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500 लोगों की हत्या, महिलाओं की पिटाई-दी मौत… सारे मुस्लिम, फिर भी ‘भारत के मुस्लिमों’ पर चुदुर-बुदुर कर रहा ईरान का कठमुल्ला, विदेश मंत्रालय ने कर दिया शांत

ईरान के सुप्रीम लीडर और शियाओं के बड़े धर्मगुरु अयातोल्लाह अल खामनेई ने भारत में मुस्लिम पीड़ित वाले प्रोपेगेंडा को हवा देने की कोशिश की है। खामनेई ने एक ट्वीट में म्यांमार और गाजा की तरह भारत में मुस्लिमों के शोषित होने का दावा किया। खामनेई के इस बयान का भारत ने जवाब देते हुए कहा है कि उन्हें पहले अपने घर में झाँकना चाहिए।

सोमवार (16 सितम्बर, 2024) को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अल खामनेई ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “इस्लाम के दुश्मनों ने हमेशा हमारी इस्लामी उम्माह वाली इकट्ठा पहचान को निशाना बनाने का प्रयास किया है। अगर हम म्यांमार,गाजा,भारत या किसी और जगह पर मुस्लिम को होने वाले दर्द से अनजान हैं, तो हम खुद को मुसलमान नहीं कह सकते।”

ईरान के सुप्रीम लीडर के इस बयान पर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है। भारत में सोशल मीडिया पर भी ईरान के सुप्रीम के इस बयान की आलोचना की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी खामनेई के इस बयान पर अपना रुख साफ़ कर दिया और ईरान के अल्पसंख्यकों के प्रति खराब रिकॉर्ड पर भी प्रकाश डाला।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “हम ईरान के सुप्रीम लीडर द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हैं। ये फर्जी सूचना पर आधारित हैं और स्वीकार्य नहीं हैं। भारत के अल्पसंख्यकों पर टिप्पणी करने वाले देशों को सलाह है कि वे दूसरों के बारे में कोई भी बात करने से पहले अपना रिकॉर्ड देखें।”

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब ईरान ने भारत में मुस्लिम पीड़ित होने वाला प्रोपेगेंडा चलाया हो। आयतोल्लाह अल खामनेई ने इससे पहले 2020 में CAA विरोधी दंगों के समय भी भारत में मुस्लिम पीड़ित वाला नैरेटिव चलाने की कोशिश की थी। उन्होंने इस दौरान भारत में हिन्दुओं के अतिवादी होने का आरोप लगाया था।

ईरान खामनेई भारत मुस्लिम

जहाँ एक ओर ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर चिंता कर रहे हैं जो किसी भी इस्लामी देश से अच्छी है, वहीं उनके ही देश का अल्पसंख्यकों और महिलाओं के प्रति रिकॉर्ड विश्व में सबसे निचले स्तर का रहा है। भारत में मुस्लिमों पर रोने पीटने वाले वाले ईरान ने वर्ष 2023 में कम से कम 22 औरतों को मौत की सजा दी थी।

इन औरतों को मौत की सजा इसलिए दी गई थी क्योंकि यह आयतोल्लाह के दकियानूसी इस्लामी विचारों को नहीं मानती थीं। जिन महिलाओं को मौत की सजा दी गई उनमें से अधिकांश का दोष यह था कि उन्होंने हिजाब पहनने से इनकार कर दिया था जिसे आयतोल्लाह के इस्लामी राज की नाफ़रमानी माना गया था।

ईरान की लड़की महसा अमीनी का मामला पूरी दुनिया में चर्चित रहा था। महसा अमीनी एक 22 वर्ष की युवती थी जिसे ईरान की पुलिस ने हिजाब का विरोध करने के लिए हिरासत में लिया था। सितम्बर, 2022 में पुलिस की ही हिरासत में महसा अमीनी की मौत हो गई थी। आरोप है कि पुलिस ने महसा अमीनी को यातनाएँ दी जिसके कारण उनकी मौत हुई।

अमीनी की मौत के बाद ईरान में बड़े स्तर पर प्रदर्शन चालू हो गए थे और खामनेई की इस्लामी सत्ता को चुनौती मिलने लगी थी। ईरान की सरकार ने इन विरोध प्रदर्शन को बेरहम तरीके से दबा दिया था। ईरान की सरकार ने इसके लिए सारे हथकंडे अपनाए थे। लगभग 500 लोगों को मार दिया गया था।

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ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में सरदार पटेल को किया अपमानित, महापुरुषों का अपमान: हिन्दू संगठनों ने की कार्रवाई की माँग

उत्तर प्रदेश के बरेली में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अपमान किया गया है। यहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सरदार पटेल की प्रतिमा को जूतों की माला पहना दी है। यह करतूत करने वालों की तादाद 8 से 9 लोगों की बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना बरेली जिले के थानाक्षेत्र नवाबगंज की है। सोमवार (16 सितंबर 2024) को यहाँ हिन्दू जागरण मंच के हरिपाल सिंह ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में हरिपाल सिंह ने बताया कि सोमवार की सुबह 10:30 से 11:30 के बीच नवाबगंज बाजार से ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस निकला था। इस जुलूस में सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल हुए थे। जुलूस के रूट में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पड़ती है। आरोप है कि जुलूस की शक्ल में चल रही मुस्लिमों की भीड़ में से 8-9 अज्ञात लोग सरदार पटेल की प्रतिमा पर पहुँच गए।

इन सभी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को जूतों की माला पहनाई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

शिकायतकर्ता ने यह हरकत जानबूझकर देश के महापुरुषों को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। इस हरकत की वजह से सर्व समाज में गुस्सा भी बताया गया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी नवाबगंज को जरूरी दिशा निर्देश भी दे दिए गए हैं।

राजस्थान में पहले से तय था जुलूस का रूट, फिर भी अलग मुड़ गई इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़; पुलिस के रोकने पर नोकझोंक-नारेबाजी, लेकिन नहीं चल पाई मनमानी

राजस्थान के बाराँ जिले में बारावफात के मौके पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने बवाल किया है। यहाँ तय रुट से अलग जाने की जिद पर आमादा भीड़ पुलिस से ही भिड़ गई। मुस्लिम भीड़ अचानक ही तय रुट से अलग जाने लगी जिसका पुलिस ने विरोध किया। पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की की गई। भीड़ में कुछ लोगों ने नारेबाजी की। फ़िलहाल पुलिस ने काफी मशक्क्त कर हंगामे को शाँत किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला बाराँ जिले के प्रताप चौक का है। यहाँ सोमवार (16 सितंबर 2024) को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस निकाला था। जुलूस में इस्लामी झंडों के साथ सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल थे। पुलिस और प्रशासन ने पिछले लम्बे समय से इन जुलूस की तैयारियाँ मुकम्मल की थीं। सभी वर्गों से बात कर के एक रुट तय किया गया था। साथ ही एक नियमावली भी बनाई गई थी, जिसका पालन सबके लिए अनिवार्य किया गया था।

बताया जा रहा है कि दोपहर में यह जुलूस तय रुट से होता हुआ प्रताप चौक पर पहुँचा। तभी इसमें मौजूद कुछ लोगों ने अपना रास्ता बदल कर तय मार्ग से अलग चलना शुरू कर दिया। रुट में बदलाव की कोशिश होती देख कर पुलिस ने उन लोगों को आगे जाने से रोक दिया। इस बात पर रास्ता बदलने पर आमादा लोग भड़क गए। उन्होंने बीच सड़क पर ही हंगामा करना शुरू कर दिया। नारेबाजी के साथ आसपास मौजूद बाकी लोगों को भी भड़काने की कोशिश की गई।

हालाँकि इस हंगामे के बावजूद पुलिस ने तय रुट में किसी भी प्रकार से बदलाव से साफ़ इंकार कर दिया। आखिरकार मौके पर पुलिस के सीनियर अधिकारी पहुँचे। उन्होंने लोगों को नियमों का हवाला देते हुए समझाया। काफी देर की आपाधापी के बाद ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस उसी राह से आगे बढ़ा, जो पहले से ही तय था। पुलिस के मुताबिक बल प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ी। जिले के पुलिस अधीक्षक ने लोगों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।

जिबरान ने नाबालिग हिन्दू लड़की को दोस्तों के साथ मिल कर घर से उठाया, 4 दिन बाद भी सुराग नहीं: धमकी के बाद परिवार ने छोड़ा घर

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अचलगंज थाना क्षेत्र के एक गाँव से एक 16 वर्षीय नाबालिग हिंदू किशोरी का अपहरण कर लिया गया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक जिबरान ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी बेटी को जबरन घर से उठा लिया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने धमकी दी कि अगर गाँव में दिखाई दिए, तो पूरे परिवार को गोली मार देंगे।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर की रात को आरोपित जिबरान अपने दर्जन भर साथियों के साथ पीड़िता के घर पहुँचा। उन्होंने परिवार पर दबाव बनाकर उनकी बेटी को जबरदस्ती उठा लिया। पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपित जिबरान ने धमकी दी कि अगर उन्होंने पुलिस से शिकायत की या गाँव में दिखे, तो उनके पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। इस घटना के बाद परिवार ने डर के कारण घर छोड़ दिया और कहीं और जाकर शरण ली।

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने जबरन उन्हें एक सादे कागज पर अँगूठा लगाने के लिए मजबूर किया। आरोपितों ने दावा किया कि उनकी बेटी 20 साल की है, जबकि वह महज 16 साल की है। इसके बाद, पीड़िता के माता-पिता ने अपने बेटे को दिल्ली में इसकी सूचना दी, जो तुरंत वापस उन्नाव लौट आया और पुलिस से शिकायत की।

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

घटना के चार दिन बाद पीड़िता के भाई ने अचलगंज पुलिस थाने में जाकर लिखित शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस ने अपहरण और अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया और जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है और पीड़िता की बरामदगी नहीं हो पाई है।

इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन अब तक किशोरी का कोई पता नहीं चल सका है। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और आरोपितों को संरक्षण देने का प्रयास कर रही है। पीड़िता के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी को किसी मदरसे में छिपाकर रखा गया था, लेकिन अब वहाँ से भी उसकी कोई जानकारी नहीं है।

दबंगों की धमकी और लव जिहाद का आरोप

पीड़िता के भाई ने बताया कि उनकी बहन के अलावा भी गाँव में इसी तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं, जहाँ मुस्लिम समुदाय के दबंगों ने अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिबरान और उसके साथियों ने पहले भी कई बार गाँव में लव जिहाद के जरिए लड़कियों को बहकाने और जबरन शादी कराने की कोशिश की है। पीड़िता के भाई का कहना है कि इस बार भी उनकी बहन के साथ जबरन शादी कराई जा रही है।

परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

पीड़िता के माता-पिता अब पूरी तरह से असहाय और डरे हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढकर उन्हें सौंपा जाए। पीड़िता के पिता ने कहा, “हमारी बेटी को जबरन उठाकर ले जाया गया है, हम मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे हमें न्याय दिलाएँ।” पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि गाँव में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ विशेष समुदाय के लोग हिंदू लड़कियों को जबरन उठा ले जाते हैं और उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं। इस मामले को लेकर गाँव में भी भय और आक्रोश का माहौल है।

पुलिस की निष्क्रियता पर उठते सवाल

पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और लापरवाही बरत रही है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही पीड़िता को बरामद किया जाएगा।

वहीं, सीओ बीघापुर ऋषिकांत शुक्ला ने बताया कि एक नाबालिग लड़की जबरन घर से उठा ले जाने का मामला सामने आया है। आरोपितों के खिलाफ 292/24 धारा 191, 333, 137 दो के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। इस संबंध में संदिग्ध चार व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही अपहृत लड़की की तलाश भी जारी है। आजतक की रिपोर्ट में मुख्य आरोपित का नाम रिजवान बताया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘लव जिहाद’ और जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। सरकार ने ऐसे मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया है और जुर्माने की राशि को भी दोगुना कर दिया है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है, जिससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।

‘हिंदुस्तान में रहना है तो, ख्वाजा-ख्वाजा कहना है’: गणेश पंडाल के आगे इस्लामी कट्टरपंथियों ने लगाए फिलीस्तीन जिंदाबाद के भी नारे, संदिग्ध को पुलिस से छुड़ा ले गए

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में बारावफात के जुलूस में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा आपत्तिजनक नारेबाजी का मामला सामने आया है। यहाँ गणेश पंडाल के आगे मुस्लिम भीड़ ने हरे झंडे लहराए और उत्तेजक नारेबाजी की गई। भीड़ ने ‘फिलीस्तीन जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए गए। वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस द्वारा पकड़े गए एक कथित संदिग्ध को कुछ लोगों ने छुड़ा भी लिया। फ़िलहाल प्रशासन पूरे मामले की जाँच करवा रहा है। घटना सोमवार (16 सितंबर 2024) की है।

यह मामला बलरामपुर जिले के मुस्लिम बहुल बाजार उतरौला का है। यहाँ सोमवार (16 सितंबर) को बारावफात का जुलूस निकला था। इस जुलूस में नाबालिग से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे। भीड़ के हाथों में हरे रंग के अलावा फिलीस्तीन के भी झड़े थे। यह भीड़ बाजार में कुछ हिन्दू व्यपारियों द्वारा स्थापित गणेश पंडाल के आगे पहुँच कर रुक गई। पंडाल के आगे कई लोग उत्तेजक नारेबाजी करने लगे।

इस दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने “रसूल के गुलाम को मौत भी कबूल है”, “फिलीस्तीन का मुसलमान जिंदाबाद” “मस्जिद ए अक्सा जिंदाबाद” जैसे नारे भी लगाए। कट्टरपंथियों की भीड़ ने नारेबाजी में यह भी कहा कि “हिंदुस्तान में रहना है, तो ख्वाजा-ख्वाजा कहना है”।

ये तमाम नारेबाजी पुलिस के आगे ही की गई है। इसी घटना में एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उतरौला के SHO इंस्पेक्टर संजय दुबे दिखाई दे रहे हैं। संजय दुबे भीड़ में मौजूद किसी संदिग्ध को पकड़ना चाह रहे हैं। उस संदिग्ध पर आपत्तिजनक नारेबाजी का आरोप है। इसी दौरान आसपास अन्य मुस्लिमों की भीड़ जुट जाती है। वो पुलिस पर उस संदिग्ध को छोड़ देने का दबाव बनाते हैं। आखिरकार थोड़ी देर की ना-नुकुर के बाद इंस्पेक्टर ने उस संदिग्ध को छोड़ दिया।

इस हरकत के खिलाफ सिद्धि विनायक सेवा समिति, उतरौला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में हिन्दू व्यापारियों ने मुस्लिम भीड़ पर गणेश पंडाल के आगे देश विरोधी नारेबाजी का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक हिन्दुओं में आक्रोश है। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग भी की गई है। बलरामपुर पुलिस से हिन्दुओं ने अपेक्षा जताई है कि भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न हो। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। बलरामपुर पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

बाराबंकी में लव जिहाद: आजम जैदी ने अमन बनकर हिंदू महिला से रचाई शादी, फिर डालने लगा धर्मपरिवर्तन का दबाव, कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक बार फिर ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक व्यक्ति ने हिंदू बनकर महिला से शादी की और बाद में उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित महिला ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद न्यायालय ने पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया।

धोखे से शादी और उत्पीड़न

पीड़िता के अनुसार, आरोपित मोहम्मद आजम जैदी ने अपना नाम अमन बताकर 2016 में उससे शादी की थी। महिला को शादी के बाद ही ससुराल पहुँचने पर पति की असली पहचान का पता चला। जब उसने इस धोखाधड़ी का विरोध किया तो उसे धमकाया गया और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया गया। महिला ने बताया कि शादी के बाद उसका जमकर यौन उत्पीड़न किया गया और धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को यह बात बताई, तो उसके साथ और भी बुरा किया जाएगा।

बेटी के जन्म के बाद शुरू हुआ धर्म परिवर्तन का दबाव

2017 में पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद से आरोपित ने उस पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता ने बताया कि उसे बार-बार धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उसने इसका विरोध किया। इसी दौरान उसके साथ और भी दुर्व्यवहार किया जाने लगा। पीड़िता ने इस धोखाधड़ी और उत्पीड़न की शिकायत करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ से उसे न्याय की उम्मीद मिली।

अदालत के निर्देश पर पुलिस कार्रवाई

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह की अदालत ने महिला की शिकायत पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए पुलिस को मामले में कार्रवाई करने का आदेश दिया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 498ए (पत्नी के साथ क्रूरता), 323 (चोट पहुंचाना), 504 (अपमान), 506 (धमकी) और 376 (बलात्कार) के तहत केस दर्ज किया। इसके अलावा, मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम और उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने आरोपित को किया गिरफ्तार

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि अदालत के निर्देश पर तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपित मोहम्मद आजम जैदी को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपित ने पीड़िता के साथ कई बार मारपीट भी की थी। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि केस दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि जल्द ही मामले की जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

लव जिहाद और यूपी का सख्त कानून

उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद‘ जैसे मामलों को रोकने के लिए पहले से ही कानून लागू है, लेकिन राज्य सरकार ने इस कानून को और सख्त बना दिया है। यूपी सरकार ने ‘प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलीजन (अमेंडमेंट) बिल 2024’ पास किया है, जिसके तहत जबरन, लालच देकर, या धोखे से धर्म परिवर्तन करवाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। इस नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति महिला, नाबालिग या किसी भी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करने के लिए जबरन या धोखाधड़ी का सहारा लेता है, तो इसे एक गंभीर अपराध माना जाएगा।

नए कानून के अंतर्गत सजा को भी सख्त कर दिया गया है, जिसमें न केवल उम्रकैद की सजा बल्कि जुर्माने की रकम भी दोगुनी कर दी गई है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति शादी का झूठा वादा कर या शादी के बाद धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता है, तो उसे भी कड़ी सजा दी जाएगी।

बाराबंकी का यह मामला दिखाता है कि किस तरह से धोखाधड़ी कर धर्म परिवर्तन का प्रयास किया जाता है। आरोपित ने पहले हिंदू बनकर महिला से शादी की और फिर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। हालाँकि, महिला ने साहस दिखाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना यह भी साबित करती है कि उत्तर प्रदेश सरकार का लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखता है और दोषियों को कानून के दायरे में लाता है।

सरकार द्वारा बनाए गए नए कानूनों से ऐसे मामलों में और सख्ती आ सकती है, जिससे महिलाएँ और कमजोर वर्ग के लोग सुरक्षित रह सकें। यह कानून उन लोगों के खिलाफ एक बड़ा हथियार है जो शादी और प्यार का दिखावा कर धार्मिक धोखाधड़ी का खेल खेलते हैं।

ईद के जुलूस से बजरंग बली के मंदिर पर पत्थरबाजी, श्रद्धालु के घायल होने के बाद मंदसौर की सड़कों पर हनुमान चालीसा: कड़ा एक्शन न होने पर आंदोलन का अल्टीमेटम

मध्य प्रदेश के मंदसौर में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क गई। हिंसा की वजह जुलूस से हनुमान मंदिर पर पत्थर फेंका जाना बताया जा रहा है। इस पत्थरबाजी से एक श्रद्धालु घायल हो गया है। इस घटना के विरोध में हिन्दू समुदाय के लोग भी सड़क पर उतर आए। पत्थरबाज की जल्द गिरफ्तारी की माँग को ले कर हंगामा हुआ। पुलिस के आगे हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। फिलहाल पुलिस के केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना सोमवार (16 सितंबर, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना मंदसौर के नेहरू बस स्टैंड क्षेत्र की है। यहाँ बालाजी मंदिर है जिसमें बजरंग बली सहित अन्य कई देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर आसपास के हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर मंगलवार को यहाँ आम दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ होती है। सोमवार को इसी मंदिर के सामने से मुस्लिम समुदाय के लोग ईद मिलादुन्नबी का जुलूस ले कर निकल रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद भीड़ में से किसी एक ने मंदिर के अंदर पत्थरबाजी कर दी।

जुलूस से फेंका गया एक पत्थर मंदिर में मौजूद एक श्रद्धालु को लगा जिस से वो घायल हो गया। घायल का इलाज करवाया गया। इस बीच मामले की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन से जुड़े लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन को कुछ स्थानीय व्यापारियों का भी समर्थन मिला और बाजार बंद हो गए। हालात ऐसे बने कि दोनों पक्षों के आमने-सामने आ जाने की नौबत आ गई। मामले की सूचना पर पुलिस बल फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँचा।

कार्रवाई की माँग पर अड़े हिन्दू संगठन के सदस्यों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। विरोधस्वरूप सड़क पर हनुमान चालीसा भी पढ़ी जाने लगी। उन्होंने पुलिस पर इस घटना को हल्के में लेने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए तमाम सीनियर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। बालाजी मंदिर के पुजारी शरद की तहरीर पर अज्ञात पत्थरबाज के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीमों ने जाँच शुरू कर दी है। प्रशासन का दावा है कि पत्थरबाज को जल्द गिरफ्तार भी कर लिया जाएगा।

विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए इसे सोची समझी साजिश करार दिया है। भारतीय जनता पार्टी के मंदसौर के पदाधिकरियों ने भी एलान किया है कि अगर जल्द ही हमलावर पर एक्शन न हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। CCTV फुटेज व अन्य साक्ष्यों से हमलावर की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

दानिश ने ‘देव’ बन दलित लड़की को फाँसा, मंगलसूत्र पहना कर डेढ़ साल बनाए संबंध फिर कराया गर्भपात: यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ दानिश ने खुद को देव बताते हुए दलित समुदाय की हिन्दू लड़की को प्यार के जाल में फँसाया। बाद में आरोपित ने पीड़िता से शादी का ढोंग कर के डेढ़ साल तक रेप किया। गर्भवती होने पर पीड़िता का गर्भपात भी करवाया गया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित दानिश को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, अनुसूचित जाति की एक पीड़िता ने हापुड़ के धौलाना थाने में गुरुवार (12 सितंबर 2024) को तहरीर दी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि वह गाजियाबाद की एक मार्केटिंग कम्पनी में जॉब करती थी। लगभग डेढ़ साल पहले यहीं पर उसकी मुलाकात दानिश से हुई थी। तब दानिश ने खुद को देव बताया था। कुछ ही दिनों में दानिश ने पीड़िता को चिकनी-चुपड़ी बातों में फँसा लिया। इसके बाद दोनों का मिलना-मिलाना भी शुरू हो गया।

जाटव समुदाय की पीड़िता ने आगे बताया कि 7 अप्रैल 2023 को दानिश उसे ले कर मोहननगर इलाके के ही एक होटल में गया। यहाँ उसने शादी का ढोंग करते हुए पीड़िता को मंगलसूत्र पहनाया। इसके बाद दानिश ने पीड़िता से रेप किया। लगभग 6 महीने तक शारीरिक संबंध बनाने के बाद दानिश ने पीड़िता को झाँसे में रखने के लिए एक दिखावे की शादी गाजियाबाद में कर डाली। दानिश ने अपनी पहचान छिपाने की बहुत साजिशें रचीं। वह अक्सर मंदिर जाया करता था जहाँ वो पूजापाठ भी करता था।

कथित शादी के बाद देव बने दानिश ने पीड़िता को गाजियाबाद के डासना में कमरा दिला कर रखा। कुछ ही दिनों में पीड़िता गर्भवती हो गई। 22 जून 2024 को दानिश ने पीड़िता को दवा खिलाकर उसका गर्भपात करा दिया। उसी समय दानिश ने पीड़ित से अपनी असलियत भी बताई कि वो देव नहीं बल्कि मुस्लिम है और उसका नाम दानिश है। पीड़िता ने अपनी पड़ताल कर के दानिश का असली पता खोजा। वह 1 जुलाई 2024 को उसके घर पहुँच गई। यहाँ दानिश के परिजनों ने पीड़िता को बुरी तरह से पीट कर घर से बाहर कर दिया।

शिकायत में पीड़िता ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए यह भी बताया कि डेढ़ साल तक दानिश के चंगुल में फँसने की वजह से उसका जीवन अंधकारमय हो चुका है। अब पीड़िता जैसे-तैसे अपना गुजर-बसर कर रही है। पीड़िता ने दानिश और उसके परिजनों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। हापुड़ पुलिस ने यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2), 123, 318 (4) और 64 के साथ SC/ST एक्ट में दर्ज किया।

इसके बाद इस जीरो FIR को घटनाक्षेत्र होने की वजह से गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने में ट्रांसफर कर दिया गया। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। गुरुवार (12 सितंबर) को केस दर्ज कर के साहिबाबाद पुलिस ने फरार चल रहे दानिश की तलाश शुरू कर दी। 16 सितंबर (सोमवार) को पुलिस ने दानिश को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती सबूतों ने पीड़िता के द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई है। ACP रजनीश कुमार उपाध्याय के मुताबिक मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

चाकू, मोबाइल, कैश, स्टोव, सिगरेट-बीड़ी… छापेमारी के बाद दूसरी जेल में शिफ्ट हुआ कन्नड़ अभिनेता दर्शन: मिल रही थी VIP सुविधाएँ, फैन को तड़पा-तड़पा कर मार डाला था

रेणुकास्वामी हत्याकांड में जेल में बंद फिल्म अभिनेता दर्शन को कर्नाटक की जेल में VVIP ट्रीटमेंट दिए जाने का मामला सामने आया है। एक फोटो में दर्शन बेंगलुरु सेन्ट्रल जेल में कुर्सियाँ लगा कर साथियों सहित ऐशो-आराम की मुद्रा में नजर आया है। फोटो वायरल होने के बाद शनिवार (14 सितंबर, 2024) को पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने जेल में छापा मारा। छापे में मोबाइल फोन, चाकू और आमलेट स्टोव जैसी वस्तुएँ बरामद हुईं हैं। दर्शन और उनके साथियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया जा रहा है।

TOI के मुताबिक, शुक्रवार (13 सितंबर, 2024) को बेंगलुरु सेंट्रल जेल में बंद अभिनेता दर्शन की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस फोटो में दर्शन जेल कैम्पस में मजमा लगाए हुए हैं। वह प्लास्टिक की कुर्सियों पर सामने टेबल रख कर अपने कुछ साथियों सहित बैठा दिखा। इनके हाथों में चाय के कप है। साथ ही चारों लोग किसी बात पर ठहाके भी लगा रहे हैं। दर्शन के साथ मौजूद अन्य लोगों में 2 के नाम नागराज और श्रीनिवास हैं। ये दोनों भी रेणुकास्वामी हत्याकांड में नामजद हैं।

इस फोटो के वायरल होते ही कर्नाटक में जेलों की अंदर कैदियों को VVIP ट्रीटमेंट देने के आरोप लगने लगे। वायरल तस्वीर पुलिस के भी पास पहुँची जिसका संज्ञान लिया गया। जेल पर छापेमारी के लिए बेंगलुरु दक्षिण डिवीजन पुलिस अधिकारियों की एक टीम बनाई गई। 40 सदस्यों की एक टीम को एक महिला IPS अधिकारी ने लीड किया। शाम लगभग 4:30 पर यह टीम सीधे नागराज की बैरक में पहुँची और तलाशी लेना शुरू किया। इसके बाद कई अन्य बैरकों को भी खँगाला गया।

कुल मिला कर जेल से 15 मोबाइल फोन, चाकू, आमलेट बनाने का स्टोव, मोबाइल चार्जिंग के लिए पॉवर बोर्ड, इलेक्ट्रिटक स्टोव, 36 हजार रुपए कैश, सिगरेट और बीड़ी के पैकेट के साथ माचिस भी बरामद हुआ। इसमें सैमसंग कम्पनी के एक मोबाइल फोन की कीमत 1 लाख 30 हजार के आसपास बताई जा रही है। बरामदगी के बाद जेल के 12 स्टाफ को सस्पेंड कर दिया गया है। इन सभी के खिलाफ जाँच शुरू कर दी गई है। दर्शन और उसके साथियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।

दर्शन को बेल्लारी जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद एक अन्य FIR दर्ज की गई है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 323 के साथ कर्नाटक जेल अधिनियम (संशोधित) के तहत दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि न सिर्फ कैदियों बल्कि उनको सुविधाएँ पहुँचाने वाले जेलकर्मियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बताते चलें कि इसी केस में दर्शन की प्रेमिका पवित्रा गौड़ा भी जेल में बंद हैं। उन पर भी अपने प्रेमी सहित रेणुकास्वामी की हत्या में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है।

शेख हसीना को हटाने की 2019 से ही चल रही थी USAID की साजिश, बांग्लादेश तख्तापलट में लगी थी कई अमेरिकी एजेंसियाँ: रिपोर्ट में दस्तावेजों का हवाला, डोनाल्ड लू भी था शामिल

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने की योजना 2019 में ही बन गई थी। अमेरिका की अलग-अलग एजेंसियाँ इस काम में लगाई गईं थी। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन लाने के लिए लाखों डॉलर भी बहाए गए। हसीना की सत्ता पलटने के लिए अमेरिका ने अलग-अलग एजेंसियों का प्रयोग किया।

यह सारे खुलासे अखबार द सन्डे गार्जियन (The Sunday Guardian) को मिले अमेरिकी कागजों से हुआ है। सन्डे गार्जियन की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस पूरी योजना का हिस्सा वह अमेरिकी राजनयिक डोनाल्ड लू भी था, जो सत्ता परिवर्तन का मास्टर माना जाता है।

अमेरिका की एजेंसियों का हुआ इस्तेमाल

बांग्लादेश में सत्ता बलदने के लिए अमेरिकी एजेंसियों का इस्तेमाल हुआ। यह एजेंसियाँ सरकार से पैसा लेती है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का प्रमुख काम करने वाली एक ऐसी ही एजंसी इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टिट्यूट (IRI) है। IRI अमेरिका की USAID और NED नाम की एजेंसियों के लिए काम कर रही थी और उनका उद्देश्य पूरा कर रही थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन दोनों एजेंसियों से पैसा लेकर ही IRI ने बांग्लादेश में अपना काम चालू किया।

IRI ने इसके लिए एक कार्यक्रम चलाया और यह जनवरी 2021 तक चला । IRI ने कहा इस कायर्क्रम का उद्देश्य बांग्लादेश के भीतर उन लोगों को आवाज देना है, जो हसीना की दमनकारी सत्ता के विरुद्ध खड़े हो सकें। IRI ने अपने इस कार्यक्रम में LGBT, बिहारी और बाकी समुदायों के लोगों के समूहों को समर्थन दिया। इसके तहत 77 ‘एक्टिविस्ट’ को ट्रेनिंग भी दी गई। इन लोगों को बड़ी धनराशि भी दी गई। इसका अर्थ यह लगाया जा सकता है कि अमेरिका उन लोगों को अपने पक्ष में बोलने के लिए तैयार कर रहा था जो हसीना का विरोध कर सकें।

IRI ने 2021 में एक और प्रोग्राम चलाया था। इसके लिए उसे अमेरिकी एजेंसी NED से 9 लाख डॉलर की मदद मिली थी। इस कार्यक्रम के तहत IRI ने उन नेताओं को तैयार करने का लक्ष्य रखा था जो आगे जाकर बड़ी आवाज बन सकें। इसके तहत IRI ने बांग्लादेश की कई पार्टियों के लोगों को सहायता करती जिससे वह बड़े पदों पर पहुँच सके। IRI ने अपना एजेंडा बढ़ाने के लिए कई ऐसे लोगों को उन कार्यक्रमों में शामिल करवाया जहाँ अमेरिकी राजनयिक और अधिकारी आते थे।

सत्ता बदलने को सभी को आजमाया

IRI ने बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता गिराने के लिए अलग-अलग संस्थानों का विकल्प सोचा था। एक रिपोर्ट में IRI ने जिक्र किया कि बांग्लादेश की सेना और यहाँ के कारोबारी शेख हसीना की सत्ता पलट सकते हैं। हालाँकि, IRI ने पाया कि अधिकांश बड़े कारोबारी शेख हसीना की आवामी लीग का समर्थन करते हैं और सेना के बड़े अधिकारी भी सरकार के प्रति कोई ख़ास गुस्सा नहीं है। अपनी रिपोर्ट में IRI ने कहा कि सैन्य अधिकारियो को बड़े पद दिए गए हैं, जिससे वह प्रसन्न हैं। IRI ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इसी तरह से आवामी लीग सत्ता पर जमी हुई है।

बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी BNP का पैंतरा भी IRI आजमाना चाहती थी लेकिन उसे यह लम्बी रेस का घोड़ा नहीं लगी। IRI ने पाया कि BNP पर हुई कार्रवाइयों ने उसकी छवि खराब कर दी है। बांग्लादेश के आम लोग उसे पसंद नहीं करते। इसके अलावा IRI ने यह भी कहा कि BNP में दो गुट चल रहे हैं जिनमे से एक ढाका जबकि दूसरा लंदन से चलता है। ऐसे में IRI ने सत्ता परिवर्तन के लिए BNP को फिट नहीं समझा। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद युनुस को इसीलिए लाया गया क्योंकि BNP मुखिया खालिदा जिया की अब भी स्वीकार्यता नहीं है।

लाशों पर सत्तापलट की थी चाहत

IRI चाहती थी कि बांग्लादेश में कोविड महामारी में बड़ा नुकसान हो जिसका फायदा उठा कर शेख हसीना का तख्तापलट किया जाए। IRI ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा, “कोरोनावायरस महामारी के स्वास्थ्य और आर्थिक परिणामों से बांग्लादेश की राजनीति अस्थिर होने की संभावना थी। हालाँकि, बांग्लादेश में मृत्यु दर कम रही और खतरनाक अनुमानों के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ।” इस तरह IRI के हाथ से यह एक मौका भी चला गया।

भारत से भी IRI को समस्या

अमेरिकी एजेंसी IRI को मात्र बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार या उनकी पार्टी आवामी लीग से ही नहीं बल्कि भारत से भी समस्या है। IRI ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा, “बांग्लादेश में राजनीति में दो दलों का वर्चस्व है: अवामी लीग (AL) और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP)। पिछले दस सालो से, भारत के समर्थन के कारण आवामी लीग लगातार आधिपत्यवादी: राजनीतिक मुकाबले पर हावी होने वाली और भ्रष्ट हो गई है।” IRI ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में भारत का प्रभाव कम करने की जरूरत है।

एक अन्य रिपोर्ट में IRI ने कहा, ” इस बात की पूरी संभावना है कि आवामी लीग और शेख हसीना भारत के समर्थन के तहत किसी भी तरह से फिर से चुनाव जीतने की कोशिश करेंगे। बांग्लादेश के भीतर इस इलाके की शक्तियों (भारत और चीन) के हस्तक्षेप को संतुलित करना आवश्यक है।” IRI ने यह भी बताया कि उसने BNP हो या अवाम्मी लीग, दोनों में बड़े स्तर पर घुसपैठ कर ली थी। इसके लिए उनसे पाँच अमेरिकी राजनयिकों का सहारा लिया था। इनमे से एक USAID में तैनात था। इस पूरे ऑपरेशन को डोनाल्ड लू समेत बाकी अधिकारी देख रहे थे।

हसीना ने जताया था खतरा

IRI की गतिविधियाँ जहाँ एक तरफ चल रही थीं, वहीं दूसरी तरफ शेख हसीना लगातार इस खतरे को समझ रहीं थी। अप्रैल, 2023 में बांग्लादेश की संसद में हसीना ने इसी खतरे को लेकर देश को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका विश्व के किसी भी देश में सरकार पलट सकता है। इससे पहले अमेरिका ने लगातार शेख हसीना की सरकार पर दबाव बनाना चालू कर दिया था। हसीना सरकार के अधिकारियों पर अमेरिका ने प्रतिबन्ध भी लगाए थे।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना की सत्ता गिर गई थी। शेख हसीना को देश छोड़ कर भारत आना पड़ा था। शेख हसीना की सत्ता आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के बाद गई थी। इस प्रदर्शन में जमात ए इस्लामी और इस्लामी कट्टरपंथी संगठन शामिल हो गए थे और भारी हिंसा की थी।