Home Blog Page 639

दिल्ली में क्यों लगी 163, कालकाजी मंदिर के पुजारी को क्यों जाना पड़ा सुप्रीम कोर्ट: BNSS की उस धारा के बारे में जानिए सब कुछ जो रामलीला में बन रहा था अड़ंगा

दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पुजारी ने सुप्रीम कोर्ट में रामलीला आयोजन में लगने वाले अड़ंगे को लेकर याचिका डाली है। पुजारी ने कहा है कि उनके इलाके में लोगों के इकट्ठा होने पर दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत रोक लगाई है, इसके कारण रामलीला का आयोजन नहीं हो पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में केंद्र सरकार ने बताया है कि उसने यह आदेश वापस ले लिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मानस नमन सेवा समिति के सचिव और कालकाजी मंदिर के पुजारी सुनील ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के समक्ष डाली है। पुजारी सुनील ने कहा है कि उनकी समिति दिल्ली के चिराग इलाके में प्रति वर्ष रामलीला का आयोजन करती है।

उन्होंने कहा है कि इस बार दिल्ली पुलिस ने 30 सितम्बर, 2023 से लेकर 5 अक्टूबर तक दिल्ली के भीतर धरना प्रदर्शन समेत ऐसे सभी आयोजनों पर रोक लगाई है। इसी के अंतर्गत 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इसी कारण रामलीला आयोजित करने में भी समस्या आने वाली है।

याचिका में कहा गया कि दशहरा और नवरात्रि आने वाले हैं और दिल्ली पुलिस की रोक ऐसे त्योहारों और धार्मिक समारोहों पर बंधन लगाएगी। याचिका में माँग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में दिल्ली पुलिस के आदेश पर अपना निर्णय सुनाए।

याचिकाकर्ता ने कहा कि दिल्ली पुलिस का आदेश दिल्लीवासियों के मन में डर भर रहा है। यह भी कहा गया कि इससे दिल्ली में रहने वाले लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं को लेकर चिंतित हैं। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि वह जिम्मेदारी से बच रही है।

इस मामले में गुरुवार (5 अक्टूबर, 2024) को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली पुलिस उसके अंतर्गत आती है और उसने यह आदेश वापस ले लिया है। कोर्ट को इस विषय में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जानकारी दी है।

गौरतलब है कि 30 सितम्बर, 2024 को दिल्ली पुलिस ने एक आदेश पारित करते हुए राजधानी के नई दिल्ली, उत्तर और मध्य जिले के भीतर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी थी। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि वक्फ बिल, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव और बाकी स्थितियों के कारण दिल्ली का माहौल संवेदनशील है।

क्या है BNSS की धारा 163?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धरा 163 के तहत जिला मजिस्ट्रेट या फिर राज्य सरकार आगामी खतरे को भाँपते हुए सामान्य गतिविधियों पर रोक लगा सकती है। इसके अंतर्गत लोगों को एक जगह इकट्ठा होने, उनके धरना प्रदर्शन में भाग लेने या ऐसी अन्य गतिविधि से रोका जा सकता है। यदि कोई इस व्यवस्था का उल्लंघन करता है तो पुलिस उस पर कार्रवाई कर सकती है। पुरानी व्यवस्था में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत यह धारा 144 कही जाती थी। नई व्यवस्था के तहत यह BNSS की धारा 163 बनाई गई है।

प्यार का दिखावा, धोखे से शादी, फिर धर्मांतरण… मुस्लिम करते हैं हिंदू महिलाओं को टारगेट: लव जिहाद का पूरा गेम अदालत ने समझाया, विस्तार से पढ़िए आदेश

बीते दिनों बरेली में लव जिहाद के एक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का जो फैसला आया वो अब हर जगह चर्चा में है। कोर्ट ने ‘आनंद’ बनकर हिंदू महिला के साथ रेप और उसे गर्भवती करने वाले मोहम्मद आलिम को सजा सुनाते हुए देश में चल रहे धर्मांतरण के खेल से लेकर विदेशी साजिश तक पर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की।

कोर्ट ने माना कि केस की सुनवाई और सारे गवाहों की दलील के बाद साफ है कि मोहम्मद आलिम का प्रकरण लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण का मामला है। इसके बाद कोर्ट के आदेश में लव जिहाद की परिभाषा बताते हुए कहा गया–

-लव जिहाद में मुस्लिम पुरूष हिंदू महिलाओं को निशाना बनाते हैं। वो पहले उनसे प्यार का दिखावा करते हैं, उनसे धोखे से शादी करते हैं, फिर धर्मांतरण का दबाव बनाते हैं… जैसा कि मोहम्मद आलिम ने किया।

-कोर्ट ने कहा- लव जिहाद का उद्देश्य हिंदुस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश है जिसमें एक मजहब के अराजक तत्व जनसांख्यिकी युद्ध के जरिए वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं।

-आसान शब्दों में कहें तो लव जिहाद मुस्लिम पुरुषों पर गैर मुस्लिम समुदायों से जुड़ी महिलाओं को इस्लाम धर्म में परिवर्तित करना है। इस दौरान प्रेम का ढोंग करके उन्हें फँसाया जाता हैं।

-अदालत ने कहा कि लव जिहाद के लिए बड़ी मात्रा में पैसा चाहिए होता है इसलिए लव जिहाद में विदेशी फंडिंग से इंकार भी नहीं हो सकता।

-कोर्ट ने कहा जबरदस्ती, लालच देकर या झूठ बोलकर धर्मांतरण कराने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता। चाहे किसी भी धर्म का व्यक्ति हो, उसे अवैध-धर्मांतरण का अधिकार प्राप्त नहीं है।

-यदि बलपूर्वक, झूठ बोलकर, धोखाधड़ी करके या जबरदस्ती या लालच देकर किसी को अवैध रूप से धर्मांतरित करवाया जाता है, तो निश्चित रूप से उत्तर-प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए, चाहे वह व्यक्ति कोई भी क्यों न हो।

-लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण किसी अन्य बड़े उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कराया जाता है। यदि समय रहते भारत सरकार के द्वारा लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देश को भुगतने होंगे।

–भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने के लिए हिंदू लड़कियों को प्रेम में फँसाकर उनका अवैध धर्मांतरण करने का अपराध एक विरोधी गिरोह द्वारा बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है।

-कोर्ट के आदेश में कहा गया कि गैर मुस्लिमों के कमजोर वर्ग के लोगों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा ओबीसी आदि समुदाय के लोगों, महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाया जाता है। उनका ब्रेन वॉश करके तथा उनके धर्म की बुराई करके, देवी-देवताओं के संबंध में अपमानजनक टिप्पणी करके तथा मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर व विभिन्न प्रकार के लालच जैसे विवाह, नौकरी आदि का प्रलोभन देकर उनका अवैध धर्मान्तरण कराया जा रहा है।

-कोर्ट ने कहा कि अवैध धर्मांतरण के प्रकरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। अवैध धर्मांतरण देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता के लिए खतरा है। भारत का संविधान भले ही सभी लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार एवं संरक्षण देता है लेकिन अगर इसकी आड़ में दूसरे धर्मों के अस्तित्व को लालच देकर, असमायक दबाव या अन्य माध्यमों का प्रयोग करके दुष्प्रभावित किया जाएगा तो निश्तिक रूप से अन्य सभी धर्मों के संरक्षण का हनन होगा।

₹5600 करोड़ की कोकीन तस्करी का सरगना तुषार गोयल 2003 से कॉन्ग्रेस सदस्य, RTI सेल का रह चुका है चेयरमैन: रिपोर्ट में दावा- पहले करवाता था देह व्यापार

दिल्ली पुलिस ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी में 5600 करोड़ रुपए की कोकीन की एक बड़ी खेप को पकड़ा है। इस ड्रग सिंडिकेट का सरगना तुषार गोयल है। तुषार गोयल कॉन्ग्रेस का नेता है और वह साल 2022 में दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस की RTI सेल का चेयरमैन रह चुका है। उसने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर इसका जिक्र किया है।

सरगना तुषार गोयल के कई कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ फोटो भी सामने आए हैं। इस बात का खुलासा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की पूछताछ में हुआ है। खुद तुषार गोयल ने स्पेशल सेल की पूछताछ में इसका खुलासा किया है कि वह 2022 में कॉन्ग्रेस दिल्ली का RTI सेल प्रमुख था। उसने बताया कि वह साल 2002 में यूथ कॉन्ग्रेस का सदस्य बना था।

पुलिस तुषार गोयल के बैकग्राउंड को खंगाल रही है। कहा जा रहा है कि 40 वर्षीय तुषार गोयल ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। वह दिल्ली के वसंत विहार में रहता है। उसके पिता दिल्ली में तुषार पब्लिकेशन और ट्यूलिप पब्लिकेशन के मालिक हैं। तुषार ने साल 2008 में शादी की और उसके बाद देह व्यापार का काम शुरू कर दिया और सेक्स रैकेट चलाने लगा।

इसी दौरान तुषार गोयल की मुलाकात दुबई के एक गिरोह से हुई। तभी से वह देह व्यापार के साथ-साथ ड्रग्स के धंधे में जुड़ गया और ड्रग्स की तस्करी करने लगा। दिल्ली पुलिस को अगस्त में इसकी भनक लगी थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस पिछले दो महीने से उस पर और उसके गिरोह पर नजर रख रही है। आखिरकार उसे दबोच लिया गया। 

तुषार गोयल द्वारा डाला गया RTI (साभार: आजतक)

तुषार गोयल का साथी हिमांशु पहले बाउंसर था। वहीं, तुषार का ड्राइवर औरंगजेब सिद्दीकी उत्तर प्रदेश के देवरिया का रहने वाला है। चौथा आरोपित भरत जैन ही मुंबई से 15 किलोग्राम कोकीन दिल्ली लाया था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से पहले 15 किलोग्राम कोकिन बरामद की थी। इसके बाद उनकी निशानदेही पर महिपालपुर के गोदाम में छापा मारकर बाकी की ड्रग्स जब्त की गई।

दरअसल, दिल्ली के महिपालपुर में 550 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तुषार गोयल, भरत कुमार जैन, औरंगजेब सिद्दीकी और हिमांशु कुमार शामिल है। लगभग 5600 करोड़ रुपए की कोकीन के तार दुबई से जुड़े हैं। सप्लायर के तौर पर दुबई के एक बड़े कारोबारी का नाम सामने आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग्स मुंबई के बंदरगाह तक पहुँचा और वहाँ से इसे दिल्ली लाया गया था। इसे महिपालपुर के गोदाम में रखा गया था। कोकीन के साथ-साथ वहाँ से 40 किलोग्राम गाँजा भी बरामद किया गया है। कहा जा रहा है कि इन ड्रग्स से 50 लाख डोज बनाई जा सकती हैं। इस खेप को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड पहुँचाया जाना था।

जनाना गेट से घुसे, बाथरूम में लोड किए हथियार, फिर बाहर निकल 7 लोगों की कर दी हत्या: कौन कहते हैं मस्जिद से नहीं आते आतंकी, क्या इजरायल करेगा ‘समतल’?

इजरायल के जाफा में बुधवार (2 अक्टूबर, 2024) को हुए आतंकी हमले में एक मस्जिद का इस्तेमाल इस्लामी आतंकियों ने किया। यह खुलासा हमले की जाँच के बाद हुआ है। हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी, इनमें से 6 लोगों की पहचान भी सामने आई है। हमले में जिस मस्जिद का इस्तेमाल हुआ, उसे गिराने की बात इजरायल के सुरक्षा मंत्री ने की है। वहीं इजरायल की नेत्री ने कहा है कि ने मस्जिद गिराए जाने से इजरायल में रहने वाले अरबियों में खौफ भरेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला करने वाले दोनों आतंकियों का नाम मुहम्मद मसक और अहमद हिमौनी था। यह दोनों फिलिस्तीनी थे और वेस्ट बैंक के रहने वाले थे। यह दोनों आतंकी हमास से जुड़े हुए थे। दोनों इजरायल में बिना किसी परमिट के घुसे थे और उन्होंने इसके बाद एक मेट्रो स्टेशन पर हमला किया।

इसी हमले की जाँच में सामने आया है कि यह दोनों आतंकी हमला करने से पहले जाफा की एक अल नुझा मस्जिद में घुसे थे। यह आतंकी महिलाओं वाले गेट से घुसे थे। यहाँ दोनों ने बाथरूम के भीतर अपने हथियार रखे थे। उन्होंने यहाँ मौजूद लोगों को धमकाया और कहा कि जो भी मस्जिद छोड़ के गया उसको भी मार दिया जाएगा। इसके बाद दोनों इस मस्जिद से बाहर निकले और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे।

मस्जिद का आतंकी हमले में इस्तेमाल होने का खुलासा तब हुआ जब यहाँ इजरायल के सुरक्षा मंत्री बेन ग्वीर पहुँचे। उन्होंने कहा कि अगर यह बात सामने आई है कि आतंकियों ने मस्जिद का इस्तेमाल किया तो इसे तुरंत ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह बयान मस्जिद के बाहर ही दिया।

इजरायल की एक नेता मेराव बेन अरी ने कहा कि मंत्री के इस बयान के कारण यहाँ रहने वाले अरबियों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है। हालाँकि, मंत्री ने मेराव बेन अरी पर नस्लभेदी राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें यह कहीं और करनी चाहिए।

मस्जिद के सहारे हमला करने वाले दोनों इस्लामी आतंकियों को सुरक्षाबलों ने बुधवार को ही मार गिराया था। इस हमले के पीड़ितों में 4 महिलाएँ। मारे गए लोगों में एक ग्रीक नागरिक भी था। यह हमला उस दौरान हुआ जब ईरान भी इजरायल के ऊपर मिसाइलों से हमला कर रहा था।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2024 से ही चालू इजरायल-हमास का संघर्ष अब और गहरा हो गया है। हाल ही में इजरायल ने ईरान समर्थित इस्लामी आतंकी समूह हिजबुल्लाह के प्रमुख नसरुल्लाह को मार गिराया था। इसके बाद ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं। हालाँकि, इन हमलों में कोई बड़ा नुकसान होने की सूचना नहीं है।

12 दिन के भीतर नासिर ने 2 बार बरेली को दहलाया, इस बार 2 बच्चों समेत 5 की गई जान: अवैध तरीके से बनाए जा रहे पटाखों में ब्लास्ट से कई घर जमींदोज

उत्तर प्रदेश के बरेली में अवैध पटाखा फैक्टरी में बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को जोरदार धमाका होने से पाँच घर जमींदोज हो गए। मलबे में दबने और झुलसने से महिला और उसके दो बेटों समेत पाँच की मौत हो गई है। इनमें से एक महिला की पहचान नहीं हो सकी है। हादसे में पाँच लोग घायल भी हुए हैं। वहीं, एक व्यक्ति लापता है। माना जा रहा है कि वह मलबे में दबा हो सकता है।

यह घटना बरेली के सिरौली थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गाँव की है। यहाँ आबादी के बीच एक अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही थी। सिरौली के मोहल्ला कौवा टोला निवासी दो भाई नाजिम और नासिर शाह कल्याणपुर के रहमान शाह के घर में बगैर लाइसेंस के पटाखा फैक्टरी चलवा रहे थे। घटना के बाद स्थानीय बचाव दलों के साथ राज्य आपदा बचाव दल (एसडीआरएफ) बचाव कार्य में जुटा रहा।

बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक, इस फैक्ट्री में पटाखे बनाने के साथ ही यहाँ उनका भंडारण किया जाता था। जिस रहमान शाह के घर में यह पटाखा फैक्ट्री चल रही थी, उसका नाजिम दामाद है। बुधवार की शाम चार बजे हुई इस घटना से रहमान समेत उसके पड़ोसी मोहम्मद अहमद उर्फ पप्पू शाह, इसरार, रुखसार व बाबू शाह के घर भरभरा कर गिर गए हैं।

मकान के मलबे में दबने से रहमान की 44 वर्षीय बहू तबस्सुम और पड़ोसी रुखसार की 28 वर्षीय बीवी रुखसाना की मौत हो गई। इस बीच तबस्सुम के दो बेटे हसन (4) व शहजान (5) कहीं नजर नहीं आए तो मलबे को हटाया गया। मलबे में दोनों बच्चों की लाशें मिलीं। मलबे से एक अज्ञात महिला का भी शव मिला है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि यह अज्ञात महिला कौन है।

रहमान के दामाद नाजिम का अभी भी पता नहीं चल सका है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, मलबों को हटाने का काम जारी है। धमाका इतना जोरदार था कि पाँच मकान जमींदोज होने के अलावा आसपास के कई घरों और धर्मस्थलों में दरारें आ गई हैं। कई घरों की खिड़कियों में लगे शीशे टूटकर बिखर गए। 

एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार, 27 सितंबर 2024 से जिले में विस्फोटक लाइसेंस धारकों का सत्यापन अभियान शुरू किया गया है। इस सूची में लाइसेंस धारक नासिर शाह का भी नाम था। आरोपितों ने विस्फोटक सामग्री ससुराल में छिपा दी थी। इस मामले में एसएसपी अनुराग आर्य ने दारोगा देशराज सिंह व नाहर सिंह, सिपाही अजय व सुरेंद्र को निलंबित कर दिया है। 

कहा जा रहा है कि बुधवार की शाम को रहमान शाह ने चाय बनाने को कहा तो फातिमा प्रथम तल पर रसोई में गई। वहाँ अचानक सिलेंडर फट गया। लपटें जैसे ही तीसरी मंजिल के कमरे में रखे पटाखों एवं बारूद तक पहुँचीं, तेज धमाके होने लगे। देखते ही देखते आसपास के मकान भरभराकर गिर गए। लोगों का कहना है कि धमाके के दौरान ईंटें 70 फीट तक उछल रही थीं।

सिरौली के नासिर के पास आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस था, मगर वह आबादी के बीच मकान में ही यह काम करने लगा। 21 सितंबर को उसकी छत पर पटाखों के ढेर में आग लग गई थी। उस मामले में FIR दर्ज करके उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। उसके बाद वह भाई की ससुराल में आकर पटाखे बनाने लगा। पिछले 10 दिनों में दूसरी घटना की जाँच कराई जा रही। हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है।

बातें सूफीवाद की, काम भारत में घुसपैठियों को बसाना: पाकिस्तान के ‘सिद्दीकी परिवार’ को ‘शर्मा जी’ की पहचान देने के पीछे मेहदी फाउंडेशन, इसके बारे में जानिए सब कुछ

बीते दिनों बेंगलुरु से पाकिस्तान के राशिद अली सिद्दीकी का परिवार गिरफ्तार हुआ था। छानबीन में पता चला था कि राशिद का परिवार फर्जी हिंदू नाम के साथ भारत में रह रहा था और उन्हें 10 साल पहले यहाँ भारत में लाने के पीछे एक ‘सूफी’ मेहदी फाउंडेशन का हाथ था। इसी संस्था ने उनके लिए फर्जी डॉक्यूमेंट, फर्जी पहचान पत्र आदि की व्यवस्था की थी। इतना ही नहीं, यही संस्था राशिद अली सिद्दीकी के परिवार के रहने-खाने का खर्चा भी उठाती थी। बदले में राशिद आलरा टीवी पर आकर संस्था के विचार को प्रमोट करते थे।

हमने इस खबर के सामने आने के बाद इस संस्था से जुड़ी जानकारी जुटाई। इस दौरान सामने आया कि पहले मेहदी फाउंडेशन आरजीएस इंटरनेशनल नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1983 में सूफी बाबा गौहर अली शाह की पाँचवी पीढ़ी के वंशज लेखक रा रियाज गौहर शाही ने यूनुस अलगोहर के साथ मिलकर की थी। बाद में एमएफआई की आधिकारिक तौर पर स्थापना हुई और यूनुस अलगोहर इसके अध्यक्ष बन गए।

सामान्य तौर पर यूनुस अलगोहर अपनी बातों में मजहबी सद्भाव और शांति का प्रचार करते हैं और मजहबी कट्टरता के खिलाफ वकालत करते हैं। वहीं वेबसाइट के होमपेज पर भी मेहदी फाउंडेशन की जो जानकारी लिखी है उसमें भी ‘ईश्वरीय प्रेम और सार्वभौमिक शांति’ के प्रचार की बात लिखी है। वेबसाइट में गौहर शाही की छवि के साथ कई धर्मों के प्रतीक भी हैं।

संगठन दावा करता है कि वह नफऱत के बीच प्रेम की लौ जलाने का काम करते हैं और अपने अनुयायियों को सिखाते हैं कि वो सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर रहें। संगठन ये भी कहता है कि वो किसी एक मजहब से नहीं जुड़े, लेकिन ये संगठन मुसलमानों को कट्टरपंथ से दूर करने के लिए जिस सूफीवाद को बढ़ावा देता है उसका इतिहास भारत में काला रहा है।

जानकारी के मुताबिक मेहदी फाउंडेशन की स्थापना सबसे पहले लंदन में हुई थी जहाँ इसका मुख्यालय भी है और अब यह कनाडा, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत, ग्रीस, थाईलैंड, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में भी अपने केंद्र खोल चुका है। इसके अलावा, mehdifoundation.com नाम से एक और वेबसाइट है जो हिंदी और उर्दू सहित कई भाषाओं में उपलब्ध है। यह भी संगठन द्वारा बताए गए समान विचारों को बढ़ावा देती है।

एमएफआई यूट्यूब पर करीब 1.5 मिलियन सब्सक्राइबर और फेसबुक पर 96 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ अलरा टीवी नाम से एक चैनल भी चलाता है। खास बात यह है कि इस चैनल ने राशिद अली सिद्दीकी को प्रचारक के तौर पर नियुक्त किया है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ तो यह संगठन धर्मनिरपेक्ष होने और चरमपंथ के खिलाफ होने का दावा करता है, लेकिन दूसरी तरफ हिंदुओं का नरसंहार करने वाले टीपू सुल्तान का प्रसंशक है। 2019 में इनके अकॉउंट से डाली गई तस्वीर में टीपू का नाम देखा जा सकता है।

बता दें कि मेहदी संगठन को अपने विचारों के कारण मुस्लिम देशों (पाकिस्तान, बाग्लादेश) में भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। इसे लेकर गौहर शाही और यूनुस अलगोहर पर कई बार हमले भी हुए। इनमें गौहर शाही तो अपने विवादित दावों के कारण जाने जाते हैं। जैसे 1997 में उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकात ईसा मसीह से हो चुकी है। इसके अलावा वह खुद को मसीहा, मेहदी और कल्कि का अवतार बताते हैं। वहीं मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के अध्यक्ष (अंतरराष्ट्रीय) अमजद गौहर, जो हैं तो एक पाकिस्तानी नागरिक हैं लेकिन उनके ऊपर 12 बार ईशनिंदा का आरोप लगा है। वह वर्तमान में ब्रिटेन में शरण माँग रहे हैं। वहीं यूनुस अलगोहर पर भी 2013 में बेईमानी के आरोप लग चुके हैं

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है फाउंडेशन की हरकत

उल्लेखनीय है कि मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल भले ही सूफीवाद और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने की बात करता है लेकिन ये सच्चाई नजरअंदाज नहीं की जा सकती कि इस संगठन ने पाकिस्तानी परिवार को अवैध रूप से भारत में घुसाया, उनके लिए फर्जी दस्तावेज बनवाए और घुसपैठ को छिपाया… ये सारी प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से हमारे भारत के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इसके अलावा ये संगठन संगठन समन्वयकारी होने का दावा करता है, लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं है कि उन्होंने पाकिस्तान से आए हिंदुओं का समर्थन किया है, जो वास्तविक असहिष्णुता का शिकार हैं और दशकों से जातीय सफाया किया जा रहा है।

नोट: ये रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

नवरात्रि मेले में सभी दुकानदारों को बोर्ड पर लिखना होगा अपना नाम, नगर निगम के आदेश पर भड़के रतलाम के काजी: कहा- सुप्रीम कोर्ट जाएँगे

मध्य प्रदेश के रतलाम में नगर निगम ने नवरात्रि मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों को दुकान पर अपना असली नाम लिखने के निर्देश दिए हैं। जिले के व्यापारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे बिजनेस में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे तुगलकी फरमान बताते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। मुस्लिम पक्ष का नेतृत्व शहर काजी कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुकानों पर अपने असली नाम लिखने का निर्णय रतलाम नगर निगम की राजस्व समिति ने लिया है। इस समिति के दिलीप गाँधी ने बुधवार (2 सितंबर 2024) को बताया कि दूसरे प्रदेशों से कई व्यापारी चूड़ी-बिंदी बेचने आते हैं। इन बाहरी दुकानदारों को मेले में कोई असुविधा न हो इसके लिए नवरात्रि मेले में दुकानदारों को उनके असली नाम लिखकर व्यापार करने की हिदायत दी गई है।

इसी के साथ 12 अक्टूबर तक चलने वाले मेले में लगने वाली दुकानों के आबंटन में भी आधार कार्ड देखे जाएँगे, जिससे कोई दुकान किसी बिचौलिए को न मिल पाए। नगर निगम के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष लामबंद हो गया है। मुस्ल्मि पक्ष की तरफ से रतलाम के शहर क़ाज़ी सैयद आसिफ ने बयान जारी किया है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले जैसा ही बताया।

नगर निगम के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन बताते हुए आसिफ ने इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। बकौल शहर क़ाज़ी, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आदेश की कॉपी मँगवाई गई है। आसिफ ने कहा कि कॉपी आने के बाद नगर निगम के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। यह मुकदमा एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन फॉर सिविल राइट्स के बैनर तले की जाएगी।

मुस्लिम पक्ष ने अपने विरोध की जानकारी जिलाधिकारी को भी दे दी है। शहर काजी ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर बोर्ड लगाने के फरमान की वजह से ‘लॉ एन्ड ऑर्डर’ प्रभावित हुआ तो उसकी जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। रतलाम के कई व्यापारियों ने नगर निगम द्वारा जारी बोर्ड पर प्रोप्राइटर का नाम लिखने के फैसले का समर्थन किया है।

कानपुर से जूता-चप्पल बेचने आए दुकानदार नसीम ने इसे एक अच्छा फैसला बताया है। नसीम का कहना है कि इस से धंधे में पारदर्शिता बढ़ेगी। बताते चलें कि हर नवरात्रि पर रतलाम के कालिका माता मंदिर में 9 दिनों का गरबा रास होता है। तब यहाँ 3 से 12 अक्टूबर तक लगने वाले मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आते हैं। आने वाले इन लोगों में श्रद्धालु और दुकानदार दोनों शामिल हैं।

महाकाल मंदिर, सैन्य अड्डे, रेलवे स्टेशन सब उड़ाएँगे, जैश कमांडर के नाम से धमकी: कहा- मध्य प्रदेश और राजस्थान को खून से रंग देंगे, जिहादियों की मौत का बदला लेंगे

राजस्थान में हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट को मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) को चिट्ठी भेजकर कई जगह बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई। टारगेट के तौर पर महाकाल मंदिर सहित मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई रेलवे स्टेशनों के नाम लिखे हैं। ब्लास्ट के लिए 30 अक्टूबर और 2 नवम्बर का समय दिया गया है। धमकाने वाले ने अपना नाम जम्मू-कश्मीर से मोहम्मद सलीम और खुद को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का एरिया कमांडर बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार की शाम हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट नागेंद्र सिंह को पीले रंग का एक लिफाफा मिला। चिट्ठी डिप्टी सुपरिटेंडेंट जगत नारायण के नाम से भेजी गई थी। इस पत्र पर हनुमानगढ़ पोस्ट ऑफिस की मुहर और तारीख 30 सितंबर है। जिस डाकखाने से यह चिट्ठी आई है उसका कोड 1440 है। इसकी मुहर में पंजाबी भाषा में कुछ लिखा हुआ है। जब इसे खोला गया तो उसमें सीरियल ब्लास्ट की धमकी लिखी हुई थी।

पत्र में राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश को भी खून से रंग देने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने खुद को जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर सलीम बताया है। उसने लिखा, “हे खुदा मुझे माफ कर। जम्मू-कश्मीर में मारे जा रहे हमारे जिहादियों की मौत का बदला जरूर लेंगे। हम ठीक 30 अक्टूबर को जयपुर, जोधपुर, अलवर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, बूंदी, उदयपुर, बीकानेर, जयपुर मंडल, मध्य प्रदेश के भी रेलवे स्टेशन, 2 नवम्बर को उज्जैन महाकाल मंदिर, जयपुर के कई धार्मिक स्थानों, रेलवे स्टेशन और सैन्य अड्डों को बम से उड़ा देंगे।”

लाइनिंग वाली कॉपी पर हाथ से लिखी गई इस चिट्ठी के अंत में खुदा हाफिज लिख गया है। रेलवे के एक कर्मचारी का दावा है कि पत्र में जैश-ए-मोहम्मद जिंदाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे नारे भी लिखे हुए थे। फिलहाल इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। नागेंद्र सिंह ने इसकी सूचना राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) को दी। पुलिस ने इस चिट्ठी लेकर जाँच शुरू कर दी है।

जन सुराज अब हो गई पार्टी, पटना के मैदान से प्रशांत किशोर ने किया ऐलान: ‘जय बिहार’ का दिया नारा, कहा- आवाज बंगाल तक पहुँचनी चाहिए, जहाँ बिहार के छात्रों को पीटा

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में एक नए राजनीतिक दल की एंट्री हो गई है। यह राजनीतिक दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार रहे प्रशांत किशोर ने गठित किया है। इस राजनीतिक दल का नाम ‘जन सुराज पार्टी’ होगा। इसके पहले PK के नाम से प्रसिद्ध प्रशांत किशोर जन सुराज के बैनर तले 2 मई 2022 से बिहार के गाँव-गाँव का दौरा कर रहे थे।

प्रशांत किशोर ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, “जन सुराज अभियान 2-3 साल से चल रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि हम पार्टी कब बनाएँगे। हम सभी को भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए। आज चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर जन सुराज को जन सुराज पार्टी के रूप में स्वीकार कर लिया है।” उन्होंने जय बिहार का नारा दिया और कहा कि यह आवाज बंगाल तक पहुँचनी चाहिए, जहाँ बिहार के छात्रों को पीटा गया।

प्रशांत किशोर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो दल के नेतृत्व करने वाले लोगों में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा है कि वे दल बनने के बाद भी पहले की तरह पदयात्रा करते रहेंगे। प्रशांत किशोर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि जन सुराज बिहार के अगले विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा और आगामी चार विधानसभा उप-चुनाव में भी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

प्रशांत किशोर ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी पटना के वेटेनरी कॉलेज ग्राउंड में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया और यही अपने पार्टी के नाम की घोषणा की। उन्होंने मंच पर पहुँचते ही ‘जय जय बिहार’ का नारा दिया। इसके बाद जन सुराज के इस कार्यक्रम में प्रार्थना गीत ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता..’ गाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

प्रशांत किशोर ने मंच से कहा, “…आप सभी को इतनी जोर से ‘जय बिहार’ कहना चाहिए कि कोई आपको और आपके बच्चों को ‘बिहारी’ न कहे और यह गाली जैसा लगे। आपकी आवाज दिल्ली तक पहुंचनी चाहिए। यह बंगाल तक पहुंचनी चाहिए, जहां बिहार के छात्रों को पीटा गया। यह तमिलनाडु, दिल्ली और बॉम्बे तक पहुंचनी चाहिए, जहां भी बिहारी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।”

इस दौरान वरिष्ठ वकील वाईवी गिरी ने लोगों को संबोधित किया। उनके बाद चौथे नंबर पर संबोधन के लिए पूर्व मंत्री मोनाजिर हसन मंच पर पहुँचे। उनके बाद पूर्व एमएलसी रामबली चंद्रवंशी आए। उन्होंने कहा कि बिहार में 35 सालों से बड़े भाई और छोटे भाई का राज रहा, लेकिन राज्य अपने हालात पर आँसू बहा रहा है। उन्होंने कहा कि एक साल या 10 साल लगे, बिहार के हालात को बदला जाएगा।

जन सुराज से जुड़े पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार को दो भाइयों ने मिलकर लूटा है। ये लोग जन सुराज के आने से बौखला गए हैं। राजद वाले सबसे ज्यादा बौखलाए हुए हैं। चिट्ठी निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज तीसरा विकल्प खड़ा कर रहा। जन सुराज पार्टी के स्थापना कार्यक्रम में प्रार्थना के बाद संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई।

चंपारण के एक रिटायर्ड टीचर गोरख महतो ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। इस दौरान महतो ने कहा कि प्रशांत किशोर 21वीं सदी के महानायक हैं, जिन्होंने उनके जैसे एक अति पिछड़ी जाति के आदमी को इतना सम्मान दिया है। जन सुराज के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा गया है कि जन सुराज अभियान एक अहम पड़ाव पर पहुँच चुका है।

इसमें आगे लिखा है, “बिहार के लाखों लोगों के सामूहिक प्रयास का यह अभियान आज राजनीतिक दल का स्वरूप लेने जा रहा है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ज्ञान की भूमि और लोकतंत्र की जननी माने जाने वाले बिहार में ऐसे दल की नींव रखी जा रही है जो किसी व्यक्ति, जाति, वर्ग या परिवार का न होकर बिहार में व्यवस्था परिवर्तन के सपने को साकार करने को संकल्पित लोगों का होगा।”

जन सुराज का संविधान

जन सुराज का जो नया संविधान तैयार किया गया है, उसमें चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं किया गया है। संगठन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह भारत के मूल संविधान के मद्देनजर ऐसा किया गया है। भारत के संविधान में सभी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का हक और अधिकार है। पार्टियों को भारत का संविधान मानना होता है।

संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि संविधान के अनुरूप पार्टी का संविधान नहीं होने पर चुनाव आयोग के पास एक्शन लेने का अधिकार है। संविधान में न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं किया गया है। इसलिए ऐसा किया गया है। लोक प्रतिनिधित्व 1951 के अनुच्छेद-2 में कहा गया है कि राजनीतिक दल का उद्देश्य संविधान के अनुरूप ही होना चाहिए।

जन सुराज के सिलेक्शन कमेटी के सदस्य गणेश राम ने न्यूनतम अर्हता को पार्टी के संविधान में शामिल नहीं किए जाने पर कहा कि इसे भारत के मूल संविधान को देखकर तैयार किया गया है। गणेश राम ने आगे कहा, “यह भी तो हो सकता है कि हम टिकट वितरण में इसे लागू करें? प्रशांत किशोर की कोशिश है कि बिहार में अंगूठा छाप नेता लोगों पर राज न कर पाए।”

पार्टी सूत्रों के हवाले से टीवी 9 भारतवर्ष ने कहा है कि संविधान में दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदाय में शिक्षा की कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। संविधान में अगर न्यूनतम अर्हता को शामिल किया जाता तो बाकी पार्टियाँ इसे दलित और पिछड़ा विरोधी घोषित करती। प

झारखंड में रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाया, कानपुर में पटरी पर रख दिया आग बुझाने वाला सिलेंडर: लोको पायलट की सतर्कता से बड़ा हादसा टला

हाल में ट्रेनों को बेपटरी करने की साजिश रचे जाने की कई घटनाएँ सामने आई हैं। अब इसी तरह की कोशिश एक बार फिर कानपुर में देखने को मिली है। यहाँ रेलवे ट्रैक पर आग बुझाने वाला सिलेंडर रखा हुआ मिला है। वहीं झारखंड के साहिबगंज में रेलवे ट्रैक को बम धमाके से उड़ा दिया गया है। दोनों घटना की जाँच चल रही है।

पहला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले से है। यहाँ बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को एक मालगाड़ी सुबह 7 बजे के आसपास अम्बियापुर के पास से गुजर रही थी। तभी लोको पायलट को हावड़ा-दिल्ली डाउनलाइन पर एक अग्निशमन यंत्र पड़ा दिखा। मालगाड़ी के पायलट ने ट्रेन रोक दी और कंट्रोल रूम को सूचित किया। जीआरपी और RPF की टीमें फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच में जुट गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अग्निशमन यंत्र काफी पुराना है। इस पर लिखे स्टीकर आदि नोच दिए गए हैं। प्रथम दृष्टया पुलिस ने इसे किसी की शरारत माना है। बताते चलें कि रविवार (22 सितंबर 2024) को भी कानपुर देहात में रेलवे ट्रैक पर सिलेंडर पाया गया था। तब भी ट्रेन ड्राइवर ने सतर्कता से गाड़ी रोक कर उसे हटा दिया था। अभी तक उस मामले में भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

रेल ट्रैक को बम से उड़ाया

दूसरा मामला झारखंड के साहिबगंज से है। यहाँ मंगलवार-बुधवार की रात बदमाशों ने एनटीपीसी एमजीआर रेलवे ट्रैक को बम से उड़ा दिया है। यह जगह बरहेट थानाक्षेत्र के गाँव रांगा के पास स्थित घुट्टू टोला की है। रिपोर्ट्स के अनुसार जोरदार ब्लास्ट से रेल की पटरी का 470 सेंटीमीटर का टुकड़ा 39 मीटर दूर जा कर गिरा मिला। जहाँ ब्लास्ट किया गया, वहाँ 3 फ़ीट गहरा गड्ढा हो गया। मरम्मत होने तक ट्रैक पर ट्रेनों का परिचालन फ़िलहाल बंद कर दिया गया है।

रेलवे के नाइट गार्ड जितेंद्र कुमार के मुताबिक घटना आधी रात के समय लगभग 12 बजे की है। जिस लाइन को विस्फोट से उड़ाया गया है, वह सिर्फ NTPC के लिए कोयला ले जाने के काम में आती है। इसे ललमनिया फरक्का MGR लाइन भी कहते हैं। कुछ लोगों को ये कोयला चोरों की करतूत लग रही है लिस बल मौके पर पहुँच कर छानबीन में जुटी हुई है।