Home Blog Page 648

हिजबुल्लाह के आतंकियों पर नरमी नहीं दिखाएगा इजरायल, लेबनान में ’21 दिनों का युद्धविराम’ के अमेरिकी प्रस्ताव को नेतन्याहू की ना: कहा- गाजा में भी लड़ाई जारी रहेगी

फिलिस्तीन के बाद इजरायल का लेबनान पर सैन्य कार्रवाई जारी है। लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह पर कार्रवाई के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपातकालीन बैठक की। बुधवार (25 सितंबर) को अमेरिका, फ्रांस और उनके कुछ सहयोगियों ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 21 दिन के युद्ध विराम की अपील की। साथ ही गाजा में भी युद्ध विराम के लिए समर्थन व्यक्त किया।

संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के दूत ने इस आह्वान का स्वागत किया और कहा कि इजरायल कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। हालाँकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह समझौता उन शर्तों को पूरा नहीं करता है, जिसके तहत इजरायल के निवासियों को सुरक्षित रूप से अपने घरों में लौटने की अनुमति दी जाए तो इजरायल बल प्रयोग करने में संकोच नहीं करेगा।

इस बीच खबरें आईं कि इजरायल ने हिजबुल्लाह ने 21 दिन के युद्ध विराम को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने युद्ध विराम को स्वीकार करने की खबरों को खारिज कर दिया। पीएमओ ने कहा, “युद्ध विराम के बारे में रिपोर्ट गलत है। यह एक अमेरिकी-फ्रांसीसी प्रस्ताव है, जिस पर प्रधानमंत्री ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।”

यह बयान तब जारी किया गया है, जब नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क जा रहे थे। इस रिपोर्ट को को भी खारिज कर दिया गया है कि कूटनीतिक पहल के परिणामस्वरूप इजरायली सेना IDF ने हिजबुल्लाह को लिटानी नदी तक वापस लौटने के लिए अपने सैन्य अभियान के स्तर को कम कर दिया है, जो कि UNSC के प्रस्ताव 1701 के तहत अनिवार्य है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने आगे कहा, “उत्तर में लड़ाई कम करने के कथित निर्देश के बारे में रिपोर्ट सच्चाई के विपरीत है। प्रधानमंत्री ने आईडीएफ को अपनी प्रस्तुत योजना के अनुसार पूरी ताकत से लड़ाई जारी रखने का निर्देश दिया है। गाजा में लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक युद्ध के सभी उद्देश्य हासिल नहीं हो जाते।”

इजराइल के विदेश मंत्री इजराइल काट्ज़ ने गुरुवार (26 सितंबर) को सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “उत्तर (नॉर्थ) में युद्धविराम नहीं होगा।” इजरायल के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री का यह बयान ह्वाइट हाउस के बयान के बाद आया है। अमेरिका, फ्रांस और अन्य दस देशों ने 31 मई को गाजा में हुए युद्धविराम और बंधक समझौते के क्रियान्वयन का भी आह्वान किया है।

अपने ही मंत्री के आदेश से हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार ने झाड़ा पल्ला, कहा- दुकानों पर नाम लिखने का नहीं हुआ है फैसला: हाईकमान ने भी विक्रमादित्य सिंह को फटकारा

रेस्टोरेंट-ढाबों और खाने-पीने की रेहड़ियों पर दुकान मालिक का नाम दर्शाने को लेकर लिए गए फैसले से हिमाचल प्रदेश सरकार पलट गई है। हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने इस फैसले को लेकर अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। कॉन्ग्रेस सरकार ने साफ़ किया है कि अभी ऐसा कोई फैसला लागू नहीं किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने गुरुवार (26 सितम्बर, 2024) को इस संबंध में एक बयान जारी किया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया है कि वर्तमान में ऐसा कोई आदेश लागू नहीं है लेकिन इस पर राज्य सरकार कैबिनेट बैठक में मंथन करेगी। कॉन्ग्रेस सरकार ने कहा है कि यह फैसला लेने से पहले सभी लोगों से राय ली जाएगी।

कॉन्ग्रेस सरकार ने यह भी बताया है कि इस संबंध में एक कमिटी का गठन किया गया है। इसके मुखिया राज्य सरकार में मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान होंगे। इस कमिटी में भाजपा और कॉन्ग्रेस, दोनों राज्यों के विधायक शामिल होंगे। कमिटी इस मुद्दे को लेकर विचार विमर्श करेगी। यह कमिटी अपने सुझाव सरकार को देगी।

कॉन्ग्रेस सरकार ने यह स्पष्टीकरण कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के ऐलान के एक दिन के बाद दिया है। विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट करके इस निर्णय की जानकारी दी थी। इसमें उन्होंने बताया था कि हिमाचल प्रदेश में शुद्ध भोजन मिले, इसके नाम दर्शाने को अनिवार्य किया जा रहा है।

विक्रमादित्य सिंह ने इस निर्णय को बताते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा लिए गए ऐसे ही निर्णय की एक फोटो डाली थी। विक्रमादित्य सिंह के इस बयान के बाद खलबली मच गई थी। कहा गया था कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के नक़्शेकदम पर लिया गया है।

योगी सरकार ने इससे पहले कांवड़ यात्रा के दौरान जब ऐसा ही निर्णय लिया था तो कॉन्ग्रेस ने इसे संविधान पर हमला बताया था। इसके बाद जब हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐसा ही निर्णय लिया तो लोगों ने दोहरे रवैये पर प्रश्न उठाए। इसके बाद गुरुवार को इस संबंध में स्पष्टीकरण दे दिया गया।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में आदेश दिया है कि होटल-रेस्टोरेंट, ढाबों और दुकानों पर मालिक और मैनेजर का नाम और उनका पता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा सरकार ने आदेश दिया है कि रेस्टोरेंट-होटल में सब कहीं CCTV भी लगाए जाएँ।

विक्रमादित्य सिंह ने गुरुवार को इसको लकर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में नाम प्रदर्शित करने को लेकर लिया गया निर्णय योगी सरकार से सम्बन्धित नहीं है। उन्होंने कहा कि था कि हिमाचल अलग राज्य है और इसके अलग मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं के कारण इस मामले पर कमिटी बनाई गई है।

रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि विक्रमादित्य के इस बयान को लेकर कॉन्ग्रेस हाईकमान खफा है। दावा किया गया है कि विक्रमादित्य सिंह से ऐसे बयानों से बचने की अपील की गई है। यह भी बताया गया है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे विक्रमादित्य सिंह से इस बात को लेकर खासे गुस्सा हैं।

जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए बनाया ₹8300 करोड़ का फंड, उसने अब अमेरिका में खरीदे 200+ रेडियो स्टेशन: कौन है PM मोदी-ट्रंप से घृणा करने वाला जॉर्ज सोरोस?

वामपंथी अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस को अमेरिका में ‘ऑडेसी’ खरीदने की मंजूरी मिल गई है। ऑडेसी कंपनी अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी रेडियो चेन है और इसके पास अमेरिका के भीतर 200 से अधिक रेडियो स्टेशन हैं। इसे सुनने वालों की संख्या 16 करोड़ से अधिक है। इसे हाल ही में अमेरिका में रेडियो, केबल और ऐसे ही इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को नियंत्रण करने वाली संस्था FCC ने मंजूरी दी है। यह एक बड़ी डील मानी जा रही है।

FCC की इस मंजूरी के कारण अमेरिकी चुनाव के कुछ दिन पहले वामपंथी कारोबारी की पहुँच 16 करोड़ से अधिक लोगों और 40 बाजारों तक हो सकती है। जिस कम्पनी को सोरोस ने अधिग्रहित किया है उस पर $400 मिलियन (लगभग ₹3200 करोड़) का कर्ज है। सोरोस ने हाल ही में यह कर्ज अपने हाथों में ले लिया था। सोरोस ने लगभग $280 मिलियन टर्म लोन और $135 मिलियन रिवॉल्विंग कर्ज को 50 सेंट/डॉलर पर या ऑडेसी में लगभग 40% मालिकाना हक़ के बदले लिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, “FCC का यह निर्णय मतदान के बाद आया। FCC में शामिल 3 डेमोक्रेट ने इस कदम के पक्ष में मतदान किया, जबकि दो रिपब्लिकन ने इसके खिलाफ मतदान किया।” FCC नियमों के अनुसार, अमेरिकी रेडियो स्टेशनों पर किसी विदेशी कंपनी का मालिकाना हक़ 25% से अधिक नहीं होना चाहिए।

इस विषय में उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेजों के अनुसार, सोरोस ने कम्पनी की बोली लगाने के लिए अपने विदेशी निवेश वाली कम्पनी का इस्तेमाल किया। उसने विदेशी कम्पनी के जरिए मालिक बनने के लिए FCC से रियायत भी माँगी। इस प्रक्रिया में अमेरिकी सुरक्षा पर प्रभाव को भी जाँचा जाता है, इस प्रक्रिया में 1 साल तक लग सकता है। इस बार इसका पालन भी नहीं हुआ।

FCC के एक प्रवक्ता के अनुसार, “कोई भी निर्णय तब तक अंतिम नहीं होता जब तक आयोग इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता। सोरोस वाले निर्णय हमने सार्वजनिक नहीं किया है।” FCC के प्रवक्ता ने बताया है कि उसे ऑडेसी के दिवालिया होने के पहले के स्वरुप और बाद के स्वरुप को लेकर आवेदन मिला है। उसने बताया है कि इसमें 1 साल तक लगता है।

दूसरी ओर, FCC के कुछ लोगों ने इस बात को नकारा है कि सोरोस वाली डील में कोई जल्दबाजी बरती गई है। उन्होंने बताया कि क्यूम्यलस मीडिया (2018), आईहार्ट मीडिया (2019), लिबरमैन टेलीविजन (2019), फ्यूजन कनेक्ट (2019), विंडस्ट्रीम होल्डिंग्स (2020), अमेरिका-सीवी स्टेशन ग्रुप (2021), और अल्फा मीडिया (2021) के ऐसे ही दिवालिया होने के बाद यही प्रक्रिया अपनाई गई थी और इतना ही समय लिया गया था।

वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नामित FCC आयुक्त नाथन सिमिंगटन ने इस प्रक्रिया की आलोचना की है और दावा किया है कि इसे तेजी से आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, “FCC ऐसी कम्पनियों को विदेशी स्वामित्व वाली सीमा की शर्त से छूट देता है जो दिवालियापन से बाहर निकल रहीं हो। मेरे विरोध के बावजूद, इस निर्णय में ऐसा ही किया गया। लेकिन यह एकमात्र ऐसा कारण नहीं था जिससे इसको तेजी से आगे बढ़ाया गया।”

सिमिंगटन ने आगे बताया, “FCC ने कर्मचारियों के ही स्तर पर इसे निपटाने का फैसला ले लिया था। इसकी सूचना FCC आयुक्तों को शुक्रवार को दी गई। इस संबंध में लगभग कोई तथ्यात्मक रिकॉर्ड नहीं है क्योंकि इसका कोई विश्लेषण तक नहीं किया गया। अध्यक्ष के अलावा किसी भी आयुक्त को इस मुद्दे के बारे में विचार करने के लिए नहीं बुलाया गया। यहाँ तक कि कर्मचारियों को हमारे वोट के बिना हमारी ओर से इसे संभालने का निर्देश दिया गया था। यही असली फास्ट-ट्रैक है।”

ट्रंप द्वारा FCC में नामित दूसरे सदस्य ब्रेंडन कैर ने भी पहले इस सौदे के बारे में चिंता जताई थी। उन्होंने हाल ही में कहा, “मुझे लगता है कि FCC कई वर्षों से स्थापित की गई लेन-देन की समीक्षा के लिए अपनी सामान्य प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा है। मुझे लगता है कि FCC पहली बार एक बिल्कुल नया शॉर्टकट बनाने के लिए तैयार है।”

कैर ने कहा, “हम आम तौर पर लोगों से हमारे पास याचिका दायर करने के लिए कहते हैं, इसके बाद विदेशी मालिकाना हक़ की जाँच के लिए सुरक्षा एजेंसियों की राय लेते हैं और उसके बाद मतदान करते हैं। यहाँ, वे कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं जो आयोग के मामले में पहले कभी नहीं किया गया है।”

कैर ने एक इंटरव्यू में कहा, “सोरोस देश के दूसरे सबसे बड़े रेडियो स्टेशन समूह को खरीदना चाहता है। उनमें से कुछ पेंसिल्वेनिया, वर्जीनिया और फ्लोरिडा (आगामी राष्ट्रपति चुनाव में महत्वपूर्ण राज्य) में हैं। अधिकांश संभवतः संगीत या खेल से संबंधित हैं, लेकिन उन राज्यों में कुछ ऐसे भी हैं जो बातचीत प्रसारित करते हैं।”

हालाँकि, एक वेबसाइट दिखाती है कि यह अमेरिका की सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली रेडियो कम्पनियों में से एक है। ऑडेसी ने जनवरी में दिवालियापन के लिए आवेदन किया था, इसमें दावा किया गया था कि उनके विज्ञापन राजस्व में अरबों डॉलर की गिरावट आई है। उन्ह्होने इसे वित्तीय कठिनाइयों का सबसे बड़ा कारण बताया था।

सोरोस के इस कम्पनी को खरीदने के बाद अवर्तमान शेयरहोल्डर की भागीदारी इसमें खत्म हो जाएगी। इससे पहले टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने अप्रैल में सोरोस की संदिग्ध गतिविधियों पर FCC के ढुलमुल रवैये का मामला उठाया था।

रॉय द्वारा खुलासा किए जाने से कुछ महीने पहले ही सोरोस ने ऑडेसी में लगभग $400 मिलियन का निवेश किया था। रॉय ने एक कानून का हवाला दिया, इसके अनुसार जिन फर्मों में 25% से अधिक विदेशी स्वामित्व है, वह रेडियो लाइसेंस नहीं रख सकतीं। रॉय के कारण सोरोस की रेडियो नेटवर्क खरीदने की योजना खटाई में पड़ गई।

रॉय ने FCC को एक पत्र में लिखा है कि सोरोस ने FCC को आवेदन देकर सामान्य प्रक्रिया का पालन करने के बजाय प्रक्रिया ही खत्म करने का आवेदन दिया और इसे कुछ समय के लिए टालने का अनुरोध भी किया। सोरोस ने इस पूरी प्रकिया को ही उलट पलट डालने का प्रयास किया।

93 साल के वामपंथी सोरोस ने अपनी 6.7 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति का उपयोग करके कई लिबरल नीतियों को बढ़ाया है। 2021 में, उसने अपने ‘ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन’ के माध्यम से चुनाव और राजनीतिक न्याय के नाम परकम से कम $140 मिलियन का योगदान दिया।

सोरोस ने 2023 में अपने बेटे एलेक्स को अपनी विरासत सौंप दी थी। इस बीच उसका संगठन लाखों डॉलर खर्च करके टेक्सास जैसे राज्यों में डेमोक्रेट को जिताने के लिए काम कर रहा है। सोरोस लगातार ऐसे मीडिया संस्थान कब्जाता रहा है जो दक्षिणपंथी झुकाव रखते हैं। सोरोस ने पिछले साल के चुनाव से पहले पोलैंड में एक मीडिया कंपनी खरीदी थी और इसने एक दक्षिणपंथी सरकार को गिराने में अहम रोल निभाया था।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस?

जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।

जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।

साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।

सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।

इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।

सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और पीएम मोदी को तानाशाह कहा था। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कॉन्ग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।

भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जोड़ा गया था। 31 अक्टूबर, 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।

CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।

कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।

दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नरफत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।

मदरसे के 12 वर्षीय छात्र को मौलाना ने बीड़ी पीने से रोका, कर दी पिटाई: गुस्साए किशोर ने रात में आकर आस मोहम्मद के गले को आरी से रेता, हालत गंभीर

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पिटाई से भड़के मदरसे के एक नाबालिग छात्र ने धारदार हथियार से मौलवी का गला रेत दिया है। इसमें मौलवी गंभीर रूप से घायल हो गया है। गंभीर हालात में मौलवी को हापुड के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मदरसा अवैध रुप से चल रहा है।

यह घटना मोदीनगर शहर के भोजपुर थाना क्षेत्र के गाँव त्योढ़ी 13 बिस्वा स्थित मदरसे की है। इस मदरसे में 8वीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। यहाँ कक्षा छह में गाँव का ही एक 13 वर्षीय किशोर भी पढ़ाई करता है। कहा जा रहा है कि दो दिन पहले वह कक्षा में बीड़ी पीता हुआ पकड़ा गया था। इसके बाद मदरसे के मौलाना आस मोहम्मद ने देख लिया था।

आस मोहम्मद ने किशोर को टोका और बीड़ी पीने के कारण उसकी पिटाई कर दी। मौलाना ने किशोर को दोबारा बीड़ी नहीं पीने की चेतावनी भी दी। इससे छात्र भड़क गया। वह देर शाम मदरसे में गया और कमरे में सो रहे आस मोहम्मद का गला आरी से रेत दिया। इस अचानक हमले से मौलाना आस मोहम्मद चिल्लाने लगा। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग दौड़ते हुए आए।

उन्होंने देखा कि मौलाना के गले से खून बह रहा है और वह गंभीर रूप से घायल है। इसके बाद वे मौलाना को लेकर अस्पताल लेकर पहुँचे। सूचना मिलते ही गाजियाबाद पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। उसने पूछताछ के लिए छात्र को हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही घटनास्थल से खून से सनी आरी बरामद कर ली है। मदरसे को भी कब्जे में ले लिया गया है।

पुलिस इस मामले का संज्ञान लेकर इसकी जाँच कर रही है। हालाँकि, इस मामले में अभी तक किसी ने तहरीर नहीं दी है। एसीपी मोदीनगर ज्ञान प्रकाश राय ने बताया कि मौलाना का अस्पताल में उपचार चल रही है। उनकी हालत खतरे से बाहर है। इस मामले में जाँच की जा रही है।

‘नरेश चिकन कॉर्नर’ पर थूक वाली रोटी सेंक रहा था शहजाद… हिंदू नाम देख इस्लामी कट्टपंथियों ने झूठ फैलाया, गिरफ्तारी के बाद सब चुप

सोशल मीडिया पर थूक वाली वीडियो दिखना कोई नया नहीं रह गया। 25 सितंबर को भी ऐसी एक वीडियो वायरल हुई थी। वीडियो बागपत के टिटिरी शहर स्थित नरेश चिकन कॉर्नर से थी। वीडियो में एक युवक रोटी पर थूककर उसे सेंक रहा था।

हिंदुओं ने जहाँ इस वीडियो को देख सवाल उठाया था कि अगर हिंदुओं की दुकान पर ऐसा होगा तो किस पर विश्वास किया जाना चाहिए। वहीं इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस वीडियो के बहाने ये दिखाया था कि मुस्लिमों को बेवजह बदनाम किया जाता है। थूकने वाला काम तो हिंदू भी करते हैं।

इस क्रम में अकॉउंट से इस वीडियो को कइयों ने साझा किया। हालाँकि नाम का खुलासा होने के बाद किसी ने इस पर मुँह नहीं खोला है।

अब इसी मामले में जानकारी सामने आई है कि जिस युवक को देखकर हिंदुओं को सवालों को घेरे में घेरा जा रहा था उस युवक का नाम शहजाद है। शहजाद की वीडियो में देख सकते हैं कि वो ढाबे के बाहर हाथ से रोटी बना रहा है और फिर उसे थूककर सेंक रहा है।

पुलिस ने इस मामले में जाँच की और शहजाद को गिरफ्तार किया। ढाबे के मालिक से पूछताछ में सामने आया कि जब मालिक ने ये वीडियो देखी तो उन्होंने शहजाद से सवाल-जवाब किए लेकिन शहजाद ने सफाई देने की बजाय मालिक के साथ ही गलत व्यवहार करना शुरू कर दिया। अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

इससे पहले लोनी बॉर्डर के पास से ऐसा मामला उजागर हुआ था। जूस की दुकान पर जावेद (बदला हुआ नाम) और उसका बेटा जूस में पेशाब मिलाकर लोगों को पिला रहे थे। छानबीन में उनकी दुकान से पेशाब भरी बोतल भी मिली थी।

7 सितंबर को नोएडा के ढाबे की वीडियो सामने आई थी। यामीन का बेटा चांद रोटी पर थूकता दिखा था। उसकी वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

मालूम हो कि लगातार थूक जिहाद के मामले सामने आने के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि हर खाने की दुकान पर मालिक का नाम होना अनिवार्य है। इसके लिए पुलिस वेरिफिकेशन भी करेगी। ये निर्णय़ सीएम ने हाई लेवल मीटिंग के बाद लिया। उन्होंने रेस्टोरेंट आदि में हा ग्राहकों के बैठने वाली जगह पर सीसीटीवी लगाने के निर्देश भी दिए हैं।

अजमेर के सरकारी स्कूल में नमाज पढ़ती थीं मुस्लिम टीचर, बच्चों को भी उकसाती थीं: असमा परवीन निलंबित, शगुफ्ता पर कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को चिट्ठी

राजस्थान के अजमेर जिले के एक सरकारी स्कूल में नमाज पढ़ने और बच्चों को नमाज पढ़ने के लिए उकसाने के आरोप में एक मुस्लिम शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एक अन्य मुस्लिम शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को लिखा गया है। जिन शिक्षिकाओं पर कार्रवाई की गई है, उनके नाम हैं- असमा परवीन और शगुफ्ता। यह मामला ब्यावर खास सीनियर सेकेंडरी स्कूल का है।

ब्यावर के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार गुप्ता ने बताया, “पिछले लंबे समय से ब्यावर खास स्कूल में दो शिक्षिकाएँ विद्यार्थियों को नमाज पढ़ने के लिए उकसाती थीं। इसकी शिकायत भी शिक्षा विभाग को मिली थी। जाँच के बाद आरोप सही पाया गया। इसकी वजह से शिक्षिका असमा परवीन को सस्पेंड कर दिया गया।”  

उन्होंने आगे कहा, “दूसरी शिक्षिका शगुफ्ता सेकंड ग्रेड में होने की वजह से अपने स्तर पर सस्पेंड नहीं किया जा सकता था। इसलिए शगुफ्ता पर कार्रवाई के लिए संयुक्त निदेशक कार्यालय को रिपोर्ट भेज दिया गया है।” कहा जा रहा है कि दोनों शिक्षिकाओं को स्कूल प्रशासन ने कई बार इसको लेकर हिदायत भी दी थी, लेकिन दोनों शिक्षिकाओं पर कोई असर नहीं पड़ा।

आखिरकार, स्कूल प्रशासन और गाँव वालों ने इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अजय कुमार गुप्ता ने शिकायत मिलने पर एक जाँच कमिटी बनाई थी। इसमें अतीत मंड स्कूल की प्रिंसिपल विमला चौहान और गणेशपुरा स्कूल के प्रधानाचार्य सुनील व्यास को जाँच सौंपा गया था। जाँच में आरोप सही पाए गए हैं।

आसमा परवीन का ट्रांसफर सीबीईओ कार्यालय में किया गया है। इन्हें नियमानुसार 50 प्रतिशत निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। ब्यावर खास के कार्यवाहक प्रधानाचार्य महेंद्र माली ने बताया कि DEO के निर्देशानुसार शिक्षिका असमा परवीन को कार्यमुक्त कर दिया गया है। जबकि शिक्षिका शगुफ्ता अभी इसी स्कूल में ही कार्यरत है। इनके बारे में जो भी निर्देश मिलेंगे उसका पालन किया जाएगा।

बता दें कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा था कि शिक्षक स्कूल छोड़कर नमाज पढ़ने नहीं जा सकते। उन्होंने कहा था कि नमाज और पूजा-पाठ के नाम पर स्कूल से गायब रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई शिक्षक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना चाहता है तो वह छुट्टी लेकर जा सकता है। 

मानहानि में संजय राउत को 15 दिन की जेल-जुर्माना भी, कहा था- किरीट सोमैया ने किया ₹100 करोड़ का घोटाला: जानिए सजा सुनाए जाने के बाद भी क्यों नहीं हुई कैद

शिवसेना (उद्धव) के राज्यसभा सांसद संजय राउत को भाजपा नेता किरीट सोमैया और उनकी पत्नी के बारे में झूठ फ़ैलाने पर कोर्ट ने सजा दी है। संजय राउत को मानहानि का दोषी मानते हुए कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने यह फैसला किरीट सोमैया की पत्नी के दायर किए गए मुकदमे में सुनाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई के मझगाँव मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने गुरुवार (26 सितम्बर, 2024) को किरीट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया द्वारा दायर इस मुकदमे में सजा का ऐलान किया। कोर्ट ने संजय राउत पर झूठ फ़ैलाने और किरीट सोमैया और उनकी पत्नी की छवि खराब करने के आरोप सही पाए और उन्हें 15 दिन की जेल की सजा सुनाई।

कोर्ट ने संजय राउत पर ₹25,000 का जुर्माना भी ठोंका है। हालाँकि, संजय राउत को अभी इस मामले में जेल नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने सजा सुनाए जाने के बाद इस मामले में जमानत याचिका लगाई। इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और साथ ही उनको दी गई सजा को भी 30 दिन के लिए निलंबित कर दिया।

मेधा सोमैया ने संजय राउत के खिलाफ यह मुकदमा 2022 में किया था। मेधा ने संजय राउत पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके पति किरीट सोमैया और उनके खुद के खिलाफ भ्रष्टाचार सम्बन्धी झूठे दावे किए, इससे उनकी दशकों की बनाई छवि धूमिल हुई। उन्होंने कहा कि यह फर्जी आरोप इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में भी खूब चले।

गौरतलब है कि संजय राउत ने 2022 में किरीट सोमैया और उनकी पत्नी मेधा सोमैया पर मुंबई में शौचालयों के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। संजय राउत ने कहा था कि मीरा भायंदर इलाके में बनाए गए इन शौचालयों के निर्माण ₹100 करोड़ का घोटाला किया गया है, जिसमें सोमैया दंपती शामिल हैं।

इस बात को लेकर संजय राउत के खिलाफ मेधा सोमैया ने मामला दर्ज करवाया था। सोमैया ने इस संबंध में कोर्ट के सामने संजय राउत के वह वीडियो भी पेश किए थे जिनमें वह उन पर आरोप लगा रहे थे। कोर्ट ने इन वीडियो और बाकी सबूतों को देखते हुए राउत को दोषी माना और उन्हें सजा सुनाई।

संजय राउत को सजा दिए जाने पर किरीट सोमैया ने कहा, “संजय राउत को 15 दिन की सजा सुनाई गई, उसको हिरासत में लिया गया। ₹25000 का जुर्माना उन्हें मेधा सोमैया को देना पड़ेगा। संजय राउत की तरफ से इस मामले में अभी कोई प्रतिक्रया नहीं आई है।

जो जाली दस्तावेजों पर बन गई IAS, जिसके फ्रॉड को UPSC ने भी माना, उस पूजा खेडकर की गिरफ्तारी पर रोक हाई कोर्ट ने फिर बढ़ाई: 5 बार मिल चुकी है राहत

पुणे की बर्खास्त ट्रेनी आईएस पूजा खेडकर को दिल्ली हाईकोर्ट से लगातार पाँचवी बार राहत मिली है। जानकारी के मुताबिक जस्टिस चंद्र धारी सिंह ने पूजा के वकील के अनुरोध के बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिका को मंजूरी दे दी। अब मामले की सुनवाई 4 अक्टूबर को होनी है।

बताया जा रहा है कि इस मामले में खेडकर के वकीलों ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखने के लिए समय माँगा था। इसी कारण से पूजा खेडकर को गिरफ्तारी में मिली छूट को जारी रखा गया।

पाँच बार मिली राहत

पूजा खेडकर पर सिविल सेवा में ओबीसी एवं दिव्यांगता कोटा का अनुचित ढंग से लाभ लेने का आरोप है। दिल्ली पुलिस हाई कोर्ट को बता चुकी है कि पूजा खेडकर की तरफ से जमा कराए गए 2 विकलांगता के प्रमाण पत्र फर्जी होने का शक है। इसके अलावा यूपीएससी ने भी पूजा खेडकर के खिलाफ झूठे दस्तावेज दाखिल करने का आरोप लगाकर कार्रवाई की थी।

हालाँकि मामले की जाँच और सवालों के जवाब दाखिल करने और उन्हें पढ़ने के क्रम में खेडकर को अदालत से राहत मिलती गई। कोर्ट से उन्हें सबसे पहले राहत 12 अगस्त को मिली थी। हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए पूजा खेडकर को 21 अगस्त तक गिरफ्तारी से राहत दी थी। साथ ही दिल्ली पुलिस और यूपीएससी से जवाब माँगा कि पूजा खेडकर की हिरासत क्यों जरूरी है।

इसके बाद 21 अगस्त को फिर सुनवाई हुई। यूपीएससी ने अपील की कि पूजा को राहत न दी जाए, लेकिन सुनवाई के बाद फिर अदालत ने पूजा को गिरफ्तारी से राहत दी और अगली सुनवाई की तारीख 29 अगस्त रखी गई। इसके बाद 6 सितंबर से 25 सितंबर पूजा को चौथी बाहर राहत मिली और फिर आज 26 सितंबर को मामला अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया गया। वहीं पूजा को मिली छूट जारी रखी गई।

पूजा खेडकर का मामला

बता दें कि पूजा खेडकर का मामला इस वर्ष जुलाई में प्रकाश में आया था। पुणे कलेक्टर ने पूजा की माँगों से तंग आकर उनके व्यवहार की रिपोर्ट एडिशनल चीफ सेक्रेट्री को भेजी थी। 8 जुलाई पूजा खेडकर का ट्रांसफर वाशिम भेजा गया। 11 जुलाई को केंद्र सरकार ने पूजा पर लगे आरोपों की जाँच के लिए कमेटी बनाई। 16 जुलाई को वाशिम में चल रही उनकी ट्रेनिंग रोक दी गई। 23 जुलाई तक मसूरी स्थित LBSNAA में रिपोर्ट करने को कहा गया।

धीरे-धीरे पूजा खेडकर के माता-पिता से जुड़ी खबरें सामने आने लगीं। 18 जुलाई को पूजा की माँ गिरफ्तार हुई। 19 जुलाई को पूजा के खिलाफ यूपीएससी ने एफआईआर दर्ज कराई। 31 जुलाई को पूजा के खिलाफ पटियाला हाउस में अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई। 1 अगस्त को कोर्ट ने याचिका खारिज की। 5 अगस्त को पूर्व ट्रेनी आईएस दिल्ली हाईकोर्ट पहुँची और उसके बाद से ये मामला वहाँ सुना जा रहा है।

गणपत विश्वविद्यालय में मुस्लिमों ने खुले में पढ़ी नमाज, हिन्दू संगठनों ने किया विरोध: हनुमान चालीसा का पाठ, गंगाजल से हुई धुलाई

मेहसाणा के गणपत विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों ने खुले में नमाज पढ़ी। इस पर विवाद हो गया है। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद मेहसाणा के हिंदू संगठनों में गुस्सा है। इस घटना का विरोध करने के लिए हिन्दू संगठनों ने इकट्ठा होकर विश्वविद्यालय में जाकर विरोध प्रदर्शन किया है।

हिन्दू संगठनों ने यहाँ अखंड हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। बजरंग दल-विश्व हिन्दू परिषद ने कॉलेज परिसर में गंगाजल और गोमूत्र छिड़ककर शुद्धिकरण भी किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ने यह आश्वासन दिया है कि दोबारा खुले में नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। मामले को शांत करने की कोशिश की कि ऐसा दोबारा नहीं होगा।

जानकारी के अनुसार, गणपत विश्वविद्यालय मेहसाणा तालुका के खेरवा गाँव के पास स्थित है, यहाँ हाल ही में मुस्लिम छात्रों ने परिसर के भीतर खुले में नमाज पढ़ी। इसका किसी ने वीडियो भी बनाया। यह वीडियो इसके बाद वायरल हो गया। इसके बाद स्थानीय हिन्दू संगठनों के लोग यहाँ इकट्ठा हो गए।

गणपत विश्वविद्यालय में सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ने के विवाद के बाद यहाँ के प्रवक्ता भीकेश भट्ट का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा, “कॉलेज में हुई घटना का वीडियो सामने आने के बाद बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, हिंदू संगठनों ने विश्वविद्यालय से आश्वासन माँगा कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।”

भीकेश भट्ट ने आगे बताया, ” हमने विश्वविद्यालय की ओर से यह वादा किया है कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। नमाज पढ़ने वाले छात्र नए थे, इसलिए उन्हें नियमों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अब यह पूरा मामला सुलझ गया है।”

ऑपइंडिया ने घटना के बारे में अधिक जानकारी के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क भी किया। हालांकी, इस जघन्य घटना से शर्मिंदा होने के कारण थोड़ी ही जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।” जब ऑपइंडिया ने दूसरी बार इस विषय सम्पर्क करने का प्रयास किया तो नम्बर बंद मिला। जैसे ही इस विषय में अन्य जानकारियाँ सामने आएँगी, रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा।

अंसारी लड़की से अब्बासी लड़के ने कर लिया इश्क वाला निकाह, लड़के के छोटे भाई को जंजीरों से बाँधकर पीटा-दिए बिजली के झटके: कौन कहता है मुस्लिमों में नहीं है ऊँच-नीच?

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में आमिर नाम के एक मुस्लिम लड़के ने अपने ही संप्रदाय की ऊँची जाति की लड़की से प्रेम विवाह कर ने लिया तो उसके भाई को अपहरण कर लिया गया। लड़की पक्ष के लोगों ने आमिर के छोटे भाई अरशद को अगवा कर लिया उसे बंधक बनाकर ना सिर्फ बेल्ट, लाठी-डंडों और जंजीरों से पीटा, बल्कि करंट भी लगाया। उसे रात भर पीट-पीट कर मौत के करीब पहुँचा दिया।

यह घटना दातागंज कोतवाली क्षेत्र की है। मोहल्ला नालापार निवासी आमिर नाम का एक युवक अपने ही संप्रदाय की युवती से प्रेम करता था। यह बात लड़की पक्ष को पसंद नहीं थी। ‘अंसारी’ जाति से आने वाले लड़की पक्ष का कहना था कि आमिर उनसे नीची ‘अब्बासी’ जाति का है। लड़की के घरवालों के विरोध के बाद दोनों एक दिन घर से फरार हो गए और प्रेम विवाह कर लिए।

इस मामले को लेकर इरशाद हुसैन ने अपनी शिकायत में बताया कि उनका छोटा भाई अरशद मंगलवार (24 सितंबर 2024) की रात करीब 11:30 बजे दुर्गा देवी मंदिर चौराहा पर गया था। इसी दौरान मोहल्ला अरेला निवासी लल्ला बाबू, जमील, जुल्फिकार, आफताब, नदीम, अरशद, तस्लीम, मुबीन, मुन्ने का लड़का और आफताब वहाँ पहुँचे।

अपनी शिकायत में इरशाद हुसैन ने आगे कहा, “उनके भाई अरशद का अपहरण करके जमील के घर ले गए। वहाँ उसे बंधक बनाकर कहा कि ‘नीची जाति का होने के बाद भी तेरे भाई ने हमारे परिवार की बेटी से शादी की है। अब उसका परिणाम भुगत। इसके बाद उन सभी ने मिल कर अरशद को करंट लगाया, लाठी डंडे व बेल्टों से बेरहमी से पीटा। जान से मारने के लिए धारदार हथियारों से भी प्रहार किया।” 

इरशाद ने आरोप लगाया कि चोर बताकर सरे राह पीटते, घसीटते और उल्टा टाँग कर रास्ते के किनारे मरा हुआ समझ कर छोड़कर फरार हो गए। इससे उनके भाई को गंभीर चोट आई हैं। उन्होंने कहा कि इन नामजद आरोपियों के साथ आठ से दस अज्ञात लोग भी थे। वह सभी धमकी देकर गए हैं कि उनकी बेटी के साथ शादी करने का यह ट्रेलर है, आगे और झेलना पड़ेगा। 

इस मामले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। पुलिस ने शिकायती पत्र के आधार पर पीड़ित अरशद को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेज दिया है। इस मामले में कुछ कुल 9 नामजद सहित कुल 19 आरोपितों के खिलाफ इसके बाद हत्या के लिए अपहरण, हत्या का प्रयास, बंधक बनाने, धारदार हथियार से चोट पहुँचाने, धमकी देने और अपमान करने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली।

एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने लल्ला बाबू, जमील और जुल्फिकार को गिरफ्तार कर लिया है। दातागंज इंस्पेक्टर अरिहंत कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही गिरफ्तार कर सभी को जेल भेजा जाएगा। बता दें कि मुस्लिमों के मजहबी गुरु या नेता अक्सर ये दावा करते हैं कि इस्लाम में जाति प्रथा नहीं है, लेकिन यह हकीकत से कोसों दूर है।