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‘कोलकाता में घर है, ED दिल्ली बुला रही’: कोयला घोटाला में समन रद्द करवाने सुप्रीम कोर्ट गए थे ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, TMC सांसद को नहीं मिली राहत

कोयला घोटाला मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस (Trinamool congress) के सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी की याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने खारिज कर दिया ह। अपनी याचिका में उन्होंने घोटाले के संबंध में मिले ईडी के समन को चुनौती दी थी।

अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कोलकाता में उनका सामान्य निवास स्थान है, लेकिन ED ने उन्हें नई दिल्ली में पेश होने को कहा। उनकी इस याचिका पर गौर करते हुए जस्टिस बेला त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने फैसला सुनाया। इससे पहले इस मामले में 13 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा गया था।

ईडी ने जो समन अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को भेजा उसमें कहा गया था कि घोटाले के पैसे को दिल्ली और विदेश मे ट्रांसफर किए गए थे, इसलिए दिल्ली मे पूछताछ की जा सकती है, जबकि बनर्जी और उनकी पत्नी का कहना था कि उन लोगों से पूछताछ कोलकाता में हो सकती है फिर भी उन्हें बुलाया जा रहा है।

बता दें कि इस मामले में अभिषेक बनर्जी की ओर से कपिल सिब्बल और रुजिरा बनर्जी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल शंकरनारायण से कोर्ट में पेश हुए थे। हालाँकि बावजूद इसके उनकी याचिका पर गौर नहीं हुआ।

गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल के स्कूलों में करोड़ों रुपये के भर्ती घोटाले में पैसे के लेन-देन की जांच के संबंध में अभिषेक बनर्जी कई बार ईडी के सामने पेश भी नहीं हुए गैं। वहीं इस मामले में ईडी ने अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से बात की है।

नहर में मिली वकील मोहिनी तोमर की लाश: पति ने बताया- चंदन गुप्ता केस में मुनाजिर रफी की बेल का किया था विरोध, तिरंगा यात्रा के दौरान हिंदू युवक की हुई थी हत्या

उत्तर प्रदेश के कासगंज में 3 सितंबर को जिला न्यायलय के गेट से गायब हुईं अधिवक्ता मोहिनी तोमर की लाश हजारा नहर में मिलने के बाद से जिले में बवाल है। पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो आरोपितों के नाम हैदर और मुस्तफा भी हैं।

अब मीडिया रिपोर्ट्स में इस हत्या से जुड़ी दो थ्योरी सामने आ रही हैं। कहीं बताया जा रहा है कि मोहिनी तोमर की हत्या उनके कोर्ट में चल रहे हालिया केस को लेकर हुई। वहीं कहीं पर इस हत्या को 6 साल पुराने चंदन गुप्ता केस से जोड़कर भी बताया जा रहा है।

हालिया मामला शिवशंकर नाम के शख्स से जुड़ा है जिसकी पैरवी मोहिनी तोमर कर रही थीं। इस मामले को लेकर पता चलता है कि कुछ समय पहले एक क्रिकेट मैच में हारने के बाद हैदर, मुस्तफा और सलमान की टीम ने शिवशंकर से गाली-गलौच की थी और बाद में उन्हें पीटा भी गया था। मोहिनी तोमर की ओर से ये केस कोर्ट में पेश किया गया।

शिवशंकर के अनुसार, शुरू में तो उनसे मामले में राजीनामा कराने का दबाव बनाया जा रहा था, हालाँकि बाद में जब मामला हाई कोर्ट जाने को हुआ तो उन्हें धमकियाँ मिलने लगीं और फिर मोहिनी का अपहरण करके इस हत्या को अंजाम दिया गया।

वहीं मोहिनी तोमर के पति ने एफआईआर में बताया कि कुछ समय से उनकी पत्नी काफी परेशान रहने लगी थीं। जब उन्होंने इस घटना के बारे में बार-बार पूछा तब जाकर उन्होंने बताया कि चूँकि उन्होंने मुस्तफा कामिल के बेटों की जमानत का विरोध किया इसलिए उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं। इसके अलावा मुनाजिर रफी का नाम भी मृतिका के पति द्वारा एफआईआर में लिखाया गया है। उन्होंने बताया कि रफी का नाम चंदन गुप्ता केस में सामने आया था। उसके बाद मोहिनी ने उस मामले में भी रफी की बेल का विरोध किया था।

उन्होंने अपनी तहरीर में बताया कि वकील मुस्तफा कामिल, असद मुस्तफा, हैदर मुस्तफा, सलमान, मुनाजिर रफी, केशव मिश्रा ने योजनाबद्ध तरीके से उसकी मोहिनी तोमर को किसी व्यक्ति के माध्यम से न्यायालय में मुख्य गेट के बाहर बुलाकर उनका अपहरण कर लिया। इसके बाद अज्ञात स्थान पर ले जाकर हत्या करवा दी।

अब इस मामले को लेकर विभिन्न जगहों पर हिंदू संगठन और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सड़क जाम करते हुए हाईवे पर जाम लगा दिया गया। अधिवक्ताओं ने हाईवे पर बैठ इंसाफ के लिए नारेबाजी की। वहीं पुलिस ने मामले में आरोपितों के विरुद्ध एक्शन लेते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

चंदन गुप्ता हत्या- उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में 26 जनवरी 2018 को निकली ‘तिरंगा यात्रा’ पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला किया था। इस हमले में चंदन गुप्ता उर्फ़ अभिषेक की मौत हो गई थी। ‘तिरंगा यात्रा’ में शामिल लोगों पर गोलियाँ चलाई गई थी। पथराव हुआ था। इसी घटना में चंदन गुप्ता की मौत हो गई थी।

सबकी हो भागीदारी, विदेशी पैसे पर लगे रोक… इन 9 सुझावों पर गौर कर वक्फ बिल को प्रभावी बना सकती है JPC, इसके बिना ‘मजहबी जमींदार’ से जमीन बचाना मुश्किल

देश में वक्फ संपत्तियों पर लगातार उपजते विवाद और इनसे होने वाले पचड़ों के बाद केंद्र सरकार हाल ही में वक्फ संशोधन अधिनियम विधेयक लेकर आई है। वक्फ में सुधार के उद्देश्य से लाए गए इस बिल को सरकार ने 8 अगस्त, 2024 को मानसून सत्र के दौरान संसद में रखा था। बिल पर विपक्ष के कुछ सदस्यों के विरोध के बाद इसके लिए संयुक्त संसदीय कमिटी (JPC) को भेज दिया गया। बिल वर्तमान में इसी कमिटी के पास है। कमिटी का बिल को लेकर बैठकों का दौर जारी है।

JPC ने इस संबंध में अगस्त माह के अंत में जनता से बिल पर सुझाव माँगे हैं। समिति ने कहा है कि वह इस बिल को लेकर आम जनता, इसके भागीदारों और साथ ही NGO समेत बाकी लोगों की राय जानना चाहती है। कमिटी ने अपने संपर्क सूत्र भी दिए हैं और बताया है कि उसे इस पते पर लोग अपने सुझाव भेज सकते हैं। उसने डिजिटल तरीके से भी सुझाव देने को कहा है। वक्फ बिल को लकर कमिटी चाहती है कि उसके पास सभी भागीदारों की राय उसे मिले, ताकि उसे कानून बनाने में आसानी रहे।

वक्फ में क्या बदलाव का है प्रस्ताव?

इस बिल में सरकार ने वक्फ संपत्तियों को लेकर होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए कई बदलावों का प्रस्ताव किया है। इस बिल में कहा गया है कि कोई व्यक्ति तभी अपनी सम्पत्ति को वक्फ बना सकता है जब वह 5 साल से इस्लाम धर्म में मान रहा है। इसके अलावा बिल में यह भी बताया गया है कि किसी सरकारी सम्पत्ति को वक्फ नहीं बताया जा सकेगा। वक्फ घोषित करने से पहले उसका सर्वे करने के लिए वक्फ कमिश्नर की नियुक्ति के लिए भी प्रावधान किया गया है।

नए बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि केन्द्रीय स्तर पर एक वक्फ काउंसिल बनाई जाएगी। इसका काम सरकार और बाकी वक्फ बोर्ड को सलाह देना होगा। इसके चेयरमैन केन्द्रीय मंत्री होंगे। इस काउंसिल में महिलाओं और गैर मुस्लिमों की नियुक्ति का भी रास्ता निकाला गया है। इसके अलावा इस बिल में वक्फ से सम्बन्धित विवादों को निपटाने के लिए ट्रिब्यूनल की व्यवस्था भी की गई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत एक क्लास-1 का अधिकारी ट्रिब्यूनल का प्रमुख होगा।

नए बिल में एक बड़ा बदलाव वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के विरुद्ध अपील को लेकर है। पहले की व्यवस्था में वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम था और इसके विरुद्ध सामान्य कोर्ट में अपील नहीं हो सकती थी। नए बिल में यह व्यवस्था कर दी गई है। वक्फ बोर्ड की जवाबदेही का प्रावधान भी इस बिल में किया गया है। इस बिल के रूप लेने के बाद CAG वक्फ बोर्ड का ऑडिट करेगा। इसके अलावा शिया-सुन्नी के साथ ही आगाखानी और बोरा मुस्लिमों के लिए भी अलग वक्फ बोर्ड बनाने का प्रावधान किया है।

वक्फ बिल के लिए 9 सुझाव

वक्फ बोर्ड में अलग-अलग भागीदारों ने कई सुझाव दिए हैं। यह 9 सुझाव इस बिल को और मजबूत कर सकते हैं।

1. वक्फ बोर्ड में हो विविधता

भारत मुस्लिम आबादी 14% है। वक्फ बोर्ड भारत में जमीनों का तीसरा सबसे बड़ा मालिक है। लेकिन इस जमीन का पूरा प्रबन्धन केवल मुस्लिमों की निगरानी है। सरकार को अलग-अलग राज्यों में वक्फ के सलाहकार बोर्ड में हिंदू, सिख, जैन, ईसाई और अन्य समुदायों से कम से कम 40% गैर-मुस्लिमों की भागीदारों पर विचार करना चाहिए। इसके अलावा, 60% मुस्लिमों में भी में सुन्नी, शिया, बरेलवी, देवबंदी और अन्य सभी मुस्लिम संप्रदायों के प्रतिनिधि शामिल किए जाने चाहिए।

2. मंत्रालय से हो निगरानी

वक्फ अधिनियम में सबसे महत्वपूर्ण संशोधनों में से एक सलाहकार बोर्ड की जवाबदेही है। उन्हें सीधे एक मंत्रालय को रिपोर्ट करना चाहिए। यदि इस पर निगरानी रखी जाएगी तो इससे किसी भी समुदाय के किसी भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुँचेगा। हाँ इससे उन लोगों को

3. न्यायिक निगरानी

वक्फ ट्रिब्यूनल को अलग एक स्वतंत्र निकाय बनाने की जगह उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में रखा जाना चाहिए। यह तब और जरूरी हो जाता है जब कई मामले दूसरे धर्म के लोगों से जुड़े हुए हों। इससे एक समानांतर न्यायिक व्यवस्था पर भी रोक लगेगी।

4. टैक्स और सब्सिडी में ना मिले स्पेशल ट्रीटमेंट

वक्फ पर भी उसी तरह के टैक्स लगाए जाने चाहिए जिस तरह के टैक्स बाकी धार्मिक संस्थाओं पर लगाए जाते हैं। इसके साथ ही वक्फ बोर्ड को उसी हिसाब से सब्सिडी, टैक्स में छूट और लोन में सुविधाएँ दी जानी चाहिए, जैसी बाकी धार्मिक संस्थाएँ पाती हैं। इस मामले में स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं होना चाहिए।

5. डिजिटलीकरण

वक्फ की संपत्तियों का जल्द से जल्द डिजिटलीकरण प्राथमिकता के तौर पर किया जाना चाहिए। यह डाटा जनता को भी उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। इसके अलावा यदि कोई सामान्य सम्पत्ति वक्फ बनती है, तो इसकी जानकारी भी तुरंत आनी चाहिए उर इनका रिकॉर्ड बाकी स्मप्त्तियों की तरह रखा जाना चाहिए। इसमें पारदर्शिता भी होनी चाहिए।

6. समय से निपटें कानूनी विवाद

वक्फ में सबसे बड़ी समस्या है कि बड़ी तादाद में इसकी संपतियां कानूनी पचड़ों में फंसी हुई हैं। किसी भी कानूनी मामले को एक निश्चित समय के भीतर सुलझाया जाना चाहिए, जो तीन महीने से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों को तीन महीने से ज्यादा खींचने की कोई जरूरत नहीं है।

7. कठोर ऑडिट

सभी वक्फ बोर्डों को CAG या किसी ऐसी ही संस्था के ऑडिट से गुजारा जाना चाहिए। अगर बाकी सभी संस्थाओं को ऑडिट से गुजरना पड़ता है, तो वक्फ के लिए नियम अलग नहीं होने चाहिए। इससे पारदर्शिता भी आएगी और जिम्मेदारी तय करने में भी आसानी रहेगी।

8. विदेशी फंडिंग की करें जाँच

सरकार की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति वक्फ बोर्ड को दान देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा उन NGO या विदेशी संस्थाओं के दान देने पर भी रोक लगाई जानी चाहिए जो अपने हित पूरे करने के लिए पैसा भेजती हैं।

9. अब जमीन पर कब्जा करने की कोई गुंजाइश नहीं

सार्वजनिक, सांस्कृतिक, निजी और सरकारी संपत्तियों को वक्फ बता देने की शक्ति को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए। अगर किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करना ही है, तो उसे एक कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए, जिसमें हर कदम पर अलग-अलग विभागों द्वारा कड़ी निगरानी की जानी चाहिए। इससे जमीन पर अवैध कब्जे की संभावना कम हो सकेगी। किसी भी सम्पत्ति को वक्फ घोषित करना मात्र एक चेक भरने जैसा नहीं होना चाहिए।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है, इस लिंक पर क्लिक कर आप विस्तार से इसे पढ़ सकते हैं)

कोलकाता के अस्पताल में डॉक्टर की रेप के बाद कर दी हत्या, पर बंगाल पुलिस सबूत दबाने में लगी रही: पीड़ित परिजनों का दावा, पिता बोले- हमारा सब कुछ खत्म हो गया

आर जी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुई रेप और हत्या की घटना में अब महिला डॉक्टर के परिजनों ने पुलिस पर सबूतों को दबाने का आरोप लगाया है। परिजनों ने जादवपुर में बिटिया के लिए आयोजित प्रदर्शन के बीच राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए ट्रेनी डॉक्टर की मौसी ने कहा कि पुलिस और प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पूछा, “आखिर क्यों वो हमेशा सबूतों को दबाने के लिए तैयार रहते हैं? क्यों उनके माता-पिता को 3-4 घंटे शव देखने में लगे? क्यों उन्हें सेमिनार हॉल तक में जाने नहीं दिया?”

उन्होंने कहा, “सौ से ज्यादा लोग कमरे में आए-गए लेकिन माता-पिता को अनुमति नहीं मिली अंदर जाने की। एक महीना हो गया है। क्यों उस समय हर चीज को जल्दी-जल्दी निपटाया गया? अगर पुलिस-प्रशासन ही ऐसी हरकत करेंगे तो फिर हम किसके पास जाएँगे?”

मृतिका की मौसी ने कहा कि वो उन जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में हैं जो अपनी साथी के लिए आवाज उठा रहे हैं और इस प्रदर्शन को न्याय मिलने तक जारी रखने की बात कर रह रहे हैं।

वहीं उनके पिता ने कहा, “उस घटना ने हमारा सब कुछ खत्म कर दिया। सिर्फ एक दिन में, हमारी जिंदगी, हमारे सपने सब तबाह हो गए। बस उम्मीद है कि जूनियर डॉक्टरों के जरिए समर्थन मिलेगा जो हमारी बेटी के लिए न्याय माँग रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “कृपया मेरे साथ तब तक आप लोग खड़े रहें जब तक कोई सॉल्यूशन न निकले। हमारा दिल आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों के साथ है। आपकी आवाजें हमें मजबूत करती हैं। आप घटना के बाद बिखर गए थे।”

बता दें कि आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर के हत्या के मामले में इससे पहले परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने चुप रहने के लिए पैसे देने का प्रयास किया था। हालाँकि उन्होंने वो पैसे लेने से मना कर दिए। वहीं मृतिका के चाचा ने कहा था कि पुलिस ने उन लोगों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाने के प्रयास भी किए थे।

पप्पू नहीं हैं राहुल गाँधी, इतनी ‘गहरी सोच’ कि कई बार समझना मुश्किल होता है: अब सैम पित्रोदा को कॉन्ग्रेस नेता में ‘रणनीतिकार’ दिखे, स्वरा भास्कर ने भी पाया था ‘इंटेलिजेंट’

अमेरिका के टेक्सास में आयोजित एक कार्यक्रम में गाँधी परिवार के पूर्व सलाहकार सैम पित्रौदा ने मंच पर चढ़कर राहुल गाँधी की तारीफों के पुल बाँधे। इस दौरान उन्होंने लोगों को समझाया कि आखिर क्यों राहुल गाँधी को ‘पप्पू’ नहीं कहा जाना चाहिए।

उन्होंने राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए कहा, “राहुल गाँधी का एजेंडा कुछ बड़े मुद्दों को संबोधित करना है। मैं आपको बता दूँ कि वह ‘पप्पू’ नहीं हैं, वह उच्च शिक्षित हैं, वह किसी भी विषय पर गहरी सोच रखने वाले रणनीतिकार हैं और कई बार उन्हें समझना बहुत मुश्किल होता है।।”

सैम पित्रोदा ने आगे कहा कि राहुल गाँधी की सोच का कोई तोड़ नहीं है। उनके पास एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसको गलत दिखाने के लिए भाजपा ने करोड़ों रुपए खर्च किए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राहुल के खिलाफ गलत दृष्टिकोण बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी कॉन्ग्रेस समर्थक ने इस तरह मंच से राहुल गाँधी के लिए पप्पू शब्द का इस्तेमाल किया हो। इससे पहले स्वरा भास्कर ने भी राहुल गाँधी के लिए पप्पू शब्द का इस्तेमाल किया था।

इंडिया टुडे से बात करते हुए स्वरा भास्कर ने कहा था, “मुझे नहीं पता कि इस तरह की तुलना जायज होगी, लेकिन मुझे राहुल गाँधी की याद आ रही है। उन्हें हर कोई पप्पू कहने लगा। इसके कारण धीरे-धीरे लोगों को यकीन होने लगा कि वे पप्पू हैं। लेकिन मैं उनसे मिली हूँ। वे बेहद ही बुद्धिमान और मुखर इंसान हैं। इसी तरह बॉलीवुड का भी पप्पूकरण कर दिया गया है।”

दिलचस्प बात ये है कि पित्रौदा और भास्कर के इन बयानों के कारण राहुल गाँधी की तारीफ की जगह उनका और भी मखौल उड़ता है। लोग कहते हैं कि इस तरह के बयान देकर तो कॉन्ग्रेसी सिर्फ ये बता रहे हैं कि वो भी मानते हैं कि लोग राहुल गाँधी को क्या समझते हैं और उन्हें सिर्फ उनका बचाव करना है।

मस्जिद के नाम पर ढाई एकड़ जमीन कब्जाई, छत्तीसगढ़ सरकार ने बुलडोजर से किया समतल: मजार से लेकर अवैध दुकान तक सब साफ, भिलाई-रायपुर हाइवे पर था अतिक्रमण

छत्तीसगढ़ के भिलाई में नगर निगम की टीम ने मस्जिद के अवैध अतिक्रमण को जमींदोज कर दिया। करबला कमिटी ने धार्मिक कार्य के लिए मिली जमीन को बढ़ा कर दुकानें, मैरिज हाल और मजार बना ली थी। नगर निगम की टीम ने सारा कब्जा हाई कोर्ट के आदेश के बाद हटा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भिलाई के जोन कार्यालय के पास बनी इस मस्जिद पर यह कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई के लिए रविवार (8 अगस्त, 2024) को नगर निगम का अमला यहाँ पहुँचा। इसके साथ पुलिस बल भी मौजूद था। इस जगह का प्रबन्धन करने वाली करबला कमिटी ने नोटिस के बाद भी यहाँ से अपना कब्जा नहीं हटाया था।

इसके बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुँच कर मस्जिद की चारदीवारी, पाँच दुकानें, एक मैरिज हाल और स्वागत गेट को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। नगर निगम ने इस कार्रवाई से तीन दिन पहले एक नोटिस भेज दिया था।

आरोप है कि वर्ष 1984 में मस्जिद के निर्माण के लिए लगभग 800 स्क्वायर फीट जमीन सरकार की तरफ से भिलाई-रायपुर हाइवे पर मिली थी। इसे यह जमीन विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) की तरफ से दी गई थी। हालाँकि, कमिटी ने इस जमीन का दुरुपयोग करते हुए 800 स्क्वायर फीट की जगह ढाई एकड़ जमीन पर अतिक्रमण कर लिया।

कमिटी ने यहाँ मस्जिद के बाद एक मजार, एक मैरिज हाल और पाँच दुकानें बना ली। इसके अलावा एक मजार भी बनाई गई थी। इन सभी पर नगर निगम का बुलडोजर चल गया। इससे पहले सामने आई शिकायत में बताया गया था कि मस्जिद के पास में ही नगर निगम का कार्यालय है, उसकी जमीन पर तक कब्जा हो गया।

नगर निगम की टीम ने यह कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश के बाद की है। हाई कोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि जल्द से जल्द यह कब्जा खाली करवाया जाए। इसके बाद भिलाई नगर निगम की टीम एक्शन में आई। भिलाई नगर निगम ने कहा कि वह मस्जिद के आसपास जितने भी गैर धार्मिक ढाँचे हैं, उन्हें तोड़ देंगे।

करबला कमिटी ने नगर निगम की कार्रवाई का विरोध किया और दावा किया कि उनका यहाँ कब्जा 1957 से है। इस मामले में शिकायत भाजपा नेता बीजेपी नेता एसके मोबिन उर्फ बाबर ने की थी। उन्होंने कहा था कि कि मुस्लिम समाज के लोगों ने सैलैनी बाबा की मजार से लगी सुपेला-भिलाई जीई रोड की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।

बाबर ने बताया था कि करबला कमेटी भिलाई के अध्यक्ष गुलाम सैलानी ने दरगाह की आड़ में करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर दुकानें बनवा दी हैं और इसका किराया वसूलता है। इससे नगर निगम को भी नुकसान हो रहा है। बाबर ने कहा कि यहाँ मजार तो बहुत पहले से है, लेकिन बाकी के निर्माण कार्य कब्जा करके किए गए हैं। 

गैस सिलेंडर, माचिस-बारूद, पेट्रोल की बोतल… कानपुर में ट्रेन हादसे की पूरी स्क्रिप्ट थी तैयार, इमरजेंसी ब्रेक ने बचाया: रेलवे लाइन पर साजिश किसकी?

देश भर में ट्रेनों को निशाना बनाने का सिलसिला लगातार जारी है। अब उत्तर प्रदेश के कानपुर में पटरी पर सिलेंडर रख कर ट्रेन को पलटने की साजिश सामने आई है। कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस पटरी पर रखे गए LPG से सिलेंडर से टकराई और रुक गई। इस हादसे में जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है।

जानकारी के अनुसार, हरियाणा के भिवानी से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जा रही कालिंदी एक्सप्रेस (14723) कानपुर में अनवरगंज-कासगंज रूट पर रविवार (8 अगस्त, 2024) को पटरी पर रखे सिलेंडर से टकराई, इसके बाद तेज धमाका हुआ। लोको पायलट ने इसके बाद आपातकालीन ब्रेक लगा दिए। इससे ट्रेन जहाँ की तहाँ रुक गई।

लोको पायलट ने बताया कि उसे पटरी पर कोई संदिग्ध चीज दिखी लेकिन जब तक वह ब्रेक लगाए तब उससे टक्कर हो गई और धमाके की आवाज हुई। मौके पर पहुँची पुलिस को जाँच में यहाँ से LPG सिलेंडर मिला। इसके आसपास एक पेट्रोल की बोतल और माचिस भी मिली।

मौके पर से एक झोला भी मिला, बताया गया है कि इसमें बारूद थी। इस घटना के बाद काफी देर ट्रेन रुकी रही। पुलिस और RPF ने जाँच के बाद ट्रेन को रवाना किया। मामले की जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। पुलिस ने बताया है कि सिलेंडर को ट्रेन की पटरी पर ही रखा गया था जो हादसे के दौरान रगड़ खा गया।

इस मामले में कानपुर में कानून व्यवस्था के ACP हरीश चंदर ने बताया ,”रेलवे प्रशासन द्वारा बताया गया कि भिवानी प्रयागराज एक्सप्रेस इस रूट से गुजर रही थी, पटरी पर संदिग्ध वस्तु देख कर ड्राइवर ने ब्रेक लगाए। ट्रेन सिलेंडर से टकराई है। ट्रेन इसके बाद काफी देर तक रुकी रही। इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया। हम लोग घटना की जाँच बारीकी से कर रहे हैं। मौके पर अधिकारी और फॉरेंसिक टीम मौजूद है। घटनास्थल पर एक सिलेंडर और आपत्तिजनक सामान मिला है। घटना की समीक्षा की जा रही है। इसमें कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”

ट्रेन पलटने की साजिश के सवाल पर पुलिस ने बताया कि उसकी जाँच सभी एंगल से चल रही है। कानपुर में हुए इस हादसे के बाद इस रूट की कई और ट्रेन प्रभावित हुईं। अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। स्थानीय पुलिस मामले में जाँच कर रही है। ट्रेनों का आवागमन सामान्य तरीके से जारी है।

बीते कुछ समय में कई ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनमें जानबूझ कर ट्रेन की पटरी पर ऐसे सामान रखे गए जिनसे ट्रेन पलट सकती थी। इससे पहले 17 अगस्त, 2024 को कानपुर में ही साबरमती एक्सप्रेस के साथ भी दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। लोको पायलट ने बताया था कि किसी चीज से यह ट्रेन टकराई, जिसके बाद हादसा हुआ।

कानपुर में हुए इस हादसे में पटरी पर वस्तु रखे जाने की बात अश्विनी वैष्णव ने भी की थी। बाद में सामने आया था कि पटरी पर लोहे का टुकड़ा रखा गया था। कानपुर के अलावा और भी जगहों से ऐसे ही प्रयास सामने आए हैं। राजस्थान के पाली में भी पटरी पर दो दिन लगातार सीमेंट के बोल्डर रखे गए थे।

इसके अलावा अलीगढ़ में पटरी पर एक मोटरसाइकिल का पहिया रखा गया था। इस मामले में अफसान नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। यह सभी मामले तब सामने आए हैं जब पाकिस्तानी आतंकी फरहतुल्लाह गोरी भारत में ट्रेन और बाकी इन्फ्रा को निशाने पर लेने की बात कर रहा है।

पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने यह काम स्लीपर सेल से करने को कहा है। आतंकी गोरी ने कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) आतंक की कमर तोड़ रहा है। इसका जवाब देने के लिए उसने देश भर में इन्फ्रा पर हमला करने को कहा है। इस संबंध में एक वीडियो सुरक्षा एजेंसियों को मिला है।

सुरक्षा एजेंसियों को मिले वीडियो में गोरी बता रहा है कि कैसे ट्रेनों में अलग-अलग तरीके से धमाके किए जा सकते हैं। वह इसके लिए प्रेशर कुकर जैसी चीजों से बम बनाने का भी आईडिया दे रहा है। गोरी अभी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की शह पर वहीं रह रहा है और भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है।

सूरत में गणपति पंडाल पर मुस्लिम नाबालिगों ने किया पथराव, एक्शन लेने पर पुलिस पर भी हमला: सैंकड़ों हिंदू विरोध में उतरे, अब तक 27 गिरफ्तार

गुजरात के सूरत के लालगेट इलाके में गणेश भगवान के मंडप पर पथराव की घटना प्रकाश में आई। आरोप है कि इस घटिया हरकत को कुछ मुस्लिम समुदाय के नाबालिगों द्वारा अंजाम दिया गया। घटना के बाद जब हजारों हिंदू विरोध में सड़कों पर उतरे तो पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में कुछ गिरफ्तारियाँ कीं। हालाँकि इन गिरफ्तारियों से पहले मुस्लिम बहुल इलाके में उन्हें भी पत्थरों से निशाना बनाया गया

जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला लालगेट के वरियाली बाजार का है। यहाँ कुछ मुस्लिम समुदाय के नाबालिगों द्वारा गणेश मंडप पर पथराव किया गया। हिंदू समुदाय को जब ये सूचना मिली तो वो सबमें आक्रोश फैल गया। इस दौरान लागेट थाने का घेराव भी किया गया।

बताया जा रहा है कि पथराव की घटना सबसे पहले 7 सितंबर को हुई थी और उसके बाद अगले दिन यानी 8 सितंबर को भी हुई। इसी के बाद हिंदुओं ने आपा खोया। हालाँकि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए कदम उठाए और उन्हें पकड़ने इलाके में भी गई। हालाँकि पुलिस को देखते ही आरोपितों के इलाके में पथराव होने लगा। पुलिस ने मशक्कत के बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

घटना के बारे में पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने कहा, “इससे ​​पहले यहाँ गणेश मंडप पर पथराव हुआ था। यहाँ मौजूद नाबालिग आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है, फिलहाल पुलिस की जाँच जारी है। शांति स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा। सभी आरोपितों का चेहरा सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले पर विधायक कांति बलार ने हिंदू युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आपके साथ हूँ। भारतीय जनता पार्टी आपके साथ है। हम इस तरह बार-बार पथराव बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिन लोगों को पकड़ लिया गया है उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।”

वहीं इस मामले पर गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने संज्ञान लिया। उन्होंने कहा, “जैसा कि मैंने वादा किया था, सूरज उगने से पहले हमने पत्थरबाजों को पकड़ लिया है! 27 पत्थरबाज गिरफ्तार किए गए हैं। सीसीटीवी, वीडियो विजुअल्स, ड्रोन विजुअल्स और अन्य तकनीकी निगरानी कार्य अभी भी जारी है। सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।हमारी टीमें पत्थरबाजों की पहचान करने और उन्हें सजा दिलाने के लिए पूरी रात काम कर रही थी और अभी काम रही है।”

बता दें कि गणपति पंडाल में हुए पथराव की घटना के बाद गिरफ्तार हुए आरोपितों को लेकर बताया जा रहा है कि उनकी उम्र 15 साल से अधिक नहीं है। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है और साथ ही वो लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं जिन्होंने भड़काऊ नारेबाजी की थी।

राहुल गाँधी और MK स्टालिन पहले से अमेरिका में, अब DK शिवकुमार ‘निजी यात्रा’ पर हो रहे रवाना: ओवैसी और अब्दुल्ला से मिल चुके हैं अमेरिकी राजनयिक

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी 3 दिवसीय यात्रा पर शनिवार (8 सितंबर, 2024) को अमेरिका पहुँचे। इसके तुरंत बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के सीनियर नेता डी के शिवकुमार भी अमेरिका के लिए निकल रहे हैं। ऐसे में अब चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि ये दोनों नेता अमेरिका के शीर्ष नेताओं से कुछ जरूरी मुद्दों पर मुलाक़ात और बातचीत करने गए हैं। हालाँकि अब डी के शिवकुमार ने इन खबरों का खंडन किया है। उन्होंने अपनी यात्रा को निजी और पारिवारिक बताया है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने शनिवार (8 सितंबर) को अपने X हैंडल से सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि उनकी इस यात्रा के बारे में तमाम तरह की अफवाहें सुनाई दे रही है। बकौल डी के शिवकुमार, यह यात्रा पूरी तरह से निजी और पारिवारिक है जिसका किसी विभागीय टूर या राजनैतिक उद्देश्य से कोई भी लेना-देना नहीं है। शिवकुमार ने लोगों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की भी अपील की है। कॉन्ग्रेस नेता ने यह ट्वीट तेलगू और अंग्रजी दोनों भाषाओं में किया है।

बताते चलें कि डी के शिवकुमार से पहले कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गाँधी अमेरिका की यात्रा पर गए है। यहाँ वो 3 दिन समय बिताएँगे। इस दौरान राहुल गाँधी ने कहा है कि वो भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में प्रयास करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने पिछले हफ्ते कहा था कि राहुल अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर नहीं आ रहे हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद भवन) में विभिन्न लोगों से ‘व्यक्तिगत तौर’ पर बातचीत करने का मौका मिलेगा। यहाँ पर राहुल गाँधी पत्रकारों से भी रूबरू होंगे।

गौरतलब है कि हाल ही में बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ था। इस तख्तापलट में शेख हसीना सरकार के खिलाफ न सिर्फ बांग्लादेश के कट्टरपंथी बल्कि सेना व पुलिस से जुड़े तमाम लोगों ने बगावत कर दी थी। मुश्किल समय में शेख हसीना को भारत में शरण मिली थी। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के कई जानकार इस तख्तापलट में अमेरिका का हाथ होने का इशारा करते हैं। हाल ही में अमेरिकी राजनयिकों ने हैदराबाद में AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात की है। जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

जिस मौलाना का समर्थन करती है ‘भीम आर्मी’, उसी ने दलित महिला से किया बलात्कार: पहले फिरदौस ने ‘हृदेश’ बन फाँसा, फिर नूर अहमद अज़हरी के साथ रेप का बनाया वीडियो

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मुस्लिम समुदाय के 2 युवकों पर एक दलित वर्ग की शादीशुदा महिला से रेप का आरोप लगा है। आरोपितों में एक मौलाना भी शामिल है जिसका नाम नूर अहमद अज़हरी है। दूसरे आरोपित का नाम फिरदौस है। आरोपितों ने पीड़िता का अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल किया और जान से मार डालने की धमकी भी दी। शनिवार (7 सितंबर, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। ऑपइंडिया ने अपनी पिछली रिपोर्ट में नूर अहमद अज़हरी के काले कारनामों का जिक्र किया था। मौलाना नूर अहमद अज़हरी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का पदाधिकारी है।

यह मामला पीलीभीत जिले के थाना क्षेत्र पूरनपुर का है। यहाँ शनिवार को जाटव समुदाय की एक महिला ने खुद को हिन्दू बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से है। उनका पति दिल्ली में रह कर मजदूरी कर के परिवार पालता है। 8 महीने पहले महिला के जेठ के साथ एक युवक उनके घर आया था। वह युवक असल में फिरदौस था लेकिन उसने अपना परिचय हृदेश के तौर पर दिया था। हृदेश बना फिरदौस पीड़िता से फोन पर बातें करने लगा।

शिकायत में आगे बताया गया है कि कुछ दिनों की बातचीत में ‘हृदेश’ ने पीड़िता को अपने जाल में फँसा लिया। इसी के साथ उसने विश्वास में ले कर पीड़िता से कई बार रेप किया। कई बार बलात्कार की वजह से लगभग 4 महीने पहले पीड़िता की तबियत खराब हो गई। तब ‘हृदेश’ (फिरदौस) ने पीड़िता की बीमारी ठीक करवाने के बहाने उसे झाड़-फूँक करने वाले एक मौलाना से मिलवाया। यह मौलाना नूर अहमद अहजहरी था जो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का उत्तर प्रदेश में पदाधिकारी है।

फिरदौस पीड़िता को अपने साथ पूरनपुर इलाके के खानका लाया। यहाँ मौलाना नूर अहमद अज़हरी ने पीड़िता पर भूत-प्रेत का साया बताते हुए पूरी रात बलात्कार किया। मौलाना द्वारा रेप के दौरान फिरदौस ने साजिशन पीड़िता की अश्लील वीडियो बना ली। इसी वीडियो को वायरल करने का डर दिखाते हुए फिरदौस ने पीड़िता से कई बार बलात्कार किया। शनिवार (7 सितंबर) को फिरदौस पीड़िता को फिर से पूरनपुर लाया। वह पीड़िता पर होटल में चलने का दबाव बनाने लगा।

जब पीड़िता ने इनकार कर दिया तो फिरदौस ने उसे जान से मार डालने की धमकी देते हुए पीटा। इसी दौरान उसने खुद को हृदेश नहीं बल्कि मुस्लिम बताया। पीड़िता जैसे-तैसे हृदेश के चंगुल से निकल कर पुलिस स्टेशन पहुँची। यहाँ उसने शिकायत दर्ज करवाते हुए नूर मोहम्मद अज़हरी और फिरदौस पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने इन दोनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस द्वारा मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मौलाना पर कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय बजरंग दल ने रविवार को प्रदर्शन भी किया था।

इसी हफ्ते थाना घेर कर काटा था हंगामा

बताते चलें कि मौलाना फिरदौस अज़हरी ने इसी सप्ताह पूरनपुर थाने पर भीड़ जुटा कर हंगामा किया था। यह हंगामा चंगेज खान नाम के एक युवक के समर्थन में किया गया था जिसका हिन्दू संगठन के सदस्यों से झगड़े का वीडियो वायरल हुआ था। चंगेज खान OBC वर्ग की एक हिन्दू महिला के घर में घुस कर यौन शोषण का आरोपित भी है। इसी चंगेज के समर्थन में भीड़ जुटाते हुए मौलाना नूर मोहम्मद अज़हरी ने हिन्दू संगठनों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था। साथ ही उसने भविष्य में और बड़े हंगामे की धमकी भी दी थी। ‘भीम आर्मी’ ने भी तक इस हंगामे में मौलाना अज़हरी के सुर में सुर मिलाए थे।