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‘काम पर लौट जाइए, कार्रवाई नहीं करूँगी’ : कोलकाता में धरने पर बैठे डॉक्टरों से CM ममता बनर्जी अचानक मिलने पहुँचीं, प्रदर्शनकारियों ने की नारेबाजी

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब एक महीने से जारी हड़ताल के बीच शनिवार (14 सितंबर 2024) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डॉक्टरों के धरना स्थल पर अचानक पहुँचीं और डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की भावुक अपील की। बता दें कि यह मामला तब शुरू हुआ जब अस्पताल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की रेप कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सीबीआई जाँच चल रही है और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हो रही है।

ममता बनर्जी की भावुक अपील

कोलकाता में डॉक्टरों के धरना स्थल पर पहुँचने के बाद ममता बनर्जी ने डॉक्टरों से काम पर लौटने की भावुक अपील की। जैसे ही ममता वहाँ पहुँचीं, नाराज डॉक्टरों ने नारेबाजी शुरू कर दी, लेकिन ममता ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “कल पूरी रात बारिश हो रही थी, आप लोग सो नहीं पाए, यह देखकर मुझे भी कष्ट हुआ। मैं आपसे अपील करने आई हूँ कि अब इस कष्ट को और न सहें।”

ममता ने आगे कहा, “मैं आपके डिमांड पर विचार करूँगी और चर्चा करूंगी। दोषियों को सजा जरूर मिलेगी। मैंने सीबीआई से अनुरोध किया है कि तीन महीने में दोषी को सजा मिले।” ममता ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा और अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सही करने का काम जल्द शुरू किया जाएगा।

डॉक्टरों की हड़ताल के बीच ममता बनर्जी ने उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मैं यूपी पुलिस नहीं हूँ, मैं कोई कार्रवाई नहीं करूँगी। हमें आप लोगों की जरूरत है। पेशेंट्स की मौत हो रही है, इसलिए आप काम पर लौटें। मैं कोई अंतिम चेतावनी नहीं दे रही, बल्कि अंतिम प्रयास कर रही हूँ।” ममता ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि वे सिविक वालंटियर्स, जो अस्पताल की रोगी कल्याण समितियों का हिस्सा हैं, को हटा रही हैं। उन्होंने कहा, “जो भी दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी, चाहे वह मेरा दोस्त हो या दुश्मन।”

हड़ताल की शुरुआत और डॉक्टरों पर हमला

यह घटना तब शुरू हुई जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ रेप और हत्या का मामला सामने आया। अस्पताल के डॉक्टर न्याय की माँग कर रहे हैं और तभी से हड़ताल पर बैठे हैं। इस घटना के बाद अस्पताल में तनाव और बढ़ गया और डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई के हाथों सौंपा गया और अब सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि डॉक्टरों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़े, खासकर जब यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है।

ममता ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई से पहले यहाँ आई हूँ, ताकि आपको किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। मैं चाहती हूँ कि आप लोग काम पर लौटें और मैं आपकी सभी माँगों पर विचार करूँगी।”

डॉक्टरों की हड़ताल और ममता बनर्जी के धरना स्थल पर पहुँचने से यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर सख्ती से कार्रवाई करेंगी और दोषियों को सजा दिलवाएँगी। लेकिन, इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं और टीएमसी का दावा है कि यह पूरी घटना ममता सरकार को बदनाम करने की एक साजिश हो सकती है।

₹42 करोड़ में बना हाटकेश्वर ब्रिज, ₹52 करोड़ तोड़ने में लगे? : ‘गुजरात मॉडल’ का मजाक उड़ाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बोला झूठ, गृह राज्यमंत्री ने सच्चाई बताई

अहमदाबाद का हाटकेश्वर ब्रिज एक बार फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। इस पुल को लेकर हाल ही में मीडिया चैनलों और कॉन्ग्रेस पार्टी ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स में इस ब्रिज को बनाने में 42 करोड़ रुपये का खर्च आया था, और अब इसे तोड़ने में 52 करोड़ रुपये की लागत बताई जा रही है। कॉन्ग्रेस ने इसे ‘गुजरात मॉडल’ की विफलता के तौर पर पेश किया, लेकिन सच्चाई कुछ और है।

कॉन्ग्रेस का आरोप और मीडिया रिपोर्ट

न्यूज़ चैनल ‘आजतक’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अहमदाबाद के हाटकेश्वर ब्रिज को बनाने में 42 करोड़ रुपये का खर्च आया था, लेकिन अब इसे गिराने में 52 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। कॉन्ग्रेस ने इसे सोशल मीडिया पर उठाया और एक इन्फोग्राफिक जारी कर ‘गुजरात मॉडल’ पर तंज कसा। कॉन्ग्रेस ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार और गुजरात सरकार की विफलता के रूप में प्रस्तुत किया।

कॉन्ग्रेस के इस आरोप के बाद, वामपंथी पारिस्थितिकी तंत्र और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई सवाल उठाए गए।

गृह राज्य मंत्री ने किया ‘फैक्ट चेक’

कॉन्ग्रेस और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद, गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और तथ्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का दावा भ्रामक है। सांघवी ने स्पष्ट किया कि 52 करोड़ रुपये सिर्फ पुल को तोड़ने की नहीं, बल्कि इसे तोड़कर फिर से बनाने की कुल लागत है। उन्होंने आगे बताया कि पुराने पुल को बनाने वाले ठेकेदार से इस खर्च की वसूली की जाएगी।

सांघवी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, “झूठा गिरोह कॉन्ग्रेस दावा कर रही है कि वह अहमदाबाद में हाटकेश्वर ब्रिज को तोड़ने के लिए ₹52 करोड़ खर्च करने जा रही है। यह भ्रामक है।” उन्होंने आगे कहा, “तथ्य यह है कि पुराने पुल को ध्वस्त करने और नए पुल के निर्माण की कुल लागत ₹52 करोड़ है।”

गृह राज्य मंत्री ने मीडिया चैनल ‘आजतक’ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाने से पहले तथ्यों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “एक जिम्मेदार और अग्रणी समाचार चैनल के रूप में, आपको प्रकाशन से पहले तथ्यों की जाँच करनी चाहिए।”

सांघवी ने बताया कि इस 52 करोड़ की लागत में नया पुल बनाने का खर्च भी शामिल है, न कि सिर्फ तोड़ने का खर्च। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुल के निर्माण में आने वाली लागत पुराने ठेकेदार से वसूल की जाएगी, जिससे सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

अहमदाबाद के खोखरा इलाके में स्थित इस हाटकेश्वर ब्रिज का निर्माण 2017 में किया गया था और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला गया था। हालाँकि, केवल पाँच साल बाद, वर्ष 2022 में पुल में संरचनात्मक खामियाँ पाई गईं, जिससे इसे बंद कर दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया कि पुल को पूरी तरह से गिराकर नए सिरे से बनाया जाना चाहिए।

मार्च 2024 में अहमदाबाद मिरर ने रिपोर्ट दी थी कि अहमदाबाद नगर निगम ने पुल को ध्वस्त करने और उसके स्थान पर एक नया चार-लेन पुल बनाने के लिए निविदा जारी की है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 51.70 करोड़ रुपये बताई गई थी।

पुल को दोबारा बनाने की योजना

गौरतलब है कि इस 52 करोड़ रुपये की लागत में सिर्फ पुल को गिराने का खर्च नहीं है, बल्कि इसे दोबारा बनाने का खर्च भी शामिल है। अहमदाबाद नगर निगम ने इसके लिए एक निविदा जारी की है, जिसमें पुल को गिराकर नए सिरे से एक चार-लेन पुल का निर्माण किया जाएगा। इससे यह साफ हो जाता है कि कॉन्ग्रेस और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा जो दावे किए जा रहे थे, वे तथ्यात्मक रूप से गलत थे। पुल की कुल लागत में निर्माण और विध्वंस दोनों शामिल हैं, और यह खर्च जनता के करों पर नहीं बल्कि पुराने ठेकेदार से वसूला जाएगा।

अहमदाबाद के हाटकेश्वर ब्रिज का मुद्दा भले ही राजनीतिक हो गया हो, लेकिन तथ्य यह है कि 52 करोड़ रुपये की लागत केवल पुल को गिराने पर खर्च नहीं की जा रही है। इसमें नए पुल का निर्माण भी शामिल है, और यह रकम ठेकेदार से वसूली जाएगी। इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस और विपक्ष ने इसे ‘गुजरात मॉडल’ की विफलता के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन सरकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से साफ है कि कॉन्ग्रेस का दावा पूरी तरह से गलत है।

यह समाचार मूल रूप से गुजराती भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘विपक्षी आए तो दोबारा लाएँगे अनुच्छेद 370’ : जम्मू-कश्मीर चुनाव से पहले डोडा में PM मोदी ने किया आगाह, जनता से बोले- महाराजा हरि सिंह के अपमान मत भूलिए

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 सितंबर 2024) को डोडा में एक जनसभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद के दमन के लिए भाजपा को प्रतिबद्ध बताया। PM मोदी ने विपक्षी दलों पर न सिर्फ आतंकवाद, बल्कि अलगाववाद को भी बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। इस दौरान उन्होंने धारा 370 को हटाना अपनी सरकार बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।

अपने चुनावी प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डोडा में उमड़ी भीड़ को देखकर काफी उत्साहित थे। उन्होंने सभा में लोगों की उपस्थिति को उन्होंने जनता का भाजपा के लिए आशीर्वाद बताया है। भाजपा द्वारा कश्मीर में अभूतपूर्व विकास करने का दावा करते हुए PM मोदी ने कहा कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर के कई हिस्से पूरे देश से रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएँगे। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर के कई गाँवों तक नल का जल और बिजली आदि पहुँच जाएगा।

धारा 370 की याद दिलाते हुए PM मोदी ने कहा कि इसकी वजह से राज्य में आतंकवाद का बोलबाला हुआ करता था। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी, हड़ताल और तमाम चरमपंथी हरकतों को कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बढ़ावा दिया। हिन्दू समाज की जातियों को मिलने वाले आरक्षण को भी हड़प लिया जाता था। PM मोदी ने लोगों से पूछा कि क्या वो फिर से पुराने आतंकवाद का दौर लाना चाहते हैं? इस पर जनसमूह ने एक स्वर में ‘नहीं’ का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि राज्य में जमीन कब्जा करने वाले गिरोहों को बढ़ावा दिया गया। छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए यहाँ के लोगों को तरसाया गया। सरकारी नौकरियों में सिर्फ उन्हीं लोगों की भर्तीय की गई, जो कॉन्ग्रेस, NC और महबूबा मुफ्ती के तीन खानदानों को दी गई। इन लोगों ने आतंकवाद को पाला-पासा ताकि उनकी अरबों-खरबों की संपत्ति बरकरार रखें। पीएम ने कहा कि विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को वापस लाना चाहते हैं।

PM मोदी ने कॉन्ग्रेस को सबसे बेईमान पार्टी और गाँधी परिवार को शाही खानदान बताते हुए सबसे भ्रष्ट परिवार बताया। नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिमाचल प्रदेश को बर्बाद कर दिया। उन्होंने लोगों को कॉन्ग्रेस से सतर्क रहने के लिए कहा। पीएम ने कहा कि ये लोग जम्मू-कश्मीर को भी सत्ता में आए तो बर्बाद कर देंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह एवं अन्य राजाओं को लेकर कैसी-कैसी टिप्पणियाँ की हैं, वो भी आपने सुनी है। ये सिर्फ महाराजा का नहीं, बल्कि डोगरा (क्षत्रियों) का अपमान है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग ये अपमान कभी भूला नहीं सकेंगे और चुनवों में इसका बदला जरूर लेंगे।

पीएम मोदी ने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा प्रदेश का चहुँमुखी विकास करेगी। उन्होंने राहुल गाँधी को को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि कई लोग ऐसे भी हैं, जो नफरत की दुकान के आगे मोहब्बत का बोर्ड लगा कर घूम रहे हैं। अमेरिका में हुई भारतीय पत्रकार की पिटाई का भी जिक्र मोदी ने अपने सम्बोधन में किया है।

बेटी पैदा होने पर भड़का नेवी में काम करने वाला तस्लीम मोहम्मद, बीवी को डाक से भेजा तीन तलाक: मुंबई में केस दर्ज, भाई-बहन-अब्बा सब केस में नामजद

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ मर्चेंट नेवी में काम करने वाले एक शख्स ने अपनी बीवी को डाक से तीन तलाक भेजा। ये डाक 2 बार अलग-अलग तारीखों पर भेजे गए। आरोपित का नाम तस्लीम मोहम्मद है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। आरोपित शौहर के साथ इस केस में उसका अब्बा, भाई, बहन और बहनोई भी नामजद किए गए हैं। तलाक की वजह बेटा न पैदा होना और दहेज़ का लालच बताया गया है।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के थानाक्षेत्र वकोला का है। यहाँ रहने वाली एक 30 वर्षीया मुस्लिम महिला ने अपने ससुरालीजनों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि साल 2018 में पीड़िता का निकाह तस्लीम मोहम्मद से हुआ था, तब तस्लीम पढ़ाई करता था। उस समय पीड़िता के अब्बा ने दहेज़ में 5 लाख रुपए दिए थे। इस बीच जनवरी 2021 में तस्लीम मोहम्मद को मर्चेंट नेवी में नौकरी मिल गई और वह 9 माह के लिए अपनी शिप पर चला गया।

आरोप है कि तस्लीम मोहम्मद के पानी के जहाज पर जाते ही ससुराल के बाकी सदस्यों ने पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। सबसे पहले घर छोटा होने का बहाना बताकर पीड़िता को उसके मायके भेज दिया गया। इस बीच पीड़िता गर्भवती हुई और एक बेटी को जन्म दिया। बेटी पैदा हने के बाद तस्लीम के घर वालों ने पीड़िता को और ज्यादा तंग करना शुरू कर दिया। बताया गया है कि आरोपित बेटा चाहते थे। इस बीच नवंबर 2023 को पीड़िता की सास की मौत हो गई।

शिकायत में आगे बताया गया है कि सास की मौत की जानकारी मिलते ही पीड़िता अपनी ससुराल पहुँची, तब पीड़िता की ननद ने उसे घर के अंदर घुसने भी नहीं दिया। कुछ दिनों बाद दिसंबर 2023 में तस्लीम मोहम्मद छुट्टी पर घर आया। उसने भी अपने घर के बाकी सदस्यों जैसी हरकत की और जनवरी 2024 को पीड़िता को तीन तलाक का नोटिस भेज दिया। जब पीड़िता ने यह नोटिस लेने से इंकार कर दिया तो उसके शौहर की तरफ से 17 फरवरी को दूसरा और 21 मार्च को तीसरी बार तलाक का नोटिस भेजा गया।

हालाँकि पीड़िता ने इसमें से एक भी नोटिस रिसीव नहीं किया, तब तस्लीम मोहम्मद ने तलाक की यही नोटिस पीड़िता को व्हाट्सएप कर दिया। पीड़िता तलाक के पक्ष में नहीं बताई जा रहीं है। उसने ससुराल में रहने की इच्छा जताई और काउंसिलिंग की माँग की। लेकिन, इन प्रयासों का तस्लीम और उसके घर वालों पर कोई असर नहीं पड़ा। आखिरकार मजबूर हो कर पीड़िता ने अपनी ससुराल पक्ष के कुल 7 आरोपितों के खिलाफ थाने में तहरीर दी।

इस शिकायत पर पुलिस ने तीन तलाक अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। FIR में पीड़िता के शौहर तस्लीम मोहम्मद, ससुर इलियास खान, ननद आफरीन और परमीन, ननद का शौहर बिलाल, देवर इमरान और गुफरान को नामजद किया गया है। इन सभी पर साल 2018 से 2024 के बीच पीड़िता को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने, दहेज़ माँगने और तीन तलाक देने का आरोप है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

MBBS में एडमिशन के लिए अभ्यार्थी बन गए अल्पसंख्यक, फर्जी प्रमाण-पत्र भी बनवाया: जाँच के बाद 20 कैंडिडेट्स का नामांकन रद्द

उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक कोटे से MBBS में एडमिशन लेने के लिए नियम विरुद्ध धर्मांतरण करने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थियों ने हिंदू से बौद्ध धर्म अपना लिया और उसका सर्टिफिकेट बनवाकर मेरठ के सुभारती यूनिवर्सिटी में जमा करवा है। ऐसे 20 मामले सामने आए हैं। इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद सर्टिफिकेट को रद्द करके जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

दरअसल, गुरुवार (12 सितंबर 2024) को उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन डाला। इसमें कहा गया है कि फर्जी अल्पसंख्यक प्रमाण-पत्र लगाने वाले अभ्यर्थियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही इन लोगों के नामांकन रद्द किए जाएँगे। इस घटना के बाद चार छात्रों ने अपना नामांकन वापस ले लिया।

इन अभ्यर्थियों ने बौद्ध धर्म अपनाने के लिए उत्तर प्रदेश के विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन एक्ट 2021 का पालन नहीं किया। इसके सेक्शन 8 और 9 में लिखा है कि अपना धर्म परिवर्तन करने की इच्छा वाले व्यक्ति को कम-से-कम 60 दिन पहले अपने जिले के जिला मजिस्ट्रेट या अपर जिला मजिस्ट्रेट के सामने लिखित में घोषणा करनी होगी। उन्हें बताना होगा कि वह बिना किसी बल, प्रताड़ना या प्रलोभन के अपना धर्म स्वेच्छा से परिवर्तित करना चाहता है।

जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र लगाए थे, उनमें यूपी के प्रयागराज, वाराणसी, बिजनौर, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर के अलावा दिल्ली और महाराष्ट्र के भी अभ्यर्थी शामिल हैं। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों ने मैनेजमेंट कोटा के तहत अल्पसंख्यक सीटों पर नामांकन के लिए यूनिवर्सिटी को 40 लाख से लेकर 50 लाख रुपए तक दिए थे।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में MBBS में नामांकन की काउंसिलिंग चल रही है। इसी दौरान किसी इन प्रमाण पत्रों के संंबंध में किसी ने यूपी चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक किंजल सिंह से इसकी शिकायत कर दी। किंजल सिंह ने जाँच कराई तो शिकायत पाई गई। उन्होंने पाया कि सुभारती मेडिकल यूनिवर्सिटी में हिंदुओं ने अल्पसंख्यक कोटे से नामांकन लिया है।

अपने व्हाट्सऐप मैसेज में शिकायतकर्ता ने लिखा था, “उत्तर प्रदेश में मेडिकल के छात्रों की काउंसिलिंग में अल्पसंख्यक दर्जे के नाम पर बड़ा घोटाला चल रहा है। मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय में बौद्ध अल्पसंख्यक के नाम पर ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क के अलावा लाखों रुपए लेकर सामान्य उम्मीदवारों को सीट दी जा रही है। इसमें कौर और मित्तल सरनेम वाले उम्मीदवारों को अल्पसंख्यक कोटे से एडमिशन दिए जा रहे हैं। 40 से 50 लाख रुपए डोनेशन लिए गए हैं।”

चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक किंजल सिंह ने सभी अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट मँगवाकर जाँच कराए तो पता चला कि सभी सर्टिफिकेट हाल ही में जारी किए गए हैं। जिन उम्मीदवारों ने बौद्ध धर्म का सर्टिफिकेट लगाए हैं, वे सभी हिंदू हैं और संपन्न परिवारों से हैं। ये सर्टिफिकेट मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, गौतमबुद्ध नगर, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, मुजफ्फरनगर और हापुड़ जिले से जारी किए गए थे। कुछ उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट दूसरे जिलों से जारी किए थे।

महानिदेशक किंजल सिंह ने इन जिले के डीएम को सर्टिफिकेट की जाँच के लिए आदेश किया। आदेश की एक कॉपी अल्पसंख्यक विभाग के डायरेक्टर को भी भेजी गई है। आदेश के बाद सभी जिलों के डीएम ने माना है कि सर्टिफिकेट गलत तरीके से जारी किए गए हैं। इनमें नियमों का पालन नहीं किया गया। वाराणसी को छोड़कर सभी डीएम ने इन प्रमाण पत्रों को रद्द करने का आदेश दे दिया है।

दरअसल, वाराणसी के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी छुट्‌टी पर हैं। इसलिए वहाँ से जारी किया गया एक सर्टिफिकेट कैंसिल नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी सर्टिफिकेट डीएम, एसडीएम और अल्पसंख्यक अधिकारी के यहाँ से जारी हुए हैं। अब इसकी भी जाँच की जाएगी कि ये सर्टिफिकेट जारी कैसे हुए।

बता दें कि मेरठ स्थित सुभारती यूनिर्वर्सिटी एक बौद्ध अल्पसंख्यक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। अल्पसंख्यक कोटे को लेकर सुभारती यूनिवर्सिटी और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच सुप्रीम कोर्ट में केस भी चला। कोर्ट ने सुभारती विश्वविद्यालय को 50% अल्पसंख्यक कोटे की सीट भरने का आदेश दिया। इसी तहत यह नामांकन हो रहा था। सुभारती विश्वविद्यालय में MBBS की 200 सीट हैं, जिनमें से 100 सीटें अल्पसंख्यक कोटे के लिए है।

छत्तीसगढ़ में वंदे भारत ट्रेन पर पथराव, कॉन्ग्रेस नेता के भाई समेत 5 आरोपित गिरफ्तार: पीएम मोदी करने वाले थे वर्चुअल उद्घाटन, ट्रायल रन के दौरान तोड़फोड़

छत्तीसगढ़ के महासमुंद में वंदे भारत ट्रेन पर पथराव की एक गंभीर घटना सामने आई है। इस पथराव में ट्रेन के तीन कोचों के शीशे टूट गए। यह ट्रेन ट्रायल रन पर थी, और इस घटना ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें प्रमुख आरोपित शिवकुमार बघेल भी शामिल है, जो कॉन्ग्रेस नेता ताम्रध्वज बघेल का भाई है। ताम्रध्वज बघेल खल्लारी विधानसभा क्षेत्र का यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल रन चल रहा था। महासमुंद के बागबाहरा रेलवे स्टेशन के पास कुछ असामाजिक तत्वों ने ट्रेन पर पथराव किया। इस हमले में ट्रेन के तीन कोच C2-10, C4-1, और C9-78 के शीशे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 सितंबर को वर्चुअल हरी झंडी दिखाने वाले थे, लेकिन इस घटना ने ट्रायल रन को प्रभावित किया।

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पाँच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इन आरोपितों में शिवकुमार बघेल, जो कॉन्ग्रेस नेता ताम्रध्वज बघेल का भाई है, प्रमुख आरोपित के रूप में सामने आया है। अन्य आरोपितों के नाम देवेंद्र कुमार, जीतू पांडे, सोनवानी और अर्जुन यादव हैं। सभी आरोपित बागबाहरा के निवासी हैं और उन पर रेलवे एक्ट 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

RPF (रेलवे सुरक्षा बल) के अधिकारी परवीन सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल रन चल रहा था, जब यह हमला हुआ। सुबह करीब 9 बजे कुछ असामाजिक तत्वों ने बागबाहरा के पास चलती ट्रेन पर पथराव किया। सुरक्षा बलों ने तुरंत सूचना दी और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

पीएम मोदी दिखाने वाले थे हरी झंडी

वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसे भारत की सबसे उन्नत ट्रेनों में से एक माना जाता है, हाई-स्पीड ट्रेन है। यह ट्रेन यात्रियों को तेज गति, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करती है। यह ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है और देश के विभिन्न हिस्सों में इसका परिचालन तेजी से बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 सितंबर को इस ट्रेन को वर्चुअल हरी झंडी दिखाने वाले थे, लेकिन इस घटना से ट्रायल रन में बाधा आ गई। वंदे भारत ट्रेन से देश के रेल नेटवर्क को और अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

पाकिस्तान में नाबालिग हिन्दू लड़की का अधेड़ उम्र के मुस्लिम शख्स से निकाह: मदरसे के बाहर धर्मांतरण रुकवाने के लिए गिड़गिड़ाते रहे परिजन, मौलवी ने बाहर से भगाया

पाकिस्तान से एक और हिंदू नाबालिग लड़की के अपहरण, धर्मांतरण और जबरन धर्मांतरण की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि जब पीड़िता के परिजन घटना की जानकारी होने पर मदरसे में धर्मांतरण रुकवाने पहुँचे तो उन्हें अंदर भी नहीं जाने दिया। घटना 12 सितंबर 2024 की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला पाकिस्तान के सिंध प्रान्त का है। यहाँ के हुंगुरु गाँव से बुधवार (11 सितंबर) को 16 साल की एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर लिया गया था। पीड़िता के परिजनों की कहीं प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो वो अपनी तरफ से खोजबीन में जुट गए। इसी दौरान उनको पता चला कि उनकी बेटी का निकाह आनन-फानन में दोगुनी उम्र के मुस्लिम व्यक्ति के साथ कर दिया गया है।

परिजनों को यह भी पता चला कि गुरुवार (12 सितंबर) को पीड़िता को एक मदरसे के अंदर इस्लाम कबूल करवाया जाएगा। लड़की के परिजनों ने जैसे-तैसे मदरसे का पता लगाया और वहाँ अपनी बेटी को बचाने पहुँचे, लेकिन मदरसे के बाहर पहुँचने के बाद भी वो इस्लामी कट्टरपंथियों से जीत नहीं पाए। मदरसे के बाहर लड़की की माँ और पिता मिन्नत करते रह गए पर उन्हें उनकी बेटी से मिलवाया तक नहीं गया। मौलवी ने पीड़िता के घर वालों को भगा दिया। इसी के साथ लड़की को इस्लाम कबूल करवा दिया गया।

पाकिस्तान दारावर इत्तेहाद संगठन के प्रमुख शिवा फकीर काची ने आरोप लगाया है कि वहाँ हिन्दू लड़कियों के साथ ऐसी गंभीर घटनाएँ अब आम बात जैसी हो गईं हैं। उन्होंने हिन्दुओं को गरीब बताया जिसकी वजह से उनकी महिलाओं को कट्टरपंथी टारगेट करते हैं। बताते चलें कि बुधवार (11 सितंबर) को हैदराबाद के एक सेशन कोर्ट ने एक हिन्दू लड़की को उसके परिवार के साथ फिर से मिलाने का आदेश दिया था। पीड़िता का 2023 में हैदराबाद से अपहरण कर लिया गया था। बाद में लड़की को इस्लाम कबूल कराया गया था और फिर एक उम्रदराज मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करवा दिया गया था।

24 घंटे में 3 आतंकी ढेर, 2 जवान बलिदान: PM मोदी की डोडा में पहली रैली से पहले जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और बारामूला में मुठभेड़

जम्मू-कश्मीर के डोडा में होने जा रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक रैली से पहले वहाँ आतंकियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़ जारी है। इस क्रम में सुरक्षा जवानों ने तीन आतंकियों को ढेर कर दिया है जबकि 2 हमारे जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। बलिदानियों के नाम नायब सूबेदार विपिन कुमार और सिपाही अरविंद सिंह हैं।

ये मुठभेड़ बारामूला और किश्तवाड़ में हुई है। आतंकियों को पकड़ने के लिए दोनों जगहों पर सेना और पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया। बारामूला के टापर इलाके में 11 बजे मुठभेड़ शुरू हुई थी, जिसके बाद आज सुबह खबर आई कि तीन आतंकियों को मार दिया गया है।

वहीं किश्तवाड़ के नैदघाम गाँव में 13 सितंबर को मुठभेड़ हुई थी। यहाँ सेना को जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों के होने की खुफिया सूचना मिली थी। सेना ने पुलिस के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाया और दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हुई। इस दौरान नायब सूबेदार विपिन कुमार और सिपाही अरविंद सिंह घायल हुए। इलाज के लिए इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वहाँ दोनों जवान वीरगति को प्राप्त हो गए।

इस मुठभेड़ के दौरान एक वीडियो भी सामने आई है। ये वीडियो बारमूला में मारे गए आतंकी की है। ड्रोन फुटेज में वो गोली लगने के बाद जमीन पर तड़पता दिख रहा है। इससे पहले कठुआ में दो आतंकियों को मौत के घाट उतारकर उनके पास से हथियार बरामद किए गए थे। 11 सितंबर को उधमपुर में भी 3 आतंकियों कोको मारा गया था।

‘दो कौड़ी का आदमी… 10 वोट नहीं ले पाया’ : लाइव शो में आनंद रंगनाथन ने लगाई ‘पत्रकार’ आशुतोष को फटकार, बोले- चिल्लाओ मत, मैं तुम्हारा पिता नहीं

‘टाइम्स नाउ नवभारत चैनल’ पर एक लाइव डिबेट के दौरान वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राजनेता आशुतोष और लेखक आनंद रंगनाथन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बहस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर चर्चा के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे बहस एक अलग दिशा में चली गई।

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच डिबेट का मुख्य मुद्दा अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलने से संबंधित था। दोनों पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे थे। इस बीच, बहस का विषय अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गणेश उत्सव के अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ के घर पूजा करने जाने पर आ गया।

लेखक आनंद रंगनाथन ने आशुतोष की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पत्रकार के तौर पर वह जहाँ चाहें, जाने के लिए स्वतंत्र हैं। आनंद रंगनाथन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर पत्रकार के रूप में आशुतोष स्वतंत्र हैं, तो यह नियम अन्य लोगों, खासकर चीफ जस्टिस पर भी लागू होना चाहिए।

इस दौरान बीजेपी की प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने आशुतोष से जुड़ा एक प्रसंग सामने रखा, जिसमें उन्होंने कहा, “मैंने अपनी आँखों से देखा था, जब आप आम आदमी पार्टी में रहते हुए कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन हेड रणदीप सुरजेवाला से मिलने पिछले दरवाजे से चोरों की तरह जाते थे।” दरअसल, आशुतोष ने दावा किया था कि वो अभी भी पत्रकार हैं। उन्होंने कहा ये भी कहा कि वो राजनीति भले छोड़ चुके हैं, लेकिन दलबदलू नहीं हैं। उनके इस दावे पर राधिका खेड़ा ने उन्हें एक्सपोज कर दिया, जिसके बाद वो चिल्लाने लगे। इस पूरी बहस को 3 मिनट के बाद देखा जा सकता है।

बहस के दौरान आशुतोष को आनंद रंगनाथन के लहजे और व्यक्तिगत टिप्पणी पर आपत्ति हुई, जिससे बहस और अधिक गर्म हो गई। आनंद रंगनाथन ने आशुतोष से कहा, “चिल्लाना बंद करो, मैं तुम्हारा पिता नहीं हूँ।” इस टिप्पणी के बाद आशुतोष नाराज हो गए और स्टूडियो में ही आनंद रंगनाथन की ओर बढ़ गए। इस बीच, रंगनाथन ने आशुतोष को बुरी तरह से झिड़क दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘दो कौड़ी का आदमी’ और ’10 वोट भी नहीं ला पाया’ जैसे तमगों के साथ संबोधित किया।

यही नहीं, जब आशुतोष ने हाथापाई की कोशिश की, तो रंगनाथन ने उन्हें ऐसा करके देखने के लिए भी ललकार दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘फर्जी जर्नलिस्ट’ कहकर भी एक्सपोज किया। इसके बाद आशुतोष ने माफी की माँग की, हालाँकि किसी भी पक्ष ने माफी नहीं माँगी।

स्थिति को बिगड़ते देख, शो को होस्ट कर रहीं सीनियर एंकर नाविका कुमार को बीच-बचाव करना पड़ा। उन्होंने दोनों को शांत करने की कोशिश की और स्थिति को संभाला।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच की इस तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस बहस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

बता दें कि आशुतोष कभी टीवी इंडस्ट्री के शीर्ष पत्रकारों में शामिल रहे थे। शुरुआत में उन्हें बहुजन राजनीति के जनक माने जाने वाले मान्यवर कांशीराम से मिले थप्पड़ ने खूब चर्चा दिलाई थी। वो कई बार टीवी डिबेट में बुरी तरह से रो भी चुके हैं। आशुतोष ने बाद में राजनीति ज्वॉइन कर ली थी और लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें बुरी तरह से हार मिली थी। चुनाव के दौरान आशुतोष अपना नाम आशुतोष गुप्ता लिखते थे। फिलहाल वो एक स्वतंत्र न्यूज पोर्टल से जुड़कर काम कर रहे हैं और टीवी चैनलों पर आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस का पक्ष लेकर बोलते सुने जाते हैं।

100+ दिन से अंतरिक्ष में फँसीं सुनीता विलियम्स, बोइंग विमान लौटने के बाद पहली बार की प्रेस कॉन्फ्रेंस: बताया- स्पेस में रहकर करेंगी US के चुनावों में मतदान

नासा के दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर इस समय अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं और वे फरवरी 2024 तक वहीं रहेंगे। इस बीच, अमेरिका में नवंबर 2024 में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। हालाँकि सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर भले ही अंतरिक्ष में हों, फिर भी वो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाली वोटिंग में हिस्सा लेंगे और अपना वोट डालेंगे। नासा के एक विशेष प्रणाली के माध्यम से ये अंतरिक्ष यात्री अपने वोट अंतरिक्ष से ही डाल सकेंगे।

अंतरिक्ष में रहकर अमेरिकी चुनाव के लिए मतदान

नासा के अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) साल 1997 से ही अपने वोट डालते आ रहे हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक बैलट्स भेजे जाते हैं, जिन्हें अंतरिक्ष यात्री भरकर वापस धरती पर भेजते हैं। यह प्रक्रिया काफी सरल है। पहले, बैलट्स को ISS तक भेजा जाता है, जहां अंतरिक्ष यात्री उसे भरते हैं। इसके बाद, भरे हुए बैलट्स को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धरती पर वापस भेजा जाता है, जहाँ इन्हें संबंधित काउंटी क्लर्क द्वारा प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में सुरक्षा के लिए बैलट्स को एन्क्रिप्ट किया जाता है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके।

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का वोटिंग अनुभव

हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बुच विलमोर ने बताया, “मैंने आज अपना बैलट माँगा है। हमें यह कुछ हफ्तों में मिल जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसमें हम सभी नागरिकों के रूप में शामिल होते हैं। हम इसके लिए उत्साहित हैं।”

बता दें कि साल 1997 में टेक्सास के कानून द्वारा यह व्यवस्था की गई थी कि नासा के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में रहते हुए भी अपने वोट डाल सकें। डेविड वुल्फ पहले ऐसे अंतरिक्ष यात्री थे जिन्होंने मीर स्पेस स्टेशन से वोट डाला था।

स्पेस सेंटर में फंसे हैं दोनों अंतरिक्ष यात्री

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर दोनों ही नासा के अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और दोनों ने हमेशा अंतरिक्ष को अपना ‘खुशहाल स्थान’ बताया है। हालाँकि, हाल ही में उन्होंने स्वीकार किया कि बीते कुछ महीनों में उनके लिए समय कठिन रहा है। बोइंग के स्टारलाइनर यान में आई तकनीकी समस्याओं के कारण वे ISS में फंसे हुए हैं। एक हफ्ते का परीक्षण मिशन कई महीनों तक खिंच गया और वे अगले साल फरवरी तक अंतरिक्ष में रहेंगे।

विलमोर ने बताया, “पिछले तीन महीनों का सफर कठिन रहा है। हमने हर कदम पर अपने यान की समस्याओं का आकलन किया है। यह कभी-कभी काफी मुश्किल हो जाता था।” सुनीता विलियम्स ने कहा कि उन्हें ISS पर रहने में कोई विशेष कठिनाई नहीं हुई, क्योंकि उनका पहले से ही यहाँ रहने का अनुभव है।

विलमोर ने यह भी बताया कि बोइंग को अपने यान में कुछ सुधार करने होंगे, लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि बोइंग और पूरी टीम इसे सफलतापूर्वक पूरा करेगी। उन्होंने कहा, “जब आप स्पेसक्राफ्ट के साथ ऐसे नए काम करते हैं जो पहले कभी नहीं किए गए, तो कुछ नई चुनौतियाँ जरूर सामने आती हैं।”

नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर भले ही अंतरिक्ष में फंसे हों, लेकिन वे अमेरिकी लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाने के लिए तैयार हैं। नासा की यह विशेष वोटिंग प्रणाली उन्हें यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि वे अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन कर सकें, चाहे वे धरती पर हों या अंतरिक्ष में।

गौरतलब है कि सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 5 जून से अंतरिक्ष में हैं। अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर पिछले 3 महीने से ज्यादा समय से स्पेस में फंसे हुए हैं। वहीं, दूसरी तरफ जिस स्पेसक्राफ्ट स्टारलाइनर में वो दोनों इंटरनेशनल स्पेश स्टेशन गए थे, वह अब उन दोनों के बिना वापस आ चुका है।