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‘तुम्हारी शादी नहीं होने दूँगा, मैं ही निकाह कर अपने पास रखूँगा’: दलित युवती का मुफ्ती इमरान पर आरोप, बोली- जिन्नात के जरिए बुलवाता और गंदी हरकत करता

उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक दलित युवती ने मुफ्ती इमरान पर ‘जिन्न’ के जरिए उसे झाड़-फूँक के लिए बुलाने और फिर गंदी हरकत करने का आरोप लगाया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने मुफ्ती को गिरफ्तार कर लिया है। युवती ने बताया कि मुफ्ती इमरान उससे कहता था कि वह उसकी शादी नहीं होने देगा। वह उससे निकाह करेगा और अपने साथ रखेगा।  

यह मामला हरदोई जिले के कोतवाली बेनीगंज इलाके में बेनीगंज कस्बा का है। यहाँ की 22 वर्षीय एक दलित युवती ने बताया कि वह बीमार रहती थी। इसलिए उसके माता-पिता कस्बे के मोहल्ला कृष्णानगर के रहने वाले मुफ्ती इमरान के पास नवंबर 2023 नवंबर में झाड़-फूँक कराने के लिए उसे ले गए थे। इसके बाद उसकी तबियत ठीक हो गई थी।

युवती का कहना है कि जब भी उसकी तबीयत खराब होती थी तो वह मुफ्ती इमरान के पास झाड़-फूँक करवाने जाती थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मुफ्ती इमरान उस पर गंदी नीयत रखता था। वह उसे ‘जिन्न’ के जरिए बुलाता था और फिर उसके साथ गलत काम करता था। मुफ्ती इमरान उसे धमकी देता था कि उसकी शादी नहीं होने देगा और वह खुद उससे निकाह करेगा।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वह ठीक होकर घर आ जाती मुफ्ती इमरान अपने जिन्नात भेजकर उसको फिर बीमार कर देता है। इसलिए उसको दोबारा से उसके पास जाकर झाड़-फूँक करवानी पड़ती है। घर पर युवती इमरान… इमरान… कहकर शोर मचाने लगती थी। जब परिजन उसे मुफ्ती इमरान के पास लेकर जाते थे तो वह ठीक हो जाती थी।

पीड़िता के पिता मेहनत मजदूरी करने का काम करता है। उसके पाँच बेटे और दो बेटियाँ हैं। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। परिजनों का कहना है कि उसकी छोटी बेटी पर ‘जिन्न का साया’ होने की आशंका हुई तो उसे गाँव के ही एक व्यक्ति से झाड़-फूँक करवाई, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार वह भुसौरी पुरवा निवासी मुफ्ती इमरान के पास झाड़-फूँक करवाने गए थे।

इस मामले में युवती ने पुलिस थाने में जाकर शिकायत की है। युवती की शिकायत के आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि युवती बीमार होने पर इमरान के पास जाती थी और इमरान उसके साथ तांत्रिक गतिविधियाँ करता था। वह युवती को बुलाकर उसे परेशान करता था। इसकी शिकायत पर इमरान ने युवती के साथ अभद्रता की।

कुख्यात नक्सली विनोद मिश्रा के खिलाफ NIA ने दायर की चार्जशीट, रिश्तेदार वामपंथी आतंकी प्रमोद मिश्रा के साथ मगध क्षेत्र में बैन CPI (माओवादी) को दोबारा कर रहा था खड़ा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) को मगध क्षेत्र में फिर से खड़ा करने के मामले में कुख्यात नक्सली विनोद मिश्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। एजेंसी ने शनिवार को बताया कि विनोद मिश्रा नक्सली संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और उत्तर क्षेत्र ब्यूरो प्रमुख प्रमोद मिश्रा उर्फ ​​सोहन दा उर्फ ​​बनवारी जी उर्फ ​​बीबी जी उर्फ ​​बाबा का करीबी और रिश्तेदार है।

बिनोद कुमार मिश्रा को भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत पूरक आरोपपत्र में नामित किया गया है। NIA ने अपने एक बयान में कहा कि उसकी जाँच से पता चला है कि आरोपित विनोद मिश्रा ने मगध क्षेत्र (बिहार के गया और औरंगाबाद क्षेत्र) में प्रतिबंधित संगठन को पुनर्जीवित और मजबूत करने की कोशिश की।

इसके अलावा, इसके लिए उसने अपनी नापाक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए अपने घर पर कई बैठकें भी आयोजित की थी। उसने नक्सल नेताओं और कैडरों को अपने घर में आश्रय दिया और उन्हें रसद आदि की सहायता भी प्रदान की थी। इसके अलावा, ये सभी भारत विरोधी विध्वंसक गतिविधियों में शामिल थे। विनोद मिश्रा गिरफ्तार प्रमोद मिश्रा का रिश्तेदार है।

एनआईए ने कहा, “जाँच से पता चला है कि गिरफ्तार आरोपित और अन्य संदिग्ध सीपीआई (माओवादी) की भारत विरोधी विचारधारा का प्रचार करने में लगे हुए थे और मगध क्षेत्र में संगठन को पुनर्जीवित करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कैडर की भर्ती और लेवी एकत्र करने की प्रक्रिया में भी थे। इसका उद्देश्य भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करना था।”

दरअसल, यह मामला (RC-26/2023/NIA) केस में प्रतिबंधित संगठन के दो शीर्ष नक्सली नेताओं- प्रमोद मिश्रा और अनिल यादव की गिरफ़्तारी से शुरू हुआ था। बिहार पुलिस ने 10 अगस्त 2023 को विनोद मिश्रा के घर से ही प्रमोद मिश्रा को गिरफ्तार किया था। उस वक्त विनोद मिश्रा फरार हो गया था। इस मामले में तब पुलिस ने टेकारी थाना में मामला दर्ज किया था।

इन नक्सली नेताओं की गिरफ़्तारी के समय उनके पास से विभिन्न नक्सली साहित्य, हस्तलिखित पत्र और सात मेमोरी कार्ड जब्त किए गए थे। जब्त किए गए मेमोरी कार्ड में नक्सली गतिविधियों से संबंधित विभिन्न तस्वीरें, पत्र, पत्राचार और साहित्य शामिल थे। इस मामले को एनआईए ने अक्टूबर 2023 में अपने हाथ में ली और प्रमोद मिश्रा समेत तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इन आरोपितों में प्रमोद मिश्रा और अनिल यादव उर्फ ​​अंकुश उर्फ ​​लवकुश के साथ विनोद मिश्रा भी शामिल था। फरवरी 2024 में एजेंसी ने प्रमोद मिश्रा और सीपीआई (माओवादी) के सब-जोनल कमिटी सदस्य अनिल यादव के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। अब तक गिरफ्तारी से बच रहे विनोद मिश्रा को 20 मार्च 2024 को झारखंड के धनबाद से गिरफ्तार किया गया था।

इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा से तंग आए बांग्लादेशी हिंदू, ढाका सहित कई शहरों के हाईवे किए जाम: लगा रहे न्याय और सुरक्षा की गुहार

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे वहाँ के हिंदू समुदाय में असुरक्षा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस हिंसा और अन्याय के खिलाफ बांग्लादेश में हिंदू समुदाय ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। वे अपने घरों, मंदिरों और परिवारों पर हो रहे हमलों से परेशान हैं और इस हिंसा के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

हिंदू समुदाय का कहना है कि उनकी धार्मिक पहचान और आजीविका को इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। इस हिंसा और उत्पीड़न के चलते विरोध प्रदर्शन बढ़ गए हैं, और हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय न्याय और सुरक्षा की माँग कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को हिंदू समुदाय के सदस्य सड़कों पर उतरे और बांग्लादेश की राजधानी ढाका के शाहबाग चौराहे पर धरना दिया। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन सनातनी अधिकार आंदोलन और बांग्लादेश हिंदू जागरण मंच जैसे हिंदू संगठनों के सहयोग से किया गया था। विरोधियों ने बांग्लादेश सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को हल करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।

धरना लगभग 4:30 बजे शुरू हुआ और इस दौरान उन्होंने यातायात को बाधित कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आठ मुख्य माँगें रखीं, जिनमें अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कानून बनाना, मुआवजा और पुनर्वास, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और दुर्गा पूजा के लिए 5 दिन की छुट्टी की माँगें शामिल थीं।

इसके साथ ही, चटगाँव शहर के जमाल खान चौराहे पर भी हिंदू संगठनों ने रैली आयोजित की और अपनी माँगों को जोरदार तरीके से उठाया।

आठ प्रमुख माँगें:

  1. अल्पसंख्यकों पर हमलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और ट्रिब्यूनल का गठन।
  2. सांप्रदायिक हिंसा के शिकार लोगों का मुआवजा और पुनर्वास।
  3. अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून का निर्माण।
  4. अल्पसंख्यक मामलों के लिए एक मंत्रालय की स्थापना।
  5. हिंदू धर्म कल्याण ट्रस्ट को हिंदू फाउंडेशन में बदलना।
  6. बौद्ध और ईसाई धर्म कल्याण ट्रस्टों को भी फाउंडेशन में बदलना।
  7. संपत्ति के कानून को सख्ती से लागू करना और संपत्ति के संरक्षण के लिए कानून बनाना।
  8. दुर्गा पूजा के लिए 5 दिन की छुट्टी देना।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले 53 वर्षों में किसी भी सरकार ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हुए अत्याचारों को ठीक से नहीं संभाला है। इसके कारण अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं है और वे बार-बार इस तरह के हमलों को अंजाम देते रहते हैं। बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से हिंदू समुदाय पर हमले और बढ़ गए हैं।

कई रिपोर्टों के अनुसार, 5 अगस्त को शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की संख्या में तेज़ी आई है। इससे हिंदुओं के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा और उत्पीड़न की एक नई लहर आई है, जिसे कुछ विश्लेषक “नरसंहार” की संज्ञा दे रहे हैं।

मोहम्मद यूनुस का विवादित बयान

एक तरफ हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हिंदू समुदाय पर हो रही हिंसा को “बढ़ाचढ़ाकर पेश किया गया” बताया। उन्होंने कहा कि यह हिंसा केवल सांप्रदायिक नहीं बल्कि राजनीतिक थी। उनके अनुसार, “हिंदू विरोधी हिंसा को बड़ा दिखाया जा रहा है और इसे राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”

बांग्लादेश में हिंदुओं पर होते रहे हैं हमले

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा कोई नई बात नहीं है। पिछले कई दशकों से यह समुदाय लगातार उत्पीड़न और हिंसा का सामना कर रहा है। 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद, यह हिंसा और अधिक बढ़ गई है। हिंदू समुदाय के लोग अब अपनी आवाज़ उठा रहे हैं और सरकार से अपनी सुरक्षा और अधिकारों की माँग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी हिंदू संगठन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह हिंसा धार्मिक आधार पर की जा रही है और इसे समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब बांग्लादेश के 49 जिलों में हिंदू समुदाय के घरों, मंदिरों और व्यवसायों पर हमले शुरू हुए। प्रथम आलोक की रिपोर्ट के अनुसार, 5 अगस्त से 20 अगस्त तक हिंदू समुदाय पर कुल 1,068 हमले किए गए। ये वो दिन था, जब शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी और उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उसके बाद से हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं।

राम मंदिर को उड़ाने और CM योगी की हत्या की धमकी: बिहार के भागलपुर से मकसूद अंसारी गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी से था संपर्क

अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार के भागलपुर से मोहम्मद मकसूद को गिरफ्तार किया है। मकसूद ने इस साल 14 जून को राम मंदिर को उड़ाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके पुलिस ने बड़ी खंजरपुर में छापेमारी करके उसे गिरफ्तार कर लिया और कागजी प्रक्रिया पूरी करके उसे यूपी ले आई।

जिस समय पुलिस ने मोहम्मद मकसूद अंसारी को गिरफ्तार किया, उस समय वह अपने बहन के ससुराल से आ रहा था। इसी दौरान उसका मोबाइल नम्बर ट्रेस करके पुलिस ने उसे भागलपुर के गुरहट्टा चौक से दबोच लिया। वहीं, कुछ रिपोर्ट में उसकी गिरफ्तारी भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र के बड़ी खंजरपुर स्थित मस्जिद गली स्थित उसके घर से गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है।

पिछले कुछ दिनों से पुलिस उसके घर पर पहुँचकर उसकी माँ से पूछताछ कर रही थी। हालाँकि, उसका सुराग नहीं मिल पा रहा था। मोहम्मद मकसूद के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ से भी जुड़े होने की बात सामने आ रही है। पुलिस ने उसके पास से चार मोबाइल फोन बरामद किया है। इनमें से एक मोबाइल वह भी है, जिसके फेसबुक से धमकी दी गई थी।

यह बात भी सामने आई है कि मकसूद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आमिर के संपर्क में था। उसका देश विरोधी पोस्ट भी मकसूद शेयर किया करता था। इतना ही नहीं, साइबर ठगी में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है। संगठन के नाम पर भी लाखों रुपए इकट्ठा करने और नए लड़कों की संगठन में भर्ती को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारी मिली है। बरामद मोबाइल से आमिर से जुड़ी जानकारी भी मिली है।

मकसूद की अम्मी का कहना है कि वह कैंसर की मरीज है और उसका बेटा उसकी देखभाल करता था। उसने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उसकी अम्मी का कहना है कि उसके बेटे का फोन कुछ दिन उसके साला के पास था। उसके साले ने उस फोन से क्या किया, क्या नहीं किया, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। फिलहाल पुलिस उसके संभावित साथियों की भी तलाश कर रही है।

उसकी अम्मी ने यह भी कहा कि मकसूद अंसारी अपनी नौकरी के लिए फोन पर बातें किया करता था। उसने नौकरी के लिए चंडीगढ़ में आवेदन भी दिया था। वहाँ से उसका वीजा बनाने की बात हो रही थी। वीजा बन जाने के बाद वह विदेश जाने वाला था। उसकी अम्मी का कहना है कि मकसूद के विदेश जाने से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि हुसैनाबाद के सकरुल्ला चक में रहने वाले 26 साल के मोहम्मद मकसूद अंसारी के साला अमन का मोबाइल खराब हो गया था। उसने बताया कि अमन ने इस दौरान उसके मोबाइल से क्या किया उसे इसकी जानकारी नहीं है। पुलिस इस मामले में उसके साले अमन की संलिप्ता की भी जाँच कर रही है।

बता दें कि इस साल 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का उद्घाटन हुआ था। इसके बाद 14 जून 2024 को राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दी गयी थी। इसके साथ ही सीएम योगी को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी भरे मैसेज मिलने के बाद यूपी पुलिस सहित देश की सुरक्षा एजेंसी अलर्ट हो गई थीं। इस धमकी में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आया था।

ऑडियो मैसेज सामने आने के बाद अयोध्या के राम जन्मभूमि थाना में केस दर्ज किया गया था। यूपी पुलिस को उस मोबाइल के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि यह मोबाइल किसी मकसूद अंसारी नाम के शख्स का है और वह बिहार के भागलपुर जिले का रहने वाला है। फिलहाल इस मामले में पुलिस खुलकर कुछ भी बताने से परहेज कर रही है।

अवैध इबादतगाह नहीं बर्दाश्त, अतिक्रमण हटाओ: हिमाचल प्रदेश में शिमला से कुल्लू तक हिंदुओं का प्रदर्शन, सड़क पर किया हनुमान चालीसा पाठ

हिमाचल प्रदेश के संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। शिमला में हिन्दुओं के प्रदर्शन के बाद अब इसी राज्य के कुल्लु में भी धरना दिया गया है। इस दौरान सड़क पर हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को इस विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी पूरी मस्जिद को ही अतिक्रमण बतापर इस पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इसी के साथ इस मस्जिद के खिलाफ सुन्नी, पाँवटा साहिब, हमीरपुर और बिलासपुर में भी प्रदर्शन हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार की सुबह ही कुल्लू में हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य सड़क पर उत्तर आए। उन्होंने शिमला में प्रदर्शनकारी हिन्दुओं के साथ अपनी एकजुटता दिखाई। प्रदर्शनकारी हिन्दुओं का आरोप है कि संजौली की पूरी मस्जिद ही अतिक्रमण कर के बनाई गई है। उन्होंने माँग की है कि पूरी मस्जिद को ही हटाया जाए। धरने की सूचना पर फ़ौरन ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुँचा।

इस बीच हिन्दू संगठन के लोग हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। हालाँकि अंत में धरना बिना किसी विवाद के शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने इस प्रदर्शन की एक वीडियो भी अपने X हैंडल पर शेयर की है। उन्होंने दावा है कि न सिर्फ शिमला और कुल्लू बल्कि सुन्नी, बिलासपुर, हमीरपुर और पांवटा साहिब में भी अवैध मस्जिदों के विरुद्ध हिन्दू प्रदर्शन कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश की अवैध इबादतगाहों के खिलाफ सामूहिक एकजुटता दिखाते हुए व्यापारी वर्ग ने भी इन प्रदर्शनकारियों के पक्ष में आवाज उठाई है। प्रदेश के कई हिस्सों में सांकेतिक रूप से बाजारों को 3 घंटों के लिए बंद रखा गया। इस बंद का सबसे ज्यादा असर सुन्नी कस्बे में देखने को मिला है। यहाँ बाजार पूरी तरह से बंद हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस और वहाँ के मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

चूमा, दुलराया, गोद में उठाया… PM आवास में ‘दीपज्योति’ का स्वागत देख लोग हुए गदगद, बोले- कोई ऐसे ही नरेंद्र मोदी नहीं बन जाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास में नए सदस्य का स्वागत हुआ है। ये मेहमान कोई और नहीं बल्कि एक बछिया है जिसका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘दीपज्योति’रखा है। प्रधानमंत्री ने इसकी एक वीडियो साझा की है और उसमें उस बछिया को दुलराते हुए भी दिखे।

वीडियो को शेयर करते गुए उन्होंने लिखा, “हमारे शास्त्रों में कहा गया है – गाव: सर्वसुख प्रदा:’। लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास परिवार में एक नए सदस्य का शुभ आगमन हुआ है। प्रधानमंत्री आवास में प्रिय गौ माता ने एक नव वत्सा को जन्म दिया है, जिसके मस्तक पर ज्योति का चिह्न है। इसलिए, मैंने इसका नाम ‘दीपज्योति’ रखा है।”

वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस बछिया को चूमते हुए, उसे सहलाते हुए, उसे गोद में बैठाकर बाग में घूमते हुए दिखे। उन्होंने मंदिर के सामने उसे फूल पहनाकर उसका स्वागत किया और मस्तक पर बने ज्योति चिह्न पर हाथ घुमाया।

उनकी वीडियो देखने के बाद नेटीजन्स इसपर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कहा जा रहा है- एक ही दिल है पीएम मोदी उसे कितनी बार जीतेंगे। कोई उन्हें हिंदू हृदय सम्राट कह रहा है तो कोई सच्चा सनातनी।

दूसरी पार्टियों के नेताओं से तुलना करते हुए कहा जा रहा है कि ऐसे ही कोई नरेंद्र मोदी नहीं बन जाता।

एक यूजर ने कहा, “गौ माता द्वारा जन्मे ‘दीपज्योति’ नव वत्सा का स्वागत कर, आप एक बार फिर भारतीय संस्कृति और परंपरा की गहराई को प्रकट कर रहे हैं। यह कदम हमारे सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।”

एक ने लिखा, वीआईपी लोग अपने घरों में कुत्ते को रखना अपनी शान समझते थे अब ये नया भारत है अब गाय माता को रखना अपनी शान समझते हैं।

बेल पर रिहा हुए CM केजरीवाल पत्नी संग पहुँचे हनुमान मंदिर: पटाखे फोड़कर जश्न मनाने वाले समर्थकों पर केस दर्ज, कोर्ट ने कहा था- गिरफ्तारी बिलकुल जायज थी

दिल्ली के शराब घोटाले में जमानत पर तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पहुँचे और पूजा-अर्चना की। उनके साथ पत्नी सुनीता केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह भी थे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रिहाई का जश्न भी मनाया।

मंदिर पहुँचकर सुनीता केजरीवाल ने भगवान हनुमान को जल चढ़ाया। इसके बाद अरविंद केजरीवाल राजघाट जाकर महात्मा गाँधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि शराब नीति केस में जमानत मिलने के बाद मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने भी इसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की पूजा की थी। अंतरिम जमानत के बाद 2 जून को सरेंडर करने से पहले भी केजरीवाल ने यहाँ दर्शन किए थे।

जेल से बाहर आने पर केजरीवाल ने 13 सितंबर को कहा था, “आज मैं जेल से बाहर आ गया हूँ। मेरे हौसले 100 गुना ज्यादा बढ़ गए हैं। मैं सच्चा था… मैं सही था, इसलिए भगवान ने मेरा साथ दिया। ऊपर वाले ने मुझे रास्ता दिखाया। ऐसे ही भगवान रास्ता दिखाता रहे। ये राष्ट्र विरोधी ताकतें, जो देश को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं, मैं इनके खिलाफ ऐसे ही लडूँ।”

बुधवार (11 सितंबर 2024) को अरविंद केजरीवाल के 177 दिन बाद जेल से बाहर आने पर तिहाड़ के बाहर AAP कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की थी। इसको लेकर दिल्ली के सिविल लाइंस थाने में अज्ञात के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है। दरअसल, दिल्ली में प्रदूषण के चलते 1 जनवरी 2025 तक पटाखे जलाने पर बैन है।

केजरीवाल के बाहर आने पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ऐसे जश्न मनाया, जैसे उन्हें शराब घोटाले से बरी कर दिया गया हो। अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में आरोपमुक्त नहीं हुए हैं, बल्कि जमानत पर बाहर आए हैं। ये बात AAP कार्यकर्ता नहीं समझ पा रहे हैं। उन्हें जमानत पर कुछ निश्चित शर्तों के साथ दी गई है।

इन शर्तों के तहत केजरीवाल दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं करना है। ना ही इस केस को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करनी है। उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली सचिवालय में जाने की भी अनुमति नहीं दी गई है। इसके साथ ही वे वह सरकारी फाइलों पर दस्तखत भी नहीं करेंगे।

अरविंद केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट के सामने हर सुनवाई पर मौजूद होना होगा, जब तक कि उन्हें पेशी से छूट न मिले। इसके अलावा, उन्हें जमानत पर बाहर रहने के दौरान केस से जुड़े गवाहों से संपर्क नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई है। अरविंद केजरीवाल को 10-10 लाख रुपए के दो मुचलके भरने पर जमानत मिली है।

जमानत की याचिका पर सुनवाई करते समय भी जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी कानून सम्मत थी। इसमें कोई प्रक्रियागत अनियमितता नहीं हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई ने गिरफ्तारी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के निर्देशों का पालन किया था।

‘काम पर लौट जाइए, कार्रवाई नहीं करूँगी’ : कोलकाता में धरने पर बैठे डॉक्टरों से CM ममता बनर्जी अचानक मिलने पहुँचीं, प्रदर्शनकारियों ने की नारेबाजी

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब एक महीने से जारी हड़ताल के बीच शनिवार (14 सितंबर 2024) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डॉक्टरों के धरना स्थल पर अचानक पहुँचीं और डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की भावुक अपील की। बता दें कि यह मामला तब शुरू हुआ जब अस्पताल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की रेप कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सीबीआई जाँच चल रही है और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हो रही है।

ममता बनर्जी की भावुक अपील

कोलकाता में डॉक्टरों के धरना स्थल पर पहुँचने के बाद ममता बनर्जी ने डॉक्टरों से काम पर लौटने की भावुक अपील की। जैसे ही ममता वहाँ पहुँचीं, नाराज डॉक्टरों ने नारेबाजी शुरू कर दी, लेकिन ममता ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “कल पूरी रात बारिश हो रही थी, आप लोग सो नहीं पाए, यह देखकर मुझे भी कष्ट हुआ। मैं आपसे अपील करने आई हूँ कि अब इस कष्ट को और न सहें।”

ममता ने आगे कहा, “मैं आपके डिमांड पर विचार करूँगी और चर्चा करूंगी। दोषियों को सजा जरूर मिलेगी। मैंने सीबीआई से अनुरोध किया है कि तीन महीने में दोषी को सजा मिले।” ममता ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा और अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सही करने का काम जल्द शुरू किया जाएगा।

डॉक्टरों की हड़ताल के बीच ममता बनर्जी ने उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मैं यूपी पुलिस नहीं हूँ, मैं कोई कार्रवाई नहीं करूँगी। हमें आप लोगों की जरूरत है। पेशेंट्स की मौत हो रही है, इसलिए आप काम पर लौटें। मैं कोई अंतिम चेतावनी नहीं दे रही, बल्कि अंतिम प्रयास कर रही हूँ।” ममता ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि वे सिविक वालंटियर्स, जो अस्पताल की रोगी कल्याण समितियों का हिस्सा हैं, को हटा रही हैं। उन्होंने कहा, “जो भी दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी, चाहे वह मेरा दोस्त हो या दुश्मन।”

हड़ताल की शुरुआत और डॉक्टरों पर हमला

यह घटना तब शुरू हुई जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ रेप और हत्या का मामला सामने आया। अस्पताल के डॉक्टर न्याय की माँग कर रहे हैं और तभी से हड़ताल पर बैठे हैं। इस घटना के बाद अस्पताल में तनाव और बढ़ गया और डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई के हाथों सौंपा गया और अब सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि डॉक्टरों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़े, खासकर जब यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है।

ममता ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई से पहले यहाँ आई हूँ, ताकि आपको किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। मैं चाहती हूँ कि आप लोग काम पर लौटें और मैं आपकी सभी माँगों पर विचार करूँगी।”

डॉक्टरों की हड़ताल और ममता बनर्जी के धरना स्थल पर पहुँचने से यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर सख्ती से कार्रवाई करेंगी और दोषियों को सजा दिलवाएँगी। लेकिन, इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं और टीएमसी का दावा है कि यह पूरी घटना ममता सरकार को बदनाम करने की एक साजिश हो सकती है।

₹42 करोड़ में बना हाटकेश्वर ब्रिज, ₹52 करोड़ तोड़ने में लगे? : ‘गुजरात मॉडल’ का मजाक उड़ाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बोला झूठ, गृह राज्यमंत्री ने सच्चाई बताई

अहमदाबाद का हाटकेश्वर ब्रिज एक बार फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। इस पुल को लेकर हाल ही में मीडिया चैनलों और कॉन्ग्रेस पार्टी ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स में इस ब्रिज को बनाने में 42 करोड़ रुपये का खर्च आया था, और अब इसे तोड़ने में 52 करोड़ रुपये की लागत बताई जा रही है। कॉन्ग्रेस ने इसे ‘गुजरात मॉडल’ की विफलता के तौर पर पेश किया, लेकिन सच्चाई कुछ और है।

कॉन्ग्रेस का आरोप और मीडिया रिपोर्ट

न्यूज़ चैनल ‘आजतक’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अहमदाबाद के हाटकेश्वर ब्रिज को बनाने में 42 करोड़ रुपये का खर्च आया था, लेकिन अब इसे गिराने में 52 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। कॉन्ग्रेस ने इसे सोशल मीडिया पर उठाया और एक इन्फोग्राफिक जारी कर ‘गुजरात मॉडल’ पर तंज कसा। कॉन्ग्रेस ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार और गुजरात सरकार की विफलता के रूप में प्रस्तुत किया।

कॉन्ग्रेस के इस आरोप के बाद, वामपंथी पारिस्थितिकी तंत्र और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई सवाल उठाए गए।

गृह राज्य मंत्री ने किया ‘फैक्ट चेक’

कॉन्ग्रेस और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद, गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और तथ्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का दावा भ्रामक है। सांघवी ने स्पष्ट किया कि 52 करोड़ रुपये सिर्फ पुल को तोड़ने की नहीं, बल्कि इसे तोड़कर फिर से बनाने की कुल लागत है। उन्होंने आगे बताया कि पुराने पुल को बनाने वाले ठेकेदार से इस खर्च की वसूली की जाएगी।

सांघवी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, “झूठा गिरोह कॉन्ग्रेस दावा कर रही है कि वह अहमदाबाद में हाटकेश्वर ब्रिज को तोड़ने के लिए ₹52 करोड़ खर्च करने जा रही है। यह भ्रामक है।” उन्होंने आगे कहा, “तथ्य यह है कि पुराने पुल को ध्वस्त करने और नए पुल के निर्माण की कुल लागत ₹52 करोड़ है।”

गृह राज्य मंत्री ने मीडिया चैनल ‘आजतक’ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाने से पहले तथ्यों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “एक जिम्मेदार और अग्रणी समाचार चैनल के रूप में, आपको प्रकाशन से पहले तथ्यों की जाँच करनी चाहिए।”

सांघवी ने बताया कि इस 52 करोड़ की लागत में नया पुल बनाने का खर्च भी शामिल है, न कि सिर्फ तोड़ने का खर्च। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुल के निर्माण में आने वाली लागत पुराने ठेकेदार से वसूल की जाएगी, जिससे सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

अहमदाबाद के खोखरा इलाके में स्थित इस हाटकेश्वर ब्रिज का निर्माण 2017 में किया गया था और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला गया था। हालाँकि, केवल पाँच साल बाद, वर्ष 2022 में पुल में संरचनात्मक खामियाँ पाई गईं, जिससे इसे बंद कर दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया कि पुल को पूरी तरह से गिराकर नए सिरे से बनाया जाना चाहिए।

मार्च 2024 में अहमदाबाद मिरर ने रिपोर्ट दी थी कि अहमदाबाद नगर निगम ने पुल को ध्वस्त करने और उसके स्थान पर एक नया चार-लेन पुल बनाने के लिए निविदा जारी की है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 51.70 करोड़ रुपये बताई गई थी।

पुल को दोबारा बनाने की योजना

गौरतलब है कि इस 52 करोड़ रुपये की लागत में सिर्फ पुल को गिराने का खर्च नहीं है, बल्कि इसे दोबारा बनाने का खर्च भी शामिल है। अहमदाबाद नगर निगम ने इसके लिए एक निविदा जारी की है, जिसमें पुल को गिराकर नए सिरे से एक चार-लेन पुल का निर्माण किया जाएगा। इससे यह साफ हो जाता है कि कॉन्ग्रेस और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा जो दावे किए जा रहे थे, वे तथ्यात्मक रूप से गलत थे। पुल की कुल लागत में निर्माण और विध्वंस दोनों शामिल हैं, और यह खर्च जनता के करों पर नहीं बल्कि पुराने ठेकेदार से वसूला जाएगा।

अहमदाबाद के हाटकेश्वर ब्रिज का मुद्दा भले ही राजनीतिक हो गया हो, लेकिन तथ्य यह है कि 52 करोड़ रुपये की लागत केवल पुल को गिराने पर खर्च नहीं की जा रही है। इसमें नए पुल का निर्माण भी शामिल है, और यह रकम ठेकेदार से वसूली जाएगी। इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस और विपक्ष ने इसे ‘गुजरात मॉडल’ की विफलता के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन सरकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से साफ है कि कॉन्ग्रेस का दावा पूरी तरह से गलत है।

यह समाचार मूल रूप से गुजराती भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘विपक्षी आए तो दोबारा लाएँगे अनुच्छेद 370’ : जम्मू-कश्मीर चुनाव से पहले डोडा में PM मोदी ने किया आगाह, जनता से बोले- महाराजा हरि सिंह के अपमान मत भूलिए

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 सितंबर 2024) को डोडा में एक जनसभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद के दमन के लिए भाजपा को प्रतिबद्ध बताया। PM मोदी ने विपक्षी दलों पर न सिर्फ आतंकवाद, बल्कि अलगाववाद को भी बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। इस दौरान उन्होंने धारा 370 को हटाना अपनी सरकार बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।

अपने चुनावी प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डोडा में उमड़ी भीड़ को देखकर काफी उत्साहित थे। उन्होंने सभा में लोगों की उपस्थिति को उन्होंने जनता का भाजपा के लिए आशीर्वाद बताया है। भाजपा द्वारा कश्मीर में अभूतपूर्व विकास करने का दावा करते हुए PM मोदी ने कहा कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर के कई हिस्से पूरे देश से रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएँगे। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर के कई गाँवों तक नल का जल और बिजली आदि पहुँच जाएगा।

धारा 370 की याद दिलाते हुए PM मोदी ने कहा कि इसकी वजह से राज्य में आतंकवाद का बोलबाला हुआ करता था। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी, हड़ताल और तमाम चरमपंथी हरकतों को कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बढ़ावा दिया। हिन्दू समाज की जातियों को मिलने वाले आरक्षण को भी हड़प लिया जाता था। PM मोदी ने लोगों से पूछा कि क्या वो फिर से पुराने आतंकवाद का दौर लाना चाहते हैं? इस पर जनसमूह ने एक स्वर में ‘नहीं’ का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि राज्य में जमीन कब्जा करने वाले गिरोहों को बढ़ावा दिया गया। छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए यहाँ के लोगों को तरसाया गया। सरकारी नौकरियों में सिर्फ उन्हीं लोगों की भर्तीय की गई, जो कॉन्ग्रेस, NC और महबूबा मुफ्ती के तीन खानदानों को दी गई। इन लोगों ने आतंकवाद को पाला-पासा ताकि उनकी अरबों-खरबों की संपत्ति बरकरार रखें। पीएम ने कहा कि विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को वापस लाना चाहते हैं।

PM मोदी ने कॉन्ग्रेस को सबसे बेईमान पार्टी और गाँधी परिवार को शाही खानदान बताते हुए सबसे भ्रष्ट परिवार बताया। नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिमाचल प्रदेश को बर्बाद कर दिया। उन्होंने लोगों को कॉन्ग्रेस से सतर्क रहने के लिए कहा। पीएम ने कहा कि ये लोग जम्मू-कश्मीर को भी सत्ता में आए तो बर्बाद कर देंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह एवं अन्य राजाओं को लेकर कैसी-कैसी टिप्पणियाँ की हैं, वो भी आपने सुनी है। ये सिर्फ महाराजा का नहीं, बल्कि डोगरा (क्षत्रियों) का अपमान है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग ये अपमान कभी भूला नहीं सकेंगे और चुनवों में इसका बदला जरूर लेंगे।

पीएम मोदी ने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा प्रदेश का चहुँमुखी विकास करेगी। उन्होंने राहुल गाँधी को को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि कई लोग ऐसे भी हैं, जो नफरत की दुकान के आगे मोहब्बत का बोर्ड लगा कर घूम रहे हैं। अमेरिका में हुई भारतीय पत्रकार की पिटाई का भी जिक्र मोदी ने अपने सम्बोधन में किया है।