प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग रखने वाले अनुच्छेद 370 को तिलांजलि दे दी थी। मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक कदम की जहाँ बड़े स्तर पर प्रशंसा होती रही है वहीं एक तबका इससे कुपित रहा है। हमेशा कश्मीर को अलग रखने की राजनीति करने वाले नेता और एक्टिविस्ट लगातार मोदी सरकार के इस फैसले पर प्रश्न उठाते हैं। अनुच्छेद 370 से होने वाले बदलाव श्रीनगर के लाल चौक से लेकर टीथवाल में फिर से चालू हुए शारदा मंदिर तक दिखते हैं।
अनुच्छेद 370 से होने वाला बदलाव इतना साफ़ है कि अब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता अपने लावलश्कर के साथ पैदल चलते हुए आधा कश्मीर नापता है। वह श्रीनगर और उन इलाकों में जाता है जिन्हें कभी आतंक का गढ़ माना जाता था लेकिन उसे खरोंच तक नहीं आती। राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा इसी का उदाहरण है। कश्मीर में बदलाव पर सवाल पूछने वालों को यह जवाब देना चाहिए कि यही माहौल वह 1990 के दशक में क्यों नहीं दे पाए थे जब भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी तिरंगा लेकर श्रीनगर गए थे।
तब जोशी और उनके साथ मौजूद वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला भी हुआ था। श्रीनगर की गलियों को तक तब की कॉन्ग्रेस सरकार सुरक्षित नहीं कर पाई थी। भाजपा नेताओं को जगह-जगह रोका गया था। अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के काम को मानने के लिए ज्यादा समय को पीछे ले जाने की जरूरत नहीं है। आज से 13 साल पहले 2011 का समय याद कर लिया जाना चाहिए जब भाजपा के युवा मोर्चा ने एक एकता यात्रा का आह्वान किया था।
तब की कॉन्ग्रेस सरकार ने इन युवाओं को श्रीनगर ना पहुँचने देने को सारे हथकंडे अपना लिए थे। तब केंद्र और राज्य, दोनों जगह कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। जिस नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ वह गलबहियाँ करती है, उसके मुखिया के बेटे उमर अब्दुल्लाह सत्ता संभाल रहे थे। लेकिन इस दौरान भाजपा नेताओं को जम्मू कश्मीर में घुसने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। कश्मीर के इस बदलाव की इस बात को क्षद्म एक्टिविस्ट और कश्मीर की कथित आजादी का सपना देखने वाले मानें या ना मानें, UPA सरकार में गृह मंत्री रहे सुशील शिंदे ने खुद माना है।
UPA की सरकार में गृह मंत्री रहे शिंदे ने अपनी किताब विमोचन के कार्यक्रम में तब के कश्मीर की स्थिति बताई है। उन्होंने कहा, “जब मैं होम मिनिस्टर था, तो मैं उनके पास जाता था और सलाह माँगता था। उन्होंने मुझे कहा कि सुशील तुम लाल चौक जाकर भाषण करो और लोगों से मिलो। मुझे उस सलाह से फायदा मिला कि एक ऐसा होम मिनिस्टर है जो वहाँ जाता है लेकिन मेरी फ$ती थी ये किसको बताऊँ। ये सच ही है।”
At the launch of his memoir, UPA era Home Minister Sushil Shinde admits that things were so bad in Kashmir valley in those days that उनकी भी वहाँ जाने में फटती थी।
Things have changed dramatically since. 2-3 crore tourists visit Jammu & Kashmir every year. Even Balak Buddhi and… pic.twitter.com/2YqRjRiqWm
सुशील शिंदे का यह खुलासा इसलिए अहम हो जाता है कि वह कोई सामान्य इंसान नहीं है। देश के गृह मंत्री, दूसरे सबसे बड़े सूबे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल जैसे पदों पर वह रह चुके हैं। गृह मंत्री के तौर पर उनके साथ बड़ा भारी प्रशासनिक अमला चलता था। लेकिन तब भी उनको लाल चौक पर डर लगता था। अब कश्मीर में माहौल इतना बदला है कि लाल चौक पर 24 घंटे तिरंगा लहराता है और कोई भी आम आदमी किसी भी समय यहाँ जाकर उस तिरंगे को सलाम कर सकता है।
सुशील शिंदे की यह स्वीकारोक्ति यह भी दिखाती है कि दशकों तक केंद्र सरकार में रहने वाली कॉन्ग्रेस ने कश्मीर समस्या को इतना गम्भीर बनाया कि उसके मंत्री ही जाने में डरने लगे। यहीं तक कॉन्ग्रेस की समस्या नहीं रूकती। अब उसने उस पार्टी से दोबारा गठबंधन कर लिया है जो कश्मीर को अनुच्छेद 370 से पहले वाले दौर में ले जाने को अमादा है। उसने नेशनल कॉन्फ्रेंस को कश्मीर की सत्ता में लाने के लिए हाथ मिलाया है। इससे साफ़ होता है कि वह अब भी कश्मीर का भला नहीं, राजनीति चाहती है।
चाहे राहुल गाँधी की सुरक्षित यात्रा हो, कश्मीर में G20 का आयोजन हो या फिर सुशील शिंदे की स्वीकारोक्ति, यह जवाब है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 ने क्या बदल दिया है। यह दिखाता है कि कश्मीर में केवल लोग अब अपने आप को सुरक्षित महसूस ही नहीं करते बल्कि इसे बताते भी हैं कि अब स्थिति बदली है।
राजस्थान के कोटा जिले में एक स्कूल के व्हाट्सएप्प ग्रुप से गणेश चतुर्थी की पोस्ट डिलीट करने से विवाद खड़ा हो गया। पोस्ट डिलीट करने का आरोप स्कूल के प्रिंसिपल पर लगा है जिनका नाम शफी मोहम्मद अंसारी है। इस हरकत से स्कूल के हिन्दू शिक्षक भड़क उठे और उन्होंने शफी मोहम्मद अंसारी पर कार्रवाई की माँग शुरू कर दी। शुक्रवार (6 सितंबर, 2024) को पुलिस ने आरोपित प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच चल रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कोटा जिले के थाना क्षेत्र बयावर कला का है। यहाँ के लाठुरी क्षेत्र में सरकारी उच्चतर माध्यम विद्यालय है। इस स्कूल में शिक्षकों का एक व्हाट्सएप्प ग्रुप बना हुआ है जिसके एडमिन प्रिंसिपल शफी मोहम्मद अंसारी हैं। ग्रुप में कुछ ग्रामीण भी जुड़े हैं। गणेश चतुर्थी के दिन इस ग्रुप में एक ग्रामीण भरत नागर ने अलग-अलग 2 पोस्ट भेजी। इन पोस्टों में भगवान गणेश की फोटो छपी हुई थी और सभी को पर्व की बधाई दी गई थी।
आरोप है कि शफी मोहम्मद अंसारी ने इन दोनों पोस्टों को अपने एडमिन अधिकार से डिलीट कर दिया। प्रिंसिपल शफी अंसारी की इस हरकत से ग्रुप के हिंदू शिक्षक भड़क गए। उन्होंने ग्रुप में ही इसका विरोध शुरू कर दिया। कुछ ही देर में यह बात छात्रों और उनके अभिभावकों में भी फैल गई। उन्होंने भी शफी मोहम्मद अंसारी की इस करतूत की खिलाफत शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह मामला हिंदू संगठनों तक पहुँच गया।
हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य स्कूल के आगे जमा हो गए और प्रिंसिपल पर कड़े एक्शन की माँग करने लगे। वो ‘शफी मोहम्मद अंसारी को बर्खास्त करो’ जैसे नारे भी लगा रहे थे। मामले की जानकारी पुलिस को मिलते ही वो फ़ौरन स्कूल में पहुँची। नाराज लोगों को समझा-बुझा कर शांत करवाया गया। हालाँकि, हिन्दू संगठन के सदस्य शफी मोहम्मद पर कार्रवाई की माँग को ले कर अड़े रहे। आखिरकार शुक्रवार (6 सितंबर।, 2024) को आरोपित प्रिंसिपल को शांतिभंग की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया।
झारखंड के गिरिडीह जिले से साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ माँ दुर्गा के मंदिर के आगे इस्लामी झंडा लगाने से 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। मौके पर पहुँची पुलिस ने हरे रंग के इस झड़े को हटाया। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने यह हरकत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। कुल 21 लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दे कर कार्रवाई के लिए 2 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना 9-10 सितंबर रात की बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना गिरिडीह जिले के थाना क्षेत्र सरिया की है। यहाँ केशवारी देवी मंदिर स्थानीय लोगों सहित आसपास के निवासियों की श्रद्धा व आस्था का केंद्र माना जाता है। नवरात्रि को यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। बताया जा रहा है कि सोमवार-मंगलवार की रात में किसी असामाजिक तत्व ने मंदिर परिसर में ही हरे रंग का इस्लामिक झंडा गाड़ दिया था। झंडे में किसी मस्जिद का चित्र बना हुआ है। ऊपर अरबी भाषा में कुछ इस्लामिक लाइनें लिखी हुई हैं। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है।
इन लाइनों के नीचे एक तलवार छपी हुई है। मामले की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग जमा होने लगे। कुछ ही देर में हिन्दू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर पहुँच गए। इन सभी ने एकजुट हो कर झंडा लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की माँग करनी शुरू कर दी। हंगामे की सूचना पर मौके पर पुलिस पहुँची और नाराज लोगों को समझा कर शांत किया। झंडे को उतार दिया गया।घटनास्थल पर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग भी पहुँच गए। इन्होने कुल 21 लोगों को इस घटना के पीछे जिम्मेदार बताया।
गिरिडीह में देवी मंडप के पास कुछ असामाजिक तत्वों ने इस्लामिक झंडा गाड़ दिया था, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। pic.twitter.com/P6qHSnCswb
सभी आरोपितों के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई। कुल 21 लोगों को इस घटना के पीछे जिम्मेदार बताते हुए थाने में तहरीर दी गई। भारतीय जनता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष अजय यादव ने प्रशासन को 2 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए सभी आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग दी है। उन्होंने कहा कि 2 दिन बाद आंदोलन किया जाएगा। वहीं पुलिस मामले की जाँच व ये हरकत करने वाले आरोपितों की तलाश में जुट गई है। हालत तनावपूर्ण देखते हुए संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
आरक्षण खत्म करने की वकालत को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी घिर गए हैं। राहुल गाँधी के आरक्षण खत्म करने वाले बयान पर केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान और बसपा सुप्रीमो मायावती ने हमला बोला है। जहाँ मायावती ने राहुल गाँधी के नाटक से सतर्क रहने की सलाह दी है तो वहीं चिराग पासवान ने आरक्षण खत्म करने की बात को भी अपराध बताया है।
मायावती ने राहुल गाँधी के बयान को लेकर एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “केन्द्र में काफी लम्बे समय तक सत्ता में रहते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार ने OBC आरक्षण को लागू नहीं किया और ना ही देश में जातीय जनगणना कराने वाली यह पार्टी अब इसकी आड़ में सत्ता में आने के सपने देख रही है…अब कॉन्ग्रेस पार्टी के सर्वेसर्वा श्री राहुल गाँधी के इस नाटक से भी सर्तक रहें जिसमें उन्होंने विदेश में यह कहा है कि भारत जब बेहतर स्थिति में होगा तो हम SC, ST, OBC का आरक्षण खत्म कर देंगे।”
1. केन्द्र में काफी लम्बे समय तक सत्ता में रहते हुए कांग्रेस पार्टी की सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लागू नहीं किया और ना ही देश में जातीय जनगणना कराने वाली यह पार्टी अब इसकी आड़ में सत्ता में आने के सपने देख रही है। इनके इस नाटक से सचेत रहें जो आगे कभी भी जातीय जनगणना नहीं करा पाएगी।
मायावती ने लिखा, “इन वर्गों के लोग कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी के दिए गए इस घातक बयान से सावधान रहें, क्योंकि यह पार्टी केन्द्र की सत्ता में आते ही, अपने इस बयान की आड़ में इनका आरक्षण जरूर खत्म कर देगी। ये लोग संविधान व आरक्षण बचाने का नाटक करने वाली इस पार्टी से जरूर सजग रहें।” मायावती ने कहा कि कॉन्ग्रेस की सोच हमेशा शुरू से ही आरक्षण विरोधी रही है। उन्होंने कहा कि जब तक देश से जातिवाद जड़ से खत्म नहीं हो जाता तब तक आरक्षण का जारी रहना जरूरी है।
वहीं केन्द्रीय मंत्री और लोजपा(R) के मुखिया चिराग पासवान ने भी राहुल गाँधी पर हमला बोला। उन्होंने भी ट्विटर पर अपनी राय रखी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “राहुल गाँधी के बयान से कॉन्ग्रेस की मानसिकता का पर्दाफाश हुआ है। कॉन्ग्रेस चाहती है, और उनकी प्राथमिकताओं में यह रहा है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी द्वारा दिए गए आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए।”
आरक्षण समाप्त करना तो दूर, सोचना भी अपराध है राहुल गांधी जी !
आज राहुल गांधी के बयान से कांग्रेस पार्टी की मानसिकता का पर्दाफाश हुआ है। कांग्रेस चाहती है, और उनकी प्राथमिकताओं में यह रहा है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी द्वारा दिए गए आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए। संवैधानिक…
चिराग पासवान ने लिखा, “आरक्षण को समाप्त करना तो दूर, कोई उस प्रावधान से छेड़छाड़ करने की भी नहीं सोच सकता…कॉन्ग्रेसी मानसिकता वाले लोग जनता को गुमराह करने के लिए ऐसे बयानों का इस्तेमाल करते आए हैं। आरक्षण का मुद्दा कॉन्ग्रेस का चुनावी जुमला है, जिससे हम सबको सावधान रहने की जरूरत है।”
दलित, आदिवासी, पिछड़ा विरोधी @INCIndia की मानसिकता @RahulGandhi जी के ज़ुबा पर आ ही गई। पंडित नेहरू ने 1961 में सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर दलित आरक्षण का विरोध किया था।कांग्रेस क़ानून बनाकर आरक्षण छीनती है, वही @narendramodi जी आरक्षण के लिए क़ानून बनाते है।@BJP4Indiapic.twitter.com/VvUTXfYcZU
भाजपा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP बृज लाल ने भी राहुल गाँधी पर हमला बोला। बृज लाल ने कहा कि राहुल गाँधी के मन की बात मुंह पर आ गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने 1961 में SC आरक्षण का विरोध किया था और इन्होने हमेशा OBC को तिरस्कृत किया है। राहुल गाँधी के बयान के बाद अब कॉन्ग्रेस बैकफुट पर आ गई है।
STORY | We will think of scrapping reservation when India is a fair place: Rahul Gandhi (@RahulGandhi)
यह पूरा विवाद राहुल गाँधी के अमेरिका में दिए गए एक बयान के बाद चालू हुआ है। राहुल गाँधी ने हाल ही में अमेरिका के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में आरक्षण खत्म करने को लेकर बात की है। राहुल गाँधी से जब यह सवाल पूछा गया कि भारत में जातिगत आधार पर आरक्षण कब खत्म होगा तो उन्होंने कहा, “हम आरक्षण खत्म करने की तब सोचेंगे जब भारत में निष्पक्षता होगी। अभी भारत में निष्पक्षता नहीं है। अभी कुछ ऊँची जातियों के लोग भी कहते हैं कि हमने आखिर क्या गलत किया है, हमें क्या सजा मिल रही है।”
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व वन मंत्री मोहम्मद अकबर पर एक अध्यापक को आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने का आरोप लगा है। मृतक का नाम देवेंद्र ठाकुर है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। FIR में मोहम्मद अकबर के अलावा मदार खान व 2 अन्य लोग भी नामजद किए गए हैं। सुसाइड नोट में इन सभी पर नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने और उसे वापस न करने की बात कही गई है। घटना मंगलवार (3 सितंबर 2024) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बालोद जिले के थाना क्षेत्र डोंडी का है। यहाँ के गाँव घोटिया में 3 सितंबर को देवेंद्र ठाकुर नाम के एक व्यक्ति ने अपने घर में फाँसी लगा कर सुसाइड कर लिया था। इसी दिन टीचर्स डे भी था। देवेंद्र ठाकुर भी पेशे से सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और लाश का पंचनामा व अन्य कानूनी कार्रवाई पूरी की। तलाशी के दौरान मृतक के पास से एक सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट में देवेंद्र सिंह ने कॉन्ग्रेस को जनजातीय लोगों की विरोधी पार्टी बताया है।
इसी सुसाइड नोट में देवेंद्र ठाकुर ने कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मंत्री अकबर खान, मदार उर्फ़ सलीम खान, हिरेन्द्र नेताम और प्रदीप ठाकुर को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है। मृतक के मुताबिक इन सभी ने नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे ले लिए थे लेकिन उसे वापस नहीं किया। यह नौकरी वन विभाग में लगनी थी। किसी लीलाराम कोर्राम को सम्बोधित करते हुए देवेंद्र ने अपनी मौत के बाद उन्हें पैसे निकलवाने की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही खुद को न्याय दिलाने की भी अपील की है।
एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपितों ने देवेंद्र ठाकुर से 4 लाख 70 हजार रुपए हड़पे थे। जब नौकरी नहीं लगी तो देवेंद्र ठाकुर आरोपितों से अपने पैसे वापस माँग रहे थे। हालाँकि उन्हें पैसे भी नहीं लौटाए गए। इस बात को ले कर देवेंद्र काफी डिप्रेशन में थे। उनकी आत्महत्या के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 व 3 (5) के तहत कार्रवाई की है। हालाँकि कॉन्ग्रेस नेता अकबर खान ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने सुसाइड नोट की जाँच कराए जाने की माँग की है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।
यह डोजियर इस उद्देश्य के साथ तैयार किया गया है कि Wikipedia एक स्वतंत्र, संपादकीय हस्तक्षेप-रहित विश्वकोश नहीं है, जैसा कि Wikimedia Foundation द्वारा दावा किया गया है। यह डोजियर भारत, भारतीय कानूनों और भारत-संबंधी सामग्री पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए तैयार किया गया है, ताकि Wikipedia को एक प्रकाशक के रूप में मान्यता देने के संबंध में सिफारिशें तैयार की जा सकें, जो अपनी प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित सामग्री के लिए सीधे जिम्मेदार हो।
यह डोजियर Wikipedia और इसके मूल कंपनी – Wikimedia Foundation के विभिन्न पहलुओं की संक्षिप्त समीक्षा करता है, ताकि Wikimedia Foundation द्वारा किए गए दावों को समझा जा सके जैसे कि Wikipedia एक मुफ्त और सबके लिए संपादन के लिए खुला विश्वकोश है, विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करता है, निष्पक्ष दृष्टिकोण बनाए रखता है, दान पर निर्भर करता है आदि। इसमें Wikimedia Foundation को मिलने वाले अनुदानों, अनुदान प्राप्त करने वाले संस्थाओं और NGOs पर भी चर्चा की गई है। इसके अलावा, यह समझने का प्रयास किया गया है कि Wikimedia Foundation बिना भारत में अपनी उपस्थिति के भारत में कैसे काम कर रहा है और अपने व्यावसायिक लक्ष्यों के लिए विभिन्न संस्थाओं को वित्तीय सहायता कैसे प्रदान कर रहा है।
डोजियर पहले Wikipedia की स्पष्ट वामपंथी पूर्वाग्रह पर मौजूदा शोध में गहराई से चर्चा करता है और उन तत्वों पर ध्यान केंद्रित करता है जो इस पूर्वाग्रह में योगदान देते हैं। उद्धृत किए गए तीन शोध पत्रों में यह स्पष्ट निष्कर्ष निकलता है कि Wikipedia में अंतर्निहित सामग्रियाँ वामपंथी पूर्वाग्रह से ग्रसित है। Wikipedia के ‘NPOV’ (निष्पक्ष दृष्टिकोण) दिशानिर्देशों का अर्थ यह नहीं है कि सभी दृष्टिकोणों को लेख में समान प्रतिनिधित्व मिलेगा। NPOV का परिणाम बस इतना है कि जो भी विवरण ‘विश्वसनीय स्रोत’ में उल्लिखित है, उसे ही शामिल किया जाएगा। ‘विश्वसनीय स्रोतों’ का पूल स्वयं दूषित है क्योंकि संपादक और प्रशासक, जिनके पास Wikipedia में असामान्य शक्ति है, सुनिश्चित करते हैं कि ‘दक्षिणपंथी’ (गैर-वामपंथी) स्रोतों को खारिज या ब्लैकलिस्ट किया जाए – जिससे उन स्रोतों को Wikipedia लेखों में संदर्भ सामग्री के रूप में उद्धृत करने से रोक दिया जाता है।
Wikipedia के सह-संस्थापक लैरी सेंगर ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि Wikipedia में स्पष्ट वामपंथी पूर्वाग्रह है। कई साक्षात्कारों और वार्ताओं में, उन्होंने इस पर विस्तार से बात की है कि Wikipedia कैसे संतुलन का पैमाना बदलता है, जिससे जानकारी वास्तविकता का सटीक प्रतिनिधित्व नहीं करती और वामपंथी पूर्वाग्रह से भरी होती है।
इस शोध पत्र में पाया गया है कि Wikipedia की संरचना स्वयं कुछ व्यक्तियों को पूर्ण शक्ति देती है जिन्हें ‘प्रशासक’ कहा जाता है। पूरे विश्व में केवल 435 सक्रिय प्रशासक हैं जिनके पास संपादकों को प्रतिबंधित करने, स्रोतों को ब्लैकलिस्ट करने, योगदानकर्ताओं को प्रतिबंधित करने और लेखों पर संपादन करने या पलटने का अधिकार है। इन कुछ प्रशासकों के पास Wikipedia में सामग्री के संबंध में असीमित शक्ति है। यह शोध यह भी बताता है कि इनमें से कई संपादक और प्रशासक Wikimedia Foundation द्वारा Wikimedia-संबंधित परियोजनाओं के लिए अनुदान के रूप में भुगतान किए जाते हैं और इस प्रकार, यह निश्चित रूप से साबित होता है कि Wikipedia वह मुफ्त-सबके लिए-संपादित करने वाला मॉडल नहीं है जैसा कि इसे दावा किया गया है।
शोध फिर यह देखता है कि Wikimedia Foundation को पैसा कहाँ से मिलता है और वह पैसा कहाँ खर्च किया जाता है। इस विश्लेषण का विशेष ध्यान भारत पर है। पाया गया कि Wikimedia Foundation को अत्यधिक प्रेरित दाता-निर्देशित फंडों से लाखों डॉलर मिलते हैं, जिसमें Open Society Foundation, Rockefeller Foundation, Tides Foundation जैसे फाउंडेशन शामिल हैं। Google भी Wikimedia Foundation को लाखों डॉलर दान करता है और Wikipedia सामग्री को बढ़ावा देता है, जिसमें Abstract Wikipedia जैसे परियोजनाओं की फंडिंग शामिल है जो मूल रूप से इंटरनेट का उपनिवेशीकरण करने का उद्देश्य रखती है।
Wikimedia Foundation के पास गुप्त Tides Foundation के साथ गहन वित्तीय संबंध हैं, जिसे George Soros के साथ मिलकर अमेरिका के विश्वविद्यालयों में Hamas समर्थक प्रदर्शनों को फंड करने का आरोप लगाया गया है।
Wikimedia और Tides Foundation कई संगठनों को भी फंड करते हैं जो विशेष रूप से भारत के हितों के खिलाफ काम करते हैं और इसके संप्रभुता को विभिन्न स्तरों पर कमजोर करते हैं।
Wikimedia Foundation और Tides Foundation के बीच संबंधों को Hindus For Human Rights, Equality Labs, Art + Feminism, Access Now, Hindenburg जैसी संदिग्ध संस्थाओं के साथ पाया गया है, जो भारतीय तंत्र के पूरी तरह खिलाफ हैं।
भारत में, Wikimedia Foundation की कोई उपस्थिति नहीं है। 2019 में एक पंजीकृत समाज के रूप में जो उपस्थिति थी, उसे बंद कर दिया गया। भारत में समापन के बावजूद, Wikimedia Foundation न केवल भारत से दान के रूप में लाखों प्राप्त करता है बल्कि भारत में NGOs को भी फंड करता है जो Wikimedia Foundation के व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देते हैं। इन सभी संगठनों को Wikimedia Foundation और Tides Foundation द्वारा फंड किया जाता है जो वामपंथी संगठन हैं।
जहाँ तक Wikipedia की सामग्री का सवाल है, इस शोध में पाया गया कि एक छोटा समूह संपादकों और प्रशासकों का भारत में सामग्री को विकृत करता है, जिसमें एक संपादक भी शामिल है जिसे मणिपुर राज्य में असंतोष फैलाने और संघर्ष पैदा करने का ठेका दिया गया है। संपादक अक्सर Wikipedia लेखों में असुविधाजनक तथ्यों और विभिन्न दृष्टिकोणों को जोड़ने की कोशिशों को रोकते हैं। इसके अलावा, वहाँ एक विशेष एंटी-हिंदू और एंटी-भारत पूर्वाग्रह है जो संपादकों द्वारा प्रकट किया जाता है, जो Google और Wikimedia Foundation के बीच साझेदारी के कारण विषयों को परिभाषित करता है।
अंत में, शोधकर्ता द्वारा Wikimedia Foundation से निपटने के लिए की गई सिफारिशों की एक सूची है, जो संपादकीय लाइन को भारतीय कानूनों के अधीन किए बिना चलाती है। जबकि Wikimedia Foundation का दावा है कि Wikipedia केवल एक माध्यम है, यह पाया गया है कि Wikipedia IT Guidelines के तहत ‘प्रकाशकों’ के लिए सभी मानकों को पूरा करता है। इसका मतलब है कि Wikimedia Foundation को Wikipedia पर सभी सामग्री के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और भारत में एक उपस्थिति स्थापित करने की आवश्यकता होनी चाहिए ताकि भारतीय कानूनों, FCRA, NGOs, IT Guidelines, वित्तीय खुलासे के मानकों आदि के अधीन हो सके। हमारे डोजियर में ये सिफारिशें भी हैं:
Wikipedia को एक प्रकाशक के रूप में घोषित करें
Wikipedia ने दावा किया है कि यह एक माध्यम है जो ‘विश्वसनीय स्रोतों’ पर निर्भर करता है और बिना सामग्री हस्तक्षेप और संपादकीय लाइन के, सभी के लिए संपादित करने वाला है। हालाँकि, शोध से यह स्पष्ट है कि यह सच नहीं है। Wikipedia सभी प्रकाशकों के मानकों को पूरा करता है। वे वर्तमान और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी एकत्र करते हैं, अपने संपादकों और प्रशासकों को वेतन देते हैं और वे इंटरनेट पर जनता के लिए आसानी से सुलभ हैं। चूँकि Wikipedia का संपादकीय दृष्टिकोण संपादकों और प्रशासकों के आधार पर होता है, साक्ष्य सुझाव देते हैं कि वे अब न्यूट्रल प्लेटफॉर्म के रूप में विचारणीय नहीं हैं।
एक प्रकाशक के रूप में घोषित किए जाने पर, Wikimedia को भारत में अपने कार्यालय स्थापित करने होंगे, एक शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी और भारतीय कानूनों के तहत अवैध सामग्री पर सबमिट करना होगा जो भारत की संप्रभुता को कमजोर करती है या असंतोष पैदा करती है।
वित्तीय लेन-देन की जाँच करें
Wikimedia Foundation भारत में कई वित्तीय लेन-देन करती है ताकि अपने व्यावसायिक हितों को बढ़ावा दे सके और वामपंथी संगठनों और व्यक्तियों को फंड कर सके जो भारत की संप्रभुता को कमजोर करते हैं और असंतोष पैदा करते हैं। भारत में किसी भी वित्तीय लेन-देन, भुगतानों और फंड संग्रह की भारतीय कानूनों के तहत निगरानी की जाती है, जिसमें IT कानून, FCRA, NGOs और IT Guidelines शामिल हैं। सरकार को Wikimedia Foundation पर यह प्रभाव डालना चाहिए कि वे कानूनी रूप से भारत में एक आधिकारिक उपस्थिति स्थापित करे और भारतीय कानूनों के अनुसार वित्तीय जाँच से गुजरें।
विकिपीडिया लेखों पर पूर्वाग्रह चिह्नित करने वाला ब्राउज़र एक्सटेंशन स्थापित करें
शोध में चर्चा की गई है कि विकिमीडिया फाउंडेशन ने विकिपीडिया एडमिनिस्ट्रेटर ‘न्यूज़लिंगर’ को हजारों डॉलर का भुगतान किया है ताकि एक ऐप और एक ब्राउज़र एक्सटेंशन बनाया जा सके, जो विकिपीडिया के पूर्वाग्रह को स्थायी स्रोतों में चिह्नित करेगा। इसका मतलब यह है कि जब कोई इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को पढ़ेगा, तो विकिपीडिया एडिटर्स के पूर्वाग्रही विचार सामने आएँगे, जो यह तय करेंगे कि कौन सा स्रोत विश्वसनीय है और कौन सा नहीं।
विकिमीडिया फाउंडेशन और गूगल की गहरी साझेदारी को देखते हुए, इसमें कोई संदेह नहीं कि यह परियोजना लागू की जा सकती है। भारत सरकार को एक ऐसा ब्राउज़र एक्सटेंशन विकसित करना चाहिए जो कम से कम भारत से संबंधित विकिपीडिया लेखों पर पूर्वाग्रह, गलत सूचना, गुमराह करने वाली जानकारी और फर्जी समाचार को चिह्नित कर सके।
विकिपीडिया का मूल्यांकन प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के तहत करें
प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002, भारत में एंटीट्रस्ट मुद्दों को संबोधित करने वाला मुख्य कानून है। इसे बाजारों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और बनाए रखने, एंटी-कंपिटिटिव प्रथाओं को रोकने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए बनाया गया था। गूगल और विकिमीडिया फाउंडेशन के सहयोग से विकिपीडिया सामग्री और जानकारी के पक्ष में संतुलन को बिगाड़ रहा है, जिससे भारतीय मीडिया और कंटेंट स्रोतों को नुकसान पहुँच रहा है।
हमने किया जो खुलासा, उसे Facebook ने कर दिया बैन: सब मिले हुए हैं
दिलचस्प बात यह है कि जब हमारे पाठकों ने अपने फेसबुक अकाउंट्स पर लिंक साझा करने की कोशिश की, तो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ने तुरंत लिंक हटा दिया और उपयोगकर्ताओं को इसे साझा करने के खिलाफ चेतावनी दी। फेसबुक ने प्रभावी ढंग से OpIndia की विकिपीडिया पर की गई जांच को प्रतिबंधित कर दिया है।
एक उपयोगकर्ता MB झाँसी ने ‘X’ पर OpIndia के लिंक के नीचे सूचित किया कि फेसबुक लिंक साझा करने की अनुमति नहीं दे रहा था।
हमारे एक पाठक ने फेसबुक पर लिखा, “मैंने OpIndia की विकिपीडिया पर की गई जाँच (डोजियर) का लिंक पोस्ट किया, और तुरंत मुझे फेसबुक से एक नोटिफिकेशन मिला कि मेरी पोस्ट हटा दी गई है क्योंकि यह फेसबुक के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है! बिग ब्रदर दोनों बीमार और खतरनाक है…”
असल में, जब हमने अपने फेसबुक पेज पर लिंक साझा करने की कोशिश की, तो लिंक हटा दिया गया और हमें एक चेतावनी मिली। फेसबुक की चेतावनी ने कहा कि हम “भ्रामक तरीके” से लाइक, फॉलो, शेयर या वीडियो व्यूज प्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे, जो उनके समुदाय मानकों के खिलाफ है।
उनके समुदाय मानकों में लिखा है, “समुदाय मानक: स्पैम – हम लोगों को भ्रामक लिंक या सामग्री का उपयोग करने की अनुमति नहीं देते हैं ताकि लोगों को एक वेबसाइट पर जाने या वहां बने रहने के लिए मजबूर किया जा सके। हमें ये चीजें पसंद नहीं हैं: किसी पेज को लाइक करने के लिए लोगों को कहना ताकि वे किसी अन्य साइट पर सामग्री देख सकें। वेबसाइट पर लोगों को छोड़ने से रोकने के लिए अप्रासंगिक पॉप-अप का उपयोग करना। लिंक को हमारी प्लेटफॉर्म पर कुछ के रूप में छिपाना, जैसे कि पोल या वीडियो, ताकि क्लिक मिल सकें। पूरी तरह पढ़ें: स्पैम। आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हम चाहते हैं कि आप दूसरों के साथ स्वतंत्र रूप से साझा करें। हम केवल चीजें हटा देते हैं या लोगों को प्रतिबंधित करते हैं ताकि समुदाय सम्मानजनक और सुरक्षित रहे।”
वास्तव में, OpIndia की जाँच और डोजियर ने इनमें से किसी भी ‘समुदाय मानक’ का उल्लंघन नहीं किया है।
(इस लेख को मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था, हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi US Visit) इस समय अमेरिका दौरे पर हैं। भारत को बदनाम करने की नीयत से वे विदेशी जमीन से एक के बाद एक प्रोपेगेंडा कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि भारत में सिखों को पगड़ी और कड़ा पहनने तक की इजाजत नहीं है।
कॉन्ग्रेस नेता ने कहा है, “भारत में लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या एक सिख को भारत में पगड़ी पहनने की इजाजत दी जाएगी? क्या एक सिख को भारत में कड़ा पहनने की इजाजत दी जाएगी या वह गुरुद्वारा जा सकेगा? लड़ाई इसी बात को लेकर है और यह सिर्फ सिखों के लिए नहीं है, यह सभी धर्मों के लिए है।”
Herndon, Virginia, USA: Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, "The fight (in India) is about whether a Sikh, is going to be allowed to wear a turban in India…whether a Sikh will be allowed to wear a kada in India or will be able to go to the Gurudwara…that's what… pic.twitter.com/PDbvPfcIse
दिलचस्प यह है कि राहुल गाँधी उसी राजीव गाँधी के पुत्र हैं, जिनके प्रधानमंत्री रहते हुए स्वतंत्र भारत में सिखों का नरसंहार हुआ था। जिन्होंने इस नरसंहार का यह कह बचाव किया था कि जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है। राहुल गाँधी उसी इंदिरा गाँधी के पौत्र हैं जिनकी हत्या के बदले में सिखों का नरसंहार किया गया था। यह नरसंहार पगड़ी-कड़ा से पहचान कर अंजाम दिया गया। इस दौरान हिंसा से गुरुद्वारों को भी अपवित्र किया गया। राहुल गाँधी उसी कांग्रेस पार्टी के नेता हैं, जिससे जुड़े लोगों की इस नरसंहार में संलिप्तता थी।
इस नरसंहार से कांग्रेस की संलिप्तता इस बात से भी समझी जा सकती है कि राहुल गाँधी के प्रोपेगेंडा से ठीक चंद दिन पहले दिल्ली की एक अदालत ने कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद और गाँधी परिवार के करीबी जगदीश टाइटलर पर इस नरसंहार को लेकर मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा कि है टाइटलर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की अलग-अलग धाराओं के अंतर्गत हत्या, दंगा भड़काने समेत अन्य कई आरोपों में मामला चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं।
टाइटलर से जुड़ा यह मामला दिल्ली के एक इलाके में सिखों के खिलाफ भीड़ को उकसाने और दंगों की अगुवाई करने से जुड़ा है। CBI ने मई 2023 में इस मामले में जो चार्जशीट दाखिल की थी उसमें एक गवाह ने कहा था, “जगदीश टाइटलर ने भीड़ से पहले सिखों को मारने और फिर उनकी दुकानें एवं कीमती सामान लूटने के लिए कहा।” गवाहों ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ी से उतर कर कहा, “सिखों को मारो, इन्होने हमारी माँ को मार दिया।”
इसी चार्जशीट में एक अन्य गवाह के हवाले से बताया गया है कि तत्कालीन सांसद टाइटलर ने दिल्ली के आजाद मार्केट में गुरुद्वारा पुल बंगश पर हमले के लिए भी उकसाया था। इसके बाद भीड़ ने गुरुद्वारा पुल बंगश को आग लगा दी और 1 नवंबर 1984 को सिख समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी।
सुलखान सिंह 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के पुलिस महानिदेशक रह चुके हैं। उन्होंने कुछ साल पहले बताया था कि इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद जो कुछ हुआ वह दंगा नहीं था, बल्कि सुनियोजित नरसंहार था जो राजीव गाँधी के आदेश से हुआ। उन्होंने कहा था, “इस नरसंहार के मुख्य ऑपरेटर थे- जगदीश टाइटलर, अजय माकन और सज्जन कुमार। राजीव गाँधी के मुख्य विश्वासपात्र कमलनाथ इस पूरे नरसंहार की मॉनीटरिंग कर रहे थे। इस नरसंहार को लेकर राजीव गाँधी के बयान और इन सभी आतताइयों को संरक्षण के साथ-साथ अच्छे पदों पर तैनात करना उनकी संलिप्तता के जनस्वीकार्य सबूत हैं। राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद भी कॉन्ग्रेस नेतृत्व व सरकारों द्वारा इन व्यक्तियों को संरक्षित करना और उन्हें पुरस्कृत करना, इस सबकी सहमति को दर्शाता है।”
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने अपनी पुस्तक में इस दौरान दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे पर हमले का भी जिक्र किया था। फुल्का ने लिखा है कि भीड़ द्वारा गुरुद्वारा को नुक़सान पहुँचाया गया और 2 सिखों को ज़िंदा जला डाला गया था। फुल्का लिखते हैं कि हत्यारों द्वारा 5 घंटे तक उत्पात मचाया गया और कहा जाता है कि कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ पूरे 2 घंटे तक भीड़ के साथ रहे। तत्कालीन कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर ने भी मौके पर कमलनाथ की मौजूदगी की पुष्टि की थी। अगले दिन इंडियन एक्सप्रेस में भी खबर छपी थी कि कमलनाथ ने ही भीड़ का नेतृत्व किया था।
असल में राहुल गाँधी का यह प्रोपेगेंडा उस साजिश का विस्तार है, जिसे गुरपतवंत सिंह पन्नू जैसे खालिस्तानी आतंकी अरसे से बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह साजिश है सिखों और हिंदुओं को आमने-सामने खड़ा कर देना, जबकि 1984 में जब सिखों पर ‘कॉन्ग्रेसी’ टूट पड़े थे तब सैकड़ों पीड़ितों की जान उनके हिंदू पड़ोसियों ने बचाई थी।
हिंदुओं को जाति के नाम पर बाँटकर सियासी फायदा खोज रहे राहुल गाँधी अब उन्हें आपस में लड़वाकर देश को गृहयुद्ध की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने विदेशी धरती का चयन भी जान-बूझकर किया है, क्योंकि भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त खालिस्तानियों को भी विदेशी जमीनों पर पनाह मिली हुई है।
यही कारण है कि बीजेपी नेता आरपी सिंह ने राहुल गाँधी को इस बयान को लेकर कोर्ट में घसीटने की चुनौती दी है। सिंह ने कहा है कि कॉन्ग्रेस की सरकार में सिखों की पगड़ी उतारी जाती थी। हर सिख की चेकिंग होती थी। दिल्ली में 3000 सिखों का कत्लेआम किया गया था। उनकी पगड़ियाँ उतारी। केश काटे। दाढ़ी काटे। उनकी ककार उतारे। उन्हें तेल डालकर, पेट्रोल डालकर, कोई स्पेशल पाउडर डालकर, गले में टायर डालकर जलाया गया।
#WATCH | Delhi: "…3000 Sikhs were massacred in Delhi, their turbans were taken off, their hair was chopped off and beard was shaved…He (Rahul Gandhi) doesn't say that this happened when they (Congress) were in power…I challenge Rahul Gandhi to repeat in India what he is… https://t.co/fOnkpaWW0Vpic.twitter.com/kUJPpkC2ak
बीजेपी नेता ने कहा, “राहुल गाँधी यह नहीं बताते कि यह सब कॉन्ग्रेस के सत्ता में रहते हुए हुआ। यह नहीं कहते कि यह तब हुआ, जब कॉन्ग्रेस सरकार में थी। मैं राहुल गाँधी को चुनौती देता हूँ कि वह सिखों के बारे में जो कह रहे हैं, उसे हिंदुस्तान में कहें। मैं उनके खिलाफ केस दर्ज करूँगा। मैं उन्हें कोर्ट में घसीटूँगा।’
सूरत के बाद वड़ोदरा में भी गणेश पंडाल निशाने पर है। वडोदरा के भायली में प्रधानमंत्री आवास योजना में मिले फ्लैट की बिल्डिंग पर गणेशोत्सव के दौरान अरबी झंडे फहराए जा रहे हैं। 10 टॉवर वाली इस सोसायटी में 450 घर हैं, इनमें से लगभग 48 घर मुस्लिम को और बाकी हिंदुओं को आवंटित किए गए हैं। बिल्डिंग पर अरबी झंडे फहराए जाने के बाद सोसायटी में तनाव की स्थिति बन गई है, मौके पर पुलिस मौजूद है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना वासना-भायली स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने अर्बन 7 टॉवर की है। इस योजना के तहत कुल 10 टॉवर बनाए गए हैं। इन्मने करीब 450 मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन घरों को निकाय द्वारा आवंटित किया गया है। इन 450 घरों में से 48 घर मुस्लिम समुदाय को आवंटित हैं।
जिन परिवारों को यहाँ मकान दिए गए हैं वो यहाँ रहने के लिए आ चुके हैं। गणेशोत्सव शुरू होने के बाद यहाँ रहने वाले हिन्दू परिवारों ने इनमें से F टॉवर में सार्वजनिक गणेश पंडाल लगाया है। यहाँ लोगों ने स्वेच्छा से भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की है। हालाँकि, यहाँ रहने वाले एक मुस्लिम को इससे दिक्कत हो गई।
रविवार (9 सितम्बर, 2024) को एक मुस्लिम शख्स ने गणपति पंडाल वाले टावर पर अरबी झंडा फहरा दिया। जब यहाँ रहने वाले बाकी हिन्दू निवासियों ने यह देखा तो उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने पंडाल वाले टावर से अरबी झंडा उतारने को कहा लेकिन स्थानीय मुस्लिम यहाँ लड़ने के लिए आ गए और झंडा लगा रहने पर अड़ गए, उन्होंने धमकियाँ भी दी।
झंडा फहराने वाला बाहरी: स्थानीय लोग
ऑपइंडिया ने इस मामले में यहाँ की गणेश उत्सव समिति के सदस्य नितिन राजपूत से संपर्क किया। नितिन इसी सोसायटी में रहते हैं। नितिन राजपूत ने ऑपइंडिया को बताया, ”उन लोगों ने जानबूझकर गणेश पंडाल वाले फ्लैट पर अपना अरबी झंडा लगाया था। झंडा लगाने वाले व्यक्ति को यहां फ्लैट मिला है लेकिन वह यहाँ नहीं रहता। उसने अपना फ़्लैट एक और परिवार को दे रखा है। वह खुद पडरा में रहता है। यहाँ जितने मुस्लिम परिवार रहते हैं, उनमें से ज्यादातर के खुदके फ्लैट नहीं हैं। असल मालिकों ने यह फ्लैट दूसरे लोगों को रहने के लिए दिए हुए हैं।”
एक झंडा उतारा, 11 फहराए
नितिन राजपूत ने आगे बताया, “यहाँ रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने झंडा फहराने का विरोध किया। हमने इसके बाद स्थानीय पार्षद को बुलाया और उन्होंने झंडा उतार दिया। हमें लगा कि मामला इसके बाद शांत हो गाया। लेकिन रात 11 बजे अचानक हमारी सोसायटी में मुस्लिम भीड़ जमा हो गई। उन लोगों ने धमकाया, डराया और 10 टॉवर पर अपने अरबी झंडे लगाए। इसके अलावा उन्होंने सोसायटी के गेट पर भी अरबी झंडा लगाया। वो कह कर गए कि झंडा नहीं उतरना चाहिए। उनके साथ की महिलाएँ गालियाँ दे रही थीं।”
दोबारा झंडा फहराते ही स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत एक बार फिर पार्षद नितिन डोंगा से शिकायत की। नितिन डोंगा ने मौके पर पहुँच कर झंडे फिर उतरवा दिए। इस घटना की जानकरी पुलिस तक पहुँची। पुलिस भी बड़े काफिले के साथ यहाँ पहुँची। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में आक्रोश है।
उन्होंने ऑपइंडिया से बताया कि अब उन्हें आगे बवाल होने का डर है। उन्होंने बताया “हमें ये घर हाल ही में मिले हैं। यह हमारा पहला हिंदू त्योहार है। सनातन धर्म में कई त्योहार हैं और हमें डर है कि वो हमसे बार बार विवाद करेंगे। हमारी प्रशासन से माँग है कि हिंदू इलाकों में गैर-हिंदुओं को घर ना दिए जाएँ।” उन्हें दूसरी जगह पर घर देकर विवाद से बचा जा सकता है।
नहीं होनी चाहिए ऐसी घटनाएँ: BJP पार्षद नितिन डोंगा
ऑपइंडिया ने अतिरिक्त जानकारी के लिए स्थानीय पार्षद नितिन डोंगा से भी बात की। उन्होंने कहा, ”जब सुबह लोगों ने मुझे बुलाया तो मैं तुरंत वहाँ पहुँचा और झंडा उतारकर शांति बनाए र्कहने की बात कही। यहाँ सब कुछ शांत हो चुका था लेकिन रात में मुझे फिर से फोन आया कि मुस्लिमों ने एक झंडा उतार कर सारी बिल्डिंग पर झंडे फहरा दिए हैं। जबकि सुबह उतारने की बातचीत हुई थी। इसके बाद हमने पुलिस की मौजूदगी में इन झंडों को उतार दिया है और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा है कि ऐसा दोबारा न हो।”
ये कट्टर मानसिकता: विश्व हिन्दू परिषद
वडोदरा में गणेशोत्सव में अरबी झंडा फहराने की घटना को लेकर विश्व हिंदू परिषद समेत हिंदू संगठनों ने आक्रोश जताया। इस संबंध में विहिप के नगर मंत्री विष्णु प्रजापति ने ऑपइंडिया को बताया, ”पिछले कुछ समय से गुजरात में कट्टर मानसिकता बढ़ती जा रही है। हमें मुस्लिम समुदाय के लोगों से कोई दिक्कत नहीं है0 हम सब एक साथ रहते हैं। लेकिन जो लोग चरम सीमा पर जा रहे हैं, उन्हें हम इतना जरूर बता दें कि 1947 में आजादी के बाद देश का बँटवारा सोच पर था, यदि उन लोगों को यहाँ रहने में कोई समस्या है तो अपना रास्ता पकड़ लें।”
उन्होंने कहा, “जहाँ तक वर्तमान घटनाओं की बात है तो विश्व हिंदू परिषद और सभी हिंदू संगठन एक साथ हैं। यदि आवश्यकता हुई तो हम साइट का दौरा भी करेंगे, बस प्रशासन से कह रहा हूँ कि इस तरह से मिश्रित आबादी बनाना बंद करें कि मनमुटाव पैदा ना हो। हम इस दिशा में मुख्यमंत्री का भी ध्यान आकर्षित करेंगे।”
सूरत में किया बवाल, चला बुलडोजर
वड़ोदरा से पहले सूरत में भी गणेशोत्सव के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हिंसा की। सूरत के लालगेट के वरियाली बाजार में गणेश पंडाल पर मुस्लिमों ने पथराव किया। पथराव की यह घटना दो बार हुई। हिंदू समुदाय को जब ये सूचना मिली तो वो सबमें आक्रोश फैल गया। इस दौरान लागेट थाने का घेराव भी किया गया। बताया गया जब इनको पुलिस पकड़ने गई तो उसे भी पथराव का सामना करना पड़ा। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने इस मामले में 24 घंटे में कार्रवाई का वादा किया था।
गणेश पंडाल पर हमला करने वाले कई लड़के सूरत के सैयदपुरा इलाके के रहने वाले थे। यहाँ प्रशासन ने अवैध ढांचों पर बुलडोजर कार्रवाई की है। कई अवैध ढांचों को प्रशासन ने गिरा दिया। इसके अलावा 27 पत्थरबाजों को पुलिस रात में ही पकड़ लाई थी।
उत्तर प्रदेश के भदोही के समाजवादी पार्टी विधायक जाहिद बेग के घर से एक नाबालिग लड़की की लाश बरामद हुई है। नाजिया MLA जाहिद के यहाँ नौकरानी थी और पिछले 7 वर्षों से उनके घर पर काम करती थी। नाजिया की लाश विधायक जाहिद बेग के घर में एक कमरे से बरामद हुई है, वह फांसी पर लटकी हुई थी।
जानकारी के अनुसार, सोमवार (9 सितम्बर, 2024) को सुबह विधायक के परिवार को घर की दूसरी मंजिल पर नाजिया का शव पंखे से लटकता मिला। इसके बाद इस मामले में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने पहुँच कर शव को उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बताया गया कि नाजिया 17 साल की थी और विधायक के यहाँ पिछले 7 साल से काम कर रही थी। वह घर में नौकरानी थी। उसे ऊपर का स्टोर रूम रहने के लिए मिला हुआ था। जब वह सोमवार को काम करने के लिए नहीं आई तो दूसरी नौकरानी को उसे बुलाने भेजा गया। दूसरी नौकरानी ने पंखे से उसे लटकता पाया।
नाजिया के घर वाले दूसरी जगह पर कांशीराम आवास में रहते हैं। MLA जाहिद बेग के घरवालों ने बताया कि रविवार को नाजिया खानापीना खाने के बाद अपने कमरे में रात 10 बजे गई और इसके बाद ही यह घटना हो गई। मामले में अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इन्तजार किया जा रहा है।
पुलिस ने लोगों से पूछताछ के अलावा घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम को भेज कर सबूत भी इकट्ठा किए हैं। यह साफ़ नहीं हो सका है कि नाजिया की फांसी का कारण क्या था। पुलिस ने नाजिया के घरवालों से भी पूछताछ की। नाजिया के पिता इमरान ने बताया कि उन्होंने 7 महीने पहले नाजिया का फोन छीन लिया था। नाजिया इसके बाद नाराज थी।
पुलिस ने कमरे से नाजिया से उसका फोन भी जब्त किया है। इस मामले में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँचे हैं। पुलिस ने बताया कि सूचना के बाद टीम ने शव को कब्जे में लिया था, उसकी मौत के सभी बिन्दुओं पर जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि फांसी के कारणों का पता नहीं चला है।
लिंग अनुपात में लगातार गिरावट को देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा तो काफी बाद में दिया, उससे पहले ही इस माँ ने बेटी को बचाया भी और उसे पढ़ाया भी। पढ़कर उसकी बेटी डॉक्टर बनी। लेकिन एक दिन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक अस्पताल में ही उसकी बेटी का पहले रेप हुआ और फिर हत्या कर दी गई।
इस मामले में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी TMC सरकार और कोलकाता पुलिस के रवैए ने पीड़िता की माँ को घनघोर अंधकार में धकेल दिया है। उन्हें यह कहने को मजबूर कर दिया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनकी बेटी के लिए न्याय माँगने के आंदोलन का उसी तरह गला घोंटना चाहती हैं, जैसे उनकी बेटी का गला घोंट दिया गया था।
इस माँ की बेटी के साथ कोलकाता के आरजी कर मेडिकल अस्पताल में बर्बरता हुई। बेटी के शव के लिए घंटों इंतजार कराया गया। जल्दबाजी में अंतिम संस्कार के लिए दबाव डाला गया। कथित तौर पर कहा गया कि उनकी बेटी ने सुसाइड किया है। कोलकाता पुलिस ने तब ‘घूस’ देने की कोशिश की, जब घर में बेटी का शव पड़ा था।
West Bengal | RG Kar Medical College and Hospital rape and murder case in Kolkata | Victim's mother says, "The Chief Minister (Mamata Banerjee) is lying. We were offered money…My daughter will not return, will I lie in her name? The Chief Minister said you will get money, make… pic.twitter.com/If2fTwSOMi
अब इस माँ ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘झूठी’ बताया है। उन्होंने कहा है, “मुख्यमंत्री झूठ बोल रही हैं। हमें पैसा ऑफर किया गया था। मेरी बेटी अब नहीं लौटेगी, क्या मैं उसके नाम पर झूठ बोलूँगी? मुख्यमंत्री ने कहा था कि आपको मुआवजा मिलेगा और आप अपनी बेटी की याद में कुछ बनवा सकती हैं। मैंने तब कहा था कि जब मेरी बेटी को न्याय मिल जाएगा, मैं आपके दफ्तर आकर मुआवजा ले जाऊँगी।”
दरअसल, पिछले दिनों मृतक डॉक्टर के पिता ने कोलकाता पुलिस की ओर से रिश्वत की पेशकश का खुलासा किया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने इसे खारिज करते हुए पीड़ित परिवार से पैसों की पेशकश का सबूत देने को कहा था। मुख्यमंत्री ने इस मामले में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को खत्म कर, प्रदर्शनकारियों से आने वाले दुर्गापूजा की तैयारियों में जुटने की अपील भी की है।
मृतका की माँ ने इसे ‘अमानवीय’ बताते हुए कहा है, “यदि देश के लोग त्योहार मनाने के लिए जाना चाहते हैं तो वे जा सकते। लेकिन उन्होंने मेरी बेटी को अपने परिवार का सदस्य माना है। यदि वे त्योहार के लिए जाना चाहें तो मुझे कुछ नहीं कहना। मेरे घर में भी दुर्गा पूजा होती थी, मेरी बेटी खुद ही करती थी। लेकिन अब मेरे घर में कभी भी दुर्गा पूजा नहीं मनाई जाएगी। मेरे कमरे की लाइट बंद है। मैं लोगों से कैसे कहूँ कि वे त्योहार मनाने के लिए चले जाएँ?”
पीड़ित माँ का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री इस आंदोलन को दबाना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी उसी तरह आंदोलन का गला घोंटना चाहती हैं, जैसे मेरी बेटी का गला घोंटा गया। सबूत नष्ट कर दिए गए। न्याय मिलने तक हम सड़क पर ही रहेंगे।”