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पुणे में गणपति विसर्जन पर खूब बजेंगे ढोल-नगाड़े, CJI चंद्रचूड़ वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दी हरी झंडी: NGT ने लगाई थी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने गणपति विसर्जन में ढोल-ताशे की संख्या पर सीमा लगाने वाले करने वाले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के एक आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश पुणे शहर के लिए दिया गया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने NGT का यह निर्णय रोका है।

गुरुवार (12 सितम्बर, 2022) को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार, पुणे अधिकारियों, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) समेत अन्य को इस मामले में नोटिस भी जारी किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इनको अपना ढोल-ताशा बजाने दीजिए, यह पुणे का दिल है।” NGT ने इससे पहले प्रत्येक गणेश पंडाल के आसपास ध्वनि प्रदूषण की निगरानी करने और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही उसने ढोल-ताशा-जंज बजाने वाले ग्रुप की संख्या को 30 लोगों तक सीमित करने का आदेश दिया था।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अमित पई ने कहा कि पुणे में गणपति विसर्जन में ‘ढोल ताशा’ का बहुत गहरा सांस्कृतिक महत्व है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को गणेश चतुर्थी समारोह के दौरान ध्वनि प्रदूषण को सीमित करने के NGT के बाकी निर्देशों से कोई समस्या नहीं है लेकिन वह ढोल ताशों का की संख्या घटाने के खिलाफ हैं।

CJI की बेंच ने कहा कि इस मामले में नोटिस जारी कर दीजिए। बेंच ने कहा कि पई ने इस मामले में बताया है कि यदि इसे आगे बढ़ाया तो NGT का निर्देश नम्बर 4 लागू हो जाएगा और ढोल ताशे नहीं बज पाएँगे। CJI ने कहा कि ढोल ताशा बजाने दीजिए क्योंकि यह पुणे का दिल है।

गौरतलब है कि NGT ने 30 अगस्त को आदेश दिया था कि 7 सितंबर से शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए गणेश पंडालों की निगरानी की जाए। इसके अलावा NGT ने विसर्जन जुलूसों को लेकर भी कुछ निर्देश दिए थे।

NGT ने पंडाल में 100 वाट की क्षमता से अधिक लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा विसर्जन जुलूस के दौरान टोल और डीजे सेट के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही NGT ने ढोल ताशा वाले समूह की संख्या घटा कर 30 कर दी थी।

मेजर हर्षित चौधरी बन शहबाज ने कई हिंदू लड़कियों को फाँसा, शादी भी की: वन्दे भारत में चोरी से खुला राज, अधिकारी लड़की से फिर शादी के लिए करने गया था बात

उत्तर प्रदेश के रहने वाले शहबाज ने फर्जी हिन्दू नाम रख कम से कम दो दर्जन हिन्दुओं लड़कियों को निशाना बनाया। उन्हें झूठी पहचान के आधार पर फंसा कर बाद में उनसे पैसे वसूले। उसने एक हिन्दू लड़की से फर्जी पहचान के आधार पर शादी भी कर ली। लव जिहाद करने वाले शहबाज को अहमदाबाद पुलिस ने दिल्ली से पकड़ा तो कई खुलासे हुए।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में 31 अगस्त को वन्दे भारत ट्रेन में एक बैग की चोरी हुई थी। इस चोरी की जाँच में पुलिस को हर्षित चौधरी नाम के आदमी का पता लगा था। उसके टिकट से पुलिस ने जानकारी निकाल कर उसका नम्बर ट्रेस किया था।

अहमदाबाद पुलिस को उसकी लोकेशन दिल्ली में मिली थी। इसके बाद पुलिस उसे पकड़ ले गई थी। पुलिस को शहबाज ने अपनी पहचान सेना में तैनात मेजर के तौर पर बताई थी। हालाँकि, यह झूठ निकला। इसके अलावा उसके आधार और पैन कार्ड भी फर्जी निकले। यहाँ तक कि उसने सेना का पहचान पत्र बनवा रखा था जो फर्जी निकला।

पुलिस ने जब उसकी पड़ताल की तो सामने आया कि वह हर्षित चौधरी नहीं बल्कि अलीगढ़ का रहने वाला मोहम्मद शहबाज है जो फर्जी पहचान के आधार पर ऑनलाइन साईट से हिन्दू लड़कियों को निशाना बनाता है। पुलिस ने उसकी फोन की जाँच भी की। उसके फोन में लगभग 24 लड़कियों के फोटो मिले।

पुलिस ने जब पूछताछ की तो शहबाज ने बताया कि वह सब कहीं अपनी पहचान मेजर हर्षित चौधरी के तौर पर बताता है और इसके सहारे अच्छी कमाई करने वाली लड़कियों को फंसाता है। उसने बताया कि वह शादी वाली साईट से लड़कियों को निशाने पर लेता है। वह इन लड़कियों को शादी का झांसा देकर सम्बन्ध बनाता है।

वह एक लड़की को अपने जाल में फँसाने के लिए ही अहमदाबाद आया था जहाँ उसने बैग चोरी किया। शहबाज ने बताया कि वह इन हिन्दू लड़कियों को ब्लैकमेल करता है और उनसे पैसे वसूलता है। वह बार बार यही क्रम दोहराता है। मोहम्मद शहबाज कुछ वर्ष सेना में रहा भी है, इसीलिए वह अपने आप को मेजर बता लेता है और किसी को शक नहीं होता।

बताया गया है कि मोहम्मद शहबाज को सेना से बर्खास्त किया जा चुका है। मोहम्मद शहबाज ने झारखंड की हिन्दू लड़की से शादी भी की है। वह उसे अलीगढ़ में ले कर रहता था। यह शादी हिन्दू तौर तरीके से हुई है। लड़की को भी इस बात की जानकारी अब हुई है कि उसकी शादी हर्षित नहीं बल्कि शहबाज से हुई है।

अब उस हिन्दू लड़की ने भी अलीगढ़ में एक FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शहबाज उससे मारपीट करता था और जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता था। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस उसे गुजरात से लेकर भी आई है। शहबाज के बारे में खुलासा हुआ है कि वह पहले से शादीशुदा है, उसका पाँच साल पहले निकाह हुआ था और उसके 2 बच्चे हैं।

पुलिस अब उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई कर रही है। मामले में अगर वह पीड़ीताएं भी सामने आती हैं जिनसे पूर्व में शहबाज ने ठगी और लव जिहाद किया है तो उसके खिलाफ और भी मामले दर्ज होने की संभावना है। शहबाज से अभी पुलिस और जानकारी निकालने की कोशिश कर रही है।

CPM नेता सीताराम येचुरी: एकमात्र हिंदू देश नेपाल से ‘हिंदू’ शब्द को गायब करने का रचा षड्यंत्र, साथ दिया था कॉन्ग्रेसी सरकार ने

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), जिसे CPM या CPIM भी कहा जाता है, के महासचिव सीताराम येचुरी का निधन हो गया है। वे 72 साल के थे और निमोनिया की शिकायत होने के बाद उन्हें 19 अगस्त को दिल्ली के AIIMS में भर्ती कराया गया था। पिछले 25 दिन से उनका इलाज चल रहा था। वे 1974 में स्टूडेंट फेरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े थे।

CPI(M) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि ‘कॉमरेड सीताराम येचुरी को साँस की नली में गंभीर संक्रमण हुआ था। डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी।’ कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा, “वे मेरे अच्छे दोस्त थे। वे भारत के विचार के सच्चे रक्षक थे। वे देश को अच्छी तरह समझते थे। मैं उनके साथ की गई लंबी चर्चाओं को बहुत याद करूँगा। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ हैं।”

चेन्नै के तेलुगू भाषी ब्राह्मण परिवार में 12 अगस्त 1952 को जन्मे सीताराम येचुरी नेपाल के राजा वीरेंद्र सिंह की लोकतांत्रिक पद्धति के खिलाफ और वामपंथियों के सहयोगी थे। वे नेपाल की विद्रोही वामपंथियों की समय-समय पर समर्थन एवं सहयोग किया। दुनिया के इकलौते हिंदू राष्ट्र के खिलाफ सीपीएम के सीताराम येचुरी और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

येचुरी और त्रिपाठी की मुलाकात माओवादी नेता बाबूराम भट्टाराई से दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुई थी, जहाँ वे छात्र नेता थे। साल 2006 में नेपाल में हिंदू राजशाही खत्म हो गई और वह हिंदू राष्ट्र से एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बन चुका था। उस दौरान येचुरी और त्रिपाठी नेपाली संसद में भी शामिल हुए थे।

नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री और ‘भारत के अच्छे मित्र’ चक्र प्रसाद बस्तोला सहित नेपाली नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया था। संसद में येचुरी ने कहा था, “यह पूरी तरह से नेपाली लोगों की जीत है। अक्सर भारत को बड़े भाई के रूप में देखा जाता है। भारत और नेपाल भाई हैं, लेकिन जुड़वाँ हैं। एक की पीड़ा दूसरे में झलकती है। एक की जीत का जश्न दूसरा मनाता है।”

येचुरी और त्रिपाठी ने साउथ एशिया फाउंडेशन के राहुल बरुआ के साथ मिलकर साल 2005 में भारत में ‘नेपाल डेमोक्रेसी सॉलिडेरिटी कमेटी’ की स्थापना की थी। नेपाल में लोकतंत्र लाने के लिए येचुरी ने माओवादियों के साथ-साथ अपने प्रभाव का खूब इस्तेमाल किया। वहीं, त्रिपाठी ‘नेपाली कॉन्ग्रेस’ और शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले उसके अलग हुए गुट नेपाली कॉन्ग्रेस (डेमोक्रेटिक) के करीब थे।

नेपाल में हिंदू राजशाही खत्म हुई तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने येचुरी का इस्तेमाल किया था। मनमोहन सिंह का मानना था कि जेएनयू के एक अन्य पूर्व छात्र रहे माओवादी बाबूराम भट्टराई पर वे अपना प्रभाव इस्तेमाल कर सकें। त्रिपाठी भट्टराई को भी अच्छी तरह जानते थे। हिंदू राजशाही खत्म होने से पहले येचुरी दो बार वामपंथियों का प्रतिनिधिमंडल लेकर नेपाल जा चुके थे।

नेपाल की राजनीति एवं हिंदू राजशाही के विरोध में सीताराम येचुरी की भूमिका का इसी अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी वजह से नेपाल के राजनीतिक दलों और माओवादियों के बीच 12 सूत्री समझौते हुए थे।इसे ‘येचुरी फॉर्मूला’ कहा गया था। तब येचुरी ने कहा था, “मैं इस तरह की ब्रांडिंग के खिलाफ हूँ। यह नेपाली फॉर्मूला है और नेपाली राजनीतिक दल यही चाहते थे।”

नेपाली संसद की बहाली और संविधान सभा के गठन की प्रक्रिया का स्वागत करते हुए सीपीएम नेता ने कहा था, “नेपाल को एक नए लोकतांत्रिक रास्ते पर चलना चाहिए। राजनीतिक प्रक्रिया को 1990 में जो हासिल हुआ था, उसे बहाल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही समझ माओवादियों को लोकतांत्रिक मुख्यधारा में लाएगी।”

साल 2006 में नेपाल के लिए जाने से पहले उन्होंने माओवादी नेतृत्व प्रचंड से बात की थी। दिल्ली में उन्होंने कहा था, “उनका मुद्दा बिल्कुल स्पष्ट है। संविधान सभा के सवाल पर नेपाली लोगों के साथ दो बार विश्वासघात किया गया है? पहली बार 1951 में और फिर 1990 में। वे इसे दोहराना नहीं चाहते। यह उनके लिए एक उचित पूर्व शर्त है, जिसे वे ‘नेपाल के नए लोकतांत्रिक विकास’ कहते हैं।”

उन्होंने कहा :e, “इसका भारत में अति-वामपंथियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आज की क्रांतियों में लोकतंत्र के लिए लोगों की चाहत को भी शामिल किया जाना चाहिए।” नेपाली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गिरिजा प्रसाद कोइराला के निमंत्रण पर येचुरी और त्रिपाठी नेपाल पहुँचे थे और वहाँ सात दलों के गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक की थी।

नेपाल में जब संविधान लागू करने में कुछ ही महीने बाकी रहे तो सीताराम येचुरी वहाँ के राजनीतिक दलों से विचार विमर्श करने के लिए साल 2010 में तीन दिवसीय यात्रा पर नेपाल पहुँचे। इस दौरान वे नेपाली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गिरिजा प्रसाद कोइराला, नेपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के अध्यक्ष झालानाथ खनल से भी मुलाकात की थी।

इस तह सीताराम येचुरी और दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने पड़ोसी देश नेपाल की आंतरिक राजनीतिक हालातों में हस्तक्षेप करते हुए वामपंथियों को हर तरह से मदद पहुँचाई। इसके बाद हिंदू राष्ट्र की पदवी को खत्म करके भारत के इस पड़ोसी देश को एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ज्योति बसु CPM पोलित ब्यूरो के सदस्य येचुरी को खतरनाक आदमी कहा करते थे।

सुल्तानपुर डकैती में शामिल था मंगेश यादव, यूपी डीजीपी ने जारी किया सबूत: वीडियो में मृतक की बहन के बयान से अखिलेश यादव की राजनीति पर फिरा पानी

उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके साफ किया है कि डकैत मंगेश यादव सुल्तानपुर में हुई डकैती में शामिल था। उन्होंने इसके सबूत में एक CCTV वीडियो भी जारी किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पुलिस किसी की जाति देख कर एनकाउंटर नहीं करती है।

गुरुवार (12 सितम्बर, 2024) को हुई लखनऊ में डीजीपी प्रशांत कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सुल्तानपुर में हाल ही में डकैत मंगेश यादव के एनकाउंटर पर बात की। उन्होंने इस संबंध में उठाए गए प्रश्नों का जवाब भी दिया।

इस दौरान डीजीपी प्रशांत कुमार ने सुल्तानपुर डकैती कांड का एक वीडियो मीडिया को दिखाया। इसमें पुलिस ने अपराधियों पर नंबर भी लिख रखे थे। डीजीपी ने बताया कि वीडियो में पाँच नम्बर पर दिखने वाला अपराधी मंगेश यादव था। वह हेलमेट पहन कर दुकान में घुसा था।

डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस दौरान मंगेश हथियारों से लैस था और पिस्टल के डैम पर दुकानदार को धमका रहा था। वह दुकान में तीसरे नम्बर पर घुसा था। उससे पहले अनुज प्रताप सिंह और एक और लुटेरा सर्राफ की दुकान के भीतर पहुँच चुका था। मंगेश यादव केवल घटना में शामिल ही नहीं था बल्कि उसने जौनपुर से एक बाइक भी चुराई थी।

यह बाइक इस लूट में काम में ली गई थी। डीजीपी प्रशांत कुमार ने इस दौरान एक और वीडियो भी साझा किया जिसमें पुलिस को मंगेश की बहन बता रही हैं कि वह दो महीने से घर नहीं पहुँचा है। बाद में मंगेश की बहन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लूट वाले दिन मंगेश घर पे था। ऐसे में दोनों बयानों में अंतर नजर आया।

प्रशांत कुमार ने बताया कि इस वारदात में एक बोलेरो गाड़ी उपयोग की गई थी, उसे भी बरामद कर लिया गया था। इस बोलेरो के भीतर से 15 किलो चाँदी मिली थी। इसके अलावा 1.2 किलो सोना एक खेत से मिला था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में मुख्य आरोपित विपिन सिंह ने स्वयं रायबरेली कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।

वहीं मंगेश यादव के एनकाउंटर पर डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि पुलिस जाति देख कर काम नहीं करती। उन्होंने कहा कि मंगेश यादव के लूट में शामिल होने के सबूत थे और उस पर की गई कार्रवाई निष्पक्ष है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा था जिसे हमने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया है।

क्या था मामला?

सुल्तानपुर में बदमाशों के एक गैंग ने 28 अगस्त, 2024 को दिन दहाड़े भारत सर्राफ नाम की एक दुकान पर धावा बोल कर उसे लूट लिया था। इस दौरान कई बदमाश दुकान के अंदर घुसे थे जबकि बाकी बाहर मौजूद थे। यह दुकान से करोड़ों का सोना-चाँदी और कैश लेकर गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने इनकी जाँच चालू की थी। मामले में कई आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था जबकि विपिन सिंह ने सरेंडर कर दिया था। वहीं मंगेश यादव इस मामले में फरार था।

2 सितम्बर, 2024 को मंगेश का सामना UPSTF से हो गया। इस दौरान उसने सरेंडर के बजाय पुलिस पर ही गोली चला दी थी। इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। इसके बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया। समाजवादी पार्टी मुखिया ने इस एनकाउंटर में गड़बड़ी के आरोप लगाए और कहा कि पुलिस ने जाति देख कर यह किया। हालाँकि, यूपी पुलिस के मुखिया प्रशांत कुमार ने खुद ही सामने आ कर इस मामले में सब कुछ स्पष्ट कर दिया है।

PM मोदी के जन्मदिन पर अजमेर दरगाह में लगेगा लंगर, शाही देग में तैयार होगा 4000 किलो शाकाहारी खाना: सलामती की दुआ भी पढ़ी जाएगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 74वें जन्मदिन के मौके पर 17 सितंबर को अजमेर शरीफ दरगाह की ओर से 4000 किलो शाकाहारी भोजन तैयार करवाकर वितरित करने का निर्णय लिया गया है। दरगाह के अधिकारियों की ओर से बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और सेवा पखवाड़ा के मौके पर ये खाना अजमेर दरगाह की शाही देग में तैयार होगा।

इस आयोजन को लेकर अजमेर शरीफ के सैयद अफशां चिश्ती ने बुधवार को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शाही देग में सालों से शाकाहारी भोजन तैयार होता आया है और आने वाली 17 सितंबर को इसमें 4,000 किलो शाकाहारी भोजन तैयार होगा, जिसमें शुद्ध चावल और इसके साथ ही घी, मेवे आदि डाले जाएँगे। बाद में इसे गरीबों को बाँटा जाएगा।

उन्होंने बताया कि ये आयोजन पीएम मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में होगा। साथ ही कहा ऐसा पहली बार हो रहा है कि देश के किसी प्रधानमंत्री के लिए दरगाह की देग में लंगर तैयार होगा। सैयद अफशां चिश्ती ने कहा कि इस आयोजन के साथ वह लोग पीएम मोदी के जन्मदिन पर उनकी लंबी उम्र के लिए भी प्रार्थना करेंगे। पूरे लंगर का आयोजन इंडियन माइनॉरिटी फाउंडेशन और अजमेर शरीफ के चिश्ती फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है।

भोजन का विरतरण 17 सितंबर को सुबह भर रहेगा। दरगाह से जुड़े लोग व्यवस्थित तरीके से इसे वितरित करने में मदद करेंगे। दरगाह के अधिकारियों ने बताया उनके द्वारा किया जा रहा यह कार्यक्रम न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के जश्न का प्रतीक है, बल्कि सेवा और सामुदायिक कल्याण की भावना को भी दर्शाता है। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम में पीएम मोदी की दुआ और सलामती के लिए दुआ भी पढ़ी जाएगी। साथ ही कुरान की आयतों का पाठ होगा, नात (भक्ति गीत गाए जाएँगे) और कव्वाली होगी।

महंत अवैद्यनाथ: एक संत, एक योद्धा और एक समाज सुधारक, जिन्होंने राम मंदिर के लिए बिगुल फूँका और योगी आदित्यनाथ जैसे व्यक्तित्व को निखारा

सन 1919 में एक साधारण परिवार में जन्मे महंत अवैद्यनाथ को पहले ‘कृपाल सिंह बिष्ट’ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ वह गोरखनाथ मठ के महंत बने और अपने गुरु महंत दिग्विजयनाथ से विरासत में मिले बड़े कर्तव्यों को सफलतापूर्वक निभाया। महंत दिग्विजयनाथ न केवल एक धार्मिक नेता थे, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और हिंदू पुनर्जागरण के एक प्रमुख नेता भी थे।

महंत अवैद्यनाथ ने इस महान धरोहर को न केवल सँभालना था, बल्कि उसे और आगे ले जाकर समाज और धर्म के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना था। महंत अवैद्यनाथ का जीवन केवल आध्यात्मिकता और समाज सेवा तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा, जहाँ उन्होंने अपने धार्मिक आदर्शों को बेहद मजबूती के साथ लागू किया, जिसे आज एक आदर्श के रूप में माना जाता है।

वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे और बाद में गोरखपुर से सांसद भी सदस्य बने। सन 1962  में उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के मनीराम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से हिन्‍दू महासभा की ओर से चुनाव में भाग लिया था। सन 1969 में जब वे मठ का महंत बनकर उसका कार्यभार सँभाला तो उन्होंने इसे केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रखा।

महंत अवैद्यनाथ के नेतृत्व में मठ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। इससे मठ केवल एक आध्यात्मिक स्थान ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का एक प्रमुख केंद्र बन गया। सन 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में करीब 1,500 दलितों ने इस्लाम धर्म अपना लिया था। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया।

इस घटना के बाद महंत अवैद्यनाथ ने सामाजिक समरसता और दलित उत्थान के लिए सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। उनके नेतृत्व में 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन हुआ, लेकिन उसी साल 31 अक्टूबर को इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद यह मामला कुछ दिनों के लिए रोक दिया गया।

ठीक एक साल बाद 1 नवंबर 1985 को द्वितीय धर्म संसद में समिति ने सरकार को अल्टीमेटम दिया गया कि 8 मार्च 1986 तक राम मंदिर के ताले खुलवा दे नहीं तो सरकार लाखों संतों के क्रोध का सामना करने को तैयार रहे। महंत अवैद्यनाथ, विश्व हिंदू परिषद् और फैजाबाद के एक युवा वकील के मिले-जुले प्रयास से यह आंदोलन कोर्ट का आदेश लाने में सफल रहा।

इस आदेश में कहा गया कि 1 फरवरी 1986 को श्रीराम जन्मभूमि के ताले खोले जाएँ। उस वक़्त उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह थे और उनकी महंत अवैद्यनाथ में गहरी आस्था थी। परिणामस्वरूप ये लोग प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर इतना दबाव बनाने में सफल रहे कि वह इस फैसले में सहयोग करें। आगे चलकर राजीव गाँधी उनके आगे झुके भी।

एक बार फिर से 22 सितंबर 1989 को दिल्ली के वोट क्लब में विशाल हिंदू सम्मेलन में महंत अवैद्यनाथ के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखने की तिथि निश्चित कर दी गई। 9 और 10 नवंबर 1989 को वैदिक विधि विधान से आधारशिला का समारोह शुरू हुआ और महंत अवैद्यनाथ के कहने पर अनुसूचित जाति से आने वाले कामेश्वर चौपाल से आधारशिला रखवाई गई। 

दरअसल, गोरक्षपीठ जाति-पाँति और ऊँच-नीच जैसे भेदभाव को नहीं मानता है। इसलिए राम मंदिर की आधारशिला रखने के लिए SC समाज के व्यक्ति को चुना गया। इस बीच दिसंबर 1989 में राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के नए प्रधानमंत्री बने। उन्होंने महंत अवैद्यनाथ से मामले को सुलझाने के लिए कुछ महीनों का समय माँगा।

सरकार की लापरवाही को देखते हुए महंथ अवैद्यनाथ ने राम मंदिर को लेकर देशभर में जनजागरण अभियान शुरू कर दिया। वहीं, दूसरी ओर अजय सिंह बिष्ट कोटद्वार में बीएससी की पढ़ाई कर रहे थे और  एबीवीपी के साथ जुड़कर सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते रहते थे। पुनर्जागरण के दौर को लेकर नियति ने भी बहुत कुछ तय कर रखा था।

इसी जनजागरण में दौरान महंत अवैद्यनाथ को अपना शिष्य, गोरखपीठ के भविष्य का पीठाधीश्वर और देश के सबसे बड़े सूबे को उसका सबसे लंबे समय तक रहने वाला मुख्यमंत्री मिलने वाला था। नियति ने इन्हीं के मुख्यमंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण होना तय कर दिया था। इसके अलावा भी बहुत कुछ अभी होना बाकी था। 

पहली बार 1990 में अजय सिंह बिष्ट का साक्षात्कार महंत अवैद्यनाथ से हुआ। उनसे वो अत्यंत प्रभावित हुए। महंत अवैद्यनाथ की अध्यक्षता वाली श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन समिति ने घोषणा की कि 30 अक्टूबर को अयोध्या में कारसेवा के तहत मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। उस समय उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को सांप्रदायिक करार दिया था।

इस तरह श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत अवैद्यनाथ कर रहे थे। उनके साथ साधु-संतों के 970 से अधिक संगठन और तमाम सांस्कृतिक संगठन एवं राजनीतिक दल भी काम कर रहे थे। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या की रथ यात्रा निकालने की घोषणा कर दी।

इसके विपरीत मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कानून व्यवस्था की आड़ में यह घोषणा की, “मेरे मुख्यमंत्री रहते अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।” 23 अक्टूबर को लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा बिहार के समस्तीपुर में रोक कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। 26 अक्टूबर को दिल्ली से अयोध्या जाते समय महंत अवैद्यनाथ को बीच रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया।

इन सबके बावजूद 30 अक्टूबर को अयोध्या में लाखों कारसेवक प्रवेश कर गए, जिससे बौखलाई उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुलिस ने कारसेवकों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। महंत अवैद्यनाथ से प्रभावित अजय सिंह बिष्ट भी इस कारसेवा में शामिल हुए थे। कारसेवकों पर हमले के ठीक एक साल बाद महंत अवैद्यनाथ ने एक घोषणा की।

महंत अवैद्यनाथ ने 30 अक्टूबर 1991 को कारसेवकों को श्रद्धांजलि देते हुए घोषणा की कि श्रीराम मंदिर का निर्माण किसी के दया से नहीं, बल्कि हिंदुओं के शौर्य से होगा। 23 जुलाई 1992 को जब सुप्रीम  कोर्ट ने विवादित स्थल पर किसी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी तो उसी दिन महंत अवैद्यनाथ के नेतृत्व एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव से जाकर मिला।

प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने महंत अवैद्यनाथ से 3 महीने तक रुकने का आग्रह किया। हालाँकि, समय बीत जाने पर सरकारी लापरवाही को देखते हुए 30 अक्टूबर की पाँचवीं धर्म संसद में 6 दिसंबर को कारसेवा का दिन तय हुआ। 6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों व साधु संतों के मौजूदगी में विवादित ढाँचा गिरा दिया गया। मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में चलने लगा था।

इधर 1994 में अजय सिंह बिष्ट गोरखपीठ के उत्तराधिकारी घोषित किए जा चुके थे और वे अब योगी आदित्यनाथ बन चुके थे। सन 1998 में बड़े महंत जी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया और योगी आदित्यनाथ जी, जिन्हें लोग वहाँ प्यार से ‘छोटका बाबा’ कहते थे उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया। महंत अवैद्यनाथ की एक और महान उपलब्धि उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ को तैयार करना थी।

उन्होंने योगी आदित्यनाथ को न केवल धार्मिक, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए भी तैयार किया। आज योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और अपने गुरु के आदर्शों पर चलकर प्रदेश और देश की सेवा कर रहे हैं। बड़े महंत जी (अवैद्यनाथ जी) पूर्ण रूप से धार्मिक-सामाजिक और मंदिर के कार्यों में अपने आपको लगा दिया। उनके जीवन के आख़िरी इच्छा राम मंदिर को देखना था।

इसी आस में महंत अवैद्यनाथ ने 12 सितंबर 2014 को अपना नश्वर शरीर त्याग दिया। महंत अवैद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद योगी आदित्यनाथ गोरखपीठ के पीठाधीश्वर बने। फिर 19 मार्च 2017 को वे देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिनों के बाद योगी आदित्यनाथ अयोध्या भगवान राम का दर्शन करने गए।

आखिरकार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ। महंत अवैद्यनाथ का जीवन धर्म, सेवा और नेतृत्व का प्रतीक था। उन्होंने गोरखनाथ मठ की परंपराओं को न केवल सँजोया, बल्कि उन्हें समाज की भलाई के लिए उपयोग किया। उनका जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी सेवाओं तक फैला हुआ था।

हिंदुओं पर लाठीचार्ज के विरोध में शिमला बंद, इमाम ने माना मस्जिद ‘अवैध’: कहा- कोर्ट का आदेश हो तो तोड़ देंगे, बचाव में जुटी है कॉन्ग्रेस सरकार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला गुरुवार (12 सितम्बर, 2024) को ठहर गई। शिमला के व्यापार मंडल ने सुक्खू सरकार के हिन्दुओं पर दमन के विरोध में बाजार बंद रखे। पर्यटकों और आम जनता की आवाजाही से गुलजार रहने वाला शिमला एक दम शांत पड़ा है। शहर भर के व्यपारियों ने यह फैसला अवैध मस्जिद के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हिन्दुओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में लिया। वहीं प्रदर्शनकारी हिन्दू DC और SP के दफ्तर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने लगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिमला में गुरुवार को किसी भी दुकान का शटर नहीं उठा। शिमला के सभी प्रमुख छोटे बड़े बाजार बंद रहे। यह बंदी सुबह से लेकर दोपहर 1 बजे तक की गई। इस दौरान ना केवल दुकानें बंद रहीं बल्कि शिमला का व्यापार मंडल भी सड़कों पर उतर आया। शिमला के व्यपारियों ने बुधवार को हिन्दुओं पर चली पुलिस की लाठियों के विरुद्ध प्रदर्शन किया।

व्यापारी बोले- एसपी को हटाओ

व्यापार मंडल ने एक रैली निकाल कर हिन्दुओं के विरुद्ध हुई पुलिसिया कार्रवाई पर अपना रोष जताया। शहर भर के व्यापारियों ने इस दौरान सुक्खू सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की। इसी के साथ व्यापारी हिन्दू प्रदर्शनकारी शिमला के DC और SP के दफ्तर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया।

व्यापरियों ने माँग की कि शिमला के SP को हटाया जाए। वहीं अब सामने आया कि बुधवार को हुई पुलिसिया कार्रवाई में 12 लोग घायल हुए हैं। कई लोगों को हल्की चोटें आई। सभी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस बीच संजौली इलाके में तनाव बना हुआ है।

गौरलतब है कि शिमला के संजौली में बनी अवैध मस्जिद पर कार्रवाई की माँग करते हुए बुधवार को शिमला के हिन्दुओं ने एक प्रदर्शन का आयोजन किया था। यह प्रदर्शन संजौली इलाके में ही होना था। हालाँकि, सुक्खू सरकार ने इसको रोकने के लिए सभी हथकंडे अपनाए।

इसके बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं रुके तो पुलिस ने उन पर लाठियाँ चला दी और पानी की बौछार मारी। इसमें कई लोग घायल हुए। संजौली की अवैध मस्जिद मामले में अब इस बीच नया मोड़ भी आ गया है। इसको गिराने के पक्ष में मुस्लिम वर्ग ही आ गया है।

मस्जिद कमिटी ने कहा- तोड़ तो अवैध निर्माण

मस्जिद के अवैध निर्माण पर हिन्दुओं के बढ़ते दबाव को देखकर संजौली मस्जिद कमिटी ने खुद ही इसे गिराने का प्रस्ताव दिया है। गुरुवार को मस्जिद कमिटी ने नगर निगम के अधिकारियों से मुलाक़ात की है। कमिटी ने कहा कि वह कोर्ट का आदेश आने पर मस्जिद में अवैध रूप से किया गया निर्माण तोड़ देंगे।

मस्जिद कमिटी ने कहा है कि वह कोर्ट का फैसला आने तक इसकी तीन मंजिलों को सील कर देंगे। इस मामले में अगली सुनवाई अक्टूबर में है। कमिटी ने यह मान लिया है कि मस्जिद में अवैध निर्माण हुआ है। उसके प्रतिनिधियों ने कहा है कि यह अवैध निर्माण बाहर से आने वाले मुस्लिमों के कारण हुआ है।

संजौली मजिस्द के इमाम शहजाद ने कहा है कि हमने मस्जिद का निर्माण हटाने और उसे सील करने का आवेदन दिया है। इमाम शहजाद ने यह भी कहा कि वह किसी प्रेशर में यह काम नहीं कर रहे हैं बल्कि इस भाईचारे को बचाना चाहते हैं। नगर निगम के आयुक्त भूपेन्द्र अत्री ने कहा है कि वह इस आवेदन पर अब विचार करेंगे।

CM सुक्खू के सलाहकार ने कहा- प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यकर्ता

जहाँ एक ओर संजौली मस्जिद की कमिटी ने मान लिया है कि यहाँ अवैध निर्माण हुआ है, वहीं सुक्खू सरकार हिन्दू प्रदर्शनकारियों को भाजपा का कार्यकर्ता बताने में जुटी है। CM सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने प्रदर्शनकारियों को भाजपा कार्यकर्ता बता है। नरेश चौहान ने कहा, “मैं सबको निजी तौर पर जानता हूँ, यह सभी भाजपा के कार्यकर्ता हैं और चुनाव भी लड़ चुके हैं। ये लोग राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दे को उठाना चाहते हैं। यह मुद्दा हिन्दू-मुस्लिम का नहीं है।”

कहाँ से चालू हुआ विवाद

राजधानी शिमला में बनी संजौली की मस्जिद में अवैध निर्माण को हटाने की लम्बे समय से माँग चल रही है। यह मामला हाल ही में मारपीट की एक घटना के बाद और गरमा गया। दरअसल, 31 अगस्त, 2024 को एक स्थानीय युवक यशपाल की मल्याना में मुस्लिम लड़कों से कहासुनी हुई।

इसके बाद मुस्लिम हिंसक हो गए, उन्होंने यशपाल पर हमला कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमला करने वाले यह युवक कुछ देर बाद संजौली की मस्जिद में छुप गए।इसके बाद आसपास के लोगों का गुस्सा भड़क गया। स्थानीय लोग यहाँ इकट्ठा होकर इन युवकों पर कार्रवाई करने की माँग करने लगे।

इसको लेकर पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को पकड़ा, जिसमें 2 नाबालिग हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम गुलनवाज, सारिक, सैफ अली और रोहित हैं। इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया।

इस लड़ाई झगड़े की घटना के बाद यह मस्जिद विवादों के केंद्र में आ गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली की यह मस्जिद पहले कच्ची थी और मात्र दो मंजिल की थी। लेकिन 2010 के बाद इसमें तेजी से पक्का निर्माण किया जाने लगा। देखते देखते यह मस्जिद पाँच मंजिल तक पहुँच गई।

इस मामले में राज्य सरकार ने बताया कि 2010 में जब इस मस्जिद में अवैध निर्माण चालू हुआ तो शिमला नगर निगम ने नोटिस भी भेजे लेकिन निर्माण नहीं रुका। मस्जिद के निर्माण रोकने को लेकर 30-35 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके आसपास एक अवैध निर्माण को शिमला नगर निगम ने तोड़ा भी था। फिर भी यह पाँच मंजिल मस्जिद शहर के बीचों-बीच खड़ी कर दी गई।

तबसे ही इस मस्जिद को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन कर रहे हैं। मस्जिद के अवैध होने की बात हिमाचल सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी कही थी। स्थानीय लोगों को हिन्दू संगठनों की माँग है कि इस अवैध निर्माण को जमींदोज किया जाए और सरकार इसमें ढिलाई ना बरते। हालाँकि, सुक्खू सरकार बता रही है यह मामला अभी कोर्ट में है।

PM की इफ्तार पार्टी में CJI का जाना ‘सेकुलरिज्म’, मुख्य न्यायाधीश की गणेश पूजा में प्रधानमंत्री का होना ‘लोकतंत्र पर खतरा’: इतना दोगलापन कहाँ से लाते हो लिब्रांडुओं

गणेश चतुर्थी के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ के घर पहुँचे। इस दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी ने प्रधानमंधी का स्वागत किया। बाद में सबने हाथ में थाल लेकर गणेश भगवान की पूजा-अर्चना की… ये दृश्य सामान्य हिंदू के लिए अभिभूत करने वाला था लेकिन लिबरलों के लिए ये किसी जख्म से कम नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वीडियो को देखने के बाद लिबरल बिलबिलाए हुए हैं। उनके लिए स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संविधान सब खतरे में आ गया है। कहा जा रहा है कि अब सीजेआई और प्रधानमंत्री के बीच के रिश्ते खुलकर दिखने लगे हैं। ऐसे में उन्हें आशंका है कि उन्हें अदालत से न्याय मिल सकेगा या नहीं।

रोना रोने वालों में पहला नाम आरफा खानुम शेरवानी का है। उन्हें सीजेआई के घर में पीएम मोदी को आरती करता देख इतना दुख हुआ कि उन्होंने अपने पोस्ट पर लिखा- “इंसान जालिमों की हिमायत में जाएगा। ये हाल है तो कौन अदालत जाएगा।”

उनके हिसाब से यहाँ ‘इंसान’ सीजेआई हैं और ‘जालिम’ पीएम मोदी हैं। अगर पीएम मोदी ही सीजेआई से अच्छे संबंध रखेंगे तो फिर आखिर उन लोगों की कौन सुनेगा।

इसी तरह अगला नाम नेहा सिंह राठौड़ का है। आरती की घंटी की तुलना खतरे की घंटी से करते हुए नेहा राठौड़ कहती हैं- “जज साहब के घर गणपति पूजा की आरती में लोकतंत्र के लिए ख़तरे की घंटी बज रही है।”

आगे वकील इंदिरा जयसिंह इस वीडियो को देखने के बाद कहती हैं कि मुख्य न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन को लेकर समझौता किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को इसकी निंदा करनी चाहिए।

इस तरह अशोक धावले सीजेआई के घर पीएम मोदी को पूजा करते हुए देख कहते हैं अब न्यायाधीश चंद्रचूड़ को उनकी रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा में पोस्ट मिलेगी, वो राज्यपाल बनेंगे या फिर अडानी बोर्ड के डायरेक्टर या हो सकता है अगले कानून मंत्री ही बन जाएँ।

प्रशांत भूषण इस वीडियो को देख कहते हैं- हैरानी है कि मुख्य न्यायाधीश ने मोदी को अपने आवास पर प्राइवेट मीटिंग के लिए आने दिया। बहुत बुरा संदेश जाएगा कि जिस न्यायपालिका का काम मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है वह सरकार के दायरे में काम करे। प्रशांत भूषण बताते हैं कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच दूरी होनी चाहिए।

लिबरल पत्रकार और लिबरल वकीलों के बाद कुछ राजनेता भी हैं जिन्हें पीएम मोदी द्वारा सीजेआई के घर जाने पर आपत्ति हो रही है। शिवसेना के संजय राउत कहते हैं कि उनकी पार्टी का मामला कोर्ट में हैं जिसमें दूसरी पार्टी केंद्र सरकार हैं ऐसे में वो कैसे सोचें कि उन्हें न्याय मिलेगा। इसी तरह पूर्व कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी भी अपने ट्वीट में इस मुद्दे को उठाती हैं पूछती हैं कि क्या जो महाराष्ट्र का मामला कोर्ट में है उसमें फैसला आ जाएगा या चुनाव आने तक उसे टाला जाता रहेगा।

पूजा-पाठ से है समस्या, इफ्तार पार्टी से नहीं

ध्यान रहे अलग-अलग प्रोफेशन से आने वाले लिबरलों की ये सारी आशंका, ये सारा डर सिर्फ पीएम मोदी के सीजेआई के घर पहुँच जाने के कारण है। दिलचस्प बात ये है कि इसी लिबरल जमात को इफ्तार पार्टी से समस्या नहीं है।

अगर देश का प्रधानमंत्री इफ्तार पार्टी का आयोजन कराए और देश के बड़े बड़े नेता उसमें शामिल होने जाएँ… तब इन्हें डर नहीं सताता कि सेकुलर देश में इस तरह देश के प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित इफ्तार से देश की बहुसंख्यक आबादी को कैसा चलेगा।

इफ्तार पार्टी की बात कोई काल्पनिक नहीं है। साल 2009 में प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह द्वारा उनके घर पर इफ्तार पार्टी होस्ट की गई थी और उस समय उनकी मेहमानों में एक चेहरा तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन का भी था।

आज लोकतंत्र को खतरे में बताकर चिल्लाने वालों को शायद तब सब कुछ सही लगा हो। तब उन्हें ये डर न सताया हो कि आखिर जब सीजेआई ही प्रधानमंत्री के घर आकर उनसे हँस-हँस कर बात कर रही हैं तो फिर इंसाफ कौन करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ

इनका ये डर आज सिर्फ इसलिए है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री ‘नरेंद्र मोदी’ हैं और वो हिंदू धर्म को मानने वाले सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के घर जाकर पूजा कर रहे हैं। लिबरलों के हिसाब से तो शायद सीजेआई का धर्म हिंदू है तो उन्हें मन से नास्तिक होना चाहिए, क्योंकि अगर वो अपने धर्म का पालन करेंगे तो इस जमात को हमेशा यही लगेगा कि जो शख्स पूजा पाठ करता है वो कैसे न्याय कर पाएगा! लेकिन वही व्यक्ति बैठकर घर में इफ्तार पार्टी कर दे तो उसकी विश्वसनीयता इनकी नजरों में दुगनी बढ़ जाएगी, उसमें न्याय की क्षमता आ जाएगी, उसके सेकुलरिज्म के कसीदे पढ़ें जाएँगे।

लिबरलों का ये हाल तब है जब उनके ऊपर खुद को न्यूट्रल दिखाने के लिए दबाव है। सोचिए, अगर वो ये दिखावा करना छोड़ दें तो इनके ट्वीट में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच के संबंध पर बात नहीं होगी बल्कि ये खुलेआम हर हिंदू त्योहार का विरोध करते दिखेंगे।

संविधान देता है धर्म मानने और धर्म का आचरण करने की आजादी

आज जिस लोकतंत्र और संविधान को खतरे में बताकर ये लोग सीजेआई के घर होती पूजा और उसमें शामिल हुए पीएम का विरोध कर रहे हैं वहीं संविधान देश के नागरिकों को अनुच्छेद 25 के तहत अपने-अपने धर्म को मानने की आजादी देता है। वहीं अनुच्छेद 25 (1) में उल्लिखित है कि लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अंत:करण की स्वतंत्रता का और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा।

अब ये जमात ये तो नहीं कह सकती न कि देश का पीएम बनने से और सीजेआई बनने से देश की नागरिकता छिन जाती है… सच तो यही है कि जो अधिकार एक नागरिक के होते हैं वही अधिकार पीएम मोदी और सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के पास भी हैं। ऐसे में अगर ये दोनों लोग अपने इन अधिकारों से वाकिफ हैं और इन्हें अपने धर्म का आचरण करने में समस्या नहीं है तो जाहिर है वो लोग इस तरह कार्यक्रमों में आ जा सकते हैं। और अगर लिबरलों के हिसाब से जवाब नहीं होना चाहिए, तो फिर उन्हें आपत्ति का आधार इफ्तार पार्टियों और सम्मेलनों को बनाना चाहिए जहाँ पहुँचकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के लोग मिलते भी हैं और उनके बीच हँस-हँसकर बात भी होती है।

PM मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से पहले भारी मात्रा में हथियार बरामद, AK47 और गोला-बारूद से लेकर IED तक शामिल: 2 आतंकी भी ढेर

जम्मू-कश्मीर में पीएम मोदी की यात्रा से पहले सुरक्षा बलों ने कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तान से सटे नियंत्रण रेखा के पास हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया है। दरअसल, विशिष्ट खुफिया जानकारी मिलने के बाद श्रीनगर स्थित भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स ने सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त अभियान शुरू किया। इनमें एके-47 और गोला-बारूद शामिल हैं।

हथियारों का यह जखीरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से कुछ दिन पहले ही बरामद हुए हैं। दरअसल, पीएम मोदी आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने जा रहे हैं। पीएम मोदी इस केंद्रशासित प्रदेश में 14 सितंबर और उसके बाद 19 सितंबर को चुनाव प्रचार करने के लिए पहुँचेंगे।

इस अभियान को लेकर चिनार कॉर्प्स ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) ने लिखा, “विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर आज कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त अभियान चलाया गया। बताए गए क्षेत्र में तलाशी के दौरान हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटकों का एक बहुत बड़ा जखीरा बरामद हुआ है।

बरामद जखीरों के बारे में जानकारी देते हुए सेना ने आगे बताया, “इनमें AK 47, हैंड ग्रेनेड, RPG राउंड, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) के लिए सामग्री और अन्य युद्ध-जैसे सामान शामिल हैं। मौजूदा सुरक्षा स्थिति और महत्वपूर्ण आगामी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह बरामदगी महत्वपूर्ण है और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी ताकत है।”

इस बीच, भारतीय सेना ने कहा कि बुधवार (11 सितंबर 2024) को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। सोशल मीडिया साइट X पर एक पोस्ट में भारतीय सेना के राइजिंग स्टार कॉर्प्स ने कहा, “राइजिंग स्टार कॉर्प्स के जवानों द्वारा खंडारा कठुआ में चल रहे ऑपरेशन में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। ऑपरेशन जारी है।”

बुधवार को ही बीएसएफ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पाकिस्तान की ओर से बिना उकसावे के की गई गोलीबारी में उसका एक जवान घायल हो गया। भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा करने वाली बीएसएफ ने एक बयान में कहा कि सुबह करीब 2:35 बजे बिना उकसावे की गोलीबारी का उसके जवानों ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने माना पहली बार जबरन बनाया शारीरिक संबंध, फिर भी रद्द कर दी रेप की FIR: जानिए गोवा के संगीतकार को क्यों मिली राहत?

बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने हाल ही में एक संगीतकार के खिलाफ दायर बलात्कार के मामले को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि उसके साथ पहली बार यौन क्रियाकलाप के दौरान पीड़िता की सहमति नहीं थी, लेकिन बाद में यौन संबंध उसकी सहमति से हुए। कोर्ट ने इसे शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाना नहीं माना। इसके बाद उसने दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी।

न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक और न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस की पीठ ने सामग्री की समीक्षा के बाद यह निर्णय दिया। कोर्ट ने पाया कि 32 वर्षीय नामी संगीतकार और 38 साल शिकायतकर्ता महिला के बीच संबंध सहमति से बने थे और ये संंबंध शादी के वादे पर आधारित नहीं थे, जैसा कि शिकायतकर्ता महिला ने दावा किया है।

FIR को रद्द करते हुए खंडपीठ ने कहा, “हम पाते हैं कि भले ही शिकायत में लगाए गए आरोप और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को उनके अंकित मूल्य पर लिया जाए, लेकिन धारा 164 के तहत बयान से जो पता चलता है वह यह है कि 08.01.2024 को शिकायतकर्ता याचिकाकर्ता के साथ रात के खाने के लिए बाहर गई थी और चूंकि देर हो चुकी थी, इसलिए शिकायतकर्ता याचिकाकर्ता के फ्लैट में रुकी थी।”

कोर्ट ने आगे कहा, “आधी रात को याचिकाकर्ता (संगीतकार) ने शिकायतकर्ता (महिला) के बेडरूम में गया और उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। शिकायतकर्ता ने रोते हुए उससे पूछा कि उसने यह कृत्य क्यों किया, जबकि उसने उसे बताया कि वह उसके साथ अपनी पत्नी की तरह व्यवहार करता है और उसने उससे शादी करने का वादा किया था।”

हाई कोर्ट की पीठ ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए आगे कहा, “अगले दिन दोपहर के भोजन के बाद, याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता को घर छोड़ दिया। आरोपों से यह देखा गया है कि अभियोक्ता ने यौन संबंध के लिए सहमति नहीं दी थी। इस प्रकार कोई सहमति या शादी का वादा नहीं था।” इसके बावजूद कोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच यौन संबंध आपसी सहमति से बने।

न्यायालय ने पाया कि पहला सामना गैर-सहमति से हुआ था, लेकिन बाद की यौन गतिविधि सहमति से हुई थी, क्योंकि शिकायतकर्ता ने स्वेच्छा से संबंध जारी रखा था। कोर्ट ने कहा, “शिकायतकर्ता के पास उस कृत्य से जुड़े परिणामों को समझने के लिए पर्याप्त ज्ञान और परिपक्वता थी, जिसके लिए वह सहमति दे रही थी। शिकायतकर्ता अपने संबंधों से जुड़ी जटिलताओं को समझने में सक्षम थी।”

कोर्ट ने कहा, “शिकायतकर्ता ने स्वेच्छा से याचिकाकर्ता के साथ शिकायत में और धारा 164 के बयानों में उल्लिखित स्थानों पर गई थी, जिसकी आयु 32 वर्ष थी। आरोप है कि याचिकाकर्ता ने उसे आश्वासन दिया था कि वह उससे शादी करेगा। पहले अवसर पर, शिकायतकर्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। उसके बाद शिकायतकर्ता ने कई अवसरों पर स्वेच्छा से याचिकाकर्ता के साथ निकटता में रही, जिसके परिणामस्वरूप सहमति से शारीरिक संबंध बने।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता महिला ने अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता संगीतकार के साथ विभिन्न जगहों पर गई। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्य आईपीसी की धारा 90 के तहत बलात्कार के आरोप के लिए मानदंड पूरे नहीं करते हैं। इसके बाद कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि साक्ष्य बलात्कार के दावे का समर्थन नहीं करते हैं और इस प्रकार एफआईआर और आरोपपत्र को रद्द कर दिया।

दरअसल, महिला ने संगीतकार पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए 25 जनवरी 2024 को पणजी की महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। दर्ज शिकायत के अनुसार, दोनों की मुलाकात पणजी स्थित आइनॉक्स में अक्टूबर में म्यूजिक फेस्ट में हुई थी। बाद में सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम के ज़रिए दोनों के बीच बातचीत होने लगी थी।

शिकायत के अनुसार, 7 जनवरी को संगीतकार ने महिला की दादी के सामने उससे शादी करने की अपनी मंशा जाहिर की। हालाँकि, महिला की दादी ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बावजूद संगीतकार ने दादी से वादा किया कि वह महिला को प्यार करता है और उसे खुश रहेगा। उसने कहा कि अगर उसका परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं होता है, तब भी वह शादी करेगा।

इसके अगले दिन यानी 8 जनवरी को संगीतकार महिला को डिनर पर ले गया। काफी देर होने के कारण उसने महिला को रात में अपने फ्लैट में ही रहने के लिए कहा। महिला जब ठहर गई तो संगीतकार ने आधी रात को उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। जब शिकायतकर्ता परेशान हुई तो संगीतकार ने उसे आश्वासन दिया कि वह उससे शादी करेगा।

इसके बाद महिला और संगीतकार ने आपसी सहमति से महिला के रिश्तेदारों के घर, होटल आदि सहित विभिन्न जगहों पर कुल सात बार शारीरिक संबंध बनाए। हालाँकि, 19 जनवरी के बाद से महिला से दूरी बनानी शुरू कर दी। उसने महिला से कहा कि उसकी माँ इस रिश्ते को मंजूरी नहीं दे रही है। इसलिए वह उससे शादी नहीं कर सकता। इस बीच महिला को पता चला कि वह गर्भवती है। आखिरकार उसने संगीतकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया।