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जिस IAMC के लश्कर जैसे आतंकी संगठन से लिंक, वह अमेरिका के हिंदुओं को बता रहा ‘असहिष्णु-इस्लामोफोबिक’: 950 लोगों के सर्वे से चलाया प्रोपेगेंडा

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) ने एक बार फिर से हिंदू विरोधी और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को बढ़ाने वाला काम किया है। वॉशिंगटन स्थित इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने हिंदू अमेरिकियों को बदनाम करने की कोशिश में एक सर्वे प्रकाशित किया है, जिसका उद्देश हिंदू अमेरिकियों को ‘जातिवादी’, ‘असहिष्णु’ और ‘इस्लामोफोबिक’ बताना है। IAMC वाशिंगटन स्थित एक इस्लामवादी समूह है, जिसका अतीत आतंकवादी संगठनों से जुड़ा रहा है।

इस रिपोर्ट में हम IAMC के सर्वेक्षण (पीडीएफ) के पीछे की सच्चाई को उजागर करेंगे और इसके प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।

IAMC का सर्वेक्षण

IAMC ने भारतीय मूल के मुसलमानों पर एक सर्वेक्षण किया, जिसमें केवल 950 लोगों का चयन किया गया। यह संख्या बहुत कम है, जो कि कुल 2.41 लाख भारतीय मूल के मुसलमानों का केवल 0.003% है।

IAMC सर्वेक्षण रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

IAMC का यह सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि कैसे हिंदू राष्ट्रवाद का उभार भारतीय मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव का कारण बना है। हालाँकि वो पहले भी ऐसी भ्रामक रिपोर्ट्स प्रकाशित करता रहा है।

IAMC ने दावा किया, ‘अधिकांश उत्तरदाताओं ने पिछले दशक में हिंदू मित्रों या सामाजिक संपर्कों से भेदभाव का अनुभव किया।’ हालाँकि, इस रिपोर्ट में कोई ठोस उदाहरण या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह केवल सांकेतिक और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है, जो वास्तविकता को दर्शाने में असफल है।

IAMC के सर्वेक्षण में व्यक्त की गई धारणाएँ भ्रामक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तरदाताओं ने सामाजिक और व्यावसायिक सेटिंग में भेदभाव का अनुभव किया। लेकिन जब हम इस दावे की गहराई में जाते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि IAMC ने सिर्फ भावना को ‘सत्य’ के रूप में प्रस्तुत किया है। उदाहरण के लिए, उत्तरदाताओं ने सोशल मीडिया पर उत्पीड़न की घटनाओं का उल्लेख किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये उत्पीड़न हिंदू अमेरिकियों द्वारा थे या अन्य किसी धार्मिक पृष्ठभूमि से संबंधित थे।

सर्वेक्षण में कई प्रश्न ऐसे थे जो भारतीय राजनीति को अमेरिका में मुसलमानों के अनुभवों से जोड़ते थे। उदाहरण के लिए, IAMC ने पूछा कि क्या नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद मुसलमानों को अमेरिकी सांस्कृतिक आयोजनों में अधिक या कम आरामदायक महसूस होता है। यह प्रश्न पूर्वाग्रह से भरा हुआ है और इसका कोई ठोस आधार नहीं है।

समुदायों के बीच झगड़े को बढ़ावा देना

IAMC ने अपने सर्वेक्षण में दावा किया है कि 94% उत्तरदाताओं ने कहा कि हिंदू राष्ट्रवाद धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए खतरा है। यह दावा पूरी तरह से संदिग्ध है। IAMC ने जानबूझकर ईसाई समुदाय का समर्थन पाने की कोशिश की है, जिससे हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाया जा सके। यह स्पष्ट है कि IAMC का उद्देश्य मुसलमानों को एकजुट करना और हिंदू अमेरिकियों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देना है। सर्वेक्षण का उद्देश्य यह दिखाना था कि हिंदू अमेरिकियों के खिलाफ भेदभाव बढ़ रहा है।

इस सर्वेक्षण में कई प्रश्न ऐसे थे जो अमेरिकी सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में मुसलमानों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते थे। उदाहरण के लिए, IAMC ने पूछा कि क्या 2014 में नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सत्ता में आने के बाद मुसलमानों को अमेरिकी सांस्कृतिक आयोजनों में अधिक या कम आरामदायक महसूस होता है। यह प्रश्न पूरी तरह से पक्षपाती और पूर्वाग्रह से ग्रस्त है, क्योंकि यह एक देश की राजनीति को दूसरे देश की सांस्कृतिक धाराओं के साथ जोड़ने का प्रयास करता है।

इस सर्वेक्षण में IAMC ने कई व्यक्तिगत धारणाओं को ‘सत्य’ के रूप में प्रस्तुत किया है। उदाहरण के लिए, उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये उत्पीड़न हिंदू अमेरिकियों द्वारा थे या अन्य धार्मिक पृष्ठभूमि के लोगों द्वारा।

आईएएमसी ने आरोप लगाया, “डिजिटल प्लेटफॉर्म भेदभाव के केंद्र बन गए हैं, 48% उत्तरदाताओं ने फेसबुक, व्हाट्सएप और लिंक्डइन सहित सोशल मीडिया पर उत्पीड़न की रिपोर्ट की है। उत्तरदाताओं ने इन अनुभवों को भावनात्मक रूप से थका देने वाला बताया, जिससे अलगाव और शत्रुता की भावना बढ़ती है।”

सामाजिक और पेशेवर स्तर पर भेदभाव का दुष्प्रचार

IAMC ने यह भी कहा कि 70% उत्तरदाताओं ने पेशेवर सेटिंग में भेदभाव का अनुभव किया। लेकिन इसमें भी कोई ठोस प्रमाण नहीं है। नौकरी से निकाले जाने या पदोन्नति न मिलने के मामलों में IAMC ने हिंदू प्रबंधन को दोषी ठहराने का प्रयास किया। यह एक अत्यधिक सामान्यीकरण है, क्योंकि कार्यक्षेत्र में कई कारक होते हैं, जैसे कि नौकरी के प्रदर्शन, अन्य बेहतर उम्मीदवारों की उपलब्धता, आदि।

IAMC का सर्वेक्षण सामाजिक तनाव को बढ़ावा देने का काम करता है। यह संगठन जानबूझकर ईसाई समुदाय का समर्थन पाने की कोशिश कर रहा है ताकि हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाया जा सके। इससे समुदायों के बीच घृणा बढ़ सकती है।

एजेंडा के तहत हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश

IAMC ने अपनी ‘सर्वेक्षण रिपोर्ट’ में बड़े पैमाने पर कुछ खास शब्दों का जमकर इस्तेमाल किया है, जिसमें हिंदू राष्ट्रवाद (64 बार), भारत (35 बार), हिंदुत्व (16 बार), भाजपा (8 बार), आरएसएस (5 बार) जैसे शब्द हैं। ये शब्द 24 पन्नों की रिपोर्ट में बहुत बार आए। इसके साथ बी इसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और यह कैसे “संभावित रूप से अपने मुस्लिम नागरिकों को वंचित करने” की एक चाल है, के बारे में भी व्यापक झूठे दावे किए गए हैं। हालाँकि इस सर्वे में दिलचस्प बात ये निकलकर आई कि भारत में उत्पन्न ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ का रोना रोने वाले मुस्लिमों में से 92% ने आस्था (अर्थात इस्लाम) को ‘बहुत महत्वपूर्ण’ बताया।

इस सर्वे में शामिल एक व्यक्ति ने IAMC को बताया कि हिंदू राष्ट्रवाद ने उसे और उसके परिवार को प्रभावित किया है, लेकिन उसने इस बारे में विस्तार से बताने की ज़हमत नहीं उठाई। दूसरे ने दावा किया कि उसने कथित “बीजेपी सरकार द्वारा फैलाए गए इस्लामोफोबिया और नफ़रत” के कारण अच्छे और पुराने दोस्तों को खो दिया।

वैसे, सिस्को से जुड़े ऐसे ही मामले में सारे आरोप खारिज हो चुके हैं, जिसमें जातिगत भेदभाव के आरोप लगे थे।

IAMC का उद्देश्य और आतंकवाद से जुड़ाव

IAMC एक इस्लामिक संगठन है, जो भारतीय मूल के मुसलमानों के अधिकारों की बात करता है। लेकिन इसके दावे और गतिविधियाँ संदिग्ध हैं। यह संगठन आतंकवादी समूहों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, सिमी और जमात-ए-इस्लामी से जुड़ा हुआ है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के अपने संस्थापक शेख उबैद के माध्यम से लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) के साथ संबंध हैं।

IAMC की गतिविधियाँ अक्सर भारत और भारतीय हिंदुओं के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने पर केंद्रित होती हैं। इसकी गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से इस्लामवादी एजेंडे को बढ़ावा देती हैं।

IAMC ने अन्य अमेरिकी समूहों के साथ मिलकर भारत को यूएससीआईआरएफ (अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर USA का आयोग) की काली सूची में डलवाने के लिए अभियान चलाया था और काफी धन भी खर्च किया था, लेकिन वो बुरी तरह से फेल रहा था। IAMC पर इस्लामिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और फर्जी खबरें फैलाने का भी आरोप है, जिसकी वजह से साल 2021 में इस पर UAPA के तहत कार्रवाई भी की गई थी।

IAMC का यह नया सर्वेक्षण भी हिंदू अमेरिकियों को बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित प्रयास है। इसके परिणाम और दावे संदेहास्पद हैं और सच्चाई से बहुत दूर हैं। भारतीय मूल के मुसलमानों के अनुभवों को इस तरह से प्रस्तुत किया गया है कि यह हिंदू अमेरिकियों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा दे सके। इस प्रकार के भ्रामक सर्वेक्षणों से हमें सावधान रहना चाहिए और वास्तविकता को समझने के लिए तथ्यों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

मूल लेख अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

तिरुपति के बीफ वाले लड्डू के बाद ‘सनातन धर्म रक्षा बोर्ड’ की माँग ने पकड़ा जोर, आंध्र प्रदेश के डिप्टी CM पवन कल्याण ने भी किया समर्थन: कहा- एकजुट हो हिंदू

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद की पवित्रता के साथ हुई छेड़छाड़ का मामला अब पूरे देश में चर्चा का कारण है। हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने पर हर कोई चाहता है कि मामले में अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई हो। इस क्रम में मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण को टैग करके न्याय माँगा जा रहा है।

सीएम नायडू ने कल ही इस मामले में बता दिया था कि सरकार के संज्ञान में मामला आने के बाद मंदिर में शुद्ध घी की व्यवस्था की गई है। वहीं डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने इस मामले में ट्वीट पर लिखा- “पिछली सरकार के कार्यकाल दौरान, तिरुपति बालाजी प्रसाद में पशु मेद (मछली का तेल, सूअर की चर्बी और बीफ़ वसा) मिलाए जाने की बात के संज्ञान में आने से हम सभी अत्यंत विक्षुब्ध हैं। तत्कालीन वाईसीपी (YCP) सरकार द्वारा गठित टीटीडी (TTD) बोर्ड को कई सवालों के जवाब देने होंगे! इस सन्दर्भ में हमारी सरकार हर संभव सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह समूचा प्रकरण मंदिरों के अपमान, भूमि संबंधी मुद्दों और अन्य धार्मिक प्रथाओं से जुड़े कई मुद्दों पर चिंतनीय प्रकाश डालता है। अब समय आ गया है कि पूरे भारत में मंदिरों से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अविलंब ‘सनातन धर्म रक्षा बोर्ड’ का गठन किया जाए।”

उन्होंने कहा, “सभी नीति निर्माताओं, धार्मिक प्रमुखों, न्यायपालिका, आम नागरिकों, मीडिया और अपने-अपने क्षेत्रों के अन्य सभी दिग्गजों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर एक सार्थक बहस होनी चाहिए। मेरा मानना है कि हम सभी को किसी भी रूप में ‘सनातन धर्म’ के अपमान को रोकने के लिए अविलंब एक साथ आना चाहिए।”

बता दें कि तिरुपति के प्रसाद में हुई गड़बड़ी को लेकर तिरुमाला मंदिर के पूर्व पुजारी रमना दीक्षितुलु ने भी राय रखी है। उन्होंने कहा, “प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गाय के घी में बहुत सारी अशुद्धियाँ थीं और यह घटिया क्वालिटी का था। मैंने कई साल पहले इस पर ध्यान दिया था। मैंने इसे संबंधित अधिकारियों और ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के सामने रखा था। लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की।”

पूर्व पुजारी बोले- “पहले ये मेरे लिए अकेले की लड़ाई थी, लेकिन अब, नई सरकार ने सत्ता संभाली है और उसने सारी अशुद्धियाँ साफ करने का वादा किया है। उन्होंने पहले ही सरकारी डेयरियों से शुद्ध गाय का घी खरीद लिया है और वे अब शुद्ध घी से खाद्य सामग्री तैयार कर रहे हैं। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इस तरह के महान पाप मंदिर में न दोहराए जाएँ, जो एक पवित्र मंदिर है जिसमें करोड़ों भक्तों की गहरी आस्था और भक्ति है।”

हरियाणा में वही ‘रेवड़ी मॉडल’ लेकर आई कॉन्ग्रेस, जिसने कर्नाटक-हिमाचल की अर्थव्यवस्था को किया तबाह: कब आर्थिक प्रबंधन सीखेंगे राजनीतिक दल?

देशां में देश हरियाणा, जित दूध-दही का खाना! इस वाक्य से देश भर में प्रसिद्ध राज्य हरियाणा में दूध-दही के साथ ही रेवड़ियों की आमद भी हो गई है। यह रेवड़ियाँ खाई तो नहीं जा सकतीं लेकिन बाँटी जरूर जा सकती हैं। हरियाणा के 2024 विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा और कॉन्ग्रेस ने कमर कस ली है और अपने-अपने पत्ते भी खोल दिए हैं। इस बार की चुनावी लड़ाई में हर अनुमान में मजबूत दिखने वाली कॉन्ग्रेस ने हरियाणा की जनता से कई ‘गारंटी’ वादे कर दिए हैं।

कॉन्ग्रेस यही प्रयोग हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में कर चुकी है और उसे चुनावी फ्रंट पर सफलता भी मिली थी। लेकिन चुनावों के कुछ ही महीने के बाद जहाँ कर्नाटक में विकास के सब काम रोक कर गारंटी का ही भरण पोषण करने में राज्य की अर्थव्यवस्था हांफने लगी तो वहीं हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो खुद ही आर्थिक बदहाली का रोना रो दिया। लेकिन कॉन्ग्रेस इसके बाद भी नहीं सुधरी, उसने वैसा ही घोषणा पत्र एक बार फिर हरियाणा के लिए तैयार कर दिया है।

क्या हैं हरियाणा के लिए कॉन्ग्रेस के वादे

कॉन्ग्रेस ने हरियाणा में हर वर्ग को लुभाने के लिए बड़े-बड़े सपने दिखाए हैं। कॉन्ग्रेस ने हरियाणा में सरकार बनने पर पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) लागू करने का वादा किया है। इसके अलावा उसने कहा है कि वह हर परिवार को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देगी। इसके अलावा उसने कहा है कि वह ₹25 लाख तक की इलाज योजना भी लाएगी। हरियाणा में कॉन्ग्रेस ने नकद फायदे देने की बात भी दोहराई है। कॉन्ग्रेस ने कहा है कि वह हर महिला को ₹2000 देगी। उसने वृद्धावस्था पेंशन को भी ₹6000 करने का वादा किया है। गरीबों को जमीन भी कॉन्ग्रेस देगी।

सब जान कर भी अनजान बन रही कॉन्ग्रेस

हरियाणा में कॉन्ग्रेस ने जो वादे किए हैं, उनका अर्थव्यवस्था पर क्या फर्क होगा इस बात से कॉन्ग्रेस अनजान नहीं है। वह ऐसे ही वादे और राज्यों में करके भूल चुकी है या फिर इनकी वजह से राज्य आर्थिक कंगाली के दौर में आ गए हैं। सबसे पहले पुरानी पेंशन का मुद्दा ही उठा लिया जाए तो इसे कॉन्ग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में लागू किया है। इसकी वजह से राज्य की कर्ज लेने की क्षमता घट गई है और सितम्बर में हाल यह हो गया कि सुक्खू सरकार समय से कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं दे पाई।

वहीं अगर मुफ्त बिजली का वादा देखा जाए तो इसमें भी कॉन्ग्रेस हिमाचल में फेल हो गई। उसने यहाँ भी 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाई। इसके उलट उसने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दिए जाने वाली योजना भी बंद कर दी। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने भी मुफ्त बिजली योजना चालू की, इसका परिणाम यह है कि पंजाब आज देश में सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में से एक है। इसके बाद बात आती है मुफ्त इलाज योजना की। हिमाचल में ही कॉन्ग्रेस सरकार ने हिमकेयर नाम की ऐसी ही एक योजना पर ग्रहण लगा दिया।

अगर महिलाओं को ₹1500 या ₹2000/महीना देने की बात की जाए तो इस वादे को भी हिमाचल में पूरा नहीं किया गया। कर्नाटक में इस वादे समेत मुफ्त बिजली के लिए बाकी सारे विकास काम रोक दिए गए। इसके बाद मुद्दा आता है फ्री जमीन देने का। 2014 से पहले हरियाणा में कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। उस दौरान भी यही योजना चलाई गई थी जिसमें गरीबों को आवासीय भूखंड दिए गए थे। इस योजना में एक जगह एक ही परिवार को 129 भूखंड दे दिए गए थे। इसके अलावा भूपिंदर हुड्डा की सरकार के जाने का एक बड़ा कारण जमीन घोटाले ही थे।

पहले भी रेवड़ी कर चुकी हैं नुकसान

कॉन्ग्रेस ने इससे पहले हिमाचल और कर्नाटक में ऐसे ही वादे किए। दोनों जगह उसे सफलता मिली। कर्नाटक में उसने आते ही पाँच गारंटियों को लागू करने की कवायद चालू कर दी। लेकिन उसके इस चुनावी वादे का बोझ राज्य के दलितों और जनजातियों पर आ गया। कॉन्ग्रेस सरकार ने 2023-24 और 2024-25 में दलितों के लिए दिए जाने वाले विकास फंड में से पैसा अपनी गारंटी पूरी करने को निकाल लिया। 2024-25 में उसने दलितों-जनजातियों पर खर्च होने वाले ₹14000 करोड़ गारंटियों की तरफ मोड़ दिए।

हरियाणा में बड़े बड़े वादे करने वाली कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक में अपनी इन्हीं गारंटियो को पूरा करने के चक्कर में साफ़ कह दिया था कि अब विधायक कोई विकास कार्य ना माँगे। इसके लिए फंड ना होने की बात कही गई थी। कर्नाटक में गारंटियों का खर्चा 2024-25 में ₹50000 करोड़ के पार पहुँच गया है। वहीं हिमाचल में आधे से अधिक गारंटियाँ लागू ही नहीं हुई और जो हुईं भी उनके कारण राज्य का भट्ठा बैठ गया और वह आर्थिक संकट में है। अब हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार तनख्वाह ना लेकर इसे ठीक करना चाहती है।

हरियाणा को इन रेवड़ियों से क्या नुकसान

हरियाणा में यदि कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आती है और इन वादों को पूरा करती है तो इसका राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में हरियाणा देश में आर्थिक तौर पर मजबूत राज्यों में से एक है। हरियाणा का राजकोषीय घाटा अभी 3% से कम है। यह सीमा के भीतर है। हरियाणा का कर्ज भी अभी विशेष अधिक नहीं है। लेकिन अगर राज्य यह सभी योजनाएँ लागू करता है तो उसे एक मोटी धनराशि इस पर खर्चनी होगी जिससे राज्य का हिसाब-किताब बिगड़ेगा।

रेवड़ी-रेवड़ी में है अंतर

कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए चुनावी वादों की आलोचना पर सवाल उठता है कि बाकी पार्टियाँ भी यही कर रही हैं। लोग प्रश्न पूछते हैं कि केंद्र सरकार भी कई जगह सब्सिडी देती है और कई मामलों में नकद लाभ भी देती है। इसके लिए हमें यह समझने की जरूरत है कि असल में मदद की जरूरत किसे है। भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है और सरकार को अवश्य कमजोर तबके की मदद करनी चाहिए। लेकिन यदि यह व्यवस्थित ढंग से उन लोगों को की जाए जो सही में इसके जरूरतमंद हैं, तब इसका सही फायदा है।

मोदी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में लक्ष्य आधारित सब्सिडी पर जोर दिया है। इसके तहत उन्हीं तबकों को मदद मिलती है, जो इसके जरूरतमंद हैं। इसका उदाहरण किसान सम्मान निधि है। इसके तहत केवल छोटे किसान ही इसका लाभ पाते हैं। इससे अर्थव्यवस्था पर बोझ भी कम होता है और अपात्र लोग भी बाहर हो जाते हैं।

दूसरी पार्टियाँ भी हैं दोषी

ऐसा नहीं है कि हरियाणा में केवल कॉन्ग्रेस ने ही ऐसे वादे किए हैं। वर्तमान में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा ने भी कुछ-कुछ यही वादे अपने मेनिफेस्टो में शामिल किए हैं। नॉनस्टॉप हरियाणा संकल्प पत्र नाम से जारी किए गए मेनिफेस्टो में भाजपा ने भी महिलाओं को ₹2100/महीने, हर छात्रा को स्कूटी समेत कई लुभावने वादे किए हैं।

ऐसे में भाजपा भी राज्य की आर्थिकी को लेकर पूरी तरह गंभीर है, यह बात नहीं कही जा सकती। लेकिन मुद्दा यह है कि भाजपा के पास कोई और रास्ता भी नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब आपका मुख्य विपक्षी दल ऐसे वादे करके जनता को लुभा रहा हो, तो आप एकदम विपरीत राह नहीं पकड़ सकते। भले ही आप ₹100 के सामने ₹75 का वादा करें, लेकिन शून्य पर तो नहीं जा सकते।

रेवड़ी वाली इस बीमारी का इलाज केवल दो रास्तों से हो सकता है। पहला यह कि चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट इस बात को जरूरी कर दे कि पार्टियाँ वादे करने के साथ ही उन्हें पूरा कैसे करेंगी, इस बात का ब्यौरा दें या फिर सभी राजनीतिक दलों में एक आपसी सहमति बने। पहला रास्ता वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मुश्किल है और दूसरा असंभव लगता है। हरियाणा की अर्थव्यवस्था आगे किस हाल में होगी, यह वहाँ का वोटर तय करने जा रहा है। कोई भी पार्टी जीते, रेवड़ी प्रथा अर्थव्यवस्था के लिए कभी ठीक नहीं कही जा सकती।

मनी लॉन्ड्रिंग-टेरर फंडिंग से मोदी सरकार की लड़ाई का मुरीद हुआ FATF, कहा- ED-NIA के काम शानदार: बताया इस्लामी हो या वामपंथी आतंकवाद, सबसे भारत को खतरा

FATF की हालिया रिपोर्ट में भारत सरकार के आतंकवाद विरोधी प्रयासों की सराहना की गई है, खासकर एनआईए और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के कामों को शानदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने और जटिल वित्तीय जाँचों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस्लामिक आतंकवाद, जैसे कि ISIL और अल-कायदा, के साथ ही वामपंथी उग्रवाद को भी भारत के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। FATF ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में तेजी लाने और गैर-लाभकारी संगठनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए और कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है।

इस्लामी आतंकवाद बड़ा खतरा

FATF (Financial Action Task Force) की हालिया रिपोर्ट में इस्लामी आतंकवाद को भारत के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आतंकवाद और आतंकवादी वित्तपोषण से गंभीर रूप से प्रभावित है, खासकर जम्मू-कश्मीर और इसके आसपास सक्रिय ISIL (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और लेवांत) और अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठनों से। ये संगठन लगातार भारत की सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

रिपोर्ट में भारत के आतंकवाद से निपटने के प्रयासों की प्रशंसा की गई है, खासकर आतंकवादी नेटवर्क को बाधित करने और रोकने के लिए। भारत ने जटिल वित्तीय जाँचों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जिससे आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर रोक लगाने में मदद मिली है। हालाँकि, FATF ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत को आतंकवादियों के वित्तीय मामलों की सुनवाई और अभियोजन में तेजी लानी चाहिए। आतंकवादी वित्तपोषण के मामलों में दोषसिद्धि और सख्त दंड सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

रिपोर्ट में गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी ध्यान आकर्षित किया गया है। इस्लामी आतंकवादी समूह अक्सर इन संगठनों के जरिए वित्तपोषण प्राप्त करते हैं। FATF ने सुझाव दिया है कि भारत को जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर इस सेक्टर में जागरूकता बढ़ानी चाहिए ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके।

लेफ्ट विंग टेररिज्म: भारत की चुनौती

इस रिपोर्ट में FATF ने कहा है कि भारत के सामने उभरते हुए आतंकवाद के विभिन्न आयामों में से एक प्रमुख खतरा लेफ्ट विंग आतंकवाद (वामपंथी उग्रवाद) है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है। रिपोर्ट में खासतौर पर लेफ्ट विंग समूहों का जिक्र किया गया है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में फैले माओवादी या नक्सलवादी समूह, मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में सक्रिय हैं। इन समूहों का मुख्य उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गिराकर एक वैकल्पिक कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना करना है। लेफ्ट विंग आतंकवाद का सबसे प्रमुख और चिंताजनक पहलू यह है कि यह न केवल सुरक्षा बलों के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि आम नागरिकों और विकासात्मक परियोजनाओं को भी निशाना बना रहा है। इन उग्रवादी समूहों का मुख्य वित्तपोषण अवैध गतिविधियों जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, और हथियारों के अवैध व्यापार से होता है।

FATF (Financial Action Task Force) की हालिया रिपोर्ट में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि लेफ्ट विंग समूह भारत सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और उन्हें उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहे हैं। यह समूह न केवल हिंसा का सहारा ले रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं, जिसके चलते इनके खिलाफ लड़ाई और भी कठिन हो जाती है।

FATF की रिपोर्ट में लेफ्ट विंग समूहों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि माओवादी और नक्सलवादी समूह न केवल आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन प्राप्त कर रहे हैं। इन समूहों की मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों पर भी निगरानी की गई है और FATF ने इस पर चिंता जताई है कि ये समूह किस तरह से अपने वित्तपोषण को छिपाने के लिए जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत सरकार ने लेफ्ट विंग आतंकवाद से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘समाधान’ योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना और उग्रवादियों का आत्मसमर्पण कराना है। इसके तहत प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई है और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया गया है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है ताकि माओवादी हिंसा से निपटा जा सके।

विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण करके वहाँ के नागरिकों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने न केवल सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि उन्हें आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस किया है ताकि वे उग्रवादियों का सामना कर सकें। साथ ही, भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ाया है ताकि आतंकवादी वित्तपोषण पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

लेफ्ट विंग आतंकवाद भारत के सामने एक गंभीर समस्या है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास दोनों को बाधित कर रहा है। FATF की रिपोर्ट में इस खतरे को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है, जिसमें माओवादी और नक्सलवादी समूहों की गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खतरनाक बताया गया है। भारत सरकार ने लेफ्ट विंग आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर कड़ी निगरानी रखना और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

FATF की सिफारिशों का पालन करते हुए भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादी संगठनों को मिलने वाला वित्तपोषण पूरी तरह से बंद हो सके। साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज करना भी जरूरी है, ताकि वहां के लोग उग्रवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ सकें। भारत के लिए लेफ्ट विंग टेररिज्म को खत्म करना न केवल आंतरिक सुरक्षा का सवाल है, बल्कि यह देश के विकास और समृद्धि के लिए भी जरूरी है।

FATF क्या है?

FATF (Financial Action Task Force) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 1989 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए प्रभावी नीतियों का निर्माण करना है। FATF की रिपोर्टें और सिफारिशें दुनियाभर के देशों को इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित करती हैं। FATF की रिपोर्टें समय-समय पर जारी की जाती हैं, जिनमें विभिन्न देशों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों का मूल्यांकन किया जाता है। यह संगठन विशेष रूप से यह देखता है कि कौन-कौन से देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने में सक्षम हैं और किस हद तक वे इन गतिविधियों को काबू करने में सफल हुए हैं।

FATF की हालिया रिपोर्ट में भारत के आतंकवाद विरोधी कदमों की तारीफ की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कानून बनाए हैं और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की है। विशेष रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए भारत ने विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं। भारत के एनआईए (National Investigation Agency) और ईडी (Enforcement Directorate) जैसे एजेंसियों ने आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर कड़ी निगरानी रखी है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई और फैसलों में देरी हो रही है। FATF ने भारत से इस प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया है ताकि आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण को पूरी तरह से बंद किया जा सके।

‘100 करोड़ लोगों ने खाया बीफ वाला लड्डू, मजा आ गया’: तिरुपति के प्रसाद पर कॉन्ग्रेस समर्थक ने हिंदुओं का उड़ाया मजाक, कहा- अब दूसरे की प्लेट में मत झाँकना

तिरुपति मंदिर के पवित्र प्रसाद लड्डू में जानवरों की चर्बी मिली होने की बात सामने आने के बाद कथिततौर पर कॉन्ग्रेस समर्थक व सोशल मीडिया के पोस्टों से जाहिर होते हिंदू विरोधी, पीयूष मानुष ने हिंदुओं का मजाक उड़ाया है। पीयूष ने अपनी वीडियो में कहा कि 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे, क्या उन्हें बीफ पसंद आया।

पीयूष ने अपने एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए हिंदुओं का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “क्या तुमको अच्छे लड्डू मिले?… इतने दिनों तक तुम दूसरों की प्लेट देखते रहे कि कहीं वो बीफ तो नहीं खा रहे, तुमने उनके टिफिन चेक किए, उनके रेफ्रिजरेटर भी चेक किए, उन्हें मार भी डाला। अब कम से कम 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे। उन्हें लड्डू मिले होंगे। क्या हुआ? अब तुमको बीफ अच्छा लगा? मजा आया? तुम्हारा काम हो गया। कम से कम अब दूसरे की प्लेट तो मत देखिए। जाओ अपना काम करो। पेरुमल ने खुद आपको अच्छे लड्डू दिए हैं।”

पीयूष की ये वीडियो ऐसे समय में सामने आई है जब हाल में प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर खुलासा किया और जाँच रिपोर्ट से पता चला कि उसमें मछली का तेल, सूअर की चर्बी और बीफ आदि है। इस जानकारी के सामने आते ही बवाल शुरू हो गया।

हिंदुओं ने सोशल मीडिया पर विरोध करते हुए कहना शुरू किया कि जो कोई भी इस घृणित पाप का भागीदार था उन्हें भगवान वेंकटेश्वर कभी माफ नहीं करेंगे। सरकार से अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की गई। कहा गया कि ये मामला साफ तौर पर हिंदू घृणा से जुड़ा है। हिंदुओं की आस्था को जानबूझकर ठेस पहुँचाया गया है।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बंदी संजय ने कहा, “तिरुमाला के लड्डू को बहुत ही ‘पवित्र प्रसाद’ माना जाता है, इसे दूषित करना अक्षम्य पाप है… पिछली सरकार के कार्यकाल में, अन्य धर्मों के कुछ लोगों को टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड में शामिल किया गया था… इसलिए ऐसी घटना हुई। मैं आंध्र प्रदेश सरकार से तुरंत जाँच करने और सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ।”

गौरतलब है कि गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र” (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी। रिपोर्ट में लिखा था- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहू के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है।

पोर्न दिखाकर बच्चियों का यौन शोषण करता था मौलवी शब्बीर, शिकायत वापस लेने के लिए उसके समर्थकों ने किया हमला: रुद्रपुर की अवैध मस्जिद में नाबालिग से रेप के बाद हुआ था गिरफ्तार

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में पिछले माह मौलवी से जुड़ा घिनौना मामला सामने आया था, जिसमें रुद्रपुर कोतवाली के मलसी गाँव में मौलवी शब्बीर रजा हुसैन छोटी-छोटी बच्चियों को पॉर्न दिखाता था और उनका यौन शोषण करता था। करीब आधा दर्जन बच्चियों के साथ वो ऐसी हरकतें करता था, जिसकी शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। मौलवी शब्बीर रजा हुसैन यूपी के पीलीभीत का रहने वाला है। अब पता चला रहा है कि मलसी गाँव में मौलवी की शिकायत करने वालों के खिलाफ मौलवी के समर्थकों ने हमला बोल दिया। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई है, जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रुद्रपुर कोतवाली के मलसी गाँव की मस्जिद में अवैध रूप से मदरसा चलाने वाले मौलवी शब्बीर रजा हुसैन की शिकायत करने वाले नबी हसन व अन्य लोग थे। मौलवी शब्बीर रजा हुसैन पर 6 बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद से वो जेल में है।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, मंगलवार (17 सितंबर 2024) की रात मौलवी के समर्थन में मोहम्मद खुर्शीद और अन्य लोगों ने काफी विवाद किया और मौलवी की शिकायत करने वालों पर हमला कर दिया। इस मामले में देर रात तक दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई, जिसमें 7 लोग घायल हो गए। घायलों में मोहम्मद यूनुस, शाहिद अहमद और कबीर अहमद का नाम है, जिन्हें रुद्रपुर के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मोहम्मद खुर्शीद और उसके साथी चाहते थे कि मौलवी शब्बीर रजा हुसैन के खिलाफ की गई पुलिस शिकायत वापस ली जाए, लेकिन पीड़ित परिवारों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद खुर्शीद और उसके साथियों ने हमला कर दिया। इस दौरान 4-5 राउंड फायरिंग की भी बात सामने आई है।

एसपी सिटी मनोज कत्याल, सीओ निहारिका तोमर समेत पुलिस के कई अधिकारियों ने अस्पताल पहुँचकर घायलों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और गाँव में पुलिस और पीएसी की टीम को तैनात कर दिया। पुलिस ने ही घायलों को रुद्रपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बताया जा रहा है कि इस घटना में खुर्शीद पक्ष के लोग भी घायल हुए, लेकिन वो ईलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुँचे।

एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मलसी में विवाद हुआ था। इस दौरान फायरिंग भी हुई है, घटना में दोनों ही पक्ष के सात लोग घायल हुए हैं। दावा ये भी किया जा रहा है कि हमले की तैयारी पहले से थी, इसलिए खुर्शीद की तरफ से बाहर से भी लोग आए थे, जो हमले में शामिल हुए थे।

गौरतलब है कि 16 अगस्त 2024 को रुद्रपुर में हड़कंप मच गया था, जब मौलवी की करतूतें सामने आई थी। शुरुआत में पता चला था कि मौलवी शब्बीर रजा हुसैन ने 8 साल की बच्ची को पॉर्न दिखाकर गलत हरकत की है, लेकिन जाँच में पता चला कि उसने आधा दर्जन बच्चियों को अल्लाह का डर दिखाकर ऐसा काम किया था। मौलवी को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, लेकिन उसके समर्थक चाहते हैं कि उसके खिलाफ की गई शिकायतें वापस ली जाए, इसीलिए घटना के एक माह बाद मौलवी के समर्थकों ने पीड़ितों पर हमला कर दिया।

बदला लेने की धमकी दे रहा था हिजबुल्लाह, इजरायल ने लेबनान के आसमान से बरसा दी आफत: 1000 रॉकेट लॉन्चर किए नष्ट, पेजर- वाकी टॉकी ब्लास्ट के बाद नई तबाही

इजरायल ने लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह से जुड़े आतंकियों के पेजर और बाकी डिवाइस उड़ाने के बाद अब सीधा हमला बोला है। इजरायल ने लेबनान के भीतर हवाई हमले किए हैं और हिजबुल्लाह के हजारों रॉकेट तबाह कर दिए हैं। तिलमिलाए हिजबुल्लाह ने बदला लेने की बात कही है।

इजरायल ने गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को दक्षिणी लेबनान में यह हमले किए। इजरायल ने इस इलाके में हमले के लिए तैयार रखे गए हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया। इजरायल के इस हमले में हिजबुल्लाह के कम से कम 1000 रॉकेट तबाह हो गए।

हिजबुल्लाह पर हुए इस हमले ने उसकी इजरायल को निशाना बनाने की ताकत पर काफी असर डाला है। इजरायल ने जिन रॉकेट को निशाना बनाया है, उनको हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले के लिए एकदम तैयार रखा था। हिजबुल्लाह किसी भी समय उनको इजरायल के भीतर लॉन्च करने वाला था।

इजरायल ने यह कारनामा मात्र 20 मिनट में कर दिया। स्थानीय मीडिया ने बताया है कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास और इजरायल के बीच चालू हुए युद्ध के बाद यह हिजबुल्लाह पर सबसे बड़ा हमला है। हिजबुल्लाह, हमास के समर्थन में लेबनान की तरफ से इजरायल पर रॉकेट छोड़ता रहा है।

हिजबुल्लाह पर हमले के बारे में इजरायली सेना ने बताया, “IDF वर्तमान में लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला कर रही है ताकि उसकि आतंकी क्षमताओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर को कम किया जा सके। दशकों से, हिज़्बुल्लाह ने घरों में हथियार छुपाए हैं, उनके नीचे सुरंगें खोदी हैं और आम जनता को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया है, इससे दक्षिणी लेबनान युद्ध के मैदान में बदल गया है। IDF इजरायल में सुरक्षा लाने के लिए काम कर रही है ताकि लोगों को उनके घरों में वापस लौटने में सक्षम बनाया जा सके।”

इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह के रॉकेट तबाह करने के अलावा कई इमारतों पर भी हमला कर उन्हें तबाह कर दिया। यह हिजबुल्लाह के ठिकाने थे। हिजबुल्लाह को इससे बड़ा नुकसान पहुँचा है। इजरायल के यह हमले ऐसे समय में सामने आए हैं लेबनान के भीतर जगह-जगह हजारों धमाके हो रहे हैं।

बपतिस्मा करा चुकी हैं गोविंदा की पत्नी, कहा- वाइन पीने के लिए मैं बनी ईसाई: माना उनके पति का करियर उनकी माँ के पूजा-पाठ का पुण्य

बॉलीवुड स्टार गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा हाल में एक पॉडकॉस्ट में नजर आईं। इस पॉडकॉस्ट में उन्होंने जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर बात की। इस दौरान उन्होंने यहाँ तक बताया कि वो पंजाबी परिवार से आती हैं, ससुराल में उनके बहुत पूजा पाठ होती थी लेकिन उन्होंने बचपन में वाइन पीने की लालच में ईसाई धर्म अपना लिया था और इस बारे में किसी को जानकारी भी नहीं होने दी थी।

‘टाइम आउट विद अंकित’ शो में सुनीता आहूजा बताती दिखीं कि उन्होंने अपनी पढ़ाई एक ईसाई स्कूल में की थी, उनके ईसाई दोस्त थे, उन्हें पता था कि जीसस का ब्लड जिसे कहा जाता है वो और कुछ नहीं बल्कि वाइन है। इसी लालच में उन्होंने एक दिन अपने माता-पिता को बताए बिना चुपके से ईसाई धर्म अपना लिया।

सुनीता आहूजा ने पॉडकॉस्ट में 4 बजकर 23 मिनट के बाद बताया, “मेरा जन्म बांद्रा में हुआ था। मेरा बपतिस्मा हो चुका है। मैं एक ईसाई स्कूल में थी और मेरे सभी दोस्त ईसाई थे। एक बच्चे के तौर पर, मैंने सुना था कि यीशु के खून में वाइन है। और मैंने मन में सोचा, ‘वाइन का मतलब है शराब’। मैं हमेशा बहुत चालाक थी। शराब पीने में कोई बुराई नहीं है, बस थोड़ी सी शराब पीने के लिए मैंने खुद को ईसाई बना दिया।”

उन्होने बताया कि वो आजतक ईसाई धर्म का पालन करती हैं। शनिवार को चर्चों में जाती हैं। इसके अलावा उन्होंने दरगाह, गुरुद्वारे और मंदिर जाने की बात भी बताई। आगे सुनीता से जब पूछा गया कि क्या वो अपने पति के लिए लेडी लक थीं तो इसपर सुनीता ने जवाब दिया कि गोविंदा जो हीरो बने वो अपने माँ की पूजा-पाठ से बने हैं। माँ इतना गायत्री मंत्र का जाप करती थीं। गोविंदा घर के छोटे थे और उनकी माँ उनके लिए बहुत कुछ करती थीं।

(मालूम हो कि गोविंदा की माँ निर्मला देवी, गोविंदा के जन्म के बाद साध्वी बन गई थीं। उन्होंने अपना जीवन यापन साध्वी की तरह जिया। )

आगे सुनीता आहूजा ने इस शो में ये भी बताया कि उन्हें दारू पीने का शौक है। वो कहती हैं कि गोविंदा इतना शौकीन नहीं है, लेकिन उन्हें बहुत है। जब तक गोविंदा एक बीयर पीते हैं तब तक वो 4 पी जाती हैं। उन्होंने कहा कि वो और उनका बेटा पार्टी करने के लिए घर पर शराब पी लेते हैं।

उनका कहना है कि वो लोग शराब पीने बाहर इसलिए भी नहीं जाते क्योंकि आजकल लोग हर मूमेंट रिकॉर्ड करने लगते हैं। फिर तरह-तरह की बातें होती हैं। इससे बढ़िया तो यही है कि घर में बैठकर दारू पियो। घर में एक दूसरे को गाली दे दो। बाहर बवाल ही न हो।

बता दें कि सुनीता और गोविंदा की शादी 1987 में हुई थी। 1 साल से ज्यादा टाइम तक दोनों ने अपने रिश्ते को छिपाए रखा। हालाँकि बाद में बेटी टीना के होने के बाद रिश्ता खुल गया। गोविंदा को जहाँ इंडस्ट्री में शर्मीला स्वभाव का जाना जाता है वहीं उनकी पत्नी सुनीता आहूजा अक्सर मुखर होकर बात करते दिखती हैं। इस पॉडकॉस्ट में भी उन्होंने इसी तरह बात की है। चाहे फिर वो अपनी शादी को लेकर हो या फिर गोविंदा की फैन फॉलोइंग से उनपर क्या असर पड़ता था उसपर।

जिस घी से बनता था तिरुपति का मशहूर लड्डू, उसमें मिला था बीफ-सूअर की चर्बी और मछली का तेल: लैब रिपोर्ट ने किया कन्फर्म, बोले हिंदू- इस पाप का प्रायश्चित नहीं

तिरुपति के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता पर उठाए गए सवाल सच थे। जाँच नतीजों में पता चला है कि जगन सरकार ने तिरुपति मंदिर में जिस घी से लड्डू बनाने की अनमुति दी थी उसमें हकीकत में जानवरों की चर्बी थी। उसमें बीफ फैट, मछली का तेल और लार्ड (सूअर की चर्बी), ताड़ का तेल और अन्य चीजें शामिल थीं।

गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र” (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी। रिपोर्ट में देख सकते हैं साफ-साफ इन सारी चीजों का जिक्र है। रिपोर्ट में लिखा है- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहूं के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद इस हरकत से हिंदू आहत हैं।

इस मामले को जहाँ स्वयं प्रदेश मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा उठाया गया तो वहीं केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बंदी संजय ने कहा, “तिरुमाला के लड्डू को बहुत ही ‘पवित्र प्रसाद’ माना जाता है, इसे दूषित करना अक्षम्य पाप है… पिछली सरकार के कार्यकाल में, अन्य धर्मों के कुछ लोगों को टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड में शामिल किया गया था… इसलिए ऐसी घटना हुई। मैं आंध्र प्रदेश सरकार से तुरंत जाँच करने और सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ।”

तिरुपति मंदिर और लड्डू का महत्व

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर तिरुमाला पहाड़ियों के ऊपर स्थित है। दुनिया भर से भक्त प्रार्थना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर आते हैं, जिससे यह भारत के सबसे समृद्ध और व्यस्ततम तीर्थ स्थलों में से एक बन गया है। इस मंदिर को तिरुमला तिरुपति देवस्थानम(एक स्वतंत्र ट्रस्ट) द्वारा मैनेज किया जाता है। मंदिर जितना अपनी रीतियों के लिए प्रसिद्ध है उतना ही लड्डू के लिए है। यहाँ रोजाना 3.5 लाख लड्डू बनते हैं जिनके लिए 400-500 किलो घी लगता है, 750 किलो काजू, 500 किलो किशमिश और 200 किलो इलायची लगती है।

हालिया विवाद के बाद टीटीडी ने एक कमेटी बनाई है जो लड्डुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण घी खरीदने के लिए नियम व शर्तों पर सलाह देगी। वहीं आम हिंदू इस खबर को सुन हैरान हैं। उनका कहना है कि भगवान और भगवान के भक्तों के साथ किया गया ये ऐसा पाप है जिसकी कोई क्षमा नहीं है। भगवान इसका फल YSRCP को जरूर देंगे।

खालिस्तानी आतंकी पन्नू की फरियाद पर अमेरिकी अदालत ने NSA अजीत डोभाल-पूर्व रॉ चीफ को भेज दिया समन, कहा- 21 दिन में जवाब दो: भारत ने बताया अनुचित

अमेरिका की कोर्ट ने भारत सरकार को समन जारी किया है। समन में भारत सरकार से 21 दिनों के भीतर जवाब माँगा गया है। वांछित खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित दक्षिणी जिला न्यायालय में एक दीवानी मुकदमा दायर किया था। इसमें पन्नू ने भारत सरकार पर अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। इसे भारत ने ‘अनुचित और निराधार आरोप’ बताया है।

मुकदमे में भारत सरकार के अलावा भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण अधिकारियों एवं लोगों के नाम भी शामिल हैं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के पूर्व प्रमुख सामंत गोयल, R&AW एजेंट विक्रम यादव और भारतीय व्यवसायी निखिल गुप्ता का नाम शामिल है।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (19 सितंबर 2024) को खालिस्तान समर्थक आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा भारत सरकार के खिलाफ ‘हत्या’ के प्रयास को लेकर दायर मुकदमे को ‘अनुचित और निराधार आरोप’ बताते हुए खारिज कर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि अब जबकि मामला दर्ज हो चुका है, ऐसी स्थिति में भी भारत के विचार नहीं बदलेंगे।

विदेश सचिव ने पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले गुरुवार (19 सितंबर 2024) को कहा, “जैसा कि हमने पहले कहा है, ये पूरी तरह से अनुचित और निराधार आरोप हैं। अब चूँकि यह विशेष मामला दर्ज हो गया है, इससे अंतर्निहित स्थिति के बारे में हमारे विचार नहीं बदलेंगे। मैं केवल आपका ध्यान इस विशेष मामले के पीछे के व्यक्ति की ओर आकर्षित करना चाहूँगा, जिसका इतिहास सर्वविदित है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं इस तथ्य को भी रेखांकित करना चाहूँगा कि वह (पन्नू) जिस संगठन का प्रतिनिधित्व करता है, वह एक गैरकानूनी संगठन है, जिसे 1967 के गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत ऐसा घोषित किया गया है। ऐसा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करने के उद्देश्य से राष्ट्र-विरोधी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के कारण किया गया है।”

बता दें कि गुरपतवंत सिंह पन्नू ‘सिख फॉर जस्टिस’ नाम का एक अलगाववादी संगठन चलाता है, जो हमेशा भारत के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाता है। पन्नू भारत द्वारा घोषित एक आतंकवादी भी है। उसके पास अमेरिका और कनाडा की नागरिकता है। उस पर भारत और उसके हितों के खिलाफ साजिश रचने के कई आरोप पर हैं।

इससे पहले नवंबर में अमेरिकी न्याय विभाग ने पन्नू की हत्या की साजिश में कथित संलिप्तता के लिए एक भारतीय नागरिक के खिलाफ अभियोग पत्र जारी किया था। न्याय विभाग ने दावा किया था कि मैनहट्टन में संघीय अदालत में दायर अभियोग पत्र में बिना पहचान वाले एक भारतीय सरकारी कर्मचारी ने हत्या के लिए एक हत्यारे को नियुक्त करने के लिए निखिल गुप्ता नामक एक भारतीय नागरिक की भर्ती की थी।

न्याय विभाग ने कहा कि अभियोग में शामिल आरोप केवल आरोप हैं और जब तक दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक प्रतिवादी को निर्दोष माना जाता है। इस पर भारत ने अमेरिकी सरकार की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए एक उच्चस्तरीय जाँच समिति का गठन किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत ऐसे इनपुट को गंभीरता से लेता है, क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर भी असर डालते हैं।