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बजट 2019: वो पाँच बड़ी बातें जो आपको पता होनी चाहिए

संसद में शुक्रवार को कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट 2019 पेश किया। सरकार द्वारा पेश किए गए इस बजट में ‘सबका साथ सबका विकास’ की मूल भावना का ख़याल रखा गया। यही वजह है कि सरकार ने किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए कई बड़ी घोषणा की। ऐसे में बजट 2019 से जुड़ी वो पाँच बातें जिसके बारे में आपको पता होनी चाहिए।

भ्रष्टाचार के विरुद्ध कदम

रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता के नए युग का सूत्रपात करते हुए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री ने रियल एस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) तथा बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 ने उन आर्थिक अपराधियों की परिसंपत्तियों को ज़ब्त करने और उनका निपटारा करने में सहायता प्रदान की है जो देश के न्यायाधिकार से बच निकलते हैं। उन्होंने कहा कि कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधनों तथा स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है।

स्वच्छता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा शुभारंभ किए गए स्वच्छता मिशन की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि देश ने 98% ग्रामीण स्वच्छता कवरेज का लक्ष्य हासिल किया है। 5.45 लाख गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण

आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार 25% (लगभग 2 लाख) अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था करेगी। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए वर्तमान आरक्षित व्यवस्था पर जिसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

ग़रीबों के लिए अनाज

वित्त मंत्री ने कहा कि ग़रीबों तथा मध्यम वर्ग के परिवारों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए 2018-19 में 1,70,000 करोड़ रुपए ख़र्च हुए हैं। 2019-20 के बजट अनुमान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के लिए 60 हजार करोड़ रुपए की धनराशि का आवंटन किया गया है।

राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति में कमी

बजट के दौरान गोयल ने कहा कि 2011-12 के 5.8% तथा 2012-13 के 4.9% की उच्च दर की तुलना में राजकोषीय घाटे को 2018-19 के संशोधित अनुमानों के अनुसार 3.4% पर लाया गया है।

वर्तमान सरकार के कामकाज़ के बारे में जानकारी देते हुए गोयल ने कहा कि औसत मुद्रास्फीति की दर 2000-2014 में 10.1% थी जो कम होकर 4.6% हो गई है। दिसंबर 2018 में मुद्रास्फीति केवल 2.19% थी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस वर्ष चालू खाता घाटा जीडीपी के केवल 2.5% रहने की संभावना है। 6 वर्ष पहले यह केवल 5.6% था। श्री गोयल ने कहा कि मजबूत मूलभूत घटकों तथा स्थिर नियामक व्यवस्था के कारण देश में पिछले 5 वर्षों के दौरान 239 बिलियन डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) हुआ है। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक कर सुधार के मामले में वस्तु एवं सेवाकर एक मील का पत्थर है।

बजट 2019: ग़रीब, अति पिछड़े, घुमंतू, अर्ध-घुमंतू जातियों के लिए भी खुले विकास के द्वार

मोदी सरकार ने सबका साथ, सबका विकास के जिस नारे के साथ देश की जनता की सेवा का प्रण लिया था, वह लगातार उनके विज़न और कार्यप्रणाली में नज़र आता रहा। पिछले 72 साल के कामों पर अगर नज़र दौड़ाई जाए तो पिछले पाँच सालों में देश के सर्वाधिक वंचित वर्गों के लिए ज़मीनी स्तर पर मोदी के कार्यों ने उन सभी को लाभ पहुँचाया जो अभी तक सत्ताधारियों के लिए सिर्फ़ वोट बैंक बने हुए थे। जिन्हें कई सरकारों ने सिर्फ़ सब्ज़बाग दिखाए।

जिन बुनियादी मुद्दों को लोग काम करने लायक भी नहीं समझते थें। उन पर मोदी सरकार ने विशेष ध्यान देते हुए सबसे पहले स्वच्छता अभियान शुरू किया जिससे न सिर्फ़ साफ़-सफ़ाई के प्रति जागरूगता बढ़ी बल्कि सफ़ाई कर्मियों का भी जीवन स्तर सुधरा, उन्हें सुविधाएँ दी गई, सफ़ाई के तौर-तरीक़ों का भी उन्नयन किया गया।

आज संसद में अंतरिम बजट 2019-20 पेश करते हुए कार्यवाहक वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने पुनः उस संकल्प को दोहराते हुए घुमन्तू जातियों के लिए योजनाओं की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार देश के सबसे वंचित वर्ग तक पहुँचने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें, गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

घुमन्तू जातियाँ ऐसा वर्ग है जिनके बारे में कोई भी आधिकारिक आँकड़ा मौज़ूद नहीं था। बता दें कि घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय जीवन यापन के लिए एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहते हैं। मोदी सरकार की वंचितों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण देते हुए आज वित्तमंत्री गोयल ने याद दिलाया कि इन समुदायों तक विकास व कल्याण कार्यक्रम नहीं पहुँच पा रहे थे और ये निरंतर विकास कार्यक्रमों के लाभ से छूट रहे थे।

सबसे पहले रेनके आयोग और आईडेट आयोग ने इन समुदायों की पहचान का काम किया और इन समुदायों की सूची बनाई है।

पीयूष गोयल ने कहा कि नीति आयोग के तहत एक समिति का गठन किया जाएगा जिसका काम गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू को औपचारिक रूप से वर्गीकृत करना होगा।

पीयूष गोयल ने मोदी सरकार की मंशा को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एक कल्याण विकास बोर्ड का भी गठन किया जाएगा। जिसका उद्देश्य गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के कल्याण और विकास कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना होगा। बोर्ड ऐसे समुदायों तक पहुँच के लिए विशेष रणनीतियाँ बनाना और कार्यान्वित करना भी सुनिश्चित करेगा।

जिस तरह से मोदी सरकार ऐसे वर्गों के प्रति अपना विज़न प्रस्तुत कर रही है उससे आस बँधी है। इससे पहले जिस तरह से मोदी सरकार ने धुंएँ में काम करती माँओं को राहत देते हुए उज्जवला योजना के माध्यम से ग़रीब से ग़रीब और वंचित वर्गों तक मुफ़्त गैस सिलिंडर कनेक्शन और कम दाम पर उनका वितरण सुनिश्चित कर लाभ पहुँचाया वो भी अपने आप में एक मिसाल है।

शौचालय, इससे पहले किसी सरकार ने गंभीरता से नहीं सोचा था कि ये भी बुनियादी ज़रूरत का हिस्सा है। आज घर-घर में शौचालय की सुविधा से माताओं-बहनों को जो राहत मिली है वह तो काबिले तारीफ़ है ही, साथ ही पर्यावरण और साफ़-सफ़ाई के प्रति बढ़ती जागरूकता ने ग़रीबों-वंचितों के स्वास्थ्य में भी हुए सार्थक परिवर्तन को परिलक्षित किया है।

सरकार ने ग़रीबों के स्वास्थ्य के प्रति सजगता का प्रमाण देते हुए जन आरोग्य योजना के माध्यम से उनकी स्वास्थ्य देखभाल भी सुनिश्चित की। मात्र 4 महीने में ही इस योजना का लाभ इतना व्यापक रहा कि इसके दूरगामी संभावनाओं के लिए बिल गेट्स ने भी मोदी सरकार की तारीफ़ की थी।

हाल ही में पद्म पुरस्कारों की घोषणा में भी मोदी सरकार के दृष्टिकोण की झलक देखने को मिली, जहाँ ऐसे पुरस्कार लम्बे समय तक भाई-भतीजावाद या संपन्न वर्गों की अमानत रहें, वहीं मोदी सरकार के कार्यकाल में पद्म पुरस्कार की गरिमा भी पुनः लौट आई, कहीं गुमनाम किसान चाची को ये सम्मान प्राप्त हुआ तो कहीं चाय की आमदनी से ग़रीबों के लिए मुफ़्त स्कूल चलाने वाले डी प्रकाश राव को।

बजट 2019: जानिए आपको क्या मिला!

संसद में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज बजट 2019 पेश किया। ऐसा अक्सर होता है कि सोशल मीडिया पर बजट पर दिख रहे ढ़ेर सारे ख़बरों के बीच अपने काम की ख़बर आपको नहीं मिलती है, या फ़िर बजट से जुड़ी ख़बरों की पेचीदगी की वजह से ख़बर को आप समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में सीधे तौर पर जानिए कि इस बजट के ज़रिए आमलोगों के लिए या फ़िर आपके लिए सरकार ने क्या बड़ी घोषणा की है।

– यदि आप 15 हजार या इससे कम कमाते हैं तो हर महीने आपको 100 रूपए जमा करना होगा, 60 साल की उम्र के बाद आपको 3 हजार रूपए प्रतिमाह पेंशन दिए जाएंगे

– यदि आप खेती किसानी से लगे हुए हैं तो सरकार की तरफ़ से आपको किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएँगे

– यदि आप किसी कंपनी में काम करते हैं तो अब मौत के बाद आपको 2.5 लाख रूपए की बजाय 6 लाख रूपए मुआवजा

– यदि आपकी सैलरी 21 हजार रूपए तक है तो आपको हर हाल में कंपनी के द्वारा बोनस मिलेगा

– यदि आप किसान हैं और फ़सल उपजाने के साथ ही साथ आप पशुपालन या मत्स्य पालन के लिए कर्ज ले रहे हैं तो आपको 2 फ़ीसदी ब्याज में छूट मिलेगी

– यदि आपके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन का मालिकाना हक है तो आपको 6 हजार रूपए हर साल मदद दी जाएगी

– यदि अब तक आपके घर बिजली नहीं पहुँची है तो सौभाग्य योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन आपको दी जाएगी।

– यदि आप महिला हैं और नौकरी कर रही हैं तो अब आपको 26 सप्ताह मैटरनिटी लीव दी जाएगी

-यदि आप किसी तरह के आपदा का शिकार हुए हैं तो और आपने किसी बैंक से कर्ज़ ले रखा है तो आपको ब्याज में 5 फीसदी की छूट दी जाएगी

सबरीमाला कोई पब्लिक प्लेस नहीं, हिन्दुओं का पवित्र स्थल: संघ प्रमुख के बयान के मायने

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने प्रयागराज कुंभ में आयोजित धर्म संसद में सबरीमाला मुद्दे को लेकर केरल सरकार पर निशाना साधा। संघ प्रमुख ने कहा कि सबरीमाला मंदिर कोई सार्वजनिक जगह नहीं है बल्कि एक सम्प्रदाय विशेष का स्थल है। उन्होंने केरल की वामपंथी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हिन्दुओं के सम्मान एवं भावनाओं को आहत करते हुए श्रीलंका से महिलाओं को लाकर सबरीमाला मंदिर में घुसाया गया। सरसंघचालक ने कहा:

“कोर्ट ने कहा महिला अगर प्रवेश चाहती है तो करने देना चाहिए। अगर किसी को रोका जाता है तो उसको सुरक्षा देकर जहाँ से अब दर्शन करते हैं वहाँ से ले जाना चाहिए। लेकिन कोई जाना नहीं चाह रहा है इसलिए श्रीलंका से लाकर इनको पिछले दरवाजे से घुसाया जा रहा है।”

हिन्दू महिलाएँ जानतीं हैं परम्पराओं का सम्मान करना

भागवत का यह बयान विचारणीय है। संघ प्रमुख ने वही बात कही है, जिस से हर एक हिन्दू और भारतीय परम्पराओं का सम्मान करने वाला व्यक्ति सहमत होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दू महिलाएँ सबरीमाला मंदिर में नहीं जाना चाहती। उनका यह बयान निश्चित ही रेहाना फातिमा और मैरी स्वीटी जैसी महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश करने के परिपेक्ष्य में है। संघ प्रमुख की सोच यह है कि हिन्दू महिलाएँ अपने ही पूर्वजों द्वारा सदियों पहले बनाए गए परम्पराओं का सम्मान करना जानती है, और उसे तोड़ना नहीं चाहती।

अक्टूबर 2018 में 46 वर्षीय मैरी स्वीटी ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास किया था लेकिन श्रद्धालुओं के विरोध के कारन उन्हें वापस लौटना पड़ा था। ईसाई संप्रदाय से आने वाली मैरी स्वीटी के एक हिन्दू मंदिर में जबरन प्रवेश को लेकर सवाल भी खड़े किए गए थे। इसी तरह, उसी महीने रेहाना फ़ातिमा ने भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी। मैरी ने तो यहाँ तक कहा था कि उनके अंदर कोई दैवीय शक्ति है जो उन्हें सबरीमाला की तरफ खींच रही है।

संघ प्रमुख का यह कहना कि हिन्दू महिलाएँ सबरीमाला के नियम-क़ानून का पालन करना चाहती है, इन्ही ख़बरों के परिपेक्ष्य में हो सकता है। अन्य सम्प्रदायों की महिलाओं का अचानक से एक हिन्दू मंदिर के प्रति प्रेम जग जाना उनके इस बयान के पृष्ठभूमि को दर्शाता है। इसी तरह एक 46 वर्षीय श्रीलंकन महिला ने भी सबरीमाला में प्रवेश किया था। संघ प्रमुख ने इसी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि श्रीलंका से महिलाओं को लाकर मंदिर में घुसाया जा रहा है।

जस्टिस इंदु मल्होत्रा के निर्णय से अलग नहीं है संघ प्रमुख का बयान

संघ प्रमुख का बयान इस मुद्दे को लेकर जस्टिस इंदु मल्होत्रा के असहमति वाले निर्णय से मिलता-जुलता है। आपको याद होगा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय पीठ ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने की इजाज़त दे दी थी। 4-1 के बहुमत वाले निर्णय में जस्टिस इंदु मल्होत्रा एकमात्र सदस्य थीं, जिन्होंने बहुमत के ख़िलाफ़ निर्णय (Dissenting Voice) दिया था। ग़ौरतलब है कि वह उस पीठ की एकमात्र महिला सदस्य भी थीं। उन्होंने कहा था:

“देश में पंथनिरपेक्ष माहौल बनाये रखने के लिये गहराई तक धार्मिक आस्थाओं से जुड़े विषयों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। सामाजिक कुरीतियों से इतर यह तय करना अदालत का काम नहीं है कि कौन सी धार्मिक परंपराएँ खत्म की जाएँ। भगवान अय्यप्पा के श्रद्धालुओं के पूजा करने के अधिकार के साथ समानता के अधिकार का टकराव हो रहा है। इस मामले में मुद्दा सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं है। इसका अन्य धार्मिक स्थलों पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।”

अगर मोहन भागवत के बयानों की जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बहुमत के विपरीत दिए गए निर्णय से तुलना करें तो पता चलता है कि दोनों के बयान काफ़ी मिलते-जुलते हैं। जस्टिस मल्होत्रा का कहना था कि इसका प्रभाव अन्य धार्मिक स्थलों पर भी पड़ेगा। उनका यह डर बेवज़ह नहीं था। कुछ दिनों पहले ही प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे नंदकुमार ने भी इसी प्रकार का डर जताते हुए कहा था कि अगर इस साजिश को सीमा से परे ले जाया गया तो देश के अन्य मंदिर और उनकी पूजा प्रणाली भी इस से अछूते नहीं रहेंगे

वामपंथी ताक़तों पर प्रहार

संघ प्रमुख ने वामपंथी ताक़तों पर करारा प्रहार करते हुए JNU प्रकरण व ऐसे अन्य घटनाओं की तरफ भी इशारा किया। उन्होंने कहा:

भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह बोलने वाले साथ मिलकर हमारे समाज में महिला-पुरुष में भेदभाव की बात लोगों के दिमाग में फैलने का काम कर रहे हैं। यह कपट है। राजनीतिक विवाद के कारण समाज को तोड़कर वोटों की कटाई करने वाले लोग ऐसा कर रहे हैं।”

ज्ञात हो कि केरल में वामपंथी पार्टी CPI (M) की ही सरकार है। केरल की लगभग सभी विपक्षी पार्टियाँ श्रद्धालुओं के साथ कड़ी नज़र आ रही हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर भले ही अदालत के निर्णय का स्वागत किया हो लेकिन पार्टी की राज्य ईकाई शुरुआत से ही केरल सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा रही है। राहुल गाँधी का बयान इस मामले में भी बदलता ही रहा है और हाल के बयानों में उन्होंने श्रद्धालुओं का समर्थन भी किया था। भाजपा की बात करें तो, पार्टी और उसके तमाम बड़े नेता एकमत से श्रद्धालुओं की वकालत करते रहे हैं।

संघ प्रमुख के बयान से उनका सन्देश साफ़ झलकता है। उनके बयान का सीधा अर्थ यह है कि राजनीति और वोटों के खेल के लिए हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मामना है कि ऐसे सदियों पुराने परंपरा पर किसी भी प्रकार का निर्णय लेने से पहले जान-भावनाओं का ख़्याल रखा जाना चाहिए।

यह पूरे भारत की लड़ाई है

केरल के श्रद्धालुओं को मोहन भागवत ने यह सन्देश भी देने की कोशिश की है कि उनकी इस लड़ाई में पूरा देश उनके साथ है, वो अलग-थलग नहीं हैं। भगवान अयप्पा को पूरे भारत द्वारा पूजे जाने की बात कह कर उन्होंने केरल के लोगों को ढाढस बंधाया है कि उनकी लड़ाई राष्ट्रीय स्तर की है, एक ही मंदिर, राज्य या सम्प्रदाय तक सीमित नहीं है। संघ प्रमुख का कि ‘सम्पूर्ण भारत के नागरिकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा’, यह दिखता है कि संघ इस मामले में कमर कस चुका है।

संघ प्रमुख की सोच यह है कि अभी भी भारत के अधिकतर हिस्सों में ऐसे लोग हैं, जो सबरीमाला को केवल एक राज्य या मंदिर की समस्या समझते हैं। उनका कहना है कि हिन्दू सगठनों ने पूरे देश को इस से अवगत कराने की बात कह इस मुद्दे को पूरी तरह राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी का संकेत दिया है। सार यह है कि अयप्पा किसी पंथ विशेष के देवता नहीं हैं, सम्पूर्ण हिन्दू समाज के हैं। सबरीमाला मंदिर समस्या सिर्फ एक मंदिर की नहीं है, अन्य धार्मिक स्थलों पर भी इसके परिणाम होंगे। और अंत में, यह मुट्ठी भर श्रद्धालुओं की लड़ाई नहीं है, पूरे देश के हिन्दुओं की है।

बजट 2019: PM मोदी ने वीडियो में दी प्रतिक्रिया, कहा यह है #BudgetForNewIndia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तुत बजट 2019 को नए भारत का बजट कहते हुए कहा कि यह बजट हर भारतीय नागरिक के लिए है। उन्होंने ट्विटर पर वीडियो जारी करते हुए बजट पर अपनी राय रखी:

बजट 2019: टैक्स जमा करने की प्रक्रिया को सरकार ने बनाया आसान

भाजपा सरकार की तरफ़ से अंतरिम बजट को पेश करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने टैक्स जमा करने वालों के लिए कई बड़ी घोषणाओं का ऐलान किया है। अपने भाषण के दौरान गोयल ने एक कविता पढ़ी जिसकी पंक्ति है- ‘एक पाँव रखता हूँ, हजार राहें फूट पड़ती हैं।’ गोयल की यह पंक्ति काफ़ी हद तक भाजपा सरकार के लिए सटीक लगती है। ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्र में सरकार बनने के बाद नोटबंदी, जीएसटी जैसे बड़े फै़सले लेने के बाद मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को उम्मीद से अधिक सफ़लता मिली है। सरकार के इन सभी फ़ैसलों का जैसे-जैसे परिणाम आता गया, इन मुद्दों पर विपक्ष की बोलती बंद हो गई।

केंद्र सरकार ने टैक्स की सीमा को 2.5 लाख रूपए से बढ़ाकर पाँच लाख रूपए कर दिया है। इस तरह सरकार के इस फ़ैसले से बड़ी संख्या में देश के मध्यम वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी।

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भी बताया कि टैक्स ज़मा करना पहले की तुलना में अब अधिक आसान बनाया जाएगा। सरकार ने बताया कि टैक्स अफ़सर की भूमिका अब ख़त्म की जाएगी। टैक्स से जुड़ी हर तरह की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सभी समस्याओं का ऑनलाइन समाधान किया जाएगा।

बजट पेश करते हुए गोयल ने यह भी कहा कि अगले दो साल में आईटीआर वेरिफिकेशन तुरंत ऑनलाइन किया जा सकेगा। इसमें किसी टैक्स अफसर की भूमिका नहीं होगी। आगे चलकर स्क्रूटनी के लिए भी दफ्तर नहीं जाना होगा। टैक्स अफसर कौन है और टैक्स देने वाला कौन है, यह दोनों को पता नहीं चल पाएगा।

इस तरह यह प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद दो प्रमुख फ़ायदे होंगे- पहला फ़ायदा तो यह होगा कि टैक्स देने वाले लोगों को किसी दफ़्तर का चक्कर नहीं लगाना होगा, जबकि टैक्स जमा करने की पूरी प्रक्रिया भी आसानी से ऑनलाइन निपटाया जा सकेगा। इसके अलावा दूसरा सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि ऑनलाइन प्रक्रिया होने की वजह से भ्रष्टाचार को रोका जा सकेगा।  

गोयल ने सदन में टैक्स से जुड़ी जानकारी को साझा करते हुए कहा कि 99.54 प्रतिशत इनकम टैक्स रिटर्न्स को बिना किसी छानबीन के मंजूर किया गया है। अब 24 घंटे में सभी इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होंगे और तुरंत रिफंड दिए जाएंगे।

यही नहीं अपने बजट भाषण में पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि टैक्स कलेक्शन 2014 में 6.38 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 12 लख करोड़ रुपए हुआ है। इसके अलावा 6.85 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल हुए हैं।

जीएसटी लागू होने के बाद निश्चित रूप से लोगों को टैक्स जमा करने के दौरान कुछ मुश्किलों का सामाना करना पड़ा। नई टैक्स प्रक्रिया की वजह से मध्यम वर्ग के लोगों को चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकीलों के पास चक्कर लगाना पड़ता था। इस तरह टैक्स जमा करने के लिए लोगों को काफ़ी समय व पैसा इंवेस्ट करना होता था।

देश में आर्थिक बदलाव की इस नई प्रक्रिया को आदतों में लाना लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल भी था। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि लंबे समय से लोगों को टैक्स डिपार्टमेंट के सुस्त काम-काज की आदत लग गई थी। ऐसे में टैक्स सिस्टम के खामियों का फ़ायदा उठाकर टैक्स चोरी करना पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो गया। लोगों के लिए हर हाल में किसी भी तरह के आय को जीएसटी पर दिखाना अनिवार्य हो गया।

ऐसे में जो नई व्यवस्था आई उसको लेकर लोगों की परेशानी उचित ही थी। लेकिन जल्द ही टैक्स जमा करने के लिए रजिस्टर्ड करने वाले लोगों की संख्या में काफ़ी वृद्धि देखने को मिली।

यही वजह था कि जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई 2018 तक एक करोड़ लोगों ने इसके लिए पंजीकरण तो कराया, लेकिन 50 फ़ीसदी लोग अभी टैक्स नहीं दे रहे थे। इन लोगों द्वारा पैसा नहीं जमा करने के पीछे जीएसटी तकनीक एक बड़ा मुद्दा था।

सरकार ने इस तकनीक को आसान बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया। इस तरह अब टैक्स जमा करने वालों को न तो किसी कर्मचारी के चक्कर लगाने होंगे और न ही किसी की जेब गर्म करनी होगी।

बजट 2019ः मोदी सरकार के बीते 5 सालों के बजट का सफ़र

केंद्र की मोदी सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है और इस बार वित्त मंत्री अरुण जेटली की जगह केंद्रीय मंत्री व कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल संसद में बजट 2019-20 पेश किए। मोदी सरकार का यह अंतरिम बजट है। इसमें आने वाले अगले तीन-चार महीने के खर्चे का ध्यान रखा गया। आइए आपको हम मोदी सरकार के पिछले पाँच सालों में बजट घोषणाओं की मुख्य बातों से अवगत कराते हैं।

केंद्रीय बजट 2014-15

सरकार ने इस बजट में करदाताओं को लाभ दिया था। संसद में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने व्यक्तिगत कर छूट की सीमा को बढ़ाकर 2 लाख से 2.5 लाख कर दिया था। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स छूट की सीमा भी बढ़ाकर 3 लाख किया गयाा था।

इसके साथ ही निवेश की सीमा को 80C के तहत 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख, जबकि आवास ऋण ब्याज दर कटौती की सीमा को बढ़ाकर 2 लाख की गई थी। इसके साथ ही जमाकर्ताओं को और राहत देते हुए (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) जमा सीलिंग को 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख प्रतिवर्ष करने का ऐलान किया गया था।

केंद्रीय बजट 2015-16

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015-16 के इस बजट में मिडिल क्लास को राहत देते हुए व्यक्तिगत इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया था। सरकार ने स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कटौती की सीमा 15,000 से बढ़ाकर 20,000 कर दिया था। इसके अलावा परिवहन भत्ता छूट में बढ़तरी करते हुए उसे दोगुना करते हुए 1,600 कर दिया गया था।

एनडीए सरकार के पहले पूर्ण बजट में, जेटली ने अगले चार वर्षों में कॉर्पोरेट टैक्स में 5% के कमी की घोषणा की थी। इसके अलावा 1 करोड़ से अधिक के राजस्व वाले ‘सुपर-रिच’ व्यक्तियों पर कुल अधिभार में 2% की वृद्धि करते हुए 12% दिया गया था।

केंद्रीय बजट 2016-17

इस बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कम आय वाले करदाताओं को राहत देते हुए प्रति वर्ष 5 लाख से अधिक की आय के वालों के लिए कर छूट की सीमा 2000 से बढ़ाकर 3000 करने का प्रस्ताव रखा था। साथ ही जिन लोगों के पास खुद का घर नहीं था और उन्हें मकान का किराया भत्ता नहीं मिल पाता था, उन्हें 24,000 के मुकाबले 60,000 प्रति वर्ष की कटौती की भी वित्त मंत्री ने घोषणा की थी।

इसके अलावा पहली बार होम बायर्स को भी 35 लाख तक के ऋण के लिए प्रति वर्ष
50,000 की कटौती मिली थी। लेकिन शर्त ये थी कि घर का मूल्य 50 लाख से अधिक न हो।

केंद्रीय बजट 2017-18

वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए इस बजट में कर की दर में बदलाव करते हुए 5 प्रतिशत घटाकर 5 लाख करने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन जिनकी कमाई 50 लाख और 1 करोड़ के बीच है, उनपर 10% का अधिभार प्रस्तावित किया गया था।

इसके अलावा 93 सालों में यह पहली बार हुआ था कि रेल बजट आम बजट का हिस्सा बनाकर पेश किया गया था। हालाँकि इस बार बजट में रेल यात्रियों को किराए में छूट और बढ़ोतरी जैसे कोई ऐलान नहीं किए गए थे।

केंद्रीय बजट 2018-19

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इनकम टैक्स के स्लैब तथा दरों में कोई बदलाव नहीं किया। लेकिन 40,000 का नया स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रस्ताव रखा गया था। जिसने मौजूदा ट्रांसपोर्ट एलाउंस 19,200 तथा मेडिकल री-इम्बर्समेंट 15,000 का स्थान लिया। इसमें पेंशन भोगियों को ट्रांसपोर्ट एलाउंस तथा मेडिकल री-इम्बर्समेंट के फायदे को ध्यान में रखा गया था।

कुल मिलाकर इस बजट का केंद्र बिंदु ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की सरकार की योजना थी। यह 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों को सेकेंडरी और टर्सियरी (Secondary & Tertiary) लेवल के अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष  ₹5 लाख तक की कवरेज प्रदान करता है।

बजट 2019 में तो ‘मोदी-मोदी’ हो गया, लेकिन फ़्यूचर का विज़न क्या है सरकार का?

केन्‍द्रीय वित्‍त, कॉरपोरेट मामले, रेल और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने आज संसद में अंतरिम बजट 2019-20 पेश करते हुए कहा कि सरकार ने 2030 में 10 सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण आयामों को सूचीबद्ध करते हुए अगले दशक के लिए अपनी परिकल्‍पना पेश की है। उन्‍होंने कहा कि हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जहाँ गरीबी, कुपोषण, गंदगी और निरक्षरता बीते समय की बातें होगी। उन्‍होंने कहा कि भारत एक आधुनिक, प्रौद्योगिक से संचालित, उच्‍च विकास के साथ एक समान और पारदर्शी समाज होगा।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि भारत अगले पाँच वर्षों में पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था होने की ओर अग्रसर है और इसके पश्‍चात यह 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था होगी।

गोयल द्वारा उल्‍लेखित परिकल्‍पना-2030 के आयाम निम्‍नलिखित हैं:-

  1. इस परिकल्‍पना के प्रथम आयाम के अंतर्गत 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और सहज-सुखद जीवन के लिए भौतिक तथा सामाजिक अवसंरचना का निर्माण करना है।
  2. परिकल्‍पना के दूसरे आयाम के अंतर्गत एक ऐसे डिजिटल भारत का निर्माण करना है जहाँ हमारा युवा वर्ग डिजिटल भारत के सृजन में व्‍यापक स्‍तर पर स्टार्ट-अप और इको-सिस्टम मे लाखों रोजगारों का सृजन करते हुए इसका नेतृत्व करेगा।
  3. भारत को प्रदूषण मुक्त राष्ट्र बनाने के लिए इलैक्ट्रिकल वाहनों और नवीकरण ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान देना।
  4. आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके ग्रामीण औद्योगीकीकरण विस्तार के माध्‍यम से बड़े पैमाने पर रोजगारों का सृजन करना।
  5. सभी भारतीयों के लिए सुरक्षित पेयजल के साथ स्वच्छ नदियां और लघु सिंचाई तकनीकों को अपनाने के माध्‍यम से सिंचाई में जल का कुशल उपयोग करना।
  6. सागरमाला कार्यक्रम के प्रयासों में तेजी लाने के साथ भारत के तटीय और समुद्री मार्गों के माध्‍यम से देश के विकास को सशक्‍त बनाना।
  7. हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम-गगनयान, भारत दुनिया के उपग्रहों को छोड़ने का “लांच पैड” बन चुका है और 2022 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना इस आयाम को दर्शाता है।
  8. सर्वाधिक जैविक तरीके से खाद्यान्न उत्‍पादन और खाद्यान्न निर्यात में भारत को आत्म निर्भर बनाना और विश्व की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाद्यान्नों का निर्यात करना।
  9. 2030 तक स्वस्थ भारत और एक बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल एवं व्यापक आरोग्यकर प्रणाली के साथ-साथ आयुष्‍मान भारत और महिला सहभागिता भी इसका एक महत्‍वपूर्ण घटक होगा।
  10. भारत को न्यूनतम सरकार, अधिकतम अभिशासन वाले एक ऐसे राष्ट्र का रूप देना जहाँ एक चुनी हुई सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले सहकर्मियों और अधिकारियों के अभिशासन को मूर्त रूप दिया जा सकता है।

साभार: पत्र सूचना कार्यालय

बजट 2019: देश की सड़कों के लिए क्या रहा खास

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने सड़क और परिवाहन से संबंधित ये घोषणाएँ की हैं।

  • देश में 27 किमी हाईवे का निर्माण प्रत्येक दिन किया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों का निर्माण तिगुना हुआ।
  • ब्रॉडगेज पर मानव रहित क्रॉसिंग खत्म करने का ऐलान भी किया गया।
  • कोलकाता-वाराणसी के बीच नदी पर जलमार्ग शुरू हुआ।

ग्रामीण सड़कों के लिए ₹19 हजार करोड़
कार्यवाहक वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच साल में हमने गाँवों में शहरों जैसी सुविधाएँ दी हैं और सड़कों का विकास तेज़ी से किया जा रहा है। आज भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हाईवे बना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना ने इसमें काफी योगदान दिया। गाँव की सड़कों के लिए 19 हजार करोड़ इस साल दिए जाएँगे।

10 तस्वीरों में बजट 2019 का सार

केंद्रीय कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए कहा कि पिछले पाँच वर्षों से भारत वैश्विक इकॉनमी में छाया रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए उन्होंने अपने बजट अभिभाषण की शुरुआत की। अपने भाषण में उन्होंने किसानों से लेकर महिलाओं, ग्रामीण लोगों, मज़दूरों, पेंशनधारकों, टैक्सदाताओं और समाज के हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की बात की।

आइए जानते हैं बजट 2019 को इन दस तस्वीरों से: