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महाकाल मंदिर, सैन्य अड्डे, रेलवे स्टेशन सब उड़ाएँगे, जैश कमांडर के नाम से धमकी: कहा- मध्य प्रदेश और राजस्थान को खून से रंग देंगे, जिहादियों की मौत का बदला लेंगे

राजस्थान में हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट को मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) को चिट्ठी भेजकर कई जगह बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई। टारगेट के तौर पर महाकाल मंदिर सहित मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई रेलवे स्टेशनों के नाम लिखे हैं। ब्लास्ट के लिए 30 अक्टूबर और 2 नवम्बर का समय दिया गया है। धमकाने वाले ने अपना नाम जम्मू-कश्मीर से मोहम्मद सलीम और खुद को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का एरिया कमांडर बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार की शाम हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट नागेंद्र सिंह को पीले रंग का एक लिफाफा मिला। चिट्ठी डिप्टी सुपरिटेंडेंट जगत नारायण के नाम से भेजी गई थी। इस पत्र पर हनुमानगढ़ पोस्ट ऑफिस की मुहर और तारीख 30 सितंबर है। जिस डाकखाने से यह चिट्ठी आई है उसका कोड 1440 है। इसकी मुहर में पंजाबी भाषा में कुछ लिखा हुआ है। जब इसे खोला गया तो उसमें सीरियल ब्लास्ट की धमकी लिखी हुई थी।

पत्र में राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश को भी खून से रंग देने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने खुद को जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर सलीम बताया है। उसने लिखा, “हे खुदा मुझे माफ कर। जम्मू-कश्मीर में मारे जा रहे हमारे जिहादियों की मौत का बदला जरूर लेंगे। हम ठीक 30 अक्टूबर को जयपुर, जोधपुर, अलवर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, बूंदी, उदयपुर, बीकानेर, जयपुर मंडल, मध्य प्रदेश के भी रेलवे स्टेशन, 2 नवम्बर को उज्जैन महाकाल मंदिर, जयपुर के कई धार्मिक स्थानों, रेलवे स्टेशन और सैन्य अड्डों को बम से उड़ा देंगे।”

लाइनिंग वाली कॉपी पर हाथ से लिखी गई इस चिट्ठी के अंत में खुदा हाफिज लिख गया है। रेलवे के एक कर्मचारी का दावा है कि पत्र में जैश-ए-मोहम्मद जिंदाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे नारे भी लिखे हुए थे। फिलहाल इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। नागेंद्र सिंह ने इसकी सूचना राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) को दी। पुलिस ने इस चिट्ठी लेकर जाँच शुरू कर दी है।

जन सुराज अब हो गई पार्टी, पटना के मैदान से प्रशांत किशोर ने किया ऐलान: ‘जय बिहार’ का दिया नारा, कहा- आवाज बंगाल तक पहुँचनी चाहिए, जहाँ बिहार के छात्रों को पीटा

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में एक नए राजनीतिक दल की एंट्री हो गई है। यह राजनीतिक दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार रहे प्रशांत किशोर ने गठित किया है। इस राजनीतिक दल का नाम ‘जन सुराज पार्टी’ होगा। इसके पहले PK के नाम से प्रसिद्ध प्रशांत किशोर जन सुराज के बैनर तले 2 मई 2022 से बिहार के गाँव-गाँव का दौरा कर रहे थे।

प्रशांत किशोर ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, “जन सुराज अभियान 2-3 साल से चल रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि हम पार्टी कब बनाएँगे। हम सभी को भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए। आज चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर जन सुराज को जन सुराज पार्टी के रूप में स्वीकार कर लिया है।” उन्होंने जय बिहार का नारा दिया और कहा कि यह आवाज बंगाल तक पहुँचनी चाहिए, जहाँ बिहार के छात्रों को पीटा गया।

प्रशांत किशोर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो दल के नेतृत्व करने वाले लोगों में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा है कि वे दल बनने के बाद भी पहले की तरह पदयात्रा करते रहेंगे। प्रशांत किशोर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि जन सुराज बिहार के अगले विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा और आगामी चार विधानसभा उप-चुनाव में भी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

प्रशांत किशोर ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी पटना के वेटेनरी कॉलेज ग्राउंड में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया और यही अपने पार्टी के नाम की घोषणा की। उन्होंने मंच पर पहुँचते ही ‘जय जय बिहार’ का नारा दिया। इसके बाद जन सुराज के इस कार्यक्रम में प्रार्थना गीत ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता..’ गाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

प्रशांत किशोर ने मंच से कहा, “…आप सभी को इतनी जोर से ‘जय बिहार’ कहना चाहिए कि कोई आपको और आपके बच्चों को ‘बिहारी’ न कहे और यह गाली जैसा लगे। आपकी आवाज दिल्ली तक पहुंचनी चाहिए। यह बंगाल तक पहुंचनी चाहिए, जहां बिहार के छात्रों को पीटा गया। यह तमिलनाडु, दिल्ली और बॉम्बे तक पहुंचनी चाहिए, जहां भी बिहारी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।”

इस दौरान वरिष्ठ वकील वाईवी गिरी ने लोगों को संबोधित किया। उनके बाद चौथे नंबर पर संबोधन के लिए पूर्व मंत्री मोनाजिर हसन मंच पर पहुँचे। उनके बाद पूर्व एमएलसी रामबली चंद्रवंशी आए। उन्होंने कहा कि बिहार में 35 सालों से बड़े भाई और छोटे भाई का राज रहा, लेकिन राज्य अपने हालात पर आँसू बहा रहा है। उन्होंने कहा कि एक साल या 10 साल लगे, बिहार के हालात को बदला जाएगा।

जन सुराज से जुड़े पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार को दो भाइयों ने मिलकर लूटा है। ये लोग जन सुराज के आने से बौखला गए हैं। राजद वाले सबसे ज्यादा बौखलाए हुए हैं। चिट्ठी निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज तीसरा विकल्प खड़ा कर रहा। जन सुराज पार्टी के स्थापना कार्यक्रम में प्रार्थना के बाद संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई।

चंपारण के एक रिटायर्ड टीचर गोरख महतो ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। इस दौरान महतो ने कहा कि प्रशांत किशोर 21वीं सदी के महानायक हैं, जिन्होंने उनके जैसे एक अति पिछड़ी जाति के आदमी को इतना सम्मान दिया है। जन सुराज के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा गया है कि जन सुराज अभियान एक अहम पड़ाव पर पहुँच चुका है।

इसमें आगे लिखा है, “बिहार के लाखों लोगों के सामूहिक प्रयास का यह अभियान आज राजनीतिक दल का स्वरूप लेने जा रहा है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ज्ञान की भूमि और लोकतंत्र की जननी माने जाने वाले बिहार में ऐसे दल की नींव रखी जा रही है जो किसी व्यक्ति, जाति, वर्ग या परिवार का न होकर बिहार में व्यवस्था परिवर्तन के सपने को साकार करने को संकल्पित लोगों का होगा।”

जन सुराज का संविधान

जन सुराज का जो नया संविधान तैयार किया गया है, उसमें चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं किया गया है। संगठन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह भारत के मूल संविधान के मद्देनजर ऐसा किया गया है। भारत के संविधान में सभी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का हक और अधिकार है। पार्टियों को भारत का संविधान मानना होता है।

संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि संविधान के अनुरूप पार्टी का संविधान नहीं होने पर चुनाव आयोग के पास एक्शन लेने का अधिकार है। संविधान में न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं किया गया है। इसलिए ऐसा किया गया है। लोक प्रतिनिधित्व 1951 के अनुच्छेद-2 में कहा गया है कि राजनीतिक दल का उद्देश्य संविधान के अनुरूप ही होना चाहिए।

जन सुराज के सिलेक्शन कमेटी के सदस्य गणेश राम ने न्यूनतम अर्हता को पार्टी के संविधान में शामिल नहीं किए जाने पर कहा कि इसे भारत के मूल संविधान को देखकर तैयार किया गया है। गणेश राम ने आगे कहा, “यह भी तो हो सकता है कि हम टिकट वितरण में इसे लागू करें? प्रशांत किशोर की कोशिश है कि बिहार में अंगूठा छाप नेता लोगों पर राज न कर पाए।”

पार्टी सूत्रों के हवाले से टीवी 9 भारतवर्ष ने कहा है कि संविधान में दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदाय में शिक्षा की कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। संविधान में अगर न्यूनतम अर्हता को शामिल किया जाता तो बाकी पार्टियाँ इसे दलित और पिछड़ा विरोधी घोषित करती। प

झारखंड में रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाया, कानपुर में पटरी पर रख दिया आग बुझाने वाला सिलेंडर: लोको पायलट की सतर्कता से बड़ा हादसा टला

हाल में ट्रेनों को बेपटरी करने की साजिश रचे जाने की कई घटनाएँ सामने आई हैं। अब इसी तरह की कोशिश एक बार फिर कानपुर में देखने को मिली है। यहाँ रेलवे ट्रैक पर आग बुझाने वाला सिलेंडर रखा हुआ मिला है। वहीं झारखंड के साहिबगंज में रेलवे ट्रैक को बम धमाके से उड़ा दिया गया है। दोनों घटना की जाँच चल रही है।

पहला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले से है। यहाँ बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को एक मालगाड़ी सुबह 7 बजे के आसपास अम्बियापुर के पास से गुजर रही थी। तभी लोको पायलट को हावड़ा-दिल्ली डाउनलाइन पर एक अग्निशमन यंत्र पड़ा दिखा। मालगाड़ी के पायलट ने ट्रेन रोक दी और कंट्रोल रूम को सूचित किया। जीआरपी और RPF की टीमें फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच में जुट गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अग्निशमन यंत्र काफी पुराना है। इस पर लिखे स्टीकर आदि नोच दिए गए हैं। प्रथम दृष्टया पुलिस ने इसे किसी की शरारत माना है। बताते चलें कि रविवार (22 सितंबर 2024) को भी कानपुर देहात में रेलवे ट्रैक पर सिलेंडर पाया गया था। तब भी ट्रेन ड्राइवर ने सतर्कता से गाड़ी रोक कर उसे हटा दिया था। अभी तक उस मामले में भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

रेल ट्रैक को बम से उड़ाया

दूसरा मामला झारखंड के साहिबगंज से है। यहाँ मंगलवार-बुधवार की रात बदमाशों ने एनटीपीसी एमजीआर रेलवे ट्रैक को बम से उड़ा दिया है। यह जगह बरहेट थानाक्षेत्र के गाँव रांगा के पास स्थित घुट्टू टोला की है। रिपोर्ट्स के अनुसार जोरदार ब्लास्ट से रेल की पटरी का 470 सेंटीमीटर का टुकड़ा 39 मीटर दूर जा कर गिरा मिला। जहाँ ब्लास्ट किया गया, वहाँ 3 फ़ीट गहरा गड्ढा हो गया। मरम्मत होने तक ट्रैक पर ट्रेनों का परिचालन फ़िलहाल बंद कर दिया गया है।

रेलवे के नाइट गार्ड जितेंद्र कुमार के मुताबिक घटना आधी रात के समय लगभग 12 बजे की है। जिस लाइन को विस्फोट से उड़ाया गया है, वह सिर्फ NTPC के लिए कोयला ले जाने के काम में आती है। इसे ललमनिया फरक्का MGR लाइन भी कहते हैं। कुछ लोगों को ये कोयला चोरों की करतूत लग रही है लिस बल मौके पर पहुँच कर छानबीन में जुटी हुई है।

गो हत्या के विरोधी थे MK गाँधी… लेकिन गोवध रोकने के लिए कानून बनाने का करते थे विरोध: खुद ही कंफ्यूज थे बापू या कर रहे थे मुस्लिम तुष्टिकरण?

भारत में गो-हत्या एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। यह मुद्दा आज से नहीं, बल्कि सदियों से है। मुगलकाल में भी इसको लेकर तमाम विरोध एवं युद्ध होते रहे हैं। ब्रिटिश भारत में भी गो-हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। महात्मा गाँधी भी गो-हत्या पर प्रतिबंध एवं गो-संरक्षण के प्रबल समर्थक थे। हालाँकि, मुस्लिम इससे नाराज ना हो जाएँ, इसके कारण वे इस पर प्रतिबंध के खिलाफ थे।

देश में गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने की माँग को लेकर देश भर से लोगों के पत्र एवं टेलीग्राम महात्मा गाँधी को मिलते रहते थे। हिंदुओं ने ऐसे लगभग एक लाख पत्र भेजकर गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। तब महात्मा गाँधी ने 25 जुलाई 1947 ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इसको लेकर एक जवाब दिया था।

महात्मा गाँधी ने माना था कि गाय हिंदुओं के लिए पवित्र है, लेकिन बावजूद उन्होंने कहा था कि वे किसी को भी गायों का वध नहीं करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते और ना ही वे करेंगे। उन्होंने कहा था कि जब तक कि जब तक गो-हत्या करने वाले (विशेष रूप से मुस्लिमों के संदर्भ में) में खुद नहीं ऐसा करने के लिए खुद तैयार ना हों।

अपने जवाब में महात्मा गाँधी ने कहा था, “मैं किसी को भी गायों का वध नहीं करने के लिए कैसे मजबूर कर सकता हूँ, जब तक कि वह खुद ऐसा करने के लिए तैयार ना हों? ऐसा नहीं है कि भारतीय संघ में केवल हिंदू ही हैं। यहाँ मुस्लिम, पारसी, ईसाई और अन्य धार्मिक समूह के लोग भी रहते हैं।”

एक तरफ महात्मा गाँधी कहते थे कि वे गो-हत्या के विरोधी हैं, दूसरी तरफ वे कहते थे कि गो-हत्या नहीं करने के लिए वे किसी को मजबूर नहीं कर सकते हैं। हालाँकि, उन्होंने अपने जीवन में बार-बार गाय की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत के हिंदुओं को न केवल गो-रक्षा या गो-सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

महात्मा गाँधी ने कहा, “मुस्लिमों पर गाय का वध करने का कोई धार्मिक दायित्व नहीं है। जहाँ तक ​​मैं कुरान को समझ पाया हूँ, उसमें किसी भी जीवित प्राणी का बिना कारण के जीवन लेना पाप बताया गया है। गाय को मारना साथी देशवासियों और मित्रों, हिंदुओं को मारना है। कुरान कहता है कि जो व्यक्ति अपने निर्दोष पड़ोसी का खून बहाता है, उसके लिए कोई स्वर्ग नहीं हो सकता।”

इसी तरह यंग इंडिया में लिखते हुए मोहनदास करमचंद गाँधी ने गौ रक्षा की आवश्यकता और महत्व के बारे में कहा है, “हिंदू धर्म का मुख्य तथ्य गौ रक्षा है। मेरे लिए गौ रक्षा मानव विकास में सबसे अद्भुत घटनाओं में से एक है। यह मनुष्य को इस प्रजाति से परे ले जाती है। मेरे लिए गाय का मतलब संपूर्ण उप-मानव दुनिया है।”

कृषि क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा, “गाय के माध्यम से मनुष्य को सभी जीवित प्राणियों के साथ अपनी पहचान का एहसास करने का आदेश दिया गया है। गाय को देवत्व के लिए क्यों चुना गया, यह मेरे लिए स्पष्ट है। भारत में गाय सबसे अच्छी साथी थी। वह बहुत कुछ देने वाली थी। उसने न केवल दूध दिया, बल्कि उसने कृषि को भी संभव बनाया।”

महात्मा गाँधी ने 6 अक्टूबर 1921 को यंग इंडिया में लिखे लेख में आगे लिखा, “गौ रक्षा दुनिया को हिंदू धर्म की देन है। और हिंदू धर्म तब तक जीवित रहेगा जब तक गाय की रक्षा करने वाले हिंदू हैं… हिंदुओं का मूल्यांकन उनके तिलक से नहीं, मंत्रों के सही उच्चारण से नहीं, उनके तीर्थयात्राओं से नहीं, जाति के नियमों के उनके सबसे सख्त पालन से नहीं, बल्कि गाय की रक्षा करने की उनकी क्षमता से किया जाएगा।”

इसी तरह दिसंबर 1927 में मद्रास में आयोजित कॉन्ग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में महात्मा गाँधी ने एक मसौदा प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी थी। इसमें एक पंक्ति थी, जिसमें कहा गया था, “मुसलमानों को गाय काटने की सामान्य अनुमति दी गई है और गो-रक्षा के सवाल को सुविधाजनक रूप से नजरअंदाज कर दिया गया है!”

गाँधीजी उस रात बोले, “मैंने एक बड़ी गलती की है। मैंने मसौदा ठीक से नहीं पढ़ा। उस मसौदे में मुसलमानों को गाय काटने की सामान्य अनुमति दी गई है और गो रक्षा के सवाल को सुविधाजनक रूप से नजरअंदाज कर दिया गया है! मैं इसे कैसे बर्दाश्त कर सकता हूँ? अगर वे गाय काटते हैं तो हम उन्हें बलपूर्वक नहीं रोक सकते। यह सच है, लेकिन हम कम से कम प्रेमपूर्वक सेवा करके उनका विश्वास जीत सकते हैं और उन्हें अपना दृष्टिकोण समझा सकते हैं, है न?”

महात्मा गाँधी गो-सेवा को हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण अंग मानते हुए भी उन्होंने गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ रहे। उन्होंने कहा है, “मैं गो-रक्षा को हिंदू धर्म का मुख्य तत्व मानता हूँ, लेकिन मैं इस बात को कभी नहीं समझ पाया कि इस मामले में मुसलमानों के प्रति इतनी नफरत क्यों है। हम रोज़ाना अंग्रेजों की तरफ़ से होने वाले कत्लेआम के बारे में कुछ नहीं कहते।”

गो-हत्या को लेकर हिंदुओं के भड़कने को लेकर महात्मा गाँधी ने कहा है, “जब कोई मुसलमान गाय काटता है तो हमारा गुस्सा भड़क उठता है। गाय के नाम पर जितने भी दंगे हुए हैं, वे सब बेकार की कोशिशें हैं। उन्होंने एक भी गाय नहीं बचाई, बल्कि इसके विपरीत मुसलमानों की कमर कस दी है और इसके परिणामस्वरूप और ज़्यादा कत्लेआम हुआ है।”

महात्मा गाँधी ने कहा कि मुसलमानों के खिलाफ हिंदुओं की हमेशा से यही शिकायत रही है कि मुसलमान गोमांस खाते हैं और बकरीद के दिन जानबूझकर गाय की हत्या करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू मुसलमानों को मांस या गोमांस खाने से परहेज करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। शाकाहारी हिंदू अन्य हिंदुओं को मछली, मांस या मुर्गी खाने से परहेज करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।

महात्मा गाँधी कहते हैं, “गोरक्षा की समस्या केवल गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुसलमानों को गोमांस खाने और गोहत्या से रोकने में है। यह बेतुका लगता है। गाय को मारे जाने पर शायद ही किसी की आत्मा को पीड़ा नहीं होती है। लेकिन मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे अपना धर्म स्वयं निभाना है या किसी और से निभाना है? दूसरों को ब्रह्मचर्य का उपदेश देने से क्या लाभ होगा, यदि मैं स्वयं ही दुराचार में डूबा हुआ हूँ?”

इस तर्क को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गाँधी कहते हैं, “मान लीजिए कि मैं स्वयं गाय को नहीं मारता, तो क्या यह मेरा कर्तव्य है कि मैं मुसलमानों को उनकी इच्छा के विरुद्ध ऐसा करने के लिए बाध्य करूँ? हम भूल जाते हैं कि ऐसे हिंदू भी हैं, जो खुशी-खुशी गोमांस खाते हैं। मैंने रूढ़िवादी वैष्णवों को जाना है, जो डॉक्टरों द्वारा बताए जाने पर अर्क खाते हैं।”

महात्मा गाँधी खाने की स्वतंत्रता के हिमायती थे। वे कहते थे, “मैं यह मानता हूँ कि मुसलमानों को गायों को मारने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए, अगर वे चाहें तो। हालाँकि, यह ध्यान रखना होगा कि इससे उनके हिंदू पड़ोसियों की संवेदनशीलता को ठेस न पहुँचे। मुसलमानों को गायों को मारने की पूरी आज़ादी देना सांप्रदायिक सद्भाव के लिए अपरिहार्य है, और गाय को बचाने का यही एकमात्र तरीका है।”

महात्मा गाँधी कहते थे, “गाय को बचाने के लिए मुसलमान से दुश्मनी पालना गाय को मारने का पक्का तरीका है और यह दुगुना पाप है। किसी हिंदू द्वारा गाय को मारने से हिंदू धर्म नष्ट नहीं होगा। हिंदू का धर्म गाय को बचाना है, लेकिन गैर-हिंदू पर बल प्रयोग करके गाय को बचाना उसका धर्म नहीं हो सकता। अगर कोई मुसलमान सोचता है कि उसे गाय को मारना चाहिए तो हिंदू बलपूर्वक उसके हाथ क्यों रोकेगा?ठ

गाँधी कहते थे, “क्यों न वह (हिंदू) उसके (मुस्लिमों के) सामने घुटनों के बल गिरकर उससे विनती करे? लेकिन हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे। तो फिर, भगवान एक दिन मुसलमानों और हिंदुओं से वह करवाएगा जो हम आज नहीं कर सकते। अगर आप ईमानवाले हैं, तो मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप अपने आप में सिमट जाएँ और अपने अंदर रहनेवाले से प्रार्थना करें कि वह आपके हाथों को गलत कामों से दूर रखे और उन्हें सही काम करने के लिए प्रेरित करे।”

महात्मा गाँधी किसी मुस्लिम को गोहत्या से दूर रखने को उसे जबरदस्ती हिंदू धर्म में परिवर्तित करने की तरह मानते थे। वे कहते थे कि अगर भारत में हिंदुओं की सरकार बनी तो भी कानून बनाकर मुसलमान अल्पसंख्यकों को गोहत्या से रोकना गलत होगा। किसी व्यक्ति के धार्मिक आचरण को उस व्यक्ति पर लागू करना स्पष्ट रूप से गलत है, जो उस धर्म को नहीं मानता।

महात्मा गाँधी अलग तरह से सोचते थे। वे सोचते थे कि जैसे वे हैं, वैसी सारी दुनिया है। वे कहते थे, “हिंदुओं को गाय के बारे में मुसलमानों की चिंता करना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि उन्हें मुसलमानों से किसी तरह की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्हें मुसलमानों की माँग को मान लेना चाहिए। यदि गोहत्या पर रोक बलपूर्वक नहीं, बल्कि मुसलमानों और अन्य लोगों द्वारा जानबूझ कर स्वेच्छा से की गई आत्म-त्याग की कार्रवाई के रूप में लगाई जाए, तो यह हिंदू धर्म के लिए सम्मान की बात होगी।”

ईरान ने करीब 200 मिसाइलें दागी, पर केवल 1 व्यक्ति की हुई मौत, वह भी निकला फिलस्तीनी: आयरन डोम और बंकर बन गए इजरायल के सुरक्षा कवच

इजरायल पर मंगलवार (1 अक्टूबर, 2024) को हुए ईरान के हमले में एक फिलिस्तीन के व्यक्ति की मौत हो गई। इजरायल के जेरिको के पास वेस्ट बैंक के नुइमा शहर में उस पर इंटरसेप्टेड मिसाइल का हिस्सा गिर गया। मृतक की पहचान हो गई है और स्पष्ट हो गया है कि उसकी मौत ईरानी हमले में हुई।

मृतक फिलिस्तीनी गाजा के जबालिया इलाके का रहने वाला था। मृतक का नाम समेह असाली है और वह 37 वर्ष का था। फिलिस्तीनी प्रशासन ने बताया है कि उनके इलाके में रॉकेट और मिसाइल के हिस्से गिरने के कारण नुकसान हुआ है और एक जान भी गई है। बताया गया है कि समेह असाली एक कामगार था।

इसके अलावा, उसी रॉकेट के टुकड़े लगने के कारण 4 फिलिस्तीनी घायल भी हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन बच्चों के पिता समेह अल-असाली उन सैकड़ों गाजा मजदूरों में से एक है, जिनके पास इजरायली वर्क परमिट है। बताया गया कि समेह 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल के खिलाफ हमास के हमले के दौरान इजरायल में फंस गया था और उसने वेस्ट बैंक में शरण ली थी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखता है कि अल-असाली के शव के पास 1 मीटर लंबा मिसाइल का टुकड़ा जमीन पर पड़ा हुआ है और उसे चादर से ढका हुआ है। इस घटना का एक वीडियो भी CCTV पर रिकॉर्ड हो गया जो कि अब लोग साझा कर रहे हैं।

वीडियो में दिखता है कि समेह असाली नुइमा गाँव की सड़क पर टहल रहा है, इसी दौरान आसमान से ईरानी मिसाइल का एक बड़ा टुकड़ा गिरता हुआ दिखाई देता है। मिसाइल का टुकड़ा सीधे समेह अल-असाली के ऊपर गिरा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इजरायली एजेसियों ने बताया है कि ईरानी हमले के कारण तेल अवीव के भीतर केवल 2 लोग ही घायल हुए हैं जबकि बाकी कुछ लोगों को हलकी फुलकी चोटें आई हैं। इजरायल और ईरान के बीच गहराते संकट के बीच 1 अक्टूबर को युद्ध के बादल छा गए। ईरान ने इस दौरान इजरायल पर लगभग 200 मिसाइल दागीं।

ईरानी हमले से बचने के लिए इजरायल के लोगों ने बंकरों में शरण ली थी। बताया गया कि ईरान द्वारा दागी गईं 181 मिसाइलों में से ज्यादातर को इजरायल के आयरन डोम ने हवा में ही मार गिराया। यह भी सामने आया कि मिसाइलों को मार गिराने में अमेरिकी सेनाओं ने भी सहायता की।

इससे पहले सोमवार को इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के भीतर कई गाँवों में हमले किए। लेबनान के इन इलाकों के भीतर इजरायल की थल सेना घुसी थी। यह हमला हिज़्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह के बंकर पर हमले में मारे जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ।

‘ईसाई बनकर देख, सारे दुख दूर हो जाएँगे’: हिंदू महिला को जबरन सोनू के घर ले गई पुष्पा, प्रार्थना सभा में बाइबिल पढ़ने को किया मजबूर

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक हिंदू महिला पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। महिला को ईसाई बनने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था। उससे कहा जा रहा था कि उसके सारे दुख दूर हो जाएँगे। उसे पैसे मिलेंगे। उसे बाइबिल पढ़ने को भी मजबूर किया गया।

पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने पुष्पा सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गाजियाबाद जिले के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र का है।

सोमवार (30 सितंबर 2024) को पीड़ित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बताया है कि वह सैन विहार इलाके में रहती है। उसके घर के पास ही पुष्पा नाम की महिला भी रहती है। पुष्पा लम्बे समय से ईसाई बनने का दबाव दाल रही है। इसमें पुष्पा के कुछ और साथी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

पीड़िता का आरोप है कि उससे न सिर्फ सारी तकलीफें खत्म हो जाने जैसे दावे किए जा रहे हैं, बल्कि पैसे भी देने का ऑफर दिया गया। पैसे पाने के लिए 2-3 महीने तक लगातार प्रार्थना में आने के लिए कहा गया। जब भी पीड़िता इससे इनकार करती तो उसे नए-नए प्रलोभन दिए जाते थे। सोमवार को पीड़िता अपने घर लौट रही थी। रास्ते में उसे पुष्पा कुछ अन्य महिलाओं सहित मिल गई। इसी दौरान पुष्पा बोली, “तू भगवान की पूजा करती है। मेरे साथ ईसाई बन कर देख।”

पुष्पा जबरन पीड़िता को लेकर गली नंबर 12 में मौजूद किसी सोनू के घर में गई। वहाँ यीशु की प्रार्थना सभा चल रही थी। प्रार्थना सभा में पीड़िता से जबरन बाइबिल पढ़वाई गई। इसी दौरान पीड़िता का पति अपने कुछ साथियों सहित प्रार्थना सभा में पहुँच गया। उसने विरोध किया और अपनी पत्नी को वहाँ से लेकर वापस आ गया। प्रार्थना सभा से लौटने के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा कर पुष्पा सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि पुष्पा और उसके साथी पहले भी कई लोगों को ईसाई बना चुके हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। गाजियाबाद पुलिस की ACP लिपि नगायच के मुताबिक केस दर्ज कर जाँच चल रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव के आश्रम में तमिलनाडु पुलिस ने भेज दी पूरी बटालियन, 150 जवानों ने ली तलाशी: जानिए क्यों आई ये नौबत, ईशा फाउंडेशन ने आरोपों पर क्या कहा?

सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन ने कहा है कि वह लोगों पर शादी करने या संत बनने सबंधी कोई दबाव नहीं डालता। यह बयान उसके कोयम्बटूर के थोंडामुथुर स्थित ईशा फाउंडेशन के भीतर मंगलवार (1 अक्टूबर, 2024) को पुलिस के सैकड़ों जवान और अफसर पहुँचने के बाद आया। पुलिस टीम संस्थान में मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के बाद पहुँची थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को पुलिस के 4 बड़े अफसर सहित 150 जवानों की टीम थोंडामुथुर स्थित ईशा फाउंडेशन के भीतर गई थी। इस पुलिस टीम ने आश्रम के भीतर रहने वाले लोगों का सत्यापन भी किया और साथ ही उस अंदर के तौर तरीकों पर जानकारी भी ली। यह जाँच बुधवार (2 अक्टूबर, 2024) को जारी है। पुलिस टीम ने ईशा फाउंडेशन के विरुद्ध पूर्व में दर्ज किए गए मामलों की जानकारी इकट्ठा करना भी चालू कर दिया है। पुलिस के साथ ही समाज कल्याण और बाल कल्याण विभाग के अफसर भी आश्रम के भीतर जाँच के लिए पहुँचे।

यह पुलिस जाँच मद्रास हाई कोर्ट में ही सुनवाई के बाद चालू हुई है। मद्रास हाई कोर्ट में सोमवार (30 सितम्बर, 2024) को ईशा फाउंडेशन के विरुद्ध डाली गई बंदी प्रत्यक्षीकरण की एक याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस याचिका में एक वरिष्ठ नागरिक ने आरोप लगाया कि उसकी दो बेटियों को आश्रम के भीतर कैद कर लिया गया है और उन्हें बाहर नहीं आने दिया जाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंदर ऐसा खाना-पीना और दवाइयाँ दी जाती हैं जिनके कारण लोगों की बाकी क्षमताएँ कम हो जाती हैं।

याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि उनकी दोनों बेटियों का आश्रम आने से पहले अच्छा करियर था और जीवन था। लेकिन आश्रम में जाने के बाद उनका करियर ठप हो गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि सद्गुरु जग्गी का आश्रम लोगों को अपना सामान्य जीवन छोड़ कर साधु बनने के लिए ब्रेनवाश करता है। यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान लोगों को उनके परिवार से नहीं मिलने दिया जाता और उनका बाहरी दुनिया से सम्पर्क काट दिया जाता है।

मद्रास हाई कोर्ट ने इस दौरान सद्गुरु जग्गी वासुदेव और ईशा फाउंडेशन को आड़े हाथों लिया। हाई कोर्ट ने कहा, “हम जानना चाहते हैं कि आखिर एक व्यक्ति जिसने अपनी बेटी की शादी कर दी और उसका जीवन अच्छी तरह से स्थापित कर दिया, वह दूसरों की बेटियों को सिर मुंडवाने और एकांत में जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित क्यों कर रहा है?”

मद्रास हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दोनों बेटियाँ भी मौजूद थीं। बेटियों ने दावा किया कि वह अपनी मर्जी से आश्रम के भीतर हैं और उन्होंने दबाव की बात मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दोनों बेटियों को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति संत बनते हैं वह सभी से प्रेम करते हैं लेकिन यह दोनों महिलाएँ अपने पिता से बदतमीजी से बात कर रही हैं और उनसे घृणा रखती हैं। कोर्ट ने पूछा कि अपने परिजनों से घृणा रखना क्या पाप नहीं है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका में किए गए गंभीर दावों के आधार पर प्रशासन को आदेश दिया है कि वह ईशा फाउंडेशन के आश्रम के भीतर जाँच करे और इसकी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखे। इस दौरान ईशा फाउंडेशन ने कोर्ट में कहा कि वह किसी से संन्यास लेने को नहीं कहते। इस संबंध में ईशा फाउंडेशन ने एक प्रेस रिलीज भी जारी की है।

इसमें फाउंडेशन ने कहा, “ईशा फाउंडेशन की स्थापना सद्गुरु ने लोगों को योग और आध्यात्मिकता प्रदान करने के लिए की थी। हमारा मानना ​​है कि वयस्क व्यक्ति को अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता और समझ है। हम लोगों से शादी करने या साधु बनने के लिए नहीं कहते क्योंकि ये व्यक्तिगत इच्छाएँ हैं। ईशा योग केंद्र में हज़ारों ऐसे लोग रहते हैं जो साधु नहीं हैं और कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने ब्रह्मचर्य या संन्यास लिया है।”

ईशा फाउंडेशन ने उस याचिकाकर्ता पर भी कई आरोप लगाए हैं। ईशा फाउंडेशन का कहना है कि याचिकाकर्ता ने एक बार झूठी जानकारी के आधार पर आश्रम के भीतर घुसने का प्रयास किया था। ईशा फाउंडेशन ने कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा दर्ज करवाए गए मामले के अलावा उन पर कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं है।

ऐसे ही बंद नहीं हो जाता है आपका सोशल मीडिया अकाउंट, UP के सीतापुर से चल रहा गैंग: शादाब-महताब गिरफ्तार, हिंदूवादी हैंडल मुख्य टारगेट; 600+ अकाउंट शिकार

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में पुलिस ने रविवार (29 सितंबर 2024) को साइबर अपराध का बड़ा गिरोह चला रहे शादाब और महताब को गिरफ्तार किया है। दोनों अपने नेटवर्क के जरिए हिंदूवादी विचारधारा के सोशल मीडिया हैंडलों पर स्ट्राइक भेजकर उसे बंद करवाते थे। बाद में इसे खुलवाने के नाम पर मोटी उगाही की जाती थी। पकड़े गए आरोपितों के टेलीग्राम पर इस गैंग से जुड़े सैकड़ों लोग जुड़े पाए गए हैं।

मामला सीतापुर जिले के कोतवाली देहात का है। शुक्रवार (27 सितंबर 2024) को इंस्टाग्राम की @randombrigade प्रोफ़ाइल के एडमिन ने पुलिस में शिकायत दी। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनके पास इंस्टाग्राम यूजरनेम @soloxkakashi की आईडी से ऑडियो फोन और मैसेज आया। इस मैसेज में कॉपीराइट स्ट्राइक करके उसके इंस्टाग्राम हैंडल को सस्पेंड कराने की धमकी दी गई।

जब पीड़ित ने ऐसा नहीं करने की गुजारिश की तो उससे पैसों की डिमांड हुई। पैसे भेजने के लिए एक QR कोड भेजा गया, जिससे जुड़े बैंक का खाता निजामुद्दीन के बेटे महताब के नाम पर रजिस्टर्ड था। पीड़ित ने 3 अगस्त 2024 को खाते में 500 रुपए भेज दिए। इसके बाद भी पीड़ित से और पैसों की माँग की गई। इस बार पैसों की डिमांड के साथ पीड़ित और उसके परिवार को खत्म करने की धमकी दी गई।

धमकियों से पीड़ित डर गया और उसने 3 अगस्त को ही 2 बार में 1500 रुपए और भेजे। इसके बावजूद धमकियाँ जारी रहीं। पीड़ित ने 5 अगस्त को 1000 रुपए और 1 सितंबर को 750 रुपए और भेजे। पीड़ित से 3,750 रुपए वसूलने के बावजूद महताब ने पीड़ित से अमेजन या फ्लिप कार्ड से 70,000 रुपए का गिफ्ट माँगना शुरू कर दिया।

जब पीड़ित ने इतने पैसे देने में खुद को असमर्थ बताया तो महताब बोला, “मैं तुम्हारे इंस्टाग्राम एकाउंट को फर्जी कॉपीराइट बताकर तुम्हें बदनाम और तुम्हारी जिन्दगी बर्बाद कर दूँगा।” लगातार उगाही से परेशान होकर पीड़ित को अपनी व अपने परिवार की जान का खतरा सताने लगा। पीडित को यह भी लगा कि महताब ने फर्जी आईडी बनाकर उसकी तरह कई बेगुनाहों को परेशान किया होगा।

आखिरकार उसने थाने में जाकर शिकायत की। आरोपित के कामों को अवैध वसूली बताते हुए पीड़ित ने महताब पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। इस तहरीर पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4), 352, 351 (2), 308 (5) व 66- D IT एक्ट के तहत केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

ऐसे देते थे अपराध को अंजाम

सीतापुर पुलिस ने इस केस की जाँच शुरू की तो महताब अंसारी के साथ शादाब का भी नाम सामने आया। ये दोनों सगे भाई हैं, जो सीतापुर के मूल निवासी हैं। फ़िलहाल के तौर पर दोनों आगरा में रहते हैं। इनके पास से 3 मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने बताया कि शादाब अपने भाई महताब के साथ मिलकर गूगल से Insta Pro 2 की Apk File डाउनलोड करता था।

इसके बाद वे अपने टारगेट की असली इंस्टाग्राम आईडी से फोटो और डाटा उठा लेते थे। दोनों आरोपित गूगल से दोबारा इंस्टाग्राम का कॉपीराइट का फॉर्म डाउनलोड करते थे। इसे वो भर के मेटा (META) प्लेटफॉर्म को शिकायत के तौर पर भेजते थे। शिकायत में META से पीड़ित की ही आईडी को फर्जी बताकर अपने द्वारा बनाई गई प्रोफ़ाइल को ही असली बता देते थे।

इसके बाद यह गिरोह असली आईडी वाले की प्रोफ़ाइल पर कॉपीराइट का दावा करते थे। ID को उड़ाने के नाम पर पीड़ित से पैसों की उगाही भी की जाती थी। पुलिस के अनुसार, शादाब और महताब अब तक लगभग 600 ID पर इसी तरह का कॉपीराइट क्लेम कर चुके हैं। इनमे से कईयों से पैसों की उगाही भी की जा चुकी है।

इन्ही पीड़ितों में से एक @randombrigade भी निकला, जिसने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। पुलिस ने शादाब और महताब को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी द्वारा अब तक अपराध से वसूले गए पैसों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जाँच व कार्रवाई के लिए थाना पुलिस के साथ साइबर सेल को भी लगाया गया है।

हिंदूवादी हैंडल थे बड़े गिरोह के निशाने पर

सीतापुर के पुलिस अधीक्षक IPS चक्रेश मिश्रा ने इस गिरोह के आपराधिक तौर तरीकों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस गिरोह के व्हाट्सएप व टेलीग्राम पर ग्रुप बने हुए हैं। इन्हीं ग्रुपों के जरिए एक साथ असली प्रोफ़ाइल के खिलाफ हजारों की संख्या में शिकायतें META और X से की जाती थीं। बकौल पुलिस अधीक्षक, इन शिकायतों का संज्ञान लेकर META और X एक्शन भी ले लेते थे।

पुलिस ने इसे एक नए तरीके का ऑनलाइन क्राइम माना है। शादाब और महताब के द्वारा बनाए गए लगभग 20 फर्जी हैंडलों की अब तक पहचान हुई है। अपने गिरोह से सम्पर्क के लिए ये दोनों टेलीग्राम, व्हाट्सएप और ट्विटर का प्रयोग करते थे। इसके अलावा, ये अन्य तरीकों से भी एक-दूसरों को संपर्क में थे।

पुलिस ने यह भी माना है कि शादाब और महताब के गिरोह द्वारा ज्यादातर दक्षिणपंथी हैंडलों को टारगेट किया जाता है। ऐसा करने के लिए इस गिरोह को कोई ऊपर से दिशा-निर्देश भी देता था, जिसके बारे में पुलिस जानकारियाँ जुटा रही है। मामले में अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सस्पेंड, 98 फर्जी डॉक्टरों की खबर रोकने को दिया था ₹10 लाख का ऑफर: फर्जीवाड़े पर भजनलाल सरकार सख्त, जाँच कमेटी का गठन

राजस्थान की भजनलाल शर्मा की सरकार ने फर्जी डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन मामले में बड़ा एक्शन लिया है। स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने 98 फर्जी डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन करने वाले रजिस्ट्रार को सस्पेंड करने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में जाँच कमिटी बनाई थी, उसी की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई हुई है।

समाचार पत्र दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अवधेश अकोदिया ने हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया था कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के भीतर 98 अयोग्य लोगों को डॉक्टर के रूप में रजिस्टर किया गया था। इनके पास डॉक्टरी की कोई योग्यता नहीं थी और इन्होने फर्जी कागज रजिस्ट्रेशन के लिए लगाए थे। इन 98 में से 1 ने भी MBBS की पढ़ाई नहीं की थी। कई ने बाहरी राज्यों के फर्जी प्रमाण पत्र और डिग्री RMC को दिए थे और प्रैक्टिस की अनुमति हासिल कर ली थी।

भास्कर ने यह भी खुलासा किया था कि इस मामले में RMC के रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा की संलिप्तता थी। भास्कर के खुलासे के बाद स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौड़ के निर्देशन में एक जाँच कमिटी बनाई गई थी। इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में गड़बड़ी की बात मानी है। इसके बाद राजेश शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। राजेश शर्मा की जगह सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर गिरधर गोयल को रजिस्ट्रार का अतिरक्त प्रभार दे दिया है।

अपनी रिपोर्ट में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अवधेश अकोदिया ने बताया था कि जब उन्होंने RMC के रजिस्ट्रार राजेश शर्मा से पूछताछ की तो उन्होंने गलती सुधारने की बजाय ₹10 लाख की रिश्वत का ऑफर अकोदिया को दे दिया था। स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने इस मामले को गंभीर अपराध बताया था। उन्होंने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई की बात भी कही थी।

रिपोर्ट से पता चला था कि RMC के पास जब ऑनलाइन आवेदन आए तो उन्होंने कोई वेरिफिकेशन नहीं किया, बल्कि जाली ईमेल अटैच करके सत्यापन की सारी प्रक्रिया पूरी कर दी। इन कथित डॉक्टरों ने ऑनलाइन आवेदन करते समय बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और एनओसी के फर्जी दस्तावेज अटैच किए थे। RMC ने बिना किसी की डिग्री की पड़ताल किए ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इन फर्जी डॉक्टरों में से कुछ सर्जन हैं तो कुछ गाइनी।

रिपोर्ट में ऐसे कुछ डॉक्टरों के नाम भी उजागर किए हैं। जैसे डॉ. सरिमुल एच मजूमदार, डॉ. रामकिशोर महावर, डॉ. गीता कुमारी, डॉ. देवेंद्र नेहरा, डॉ. शांतनु कुमार, डॉ. पंकज यादव, डॉ. महेश कुमार गुर्जर आदि। इन फर्जी डॉक्टरों ने न तो कभी मेडिकल की पढ़ाई की और न ही इंटर्नशिप का। बावजूद इनको सरकारी मुहर लगाकर डॉक्टर होने का प्रमाण पत्र बाँट दिया गया। इस मामले में अब RMC के अंतर्गत रजिस्टर्ड सभी डॉक्टरों की जाँच की माँग की गई है।

जानिए क्या है वह कानून जिसके कारण ‘हाजी अली’ का नाम-लोगो कुछ भी इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे केरल के जूस वाले, बॉम्बे हाई कोर्ट का है आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केरल के कोच्चि में पाँच जूस सेंटर आउटलेट्स को मुंबई के नामी हाजी अली जूस सेंटर के नाम, ट्रेडमार्क और लोगो का उपयोग करने से रोक दिया है। दरअसल, मुंबई के हाजी अली जूस सेंटर के संस्थापक की बेटी असमा फरीद नूरानी द्वारा दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन को लेकर एक मुकदमा दायर किया था।

न्यायमूर्ति आरआई छागला ने इस संबंध में दो अंतरिम आदेश पारित किए। एक 9 अगस्त 2024 को और दूसरा 5 सितंबर 2024 को। असमा वर्तमान में हाजी अली जूस सेंटर के ट्रेडमार्क की मालिक हैं। न्यायालय ने पाया कि असमा फरीद नूरानी को अंतरिम राहत देने के लिए प्रथम दृष्टया मामला मजबूत था।

इसके बाद कोर्ट ने एक कोर्ट रिसीवर और दो अतिरिक्त विशेष कोर्ट रिसीवरों को कोच्चि के आउटलेट्स से हाजी अली जूस सेंटर के ट्रेडमार्क और संबंधित चिह्नों वाली सभी सामग्री जब्त करने का काम सौंपा। कोर्ट ने रिसीवरों को निर्देश दिया कि वे हाजी अली चिह्न के साथ या उसके बिना सभी सामग्रियों- स्टेशनरी, मेनू कार्ड, साइन बोर्ड आदि का नियंत्रण अपने हाथ में लें।

हाजी अली जूस सेंटर का यह लोगो एक लाल सेब है। दरअसल, असमा नूरानी ने कोर्ट में दावा किया था कि कोच्चि आउटलेट्स ने फ्रैंचाइजी समझौतों की समाप्ति के बावजूद उसकी अनुमति के बिना हाजी अली ट्रेडमार्क का उपयोग जारी रखे हुए है। असमा नूरानी की इस दलील के बाद हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया।

न्यायमूर्ति छागला ने 9 अगस्त के आदेश में कहा, “मुझे लगता है कि उपरोक्त मास्टर फ्रेंचाइज समझौते और उसके बाद उप-फ्रेंचाइज समझौते की समाप्ति के बावजूद प्रतिवादियों ने अनाधिकृत रूप से वादी के पंजीकृत ट्रेडमार्क का उपयोग जारी रखा, जिसमें उसका संक्षिप्त नाम HAJC JUICE CENTRE और लोगो MUMBAI HAJI ALI, ‘द ओरिजिनल स्टोर’ शामिल है… वादी ने अंतरिम राहत के लिए वास्तव में एक मजबूत प्रथम दृष्टया मामला बनाया है।”

मुंबई में 1970 के दशक में अपना परिचालन शुरू करने वाले हाजी अली जूस सेंटर का स्वामित्व साल 2019 में अस्मा फरीद नूरानी (पारिवारिक समझौते के बाद) को उनके पिता एवं जूस सेंटर के संस्थापक फरीद अब्दुल लतीफ नूरानी की मृत्यु के बाद मिला था। इससे पहले 2018 में अल्टियस लाइफस्टाइल ब्रांड्स एलएलपी (मास्टर फ्रैंचाइज़ी) के साथ एक फ्रैंचाइजी समझौता हुआ था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत मास्टर फ़्रैंचाइज़ी समझौते (एमएफए) ने विभिन्न खिलाड़ियों को कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल सहित कई राज्यों में हाली अली जूस सेंटर संचालित करने की अनुमति दी थी। केरल को लेकर साल 2021 में एक पूरक डीड के परिणामस्वरूप कोच्चि के एडापल्ली में एक उप-फ्रैंचाइज़ी आउटलेट का शुभारंभ हुआ।

असमा नूरानी ने साल 2022 में फ्रैंचाइज़ समझौतों को रद्द कर दिया, जिसमें फ्रैंचाइज़ियों द्वारा अपने समझौतों की शर्तों का पालन करने में विफलता का हवाला दिया गया। हालाँकि, फ्रैंचाइज़ आउटलेट्स ने अपना संचालन बंद करने से इनकार कर दिया और उसका लोगो जारी रखा। इसके बाद असमा नूरानी ने इस साल जनवरी में उनके खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा दायर किया।

उन्होंने शिकायत की कि केरल में कई हाजी अली आउटलेट बिना उनकी अनुमति के और फ्रैंचाइज़ समझौते का उल्लंघन करते हुए स्थापित किए गए थे। जिन आउटलेट्स के बारे में शिकायत की गई उनमें पनमपिल्ली नगर, अलुवा, कक्कनाड और कोठामंगलम के आउटलेट शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन आउटलेट्स ने कानूनी नोटिस का जवाब नहीं दिया।

इतना ही नहीं, प्रतिवादियों (कोच्चि में आउटलेट्स के संचालकों) ने 1 दिसंबर 2022 से 24 मई 2023 के बीच की अवधि के लिए ‘हाजी अली जूस सेंटर’ चिह्न और उसके लोगो के अनधिकृत उपयोग के लिए रॉयल्टी का भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 9 अगस्त को कोर्ट ने हाजी अली नाम का उपयोग करने वाले आउटलेट्स के खिलाफ निरोधक आदेश जारी किया।

बाद में असमा नूरानी ने कहा कि उन्हें कक्कनद और कोठामंगलम में नए आउटलेट के बारे में पता चला, जिन्हें पहले अदालत के संज्ञान में नहीं लाया गया था। इसके बाद अदालत ने 5 सितंबर को कक्कनद और कोठामंगलम आउटलेट के संबंध में भी इसी तरह के निर्देशों के साथ एक और आदेश पारित किया। इसकी अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।

क्या है ट्रेडमार्क कानून

ट्रेडमार्क कानून बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत आता है। भारत में ट्रेडमार्क अधिकारों को ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 द्वारा संरक्षित किया गया है। इसके तहत पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क का अधिकार सुरक्षित किया जाता है। ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 ट्रेडमार्क के धोखाधड़ीपूर्ण उपयोग से सुरक्षा, पंजीकरण और रोकथाम से संबंधित है। यह ट्रेडमार्कधारक के अधिकारों, उल्लंघन के लिए दंड, नुकसान के लिए उपचार और ट्रेडमार्क के हस्तांतरण के तरीकों से भी संबंधित है।

ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 में ट्रेडमार्क को इस प्रकार परिभाषित किया गया है, “ट्रेडमार्क का अर्थ है एक चिह्न, जिसे ग्राफिक रूप से दर्शाया जा सके और जो एक व्यक्ति के सामान या सेवाओं को दूसरों से अलग करने में सक्षम हो और इसमें वस्तुओं का आकार, उनकी पैकेजिंग और रंगों का संयोजन शामिल हो सकता है।” ऐसे चिह्न में हस्ताक्षर, नाम, लेबल, शीर्षक आदि जैसी अनेक चीजें शामिल हो सकती हैं।

ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 7 के अनुसार ट्रेडमार्क का वर्गीकरण वस्तुओं और सेवाओं के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण के अनुसार किया जाना चाहिए। ऐसे वर्गीकरण में कुल 45 वर्ग हैं, जिनमें वस्तुएँ और सेवाएँ आ सकती हैं। वर्ग 1-34 वस्तुओं के लिए हैं और वर्ग 35-45 सेवाओं के लिए हैं।

ट्रेडमार्क का अधिकार हासिल करने के लिए इस अधिनियम की धारा 18 के तहत सूचीबद्ध प्रावधानों का पालन करते हुए लिखित रूप में आवेदन करना होगा। आवेदन में चिह्न, माल और सेवाओं का नाम, माल और सेवाओं के वर्ग, चिह्न के उपयोग की अवधि और आवेदक के व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम और पता शामिल होना चाहिए।