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बेल पर रिहा हुए CM केजरीवाल पत्नी संग पहुँचे हनुमान मंदिर: पटाखे फोड़कर जश्न मनाने वाले समर्थकों पर केस दर्ज, कोर्ट ने कहा था- गिरफ्तारी बिलकुल जायज थी

जमानत की याचिका पर सुनवाई करते समय भी जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी कानून सम्मत थी। इसमें कोई प्रक्रियागत अनियमितता नहीं हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई ने गिरफ्तारी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के निर्देशों का पालन किया था।

दिल्ली के शराब घोटाले में जमानत पर तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पहुँचे और पूजा-अर्चना की। उनके साथ पत्नी सुनीता केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह भी थे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रिहाई का जश्न भी मनाया।

मंदिर पहुँचकर सुनीता केजरीवाल ने भगवान हनुमान को जल चढ़ाया। इसके बाद अरविंद केजरीवाल राजघाट जाकर महात्मा गाँधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि शराब नीति केस में जमानत मिलने के बाद मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने भी इसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की पूजा की थी। अंतरिम जमानत के बाद 2 जून को सरेंडर करने से पहले भी केजरीवाल ने यहाँ दर्शन किए थे।

जेल से बाहर आने पर केजरीवाल ने 13 सितंबर को कहा था, “आज मैं जेल से बाहर आ गया हूँ। मेरे हौसले 100 गुना ज्यादा बढ़ गए हैं। मैं सच्चा था… मैं सही था, इसलिए भगवान ने मेरा साथ दिया। ऊपर वाले ने मुझे रास्ता दिखाया। ऐसे ही भगवान रास्ता दिखाता रहे। ये राष्ट्र विरोधी ताकतें, जो देश को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं, मैं इनके खिलाफ ऐसे ही लडूँ।”

बुधवार (11 सितंबर 2024) को अरविंद केजरीवाल के 177 दिन बाद जेल से बाहर आने पर तिहाड़ के बाहर AAP कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की थी। इसको लेकर दिल्ली के सिविल लाइंस थाने में अज्ञात के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है। दरअसल, दिल्ली में प्रदूषण के चलते 1 जनवरी 2025 तक पटाखे जलाने पर बैन है।

केजरीवाल के बाहर आने पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ऐसे जश्न मनाया, जैसे उन्हें शराब घोटाले से बरी कर दिया गया हो। अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में आरोपमुक्त नहीं हुए हैं, बल्कि जमानत पर बाहर आए हैं। ये बात AAP कार्यकर्ता नहीं समझ पा रहे हैं। उन्हें जमानत पर कुछ निश्चित शर्तों के साथ दी गई है।

इन शर्तों के तहत केजरीवाल दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं करना है। ना ही इस केस को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करनी है। उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली सचिवालय में जाने की भी अनुमति नहीं दी गई है। इसके साथ ही वे वह सरकारी फाइलों पर दस्तखत भी नहीं करेंगे।

अरविंद केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट के सामने हर सुनवाई पर मौजूद होना होगा, जब तक कि उन्हें पेशी से छूट न मिले। इसके अलावा, उन्हें जमानत पर बाहर रहने के दौरान केस से जुड़े गवाहों से संपर्क नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई है। अरविंद केजरीवाल को 10-10 लाख रुपए के दो मुचलके भरने पर जमानत मिली है।

जमानत की याचिका पर सुनवाई करते समय भी जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी कानून सम्मत थी। इसमें कोई प्रक्रियागत अनियमितता नहीं हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई ने गिरफ्तारी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के निर्देशों का पालन किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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