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बजट विश्लेषण: पशुपालन, मत्स्यपालन, सस्ते ऋण व किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है और सालों से देश में किसानों की हालत ख़राब रही है। किसानों की आत्महत्या की विचलित करने वाली ख़बरों के बीच हर साल के बजट में यह उम्मीद रहती है कि सरकार किसानों के लिए कुछ घोषणाएँ करेगी। बजट 2019 में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कृषि संबंधी वस्तुओं की गिरती क़ीमतों और खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट को किसानों की आमदनी कम होने के लिए जिम्मेदार ठहराया।

कार्यवाहक वित्त मंत्री ने कहा कि बारम्बार विभाजन के कारण जोत विखंडित हो गए हैं और इस कारण किसानों की आमदनी में कमी आई है। उनका यह कहना सही था। क्योंकि, गाँवों में वंश और पीढ़ी बढ़ने के साथ ही ज़मीन के बँटवारे होते हैं और किसी परिवार के पास खेती लायक भूमि कम होती जाती है। ऐसे किसान साहूकारों के चंगुल में फँसते हैं और घाटे में जाते हैं। गोयल ने कहा कि उन्हें बीज, उर्वरक, श्रम, उर्वरक और इनपुट के लिए लागत लगती है, जिसमें सरकार मदद करने का कार्य करती है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान)

केंद्र सरकार ने छोटे व सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान)’ की शुरुआत करने की घोषणा की। इस योजना के तहत 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले छोटी जोत के किसान परिवारों को ₹6,000 प्रति वर्ष की दर से प्रत्यक्ष सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह आय सहायता ₹2,000 तीन समान किस्तों में लाभान्वित किसानों के बैंक खातों में सीधे ही हस्तांतरित कर दी जाएगी। इस कार्यक्रम का वित्त पोषण भारत सरकार द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम से लगभग 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लाभान्वित होने की उम्मीद है।

इस कार्यक्रम पर सालाना ₹75,000 करोड़ का सरकारी ख़र्च आएगा। इस घोषणा से छोटे किसानों को फ़ायदा मिलेगा। जो भारतीय गाँवों की सामाजिक स्थिति समझते हैं, उन्हें पता है कि कैसे पीढ़ी दर पीढ़ी परिवारों के पास अपनी भूमि कम होती जा रही है और कई किसानों के तो उपज के बावज़ूद खाने के लाले पड़े हैं। वो कृषि छोड़ किसी अन्य व्यवसाय में जाने को मज़बूर हैं। ऐसे में, इस कार्यक्रम से उन्हें लाभ मिलेगा।

‘पीएम-किसान’ निर्धन किसानों के लिए वरदान साबित होगा। वैसे ग़रीब किसान जो कटाई, रोपनी और जोत के मौसम में साहूकारों से कर्ज़ लेने को मज़बूर होते हैं, उन्हें प्रत्यक्ष आय के रूप में जो भी राशि मिले, उसका उपयोग कृषि कार्य की तात्कालिक लागत की जरूरत पूरी करने में किया जा सकता है। जो किसान एक-एक रुपए को मोहताज़ होकर आत्महत्या के लिए मज़बूर होते हैं, उन्हें स्वावलम्बी बनाने की दिशा में ये योजना एक क़दम हो सकती है।

पानी पटाने के मौसम में ग़रीब किसान सब्सिडी पर बिजली, तेल और उपकरण तो ले सकता है, लेकिन उसके लिए भी उसे कुछ राशि की ज़रूरत पड़ती है- वैसे में उन्हें जो भी सहायता मिले, उसका विरोध नहीं होना चाहिए। कर्जमाफ़ी से बैंक किसानों को कर्ज़ देना लगभग बंद कर देते हैं। अतः, कर्जमाफ़ी से अच्छा है कि उन्हें कृषि में उपयोग के लिए एक छोटी व निश्चित धनराशि उपलब्ध कराइ जाए, जिसकी मदद से वो कृषि कार्य पूरा कर सकें।

इनके अलावा मृदा स्वास्थ्य कार्ड, उत्तम बीज, सिंचाई योजना और नीम कोटेड यूरिया की कमी दूर करना- सरकार ने ऐसे कई प्रयास किए हैं, जो किसानों के हित में कार्य करते हैं।

पीएम-किसान निर्धन कृषकों के लिए वरदान साबित होगा।

पशुपालन (गौपालन) के लिए प्रोत्साहन

पशुपालन एवं मत्स्यपालन- ये दो ऐसे माध्यम हैं जो कर्ज़ में डूबे या भूमि की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए आमदनी का नया ज़रिया बन सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए आवंटन बढ़ाकर ₹750 करोड़ करते हुए राष्ट्रीय कामधेनू आयोग की स्थापना की घोषणा की। इससे गाय संसाधनों का सतत अनुवांशिक उन्नयन करने और गायों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह आयोग गायों के लिए कानूनों और कल्याण योजना को प्रभावी रूप से लागू करने में भी मदद करेगा।

जब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव देव ने गौपालन कर रुपए कमाने की बात कही थी, तब कई लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया था। बिना उस पॉजिटिव पहलू को समझे इसकी आलोचना करने वालों को केंद्र सरकार ने इस बजट के माध्यम से करारा ज़वाब दिया है। गौपालन किसानों की आय का एक बहुआयामी ज़रिया हो सकता है। कार्यवाहक वित्त मंत्री ने गौ संसाधनों के अनुवांशिक उन्नयन को स्थायी रूप से बढ़ाने की बात कही है।

गौ पालन को किसान अब नए सिरे से आमदनी का माध्यम बना सकते हैं। डेयरी कंपनियों के गाँवों-बस्तियों तक पाँव पसारने के बाद अब किसानों को उनके दूध का उचित मूल्य मिलना सुगम हो गया है। सालों पहले उन्हें अपने गायों के दूध को बेचने का माध्यम नज़र नहीं आता था। अब जब सड़कों के जाल से गाँव, बस्ती और शहर एक-दूसरे से जुड़ गए हैं, उनके दूध को सही तरीक़े से बेचने के लिए परेशानी नहीं होगी।

गोयल ने गायों के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की भी बात कही है। कई नस्लों के गायों के आने के बाद, किसानों के लिए गौपालन सुविधाजनक हो गया है। दूध के अलावा गाय के गोबर, मूत्र इत्यादि का भी व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है। सरकार ने दूरगामी निर्णय लेते हुए यह घोषणा की है। कृषि के बदलते स्वरूप में किसानों के लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद रहेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी कहा कि गौपालन का धार्मिक दृष्टिकोण से विरोध करने वाले लोगों को ग्रामीण जीवन का कोई अंदाज़ा ही नहीं है।

मत्स्यपालन- भारत का विश्व में बढ़ता दबदबा

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत 6.3% हिस्सेदारी के साथ विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है। यह सेक्टर लगभग डेढ़ करोड़ के रोज़गार का माध्यम है। मत्स्यपालन में अनेक सम्भावनाएँ देखते हुए सरकार ने इसे प्रोत्साहित करने के लिए अलग से एक मत्स्य पालन विभाग बनाने का निर्णय लिया है। इसके दूरगामी परिणाम आएँगे, क्योंकि दुनिया के तमाम विकसित देश भी अब मत्स्यपालन को एक बड़े उद्योग के तौर पर देख रहे हैं। बता दें कि चीन और इण्डोनेशिया ने मछलीपालन के व्यापारिक आयाम को समझ कर रोज़गार सृजन के क्षेत्र में सफल कार्य किया है।

गौपालन और मछलीपालन किसानों की आमदनी का नया माध्यम बन सकता है।

पिछले बजट में पशुपालन एवं मछलीपालन में रत किसानों को भी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा प्रदान की गई थी। यह दिखाता है कि सरकार हर साल इस क्षेत्र में कुछ न कुछ बड़ा क़दम उठा रही है, ताकि कृषकों को आय के अधिक से अधिक स्रोतों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। सरकार ने ऐसे किसानों के लिए 2 प्रतिशत ब्याज छूट का लाभ देने का प्रस्ताव भी किया। इसके अलावा ऋण का समय पर पुनर्भुगतान करने पर उन्हें 3 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज छूट भी दी जाएगी।

किसानों को KCC से जोड़ने के लिए केंद्रीय मंत्री ने सरलीकृत फॉर्म लाकर व्यापक अभियान चलाने के निर्णय की भी जानकारी दी।

किसानों को अन्य सहायताएँ

प्राकृतिक आपदाओं से बुरी तरह प्रभावित सभी किसानों को जहाँ सहायता राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से उपलब्ध कराई जा रही हो, 2% ब्याज छूट का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा और उनके ऋणों की पुनः अनुसूचित पूरी अवधि के लिए 3 प्रतिशत तत्काल पुनः भुगतान प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

इसके अलावा कार्यवाहक वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने किसानों की आय दुगुनी करने हेतु इतिहास में पहली बार 22 फ़सलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से 50% अधिक रखा है। प्रधानमंत्री अपनी चुनावी रैलियों में भी किसानों की आदमी दुगनी करने की बात कहते रहे हैं। कॉन्ग्रेस ने किसानों के लिए कर्ज़माफ़ी की घोषणा को कई राज्य चुनावों में मुद्दा भी बनाया था। ऐसे में, किसानों के लिए बजट में कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन सरकार ने बड़ी घोषणा करने के साथ-साथ दूरगामी फ़ायदों पर ज़्यादा ज़ोर दिया है।

बजट विश्लेषण: गाँव, ग़रीब-गुरबा, पिछड़े और मध्यम वर्ग के लिए ज़रूरी था ये सब

बजट 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने ग़रीबों का विशेष ध्यान रखा है। गाँवों के इंफ़्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ सामाजिक पहलूओं को भी ध्यान में रखा गया है। स्वच्छता पर ख़ास ज़ोर तो दिया ही गया है, साथ ही ग़रीबों के भूखे पेट को भरने की व्यवस्था और सुगम की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के संसाधन पर पहला हक़ ग़रीबों का बता कर पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के 2006 में दिए उस बयान का ज़वाब दिया जिसमे उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक़ मुसलामानों का है।

आइए एक-एक कर देखते हैं कि ग़रीबों के लिए इस बजट 2019 में क्या है?

आर्थिक आधार पर ग़रीबों को आरक्षण

सामान्य वर्ग के ग़रीबों को आरक्षण देने संबंधी विधेयक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही ऐतिहासिक बता चुके हैं। संविधान संशोधन के बाद राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलते ही, इस विधेयक ने क़ानून का रूप ले लिया था। भाजपा सरकार के इस महत्वाकांक्षी विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा- दोनों ही सदनों में भारी बहुमत से पारित किया गया था। इस विधेयक को पीएम मोदी के नारे ‘सबका साथ-सबका विकास’ से जोड़ कर देखा जा रहा है। बजट पेश करते समय कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसकी चर्चा करते हुए कहा कि इस से पहले से ही आरक्षण के दायरे में आने वाले समूह पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

वित्त मंत्री ने इस बात की भी जानकारी दी कि सरकारी संस्थानों में सीटों की संख्या 25% (2 लाख) बढ़ाई जाएगी, जिससे किसी भी वर्ग हेतु वर्तमान में आरक्षित सीटों में कमी न आए। वित्त मंत्री का यह बयान एक ऐसे संतुलन की तरह प्रतीत होता है, जो सरकार हर वर्ग के बीच बना कर चलने की कोशिश कर रही है। जहाँ एक तरफ सरकार की कोशिश है कि आर्थिक रूप से विपन्न लोगों को आरक्षण मिले, वहीं दूसरी तरफ सरकार इस बात को लेकर सजग है कि पहले से आरक्षित तबके को यथास्थिति का फ़ायदा मिलता रहे।

भूखे भजन न होए गोपाला

जिस देश में दुनिया की सबसे बड़ी अल्प-पोषित आबादी रहती हो, वो भले ही मंगल और चाँद तक पहुँच जाए, लेकिन भूख से हुई एक मृत्यु भी सारी उपलब्धियों पर एक धब्बा बन जाती है। भारत जैसे विशाल देश में सबको समुचित भोजन मिले- इसकी व्यवस्था करने के लिए केंद्र सरकार सजग दिख रही है। अगर हम 2013-14 और ताज़ा 2019-20 बजट की तुलना करें तो पता चलता है कि ग़रीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने के लिए आवंटित बजट दोगुना हो चुका है।

ग़रीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार सजग।

बजट 2013-14 में इसके लिए ₹92,000 करोड़ आवंटित किए गए थे जबकि ताज़ा बजट में ₹1,70,000 करोड़ की व्यवस्था की गई है। अगर हम मनरेगा की बात करें तो उसके लिए आवंटित बजट भी 6 वर्ष में तिगुना हो चुका है। जहाँ 2013-14 में इसके लिए ₹33,000 करोड़ की व्यवस्था की गई थी जबकि इस वर्ष ₹90,000 करोड़ के आवंटन के साथ सरकार ने यह भी कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर और रुपयों की भी व्यवस्था की जाएगी।

कुल मिला कर देखें तो निचले स्तर पर ग़रीबों के रोज़गार और भोजन के लिए सरकार चिंतित नज़र आ रही है। मनरेगा और सस्ता अनाज के लिए आवंटित धनराशि में इज़ाफ़ा होना तो यही बताता है।

गाँवों एवं बस्तियों में पक्की सड़क

सबसे पहले सुव्यवस्थित आँकड़ों पर नज़र डाल कर देखते हैं कि ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)’ गाँवों और बस्तियों में सड़कों के निर्माण के लिए क्या किया गया है?

  • कुल 17.84 लाख बस्तियों में से 15.80 लाख बस्तियों को पहले ही पक्की सड़कों से जोड़ा जा चुका है। सरकार के अनुसार, शेष को भी ज़ल्द ही जोड़ दिया जाएगा।
  • अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई PMGSY के लिए केंद्र सरकार ने 2019-20 में ₹19,000 करोड़ का आवंटन किया है। बजट 2018-19 में इस योजना के लिए ₹15,500 करोड़ का आवंटन किया था। अर्थात, एक वर्ष में पूरे ₹3,500 करोड़ की वृद्धि।

हालाँकि 2013-14 का बजट पेश करते हुए पी चिदंबरम ने PMGSY के लिए इस से ज़्यादा धनराशि आवंटित की थी, लेकिन इसके प्रदर्शन के मामले में यूपीए सरकार कहीं नहीं टिकती। जहाँ 2013-14 में इस योजना के तहत 3,81,314 किमी सड़कें बनाई गई थीं, वहीं 2018-19 में 5,75,524 किमी सड़कें बनाई गई। यही कि डेढ़ गुना ज़्यादा।

इसके अलावा वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)’ के तहत पिछले चार सालों में 1.3 करोड़ आवास बनाए जा चुके हैं। अगर PMAY की तुलना पिछली हाउसिंग योजना IAY से करें तो पता चलता है कि आज औसतन 114 दिनों में एक घर बन कर तैयार हो जाता हैं। वहीं IAY के दौरान एक घर के निर्माण का औसत समय था- 314 दिन।

भोजन के अलावा ग्रामीण जीवन की सबसे बड़ी जरूरत- मकान, और गावों की खुशहाली का सबसे बड़ा माध्यम- सड़कें, ताज़ा बजट में केंद्र सरकार इन दोनों ही मोर्चे पर मुस्तैदी से अपना कार्य करते हुए नज़र आ रही है।

घर-घर में रोशनी पहुँचाने का कार्य

कार्यवाहक वित्त मंत्री ने बताया कि 2014 तक 2.5 करोड़ परिवार बिना बिजली के 18वीं शताब्दी की ज़िंदगी जीने को मज़बूर थे। अब ‘सौभाग्य योजना’ के तहत घर-घर बिजली पहुँचाने का कार्य किया गया है। शेष घरों को भी 2019 तक बिजली से जोड़ दिया जाएगा। पीयूष गोयल मोदी सरकार में बिजली मंत्रालय भी संभाल रहे हैं और उन्हें गाँव-गाँव तक बिजली पहुँचाने के लिए ‘Carnot’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

घर-घर में बिजली पहुँचाने को सरकार कटिबद्ध नज़र आ रही है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि देश के ग़रीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को 143 करोड़ LED बल्ब उपलब्ध कराए गए हैं, जिस से उन्हें बिजली बिल में सालाना ₹50,000 करोड़ की बचत हो रही है। 2016 में मोदी सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद LED बल्ब के मूल्य की तुलना 2014 से करें तो उस समय यह दस गुना से भी ज्यादा था। इस से पता चलता है कि सरकार द्वारा ग़रीबों को कम मूल्य पर बेचे जाने वाले LED बल्बों की क़ीमत में भारी कमी आई है।

स्वास्थ्य सुविधाएँ- करोड़ों लोगों को पहुँचेगा फ़ायदा

कार्यवाहक वित्त मंत्री ने कहा कि पहले ग़रीब लोग बीमारी से लड़े या रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करें- इसी सोच में डूबे रहते थे। उन्होंने प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ का ज़िक्र करते हुए बताया कि इस योजना से 50 करोड़ नागरिक लाभान्वित होंगे, जिन्हे चिकित्सा व उपचार मुहैया कराया जाएगा। बकौल गोयल, अब तक 10 लाख लोग इस योजना के द्वारा मुफ़्त चिकित्सा का लाभ उठा चुके हैं। इस से उन्हें क़रीब ₹3,000 करोड़ रुपयों की बचत हुई है।

आयुष्मान भारत के सुखद परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

आयुष्मान भारत लॉन्च लके बाद से ही विपक्ष की आलोचना के कारण लगातार ख़बरों में है, लेकिन इस योजना के लाभान्वितों की संख्या अलग ही कहानी कहती है। नवंबर 2018 में पानीपत में इस योजना के तहत एक ग़रीब मरीज़ की सफल हार्ट वॉल्व सर्जरी हुई थी। वह इस योजना के अंतर्गत हुई पहली हार्ट सर्जरी थी। इस योजना का पहले तीन महीने में ही 5 लाख लोगों ने लाभ उठाया था और बिल गेट्स जैसे दिग्गज उद्योगपति ने इसकी तारीफ़ की थी।

असंगठित क्षेत्र श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक साबित होगी ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन पेंशन योजना’

आज (फरवरी 01, 2019) संसद में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया। इस बजट के माध्यम से तमाम लाभकारी योजनाओं के ज़रिए देश की जनता को लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया। हर योजना का उद्देश्य देश की जनता को अधिकतम लाभ पहुँचाकर उनके जीवन को बेहतर दिशा प्रदान करना है। आज के बजट में एक ऐसा बड़ा निर्णय भी शामिल है, जिसे किसी भी हाल में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना’ एक ऐसी ही योजना है, जिसे अमल में लाने के बाद देश के हर व्यक्ति को ₹100 मात्र के अंशदान से उसे 60 साल की आयु के बाद ₹3000 प्रतिमाह पेंशन प्राप्त होगी।

अंतरिम बजट-2019

बता दें कि देश में पेंशन की सुविधा अब तक केवल सरकारी विभागों तक ही सीमित थी। वो भी वर्ष 2004 के बाद समाप्त कर दी गई थी। केंद्र सरकार के असंगठित क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों) के लोगों को पेंशन देने संबंधी यह योजना बहुत बड़ा फ़ैसला है। आइए आपको आज के अंतरिम बजट में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को दी जाने वाली पेंशन और उससे जुड़ी विशेष बातें बता दें।  

  • वर्तमान सरकार ने पेंशन के दायरे में लाभकारी क़दम उठाते हुए ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन’ नामक पेंशन योजना की घोषण की है, इसका संबंध ऐसे लोगों से है जिनकी मासिक आय
    ₹15,000 या उससे कम है।
  • इस पेंशन योजना से अपनी कार्यशील आयु के दौरान एक छोटी सी राशि के मासिक अंशदान करने से उन्हें 60 वर्ष की आयु से ₹3000 की सुनिश्चित मासिक पेंशन दी जाएगी।
  • 29 वर्ष की आयु में इस पेंशन योजना से जुड़ने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगार को केवल ₹100 प्रति माह का अंशदान 60 वर्ष की आयु तक करना होगा।
  • 18 वर्ष की आयु में इस पेंशन योजना में शामिल होने वाले कामगार को मात्र ₹55 प्रतिमाह का अंशदान करना होगा। सरकार हर महीने कामगार के पेंशन खाते में बराबर की राशि जमा करेगी।
  • ऐसा अनुमान है कि अगले 5 वर्षों के भीतर असंगठित क्षेत्र के कम से कम 10 करोड़ श्रमिक और कामगार इस योजना का लाभ लेंगे।
  • इससे आने वाले समय में यह योजना विश्व की सबसे बड़ी पेंशन योजनाओं में से एक बन जाएगी। बता दें कि इस योजना के पहले साल के लिए ₹500 करोड़ की राशि आवंटित की जाएगी। ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त निधियाँ भी प्रदान की जाएँगी। यह योजना चालू वर्ष से ही कार्यान्वित की जाएगी।

यह बात जगज़ाहिर है कि असंगठित क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी वर्ग के जीवन में वो स्थिरता नहीं होती, जो एक सरकारी कर्मचारी के जीवन में होती है। असंगठित क्षेत्र की बात करें तो वहाँ ऐसी स्थिरता नदारद होती है। इसका असर उसके साथ-साथ पूरे परिवार पर भी पड़ता है। ऐसे में आज के बजट में पेश की गई ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन पेंशन योजना’ उन सभी नागरिकों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी, जो असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं।

आपको बता दें कि भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आधा हिस्सा असंगठित क्षेत्र के उन 42 करोड़ कामगारों के पसीने और अथक परिश्रम से बनता है। जैसे, रेहड़ी वाले, रिक्शा चालक, निर्माण कार्यों में लगे मज़दूर, कूड़ा बीनने वाले, कृषि कामगार, बीड़ी बनाने वाले, हथकरघा कामगार, चमड़ा कामगार और इस तरह के अन्य कई सारे व्यवसाय असंगठित क्षेत्र के दायरे में आते हैं। देश की जनता का इतना बड़ा हिस्सा, जो आज भी पेंशन जैसी लाभकारी योजना का फायदा उठाने की कल्पना भी नहीं कर सकता था, उसके लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना एक ऐतिहासिक और बड़ी योजना साबित होगी।

न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के दायरे को विस्तार दिया

बता दें कि न्यू पेंशन योजना एक लाभकारी पेंशन स्कीम है, जिसमें निवेश करना लाभकारी है, क्योंकि इसमें सभी कार्यों में पारदर्शिता बनी रहती है। पारदर्शिता से मतलब यह है कि इससे जुड़े लोग कभी भी निवेश एवं लाभ का ब्यौरा ले सकते हैं। आज पेश किए गए अंतरिम बजट में न्यू पेंशन योजना को पहले से अधिक विस्तार दिया गया है।

  • न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) को और उदार किया गया है। सरकार ने एनपीएस में अपने योगदान को बढ़ाकर, 10% से 14% कर दिया है। ग्रेच्युटी के भुगतान की सीमा को
    ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख किया गया है।
  • ईएसआईसी की सुरक्षा पात्रता सीमा भी ₹15,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर, ₹21,000 प्रतिमाह कर दी गई है। सभी श्रमिकों के न्यूनतम पेंशन प्रतिमाह ₹1,000 तय की गई है।
  • सर्विस के दौरान किसी श्रमिक की मृत्यु होने की स्थिति में ईपीएफओ द्वारा राशि ₹2.5 लाख से बढ़ाकर , ₹6 लाख तक सुनिश्चित की गई। आंगनबाड़ी और आशा योजना के तहत सभी श्रेणियों के कार्मिकों के मानदेय में लगभग 50% की वृद्धि हुई है।  

इसके अलावा मोदी सरकार में चल रही पहले से कई ऐसी योजनाएँ मौजूद हैं, जिनका लाभ मज़दूरों और श्रमिकों को मिलता रहा है, लेकिन पेंशन की ऐसी व्यवस्था, जिसमें सबका विकास निहित हो, पहले अस्तित्व में नहीं थी। केंद्र सरकार ने देश की जनता के विकास के लिए इस अंतरिम बजट में और भी कई पहलुओं को शामिल किया है।

यदि एक सामान्य आदमी के जीवन की कल्पना करें, तो जिन मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता एक आम नागरिक को होती है, उसकी पूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार ने कई स्तरों पर इस कार्यकाल में काम किया है।

देश के हर तबके का विकास करने के लिए जन-जन की मूलभूत आवश्यकताओं पर न सिर्फ़ ध्यान दिया गया है, बल्कि उन्हें तमाम योजनाओं के माध्यम से अमल में भी लाया गया है । इस कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार ने शहरी और ग्रामीण, दोनों स्तर पर बराबर ध्यान दिया है। एक मज़दूर के हक़ के लिए, उसके पैसे के रखरखाव के लिए प्रधानमंत्री जनधन जैसी योजनाओं को भी धरातल पर लाया गया। बता दें कि प्रधानमंत्री जनधन योजना विश्व कीर्तिमान स्थापित किया, जिसकी वजह से इस योजना को गिनीज बुक में शामिल किया जा चूका है।

मज़दूरों के पैसे को बैंक में ट्रांसफर करने के लिए मालिकों पर नकेल कसी गई। एक मज़दूर को उसके हक़ का पूरा पैसा मिले, इसके लिए ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ या ‘डीबीटी योजना‘ को बेहतर बनाया गया। ‘डीबीटी’ के माध्यम से भी भारत सरकार द्वारा लोगों के खातों में सब्सिडी ट्रांसफर की जाती है, जिसका सीधा सा मतलब देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है।

अक्टूबर, 2017 में शुरू की गई श्रमेव जयते भी उन योजनाओं में शामिल है, जिसके माध्यम से असंगठित क्षेत्र के लाखों मज़दूरों को लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया। कई बार ऐसा होता है, जब कोई व्यक्ति एक कंपनी में वर्षों तक नौकरी करता है और उसके बाद वहाँ से छोड़कर दूसरी कंपनी ज्वॉइन करता है। ऐसी सूरत में वह अपने पीएफ (प्रोविडेंट फंड) खाते में जमा धनराशि पर ध्यान नहीं दे पाता है। अक्सर देखा जाता है कि ऐसा इसलिए भी हो जाता है क्योंकि वो इस बात पर ग़ौर ही नहीं कर पाता कि आख़िर उसके पीएफ खाते में कितनी धनराशि जमा है।

इसके अलावा ऐसा भी देखा जाता है कि वह अपने पीएफ के खाते की धनराशि प्राप्त करने में भी समर्थ नहीं होता है। इन हालातों में पीएफ खाते से बहुत से कर्मचारी अपनी जमा पूंजी नहीं निकाल पाते हैं। प्रधानमंत्री की श्रमेव जयते योजना ने ऐसे ही कर्मचारियों की मुश्किलों को हल करने में क़ामयाब रही है। इसके माध्यम से कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा राशि देख सकते हैं और उस बचत का समय आने पर इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

2015 में शुरू की गई मुद्रा योजना के तहत भी देश हित का कार्य किया गया, जिसमें स्वरोज़गार के लिए धन की व्यवस्था का प्रावधान किया गया। इसके ज़रिए कई स्वयं सहायता समूह को फलने-फूलने का अवसर प्राप्त हुआ। ख़ासतौर पर छोटे व्यापारियों को इससे काफी लाभ प्राप्त हुआ। बता दें कि इसके तहत ₹50,000 से ₹10 लाख तक के लोन की व्यवस्था है, इससे छोटे उद्योग को लगाने में लोगों को आर्थिक मदद मिलती है। कई ऐसे ग़रीब परिवार हैं, जिन्होंने इस योजना का लाभ उठाकर अपने जीवन को रोज़गार से जोड़कर लाभ प्राप्त किया। इस योजना के तहत अब तक कुल मिलाकर ₹7,23,000 करोड़ के ₹15.56 करोड़ ऋण वितरित किए गए हैं।

कार्यवाहक वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया अंतरिम बजट हर मायने में सम्पूर्ण बजट कहा जा सकता है, जिसमें किसी भी क्षेत्र की अनदेखी नहीं की गई है और देश की जनता को लाभ पहुँचाने का भरसक प्रयास किया गया है। हालाँकि, आलोचनाओं एवं सुधार की गुँजाइश सदैव रहती है।

पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री पद के लिए लोगों की पहली पसंद नरेंद्र मोदी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लोकसभा चुनाव 2019 में नरेंद्र मोदी को केंद्र में सरकार बनाने से रोकने के लिए भले ही प्रयास कर रही हो, लेकिन इसी बीच पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज सर्वे द्वारा जारी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी को बंगाल का सबसे लोकप्रिय नेता बताया गया है।

इंडिया टुडे द्वारा कराए गए इस सर्वे की रिपोर्ट ममता बनर्जी के लिए एक तरह से जोरदार झटका है। इस सर्वे के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल बंगाल में मोदी की लोकप्रियता के ग्राफ में इज़ाफ़ा हुआ है।

पीएसई सर्वे के मुताबिक पिछले साल बंगाल के 51% लोगों ने मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्टी ज़ाहिर की थी, लेकिन इस साल आँकड़े में और अधिक वृद्धि देखने को मिली है। इस साल यह आँकड़ा बढ़कर 55% पहुँच गया है।

यही नहीं भाजपा सरकार द्वारा लाए जा रहे नागरिक संहिता अधिनियम पर पूछे गए सवाल के जवाब में 48% लोगों ने माना कि असम की तर्ज़ पर पश्चिम बंगाल में भी नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) होना चाहिए।

इस सर्वे में लोगों ने ममता बनर्जी को राहुल गाँधी की तुलना में ज्यादा बेहतर प्रधानमंत्री उम्मीदवार बताया गया है, जबकि मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए लोगों की पहली पसंद हैं। यही नहीं, इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले 30% लोगों ने लोकसभा चुनाव में रोजगार को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा माना है, जबकि 26% लोगों की राय में पीने का पानी एक बड़ा मुद्दा है।

इस रिपोर्ट में उभर कर सामने आने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि पश्चिम बंगाल में रहने वाले 46% लोगों ने बीजेपी की रथ यात्रा पर रोक के फ़ैसले को गलत माना है। यह रिपोर्ट उस समय आई है जब ममता बनर्जी केंद्र में भाजपा की सरकार बनने से रोकने के लिए लगातार विपक्षी नेताओं को एकजुट कर रही है।

अभी हाल में ममता ने विपक्षी नेताओं की एक बड़ी रैली का आयोजन किया था। इस रैली के ज़रिए ममता ने खुद को प्रधानमंत्री के तौर पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया, लेकिन राहुल समेत कई विपक्षी नेताओं की कार्यक्रम से दूरी होने की वजह से ममता के सपने को सकार होने की कम संभावना है।

₹5 में भर पेट खिलाने वाली कॉन्ग्रेस बोल रही है कि ₹6 हजार से किसानों का क्या होगा!

संसद में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज अंतरिम बजट 2019 पेश किया। इस मौके पर जहाँ सरकार ने मजदूर, गरीब और किसानों को राहत देने की घोषणाएँ की, तो वहीं दूसरी ओर कॉन्ग्रेस समेत तमाम विपक्षी नेता बजट को लेकर मातम मनाते नज़र आए। दरअसल, सरकार ने ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ के जरिए 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले छोटी जोत के किसान परिवारों को ₹6,000 प्रति वर्ष की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही, जिसके बाद विपक्ष से अजीबोगरीब प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हो गईं।

इसके बाद जैसे-तैसे होश संभालते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी समेत कई अन्य नेताओं ने इसकी आलोचना इस बात का तर्क देते हुए किया कि ₹6 हजार में किसानों का क्या होगा? लेकिन शायद इन्हें 2013 में अपनी ₹5, ₹12 में खाना खिलाने वाली बात याद नहीं आई जिसमें यूपी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने गरीबों को ₹12 में भरपेट खाना मिलने की बात कही थी। इसके अलावा पार्टी के नेता ने रशीद मसूद ने यहाँ तक दावा कर दिया था कि दिल्ली में ₹5 में भरपेट खाना मिलता है।

कंज़ंप्शन एक्सपेंडिचर सर्वे से उड़ी थी कॉन्ग्रेस की नींद

दरअसल, 2013 में यूपीए सरकार के दौरान कंज़ंप्शन एक्सपेंडिचर सर्वे में गरीबी के नए आँकड़ों के बचाव में राज बब्बर ने ऐसा कहा था। रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस के ‘गरीबी हटाओं’ के नारे की पोल खुली थी। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि पिछले 12 सालों में अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि 2000 से 2012 के बीच अमीर तबके के ख़र्च करने की क्षमता 5 से 60% बढ़ी थी, वहीं गरीब की इन 12 सालों में ख़र्च करने की ताकत 5 से 30% तक ही बढ़ पाई थी।

यह हास्यास्पद है कि गरीबों के वोटबैंक की चाह लेकर उनके द्वार जाने वाली कॉन्ग्रेस मोदी सरकार के साल में ₹6 हजार यानी महीने में ₹500 देने की बात का मज़ाक उड़ा रही है। शायद कॉन्ग्रेसी नेता यह भूल गए हैं कि उनके ₹5 में भरपेट खाना खिलाने में रोज के 5X365= ₹1825 ही आते थे।

वैसे भी, इन पैसों से किसान खेती करेगा, क्योंकि उन्हें थोड़ी मदद मिल जाए, बीज-खाद के पैसे मिल जाएँ, तो वो फसल उगा लेंगे, और खाना भी खा लेंगे। जब किसान लगातार सूद और महाजन के जंजाल में फँसकर आत्महत्या करते हैं, तो उसका समाधान एक बार की क़र्ज़माफ़ी नहीं, बल्कि सतत प्रयासों से उसके जीवन में स्वाबलंबन लाना है। किसी को भी मुफ़्तख़ोरी अच्छी नहीं लगती, ख़ासकर उस किसान को तो बिलकुल ही नहीं जिसका जीवन सरकार, तंत्र, मौसम और पैसों की किल्लत से लड़ते हुए जीने में कट जाती है।

कॉन्ग्रेसी और विपक्षी नेताओं का प्रलाप उनकी घबराहट को दर्शाता है

सरकार द्वारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तर्ज़ पर पेश किए गए इस बजट पर विपक्षी नेताओं का ऊल-जूलूल बोलना उनकी घबराहट को भी दर्शाता है। शायद राहुल गाँधी इस आँकड़े और ₹5 में खाना खिलाने वाली स्कीम भूल गए तभी उन्होंने सरकार के किसानों को ₹6 हजार देने की बात का यह कहते हुए विरोध किया कि ₹17 दिए जाने का प्रावधान करना किसानों का अपमान है।

राहुल गाँधी को अब यह बात कौन समझाए कि किसानों के लिए एक-एक पैसे कि कितनी महत्ता है। राहुल गाँधी भूल गए कि यह रकम उनके हाथ में न आकर सीधे बैंक खाते में जाएगी।किसान यह समझता है, भले ₹13 का ऋण माफ़ी देने वाले राहुल न समझें, कि ये पैसे उनकी बीड़ी के लिए नहीं है। वो जानते हैं कि इतने पैसों में बुआई के समय वो खेत में बीज रोप सकते हैं। अगर सरकार की हर योजना का लाभ उन्हें मिले, तो यह मदद बड़ी मदद है।

कश्मीरी आतंकियों ने 25 साल की लड़की को गोली मारी, 10 सेकेंड का वीडियो वायरल

शुक्रवार (फ़रवरी 01, 2019) सुबह कश्मीर के शोपियाँ में एक लड़की की लाश बरामद हुई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों ने 25 वर्षीय लड़की की गोली मारकर हत्या कर दी। उन्होंने इस घटना की वीडियो बनाई और इसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि पीड़िता की पहचान पुलवामा के डूंगरपुर निवासी इशरत मुनीर के रूप में हुई है। महिला का शव शोपियाँ जिले के द्रागाद इलाके से बरामद किया गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मृतक लड़की एक पुलिसकर्मी की बहन बताई जा रही है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम उस IP एड्रेस का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, जहाँ से वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था। धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है और दोषियों को पकड़ने के लिए जाँच चल रही है।”

पुलिस ने बताया कि, ”आतंकवाद के वीभत्स कृत्य के तहत आतंकवादियों ने 25 वर्षीय लड़की की बेहद नज़दीक से गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने शोपियाँ जिले में जैनापुरा के द्रागाद इलाके से शव बरामद किया। प्रवक्ता ने कहा, ”आतंकवादियों ने इस वीभत्स घटना को अंजाम देते हुए इसका वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया।

पुलिस ने बताया कि 10 सेकंड के इस वीडियो में महिला हाथ जोड़कर दया की भीख मांगती दिखाई दे रही है, लेकिन बंदूकधारी ने उसे 2 बार बेहद नज़दीक से गोली मार दी। पुलिस ने कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। प्रवक्ता ने कहा, ”पुलिस की जांच कुछ विश्वसनीय सूचनाओं पर केंद्रित है और उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों को कठघरे में खड़ा किया जाएगा।”

कुछ रिपोर्ट्स में मीडिया का मानना है कि पूर्व आतंकवादी ज़ीनत-उल-इस्लाम इस मृत लड़की का मामा है, इसे जनवरी 13, 2019 को कटपोरा कुलगाम में एक मुठभेड़ में एक सहयोगी के साथ बंद कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि इस लड़की को सूचनाएँ पहुँचाने के आरोप के चलते मारा गया है।

कश्मीर में इस प्रकार की यह पहली घटना नहीं है, नवंबर 2018 को शोपियां जिले के निकलोरा गाँव में 17 वर्षीय नदीम मंज़ूर की गोलियों से छलनी लाश मिली थी।

3 मिनट में 35 बड़ी बातें: छोटा है, सटीक है, हर कुछ समेटे हुए है

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 1 फरवरी 2019 को अंतरिम बजट पेश किया। बजट लंबा होता है, थोड़ा उबाऊ होता है। आँकड़े ज्यादा होते हैं, तो पकाऊ भी होता है। इसलिए हम लेकर आए हैं सिर्फ मुख्य बातें:

  • मनरेगा के लिए 60,000 करोड़ रुपए
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19,000 करोड़ रुपए
  • 22वाँ नया AIIMS हरियाणा में खोलने की घोषणा
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN, पीएम-किसान) की शुरुआत: 2 हेक्टेयर तक की जोत वाले सभी भू-स्वामी किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6000 रुपए तीन बराबर-बराबर (2000-2000-2000) किस्तों में सीधे बैंक खाते में होगा ट्रांसफर
  • पीएम-किसान के लिए 2019-20 के लिए 75,000 करोड़ रुपए जबकि 2018-19 के संशोधित अनुमान में 20,000 करोड़ रुपए
  • राष्ट्रीय कामधेनु आयोग बनाने की घोषणा – यह गायों के लिए कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने और कल्याणकारी स्कीमों पर काम करेगा
  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन का आवंटन बढ़ाकर 750 करोड़ रुपया किया गया
  • अलग मत्स्य पालन विभाग बनाने की घोषणा
  • किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण लेने वालों को 2% ब्याज सब्सिडी; ऋण समय पर चुकाने वालों को 3% अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी
  • गंभीर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित सभी किसानों को 2% ब्याज सब्सिडी तथा तत्काल भुगतान के प्रोत्साहन के रूप में 3% अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी
  • न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में कर्मचारियों के योगदान को 10% रखते हुए सरकार के योगदान को 4% से बढ़ाकर 14% कर दिया है।
  • श्रमिकों को दिए जाने वाले बोनस आकलन की अधिकतम सीमा 3500 से बढ़ाकर 7000 रुपए
  • श्रमिकों को दिए जाने वाले वेतन की अधिकतम सीमा को 10,000 से बढ़ाकर 21,000 रुपए
  • ग्रेच्युटी के भुगतान की सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपए
  • ESI के लिए सुरक्षा पात्रता की सीमा 15,000 से बढ़ाकर 21,000 रुपए की गई
  • प्रत्येक श्रमिक के लिए न्यूनतम पेंशन 1000 रुपए तय
  • सर्विस के दौरान मौत होने पर श्रमिक के आश्रितों को EPFO से मिलने वाली 2.5 लाख रुपए की राशि को बढ़ाकर 6 लाख रुपए किया गया
  • आंगनबाड़ी और आशा योजना के तहत सभी श्रेणियों के मानदेय में लगभग 50% की वृद्धि
  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन नामक वृहत पेंशन योजना का आरंभ
  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन पेंशन योजना के तहत 15,000 रुपए से कम के मासिक वेतन वालों को 60 वर्ष की उम्र के बाद से प्रति माह 3000 रुपए का पेंशन दिया जाएगा
  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन पेंशन योजना में 29 वर्ष की आयु से जुड़ने वाले कामगारों को प्रति माह 100 रुपए का अंशदान 60 वर्ष की आयु तक करना होगा। 18 वर्ष की आयु से इसमें जुड़ने वाले को प्रति माह 55 रुपए का अंशदान 60 वर्ष की आयु तक करना होगा। सरकार भी हर अंशदाता के पेंशन खाते में बराबर की राशि जमा करेगी।
  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन पेंशन योजना के पहले साल के लिए 500 करोड़ रुपए का आवंटन
  • रक्षा बजट 3 लाख करोड़ रुपए का। आवश्यक हुआ तो और अधिक बढ़ोतरी की जाएगी
  • रेलवे के लिए 64,587 करोड़ रुपए की पूंजीगत सहायता का प्रस्ताव
  • पूर्वोतर क्षेत्रों में अवसंरचना विकास के लिए 21 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 58,166 करोड़ रुपए
  • किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए 75,000 करोड़ रुपए की व्यवस्था
  • राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के लिए 38,572 करोड़ रुपए
  • एकीकृत बाल विकास स्कीम के लिए 27,584 करोड़ रुपए
  • अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए 35.6% की वृद्धि के साथ 76,801 करोड़ रुपए
  • अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए 28% की वृद्धि के साथ 50,086 करोड़ रुपए
  • 5 लाख रुपए सालाना तक की आय वालों को कोई कर नहीं
  • 6.5 लाख रुपए सालाना तक की आय वालों को कोई कर नहीं यदि वे भविष्य निधि, विशिष्ट बचतों या बीमा आदि में निवेश करते हों तो
  • वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती (स्टैंडर्ड डिडक्शन) को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपए किया गया
  • बैंकों/डाकघरों में जमा धनराशियों से अर्जित ब्याज पर कर की कटौती सीमा 10,000 से बढ़ाकर 40,000 रुपए की गई
  • HBA में कर से मिलने वाली छूट की सीमा 1,80,000 से बढ़ाकर 2,40,000 रुपए करने का प्रस्ताव

बजट 2019: मोदी सरकार का ‘मास्टर स्ट्रोक’, जनता ताली पीट रही है और विपक्षी छाती पीट रहे

मोदी सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तर्ज़ पर इस बार अपना अंतरिम बजट पेश किया। मध्यम वर्गीय नौकरी-पेशा वाले लोग अंतरिम बजट (Budget 2019) में मोदी सरकार की ओर उम्मीद की नज़र से देख रहे थे। जिसके बाद सरकार ने भी उन्हें निराश नहीं किया और आज बजट के जरिए उनकी झोली भरकर उनके चेहरे पर खुशियाँ ला दी।

हर बार की तरह इस बार भी सरकार ने मिडिल क्लास और गरीबों को राहत देने और उनके जीवन को बदलने के लिए कई सारी घोषणाएँ की हैं। अपने अंतरिम बजट में सरकार ने मिडिल क्लास, किसान वर्ग, मजदूर वर्ग को बड़ी राहत देते हुए टैक्स छूट की सीमा में बढ़ोतरी की है। बता दें कि जहाँ सरकार के इस फैसले से करीब 3 करोड़ मिडिल क्लास टैक्स पेयर्स को फायदा मिलेगा वहीं अंतरिम बजट के सुंतलन से विपक्ष क्लीन बोल्ड हो गया है।

सदन में मोदी-मोदी के नारे, विपक्ष में सन्नाटा

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए टैक्स छूट की सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने का ऐलान किया। जिसके बाद सदन में न सिर्फ मोदी-मोदी के नारे लगे बल्कि विपक्ष के सन्नाटे को भी महसूस किया गया। यही कारण है कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में पेश बजट को खिसियाने अंदाज में भाजपा का चुनावी घोषणापत्र बता दिया। लेकिन वह भूल गए कि सरकार के इस फ़ैसले से करीब 3 करोड़ लोगों की जिंदगी आसान हो जाएगी।

किसानों और मजदूरों का रखा गया ख़याल

सरकार ने ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ के जरिए 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले छोटी जोत के किसान परिवारों को ₹6,000 प्रति वर्ष की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह आय सहायता ₹2,000 की तीन समान किस्तों में लाभ पाने वाले किसानों के बैंक खाते में भेजा जाएगा।

सरकार के इस कार्यक्रम से लगभग 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। यह कार्यक्रम 1 दिसंबर, 2018 से लागू किया जाएगा और 31 मार्च, 2019 तक की अवधि के लिए पहली किस्त का इसी वर्ष के दौरान भुगतान कर दिया जाएगा। बता दें कि सरकार के इस फैसले से जो किसान गरीबी की समस्या से जूझ रहे हैं उन्हें काफी राहत मिलेगी।

अंतरिम बजट में सरकार ने वैसे तो हर वर्ग का ध्यान रखा लेकिन गरीब वर्ग, मजदूर, किसान को सरकार ने ध्यान में रखते हुए उन्ही बड़ी राहत दी। गरीबों के नाम पर आजतक वोट माँगने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी को आईना दिखाते हुए सरकार ने मजदूरों को मासिक पेंशन देकर न सिर्फ़ उनका सम्मान किया, बल्कि इससे उनके जीवन में भी काफी बदलाव आएगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि मजदूर हमारी इंफ्रास्ट्रचर और उद्योगों के आधार स्तम्भ हैं, लेकिन उनके लिए किसी भी तरह की योजना का अभाव बताता है कि कुछ पार्टियाँ अभिजात्य सोच के साथ गरीब को गरीब ही रखने में व्यस्त रहीं।

सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सौगात देते हुए उनके लिए पेंशन स्कीम का ऐलान किया है। ‘प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना’ के तहत मजदूरों को कम से कम ₹3 हज़ार महीने का पेंशन दिया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें प्रति माह ₹100 का अंशदान करना होगा और जब वह 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे तो उन्हें ₹3,000 प्रति माह मासिक पेंशन के रूप में इसका लाभ मिल सकेगा। बता दें कि, इस इस योजना के जरिए करीब 10 करोड़ मजदूरों को लाभ पहुँचेगा।

इसके साथ ही सरकार ने (एक्सीडेन्टल) मुआवजे की रकम को बढ़कर ₹6 लाख कर दिया है। यानी अगर अब काम के दौरान किसी मजदूर की मौत होती है तो उसके परिवार को ₹6 लाख का मुआवजा मिलेगा।

सरकार ने बजट से पहले विपक्ष के पैरों तले से खींची थी ज़मीन

बजट से पहले भी सरकार आम जन को राहत देने और उनके विकास को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10% आरक्षण देने का फैसला लिया था। मोदी सरकार ने आर्थिक तौर पर कमज़ोर लोगों के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था करके उनकी सामाजिक जरूरत को पूरा करने का काम किया है।

बात दें कि, जब से इस बिल को स्वीकृति मिली थी तब से विपक्ष में बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जिसके बाद राहुल गाँधी ने एक ‘जुमला’ देश के सामने पेश किया जिसको हम ‘गरीब व्यक्ति को एक न्यूनतम आमदनी’ देने के नाम से जानते हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश में आम जनता और किसानों को कर्ज़माफ़ी के झूठे वादे से ठगने के बाद राहुल गाँधी ने इसकी घोषणा की थी।

आर्थिक सलाहकारों की मानें तो इस योजना को लागू करने के लिए सरकार के पास मोटी रकम होनी चाहिए जो देश की जीडीपी का 15-20% हो सकती है। सलाहकारों की मानें तो किसी एक योजना में इतना पैसा खर्च करने के लिए कई अन्य योजनाओं पर रोक लगानी पड़ेगी जो कि संभव नहीं है। बता दें कि एक आँकड़े के मुताबिक देश में करीब 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करते हैं। इनमें से शेड्यूल ट्राइब (एसटी) के 45.3% और शेड्यूल कास्ट (एससी) 31.5% के लोग इस रेखा के नीचे आते है।

बजट 2019: चुनाव से पहले ही किसानों के खाते में होगी ₹2000

अंतरिम बजट की पेशकश के दौरान मोदी सरकार ने किसानों को 6 हजार रुपए प्रति वर्ष की दर से मदद देने का ऐलान किया है। इस योजना में किसानों के खातों में प्रति वर्ष तीन किस्तों में ₹2000-2000 भेजे जाएँगे।

पिछले साल के किसान आंदोलनों को देखते हुए यह माना जा रहा था कि देश के किसान मोदी सरकार से नाराज़ चल रहे हैं। उनकी शिकायतें थी कि मोदी राज में सरकार द्वारा किसानों के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए सरकार ने मदद के रूप में किसानों के खातों में ₹ 6000 प्रति वर्ष भेजने का ऐलान किया है।

₹6000 की राशि मोदी सरकार तीन किश्तों में 2000-2000 करके सीधे किसानों के खातों में भेजेगी। जिस समय देश में चुनावी प्रचार जोर-शोर से तूल पकड़ रहे होंगे, उस वक्त किसानों को पहली किश्त मिल चुकी होगी।

किसानों को प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक मदद देने का फ़ैसला करते हुए ‘इनकम सपोर्ट प्रोग्राम’ का ऐलान भी किया गया है। इसके अलावा कार्यवाहक केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट 2019 पेश करते हुए ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ योजना की शुरुआत करके किसानों को खुशखबरी भी दी।

उन्होंने बताया कि जिन किसानों के पास दो हेक्टेयर तक की ज़मीन है उन्हें हर साल ₹6 हज़ार दिए जाएँगे। सरकार के इस फैसले से देश के कमज़ोर और छोटे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी ताकि किसानों की आर्थिक हालत में सुधार हो। किसानों के लिए उठाए गए इस कदम से जहाँ सरकार पर ₹75 हज़ार करोड़ का खर्च बढ़ेगा, वहीं देश के लगभग 12 करोड़ किसानों को इससे लाभ पहुँचेगा।

‘पीएम किसान सम्मान निधि योजना’ की शुरूआत 1 दिसंबर 2018 से लागू होगी और इस तरह इस योजना की पहली किस्त का भुगतान 31 मार्च 2019 तक की अवधि में किया जाएगा।

पीयूष गोयल ने बजट पेश करने के दौरान कहा कि मोदी सरकार किसानों की आमदनी 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य तय करके चल रही है। बता दें कि पिछले साल के बजट (2018-19) में किसानों को उनकी फसलों की लागत डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की घोषणा की थी।

रक्षा बजट ₹3 लाख करोड़ के पार जाने के मायने क्या हैं

देश की रक्षा एवं सुरक्षा देश के विकास का ही एक अंग है। हम सुरक्षित हुए बिना विकसित होने की कल्पना नहीं कर सकते। इसीलिए वार्षिक बजट को विकासोन्मुख तब तक नहीं कहा जा सकता जब तक उसमें रक्षा क्षेत्र में पर्याप्त धन का आवंटन न हुआ हो। रक्षा क्षेत्र भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही उदासीन रहा है।

ऐसे में किसी भी सरकार से यह आशा रखना कि वह डिफेंस बजट में कुछ उल्लेखनीय वृद्धि करेगी एक दिवास्वप्न की तरह है। मोदी सरकार के कार्यकाल को देखें तो 2015 से लेकर अब तक प्रत्येक बजट में वृद्धि ही हुई है जिसमें सर्वाधिक वृद्धि उस वर्ष हुई थी जब वन रैंक वन पेंशन स्कीम को लागू किया गया था।

पिछले चार वर्षों का अनुमानित रक्षा बजट देखें तो 2015-16 में ₹2,33,000 करोड़, 2016-17 में ₹2,58,000 करोड़, 2017-18 में ₹2,74,114 करोड़, 2018-19 में ₹2,82,733 करोड़ तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में ₹3,05,296 करोड़ आवंटित हुए।

धीमी गति से हुई इस वृद्धि से उन सभी रक्षा खरीद परियोजनाओं के लंबित होने की संभावना है जो गत चार-पाँच वर्षों में साइन की गई हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि 2012 में स्वीकृत हुए Long Term Integrated Perspective Plan के अंतर्गत 15 वर्षों में की जाने वाली हथियारों की खरीद पर भी कम बजट आवंटन से प्रभाव पड़ेगा।

वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान रक्षा बजट में मात्र ₹22,563 करोड़ की वृद्धि की गई है। इससे सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण प्रभावित होगा। गत वर्ष रक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने वाइस चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद्र ने कहा था कि बजट में जितना धन आवंटित किया जा रहा है उससे लिमिटेड लायबिलिटी तक पूरी नहीं होती।

बजट में धन कितना आवंटित होता है इससे अधिक आवश्यक यह है कि उस धन का कितना प्रतिशत वित्तीय वर्ष में वास्तव में खर्च होता है। सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि थलसेना में अनावश्यक खर्चों की कटौती की जाए और सेना के आकार को छोटा लेकिन अधिक प्रभावी बनाया जाए। इस दृष्टि से रक्षा बजट में कमी एक मुद्दा तो है लेकिन यह राष्ट्रीय सुरक्षा के पूरे कैनवास को कवर नहीं करता।

सुरक्षा का अर्थ केवल रक्षा मंत्रालय अथवा सशस्त्र सेनाएँ ही नहीं हैं। स्थिर आर्थिक उन्नति भी हमें सुरक्षा प्रदान करती है। हमारी समूची रक्षा व्यवस्था में कम बजट आवंटन से भी बड़ी समस्याएँ हैं। यह समस्याएँ हैं रक्षा खरीद और उत्पादन में होता अनावश्यक विलंब, रक्षा मंत्रालय के बाबूओं का ढुलमुल रवैया, संसाधनों का समुचित उपयोग तथा जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही।

पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इन कमियों को दूर करने का भरसक प्रयास किया था और निर्मला सीतारमन भी उसी को आगे बढ़ा रही हैं। यह भी सत्य है कि रक्षा क्षेत्र में सुधार कोई चार पाँच वर्षों में समाप्त होने वाली प्रक्रिया नहीं है, इसके पूरा होने में समय लगना जायज़ है। गत पाँच वर्षों में जिस तेज़ी से रक्षा खरीद के निर्णय लिए गए वह उल्लेखनीय है।

हाल ही में डिफेन ऐक्विज़िशन कॉउन्सिल ने 6 सबमरीन के निर्माण के लिए ₹40,000 करोड़ स्वीकार किए हैं। भारत सरकार ने राफेल की खरीद में भी तेज़ी दिखाई जिसके कारण वर्ष 2019 के अंत तक राफेल की पहली खेप भारतीय वायुसेना को मिल जाएगी।

साथ ही देश के अन्य क्षेत्रों जैसे ढाँचागत सुधार, वित्तीय समावेश, स्वच्छ्ता, स्थिर आर्थिक प्रगति, महिला सशक्तिकरण और विज्ञान एवं तकनीक ऐसे क्षेत्र हैं जिनके विकास से देश सशक्त मानव संसाधन तैयार करता है। इसी संसाधन के उपयोग से रक्षा प्रतिष्ठान को बल मिलता है। गत पाँच वर्षों में मोदी सरकार ने इन क्षेत्रों को विकसित करने पर काफ़ी ध्यान दिया है। इसलिए हम आशा कर सकते हैं कि आने वाले वर्षों में रक्षा बजट बढ़ेगा और रक्षा खरीद तथा उत्पादन में तेज़ी आएगी।