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पहले रोटियों पर थूका, फिर चुपड़ा उसमें बलगम: बागपत के गुलज़ार ढाबे का कारीगर सद्दाम हुसैन गिरफ्तार, मालिक एहसान भी नामजद

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक ढाबे पर रोटी बना रहे सद्दाम हुसैन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कारीगर सद्दाम को तंदूरी रोटियों पर थूकते देखा जा सकता है। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करके सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया है। सद्दाम के साथ होटल मालिक एहसान को भी नामजद किया गया है। यह घटना सोमवार (9 सितंबर 2024) की बताई जा रही है।

मामला बागपत जिले के कोतवाली शहर की है। यहाँ मंगलवार (10 सितंबर 2024) को थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल धीरज कुमार ने अपने थाने में एक तहरीर दी। इसमें उन्होंने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर एक होटल का वायरल वीडियो मिला। जाँच में यह होटल बागपत के दिल्ली रोड स्थित गुलजार होटल का निकला। इस वीडियो में तंदूर के पास खड़ा कारीगर रोटियों पर 2 थूकता दिखा।

पुलिस का आरोप है कि कारीगर ने रोटियों पर बलगम भी लगाया। हेड कॉन्स्टेबल धीरज कुमार के मुताबिक, कारीगर की इस हरकत से संक्रामक बीमारियाँ फैलने का खतरा है। पुलिस ने फ़ौरन होटल के मालिक गुलजार से बात की। गुलजार ने बताया कि उन्होंने अपना ढाबा फूंस वाली मस्जिद के पास रहने वाले एहसान को दे रखा है।

एहसान द्वारा चलाए जा रहे ढाबे में रोटी बनाने के लिए सद्दाम हुसैन नियुक्त था। सद्दाम हुसैन उत्तर प्रदेश के बागपत शहर में काजियान मस्जिद के पास रहता है। उसकी हरकत निंदनीय बताते हुए हेड कॉन्स्टेबल धीरज कुमार ने उसके खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 271, 272 और 274 के तहत दर्ज हुई है।

इस FIR में होटल मालिक एहसान को भी नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी मौजूद है। बुधवार (11 सितंबर 2024) को पुलिस ने बताया कि आरोपित सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

विदेश से करोड़ों की फंडिंग, निशाने पर गरीब-दिव्यांग एवं महिलाएँ: देश भर में धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले मौलाना कलीम और मौलाना उमर सहित 12 को उम्रकैद

देश में अवैध धर्मांतरण का रैकेट चलाने वाले वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम सहित 12 आरोपितों को उम्रकैद की सजा मिली है। इसके अलावा, चार दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। यह सजा लखनऊ स्थित NIA की कोर्ट ने सुनाई है। कोर्ट ने इन सभी को कल दोषी करार दिया था और सजा का ऐलान बुधवार (11 सितंबर 2024) को किया।

कोर्ट ने मंगलवार (10 सितंबर 2024) को मौलाना उमर गौतम और मौलाना कलीम सिद्दीकी सहित 16 आरोपियों को दोषी करार दिया था। वहीं, इदरीस कुरैशी नाम के आरोपित को हाई कोर्ट से स्टे मिल गया था। NIA-ATS कोर्ट ने इन्हें धारा 417, 120B, 153A, 153B, 295A, 121A, 123 और अवैध धर्मांतरण की धारा 3, 4, और 5 के तहत दोषी पाया है।

इन धाराओं में दोषियों को 10 साल से लेकर अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। NIA-ATS कोर्ट ने मौलाना उमर और मौलाना कलीम समेत 12 दोषियों को अधिकतम सजा उम्रकैद की सुनाई है। वहीं, जिन चार दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है, उनके नाम हैं – राहुल भोला, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, मोहम्मद सलीम, कुणाल अशोक चौधरी उर्फ आतिफ।

ये सभी दोषी उत्तर प्रदेश एवं अन्य जगहों पर धर्मांतरण का रैकेट चलाते थे। ये लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करते थे। ये दोषी लोगों को उनके मूल धर्म के बारे में भ्रम, नफरत और भय पैदा करके उनका ब्रेनवॉश करते थे। इसके बाद उन्हें इस्लाम की खूबियाँ बताते थे और मुस्लिम बनाते थे। इन सबको राज्य के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया गया था।

ये गिरोह उन लोगों को अपना टारगेट बनाते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग होते थे। इसके अलावा महिलाएँ भी इनके निशाने पर होती थीं। इनके रैकेट को चलाने के लिए इन्हें खाड़ी सहित दुनिया भर से पैसे आते थे। बहला-फुसलाकर, डरा धमकाकर और दबाव बनाकर धर्मांतरण कराते थे। धर्मांतरण करने के बाद उन पर दबाव बनाया जाता था कि वो और हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराएँ।

यह गिरोह इस बात का भी ख्याल रखता था कि धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बने लोग फिर से अपने धर्म में वापसी ना कर लें। इसके लिए उन्हें विशेष तौर पर ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें देश के अलग-अलग मस्जिदों एवं मदरसों में रखा जाता था। जो इस्लाम छोड़ने की कोशिश करते, उन्हें धमकी भी दी जाती थी।

मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र स्थित फुलत गाँव का कहने वाला कलीम सिद्दीकी पिकेट इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की शिक्षा ली है। इसके बाद दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने लगा। बीच में ही पढ़ाई छोड़कर वह इस्लामी स्कॉलर बन गया और इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने लगा।

कलीम सिद्दीकी दिल्ली के शाहीन बाग में 18 साल से अपना ठिकाना बना रखा था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 22 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 562 दिनों तक जेल में रहने के बाद अप्रैल 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। जमानत के दौरान उस पर कई तरह की पाबंदियाँ भी लगाई गई थीं।

‘जेल में 90% लोग हमारे ही हैं, अंदर ही तुम्हारी दुर्गति करवा देंगे’: RJD विधायक मुहम्मद इज़हार असफ़ी ने खुलेआम सरकारी शिक्षक को धमकाया, सामने आया Video

बिहार के किशनगंज स्थित कोचाधामन से ‘राष्ट्रीय जनता दल’ (RJD) के विधायक मुहम्मद इज़हार असफ़ी एक शिक्षक को धमकी देते हुए वीडियो वायरल हुआ है। इसमें शिक्षक को वो जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग एक बाद फिर से राजद के गुंडाराज को याद कर रहे हैं। बता दें कि लालू यादव और राबड़ी देवी के मुख्यमंत्रित्व काल में रंगदारी, अपहरण, हत्या और बलात्कार आम बात हुआ करते थे। एक बार फिर लोग उस दौर को याद कर रहे हैं।

वीडियो में राजद विधायक कह रहे हैं, “तुम समझते हो कि केस होगा तो जेल जाएँगे तो 2 दिन में बेल हो जाएगा। इसी 2 दिन में जेल के अंदर ही तुम्हारी दुर्गति करवा देंगे। पता है न, 90% लोग जेल में हमारा ही आदमी है। इसमें चोर है, बदमाश है, छिनरा है, लुच्चा है। तुम्हें बाहर में कुछ नहीं होगा तो जेल में ही तुम्हारी दुर्गति करवा देंगे।” इस दौरान राजद विधायक समर्थकों से घिरे हुए भी दिख रहे हैं। साथ ही वहाँ कुछ नाबालिग बच्चे भी हैं। इन सबके सामने धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बता दें कि किशनगंज बिहार के सीमांचल में आता है जहाँ की सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं और बांग्लादेश की सीमा भी यहाँ से बहुत अधिक दूर नहीं है। जिसे धमकी दी जा रही है, वो एक सरकारी शिक्षक है। हालाँकि, बताया जा रहा है कि ये वीडियो 31 जुलाई, 2024 का है जो अब वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि अपग्रेड हाई स्कूल अहमदनगर मोधो में शिक्षक ने एक लड़के की पिटाई कर दी थी, जिस पर भड़कते हुए विधायक ने शिक्षक को ही धमकी दे डाली।

किशनगंज एक मुस्लिम बहुल जिला है। राजद विधायक इसी मामले में समझौता कराने के लिए स्कूल पहुँचे हुए थे। खास बात ये है कि उनके बेटे विधायक के पुत्र इम्तियाज असफी ने खुद ही सोशल मीडिया के माध्यम से इस वीडियो को वायरल करवाया है। पिछले कुछ दिनों से पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव लगातार बढ़ते अपराध का आरोप लगा कर नीतीश सरकार पर हमला बोल रहे हैं, ऐसे में उनकी ही पार्टी की नेता की गुंडागर्दी को लेकर वो घिर रहे हैं।

रास्ते पर आया मालदीव: PM मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले 2 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति मोइज्जू के भारत आने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले मालदीव के दो मंत्रियों से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच वहाँ के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के कार्यालय ने मंगलवार (10 सितंबर 2024) को घोषणा की कि राष्ट्रपति बहुत जल्द भारत की यात्रा कर सकते हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी। तिथि को अंतिम रूप देने की कोशिश की जा रही है।

बता दें कि मालदीव के जिन दो जूनियर मंत्रियों ने पीएम मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी की थी, उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया गया था। अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। मोहम्मद मोइज्जू को भारत विरोधी रूख के लिए जाना जाता है। वे चीन के ज्यादा करीब हैं। हालाँकि, हाल के दिनों में दोनों के बीच रिश्तों में नरमी आई है। इसके बाद इसे और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार शपथ ग्रहण करने के दौरान इस साल जून में हुए समारोह में मोहम्मद मोइज्जू भी शामिल हुए थे। इसके बाद पिछले महीने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर माले का दौरा किया था। इस दौरान मोहम्मद मोइज्जू की उपस्थिति में जयशंकर ने कई परियोजनाओं की शुरुआत की थी। इनमें से कुछ परियोजनाएँ भारत द्वारा दी गई वित्तीय मदद से शुरू हुई हैं।

चीन समर्थक मोहम्मद मुइज्जू ने पिछले साल राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद मालदीव से भारतीय सैन्यकर्मियों को तत्काल वापस बुलाने की माँग की थी। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई थी। हालाँकि, भारत द्वारा सैन्यकर्मियों के स्थान पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के असैन्य कर्मचारियों को नियुक्त करने के बाद से हालात सुधरे हैं।

मालदीव के राष्ट्रपति के कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता राष्ट्रपति कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता हीना वलीद ने मुइज्जू की यात्रा की घोषणा उस दिन की, जिस दिन पीएम मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी करने के कारण निलंबित किए गए दो जूनियर मंत्रियों इस्तीफा दे दिया। दरअसल, पीएम मोदी ने लक्षद्वीप को पर्यटन स्थल के रूप में प्रमोट किया था। इसके बाद मालदीव के मंत्रियों ने उन पर छींटाकशी की थी।

मइज्जू के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जोकर’, ‘आतंकवादी’ और ‘इज़राइल की कठपुतली’ तक कह दिया था। उनका कहना था कि मालदीव के पर्यटन के समानांतर लक्षद्वीप को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया। तब मोइज्जू ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था। अब इन मंत्रियों ने व्यक्तिगत कारण बताकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

मालदीव स्थित भारतीय उच्चायोग ने तीन मंत्रियों मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महजूम मजीद की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इस घटना को लेकर मालदीव के विदेश मंत्रालय ने अपने मंत्रियों की इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सरकार विदेशी नेताओं के खिलाफ ‘अपमानजनक टिप्पणियों‘ से अवगत है और वह उन्हें बर्दाश्त नहीं करेगी।

हीना ने कहा कि यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्ष इस पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो तारीख दोनों देशों के नेताओं के लिए सुविधाजनक होगा, उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति बहुत जल्द भारत आने वाले हैं। ऐसी यात्राएँ दोनों देशों के नेताओं की अधिकतम सुविधा के समय के लिए निर्धारित की जाती हैं। इस बारे में चर्चा चल रही है।”

4 आतंकियों की फाँसी हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदली: नरेंद्र मोदी की पटना रैली में किए थे सीरियल ब्लास्ट, धमाकों में 8 लोगों की गई थी जान

साल 2013 में पटना के गाँधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली में हुए सीरियल ब्लास्ट के 4 दोषियों को पटना हाईकोर्ट ने फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। निचली अदालत ने 4 को फाँसी की सजा और 2 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालाँकि, पटना हाई कोर्ट ने सभी 6 दोषियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है।

सजा को बदलते हुए कोर्ट ने कहा कि इनकी उम्र कम है और इन्हें भी जीने का अधिकार है। इसलिए फाँसी की सजा नहीं दी गई। NIA की ओर से पेश स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर मनोज कुमार सिंह ने कहा, “ये बहुत अच्छा फैसला है। कोर्ट ने आरोपियों की उम्र को देखते हुए फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदला है। सभी आरोपितों की उम्र कम है। हम लोगों ने घटना की गंभीरता को लेकर दलील दी थी।”

जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ फैसले के बाद नुमान अंसारी, मोहम्मद मजीबुल्ला, हैदर अली और इम्तियाज आलम को अब फाँसी नहीं होगी। वहीं, उमैर सिद्दकी और अजहरुद्दीन कुरैशी को निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास को यथावत रखा है। बचाव पक्ष के वकील इमरान गनी ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।

पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में 27 अक्टूबर 2013 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 9 लोगों को सजा सुनाई गई थी। इनमें से चार लोगों को फाँसी की सजा दी गई थी और बाकियों को उम्रकैद। पटना हाई कोर्ट द्वारा फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के बाद अब आरोपितों को 30 साल जेल में बिताना होगा।

जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन गाँधी मैदान में पीएम मोदी की रैली थी। उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के साथ जनसभा में भाजपा के तमाम बड़े नेता मौजूद थे। इसी दौरान पहला धमाका पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 10 के सुलभ शौचालय के पास हुआ था। इसके बाद गाँधी मैदान और उसके आस-पास 6 जगहों पर बम धमाके हुए।

इन बम धमाकों में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 89 लोग घायल हुए थे। धमाके के बाद पटना के गाँधी मैदान थाने में मामला दर्ज कराया गया था। तब बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से NIA जाँच की बात कही थी। इसके बाद 31 अक्टूबर 2013 को एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया था।

साल 2014 में NIA ने आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में 187 लोगों ने कोर्ट में गवाही दी थी। पटना की निचली अदालत ने द्वारा फाँसी की सजा सुनाने के बाद आरोपितों ने इसके खिलाफ पटना हाई कोर्ट में अपील की थी। आखिरकार इनकी फाँसी को उम्रकैद में बदल दिया गया।

जिस शिमला में इंच-इंच जगह का मोल, वहाँ 200 बीघा जमीन पर वक्फ बोर्ड का कब्जा: हिन्दू जागरण मंच का दावा, अवैध मस्जिद को बचाने में जुटी है कॉन्ग्रेस सरकार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों में अवैध मस्जिद को लेकर विवाद चल रहा है। हिन्दू संगठन अवैध मस्जिद को गिराने की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं, हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार उन पर लाठियाँ बरसा रही है। अब हिमाचल प्रदेश में वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर भी नए खुलासे हो रहे हैं।

प्रदेश की राजधानी शिमला में जहाँ एक तरफ जमीन की किल्लत बढ़ती जा रही है, वहीं वक्फ बोर्ड शिमला में वन विभाग और राजस्व विभाग के बाद जमीनों का तीसरा सबसे बड़ा मालिक बना हुआ है। सरकारी सत्यापन में बताया गया है कि वक्फ बोर्ड के पास शिमला के भीतर 70 बीघा जमीन है।

वक्फ के पास कहाँ-कहाँ जमीनें

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड के पास राजधानी शिमला में ही लगभग 70 बीघे जमीन है। यह जानकारी सरकारी सत्यापन से सामने आई है। वक्फ बोर्ड के पास शिमला के लक्कड़ बाजार, संजौली, छोटा शिमला और बालूगंज जैसे इलाकों में बड़ी जमीनें हैं। बताया गया है कि शिमला के टूटीकंडी में ही बोर्ड के पास लगभग 46 बीघे जमीन है। गौरतलब है कि यह वही इलाका है जहाँ शिमला का अंतरराज्यीय बस टर्मिनल है। इस इलाके में जमीन की इतनी समस्या है कि यहाँ सरकारी बसों को सड़क पर खड़ा करना पड़ता है।

इसके अलावा वक्फ बोर्ड के पास शिमला के लक्कड़ बाजार में 7.41 बीघे जमीन है। ताराहाल इलाके में भी वक्फ बोर्ड के पास 6 बीघे से अधिक जमीन है। इसके अलावा उस संजौली में भी वक्फ बोर्ड के पास बड़ी जमीनें हैं जहाँ पर वर्तमान में मस्जिद को लेकर विवाद चल रहा है। शिमला के बम्लोई, छोटा शिमला, बालूगंज और लोअर बाजार इलाके में मिला कर वक्फ के पास 10 बीघा से अधिक जमीन है। यह भी सामने आया है कि वक्फ की इन जमीनों पर कई जगह लोगों ने निर्माण भी कर लिए हैं।

हिन्दू संगठनों ने बताया- 200 बीघे पर कब्जा

जहाँ सरकारी सत्यापन में बताया गया है कि शिमला में वक्फ बोर्ड के पास 70 बीघा जमीन है तो वहीं हिमाचल के ही हिन्दू जागरण मंच ने कहा है कि यह जमीन असल में 200 बीघा से ज्यादा है। इसके लिए उन्होंने रिकॉर्ड भी दिया है। हिन्दू जागरण मंच के कमल गौतम के अनुसार, वक्फ बोर्ड के पास शिमला के भीतर लगभग 215 बीघा जमीन है।

कमल गौतम ने ऑपइंडिया को बताया कि सबसे ज्यादा जमीन उसी संजौली में है जहाँ पर वर्तमान में अवैध मस्जिद स्थित है। ऑपइंडिया से कमल गौतम ने बताया कि यहाँ वक्फ बोर्ड के पास 156 बीघा जमीन है। इसके अलावा उन्होंने वक्फ के कब्जे वाली जमीन की माप टूटी कंडी इलाके में वही बताई है जो सरकारी सत्यापन में निकल कर आई है।

वक्फ के पास मौजूद इस जमीन की कीमत करोड़ों-अरबों में है और यह सारी जमीन उस इलाके में स्थित है जो शिमला के रिहायशी और महंगे इलाके माने जाते हैं। ऑपइंडिया के पास मौजूद जमीन के रिकॉर्ड के अनुसार, वक्फ बोर्ड के पास जितनी भी जमीनें हैं, उनमें से अधिकांश पर कब्रिस्तान अंकित है। कुछ पर मकान और मस्जिद भी अंकित है।

जमीन कब्जाने का भी हो रहा प्रयास

वक्फ बोर्ड के पास जो जमीनें अभी मौजूद हैं, उसके अलावा नई जमीन लेने का भी प्रयास हो रहा है। यह दावा कमल गौतम ने किया है। कमला गौतम ने बताया कि वर्तमान में कई जगह प्रदेश में वक्फ बोर्ड की जमीन पर कई लोग निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कब्जा जानबूझ कर करवाया जा रहा है।

कमल गौतम का आरोप है कि जब इस जमीन पर कब्जा हो जाता है तो नई जमीन की माँग की जाती है। इस तरह से लगातार जमीन वक्फ बोर्ड के पास जा रही है। यह भी आरोप है कि उन गाँवों में भी कब्जे के लिए जमीन माँगी जा रही है जहाँ मात्र एक मुस्लिम परिवार रहता है। कई जगह हिन्दू परिवारों ने इसका विरोध किया है।

संजौली का विवाद गहराया

शिमला की संजौली मस्जिद से चालू हुआ विवाद अब लगातार बढ़ता जा रहा है। संजौली में बनी अवैध मस्जिद को गिराने की माँग लगातार बढती जा रही है। स्थानीय लोगों और हिन्दू संगठनों ने संजौली में बुधवार (11 सितम्बर, 2024) को जोरदार प्रदर्शन किया है। अवैध मस्जिद गिराने की माँग करने वाले हिन्दुओं पर हिमाचल प्रदेश की पुलिस ने डंडे बरसाए हैं।

यहाँ प्रदर्शन करने वाले लोगों पर पानी की बौछार भी की गई। प्रशासन ने पहले से ही यहाँ बैरिकेड लगा दिए थे। इसके बाद जब हिन्दू यहाँ पहुँचे तो उन पर लाठियाँ चली, इस लाठीचार्ज में कई लोगों को चोटें भी आईं। हालाँकि, हिन्दू अब भी सड़कों पर डटे हुए हैं।

कैसे चालू हुआ पूरा विवाद

संजौली की मस्जिद में अवैध निर्माण को हटाने की लम्बे समय से माँग चल रही है। यह मामला हाल ही में मारपीट की एक घटना के बाद और गरमा गया। दरअसल, 31 अगस्त, 2024 को एक स्थानीय युवक यशपाल की मल्याना में मुस्लिम लड़कों से कहासुनी हुई।

इसके बाद मुस्लिम हिंसक हो गए, उन्होंने यशपाल पर हमला कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमला करने वाले यह युवक कुछ देर बाद संजौली की मस्जिद में छुप गए। इसके बाद आसपास के लोगों का गुस्सा भड़क गया। स्थानीय लोग यहाँ इकट्ठा होकर इन युवकों पर कार्रवाई करने की माँग करने लगे।

इसको लेकर पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को पकड़ा, जिसमें 2 नाबालिग हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम गुलनवाज, सारिक, सैफ अली और रोहित हैं। इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया।

इस लड़ाई झगड़े की घटना के बाद यह मस्जिद विवादों के केंद्र में आ गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली की यह मस्जिद पहले कच्ची थी और मात्र दो मंजिल की थी। लेकिन 2010 के बाद इसमें तेजी से पक्का निर्माण किया जाने लगा। देखते देखते यह मस्जिद पाँच मंजिल तक पहुँच गई।

इस मामले में राज्य सरकार ने बताया कि 2010 में जब इस मस्जिद में अवैध निर्माण चालू हुआ तो शिमला नगर निगम ने नोटिस भी भेजे लेकिन निर्माण नहीं रुका। मस्जिद के निर्माण रोकने को लेकर 30-35 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके आसपास एक अवैध निर्माण को शिमला नगर निगम ने तोड़ा भी था। फिर भी यह पाँच मंजिल मस्जिद शहर के बीचों-बीच खड़ी कर दी गई।

तबसे ही इस मस्जिद को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन कर रहे हैं। मस्जिद के अवैध होने की बात हिमाचल सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी कही थी। स्थानीय लोगों को हिन्दू संगठनों की माँग है कि इस अवैध निर्माण को जमींदोज किया जाए और सरकार इसमें ढिलाई ना बरते। हालाँकि, सुक्खू सरकार बता रही है यह मामला अभी कोर्ट में है।

महादेव मंदिर का पुजारी ‘शिवमनाथ’, पहचान-पत्र चेक किया तो निकला सनव्वर हुसैन: मोबाइल में मिली तस्वीरों में नमाजी टोपी पहने और मजार पर इबादत करता दिखा

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मंगलवार (10 सितंबर 2024) को एक मंदिर में पुजारी बन कर रहे रहे एक मुस्लिम युवक को पकड़ा गया है। युवक का नाम सनव्वर हुसैन है जो एक शिव मंदिर में पिछले 6 माह से रह रहा था। वह पहले भी कई मंदिरों में पुजारी रह चुका है। सनव्वर खुद को रामपुर जिले के निवासी बता रहा है। हालाँकि उसके आधार कार्ड पर उत्तराखंड के उधमसिंह नगर का पता छपा हुआ है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बिजनौर जिले के थाना क्षेत्र शेरकोट की है। यहाँ के गाँव तिपरजोत में एक शिव मंदिर है जो स्थानीय लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है। शिवरात्रि को यहाँ काफी भीड़ होती है। लगभग 6 माह पहले इस मंदिर में सेवादार बन कर एक युवक आया जो कुछ ही दिनों में यहाँ का पुजारी बन गया। वह मंदिर में ही रह कर पूजा-पाठ करने लगा। यहाँ वो खुद को पुजारी ‘शिवमनाथ’ बताता था। हालाँकि उसकी हरकतों से ग्रामीणों को संदेह हुआ।

मंगलवार (10 सितंबर, 2024) को उन्होंने सनव्वर से आधार कार्ड माँगा। बताया जा रहा है कि माँगे जाने के बावजूद सनव्वर ग्रामीणों को अपना पहचान पत्र देने में आनाकानी करने लगा। काफी दबाव बनाने एक बाद उसने अपना पहचान पत्र लोगों को दिखाया। आधार कार्ड से उसकी मुस्लिम होने की पोल खुली। उसके अब्बा का नाम अफसर अली है। इसी में उसका पता उत्तराखंड के उधमसिंह नगर का दर्ज था। हालाँकि सनव्वर हुसैन ने खुद को रामपुर जिले का निवासी बताया।

लोगों ने सनव्वर का मोबाइल चेक किया तो और भी खुलासे सामने आए। सनव्वर के मोबाइल में उसकी कई तस्वीरें इस्लामी वेशभूषा में हैं। एक तस्वीर में वह सिर पर नमाज़ी टोपी रख कर किसी मजार के पास खड़ा दिख रहा है। उसके हाथ इबादत के लिए उठे दिख रहे हैं। और अधिक पड़ताल में पता चला कि सनव्वर इस से पहले बिजनौर जिले के ही नागरपुर खड़कसेन और नगीना क्षेत्र के कई मंदिरों में पुजारी बन समय बिता चुका है। इन मंदिरों में उसे महराज बोला जाता था।

अपनी सफाई में सनव्वर हुसैन ने दावा किया कि वह साल 2018 में ही घर वापसी कर के हिन्दू बन चुका है। ग्रामीणों ने इस मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने सनव्वर हुसैन को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक अब तक उसका कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। सनव्वर अपनी घर वापसी के संबंध में कोई पक्के सबूत नहीं दे पाया है। उसके घर वालों को भी सूचना पहुँचा दी गई है। फ़िलहाल मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘अल्लाह हू अअकबर’ के नारे लगाते हुए भीड़ ने गणेश पंडाल पर किया हमला, कहा- बंद करो पूजापाठ, वर्ना बुरा अंजाम होगा: लखनऊ की घटना

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार (10 सितंबर 2024) को गणेश पंडाल पर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पत्थरबाजी करके भगवान की मूर्ति के पास रखे कलश को तोड़ दिया। हमले के दौरान ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारे भी लगाए गए। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने थाने पर प्रदर्शन करके कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने केस दर्ज करके संदेह के आधार पर दो नाबालिगों को पकड़ा है।

मामला लखनऊ के थाना क्षेत्र चिनहट की है। यहाँ मंगलवार (10 सितंबर 2024) को गंगा विहार कॉलोनी की छोटी मस्जिद के पास रहने वाली किरण चौरसिया ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में किरण ने बताया कि हर बार की तरह इस साल भी उन्होंने अपने घर पर शनिवार (7 सितंबर 2024) को भगवान गणेश की मूर्ति विधि-विधान से स्थापित किया था।

अगले दिन से ही 20-25 की तादाद में मुस्लिम भीड़ उन्हें परेशान करने लगी। इस भीड़ में नाबालिग और युवा भी शामिल बताए जा रहे है। किरण के मुताबिक, वो हर दिन शाम 7 से 7:30 के बीच आरती करती हैं। आरती के बीच मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारों के साथ कई अन्य उत्तेजक नारे लगाते हुए गणेश पंडाल के सामने से गुजरने लगी।

भीड़ में शामिल लोग आरती कर रहे हिंदुओं को धमकी भी देते थे। भीड़ के द्वारा हर दिन पूजा-पाठ में बाधा डालने का प्रयास किया जाता था। महिला द्वारा दी गई शिकायत में आगे बताया गया है कि मंगलवार (10 सितंबर) की शाम 7:30 बजे वह कुछ बच्चियों के साथ पंडाल में आरती कर रही थी। इसी दौरान रोज की तरह मुस्लिम युवकों की भीड़ वहाँ पहुँच गई।

भीड़ इस बार हमलावर हो गई और पंडाल में रखी प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश हुई। उन लोगों ने पूजा पंडाल पर पत्थरबाजी भी की। इस हमले में भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ मौजूद कलश टूट गया। हमले से वहाँ अफरा-तफरी का माहौल हो गया। कुछ देर तक हंगामा करने के बाद मुस्लिम भीड़ हिन्दू परिवार को दोबारा पूजा-पाठ करने पर जान से मारने की धमकी देते चली गई।

इसके बाद पीड़िता ने थाने में जाकर शिकायत दी कहा कि उसकी धार्मिक भावनाएँ आहात की गई हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। अपनी शिकायत में पीड़िता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना की जानकारी मिलते ही श्रद्धालु व हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों ने थाने पर पहुँच कर हंगामा किया।

मामले की जानकारी मिलते ही तमाम सीनियर अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपितों को चिन्हित करके उनकी धरपकड़ के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पंडाल के पास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। DCP शशांक सिंह के मुताबिक, मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

राहुल गाँधी ने भारत के लोकतंत्र पर उठाए सवाल, सीरिया-इराक से की तुलना: अमेरिका में भारत विरोधी पत्रकार और उस महिला से भी मिले जिसके पति का इस्लामी संगठन से जुड़ाव

वॉशिंगटन डीसी में मंगलवार (10 सितंबर, 2024) को ‘नेशनल प्रेस क्लब’ में भारत के विपक्षी नेता राहुल गाँधी ने भारतीय लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी की स्थिति और देश की आर्थिक प्रगति पर सवाल उठाए। शुरुआत में ही उन्होंने दावा किया, “मुझे लगता है कि 2014 में भारत की राजनीति बहुत नाटकीय रूप से बदल गई। हमने एक ऐसे राजनीतिक दौर में प्रवेश किया जिसे हमने पहले कभी नहीं देखा। ये आक्रामक और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की नींव पर हमला करने वाला है।”

अपनी लक्जरियस राजनीतिक पदयात्रा (‘भारत जोड़ो यात्रा’) का महिमामंडन करने के अपने प्रयास में, राहुल गाँधी ने आरोप लगाया, “मीडिया को दबाया गया, संस्थानों पर नियंत्रण कर लिया गया, एजेंसियाँ विपक्ष पर हमला कर रही थीं, राज्य सरकारें गिराई जा रही थीं, और हमें लगा कि लोगों तक सीधे पहुँचने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।”

गाँधी परिवार के ‘शहज़ादे’ ने अमेरिका में अपने मीडिया इंटरैक्शन का उपयोग घरेलू राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए किया। उन्होंने न केवल घरेलू राजनीतिक मामलों को उछाला बल्कि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (RSS) को भी बदनाम किया।

उन्होंने बेशर्मी से कहा, “भारत में कॉन्ग्रेस और हमारे सहयोगियों के बीच और भाजपा और आरएसएस के बीच एक वैचारिक युद्ध चल रहा है। भारत के दो बिल्कुल अलग दृष्टिकोण हैं। हम एक बहुलतावादी दृष्टिकोण में विश्वास करते हैं, एक ऐसा दृष्टिकोण जहाँ हर किसी को फलने-फूलने का अधिकार है, सभी कल्पनाएँ स्वतंत्र रूप से घूम सकती हैं, एक ऐसा भारत जहाँ आपको इस आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जाता कि आप किस धर्म में विश्वास करते हैं या आप किस समुदाय से आते हैं या आप कौन सी भाषा बोलते हैं, इसके विपरीत एक बहुत ही कठोर केंद्रीकृत दृष्टिकोण है।”

राहुल गाँधी ने राजनीतिक रूप से प्रेरित जातिगत जनगणना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं बार-बार कह रहा हूँ कि हम आरक्षण को 50% से अधिक बढ़ाएँगे।”

राहुल गाँधी ने ‘विक्टिम कार्ड’ खेला, भारत की तुलना सीरिया और इराक से की

उन्होंने राजनीतिक प्रतिशोध के शिकार के रूप में कॉन्ग्रेस पार्टी को भी पेश किया जब उसके खाते ₹135 करोड़ का टैक्स न चुकाने पर फ्रीज कर दिए गए।

उन्होंने कहा, “हमने अपना बैंक खाता फ्रीज होने के बावजूद चुनाव लड़ा। अब, मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता कि कोई ऐसा लोकतंत्र है जहाँ ऐसा हुआ हो। शायद, आप जानते हैं, इस तरह की चीज़ें सीरिया या इराक में हुआ करती थीं।” राहुल गाँधी ने भारत और असफल इस्लामी मुल्कों के बीच झूठी समानता स्थापित की।

अपने मीडिया इंटरैक्शन के दौरान, राहुल गाँधी ने यह भी आरोप लगाया, “तो भारतीय लोकतंत्र पर हमला हुआ है, इसे बहुत बुरी तरह कमजोर किया गया है, और अब यह वापस लड़ रहा है।” गाँधी युवराज तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर हैं।

गाँधी परिवार के युवराज की विवादास्पद बांग्लादेशी ‘पत्रकार’ से मुलाकात

सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों में राहुल गाँधी को भारत विरोधी, बांग्लादेशी ‘पत्रकार’ मुश्फिकुल फजल अंसारी के साथ बातचीत करते देखा गया।

मार्च में सुर्खियों में आए अंसारी ने अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर के साथ एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान (जो कि भारत का आंतरिक मामला है) दिल्ली शराब नीति मामले में AAP नेता अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया था।

मुश्फिकुल फजल अंसारी ने UN के प्रवक्ता के समक्ष भी यही मुद्दा उठाया था। ‘जस्ट न्यूज बीडी’ की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश सरकार ने उन्हें डिजिटल सिक्योरिटी एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया है। मुश्फिकुल को ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) के आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय अपराध (CTTC) विभाग द्वारा वांछित घोषित किया गया था और मामले में उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित किया गया था।

उसी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मुश्फिकुल एक वेब पोर्टल चलाता था जिसे 2015 में बांग्लादेश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। उस पर कई बार सरकार के खिलाफ गलत सूचना फैलाने का आरोप लगा है। मुश्फिकुल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का समर्थक है, जो भारत के उत्तर-पूर्व में विद्रोह का समर्थन करने के लिए जानी जाती है। यूएन मिशन ने उनके पत्रकार के रूप में कार्यक्रमों में भाग लेने पर आपत्ति जताई थी।

बीएनपी ने हंटर बिडेन को अपने लॉबीस्ट के रूप में काम पर रखने का प्रयास किया और इसके संस्थापक शेख उबेद के माध्यम से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जमात-ए-इस्लामी (JeI) से संबंध हैं।

इस दौरान राहुल गाँधी ने आईएएमसी की वकालत निदेशक सरिता पांडे से मुलाकात की

जून 2023 में सरिता पांडे ने वाशिंगटन में राहुल गाँधी से मुलाकात की थी और उन्हें उनकी माँ सोनिया गाँधी का एक चित्र भेंट किया था। उन्होंने उस समय ट्वीट किया था – “जब मैंने उन्हें चित्र सौंपा, तो मैंने कहा, “एक माँ से दूसरी माँ को,” और उन्होंने कहा कि वह इसे उन्हें देंगे। मुझे उम्मीद है कि वह ऐसा करेंगे”।

गौरतलब है कि सरिता पांडे अजीत साही की पत्नी हैं, जो इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC)’ के एडवोकेसी डायरेक्टर हैं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) के अनुसार, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के संबंध बैन इस्लामिक आतंकवादी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े हैं।

इसके अलावा, आईएएमसी के संबंध लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जमात-ए-इस्लामी (JeI) से भी उसके संस्थापक शेख उबैद के माध्यम से जुड़े हैं। आईएएमसी एक जमात-ए-इस्लामी समर्थित लॉबिंग संगठन है, जो खुद को अधिकारों की वकालत करने वाला समूह बताता है।

इससे पहले, यह कथित तौर पर यूएसए में विभिन्न समूहों के साथ मिलकर काम कर चुका है और यहाँ तक कि भारत को USCIRF (संयुक्त राज्य अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग) द्वारा ब्लैकलिस्ट कराने के लिए उन्हें पैसे भी दिए। आईएएमसी को भारत में इस्लामी कारणों को आगे बढ़ाने के लिए फर्जी खबरें और गलत सूचनाएँ फैलाने का भी दोषी पाया गया है। इसे 2021 में यूएपीए के तहत भी लिया गया था।

सरिता पांडे के पति अजीत साही को 2021 में विवादास्पद हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) द्वारा ‘स्वामी अग्निवेश मेमोरियल अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था। इस संगठन ने ‘ग्लोबल हिंदुत्व को खत्म करो’ सम्मेलन का समर्थन भी किया था।

2019 में, ‘हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स’ की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ने भी भारतीय मुसलमानों में एनआरसी को लेकर डर और घबराहट पैदा करने की कोशिश की थी। संयोग से, राहुल गाँधी ने अपनी 2023 की यूएस यात्रा के दौरान उनसे भी मुलाकात की थी। वह ‘विमेन फॉर अफगान विमेन’ नामक संगठन की सह-संस्थापक भी हैं, जो जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसायटी फाउंडेशन (OSF)/ओपन सोसायटी इंस्टीट्यूट (OSI) द्वारा वित्त पोषित है।

अब्बा फौज से रिटायर, भाई वायुसेना में, खुद ‘मेजर हर्षित चौधरी’ बन घूमता था शहबाज अली: वंदे भारत से चोरी केस में गिरफ्तारी के बाद खुला राज

गुजरात की अहमदाबाद रेलवे पुलिस ने वंदे भारत ट्रेन में चोरी करने वाले शहबाज अली नाम के एक चोर को गिरफ्तार किया है। उसने हर्षित चौधरी नाम से अपना पहचान पत्र बनवा रखा था और खुद को आर्मी में मेजर बताता था। उसके पास से सेना का एक आई कार्ड एवं अन्य कागजात भी बरामद हुए हैं। फर्जी कागजातों से शहबाज़ ट्रेन और हवाई यात्राएँ करता था। उसके अब्बू सेना के रिटायर्ड हैं, जबकि उसका भाई एयरफोर्स में है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात में कुछ दिन पहले वन्दे भारत ट्रेन से एक सूटकेस चोरी हुआ था। इस घटना की शिकायत अहमदाबाद रेलवे पुलिस में दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने जाँच के दौरान CCTV फुटेज खँगाले। इस दौरान एक युवक चोरी हुए सूटकेस के साथ नजर आया। इस युवक की पड़ताल रेलवे रिजर्वेशन से करवाई गई। सीट बुकिंग में इस्तेमाल दस्तावेजों के आधार पर युवक की पहचान राजस्थान के हर्षित चौधरी के तौर पर हुई।

आखिरकार 5 सितंबर 2024 को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए आरोपित को अहमदाबाद लाकर पूछताछ की गई। पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार आरोपित हर्षित चौधरी नहीं, बल्कि शहबाज़ मुश्ताक अली खान है। उसने हर्षित चौधरी के नाम का फर्जी आधार कार्ड बनवा रखा था। शहबाज़ न सिर्फ खुद को हिन्दू, बल्कि भारतीय सेना में मेजर बताया करता था।

तलाशी के दौरान उसके पास से एक आई कार्ड भी बरामद हुआ। इस आई कार्ड में भी शहबाज़ ने अपनी फोटो लगाकर खुद को हर्षित चौधरी बता रखा था। फर्जी कागजात बरामद होने के बाद पुलिस ने शहबाज़ से आगे की पूछताछ शुरू की। उसने बताया कि वह मूलतः उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का रहने वाला है। अलीगढ़ में वह मौलाना आज़ाद नगर में रहता है।

पूछताछ में उसने बताया कि इन फर्जी पहचान पत्रों पर उसने 3 बार घरेलू उड़ान से और इतनी ही बार ट्रेन से यात्रा कर चुका है। फर्जी कागजात बनाने के पीछे शहबाज़ ने लोगों पर रुतबा झाड़ने की मंशा बताया है। फिलहाल जाँच एजेंसियाँ इसकी पड़ताल कर रही हैं। शादीशुदा शाहबाज़ अली 2 बच्चों का अब्बा है। पुलिस को पता चला कि शहबाज़ के अब्बा मुश्ताक अली खान सेना से रिटायर्ड हैं।

वहीं, शाहबाज़ का एक भाई भारतीय वायुसेना में है। उसका एक अन्य भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। आरोपित शहबाज को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। पुलिस की जाँच इस बिंदु पर भी हो रही है कि सेना के अधिकारी का आई कार्ड शहबाज़ ने सिर्फ धौंस जमाने के लिए बनवाया था या इसके पीछे उसकी कोई और मंशा थी।