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कानपुर में मालगाड़ी पलटने की साजिश, रेलवे ट्रैक पर रखा मिला गैस सिलेंडर और बीयर की कैन: ड्राइवर की सतर्कता से टला हादसा, CCTV फुटेज से जाँच शुरू

ट्रेन को पटरी से उतारने की साजिश रचने के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे। इस बार यह साजिश उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में रची गई है। यहाँ रेल की पटरी पर गैस सिलेंडर रखा पाया गया। लोको पायलट की सतर्कता और सूझबूझ से फिलहाल एक बड़ा हादसा टल गया है। घटना रविवार (22 सितंबर 2024) की है। पुलिस टीमों ने घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच शुरू कर दी है।

घटना प्रेमपुर स्टेशन के पास की है। उत्तर रेलवे के CPRO शशिकांत त्रिपाठी ने इस घटना पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि रविवार (22 सितंबर) को प्रयागराज मंडल के प्रेमपुर स्टेशन के पास एक मालगाड़ी गुजर रही थी। तभी इस ट्रेन के पायलट ने भाँप लिया कि ट्रैक पर छोटा घेरलू सिलेंडर पड़ा हुआ है। सिलेंडर की साइज 5 लीटर की बताई जा रही है। पायलट ने फ़ौरन ही इमरजेंसी ब्रेक लगा कर सिलेंडर से पहले ही ट्रेन को रोक लिया।

रेलवे अधिकारी शशिकांत ने लोको पायलट की सराहना की है। इसी स्थान से पायलट ने कंट्रोल रूम व संबंधित अधिकारियों को सूचित किया। सूचना मिलते ही RPF और GRP के जवान व अन्य अधिकारी मौके पर पहुँचे। सिलेंडर को कब्ज़े में लेकर जाँच शुरू कर दी गई है। रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से चल रहा है। बकौल शशिकांत त्रिपाठी अब यह पड़ताल चल रही है कि रेलवे ट्रैक पर सिलेंडर कैसे और किस मकसद से रखा गया था।

शशिकांत त्रिपाठी ने आगे बताया कि हाल-फिलहाल में इस तरह की कई घटनाएँ प्रकाश में आईं हैं। इसकी रोकथाम के लिए रेलवे के सभी स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि रेलवे ट्रैक या आसपास कोई भी संदिग्ध चीज देखे जाने पर फ़ौरन ही इसकी सूचना कंट्रोल रूम में दें। रेलवे ने कुछ संवेदनशील स्थान भी चिन्हित किए हैं जहाँ विशेष सतकर्ता बरती जा रही है। बकौल शशिकांत रेलवे अब ऐसे तत्वों की पहचान के लिए AI व CCTV फुटेज आदि तकनीकियों का भी प्रयोग शुरू करने जा रहा है।

‘अब बंकर की जरूरत नहीं, भारत गोली का जवाब गोले से देता है’ : जम्मू-कश्मीर में गरजे गृह मंत्री अमित शाह, कहा- मोदी सरकार ने आतंकवाद किया दफन…फारूक अब्दुल्ला छुट्टी मनाते थे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (22 सितंबर 2024) को जम्मू-कश्मीर के नौशेरा में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस रैली के दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर जोर दिया, जिनमें पाकिस्तान की सीज़फायर उल्लंघन की नापाक हरकतें, अनुच्छेद 370 का मुद्दा और आतंकवाद के खिलाफ सरकार की कड़ी कार्रवाई शामिल थी। अमित शाह ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में किसी को बंकरों की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर सीमा पार से गोली आती है, तो उसका जवाब गोले से दिया जाएगा। यह बयान पाकिस्तान के संदर्भ में दिया गया, जो अक्सर सीज़फायर का उल्लंघन करता रहा है।

अमित शाह ने कहा, “अब बंकरों की जरूरत नहीं है क्योंकि कोई भी गोली चलाने की हिम्मत नहीं कर सकता। अगर वहाँ से गोली आई तो उसका जवाब गोले से दिया जाएगा।” यह बयान पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलीबारी पर कड़ा संदेश था।

अनुच्छेद 370 और फारूक अब्दुल्ला पर हमला

अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को बहाल करने की माँग कर रहे नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला पर हमला बोलते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 कभी वापस नहीं आएगी। अमित शाह ने कहा, “फारूक साहब, अनुच्छेद 370 अब कभी नहीं लौटेगी। ये लोग शेख अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला के पिता) का झंडा वापस लाना चाहते हैं, लेकिन अब सिर्फ तिरंगा ही जम्मू-कश्मीर में लहराएगा। वे पाकिस्तान से बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन हम तब तक पाकिस्तान से बातचीत नहीं करेंगे जब तक आतंकवाद खत्म नहीं होता।”

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्षी नेता जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को जेल से रिहा करना चाहते हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा, “वे (अब्दुल्ला परिवार) आतंकवादियों को जेल से रिहा करना चाहते हैं, लेकिन मोदी सरकार ने आतंकवाद को गहराई से दफन कर दिया है। कोई भी आतंकवादी या पत्थरबाज जेल से बाहर नहीं आएगा।”

फारूक अब्दुल्ला और 30 साल का आतंकवाद

अमित शाह ने फारूक अब्दुल्ला पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था और कर्फ्यू लगा हुआ था, तब फारूक अब्दुल्ला लंदन में छुट्टियाँ मना रहे थे। उन्होंने कहा, “30 साल तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का दौर चला। 30 साल में 3,000 दिन कर्फ्यू लगा रहा और 40,000 लोग मारे गए। फारूक साहब, उन दिनों आप कहां थे? जब कश्मीर जल रहा था, तब फारूक साहब आराम से लंदन में छुट्टियाँ मना रहे थे।”

कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर हमला

गृह मंत्री ने रैली में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का एजेंडा है आरक्षण छीनने का। राहुल गाँधी अमेरिका में जाकर कहते हैं कि पहाड़ी लोगों ने अब विकास कर लिया है और उन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है। अमित शाह ने कहा, “उनका एजेंडा आरक्षण छीनने का है। राहुल गाँधी अमेरिका जाते हैं और कहते हैं कि पहाड़ी लोग अब विकसित हो गए हैं, उन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि आरक्षण बना रहेगा। हमने धारा 370 को समाप्त किया और अब कोई इसे वापस नहीं ला सकता।”

मोदी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई

अमित शाह ने मोदी सरकार की उपलब्धियों पर भी जोर दिया, खासतौर पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवादियों को एक-एक कर खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “मोदीजी आए और हमने एक-एक कर आतंकवादियों का सफाया कर दिया। अब जम्मू-कश्मीर में शांति है और विकास का दौर चल रहा है।”

शाह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद और पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी गिरावट आई है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने का काम किया गया है। “अब कोई पत्थरबाज नहीं है, कोई आतंकवादी नहीं बचा है। हमने आतंकवाद को दफन कर दिया है।”

आरक्षण पर स्पष्टता

अमित शाह ने पहाड़ी समुदाय के आरक्षण को लेकर कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने पहाड़ी समुदाय को आरक्षण दिया है और इसे वापस लेने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने पहाड़ी लोगों को आरक्षण दिया है और कोई इसे छीन नहीं सकता। कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का एजेंडा है कि वे इसे छीनना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।”

धारा 370 की बहाली असंभव

अमित शाह ने धारा 370 की बहाली के सवाल पर स्पष्ट कर दिया कि इसे दोबारा लागू करना असंभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब केवल तिरंगा ही लहराएगा और कोई भी इसे बदल नहीं सकता। उन्होंने कहा, “फारूक अब्दुल्ला का सपना है कि वे धारा 370 को वापस लाएं, लेकिन मैं सबको बताना चाहता हूं कि कोई भी इसे वापस नहीं ला सकता।”

अमित शाह की रैली में दिए गए भाषण ने जम्मू-कश्मीर में आगामी चुनावों के लिए भाजपा की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की। शाह ने पाकिस्तान, अनुच्छेद 370 पर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि विपक्षियों का एजेंडा जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों के खिलाफ है। इस रैली से भाजपा ने अपनी कड़ी नीतियों और धारा 370 को लेकर अपनी दृढ़ता को एक बार फिर से दोहराया।

6 निकाह कर चुके जियारुल ने शंकर यादव बनकर हिंदू युवती से की 7वीं शादी, धर्मांतरण का दबाव बनाया: गाँव पहुँचने पर खुली सच्चाई, शिकायत के बाद गिरफ्तार

बिहार के पूर्णिया जिले से लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ पर 32 वर्षीय मोहम्मद जियारुल ने नाम बदल कर एक हिन्दू लड़की को पहले अपने जाल में फँसाया और बाद में उस से निकाह कर लिया। पीड़िता को जियारूल ने अपना परिचय शंकर यादव नाम से दिया था। पीड़िता से पहले जियारूल 6 निकाह कर चुका था। हिन्दू महिला को इस्लाम कबूल करवाने की भी कोशिश हुई थी। बुधवार (18 सितंबर 2024) को मिली शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना पूर्णिया जिले के थानाक्षेत्र सदर का है। यहाँ बुधवार को एक हिन्दू पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में महिला ने बताया कि दिसंबर 2023 में उसकी मुलाकात जियारूल से हुई थी। तब जियारूल मजदूरी करता था। वह शंकर यादव नाम से पीड़िता के घर में काम करने आया था। यहीं पर दोनों की मुलाकात हुई जो आगे चल कर बातचीत में बदल गई। कुछ ही दिनों में जियारूल ने लड़की को अपने झाँसे में ले लिया।

मुलाकातों के दौरान मोहम्मद जियारूल ने खुद को कुँवारा बताया। 7 फरवरी 2024 को उसने पीड़िता से शादी कर ली। इसके बाद उसने पीड़िता से कई बार शारीरिक संबंध बनाए। अगस्त महीने से जियारूल की हरकतों पर पीड़िता को शक होने लगा। वह पीड़िता पर बुर्का पहनने का दबाव बनाने लगा। इसी के साथ उसने महिला को रोज़ा रखने और नमाज़ आदि पढ़ने की भी नसीहत देनी शुरू कर दी।

जब भी अजान होती थी तो जियारूल अपने हाथ इबादत के लिए उठाने लगता था। उसने अधिकतर बातें उर्दू अल्फाज में करना शुरू कर दिया। जियारूल बात-बात पर पीड़िता को पीटने लगा। कभी-कभार वह लड़की को इस्लाम कबूल करने जैसी नसीहत भी देता था। पीड़िता ने अपने शक को यकीन में बदलने के लिए शंकर यादव बने जियारूल की खोजबीन की। इसी पड़ताल में उसके मूल गाँव का पता चला जो कि पूर्णिया के ही बरसौनी थानाक्षेत्र में है।

वह जियारूल के गाँव पहुँची तो उन्हें पहली बार अपने पति के मुस्लिम होने का पता चला। यहीं पर इस बात का भी खुलासा हुआ कि जियारूल पहले से शादीशुदा है। उसकी पहले से कुल 6 बीवियाँ थीं जिनमें वो 2 को तलाक दे चुका है। पीड़िता से जियारूल ने 7वाँ निकाह किया था। अपनी पोल खुलने के बाद जियारूल ने पीड़िता को जान से मार डालने की भी धमकी दी। इस बीच पीड़िता के परिजनों को भी जियारूल की करतूतों का पता चला।

उन सभी ने आरोपित की मिल कर पिटाई कर डाली। मामला संज्ञान में आते ही हिन्दू संगठनों ने भी कार्रवाई की माँग उठाना शुरू कर दिया। 18 सितंबर को पीड़िता ने जियारूल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। 19 सितंबर (गुरुवार) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। जियारूल के पास से शंकर यादव नाम का फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ है। गिरफ्तारी के दौरान उसके हाथ में कलावा जैसा धागा बँधा मिला। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अमेरिका के अलबामा में क्लब के बाहर फायरिंग, 4 की मौत और दर्जनों घायल: हमलावरों की पहचान करने में जुटी पुलिस, FBI एवं अन्य एजेंसियों से माँगी मदद

अमेरिका के बर्मिंघम स्थित अलबामा से शनिवार की रात को एक एंटरटेनमेंट एरिया में गोलीबारी की गई। इस गोलीबारी में कम-से-कम 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह फायरिंग कई हमलावरों ने मिलकर की है।

बर्मिंघम के पुलिस अधिकारी ट्रूमैन फिट्ज़गेराल्ड ने बताया कि रात 11 बजे के बाद फाइव पॉइंट्स साउथ क्षेत्र में कई हमलावरों ने लोगों के एक समूह पर कई गोलियाँ चलाईं। फिट्ज़गेराल्ड ने बताया कि जब अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे तो गोली लगने के कारण बेहोश हुए दो पुरुष और एक महिला बेहोश मिले। बाद में तीनों की मौत हो गई। वहीं, चौथी मौत अस्पताल में हुई।

फिट्जगेराल्ड ने कहा कि अभी तक किसी भी संदिग्ध को हिरासत में नहीं लिया गया था। उन्होंने बताया कि दर्जनों घायल हुए लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। पुलिस एवं अन्य एजेंसियाँ ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हमलावर घटनास्थल तक पैदल आए थे या किसी वाहन में सवार होकर। इसके अलावा, दूसरी जानकारियाँ भी निकाली जा रही हैं।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, हिंसा के पीछे के कारणों का अभी नहीं चल पाया है और ना ही ये पता चल पाया है कि हमला करने वाले कितने लोग थे। बर्मिंघम पुलिस ने उस इलाके के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से कहा है कि वे अपने पास मौजूद कोई भी संदिग्ध निगरानी फुटेज दिखे तो उसे पुलिस को उपलब्ध कराएँ। इसके साथ ही लोगों से भी किसी भी तरह की जानकारी साझा करने का अनुरोध किया है।

क्लब मैगनोलिया एवेन्यू पर हुक्का और सिगार लाउंज के बाहर लोग लाइन में खड़े थे, तभी गोलीबारी हुई। अधिकारियों का मानना है कि हमलावर कई होंगे। फिट्ज़गेराल्ड ने संदेह जारी है कि सामूहिक गोलीबारी की यह घटना आपराधिक से ज़्यादा सांस्कृतिक हो सकता है। उन्होंने आगे कहा, “आजकल हम बहुत ज़्यादा विवादों को गोलियों से सुलझाते हुए देख रहे हैं।” रिपोर्ट के मुताबिक, अलबामा में शूटिंग की यह 403 घटना है।

‘कैमरा उठाकर निकलो, 45 दिन तक घुसना मत’ : इजरायल ने वेस्ट बैंक में Al Jazeera के ब्यूरो पर लगाया ताला, राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत उठाया कदम

इजरायल और अल जज़ीरा समाचार नेटवर्क के बीच चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इज़रायली सैनिकों ने रामल्लाह स्थित अल जज़ीरा के कार्यालय पर छापा मारा और 45 दिनों के लिए इसे बंद करने का आदेश दिया। यह छापेमारी इज़रायल की अदालत के आदेश के तहत की गई, जिसमें कहा गया था कि अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग इज़रायल की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है। यह कार्रवाई मई 2024 में इज़रायल द्वारा अल जज़ीरा के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों की कड़ी में एक और बड़ा कदम है, जब चैनल के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया था।

सरकारी आदेश और विवाद का इतिहास

मई 2024 में इज़रायल ने अल जज़ीरा पर यह आरोप लगाते हुए उसके प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया कि चैनल की रिपोर्टिंग इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को नुकसान पहुँचा रही है। इस आदेश के तहत, पूर्वी यरुशलम और नाज़रथ में स्थित अल जज़ीरा के कार्यालयों पर छापेमारी की गई और प्रसारण उपकरण जब्त कर लिए गए। इसके साथ ही, इज़रायल में चैनल के प्रसारण और वेबसाइट को भी ब्लॉक कर दिया गया। इज़रायल ने यह आरोप लगाया कि अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग, खासतौर पर उसके अरबी भाषा के चैनल पर, हमास और अन्य कट्टरपंथी समूहों के विचारों को मंच प्रदान कर रही है, जो इज़रायल के खिलाफ हिंसा भड़काने का काम कर रही है।

इज़रायली सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, “अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग से इज़रायली सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा को खतरा है। चैनल बार-बार उन संगठनों के संदेश प्रसारित कर रहा है, जो हिंसा फैलाने और इज़रायल के खिलाफ जिहाद का आह्वान कर रहे हैं। हमारे लिए यह अस्वीकार्य है, और इसलिए हमने कड़े कदम उठाए हैं।”

अलजजीरा के रामल्लाह कार्यालय पर छापा

22 सितंबर 2024 को इज़रायली सैनिकों ने अल जज़ीरा के रामल्लाह कार्यालय पर छापा मारा और तत्काल प्रभाव से इसे बंद करने का आदेश दिया। यह आदेश 45 दिनों के लिए है। चैनल के स्थानीय ब्यूरो प्रमुख वलीद अल-ओमारी ने इस छापेमारी की लाइव रिपोर्टिंग की, जिसमें सैनिकों ने कर्मचारियों को कार्यालय खाली करने का आदेश दिया। छापे के दौरान कई दस्तावेज़ और प्रसारण उपकरण जब्त किए गए। कार्यालय की बालकनी पर लगे बैनर को भी हटाया गया, जिसमें शिरीन अबू अकलेह की तस्वीर थी। शिरीन, एक फिलिस्तीनी-अमेरिकी पत्रकार थीं, जिन्हें मई 2022 में इज़रायली सैनिकों ने मार दिया था।

एक इज़रायली सैनिक ने लाइव प्रसारण के दौरान कहा, “अल जज़ीरा कार्यालय को 45 दिनों के लिए बंद करने का आदेश है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप सभी उपकरणों को हटाएँ और कार्यालय को तुरंत खाली कर दें,”

अल जज़ीरा की प्रतिक्रिया

अल जज़ीरा ने इज़रायल की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। चैनल ने बयान जारी करते हुए कहा कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र रिपोर्टिंग कर रहा है और इस तरह की कार्रवाई प्रेस स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है। अल जज़ीरा ने अपने बयान में कहा, “इज़रायल का यह कदम स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकारों का उल्लंघन है। हम अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, और हम इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष उठाएँगे।”

अल जज़ीरा के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, “हमारी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और सत्यापित जानकारी पर आधारित है। इज़रायल की यह कार्रवाई स्वतंत्र पत्रकारिता के खिलाफ सीधी चुनौती है, और हम इस पर चुप नहीं बैठेंगे।” इज़रायल और अल जज़ीरा के बीच यह विवाद कई वर्षों से चल रहा है। इज़राइल का आरोप है कि चैनल की रिपोर्टिंग से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।

इज़रायल द्वारा अल जज़ीरा के खिलाफ उठाए गए कदमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मीडिया संगठन इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इज़रायल अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा, ये देखना अभी बाकी है। फिलहाल, अल जज़ीरा ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा और अपने रिपोर्टरों की सुरक्षा के लिए कानूनी कदम उठाएगा।

OpIndia Impact- गणपति पंडाल के आगे भड़काऊ नारेबाजी करने वाला मोहम्मद जैद 15 साथियों संग गिरफ्तार: पुलिस ने CCTV जाँच के बाद पकड़ा

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सोमवार (16 सितंबर 2024) को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक मुस्लिम भीड़ ने मुस्लिम बहुल उतरौला बाजार में भगवान गणेश के पंडाल पर फिलिस्तीनी समर्थक व उन्मादी नारेबाजी की थी। पुलिस द्वारा पकड़े गए एक व्यक्ति को भी तब भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने छुड़ा लिया था। घटना के कुछ ही घंटों के बाद ऑपइंडिया ने इस करतूत को प्रमुखता से दिखाया था। अब बलरामपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर के इस घटना में शामिल मुस्लिम समुदाय के 16 असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार किया है। मामले की जाँच अभी भी जारी है।

वीडियो वायरल होने के बाद बलरामपुर पुलिस ने थाना उतरौला में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 170, 126 और 135 के तहत केस दर्ज किया था। CCTV व अन्य वीडियो फुटेज सहित कई सबूतों को जमा करके आरोपितों को चिन्हित किया गया। पहले चरण में कुल 16 आरोपितों की पहचान हुई। शुक्रवार (20 सितंबर) को पुलिस ने दबिश देकर इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपितों को शांतिभंग की धाराओं में चालान कर के अदालत भेज दिया गया।

गणेश पंडाल पर उन्मादी नारेबाजी के आरोप में गिरफ्तार हुए अधिकतर आरोपित बलरामपुर जिले के ही निवासी हैं। इनके नाम मोहम्मद जैद, मोहम्मद इरफ़ान, शाहबाज आलम, जैद खान, मोहम्मद हुसैन, आकिब अली, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद अशरफ, साबिर अली, गुलाम बख्तियार, मोहम्मद अफ़ज़ल, मोहम्मद माज़िद, कासिम अली, महफूज़ रज़ा, जैद अंसारी और कुतुबुद्दीन हैं।

संदिग्ध को छुड़ाने वाले की पहचान अब तक नहीं

इस घटना में 2 वीडियो एक साथ वायरल हुए थे। पहले वीडियो में मज़हबी जुलूस निकाली भीड़ भगवान गणेश के पंडाल के आगे फिलिस्तीन समर्थन सहित हिंदुस्तान में रहना होगा तो ख्वाजा ख्वाजा कहना होगा जैसे नारे लगा रही थी। इस दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने “रसूल के गुलाम को मौत भी कबूल है”, “फिलीस्तीन का मुसलमान जिंदाबाद” “मस्जिद ए अक्सा जिंदाबाद” जैसे नारे भी लगाए थे।

वहीं दूसरे वीडियो में उतरौला थाने के इंस्पेक्टर द्वारा पकड़े गए एक संदिग्ध को कुछ लोगों ने छुड़ा दिया था। वायरल वीडियो में इंस्पेक्टर को कहते सुना गया, “क्यों छोड़ दें ?” फिर भी अंत में भीड़ में शामिल लोग अपने मंसूबों में सफल रहे थे। फिलहाल अभी तक पुलिस की तरफ से उस व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की गई है जिसने संदिग्ध को इंस्पेक्टर के हाथ से छुड़ाया था। बलरामपुर के एडिशनल एसपी ने अपने बयान में बताया है कि मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

बेंगलुरु में 29 साल की महालक्ष्मी की निर्मम हत्या… शव के 30 टुकड़े फ्रिज में सड़ते मिले, बदबू से हुआ खुलासा: लोगों को याद आया श्रद्धा वॉकर केस

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के व्यालिकावल इलाके में शनिवार (21 सितंबर) को एक महिला की बेरहमी से हत्या की गई। उसकी लाश को 20 से 40 टुकड़ों में काटकर घर के फ्रीज में रखा गया था। मृतका की पहचान 29 वर्षीय महालक्ष्मी के रूप में हुई है। माना जाता है कि महालक्ष्मी की हत्या करीब 15 दिन पहले की गई थी।

इस साल 2 सितंबर से उसका फोन बंद था। यह मामला तब सामने आया, जब पीड़िता के पड़ोसियों ने दुर्गंध आने की शिकायत की। पुलिस को बुलाया गया और आसपास के इलाके की घेराबंदी की गई। पुलिस ने मानव अंगों को बरामद किया है। इनमें कीड़े लगे हुए थे। पुलिस ने मामले की जाँच में फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वायड की भी मदद ली है।

इस साल की शुरुआत में महालक्ष्मी अपने पति हेमंत दास से अलग हो गई थी और बेंगलुरु में अकेली रह रही थी। वह नेपाल की मूल निवासी थी। पीड़िता की एक 4 साल की बेटी है, जो उसके पूर्व पति के साथ रहती है। मामले की जानकारी मिलने पर हेमंत भी घटनास्थल पर पहुँचा। बताया जाता है कि वह हर पखवाड़े अपने बच्चे के साथ महालक्ष्मी के घर आता था।

परेशान करने वाली इस घटना के बारे में बात करते हुए पुलिस ने बताया, “महालक्ष्मी का फोन 2 सितंबर से बंद था। जब उनसे संपर्क नहीं हो पाया तो उनकी माँ और बहन चिंतित हो गईं और घर आ गईं।” उन्होंने बताया, “जब हमने दरवाज़ा खोला तो हमने देखा कि फर्श पर कीड़े रेंग रहे थे और पूरा फर्श पीड़ित के खून से चिपचिपा था। यह खून रेफ्रिजरेटर के दरवाज़े से टपक रहा था।”

पुलिस ने आगे बताया कि महिला के पैरों को काटकर घर में रखे रेफ्रिजरेटर के ऊपर रख दिया गया था। वहीं, शरीर के बाकी हिस्सों को बीच के सेल्फ में रख दिया गया था। सिर को रेफ्रिजरेटर के नीचे रखा गया था। इस घटना को जिसने भी देखा या सुना, वह दंग रह गया। इस हत्याकांड को किसने अंजाम दिया है, इस बात का अभी खुलासा नहीं हो पाया है।

मौजूदा मामला 27 वर्षीय श्रद्धा वॉकर नामक महिला की हत्या की याद दिलाता है। आफताब अमीन पूनावाला ने 18 मई 2022 को लिव-इन-पार्टनर श्रद्धा की गला घोंटकर हत्या कर दी थी और फिर उसके शरीर को 35 टुकड़ों में काट दिया था। आफताब ने राष्ट्रीय राजधानी में 18 अलग-अलग स्थानों पर उसके शरीर के अंगों को ठिकाने लगाया।

‘ 11 दिन उपवास रखकर करूँगा प्रायश्चित’ : तिरुपति प्रसाद विवाद से आहत होकर डिप्टी CM पवन कल्याण ने लिया संकल्प, वेंकटेश्वर भगवान से माँगेंगे माफी

तिरुपति बालाजी मंदिर, जिसे तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के नाम से जाना जाता है, में प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं, जिन्हें तिरुपति लड्डू के नाम से भी जाना जाता है। यह लड्डू श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसकी महत्ता धार्मिक आस्था से जुड़ी है। हाल ही में विवाद तब खड़ा हुआ जब इन लड्डुओं में पशु चर्बी के उपयोग की बात सामने आई। इस विवाद के बाद राज्य की राजनीति में भी उथल-पुथल मच गई है। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और सुपरस्टार पवन कल्याण ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए पश्चाताप और प्रायश्चित के लिए 11 दिन का उपवास रखने का संकल्प किया है।

पवन कल्याण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि उन्हें इस घटना से गहरा आघात पहुँचा है और वे व्यक्तिगत तौर पर इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में खुद को दोषी महसूस करते हैं कि वे समय रहते इस मिलावट के बारे में जानकारी नहीं जुटा पाए। इस घटना के प्रति गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए पवन कल्याण ने 11 दिनों के उपवास का ऐलान किया है।

पवन कल्याण ने कहा, “हमारी संस्कृति, आस्था, विश्वास और श्रद्धा की धर्मधुरी, श्री तिरुपति बालाजी धाम के प्रसाद में, कुत्सित प्रयासों के तहत, जो अपवित्रता का संचार करने की कोशिश की गई, उससे मैं व्यक्तिगत स्तर पर अत्यंत मर्माहत हूँ। सच कहूँ तो, मैं अंदर से छला हुआ महसूस कर रहा हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रभु वेंकटेश्वर से मेरी प्रार्थना है कि इस दुःख के क्षण में हमें और समस्त सनातनियों को अपनी अहैतुकी कृपा से सबलता प्रदान करें। मैं अभी इसी क्षण भगवान से क्षमा प्रार्थी हो, प्रायश्चित दीक्षा हेतु, प्रण सिद्ध कर रहा हूँ, और ग्यारह दिवसीय उपवास हेतु धर्म संकल्पित हो रहा हूँ।”

पवन कल्याण ने कहा कि वे 11 दिनों के उपवास के अंतिम दो दिन, एक और दो अक्टूबर को तिरुपति जाएँगे। वहाँ वे भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करेंगे और प्रायश्चित करेंगे। इस यात्रा के दौरान वे अपने उपवास की पूर्णाहूति करेंगे।

तिरुपति लड्डू विवाद क्या है?

तिरुपति बालाजी मंदिर, जिसे तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) कहा जाता है, हिंदू श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत पवित्र स्थल है। यहाँ प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले लड्डू, जिन्हें तिरुपति लड्डू कहा जाता है, श्रद्धालुओं के बीच बहुत पवित्र माने जाते हैं। हाल ही में ये बात सामने आई कि लड्डुओं को बनाने के लिए जिस घी का उपयोग किया जाता है, वो अपवित्र है। इसमें पशु चर्बी का उपयोग हो रहा है। यह आरोप हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला था, क्योंकि प्रसादम को शुद्ध और पवित्र माना जाता है। हालाँकि बाद में मंदिर प्रशासन ने कहा था कि प्रसाद की पवित्रता बहाल कर दी गई है।

पवन कल्याण का प्रायश्चित

पवन कल्याण, जो कि न केवल आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं बल्कि साउथ के सुपरस्टार भी हैं, ने इस विवाद को गंभीरता से लिया है। उनका मानना है कि तिरुमाला तिरुपति जैसे धार्मिक स्थल से जुड़ा कोई भी विवाद सिर्फ प्रशासन की गलती नहीं, बल्कि यह हर श्रद्धालु की जिम्मेदारी है कि वे इसे शुद्ध और पवित्र बनाए रखें।

इसी भावना के चलते उन्होंने 11 दिनों के उपवास और प्रायश्चित का फैसला लिया है। उनके इस निर्णय को लेकर देश भर में चर्चाएँ हो रही हैं। पवन कल्याण के समर्थकों और श्रद्धालुओं का मानना है कि उनका यह कदम तिरुपति मंदिर की पवित्रता की रक्षा के लिए एक प्रतीकात्मक प्रयास है। उनका उपवास 11 दिनों तक चलेगा और इसके बाद वे तिरुपति जाकर भगवान वेंकटेश्वर से क्षमा प्रार्थना करेंगे।

किलर ड्रोन डील से लेकर हरक्यूलस विमान और सेमीकंडक्टर प्लांट तक: जानें प्रधानमंत्री के US दौरे से क्या हुआ हासिल, QUAD नेता ने की PM मोदी की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार (21 सितंबर 2024) की देर रात डेलावेयर में क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसमें वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए सदस्य देशों के नेताओं ने पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। इसके साथ ही अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की स्थायी सदस्यता की जमकर वकालत की।

संयुक्त बयान में कहा गया है, “हम पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर गंभीर हैं। हम विवादित क्षेत्रों के सैन्यीकरण और दक्षिण चीन सागर में जबरदस्ती करने और डराने वाले युद्धाभ्यास पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। हम तटरक्षक और समुद्री मिलिशिया जहाजों के इस्तेमाल की निंदा करते हैं, जिसमें खतरनाक युद्धाभ्यास का बढ़ता उपयोग भी शामिल है।”

हिंद महासागर में भारत की भूमिका को लेकर क्वाड के नेताओं ने भारत और पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत हिंद महासागर में महाशक्ति बनकर उभरा है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि भारत के अनुभवों से अमेरिका को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज विश्व तनाव और संघर्षों से घिरा हुआ है। इसलिए साथ मिलकर चलना जरूरी है। क्वाड को वैश्विक भलाई की शक्ति बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि क्वाड सहयोग और साझेदारी के लिए है, किसी के खिलाफ नहीं। बता दें कि QUAD में चार सदस्य देश हैं, जिनमें अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल है।

पीएम मोदी ने कहा, “स्वतंत्र, खुला, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत हमारी साझा प्राथमिकता और साझा प्रतिबद्धता है।” उन्होंने कहा कि गठबंधन ने पहले ही स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा, उभरती हुई तकनीक और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में पहल की है। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति जो बिडेन को भी संबोधित किया और गठबंधन में उनके योगदान को स्वीकार किया।

उन्होंने कहा, “अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान इस क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने पर मुझे बहुत खुशी हो रही है। आपके नेतृत्व में 2021 का पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। इतने कम समय में हमने हर दिशा में अपने सहयोग को अभूतपूर्व तरीके से बढ़ाया है। आपने इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं क्वाड के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और योगदान के लिए आपका शुक्रिया अदा करता हूँ।”

क्वाड सम्मेलन से हटकर प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से भी मुलाकात की। विदेश मंत्री ने एक बयान में कहा कि बातचीत ‘पारस्परिक हितों के क्षेत्रों’ में अमेरिका-भारत द्विपक्षीय साझेदारी को बेहतर बनाने पर केंद्रित थी। नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र भी शामिल था।

इसी तरह व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति बिडेन और प्रधानमंत्री मोदी ने निरंतर विश्वास व्यक्त किया कि हमारे लोगों, हमारे नागरिक और निजी क्षेत्रों और हमारी सरकारों के गहरे संबंधों को मजबूत करने के अथक प्रयासों ने अमेरिका-भारत साझेदारी को आने वाले दशकों में और भी अधिक ऊँचाइयों की ओर अग्रसर किया है।”

MQ-9B ड्रोन: पीएम मोदी और राष्ट्रपति बिडेन ने दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी पर चर्चा की, जिसमें ड्रोन की खरीद और संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत द्वारा 31 जनरल एटॉमिक्स एमक्यू-9B (16 स्काई गार्जियन और 15 सी गार्जियन) ड्रोन की खरीद का स्वागत किया। यह ड्रोन भारत के सशस्त्र बलों की खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) क्षमताओं को बढ़ाएगा।

इस साल फरवरी में अमेरिका ने भारतीय सेना को 3.99 बिलियन डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपए) की अनुमानित लागत से 31 MQ-9B ड्रोन की बिक्री को मंजूरी दी थी। 31 ड्रोन में से भारतीय नौसेना को 15 सी गार्डियन ड्रोन मिलेंगे, जबकि भारतीय वायुसेना और सेना को आठ-आठ स्काई गार्डियन ड्रोन मिलेंगे।

MQ-9B प्रीडेटर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी शोर-शराबे के काम कर सकता है। यह ड्रोन जमीन से 250 मीटर की दूरी तक उड़ सकता है और लक्ष्य को इसकी भनक तक नहीं लगती, जब तक कि इसे देखा न जाए। यह ड्रोन किसी कमर्शियल विमान से भी ज्यादा ऊँचाई पर उड़ सकता है, जो जमीन से करीब 50,000 फीट ऊपर है और इसकी अधिकतम गति 442 किमी/घंटा है।

सुपर हरक्यूलिस विमान: प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान पर लॉकहीड मार्टिन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त समझौते पर भी चर्चा की। व्हाइट हाउस ने कहा, “नेताओं ने जेट इंजन, युद्ध सामग्री और ग्राउंड मोबिलिटी सिस्टम के लिए प्राथमिकता वाले सह-उत्पादन व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए चल रहे सहयोग को मान्यता दी।”

पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन ने राजस्थान में चल रहे द्विपक्षीय युद्ध अभ्यास के दौरान भारत में जैवलिन और स्ट्राइकर प्रणालियों के पहले प्रदर्शन सहित रक्षा अभ्यास के दौरान नई तकनीकों और क्षमताओं को शामिल करने की भी सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग की भी सराहना की।

सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन: पीएम मोदी और बाइडेन ने कोलकाता में एक नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट की स्थापना पर चर्चा की। व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि दोनों नेताओं ने “राष्ट्रीय सुरक्षा, अगली पीढ़ी के दूरसंचार और हरित ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उन्नत संवेदन, संचार और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स पर केंद्रित एक नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट की स्थापना के लिए समझौते की सराहना की।”

बयान में कहा गया है कि यह संयंत्र भारत सेमीकंडक्टर मिशन के समर्थन के साथ-साथ भारत सेमी, थर्डटेक और अमेरिकी अंतरिक्ष बल के बीच रणनीतिक प्रौद्योगिकी साझेदारी से स्थापित किया जाएगा। व्हाइट हाउस ने कहा कि ग्लोबलफाउंड्रीज कोलकाता पावर सेंटर चिप निर्माण में अनुसंधान और विकास में पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों को बढ़ाएगा।

UN में भारत की स्थायी सदस्यता: वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि अमेरिका भारत की महत्वपूर्ण आवाज़ को प्रतिबिंबित करने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार की पहल का समर्थन करता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता भी शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी की हाल ही में पोलैंड और यूक्रेन की यात्राओं की भी सराहना की।

तिरुपति प्रसाद विवाद के बाद कर्नाटक के 34000 मंदिरों में होगा सिर्फ ‘नंदिनी’ घी इस्तेमाल, सरकार का निर्देश: Amul ने ब्रांड को बदनाम करने वाले ‘स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस’ समेत 7 पर की FIR

तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले लड्डुओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ। तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने के लिए घटिया घी का इस्तेमाल किया गया, जिसमें मछली, पशु की चर्बी की मिलावट पाई गई। यह विवाद तब और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएँ फैलने लगीं और इसे अमूल और नंदिनी घी से जोड़ा गया। इस विवाद के बाद कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी मंदिरों के लिए एक नया निर्देश जारी किया, जिसके तहत मंदिरों में प्रसाद और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सिर्फ नंदिनी घी का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, अफवाह फैलाने वाले 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।

कर्नाटक सरकार का नया निर्देश

कर्नाटक सरकार ने मंदिरों में उपयोग किए जाने वाले घी के संबंध में एक नया आदेश जारी किया, जिसमें राज्य के सभी 34,000 मंदिरों में सिर्फ नंदिनी घी का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए। यह निर्देश तिरुपति मंदिर में लड्डू के प्रसाद में पशु वसा के इस्तेमाल की अफवाहों के बाद आया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले पर गंभीरता दिखाते हुए मंदिरों में प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया।

नंदिनी घी के उपयोग का निर्देश: नंदिनी घी कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) द्वारा निर्मित होता है। कर्नाटक के मुझराई मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने सभी मंदिरों को निर्देशित किया कि वे नंदिनी घी का उपयोग करें। इसका उपयोग न केवल प्रसाद बनाने में होगा, बल्कि मंदिरों में दीप जलाने और अन्य धार्मिक कार्यों में भी इसका प्रयोग किया जाएगा। मंदिरों में “दसोहा भवनों” में भोजन परोसते समय भी नंदिनी घी का ही उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।

मंत्री रेड्डी ने यह भी कहा कि मंदिरों में दिए जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता की नियमित रूप से जाँच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं भी कोई कमी या मिलावट न हो। मंदिरों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे प्रसाद बनाने में गुणवत्ता बनाए रखें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें।

अमूल और सोशल मीडिया विवाद

जब तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद से जुड़ा यह विवाद बढ़ा, तो कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने अमूल पर निशाना साधना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ अकाउंट्स ने यह दावा किया कि तिरुपति मंदिर में इस्तेमाल किए जाने वाले घी में अमूल द्वारा आपूर्ति किया गया पशु वसा युक्त घी शामिल था। इस गलत सूचना के फैलने के बाद अमूल को कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी।

अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में सात एक्स उपयोगकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन सात उपयोगकर्ताओं में कॉन्ग्रेस समर्थक भी शामिल थे, जिन्होंने अमूल के खिलाफ गलत सूचनाएँ फैलाईं। शिकायतकर्ता, जीसीएमएमएफ (गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन) के उप महाप्रबंधक हेमंत गवानी ने आरोप लगाया कि इन उपयोगकर्ताओं ने झूठी सूचनाओं के आधार पर अमूल को बदनाम करने की कोशिश की।

अमूल ने आरोपों को किया था खारिज

अमूल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। अमूल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को कभी भी घी की आपूर्ति नहीं की है। अमूल की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया कि उनका घी उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकों से निर्मित होता है और वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत तैयार किया जाता है। अमूल ने यह भी बताया कि उनका घी शुद्ध गाय के दूध से तैयार किया जाता है और इसे भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानकों के अनुसार नियमित रूप से जाँचा जाता है।

एफआईआर और कानूनी कार्रवाई

अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने ‘स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस’, ‘सेकुलर बंगाली’, ‘बंजारा1991’ और अन्य कुछ प्रमुख एक्स अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन उपयोगकर्ताओं पर भारतीय दंड संहिता और आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इन अकाउंट्स की जाँच शुरू कर दी है और गलत सूचनाओं को फैलाने के लिए कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

एफआईआर के अनुसार, सोशल मीडिया पर झूठे दावे किए गए कि अमूल ने तिरुपति मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए घी की आपूर्ति की थी। इसके बाद यह अफवाह फैलने लगी कि तिरुपति लड्डू में पशु वसा का उपयोग हो रहा है, जो पूरी तरह से गलत था।

नंदिनी घी का तिरुपति से कॉन्ट्रैक्ट क्यों टूटा?

नंदिनी घी का तिरुपति मंदिर के साथ पुराना संबंध था। 2023 में, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को घी की आपूर्ति करने के लिए आयोजित टेंडर में हिस्सा नहीं लिया। इसका कारण यह था कि KMF को अपने नंदिनी घी की कीमत ₹400 प्रति किलो रखनी पड़ी थी, जबकि अन्य कंपनियों ने इससे कम कीमत पर घी की आपूर्ति करने की पेशकश की।

KMF ने इस बात पर जोर दिया कि वे किसानों के हितों की रक्षा के लिए गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं करेंगे। नंदिनी घी की कीमत अधिक होने के कारण TTD ने दूसरे सप्लायर से घी खरीदने का निर्णय लिया। हालाँकि, इसके बाद से KMF ने तिरुपति मंदिर को फिर से घी की आपूर्ति शुरू कर दी है और अपनी गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता जताई है।

तिरुपति लड्डू विवाद ने घी की गुणवत्ता और उसकी आपूर्ति करने वाली कंपनियों के प्रति लोगों की चिंता को बढ़ा दिया। कर्नाटक सरकार ने इस विवाद के बाद अपने मंदिरों में नंदिनी घी के उपयोग को अनिवार्य कर दिया, जबकि अमूल को झूठी अफवाहों का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के मामलों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखना कितना जरूरी है।