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‘चंद पैसों की नौकरी के लिए अपना धर्म भ्रष्ट नहीं करूँगा’: अयोध्या की कोका-कोला फैक्ट्री में हिंदू कर्मचारियों को कलावा काटने को किया मजबूर, Video वायरल पर होने ‘खाद्य सुरक्षा’ का बहाना

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में स्थित कोका-कोला की फैक्ट्री ‘अमृत बॉटलर्स’ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक सुरक्षा गार्ड पर फैक्ट्री में काम करने वाले हिंदू कर्मचारियों के कलावे काटने का आरोप लगाया जा रहा है।

यह मामला सोमवार (23 सितंबर 2024) को सामने आया और इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि गार्ड कर्मचारियों के हाथों में बंधे कलावे काटते हुए नजर आ रहा है। इसके चलते फैक्ट्री प्रबंधन पर धार्मिक भावनाओं के अपमान का आरोप लग रहा है।

यह घटना अयोध्या जिले के थानाक्षेत्र पूरा कलंदर स्थित कोका-कोला की फैक्ट्री में घटी। वीडियो में दिखाया गया है कि कई कर्मचारियों के हाथों से गार्ड ने कलावे काट दिए। कलावा, जिसे हिंदू धर्म में धार्मिक पहचान और आस्था का प्रतीक माना जाता है, को काटे जाने से वहाँ के कर्मचारियों में रोष फैल गया। वीडियो में कर्मचारियों और गार्ड के बीच हुई बहस को भी देखा जा सकता है, जिसमें कर्मचारियों ने अपने धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन की बात की है।

वहीं, वीडियो में कलावा काटते दिख रहे सिक्योरिटी गार्ड ने जवाब दिया कि “ऊपर से ऑर्डर आता है, जिसका वो पालन करता है।” इस बीच लोगों ने सुपरवाइजर को बुलाने की बात कही। सुपरवाइजर के आने के बावजूद समाधान नहीं निकला। वीडियो बनाने वाले एक व्यक्ति ने गुस्से में कहा, “जहाँ हिन्दू धर्म का अपमान हो रहा हो, वहाँ मुझे काम ही नहीं करना। मैं चंद पैसों के लिए अपना धर्म भ्रष्ट नहीं कर सकता।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वे नौकरी छोड़ने को भी तैयार हैं लेकिन अपने धार्मिक प्रतीकों का अनादर नहीं सहेंगे।

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, फैक्ट्री प्रबंधन को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा। फैक्ट्री के जनसंपर्क अधिकारी अर्जुन दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कलावा काटने का आदेश गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दिया गया था। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है, ताकि उत्पाद में किसी प्रकार की अशुद्धि न आए।

अर्जुन दास के अनुसार, यदि कलावा या कोई धागा गलती से बोतल में चला जाता है, तो यह कम्पनी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। फैक्ट्री के अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि इस वीडियो को वायरल कर संस्थान की बदनामी करने की कोशिश की गई है। अर्जुन दास का कहना है कि इस वीडियो के पीछे कुछ लोग हैं जो कंपनी की छवि को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि इस नियम के तहत कर्मचारियों को घड़ी, अंगूठी, और अन्य पहनावे भी हटाने पड़ते हैं। लेकिन कर्मचारियों का कहना था कि सिर्फ उन लोगों का सामान हटाया जाए जो सीधे तौर पर मशीनों के पास काम करते हैं, सभी कर्मचारियों पर यह नियम लागू करना उचित नहीं है।

विवाद बढ़ता देख फैक्ट्री प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सुरक्षा गार्ड को बर्खास्त कर दिया। फैक्ट्री के मुख्य सुरक्षा अधिकारी सच्चिदानंद तिवारी ने कहा कि वे खुद सनातनी हैं और कंपनी में सभी धर्मों का पूरा सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह घटना गलतफहमी की वजह से बढ़ी है और इसका उद्देश्य किसी भी धर्म का अपमान नहीं था। फिलहाल, अब तक इस मामले में किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है।

AIMIM नेता ने उकसाया, मुंबई में जमा हो गए लाखों मुस्लिम कट्टरपंथी: लगाए ‘सर तन से जुदा’ के नारे, रामगिरी महाराज-नितेश राणे के बयान पर कर रहे बवाल

इस्लामी कट्टरपंथियों ने फिर एक बार खुलेआम हत्या और सर काटने की धमकियों के साथ देश की आर्थिक आर्थिक राजधानी को पंगु बनाने की कोशिश की है। पूरे महाराष्ट्र से लाखों की तादाद में मुस्लिम मुंबई पहुँचे हैं। यहाँ उनकी भीड़ ईशनिंदा के आरोप लगा कर ‘गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ के नारे लगा रही है। कट्टरपंथी मुस्लिमों का यह हुजूम भाजपा नेता नितेश राणे और संत रामगिरी महाराज के खिलाफ यह भड़काऊ नारे लगा रहा है।

इनकी अगुवाई AIMIM का नेता इम्तियाज जलील कर रहा है। सोशल मीडिया पर मुंबई के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में दिखता है कि मुंबई की सरहदों पर लाखों की भीड़ जमा है।

इसमें हजारों की तादाद में गाड़ियाँ भी हैं। गाड़ियों पर हरे झंडे फहराए जा थे हैं। इस भीड़ में कई मौलवी भी शामिल हैं। एक मौलवी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में मौलवी से कई लोग हाथ मिला रहे हैं। मौलवी का नाम सैयद मोईन बताया जा रहा है। उसके आसपास मुस्लिम युवकों की भीड़ जमा है।

मौलवी के पास जमा मुस्लिम भीड़ पहले नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर और फिर सर तन से जुड़ा के नारे लगाती है। मौलवी इन्हें नहीं रोकता और काफिला आगे बढ़ जाता है। दूसरे वीडियो में दिखता है कि एक-एक गाड़ी पर 10-10 लोग बैठ कर मुंबई की तरफ बढ़ रहे हैं।

सामने आया है कि मुस्लिमों की इस भीड़ को मुंबई ले जाने का ऐलान AIMIM नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने किया है। उसने महाराष्ट्र के मुस्लिमों को ‘चलो मुंबई’ का नारा दिया है। मुस्लिमों की इस भीड़ को रोकने के लिए मुंबई पुलिस तैनात है और मुंबई की सीमाओं को सील कर रही है। ठाणे की सीमाओं पर भी पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

मुस्लिमों की यह भीड़ स्वामी रामगिरी महाराज और भाजपा नेता नितेश राणे के बयान को लेकर मुंबई पहुँची है। स्वामी रामगिरी महाराज ने बीते दिनों इस्लाम को लेकर एक सभा में कुछ कहा था जिसे मुस्लिमों ने इस्लाम की तौहीनी बता दिया और उनकी गिरफ्तारी की माँग करने लगे। स्वामी रामगिरी महाराज को मिल रही धमकियों के बाद नितेश राणे ने उनका बचाव किया था।

नितेश राणे ने कहा था कि यदि स्वामी रामगिरी महाराज को कोई नुकसान पहुँचाया गया तो हिन्दू उसका जवाब देंगे। नितेश राणे के एक दो और बयानों को लकर भी मुस्लिम मुंबई पर कब्जा करने चले आए हैं। मुंबई में पुलिस ने कई रूट भी बंद किए हैं।

वहीं विधायक नितेश राणे इस हुजूम से बेफिक्र नजर आ रहे हैं। नितेश राणे ने मंगलवार (24 सितम्बर, 2024) को एक ट्वीट किया है। उन्होंने इसमें हलके मूड में अपने नाश्ता करने की बात लिखी है।

गौरतलब है कि इससे पहले 2022 में सर तन से जुदा के नारे भाजपा की पूर्व नेता नुपुर शर्मा के विरुद्ध लगाए गए थे। नुपुर शर्मा को तब से सुरक्षा के साथ रहना पड़ता है। हिन्दू नेता कमलेश तिवारी के विरुद्ध भी यही नारे लगाए गए थे, बाद में उनकी गला रेत कर हत्या कर दी गई थी।

शेर खान ने किया श्रीराम मंदिर पर हमला, गेट तोड़ने और पुजारी को मंदिर न खोलने की धमकी: मथुरा पुलिस के ‘मानसिक विक्षिप्त’ बयान पर गुस्से में हिंदू

मथुरा के श्रीराम मंदिर में मुस्लिम युवक शेर खान ने पुजारी पर हमला किया और मंदिर में ईंट-पत्थर फेंके। यह घटना तब हुई जब मंदिर के पुजारी अरुण चौधरी सोमवार (23 सितंबर 2024) की सुबह मंदिर की सफाई कर रहे थे। तभी शेर खान नाम के हमलावर ने ईंट-पत्थर फेंककर मंदिर पर हमला किया और महंत को धमकी दी कि वे मंदिर न खोलें।

मथुरा की घटना

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मथुरा के राया थाना इलाके में स्थित श्रीराम मंदिर पर शेर खान नामक युवक ने हमला किया। मंदिर की सफाई करते समय शेर खान नाम का युवक पहुँचा और पुजारी को धमकाने लगा। यही नहीं, पुजारी अरुण चौधरी को शेर खान ने साफ तौर पर कहा कि वो अगले दिन से मंदिर को खोले ही न, वर्ना अंजाम बुरा होगा।

शेर खान ने दावा किया कि मंदिर उसका है और अगली बार इसे खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पुजारी ने हमले के बाद मंदिर के अंदर छुपकर अपनी जान बचाई और पुलिस को सूचित किया। इस दौरान शेर खान ने मंदिर के गेट को तोड़ने की कोशिश की और जमकर गाली-गलौच की।

मौके पर पुलिस पहुँचती, उससे पहले ही शेर खान फरार हो गया। मौके पर पहुँचे पुलिस कर्मियों ने भी पुजारी से बदतमीजी की, जिसके बाद स्थानीय लोग भड़क गए। सूचना पर एसपी देहात त्रिगुन विसेन क्षेत्राधिकारी महावन भूषण वर्मा मौके पर पहुँचे और गलत भाषा का प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।

वहीं, घटना के बाद पुलिस ने हमलावर शेर खान को गिरफ्तार कर लिया और उसे मानसिक विक्षिप्त करार दिया। इस दावे पर हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

गुस्साए लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू धार्मिक स्थल पर हमला किया हो और उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने का प्रयास किया गया हो।

मानसिक विक्षिप्तता का पैटर्न

भारत में हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों की घटनाएँ हाल के वर्षों में बढ़ी हैं, और कई मामलों में पुलिस या संबंधित लोग हमलावरों को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताकर उनके बचाव का प्रयास करते दिखते हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा की घटना में भी हमलावर शेर खान को मानसिक विक्षिप्त करार दिया गया।

मथुरा की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। ऐसी घटनाएँ आम होती जा रही हैं, और एक पैटर्न दिख रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग जब हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमला करते हैं, तो उन्हें मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने की कोशिश की जाती है। कई उदाहरण हमारे सामने हैं, जिसमें हिंदू धार्मिक स्थलों पर हुए हमलों में मुस्लिम हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर उनका बचाव किया गया। कुछ ऐसे ही मामलों पर नजर डालते हैं:

शिवमोग्गा की घटना (2024): प्राण-प्रतिष्ठा के उत्सव के दौरान एक बुर्काधारी महिला ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। जब उसके परिजनों से पूछा गया, तो उन्होंने उसे मानसिक रूप से बीमार बताया।

मोहम्मद मोइउद्दीन का हमला (2023): बिहार में ईद के दिन मोइउद्दीन ने मंदिर में घुसकर देवी के सामने पेशाब किया। पुलिस ने उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने का प्रयास किया।

जावेद का उन्नाव महादेव मंदिर पर हमला (2023): जावेद ने उन्नाव के महादेव मंदिर में हमला किया और 8 लोगों को घायल कर दिया। मीडिया ने उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर पेश किया।

शाह आलम का दुर्गा पूजा पंडाल में प्रवेश (2023): एक व्यक्ति ने दुर्गा पूजा पंडाल में कुरान लेकर प्रवेश किया और लोगों ने उसे पकड़ लिया। पुलिस ने उसे मानसिक रूप से बीमार बताकर छोड़ दिया।

आरा शेख का शिवलिंग पर पेशाब करना (2023): पश्चिम बंगाल में एक युवक ने मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब किया और इसका वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर कार्रवाई नहीं की।

सद्दाम का काली मंदिर में हमला (2023): उत्तराखंड में सद्दाम ने काली मंदिर में पेशाब किया। पुलिस ने उसे मानसिक रूप से बीमार बताकर बचाने का प्रयास किया, जबकि उसे पकड़ने के लिए 200 से ज्यादा सीसीटीवी की फुटेज छाननी पड़ी।

ऐसे हमलों की बढ़ती घटनाएँ

साल 2022 में भी कई ऐसी घटनाएँ सामने आईं, जहाँ मुस्लिम समुदाय के हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने की कोशिश की गई। जैसे कि गोरखपुर में अहमद मुर्तजा अब्बासी ने चाकुओं से हमला किया और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उसका बचाव मानसिक विक्षिप्त बताकर किया, जबकि बाद में उसे आतंकवादी संगठनों से जुड़ा पाया गया। वो आईएसआईएस जैसे दुर्दांत आतंकवादी संगठन से जुड़ने वाला था।

राँची में मंदिर के गेट का ताला खोलकर फिर बजरंग बली की मूर्ति तोड़ने वाला रमीज अहमद फरार हो गया। आराम से अपनी जिंदगी जीने लगा। सीसीटीवी फुटेज में उसका चेहरा दिखा, तो पकड़ा गया। लेकिन जो रमीज मंदिर का ताला तोड़कर मूर्ति तोड़ने के समय पूरी तरह से होश में था, वो राँची की पुलिस मानसिक विक्षिप्त बताने लगी।

कई लोग सवाल उठाते हैं कि आखिर क्यों हर बार मुस्लिम हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर उनके अपराध को हल्का किया जाता है। आप बताइए, क्या सिर्फ मानसिक विक्षिप्त व्यक्ति ऐसा कर सकता है? ऐसे में पुलिस और प्रशासन पर यह आरोप लगने लगे हैं कि वे धार्मिक हमलों पर ढील बरत रहे हैं, जिससे समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है।

सांप्रदायिक तनाव न बढ़े, इसके लिए सहते रहें हिंदू?

इस पूरे मामले के पीछे राजनीतिक और सामाजिक कारण भी हो सकते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मुस्लिम हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर उनके समुदाय की छवि को बचाने का प्रयास किया जाता है, ताकि सांप्रदायिक तनाव न बढ़े। लेकिन यह रणनीति हिंदू समुदाय में असंतोष पैदा कर रही है। वे इसे अपने धार्मिक स्थलों पर हमला और अपनी मान्यताओं का अपमान मानते हैं।

मथुरा में श्रीराम मंदिर पर हमला और उससे जुड़ी मानसिक विक्षिप्तता की राजनीति केवल एक घटना नहीं है, बल्कि एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा है, जो बार-बार देखा जा रहा है। हर बार जब मुस्लिम समुदाय से संबंधित कोई व्यक्ति हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमला करता है, उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने का प्रयास किया जाता है। यह स्थिति दोनों समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाने का कारण बन रही है, और इसे जल्द ही सुलझाने की आवश्यकता है।

मदरसे की जमीन का आवंटन रद्द करवाने सड़क पर उतरे हिंदू, विरोध में उदयपुर के कई बाजार बंद: रजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने दिखाई थी ‘मजहबी दरियादिली’

राजस्थान के उदयपुर में साल 2021 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने एक मदरसे के लिए जमीन आवंटित की थी। अब हिन्दू समुदाय के लोगों ने इस आवंटन का विरोध करना शुरू कर दिया। आवंटन निरस्त करने की माँग को ले कर बाजार बंद रखे गए। सोमवार (23 सितंबर 2024) को SDM को ज्ञापन दे कर सड़क पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। भाजपा सांसद सीपी जोशी ने भी जनभावनाओं के सम्मान का ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला उदयपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित मावली कस्बे का है। साल 2021 में राज्य में जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब यहाँ एक मदरसे के लिए लगभग 4 बीघा 16 बिस्वा जमीन आवंटित कर दी गई थी। हालाँकि तब से लोगों का आरोप है कि मदरसे के नाम पर दी गई जमीन जमीन जलभराव क्षेत्र में मौजूद है। सोमवार को इस आवंटन को रद्द करने की माँग के साथ सर्व समाज के लोग मावली में एकजुट होने लगे। तमाम प्रदर्शनकारियों के हाथों में बजरंग बली के चित्रों वाले भगवा ध्वज थे।

सर्व समाज के बैनर तले हुए हजारों लोगों के इस जमावड़े को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रदर्शन की घोषणा पहले ही कर दी गई थी। इस वजह से स्कूलों में भी छुट्टी कर दी गई थी। प्रदर्शन का असर सिर्फ बाजार में ही नहीं बल्कि आसपास के गाँवों में भी साफ दिखा। ग्रामीण इलाकों के भी लोग बड़ी तादाद में प्रदर्शन में शामिल हुए थे। पास ही स्थित घास तहसील में भी इस बंदी का असर दिखा। वहाँ के लोगों ने भी मावली के लोगों के समर्थन का एलान किया है।

लोगों ने मावली के पुराने बस अड्डे से एक रैली निकाली जो बाजार से घूमती हुई SDM कार्यालय पर जा कर खत्म हुई। कार्यालय के पास लोगों ने सड़क पर बैठ कर हनुमान चालीसा पढ़ी गई। बाद में ADM प्रशासन दीपेंद्र सिंह राठौर को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मदरसे के लिए आवंटित जमीन को रद्द करने की माँग की गई है।

इस प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद सीपी जोशी ने मीडिया से बात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की माँग का समर्थन किया और मावली में किसी भी प्रकार के मदरसे को गैर-जरूरी बताया। भाजपा सांसद ने ऐलान किया कि मदरसे के लिए जमीन का जो आवंटन हुआ है उसे रद्द करवाया जाएगा।

सीपी जोशी ने कहा कि ये भाजपा की सनातनी ​सरकार है जिसमें ऐसा कोई काम नहीं होगा जिस से भविष्य में किसी को दिक्कत हो। लोगों का विरोध देखते हुए मावली SDM मनसुखराम डामोर ने अपनी अनुशंसा जिलाधिकारी को भेज दी है। इस अनुशंसा में उन्होंने जमीन का आवंटन निरस्त करने की सिफारिश की है।

तिरुपति मंदिर में 4 घंटे चला ‘महाशांति यज्ञ’, रसोई का शुद्धिकरण-घी सिस्टम बदला: ‘बीफ वाले लड्डू’ को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी भी पहुँचे सुप्रीम कोर्ट, कहा- अदालत की निगरानी में हो जाँच

तिरुपति मंदिर के प्रसादम लड्डू में पशु चर्बी वाले घी और मछली तेल की मौजूदगी की रिपोर्ट के बाद शुद्धिकरण हवन किया गया है। मंदिर के पुजारियों और धर्मगुरुओं ने यहाँ मंदिर के साथ ही उस जगह को भी शुद्ध किया जहाँ लड्डू बनते हैं। वहीं इस मामले में अब तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व मुखिया सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए हैं। उन्होंने लड्डू में मिलावट के आरोपों को खारिज किया है। इसी मामले को लेकर पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी सुप्रीम कोर्ट पहुँचे हैं।

मंदिर अब शुद्ध, श्रद्धालु रहें निश्चिंत

सोमवार (23 सितम्बर, 2024) को सुबह 6 बजे से तिरुपति मंदिर में यह शुद्धिकरण शांति हवन चालू हुआ। इस हवन में मंदिर के प्रमुख पुजारी, यहाँ के धर्मगुरु और साथ ही TTD के अधिकारी भी शामिल हुए। पुजारियों ने कहा है कि उनकी यह पूजा लड्डुओं में हुई गड़बड़ी से आए बुरे प्रभाव को खत्म करेगी और साथ ही श्रद्धालुओं का कल्याण करेगी।

मंदिर के पुजारियों ने कहा है कि अभी मंदिर में सब कुछ पूरी तरीके से शुद्ध किया जा चुका है और अब चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर आकर दर्शन करने और लड्डू ग्रहण करने की बात कही है। TTD के अधिकारी श्यामला राव ने बताया कि यह पूजा सुबह 6 बजे से चालू हुई थी और 10 बजे तक चली।

श्यामला राव ने बताया कि शांति हवन और शुद्धिकरण का मुख्य फोकस मंदिर की रसोई में था जहाँ लड्डू तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ भी धर्मगुरुओं ने शुद्धिकरण किया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब मंदिर में गाय का घी लिए जाने का सिस्टम भी बदल दिया गया है, इससे लड्डुओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

TTD ने मंदिर में हुई पूजा की तस्वीरें भी जारी की हैं। TTD के पुजारी इन तस्वीरों में मंदिर के अलग-अलग हिस्सों को शुद्ध करते दिखते हैं। इन तस्वीरों में पुजारी लड्डुओं और उनके बनाने वाले सामान पर भी शुद्धिकरण के लिए जल छिड़कते दिखे हैं।

इससे पहले TTD ने बताया था कि वह जल्द ही घी की टेस्टिंग के लिए स्वयं ही क्षमताएँ विकसित कर लेगी। इसके लिए उसे डेयरी विकास बोर्ड से मशीनें मिल रही हैं। इसके अलावा मंदिर में एक्सपर्ट की टीम भी बुलाई गई है, यह घी के उपयोग से पहले उसको परखेगी।

सुब्रमण्यम स्वामी पहुँचे सुप्रीम कोर्ट

तिरुपति लड्डू में चर्बी और मछली तेल के मामले के सामने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ भी लग चुकी हैं। भाजपा नेता और पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका लगाई है। स्वामी ने माँग की है कि घी में मिलावट सम्बन्धी दावों की जाँच के लिए कमिटी का गठन किया जाए।

उन्होंने माँग की है कि इस कमिटी की निगरानी सुप्रीम कोर्ट स्वयं करे। सुब्रमण्यम स्वामी ने माँग की है कि मंदिर में घी कहाँ से आता है और किस्से आपूर्ति होती है, इस बात को लेकर आंध्र प्रदेश एक रिपोर्ट दाखिल करे। स्वामी ने माँग की है कि इसको लेकर आंध्र प्रदेश को निर्देश दिए जाएँ।

सुब्रमण्यम स्वामी से पहले हिन्दू सेना के कुलदीप सिंह यादव ने भी इस मामले में जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई है। उन्होंने कहा है कि प्रसाद में चर्बी की मिलावट से करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का अपमान हुआ है। उन्होंने माँग की है कि इस मामले में एक SIT गठित की जाए जो पूरी जाँच करे। सुप्रीम कोर्ट में अभी इन याचिकाओं की सुनवाई होनी बाकी है।

पूर्व चेयरमैन का दावा- नहीं हुई कोई गड़बड़ी

सुप्रीम कोर्ट में TTD के पूर्व चेयरमैन और YSRCP के पूर्व सांसद YV सुब्बा रेड्डी ने भी एक जनहित याचिका लगाई है। वह जगन मोहन रेड्डी की सरकार में TTD के मुखिया थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई जनहित याचिका में दावा किया है कि लड्डुओं को बनाने में गड़बड़ घी इस्तेमाल नहीं हुआ है।

रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में YSRCP सरकार के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए उठाए गए क़दमों की बात भी की है। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले में आरोप लगाकर करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को चोटिल कर रहे हैं।

उन्होंने याचिका में कहा, “आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की हैसियत से तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर स्वामी के पवित्र प्रसाद ‘लड्डू’ में इस्तेमाल किए जाने वाले घी में बाहरी तत्व मिलाए जाने के आरोप लगाए गए हैं, जिससे लाखों हिंदू भक्तों और हिंदू समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उनके कार्यों से मंदिर की पवित्रता, प्रतिष्ठा और आस्था को अपूर्णीय क्षति पहुँची है।”

रेड्डी ने दावा किया है कि लड्डू या अन्य किसी प्रसाद में गड़बड़ घी हो ही नहीं सकता क्योंकि जैसे ही घी से भरा ट्रक मंदिर पहुँचता है तो TTD का एक अधिकारी उसकी जाँच करता है। रेड्डी ने कहा कि ऐसे में यह दावा करना गलत है कि यहाँ प्रसाद में गड़बड़ घी का इस्तेमाल हुआ होगा।

रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि वह इस मामले में स्वतंत्र जाँच का आदेश दे। उन्होंने माँग की है कि इस जाँच की निगरानी या तो कोर्ट स्वयं करे या फिर किसी रिटायर्ड जज के नेतृत्व में इस मामले के विशेषज्ञों की टीम इसकी जाँच करे। रेड्डी ने यह भी माँग की है कि बोर्ड घी के बारे में एक रिपोर्ट तैयार करे।

गौरतलब है कि हाल ही में तिरुपति मंदिर के प्रसाद के रूप में बाँटे जाने वाले लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल के उपयोग की बात कही गई थी। एक लैब से जाँच में इसकी पुष्टि भी हुई थी। आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने बताया कि यह कारनामा पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी सरकार में हुआ।

दिल्ली की जिस Rau IAS के बेसमेंट में डूबकर मर गए 3 छात्र, उस एकेडमी के CEO और कोर्डिनेटर को मिली जमानत: ₹2.5 करोड़ जमा करने का आदेश

दिल्ली के राजेंद्र नगर में स्थित राव IAS स्टडी सर्कल के बेसमेंट में जलभराव के कारण तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत के मामले में कोचिंग सेंटर के CEO अभिषेक गुप्ता और कोऑर्डिनेटर देशपाल सिंह को 7 दिसंबर 2024 तक अंतरिम जमानत मिल गई है। इस दौरान उन्हें 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास जमा करना होगा। घटना 27 जुलाई 2024 की है, जब भारी बारिश के बाद बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्र डूब गए थे।

राउज एवेन्यू कोर्ट की प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज अंजू बजाज चंदना ने इस मामले में CEO अभिषेक गुप्ता और कोऑर्डिनेटर देशपाल सिंह को जमानत दी। इसके साथ ही अदालत ने एक शर्त लगाई है कि अभिषेक गुप्ता को 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना जमा करना होगा, जो 30 नवंबर 2024 तक दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के नियंत्रण में रेड क्रॉस सोसाइटी को दिया जाएगा।

यह मामला 27 जुलाई 2024 का है, जब दिल्ली के पुराने राजेंद्र नगर इलाके में स्थित राव के IAS स्टडी सर्कल के बेसमेंट में तीन UPSC अभ्यर्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। भारी बारिश के बाद इलाके में जलभराव हो गया था, जिससे बेसमेंट में पानी भर गया था। यह बेसमेंट कोचिंग सेंटर के रूप में उपयोग हो रहा था, जो नियमों के अनुसार अवैध था।

इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में चार जमीन मालिकों को भी जमानत दी थी, जिन्होंने इस अवैध बेसमेंट को कोचिंग सेंटर के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी थी। हाई कोर्ट ने इन चार मालिकों को 5 करोड़ रुपये का जुर्माना रेड क्रॉस सोसाइटी में जमा करने का आदेश दिया था। अदालत ने दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर से एक समिति बनाने का भी अनुरोध किया था, जो रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की निगरानी में दिल्ली में सभी अवैध कोचिंग सेंटरों पर रोक लगाने का काम करेगी, खासकर उन केंद्रों पर जो बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं।

हाई कोर्ट ने इस मामले में CBI को निर्देश दिया कि वह इलाके में जलभराव की स्थिति और उस दिन की बारिश का डेटा जमा करे। इससे यह पता चल सके कि इतनी गंभीर घटना के पीछे मुख्य कारण क्या थे। यह भी सामने आया कि कोचिंग सेंटर का संचालन अवैध था, क्योंकि बिना अनुमति के बेसमेंट का उपयोग किया जा रहा था।

ट्रायल कोर्ट ने पहले चार जमीन मालिकों की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनकी जिम्मेदारी इस अवैध कोचिंग सेंटर के संचालन से जुड़ी है। जमीन मालिकों ने बेसमेंट कोचिंग सेंटर के लिए अवैध रूप से किराए पर दिया था, जिससे छात्रों की सुरक्षा में लापरवाही हुई और इस त्रासदी का कारण बना।

राव IAS स्टडी सर्कल की इस घटना के बाद दिल्ली के अन्य कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा और वैधता पर भी सवाल उठने लगे। एक और लोकप्रिय कोचिंग सेंटर, दृष्टि IAS, को भी सुरक्षा मानकों की कमी के कारण सील कर दिया गया। यह मामला उन समस्याओं को उजागर करता है जो दिल्ली के राजेंद्र नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में अवैध कोचिंग सेंटरों के संचालन से उत्पन्न होती हैं। UPSC की तैयारी करने वाले हजारों छात्र इस इलाके में रहते हैं और विभिन्न कोचिंग सेंटरों में अध्ययन करते हैं, लेकिन इन सेंटरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस मामले में दोनों आरोपितों को फिलहाल जमानत मिल चुकी है, लेकिन उनके खिलाफ जाँच और कानूनी कार्यवाही जारी है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि इस मामले में जुड़े सभी पक्षों पर जुर्माना लगाया जाए और यह धनराशि रेड क्रॉस सोसाइटी में जमा कराई जाए। साथ ही, हाई कोर्ट की दिशा में बने इस समिति के तहत सभी अवैध कोचिंग सेंटरों पर नजर रखी जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

बुरहानपुर में रेल पटरी पर डेटोनेटर बिछाने वाला साबिर गिरफ्तार, रेलवे का ही है कर्मचारी: कर्नाटक से कश्मीर जा रही थी आर्मी स्पेशल ट्रेन, NIA भी जाँच में जुटी

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में बुधवार (18 सितंबर) को रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर बरामद हुए थे। आशंका जताई गई थी कि ये डेटोनेटर उस ट्रेन को ब्लास्ट के साथ बेपटरी करने के लिए रखे गए थे, जिसमें अधिकतर भारतीय सेना के जवान व अधिकारी सफर कर रहे थे। अब इस मामले में पुलिस ने साबिर नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया है। साबिर रेलवे का ही कर्मचारी है। इस करतूत के पीछे के मकसद की जाँच करवाई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलवे के स्टाफ साबिर की गिरफ्तारी सोमवार (23 सितंबर 2024) को हुई है। उस से NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी), ATS और RPF पूछताछ कर रही है। डेटोनेटर को पटरी पर रखना कोई साजिश थी या शरारत इसकी भी पड़ताल करने में जाँच एजेंसियाँ जुटी हुई है। साबिर की गिरफ्तारी का संज्ञान रेल मंत्रालय ने भी लिया है। मंत्रालय की तरफ से भी जाँच के आदेश जारी किए गए हैं। मामला सेना से जुड़ा हुआ है इसलिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

वहीं इस मामले में सेंट्रल रेलवे के जनसम्पर्क अधिकारी डॉ स्वप्निल नीला का भी बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि बरामद डेटोनेटर रेलवे द्वारा ही प्रयोग में लाए जाते हैं लेकिन ये जहाँ मिले, वहाँ उनके होने का औचित्य नहीं था। बताते चलें कि डेटोनेटर अमूमन कोहरे या धुंध में ट्रेनों को रोकने के काम आते हैं। इनकी आवाज से ड्राइवर को अलर्ट जाता है और वो ट्रेन को रोकना शुरू कर देते हैं। ये डेटोनेटर स्टेशन मास्टर, की मैन और लोको पायलट आदि के पास उपलब्ध होते हैं।

बताते चलें कि यह घटना बुरहानपुर के नेपानगर इलाके की है। यहाँ के सागफाटा इलाके से 18 सितंबर को जम्मू कश्मीर से होते हुए आर्मी स्पेशन ट्रेन कर्नाटक की तरफ जा रही थी। अचानक ही ट्रैक पर विस्फोट होने लगे तो लोको पायलट ने ट्रेन रोक कर एक बड़े हादसे की आशंका को टाल दिया। मामले की सूचना उसी समय कंट्रोल रूम को दी गई थी जिसके बाद एजेंसियों ने जाँच शुरू कर दी थी।

अर्चना तिवारी ‘पत्रकार’ नहीं, उस पर एक्शन ले कश्मीर पुलिस, क्योंकि उससे बात करते ही बाहर आ जाता है कश्मीरियों का ‘जहर’: यास्मीन खान की पत्रकारिता माशाअल्लाह!

जम्मू-कश्मीर में चल रहे विधानसभा चुनावों में इस समय कई पत्रकार ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इस दौरान वो जनता से कुछ सवाल करते हैं और बदले में जो जवाब आता है वो उस व्यक्ति विशेष की निजी राय होती है। ‘द राजधर्म’ की रिपोर्टर अर्चना तिवारी भी इस समय ग्राउंड पर ही हैं। वह लगातार कश्मीरी वोटरों से बात करते हुए उनकी राय अपने दर्शकों तक पहुँचा रही हैं।

इस रिपोर्टिंग के दौरान कभी हँसी-मजाक करते हुए कभी गंभीर रहते हुए अर्चना अपने सवाल करती हैं और सामने वाला शख्स उसका जवाब देता है। हाल में इसी सवाल-जवाब के क्रम में अर्चना तिवारी से एक मुश्ताक नाम का इस्लामी कट्टरपंथी टकरा गया। उसने खुलेआम कैमरे पर बोला कि अगर हिंदू उनकी जमीन पर आएँगे, रहेंगे, शराब पीएँगे तो वो लोग हिंदुओं को मारेंगे। इसके साथ उसने वीडियो में ये भी साफ-साफ कहा कि अगर उनके क्षेत्र में हिंदू मंदिर बना तो उन्हें (मुसलमानों को) उसे जलाना ही पड़ेगा।

इस वीडियो के पब्लिक होने के बाद कइयों ने इसे साझा करते हुए अपनी चिंता जताई और सोचने लगे कि 90 के दशक में ऐसी ही मानसिकता से भरे लोग कश्मीर में रहे होंगे इसलिए पंडितों का नरसंहार हुआ। ये सोच गलत भी नहीं जान पड़ती।

जब एक शख्स खुलेआम कैमरे पर इस तरह की बातें कर रहा है, अपनी नफरत दिखा रहा है तो सोचने वाली बात है कि एक हिंदू के मन में और क्या आ सकता है? अर्चना तिवारी ने अपनी वीडियो में बार-बार उस मुश्ताक को समझाना चाहा कि वो हिंदू हैं और उन्हें जब समस्या नहीं होती कि मुस्लिम रहें तो फिर मुस्लिमों को क्या परेशानी है।

अर्चना की बात सुन मुश्ताक एक बार नहीं, बार-बार यही दोहराता रहा कि वो मुसलमान है और उसे इस बात से प्रॉब्लम है कि कोई हिंदू मंदिर बने और हिंदू वहाँ पूजा पाठ करें।

मुश्ताक की वीडियो देखने के बाद जब कश्मीर में मुस्लिमों की कट्टर मानसिकता पर फिर सवाल उठने लगे तो इसे देख एक मुस्लिम महिला पत्रकार इससे बिदक गईं। महिला पत्रकार का नाम यास्मीन खान है। X पर मौजूद उनकी पब्लिक प्रोफाइल के बायो में लिखा है कि जामिया से पढ़ीं यास्मीन खान मुस्लिम मिरर, ग्रेटर कश्मीर, सलाम टीवी न्यूज, बतौर पत्रकार काम किया है और फिर ‘आवाज द वॉयस’ के लिए जम्मू-कश्मीर में रिपोर्ट कर रही हैं।

यास्मीन अर्चना तिवारी को पत्रकार नहीं मानतीं और चाहती हैं कि कश्मीर में ग्राउंड रिपोर्ट करने के लिए उन्हें जेल भेज दिया जाना चाहिए क्योंकि अर्चना की रिपोर्टिंग से कश्मीरियों का गलत चेहरा दुनिया के सामने आ रहा है। अपने ट्वीट में यास्मीन ने बिना अर्चना के नाम का उल्लेख करते हुए लिखा- “कश्मीर में एक व्यथित करने वाला प्रयास चल रहा है। एक यट्यूबर सड़कों पर उतरकर मासूम, कम-पढ़े लिखे लोगों से मंदिर, मस्जिद और शराब जैसे संवेदनशील मुद्दों पर उनकी विचार पूछ रही हैं। लोगों की समझ की कमी का फायदा उठाते हुए अपना नैरेटिव चला रही है। इससे हमारी कश्मीरियों को खतरा है। मेरा अनुरोध है कि श्रीनगर पुलिस ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तार करे और हमारे समुदाय को इस खतरे से बचाएँ।”

यास्मीन ने बड़ी चालाकी से अपने एक्स पर ये ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने अर्चना का नाम तो नहीं लिखा लेकिन जो कंटेंट का विवरण उन्होंने दिया है उससे साफ है कि वो द राजधर्म वाली अर्चना तिवारी और मुश्ताक के बीच हुई बातचीत का ही जिक्र कर रही हैं। ट्वीट में वह हिंदुओं का मंदिर जलाने की बात खुलेआम कहने वाले मुश्ताक को मासूम कह रही है वहीं दूसरी ओर चुप-चाप उसकी बात सुनने वाली अर्चना तिवारी के लिए कश्मीर पुलिस को उकसा रही हैं कि वो उन्हें गिरफ्तार करें।

हैरानी की बात ये है कि इतनी अनुभवी पत्रकार होने के बावजूद यास्मीन सही गलत में फर्क नहीं समझ पा रहीं। अगर कोई उनके इस रवैये को देख उन्हें निष्पक्ष पत्रकार न कहकर मजहब के काम करने वाली पत्रकार कहे तो क्या गलत होगा?

वायरल वीडियो देखने पर साफ पता चलता है कि मुश्ताक से अर्चना ने बस ये सवाल किए थे कि भाजपा की किन बातों के कारण वो लोग उन्हें वोट नहीं देंगे… ये सवाल तो कोई घुमा फिराकर नहीं पूछा गया था। मगर, इस सीधे से सवाल का जवाब में अगर हिंदू घृणा दिखाई जाए…तो इसमें अर्चना की गलती क्या है और क्यों उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

अपने ट्वीट पर तो उन्होंने कश्मीर में रिपोर्टिंग के दौरान उस कश्मीरी उमर की वीडियो भी डाली है जो भारतीय सेना के जवानों को हीरो समझता है, मानता है कि जवान देश की जनता के लिए शहीद होते हैं, जिसका फेवरेट क्रिकेटर विराट कोहली है।

उन्होंने उस बुजुर्ग व्यक्ति की भी वीडियो डाली है जो कहते हैं कि इतने सालों में अब कश्मीर में शांति दिखने लगी है।

अब इन लोगों की प्रतिक्रिया डालना अगर गलत नहीं है या उनसे पूछे सवाल गलत नहीं हैं तो फिर मुश्ताक से किए गए सवाल कैसे गलत हो सकते हैं या उस शख्स से किए गए सवाल कैसे गलत हो सकते हैं जो जवाब में बस ये बोले कि उन्हें हिंदू किसी कीमत पर नहीं चाहिए।

सवाल करना और जवाब पूछना… यही प्रक्रिया तो ग्राउंड पर रहते हुए हर पत्रकार फॉलो करता है। वो भी चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान तो खासकर लोगों के मन टटोले जाते हैं कि उन्हें किस पार्टी का क्या काम पसंद है क्या नहीं। इसमें गिरफ्तारी की बात कैसे आ गईं?

कहीं अपने आपको कश्मीरी पत्रकार कहने वाली यास्मीन खान को अर्चना तिवारी से समस्या इसलिए हो रही है क्योंकि उनकी रिपोर्टिंग के जरिए कट्टरपंथ में सने लोग और उनकी हिंदू घृणा से लबरेज विचार सामने आ रहे है।

यास्मीन कहती हैं कि अर्चना कश्मीर के भोले-भाले लोगों अपने जाल में फँसा रही हैं और उनसे ऐसी बातें उगलवा रही हैं। उन्हें ये चिंता नहीं है कि कश्मीर के लोगों के मन में हिंदुओं के प्रति कितना जहर घुला हुआ है, उनकी समस्या ये है कि अगर कश्मीर के कट्टरपंथी मुस्लिम अगर ऐसी सोच रखे भी हुए हैं तो इसका पता दुनिया को नहीं चलना चाहिए ताकि यास्मीन जैसे लोग पत्थरबाजों को मासूम कहने वाला अपना जमकर नैरेटिव चला सकें।

इन लोगों की यसी मानसिकता वजह है कि ये आज भी बातें कश्मीर और कश्मीरियत की करते हैं लेकिन कश्मीर की भलाई के लिए हटाए गए आर्टिकल 370 के फैसले को नहीं पचा पाए हैं। उनकी इसी मंशा को परखते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने मेनिफेस्टो में घोषणा भी की है कि अगर उनकी सरकार आती है तो वो अनुच्छेद 370 को लेकर आएँगे। शायद यास्मीन जैसों को लगता है कि अनुच्छेद 370 आने के बाद दोबारा से उनका दौर आ जाएगा।

‘पोस्टमार्टम जल्दी करो, नहीं तो खून की नदी बहेगी’: दावा- कोलकाता में जिस डॉक्टर का रेप-मर्डर उसका ‘चाचा’ बनकर पोस्टमार्टम करवाने पहुँचा था TMC नेता, सुवेंदु अधिकारी ने शेयर किया Video

कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के साथ रेप और हत्या मामले में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने विस्फोटक दावा किया है। अधिकारी ने कहा है कि पीड़िता डॉक्टर के पोस्टमार्टम के समय एक स्थानीय TMC नेता उसका चाचा बन कर पहुँच गया था और पोस्टमार्टम में जल्दी कर रहा था। सुवेंदु ने यह CBI पूछताछ से निकले डॉक्टर के हवाले से किया है।

सुवेंदु अधिकारी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आर जी कर मेडिकल कॉलेज में बलात्कार और हत्या की शिकार हुई जूनियर महिला डॉक्टर का पोस्टमार्टम करने वाली फॉरेंसिक टीम के सदस्य डॉक्टर अपूर्वा बिस्वास को CBI ने तलब किया था। पूछताछ के बाद बाहर निकलते समय उन्होंने पत्रकारों के सामने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वहाँ एक व्यक्ति था जो खुद को पीड़िता का चाचा बता रहा था और धमकी दे रहा था कि अगर पोस्टमार्टम दिन के अंत तक पूरा नहीं हुआ तो ‘खून की नदी’ बहा दी जाएगी।”

सुवेंदु अधिकारी ने आगे बताया कि यह व्यक्ति TMC का पूर्व पार्षद है। उन्होंने लिखा, “यह व्यक्ति कौन है? यह व्यक्ति संजीब मुखर्जी है। वह पानीहाटी नगर पालिका के पूर्व CPIM पार्षद है, जो बाद में TMC में शामिल हो गया और पानीहाटी TMC विधायक निर्मल घोष का करीबी बन गया।”

सुवेंदु ने आरोप लगाया कि डॉक्टर के अंतिम संस्कार में जल्दबाजी बरती गई। उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ के स्थानीय विधायक निर्मल घोष भी शमशान घाट में डॉक्टर के अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे। अधिकारी ने कहा कि घोष को इसका आदेश CM ममता बनर्जी से मिला था।

सुवेंदु अधिकारी ने पीड़िता के अंतिम संस्कार की पर्ची भी पेश की और प्रश्न उठाया कि आखिर इस पर संजीब मुखर्जी के हस्ताक्षर क्यों हैं। उन्होंने बताया कि इसी पर्ची पर सोमनाथ डे नाम के एक आदमी के भी हस्ताक्षर हैं जिसका नाम सोमनाथ डे है। उन्होंने बताया कि इस इलाके में सोमनाथ डे नाम का एक और पूर्व TMC पार्षद है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या दोनों एक ही हैं।

सुवेंदु अधिकारी ने डॉक्टर अपूर्ब बिस्वास का एक वीडियो भी साझा किया है। इसमें डॉक्टर बिस्वास बताते हैं कि अपने आप को पीड़िता का रिश्तेदार बताने वाला व्यक्ति डॉक्टरों और परिवार तक पर जल्दी पोस्टमार्टम का दबाव बना रहा था। डॉक्टर ने बताया कि वह पूर्व पार्षद हैं और मैं उनका नाम नहीं बता सकता। डॉक्टर ने यह भी कहा कि वह व्यक्ति उस इलाके का पूर्व पार्षद है जहाँ पीड़िता का परिवार रहता है। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने यह आरोप लगाए।

इन आरोपों के बाद राज्य की ममता सरकार बैकफुट पर है। अभी इस मामले में कोई खंडन सामने नहीं है। यह भी साफ़ नहीं हुआ है कि संजीब मुखर्जी कौन है और क्या उसका सही में पीड़िता के परिवार से कोई रिश्ता है या फिर वह यहाँ प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर की लाश मिली थी। डॉक्टर की हत्या से पहले उसके साथ रेप किया गया था और उसके साथ वीभत्सता हुई थी। इस मामले को पहले पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने आत्महत्या बताने का प्रयास किया था। हालाँकि, परिवार के दबाव के चलते इसे हत्या के तौर पर जाँच हुई।

इस मामले में अब तक जाँच को प्रभावित करने, घटनास्थल से सबूत मिटाने, पीड़ित परिवार को पैसे की पेशकश करने समेत लापरवाही के आरोप सामने आ चुके हैं। अब इस नए आरोप को जाँच में क्या सामने आता है, इससे साबित होगा कि क्या अंतिम संस्कार में भी दखल दिया गया।

‘5 गाड़ियों में आए, कनपटी में पिस्टल सटा पूरे शहर में घुमाया’: जानिए कैसे हुआ अयोध्या के रवि तिवारी का अपहरण, MP अवधेश प्रसाद के जिस बेटे का FIR में नाम उसे ही सपा ने दिया विधायकी का टिकट

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में रविवार (22 सितंबर 2024) को मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अजीत प्रसाद के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। अजीत प्रसाद फैज़ाबाद लोकसभा सीट से सपा सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे हैं। यह मामला रवि तिवारी नाम नाम के युवक ने अपने अपहरण और मारपीट का आरोप लगा कर दर्ज करवाया है। यह झगड़ा एक जमीनी विवाद को ले कर हुआ था जिसमें अजीत प्रसाद के साथी शशिकांत राय व राजू यादव भी नामजद हैं। पुलिस द्वारा की जा रही में पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों के सबूत पाए गए हैं। इस बीच, सपा सांसद अवधेश प्रसाद अपने बेटे के साथ खुल कर खड़े हो गए हैं।

पीड़ित रवि तिवारी ने अपनी शिकायत में अजीत प्रसाद को ‘राजनीतिक दबंग’ बताया है। उनकी FIR के अनुसार, 21 सितंबर 2024 को अजीत प्रसाद, शशिकांत राय, और राजू यादव 5 गाड़ियों में सवार होकर आए। उनके साथ 15-20 अन्य लोग भी थे। अजीत प्रसाद ने रवि तिवारी को एक बैंक के सामने से जबरदस्ती अपनी गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद, रवि को शहर के विभिन्न हिस्सों में घुमाया गया। इस दौरान अजीत प्रसाद ने पीड़ित के सिर पर पिस्टल तान दी और उसके साथ मारपीट की गई।

रवि तिवारी का आरोप है कि अजीत और उनके साथियों ने उनसे 1 लाख रुपये वापस लेने के लिए दबाव डाला और इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। FIR के अनुसार, आरोपितों ने इस पैसे से संबंधित विवाद का निपटारा करने के लिए दबाव बनाया और मारपीट की।

सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 (3), 115 (2), 191 (3) और 351 (3) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इन आरोपों पर अयोध्या के पुलिस अधीक्षक(सिटी) मधुबन कुमार सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि CCTV फुटेज में पीड़ित द्वारा लगाए गए 5 गाड़ियों से आरोपितों के आने की पुष्टि हुई है। इसी वीडियो में यह भी सामने आया है कि आरोपित पीड़ित को अपने साथ ले गए थे।

पुलिस अधीक्षक नगर ने आगे बताया कि जमीन संबंधी लगा गए आरोपों पर भी जाँच में प्रमाण जुटाए गए हैं। विक्रेता ने यह स्वीकार किया है कि उसने रवि तिवारी को अपनी जमीन बेची थी। पीड़ित का दावा है कि उसने शीतला प्रसाद नाम के एक व्यक्ति को उसकी जमीन खरीदने के नाम पर 1 लाख रुपए का एडवांस दिए थे। रवि का दावा है कि उन्होंने शीतला प्रसाद की जमीन को अजीत प्रसाद और लाल बहादुर नाम के नाम पर बैनामा कराने में मध्यस्थता की थी।

अवधेश प्रसाद की नजर में बेटा बेगुनाह

इस बीच सपा सांसद अवधेश प्रसाद खुल कर अपने बेटे के समर्थन में उतर गए हैं। उन्होंने अजीत प्रसाद पर लगे आरोपों को झूठा, भ्रामक और राजनीति से प्रेरित बताया है। अखिलेश यादव द्वारा खुद से अपने बेटे को टिकट दिए जाने का जिक्र करते हुए अवधेश प्रसाद ने भाजपा को डरा बताया। इसी दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका बेटा बड़े वोटों के अंतराल से चुनाव जीतने जा रहा है।

फ़िलहाल अभी तक इस मामले में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। आरोपितों के खिलाफ सबूत जुटाने व दबिश के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना ने अयोध्या की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है।

अयोध्या में सपा प्रत्याशी अजीत प्रसाद पर लगे ये गंभीर आरोप उनके चुनावी अभियान को बड़ा झटका दे सकते हैं। अपहरण, मारपीट और पिस्टल तानने जैसे गंभीर आरोपों के बीच पुलिस की जाँच जारी है। वहीं, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है और इसे राजनीति से प्रेरित साजिश करार दिया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच के बाद इस मामले में क्या नतीजा निकलता है और आरोपितों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।