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PM मोदी ने झारखंड को दिया 6 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का तोहफा, कहा – ‘अब देश की प्राथमिकता आदिवासी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2024 को झारखंड के जमशेदपुर में 6 नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत की। इस अवसर पर, उन्होंने राज्य के विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया। उन्होंने रांची एयरपोर्ट से ही विभिन्न योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन किया। चूँकि उन्हें जमशेदपुर में जाकर उद्घाटन करना था, लेकिन बारिश की वजह से उन्होंने रांची एयरपोर्ट से ही उद्घाटन किया। यही वजह रही कि जमशेदपुर में प्रस्तावित उनके रोड-शो को रद्द कर दिया गया। हालाँकि वो जमशेदपुर सड़क मार्ग से पहुँच रहे हैं और जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

पीएम मोदी ने दिया इन वंदे भारत ट्रेनों का तोहफा

  1. टाटानगर – पटना वंदे भारत एक्सप्रेस
  2. भागलपुर – दुमका- हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस
  3. ब्रह्मपुर – टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस
  4. गया – हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस
  5. देवघर – वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस
  6. राउरकेला – हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “आज का दिन झारखंड के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत से न केवल झारखंड की यातायात सुविधा में सुधार होगा, बल्कि यह हमारे देश की प्रौद्योगिकी और उन्नति की दिशा में एक कदम और बढ़ाएगा। इस आधुनिक ट्रेन से यात्रियों को न केवल सुविधा मिलेगी बल्कि यह राज्य की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी।”

पीएम मोदी ने कहा, “6 नई वंदे भारत ट्रेनें, 650 करोड़ से ज्यादा की रेलवे परियोजनाएँ, कनेक्टिविटी और यात्रा सुविधाओं का विस्तार, मैं झारखंड की जनता-जनार्दन को इन सभी विकास कार्यों के लिए बधाई देता हूँ।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्देश्य केवल यातायात को सुगम बनाना नहीं है, बल्कि यह हमारे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हम चाहते हैं कि हमारे देश के हर हिस्से में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचे और हर नागरिक को इसका लाभ मिले। यह ट्रेनें हमारी आधुनिक यात्रा की अवधारणा को वास्तविकता में बदल रही हैं और हमारी प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “आज झारखंड भी उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहाँ रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत झारखंड के 50 से अधिक रेलवे स्टेशनों का भी कायाकल्प किए जा रहे हैं। देश के गरीबों को सशक्त बनाने के लिए 2014 से कई कदम उठाए गए हैं। आदिवासी लोगों को जोड़ने के लिए पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) योजना चल रही है…”

पीएम मोदी ने कहा, “अब देश की प्राथमिकता देश का गरीब है। अब देश की प्राथमिकता देश का आदिवासी है। अब देश की प्राथमिकता देश का दलित, वंचित और पिछड़ा समाज है। अब देश की प्राथमिकता महिलाएँ हैं, युवा हैं, किसान हैं।” पीएम मोदी ने शुरुआत में कहा, “आज बहुत ही मंगल दिन है। इस समय झारखंड में प्रकृति पूजा के पर्व कर्मा की उमंग है। आज सुबह जब मैं रांची एयरपोर्ट पर पहुंचा तो एक बहन ने ‘करमा’ पर्व के प्रतीक ‘जावा’ से मेरा स्वागत किया। इस पर्व में बहनें अपने भाई की कुशलता की कामना करती हैं।”

पीएम मोदी राँची से जमशेद सड़क मार्ग से पहुँच रहे हैं। बारिश की वजह से उन्होंने उद्घाटन कार्यक्रम रांची से ही किया। जमशेदपुर में पीएम मोदी जनसभा को संबोधित करेंगे।

नाम: जामा मस्जिद, पता: अखाड़ा बाजार, श्रीराम गली – शिमला और मंडी के बाद कुल्लू में अवैध मस्जिद को लेकर बवाल, हिंदुओं ने कार्रवाई तक शुरू किया हनुमान चालीसा का पाठ

हिमाचल प्रदेश में अवैध मस्जिदों को लेकर हिंदुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शिमला के संजौली और मंडी के जेल रोड में मस्जिद की अवैध निर्माण के बाद कुल्लू में भी कुल्लू में भी बने अवैध मस्जिद के खिलाफ लोग आ गए। इसको लेकर हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। वहीं, मंडी में अवैध मस्जिद गिराए जाने तक लोगों ने हनुमान चालीसा का अखंड पाठ शुरू किया है।

कुल्लू में जिस मस्जिद को लेकर लोगों में आक्रोश फैला है, वह मस्जिद अखाड़ा बाजार के श्रीराम गली में स्थित है और इसका नाम जामा मस्जिद है। हिंदू संगठनों का कहना है कि जामा मस्जिद खादी ग्रामोद्योग की भूमि पर बना दी गई है। इस मस्जिद के अवैध निर्माण के खिलाफ लोगों ने हनुमान मंदिर रामशिला से ढालपुर चौक तक प्रदर्शन किया।

हिंदू जागरण मंच एवं अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने अखाड़ा बाजार पहुँचकर मस्जिद से 10 मीटर की दूरी पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। यहाँ पाठ खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारी ढालपुर चौक पहुँचे और वहाँ एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और इस अवैध मस्जिद को गिराने और पूरे इलाके मे अवैध मस्जिदों की जाँच की माँग की। जिले कुल 11 मस्जिदें बताई जा रही हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि साल 2017 से चल रहे पत्राचार में कुल्लू नगर परिषद ने यह स्वीकार किया है कि यह मस्जिद अवैध तरीके से बनाई गई है। इसे खादी ग्रामोद्योग की भूमि पर बनाया गया है। उनका कहना कि बिना पंजीकरण के दूसरे राज्यों के सैकड़ों लोग रोज हिमाचल प्रदेश में आ रहे हैं और अपनी अनैतिक गतिविधियों से यहाँ की संस्कृति और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं।

हिंदू संगठनों ने कहा कि कुछ ही दिन पहले गड़सा घाटी में गौहत्या का मामला सामने आया था। लोगों ने पता चलने पर आरोपितों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। आक्रोशित लोगों का कहना है कि ये बाहरी अराजक तत्व बिना बिल के सामान बेच रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है और करदाता व्यापारियों का व्यापार चौपट हो रहा है। 

दरअसल, अखाड़ा बाजार में बनी जामा मस्जिद का निर्माण साल 1990-91 बताया जाता है। उस समय इसकी इमारत एक मंजिल की थी, लेकिन साल 2017 तक इसका निर्माण किया गया और अब मस्जिद चार मंजिल की हो गई है। 2017 में हिंदू संगठनों के प्रयास से इस पर रोक लगा दी गई थी। उनका कहना है कि इस स्थान पर जो नक्शा पास हुआ है, उसके मुताबिक यह भवन नहीं बना है।

पूरा मामला सामने आने के बाद कुल्लू नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी हरि सिंह यादव ने कहा, “नगर परिषद को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस जमीन का रिकॉर्ड बंदोबस्ती के पास है। हिंदू संगठनों के आरोप के बाद इसकी जाँच की जाएगी।” वहीं, कुल्लू के एसडीएम ने कहा कि जामा मस्जिद की जाँच की जा रही है। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच मस्जिद के इमाम नवाब हाशमी ने निर्माण की वैधता और भूमि के मालिकाना हक का बचाव किया है। उन्होंने दावा किया कि वक्फ बोर्ड कानूनी तौर पर 1 बीघा और 2 बिस्वा जमीन का मालिक है और वह इसके लिए किराया वसूल रहा है। हाशमी ने कहा, “विवादित भूमि 1999 में कॉन्ग्रेस नेताओं की मदद से खादी बोर्ड से मस्जिद को हस्तांतरित की गई थी। इसमें निर्माण भी वैधानिक तरीके से हुई है।”

मंडी में अवैध मस्जिद गिरने तक होगा हनुमान चालीसा

हिंदू जागरण मंच ने कहा है कि वह मंडी के जेल रोड में मस्जिद के अवैध निर्माण के गिरने तक रोज हनुमान चालीसा का पाठ करेगा। इसके साथ ही शहर के विभिन्न मंदिरों में तीस दिनों तक पाठ के साथ कीर्तन होगा। मंच ने यह भी कहा कि आयुक्त कोर्ट की ओर से दी गई समयावधि तक मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद के अवैध निर्माण को नहीं हटाया तो हिंदू इसे गिराएँगे।

दरअसल, शनिवार (14 सितंबर 2024) को हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने मंडी शहर के इंदिरा मार्केट में स्थित माता सिद्ध काली के प्रांगण में हनुमान चालीसा का पाठ और माता के कीर्तन का आयोजन किया। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इनमें बुजुर्ग से लेकर महिलाएँ तक शामिल थीं। हिंदू संगठनों का कहना है प्रशासन ने हिंदुओं को आश्वस्त किया है।

ईद-ए-मिलाद पर ट्रैफिक से लेकर पुलिस-प्रशासन सब की व्यवस्था, कैद में भगवान गणेश की मूर्ति: कर्नाटक में और क्या-क्या करेगी कॉन्ग्रेसी सरकार?

कर्नाटक में जहाँ ईद-ए-मिलाद के लिए हर मोड़ पर ट्रैफिक से लेकर पुलिस की व्यवस्था की गई है, वहीं गणेश चतुर्थी के जश्न में भगवान गणेश की मूर्ति को “कैद” कर दिया गया। ये स्थिति एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करती है कि हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों पर सुरक्षा व्यवस्था की जगह उन पर अंकुश क्यों लगाया जाता है? और अगर सुरक्षा का दावा किया जा रहा है, तो भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस वैन में क्यों ले जाया गया? ऐसा लग रहा है कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार भगवान से भी ज़्यादा कानून-व्यवस्था को भगवान मान बैठी है, और अगर ये कानून हिंदू परंपराओं से टकरा जाए, तो गणेश जी तक को पुलिस स्टेशन में ले जाना पड़ता है।

ईद-ए-मिलाद पर प्रशासन अलर्ट, और गणेश चतुर्थी पर?

कर्नाटक के बेंगलुरु में 16 सितंबर 2024 के लिए ईद-ए-मिलाद के अवसर पर पुलिस ने शहरभर में ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए एडवाइजरी जारी की है। हर गली-मोहल्ले में पुलिस तैनात की गई है, और एक-एक सड़क पर नजर रखी जाएगी कि कहीं कोई जुलूस के दौरान असुविधा न हो। बेंगलुरु पुलिस ने बाकायदा ट्रैफिक रूट्स को बदल दिया, ताकि ईद के जुलूसों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिन दुख की बात यह है कि इसी ट्रैफिक व्यवस्था में गणेश विसर्जन के जुलूस के दौरान भगवान गणेश को “कैद” किया गया।

एक तरफ ईद-ए-मिलाद पर पूरी पुलिस फोर्स मुसलमानों की भीड़ के लिए अलर्ट मोड पर थी, तो दूसरी तरफ हिंदू धर्म के त्योहार पर भगवान की मूर्ति को ट्रैफिक और लॉ एंड ऑर्डर का हवाला देते हुए पुलिस वैन में ले जाया गया। क्या भगवान गणेश की भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल था, या फिर यह हिंदू त्योहारों के प्रति प्रशासन की दोहरी मानसिकता का परिणाम था?

क्या हिंदू त्योहार पर सुरक्षा का अभाव है?

सोचने वाली बात है कि जब ईद-ए-मिलाद के लिए सरकार इतनी चौकन्नी है, तो गणेश चतुर्थी पर ऐसा क्या हो गया कि भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस की हिरासत में रखना पड़ा? यह वाकया एक सच्चाई को उजागर करता है कि हिंदू त्योहारों पर सरकार का रवैया अलग होता है। प्रशासन के लिए ईद का जुलूस शांति से निकल जाए, इसके लिए हर संभव इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन जब गणेश चतुर्थी की बात आती है, तो हिंदुओं के धार्मिक प्रतीक को ‘कानून व्यवस्था’ के नाम पर पुलिस वैन में बंद किया जाता है।

जरा सोचिए, ईद पर जुलूस निकलता है और प्रशासन पूरी ताकत लगाता है कि किसी भी इस्लामी मजहबी को दिक्कत न हो। वहीं गणेश चतुर्थी पर अगर कोई हिंदू परिवार भगवान गणेश की मूर्ति को विसर्जन के लिए लेकर जा रहा है, तो उसे क्या मिलता है? पुलिस, जो हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों को ‘कंट्रोल’ करने का काम करती है।

गणेश जी की ‘गिरफ्तारी’ का सच?

बेंगलुरु में गणेश चतुर्थी के दौरान की एक वायरल तस्वीर ने सबको चौंका दिया, जिसमें गणेश जी की मूर्ति पुलिस वैन में रखी गई थी। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से फैली, और लोग सवाल करने लगे कि यह क्या हो रहा है? क्या भगवान गणेश को भी कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार ने “गिरफ्तार” कर लिया? असल में, यह घटना कर्नाटक के यादगिरी जिले की है, जहाँ गणेश चतुर्थी के जुलूस के दौरान प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा कारणों से गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन स्थल तक पुलिस वैन में लेकर जाना होगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब ईद-ए-मिलाद के जुलूसों को पुलिस सुरक्षा में बिना किसी रुकावट के जाने दिया जा सकता है, तो गणेश जी के जुलूस को क्यों नहीं?

क्या यही “धर्मनिरपेक्षता” है?

इस तरह की घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या यह वही ‘धर्मनिरपेक्षता’ है जिसका दावा कॉन्ग्रेस की सरकारें करती हैं? जब ईद के जुलूस के लिए सड़कों पर बैरिकेड लगाए जाते हैं, ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता है, और पुलिस बल तैनात होते हैं, तो गणेश चतुर्थी पर भगवान की मूर्ति को ‘गिरफ्तार’ क्यों करना पड़ता है? क्या यह प्रशासन का दोहरा रवैया नहीं है?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन अगर गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख हिंदू त्योहारों पर भीड़ और कानून-व्यवस्था के नाम पर भगवान को ही ‘कैद’ करना पड़े, तो यह धर्मनिरपेक्षता नहीं, बल्कि भेदभाव का प्रतीक है।

ईद-ए-मिलाद और गणेश चतुर्थी की तुलना

ईद-ए-मिलाद और गणेश चतुर्थी, दोनों धार्मिक त्योहार हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या गणेश चतुर्थी के दौरान सड़कों पर भीड़ नहीं होती? क्या विसर्जन के दौरान कोई ट्रैफिक व्यवधान नहीं होता? फिर क्यों ईद के लिए तो रूट बदल दिए जाते हैं और गणेश चतुर्थी के लिए भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस वैन में रखना पड़ता है?

ईद के जुलूस के लिए पुलिस प्रशासन सड़कें बंद करवा सकता है, पर हिंदू त्योहारों पर ऐसा करना उनके लिए मुश्किल क्यों हो जाता है? क्या गणेश विसर्जन का जुलूस इतना छोटा था कि उसे पुलिस वैन में ‘कैद’ कर देना ही एकमात्र उपाय था?

यह दिखावा कब तक चलेगा?

सरकार की ‘धर्मनिरपेक्षता’ सिर्फ कागजों पर है या फिर केवल कुछ विशेष धर्मों के लिए? कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर पहले भी तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस घटना ने इस धारणा को और मजबूत किया। ईद-ए-मिलाद के जुलूस को शांतिपूर्वक निकालने के लिए पूरी व्यवस्थाएँ की गईं, जबकि गणेश चतुर्थी के विसर्जन के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को ‘कैद’ कर लिया गया। यह केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान नहीं, बल्कि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार की प्राथमिकताएं कहाँ हैं।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार का असली चेहरा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार ने एक बार फिर दिखा दिया कि उनकी प्राथमिकताएँ क्या हैं। ईद-ए-मिलाद के लिए तो प्रशासन चौकन्ना था, लेकिन गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान की मूर्ति को ही कैद कर लिया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि कर्नाटक में सरकार की प्राथमिकता हिंदू त्योहारों की सुरक्षा नहीं, बल्कि उन्हें सीमित करने की है। जब तक यह दोहरा रवैया जारी रहेगा, तब तक हिंदू समाज के धार्मिक अधिकारों का हनन होता रहेगा।

अब यह सवाल सरकार से है कि क्या वे अपनी ‘धर्मनिरपेक्षता’ का सही मायने में पालन करेंगे, या फिर भगवान गणेश की मूर्ति को ‘गिरफ्तार’ करने जैसे कदम उठाते रहेंगे?

महोबा में गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान पथराव, इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया जुलूस पर हमला: बवाल के बाद हिन्‍दुओं ने किया कोतवाली का घेराव

महोबा जिले में गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। यह घटना तब हुई जब गणेश मूर्ति का जुलूस मुस्लिम बाहुल्य कसौराटोरी इलाके से गुजर रहा था। जुलूस के दौरान आतिशबाजी में एक जलता हुआ पटाखा गलती से एक कच्चे मकान में गिर गया, जिससे विवाद शुरू हो गया। इसके तुरंत बाद, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जुलूस पर पानी की बाल्टियाँ फेंकनी शुरू कर दीं और फिर पथराव भी होने लगा। इस कारण जुलूस में अफरा-तफरी मच गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और मौके पर कई थानों की फोर्स को तैनात कर दिया। पुलिस ने दर्जन भर लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, इस घटना के बाद हिंदू संगठनों ने गुस्से में आकर कोतवाली का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की।

यह घटना महोबा के शहर कोतवाली क्षेत्र के कसौराटोरी मोहल्ले की है। शनिवार (14 सितंबर 2024) को गणेश मूर्ति विसर्जन के लिए निकाले जा रहे जुलूस में शामिल भक्त डीजे की धुन पर उत्सव मना रहे थे। जैसे ही जुलूस कसौराटोरी इलाके से गुजरा, आतिशबाजी के दौरान एक जलता पटाखा कच्चे मकान के अंदर गिर गया, जिससे विवाद की शुरुआत हुई। इसके बाद जुलूस में शामिल भक्तों पर पानी की बाल्टियाँ फेंकी गईं, जिससे दोनों पक्षों में टकराव और पथराव शुरू हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा, लेकिन गुस्साए हिंदू संगठन के कार्यकर्ता कोतवाली पहुँच गए और गिरफ्तारी की माँग करने लगे। उन्होंने कोतवाली का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की। संगठन के पदाधिकारी कार्रवाई की माँग पर अड़े रहे और देर रात तक कोतवाली में डटे रहे।

पुलिस ने स्थिति को शांत करने के लिए दोनों पक्षों से बातचीत की और तनाव को कम करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने दर्जन भर लोगों को हिरासत में लिया और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष मनोज शिवहरे ने बताया कि गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान भक्तों पर पथराव करने की घटना से लोग बेहद आक्रोशित हैं। उन्होंने माँग की है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपितों को गिरफ्तार करे। वहीं, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुँच गए और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की।

CBI ने RG कर मेडिकल अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल को किया गिरफ्तार, सबूतों से छेड़छाड़ और साजिश रचने का आरोप

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर की रेप और फिर हत्या के मामले में RG कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को सीबीआई ने गिऱफ्तार कर लिया है। घोष के साथ ही इंपेक्टर अभिजीत मंडल को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों को आज सियालदह में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।

सीबीआई का कहना है कि दोनों अपराध स्थल को बिगाड़ने, सबूतों से छेड़छाड़ करने, आधिकारिक नियमों का उल्लंघन करने, आपराधिक साजिश रचने और जाँचकर्ताओं को गुमराह करने में शामिल थे। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी के रूप में अभिजीत मंडल महिला डॉक्टर की लाश मिलने के बाद अपनी भूमिका के बारे में उचित जवाब नहीं दे पाए।

मेडिकल अस्पताल में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर संदीप घोष पहले से ही एजेंसी की न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सीबीआई उन्हें रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच कर रही है।

इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य डायरी (जीडी) प्रविष्टि और एफआईआर के पंजीकरण के समय के बीच विसंगति की ओर इशारा किया था। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था, “यह बहुत स्पष्ट है कि एफआईआर दर्ज करने में कम से कम 14 घंटे की देरी हुई है।”

दरअसल, 31 वर्षीया ट्रेनी डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद रात में पोस्टमार्टम किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। हालाँकि, डॉक्टरों के तीन सदस्यीय पैनल ने शुरू में शाम को पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया था, लेकिन पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल ने ‘कुछ जरूरी मामले’ का हवाला देकर शाम 6.10 से 7.10 बजे के बीच पोस्टमार्टम करने की अनुमति दी।

रात में शव का पोस्टमार्टम करने को लेकर मृतक डॉक्टर के माता-पिता ने सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिजीत मंडल ने शव का अंतिम संस्कार जल्द करने के लिए उन पर दबाव डाला था। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान संदीप घोष के बयान से भी एजेंसी को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे पुलिस अधिकारी मंडल की भूमिका पर संदेह पैदा हुआ।

अभिजीत मंडल को सबूतों से छेड़छाड़ करने और अपराध की सूचना मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज करने में देरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। CBI के एक अधिकारी ने कहा, “पुलिसकर्मी से पहले आठ बार पूछताछ की जा चुकी है और हर बार उसने अलग-अलग बयान दिए हैं। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।” गिरफ्तारी से पहले शनिवार को मंडल से कई घंटों तक पूछताछ की गई।

इन दोनों गिरफ्तारियों पर प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने जश्न मनाया। एक डॉक्टर ने कहा, “हम पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे थे, क्योंकि वे सबूतों से छेड़छाड़ करने में शामिल थे। हम बहुत खुश हैं क्योंकि सीबीआई ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है। सीबीआई को उन अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार करना चाहिए जिन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की है।”

इससे पहले संदीप घोष के बाउंसर एवं सुरक्षाकर्मी अफसर अली खान और हावड़ा में मेडिकल शॉप चलाने वाली सुमन हजारा को पहले की गिरफ्तार कर लिया गया है। सुमन हजारा पर आरोप है कि उनकी दुकान से रिसाइकल किया हुआ मेडिकल उपकरण RG कर मेडिकल अस्पताल में सप्लाई किया जाता था। इसके अलावा, वेंडर विप्लव सिंघा और रेप के आरोपित संजय राय को गिरफ्तार किया जा चुका है।

राम रेवाड़ी की शोभा यात्रा पर मस्जिद के अंदर से पथराव, कई हिंदू घायल: ‘अवैध जामा मस्जिद’ पर बुलडोजर एक्शन की माँग, भीलवाड़ा में MLA समेत सैकड़ों लोग धरने पर

राजस्थान के भीलवाड़ा में राम रेवाड़ी की शोभायात्रा पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा पथराव किया गया, जब शोभायात्रा मस्जिद के सामने से गुजर रही थी। भीलवाड़ा के जहाजपुर में राम रेवाड़ी की शोभायात्रा के दौरान जामा मस्जिद के बाहर अचानक पथराव होने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भीलवाड़ा के जहाजपुर में शनिवार (14 सितंबर 2024) को यह घटना तब हुई, जब शोभायात्रा भगवान के बेवाण किले से आ रही थी। शोभा यात्रा जैसे ही जामा मस्जिद के पास पहुँची, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रदर्शनकारियों ने आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग करते हुए मौके पर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान शहर के बाजार भी बंद हो गए। इस मामले में 10 पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया गया है, जो मस्जिद के अंदर से पत्थरबाजी कर रहे थे।

मस्जिद से पत्थरबाजी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना की जानकारी मिलने पर जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा मौके पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने जामा मस्जिद को अवैध बताते हुए इसे बुलडोजर से तोड़ने की माँग की। इसके बाद नगर पालिका ने जामा मस्जिद को स्वामित्व और निर्माण स्वीकृति संबंधी दस्तावेज पेश करने के लिए 24 घंटे का नोटिस जारी किया। देर रात तक ये धरना चला और प्रशासन से 3 दौर की वार्ता के बाद धरना समाप्त हुआ।

रात में नगर पालिका ने बस स्टैंड के पास मुस्लिमों की कुछ केबिनों को अतिक्रमण मानकर जेसीबी से हटवा दिया। इस दौरान बाईपास के पास दो केबिनों को कुछ युवाओं द्वारा आग के हवाले कर दिया गया। इससे माहौल और अधिक बिगड़ गया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी से स्थिति नियंत्रण में रही।

शाहपुरा एसपी राजेश कांवट ने बताया कि इस मामले में अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि कस्बे के हालात तनावपूर्ण जरूर हैं, लेकिन नियंत्रण में हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

रात में जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह शेखावत, एसपी राजेश कांवट, और अजमेर के आईजी ओमप्रकाश भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने हालात का जायजा लिया और निर्देश दिए कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जाए।

वहीं, विधायक गोपीचंद मीणा ने देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धरना समाप्त करने की घोषणा की और बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मामले की जानकारी दे दी गई है। अब जिला प्रशासन सीएमओ के निर्देशन में कार्रवाई करेगा।

एक्सप्रेसवे की बदहाली पर एक्शन मोड में NHAI: 4 इंजीनियरों पर गिरी गाज, ठेकेदार पर ₹50 लाख का जुर्माना – खराब सड़क की वायरल हुई थी वीडियो

केंद्र सरकार ने सड़कों की मरम्मत एवं रख-रखाव के मामले में लापरवाही बरतने वाले चार इंजीनियरों ऐक्शन लिया है और ठेकेदार पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। पिछले दिनों अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर और दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे की बदहाली की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसका संज्ञान लिया था।

दरअसल, पिछले दिनों अलवर में दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक्सप्रेसवे पर चल रही एक कार सड़क में खामियों के कारण हवा में उछलती हुई दिखाई दी थी। इसके अलावा, कई जगहों की तस्वीरें भी लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल की थी।

इस मामले में NHAI ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के निर्देश पर इस मामले की जाँच की गई। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। NHAI ने कहा कि वक्त रहते खामियों को दूर न करने के मामले में ठेकेदार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

इसके अलावा, निर्माण कार्य की ठीक से देखभाल नहीं करने और अपने काम में लापरवाही के चलते NHAI के इंजीनियर के टीम लीडर-कम-रेजिडेंट इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित साइट इंजीनियर को भी बर्खास्त कर दिया गया है। संबंधित पीडी और मैनेजर (टेक) को भी इन खामियों के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है।

बता दें कि सुपर एक्सप्रेसवे कहलाने वाले अलवर में दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियाँ 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। हालाँकि, निर्धारित सीमा से भी अधिक रफ्तार से गाड़ियाँ दौड़ती हैं। लेकिन, यहाँ सड़कों की बैलेंसिंग सही नहीं है। कहीं उबड़-खाबड़ है तो कहीं गड्ढे बन गए हैं। कहीं गिट्टी फैली है तो कहीं कुछ। इसके कारण इस क्षेत्र में सड़क हादसे भी खूब होते हैं।

इतना ही नहीं, इन एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्से की अस्थायी मरम्मत कराया गया है। इसके साथ ही आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ प्रोफेसर केएस रेड्डी और आईआईटी गाँधीनगर के प्रोफेसर जीवी राव को एक्सप्रेसवे को हुई इस क्षति का कारण पता करने के लिए कहा गया है। वहीं, दिल्ली का श्रीराम इंस्टीट्यूट इसके नमूने एकत्र करके उनकी जाँच करेगा।

‘कॉन्ग्रेस अर्बन नक्सल का नया रूप, तुष्टिकरण उसका लक्ष्य’: PM मोदी ने कुरूक्षेत्र में भरी हुँकार, कहा- नेहरू आरक्षण के खिलाफ थे, इंदिरा ने OBC रिजर्वेशन रोका

हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुरुक्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित किया। इसमें उन्होंने किसान, जवान और आरक्षण की बात की। पीएम ने कॉन्ग्रेस को आरक्षण विरोधी बताते हुए कहा कि यह पार्टी पंडित नेहरू के जमाने से आरक्षण विरोधी है। उन्होंने कहा कि वह आरक्षण को रत्ती भर भी खत्म नहीं होने देंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 उनकी सरकार ने खत्म की और कॉन्ग्रेस उसे फिर वापस लाने की बात करती है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के जवान हर हफ्ते तिरंगे में लिपटकर आते थे। जब से जम्मू-कश्मीर में धारा 370 खत्म हुआ है, तब से आतंकवाद में कमी आई है। उन्होंने हरियाणा के लोगों को चेताया कि अगर कॉन्ग्रेस सरकार बनी तो हिमाचल जैसा आर्थिक संकट आ जाएगा।

अपने भाषण की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने किसानों को सम्मान निधि के साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए दिए। उनके सिर से 10 हजार करोड़ पर बोझ नहीं पड़ने दिया। हरियाणा की 24 फसलों पर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) लागू किया।” उन्होंने कॉन्ग्रेस को चुनौती दी कि उसमें दम है तो कर्नाटक और तेलंगाना में अपनी किसान योजनाएँ लागू करके दिखाए।

पीएम ने कहा कि भारत में सबसे बड़ा दलित, ओबीसी और आदिवासी विरोधी अगर कोई है तो वो कॉन्ग्रेस का परिवार है। अभी इन लोगों ने कहा है कि अगर सरकार में आए तो दलितों और पिछड़ों का आरक्षण खत्म कर देंगे। यही इस परिवार की सच्चाई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रहते हुए पंडित नेहरू ने आरक्षण का विरोध किया था। इंदिरा गाँधी ने OBC आरक्षण को रोका था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता की परेशानी से कॉन्ग्रेस को कभी कोई फर्क नहीं पड़ता। इससे बड़ी बेईमान और धोखेबाज पार्टी देश में और कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के आने से पहले यहाँ आधे घरों में नल का कनेक्शन नहीं था। आज हरियाणा करीब-करीब शत प्रतिशत नल से जल आता है। कभी यहाँ विकास सिर्फ एक जिले तक सिमट कर रह जाता था, अब ऐसा नहीं होता।

कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों की हितैषी भाजपा सरकार नई पेंशन स्कीम लेकर आई है। इसमें कर्मचारियों के लिए निश्चित पेंशन की गारंटी है। इस नई पेंशन स्कीम का व्यापक स्वागत हुआ है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस देश की एकता पर लगातार हमला कर रही है। वह अर्बन नक्सल का नया रूप बन गई है। उसे देश को बदनाम करने में शर्म नहीं आती।”

कॉन्ग्रेस को तुष्टिकरण की राजनीति पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा कि उसके लिए तुष्टिकरण ही सबसे बड़ा लक्ष्य है। आज तो हालत ये हो गई है कि कॉन्ग्रेस के राज में कर्नाटक में गणपति जी को भी सलाखों के पीछे डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरा देश आज गणेश उत्सव मना रहा है और कॉन्ग्रेस विघ्नहर्ता (भगवान गणेश) की पूजा में विघ्न डाल रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस का शाही (गाँधी) परिवार आरक्षण को खत्म करने वाला है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, जब तक मोदी है, बाबा आंबेडकर के दिए आरक्षण से रत्ती भर लूट नहीं करने दूँगा। ये मोदी की गारंटी है।” उन्होंने कहा कि पिछले 50 साल का इतिहास है कि दिल्ली में जिसकी सरकार रहती है, हरियाणा में भी उसी की सरकार बनाते हैं। कभी उलटफेर नहीं करते।

कुरुक्षेत्र की धरती को प्रणाम करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कुरुक्षेत्र में आना, भारत की संस्कृति के तीर्थ का दर्शन करना मन को भर देता है। यहाँ गीता का ज्ञान है। यहाँ सरस्वती सभ्यता के निशान हैं। ये गुरु गोविंद सिंह जी की छठी पातशाही की धरती है। यहाँ श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पड़े हैं। ऐसी पावन धरती से मैं आपसे फिर एक बार भाजपा की सरकार बनाने का निवेदन करने आया हूँ।” 


कोलकाता में फुटपाथ पर रखे बैग में ब्लास्ट, एक व्यक्ति का हाथ उड़ने की खबर: बंगाल भाजपा ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर NIA जाँच की माँग की

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एसएन बनर्जी रोड पर रखे एक बैग में धमाका हो गया है। विस्फोट में एक शख्स का हाथ उड़ गया। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जो व्यक्ति घायल हुआ है, वो रोड पर रखे बैग से कुछ निकालने आया था। इसी दौरान धमाका हो गया। भाजपा ने इसकी जाँच NIA से कराने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।

बताया जा रहा है कि यह घटना शनिवार (14 सितंबर 2024) की दोपहर करीब 1.45 बजे की है। तालतला पुलिस स्टेशन को ब्लोचमैन सेंट और एसएन बनर्जी रोड के पास विस्फोट की सूचना मिली। पुलिस को यह भी बताया गया कि विस्फोट में एक व्यक्ति घायल हो गया है। घायल बताया जा रहा व्यक्ति कूड़ा बीनने वाला बताया जा रहा है। घटनास्थल पर पहुँचकर पुलिस ने घायल को अस्पताल पहुँचाया।

विस्फोट में घायल व्यक्ति की पहचान बापी दास के रूप में हुई है और उसकी उम्र लगभग 58 साल है। शख्स ने पूछताछ में बताया है कि वह इधर-उधर घूमता रहता है। हाल ही में उसने एसएन बनर्जी रोड के फुटपाथ पर रहना शुरू किया था। पुलिस ने घायल शख्स का बयान अभी तक दर्ज नहीं किया है। जाँच फोरेंसिक टीम और बंगाल पुलिस घटनास्थल पर पहुँची।

घटना का चश्मदीद होने का दावा करने वाले एक शख्स ने बताया, “विस्फोट के समय हम पास में ही खड़े थे। धमाके की आवाज बहुत तेज थी। आवाज सुनकर हम तुरंत मौके पर दौड़े और देखा कि एक व्यक्ति जो पास में पड़ा हुआ है। व्यक्ति की दाहिनी कलाई पर चोट आई है। कोई और घायल नहीं हुआ है।” उसने बताया कि वो प्लास्टिक का बैग वहाँ किसने रखा था, ये किसी ने नहीं देखा।

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस घटना की जाँच NIA से कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि धमाके के सभी एंगलों की जाँच होनी चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री से कहा कि राज्य पुलिस के पास संसाधनों की कमी है, इसलिए मामले को गंभीरता से लेते हुए धमाके की जाँच एनआईए से करवाई जाए।

बता दें कि ट्रेनी महिला डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद विवादों में आए RG कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास दो दिन पहले एक संदिग्ध बैग मिला था। लावारिस बैग मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया था। आनन-फानन में बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया था, लेकिन बैग की जाँच में कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला था। इस अस्पताल के जूनियर डॉक्टर फिलहाल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

‘हिमाचल प्रदेश में हथियार लेकर मुस्लिमों के नरसंहार को निकले हिन्दू’: जानिए उस वीडियो का सच जिसके जरिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बताया जा रहा हिंसक

हिमाचल प्रदेश में अवैध इस्लामी संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। सबसे पहले शिमला स्थित संजौली क्षेत्र में एक मस्जिद द्वारा अतिक्रमण के मुद्दे पर आंदोलन हुआ। अंत में मस्जिद समिति ने खुद ही इस्लामी संरचना के उस हिस्से को ध्वस्त करने पर सहमति दे दी। इसके बाद मंडी में एक तीन मंजिला मस्जिद को लेकर आंदोलन हुआ, जिसके 2 मंजिलों को अदालत ने अवैध बताया है। पूरे हिमाचल प्रदेश में व्यापार मंडलों ने शनिवार (14 सितंबर, 2024) को बंद बुलाया।

इस दौरान मंडी से लेकर मनाली तक दुकानें बंद रहीं। हिन्दू संगठनों द्वारा आहूत इस बंद को जनता का पूर्ण समर्थन मिला। हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार है और वहाँ की पुलिस ने हिन्दू प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल-प्रयोग किया। आँसू गैस के लोगों से लेकर लाठीचार्ज तक किया गया। जबकि प्रदेश के मंत्री और पुराने कॉन्ग्रेसी अनिरुद्ध सिंह तक विधानसभा में कह चुके हैं कि बाहर से जमात के लोग आकर यहाँ गलत काम कर रहे हैं, डेमोग्राफी बदलने से असंतुलन पैदा हो रहा है।

हिमाचल प्रदेश में हथियार लहराते हिन्दू हिंसक?

इसी बीच सोशल मीडिया पर हिन्दुओं का एक वीडियो शेयर कर के उन्हें दंगाई बताया जाने लगा। इन तस्वीरों और वीडियो में हिन्दू समाज के लोग हाथों में तलवार लिए झूमते दिख रहे हैं और पीछे संगीत बज रहा है। इस दौरान ढोल-ताशे भी बज रहे हैं। जैसे, ‘टीम साथ’ ने लिखा, “हिमाचल प्रदेश में हथियार लेकर विचरण करते हिंदुत्व आतंकवादी”। यहाँ तक कि कई दक्षिणपंथी सोशल मीडिया हैंडलों ने भी फैलाया कि ये हिन्दू मस्जिदों के खिलाफ हथियार उठा रहे हैं।

रफीकुल इस्लाम ने इन हिन्दुओं को असामाजिक तत्व बता कर पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करने की अपील करते हुए लिखा, “हिमाचल में कथित हिंदू सनातनी कहलाने वाले जिनका शास्त्र ‘अहिंसा ही परम धर्म’ कहता है, वो हाथ में हथियार लेकर क्या कर रहे हैं?”

नेहा हबीब ने कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, “हिमाचल में हथियार लेकर जुलूस – मोहब्बत की दुकान वाला किधर है?”

गुलाम अब्दुल कादिर इलाहाबादी ने लिखा, “हिमाचल प्रदेश में शिमला में मस्जिद शहीद करने के लिए हथियार लेकर निकलना एक गंभीर और खतरनाक कदम है। क्या ये आतंकवाद की श्रेणी में नहीं आता? क्या कॉन्ग्रेस सरकार मुस्लिमों के नरसंहार का इंतजार कर रही है?”

हथियार लिए हिन्दुओं के वीडियो की सच्चाई

अब आपको बताते हैं कि इस वीडियो की सच्चाई क्या है। न ही ये हिन्दू किसी को मारने के लिए हथियार लेकर निकले हैं और न ही कोई ढाँचा तोड़ने के लिए। असल में ये राज्य के पारंपरिक त्योहार ‘जाग’ का है। आज भी पूरे श्रद्धाभाव ने इन परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। ये उत्सव है। मान्यता है कि मंदिर में भाद्रपद में देव-दानव युद्ध होता है। इस दौरान आग पर चल कर अग्निपरीक्षा भी दी जाती है। क्षेत्र के सुख-शांति को लेकर प्रार्थना की जाती है।

मंडी के मंदिर में पिछले 58 वर्षों ये इस त्योहार का भव्य आयोजन होता है। महाकाली मंदिर में जाग होम का विशेष उत्सव होता है। इसी तरह जुब्बल/रोहडू क्षेत्र (शिमला, हिमाचल प्रदेश) में सांस्कृतिक कार्यक्रम (मंदिरों में वार्षिक आयोजन – जाग) परंपरागत ढंग से हथियारों के संग नाटी डालने की परंपरा है। हिन्दुओं के शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक दिखा कर उन्हें बदनाम करने का प्रयास हो रहा है। जबकि वो हिन्दू ही हैं जो पुलिस का बल-प्रयोग भी सह रहे हैं, अवैध अतिक्रमण भी।