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70+ वाले बुजुर्गों को मिलेगा ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज, आयुष्मान का दायरा मोदी सरकार ने बढ़ाया: जानिए कैसे बनेगा कार्ड, कैसे मिलेगा फायदा

मोदी सरकार ने देश के 70 वर्ष या उससे अधिक सभी वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना का अतिरिक्त लाभ देने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार अब हर आय वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों (70+) को आयुष्मान योजना के तहत ₹5 लाख का अतिरिक्त बीमा देगी। केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में इस फैसले को मंजूरी मिल गई है। इससे देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों को फायदा होने की आशा जताई गई है। इस योजना का दायरा बढ़ाए जाने से उन परिवारों पर से भी इलाज के खर्चे का बोझ हटेगा जिनमें 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल हैं।

क्या है मोदी सरकार का फैसला?

मोदी सरकार ने बुधवार (11 सितम्बर, 2024) को हुई कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का दायरा बढ़ाने को मंजूरी दी है। मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि अब 70 या उससे अधिक आयु वाले देश के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को वह इस योजना के ₹5 लाख का अतिरिक्त बीमा कवर प्रदान करेगी। इससे लगभग 4.5 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे। मोदी सरकार ने इन लाभार्थियों के चयन के लिए कोई शर्तें नहीं लगाई हैं।

मोदी सरकार के इस कदम के अंतर्गत सभी आय वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को इसका लाभ दिया जाएगा। इस योजना में किसी भी आय वर्ग के लोगों को बाहर नहीं किया गया है। मोदी सरकार इस योजना का लाभ पहले से चल रही आयुष्मान योजना के तहत ही देगी। सरकार ने बताया है कि इसके लिए वह ₹3437 करोड़ का खर्च उठाएगी। उसने कहा है कि यदि यह अधिक लोग इसके तहत योजना का लाभ उठाते हैं तो वह बढ़ा हुआ खर्च भी वहन करेगी। राज्यों को भी इसका एक हिस्सा वहन करना होगा।

कैसे काम करेगी यह योजना?

इस योजना के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय इन 70+ से आयुवर्ग के लोगों को एक नया आयुष्मान कार्ड जारी करेगा। योजना के तहत ₹5 लाख का लाभ अकेले कार्डधारक उठा सकेगा। अभी तक आयुष्मान योजना के तहत ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा एक परिवार को दिया जाता है। परिवार के सभी सदस्य इसके लाभार्थी बन सकते हैं। यानी किसी परिवार में यदि 5 सदस्य हैं तो उन्हें कुल 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा प्रतिवर्ष मिलेगा। अभी तक यही व्यवस्था परिवार के वरिष्ठ नागरिकों पर लागू थी।

अब वरिष्ठ नागरिकों का कार्ड अलग हो जाने से उनको अलग ₹5 लाख का बीमा मिलेगा। इसके साथ ही 70 वर्ष से कम आयु वाले परिवार के बाकी सदस्यों का ₹5 लाख का संयुक्त स्वास्थ्य बीमा जारी रहेगा। यह भी बताया गया है कि यदि कसी परिवार में 2 ऐसे वरिष्ठ नागरिक हैं जिनकी आयु 70 वर्ष से अधिक है तो उनके बीच यह ₹5 लाख का बीमा साझा कर दिया जाएगा। सामान्य तौर पर भारतीय परिवारों में इलाज पर खर्च सदस्यों की उम्र के साथ बढ़ता है, ऐसे में यह योजना काफी प्रभावी सिद्ध होगी।

सरकार ने और क्या बताया?

मोदी सरकार ने बताया कि नई आयुष्मान योजना का लाभ उन 70+ आयु वाले लोगों को भी मिलेगा जो पहले से किसी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभ ले रहे हैं। यानी इसका लाभ CGHS (केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना) और ECHS (भूतपूर्व सैनिक स्वास्थ्य योजना) जैसी योजनाओं में आने वाले लोग भी ले सकते हैं। हालाँकि, इस नई आयुष्मान योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें दोनों में से किसी एक का चुनाव करना पड़ेगा। इसके अलावा राज्य की बीमा योजना और निजी बीमा योजना लेने वाले लोग भी इसका लाभ ले सकेंगे।

क्या है आयुष्मान योजना?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में आयुष्मान योजना का ऐलान किया था। इसके तहत वर्तमान में देश के 12 करोड़ से अधिक परिवारों को ₹5 लाख के वार्षिक स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जा रहा है। यह योजना भारत के लगभग 40% परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती है। आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक लगभग 35 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इस योजना में 17,000 से अधिक सरकार जबकि 13,000 से अधिक निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं।

इस योजना के चालू होने के बाद से अब तक 7.37 करोड़ लोगों ने इसका लाभ उठाया है। सरकार ने इस इलाज के भुगतान पर ₹90,000 करोड़ से अधिक की राशि अब तक खर्च की है। इस योजना के चलते उन परिवारों को बड़ा लाभ हुआ है, जिनकी आय का एक बड़ा हिस्सा किसी बीमारी या चोट के इलाज में लग रहा था। कैंसर जैसी गंभीर और महँगे इलाज वाली बीमारियों में भी यह योजना काम आ रही है और लोगों की जेब पर असर नहीं पड़ रहा है।

मॉर्च्युरी से शव निकालकर करते थे संभोग, कंकाल तक बेचते थे: कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हो रहे कुकर्मों का CBI को मिला सबूत, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल को लेकर चल रही जाँच में केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) को कुछ अहम सबूत मिले हैं। ये सबूत अस्पताल में हो रहे घोटाले और अवैध गतिविधियों से जुड़े हैं। बंगाली मीडिया खबरों में सीबीआई सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अस्पताल के मॉर्च्युरी में शवों के साथ सेक्स करके वीडियो बनाने का कारोबार चल रहा था। इतना ही नहीं साल 2021 में 60 से 70 शव अस्पताल से गायब होने की बात भी सामने आई है।

बता दें कि पिछले दिनों महिला डॉक्टर के साथ हुई रेप और हत्या घटना के बाद ये अस्पताल चर्चा में आया और इससे जुड़ी अनियमतताओं का खुलासा होने लगा। केस के आरोपित संजय रॉय को लेकर भी पता चला कि उसके पास अस्पताल की मॉर्च्युरी में रात में जाने की अनुमति थी जबकि मॉर्च्युरी 7:30 से 8 बजे के करीब बंद हो जाती है। रात में किसी शव का पोस्टमार्टम नहीं होता। अगर कोई शव आता भी है तो उसे पीछे दरवाजे से लाया जाता है।

मॉर्च्युरी में पोर्नोग्राफी

अब इस मामले की जाँच में जुटे अधिकारियों का यही मानना है कि मॉर्च्युरी के कोल्ड चैंबर से लाशें निकाली जाती थीं और फिर उनके साथ अश्लीलता होती थी और वीडियो बनाई जाती थी।

सूत्रों के हवाले से ही ये पता चलता है कि अधिकारियों को संजय के मोबाइल फोन पर आरजी कर अस्पताल के मुर्दाघर में रिकॉर्ड किए गए वीडियो मिले हैं। इन फोटो और वीडियो में वह और अन्य लोग मुर्दाघर के अंदर शवों के साथ संभोग करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मुर्दाघर में 40 से ज़्यादा कोल्ड चैंबर हैं। आशंका है कि ये चैंबर रात में खोले जाते थे और मुर्दाघर के अंदर की लाइट दिन-रात जलती रहती थी। इसके बाद यहाँ संजय रॉय समेत कई लोगों को प्रवेश दिया जाता था।

ये सारे खुलासे संजय रॉय की गिरफ्तारी के बाद हुए। 9 अगस्त की घटना के बाद जब संजय रॉय को हिरासत में लिया गया तो उसके फोन की जाँच से पता चला कि उसे पोर्नोग्राफी का बहुत शौक था। उसके फोन से कई पोर्न वीडियोज बरामद हुए। इसमें शवों के साथ संभोग आदि के वीडियो भी थे। छानबीन में पता चला कि ये तो अस्पताल के मॉर्च्युरी में बनाई गई वीडियो ही हैं। आनंद बाजार पत्रिका ने इस संबंध में बताया कि अस्पताल में पोर्नोग्राफी का रैकेट चल रहा था। अधिकारी इस बात से इनकार नहीं कर रहे कि इन वीडियोज को बनाने के बाद विदेशों में बेचा जाता होगा।

कंकाल बेचे जाते थे

अस्पताल में शवों के साथ हो रही घटिया हरकत के अलावा जाँच अधिकारियों को मॉर्च्युपी से कुछ अन्य अनियमतताओं के सबूत भी मिले हैं। पता चला है कि न केवल शव के साथ अश्लीलता की जाती थी बल्कि शवों से कंकाल निकालकर उन्हें बेचने का काम भी होता था।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मुर्दाघर के कोल्ड चैंबर, रजिस्टर बुक और पिछले कुछ महीनों के सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड इकट्ठा कर लिया है। सीबीआई ने रजिस्टर में गड़बड़ी के बारे में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रबीर चक्रवर्ती से स्पष्टीकरण माँगा है। हालाँकि, एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और बाद में किसी संदेश पर रिस्पांड करना बंद कर दिया।

जाँच अधिकारी ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस पूरे सिंडिकेट में कौन-कौन शामिल है। अभी तक संदीप घोष को लेकर कहा जा रहा है कि अगर कोई अनियमतताओं के विरुद्ध आवाज उठाता था तो संदीप मौखिक रूप से निर्देश देकर उसका ट्रांसफर करवा देते थे। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मॉर्च्युरी में शाम को शराब की बोतलें लाई जाती थीं। कोई कुछ कहता था तो उसका तबादला कर दिया जाता था या धमकाया जाता था।

आर जी कर अस्पताल पर पहले भी लगा पोर्न शूट करने का आरोप

उल्लेखनीय है कि आर जी कर अस्पताल को लेकर ऐसे गंभीर आरोप पहली बार सामने नहीं हैं। संयोग से 23 साल पहले भी ऐसी खबरें इस अस्पताल को लेकर सामने आई थीं। 2001 में एक चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र सौमित्र बिस्वास की रहस्यमयी ढंग से मौत हुई थी। पुलिस ने उसे आत्महत्या करार दिया था। हालाँकि जब कानूनी लड़ाई लड़ी गई तो पता चला की छात्र की हत्या शव के साथ सेक्स करने वाले गिरोह का खुलासा करने के कारण की गई थी।

इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी की लेकिन कोई खुलासे नहीं हुए। माँ ने कहा कि बेटे की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उसे इन गतिविधियों के बारे में पता चल गया था। वहीं सहकर्मियों के अनुसार, सौमित्र को पता चल गया था कि हॉस्टल के एक से अधिक कमरों में अश्लील तस्वीरें और वीडियो शूट करने के काम होते हैं। वो इस संबंध में खुलासा करता उससे पहले ही उसे मार दिया गया।

शूटिंग के लिए हॉस्टल में वेश्याएँ बुलाई जाती थीं, जब कोई वेश्या नहीं मिलती थी तो अस्पताल के शवों के साथ ऐसा होता था। छात्रों के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों के बारे में सेमिनार रूम, हॉस्टल के कमरे सब इस्तेमाल होते थे। इस गिरोह ने सौमित्र की गर्लफ्रेंड की तस्वीर का भी इस्तेमाल किया था इसलिए उसने इनका विरोध किया। यही वजह थी कि उसे मौत के घाट उतार दिया गया।

अस्पताल में भर्ती थी 11 साल की बच्ची, चेकअप के बहाने चैंबर में ले जाकर डॉक्टर दिलशाद हुसैन ने की गंदी हरकत: चीखते हुए बाहर निकली, आगरा की घटना

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती 11 साल की बच्ची का एक जूनियर डॉक्टर ने यौन शोषण किया। आरोपित डॉक्टर दिलशाद हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। मेडिकल कॉलेज ने भी उसे सस्पेंड कर दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार डॉक्टर दिलशाद हुसैन पर बच्ची को इलाज के बहाने अपने चैंबर में ले जाकर गंदी हरकत करने का आरोप है। कथित तौर पर उसने बच्ची के कपड़ों में हाथ डालकर उसके प्राइवेट पार्ट्स पर हाथ फेरा और अश्लील हरकत की। बच्ची चीखते हुए उसके चैंबर से भागी और बाहर अपनी माँ से लिपट गई।

इसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। परिजनों के हंगामे के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता ने डॉक्टर दिलशाद हुसैन को सस्पेंड कर मामले की जाँच के लिए कमेटी का गठन किया है। पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि थाना एमएम गेट पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना 10 सितंबर 2024 के रात की है। आगरा के शाहगंज क्षेत्र की पीड़ित बच्ची का बाल रोग विभाग में इलाज चल रहा था। 6 सितंबर को उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार होने के बाद 9 सितंबर को बाल रोग विभाग के जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। डॉक्टर दिलशाद हुसैन पर 10 सितंबर की देर रात चेकअप के बहाने उसका यौन शोषण करने का आरोप है।

आरोप है कि शुरुआत में इस मामले को दबाने की कोशिश की गई। पीड़ित परिवार को लालच दिए गए। हंगामे के बाद आरोपित डॉक्टर पुलिस के आने से पहले ही वार्ड से निकल गया। पीड़ित परिवार के साथ जब हिंदू संगठन के लोग खड़े हुए तो केस दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी की गई।

जूनियर डॉक्टर दिलशाद हुसैन के खिलाफ दुराचार और पॉक्सो की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वह बरेली का रहने वाला है और पीजी प्रथम वर्ष का छात्र है। पीड़िता का मेडिकल करवाकर पुलिस कोर्ट में बयान दर्ज कराने वाली है।

पहले बच्चों का रेप करते, फिर दूसरों से रेप करना सिखाते; विरोध करने पर 5 साल के बच्चों को भी दाग देते… इस्लाम के नाम पर ट्रेनिंग

इस्लामी तालीम के नाम पर बच्चों के यौन शोषण की घटना आए दिन सामने आती रहती है। लेकिन मलेशिया पुलिस ने इस्लाम के नाम पर चलने वाले ऐसे चैरिटी होम्स का खुलासा किया है, जहाँ बच्चों का पहले यौन शोषण होता था, फिर पीड़ितों को दूसरे बच्चों से रेप की ट्रेनिंग दी जाती थी।

ऐसे 20 चैरिटी होम्स पर पुलिस ने छापा मारा है। 400 से अधिक बच्चों को मुक्त कराया है। इनमें 201 लड़के और इतनी ही लड़कियाँ हैं। मौलवियों समेत 171 को गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार इन चैरिटी होम्स में रहने वाले बच्चों के साथ पहले बलात्कार किया जाता था। फिर उन्हें दूसरों बच्चों से बलात्कार करना सिखाया जाता था। विरोध करने पर 5 साल की उम्र तक के बच्चों को भी गर्म चीजों से दाग दिया जाता था।

छापेमारी की कार्रवाई चैरिटी होम्स में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं की शिकायत मिलने की बाद की गई है। पोर्ट डिक्सन में चल रहे चैरिटी होम्स को लेकर यह शिकायत 2 सितंबर 2024 को मिली थी। इसके बाद 11 सितंबर को दो अलग-अलग राज्यों में चल रहे 20 इस्लामी चैरिटी होम्स पर छापेमारी कर 402 बच्चों को मुक्त कराया गया।

इन चैरिटी होम्स का संचालन ग्लोबल इखवान सर्विसेज एंड बिजनेस (GISB) नाम की कंपनी करती है। यह मलेशियाई कंपनी एक इस्लामी व्यापारिक समूह है और सुपर मार्केट के बिजनेस से जुड़ी है। कई देशों में इनका कारोबार फैला है। इस कंपनी का एक प्रतिबंधित मजहबी संगठन से भी जुड़ाव बताया जाता है। जिन बच्चों को छापेमारी के बाद बचाया गया है वे इसी कंपनी के कर्मचारियों के बताए जा रहे हैं। इन्हें जन्म के तुरंत बाद यहाँ भेज दिया गया था।

हालाँकि जीआईएसबी ने यौन शोषण की खबरों को खारिज किया है। कहा है कि कंपनी किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं है और वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पुलिस के साथ सहयोग करेगी। जीआईएसबी का संबंध जिस इस्लामी संगठन से बताया जाता है, उसका नाम अल-अरकम है। इसे 1994 में मलेशिया की सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था।

जीआईएसबी ने भी इस संगठन से रिश्ते कबूल किए हैं। लेकिन अब वह खुद को इस्लामी रवायतों पर आधारित एक इस्लामी समूह बताता है। यह कंपनी पिछली बार ‘ओबेडिएंट वाइव्स क्लब’ की स्थापना के बाद विवादों में आई थी। इस क्लब की स्थापना का मकसद बीवियों को अपने शौहर के लिए यौन गुलाम की तरह रहने के लिए प्रोत्साहित करना था।

मलेशिया के शीर्ष पुलिस अधिकारी रजारूद्दीन हुसैन ने बताया है कि बचाए गए बच्चों की उम्र 1 से 17 साल के बीच है। गिरफ्तार लोगों में 66 पुरुष और 105 औरतें हैं। इनकी उम्र 17 से 64 साल के बीच है। उन्होंने बताया कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध और मानव तस्करी के कानूनों के तहत मामले की जाँच की जा रही है। हुसैन के अनुसार बच्चों का इस्तेमाल सहानुभूति और धन जुटाने के लिए भी यह संगठन करती थी। हमने पाया है कि मजहब के नाम पर बच्चों को गलत तालीम दी जा रही थी।

रोटी पर थूका, फिर तंदूर में उसे सेंका: फतेहपुर के ‘अपना दस्तरखान’ ढाबे के कारीगर की वीडियो वायरल, पुलिस ने आरोपित को पकड़ा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक ढाबे के अंदर खाने-पीने की चीजों पर थूकने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में रोटी बना रहे एक व्यक्ति को खाने पर झुकते देखा जा सकता है। मंगलवार (10 सितंबर 2024) को मिली तहरीर के बाद पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला सहारनपुर जिले के थानाक्षेत्र फतेहपुर का है। 10 सितंबर को यहाँ नीतीश नाम के व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में नीतीश ने बताया है कि कस्बा छुटमलपुर में ‘अपना दस्तरखान’ नाम से एक ढाबा है। नीतीश का आरोप है कि इस होटल के एक कर्मचारी द्वारा खाना बनाते समय रोटियों पर थूका जा रहा है। नीतीश ने अपनी शिकायत का आधार सोशल मीडिया से प्राप्त वीडियो को बताया। शिकायतकर्ता के मुताबिक इस हरकत से समाज में वैमनस्यता फ़ैल रही है और धार्मिक भावनाएँ आहत हो रहीं हैं।

शिकायत में नीतीश ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। सहारनपुर पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (1) के तहत दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक सबूतों को जुटाते हुए मामले की जाँच की जा रही है। जिस वायरल वीडियो का जिक्र शिकायतकर्ता ने किया है उसमें ढाबे के बाहर रोटियाँ बन रहीं हैं। इन रोटियों को लाल रंग का शर्ट पहने एक व्यक्ति बना रहा है। खाना बनाते हुए वह व्यक्ति बार-बार रोटियों की तरफ झुक रहा है। दिन का समय है और होटल पर काफी भीड़भाड़ दिख रही है।

लगभग 52 सेकेंड के इस वीडियो को सड़क के दूसरी तरफ खड़े होकर बनाया गया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। इस वीडियो में दिख रही हरकत पर नेटीजेंस ने नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर भी रोटियों को बनाने वाले पर कार्रवाई की माँग की जा रही है। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उसने रोटियों पर थूककर उन्हें सेंकने की बात को स्वीकार किया है।

मस्जिद के सामने गणपति विसर्जन जुलूस पर हमला: कर्नाटक के मांड्या में इस्लामी कट्टरपंथियों ने फेंके पत्थर, तलवार दिखा लगाई आग

कर्नाटक के मांड्या जिले के नागमंगला कस्बे से गणपति विसर्जन के दौरान पथराव की घटना सामने आई है। 11 सितंबर 2024 की रात हुई इस पत्थरबाजी के बाद इलाके में तनाव फैल गया। दो पक्ष आमने-सामने आ गए। झड़प हुई, दुकानों और वाहनों में आग लगा दी गई। पुलिस ने हालात संभालने के लिए इलाके में कुछ प्रतिबंध लगाए। साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी। अब पूरा क्षेत्र हाई अलर्ट पर है।

मीडिया में सूत्रों के हवाले से दी जा रही खबर के अनुसार, घटना तब हुई जब बदरीकोप्पलु गाँव के युवक कस्बे में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस जैसे ही एक दरगाह/मस्जिद(रिपोर्टों में कहीं दरगाह बताया जा रहा है कहीं पर मस्जिद) के पास पहुँचकर सड़क पार करने वाला था, तभी मैसूर रोड पर जुलूस निकालने को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इस विवाद को देखते हुए उपद्रवियों ने जुलूस के ऊपर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके अलावा लोगों को हथियार भी दिखाए गए।

पुलिस ने घटना की सूचना होते ही भीड़ को इधर-उधर किया। हालाँकि विसर्जन के बीच भड़की इस तरह की हिंसा को देखते हुए जुलूस में शामिल लोगों ने पुलिस थाने के सामने गणेश मूर्ति रख दी और न्याय की माँग करने लगे। इस बीच कुछ जगह दुकानों को जलाने और टायर फूँककर आक्रोश दिखाने भी खबरें मीडिया में आई हैं।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में मांड्या के एसपी मल्लिकार्जुन बालडंडी ने बताया- मस्जिद के सामने जुलूस के पहुँचने के बाद बहस हुई। पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया। जरूरत पड़ने पर लाठीचार्ज की। कुछ लोग थाने के सामने आ गए और विरोध करने लगे। सड़क पर खड़ी 4-5 बाइकों में आग भी लगाई गई। अब स्थिति नियंत्रण में हैं। इलाके में दमकल गाड़ियाँ और पुलिसकर्मी तैनात हैं।

वहीं केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस हिंसा के लिए कॉन्ग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस राज्य में एक समुदाय के तुष्टिकरण के कारण ये सब हुआ। उन्होंने इस घटना को शांति और व्यवस्था के विरुद्ध हुई घटना बताया।

उन्होंने कहा कि जब गणपति विसर्जन के समय लोग आराम से जुलूस निकाल रहे थे तो पत्थर और चप्पल पहनने की जरूरत क्या थी। क्या जरूरत थी पेट्रोल बम फोड़ने की, तलवार दिखाने की। वहीं भाजपा नेता सीटी रवि ने इस मामले को पत्थर आतंकवाद का नाम दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का इलाज को सिर्फ यूपी सरकार वाले अंदाज में होना चाहिए।

बता दें कि कर्नाटक के मांड्या से पहले भी गणपति विसर्जन के दौरान हिंसा की घटनाएँ घटी। गुजरात के सूरत में भी पंडाल पर मुस्लिम नाबालिगों ने पथराव किया था। इसके अलावा लखनऊ में भी इस्लामी भीड़ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए पंडाल पर अटैक किया था। वहीं वडोदरा में भी गणेश पंडाल का विरोध करते हुए मुस्लिमों ने अपने घर के बाहर अरबी झंडे लगा लिए थे। इसके अलावा कच्छ में भी भगवान गणेश की प्रतिमा पर हमला हुआ था। वहीं भरूच में भी गणेश चतुर्थी के मौके पर मजहबी झंडे लगाने को लेकर बवाल हुआ था।

एक पैर नाबालिग लड़की की जाँघ पर रखा, दूसरा प्राइवेट पार्ट पर… जूते दिखाने के बहाने ले गया था दुकानदार उमर कुरैशी, देहरादून पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक हिन्दू छात्रा से छेड़खानी के बाद साम्प्रदायिक तनाव फ़ैल गया है। यहाँ शनिवार (7 सितंबर 2024) को शहर में जूते खरीदने गई एक नाबालिग लड़की से मुस्लिम दुकानदार ने ही छेड़खानी की। आरोपित का नाम उमर कुरैशी है, जो उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। पुलिस ने उमर को गिरफ्तार कर लिया है।

उमर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अवैध वेंडरों के सत्यापन का अभियान छेड़ दिया है। अब तक 92 संदिग्ध वेंडरों को हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना देहरादून के पलटन बाजार की है। शनिवार (7 सितंबर) को यहाँ एक नाबालिग लड़की अपने लिए जूते खरीदने गई थी। बाजार में वह 24 वर्षीय दुकानदार उमर की शॉप पर पहुँची।

आरोप है कि उमर पीड़िता को जूते दिखाते हुए छेड़खानी करने लगा। पीड़िता वहाँ से लौट आई और अपने घरवालों को पूरी बात बताई। पीड़िता के साथ उसके परिजन थाने पहुँचे। यहाँ उन्होंने उमर के खिलाफ पुलिस में तहरीर देकर कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर उमर को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है।

उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। उमर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में उसने अपना पता उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में थानाक्षेत्र कीरतपुर के गाँव बुडगेरा बताया है। इस बीच मामले की जानकारी हिन्दू संगठन के सदस्यों को हुई। उन्होंने आरोपित पर कठोर कार्रवाई की माँग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हिन्दू संगठनों के मुताबिक, पीड़िता दुकान में गई तो उसने 300 रुपए का सामान खरीदा। इसके बाद उमर ने नाबालिग को ऊपरी फ्लोर पर भेज दिया। ऊपर उमर ने पीड़िता को ऊँचे स्टूल पर बिठाया और खुद नीचे बैठ गया। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता का एक पैर अपनी जाँघ और दूसरा अपने प्राइवेट पार्ट पर रख दिया। फिर उसने पीड़िता की जाँघ पर हाथ फेरकर पूछा, “बताओ सैंडिल कैसी लग रही है।”

उमर कुरैशी की इस हरकत से पीड़िता टेंशन में आ गई। उसने खुद को बचाने के लिए स्टील का ग्लास हाथ में उठा लिया और उमर कुरैशी को मारकर भाग गई। हिन्दू संगठन के सदस्यों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग उमर कुरैशी के समर्थन में खड़े भी हुए थे। आरोप लगाया गया कि देहरादून की मस्जिद पर मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा होकर मारने-काटने को तैयार हो गए थे।

इस घटना के विरोध में हुए प्रदर्शन में महिलाएँ भी शामिल थीं। उन्होंने सम्मान के लिए जान देने तक का एलान कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने विरोध के दौरान ‘जय श्रीराम’ और ‘हिन्दू एकता जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए। पलटन बाजार के हिन्दू दुकानदारों ने भी इस घटना के विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दीं। इस घटना के बाद पुलिस ने मुस्तैदी बढ़ा दी है।

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर जिले में अवैध वेंडरों की पहचान का सघन अभियान छेड़ा गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक कुल 92 अवैध वेंडरों को हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। बाजार में सुरक्षा के मद्देनजर महिला पुलिसकर्मियों की भी बड़े पैमाने पर तैनाती की जा रही है।

‘सब घर जाओ, हम इसे दुआ सिखाएँगे’: मदरसे में दीनी तालीम लेने गई नाबालिग छात्रा से रेप… गोरखपुर पुलिस ने मौलवी रहमत अली को दबोचा

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में सोमवार (9 सितंबर 2024) को मदरसे में एक नाबालिग छात्रा से रेप की घटना सामने आई है। पीड़िता मदरसे में दीनी तालीम लेने जाती थी। रेप का आरोप मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी रहमत अली पर लगा है। आरोपित ने बच्ची को पढ़ने में तेज करने की दुआ सिखाने का झाँसा दिया था। ग्रामीणों ने मौलवी को पकड़ कर पहले धुना फिर पुलिस के हवाले किया।

यह घटना गोरखपुर के थाना क्षेत्र उरुवा की है। यहाँ की रहने वाली 12 वर्षीया पीड़िता की माँ ने सोमवार (9 सितंबर 2024) को पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी सरकारी स्कूल के बगल में स्थित मदरसे में मजहबी तालीम लेने जाती थी। घटना के दिन रोजाना की तरह पीड़िता सुबह 8 बजे पढ़ने गई थी। लगभग 9:30 तक सभी बच्चों की छुट्टी कर दी गई।

छुट्टी के बाद मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी रहमत अली ने सारे बच्चों को घर भेज दिया और पीड़िता को वहीं रोक लिया। काफी देर तक जब बच्ची घर लौटकर नहीं आई तो पीड़िता अपनी बेटी को खोजने मदरसा में गई। वहाँ पर मौलवी बच्ची के साथ रेप करता दिखाई दिया। बच्ची की माँ को देखकर मौलवी बच्ची को छोड़कर अलग हो गया।

थाने में तहरीर देकर पीड़िता की माँ ने आरोपित मौलवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना के बाद पीड़िता डरी सहमी है। आरोपित मौलवी रहमत अली के अब्बा का नाम जुमराती है। वह मूल रूप से UP के ही संतकबीरनगर जिले का रहने वाला है। लगभग 50 वर्षीय रहमत अली शादीशुदा बताया जा रहा है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने रहमत अली को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (2) (F) और 65 (1) के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मंगलवार (10 सितंबर 2024) को गोरखपुर जिले के पुलिस अधीक्षक दक्षिणी ने बताया कि आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवा कर अदालत में बयान दर्ज करवाए गए हैं। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जिस मदरसे की यह घटना है, वह गाँव के सरकारी स्कूल के एकदम पास ही बना हुआ है। मदरसे को एक निर्माणाधीन मकान में चलाया जा रहा है। बच्ची इसी मदरसे में जाती थी।

सब जाओ, हम इसे दुआ सिखाएँगे

एक स्थानीय पत्रकार का दावा है कि निर्माणाधीन इमारत अंदर ही अंदर मस्जिद की शक्ल ले रही है। दावा किया गया है कि इस इमारत से अजान भी दी जाती है। इसी रिपोर्ट में एक बच्चे ने कहा कि मौलवी ने अन्य छात्रों से कहा, “तुम लोग जाओ, हम इसको दुआ सिखाएँगे।” सरकारी स्कूल से कुछ बच्चे मदरसे की तरफ गए तब मौलवी की करतूत का खुलासा हुआ।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि पीड़िता की उम्र लगभग 12 साल है। उसकी एक बहन भी इसी मदरसे में पढ़ती है, लेकिन मौलवी ने उसको भी घर भेज दिया था। इसी मदरसे के एक अन्य छात्र के मुताबिक, बच्ची पढ़ने में कमजोर थी इसलिए मौलवी ने उसे दुआ पढ़ कर तेज कर देने का झाँसा दिया था।

रेप से पहले मौलवी रहमत अली ने बच्चों को नमाज़ पढ़ना और दुआ करना सिखाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची की चीखें सबसे पहले सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों ने सुनी थी। आरोपित मौलवी को लोगों ने पकड़ कर पहले धुना और फिर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है।

कालिंदी एक्सप्रेस को बेपटरी करने के आरोप में हिस्ट्रीशीटर शाहरुख खान गिरफ्तार, ISIS कनेक्शन का शक: इस ट्रेन में 2019 में हो चुका है धमाका, हमले का दिया गया था ‘पैगाम’

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश के मामले में शाहरुख खान नाम के एक हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया है। जब उसे गिरफ्तार किया गया तो वह घटनास्थल से कुछ दूर चला गया था। रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के बाद छह संदिग्धों को छोड़ दिया गया और मुख्य संदिग्ध शाहरुख खान को पकड़ लिया गया।

अब तक की जाँच में उत्तर प्रदेश के कानपुर में ट्रेन को पलटने की साजिश में आतंकवादियों के शामिल होने के कई सबूत मिले हैं। कई सरकारी एजेंसियों द्वारा की गई जाँच में पता चला है कि ट्रेन पलटने की साजिश रचने वाला आरोपित शाहरुख खान एक कट्टरपंथी है। उसके खूंखार आतंकी संगठन ISIS के खुरासान मॉड्यूल से संदिग्ध संबंध हैं।

बता दें कि 9 सितंबर 2024 को कानपुर में अनवरगंज-कासगंज रूट पर चल रही कालिंदी एक्सप्रेस (14117) एक बड़ी दुर्घटना से बच गई थी। पटरी पर गैस सिलिंडर देखकर लोको पायलट ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर गाड़ी रोक दी थी। इससे एक बड़ा हादसा टल गया था। सिलेंडर से टकराने के बाद सिलिंडर में तेज धमाका हुआ था।

लोको पायलट ने बताया था कि उसे पटरी पर कोई संदिग्ध चीज दिखी थी, लेकिन जब तक वह ब्रेक लगाए तब उससे टक्कर हो गई और धमाके की आवाज हुई। मौके पर पहुँची पुलिस को जाँच में यहाँ से LPG सिलेंडर मिला। इसके आसपास एक पेट्रोल की बोतल और माचिस भी मिली। मौके पर से एक झोला भी मिला, बताया गया है कि इसमें बारूद थी।

ट्रेनों को पटरी उतारने की कई कोशिशें

पुलिस ने बताया है कि सिलेंडर को ट्रेन की पटरी पर ही रखा गया था जो हादसे के दौरान रगड़ खा गया। बीते कुछ समय में कई ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनमें जानबूझ कर ट्रेन की पटरी पर ऐसे सामान रखे गए जिनसे ट्रेन पलट सकती थी। इससे पहले 17 अगस्त, 2024 को कानपुर में ही साबरमती एक्सप्रेस के साथ भी दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।

इसके अलावा, अलीगढ़ में पटरी पर एक मोटरसाइकिल का पहिया रखा गया था। इस मामले में अफसान नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। यह सभी मामले तब सामने आए हैं जब पाकिस्तानी आतंकी फरहतुल्लाह गोरी भारत में ट्रेन और बाकी इन्फ्रा को निशाने पर लेने की बात कर रहा है। पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने यह काम स्लीपर सेल से करने को कहा था।

सामने आए वीडियो में आतंकी गोरी ने कहा था कि ED आतंक की कमर तोड़ रहा है। इसका जवाब देने के लिए उसने देश भर में इन्फ्रा पर हमला करने को कहा था। वीडियो में गोरी बता रहा है कि कैसे ट्रेनों में अलग-अलग तरीके से धमाके किए जा सकते हैं। वह इसके लिए प्रेशर कुकर जैसी चीजों से बम बनाने का भी आईडिया दे रहा है। वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की शह पर काम कर रहा था।

साल 2019 में कालिंदी एक्सप्रेस में हुआ था विस्फोट

इससे पहले 21 फ़रवरी 2019 को कानपुर-भिवानी कालिंदी एक्सप्रेस बम विस्फोट हुआ था। इसमें किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं आई थी। विस्फोट की जाँच करते समय सुरक्षा एजेंसियों को जैश-ए-मोहम्मद के संचालक द्वारा लिखा गया एक पत्र मिला था। पत्र में RDX के प्रयोग से रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले की साज़िश का विवरण था।

इस पत्र में शताब्दी एक्सप्रेस और दिल्ली-कानपुर मार्ग पर बने एक पुल पर हमला करने के बारे में भी लिखा था। कालिंदी एक्सप्रेस ने शाम 5:30 बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन से भिवानी, हरियाणा की ओर यात्रा निकली थी। ट्रेन कानपुर से 40 किलोमीटर दूर बर्राजपुर स्टेशन पर शाम करीब 6:40 बजे पहुँची। बम धमाका सामान्य डिब्बे के टॉयलेट में हुआ था।

पत्र के मुताबिक कानपुर से 30 किमी दूर 27 फरवरी को एक पुल पर एक विस्फोट होना निर्धारित किया गया था। फिर, डेढ़ किलो RDX का उपयोग करके कानपुर-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पर हमला किया जाना था। हमले से एक दिन पहले विस्फोटकों को दिल्ली के आनंद विहार बस टर्मिनल पर सौंप दिया जाना था। पत्र के ऊपरी भाग पर 786 और शब्द “पैगाम” लिखा था।

सूरत, कच्छ और भरूच… गुजरात के कई इलाकों में गणेश उत्सव पर मज़हबी उन्माद: कहीं बच्चों को किया आगे, कहीं मदरसों में ट्रेनिंग, कहीं पुलिसकर्मियों की हत्या की साजिश

गणेश चतुर्थी पर गुजरात के 3 अलग-अलग शहरों से साम्प्रदायिक तनाव की खबरें आईं हैं। यहाँ सूरत और कच्छ जिलों में पंडालों पर पत्थरबाजी की गई है। इन हमलों में मूर्तियों को नुकसान पहुँचा है। भरूच जिले में भी दोनों समुदायों के बीच तनातनी की खबर है। यहाँ हिन्दुओं के घरों पर इस्लामी झंडा लगाया गया है। पुलिस ने इन सभी मामलों में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अब तक दर्जनों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

पहला मामला सूरत जिले का है। यहाँ के वरियाली बाजार में एक गणेश पंडाल पर पत्थरबाजी हुई है। बताया जा रहा है कि इस पथराव में मुस्लिम समुदाय के नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। पंडाल में पानी के पाउच भी फेंके गए थे। हमलावर रिक्शे में आए थे जिन्होंने पंडाल पर पथराव किया। इस हरकत के बाद क्षेत्र में तनाव फ़ैल गया। हजारों हिन्दू सकड़ों पर आ गए। हालात काबू करने के लिए पुलिस बल पहुँचा। आरोप है कि मुस्लिम बहुल इलाकों से पुलिस और हिन्दुओं पर पत्थरबाजी की गई थी।

हमले के लिए नाबालिगों का गिरोह

इस हमले का मास्टरमाइंड भी मुस्लिम समुदाय का एक नाबालिग बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि गणेश प्रतिमाओं पर पत्थर और पानी फेंकने की ट्रेनिंग उसे एक मदरसे में 3 महीने से मिल रही थी। उसने अपने साथ 6 अन्य नाबालिगों को इकट्ठा कर के गिरोह बनाया था। इस गिरोह ने 10 प्रतिमाओं पर पत्थरबाजी की साजिश रची। पहले टारगेट के तौर पर ‘वरियाली च राजा’ की गणेश प्रतिमा को चुना गया था।

पहले इस साजिश को शनिवार (7 सितंबर) को अंजाम देने की कोशिश हुई। हालाँकि उस दिन मौका नहीं मिला तो अगले दिन रविवार को यह हरकत की गई। नाबालिगों के इस गिरोह ने 6 सितंबर को ही सैदयपुरा में एक गणेश पंडाल पर पानी के पाउच फेंके थे जिसे श्रद्धालुओं ने नजरअंदाज कर दिया था। हालाँकि पुलिस उन रिक्शों के मालिकों और चालकों की भी भूमिका जाँच रही है जिसमें बैठ कर ये आरोपित घटना को अंजाम दे रहे थे। वह मदरसा भी पुलिस की रडार पर है जहाँ नाबालिग को पथराव की ट्रेनिंग दी गई थी।

लगाए गए अल्लाह हु अकबर के नारे

अब तक की जाँच में इस हमले के पीछे किसी सगीर का नाम सामने आया है। पथराव से पहले सगीर के साथ मौजूद नाबालिग मुस्लिम बच्चों को मस्जिदों से खाने-पीने का सामान दिया गया था। पथराव के समय नाबालिग आरोपित ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगा रहे थे। पुलिस ने केस दर्ज कर के अब तक कुल 27 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में कई नाबालिग भी हैं जिनकी उम्र 12 से 13 साल के बीच बताई जा रही है।

गणेश प्रतिमा पर ये नाबालिग हमला कर के भाग रहे थे कि श्रद्धालुओं ने इन्हे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया। नाराज हिन्दू थाने पर जमा हो कर आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इसी दौरान मुस्लिम भीड़ पत्थरबाजों के समर्थन में आ गई। दोनों पक्षों में भिड़ंत जैसे हालत बन गए। पुलिस ने हालात संभालने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।पुलिस हालात को संभाल ही रही थी कि मुस्लिम भीड़ ने उन पर भी पत्थरबाजी शुरू कर दी। यह पथराव एक मस्जिद के पास बने 4 घरों से हुआ था।

पुलिस वालों तक की हत्या की साजिश

हमलावर भीड़ की पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों में DCP भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि मस्जिद के पास मौजूद घरों पर पूरी तैयारी के साथ पत्थर रखे गए थे। जब पुलिस ने पत्थरबाजों को पकड़ने के लिए कॉम्बिंग शुरू की तो मुस्लिमों के 27 घरों में एक साथ अँधेरा कर दिया गया। बताया जा रहा है कि पत्थरबाजों को भी सोची-समझी साजिश के तहत भगा दिया गया था। जिस सैयदपुरा क्षेत्र से पत्थरबाजी की गई थी उधर बुलडोजरों को भेजा गया है। सैयदपुरा के कुछ मुस्लिम नेताओं से भी पुलिस ने पूछताछ की है।

पुलिस की जाँच में यह भी पता चला है कि नाबालिग हमलावरों को ट्रेनिंग दी गई थी कि वो पुलिस वालों के सिर पर वार करेंगे तो उनकी मौत हो जाएगी। इस मामले में पुलिस ने 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। पहला केस गणेश प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश करने वाले नाबालिगों पर दर्ज हुआ है। वहीं दूसरी FIR पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ दर्ज हुई है। यह FIR हत्या के प्रयास, बलवा, तोड़फोड़ और अन्य धाराओं में दर्ज हुई है।

सूरत की इस घटना में अब तक कुल 26 आरोपितों के नाम सामने आए हैं। इसमें से कईयों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपित की 2 दिनों की कस्टडी रिमांड भी कोर्ट ने मंजूर कर दी है। घटना में सभी आरोपित मुस्लिम समुदाय से हैं। जिस पंडाल को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया था वहाँ गुजरात के गृह राजयमंत्री हर्ष संघवी भी पहुँचे। यहाँ उन्होंने गणपति की आरती की और एलान किया था कि धरती पर सूरज की पहली किरण पड़ने से पहले आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। गुजरात पुलिस ने गृह राजयमंत्री के इस संकल्प को पूरा भी किया था।

कच्छ में भी गणेश पंडाल पर पथराव

सूरत की ही तरह कच्छ में भी गणेश पंडाल पर पत्थरबाजी की गई है। यहाँ भी पथराव के लिए मुस्लिम समुदाय के नाबालिग लड़कों का इस्तेमाल किया गया है। इस पथराव से भगवान गणेश की मूर्ति टूट गई। पंडाल के पास ही एक हिन्दू मंदिर पर हरे रंग का इस्लामिक झंडा भी लगा दिया गया था। इस घटना के बाद हालत तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने केस दर्ज कर के 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना कच्छ के नखत्राणा के कोटा क्षेत्र की है। यहाँ के गाँव जारोदर में हिन्दू समुदाय के लोगों ने पंडाल में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की है। 10 सितंबर 2024 (मंगलवार) को शेयर किए गए वीडियो में आरोप लगाया गया है कि इस पंडाल पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी की है। इस पत्थरबाजी से गणेश प्रतिमा की नाक टूट गई है। हमलावरों ने पंडाल के ही पास एक हिन्दू मंदिर में इस्लामिक झंडा भी गाड़ दिया। इस घटना के बाद आसपास तनाव फ़ैल गया।

लोगों ने पुलिस पर भी कार्रवाई में ढिलाई करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के अब तक 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपितों के नाम मौलाना गुलाम हुसैन जाफर, आसिफ सुमरा पढियार, साहिल रमजान और हनीफ जुसन हैं। गिरफ्तार हुए 3 अन्य आरोपित नाबालिग हैं। कच्छ-पूर्व जिला के पुलिस प्रमुख सागर बागमार ने मीडिया से बताया कि अब गांव में शांति है और मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

भरूच में भी साम्प्रदायिक तनाव

गणेश चतुर्थी के पर्व पर कट्टरपंथियों ने गुजरात के ही भरूच जिले में भी हंगामा किया है। यहां मज़हबी झंडा लगाने के मामले को ले कर हिन्दू और मुस्लिम पक्ष आमने-सामने आ गए। इस घटना की वजह से शहर में तनाव फ़ैल गया। घटना 10 सितंबर (मंगलवार) की है। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालात को संभाला। प्रभावित इलाकों में फ़ोर्स तैनात कर दी गई है।

यह घटना भरूच जिले के गोकुलनगर क्षेत्र की है। यहाँ मिश्रित आबादी है। गणेश चतुर्थी के पर्व के मौके हिन्दू समुदाय के लोग अपने धार्मिक झंडे लगा रहे थे। इसी दौरान मुस्लिम पक्ष के लोगों ने अपनी आने वाली ईद की बात कह कर अपने इस्लामी झंडे और तोरण लगाने शुरू कर दिए। हिन्दुओं ने अपने घरों के पास तोरण न लगाने की अपील की लेकिन इसका मुस्लिम पक्ष पर कोई असर नहीं पड़ा और तोरण लगाना जारी रहा। इसी बात पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

बताया जा रहा है कि थोड़ी देर की बहस के बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। विवाद में 2 लोग घायल हो गए हैं। इस विवाद की सूचना मिलते ही फ़ौरन ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस को देखते ही उपद्रवी छिपने लगे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इलाके में फ़ोर्स लगा दी गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर के पूरे मामले की जाँच भी शुरू कर दी है। एसपी मयूरसिह के मुताबिक CCTV फुटेज व अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।