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‘पोस्टमार्टम जल्दी करो, नहीं तो खून की नदी बहेगी’: दावा- कोलकाता में जिस डॉक्टर का रेप-मर्डर उसका ‘चाचा’ बनकर पोस्टमार्टम करवाने पहुँचा था TMC नेता, सुवेंदु अधिकारी ने शेयर किया Video

कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के साथ रेप और हत्या मामले में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने विस्फोटक दावा किया है। अधिकारी ने कहा है कि पीड़िता डॉक्टर के पोस्टमार्टम के समय एक स्थानीय TMC नेता उसका चाचा बन कर पहुँच गया था और पोस्टमार्टम में जल्दी कर रहा था। सुवेंदु ने यह CBI पूछताछ से निकले डॉक्टर के हवाले से किया है।

सुवेंदु अधिकारी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आर जी कर मेडिकल कॉलेज में बलात्कार और हत्या की शिकार हुई जूनियर महिला डॉक्टर का पोस्टमार्टम करने वाली फॉरेंसिक टीम के सदस्य डॉक्टर अपूर्वा बिस्वास को CBI ने तलब किया था। पूछताछ के बाद बाहर निकलते समय उन्होंने पत्रकारों के सामने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वहाँ एक व्यक्ति था जो खुद को पीड़िता का चाचा बता रहा था और धमकी दे रहा था कि अगर पोस्टमार्टम दिन के अंत तक पूरा नहीं हुआ तो ‘खून की नदी’ बहा दी जाएगी।”

सुवेंदु अधिकारी ने आगे बताया कि यह व्यक्ति TMC का पूर्व पार्षद है। उन्होंने लिखा, “यह व्यक्ति कौन है? यह व्यक्ति संजीब मुखर्जी है। वह पानीहाटी नगर पालिका के पूर्व CPIM पार्षद है, जो बाद में TMC में शामिल हो गया और पानीहाटी TMC विधायक निर्मल घोष का करीबी बन गया।”

सुवेंदु ने आरोप लगाया कि डॉक्टर के अंतिम संस्कार में जल्दबाजी बरती गई। उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ के स्थानीय विधायक निर्मल घोष भी शमशान घाट में डॉक्टर के अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे। अधिकारी ने कहा कि घोष को इसका आदेश CM ममता बनर्जी से मिला था।

सुवेंदु अधिकारी ने पीड़िता के अंतिम संस्कार की पर्ची भी पेश की और प्रश्न उठाया कि आखिर इस पर संजीब मुखर्जी के हस्ताक्षर क्यों हैं। उन्होंने बताया कि इसी पर्ची पर सोमनाथ डे नाम के एक आदमी के भी हस्ताक्षर हैं जिसका नाम सोमनाथ डे है। उन्होंने बताया कि इस इलाके में सोमनाथ डे नाम का एक और पूर्व TMC पार्षद है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या दोनों एक ही हैं।

सुवेंदु अधिकारी ने डॉक्टर अपूर्ब बिस्वास का एक वीडियो भी साझा किया है। इसमें डॉक्टर बिस्वास बताते हैं कि अपने आप को पीड़िता का रिश्तेदार बताने वाला व्यक्ति डॉक्टरों और परिवार तक पर जल्दी पोस्टमार्टम का दबाव बना रहा था। डॉक्टर ने बताया कि वह पूर्व पार्षद हैं और मैं उनका नाम नहीं बता सकता। डॉक्टर ने यह भी कहा कि वह व्यक्ति उस इलाके का पूर्व पार्षद है जहाँ पीड़िता का परिवार रहता है। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने यह आरोप लगाए।

इन आरोपों के बाद राज्य की ममता सरकार बैकफुट पर है। अभी इस मामले में कोई खंडन सामने नहीं है। यह भी साफ़ नहीं हुआ है कि संजीब मुखर्जी कौन है और क्या उसका सही में पीड़िता के परिवार से कोई रिश्ता है या फिर वह यहाँ प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर की लाश मिली थी। डॉक्टर की हत्या से पहले उसके साथ रेप किया गया था और उसके साथ वीभत्सता हुई थी। इस मामले को पहले पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने आत्महत्या बताने का प्रयास किया था। हालाँकि, परिवार के दबाव के चलते इसे हत्या के तौर पर जाँच हुई।

इस मामले में अब तक जाँच को प्रभावित करने, घटनास्थल से सबूत मिटाने, पीड़ित परिवार को पैसे की पेशकश करने समेत लापरवाही के आरोप सामने आ चुके हैं। अब इस नए आरोप को जाँच में क्या सामने आता है, इससे साबित होगा कि क्या अंतिम संस्कार में भी दखल दिया गया।

‘5 गाड़ियों में आए, कनपटी में पिस्टल सटा पूरे शहर में घुमाया’: जानिए कैसे हुआ अयोध्या के रवि तिवारी का अपहरण, MP अवधेश प्रसाद के जिस बेटे का FIR में नाम उसे ही सपा ने दिया विधायकी का टिकट

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में रविवार (22 सितंबर 2024) को मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अजीत प्रसाद के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। अजीत प्रसाद फैज़ाबाद लोकसभा सीट से सपा सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे हैं। यह मामला रवि तिवारी नाम नाम के युवक ने अपने अपहरण और मारपीट का आरोप लगा कर दर्ज करवाया है। यह झगड़ा एक जमीनी विवाद को ले कर हुआ था जिसमें अजीत प्रसाद के साथी शशिकांत राय व राजू यादव भी नामजद हैं। पुलिस द्वारा की जा रही में पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों के सबूत पाए गए हैं। इस बीच, सपा सांसद अवधेश प्रसाद अपने बेटे के साथ खुल कर खड़े हो गए हैं।

पीड़ित रवि तिवारी ने अपनी शिकायत में अजीत प्रसाद को ‘राजनीतिक दबंग’ बताया है। उनकी FIR के अनुसार, 21 सितंबर 2024 को अजीत प्रसाद, शशिकांत राय, और राजू यादव 5 गाड़ियों में सवार होकर आए। उनके साथ 15-20 अन्य लोग भी थे। अजीत प्रसाद ने रवि तिवारी को एक बैंक के सामने से जबरदस्ती अपनी गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद, रवि को शहर के विभिन्न हिस्सों में घुमाया गया। इस दौरान अजीत प्रसाद ने पीड़ित के सिर पर पिस्टल तान दी और उसके साथ मारपीट की गई।

रवि तिवारी का आरोप है कि अजीत और उनके साथियों ने उनसे 1 लाख रुपये वापस लेने के लिए दबाव डाला और इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। FIR के अनुसार, आरोपितों ने इस पैसे से संबंधित विवाद का निपटारा करने के लिए दबाव बनाया और मारपीट की।

सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 (3), 115 (2), 191 (3) और 351 (3) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इन आरोपों पर अयोध्या के पुलिस अधीक्षक(सिटी) मधुबन कुमार सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि CCTV फुटेज में पीड़ित द्वारा लगाए गए 5 गाड़ियों से आरोपितों के आने की पुष्टि हुई है। इसी वीडियो में यह भी सामने आया है कि आरोपित पीड़ित को अपने साथ ले गए थे।

पुलिस अधीक्षक नगर ने आगे बताया कि जमीन संबंधी लगा गए आरोपों पर भी जाँच में प्रमाण जुटाए गए हैं। विक्रेता ने यह स्वीकार किया है कि उसने रवि तिवारी को अपनी जमीन बेची थी। पीड़ित का दावा है कि उसने शीतला प्रसाद नाम के एक व्यक्ति को उसकी जमीन खरीदने के नाम पर 1 लाख रुपए का एडवांस दिए थे। रवि का दावा है कि उन्होंने शीतला प्रसाद की जमीन को अजीत प्रसाद और लाल बहादुर नाम के नाम पर बैनामा कराने में मध्यस्थता की थी।

अवधेश प्रसाद की नजर में बेटा बेगुनाह

इस बीच सपा सांसद अवधेश प्रसाद खुल कर अपने बेटे के समर्थन में उतर गए हैं। उन्होंने अजीत प्रसाद पर लगे आरोपों को झूठा, भ्रामक और राजनीति से प्रेरित बताया है। अखिलेश यादव द्वारा खुद से अपने बेटे को टिकट दिए जाने का जिक्र करते हुए अवधेश प्रसाद ने भाजपा को डरा बताया। इसी दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका बेटा बड़े वोटों के अंतराल से चुनाव जीतने जा रहा है।

फ़िलहाल अभी तक इस मामले में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। आरोपितों के खिलाफ सबूत जुटाने व दबिश के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना ने अयोध्या की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है।

अयोध्या में सपा प्रत्याशी अजीत प्रसाद पर लगे ये गंभीर आरोप उनके चुनावी अभियान को बड़ा झटका दे सकते हैं। अपहरण, मारपीट और पिस्टल तानने जैसे गंभीर आरोपों के बीच पुलिस की जाँच जारी है। वहीं, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है और इसे राजनीति से प्रेरित साजिश करार दिया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच के बाद इस मामले में क्या नतीजा निकलता है और आरोपितों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

‘चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं को खिलाया, बिल माँगा तो पीटा’: चैतर वसावा के खिलाफ ‘बचपन के दोस्त’ ने दर्ज कराई शिकायत, AAP विधायक समेत 21 पर दंगे का आरोप

गुजरात में डेडियापाड़ा के आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा के खिलाफ एक और मारपीट का मामला दर्ज किया गया है। यह शिकायत उनके बचपन के दोस्त और AAP कार्यकर्ता शांतिलाल वसावा ने की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि लोकसभा चुनाव के दौरान विधायक और उनके समर्थकों ने होटल में खाने के बाद जब बिल माँगा गया, तो मारपीट की। डेडियापाड़ा पुलिस ने इस शिकायत पर चैतर वसावा और अन्य 21 व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता शांतिलाल वसावा एक होटल में मैनेजर थे और लोकसभा चुनाव के दौरान AAP के कार्यकर्ता अक्सर वहाँ भोजन करते थे। शांतिलाल का कहना है कि चुनाव के बाद होटल का बिल बचा हुआ था, जिसकी वसूली के लिए उन्होंने विधायक से संपर्क किया। जब बिल की माँग की गई, तो चैतर वसावा और उनके समर्थक घर आकर मारपीट करने लगे।

शांतिलाल ने बताया कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में AAP के लिए काम किया था और चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए होटल में खाने की व्यवस्था की थी। उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान 50,000 रुपये का खर्च हुआ, जिसमें से 30,000 रुपये नगद और 20,000 रुपये ऑनलाइन दिए गए थे। हालाँकि, बाद में होटल का कुल बिल 1,28,720 रुपये का बना, जिसमें से कुछ राशि अभी भी बकाया है।

विधायक से संपर्क करने पर मिली धमकी

शांतिलाल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने बाकी बकाया राशि के लिए विधायक से संपर्क किया, तो विधायक ने फोन उठाना बंद कर दिया। बाद में उन्होंने एक अनजान नंबर से विधायक को कॉल किया और फिर से पैसे की माँग की। इस पर विधायक गुस्से में आ गए और फोन काट दिया। इसके बाद, 16 सितंबर को चैतर वसावा और उनके समर्थक शांतिलाल के घर पहुँचे और उनसे मारपीट की।

एफआईआर में क्या है आरोप?

एफआईआर के अनुसार, 16 सितंबर की शाम को चैतर वसावा और उनके समर्थकों ने शांतिलाल के घर जाकर उनसे मारपीट की। आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने न केवल शांतिलाल को गालियाँ दीं, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना के बाद शांतिलाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शांतिलाल की शिकायत पर डेडियापाड़ा पुलिस ने 21 सितंबर को चैतर वसावा और उनके सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दंगे और अन्य अपराधों का आरोप लगाया गया है। हालाँकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच चल रही है।

शांतिलाल ने बताया कि वह भी AAP के सक्रिय कार्यकर्ता हैं और उन्होंने विधायक के लिए कई बार काम किया है। उन्होंने यह भी बताया कि होटल मालिक ने बिल की बची हुई राशि उनके वेतन से काट ली, जिसके बाद उनकी नौकरी भी चली गई। शांतिलाल का आरोप है कि जब उन्होंने पैसे की माँग की, तो उन्हें धमकाया गया और उनके साथ मारपीट की गई।

शांतिलाल ने कहा कि वह भी आदिवासी समुदाय से आते हैं और उन्हें न्याय चाहिए। उन्होंने बताया कि जब चैतर वसावा जेल में थे, तब भी उन्होंने उनका साथ दिया था। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के लिए निष्ठापूर्वक काम करते रहे हैं, लेकिन उनके साथ अन्याय किया गया है। इस मामले में AAP विधायक चैतर वसावा का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

चाइल्ड पोर्न रखना, देखना, भेजना सब अपराध, सुप्रीम कोर्ट ने ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ शब्द के इस्तेमाल से भी रोका: जानिए क्यों आया यह फैसला, क्या हैं इसके मायने

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों से संबंधित यौन सामग्री (चाइल्ड पोर्न) को रखना या उसे कहीं भेजना अपराध माना है। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय देते हुए मद्रास हाई कोर्ट का वह निर्णय पलटा है जिसमें बच्चों से जुड़ी यौन सामग्री रखना अपराध नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ ही इस प्रकार की सामग्री के नामकरण को लेकर भी कुछ आदेश दिए हैं।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार (23 सितम्बर, 2024) को यह निर्णय सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपने फोन या अन्य किसी डिजिटल उपकरण में चाइल्ड पोर्न को रखना, उसको नष्ट ना करना या उसके बारे में एजेंसियों को सूचित ना करना अपराध की श्रेणी में आएगा।

रखना, भेजना और बेचना सब अपराध

कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड पोर्न रखना या उसे डिलीट ना करना अपराध तब माना जाएगा जब इसे रखने वाले की मंशा इसे आगे प्रसारित करने की हो। कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति की मंशा उस समय के हालात तय करेंगे। यह POCSO एक्ट की धारा 15(1) के तहत अपराध माना जाएगा। कोर्ट ने POCSO के तहत अपराध मानने को लेकर दो और धाराओं के नियम तय किए।

इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि अपने डिवाइस पर चाइल्ड पोर्न रखने के साथ उसे लोगों में बाँटना, कहीं भेजना या फिर ऐसे ही काम में मदद करना भी अपराध माना जाएगा। कोर्ट ने इसे POCSO की धारा 15(2) के तहत अपराध माना है। यहाँ तक कि इस तरह की सामग्री को किसी को दिखाना भी अपराध के तहत आएगा।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी सामग्री पैसा कमाने या किसी तरह के लाभ लेने के लिए रखना भी अपराध माना जाएगा। यदि यह आरोप सिद्ध होता है तो इसमें इस बात की जरूरत नहीं होगी कि इससे कोई लाभ हुआ या नहीं। कोर्ट ने इसे POCSO की धारा 15(3) के तहत अपराध माना है।

इंटरनेट पर देखना भी जुर्म

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी के डिवाइस पर इस तरह का चाइल्ड पोर्न रखा ना गया हो लेकिन अगर इसे कोई इंटरनेट पर देखता है तो यह भी अपराध है। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर ऐसी सामग्री देखना, इसे आगे भेजना और इसको बाँटना अपराध कहा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर देखना भी इसे अपने डिजिटल डिवाइस पर रखने के बराबर माना जाएगा। कोर्ट ने इसे POCSO की धारा 15 के तहत अपराध बताया है।

‘चाइल्ड पोर्न’ शब्द पर आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ‘चाइल्ड पोर्न’ शब्द को देश भर के कोर्ट ना उपयोग करें। कोर्ट ने कहा कि पोर्न शब्द दो वयस्कों के बीच सहमति से बने सम्बन्धों की वीडियो को दर्शाता है। बच्चों के विषय में यह नहीं कहा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड पोर्न शब्द का उपयोग बच्चों के पीड़ित होने का प्रभाव कम करता है।

कोर्ट ने कह़ा, “लोगों को इस तथ्य के प्रति भी सचेत रहना चाहिए कि ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी’ शब्द एक ग़लत नाम है जो अपराध की गंभीरता को बताने में विफल है। यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि पारंपरिक रूप से ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी’ कहे जाने वाले प्रत्येक मामले में वास्तव में एक बच्चे का दुराचार शामिल होता है। ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी’ शब्द के उपयोग से अपराध को महत्वहीन किया जा सकता है, क्योंकि पोर्नोग्राफ़ी तो अक्सर वयस्कों के बीच सहमति से किया गया कार्य माना जाता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड पोर्न की जगह चाइल्ड सेक्सुअल एक्स्प्लोईटेटिव एंड अब्युजिव मैटेरिअल (CSEAM) शब्द उपयोग करने का आदेश दिया है। देश भर के कोर्टों को यह शब्द अपने निर्णयों को आदेश में करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ” CSEAM शब्द सही रूप से बच्चे के शोषण और दुर्व्यवहार पर जोर देता है। यह ऐसे कृत्य की आपराधिक प्रकृति पर गंभीर और मजबूत प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।”

मद्रास हाई कोर्ट का पलटा निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने ‘चाइल्ड पोर्न’ या बच्चों से जुड़ी पोर्न सामग्री पर दिए इस निर्णय में मद्रास हाई कोर्ट के हालिया निर्णय को पलट दिया है। मद्रास हाई कोर्ट ने जनवरी, 2024 में दिए गए निर्णय में कहा था किचाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करना और इसे प्राइवेट में देखना POCSO और IT के तहत अपराध नहीं है।

यह मामला 28 साल के व्यक्ति से जुड़ा था, उसके ऊपर चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करने और इसे देखने पर POCSO और IT एक्ट पुलिस ने लगाया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपित ने प्राइवेट में ये सब किया, बिना किसी पर कोई प्रभाव डाले हुए। जज ने कहा कि यदि वो कंटेंट बाँटने लगता, तब इन एक्ट्स के तहत उस पर धाराएँ लगाई जा सकती हैं।

कोर्ट ने इस व्यक्ति के खिलाफ इन दोनों धाराओं में दर्ज किया गया मामला भी रद्द कर दिया था। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि पोर्न देखना वर्तमान समय में शराब-सिगरेट पीने जैसी बीमारी बन चुकी है जिसे सामाजिक तौर सही किए जाने की जरूरत है।

मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले के NGO ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। NGO ने माँग की थी कि मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला पलट दिया जाए। इस मामले में हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस कृत्य को अपराध माना और मद्रास हाई कोर्ट का निर्णय पलट दिया।

11 साल में 3 देशों में की ₹3428 करोड़ के ड्रग्स की तस्करी, पैसों से बनाई तमिल फिल्म: स्टालिन की DMK से भी जुड़ा था जफर सादिक, जानिए क्या होता है स्यूडोएफेड्रिन

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मार्च 2024 में तमिल फिल्म प्रोड्यूसर व द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के पूर्व पदाधिकारी जफर सादिक को गिरफ्तार किया था। तब उन पर 2000 करोड़ रुपयों से अधिक मूल्य की ड्रग्स तस्करी का आरोप लगा था। अब सामने आ रही जानकारी के मुताबिक जफर सादिक ने 3 देशों में 6 मीट्रिक टन (6 हजार किलो) स्यूडोएफेड्रिन की तस्करी की थी। यह तस्करी पिछले 11 वर्षों से की जा रही थी। तस्करी के ये पैसे सादिक ने 4 तमिल फिल्मों में भी लगाए थे।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) जफर सादिक के खिलाफ अदालत में एक मजबूत केस बना रही है। जाँच के दौरान पता चला है कि जफर सादिक ड्रग्स की तस्करी में साल 2013 से एक्टिव था। वह खासतौर पर स्यूडोफेड्राइन नामक ड्रग्स की तस्करी में शामिल था। यह तस्करी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और मलेशिया में की जाती थी। इस एक दशक से अधिक समय के दौरान जफर सादिक ने लगभग 6 मीट्रिक टन (6000 किलो) स्यूडोफेड्राइन की तस्करी की।

बीते तीन सालों में ही जफर सादिक ने 3500 किलो ड्रग्स की तस्करी की, जिसकी कीमत लगभग 2000 करोड़ रुपए है। उससे पहले उसने करीब 2500 ड्रग्स की तस्करी की थी। इस तरह से जफर सादिक ने 3,428.57 करोड़ रुपए के ड्रग्स की तस्करी की।

एक अनुमान के मुताबिक सादिक द्वारा तस्करी की गई इस ड्रग्स की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत हजारों करोड़ में है। सादिक के खिलाफ सबूत जुटाने में लगी NCB को व्हाट्सएप पर भेजे गए वॉयस नोट्स भी मिले हैं। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया की फर्जी कंपनियों के IP एड्रेस व बैंको के CCTV फुटेज भी जब्त किए गए हैं। ड्रग्स की तस्करी के लिए सादिक कार्गो का इस्तेमाल करता था। तस्करी के पैसों से सादिक ने न सिर्फ तमाम सम्पत्तियाँ बनाईं बल्कि 4 तमिल फिल्मों में भी निवेश किया था।

इन खुलासों के बाद अब NCB के एक सीनियर अधिकारी ने भारत में बन रहे अवैध रसायनों की बढ़ती मात्रा पर चिंता जताई है। NCB जल्द ही रसायन बनाने वाली तमाम कंपनियों पर निगरानी तेज कर सकता है। ऐसी तमाम कंपनियों की लिस्ट बनाई जा रही है जो रसायन बनाती हैं।

बताते चलें कि ड्रग्स तस्करी रैकेट के कथित सरगना जफर सादिक को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 9 मार्च 2024 को जयपुर से गिरफ्तार किया था। उसके नेटवर्क का भंडाफोड़ फरवरी महीने में ही हो गया था जब दिल्ली में हुई छापेमारी के दौरान स्यूडोफेड्राइन नामक ड्रग्स बरामद हुआ था। गिरफ्तारी के पहले वह 15 दिनों तक फरार रहा था। जफर सादिक DMK का पदाधिकारी रहा है। उसकी कई तस्वीरें स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

क्या है स्यूडोएफेड्रिन

स्यूडोएफेड्रिन मूल रूप से दवाएँ बनाने के काम आती है। इस से बनने वाली दवा साँस लेने में तकलीफ और नींद न आने की बीमारी से परेशान लोगों के लिए अक्सर कारगर साबित होती है। दुनिया के कई देश इस ड्रग्स का इस्तेमाल दवाएँ बनाने में करते हैं। हालाँकि कुछ लोग इस ड्रग्स का दुरूपयोग नशे के लिए करते हैं। इसके दुरूपयोग की वजह से एलर्जी, हाँफना ब्लड प्रेशर अनियमित होना, धड़कने जोर-जोर से चलना और शरीर में थकान आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। स्यूडोएफेड्रिन की बिना सरकारी अनुमति के खरीद-फरोख्त कानूनी तौर पर अपराध है।

कौन है जफर सादिक?

जफर सादिक एक तमिल फिल्म प्रोड्यूसर हैं, जिन्होंने JSM Pictures के तहत तीन फिल्में बनाई हैं: “Iraivan Miga Periyavan,” “Maayavalai,” और “Mangai।” एक नई फिल्म “VR07” भी आने वाली है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का आरोप है कि सादिक ने ड्रग्स की तस्करी से मिले पैसे का इस्तेमाल फिल्म “Mangai” की प्रोडक्शन के लिए किया।

जफर सादिक का नाम द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) से भी जुड़ा है, जिससे उसकी गिरफ्तारी ने पार्टी की छवि को प्रभावित किया है। उसकी कहानी ने ये दिखाया है कि ड्रग्स के कारोबार में कितना बड़ा जाल फैला हुआ है। मार्च 2024 में NCB ने जब सादिक को गिरफ्तार किया, यह पता चला कि उसने 6000 किलो स्यूडोएफेड्रिन की तस्करी की थी, जिसकी कीमत हजारों करोड़ रुपये है। उसकी गतिविधियाँ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और मलेशिया में फैली थीं।

टॉफी खिलाने के बहाने मौलवी ने 5 साल की बच्ची का मस्जिद में किया रेप, अम्मी के आते ही हुआ फरार: राजस्थान का मामला, अलवर पुलिस ने असजद खान को पकड़ा

राजस्थान के अलवर जिले में 5 साल की एक नाबालिग बच्ची से रेप किए जाने का मामला सामने आया है। दुष्कर्म का आरोप एक मस्जिद के मौलवी पर लगा है जिसका नाम असजद खान है। असजद ने पीड़िता को टॉफी देने के बहाने मस्जिद के अंदर बुलाया था। घटना रविवार (22 सितंबर 2024) की है। पुलिस ने मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना अलवर जिले के थानाक्षेत्र राजगढ़ की है। यहाँ रविवार को 5 साल की बच्ची की माँ ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि उनके घर के सामने ही एक मस्जिद है। रविवार की सुबह बच्ची घर के बाहर इसी मस्जिद के पास खेल रही थी, तब अन्य परिजन घर के अंदर थे। इसी दौरान मस्जिद के अंदर से मौलवी असजद खान ने बच्ची को टॉफी खिलाने के बहाने अंदर बुलाया। आरोप है कि मस्जिद में मौलवी पीड़िता से रेप की कोशिश करने लगा।

बच्ची दर्द से चीखने लगी तो यह आवाज उनकी माँ तक पहुँची। पीड़िता की माँ मस्जिद में पहुँची तो वहाँ मौलवी उनकी बेटी से बलात्कार कर रहा था। पीड़िता की माँ को देखते ही मौलवी वहाँ से भाग निकला। बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया हैं। हालत फ़िलहाल स्थिर बताई जा रही है। इधर पीड़िता की माँ ने पुलिस में तहरीर देते हुए मौलवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। अपने खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई की भनक लगते ही असजद खान फरार हो गया।

मौलवी असजद खान मूल रुप से राजस्थान के भरतपुर का रहने वाला है। वह अलवर की इस मस्जिद में पिछले 2 वर्षों से रह रहा है। पुलिस ने असजद खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली। आरोपित की तलाश के लिए टीमों का गठन किया गया और छापेमारी शुरू की गई। आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और 22 सितंबर (रविवार) को ही मौलवी असजद खान को दबोच लिया गया। पुलिस इस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

सरकारी म्यूजियम से नेहरू से लेकर एडविना तक की चिट्ठी उठाकर ले गईं सोनिया गाँधी, PMML ने वापस माँगे दस्तावेज: बोले इतिहासकार रिजवान कादरी- रिसर्च के लिए ये रिकॉर्ड जरूरी

अहमदाबाद के इतिहासकार और लेखक रिजवान कादरी ने कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखकर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से संबंधित निजी दस्तावेजों की वापसी, उनकी प्रतियाँ या उनके डिजिटल एक्सेस की माँग की है। इन दस्तावेजों में नेहरू और जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजया लक्ष्मी पंडित और बाबू जगजीवन राम के बीच हुए पत्राचार शामिल हैं। कादरी, जो प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसायटी (PMML) के सदस्य हैं, ने इस मामले को उठाते हुए इन दस्तावेजों को सार्वजनिक शोध और ऐतिहासिक अध्ययन के लिए आवश्यक बताया है।

कादरी ने अपने पत्र में लिखा कि इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है, और इन तक पहुँच सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि देश के इतिहास को समग्रता से समझा जा सके। उनका कहना है कि इन कागजातों तक पहुँच होने से भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय निर्माण और भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकेगी। उनके अनुसार, गाँधी जी के लेखन को व्यवस्थित रूप से दस्तावेज किया गया है, लेकिन सरदार पटेल के योगदान को लेकर इतने व्यापक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए नेहरू और उनके पिता मोतीलाल नेहरू द्वारा छोड़े गए दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हैं।

कादरी ने पत्र में कहा कि नेहरू परिवार के प्रतिनिधि के रूप में सोनिया गाँधी द्वारा कुछ निजी दस्तावेज 2008 में वापस ले लिए गए थे। ये दस्तावेज 51 बॉक्सों में थे और इनमें से कुछ को निजी और सरकारी दस्तावेजों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कादरी ने इन दस्तावेजों को PMML में वापस लाने या उनकी प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है ताकि वे शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि अगर ये दस्तावेज वापस नहीं किए जा सकते, तो उनका डिजिटलाइजेशन किया जा सकता है ताकि उन्हें बिना नुकसान पहुँचाए संरक्षित रखा जा सके।

कादरी ने सुझाव दिया है कि वह दो योग्य सहायकों की मदद से इन दस्तावेजों को स्कैन कर सकते हैं ताकि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्यवस्थित और सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि वह इस प्रक्रिया के खर्चे को वहन करने के लिए तैयार हैं और इस बात का ध्यान रखेंगे कि दस्तावेजों की समयरेखा में कोई छेड़छाड़ न हो।

इस मामले पर सोनिया गाँधी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालाँकि, कादरी ने अपने पत्र में आशा जताई है कि यह मांग राष्ट्रीय हित और इतिहास के सही अध्ययन के लिए की गई है, और इसे स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेहरू के योगदान का निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि उनकी भूमिका को सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इन दस्तावेजों की वापसी का मामला पहली बार फरवरी 2023 में PMML की वार्षिक बैठक में उठाया गया था। यह बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें यह चर्चा हुई थी कि सोनिया गाँधी द्वारा 2008 में 51 बॉक्स वापस लिए गए थे। इन दस्तावेजों में नेहरू और एडविना माउंटबेटन के बीच हुए पत्राचार भी शामिल थे, जिनके बारे में कई बार सवाल उठाए गए हैं। कुछ सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इन पत्रों को वापस लाया जाए और यह सुनिश्चित करने के लिए फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की है कि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब न हों।

कादरी का कहना है कि इतिहासकारों को नेहरू, गाँधी और पटेल के योगदान को सही ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में अध्ययन करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सोनिया गाँधी द्वारा किए गए दस्तावेजों की वापसी अच्छे इरादों से की गई थी ताकि इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालाँकि, अब समय आ गया है कि इन दस्तावेजों तक पहुँच प्रदान की जाए ताकि राष्ट्र के इतिहास का व्यापक अध्ययन हो सके।

कादरी ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सोनिया गाँधी इन दस्तावेजों को वापस नहीं करना चाहतीं, तो वह उनकी प्रतियाँ उपलब्ध करा सकती हैं। इससे दस्तावेज सुरक्षित भी रहेंगे और साथ ही शोधकर्ताओं को उनका उपयोग करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह इस प्रक्रिया में पूरी मदद करने के लिए तैयार हैं और उम्मीद करते हैं कि सोनिया गाँधी इस पर सकारात्मक रुख अपनाएँगी।

यह मामला न केवल नेहरू के व्यक्तिगत दस्तावेजों की वापसी का है, बल्कि इससे जुड़ा एक बड़ा सवाल यह भी है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों तक पहुँच कैसे सुनिश्चित की जाए ताकि राष्ट्र के इतिहास का सही ढंग से अध्ययन हो सके। कादरी जैसे इतिहासकारों का कहना है कि इन दस्तावेजों का महत्व इतना अधिक है कि इन्हें सिर्फ एक परिवार की निजी संपत्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना राष्ट्रीय हित में है, और इस दिशा में उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

एक तरफ PM मोदी-बायडेन मुलाकात की तैयारी, दूसरी ओर व्हाइट हाउस में उन सिख संगठनों की मेजबानी जो खालिस्तानियों के हैं हमदर्द: भारत विरोधियों से अमेरिका का ये ‘प्रेम’ कैसा?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्तमान में अमेरिका की यात्रा पर हैं। उनकी इस बहुउद्देशीय यात्रा की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के साथ मिलने शुरू हुई। बायडेन ने पीएम मोदी को अपने डेलावेयर स्थित घर पर बुलाया था। पीएम मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने से पहले अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने अमेरिकी सिखों से मुलाक़ात की। सामने आया है कि अमेरिकी सरकार ने इन सिखों को हर प्रकार से बचाने का वादा किया है। अमेरिका ने यह वादा इसलिए किया है क्योंकि यह खालिस्तान समर्थक भारत पर अपनी आवाज दबाने का आरोप लगाते रहे हैं।

अमेरिकी अधिकारियों से मिलने वाले इन संगठनों में अमेरिकन सिख कॉकस कमिटी (ASCC), सिख कोएलिशन और सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड (SALDEF) शामिल थे। इन संगठनों का खालिस्तानी एजेंडा चलाने का इतिहास रहा है। एक्स पर एक पोस्ट में, ASCC के प्रीतपाल सिंह ने लिखा, “अमेरिकी सिखों की की रक्षा में सहयोग के लिए अमेरिकी अधिकारियों का आभार। हम अपने समाज की सुरक्षा के लिए और काम उनके आश्वासन पर कायम रहेंगे। स्वतंत्रता और न्याय की जीत होनी चाहिए।”

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब खालिस्तानी आतंकी गुरवतपन्त सिंह पन्नू ने अमेरिका में भारत के खिलाफ एक मुकदमा दाखिल किया है। इस मामले में अमेरिकी कोर्ट ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को तलब किया है। भारत के बाहर खालिस्तानियों की आवाज दबाने के आरोपों को लेकर एक बिल भी अमेरिकी संसद में आ चुका है। इसमें सीधे तौर पर सिखों का नाम नहीं लिया गया लेकिन कहा गया है कि अगर कोई देश अमेरिका के भीतर उसके नागरिकों की आवाज दबाने का प्रयास करता है तो उसे बताना होगा।

यह बिल एडम शिफ़ नाम के एक सांसद द्वारा लाया गया है। SALDEF ने इस बिल का समर्थन किया है। SALDEF की प्रवक्ता किरण कौर गिल ने कहा कि यह अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा में एक बड़ा कदम होगा। सिख कोएलिशन ने भी यही भाषा बोली है। हरमन सिंह ने कहा, “हम इस बिल को लाने करने और भारत द्वारा सिखों को निशाना बनाए जाने के खतरे को गंभीरता से लेने के लिए कॉन्ग्रेसमैन शिफ के प्रति आभारी हैं।” स्वर्णजीत सिंह खालसा नाम के एक व्यक्ति ने भी इस बिल का समर्थन किया।

अमेरिकन सिख कॉकस कमिटी

ASCC की गतिविधियों से प्रतीत होता है कि यह एक अलगाववादी संगठन है जो भारत से खालिस्तान तोड़ने की माँग को लेकर 2015 से काम कर रहा है। इसका एक प्रमुख सदस्य प्रीतपाल लगातार पाकिस्तानियों के सम्पर्क में है और उनसे मुलाकातें करता रहा है। फरवरी 2020 में उसने पाकिस्तानी नेता नईमुल हक के साथ 2019 में ली गई एक तस्वीर शेयर की थी। नईमुल हक़ की यह तस्वीर उसकी मौत के बाद साझा की गई थी। प्रीतपाल ने “नईमुल हक के से पाकिस्तान ने एक महान नेता और सिखों ने एक मित्र खो दिया है।”

अमेरिका खालिस्तान

इससे पहले प्रीतपाल की तस्वीरें पाकिस्तान के एक और नेता आज़मी गिल के साथ आईं थी। जनवरी 2024 में उसने हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन को एक जवाब देते हुए खालिस्तान का खुले तौर पर समर्थन किया था। प्रीतपाल का कहना है कि हिन्दुओं में जाति व्यवस्था की तरह ही सिख भी खालिस्तान माँग सकते हैं। उसने खुद पर खतरा भी बताया था।

जून 2024 में, उन्होंने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर अब प्रतिबंधित अल जज़ीरा डॉक्यूमेंट्री साझा की। उसने इस पर लिखा, “भारत, अमेरिका और कनाडा में आलोचकों को कैसे चुप कराता है। जुलाई 2022 में, कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों ने हरदीप निज्जर को चेतावनी दी थी कि उसकी जान को खतरा है। खतरे के बावजूद, उसने खालिस्तान का समर्थन जारी रखा। दुख की बात है कि निज्जर की जून 2023 में भारतीय एजेंटों द्वारा हत्या कर दी गई। अल जज़ीरा डॉक्यूमेंट्री दमन के इस भयावह उदाहरण को उजागर करती है।”

अमेरिका खालिस्तान

सिख कोएलिशन

सिख कोएलिशन एक ओर कहता है कि वह खालिस्तान की माँग को लेकर कोई रुख नहीं रखता लेकिन दूसरी तरफ वह भारत के विरुद्ध लगातार काम करता आया है। वह इस्लाम्मी आतंकी संगठनों से लिंक रखने वाले IAMC का भी समर्थन करता रहा है। फरवरी, 2021 में बेसबॉल के बड़े मुकाबले सुपर बॉल के दौरान भारत में हो रहे किसान प्रदर्शनों को लेकर एक एड चलाया गया था। यह एड काफी महँगे होते थे। इस प्रदर्शन का कनेक्शन इसी सिख कोएलिशन से निकला था।

सिख गठबंधन को ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन (OSF) से भी फंडिंग मिलती है। OSF जॉर्ज सोरोस का संगठन है, उसने प्रधानमंत्री मोदी सहित राष्ट्रवादियों और राष्ट्रवाद के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा की थी। जुलाई 2023 में, सिख कोएलिशन ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता के बारे में एक रिपोर्ट साझा की थी। यह रिपोर्ट प्रेस की आजादी की रैंकिंग से जुड़ी थी। ऑपइंडिया ने पहले ही बताया है कि ऐसी रैंकिंग निराधार आरोपों, संदिग्ध आंकड़ों और पुरानी रिपोर्टों पर आधारित हैं।

सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड (SALDEF)

SALDEF खुले तौर पर खालिस्तान का समर्थन नहीं करता लेकिन इसकी गतिविधियाँ भी संदिग्ध रही हैं। यह दिखाती हैं कि यह खालिस्तान समर्थक है। सितंबर 2023 में, SALDEF ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की थी, इसमें खालिस्तानी आतंकी से नेता बने अमृतपाल सिंह पर कार्रवाई और खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत सरकार को निशाना बनाया गया। उसने अमृतपाल सिंह की गिरफ़्तारी के विरुद्ध बात की थी।

SALDEF ने फरवरी 2024 में, इक्वलिटी लैब्स, हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HFHR) और IAMC के साथ मिलकर “वर्चुअली वल्नरेबल” नाम से एक रिपोर्ट जारी की थी। ये सभी भारत विरोधी संगठन हैं, जिनमें से दो के आतंकवादी संगठनों से संबंध साबित हुए हैं। रिपोर्ट में, उन्होंने दावा किया कि जब भी भारतीय राज्य सिखों की आवाज़ को दबाना चाहता है, तो वे उन्हें “खालिस्तानी” के रूप में लेबल करते हैं। हालाँकि, यह पूरी तरह से झूठ है।

सिख असेम्बली ऑफ़ अमेरिका

सिख असेंबली ऑफ अमेरिका एक अलगाववादी संगठन है। यह खालिस्तान की माँग को ओने मिशन स्टेटमेंट में शामिल करते हैं। यह एक नया संगठन लगता है। यह हरदीप सिंह निज्जर और गुरपतवंत सिंह पन्नू सहित खालिस्तानी आतंकवादियों का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर खुलेआम पोस्ट शेयर करता है। हाल ही में एक पोस्ट में, इस संगठन ने 2024 के उसी एक्ट पर चर्चा लिखी जिसे शिफ़ ने पेश किया था।

इसने लिखा, “यह बिल अमेरिका सिखों के दमन के लिए भारत को जवाबदेह ठहराएगा। यह बिल अमेरिका में सिखों के उत्पीड़न और धमकाने से निपटने में मदद करेगा।” इसके अलावा संगठन ने कहा कि बिल में खालिस्तान के लिए सिखों की माँग को उजागर किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि बिल के प्रायोजकों में कांग्रेसी डैन गोल्डमैन, जेम्स मैकगवर्न और एरिक स्वेलवेल और कांग्रेसी बारबरा ली, इल्हान उमर और एलेनोर होम्स नॉर्टन शामिल हैं। एक और पोस्ट में इसी संगठन ने आतंकी अवतार सिंह खंडा और निज्जर जिक्र किया था।

अमेरिकी अधिकारियों का खालिस्तान समर्थक संगठनों से मिलना अमेरिका की सरकार के लिए काफी बुरा संकेत है। लम्बी अवधि में अमेरिका को अपनी भूमि पर तेजी से फैल रहे भारत विरोधी बयानबाजी को नियंत्रित करना होगा और भारत के साथ काम करने के लिए उसे यह जल्द से जल्द करना चाहिए।

जो है 5 वक्त का नमाजी, MP इंजीनियर रशीद का करता है समर्थन, वह खुलेआम दे रहा जम्मू-कश्मीर में ‘मंदिरों को जलाने’ की धमकी, बोला- हिंदू को पूजा करते देख मुस्लिमों को अच्छा नहीं लगता है

जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। तीन चरण की वोटिंग के बाद वहाँ 4 अक्तूबर को परिणाम आएँगे। इस बीच ग्राउंड पर जाकर ‘द राजधर्म’ की रिपोर्टर अर्चना तिवारी ने वहाँ वोटरों का मन टटोलने का प्रयास किया। लेकिन, रिपोर्टिंग के दौरान उनका पाला ऐसे वोटर से पड़ा जो खुलेआम कैमरे पर हिंदू धर्म के खिलाफ, हिंदू मंदिरों के खिलाफ नफरत दिखाते हुए दिखा।

उत्तर कश्मीर के लोलाब में वोटरों से बात करने पहुँचीं अर्चना तिवारी की मुश्ताक नाम के मुस्लिम शख्स से चुनावों को लेकर चर्चा हुई। पहले तो मुश्ताक बताता दिखा कि वो इंजीनियर रशीद का समर्थक है और उसे अपने इलाके में डैम, प्ले ग्राउंड की जरूरत है और सस्ती बिजली की जरूरत है।

वीडियो में 3:52 के बाद देख सकते हैं कि मुश्ताक ने बताया कि उसके इलाके से भाजपा नहीं जीत सकती क्योंकि पार्टी ने उनके (मुसलमान) मुताबिक काम नहीं किया है। इस दौरान मुश्ताक ने बताया कि भाजपा ने शराब की दुकान खोलीं, चावल महंगे किए और मस्जिद के सामने मंदिर बना दिए।

अर्चना तिवारी ने पूछा कि आखिर सबसे ज्यादा दिक्कत किस बात से हुई। इस पर मुश्ताक ने कहा शराब की दुकान और मंदिर बनाने से… मुश्ताक ने कहा- “हम मुसलमान हैं। हमने अल्लाह को चुना है। हम पढ़ते हैं नमाज, आप लोग जाते हैं मंदिर। मुसलमान मस्जिद में जाएगा और हिंदू को मंदिर में पूजा करते देखेगा तो बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा। मंदिर में पूजा देखने से मुसलमान को समस्या होती है।”

अर्चना तिवारी ने ये बात सुन हैरानी जताई और कहा भी हिंदुओं को मुस्लिमों से कभी समस्या नहीं होती। इस पर मुश्ताक ने कहा- “आप लोगों को दिक्कत नहीं होगी लेकिन हम लोगों को समस्या है क्योंकि हम मुसलमान है।” मु्श्ताक ने आगे ये भी बताया कि अगर कोई हिंदू आएगा और यहाँ खुलेआम शराब पीएगा तो ये उसके लिए ठीक नहीं होगा। हम उसे मारेंगे। शराब हमारे मजहब में नहीं आती। हम ऐसा नहीं होने देंगे”

मुश्ताक ने आगे अपनी तमाम माँगों के साथ बताया कि गाँव में मंदिर बनाना बिलकुल ठीक नहीं है। अगर कोई आकर मंदिर बनाएगा तो हमें उसे जलाना ही पड़ेगा। इस पर अर्चना तिवारी ने पूछा- “आपको ये बातें किसने सिखाई? इस पर मुश्ताक बोलते दिखे कि अल्लाह की कसम ये बातें किसी ने नहीं सिखाईं, ये मैं अपनी जुबान से बोल रहा हूँ।”

मुश्ताक ने आगे बताया कि वो लोग हिंदुओं को अपनी जमीन ही नहीं देंगे कि कोई आकर मंदिर बना सके। वह बोला, “ये जमीन मोदी की नहीं है। ये हमारी है। हम नमाज पढ़ते हैं। पाँच बार पढ़ते हैं।”

आगे उसने बताया कि उसने कुरान में मंदिर जलाने वाली बात तो नहीं पढ़ी लेकिन उसे ये सब पता है क्योंकि वो मुसलमान है। उसने ये भी कहा कि अगर वो लोग मस्जिद में नमाज पढ़ें और हिंदू पूजा-पाठ या भजन करें तो उन्हें बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा।

इस्लामी कट्टरपंथी और अर्चना के बीच हुई बातचीत की क्लिप देखने के बाद लोग हैरान हैं और कह रहे हैं कि ऐसी मानसिकता के लोग ही कश्मीर में रहे होंगे जो पंडितों के साथ 90 के दशक में नरसंहार किया गया।

गाजियाबाद के हिंदू दंपती को परिजन ही ईसाई बनने के लिए कर रहे प्रताड़ित, भतीजा घर में लेकर आता है पादरी: इनकार करने पर सास-ससुर करते हैं पिटाई

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में धर्मांतरण से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक हिन्दू दंपति को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस घटना में ससुराल के सदस्यों द्वारा ईसाई बनने के लिए दबाव बनाने और धमकाने का आरोप है। घटना में शामिल लोगों द्वारा हिन्दू दंपति की न सिर्फ पिटाई की जा रही है, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने रविवार (22 सितंबर 2024) को केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके का है, जहाँ संगीता नाम की एक महिला ने अपने ससुरालवालों पर धर्मांतरण का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। संगीता का आरोप है कि उसके जेठ के परिवार ने पहले ही ईसाई धर्म अपना लिया है और अब उसी पर भी इस धर्म को अपनाने का दबाव डाला जा रहा है।

पीड़िता संगीता के अनुसार, उसके जेठ टीटू ने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कुछ साल पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। वह परिवार को लेकर नोएडा के सालारपुर में रहने लगे थे। टीटू की ईसाई धर्म में दीक्षित होने के बाद, उसके माता-पिता यानी संगीता के सास और ससुर ने भी ईसाई धर्म अपना लिया। लेकिन संगीता और उसके पति अजीत ने इस धर्मांतरण का विरोध किया और हिन्दू धर्म में बने रहने का निर्णय लिया।

टीटू की मौत के बाद भी धर्मांतरण का यह सिलसिला जारी रहा। टीटू का बेटा आशु, जो नोएडा में रहता है, अक्सर गाजियाबाद में संगीता के घर आता है। पीड़िता का आरोप है कि आशु अपने साथ ईसाई पादरियों को भी लाता है, जो संगीता और अजीत पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव डालते हैं। जब दंपति धर्मांतरण से इनकार करते हैं, तो आशु, उसके दादा किशनपाल और दादी अशर्फी उनके साथ बेरहमी से मारपीट करते हैं।

संगीता ने आरोप लगाया कि बार-बार धर्मांतरण से इनकार करने पर उसके और उसके पति के साथ लगातार मारपीट की जाती है। इन हिंसक घटनाओं के कारण उनके 2 छोटे बच्चे भी भयभीत हैं और डर के साए में जी रहे हैं। इसके अलावा, पीड़िता का कहना है कि उसे और उसके पति को जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। इस डर और अत्याचार के कारण संगीता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई और ससुरालवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस गंभीर मामले की शिकायत मिलने के बाद, स्थानीय पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने पीड़िता के जेठ के बेटे आशु, सास अशर्फी, और ससुर किशनपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2) और 351 (3) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/5 (1) के तहत मामला दर्ज किया है।

एफआईआर के मुताबिक, इन आरोपितों ने पीड़िता और उसके परिवार पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाया और इनकार करने पर उनके साथ हिंसा की। ऑपइंडिया के पास इस एफआईआर की कॉपी उपलब्ध है, जिसमें साफ तौर पर इन आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए हैं।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। इस बीच, पीड़िता ने भविष्य में किसी भी अनहोनी की आशंका जाहिर की है और अपनी सुरक्षा के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के तहत यह मामला न सिर्फ धार्मिक आस्था पर हमला है, बल्कि एक परिवार की स्वायत्तता और आत्मसम्मान पर भी चोट है। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत आरोपितों को कठोर सजा का प्रावधान है। यह अधिनियम ऐसे मामलों में विशेष प्रावधानों के साथ कार्रवाई करने की अनुमति देता है, जहाँ जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया जाता है।