Homeफ़ैक्ट चेकसोशल मीडिया फ़ैक्ट चेक'अडानी समूह ने कबूली सरकार में शामिल लोगों को घूस देने की बात': सुप्रीम...

‘अडानी समूह ने कबूली सरकार में शामिल लोगों को घूस देने की बात’: सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने शेयर किया फर्जी पत्र, बोले – सिर्फ ज़ुबैर की बात मानूँगा

उन्होंने इसे शेयर करते हुए लिखा, "अडानी कंपनी के किस मूर्ख कर्मचारी ने इस प्रेस रिलीज को ड्राफ्ट किया है?"

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने अडानी समूह पर निशाना साधने के लिए फर्जी खबरों का सहारा लिया है। उन्होंने दावा किया है कि गौतम अडानी ने सरकार के कई अधिकारियों और हितधारकों को घूस दिया है, ताकि उनकी कंपनी को सरकारी परियोजनाओं का ठेका मिल सके। उनके अनुसार, अडानी समूह ने खुद भी इसे स्वीकार किया है। इतना ही नहीं, संजय हेगड़े ने सोमवार (16 सितंबर, 2024) एक एक फेक लेटर भी शेयर कर के अपनी बात को सही साबित करनी चाही।

वकील संजय हेगड़े ने अडानी को बदनाम करने के लिए फैलाई फेक न्यूज़

इस फर्जी पत्र में 10 सितंबर, 2024 की तारीख़ अंकित है। इस पत्र में लिखा हुआ है कि कंपनी उन सभी सरकारी अधिकारियों और हितधारकों के नाम सार्वजनिक करेगी, जिन्हें फायदा पहुँचाया गया है। उन्होंने इसे शेयर करते हुए लिखा, “अडानी कंपनी के किस मूर्ख कर्मचारी ने इस प्रेस रिलीज को ड्राफ्ट किया है? क्या तुम्हें पता है कि तुमने घूस देने की बात स्वीकार की है? आगे ये आपराधिक मुकदमों में आपका पीछा करेगा।” उन्होंने एक ब्रिटिश सीरियल के डायलॉग का जिक्र करते हुए कहा कि कभी खुद को दोषी नहीं बताना चाहिए।

इस फर्जी पत्र का शीर्षक था – “अडानी ने आधारहीन आरोपों और धमकियों को नकार दिया है”। जब हमने पता लगाया तो पाया कि अडानी समूह की तरफ से ऐसा कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया है। यूजर्स ने भी तुलना करने पर पाया कि हस्ताक्षर, पता और लोगो तक में कई असमानताएँ थीं। हालाँकि, सोशल मीडिया पर बेइज़्ज़ती होने के बाद संजय हेगड़े ने इस पोस्ट को डिलीट कर लिया है। 1 दिन पहले ही अडानी पॉवर और एक अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक यूनिट को ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ (PPP) की तर्ज़ पर केन्या में पॉवर ट्रांसमिशन को लेकर 1.30 बिलियन डॉलर की रियायत दी गई है।

संजय हेगड़े ने फर्जी पत्र शेयर कर के डिलीट कर लिया

बड़ी बात तो ये कि जब संजय हेगड़े के पोस्ट का फैक्ट-चेक हो गया, तब वो कहने लगे कि जब तक ALTNews और मोहम्मद ज़ुबैर नहीं कहेंगे, तब तक वो नहीं मानेंगे कि क्या झूठ है और क्या सच। बता दें कि हिंडेनबर्ग रिसर्च ने दावा किया है कि अडानी समूह की करोड़ों डॉलर की रकम सिंगापुर में सरकार ने जब्त की है। अडानी पर दोबारा फर्जी रिपोर्ट का असर न होने के बाद अमेरिकी संस्था ने ये झूठ फैलाया। हालाँकि, अब उसकी बातों का कोई असर नहीं हो रहा है।

अडानी समूह ने भी फर्जी पत्र को लेकर जारी किया बयान

अडानी समूह ने भी इस फर्जी पत्र को लेकर बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व दुर्भावनापूर्ण इरादों के साथ कई फर्जी प्रेस विज्ञप्तियाँ फैला रहे हैं, जिनमें से एक का शीर्षक ‘अडानी समूह ने निराधार आरोपों और धमकियों की निंदा की’ है, जो कि केन्या में कंपनी की उपस्थिति से संबंधित है। कंपनी का कहना है कि न तो अडानी समूह और न ही उसकी कोई भी कंपनियों या सहायक कंपनियों ने केन्या से संबंधित कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी की हैं।

अडानी समूह ने कहा, “हम इस धोखाधड़ी वाली करतूत की कड़ी निंदा करते हैं और सभी से इन फर्जी और भ्रामक विज्ञप्तियों को पूरी तरह से नजरअंदाज करने का आग्रह करते हैं। हम झूठा बयान फैलाने में शामिल लोगों खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। हमारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियाँ हमारी वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं। हम मीडिया और प्रभावशाली व्यक्तियों से आग्रह करते हैं कि वे अडानी समूह से संबंधित किसी भी समाचार या लेख को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों और स्रोतों की जाँच करें।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर फैलाया जा रहा ‘अर्धसत्य’: इसे कानूनी वजहों से ZEE5 ने हटाया, सरकार ने नहीं लगाया कोई बैन; जानिए पूरा...

सतलुज पर सरकार ने बैन नहीं लगाया बल्कि फिल्म पहले IT नियम, 2021 के नियम 9 के तहत ZEE5 पर रिलीज हुई और बाद में उसी व्यवस्था के तहत उसे हटा भी दिया गया।

बाबू जगजीवन राम: वो दलित नेता जिन्हें कॉन्ग्रेस और लेफ्ट से कभी उनका हक नहीं मिला, क्योंकि वे हिंदू धर्म से नहीं करते थे...

डॉ. आंबेडकर ने जाति व्यवस्था से तंग आकर बौद्ध धर्म अपनाया, तो जगजीवन राम जीवनभर हिंदू समाज के भीतर रहकर ही कुरीतियों को सुधारने के पक्षधर रहे।
- विज्ञापन -