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शिमला के एक बाजार में 88 कारोबारी, इनमें से 42 मुस्लिम कारोबारी 1 जनवरी को ही हुए पैदा: व्यापार मंडल ने पुलिस से की शिकायत, अवैध मस्जिद के बाद सामने आया नया झोल

हिमाचल प्रदेश में अवैध मस्जिदों के निर्माण के बाद अब बाहर से आने वाले व्यापारियों के पास फर्जी कागज होने का मामला सामने आया है। शिमला के एक व्यस्त बाजार में कारोबार करने वाले बाहरी 46 व्यापारियों के पास से एक ही जन्मतिथि के आधार कार्ड मिले हैं। लगभग यह सभी व्यापारी मुस्लिम हैं। इसको लेकर स्थानीय व्यापारियों ने शिकायत दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिमला के गुम्मा बाजार इलाके में ऐसे व्यापारियों के होने की जानकारी मिली है। यहाँ के व्यापार मंडल ने एक शिकायत पुलिस को दी है। व्यापार मंडल ने कहा है कि बाहर से आकर उनके बाजार के भीतर 86 लोग व्यापार कर रहे हैं। इनमें से 46 के आधार कार्ड पर एक ही तारीख की जन्मतिथि लिखी हुई है।

बाहर से आने वाले 46 व्यापरियों के आधार कार्ड पर 1 जनवरी की ही जन्मतिथि लिखी हुई है, इनमें बस साल अलग-अलग है। जिन 46 व्यापारियों की जन्मतिथि समान पाई गई है, उनमें से 42 मुस्लिम हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों से हिमाचल में व्यापार करने पहुँचे हैं। इनमें से अधिकांश व्यापारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं।

इनके आधार कार्ड पर 1 जनवरी की तारीख जन्मतिथि के रूप में पड़ी हुई है। गौरतलब है कि देश में कई मामलों में जन्म की तारिख याद ना रहने पर 1 जनवरी डाल दी जाती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश का मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहाँ 15-23 साल के युवाओं के भी आधार कार्ड में यही समस्या पाई गई है।

शिमला व्यापार मंडल ने कहा है कि बड़ी उम्र के लोगों को भले ही अपनी सही जन्मतिथि ना याद हो लेकिन छोटी उम्र के युवा और किशोरों में भी यह तारीख नदारद है तो फिर समस्या वाली बात है। उन्होंने इस संबंध पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने कहा है कि वह अभी इन आधार कार्ड का सत्यापन कर रहे हैं।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में अवैध मस्जिदों के निर्माण और बाहर से आने वाले लोगों की अवैध घुसपैठ को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। स्थानीय निवासियों ने शिमला के संजौली और मंडी की जेल रोड पर बनाई मस्जिद मामले में विरोध प्रदर्शन किया है। जहाँ संजौली की मस्जिद गिराने का प्रस्ताव खुद मुस्लिमों ने दिया है तो वहीं मंडी की मस्जिद तोड़ने का आदेश भी हो गया है।

मंडी की मस्जिद का बड़ा हिस्सा अवैध पाया गया है। मंडी के अलवा शिमला के कसुम्पटी और बिलासपुर समेत अलग-अलग इलाकों में भी अवैध निर्माण की शिकायत की गई है। हिन्दू संगठन लगातार इस बात की माँग भी कर रहे हैं कि बाहर से आकर हिमाचल प्रदेश में रहने वाले लोग का पंजीयन हो।

भले फाइनल हार गई टीम इंडिया, पर भारत की अर्थव्यवस्था में ₹11637 करोड़ जोड़ गया क्रिकेट वर्ल्ड कप: 48 हजार नई नौकरियाँ भी पैदा की

19 नवम्बर, 2023, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच विश्व कप 2023 का आखिरी मुकाबला। इस दिन तय होना था कि भारत की 13 वर्षों की ट्रॉफी की प्रतीक्षा खत्म होगी या फिर एक बार अंतिम मौके पर भारत चूकेगा। अंत जिसका डर था, वही हुआ। भारत यह मैच हार गया। लगातार 10 मैच में जीत दर्ज करने वाली रोहित एंड कम्पनी की पारी यहाँ खत्म हुई। लेकिन भले ही नीली जर्सी पहनने वाले खिलाड़ियों को यह हार झेलनी पड़ी हो, भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह विश्व कप एक वरदान बन गया।

लगभग 45 दिन चलने वाले 2023 विश्व कप को लेकर हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह इस विश्व कप के आयोजन से भारती अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में आयोजित किए गए विश्व कप के कारण होटल, पर्यटन, खेल और यातायात क्षेत्र को हजारों करोड़ का फायदा हुआ। इससे ना केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को बल मिला बल्कि नई नौकरियाँ भी पैदा हुईं।

ICC द्वारा जारी की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 45 दिन चले इस विश्व कप के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को ₹11,637 करोड़ का फायदा मिला है। यह अब तक का सबसे महँगा और सबसे बड़ा विश्व कप था, ऐसा ICC ने बताया है। ICC ने बताया है कि विश्व कप के कारण वह शहर सबसे अधिक फायदे में रहे जहाँ इसके क्रिकेट मैच आयोजित किए गए। इन शहरों में बने स्टेडियमों की क्षमता बढ़ाने और उनके नवीनीकरण के कारण कई क्षेत्रों को फायदा हुआ।

विश्व कप से सबसे अधिक लाभ लेने वाला क्षेत्र होटल, यातायात और खाने-पीने का रहा। इस क्षेत्र ने विश्व कप के दौरान ₹4000 करोड़ से अधिक का कारोबार किया, जो पूरे विश्व के अप के कारण पैदा हुए फायदे का लगभग 37% है। विश्व कप में बाहर के देशों से भारत आए दर्शकों के कारण लगभग ₹2000 करोड़ का फायदा हुआ। विश्व कप में भारत आने वाले पर्यटकों ने भारत के अन्य पर्यटन स्थल भी घूमे, उनमें से बड़ी संख्या ने कहा है कि भारत को पर्यटन के लिए एक अच्छा विकल्प मानते हैं।

भारत आने वाले आधे से अधिक विदेशी पर्यटकों ने दोबारा भारत आने की बात भी कही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व कप आयोजन के कारण भारत में लगभग 48,000 नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं। इसके अलावा मीडिया क्षेत्र को बड़ा फायदा हुआ है। इस विश्व कप को देखने वालों की संख्या भी काफी बड़ी रही है। इस विश्व कप को 12,50,000 लोगों ने देखा जो अपने आप में रिकॉर्ड है। इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में दर्शक विश्व कप में कभी नहीं पहुँचे।

इस मामले पर ICC के CEO जियोफ अलार्दिस ने कहा, “ICC क्रिकेट विश्व कप 2023 ने क्रिकेट की महत्वपूर्ण आर्थिक शक्ति को प्रदर्शित किया है, इससे भारत को 1.39 बिलियन डॉलर का लाभ हुआ है। इस आयोजन ने हजारों नौकरियाँ पैदा कीं और भारत को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में प्रदर्शित किया। इससे यह साबित हुआ कि ICC के आयोजन ना केवल प्रशंसकों को जुनूनी रूप से आपस जोड़ते हैं बल्कि हमारे मेजबान देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।”

गौरतलब है कि रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने इस विश्व कप में शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए बिना एक मैच हारे फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल मुकाबले में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से था। इस मैच में बड़ा स्कोर ना खड़ा कर पाने के कारण भारतीय टीम को हार सहनी पड़ी थी। हालाँकि, हार के इस जख्म को रोहित एंड कम्पनी ने कुछ ही महीनों के भीतर टी20 विश्व कप जीत कर भर दिया है। इस प्रकार भारत विश्व कप ना जीत कर भी फायदे में ही रहा है।

बरेली में राज और राहुल बनकर हिंदू लड़कियों को झाँसा दे रहे थे मुस्लिम युवक, लोगों ने पहले पीटा फिर पुलिस को सौंपा: मोबाइल में मिले कई लड़कियों से चैट-अश्लील फोटो

उत्तर प्रदेश के बरेली में नाम बदल कर दो हिंदू युवतियों को फाँसने की कोशिश कर रहे दो मुस्लिम युवकों और दो उनके साथियों को पकड़ा गया है। हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने उन युवकों से उनके नाम पूछे तो उन्होंने अपना हिंदू नाम बताया। इसके बाद उनके मोबाइल की जाँच की गई तो वे दूसरे समुदाय के निकले। दोनों की पिटाई करने के बाद उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

यह मामला बरेली के इज्जतनगर क्षेत्र की है। यहाँ के कर्मचारी नगर में बुधवार (18 सितंबर 2024) की शाम की दो युवतियाँ दो युवकों को बातें कर रही थीं। इसी दौरान वहाँ से हिंदू संगठन के जुड़े विशाल श्रीवास्तव समेत अन्य लोगों गुजर रहे थे। इन दोनों युवकों के हाव-भाव देखकर इन्हें शक हुआ। इसके बाद वे दोनों युवकों के पास गए और उनसे उनका नाम पूछा।

इस पर दोनों ने अपना वास्तविक नाम छुपा लिया और हिंदू नाम बताया। हालाँकि, हिंदू संगठन के लोगों को इस विश्वास नहीं हुआ और वे दोनों का पहचान पत्र दिखाने को कहने लगे। हालाँकि, इसमें वो आनाकानी करने लगे और लोगों के साथ विवाद करने लगे। इससे लोगों का शक और गहरा गया।

हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने उनके मोबाइल को लेकर उसकी जाँच की तो उनकी असली पहचान सामने आई। वे दोनों मुस्लिम समुदाय के थे। उनके मोबाइल और इंस्टाग्राम आईडी की जाँच करने पर पता चला कि वे कई लड़कियों से जुड़े थे। कहा जा रहा है कि उनके मोबाइल में कई लड़कियों से चैट के अलावा कई अश्लील तस्वीरें भी थीं।

इसको देखकर हिंदू संगठन और आसपास के जुटे लोग भड़क गए और दोनों की पिटाई कर दी। इसके बाद लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। पुलिस ने मौैके पर पहुँचकर दोनों आरोपित युवकों को हिरासत में ले लिया। एक ने अपना नाम राहुल और दूसरे ने राज बताया था। इसी बीच कार पर सवार इन दोनों युवकों के साथी आए तो पुलिस ने उन दोनों को भी दबोच लिया।

इज्जतनगर थाना प्रभारी धनंजय पांडे का कहना है कि दोनों युवतियाँ सीबीगंज इलाके की रहने वाली हैं। पुलिस ने चारों संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है। उनके मोबाइल की भी जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि तहरीर और जाँच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नंदू पासवान और गौतम पासवान के विवाद में जली नवादा की महादलित बस्ती, ‘बहुजनों पर हमला’ बता जाति की आग लगाने निकल पड़े राहुल गाँधी: बिहार में जंगलराज लाना चाहते हैं राजनीतिक गिद्ध

बिहार को एक बार फिर से जातीय हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश की जा रही है। नवादा में बुधवार (18 सितंबर 2024) की रात को महादलित समुदाय के दर्जनों घरों में आग लगा दी गई। इसके बाद से इलाके में तनाव फैल गया है। यह मामला जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। बता दें कि बिहार में जमीन सर्वे का काम तेजी से चल रहा है। इस बीच यह हिंसा की घटना हुई है।

कहा जा रहा है कि जिस जमीन पर महादलित समाज के लोग रहते हैं, उस पर पासवान जाति के लोग अपना दावा ठोक रहे थे। इसमें उन्हें यादव समाज के लोगों द्वारा सहयोग भी दिया जा रहा था। इस घटना को लेकर जीतनराम माँझी का आरोप है कि यादव जाति के लोगों ने पासवान जाति के लोगों को जमीन कब्जाने के लिए उकसाया और महादलित परिवारों के घरों में आग लगाने में साथ दिया।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम माँझी ने इसे साजिश बताया और कहा कि घटना में लालू यादव की पार्टी राजद के समर्थकों का हाथ है। उन्होंने गुरुवार (19 सितंबर 2024) को कहा, “नवादा में मुसहर, चमार ओर दुसाध जाति के लोग वर्षों वर्षों से एक जगह रहते हैं, लेकिन विरोधी जाति के लोग, खासकर यादव जाति के जो लोग हैं, वह जमीन कब्जा करने के लिए कुछ दुसाध जाति के लोगों को अपने साथ मिलाकर उन्हें आगे कर के इस घटना को अंजाम दिया है।”

हिंदुस्तान आवामी मोर्चा के प्रमुख जीतनराम माँझी ने आगे कहा, “इससे तो यही साबित हो रहा है कि समूचे बिहार में यादव जाति के लोग अभियान चलाकर एससी जाति के लोगों की जमीनों को चाहे वह उस पर रह रहे हैं या खाली जमीन है, उसको कब्जा कर उन जमीनों पर मकान बनाते हैं या उसे बेच देते हैं।”

उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया कि सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जीतनराम माँझी ने कहा कि वे इस बात को शुरू से बोलते आ रहे हैं। जब वे बिहार विधानसभा के सदस्य थे, तब भी उन्होंने विधानसभा में कहा था कि बिहार की पर्चा वाली 70 फीसदी जमीन एक पार्टी विशेष यानी राजद के लोगों के कब्जे में है और उन जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है।

दरअसल, बिहार में जमीन सर्वे का काम जोरो पर है। जमीन विवाद बिहार में मारपीट और हत्या का एक बहुत बड़ा कारण है। अगर सरकार जमीन सर्वे के काम को इसी तरह संपन्न कराने में सफल हो जाती है तो जमीनी विवाद में होने वाली आपराधिक घटनाएँ कम हो सकती हैं। हालाँकि, कुछ पक्ष ऐसे हैं जो जमीनों पर अपना दावा कर रहे हैं।

बिहार में जिस तरह से इस हिंसा को अंजाम दिया गया है वह 1990 के दशक को याद दिलाती है, जब लालू यादव में बिहार को जातीय नरसंहारों की आग में झोंक दिया था। जातिवाद का ऐसा आग लगाया कि कितने घर तबाह हो गए। हालाँकि, इन्हीं नरसंहारों पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकते हुए लालू यादव खुद को ‘गरीबों का मसीहा’ साबित करने पर तुले रहे। उनके शासन में बदनाम हुआ बिहार आज भी उस कलंक से मुक्त नहीं हो पाया है और ना ही विकास की उस गति को पकड़ पाया है, जो आजादी के बाद बिहार में देखने को मिलती थी।

लालू यादव ने अपने शासन काल में ‘भूरा बाल’ (भू- भूमिहार, रा- राजपूत, बा- ब्राह्मण और ल- लाला यानी कायस्थ) साफ करने का नारा दिया था। उन्होंने वामपंथियों और शहाबुद्दीन जैसे माफियाओं के साथ-साथ राजद के गुंडों के साथ मिलकर के ना सिर्फ बिहार में आतंक का राज कायम किया। हालाँकि, साल 2005 में भाजपा और जदयू ने राजद की सरकार को उखाड़ फेंका और बिहार में विकास को गति दी।

पिछले कुछ समय से राजद के नेता बिहार में जाति जनगणना और ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ को लेकर आवाज उठाने लगे। यह जनसंख्या सर्वे बिहार के सर्वांगीण विकास को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि इसे जातीय राजनीति के लिए एक और अस्त्र के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश के रूप में देखा जाने लगा। हालाँकि, जाति सर्वे सर्व सहमति से हुआ।

इस बीच बिहार के राजद नेता चुनाव से पहले जातीय हिंसा की आग को फिर से बढ़ाने की कोशिश करने लगे। जीतनराम माँझी का राजद पर दिया गया बयान राजनीति से प्रेरित है या नहीं, यह एक अलग मुद्दा है, लेकिन राजद और INDI गठबंधन के उसके सहयोगी दल कॉन्ग्रेस, जिस तरह का बयान नवादा वाली घटना पर दे रही है, उससे चुनाव पूर्व जातीय खाई को और बढ़ाने वाला कहा जा सकता है।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इस घटना को लेकर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “नवादा में महादलितों का पूरा टोला जला देना, 80 से ज़्यादा परिवारों के घरों को नष्ट कर देना बिहार में बहुजनों के विरुद्ध अन्याय की डरावनी तस्वीर उजागर कर रहा है। अपना घर-संपत्ति खो चुके इन दलित परिवारों की चीत्कार और भयंकर गोलीबारी की गूंज से वंचित समाज में मचा आतंक भी बिहार की सोई हुई सरकार को जगाने में कामयाब नहीं हो पाए।”

उन्होंने कहा, “भाजपा और NDA के सहयोगी दलों के नेतृत्व में ऐसे अराजक तत्व शरण पाते हैं- भारत के बहुजनों को डराते हैं, दबाते हैं, ताकि वो अपने सामाजिक और संवैधानिक अधिकार भी न माँग पाएँ। और प्रधानमंत्री का मौन इस बड़े षड़यंत्र पर स्वीकृति की मोहर है। बिहार सरकार और राज्य पुलिस को इस शर्मनाक अपराध के सभी दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई कर, और पीड़ित परिवारों का पुनर्वास करा कर उन्हें पूर्ण न्याय दिलाना चाहिए।”

राहुल गाँधी द्वारा ‘बिहार में बहुजनों के विरुद्ध अन्याय की डरावनी तस्वीर’ और ‘भारत के बहुजनों को डराते हैं, दबाते हैं, ताकि वो अपने सामाजिक और संवैधानिक अधिकार भी न माँग पाएँ’ किसके लिए कह रहे हैं। यह दो दलित जातियों के बीच का मसला है। इसमें जीतनराम माँझी ने पिछड़ी जाति के यादव समाज पर उकसाने का आरोप लगाया है। ऐसे में राहुल गाँधी को यह सवाल लालू यादव और उनकी पार्टी से पूछना चाहिए कि महादलित जाति के परिवारों पर इस तरह के हमले क्यों हुए।

राहुल गाँधी ही नहीं, कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे दबंग जातियों का अत्याचार बताकर जातीय रंग देने की कोशिश की। उन्हें स्पष्ट शब्दों में बताना चाहिए कि दबंग जाति कौन है, जिसने बेहद गरीब एवं वंचित समाज के ऊपर हमला किया। खड़गे ने कहा कि नवादा में महादलित टोला पर दबंगों का आतंक NDA की डबल इंजन सरकार के जंगलराज का एक और प्रमाण है।

खड़गे ने अपने पोस्ट में आगे कहा, “बेहद निंदनीय है कि करीब 100 दलित घरों में आग लगाई गई, गोलीबारी की गई और रात के अँधेरे में ग़रीब परिवारों का सब कुछ छीन लिया गया। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की दलितों-वंचितों के प्रति घोर उदासीनता, आपराधिक उपेक्षा व असामाजिक तत्वों को बढ़ावा अब चरम पर है। प्रधानमंत्री मोदी जी हमेशा की तरह मौन हैं, नीतीश जी सत्ता के लोभ में बेफिक्र हैं और NDA की सहयोगी पार्टियों के मुँह में दही जम गया है।”

इस तरह, खड़गे बिहार के लालू यादव के जंगलराज का आरोप वर्तमान NDA सरकार के थोप रहे हैं, लेकिन यह सवाल अपनी सहयोगी पार्टी से नहीं पूछ रहे हैं। पूरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया बिहार में लालू यादव के जंगलराज से वाकिफ है। इसके बावजूद उसकी चर्चा नहीं करना कॉन्ग्रेस की जातीय मानसिकता को दर्शाता है।

कॉन्ग्रेस और राजद जैसी पार्टियों को चुनावों में मिल रही लगातार करारी हार ने उन्हें जातीय बँटवारे की ओर अग्रसरित किया है। उन्हें अब जातीय बँटवारा के आधार पर अपनी कुर्सी पाने की अंतिम विकल्प दिख रही है। ऐसे में वो दलित और महादलित के बीच की इस घटना को जातीय रंग देकर और भी जहर घोलने का काम कर रही है।

पिछले कुछ समय से कॉन्ग्रेस की जातीय राजनीति का रंग कई जगहों पर दिखने को मिल चुका है। उत्तर प्रदेश के हाथरस और उन्नाव जैसे कांड को कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने जातीय रंग देने की कोशिश की। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कई तरह की पैंतरेबाजी की। राहुल गाँधी से लेकर प्रियंका गाँधी तक घटनास्थल पर जाकर लोगों को भड़काने की कोशिश की। इसे पूरे देश ने देखा था।

आज बिहार में जब अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं तो वहाँ पर लक्षित जातीय भेदभाव का रंग देकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने की कोशिश शुरू कर दी है। कॉन्ग्रेस ने शायद गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम में ‘चौहान’ देखकर ऐसा मन बना लिया कि इसे सवर्णों ने अंजाम दिया है। हालाँकि, ये सभी दलित समाज हैं।

नवादा की घटना में गिरफ्तार लोगों की सूची (साभार: नवभारत टाइम्स)

मामला नवादा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के ददौर स्थित कृष्णा नगर दलित बस्ती ‘माँझी टोला’ की है, जो भूमि विवाद से जुड़ा है। गाँव के एक बड़े भूखंड पर महादलित परिवार रहते है। इस जमीन को लेकर दूसरे पक्ष से विवाद चल रहा है। इसकी सुनवाई कोर्ट में हो रही है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि बुधवार की देर शाम अचानक दबंगों ने हमला कर दिया।

कहा जा रहा है कि नंदू पासवान और गौतम पासवान के बीच जमीन को लेकर काफी समय से विवाद था। दोनों के विवाद के कारण ही बुधवार शाम को नंदू पासवान की ओर से हमले और आगजनी की बात कही जा रही है। जमीन का यह विवाद लगभग 40 साल पुराना बताया जा रहा है।

पीड़ित लक्ष्मीनिया देवी ने बताया, “हम लोग की बस्ती सरकारी जमीन पर है। प्राण बिगहा का रहने वाला नंदू पासवान इसे कब्जा करना चाहता है। वो अपने साथियों के साथ आया और इस घटना को अंजाम दिया।” इस दौरान बस्ती के 80 से 85 घरों में आग लगाने की बात कही जा रही है। हालाँकि, पुलिस ने 20 घर बताया है। वहीं, पुलिस ने 100 राउंड फायरिंग की बात भी नकार दी है।

इसके मुख्य आरोपित 70 साल के नंदू पासवान समेत 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नंदू पासवान का बेटा नागेश्वर पासवान कृष्णा नगर के वार्ड-16 का वार्ड सदस्य है। वहीं, नंदू पासवान पहले बिहार पुलिस में था। वह साल 2014 में अपनी सेवा से रिटायर हुआ है। उसकी बहू सरिता भारती आँगनबाड़ी सेविका है।

इस मामले में कुल 28 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है, जिनमें से 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं मौके से 3 देशी कट्टा, एक खोखा, 6 बाइक जब्त करने की बात कही जा रही है। इस घटना को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। जो भी दोषी हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होगी।

माफियाओं के सामने नाक रगड़े, दंगाइयों के सामने घुटने टेके: अयोध्या में CM योगी ने बताए अखिलेश यादव के ‘संस्कार’, कहा- सपा के दरिंदे कुत्ते की पूँछ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव पर हमला बोला है। CM योगी ने अखिलेश यादव को माफियाओं के आगे नाक रगड़ने वाला बताया है। उन्होंने यह भी कहा है कि जिस तरह कुत्ते की पूँछ सीधी नहीं हो सकती, उसी तरह समाजवादी पार्टी से जुड़े दरिन्दे कभी सुधर नहीं सकते।

CM योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को अयोध्या में कई विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया और इसके बाद एक बड़ी रैली को भी संबोधित किया। इसी रैली में उन्होंने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को जम कर निशाने पर लिया।

CM योगी ने अखिलेश के मठाधीश और माफिया में कोई फर्क नहीं वाले बयान पर जवाब देते हुए कहा, “माफियाओं के सामने नाक रगड़ने वाला व्यक्ति, दंगाइयों के सामने घुटने टेकने वाला व्यक्ति भारत की संत परंपरा को माफिया कहता है, यह उनके संस्कार हैं। लगता है औरंगजेब की आत्मा इनके भीतर घुस गई है और हिन्दू विरोधी आचरण करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।”

अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर CM योगी का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने अयोध्या में नाबालिग का बलात्कार करने वाले सपा नेता मोईद खान को लेकर भी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी का सही चेहरा वही है जो भदरसा में मोईद खान ने किया, जो समाजवादी पार्टी का नेता है, कन्नौज में नवाब सिंह यादव है, उसने एक बेटी के साथ यही किया।”

उन्होंने आगे कहा, “जैसे कुत्ते की पूँछ सीधी नहीं हो सकती वैसे ही जो समाजवादी पार्टी के दरिंदे जो बेटियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते हैं, यह ठीक नहीं हो सकते। इनको कानून के दायरे में लाकर ही इन पर शिकंजा कसना पड़ेगा। हमारी सरकार यही काम कर रही है इनके साथ, जिसके ये पात्र हैं।”

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन लोगों को वो विवादित ढाँचा प्यारा था जिसे रामभक्तों ने गिरा दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के हाथ रामभक्तों के खून से सने हैं वह जब अयोध्या की बात करते हैं तो आश्चर्य होता है। CM योगी का यह हमला अखिलेश यादव पर जारी रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि जब अयोध्या में दिए जलते हैं तो पाकिस्तान और समाजवादी प्रमुख को परेशानी होती है। अयोध्या पहुँचे CM योगी ने इस दौरान अयोध्या में किए गए विकास भी ब्यौरा दिया। CM योगी ने बताया कि उनकी सरकार ने माफियाओं के चंगुल से 64 हजार हेक्टेयर भूमि छुड़वाई है और इसीलिए अखिलेश यादव परेशान हैं।

अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा में आगामी दिनों में उपचुनाव होना है। यह विधानसभा यहाँ के विधायक अवधेश प्रसाद के सांसद बन जाने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर अभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हुई है। हालाँकि, सीट को लेकर दोनों पार्टियों में युद्ध जरूर चालू हो गया है।

इस बीच अखिलेश यादव के एक बयान पर भी राजनीति गरम है। उन्होंने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि मठाधीश और माफिया में अंतर नहीं होता। इस बयान पर साधु संतों ने अखिलेश यादव का विरोध किया था। अब CM योगी ने भी उन्हें जवाब दिया है।

जो डॉक्टर बीमारों को देता था जिंदगी, उसे इस्लामी कट्टरपंथ ने मुर्दा बना सड़क पर फूँक दिया: ‘ईशनिंदा’ ने पाकिस्तान में ली एक और जान, हत्या के पीछे बताया जा रहा पुलिस का भी हाथ

पाकिस्तान के उमरकोट में ईशनिंदा के आरोपित डॉक्टर शहनवाज की आज (19 सितंबर 2024 ) बेरहमी से हत्या करके उनका शव बीच सड़क में फूँक दिया गया। इस हत्या के पीछे मीरपुर खास पुलिस का हाथ बताया जा रहा है। एक वीडियो सामने आई है जिसमें अस्पताल के बाहर पुलिसकर्मी खड़े हैं। अंदर डॉक्टर का शव है। वहीं दूसरी वीडियो में उनके शव को आग लगाते देखा जा सकता है।

वीडियो बनाने वाला शख्स मीरपुर खास पुलिस की तारीफ करते नहीं थक रहा। सारे बड़े पुलिस अधिकारियों का धन्यवाद देते हुए कह रहा है कि डॉक्टर शहनवाज ने पैगंबर मोहम्मद के लिए गलत अल्फाज लिखे थे इसलिए उसके साथ ऐसा हुआ।

डॉक्टर शहनवाज की सामने आई तस्वीर में उनका शव खून से लथपथ अस्पताल पर पड़ा दिखाई दिया। वहीं दूसरी वीडियोज में दिखा कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथी उनके प्राइवेट क्लिनिक में तोड़फोड़ कर रहे हैं। सारे फर्नीचर को उठाकर ले जा रहे हैं और सड़क पर आग लगा रहे हैं।

बता दें कि डॉ शहनवाज का मुद्दा 17 सितंबर से ही पाकिस्तान में गर्माया हुआ था। उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के लिए अपशब्द कहे। इस आरोप के बाद उनके कुछ सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट वायरल हुए और उमरकोट के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर अस्पताल ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। साथ ही बयान में बताया कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है और चूँकि उनके खिलाफ उमरकोट और अन्य जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं अब अस्पताल को उनकी सेवा नहीं चाहिए।

18 सितंबर को इस बाबत कई कट्टरपंथी सड़क पर आ गए। प्रेस क्लप के सामने इकट्ठा होकर डॉक्टर शहनवाज की फौरन गिरफ्तारी की माँग उठाई। मामला 295 सी के तहत दर्ज कराते हुए खुलेआम सजा-ए-मौत माँगी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के वाहन में भी आग लगाई गई, उनपर पथराव भी हुआ और कई सार्वजनिक और सरकारी प्रॉपर्टी तोड़ी-फोड़ी गई। पुलिस ने आश्वासन दिया कि वो आरोपित को गिरफ्तार करेंगे। सख्त कार्रवाई करेंगे। बाद में पुलिस ने हालात कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर शहनवाज को पकड़ा तो, लेकिन सजा उन्हें कानून के मुताबिक नहीं दी बल्कि जैसे इस्लामी कट्टरपंथी चाहते थे वैसे दी।

नोट: उमरकोट, जहाँ डॉक्टर शहनवाज के साथ घटना घटी, वो पाकिस्तान का एकमात्र जिला है जहाँ हिंदू कारोबारियों की संख्या ज्यादा है।

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान का एजेंडा बढ़ा रही कॉन्ग्रेस-NC, खुद पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने TV पर कबूली: बोले अमित शाह- राहुल गाँधी हर एक भारत विरोधी ताकत के साथ

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की वापसी पर एक साथ हैं। ख्वाजा आसिफ ने यह बयान एक टीवी इंटरव्यू में दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस घिर गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान के इरादे और एजेंडा एक ही हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह बयान जम्मू कश्मीर में हो रहे हालिया चुनावों को लेकर दिया है। उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर के शो कैपिटल टॉक में कहा, “जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की वापसी संभव है। जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का काफी प्रभाव है। इस बात की काफी संभावना है कि यह गठबंधन सत्ता में आए। उन्होंने इसे चुनावी मुद्दा बनाया है… कॉन्ग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस और पाकिस्तान अनुच्छेद 370 वापस लागू करने को लेकर एक पेज पर हैं।”

ख्वाजा आसिफ ने इसके अलावा यह भी कहा कि अगर यह गठबंधन सत्ता में आया तो पाकिस्तान के भारत के साथ रिश्ते सुधर सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इसका कारण कॉन्ग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस की नीतियाँ होंगी। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उनसे पहले की इमरान खान वाली सरकार और फ़ौज के पूर्व मुखिया जनरल बाजवा ने भारत को लेकर डरने वाला रवैया अपना लिया था। उन्होंने इस बीच कश्मीर को लगातार पाकिस्तान द्वारा किया जाने वाला प्रलाप भी दोहराया।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद अब कॉन्ग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस पर प्रश्न उठाए गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले पर एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की अनुच्छेद 370 और 35A पर कॉन्ग्रेस और JKNC के समर्थन की बात ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस को एक्सपोज कर दिया है। इस बयान ने पुनः यह स्पष्ट कर दिया है कि कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान के इरादे भी एक हैं और एजेंडा भी। पिछले कुछ वर्षों से राहुल गाँधी देशवासियों की भावनाओं को आहत करते हुए हर एक भारत विरोधी ताकतों के साथ खड़े रहे हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने अपना हमला जारी रखते हुए लिखा, ” एयर स्ट्राइक व सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगने हों, या भारतीय सेना के बारे में आपत्तिजनक बातें करना हो, राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस पार्टी और पाकिस्तान के सुर हमेशा एक रहे हैं और कॉन्ग्रेस का हाथ हमेशा देशविरोधी शक्तियों के साथ रहा है। लेकिन, कॉन्ग्रेस पार्टी और पाकिस्तान यह भूल जाते हैं कि केंद्र में मोदी सरकार है, इसलिए कश्मीर में न तो अनुच्छेद 370 वापस आने वाला है और न ही आतंकवाद।’

कॉन्ग्रेस ने अभी इस मामले पर कोई सफाई जारी नहीं की है। वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह ने इस मामले पर कहा है कि पाकिस्तान को अपने मुद्दे देखने चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को हमसे कोई लेना-देना नहीं है और हम उनका हिस्सा नहीं है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान को अपना लोकतंत्र बचाना चाहिए और हमें अपने लोकतंत्र में हिस्सा लेने दें। हालाँकि, उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान का भारत के चुनाव पर टिप्पणी करना सही बात नहीं है। हालाँकि, उमर अब्दुल्लाह ने 370 वाली बात पर कुछ नहीं कहा।

कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत PDP को पीएम मोदी ने भी घेरा है। गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करने हुए पीएम मोदी ने कहा, ”पिछले 35 वर्षों में कश्मीर 3000 दिन बंद रहा है, यानि यह 35 साल में से 8 साल बंद में गुजर गए। पिछले पाँच साल में 8 घंटे भी कश्मीर बंद नहीं हुआ। ये अपने किया है। क्या आप चाहते हैं कि वो पुराने दिन फिर लौटें, क्या आप चाहते हैं कि फिर खून खराबा हो, कमजोर तबकों के हक़ मारे जाएँ?”

पीएम मोदी ने इस दौरान भाजपा द्वारा किए गए वादे भी गिनाए। उन्होंने कहा कि वह जम्मू कश्मीर को विकास देना चाहते हैं जबकि विपक्षी पार्टियां हड़तालें और बंद देना चाहती हैं। इस दौरान उन्होंने कश्मीरी पंडितों का भी मुद्दा उठाया। पीएम मोदी की इस रैली में भारी भीड़ उमड़ी थी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद अब कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस बैकफुट पर है जबकि भाजपा इस मामले में हमलावर है। वह कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर पाकिस्तान के साथ हाथ मिलाने का आरोप लगा रही है। यह बयान जम्मू-कश्मीर चुनावों के बीच बड़ा मुद्दा बन गया है।

‘हर फिल्म में मेरे समुदाय का मजाक उड़ाते हैं…’: पारसी जज ने ‘इमरजेंसी’ पर दिखाया आईना, वकील बोले- BJP रोक रही कंगना रनौत की फिल्म

अभिनेत्री सह बीजेपी सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की फिल्म इमरजेंसी (Emergency) 6 सितंबर 2024 को रिलीज होनी थी। लेकिन यह फिल्म अब तक सेंसर बोर्ड में अटकी पड़ी है। बॉम्बे हाई कोर्ट में 19 सितंबर 2024 को हुई सुनवाई के दौरान भी फिल्म के रिलीज पर फैसला नहीं हो पाया। हालाँकि अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड को फटकार लगाते हुए 25 सितंबर से पहले फिल्म के रिलीज पर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या इस फिल्म के रिलीज में जानबूझकर देरी की जा रही है? क्या इसके पीछे केंद्र की बीजेपी सरकार है? इसके अलावा फिल्म का विरोध कर रहे लोगों को आईना दिखाते हुए जस्टिस कोलाबावाला ने कहा, “लगभग हर फिल्म में मेरे समुदाय का मजाक उड़ाया जाता है। हम हँसते हैं और यह नहीं मानते कि यह हमारे समुदाय के खिलाफ है।”

जस्टिस कोलाबावाला पारसी हैं। उन्होंने यह टिप्पणी फिल्म में दिखाए जाने वाले विषय-वस्तु का दर्शकों पर होने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाते हुए की।

सुनवाई के दौरान जी स्टूडियोज की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने दावा किया कि बीजेपी के इशारे पर सेंसर बोर्ड काम कर रहा है। वह चाहता है कि यह फिल्म अक्टूबर में हरियाणा चुनावों के बाद रिलीज हो। धोंड ने कहा, “फिल्म की सह-निर्माता (कंगना) BJP सांसद हैं और वे (BJP) ऐसी फिल्म नहीं चाहते, जिससे ऐसा लगे कि BJP सदस्य किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं।”

गौरतलब है कि इस फिल्म को ‘सिख विरोधी’ के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन धोंड की इस दलील का पीठ पर असर नहीं पड़ा। जस्टिस कोलाबवाला ने पूछा कि कोई पार्टी अपने ही सदस्य की बनाई फिल्म को क्यों रोकना चाहेगा? उन्होंने कहा कि यदि राज्य में किसी और दल की सरकार होती तो इस पर गौर किया जा सकता था। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फिल्म से BJP को वोट देने वाले लोगों के फैसले पर असर पड़ेगा?

इस फिल्म पर चल रहे विवादों को लेकर कंगना रनौत ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा था कि जरनैल सिंह भिंडरावाले (Jarnail Singh Bhindranwale) कोई संत नहीं था। वह आतंकवादी था। उन्होंने कहा था, “कुछ लोग हैं जो कहते हैं कि भिंडरावाले जो हैं वो संत हैं। वे एक महान क्रांतिकारी हैं। वे एक लीडर हैं। वे एक धर्मात्मा हैं। ऐसे लोग डरा धमकाकर, देश को जलाने की धमकी देकर, याचिका डालकर विरोध कर रहे हैं। मुझे भी धमकियाँ दी। पिछली सरकारों ने खालिस्तानियों को आतंकवादी घोषित किया है। वह कोई संत नहीं था, जो एके-47 लेकर मंदिर में बैठा था। उनके पास ऐसे ऐसे हथियार थे जो हमारी सेना के पास भी नहीं थे।”

कंगना रनौत ने कहा था कि उनकी फिल्म को लेकर कुछ लोगों को ही आपत्ति है। यही लोग दूसरों को भी भड़का रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के 99 प्रतिशत लोग भी भिंडरावाले को संत नहीं मानते हैं। वह आतंकवादी है। य​दि वह आतंकवादी है तो मेरी फिल्म रिलीज होनी चाहिए। फिल्म की रिलीज टलने से हुए आर्थिक नुकसान को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा था, “मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि भिंडरावाले को आतंकवादी दिखाए जाने पर किसी को आपत्ति होगी। मुझे प्रताड़ित किया जाएगा। यह शर्मनाक है। इसका हमें नुकसान उठाना पड़ा है। फिल्म को रिलीज से 4 दिन पहले कैंसिल कर दिया गया था।”

गुजरात के जिस जिले की 40% आबादी बन गई ईसाई, वहाँ धर्मांतरण रोकने निकले बजरंग बली: ‘हनुमान यज्ञ’ अभियान से उद्योगपति ने बदली स्थिति, 311 गाँवों में बने 311 मंदिर

गुजरात के छोटे जिलों में से एक डांग जिला बुरी तरह धर्मांतरण की गिरफ्त में था। 40% आबादी वहाँ की ईसाई धर्म अपना चुकी थी। हिंदू धर्म में लोगों की आस्था खत्म होने लगी थी। फिर, वहाँ एक ऐसे अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद धीरे-धीरे सनातन में लोगों का विश्वास दोबारा बढ़ने लगा।

इस अभियान का नाम- हनुमान यज्ञ है। इसे सूरत के जाने-माने बिजनेसमैन व भाजपा सांसद गोविंद ढोलकिया ने शुरू किया है। इस अभियान के तहत डांग जिले के 2 तालुकाओं के 311 ग्रामों में 311 हनुमान मंदिर बनाए गए हैं। 2022 में इनमें से 14 मंदिरों का उद्घाटन हुआ था। अभियान की शुरुआत 40 लाख रुपयों से की गई थी।

ये कदम उठाया ही इसलिए गया था कि डांग में जो पिछले 20 सालों से लगातार परिवर्तन हो रहा है उसे रोका जा सके। बताया जाता है डांग की 40 फीसदी आबादी अब तक ईसाई बन गई है इसीलिए धर्मांतरण रोकने के लिए बजरंगबली का सहारा लिया गया है।

इस अभियान को लेकर हीरा व्यापारी गोविंद ढोलकिया ने कहा (जिन्हें हर वर्ष दीवाली पर बोनस के नाम पर अपने कर्मचारियों को महंगी कार देने के लिए जाना जाता है), “हम पिछले 30 सालों से डांग अहवा में मेडिकल कैंप आयोजित कर रहे हैं। साल 2017 में भी जब कैंप से लौट रहे थे तो कार में मैं और पीपी स्वामी थे। हमने गाँव में एक हनुमान जी की मूर्ति को देखा जिनपर पेड़ के तने गिरे हुए थे। मैंने स्वामी जी से पूछा कि ये कितना उचित है कि हमारे भगवान बिन घर के बैठे रहें और हम घर में रहें।”

उन्होंने आगे कहा, “स्वामीजी ने मेरी बात सुन कहा ये गलत है और इसके लिए कार्य मुझे करना चाहिए। 300 गाँव हैं, 300 में हम ऐसा करेंगे। इस अभियान को लेकर निर्णय कुछ सेकेंड में ही ले लिए गए। इसमें मैंने कुछ नहीं बोला। ये निर्णय भी मेरा नहीं था। ये हनुमान जी महाराज का, प्रभु श्रीराम जी का निर्णय था।”

गौरतलब है कि इन ग्रामों में मंदिरों के निर्माण से कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिली। पीपी स्वामी ने बताया कि मंदिर निर्माण से इलाकों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। जनजातीय परिवारों में शराब की लत बहुत आम थी लेकिन मंदिर निर्माण से कई परिवारों की यह लत दूर हो गई है।

अब इन ग्रामों में गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और होली जैसे सभी त्योहार मनाए जाते हैं। गाँव में जब भी कोई शुभ कार्य होता है तो सबसे पहले लोग बजरंगबली के मंदिर जाते हैं। इस अभियान से डांग में शांति और सहयोग का माहौल स्थापित हुआ है, लोग बिन किसी जाति-पाति के मंदिर में जाते हैं। सनातन धर्म का प्रचार करते है।

मालूम हो कि इससे पहले धर्मांतरण की मार झेल रहे जनजातीय समुदायों की रक्षा के लिए सोनगढ़ में भी बजरंगबली का सहारा लिया गया था। नतीजा ये हुआ कि सोनगढ़ तालुका के बुधवाड़ा गाँव में हनुमान जी के दर्शन के बाद 18 जून 2022 को 6 परिवारों के 35 से अधिक लोग ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू धर्म में लौट आए थे।

यह संयोग या प्रयोग… लिबरल गैंग ने पहले पत्रकार अशोक श्रीवास्तव को किया टारगेट, फिर फिर घर जाते समय उनकी कार को SUV ने मारी टक्कर: क्या कॉन्ग्रेसी गुंडई के खिलाफ खड़ा होना ही उनका गुनाह?

डीडी न्यूज के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव की गाड़ी पर हमला हुआ है। उन पर यह हमला प्रेस क्लब के बाहर पत्रकार की पिटाई मामले में कॉन्ग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन करने के बाद हुआ। पत्रकार श्रीवास्तव की गाड़ी में एक बड़ी गाड़ी ने टक्कर मार दी। हमले के बाद कई पत्रकारों ने इस मामले को उठाया है।

जानकारी के अनुसार, अशोक श्रीवास्तव जब बुधवार रात (18 सितम्बर, 2024) को अपने दफ्तर से वापस घर जा रहे थे, तब उनकी गाड़ी में एक बड़ी गाड़ी ने टक्कर मारी। इस टक्कर में अशोक श्रीवास्तव की क्षतिग्रस्त हो गई। अशोक श्रीवास्तव भी अचानक हुए इस हमले से चौंक गए।

अशोक श्रीवास्तव हमले से पहले दिन में नई दिल्ली में संसद भवन के पास स्थित प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन करने गए थे। यहाँ उन्होंने अमेरिका में इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ कॉन्ग्रेस के लोगों द्वारा की गई बदसलूकी के खिलाफ किए गए एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

उन्होंने यहाँ माँग की थी कि राहुल गाँधी पत्रकार रोहित शर्मा से माफ़ी माँगे। उनके इस प्रदर्शन में कुछ और पत्रकार भी शामिल हुए थे। उन्होंने यहाँ कहा, “हमें एक संदेश देना है कि मोहब्बत की दुकान कहने वाले पत्रकारों का सम्मान सीखें। एक पत्रकार के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने हमला किया, उसका फोन छीना, उसके साथ हाथापाई की, क्या यह मीडिया की आजादी का सम्मान है। क्या संविधान का पालन है। क्या बांग्लादेश के हिन्दुओं पर सवाल पूछना गुनाह है।”

इस प्रदर्शन को लेकर कॉन्ग्रेस के लोग चिढ़े हुए थे। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत और सुप्रिया श्रीनेत ने इस प्रदर्शन का मजाक उड़ाने की कोशिश भी की।

प्रदर्शन के बाद वह वापस अपने दफ्तर गए और उसके पास जब यहाँ से निकले तो उनकी गाड़ी में आकर एक गाड़ी टकराई। उन पर हुए इस हमले के बाद कई पत्रकारों ने इसकी सूचना ट्विटर पर डाली। पत्रकारों ने इस बात की आलचना आलोचना की कि क्या मीडिया की आजादी पर बात करने के कारण अशोक श्रीवास्तव पर हमला हुआ।

ABP न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया ने बताया, “कल रात (18 सितम्बर, 2024) को वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव पर जानलेवा हमला हुआ। आधी रात को जब वह अपने दफ़्तर से निकल रहे थे तभी उनकी कार को एक SUV ने पीछे से ज़ोरदार टक्कर मारी। कल अशोक श्रीवास्तव जी ने इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ अमेरिका में हुई बदसलूकी और हमले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था, इस प्रदर्शन से पूरा ईकोसिस्टम तिलमिला उठा था, लेकिन क्या विरोध के स्वर किसी की जान माँगते हैं?”

वहीं पत्रकार अनुपम कुमार सिंह ने भी हमले की आलोचना की। उन्होंने लिखा, “राहुल गाँधी आज भी इस देश की हर व्यवस्था से परे हैं। अमेरिका में पत्रकार पर हमला हुआ, इसके विरोध में आवाज़ उठाने पर अशोक श्रीवास्तव पर हमला कर दिया गया। अचानक से एक गाड़ी आती है और इनकी गाड़ी को जोर से टक्कर मारती है। उससे पहले सुप्रिया श्रीनेत ट्वीट कर के निशाना बनाती हैं। फिर कॉन्ग्रेस के सारे हैंडल्स एक-एक कर के पीछे पड़ जाते हैं। आज भी गाँधी परिवार इस देश का सबसे शक्तिशाली परिवार है।”

अशोक श्रीवास्तव पर हुए इस हमले का विरोध भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने भी किया है। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “कल ही DD न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ अमेरिका में हुई बदसलूकी और हमले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन से ‘मोहब्बत की दुकान’ वाला पूरा ईको सिस्टम तिलमिला उठा था। कल रात ही अशोक श्रीवास्तव पर जानलेवा हमला हुआ।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए लिखा, “आधी रात को जब वे अपने दफ्तर से निकल रहे थे तभी उनकी कार को एक SUV ने पीछे से जोरदार टक्कर मारी। अपराधी बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन विरोध करने वालों की जान पर हमला? कांग्रेस को अपने इमरजेंसी की मानसिकता से बाहर आना चाहिए। ये देश उनकी जागीर नहीं है और पत्रकार उनके गुलाम नहीं।”

इस मामले में ऑपइंडिया ने पत्रकार अशोक श्रीवास्तव से सम्पर्क करने का भी प्रयास किया। हालाँकि, उनकी प्रतिक्रिया इस मामले में नहीं मिल पाई है। गाड़ी जिस व्यक्ति ने लड़ाई, उसकी भी जानकारी नहीं सामने आई है। यह जानकारियाँ मिलते ही इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा।