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‘राहुल गाँधी की सभा में मौजूद थे कई खालिस्तानी’: कॉन्ग्रेस नेता के लिए SFJ का उमड़ा प्रेम, आतंकी पन्नू ने पगड़ी-कड़ा वाले बयान का किया समर्थन

खालिस्तानी आतंकी गुरवतपंत सिंह पन्नू के संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने राहुल गाँधी का समर्थन किया है। SFJ ने राहुल गाँधी के सिखों पर दिए गए उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें राहुल ने कहा था कि भारत में सिखों को पगड़ी और कड़ा पहनने की लड़ाई है। SFJ ने यह भी दावा किया है कि राहुल गाँधी के साथ अमेरिका में कई खालिस्तान समर्थन मौजूद थे।

SFJ ने राहुल गाँधी के बयान का समर्थन करने वाला अपना एक पत्र जारी किया है। गुरवतपंत सिंह पन्नू द्वारा जारी किए गए इस पत्र में SFJ ने कहा, “वाशिंगटन डीसी में एक सभा को संबोधित करते हुए, जहाँ कई खालिस्तान समर्थक सिख भी मौजूद थे, राहुल गाँधी ने SFJ के खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह अभियान को उचित ठहराया है। उनका यह कहना ‘भारत में लड़ाई इस बात की है क्या एक सिख को पगड़ी और कड़ा पहनने की अनुमति होगी, और क्या वह गुरुद्वारा जा सकेगा’ हमारी बात का समर्थन है।”

राहुल गाँधी SFJ
SFJ का बयान

SFJ ने आगे कहा, “भारत में सिखों के अस्तित्व पर खतरे वाला राहुल का बयान साहसी और बोल्ड है बल्कि 1947 से सिखों पर भारत में हुए अत्याचार की बात को मजबूत करता है। यह बयान तथ्यात्मक इतिहास पर आधारित है और सिखों के देश खालिस्तान बनाने के लिए पंजाब में स्वतंत्रता जनमत संग्रह पर SFJ के रवैये को सही ठहराता है।”

हमेशा भारत तोड़ने की बात करने वाले खालिस्तानी आतंकी गुरवतपंत सिंह पन्नू का राहुल गाँधी के लिए यह प्रेम उनके हालिया बयान के बाद उमड़ा है। राहुल गाँधी ने अपने अमेरिका दौरे में वर्जीनिया में कहा था, “भारत में लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या एक सिख को भारत में पगड़ी पहनने की इजाजत दी जाएगी? क्या एक सिख को भारत में कड़ा पहनने की इजाजत दी जाएगी या वह गुरुद्वारा जा सकेगा? लड़ाई इसी बात को लेकर है और यह सिर्फ सिखों के लिए नहीं है, यह सभी धर्मों के लिए है।”

देश को तोड़ने और भारत में सिखों को प्रताड़ित बताने वाले खालिस्तानी आतंकियों के लिए यह सुनहरा मौक़ा बन गया है। भारत के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी पार्टी के डी फैक्टो मुखिया का उनके भारत विरोधी एजेंडे को मजबूत करने में यह बयान एक संजीवनी की तरह काम आएगा। SFJ का राहुल को साहसी बताना इसी कड़ी का एक हिस्सा है। SFJ ने यह दावा भी किया है कि राहुल गाँधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में खालिस्तानी शामिल थे। इससे राहुल के कार्यक्रमों की मंशा पर संशय पैदा होता है।

राहुल गाँधी के तथ्यों से परे इस बयान पर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। भाजपा नेता RP सिंह ने उन्हें इस मामले को लेकर कोर्ट में घसीटने की चुनौती भी दी है। कई लोगों ने उन्हें याद दिलाया है कि भारत में सिखों के लिए सबसे अधिक खतरा तब पैदा हुआ था जब उनके पिता राजीव गाँधी देश के प्रधानमंत्री थे और इस दौरान सिखों का खुलेआम नरसंहार हुआ था।

राहुल गाँधी के इस बयान पर लोगों ने यह भी याद दिलाया कि राजीव गाँधी ने कहा था, “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास की धरती हिलती है।” उनका यह बयान हिंसा के समर्थन के रूप में देखा जाता है। कॉन्ग्रेस के ही कई नेताओं कमलनाथ, जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह पर सिख विरोधी दंगे भड़काने का आरोप है।

सगा भाई ही जिसका शौहर, जो भारत-हिंदुओं से रखती है नफरत, अमेरिका की उस महिला सांसद से मिले राहुल गाँधी: डोनाल्ड लू से भी कॉन्ग्रेस नेता की मुलाकात

अमेरिकी दौरे पर गए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने जिन लोगों से मुलाकात की है, उनमें इल्हान उमर (Ilhan Omar) भी शामिल हैं। उमर अमेरिकी संसद के निचले सदन की सदस्य हैं। इस्लामपरस्ती ही उनकी पहचान है। भारत और हिंदुओं से घृणा को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं।

इल्हान उमर अमेरिकी सांसदों के उस समूह का हिस्सा थीं जिसने वाशिंगटन डीसी के रेबर्न हाउस में कॉन्ग्रेस नेता के साथ बैठक की। इसकी मेजबानी अमेरिकी सांसद ब्रेडली जेम्स शेरमन ने की। उमर के अलावा इस बैठक में सांसद जोनाथन जैकसन, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, बारबरा ली, श्री थानेदार, जीसस जी ग्रासिया, हैंक जॉनसन और जैन शाकोवस्की भी शामिल थे।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार सूत्रों ने बताया है कि राहुल गाँधी ने अमेरिकी राजनयिक डोनाल्ड लू से भी मुलाकात की है। डोनाल्ड लू को तिकड़मों से दूसरे देशों की सरकार गिराने के लिए जाना जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया है कि डोनाल्ड लू 10-16 सितंबर के बीच भारत और बांग्लादेश की यात्रा करेंगे।

विपक्ष का नेता बनने के बाद राहुल गाँधी की यह पहली अमेरिकी यात्रा है। इस दौरान उन्होंने अपने ही देश और उसकी सरकार को बदनाम करने के लिए कई प्रोपेगेंडा को विदेशी जमीन से हवा दी है। यहाँ तक कि खालिस्तानी आतंकियों के सुर में सुर मिलाते हुए यह बताने की कोशिश की है कि भारत में सिखों को पगड़ी पहनने की इजाजत नहीं है। उन्हें गुरुद्वारा नहीं जाने दिया जा रहा है।

इन बयानों के बाद राहुल गाँधी की इल्हान उमर और डोनाल्ड लू के साथ मुलाकात भी विवादों में आ गई है। यदि उमर और लू के अतीत पर गौर करें तो यह मुलाकात भारतीय हितों के अनुकूल नहीं लगती हैं। भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का कहना है कि इल्हान उमर के साथ मुलाकात से स्पष्ट है कि राहुल गाँधी भारत विरोधी लोगों के साथ हैं। कॉन्ग्रेस नेता ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर उनका मनोबल बढ़ाते हैं।

कौन हैं इल्हान उमर

जैसे भारत में संसद के उच्च सदन को राज्यसभा और निचले सदन को लोकसभा कहते हैं, उसी तरह अमेरिका में उच्च सदन को सीनेट और निचले सदन को प्रतिनिधि सभा या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव कहते हैं। इल्हान उमर, अमेरिकी संसद के निचले सदन की सदस्य हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी से नाता रखती हैं।

अफ्रीकी मूल की इस अमेरिकी महिला सांसद के बयानों में भारत के प्रति घृणा और पाकिस्तानपरस्ती साफ दिखती है। वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) का दौरा कर चुकी हैं। तब आंतकियों को संरक्षण देने वाले हमारे पड़ोसी मुल्क ने उनका जोरदार स्वागत किया था। हालाँकि, भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली अमेरिकी सांसद के इस दौरे का ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी विरोध किया था। भारत ने उनकी इस यात्रा को निंदनीय बताया, जबकि अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने उनके पीओके दौरे को व्यक्तिगत गतिविधि बताकर खुद को उनसे अलग कर लिया था।

पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर

इल्हान उमर की पैदाइश सोमालिया की है। कट्टरपंथी इस्लामी विचार रखती हैं। हालिया पाकिस्तान दौरे में इमरान खान से मिलीं। उनकी जमकर तरीफ की। इमरान ने भी उमर की ‘इस्लामोफोबिया के मुद्दों पर साहसी और सैद्धांतिक रुख’ की सराहना की। उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति सुल्तान महमूद चौधरी और पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से भी मुलाकात की और जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर चर्चा की। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने उमर को एजेंडावादी बताते हुई जबर्दस्त फटकार लगाई थी। उन्हें संकीर्ण सोच वाली नेता बताते हुए कहा कि भारत क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा।

मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी हैं इल्हान उमर

इल्हान उमर को मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल है। उमर पर इस्लामी एजेंडा इस कदर हावी है कि वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की भी परवाह नहीं करती हैं। दुनियाभर में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। मुस्लिम देशों से उनकी मोहब्बत और भारत के प्रति उनकी घृणा किसी से भी छिपी नहीं है।

कश्मीर, भारतीय मुस्लिमों, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इल्हान उमर कई विवादित बयान दे चुकी हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत सोशल मीडिया पर जगजाहिर है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी संसद में यहाँ तक कह दिया था कि आखिर मोदी सरकार मुस्लिमों के खिलाफ और कितने जुल्म करेगी जिसके बाद बाइडन प्रशासन कुछ कहेगा?

इल्हान उमर के बारे में बताया जाता है कि वो पहली अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद में पहुँची हैं। उमर 2019 में मिनिसोटा से सांसद चुनी गई थीं। इस संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम-अमेरिकी महिलाओं में भी शामिल हैं।

उमर के परिवार ने गृहयुद्ध के कारण सोमालिया छोड़ दिया था, उस वक्त उमर महज आठ वर्ष की थीं। उनके परिवार ने केन्या के शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए और फिर 1990 के दशक में अमेरिका आए। दादा ने उमर को उनकी किशोरावस्था में ही राजनीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। वह 2016 में चुनाव जीतकर मिनिसोटा की प्रतिनिधि सभा पहुँची और तीन साल बाद 2019 में वो अमेरिकी संसद के लिए चुनी गईं।

गैर मुस्लिमों से नफरत

सोमालिया में ही पैदा हुईं मानवाधिकार कार्यकर्ता अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) ने 12 जुलाई 2019 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में Can Ilhan Omar Overcome Her Prejudice? शीर्षक से लिखे लेख में कहा था, “किसी के मन में किसी के प्रति प्रति नफरत घर कर जाए तो उससे उबरना मुश्किल होता है। इल्हान उमर के साथ भी यही बात लागू है।”

अयान के मुताबिक, इल्हान उमर उन मुस्लिमों में शामिल हैं, जो दुनिया में जो भी गलत हो रहा है, उसके लिए एकमात्र दोषी यहूदियों को मानती हैं। उनमें गैर-मुसलमानों के प्रति भी नफरत कूट-कूटकर भरी है, क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है। वहीं, भारत में काफी चर्चित पाकिस्तानी मूल के लेखक और पत्रकार तारेक फतेह भी इल्हान उमर को भारत विरोधी कट्टर इस्लामवादी करार दे चुके हैं।

इल्हान उमर के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बातें स्वतंत्रता-समानता की करती हैं, लेकिन कट्टर इस्लाम के प्रति उनका झुकाव साफ-साफ झलकता है। वे बुर्का, हिजाब की जबर्दस्त पैरोकार हैं। उन्होंने ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन की मंजूरी भी मिल गई।

लेकिन, उनके इस कदम की रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस का चुनाव लड़ चुकीं एक और मुस्लिम नेता डालिया अल-अकिदी (Dalia Al-Aqidi) ने जबर्दस्त विरोध किया था। उन्होंने अरब न्यूज में एक लेख लिखकर पूछा है कि क्या इस्लाम के नाम पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों को मुस्लिम आतंकी कहना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आएगा?

सगे भाई ही इल्हान उमर के शौहर

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, “इल्हान उमर को अमेरिका, यहाँ के शासन-प्रशासन और यहाँ के लोगों से नफरत है। वह हमारे देश से घृणा करती हैं। वह ऐसी जगह से आई हैं जहाँ सरकार है ही नहीं और यहाँ आकर हमें ही ज्ञान दे रही हैं कि अपना देश कैसे चलाना चाहिए?”

यही नहीं ट्रंप ने कई बार कहा था कि इल्हान के दूसरा पति अहमद इल्मी और कोई नहीं उनका सगा भाई ही है। ट्रंप ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक प्रचार अभियान में जस्टिस डिपार्टमेंट से इसकी जाँच करने की माँग भी की थी। इसकी पुष्टि तब हुई जब ट्रंप की पार्टी के एक रणनीतिकार ने पिछले वर्ष अगस्त में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी।

डीएनए के कई टेस्ट में उमर इल्हान और अहमद इल्मी के सगे बहन-भाई होने का सौ फीसदी मिलान हुआ था। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमाली समुदाय के नेता ने भी खुलासा किया था कि इल्हान उमर ने अपने भाई से निकाह किया है।

हिंदू की दुकान में आईं मुस्लिम औरतें, अपने बच्चों से तुड़वाई भगवान की मूर्तियाँ: उसी सूरत की घटना जहाँ गणेश पूजा पर हुई पत्थरबाजी, लाइमा शेख-रुबिका पठान गिरफ्तार

सूरत के सैयदपुरा में गणेशोत्सव में इस्लामी भीड़ की हिंसा के बाद एक और हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली घटना हुई है। सूरत में मुस्लिम महिलाओं ने मूर्ति की एक दुकान में घुस कर भगवान गणेश की दो मूर्तियाँ तोड़ी। इसके लिए उन्होंने अपने नाबालिग बच्चों को सहारा लिया। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, विशाल हीरालाल खलासी सूरत के अठवा इलाके के सोनी पालिया बाजार में गणपति मूर्तियाँ बेचता है। यहाँ कुछ दिन पहले लाइमा सलीम शेख और रुबिका इरफान पठान अपने दो छोटे बच्चों के साथ उसकी दुकान पर आईं। इन दोनों मुस्लिम महिलाओं ने इसके बाद अपने नाबालिग बच्चों को उकसाया और दुकान में रखीं गणेश मूर्तियाँ तुड़वा दी।

इस घटना से के कारण दुकानदार को ₹60 हजार का नुकसान हुआ। इन दोनों ने यह घटना जानबूझ कर की, उनकी इस हरकत के कारण हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। सूरत पुलिस (Surat Police) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस जाँच में सामने आया है कि यह दोनों मुस्लिम महिलाएँ फुटपाथ पुल पर रहती हैं और भीख माँग कर अपना गुजारा करती हैं। इस मामले में पूछताछ से पता चला कि इन दोनों ने अपने 5-6 साल के नाबालिग बच्चों को दुकान के भीतर उकसाया और फिर इन बच्चों ने दुकान के भीतर 10 मूर्तियाँ तोड़ दी।

पुलिस ने सैयदपुरा की घटना के बाद तनाव की स्थिति को देखते हुए इस घटना की आरोपित महिलाओं को आनन-फानन में पकड़ लिया। इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई चल रही है। पुलिस मामले में आगे जाँच कर रही है और यह दोनों महिलाएँ वर्तमान में हिरासत में हैं।

वडोदरा में भी कई गणेश प्रतिमाएं तोड़ी गईं

गौरतलब है कि सूरत के अलावा वडोदरा में भी गणेश प्रतिमाओं को तोड़ने की कई घटनाएँ हो चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, वडोदरा के अलग-अलग इलाकों में तीन ऐसी घटनाएँ हुई हैं, जिसमें गणेश पंडाल में जाकर गणेश प्रतिमाओं को खंडित किया गया है। यह बात सामने आई है कि वडोदरा के राजमहल रोड और डांडिया इलाके में 3 गणेश पंडाल की मूर्तियाँ तोड़ी गईं। रणछोड़ युवक मंडल, प्रगति युवक मंडल और खड़िया पोल युवक मंडल की मूर्तियों को तोड़े जाने से यहाँ के हिन्दू आक्रोशित हैं।

बताया गया कि इन पंडालों में रात के समय कुछ अज्ञात व्यक्ति आए और गणपति की मूर्तियों को खंडित कर दिया। यह सभी CCTV कैमरे में भी कैद हुए हैं। इन पंडालों से कई सामान चोरी होने की घटनाएँ सामने आई हैं। इसको लेकर FIR दर्ज करवाई गई हैं। पुलिस अभी इन मामलों में जाँच कर रही है।

भारत आ रहा है डोनाल्ड लू, जिस बांग्लादेश में लगाई आग वहाँ भी जाएगा: जानिए कौन है अमेरिका का बदनाम डिप्लोमेट, USAID की पॉलिसी को बढ़ाता है ‘तख्तापलट का मास्टर’

कई देशों में तिकड़म से सरकारों को गिराने के मास्टर माने वाले अमेरिकी राजनयिक डोनाल्ड लू भारत आ रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने उनकी भारत यात्रा का ऐलान किया है। डोनाल्ड लू भारत के बाद बांग्लादेश भी जाएँगे। अमेरिका ने उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के ‘सहयोग’ में बढ़ोतरी का बताया है। हालाँकि, लू का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वह जिस भी देश में पाँव रखते हैं वहाँ कुछ दिनों बाद सत्ता परिवर्तन की कोशिश होती है। बांग्लादेश और श्रीलंका इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार (10 सितम्बर, 2024) को एक प्रेस रिलीज जारी करके बताया कि डोनाल्ड लू 10-16 सितम्बर (भारत में यह तारीख 11 सितम्बर होगी) के बीच होगी। यह जानकारी नहीं दी गई है कि डोनाल्ड लू कितने दिन भारत में रहेंगे और कितने दिन बांग्लादेश में होगी। डोनाल्ड लू की इस यात्रा को लेकर विदेश विभाग ने बताया कि वह यहाँ इंडिया आइडियाज समिट में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा वह अमेरिका और भारत के 2+2 बातचीत में हिस्सा लेंगे।

इस बातचीत में उनके साथ भारतीय विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से लोग शामिल होंगे। इस मुलाक़ात में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर बातचीत होगी। इसके बाद डोनाल्ड लू बांग्लादेश की यात्रा करेंगे। यहाँ वह शेख हसीना के तख्तापलट के बाद लाई गई अंतरिम सरकार से मिलेंगे। प्रेस रिलीज में बताया गया है कि यहाँ डोनाल्ड लू अमेरिका और बांग्लादेश के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर बात करेंगे।

डोनाल्ड लू की यात्रा से विदेश मामलों में रूचि रखने वाला एक बड़ा तबका सशंकित है। यह डोनाल्ड लू के ट्रैक रिकॉर्ड के चलते है। लू को ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखा जाता है जो उन देशों में सत्ता बदलने का मास्टर है जो अमेरिकी दबाव में नहीं आते। उनकी बांग्लादेश और श्रीलंका समेत कई देशों में गतिविधियाँ संदिग्ध रही हैं।

कौन हैं डोनाल्ड लू, बीच चुनाव में किया था भारत का दौरा

डोनाल्ड लू अमेरिका के एक राजनयिक हैं, जो फ़िलहाल दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों में एसिस्टेंट सेक्रेटरी हैं। इससे पहले वह अल्बानिया और किर्गिस्तान में अमेरिका का राजदूत रहे हैं। पुणे स्थित ‘ग्लोबल स्ट्रैटेजी फाउंडेशन’ के संस्थापक डॉ अनंत भागवत ने मई 2024 में कहा था कि भारत में डोनाल्ड लू घृणा की विषयवस्तु बनते हैं, क्योंकि वो भारतीय लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने का प्रयास करते हैं।

जनवरी 2023 में खबर आई थी कि भारत के विपक्षी नेता राहुल गाँधी ने अमेरिका स्थित ‘व्हाइट हाउस’ में एक गुप्त बैठक की थी। बताया जाता है कि डोनाल्ड लू भी वहाँ मौजूद थे। हालाँकि, भारत के विदेश मंत्रालय के पास इससे संबंधित कोई जानकारी नहीं थी। अमेरिका पूरी दुनिया के मानवाधिकार का ठेका लेकर भी बैठा रहता है। डोनाल्ड लू ने भी भारत में मोदी सरकार के कार्यकाल में मानवाधिकार को लेकर चिंता जताई थी।

भारत में कई लोगों के कान तब खड़े हो गए थे, जब लोकसभा चुनाव 2024 के बीच में डोनाल्ड लू यहाँ के दौरे पर पहुँचे। उस दौरान वो बांग्लादेश और श्रीलंका भी गए थे। डॉ अनंत भागवत ने तब कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन का प्रशासन भारत के एक स्थिर सरकार नहीं चाहता है, क्योंकि मोदी सरकार के एक दशक में भारत की विदेश नीति मजबूत रही है, अपनी शर्तों पर चलती रही है, स्थिर रही है।

डोनाल्ड लू चुनाव के बीच राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई पहुँचते हैं जहाँ द्रविड़ राजनीति का बोलबाला है और भाजपा लड़ाई में नहीं रहती। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK नेताओं की तरफ से ही देश को खंडित कर के एक अलग देश ‘द्रविड़नाडु’ की माँग होती रही है। अमेरिका की तरफ से एक बयान में कहा गया कि ‘दक्षिण भारत से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने’ के लिए वो चेन्नई गए थे।

वो बांग्लादेश भी गए थे, जहाँ शेख हसीना चौथी बार जीत कर लौटी थीं। बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत पीटर हास पर वहाँ की विपक्षी पार्टी BNP के समर्थन के आरोप लग चुके हैं, जिसने चुनाव का बहिष्कार किया था। शेख हसीना के करीबियों का तब मानना था कि अमेरिका लगातार ढाका को चीन के खिलाफ लॉबिंग में शामिल करना चाहता है। इंडो-पैसिफिक में अमेरिका लगातार बांग्लादेश को पूरी तरह अपनी तरफ करने में लगा हुआ था।

बांग्लादेश में भी मानवाधिकार को लेकर अमेरिका ने चिंताएँ जताई थीं, चुनाव से पहले। मार्च 2023 में जब अमेरिका की ‘सीनेट फॉरेन अफेयर्स कमिटी’ के समक्ष डोनाल्ड लू पेश हुए थे, तब भी उन्होंने भारत में मानवाधिकार को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव का ना होना और ‘जारी मानवाधिकार हनन’ पर चिंता जाहिर की थी।

जम्मू कश्मीर को लेकर भी डोनाल्ड लू ‘चिंतित’

जबसे जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 व 35A को निरस्त कर उसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। इसके बाद वहाँ पत्थरबाजी की घटनाएँ कम हुई हैं, एक साल में 2 करोड़ से अधिक लोग पर्यटन के लिए पहुँचे हैं। अब यहाँ चुनाव भी करवाए जा रहे हैं।

डोनाल्ड लू ने कहा था, “हम पूरे देश में मुस्लिमों व अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भेदभाव की के साथ-साथ NGOs को प्रतिबंधित किए जाने की खबरों पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं। ये महत्वपूर्ण है कि एक साझेदार के रूप में हम भारत में परेशान करने वाली घटनाओं को लेकर आवाज़ उठाएँ।” साथ ही ताइवान-भारत के संबंधों को लेकर भी डोनाल्ड लू ने बयान दिया था।

उन्होंने कहा था कि ताइवान के नियंत्रण वाले समुद्री क्षेत्र में भारत के जहाज देखे गए हैं और ये ताइवान की सुरक्षा को लेकर उसे आश्वासन देने के बीच प्रतीकात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। साफ़ है, अमेरिका एक तरह से भारत को चीन के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। उन्होंने जम्मू कश्मीर में ‘बड़े पत्रकारों’ को गिरफ्तार किए जाने का दावा किया था। साथ ही कहा था कि अमेरिका इस मामले में भारत पर दबाव बनाएगा कि वो कश्मीरियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे।

बता दें कि कश्मीर में अब तक 70 सरकारी कर्मचारी आतंकियों की मदद करने को लेकर बरख़ास्त किए जा चुके हैं। कार्रवाई उन्हीं पर की जाती है, जो देश के खिलाफ काम में लिप्त रहते हैं। जैसे, ‘कश्मीर वाला’ नामक मीडिया संस्थान के संपादक को जेल हुई क्योंकि फहद शाह ने आतंकवाद का महिमामंडन किया था। बताइए, क्या किसी अन्य देश को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार है? पाकिस्तान में भी अप्रैल 2022 में चुने हुए प्रधानमंत्री इमरान खान को अपदस्थ कर के अस्थायी सरकार बनाई गई जिसमें कई दलों का गठबंधन शामिल था।

पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका…

खुद इमरान खान आरोप लगा चुके हैं कि विदेशी हस्तक्षेप से उन्हें हटाया गया और इसमें डोनाल्ड लू का हाथ था। बताया जाता है कि यूक्रेन से युद्ध के बीच अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इमरान खान उससे संबंध बढ़ा रहे थे, इसीलिए USA नाराज़ था। डोनाल्ड लू ने इस पर सवाल किए जाने पर इसे पूरी तरह झूठ और ‘कंस्पिरेसी थ्योरी’ बताया था। उन्होंने इस आरोप को एकदम नकार दिया था। इन सबसे पता चलता है कि दक्षिण एशिया में अमेरिका का ‘डीप स्टेट’ अपना हस्तक्षेप बढ़ाना चाहता है।

डोनाल्ड लू ने बांग्लादेश में ‘राजनीतिक सुधारों’ की भी बात की थी, साथ ही खालिदा जिया को अमेरिकी समर्थन पर वहाँ शेख हसीना की पार्टी ‘आवामी लीग’ ने आवाज़ उठाई थी। आज वहाँ ‘आवामी लीग’ के नेताओं को मारा जा रहा है, हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं और शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी है। अब आता है श्रीलंका। श्रीलंका अमेरिका-चीन के खेल में फँस गया।

हमने जुलाई 2022 में श्रीलंका में वही तस्वीरें देखी थीं जो आज बांग्लादेश में देख रहे हैं। तब श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन में घुस कर प्रदर्शनकारी स्विमिंग पूल में नहा रहे थे। श्रीलंका पर चीन का कर्ज बढ़ता चला जा रहा है, हुए वहाँ चीनी प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका बेचैन था।

इस साल डोनाल्ड लू ने दावा किया है कि श्रीलंका अब वापसी कर रहा है। श्रीलंका में भी विरोध प्रदर्शनों के परिणाम वही हुए थे, गोटाभया राजपक्षे को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा था और देश छोड़ना पड़ा था। जबकि उनके भाई महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था।

आज कोलम्बो वेस्ट टर्मिनल पोर्ट के लिए अमेरिका फंडिंग कर रहा है। ‘नए’ श्रीलंका की तारीफ़ करते हुए डोनाल्ड लू ने भारत-बांग्लादेश को रोहिंग्या को लेकर चेताया था। बता दें कि रोहिंग्या घुसपैठिए एक बड़ी समस्या हैं भारत के लिए, वो यहाँ आकर अपराध करते हैं और कइयों ने भी फर्जी दस्तावेज तक बना लिए हैं।

USAID के माध्यम से श्रीलंका को वित्तीय सहायता दी गई। USAID ‘अंतरराष्ट्रीय विकास’ की संस्था है, हालाँकि, इस पर सत्ता परिवर्तन के लिए फंडिंग के आरोप भी लगते रहे हैं। अब सवाल उठता है कि क्या डोनाल्ड लू भारत में भी ऐसा ही कुछ करना चाहते हैं जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका में हुआ? भारत में ये बहुत मुश्किल है क्योंकि ये एक विशाल देश है जहाँ सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था है। यहाँ हर क्षेत्र में लोगों की आय के स्रोत और प्राथमिकताएँ बदलती रहती हैं, कृषि ही एक ऐसा पेशा है जो पूरे देश को एक करता है।

भारत में मोदी सरकार से दिक्कत

फिर भी, अमेरिका का डीप स्टेट भारत में एक मजबूत मोदी सरकार की जगह गठबंधन वाली भाजपा विरोधी सरकार को प्राथमिकता देगा। इसके लिए माहौल बनाया जाना शुरू हो गया है। ‘अग्निवीर’ को लेकर भ्रम फैलाया गया, संसद में खुलेआम झूठ बोला गया।

जाति जनगणना को लेकर हिन्दुओं को बाँटने का प्रयास किया गया। संसद में राहुल गाँधी ने कहा कि वो जाति जनगणना करा के रहेंगे। ‘किसान आंदोलन’ के दौरान हमने लाल किले पर खालिस्तानी झंडा देखा था, 1 साल तक दिल्ली की सीमाओं को घेर कर रखा गया था। आज भी कई किसान पंजाब-हरियाणा के शम्भू बॉर्डर पर बैठे हुए हैं।

ये सभी ऐसे मुद्दे हैं, जिनका इस्तेमाल कर के देश की जनता के एक बड़े वर्ग को भड़काया जा सकता है। पत्रकार हर विरोध प्रदर्शन पर सवाल पूछने पहुँच जाते हैं अमेरिकी राजनयिकों से, यहाँ तक कि कंगाल पाकिस्तान के पत्रकार भी UN में भारत के मुद्दों को लेकर बड़े चिंतित रहते हैं।

खासकर जब अमेरिका ने डोनाल्ड लू जैसे अधिकारी को लगा रखा हो, तो शक की गुंजाइश तो रहती ही है। अब अल्बानिया में उनके कार्यकाल को ही ले लीजिए। उस दौरान भी उन्होंने वहाँ की सरकार को उखाड़ फेंकने की बात की थी। उन्होंने जनता को नेताओं से सवाल पूछने और सरकार बदल डालने के लिए कहा था।

अल्बानिया-किर्गिस्तान में भी राजदूत रहते दिखाया ‘कमाल’

संसदीय से लेकर न्यायिक सुधारों की बात करते हुए उन्होंने अल्बानिया के युवाओं को कहा था कि वो अपने अभिभावकों से अच्छा जीवन जीने के लिए अपनी सरकार पर दबाव बनाएँ। इतना ही नहीं, अमेरिकी राजदूत ने तब छोटे से देश अल्बानिया के कई शहरों में घूम-घूम कर युवाओं से बातचीत की थी

इसी तरह जब डोनाल्ड लू किर्गिस्तान में अमेरिकी राजदूत थे, तब वहाँ भी राजनीतिक तनाव का दौर चल रहा था। 2018 से 2021 तक वो वहाँ रहे, और किर्गिस्तान में उस दौरान एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। जून 2019 में सांसदों ने तत्कालीन राष्ट्रपति सूरोनबे शिरिपोविच जीनबेकोव पर आपराधिक मामला चलाने के लिए वोट किया।

2020 में उन्हें आखिरकार इस्तीफा देना पड़ा था, क्योंकि उनके खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। वहाँ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। अक्टूबर 2020 में हुए चुनावों में धाँधली के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि राष्ट्रपति सूरोनबे शिरिपोविच जीनबेकोव पर इस्तीफे को लेकर दबाव बनाने में अमेरिका का भी हाथ था।

अल्बानिया में तो अभी भी वहाँ के प्रधानमंत्री एडी रामा को हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। कई शहरों में प्रदर्शनों को रोकने के लिए बल-प्रयोग करना पड़ा। इस तरह डोनाल्ड लू का कनेक्शन किर्गिस्तान-अल्बानिया में तनाव से भी है। अब भारत में उसकी गतिविधियाँ क्या रहती हैं और वह किनसे मिलता है, यह देखने वाला होगा।

झारखंड में बजरंगबली के मंदिर में फेंका गया माँस, मजीद मियाँ के घर वालों पर आरोप: हिन्दू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने 4 को किया गिरफ्तार

झारखंड के धनबाद में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ बजरंग बली के मंदिर में मांस का टुकड़ा देख कर हिन्दू समाज के लोग आक्रोशित हो गए। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालात सँभाला। स्थानीय लोगों ने इस हरकत का आरोप मजीद मियाँ, मोइन मियाँ, रेहान मियाँ, गुलशन खातून और फैज मियाँ समेत 15-20 अन्य अज्ञात लोगों पर लगाया है। पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर के पूछताछ शुरू कर दी है। घटना सोमवार (9 सितंबर, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला धनबाद के थाना क्षेत्र चिरकुंडा का है। यहाँ के बाबूडंगाल सीएमडब्ल्यूओ कॉलोनी में बजरंगबली का मंदिर है। यह मंदिर आसपास के लोगों की आस्था का केंद्र है। मंगलवार को यहाँ सामान्य दिनों से अधिक भीड़ होती है। बताया जा रहा है कि सोमवार की रात इस मंदिर में कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल खराब करने के लिए माँस का टुकड़ा फेंक दिया। अगले दिन मंगलवार (10 सितंबर 2024) की सुबह जब मंदिर में श्रद्धालु पहुँचे तो वो आक्रोशित हो गए।

थोड़े ही समय में आसपास यह खबर फैल गई तो लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया। मामले की जानकारी होते ही हिन्दू संगठन से जुड़े लोग भी वहाँ पहुँच गए। इन सभी का आरोप था कि सोमवार को मंदिर के ही पास रहने वाले मजीद मियाँ के घर में शादी थी। इसी शादी में बने नॉनवेज का टुकड़ा किसी ने फेंक कर माहौल खराब करने की कोशिश की। आरोपितों के तौर पर मजीद मियां, मोइन मियां, रेहान मियां, गुलशन खातून, फैज मियां समेत 15-20 अज्ञात लड़कों के नाम लिए गए।

मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस बल पहुँच गया। प्रशासन ने नाराज लोगों को समझा-बुझा कर शांत करवाया। मंदिर परिसर को साफ करवाया गया। इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अब तक 4 संदिग्ध आरोपितों को गिरफ्तार कर के पूछताछ की जा रही है। लोगों का कहना है कि आरोपितों की तरफ से ऐसी हरकतें पहले भी की जा चुकी हैं। हालाँकि मजीद मियाँ का परिवार इस घटना में अपनी संलिप्तता होने से इंकार कर रहा है।

‘अजान से 5 मिनट पहले बंद करो पूजा-पाठ, वरना जाओ जेल’: बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिन्दुओं को सरकार का फरमान, कहा – भारत ने हम पर थोपा राष्ट्रगान

बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता के पतन के बाद वहाँ की नई सरकार गठित होते ही हिन्दू और भारत विरोधी एजेंडे पर चल निकली है। यहाँ हिन्दुओं को साफ तौर पर फरमान सुना दिया गया है कि वो अज़ान से 5 मिनट पहले या तो अपनी पूजा-पाठ बंद कर दें वर्ना गिरफ्तारी के लिए तैयार रहें। वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेशी राष्ट्रगान को भारत द्वारा बनाए जाने की का आरोप लगाया जा रहा है।

पहला मामला हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसी मुद्दे को ले कर ISKCON के प्रवक्ता राधारमण दास ने मंगलवार (10 सितंबर, 2024) को अपने ‘X’ हैंडल पर एक वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को उन्होंने बांग्लादेश के गृहमंत्री का सलाहकार बताया है। दावा किया गया है कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने बांगला भाषा में हिन्दुओं को चेतावनी दी है कि वो मुस्लिमों की अजान से 5 मिनट पहले अपने पूजापाठ बंद कर दें।

प्रतिबंधित किए जा रहे इन धार्मिक क्रियाकलापों में भजन और आरती भी शामिल हैं। वीडियो में बोल रहे बांग्लादेशी अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी है कि फरमान को न मानने वालों को जेल में डाल दिया जाएगा।

वहीं दूसरे मामले में बांग्लादेश के मजहबी मामलों के सलाहकार AFM खालिद हुसैन ने अपने ही देश के राष्ट्रगान पर सवाल खड़ा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (7 सितंबर, 2024) को उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का वर्तमान राष्ट्रगान भारत द्वारा साल 1971 में थोपा गया है। बकौल खालिद हुसैन, फ़िलहाल अभी नई सरकार की मंशा राष्ट्रगान बदलने की नहीं है। खालिद हुसैन से पहले बांग्लादेश के अब्दुल्लाही अमान आज़मी ने राष्ट्रगान बदलने की माँग उठाई थी। तब उन्होंने नई सरकार से माँग की थी कि मुल्क का राष्ट्रगान बदला जाए।

आरिफ और रिजवान ने मुन्नन खाँ चौराहे पर नाबालिग दलित लड़की को बिठाया, चलती कार में किया गैंगरेप: जाति का नाम लेकर दी गंदी-गंदी गालियाँ

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में दलित समुदाय की एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। यहाँ मोबाइल का लालच दे कर पीड़िता को चलती कार में हवस का शिकार बनाया गया है। विरोध करने पर पीड़िता को जातिसूचक गालियाँ भी दी गईं। आरोपितों के नाम रिज़वान और मोहम्मद आरिफ़ है। घटना शनिवार (7 सितंबर, 2024) की है। पुलिस ने केस दर्ज कर के दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला गोंडा जिले के कोतवाली नगर का है। यहाँ रविवार (8 सितंबर, 2024) को पीड़िता की माँ ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि शनिवार की शाम लगभग 7 बजे वो अपने पति के साथ अपने मायके गई हुईं थीं। जब सुबह वो अपने घर लौटीं तो उनकी बेटी काफी गुमसुम थी। इसकी वजह पूछने पर पीड़िता ने बताया कि उसे मोबाइल दिलाने का लालच दे कर 20 वर्षीय मोहम्मद आरिफ और इतने ही साल के रिज़वान ने गैंगरेप किया है। आरिफ गोंडा जबकि रिज़वान पड़ोसी जिले बलरामपुर का निवासी है।

पीड़िता के मुताबिक, आरिफ और रिज़वान ने उसे अपनी स्विफ्ट कार में मुन्नन खाँ चौराहे के पास बिठाया और सुनसान जगह ले गए। इन दोनों ने यह गैंगरेप चलती कार में किया। तेज गति से चल रही कार अचानक बिजली के एक खम्भे से टकरा भी गई थी। जब पीड़िता ने इन दोनों आरोपितों की हरकतों पर उन्हें डाँटा तो इन्होंने गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए जातिसूचक शब्द बोले। इसी के आरिफ और रिज़वान ने अपनी कार और पीड़िता को वहीं छोड़ दिया और खुद किसी गाड़ी से घर लौट आए।

जैसे-तैसे पीड़िता पैदल ही लम्बी दूरी तक चल कर अपने घर पहुँच पाई। अगले दिन अपनी माँ के लौटने पर उसने सारी बात बताई। पीड़िता की माँ की तहरीर पर पुलिस ने रिज़वान और आरिफ के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) और 352 के साथ पॉक्सो एक्ट व SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। सोमवार (9 सितंबर, 2024) को पुलिस ने बताया कि आरिफ और रिज़वान को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

अतीक अहमद की बेटी ने की घर वापसी, अब कहलाएँगी ‘आरती श्रीवास्तव’: वैदिक विधि-विधान से प्रेमी जयवीर के साथ किया विवाह

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक मुस्लिम लड़की ने घर वापसी की है। लड़की का नाम आसमीन है जो अब आरती श्रीवास्तव नाम से जानी जाएँगी। आसमीन ने बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम में हिन्दू युवक जयवीर सिंह के साथ 7 फेरे लिए। इस दौरान आसमीन ने हवन किया और हिन्दू देवी-देवताओं के जयकारे लगाए। पुजारी के के शंखधर सहित आश्रम में मौजूद अन्य लोगों ने वर वधू को आशीर्वाद दिया। यह विवाह सोमवार (9 सितंबर, 2024) को सम्पन्न हुआ।

आसमीन मूल रूप से बरेली के बहेड़ी थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके अब्बा का नाम अतीक अहमद है। वहीं जयवीर सिंह बरेली के ही रसूलपुर के निवासी है। जयवीर का आसमीन के घर लम्बे समय से आना-जाना था। दोनों की यहीं बातचीत शुरू हुई तो थोड़े समय में प्यार में बदल गई। दोनों बाहर मिलने लगे और कुछ दिनों बाद शादी करने का मन बना लिए। जब आसमीन के घर वालों को इसकी भनक लगी तो वो भड़क गए। उन्होंने आसमीन पर तमाम तरह की पाबंदियाँ कायम कर दीं।

इधर जयवीर किसी भी हाल में अपने प्यार से शादी करने की कोशिश में जुटे रहे। 9 सितंबर (सोमवार) को मौक़ा पा कर आसमीन अपने घर से निकल गईं। रास्ते में वो जयवीर से मिलीं। दोनों ने एक साथ कचेहरी जा कर शपथ पत्र बनवाए। शपथ पत्र में आसमीन ने खुद को बालिग़ बताते हुए जयवीर से बिना किसी जोर-जबरदस्ती के शादी करने की बात लिखी है। जयवीर ने भी अपने शपथ पत्र में आसमीन से अपना विवाह बिना किसी दबाव के होना बताया है। ऑपइंडिया के पास वीडियो और विवाह के कागजात मौजूद हैं।

अदालत में कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद जयवीर और आसमीन एक साथ बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम पहुँचे। यहाँ आसमीन ने अपने शुद्धिकरण की माँग करते हुए ‘घर-वापसी’ की इच्छा जताई। शुद्धिकरण के बाद आसमीन का नाम आरती श्रीवास्तव रखा गया। इसके बाद आरती का जयवीर से वैदिक विधि विधान से विवाह सम्पन्न हुआ। दोनों ने अग्नि के सामने 7 फेरे लिए और हिन्दू देवी-देवताओं की जयकार की। आरती बनी आसमीन ने इस मौके पर खुद को बेहद खुश बताया।

अपने विवाह के बाद आरती श्रीवास्तव उर्फ़ आसमीन ने बरेली पुलिस को पत्र भेज कर अपनी व अपने पति जयवीर की सुरक्षा की गुहार लगाई है। आसमीन को आशंका है कि उनके परिजन ऑनर किलिंग जैसी किसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। बकौल आसमीन अपने मंसूबों में असफल होने के बाद उनके मामा सईद अहमद व जावेद उनकी ससुराल वालों को किसी झूठे मुकदमे में भी फँसा सकते हैं। इसी शिकायत में किसी सगीर और पूर्व प्रधान कमर का भी जिक्र है। ये सभी बरेली के अलग-अलग हिस्सों के निवासी हैं।

‘सनातनियों की सुनेंगे, सनातनियों को चुनेंगे’: 2 दिन में कॉन्ग्रेस में शामिल होने के फैसले से पलटे भजन गायक कन्हैया मित्तल, लोगों से माँगी माफ़ी

‘जो राम को लाए हैं’ वाला गाना गा कर सुर्खियाँ बटोरने वाले कन्हैया मित्तल ने महज 48 घंटों में कॉन्ग्रेस पार्टी ज्वाइन करने का अपना फैसला बदल दिया है। उन्होंने मंगलवार (10 सितंबर 2024) को एक वीडियो जारी कर के इसका एलान किया है। अब कन्हैया ने ‘सनातनियों के सुनेंगे, सनातनियों को चुनेंगे’ का नारा दिया है। कन्हैया ने लोगों से 2 दिन पहले दिए गए अपने उस बयान के लिए माफ़ी भी मांगी है जिसमें उन्होंने मन की बात करते हुए कॉन्ग्रेस ज्वाइन करने की बात कही थी।

मंगलवार को कन्हैया मित्तल ने अपनी सफाई में एक वीडियो जारी किया है। वीडियो की शुरुआत जय श्री राम से करते हुए कन्हैया मित्तल ने बताया कि पिछले 2 दिनों से उन्हें एहसास हुआ है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व और तमाम सनातनी भाई-बहन उनको बहुत प्यार करते हैं। उन्होंने 2 दिनों से अपने चाहने को हुई परेशानी के लिए माफ़ी माँगी। कन्हैया ने आगे कहा, “जो मैंने अपने मन की बात कही थी कि मैं कॉन्ग्रेस ज्वाइन करने वाला हूँ, उसे मैं वापस लेता हूँ क्योंकि मैं नहीं चाहता कि किसी भी सनातनी का भरोसा टूटे।”

अपने बयाने में कन्हैया ने आगे कहा, “मैं टूटूँगा तो न जाने कितने और टूटेंगे। हम सब मिल कर राम के थे और राम के रहेंगे।” इसी के बाद कन्हैया ने दोबारा लोगों को डिस्टर्ब करने के लिए माफ़ी माँगी। इशारों ही इशारों में कन्हैया ने अपने 2 दिन पहले दिए गए बयान को गलती माना है। उन्होंने गलती का एहसास करवाने के लिए लोगों को धन्यवाद किया और आशा जताई है कि उनसे सब ऐसे ही जुड़े रहेंगे। अपने कैप्शन के तौर पर कन्हैया ने ‘सनातनियों के सुनेंगे, सनातनियों को चुनेंगे’ लिखा है।

पहले किया था कॉन्ग्रेस में शामिल होने का एलान

बताते चलें कि 8 सितंबर, 2024 को कन्हैया मित्तल ने एक वीडियो जारी करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी ज्वाइन करने के संकेत दिए थे। यह वीडियो उन्होंने राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी से बनाया था। तब उन्होंने एक दोस्त से बातचीत का हवाला देते हुए कहा था कि सनातन की बात करने वाला एक ही दल न हो और ये आवाज सभी पार्टियों से उठे। तब कन्हैया ने कहा था कि भाजपा से उनका कोई मतभेद नहीं है और न ही उन्होंने यह निर्णय टिकट न मिलने की वजह से लिया है।

तब कन्हैया मित्तल ने भाजपा से अपना रिश्ता केवल मंचों पर गाने तक ही सीमित बताया था। खुद को योगी आदित्यनाथ का शिष्य बताते हुए कन्हैया मित्तल ने कॉन्ग्रेस ज्वाइन करने के पीछे अपनी मंशा जनसेवा बताई थी। कन्हैया मित्तल ने तब कॉन्ग्रेस पार्टी में मौजूद सनातनियों को अलग नजर से न देखने की अपील भी की थी। उन्होंने तब यह भी दावा किया था कि वो नहीं चाहते कि सनातन की बात करने वाली सिर्फ एक ही पार्टी हो। कन्हैया मित्तल ने तब राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका के अयोध्या न जाने के निर्णय का बचाव भी किया था।

जिस लाल चौक पर कॉन्ग्रेसी गृहमंत्री की ‘फटी’ थी, वहाँ आम भारतीय लहरा रहे तिरंगा: PM मोदी का करिए धन्यवाद, सुशील शिंदे के कबूलनामे ने बताया 370 हटाने से क्या बदला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग रखने वाले अनुच्छेद 370 को तिलांजलि दे दी थी। मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक कदम की जहाँ बड़े स्तर पर प्रशंसा होती रही है वहीं एक तबका इससे कुपित रहा है। हमेशा कश्मीर को अलग रखने की राजनीति करने वाले नेता और एक्टिविस्ट लगातार मोदी सरकार के इस फैसले पर प्रश्न उठाते हैं। अनुच्छेद 370 से होने वाले बदलाव श्रीनगर के लाल चौक से लेकर टीथवाल में फिर से चालू हुए शारदा मंदिर तक दिखते हैं।

अनुच्छेद 370 से होने वाला बदलाव इतना साफ़ है कि अब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता अपने लावलश्कर के साथ पैदल चलते हुए आधा कश्मीर नापता है। वह श्रीनगर और उन इलाकों में जाता है जिन्हें कभी आतंक का गढ़ माना जाता था लेकिन उसे खरोंच तक नहीं आती। राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा इसी का उदाहरण है। कश्मीर में बदलाव पर सवाल पूछने वालों को यह जवाब देना चाहिए कि यही माहौल वह 1990 के दशक में क्यों नहीं दे पाए थे जब भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी तिरंगा लेकर श्रीनगर गए थे।

तब जोशी और उनके साथ मौजूद वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला भी हुआ था। श्रीनगर की गलियों को तक तब की कॉन्ग्रेस सरकार सुरक्षित नहीं कर पाई थी। भाजपा नेताओं को जगह-जगह रोका गया था। अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के काम को मानने के लिए ज्यादा समय को पीछे ले जाने की जरूरत नहीं है। आज से 13 साल पहले 2011 का समय याद कर लिया जाना चाहिए जब भाजपा के युवा मोर्चा ने एक एकता यात्रा का आह्वान किया था।

तब की कॉन्ग्रेस सरकार ने इन युवाओं को श्रीनगर ना पहुँचने देने को सारे हथकंडे अपना लिए थे। तब केंद्र और राज्य, दोनों जगह कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। जिस नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ वह गलबहियाँ करती है, उसके मुखिया के बेटे उमर अब्दुल्लाह सत्ता संभाल रहे थे। लेकिन इस दौरान भाजपा नेताओं को जम्मू कश्मीर में घुसने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। कश्मीर के इस बदलाव की इस बात को क्षद्म एक्टिविस्ट और कश्मीर की कथित आजादी का सपना देखने वाले मानें या ना मानें, UPA सरकार में गृह मंत्री रहे सुशील शिंदे ने खुद माना है।

UPA की सरकार में गृह मंत्री रहे शिंदे ने अपनी किताब विमोचन के कार्यक्रम में तब के कश्मीर की स्थिति बताई है। उन्होंने कहा, “जब मैं होम मिनिस्टर था, तो मैं उनके पास जाता था और सलाह माँगता था। उन्होंने मुझे कहा कि सुशील तुम लाल चौक जाकर भाषण करो और लोगों से मिलो। मुझे उस सलाह से फायदा मिला कि एक ऐसा होम मिनिस्टर है जो वहाँ जाता है लेकिन मेरी फ$ती थी ये किसको बताऊँ। ये सच ही है।”

सुशील शिंदे का यह खुलासा इसलिए अहम हो जाता है कि वह कोई सामान्य इंसान नहीं है। देश के गृह मंत्री, दूसरे सबसे बड़े सूबे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल जैसे पदों पर वह रह चुके हैं। गृह मंत्री के तौर पर उनके साथ बड़ा भारी प्रशासनिक अमला चलता था। लेकिन तब भी उनको लाल चौक पर डर लगता था। अब कश्मीर में माहौल इतना बदला है कि लाल चौक पर 24 घंटे तिरंगा लहराता है और कोई भी आम आदमी किसी भी समय यहाँ जाकर उस तिरंगे को सलाम कर सकता है।

सुशील शिंदे की यह स्वीकारोक्ति यह भी दिखाती है कि दशकों तक केंद्र सरकार में रहने वाली कॉन्ग्रेस ने कश्मीर समस्या को इतना गम्भीर बनाया कि उसके मंत्री ही जाने में डरने लगे। यहीं तक कॉन्ग्रेस की समस्या नहीं रूकती। अब उसने उस पार्टी से दोबारा गठबंधन कर लिया है जो कश्मीर को अनुच्छेद 370 से पहले वाले दौर में ले जाने को अमादा है। उसने नेशनल कॉन्फ्रेंस को कश्मीर की सत्ता में लाने के लिए हाथ मिलाया है। इससे साफ़ होता है कि वह अब भी कश्मीर का भला नहीं, राजनीति चाहती है।

चाहे राहुल गाँधी की सुरक्षित यात्रा हो, कश्मीर में G20 का आयोजन हो या फिर सुशील शिंदे की स्वीकारोक्ति, यह जवाब है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 ने क्या बदल दिया है। यह दिखाता है कि कश्मीर में केवल लोग अब अपने आप को सुरक्षित महसूस ही नहीं करते बल्कि इसे बताते भी हैं कि अब स्थिति बदली है।