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लेबनान में ढेर हुआ आतंकी सरगना नसरल्लाह, गमजदा हो गईं जम्मू-कश्मीर की महबूबा, चुनाव प्रचार रोका: ईरान से बोले नेतन्याहू- कहीं भी पहुँच सकता है इजरायल

हिज्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद इज़रायल और ईरान के बीच तनाव और गहराता जा रहा है। इस घटना ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नसरल्लाह की मौत को एक बड़ी सफलता बताते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि इज़रायल कहीं भी पहुँच सकता है।

नेतन्याहू ने कहा, “यह इज़रायल की ताकत का सबूत है, और हमारे दुश्मनों को सावधान रहना चाहिए कि हम अपने दुश्मनों को जहाँ भी हो, निशाना बना सकते हैं। ईरान का कोई भी हिस्सा हमारी पहुँच से बाहर नहीं है।”

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने मुसलमानों से इज़रायल का विरोध करने की अपील की है। उन्होंने इस घटना को “जिहाद का आह्वान” बताते हुए कहा कि मुसलमानों को एकजुट होकर इज़रायल के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। इस बयान के बाद ईरान और उसके समर्थक गुटों में नाराजगी और रोष फैल गया है, और ईरान-इज़रायल संबंधों में तनाव तेजी से बढ़ा है। ईरान ने इस्लामिक सहयोग संगठन (IOC) की आपातकालीन बैठक भी बुलाने की बात कही है। यही नहीं, ईरान ने खुलकर कहा है कि वो हिज्बुल्लाह का पूरा समर्थन करता रहेगा। इस बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षित जगह ले जाया गया है।

पीडीपी की मुखिया ने चुनाव प्रचार रोका

इस तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। भारत में, खासकर जम्मू-कश्मीर में, इस्लामिक कट्टरपंथी झुकाव वाली पार्टियों में इस घटना को लेकर सहानुभूति और विरोध दोनों ही देखने को मिल रहे हैं। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने नसरल्लाह की मौत पर शोक जताते हुए अपना चुनाव प्रचार भी स्थगित कर दिया है। महबूबा ने कहा कि “यह समय शांति और संवेदना का है, न कि राजनीति का।” महबूबा मुफ्ती ने नरसल्लाह की मौत को बलिदान करार दिया है।

हालाँकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत सरकार की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं है। भारत ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन यह साफ है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारत के भीतर भी हो सकता है, खासकर धार्मिक और राजनीतिक मोर्चों पर। महबूबा मुफ्ती का चुनाव प्रचार स्थगित करना और कट्टरपंथी गुटों की प्रतिक्रियाएं इस बात का संकेत हैं कि यह मामला भारत के भीतर एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है।

बता दें कि भारत में इज़रायल और ईरान दोनों के साथ अच्छे कूटनीतिक संबंध रहे हैं। इज़रायल भारत का महत्वपूर्ण सैन्य और तकनीकी साझेदार है, जबकि ईरान भारत के लिए ऊर्जा और व्यापार के संदर्भ में एक अहम देश है। ऐसे में, भारत के लिए इन दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

10 साल की उम्र में गलती से भारत में घुसा फिर भी बना रहा ‘मुसलमान’, 22 साल बाद पाकिस्तान लौटा तो अपने भी कह रहे ‘काफिर’: सिराज मुहम्मद की कहानी फिल्मी है, पर सच्ची है

10 साल की उम्र में एक लड़का गलती से गलत ट्रेन पकड़कर भारत आ गया था। यहाँ आकर वो करीबन 22 साल रहा। यहाँ उसने शादी की, उसके बच्चे हुए, एक परिवार: बना। इसके बाद उसने सोची कि क्यों न सबको लेकर अपने ही मुल्क चला जाए। उसने लौटने का फैसला किया। लेकिन उस समय उसे ये नहीं पता था जिस जगह को वो अपना समझकर जा रहा है वहाँ उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा।

हम बात कर रहे हैं कि 38 साल के सिराज मुहम्मद खान की जिनकी कहानी हाल में पाकिस्तानी समाचार पोर्टल डॉन पर प्रकाशित हुई है। सिराज खान पिछले छह साल से खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत के बट्टाग्राम में एक किराए के कमरे में रहता है। उसकी बीवी और तीन बच्चे हैं। सिराज के पास पाकिस्तानी पहचान है लेकिन उसका परिवार भारतीय है।

सिराज बताते हैं कि उनका जन्म 1986 में मनसेहरा जिले के बाहपी इलाके कोंश घाटी के शरकूल गाँव में हुआ था। वह 1996 में 10 साल की उम्र में बस में सवार होकर लाहौर पहुँचे और बस टर्मिनल से रेलवे स्टेशन तक पैदल चलकर एक ट्रेन में चढ़ गए। उन्हें लगा कि वह ट्रेन उन्हें कराची लेकर जाएगी लेकिन वो ट्रेन समझौता एक्सप्रेस थी जिसमें चढ़ वह भारत पहुँच गए। छोटा बच्चा होने के नाते उस समय उन्हें इमीग्रेशन की सख्त प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना पड़ा।

वह भारत पहुँचे ये सोचकर कि वो कराची आ गए। धीरे-धीरे समझ आया कि ये कराची नहीं भारत है। वह घबराए, रास्ते में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन लोग अच्छे मिले तो मुश्किलें इतनी बड़ी नहीं लगीं। कहीं किसी ने उन्हें पैसे देकर दिल्ली से मुंबई जाने को कहा, तो किसी ने उन्हें अहमदाबाद के आश्रय स्थान तक पहुँचा दिया। उनकी पहचान के लिए उन्हें शिमला से कश्मीर तक ले जाया गया। उनके बताए पते पर चिट्ठियाँ भेजी गईं और भी बहुत कुछ हुआ।

सिराज ने भारत में रहकर छोटे-मोटे काम करते हुए अपना गुजारा शुरू किया। फिर तनख्वाह आने पर उन्होंने मुबंई के विजय नगर झुग्गी में कमरा किराए पर लिया। यहाँ उनकी मुलाकात साजिदा से हुई। दोनों ने 2005 में शादी की। पहले उन्हें एक बेटी हुई फिर 2010 में दो जुड़वा लड़के।

इस तरह सिराज ने भारत में अपना पूरा परिवार बनाया। उनके बच्चों के जन्म के साथ उन्होंने भारत में नागरिकता के लिए आवेदन किया। धीरे-धीरे उन्हें आधार, राशन और मतदाता कार्ड सब मिल गया। 2009 में उन्हें भारत की नागरिकता मिल गई।

सब ठीक था, मगर सिराज को ये लगने लगा कि जब उनका असली परिवार पाकिस्तान में है तो वो इस परिवार को उनसे दूर क्यों रखे। वह प्रवर्तन निदेशालय के पास गए। कहानी सुनाई और पाकिस्तान जाने की इच्छा रखी। शुरू में तो उन्हें कानून के तहत अवैध रूप से भारत आने पर पकड़कर जेल में रख दिया गया, लेकिन बाद में किसी तरह वो पाकिस्तान पहुँचे। सीमा पार करने के बाद उनसे पूछताछ हुई उन्हें उनके घर जाने की इजाजत मिली। बस में बैठ उन्होंने सोचा कि शायद कुछ ठीक हो, मगर ठीक होने की बजाए चीजें बिगड़ गईं।

दरअसल, करीबन 22 साल बाद सिराज घर लौटे तो उनके परिजन उन्हें देख खुश नहीं हुए। उलटा भाई ने तो ये कह दिया कि वो प्रॉपर्टी के लिए लौटे हैं। उन्हें उनके अम्मी-अब्बा संदेह की नजर से देखने लगे। उन्हें जासूस, हिंदू और काफिर कहा जाने लगा। उनकी हालत ऐसी कर दी गई कि उन्हें पाकिस्तान लौटने पर पछतावा होने लगा।

इसी बीच उनका परिवार उनसे मिलने वीजा लेकर पाकिस्तान आया। मगर साजिदा के साथ तो सिराज से भी बद्तर हुआ। साजिदा ने बताया कि वहाँ लोग साजिदा के रंग रूप को लेकर गंदी टिप्पणी करते थे। साजिदा ने दुखी होकर कहा कि लोग कहते रहते हैं कि भारत में मुसलमानों के लिए रहना मुश्किल है लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ कभी उन्होंने ऐसी नफरत नहीं झेली जैसी पाकिस्तान में झेली। उनके बच्चों को स्कूल में बहिष्कृत किया गया, हर बार मजाक उड़ाया गया। डर से पूरा परिवार एक कमरे में रह था क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके साथ इससे भी बुरा हो सकता है।

हालात इतने बुरे हो गए कि साजिदा को घर लौटना पड़ा। उन्होंने पाकिस्तान में अपने अनुभव को नरक जैसा बताया। बाद में बच्चों को देखते हुए उन्हें दोबारा सिराज के पास जाना पड़ा। अब उनका परिवार एक है लेकिन पाकिस्तान में उनके परिवार के वीजा एक्सटेंशन करवाने के लिए रिश्वत माँगी जा रही हैं। उन्हें कुछ नहीं समझ आ रहा कि वो क्या करें और कैसे उस परिवार के साथ रहें जिसे उन्होंने भारत में बनाया था।

कैंसर इलाज के लिए ‘मेडिकल वीजा’ पर भारत आया, उपचार की जगह देख रहा था क्रिकेट मैच: कानपुर में पिटाई का लगाया झूठा आरोप, बांग्लादेश भेजा गया टाइगर रोबी

कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में बांग्लादेश और भारत के बीच टेस्ट मैच के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया था, जिसमें बांग्लादेशी क्रिकेट फैन, रबी-उल-इस्लाम उर्फ़ टाइगर रोबी ने मारपीट का आरोप लगाया था। अब पता चला है कि वो मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था, उसे वीज़ा नियमों के उल्लंघन के आरोप में भारत से डिपोर्ट कर दिया गया। साथ ही, भारत सरकार ने उस पर 5 साल का वीजा प्रतिबंध भी लगा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइगर रोबी, जो मेटास्टेटिक कैंसर से पीड़ित था, मेडिकल उपचार के लिए भारत आया था। उसने कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज कराने का दावा किया था, परंतु वह देश में क्रिकेट मैच देखने के उद्देश्य से विभिन्न शहरों में घूमता रहा। उसने चेन्नई में बांग्लादेश क्रिकेट टीम का समर्थन किया और फिर कानपुर टेस्ट मैच के लिए वहां पहुंच गया। हालांकि, उसने अपने वीजा की शर्तों के तहत कोई भी मेडिकल टेस्ट नहीं कराया।

शुक्रवार (27 सितंबर 2024) को कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में रोबी बांग्लादेशी झंडे के साथ देखा गया। इस दौरान उसने भारत के कुछ प्रशंसकों पर मारपीट का आरोप भी लगाया, जिसे बाद में उसने खुद ही खारिज कर दिया। रोबी ने पहले दावा किया था कि उसे स्टेडियम के अंदर सुरक्षा कर्मियों द्वारा मारा-पीटा गया था। हालाँकि, जब उसे अस्पताल ले जाया गया और उसका इलाज किया गया। इसके बाद उसने अपना बयान बदल दिया और कहा कि उसकी तबीयत सिर्फ खराब थी और किसी ने उसे नहीं मारा।

वापस बांग्लादेश किया गया डिपोर्ट, 5 साल का बैन लगा

पुलिस द्वारा की गई जाँच में यह पाया गया कि टाइगर रोबी भारत में मेडिकल वीजा पर आया था, लेकिन उसने वीजा की शर्तों का दुरुपयोग किया। अधिकारियों ने बताया कि उसके पास भारत आने का असली मकसद इलाज करवाना था, लेकिन उसने इसका इस्तेमाल क्रिकेट मैच देखने के लिए किया। कानपुर पुलिस ने शनिवार को उसे दिल्ली की फ्लाइट में बैठाया, जहाँ से उसे ढाका भेजा गया।

पुलिस अधिकारी, एडीसीपी (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रोबी की हालत खराब हो गई थी, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उसकी तबीयत में सुधार हुआ, लेकिन उसकी सच्चाई जानने के बाद उसे देश छोड़ने के लिए बाध्य किया गया। भारत में वीजा नियमों का उल्लंघन करने के कारण टाइगर रोबी पर 5 साल का प्रतिबंध लगाया गया है। उसे अब आने वाले समय में भारत आने की अनुमति नहीं होगी।

अब केवल गुलाम कश्मीर (PoK) वापस लेना है: संयुक्त राष्ट्र से जयशंकर ने दुनिया को बताया मोदी सरकार का इरादा, कहा- अपने कर्मों का फल भोग रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGC) में कश्मीर का मसला उठाने के बाद भारत ने करारा दिया है। पहले तो संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि भाविका मंगलनंदन ने पाकिस्तान को उसको हैसियत याद दिलाई और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चेतावनी भी दे दी है। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के बीच सुलझाया जाने वाला मुद्दा केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को वापस लेना है।

अमेरिका के न्यूयॉर्क में 79वें UNGC को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, “हमने कल इसी मंच से कुछ विचित्र बातें सुनीं। मैं भारत की स्थिति को स्पष्ट कर दूँ कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की नीति कभी सफल नहीं होगी और उसे दंड से बचने की कोई उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। इसके विपरीत, कार्रवाई के निश्चित रूप से परिणाम होंगे।”

पूर्व विदेश सचिव रह चुके सुब्रमण्यम जयशंकर (एस जयशंकर) ने कश्मीर नीति और आतंकवाद को लेकर भारत का रूख स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारे बीच सुलझाया जाने वाला मुद्दा केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना और आतंकवाद के साथ पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे लगाव को त्यागना है।”

पाकिस्तान की अपनी धरती पर ‘आतंकवादियों को पनाह देने’ की नीति के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “कई देश अपने नियंत्रण से परे की परिस्थितियों के कारण पीछे छूट जाते हैं, लेकिन कुछ देश जानबूझकर ऐसे फैसले लेते हैं जिनके परिणाम विनाशकारी होते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। दुर्भाग्य से, उनके कुकृत्यों का असर दूसरों पर भी पड़ता है, खासकर पड़ोस पर।”

उन्होंने कहा, “जब राजनीति अपने लोगों में इस तरह की कट्टरता भरती है तो इसकी जीडीपी को सिर्फ कट्टरपंथ और आतंकवाद के निर्यात के रूप में मापा जा सकता है। आज हम देखते हैं कि दूसरों पर जो बुराइयाँ लाने की कोशिश की गई थी, वे उसके अपने समाज को निगल रही हैं। यह दुनिया को दोष नहीं दे सकते। यह केवल उनका कर्म है।”

पाकिस्तानी पीएम ने कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन की थी

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UNGC में बोलते हुए कश्मीर में भारत सरकार की कार्रवाई की आलोचना की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने जम्मू-कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से की है। शहबाज शरीफ ने कहा था, “फिलिस्तीन के लोगों की तरह जम्मू और कश्मीर के लोगों ने भी अपनी स्वतंत्रता और आत्म-निर्णय के अधिकार के लिए एक सदी तक संघर्ष किया है।”

शहबाज शरीफ ने यह आशंका जताई कि अगर पाकिस्तान किसी तरह का दुस्साहस करने की सोचता है तो भारत उसे छोड़ेगा नहीं है। भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के नेतृत्व ने ‘नियंत्रण रेखा पार करने की धमकी’ दी है। हालाँकि उन्होंने अपनी कमजोर छिपाते हुए कहा कि पाकिस्तान जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस भारत की ओर से जवाब देते हुए भारतीय राजनयिक भाविका मंगलनंदन ने कहा, “पाकिस्तान ने लंबे समय से अपने पड़ोसियों के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इसने हमारी संसद, हमारी वित्तीय राजधानी मुंबई, बाजारों और तीर्थस्थलों पर हमला किया है। यह सूची लंबी है। ऐसे देश के लिए कहीं भी हिंसा के बारे में बात करना सबसे बड़ा पाखंड है।”

आतंकवाद पर पाकिस्तान को लताड़ लगाते हुए भाविका मंगलनंदन ने कहा, “पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद के परिणाम उसे निश्चित रूप से भुगतने होंगे। यह हास्यास्पद है कि एक राष्ट्र जिसने 1971 में नरसंहार किया और जो आज भी अपने अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार करता है, वह असहिष्णुता और भय के बारे में बोलने की हिम्मत करता है।”

जातिगत आरक्षण: जरूरतमंदों को लाभ पहुँचाना उद्देश्य या फिर राजनीतिक हथियार? विभाजनकारी एजेंडे का शिकार बनने से बचना जरूरी

जब हमारे नेता जातिगत आरक्षण की बात करते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि हम उन्हें हिंदुत्व की सच्चाई याद दिलाई जाए। क्या ये नहीं सही है कि हमारी राजनीतिक व्यवस्था, जो अपने आप को भारतीय संस्कृति का रक्षक बताती है, वास्तव में वो जातिवाद को बढ़ावा दे रही है? इतिहास से छेड़छाड़ और पूर्वजों की उपाधियों को ध्वस्त करना केवल एक राजनीतिक खेल है।

हमारी सांस्कृतिक धरोहर में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ हमारे पूर्वजों ने समानता एवं सामाजिक न्याय के लिए लड़ाई लड़ी। आज जब हम जातिगत आरक्षण पर बहस करते हैं तो हमें यह समझना होगा कि असली शोषण कौन कर रहा है। असली शोषित कौन कौन है? ये सब कुछ स्पष्ट होना बेहद जरूरी है, ताकि आम जनता इसके पीछे की सच्चाई समझ सके।

आज देश में जिस जातिगत आरक्षण की बात हो रही है, उसे भी समझना आवश्यक होगा कि क्या यह हमारे समाज के कमजोर वर्गों से जुड़ा मसला है, जो केवल जातिगत पहचान के आधार पर विभाजित हो गए हैं या फिर यह उन नेताओं के हित से जुड़ा मामला है, जो अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बाँटने का काम कर रहे हैं?

यह सच है कि आरक्षण की आवश्यकता है, लेकिन क्या यह सही तरीके से लागू हो रहा है? क्या इसके जरिए हम वास्तव में उन लोगों की मदद कर रहे हैं, जिनके लिए इसे हम आवश्यक मानते हैं या फिर हम एक नई जातिगत विभाजन की नींव रख रहे हैं? हमें यह सोचना होगा कि क्या हम अपने पूर्वजों के मूल्यों को भूल रहे हैं?

हमें सोचना होगा कि कहीं हम अपनी पहचान को एक नए राजनीतिक एजेंडे का शिकार तो नहीं बन रहे हैं। इन बातों को ध्यान रखते हुए हमें चुप नहीं रहना चाहिए। अगर हम इतिहास को भूलेंगे और अपने पूर्वजों की छत्रियों को ध्वस्त होने देंगे तो हमारा समाज किस दिशा में बढ़ेगा? यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह मुद्दा हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे मूल्यों का मामला है।

इनके बिना हम कुछ भी नहीं है। इसलिए, साहस के साथ हमें यह प्रश्न उठाने चाहिए कि क्या यह समय नहीं है कि हम अपने नेताओं को उनकी ज़िम्मेदारियों का अहसास कराएँ? हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जातिगत आरक्षण की बहस केवल राजनीतिक हथियार न बने। जातिगत आरक्षण सकारात्मक बदलाव की ओर ले जाने वाला एक माध्यम बनना चाहिए।

समाज की भलाई के लिए हमें जागरूक रहना होगा और अपनी आवाज उठानी होगी। हिंदुत्व का असली मतलब एकता, समानता और सामाजिक न्याय है। क्या हम इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं या फिर जातिगत आरक्षण के बहाने केवल विभाजन का खेल खेलते रहेंगे? यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस रास्ते का चयन करते हैं।

राकेश बन सलमान ने हिंदू युवती को फँसाया, प्रेगनेंट होने पर 3 बार अबॉर्शन: मौलवी के साथ हलाला, दोस्त से संबंध बनवाने के भी आरोप, लखनऊ में केस दर्ज

लखनऊ में एक और लव जिहाद का मामला सामने आया है, जहाँ आरोपित सलमान ने राकेश बनकर एक हिंदू महिला को अपने प्रेम जाल में फंसाया। पीड़िता का आरोप है कि सलमान ने पहले अपना नाम राकेश बताया और खुद को हिंदू बताया ताकि वह महिला का विश्वास जीत सके। इस धोखे के बाद, पीड़िता को शादी के लिए मजबूर किया गया और उसे सलमान की सच्चाई का पता तब चला जब वह पहले ही उसके साथ निकाह कर चुकी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके का है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब वह सलमान से मिली, तो उसने अपना नाम राकेश बताया और खुद को हिंदू समुदाय का होने का दावा किया। उन्होंने एक-दूसरे से दोस्ती की और यह दोस्ती जल्द ही प्रेम में बदल गई। सलमान ने पीड़िता के साथ शादी का वादा किया और उसे अपने परिवार से भी मिलवाया। लेकिन यह सब कुछ एक बड़े छल का हिस्सा था, जिसका खुलासा तब हुआ जब पीड़िता को पता चला कि सलमान का असली नाम राकेश नहीं, बल्कि सलमान है और वह मुस्लिम है।

पीड़िता के अनुसार, सलमान ने तीन बार उसका गर्भपात कराया और हर बार उसे यह यकीन दिलाया कि वे जल्द ही शादी करेंगे। एक बार जब वह सलमान के असली धर्म और पहचान के बारे में जान गई, तब भी वह खुद को इस रिश्ते से अलग नहीं कर पाई। सलमान ने पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने निकाह के बाद तलाक भी दिया और मौलाना से हलाला भी कराया।

पीड़िता का दावा है कि सलमान ने न केवल उसकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि उसे अपने दोस्त आसिम खान के साथ भी जबरदस्ती संबंध बनाने पर मजबूर किया। आसिम खान विधानसभा में काम करता है और समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात है। आसिम खान ने भी महिला के साथ बलात्कार किया और सलमान ने इस स्थिति में भी उसका समर्थन किया।

पीड़िता लखनऊ के खुर्रम नगर की रहने वाली है और उसकी उम्र लगभग 25 वर्ष हो चुकी है। वो नाबालिग थी, तब से सलमान उसके साथ संबंध बना रहा है। अभी उसके तीन बच्चे हैं, लेकिन सलमान ने बच्चों को छीन लिया है और उसे घर से भगा दिया है। सलमान उसे बच्चों से मिलने नहीं देता और धमकी देता है कि अगर उसने मुस्लिम धर्म नहीं अपनाया, तो वह बच्चों को नेपाल में बेच देगा।

पीड़िता ने अब इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। उसने सलमान और उसके दोस्त आसिम खान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी है और सलमान व आसिम के खिलाफ मामले दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस अधिकारी इस बात की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं, या फिर इस तरह के और भी मामले सामने आ सकते हैं।

जॉइंट कमिश्नर अमित वर्मा ने कहा कि पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और सलमान और आसिम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला बेहद संवेदनशील है और इस पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। लखनऊ पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कदम उठाए हैं और आगे की जाँच की जा रही है।

पहले कार में मारी मोटरसाइकल से टक्कर, फिर निहंगों ने तलवार से हमला किया: मोहाली थाने में शिकायत दर्ज, पीड़ित के हाथ में आई गंभीर चोट

पंजाब के मोहाली में बुधवार (25 सितंबर 2024) को निहंग के वेषभूषा पहने दो बाइक सवारों ने एक कार चालक पर तलवार से हमला कर दिया था। अब इस मामले में शिकायत दर्ज हुई है। पीड़ित ने मोहाली पुलिस को बताया कि बाइक सवारों ने इस हमले में न केवल उनकी कार को क्षतिग्रस्त किया बल्कि उन्हें भी गंभीर रूप से चोटिल कर किया

पीड़ित की पहचान 53 साल के हरप्रीत सिंह के तौर पर हुई है। इस घटना में उनके हाथ में गंभीर चोटे आई हैं। अस्पताल में इलाज के बाद उन्होंने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया, बुधवार रात करीब 9.15 बजे चावला अस्पताल के पास ट्रैफिक लाइट पर बाइक सवार दो लोगों ने उनकी कार में टक्कर मार दी। इसके बाद उन लोगों में बहस हुई और बाइक सवारों ने तलवारों से उनकी कार पर हमला कर दिया, जिससे कार का पिछला शीशा टूट गया।

स्थिति देखते हुए हरप्रीत ने वहाँ से अपनी कार भगाकर अपने घर जाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने बाइक से पीछा करते हुए उन्हें फिर से रोका और उनकी कार की विंडशील्ड और ड्राइवर की तरफ की खिड़की पर तलवारों से हमला किया। हमले में उनके हाथ में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित के अनुसार, उनकी जान सड़क पर आते जाते लोगों के कारण बची। वहीं हमलावर मौके से भाग गए।

पुलिस ने इस मामले को मटौर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास), 118 (1) (चोट पहुँचाना), 324 (4) (शरारत), 126 (2) (गलत तरीके से रोकना) और 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत दर्ज किया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच कर रही है।

बता दें कि पंजाब में निहंग सिखों द्वारा तलवार से हमलों की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। अगस्त 2024 में निगंहों ने शमी नारंग नाम एक व्यक्ति के दुकान में घुसकर उसका हाथ काट दिया था, जिसमें उसकी जान चली गई थी। शम्मी के बेटे करण पर भी निहंगों ने तलवार से वार कर दिया और उसकी कलाई भी काट दी। शम्मी के भाई पर भी निहंगों ने हमला किया। इसमें वह भी घायल हो गए। उससे पहले ऐसा ही एक मामला लुधियाना से सामने आया था, जहाँ शिवसेना नेता संदीप थापर पर हमला कर दिया गया था। वो हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। संदीप थापर महान क्रांतिकारी सुखदेव के वंशज हैं।

इजरायल की ताबड़तोड़ कार्रवाई से डरा ईरान! सेफ हाउस भेजे गए सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई: हिज्बुल्लाह चीफ से पहले हमास प्रमुख का भी ऐसे ही किया था खात्मा

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत के बाद सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। इजरायल के हवाई हमले में नसरल्लाह के मारे जाने की खबर के बाद, क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ईरान हिज्बुल्लाह और अन्य सहयोगियों के साथ निकट संपर्क में है और इजरायल के खिलाफ रणनीति तैयार कर रहा है।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इजरायल की क्रूरता की निंदा करते हुए कहा कि वह(ईरान) लेबनान के साथ खड़ा है। ईरान ने मुस्लिम देशों को इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। फिलहाल उन्हें सुरक्षित जगह पर भेजा जा चुका है। बता दें कि इजरायल ने ईरान की राजधानी में अपने सबसे बड़े दुश्मनों से एक हमास के चीफ इस्माइल हानिया को ढेर कर दिया था। ऐसे में ईरान को डर है कि कहीं इजरायल वैसा ही कदम न उठा ले। इस बीच, इजरायल में भी हाई अलर्ट जारी किया जा चुका है।

हिज्बुल्लाह प्रमुख की मौत के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इजरायल के बढ़ते हमले और हिज्बुल्लाह के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है। मिकाती ने कहा कि यह बैठक लेबनान की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।

ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच संपर्क और भी गहरा हो गया है। ईरान ने हिज्बुल्लाह को सैन्य और रणनीतिक समर्थन देने की पुष्टि की है और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने वाली इजरायली गतिविधियों की आलोचना की है। नसरल्लाह की मौत के बाद, ईरान ने मुस्लिम देशों की बैठक (ओआईसी) बुलाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि इस क्षेत्रीय संकट का हल निकाला जा सके।

इजरायल ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ लगातार हवाई हमले किए हैं, जिससे लेबनान की राजधानी बेरूत में व्यापक विनाश हुआ है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने हिज्बुल्लाह के केंद्रीय ठिकाने पर हमला कर नसरल्लाह को खत्म कर दिया है, हालाँकि हिज्बुल्लाह ने अभी तक इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है। इजरायल की इन कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लेबनान ने ईरानी विमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद ईरान से आ रहे एक विमान को वापस लौटना पड़ा।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस संघर्ष को ‘आवश्यक’ बताते हुए कहा कि हिज्बुल्लाह और उसके समर्थकों से निपटना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और हिज्बुल्लाह के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। वहीं, इजरायल ने नसरल्लाह को मारने के बाद हाई अलर्ट जारी किया है।

हिज्बुल्लाह और ईरान के ऐतिहासिक संबंध

ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच लंबे समय से गहरे राजनीतिक और सैन्य संबंध हैं। नसरल्लाह की मौत के बाद, ईरान के नेता खामेनेई ने हिज्बुल्लाह को अपने समर्थन का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने गाजा युद्ध से कोई सबक नहीं सीखा और यह मूर्खतापूर्ण रणनीति उसे ही नुकसान पहुँचाएगी। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह लेबनान के साथ मजबूती से खड़ा है और इजरायल की क्रूरता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करेगा।

ईरान ने इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की आपात बैठक की माँग की है, ताकि मुस्लिम देशों के बीच एकजुटता बढ़ाई जा सके और इजरायल के खिलाफ सामूहिक रुख अपनाया जा सके। ईरान का यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकता है।

नसरल्लाह की मौत के बाद, हिज्बुल्लाह के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान और हिज्बुल्लाह के सहयोगियों के बीच इस पर विचार किया जा रहा है कि अब अगला कदम क्या होगा। इजरायल के खिलाफ किसी बड़े जवाबी हमले की आशंका बनी हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में और ज्यादा हिंसा फैल सकती है।

किराएदारों पर रखें खास ध्यान, ड्रोन-हॉट बलून हवा में न उड़ाएँ… नवरात्रि से पहले मुंबई में हाई अलर्ट, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात

महाराष्ट्र के मुंबई में आतंकी हमले का खतरा देखते हुए शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियों को अपने खुफिया सूत्रों से मिले इनपुट के आधार पर सिक्योरिटी टाइट की है। पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात है और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर खासी नजर रखी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक आने वाले त्योहारों को देखते हुए धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई गई हैं। दूसरी ओर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

लोगों से अपील की गई है कि अगर उन्हें कोई भी संदिग्ध वस्तु कहीं भी दिखाई दे तो वो उसकी सूचना बिन देरी किए पुलिस को दें। जगह-जगह आतंकवाद निरोधक बल को भी सक्रिय कर दिया गया है। साथ ही पुलिस जवानों की मॉक ड्रिल भी करवाई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि उन्हें भीड़भाड़ वाले स्थानों और धार्मिक स्थलों पर मॉकड्रिल करने के निर्देश मिले हैं इसलिए शहर के सभी डीसीपी अपने जोन में विशेष ध्यान दे रहे हैं।

बता दें कि आने वाले कुछ दिनों में जगह-जगह नवरात्रि का उत्सव मनाया जाएगा। इस क्रम में पंडाल भी लगेंगे और भीड़ भी उमड़ेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ अराजक तत्व लोगों में छिपकर अपने मंसूबों को अंजाम दे सकते हैं।

यह भी आशंका है कि आतंकी आम लोगों के भेष में किराएदार बनकर रह रहे हो इसलिए मकान मालिकों, होटल मालिकों, टूरिस्ट गेस्ट हाउस को आगाह किया गया है। अगर उन्हें किराएदारों की कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे तो वो उसकी सूचना फौरन पुलिस को दें।

इसके साथ किसी को भी अपने यहाँ जगह देने से पहले उनका नाम, देश , पासपोर्ट डिटेल, वीजा डिटेल की अच्छी से जाँच कर लें। इसके अलावा मुंबई पुलिस ने इस बीच कुछ उपकरणों के प्रयोग पर भी रोक लगा दी है। जैसे ड्रोन, कैमरा, रिमोट कंट्रोल, माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट, पैरा ग्लाइडर्स, मोटर्स, हैंड ग्लाइडर्स,ह़ॉट एयर बलून जैसी तमाम चीजें शामिल हैं।

मोदी पाताल से खोज लाएगा…भारत घर में घुसकर मारेगा: जम्मू में गरजे प्रधानमंत्री, आतंकियों को याद दिलाया- आज की ही रात हुई थी सर्जिकल स्ट्राइक की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान की प्रचार के लिए शनिवार (28 सितंबर) को जम्मू में रैली की। प्रधानमंत्री ने कहा कि एमए स्टेडियम में विजय संकल्प महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2016 में आज ही की रात सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी। उस दिन दुनिया को बता दिया गया था कि ये नया भारत है, जो घर में घुसकर मारता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वो दौर याद कीजिए, जब सीमा पार से आए दिन गोले बरसते रहते थे। उधर से गोलियाँ चलती थीं और इधर से कॉन्ग्रेस वाले सफेद झंडा दिखाते थे। जब भाजपा सरकार ने गोली का जवाब गोले से दिया तो उधर वालों (पाकिस्तान) के होश ठिकाने आ गए। अब आतंक के आकाओं को पता है अगर कुछ भी हिमाकत की तो मोदी पाताल से भी उन्हें खोज निकालेगा।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कॉन्ग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों पर सवाल उठाया। जम्मू में आयोजित इस महारैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस वही पार्टी है, जिसने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कॉन्ग्रेस आज भी पाकिस्तान की भाषा बोलती है।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस के साथ-साथ फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और महबूबा मुफ्ती की PDP पर भी सवाल उठाते हुए इन्हें संविधान का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। पीएम मोदी ने कहा, “आज कॉन्ग्रेस पूरी तरह से अर्बन नक्सलियों के कब्जे में है। जब विदेशों से घुसपैठिए यहाँ आते हैं तो कॉन्ग्रेस को अच्छा लगता है। वो उन्हें अपना वोट बैंक मानती है।”

PM ने कहा, “कॉन्ग्रेस उन घुसपैठियों का स्वागत करती दिखती है, जबकि अपने ही लोगों के दर्द का मजाक उड़ाती है। कॉन्ग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP ने बाबा साहब अंबेडकर के संविधान की आत्मा का गला घोंटा है। कई-कई पीढ़ियों से रह रहे अनेक परिवारों को वोट देने तक का हक नहीं था। भाजपा ने लोगों को वोट का अधिकार दिया।”

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आ रहे बदलावों से कॉन्ग्रेस, NC और PDP वाले भड़के हुए हैं। इन्हें आपका विकास पसंद नहीं है। ये लोग कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनी तो फिर वो पुराना सिस्टम लाएँगे। पीएम ने कहा कि ये लोग फिर से भेदभाव वाला निजाम लाएँगे, जिसका सबसे बड़ा शिकार जम्मू रहा है। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों ने जम्मू के साथ हमेशा अन्याय किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोग कॉन्ग्रेस, NC और PDP के तीन खानदानों से त्रस्त हैं। लोग फिर वही निजाम नहीं चाहते, जिसमें भ्रष्टाचार हो… नौकरियों में भेदभाव हो। जम्मू-कश्मीर के लोग अब आतंक, अलगाव और खून-खराबा नहीं चाहते हैं। यहाँ के लोग अमन-शांति और अपने बच्चों का बेहतर भविष्य चाहते हैं। इसलिए जम्मू-कश्मीर के लोग भाजपा सरकार चाहते हैं।”