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जनवरी से जून 2019 के बीच नौकरियों में 20% बढ़ोतरी की संभावना: Naukri.Com

भारत के प्रमुख जॉब पोर्टल्स में से एक Naukri.com ने ‘हायरिंग आउटलुक सर्वेक्षण’ (Hiring Outlook survey) में प्रकाशित किया है कि जनवरी से जून 2019 के बीच देश में रोज़गार के लिए सुनहरा अवसर है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “आने वाले छह महीने रोज़गार की दृष्टि से बहुत ज़्यादा उम्मीदों से भरा है। सर्वेक्षण में देश भर के 3310 रिक्रूटर्स को शामिल कर किया गया है। सर्वे में शामिल 84% रिक्रूटर्स देश में हायरिंग एक्टिविटी में तेज़ उछाल की उम्मीद कर रहे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 20% ज़्यादा है।”

इंफो इंडिया लिमिटेड के चीफ़ मार्केटिंग ऑफिसर सुमीत सिंह के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, “जिस तरह से रिक्रूटर्स नौकरियों के लिए उत्सुकता दिखा रहे हैं, चाहे वो रिप्लेसमेंट जॉब हो या नई भर्तियाँ (replacement hiring and new jobs), दोनों क्षेत्र आने वाले समय में रोज़गार की बेहतर छवि पेश करते हैं।”

पिछले काफ़ी समय से जिस तरह से आधारभूत उद्योगों ने तेज गति से उछाल आया है। उससे नौकरियों के सृजन की उम्मीदें और बढ़ी हैं। इसी तरह की सम्भावना ‘जॉबस्पीक’ नामक पोर्टल ने भी व्यक्त की है। कहा है कि जॉब क्रिएशन ने पिछले साल से जो गति पकड़ी है उसके नए साल में भी जारी रहने की संभावना है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि 56% रिक्रूटर्स नए जॉब क्रिएशन और रिप्लेसमेंट हायरिंग दोनों की उम्मीद कर रहे हैं। साथ ही, ”साल की पहली छमाही में नई जॉब क्रिएशन और रिप्लेसमेंट हायरिंग दोनों में ग्रोथ की 56% रिक्रूटर्स को उम्मीद है। जबकि सर्वे में शामिल 12 पर्सेंट रिक्रूटर्स ने कहा कि सिर्फ़ रिप्लेसमेंट हायरिंग ही होगी। ज़्यादातर रिक्रूटमेंट की संभावना आईटी, बीएफएसआई और बीपीओ में हैं।

लगभग आधे रिक्रूटर्स ने सर्वे में उम्मीद जताई कि रिक्रूटमेंट सेल्स और मार्केटिंग में सबसे ज्यादा हो सकता है। इसके बाद आईटी-सॉफ्टवेयर फंक्शनल एरियाज में। एक-चौथाई रिक्रूटर्स ने यह भी टिप्पणी की कि ऑपरेशन सेक्टर जैसे एचआर और अकॉउंट डोमेन में भर्ती अधिक होगी। रोज़गार के अवसरों में बढ़ोतरी की उम्मीद को इस तथ्य से और बल मिल जाता है कि सर्वेक्षण में शामिल केवल 1% रिक्रूटर्स ने ही इस दौरान छँटनी की उम्मीद की थी।

साथ ही दिलचस्प बात यह है कि रिक्रूटर्स के बीच इस बात पर संदेह व्यक्त किया गया है कि ज़रूरत के हिसाब से क्या उतने मात्रा में योग्य उम्मीदवार मिलेंगे या नहीं? रिपोर्ट में कहा गया है, “42% रिक्रूटर्स ने भविष्यवाणी की है कि अगले छह महीनों में योग्य उम्मीदवारों की कमी का मुद्दा सामने आ सकता है। जबकि 31% रिक्रूटर्स ने कहा कि प्रतिभा (योग्य उम्मीदवार) की कमी बनी रहने के बावजूद, नौकरियों में तीव्रता बानी रहेगी। अधिकतम ‘टैलेंट क्रंच’ 3-5 साल के अनुभव बैंड में होने की उम्मीद है।”

वेतन वृद्धि के मुद्दे पर, सर्वे में शामिल एक-तिहाई रिक्रूटर्स का मानना ​​था कि वेतन वृद्धि 10-15% के बीच होगी। 15% रिक्रूटर्स ने इसे 15-20% के बीच होने की संभावना व्यक्त की, जबकि 16% ने रिपोर्ट किया कि इंक्रीमेंट 20% से ऊपर होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों के अपने पुराने संस्था को छोड़ देने की दर ( Predicted rate of Attrition) के बारे में 14% रिक्रूटर्स ने पिछले साल कराए गए आउटलुक सर्वेक्षण में 20% – 40% के बीच होने की भविष्यवाणी की थी। यह वर्तमान आउटलुक सर्वे में 7% तक है। सर्वे में शामिल 50% रिक्रूटर 5% – 15% के बीच एट्रिशन की दर बनाए रखते हैं। कुछ रिक्रूटर्स ने ये सुझाव दिया कि 1-3 साल के प्रवेश स्तर (Entry Level) के बैंड में अधिकतम प्रभाव दिखाई देगा। रिक्रूटर्स ने कार्यात्मक क्षेत्रों जैसे बिक्री और विपणन और आईटी सॉफ्टवेयर (Sales & Marketing and IT Software) में अधिक एट्रिशन दर होने की संभावना व्यक्त की है।

बता दें कि, विपक्षी दलों द्वारा रोज़गार की संभावनाओं पर लगातार हो-हल्ला मचाने के बावजूद, देश में व्यापक रोज़गार सृजन हुए हैं। हाल ही में रेलवे में भी 4 लाख नौकरियों के साथ अगले 6 महीने रोज़गार की दृष्टि से आशावादी दिखते हैं।

Naukri.com सर्वेक्षण से अगर निष्कर्ष निकालें तो साफ़ देख सकते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के पास आवश्यक प्रतिभा है, तो उसे काम पर रखने की संभावना पहले की तुलना में बहुत अधिक है।

अंग्रेज़ी के मूल लेख का अनुवाद रवि अग्रहरि ने किया है।

येचुरी का लेनिन प्रेम: माओवंशियों पर तर्क़ के हमले होते हैं तो वो ‘महान विचारों’ की पनाह लेता है

रूस में जिस लेनिन की मूर्तियों को कई जगह से हटाया गया, उस आतंकी और सामूहिक नरसंहारों के दोषी की मूर्ति तमिलनाडु में सीताराम येचुरी समेत वामपंथियों की मौज़ूदगी में स्थापित की गयी। लेनिनवंशियों ने हत्यारे के तथाकथित महान विचारों की बात करते हुए उसकी बड़ाई में कसीदे काढ़े।

‘कुत्ते की मौत आती है तो वो शहर की ओर भागता है’ से प्रेरित होकर ये कहा जा सकता है कि नालायक माओवंशियों पर तर्क़ के हमले होते हैं तो वो विचारों की गोद में पनाह लेता है। वो ये गिनाता है कि लेनिन ने जो विचार दिए थे वो कितने ग़ज़ब के हैं!

ये चिरकुट सोचते हैं कि किसी ने बहुत पहले कुछ कहा था और वो छप कर आ गया तो वो हर काल और संदर्भ में सही होगा। जैसे कि ‘शांति की स्थापना बंदूक की नली से गुज़रते हुए होती है’, ये आज के वामपंथियों के कई बापों में से एक ने कहा था। मेरा सवाल ये है कि आज के दौर में कौन-सी शांति की स्थापना होनी रह गई है? क्या कहीं पर कोई तंत्र असंवैधानिक तरीक़े से लाया गया है? क्या देश की सरकार चुनी गई सरकार नहीं है या राज्यों में पुलिस के मुखिया सरकार चला रहे हैं?

ये वही माला जपेंगे कि मार्क्स ने ये कहा था, लेनिन के विचारों से भगत सिंह सहमत थे, और दिस एवं दैट…

ये लीचड़ों का समूह, जो दिनों-दिन सिकुड़ता जा रहा है, ये नहीं देखता कि किताब किस समय लिखी गई थी, भगत सिंह के सामने कौन थे, और लेनिन ने किस तंत्र को ध्वस्त किया था। उससे इनको मतलब नहीं है। समय और संदर्भ से बहुत दूर इनके लहज़े में ज़बरदस्ती की अभिजात्य गुंडई और कुतर्की बातें होती हैं।

चूँकि लेनिन ने ज़ारशाही को ख़त्म करने के लिए क्रांति की थी, और उसके समर्थकों ने आतंक मचाया था, तो आज के दौर में भी वो सब जायज़ है। जायज़ इसलिए क्योंकि इनको शब्दों से किसी तानाशाह, मोनार्क या ज़ार और लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी हुई सरकार में कोई अंतर नहीं दिखता। ये धूर्तता है इनकी क्योंकि और कोई रास्ता नहीं है अपने अस्तित्व को लेकर चर्चा में बने रहने का। इसीलिए ‘मूर्ति पूजा’ पर उतर आए हैं।

इनकी बातें अब विश्वविद्यालयों तक सिमट कर रह गई है। वहाँ से भी अपनी बेकार की बातों के कारण हूटिंग के द्वारा भगाए जाते हैं। अब ये डिग्री कॉलेजों में हुए चुनावों में कैमिस्ट्री डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी का चुनाव जीतकर देश में युवाओं का अपनी विचारधारा में विश्वास होने की बातें करते हैं। इनके मुद्दे दूसरे लोग अपना रहे हैं, और ये चोरकटबा सब, तमाम वैचारिक असहमति के बावजूद, अपने बापों के नाम को बचाने के लिए विरोधियों से गठबंधन करते नज़र आते हैं।

चूँकि ये सत्ता में नहीं हैं तो जो सत्ता में है वो हिटलर और ज़ार हो जाता है। चूँकि ये अपनी बातों से जनता को वोट करने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते तो ‘आर्म्ड रेबेलियन’ जायज़ हो जाता है। चूँकि तुम्हारा मैनिफ़ेस्टो बकवास है इसलिए ग़रीबी एक हिंसा है, जो कि किसी दूसरे ग़रीब को काट देने के बराबर वाली हिंसा के समकक्ष हो जाती है।

आप ज़रा सोचिए कि अगर मेरे पास शब्द हों, और तंत्र हों, तो मैं आपको क्या साबित करके नहीं दे सकता। मैं ये कह सकता हूँ कि कौए सफ़ेद होते हैं, और आप इसलिए मत काटिए मेरी बात क्योंकि आपने ब्रह्माण्ड के हर ग्रह का विचरण नहीं किया है। मैं ये कह सकता हूँ कि ग़रीबी एक स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज़्म है क्योंकि लोग ग़रीबी से मरते हैं और स्टेट कुछ नहीं कर रहा।

उस वक़्त मैं ये नहीं देखूँगा कि क्या देश की आर्थिक स्थिति वैसी है, और क्या सामाजिक परिस्थिति वैसी है कि हर ग़रीब को सब्सिडी देकर भोजन दिया जा सके। उस वक़्त जब आपसे टैक्स लिया जाएगा तो आप ये कहते पाए जाएँगे कि हमारी कमाई से किसी ग़रीब का पेट क्यों भरे? सरकार मिडिल क्लास की जान ले लेना चाहती हैं। ये है वामपंथी विचारकों की दोगलई।

लेनिन की करनी जायज़ हो जाती है, उसके समर्थकों द्वारा किया नरसंहार क्रांति के नाम पर जायज़ है क्योंकि उससे रूस में नया तंत्र सामने आया। फिर हिटलर भी तो औपनिवेशिक शक्तियों से लड़ रहा था, उसने भी तो एक तरह से ऑप्रेसिव तंत्र के सामने खड़े होने की हिम्मत दिखाई थी। उसकी मूर्तियाँ लगवा दी जाएँ?

जब ब्लैक और व्हाइट में चुनाव करना हो, तो ये आपको ‘लेस इविल’, ‘गुड टेरर’ जैसी बातों में उलझाएँगे। ये आपको कहेंगे कि लेनिन कितने महान विचारक थे, लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि आपकी पार्टी या विचारधारा के समर्थक लेनिन की लिखी किताब नहीं पढ़ते, वो वही काम करते हैं जो आप उनसे लेनिन के महान होने के नाम पर करवाते हैं: हिंसा और मारकाट।

लेनिन की क्रांति को एक शब्द में समाहित करके अपने काडरों द्वारा किए गए अनेकों नरसंहारों पर चुप रहने वाले संवेदनहीनता के चरम पर बैठे वो लोग हैं जिन्हें ग़रीबों और सर्वहारा की बातों से कोई लेना-देना नहीं है। ये लोग सीआरपीएफ़ के जवानों की विधवाओं, अनाथ बच्चों और अकेले पड़ चुके परिवारों की ग़रीबी और भविष्य की ओर नहीं देखते। ये प्रैक्टिकल बातें नहीं देखते, ये बस यही रटते रहते हैं कि ग़रीबी भी हिंसा है।

अंत में हर बात वहीं ख़त्म होती है कि जब सत्ता आपके समीप नहीं है तो आप हर वो यत्न करते हैं जिससे लगे कि आप बहुत गम्भीर हैं मुद्दों को लेकर। तब वुडलैंड का जूता पहनकर ग़रीब रिक्शावाले के द्वारा भरी दोपहरी में ख़ाली पैर रिक्शे के पैडल चलाने से होने वाले छालों पर कविता करते हैं आप। तब आपके सेमिनारों में ग़रीबी और सत्ताधारी पक्ष के ‘हिंसा’ के तरीक़ों पर बात होती है, जहाँ टेंट के बाहर बैठा ग़रीब प्लेट से बची हुई सब्ज़ी चाटता है जिसे देखकर आपको घिन आती है। आप उसके लिए तब भी कुछ नहीं करते और हिक़ारत भरी निगाह से ताकते हुए उसे गरिया देते हैं कि ‘मोदी को वोट दिया था, तो भुगतो।’

ये तो संवेदना नहीं है। ये तो द्वेष है, घृणा है उन लोगों के प्रति जो संविधान की व्यवस्था का हिस्सा बने हैं और आपकी बातों से कन्विन्स नहीं हो पा रहे। अगर संवैधानिक व्यवस्थाओं में विश्वास नहीं है तो नाव लेकर समंदर में जाइए और पायरेट बन जाइए। क्योंकि आपकी बातों में देश के किसी कोने के लोग अब विश्वास दिखाते नज़र नहीं आ रहे।

इसीलिए आज भी आप काम की बात करने की बजाय वाहियात बातें करते नज़र आ रहे हैं। आप उन प्रतीकों को डिफ़ेंड कर रहे हैं जिनका नाम लेकर इसी ज़मीन के ग़रीब मुलाजिमों को काटा गया, बमों और गोलियों से भूना गया। इस ख़ून की महक से आप उन्मादित होते हैं कि सरकार पर दबाव बन रहा है क्योंकि आपके प्यादे जंगलों में आपकी कही बातों को सच मानकर आपके ख़ूनी इरादों को अंजाम देते हैं।

आप कभी नहीं फँसते क्योंकि आपको लिखना और बोलना आता है। आपके पास वक़ील हैं। आपकी बेटी नक्सलियों के साथ जंगलों में एरिया कमांडर के सेक्स की भूख नहीं मिटा रही। आपका बेटा सीआरपीएफ़ के लिए माइन्स नहीं बिछा रहा। आप बुद्धिजीवी बनते हैं और मौन वैचारिक सहमति देते हैं क्योंकि प्यादों की लाइन ही राजा को बचाने के लिए पंक्तिबद्ध होती है। आपको ये छोटे-छोटे ग़रीब लोग चाहिए जिनके कंधों पर लूटे गए इन्सास रखवाकर आप चर्चा में बने रहते हैं।

अपने चेहरों के आईनों में देखिए हुज़ूर, वहाँ फटी चमड़ी के बीच पीव और मवाद में नहाया अवचेतन मिलेगा। वो आपसे कुछ कहना चाह रहा होगा लेकिन आप मुँह फेर लेंगे। क्योंकि दोगलेपन में आपका सानी नहीं। आप एक विलुप्त होती विचारधारा के वो स्तम्भ हैं जहाँ आपका अपना कुत्ता भी निशान नहीं लगाता क्योंकि उसे भी पता है कि आपकी ज़मीन ग़ायब हो रही है।

MP: कर्ज़माफ़ी को लेकर समस्या सुनाने गए लोगों को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

मध्य प्रदेश के देवास में कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री जीतू पटवारी से मिलने पहुँचे लोगों पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का कहर टूट पड़ा। दरअसल कुछ लोग कर्ज़माफ़ी को लेकर किसानों की दिक्कतों को बताने के लिए मंत्री से मिलने के लिए आए थे। लेकिन जल्द ही मंत्री से मिलने पहुँचे लोगों और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच की बहस हाथापाई में बदल गई।

इसके बाद कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता लोगों को दौरा-दौरा कर पीटने लगे। जिन लोगों की पिटाई हुई उन्होंने खुद को मजदूर संगठन से जुड़ा हुआ बताया है। कॉन्ग्रेस के कोप के शिकार इन लोगों ने मीडिया को बताया कि कर्ज़ माफ़ी के संबंध में किसानों की समस्या सुनाने के लिए वो सभी मंत्री के पास आए थे। जिसके बाद मामूली-सी बात पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीटना शुरू कर दिया।

जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार द्वारा किसानों की क़र्ज़माफ़ी की घोषणा के बाद किसानों की मुश्किलें ख़त्म होने के बजाए बढ़ती ही जा रही हैं। क़र्ज़माफ़ी को लेकर सरकारी दफ़्तरों में चिपकाई जा रही सूची में किसी के नाम ₹13 तो किसी के नाम के आगे ₹30 की क़र्ज़माफ़ी है। क़र्ज़माफ़ी के मुद्दे पर 15 साल बाद सत्ता में आई कॉन्ग्रेस की कमलनाथ सरकार के इस रवैये से जनता बेहद परेशान है।

किसानों के लिए जारी क़र्ज़माफ़ी की लिस्ट में निपानिया के रहने वाले एक किसान शिवपाल का भी नाम है। शिवपाल पर बैंक के ₹20,000 से ज्यादा का कर्ज़ है। लेकिन सरकार द्वारा जारी लिस्ट में उनके नाम के आगे ₹13 की क़र्ज़माफ़ी की गई है। शिवपाल ने अपने बयान में कहा, “सरकार क़र्ज़ माफ़ कर ही रही है तो मेरा पूरा क़र्ज़ माफ़ होना चाहिए, ₹13 की तो हम बीड़ी पी जाते हैं।”

7वाँ वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए तोहफ़ों की बरसात

दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने तोहफ़ों की बरसात करते हुए 7वें वेतन आयोग की कई सिफ़ारिशों को हरी झंडी दे दी है। बता दें कि इन सिफ़ारिशों को 2 साल पहले ही मंजूरी मिल गई थी लेकिन अब तक इसे किसी कारणवश लागू नहीं किया जा सका था। अब सरकार ने उन्हें खुशखबरी देने की तैयारी कर ली है। सरकार ने कैश और ट्रेजरी का काम देखने वाले कर्मचारियों के भत्तों में 300 फीसदी की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है।

केंद्र सरकार ने हैंडलिंग अलॉएन्स और ट्रेजरी अलॉएन्स को मिला कर एक करने का फ़ैसला लिया है। इस प्रस्ताव के पास होने के बाद अब इसे हैंडलिंग एंड ट्रेजरी अलॉएन्स के नाम से जाना जाएगा। नया साल शुरू होते ही केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को ये सुविधाएँ देने का फ़ैसला लिया है। क़यास लगाए जा रहे हैं कि गणतंत्र दिवस के मौके पर इस सम्बन्ध में और निर्णय लिए जा सकते हैं।

इस प्रावधान से पहले भत्तों को कुल पाँच श्रेणियों में विभाजित किया गया था जो कि नक़द पर आधारित थे। ज्ञात हो कि केंद्र सरकार अभी 50 हजार रुपए तक की राशि को संभालने वाले कर्मियों को 230 रुपए, 50 हजार से 2 लाख रुपए तक की रकम संभालने वाले को 450 रुपए, 2 लाख से 5 लाख रुपए की राशि को हैंडल करने वालों को 600 रुपए, 5 लाख से 10 लाख रुपए को संभालने वालों को 750 रुपए और दस लाख से ज्‍यादा की राशि को संभालने वाले कर्मचारियों को 900 रुपए बतौर भत्‍ता देती है।

ताज़ा प्रावधानों के तहत अब इन्हे सिर्फ़ दो श्रेणियों में रखा जाएगा। 5 लाख रुपए तक की राशि संभालने वालों को अब भत्‍ते के तौर पर 700 रुपए और 5 लाख रुपए से ज्‍यादा की रकम संभालने वालों को 1 हजार रुपए का अलाउंस दिया जाएगा।

इसके अलावे मोदी सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेज सहित देश भर के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के तहत बढ़ा हुआ वेतन देने को मंजूरी दे दी है। इसे लेकर 1241 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

बता दें कि महाराष्‍ट्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है और BMC के कर्मचारियों को फरवरी से इसका लाभ मिलने लगेगा। उत्तराखंड सरकार ने भी दो लाख कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लागू सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने का आदेश जारी कर दिया है।

BSF ने बंग्लादेश सीमा पर 31 रोहिंग्या रिफ़्यूजी को गिरफ़्तार कर त्रिपुरा पुलिस के हवाले किया

बंग्लादेश सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने 31 रोहिंग्या रिफ़्यूजी को गिरफ़्तार कर लिया है। बीएसएफ ने इन सभी को गिरफ़्तार करने के बाद त्रिपुरा पुलिस के हवाले कर दिया।

पिछले दिनों बंग्लादेश सीमा पर तैनात बॉर्डर गार्डस बांग्लादेश (BGP) के जवानों ने इन्हें अपने देश में घुसने से मना कर दिया था, जिसके बाद तीन दिनों से ये सभी बंग्लादेश सीमा पर फँसे हुए थे।

इसके बाद बीएसएफ व बीजीपी के उच्चाधिकारियों के बीच मीटिंग के बाद बीएसएफ के जवानों ने सभी रोहिंग्या रिफ़्यूजी को गिरफ़्तार करके त्रिपुरा पुलिस के हवाले कर दिया है। क्षेत्र के असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर विद्युत सूत्रधार ने मीडिया को बताया कि गिरफ़्तारी के बाद सभी रिफ़्यूजी को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट संजन लाल त्रिपुरा के सामने पेश किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने गिरफ़्तार किए गए सभी रोहिंग्या को 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

इंडियन पासपोर्ट एक्ट अवेहलना के जुर्म में इन सभी पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 4 फ़रवरी को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के कोर्ट में होनी है। कोर्ट में सुनवाई को दौरान न्यायाधीश ने 7 महिला व 17 बच्चों को ₹30,000 के हिसाब से जमा करने बाद बेल लेने को ऑफ़र भी दिया, लेकिन यह रक़म जमा नहीं करने के बाद सभी को 14 दिनों के हिरासत में जेल भेजा गया।

भाजपा सरकार रोहिंग्या को देश से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध

साल 2017 में अपने म्यांमार के दौरे के समय ही प्रधानमंत्री ने इस बात की घोषणा की थी कि वो रोहिंग्याओं के निर्वासन पर विचार कर रही है। इस बात पर विचार करने के दौरान ये नहीं तय किया गया था कि इन लोगों को म्यांमार भेजा जाएगा या फिर बांग्लादेश भेजा जाएगा, क्योंकि उस समय बांग्लादेश में पहले से ही लाखों की तादाद में रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे थे और म्यांमार इन्हें स्वीकारने के लिए किसी भी हाल में तैयार नहीं था।

ऐसे में अब 2019 के शुरुआती महीने में निर्वासन के डर से क़रीब 1300 रोहिंग्या लोगों ने बांग्लादेश में पलायन किया है, जिसकी वजह से नई दिल्ली को और केंद्रीय सरकार को काफ़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कई बुद्धिजीवियों ने मोदी सरकार द्वारा इस मामले पर विचार किए जाने को नकारात्मकता के साथ पेश करने का भी प्रयास किया है, अलजज़ीरा की वेबसाइट पर हाल ही में आई रिपोर्ट में SAHRDC के रवि नैय्यर ने बताया कि भारत में पिछले साल से रोहिंग्या वासियों के लिए रहना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

रेलवे में 4 लाख युवाओं को मिलेगा रोज़गार: रेल मंत्री पीयूष गोयल

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने देश के नौजवानों के लिए नौकरियों के रूप में एक बड़ी सौगात दी है। पीयूष गोयल ने कहा, “पिछले साल हमने डेढ़ लाख लोगों को नौकरी देने का अवसर प्रदान किया था। अगले दो वर्षों में रेलवे सेवानिवृति से होने वाली वैकेंसी और अन्य वैकेंसी को मिलाकर कुल 4 लाख लोगों को नौकरी देने जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “रेलवे में 2 लाख 30 हज़ार और वेकैंसी निकाली जाएगी। रेलवे में अभी 1 लाख 32 हज़ार पद खाली है। दो साल में 1 लाख लोग और रिटायर होने वाले हैं। लिहाज़ा पुरानी ग्रुप सी और ग्रुप डी की वेकैंसी और इस बार जो वेकैंसी रेलवे निकालने जा रहा है, उसको मिला दें तो रेलवे 2 साल में लगभग 4 लाख नई नौकरियाँ प्रदान करेगा।”

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2018 में Railway Recruitment Board (RRB) ग्रुप सी एएलपी, टेक्नीशियन के 60 हज़ार से ज़्यादा पदों की वैकेंसी निकली गई थी। इसके अलावा पिछले वर्ष ही ग्रुप डी के 62 हज़ार 907 पदों पर भी वैकेंसी निकाली गई थी। अभी ग्रुप सी और ग्रुप डी दोनों ही भर्तियों की प्रक्रिया चल रही है।

ख़ास बात ये है कि 2 लाख 30 हज़ार नए पदों पर होने वाली भर्ती में आर्थिक रूप से कमज़ोर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 10% आरक्षण दिया जाएगा। ये भर्ती 2 चरणों में होगी। पहले चरण में 1 लाख 31 हज़ार 428 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफ़िकेशन जारी किया जाएगा। ये नोटिफ़िकेशन फ़रवरी या मार्च में जारी होने की सम्भावना है। जबकि दूसरे चरण में 99 हज़ार पदों पर भर्ती के लिए मई-जून 2020 में नोटिफ़िकेशन जारी किया जाएगा।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “नौजवानों का जोश भारतीय रेल की सेवा में काम आए, और भारतीय रेल भी उसी जोश के साथ और अधिक सुविधाजनक व अच्छी बने। इसके लिये हम युवाओं का स्वागत करते हैं।”

भर्तियों की घोषणा के अलावा उन्होंने पिछली सरकारों को निशाने पर लेते हुए कहा, “यदि पिछ्ली सरकारों ने आज की तरह रेलवे में भारी निवेश किया होता तो आज देशवासियों को जो समस्या हो रही है वो नहीं हुई होती। इस सरकार ने जहाँ जितनी आवश्यकता है, उस पर फ़ोकस करते हुए योजनाबद्ध तरीक़े से काम किया। जिसका परिणाम आने वाले समय में देश के सामने होगा।”

2 इंजीनियर, 1 किशोर सहित 9 संदिग्ध आतंकी गिरफ़्तार, ISIS से हो सकता है लिंक

महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने सोमवार (जनवरी 21, 2019) को राज्य के कई इलाक़ों में छापेमारी की। इस छापेमारी में ATS को बड़ी क़ामयाबी मिली है। इस दौरान 9 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ़्तार किया गया और कई संदिग्ध वस्तुएँ भी बरामद की गई। ठाणे और औरंगाबाद से गिरफ़्तार संदिग्धों के खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के साथ भी लिंक हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ इस बारे में पड़ताल कर रही है।

ठाणे के मुंब्रा शहर में अमृत नगर, कौसा, मोती बाग और अलमास कॉलोनी इलाकों और औरंगाबाद की कैसर कॉलोनी, राहत कॉलोनी और दमडी महल इलाकों में सोमवार (जनवरी 21, 2019) को देर रात और मंगलवार को सुबह छापे मारने के बाद गिइन गिरफ़्तारियों को अंजाम दिया गया।

सूत्रों के अनुसार पकड़े गए संदिग्ध आतंकी ISIS में शामिल होने वाले थे। इनके पास से केमिकल पाउडर, एसिड पाउडर, धारदार हथियार, हार्ड ड्राइव, मोबाइल फोन, सिम कार्ड जब्त हुए हैं। साथ ही कई उर्दू की पुस्तकें भी ज़ब्त की गई है। बताया जाता है कि ये सभी सीरिया जाने की योजना तैयार कर रहे थे। वहाँ उन्हें फ़िदायीन बनने का प्रशिक्षण दिया जाने वाला था। गिरफ़्तार किए गए लोगों में मोहम्मद मजहर शेख मकैनिकल इंजिनियर है और मोहसिन खान सिविल इंजिनियर है।

इनके अलावे एक 17 वर्षीय किशोर को भी हिरासत में लिया गया है। फ़हद शाह नमक आर्किटेक्ट को भी गिरफ़्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि इन सबको हिरासत में लेने के बाअद ATS टीम इनके घर पहुँची और फिर तलाशी ली। NBT में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार गिरफ़्तार मज़हर के भाई ने समाचार एजेंसी को बताया:

“मजहर औरंगाबाद में अपने एक दोस्त सलमान के निकाह में शामिल होने की बात कहकर घर से गया था। बाद में उसका मोबाइल बंद हो गया। मंगलवार को तड़के तीन बजे खुद को एटीएस का अधिकारी बताने वाले कुछ लोग उसके घर आए थे। उन्होंने घर की तलाशी लेकर कोना-कोना छान मारा था।”

ATS ने बताया कि उन्होंने कई दोनों से इन संदिग्ध आतंकियों पर नज़र रखी हुई थी और इसके लिए कई टीमों को तैनात किया गया था। गिरफ्तार संदिग्धों के खिलाफ IPC की धारा 120 बी के साथ आतंकी कानून यूएपीए की धाराएँ भी दर्ज़ की गई है। अभी इस बात का ख़ुलासा होना बाकी है कि ये सभी कहाँ-कहाँ आतंकी हमला करने की फ़िराक में थे।

आपको याद होगा कि दिसंबर 2018 में NIA 10 ने मुस्लिम युवकों को गिरफ़्तार किया था जो ISIS से प्रेरित मॉड्यूल बना कर किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की फ़िराक में थे। उसके बाद से कई ऐसे मामले आ चुके हैं जिस से यह पता चला है कि आतंकी संगठन भारत के मुस्लिम युवकों को बरगला कर उन्हें आतंकवादी बनाने की कोशिश में जुटी है।

चीन से आगे निकल जाएगी भारतीय अर्थव्यवस्था: रघुराम राजन

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में भारत जल्द ही चीन से आगे निकल जाएगा। राजन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ती जा रही है जबकि चीन की अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी पड़ गई है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) को सम्बोधित करते हुए पूर्व RBI गवर्नर ने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों में भारत बाकियों से बेहतर स्थिति में होगा।

अभी हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने भी अनुमान लगाया था कि 2019 में भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत जबकि 2020 में 7.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। IMF का यह भी अनुमान था कि अगले दो सालों में भारत की विकास दर चीन से अधिक रहने वाली है। IMF ने अमेरिका से तनाव के कारण चीनी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी रहने की चिंता जताई। ज्ञात हो कि चीन अभी विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

रघुराम राजन ने IMF के इन दावों पर अपनी मुहर लगाते हुए कहा;

“नेपाल और अफगानिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए चीन और भारत दोनों की ही मदद ले रहे हैं। यह क्षेत्रीय कंपनियों और बैंकों के लिए बेहतर अवसर है। ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ भारत निवेश कर रहा है लेकिन उसे यह दायरा और बढ़ाना होगा। उद्योगों को भी जरूरी कदम उठाने के लिए सरकार से बातचीत करनी चाहिए।

साथ ही रघुराम राजन ने भारत को सलाह देते हुए कहा कि पड़ोसी देशों से व्यापार में वृद्धि होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध से पहले जर्मनी और फ्रांस एक-दूसरे से लड़ते रहते थे लेकिन बाद में दोनों ने इस्पात और कोयले के क्षेत्र में परस्पर सहयोग से अपनी अर्थव्यवस्था को मज़बूत किया। राजन ने भारत को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ सहयोग करने की सलाह भी दी। रोज़गार सृजन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों में भी ये समस्या है।

बता दें कि तीन सालों तक भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे राजन अभी शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं।

छात्रा से छेड़-छाड़ के आरोप में NSUI जिलाध्यक्ष इरफ़ान गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में कॉन्ग्रेस पार्टी के छात्र नेता इरफ़ान हुसैन को छेड़-छाड़ के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। इरफ़ान शाहजहाँपुर के एनएसयूआई जिलाध्यक्ष भी थे। पिछले दिनों इरफ़ान ने अपने साथी शाहरोज, नदीम और कामरान के साथ मिलकर कॉलेज कैंपस में एक छात्रा के साथ छेड़-छाड़ की थी।

यही नहीं जब छात्रा ने इस घटना पर विरोध किया तो इरफ़ान व उसके साथियों ने छात्रा को अगवा करने की धमकी भी दी। इस मौके पर कुछ लोगों ने इरफ़ान और उसके साथियों का वीडियो बना लिया, जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। पुलिस ने चारों आरोपी के खिलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भी यौन-शोषण का आरोप

जानकारी के लिए बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी के छात्र नेता पर पहले भी इस तरह का आरोप लग चुका है। कॉन्ग्रेस पार्टी के छात्र विंग एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज़ ख़ान पर उन्हीं के पार्टी की एक महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया था।

इस आरोप के बाद जाँच के लिए एनएसयूआई की तरफ़ से तीन सदस्यों की टीम गठित की गई थी। महिला ने फ़िरोज पर यह आरोप लगाया था कि वो बार-बार होटल में आने और वहीं ठहरने के लिए दवाब बना रहे थे।     

संघ के दिनों में साथियों के लिए चाय और खाना बनाता था, बर्तन भी धोता था: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरूआती जीवन के कई पन्ने अभी भी अनछुए है। हाल ही में लोकप्रिय फ़ेसबुक पेज ‘ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे’ (Humans of Bombay) के साथ साझा किए एक इंटरव्‍यू में उन्होंने अपने जीवन यात्रा के विभिन्‍न पड़ावों और अनुभवों को साझा किया है। इस कड़ी में उन्‍होंने हिमालय से लौटने के बाद के अनुभवों को साझा किया है। पढ़िए पीएम मोदी की वो कहानी, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

हिमालय से वापस आने के बाद

उन्होंने साझा किया कि कैसे हिमालय के अनुभवों ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, ”हिमालय से वापस आने के बाद मुझे अपने बारे में यह यक़ीन हो गया था कि मैं अपना जीवन दूसरों की सेवा में लगाना चाहता हूँ। लिहाज़ा लौटने के कुछ समय के भीतर ही मैं अहमदाबाद के लिए रवाना हो गया। इस तरह पहली बार मैं एक बड़े शहर में रहने के लिए गया, जहाँ की जीवन की गति बिल्‍कुल अलग थी। वहाँ पर मैंने यदा-कदा अपने अंकल की कैंटीन में उनकी मदद करने से शुरुआत की।”

कैसे सीखी हिंदी

प्रधानमंत्री मोदी के हिंदी सीखने की कहानी भी रोचक है, उन्होंने अन्यत्र कहा था कि ‘जब वह छोटे थे तब उन्‍हें हिंदी आती ही नहीं थी। वह रोज पिता के साथ सुबह चाय की दुकान खोला करते थे। दुकान की साफ़-सफ़ाई की जिम्‍मेदारी उनके ऊपर थी। कुछ देर में ही लोगों का आना शुरू हो जाता था। पिता जब उन्‍हें चाय देने को बोलते तो वह लोगों की बात ध्यान से सुना करते थे। ऐसे ही धीरे-धीरे उन्‍हें हिंदी बोलना आ गया।’

मैं पूर्णकालिक प्रचारक बन गया

सेवा की शुरुआत संघ की पाठशाला से हुई, “अहमदाबाद में ही अंततः मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पूर्णकालिक प्रचारक बन गया। वहाँ मुझे जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से मिलने और बातचीत करने का अवसर मिला और इसके साथ विविध क्षेत्रों में काम करने का मौका मिला। वहाँ हम सब बारी-बारी से आरएसएस कार्यालय को साफ़ रखते थे। साथियों के लिए चाय और खाना बनाते थे और बर्तन भी धुलते थे।”

व्यस्त लेकिन स्पष्ट

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, “वह उस पड़ाव पर जीवन की कठोरताओं के बीच व्‍यस्‍त थे लेकिन इस बात के लिए भी स्‍पष्‍ट थे कि हिमालय से जो शांति का अनुभव लेकर लौटे हैं, उसको किसी भी सूरत में नहीं जाने देंगे। इस कारण जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए हर साल पाँच दिन एकांतवास में जाने का निश्‍चय किया।”

एकांतवास

ख़ुद की ख़ोज में एकांतवास के अनुभव का भी ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, ”कई लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि मैं दीवाली के मौके पर 5 दिनों के लिए एकांतवास पर चला जाता हूँ। ऐसे किसी जंगल में जहाँ केवल स्‍वच्‍छ जल के अतिरिक्‍त कोई आदमी नहीं होता था। मैं उन 5 दिनों के लिए खाने की पर्याप्‍त सामग्री पैक करके ले जाता था। वहाँ कोई रेडियो या अखबार नहीं होता था और उस दौरान कोई टीवी या इंटरनेट नहीं था।” इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि वह एकांतवास उनको जीवन को हैंडल करने की ताकत देता था। उन्‍होंने कहा, “लोग कहते थे कि आप किससे मिलने जाते हो? तो मैं कहता था कि मैं अपने आप से मिलने जाता हूँ।”

अभाव लेकिन संतोष

इससे पहले की कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया था, “मेरे परिवार के आठ लोग 40X12 के कमरे में रहते थे। यह छोटा सा घर था, पर हमारे परिवार के लिए पर्याप्‍त था। हमारे दिन की शुरुआत सुबह पाँच बजे हो जाती थी। मेरी माँ पढ़ी-लिखी नहीं थी पर भगवान की कृपा से उनके पास एक ख़ास तरह का ज्ञान था। वह नवजात शिशुओं की हर तकलीफ़ तुरंत समझ जाती थीं। माँ के उठने से पहले ही महिलाएँ अपने शिशुओं को लेकर घर के बाहर लाइन लगाए रहती थीं।”

युवाओं को सलाह

इसी कड़ी में पीएम मोदी ने ‘युवा दोस्‍तों’ को सलाह भी दी। उन्‍होंने कहा, ”अपने जीवन की तेज गति और व्‍यस्‍त कार्यक्रम के बीच कुछ समय अपने लिए निकालें। खुद के बारे में सोंचें और आत्‍ममंथन करें। इससे आपका दृष्टिकोण बदलेगा। आप अपनी अंतरात्‍मा को बेहतर तरीक़े से समझ पाएँगे।”