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अब फैक्टचेक नहीं कर सकती केंद्र सरकार: जानिए क्या है IT संशोधन नियम 2023 जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने बताया ‘असंवैधानिक’, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम 2023 के नियम 3 को रद्द कर दिया। यह धारा केंद्र सरकार को सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सरकार के खिलाफ झूठी या फर्जी खबरों की पहचान करने के लिए तथ्य-जाँच इकाइयों (Fact Check Unit) के गठन का अधिकार देता है।

इस साल जनवरी में एक खंडपीठ द्वारा विभाजित फैसला देने के बाद यह मामला उनके पास भेजे जाने के बाद टाईब्रेकर न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर ने आज अपनी राय दी है। एकल पीठ न्यायाधीश ने यह फैसला पढ़ते हुए कहा, “मेरा मानना ​​है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करता है।”

आईटी संशोधन नियम 2023 के तहत सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021, जिसे आईटी नियम 2021 भी कहा जाता है, में संशोधन किया गया था। इस नियम के खिलाफ कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गई थीं। इनमें एक याचिका स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा द्वारा दायर याचिका भी शामिल है।

इस नियम के तहत सरकार को फैक्ट चेक यूनिट बनाने के अधिकार को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह संशोधन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(ए)(जी) (कोई भी पेशा या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता) का भी उल्लंघन करता है।

इस मामले में 31 जनवरी 2024 को न्यायमूर्ति जीएस पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले ने इस मामले पर विभाजित फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति पटेल ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया और नियम 3 को खारिज कर दिया। इसमें यूजर की सामग्री की सेंसरशिप की आशंका और सामग्री की सटीकता की जिम्मेदारी रचनाकारों से बिचौलियों पर स्थानांतरित होने की चिंताओं का हवाला दिया गया था।

जस्टिस पटेल ने अनुच्छेद 14 से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अन्य संस्थाओं की तुलना में केंद्र सरकार से संबंधित सूचना को ‘उच्च मूल्य’ का पहचान प्रदान करने का कोई औचित्य नहीं है। इसके विपरीत, जस्टिस गोखले ने संशोधित नियमों की वैधता को बरकरार रखा था और कहा था कि इसमें दुर्भावनापूर्ण इरादे से गलत सूचना को लक्षित करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा किया गया है।

जस्टिस गोखले ने यह भी कहा कि किसी नियम को केवल संभावित दुरुपयोग की चिंताओं के आधार पर उसे अमान्य नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, उन्होंने इसकी भी पुष्टि की कि यदि X, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे कोई मध्यस्थ की कार्रवाई उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है तो याचिकाकर्ता और यूजर अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने मामले पर टाई-ब्रेकिंग राय देने के लिए न्यायमूर्ति चंदुरकर को नियुक्त किया। इसके बाद एकल पीठ न्यायाधीश चंदुरकर ने यह फैसला पढ़ते हुए कहा, “मेरा मानना ​​है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करता है।” इस तरह दो न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया।

याचिकाकर्ताओं का वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सीरवाई और अरविंद दातार ने प्रतिनिधित्व किया। इन अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि फैक्ट चेकिंग यूनिट का उद्देश्य उन चर्चाओं पर पूर्ण सेंसरशिप लगाना है, जिन्हें सरकार दबाना चाहती है। उन्होंने नागरिकों को सूचित रखने के अपने घोषित उद्देश्य को पूरा करने के लिए फैक्ट चेंकिंग यूनिट के लिए प्रावधानों की कमी की ओर भी इशारा किया।

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि फैक्ट चेकिंग यूनिट आलोचना या व्यंग्य को रोकने का प्रयास नहीं करते हैं, बल्कि केवल सरकार से संबंधित सामग्री पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जोर देकर कहा कि विवादित नियम केवल आधिकारिक सरकारी फाइलों में पाई जाने वाली जानकारी पर लागू होता है।

नियम 3 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले दावों के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव केवल फर्जी और झूठी खबरों से संबंधित होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी को भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के बारे में सतर्क रहना चाहिए।

इस पर याचिकाकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि सटीक जानकारी का अधिकार नागरिकों का है, राज्य का नहीं। इसकी साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सरकार पहले से ही यह घोषित कर सकती है कि क्या सच है या झूठ। उन्होंने मध्यस्थों को सुरक्षा से वंचित करने की सरकार की क्षमता पर भी सवाल उठाया। नियम 3 ऑनलाइन और प्रिंट से संबंधित कंटेंट को लेकर है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने 6 अप्रैल 2023 को सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सरकार से संबंधित झूठे या भ्रामक सामग्री की जाँच के लिए फैक्ट चेक यूनिट बनाने का फैसला लिया था। इसके तहत एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म को अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की पहचान करने के बाद या तो सामग्री को हटाना था या एक अस्वीकरण जोड़ना था। 

बेटे की सरकार में तिरुपति की रसोई में ‘बीफ की घुसपैठ’, कॉन्ग्रेस पिता के शासन में इसी मंदिर में क्रॉस वाले स्तंभ पर हुआ विवाद: तब YSR, अब जगनमोहन कर रहे इनकार

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू में पशुओं की चर्बी और मछली का तेल पाए जाने का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँचाने वाली यह मिलावट पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के राज में होने का आरोप लगाया गया है। लड्डू में पशु चर्बी और मछली का तेल मिलाए जाने की बात की पुष्टि लैब रिपोर्ट से भी हो गई है। इसके बाद जगन मोहन रेड्डी और उनके समय में तिरुपति मंदिर का प्रशासन करने वाले तिरुपति देवस्थानम बोर्ड से जुड़े लोग घेरे में हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने इस बीच इन सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए अपना बचाव किया है। उन्होंने ऐसी किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “लड्डुओं के घी के लिए टेंडर प्रक्रिया हर छह महीने में होती है, और मानदंड कई दशकों से नहीं बदले हैं। टेंडर डालने वालों को NBL प्रमाणपत्र और गुणवत्ता का प्रमाणपत्र देना होता है। TTD घी से नमूने लेकर प्रमाणित होने वालों को ही टेंडर देता है। TDP धार्मिक मामले का राजनीतिकरण कर रही है। हमने अपने शासनकाल में 18 बार कई चीजों को अस्वीकार किया था।”

जगन अब कुछ भी कहें, यह मामला थमता नहीं दिख रहा है। इससे पहले भी तिरुपति मंदिर के बारे में हुए विवादों ने हिन्दुओं को झकझोर कर रख दिया था। तब इस हिन्दू मंदिर में ईसाई परम्परा घुसाने का आरोप लगाया गया था। जब यह आरोप लगा था तब जगन मोहन रेड्डी के पिता YS राजशेखर रेड्डी राज्य के मुखिया थे।

यह विवाद 2007 में हुआ था। तब भाजपा समेत हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया था कि TTD ने मंदिर के एक उत्सव के लिए जिन स्तम्भ का ऑर्डर दिया है, वह ईसाइयों के लिए पवित्र क्रॉस जैसे दिखते हैं। 2007 में होने वाले वार्षिक ब्रम्होत्सव के लिए TTD ने 250 स्तम्भ बनाने का ऑर्डर दिया था।

यह ऑर्डर बेंगलुरु की एक कम्पनी का को दिया गया था। यह स्तम्भ महोत्सव के दौरान सौन्दर्य के काम में लगाए जाने थे। इनका निर्माण प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से होना था और इन पर नक्काशी की की जानी थी। हालाँकि, जब इन स्तम्भों का एक नमूना बन कर तिरुपति पहुँचा तो लोगों के कान खड़े हो गए।

भाजपा समेत कई हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि इनकी बनावट ईसाई क्रॉस जैसी लगती है। हिन्दुओं ने कथित तौर पर क्रॉस जैसे दिखने वाले स्तम्भ को तोड़ भी दिया था। हालाँकि, TTD में YSR की सरकार द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी इस डिजाइन का बचाव करते रहे थे।

अधिकारियों ने इस दौरान दावा किया था कि यह स्तम्भ मंदिर की डिजाइन से मिलते हुए बनाए गए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री YSR के ईसाई होने के कारण यह विरोध और तेज हो गया था। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया था कि तिरुपति के आसपास लगातार ईसाई दखल बढ़ रहा है।

YSR 2004 से 2009 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे और उनकी 2009 में एक विमान हादसे में मौत हो गई थी। उनके बेटे जगन ने इसके बाद उनकी राजनीति को आगे बढाते हुए अपनी पार्टी बनाई और 2019 में मुख्यमंत्री बने थे। उनके कायर्काल में भी तिरुपति में ईसाई को चेयरमैन बनाने का विवाद हुआ था।

‘इस्लाम कबूलो, हिंदू धर्म अच्छा नहीं’: 10वीं की छात्रा की शिकायत के बाद गिरफ्तार हुआ इजहार, बुर्का-कुरान देकर निकाह का बना रहा था दबाव; पीड़िता बोली- 5 साल से कर रहा परेशान

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में ग्रूमिंग जिहाद से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग हिंदू लड़की को पाँच साल तक प्रेमजाल में फंसाकर उसका ब्रेनवॉश करने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने का आरोप लगा है। घटना मंझनपुर थाना क्षेत्र की है, जहाँ पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मुख्य आरोपित इजहार समेत 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है।

दोस्ती से शुरू हुआ खेल, प्यार की आड़ में धर्मांतरण का षड्यंत्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी, जो कक्षा 10 की छात्रा है, को इजहार नाम के युवक ने पिछले पाँच साल से अपने प्रेमजाल में फंसा रखा था। शुरुआत में यह मामला सिर्फ दोस्ती का था, लेकिन धीरे-धीरे इजहार ने नाबालिग पर मानसिक दबाव डालकर उसका ब्रेनवॉश किया और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया।

पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा, “इजहार मुझे पिछले चार-पाँच साल से परेशान कर रहा था। उसने मुझे बुर्का और कुरान दी और मुझसे निकाह करने की बात करता था। उसने मुझ पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव डाला, यह कहते हुए कि हिंदू धर्म अच्छा नहीं है।”

परिवार की चिंता और कार्रवाई

लड़की के पिता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को कई बार इजहार के साथ देखा था, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि इजहार उनकी बेटी को धर्मांतरण के लिए मजबूर कर रहा है। कुछ दिन पहले जब पिता ने घर की अलमारी की जाँच की, तो उन्हें वहां से एक बुर्का और कुरान मिली, जो कि उनकी बेटी को इजहार ने दी थी। यह देखकर पिता ने तुरंत थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत में पिता ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इजहार का विरोध किया, तो उसने गाली-गलौज की और कहा कि “मैं तुम्हारी बेटी को मुस्लिम बना चुका हूँ और जल्द ही उसे अपने साथ ले जाऊंगा, कोई रोक नहीं पाएगा।”

पुलिस का बयान और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और मुख्य आरोपित इजहार को गिरफ्तार कर लिया। कौशांबी के सीओ अभिषेक सिंह ने बताया, “मंझनपुर थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उनकी नाबालिग बेटी का ब्रेनवॉश कर उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जा रहा है। हमने मुख्य आरोपित इजहार समेत 5 लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया है। इजहार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, और मामले की जाँच चल रही है।”

पुलिस ने नाबालिग के पास से बुर्का और कुरान भी बरामद की है। अधिकारियों ने बताया कि इजहार ने अपनी योजना के तहत पीड़िता को मानसिक रूप से प्रभावित किया और उसका धर्मांतरण करने की कोशिश की। इस मामले में अन्य आरोपित भी जाँच के घेरे में हैं, और पुलिस इस साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की जाँच कर रही है।

हिंदू संगठनों की नाराजगी और माँग

घटना के बाद जिले में हिंदू संगठनों का आक्रोश बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के जिला सहमंत्री वेद प्रकाश सत्यार्थी ने कहा, “जिले में एक मदरसे के जरिए धर्मांतरण की घटनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। कट्टर इस्लामिक संगठन यहाँ हिंदू बहन-बेटियों को प्रेमजाल में फंसाकर उनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं और धर्मांतरण कर निकाह के लिए मजबूर कर रहे हैं। हम पुलिस प्रशासन से माँग करते हैं कि इस मामले की गंभीरता से जाँच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।”

वेद प्रकाश सत्यार्थी ने आगे कहा कि कौशांबी में इस तरह की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। “यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का मामला सामने आया है। कई बार कट्टरपंथी संगठन प्रेमजाल में फंसाकर हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण करने की कोशिश करते हैं। प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।”

पीड़िता का भविष्य और परिवार की सुरक्षा पर सवाल

पीड़िता के पिता ने अपनी चिंता जताते हुए कहा कि इस घटना के बाद से उनका परिवार डरा हुआ है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपनी बेटी और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा, “हमारे परिवार पर बहुत बड़ा संकट आ गया है। हमारी बेटी का भविष्य खतरे में है, और हम नहीं चाहते कि उसे किसी भी तरह का नुकसान हो।” पुलिस ने फिलहाल मामले में पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई है और कहा है कि वह मामले की पूरी गहराई से जाँच करेंगे।

सीओ अभिषेक सिंह ने बताया कि मामले की जाँच क्षेत्राधिकारी मंझनपुर द्वारा की जा रही है, और अन्य आरोपियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में है। पुलिस ने कहा है कि वे जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी करेंगे और इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

इस घटना ने कौशांबी के लोगों के बीच डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। वहीं, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद है, जबकि इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई की माँग तेजी से बढ़ रही है।

रात को FIR दर्ज कराने ओडिशा के थाने में गई आर्मी अधिकारी की मंगेतर, दावा- पुलिस वालों ने बाँधकर पीटा, पैंट उतार दिखाए प्राइवेट पार्ट: जानिए अब तक क्या हुआ

ओडिशा हाई कोर्ट से जमानत मिलन के एक दिन बाद भुवनेश्वर के भरतपुर पुलिस स्टेशन में थाना प्रभारी दीनाकृष्ण मिश्रा एवं अन्य पुलिसकर्मियों पर सेना के अधिकारी की महिला वकील मंगेतर ने छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि 15 सितंबर 2024 की सुबह पुलिस हिरासत में उसके साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न किया गया।

महिला ने बताया, “जब मैं मदद के लिए चिल्ला रही थी तो सुबह करीब 6 बजे पुलिस स्टेशन का थाना प्रभारी आया। उसने मेरी पैंट नीचे कर दी। फिर उसने अपनी पैंट नीचे करके अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया और कहा – तुम कितनी बार इसे लोगी कि तुम चुप रहोगी।” महिला ने आगे कहा कि वह रोड रेज की एक घटना में कुछ युवकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने अपने मंगेतर के साथ थाने गई थी।

AIIMS भुवनेश्वर में भर्ती पेशे से वकील पीड़िता ने पत्रकारों से कहा, “15 सितंबर की रात करीब 1 बजे हम अपना रेस्टोरेंट बंद करके घर जा रहे थे। उस समय कुछ युवकों ने हमारी कार रोकी और हमारे साथ हाथापाई करने की कोशिश की। हम कार में बैठ बैठकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए भरतपुर पुलिस स्टेशन गए। वहाँ रिसेप्शन पर एक महिला कॉन्स्टेबल नाइटी पहने बैठी थी।”

वहाँ महिला वकील ने आपबीती बताते हुए महिला पुलिसकर्मी से शिकायत दर्ज करने और युवकों को पकड़ने के लिए गश्ती दल भेजने का अनुरोध किया। हालाँकि, महिला वकील ने आरोप लगाया कि महिला पुलिसकर्मी ने उसकी मदद नहीं की, बल्कि उसके साथ दुर्व्यवहार किया। महिला का आरोप है कि उसके सैन्य अधिकारी मंगेतर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

पीड़िता ने आगे बताया कहा, “जब मैंने कहा कि मैं एक वकील हूँ और एफआईआर दर्ज करना आपका कर्तव्य है तो वह मुझ पर भड़क गई। कुछ ही देर बाद एक अन्य महिला अधिकारी और अन्य कर्मचारी गश्ती वाहन में पुलिस स्टेशन पहुँचे। उन्होंने (मेरे मंगेतर को) शिकायत लिखने की अनुमति दी, लेकिन मुझे नहीं पता कि उन्होंने उसे तुरंत हिरासत में क्यों रखा।”

सैन्य ब्रिगेडियर की बेटी पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने महिला पुलिस अधिकारी से कहा कि एक सैन्य अधिकारी को जेल के पीछे नहीं डाल सकते तो दोनों महिला पुलिसकर्मियों ने उनके बाल खींचे और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इतना ही नहीं, दोनों महिला पुलिसकर्मी महिला वकील को थाने के गलियारे में पकड़कर घसीटते रहे।

महिला ने आरोप लगाया, “जब एक महिला कॉन्स्टेबल ने मेरा गला घोंटने की कोशिश की तो मैंने उसका हाथ काट लिया। उसने मेरे हाथ मेरी जैकेट से और मेरे पैर एक महिला कॉन्स्टेबल के दुपट्टे से बाँध दिए और मुझे एक कमरे में बंद कर दिया। कुछ समय बाद एक पुरुष अधिकारी आया और मेरी ब्रा उतार दिया और मेरे स्तनों पर लगातार लात मारी।”

इस मामले की जाँच कर रही क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त महानिदेशक को दी गई शिकायत में सेना अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसकी मंगेतर ने पुलिस अधिकारियों से गिरफ्तारी वारंट की माँग की तो उसे एक कमरे में घसीटा गया। कपड़े उतारे गए और थाना प्रभारी मिश्रा सहित चार पुरुष और तीन महिला पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की।

सैन्य अधिकारी ने आरोप लगाया, “थाना प्रभारी ने मेरी मंगेतर का यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की और मैं 30 मिनट तक उसकी चीखें सुनता रहा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब वह शिकायत लिख रहा था तो चार पुलिस अधिकारियों ने उसे घसीटकर एक कोठरी में ले गए। वहाँ उसकी पैंट उतारी और बटुआ, फोन, सेना का पहचान पत्र और कार की चाबियाँ सहित उसका सारा सामान ले लिया।

यह मामला हाईलाइट होने के बाद ओडिशा पुलिस ने थाने के प्रभारी निरीक्षक दीनाकृष्ण मिश्रा, एक सब-इंस्पेक्टर, दो महिला दारोगा और एक कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया है। वहीं, इस मामले में पर ओडिशा हाई कोर्ट ने बेहद कठोर टिप्पणी की है। उसने कहा कि पुलिस अत्याचार के आरोपों को ‘अत्यंत गंभीरता’ से लिया जाएगा और मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाया जाएगा।

ओडिशा हाई कोर्ट ने बुधवार (18 सितंबर) को सैन्य अधिकारी और उसकी मंगेतर को जमानत दे दी। वहीं, निचली अदालत ने दोनों को जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इस पर हाई कोर्ट ने यह भी कहा, “विद्वान मजिस्ट्रेट अपने न्यायिक दिमाग का इस्तेमाल करने में विफल रहे हैं और उन्होंने यांत्रिक तरीके से काम किया है।”

गुलाम भारत में अंग्रेज नहीं खिला पाए चर्बी, स्वतंत्र भारत में तिरुपति के बीफ वाले लड्डू खिला दिए: क्या दक्षिण से उठेगी सनातन रक्षा की लहर, क्या हिंदुओं की टूटेगी निद्रा

तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद की शुद्धता से छेड़छाड़ का मामला कोई साधारण मामला नहीं है। सामने आई रिपोर्ट बताती है कि जो प्रसाद भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ता था उसमें पिछले कुछ समय से जानवर की चर्बी वाला घी इस्तेमाल होता था। मामला गरमाया तो घी की जाँच रिपोर्ट सामने आई और ये पता चला कि घी में मछली का तेल, गोमांस और सूअर की चर्बी सब डली हुई थी।

समूचा देश इस रिपोर्ट को देख सन्न रह गया। किसी को उम्मीद नहीं थी कि इतने बड़ा आस्था का केंद्र तिरुपति मंदिर साजिश का शिकार होगा। सवाल उठने शुरू हुए, लोगों ने विरोध करना शुरू किया। लेकिन इन सबके बीच एक गैंग और एक्टिव हुई- लिबरल, वामपंथियों और इस्लामी कट्टरपंथियों की।

कुछ ने तो खुलेआम खुशी जताई कि आखिरकार हिंदुओं ने बीफ का सेवन कर ही लिया, लेकिन वहीं दूसरी कुछ लोग तर्क देते दिखे कि जो हो गया वो हो गया अब मामले पर आगे नहीं बोला जाना चाहिए क्योंकि ये कोई बड़ी बात नहीं है। उनके मुताबिक कई मंदिरों में घटिया क्वालिटी के घी का प्रयोग होता है और तमाम हिंदू मांसाहारी भी हैं तो इसलिए इस खुलासे से इतना फर्क नहीं पड़ना चाहिए।

बड़ी चालाकी से इस मामले को हिंदुओं के खान-पान से जोड़कर हल्का दिखाने का प्रयास हो रहा है जबकि विवाद खान-पान का नहीं आस्था और विश्वास का है।

भारत में विभिन्न वर्ग के लोग रहते हैं। सबका अपना खान-पान है। कोई शाकाहारी है कोई मांसाहारी। हिंदू भी ऐसे ही हैं। इनमें कुछ लोग हैं जो प्याज लहसुन को भी हाथ नहीं लगाते, लेकिन वही कुछ हैं जो नॉनवेज चाव से खाते हैं। अब खान-पान के हिसाब से इनकी तुलना की जाए तो इन्हें दो वर्गों में रखा जा सकता है, लेकिन आस्था की बात आते ही ये एक होते हैं।

हिंदू धर्म में गोमांस वर्जित है और सनातन मानने वाले इससे पूरा परहेज करते हैं…। फिर आखिर किस तरीके से ये कहा जा सकता है कि जो मांसाहारी हैं वो इस मुद्दे का बवाल न बनाएँ। खान-पान निजी मामला हो सकता है लेकिन उन्हें धोखे में रखकर ऐसी चीजें उन्हें खिलाना कहाँ तक उचित होता है?

घर में भगवान की पूजा करते समय प्रयास किए जाते हैं कि भगवान को लगने वाला प्रसाद शुद्ध तरीके से निर्मित हो, फिर इतने बड़े मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त योग्य कैसे योग्य हो सकता है।

इतनी बड़ी घटना के बाद भी हिंदू शांत हैं। उनके लिए शायद विरोध का अर्थ केवल सोशल मीडिया पोस्ट करना है। यदि ज्यादा गंभीर मामला है तो धड़ाधड़ पोस्ट करते हैं और अगर छोटा-मोटा मामला है तो एक दो ट्वीट के बाद भूल जाते हैं। लेकिन क्यायही मखौल अगर किसी अन्य मजहब का उड़ता तो क्या आपको लगता है वो इस प्रकार नाराजगी व्यक्त करते…।

ब्रिटिश भी नहीं खिला पाए थे गोमांस

एक समय ऐसा भी था जब गोमांस के सहारे ब्रिटिशों ने भी हिंदुओं की आस्था भंग करनी चाही थी। हालाँकि उस समय गुलाम देश में होते हुए हिंदुओं का विरोध जमीनी था। नतीजा ये हुआ कि भारतीय हिंदुओं ने ब्रिटिशों के दिए गेहूँ, आटे, रोटी किसी चीज को हाथ लगाना बंद कर दिया। घी में जानवरों की चर्बी की बात आई, दवाओं में गाय और सूअर के मांस के मिलावट की…। हिंदुओं ने सब छोड़ दिया।

कथिततौर पर ये सारी अफवाहें थीं, लेकिन उस समय में भी हिंदुओं ने इनका बहिष्कार करने से परहेज नहीं किया था और आखिर में जब ब्रिटिशों ने गोमांस वाली कारतूस उनके हाथ में थमानी चाही थी तो हिंदू उनके विरुद्ध इतनी मजबूती से खड़े हुए थे कि आज हिंदुओं के उसी विरोध को 1857 का विद्रोह भी कहा जाता है। सोचकर देखिए, जिन हिंदुओं ने एक भनक लगने पर अपने धर्म के लिए अपनी मूलभूत जरूरतों को त्याग दिया उनके लिए धर्म के साथ होने खिलवाड़ कितनी बड़ी बात होगी।

क्या दक्षिण से उठेगी फिर हिंदुत्व की लहर

इस घटना के बाद आज भले ही देश के अन्य हिस्सों में हिंदुओं का आक्रोश न नजर आ रहा हो, लेकिन दक्षिण में सनातन धर्म रक्षा बोर्ड को लागू करने की माँग अब जोरों पर हैं। खुद डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने इस बोर्ड की माँग करते हुए हिंदुओं को एकजुट होने की अपील की है जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि शायद तिरुपति की इस घटना के बाद हिंदू के जागृत होने की लहर दक्षिण से ही उठेगी ठीक वैसे जैसे 1200साल पहले हुआ था।

8वीं सदी में जब भारत भूमि पर सनातन पर खतरा धर्म क्षीण होने लगा था, हिंदू पथ से भ्रमित होने लगे थे तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए आदि शंकराचार्य अपनी यात्रा पर निकले। उन्होंने रणनीति बनाई और विभिन्न धर्म केंद्रों की यात्रा के दौरान उपस्थित धर्म गुरुओं को तर्क और शास्त्रार्थ की चुनौती देते रहे। यह आदि शंकराचार्य का चमत्कार ही था कि पूरे भारतवर्ष में उन्हें कोई भी नहीं हरा पाया। धीरे-धीरे धर्म छोड़कर गए धर्म गुरू वापस सनातन में लौटने लगे। उनके द्वारा स्थापित किए गए चार मठ (वर्धन पुरी मठ (जगन्नाथ पुरी), श्रंगेरी पीठ (रामेश्वरम्), शारदा मठ (द्वारिका) और ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ धाम)) ही हैं जिन्हें आज चार धाम के नाम से जाना जाता है।

संजौली की जिस अवैध मस्जिद को तोड़ने के लिए तैयार हो गए थे मुस्लिम, उसमें दिल्ली से पचड़ा डाल रहा कॉन्ग्रेस का हाई कमान: हिमाचल सरकार से कहा हिंदुओं का प्रदर्शन रोको

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संजौली में मस्जिद के अवैध निर्माण का मुद्दा अभी थमा नहीं है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध मस्जिद बनाए जाने और बाहरी लोगों को लेकर राज्य के स्थानीय निवासी प्रदर्शन कर रहे हैं। हिमाचल के नेरवा में भी इस मुद्दे को लेकर अब जोरदार प्रदर्शन हुआ है। हिन्दू संगठनों ने यहाँ अवैध मस्जिदों और घुसपैठ को लेकर प्रदर्शन किया।

शिमला के नेरवा में गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को बड़ी संख्या में हिन्दू इकट्ठा हुए। इसके बाद यह सभी एक रैली में शामिल हुए और नारेबाजी की। यहाँ भी प्रदर्शनकारी मस्जिद के सामने प्रदर्शन करना चाहते थे। हालाँकि, प्रदर्शन को पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद काफी देर तक बवाल जारी रहा।

हिन्दू जागरण मंच के मुखिया कमल गौतम ने इस प्रदर्शन को संबोधित किया और कहा कि राज्य की सुक्खू सरकार ने न्याय की माँग करने वाले हिन्दुओं पर लाठियाँ भांजी हैं। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार को जल्द ही इसका जवाब मिल जाएगा। उन्होंने राज्य में बढ़ते लव जिहाद का मुद्दा भी उठाया।

कमल गौतम ने कहा कि वह अपने समाज के साथ ही व्यवहार रखें और बाहर से आने वाले अवैध लोगों को प्रश्रय ना दें। उन्होंने प्रशासन से माँग की कि यहाँ आने वाले हर आदमी का पंजीकरण और सत्यापन किया जाए। कमल गौतम ने अपील की कि पंचायतों को अपने स्तर पर NRC लागू कर दें और बाहर के अवैध लोगों को जगह ना दें।

नेरवा में हुए इस प्रदर्शन में अवैध मस्जिदों का मुद्दा भी उठा। कमल गौतम ने कहा कि उन्हें स्थानीय मुस्लिमों से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उन्हें बाहर से अवैध रूप से आने वालों का साथ नहीं देना चाहिए। नेरवा में यह प्रदर्शन दिन भर चलता रहा। यहाँ इकट्ठा लोगों ने माँग की कि राज्य अवैध रूप से बनाई गई मस्जिदों पर कार्रवाई हो।

नेरवा में हुआ प्रदर्शन अकेला नहीं है, वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। यह प्रदर्शन शिमला के संजौली में बनी अवैध मस्जिद पर हुए विवाद के बाद चालू हुए हैं। संजौली मस्जिद मामले में मुस्लिमों ने खुद ही इसे गिराने की अनुमति माँगी है।

जहाँ एक ओर संजौली में मुस्लिमों ने खुद ही मस्जिदों को तोड़ने की अनुमति माँगी वहीं राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को हाईकमान से अवैध निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन रोकने का हुक्म मिला है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सुखविंदर सिंह सुक्खू से यह प्रदर्शन रोकने को कहा है।

इससे पहले हिमाचल प्रदेश कॉन्ग्रेस के मुस्लिम नेताओं की टीम हाईकमान से मिली। इस दौरान कॉन्ग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मस्जिदों को लेकर होने वाले प्रदर्शनों को गलत बताया।

हिमाचल प्रदेश में चल रहे इस विवाद के बीच मंडी में स्थित मस्जिद का पानी-बिजली काट दिया गया है। इस मस्जिद को नगर निगम ने गिराने का आदेश दिया था। इस मस्जिद की जाँच में पता चला था कि यह 4 गुना अधिक जमीन कब्ज़ा करके बनाई गई थी।

है 10वीं पास, पर महिलाओं को फँसाने के लिए कभी सैन्य अधिकारी तो कभी व्यापारी बन बन जाता था अयूब खान, 50+ महिला शिकार: जज तक आ गईं झांसे में

दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा मुकीम अयूब खान, जिसने अपनी चतुराई और झूठी पहचान से 50 से अधिक महिलाओं को शादी के झांसे में फंसा लिया। मुकीम की कहानी किसी फिल्मी ड्रामा से कम नहीं, जहाँ हर कदम पर सस्पेंस, धोखा और चतुराई का जाल बिछा हुआ था।

मासूम शुरुआत, मगर शातिर इरादे

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2020 की बात है, जब मुकीम अयूब खान, जो पहले से शादीशुदा और तीन बच्चों का पिता था, एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर ‘शादी के प्रस्ताव’ की तलाश कर रहा था। शुरूआत में, उसका कोई बुरा इरादा नहीं था। लेकिन जब उसने एक तलाकशुदा महिला से बातचीत शुरू की, जो अपनी पाँच साल की बेटी के साथ एक नई शुरुआत करना चाहती थी, तब उसकी नीयत बदल गई।

गुरुवार (19 सितंबर 2024) को दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “उसने पहली महिला से अपनी आर्थिक तंगी का झूठा बहाना बनाकर मदद माँगी। उस महिला ने उसे आर्थिक मदद दी, और यहीं से मुकीम के दिमाग में एक विचार ने जन्म लिया – अगर वह खुद को एक उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी, व्यापारी या सेना के अफसर के रूप में पेश करके अमीर महिलाओं को ठग सके तो?”

मुकीब अयूब खान ने साल 2020 में सबसे पहले वडोदरा की एक महिला को ठगा और अपनी बीवी को छोड़ी, जो उसकी तीसरी शादी थी। इसके बाद वो एक के बाद एक अपनी ठगी का शिकार बनी 4 महिलाओं से शादी करता रहा और फरार होता रहा। आखिरी शादी 2023 में प्रीत विहार की एक विधवा महिला से की थी।

एक से बढ़कर एक झूठी पहचान

मुकीम ने मैट्रिमोनियल साइट्स पर अलग-अलग नामों से प्रोफाइल बनानी शुरू की। कभी वो खुद को सरकारी अधिकारी बताता, तो कभी सेना का अधिकारी या फिर कोई बड़ा व्यापारी। उसका मुख्य निशाना तलाकशुदा महिलाएँ थीं, जो फिर से अपनी जिंदगी को बसाने का सपना देख रही थीं।

मुकीम ने महिलाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए हर बार नए-नए तरीके अपनाए। उसने झूठे वादे किए, महंगी गाड़ियाँ और गहने हासिल किए, और फिर गायब हो जाता। उसने कई महिलाओं से फ्लाइट टिकट, गिफ्ट्स और यहां तक कि शादी के नाम पर पैसे भी ऐंठे। खास बात यह थी कि उसने चार महिलाओं से तो बाकायदा शादी भी की।

दिल्ली पुलिस ने मुकीम को 2 सितंबर को हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। एक पीड़िता की शिकायत पर उसे गिरफ्तार किया गया और उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया।

क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजय कुमार सैन ने बताया, “पूछताछ के दौरान, मुकीम ने खुलासा किया कि वह अमीर मुस्लिम महिलाओं को अपना शिकार बनाता था। वह खुद को सरकारी अधिकारी, सेना के अफसर या फिर बड़ा व्यापारी बताकर महिलाओं को धोखा देता था। वह उनसे बातचीत शुरू करता और धीरे-धीरे उनका विश्वास जीतता।” उसने देश के 2 सबसे बड़े मैट्रिमोनियल वेबाइटों पर करीब 20 फर्जी आईडी बनाई और ठगी को अंजाम देता रहा।

मुकीम पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क का रहने वाला था और उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से उसका संबंध था। उसकी गिरफ्तारी कई राज्यों की पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि वह कई बार पुलिस की पकड़ से फिसल चुका था। वह अक्सर अपना फोन नंबर और ठिकाना बदल लेता था, जिससे वह पुलिस की नज़रों से बचा रहा।

झूठी कहानियों का जाल

मुकीम का तरीका बेहद चतुराई से भरा था। वह महिलाओं को बताता कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है और उसकी एकलौती बेटी की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उसने अपनी असली पत्नी और बेटी की तस्वीरें दिखाकर महिलाओं का विश्वास जीत लिया।

महिलाओं का भरोसा जीतने के बाद, मुकीम उनसे शादी की तैयारियों के नाम पर पैसे ऐंठता। वह उन्हें कहता कि वह शादी के लिए रिसॉर्ट, शादी हॉल या होटल बुक कर रहा है, और इसके लिए उसे पैसे चाहिए। लेकिन, एक बार जब वह पैसे ले लेता, तो वह गायब हो जाता। मुकीम के खिलाफ कई महिलाओं ने शिकायतें दर्ज की हैं, जिनमें एक न्यायिक अधिकारी और एक गैर-लाभकारी संस्था की कार्यकर्ता भी शामिल हैं। हालाँकि, कई महिलाएँ अब भी पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने से कतराती हैं।

पुलिस की नाक के नीचे से कई बार भागा

दिल्ली पुलिस के अनुसार, मुकीम को पकड़ने में बहुत मुश्किलें आईं। वह हर बार अपना फोन नंबर और ठिकाना बदल लेता, जिससे उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई बार योजनाएँ बनाईं, लेकिन वह हर बार फिसल जाता। डीसीपी संजय कुमार सैन ने बताया, “मुकीम ने जिन महिलाओं को ठगा, उनमें से कई ने शिकायत दर्ज नहीं करवाई है। हम अभी और जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। यह मामला और बड़ा हो सकता है।”

मुकीम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि उसने कितनी और महिलाओं को ठगा है। उसके खिलाफ और भी कई मामले सामने आ सकते हैं, क्योंकि उसकी ठगी की कला इतनी महीन थी कि बहुत से लोग उसकी असलियत को समझ ही नहीं पाए। पुलिस का मानना है कि उसने महिलाओं को ठगने के लिए जिस स्तर की चतुराई और चालाकी दिखाई, वह किसी प्रोफेशनल ठग से कम नहीं।

ठगी का जाल और उसके शिकार

मुकीम अयूब खान की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि आज के डिजिटल युग में ठगों के लिए लोगों को फंसाना कितना आसान हो गया है। लेकिन पुलिस की सख्ती और सतर्कता ने उसे अंततः कानून के शिकंजे में ला दिया है। अब सवाल यह है कि मुकीम जैसे और कितने ठग आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, और कितनी मासूम महिलाएँ उनकी शातिर चालों का शिकार बन रही हैं?

इस खबर ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और किसी भी ऑनलाइन रिश्ते या प्रस्ताव को लेकर पूरी तरह से छानबीन करें। पुलिस की जांच जारी है, और आगे की कार्रवाई से पता चलेगा कि मुकीम के ठगी के जाल में और कितने लोग फंसे हुए हैं।

‘कभी हमारे गुलाम थे काफिर, आज मुस्लिमों का ही हो रहा शोषण’: जम्मू-कश्मीर में चुनाव से बौखलाया आतंकी संगठन ISIS, जिहाद के लिए उकसाया

कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन ISIS की आईएस-के (IS-K) ने अपनी पत्रिका ‘वॉइस ऑफ खुरासान’ के हालिया अंक में जम्मू-कश्मीर को लेकर खूब जहर उगला है। कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव होता देख बौखलाए इस आतंकी संगठन ने मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की है। उसने हुए लिखा है कि कश्मीर काफिरों (इस्लाम में गैर-मुस्लिमों के लिए अपमानजनक संबोधन) के कब्जे में है। इसके लिए जिहाद (इस्लामी जंग) का वक्त आ गया है।

पत्रिका में ‘कश्मीर: द पैराडाइज अंडर दि कंट्रोल ऑफ इनफिडेल्स (कश्मीर: काफिरों के नियंत्रण में जन्नत)’ शीर्षक में लिखा गया है कि एक समय था जब इस इस्लाम ने दुनिया पर राज किया और भारत से लेकर अंदलूसिया (स्पेन) तक किसी काफिर ने मुस्लिमों का अपमान करने की हिम्मत नहीं की। उस समय अल्लाह की धरती पर अल्लाह की शरीयत का शासन था।

पत्रिका में उसने लिखा है, “एक समय की बात है, जब काफिर इस गर्वीली उम्माह को जजिया देते थे और इसके हर हुक्म का पालन करते थे। एक समय की बात है, जब उम्माह के पास अरब प्रायद्वीप से आए नौजवान एक ईमान वाली बहन की पवित्रता की रक्षा के लिए भारत में राजाओं को इतनी कड़ी सज़ा देते थे कि उनके दर्द की छाप कई पीढ़ियों तक बनी रही।”

लोगों को भड़काते हुए ISIS ने अपनी पत्रिका में लिखा है कि एक समय इस्लाम के एक हाथ में तलवार और दूसरे में कुरान था, जो पूरब और पश्चिम के काफिरों में डर पैदा करता था। जब से उम्माह ने जिहादी हथियारों की जगह खिलौनों की ओर रुख किया और कुरान की जगह पश्चिमी संस्कृति और कानूनों को अपनाया है, तब से काफिरों ने इसकी शान को दिन-ब-दिन खत्म कर दिया है।

कश्मीर का जिक्र करते हुए इस ऑनलाइन पत्रिका में लिखा गया है, “इस्लामी उम्माह के खंडित अस्तित्व का एक हिस्सा ‘कश्मीर’ है। यह जन्नत जैसी भूमि है, जिस पर दशकों से काफ़िर हिंदुओं, राष्ट्रवादी मिलिशिया और खुफिया एजेंसियों के हितों के लिए काम करने वाले तथाकथित जिहादी संगठनों द्वारा अत्याचार किया गया है।”

इराक में अल्पसंख्यक यजिदी समुदाय के लोगों के विनाश के लिए कुख्यात ISIS ने कश्मीर को अब उत्पीड़न और उजाड़ का प्रतीक बताया है। उसने लिखा है कि कश्मीर पूर्वी तुर्किस्तान की तरह इस्लाम के लोगों के लिए जेल बन गई है, जहाँ पहचान, सभ्यता और संस्कृति खतरे में है। जिस कश्मीर को कभी धरती का ‘जन्नत’ कहा जाता था, वह अब हिंदू बहुदेववादियों द्वारा शासित है।

इतिहास में इस्लामी आक्रांताओं द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप में किए गए विनाश पर गौरव करते हुए इस आतंकी साहित्य में कहा गया है कि कश्मीर कभी मुस्लिमों के लिए भारतीय उपमहाद्वीप पर इस्लाम का किला था। आज उनके लिए यह कैदखाना बन गई है। एक समय था जब मुस्लिमों के घोड़े कश्मीर की धरती से होकर भारत के विशाल भूभाग को शरीयत के शासन के अधीन लाने के लिए गुजरते थे।

अपनी प्रोपेगेंडा के जरिए आम मुस्लिमों को उकसाने का प्रयास करते हुए IS-K ने अपनी मैगजीन में कहा कि भारत से आए मुश्रिकों की सेनाएँ इस्लाम और उसके दीनी रीति-रिवाजों को रौंद रही हैं। आज कश्मीर का हर शहर और गाँव गुलामी और उत्पीड़न से कराह रहा है। हर घर से मुस्लिमों की चीखें निकल रही हैं। हिंदू मुश्रिकों और खासतौर पर ‘भारतीय जनता पार्टी’ के हाथों मुस्लिमों का रोज खून बहाया जा रहा है।

अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद घाटी में लौटे अमन-चैन से तिलमिलाए इस आतंकी संगठन में लोगों के सामने झूठ परोसते हुए लिखा है कि कश्मीर में वहाँ के मुस्लिमों को किसी न किसी बहाने जेलों में डाला जा रहा है। उनका अपहरण किया जाता है। मुस्लिम बहनों की इज्जत को तार-तार किया जाता है। हालाँकि, हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

कश्मीर विधानसभा के लिए वहाँ हुए पहले चरण के मतदान में स्थानीय लोगों की शानदार भागीदारी से यह आतंकी संगठन तिलमिला गया है। इसलिए तरह-तरह के झूठ दुनिया के लोगों के सामने परोसने की कोशिश कर रहा है, ताकि मुस्लिमों पर अत्याचार के नाम पर इस्लामी आतंकवाद की आग में अधिक से अधिक नौजवानों को झोंका जा सके।

उसने कहा है कि उइगरों के बाद कश्मीरी मुसलमान इस्लामी उम्माह का वह हिस्सा हैं, जो सबसे ज़्यादा नरसंहार झेल रहा है। उनका दीन-ईमान खतरे में है। झूठ फैलाते हुए उसने लिखा है, “हिंदू मुश्रिकों की इच्छा यही है कि कश्मीरी मुसलमान अल्लाह की इबादत वैसे ही करें, जैसा वे करते हैं और इसके बजाय ‘राम राम और भगवान भगवान’ (नवजुबिल्लाह) का जाप करें।”

उसने कश्मीर के लोगों को चीनी के उइगर समुदाय के मुस्लिमों से की है, जिनका खात्मा चीन द्वारा सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। उसने आशंका व्यक्त करते हुए लिखा है, “कल कश्मीर पर एक रणजीत सिंह, एक गुलाब सिंह और एक अमृत सिंह ने अत्याचार किया था, लेकिन आज कश्मीर के हर शहर पर भारतीय मुश्रिकों से अलग एक रणजीत सिंह का शासन है, जो सभी कश्मीरी मुसलमानों की प्रतिष्ठा और सम्मान को नष्ट करने के लिए अथक काम में लगे हुए हैं।”

इतिहास के मुस्लिम आक्रमणकारियों को महिमामंडित करते हुए इस आतंकी पत्रिका में लिखा है, “एक समय हिंदू और सिख मुश्रिकों ने इस भूमि पर पैर रखने की हिम्मत नहीं की थी। उन्हें इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन अब यह क्षेत्र हिंदू और सिख मुश्रिकों के लिए एक आश्रय स्थल है। वहाँ के मुस्लिमों को इनसे अनुमति लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।”

प्रोपगेंडा फैलाते हुए इसमें आगे लिखा गया है कि कश्मीर का क्षेत्र, जो कभी मुस्लिमों का बहुमत था, अब अधिकांश शहरी और प्रभावशाली क्षेत्रों में हिंदू और सिख मुश्रिकों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। इस भूमि पर कभी उनका शासन था, अब मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। उनके घर, जमीन और यहाँ तक ​​कि मस्जिदें भी भारतीय मुश्रिकों को दी जा रही हैं और मुस्लिमों को जबरन बेदखल किया जा रहा है।

पत्रिका में कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान स्थित अन्य इस्लामी आतंकी संगठन जैसे कि जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा के साथ-साथ पाकिस्तान पर निशाना साधा गया है और उन्हें कश्मीर मुद्दे का व्यापारी बताया गया है। इसमें ‘अल-वाला वल-बारा’ सिद्धांत के तहत भारतीय सेनाओं पर हमले के लिए उकसाया गया है। इसके साथ ही मुस्लिम युवाओं से आतंकवाद की आग में कूदने के लिए आह्वान किया गया है।

इसमें मुस्लिमों को उकसाते हुए कहा गया है, “उठो और अपने ईमान, सम्मान और दीन की रक्षा करो और इस पवित्र पथ पर अपने प्राण और धन का बलिदान दो! मुजफ्फरनगर, श्रीनगर, लद्दाख और कश्मीर के हर शहर की गलियों को मूर्तिपूजकों और देशद्रोहियों के खून से रंग दो! उन्हें ऐसी सजा दो कि आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें याद रखें! कश्मीर को भारतीय सैनिकों का कब्रगाह बना दो।”

इस पत्रिका में गजवातुल-हिंद (भारत पर आक्रमण) को लेकर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है, “अबू हुरैरा ने बताया कि अल्लाह के रसूल ने कहा- मेरी उम्मत के कुछ लोग भारत पर आक्रमण करेंगे और अल्लाह उन्हें इसमें विजय दिलाएगा और वे भारतीय राजाओं को जंजीरों में जकड़ देंगे। फिर वे अश-शाम लौट आएँगे और वहाँ उन्हें ‘ईसा इब्न मरियम’ मिलेंगे।”

इस आतंकी साहित्य ने आगे लिखा है, “हज़रत अबू हुरैरा ने रिवायत की है: ‘अल्लाह के रसूल ने हमसे भारत पर आक्रमण का वादा किया था। अगर मुझे इसमें भाग लेने का अवसर मिला तो मैं अपनी जान और धन इसमें खर्च करूँगा। अगर मैं मारा गया तो मुझे सबसे अच्छे शहीदों में गिना जाएगा और अगर मैं वापस लौट आया तो मैं जहन्नुम की आग से आज़ाद हो जाऊँगा।”

आतंकी संगठन ने विभिन्न स्रोतों का हवाला देते हुए आम लोगों को जिहाद और आतंकवाद के लिए उकसाया है। उसका कहना है कि ‘अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते।’ दरअसल, कश्मीर में अपनी जमीन तलाश रहे इस इस्लामी संगठन ने शांति से अपनी जीवन-यापन करने की कोशिश करने वाले कश्मीरी मुस्लिमों को उकसाने का भरपूर प्रयास किया है। जम्मू-कश्मीर में चुनाव की प्रक्रिया बेहद शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है और लोग आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

इन सब कारणों से इस्लामी आतंकी संगठन घबराए हुए हैं। यही कारण है कि आम लोगों के सामने गलत तथ्य प्रस्तुत करके उन्हें गुमराह करने की कोशिश किया जा रहा है। हालाँकि, अधिकांश लोग समझ चुके हैं कि शांति ही जीवन जीने का असली तरीका है और वे इस सिद्धांत को धीरे-धीरे अपने जीवन में उतारने लगे हैं। इस कारण कश्मीर में दशकों के आतंकवाद के बाद अद्वितीय शांति लौट रही है।

हूर से मिले 879 हिजबुल्लाह आतंकी, संगठन के दस्तावेजों से खुलासा: रिपोर्ट में दावा- मोसाद ने ही फर्जी कंपनी बना थमाए वे पेजर-वायरलेस जिनमें हुए धमाके

लेबनान के भीतर लगातार हो रहे धमाकों के चलते हिजबुल्लाह के 800 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। यह खुलासा हिजबुल्लाह के एक खुफिया दस्तावेज से हुआ है। मारे जाने वालों में लेबनान ही नहीं बल्कि ईरान और यमन जैसे देशों के नागरिक शामिल हैं। लेबनान में यह धमाके पेजर, वॉकी-टॉकी और कई अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में हुए हैं। लेबनान में देशव्यापी हमले का आरोप इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर लग रहा है। बताया जा रहा है कि उसने ही हिजबुल्लाह को एक दिन में इतना बड़ा नुकसान पहुँचाया।

हिजबुल्लाह के खुफिया दस्तावेज से पता चला कि इन धमाकों में 879 लोग मारे गए। इन मरने वालों में 131 ईरानी और ​​79 यमनी थे। मरने वालों में 291 वरिष्ठ अधिकारी भी थे। हिजबुल्लाह के पेजरों में यह धमाके कैसे हुए, इसको लेकर अलग-अलग थ्योरी दी जा रही है।

शुरुआत में कहा गया कि यह पेजर और वॉकी-टॉकी गरम होने के कारण फटे और इनमें इसके लिए एक मैसेज भेजा गया था। वहीं दूसरी तरफ बताया गया कि इन पेजर में 3 ग्राम विस्फोटक छुपाया गया था जिसे एक सिग्नल के द्वारा फोड़ा गया। यह भी बताया गया कि इजरायल ने इन पेजर और वॉकी टॉकी से हिजबुल्लाह के पास पहुँचने से पहले ही इनमें गड़बड़ी कर दी थी।

पेजर और वॉकी टॉकी के मामले में मोसाद ने कैसे हिजबुल्लाह को मूर्ख बना दिया और उसका बड़ा नुकसान किया, इसको लेकर अब अमेरिकी अखबार द न्यू यॉर्क टाइम्स (NYT) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। उसकी रिपोर्ट में दावा है कि मोसाद ने हिजबुल्लाह द्वारा खरीदे जाने वाले पेजर के लिए संभवतः एक फर्जी कम्पनी ही खड़ी कर ली और उनके निर्माण के समय उसमे विस्फोटक छुपाए। जब यह पेजर हिजबुल्लाह के पास पहुँच गए तो उसने धमाका कर दिया।

मोसाद की कंपनी का क्या है मामला?

मंगलवार को जिन पेजरों में विस्फोट हुआ, वे ताइवान की कंपनी गोल्ड अपोलो के हैं। विस्फोट के बाद कंपनी के पेजर मॉडल AR-924 की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं। बताया गया कि हिजबुल्लाह ने कुछ महीने पहले बड़ी संख्या में पेजर खरीदे थे। हालाँकि, गोल्ड अपोलो ने पेजर बनाने की बात से इनकार करते हुए कहा कि यह पेजर हंगरी की कंपनी BAC कंसल्टिंग ने लाइसेंस के तहत बनाए थे।

गोल्ड अपोलो के संस्थापक और CEO सू चिंग-कुआंग ने कहा “उन उपकरणों में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे हमने बनाया था या उन्हें निर्यात किया था।” सू ने कहा कि BAC द्वारा बनाए गए पेजर गोल्ड अपोलो द्वारा बनाए जाने वाले पेजरों से बिल्कुल अलग हैं और कंपनी को केवल ब्रांड नाम का ही लाइसेंस दिया गया है।

NYT की रिपोर्ट में कहा गया है कि बुडापेस्ट में BAC के मुख्यालय से पता चलता है कि यह मोसाद द्वारा स्थापित फर्जी कंपनी के अलावा कुछ नहीं है। NYT ने इजरायली अधिकारियों के हवाले बताया कि मोसाद ने BAC में पेजर बनाने में शामिल लोगों की असली पहचान छिपाने के लिए कम से कम दो और फर्जी कंपनियाँ भी बनाईं।

हंगरी के रिकॉर्ड बताते हैं कि BAC को मई 2022 में एक कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया था। इसके लिंक्डइन पेज के अनुसार, यह दूरसंचार, पर्यावरण, विकास और जैसे मामले में सेवाएँ देती है। रिपोर्ट के अनुसार, BAC सामान्य तौर पर काम करती थी, उन्होंने हिजबुल्लाह के अलावा कई ग्राहकों को कई एकदम साधारण पेजर की आपूर्ति भी की।

हंगरी के अनुसार, यह कम्पनी बिचौलिए का काम करती है और हंगरी में इसका कोई कारखाना नहीं है। हंगरी के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ज़ोल्टन कोवाक्स ने एक्स पर पोस्ट किया कि लेबनान में फटने वाले हिजबुल्लाह के पेजर हंगरी में कभी बने ही नहीं।

उन्होंने बताया कि हंगरी जाँच में सभी अंतर्राष्ट्रीय साझेदार एजेंसियों और संगठनों के साथ सहयोग कर रहा हैं। BAC की CEO क्रिस्टियाना बार्सोनी-आर्किडियाकोनो ने भी कहा कि कंपनी ने पेजर नहीं बनाए और वह इनकी सप्लाई के मामले में केवल एक कड़ी का काम कर रही थी।

अभी यह साफ़ नहीं है कि पेजर कहाँ बनाए गए थे, लेकिन यह जरूर मालूम हो गया है BAC को मोसाद के बनाए गड़बड़ पेजर मिले और उसने यह पेजर लेबनान में हिजबुल्लाह को बेच भी दिए। BAC ने 2022 में पेजर की आपूर्ति शुरू की थी, लेकिन हिजबुल्लाह के सरगना हसन नसरल्लाह द्वारा अपने आतंकियों से मोबाइल फोन का उपयोग न करने और बातचीत के लिए पुरानी तकनीक वाले पेजर का उपयोग करने के लिए कहने के बाद इसमें तेजी आई, हिजबुल्लाह का मानना था कि पेजर को हैक नहीं किया जा सकता है।

नसरल्लाह के आदेश को उन रिपोर्टों से और मजबूती मिली, जिनमें कहा गया था कि इजरायल ने दुनिया में कहीं भी किसी भी सेलफोन को ट्रैक करने की तकनीक विकसित कर ली है और वह उस फोन का कैमरा और माइक्रोफोन तक एक्सेस कर सकते हैं।

हिजबुल्लाह और उसके आतंकियों के बीच यह बात फैल गई कि अब कोई भी मोबाइल सुरक्षित नहीं है, यहाँ तक कि एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप भी ट्रैक किए जा सकते हैं। इसके बाद हिजबुल्लाह ने फोन छोड़ पेजर पर आने को कहा। हिजबुल्लाह यहीं गच्चा खा गया और उसे मोसाद वाले पेजर मिले।

BAC को यह आर्डर हिजबुल्लाह से आसानी से मिल भी गया था। इसके दो कारण हो सकते हैं, एक तो कोई आतंकी संगठन को सप्लाई करना नहीं चाहेगा और दूसरा इस बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा भी नहीं है। कोई भी विस्फोटक बनाने में पाँच चीजे- एक कंटेनर, एक बैटरी, एक ट्रिगरिंग डिवाइस, एक डेटोनेटर और एक विस्फोटक चार्ज की ज़रूरत होती है। पेजर या ज़्यादातर दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में सिर्फ़ पहले 3 घटक होते हैं, इसलिए BAC को सिर्फ़ विस्फोटक और डेटोनेटर जोड़ने की ज़रूरत थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पेजर में बैटरी के साथ मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटक रखा गय था। इनमें संभवतः 3 से 5 ग्राम PETN या RDX, रखी गई थी। हिज़्बुल्लाह ने लगभग 5000 पेजर खरीदे थे। उन्हें उन्हें लगभग 5 महीने पहले लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकियों को दिया गया था। फटने से पहले तक, डिवाइस ठीक से काम कर रहे थे, और इनमें छिपे हुए विस्फोटकों का पता नहीं चला था।

इसके बाद मोसाद ने फैसला किया कि अब ऑपरेशन को अंजाम देने का समय आ गया है। हमले वाले दिन हज़ारों पेजर दोपहर में बीप हुए और उन्हने अरबी में एक संदेश प्राप्त हुआ जो हिज़्बुल्लाह के नेतृत्व द्वारा भेजे गए मैसेज जैसा था। इसके बाद पेजर इकट्ठे गरम होकर फट गए।

पेजर ही नहीं वॉकी टॉकी भी फटे

पेजरों के फटने के एक ही दिन बाद, हिजबुल्लाह जो वॉकी-टॉकी इस्तेमाल करता था, उनमें भी हजारों विस्फोट हुए। इसमें 25 लोग मारे गए और 1000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। फटने वाले इन वॉकी-टॉकी की तस्वीरें दिखाती हैं कि इनमें से कुछ जापानी रेडियो निर्माता आईकॉम द्वारा बनाए गए थे। हालाँकि, इस कंपनी ने कहा कि उसने एक दशक पहले इस टाइप के मॉडल को बनाना बंद कर दिया था। आईकॉम ने कहा कि वह फिर भी मामले की जाँच कर रही है।

आईकॉम ने ने गुरुवार को बताया कि उसने अक्टूबर 2014 तक अपने आईसी-वी82 टू-वे रेडियो को मध्य पूर्व समेत कई देशों में निर्यात किया था। इसके बाद उसने इस मॉडल को बनाना बंद कर दिया। कंपनी अब डिवाइस में इस्तेमाल होने वाली बैटरी तक नहीं बनाती। कंपनी ने आगे कहा कि वे यह नहीं बता सकते कि यह उनके हैं भी या नहीं।

अभी यह साफ़ नहीं है कि रेडियो में गड़बड़ी कैसे की गई। यह सामने आया है कि हिजबुल्लाह ने उन्हें सिर्फ पाँच महीने पहले खरीदा था। ऐसे में इस बात की आशंका है कि उनमें भी पेजरों की तरह लेबनान भेजे जाने से पहले गड़बड़ी की गई। यह पता नहीं है कि रेडियो की आपूर्ति बीएसी ने की थी या किसी कंपनी ने। चूंकि इस डिवाइस का उत्पादन एक दशक पहले बंद हो गया था, इसलिए यह संभावना नहीं है कि कहीं यह हजारों की संख्या में पड़े हों।

इस बात की जरूर संभावना है कि पुराने डिवाइस की कॉपी मोसाद द्वारा BAC या किसी और फर्जी कंपनी के माध्यम से हिजबुल्लाह को बेचने के लिए बनाई गई थीं। मोसाद ने यह कॉपी बनाने के दौरान ही उनमें विस्फोटक लगा दिए होंगे और उसके बाद यह हिजबुल्लाह के पास पहुँचे।

टीचर कासिम रेहान ने पहले देखा पोर्न, फिर 3 साल की बच्ची से किया रेप: डाउनलोड कर रखे थे 100+ गंदे वीडियो, भोपाल का स्कूल सील-मान्यता भी होगी रद्द

भोपाल के रेडक्लिफ स्कूल में कासिम रेहान नाम के कंप्यूटर टीचर ने 3 साल की बच्ची के साथ रेप किया, उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जाँच में पता चला है कि कासिम रेहान के फोन में 100 से ज्यादा पॉर्न क्लिप्स की डाउलोडिंग के सबूत मिले हैं, ये क्लिप्स छोटे बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े थे। इस बीच, प्रशासन ने रेडक्लिफ स्कूल को सील कर दिया है और मान्यता रद्द किए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले का मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संज्ञान लिया था और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित कंप्यूटर टीचर कासिम रेहान के मोबाइल डाटा हिस्ट्री में 100 से अधिक पॉर्न क्लिप्स डाउनलोड किए जाने के सबूत मिले हैं। अधिकतर का जुड़ाव बच्चियों के यौन उत्पीड़न से है। पुलिस ने कासिम रेहान के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है।

बच्ची पर नजर रख रहा था कासिम

आरोपित कासिम रेहान ने पूछताछ में बताया है कि फोन में पॉर्न क्लिप देखा करता था। उसने पॉर्न क्लिप देखने के दौरान ही ध्यान दिया कि बच्ची वॉशरूम की तरफ आ जा रही है और वो तुरंत उसके पीछे चला गया और बच्ची का उसने उत्पीड़न किया। कासिम ने बताया कि वो 4-5 दिनों से बच्ची पर नजर रख रहा था। उसने यौन उत्पीड़न के बाद बच्ची को धमकाया भी था कि वो किसी से कुछ न कहे। इसके लिए उसने बच्ची को चॉकलेट का लालच भी दिया था।

एसआईटी ने दर्ज किया पीड़ित का बयान

इस मामले में एसपीपी-महिला सुरक्षा और एसआईटी की हेड निधि सक्सेना ने कहा, “गुरुवार (19 सितंबर 2024) को बच्ची और उसके माता-पिता का बयान दर्ज किया गया है। बच्ची को काउंसिलिंग दी जा रही है। इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा रहा है।”

स्कूल हुआ सील, मान्यत होगी रद्द

भोपाल के जिस स्कूल में रेप कांड हुआ है, उसे सील कर दिया गया है। टीटी नगर की एसडीएम कहा है कि स्कूल की मान्यता भी रद्द की जाएगी, इसके लिए कार्रवाई का जा रही है। इस बीच, स्कूल के बाहर पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। टीटी नगर के एसीपी चंद्र शेखर पांडेय ने कहा कि स्कूल को सील कर दिया गया है।

इस मामले की जाँच के लिए भोपाल के कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने एसआईटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की जाँच कर रही है। इस एसआईटी में टीटीनगर की एसडीएम डॉ अर्चना शर्मा, महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुनील सोलंकी, जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार और शिक्षा केंद्र के जिला समन्वयक ओम प्रकाश शर्मा शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोपाल के कमलानगर थाना क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली साढ़े 3 साल की पीड़िता सोमवार (16 सितंबर 2024) को अपने घर पहुँची। पीड़िता की माँ को बेटी की तबीयत ठीक नहीं लगी। उसने जाँच की तो उसके प्राइवेट पार्ट पर घाव दिखा। जब माँ ने बेटी से इसकी वजह पूछी तो असलियत सामने आई। बच्ची ने टीचर कासिम रेहान की करतूत बताई।

कासिम रेहान स्कूल में आईटी का टीचर है। इसके बाद बच्ची के माता-पिता स्कूल पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रिंसिपल व मैनेजमेंट सहित अन्य स्टाफ से कासिम की करतूत बताई। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि उनकी शिकायत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और न ही कासिम के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। आखिरकार पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में तहरीर दी। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।