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मौलाना ने हिन्दू महिला को सुनाया चारपाई पर नंगे लेटने का फरमान, बीमार बच्चे के लिए ताबीज बनवाने गई थी मदरसा: बलात्कार की कोशिश, दी गंदी गालियाँ

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के एक मदरसे में एक हिन्दू महिला से रेप की कोशिश किए जाने का मामला सामने आया है। इस करतूत का आरोप मदरसे के मौलाना पर लगा है जिसका नाम मंसूर है। मौलाना ने झाड़फूंक से इलाज के नाम पर अन्धविश्वास फैला रखा था। पीड़िता अपने बीमार बच्चे की ताबीज बनवाने के लिए मदरसे में गई थी। पुलिस ने मौलाना मंसूर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना मंगलवार (3 सितंबर, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना अमरोहा जिले के थानाक्षेत्र गजरौला की है। यहाँ जलालनगर इलाके में एक मदरसा है जिसमें मौलाना मंसूर छात्रों को पढ़ाता है। वह झाडफ़ूंक के नाम पर लोगों में अन्धविश्वास भी फैला रहा था। इन्ही बातों में एक हिन्दू महिला भी आ गई। उसका बेटा बीमार था जिसके झाड़-फूँक से इलाज के लिए पीड़िता मंगलवार (3 सितंबर) को मदरसे में चली गई। यहाँ मौलाना ने पीड़िता को बताया कि उसके बेटे पर जिन्न का साया है।

महिला ने इलाज पूछा तो मौलाना ने उसे 7 तरह की मिठाइयाँ लाने के लिए कहा। इसी के साथ मंसूर ने एक जोड़ी लौंग और जायफल भी मँगवाया। जब पीड़िता ये सब सामान ले आई तो मौलाना ने उसे कपड़े उतार कर नंगे ही चारपाई पर लेटने का फरमान सुनाया। मौलाना की इस बात पर पीड़िता को शक हुआ। उसने कपड़े उतारने से मना कर दिया तो मौलाना भड़क गया। आरोप है कि मंसूर ने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए जान से मार डालने की धमकी भी दी।

खुद को फँसता देख कर महिला ने 112 नंबर डायल कर के पुलिस बुला ली। मौके पर पहुँच कर पुलिस ने मौलाना को हिरासत में ले लिया। मंसूर के खिलाफ महिला की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई और मौलाना को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘कैलेसिया सभा’ के नाम पर जुटाता था हिन्दुओं को, लालच दे कर बनाता था ईसाई: पादरी संजीव सीतापुर पुलिस की हिरासत में

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से ईसाई धर्मांतरण का मामला सामने आया है। यहाँ संजीव कुमार नाम के व्यक्ति को पादरी बताते हुए हिन्दू संगठनों ने उस पर हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप लगाया है। धर्मान्तरण के लिए संजीव लोगों को ‘कैलेसिया’ नामक सभा के बहाने एकजुट करता था। हिन्दू संगठनों ने इस सभा में पहुँच कर हंगामा किया। पुलिस ने संजीव को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना शनिवार (7 सितंबर 2024) की है।

यह मामला सीतापुर जिले के थानाक्षेत्र सदरपुर का है। शनिवार को यहाँ राष्ट्रीय बजरंग दल के जिला उपाध्यक्ष राहुल गुप्ता ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में राहुल ने बताया कि उनको गाँव देवरिया खुर्द में संजीव कुमार नाम के एक धर्मांतरित ईसाई द्वारा हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन की सूचना मिली थी। संजीव सीतापुर के मानपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। आरोप है कि खुद धर्म परिवर्तन के बाद वह अन्य हिन्दुओं को भी ईसाई बनाने के काम पर लगा हुआ है। इसी सूचना पर राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ता गाँव देवरिया खुर्द पहुँच गए।

शिकायत में राहुल गुप्ता ने आगे बताया कि सूचना सही पाई गई और गाँव में संजीव हिन्दुओं के धर्मांतरण में व्यस्त मिला। वह एक घर में सभा जुटा कर लोगों को बहला-फुसला रहा था। सभा स्थल पर शिकायतकर्ता राहुल गुप्ता और उनके सहयोगियों ने हंगामा किया। हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुँची। मुख्य आरोपित संजीव को हिरासत में ले लिया गया है जिस से पूछताछ की जा रही है। आरोपित पर उत्तर प्रदेश धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

जिस घर में धर्मांतरण की साजिश का आरोप है वहाँ की दीवारों पर ईसा मसीह के चित्र लगे हुए हैं। चित्रों के साथ दीवारों पर ईसाई साहित्य से जुड़ी कई अन्य बातें भी कागजों पर लिखी मिली। इस दौरान हिन्दू संगठन के सदस्यों और संजीव के समर्थकों में नोकझोंक भी हुई। राष्ट्रीय बजरंग दल के सीतापुर पदाधिकारी आशुतोष ने वीडियो जारी कर के बताया कि लोगों को ईसाई मत में लाने के लिए संजीव कैलेसिया नाम की सभा जुटाता था।

आशुतोष का दावा है कि कथित प्रार्थना स्थल पर बाइबिल, अन्य ईसाई सहित और एक तरल पदार्थ भी मिला है। उन्होंने सभा के आयोजक संजीव को पादरी बताया है। दावा है कि संजीव को हिन्दू संगठन से जुड़े लोग ही पकड़ कर पुलिस को सौंपा था। आशुतोष ने आगे बताया कि ये उनके द्वारा अब तक एक दर्जन से अधिक कैलेसिया सभाएँ पकड़ी गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले को देखने का अनुरोध करते हुए राष्ट्रीय बजरंग दल ने पुलिस से भी सक्रियता की उम्मीद जताई।

समाजवादी पार्टी के नेता ने किया रेप, वीडियो भी बनाया: नवाब यादव और मोईद खान की तरह वीरेंद्र पाल को भी बचाएँगे सपा सुप्रीमो अखिलेश?

समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम यादव ने ‘लड़कों से गलती हो जाती है…’ का बयान क्या दिया था, उनकी पार्टी के नेताओं ने इसे अपराध करने का लाइसेंस मान लिया। मोईद खान और नवाब यादव के बाद समाजवादी पार्टी के एक और नेता के खिलाफ रेप का मामला दर्ज हुआ है। सपा नेता वीरेंद्र बहादुर पाल के खिलाफ एक महिला वकील ने मुकदमा दर्ज कराया है।

महिला उत्तर प्रदेश के मऊ की रहने वाली है और वीरेंद्र पाल की पूर्व सहयोगी है। उसने थाने में रविवार (8 सितंबर 2024) को मुकदमा दर्ज करवाया है। वीरेंद्र पाल के पिता दयाराम पाल भी सपा के नेता रहे हैं। वहीं, वीरेंद्र पाल सेंट्रल मऊ बार एसोसिएशन का दो बार अध्यक्ष रह चुका है। इतना ही नहीं, वह समाजवादी पार्टी का प्रदेश सचिव भी रह चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने मऊ के नगर कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उसने कहा है कि वीरेंद्र पाल ने उसके पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिला दिया। इसके बाद उसके साथ बलात्कार किया। उसने यह भी बताया कि समाजवादी पार्टी के नेता ने इस कृत्य का अश्लील फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया है।

महिला वकील ने बताया कि आरोपित उसका फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पिछले एक साल से उसका रेप कर रहा था। बकौल पीड़िता, वीरेंद्र पाल उसकी मर्जी के खिलाफ उसे लखनऊ लेकर गया था। महिला वकील की शिकायत पर पुलिस ने धारा 115(2), 351(2), 352, 123 और 64(2)(m) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।

इस मामले पर मऊ के सीओ अंजनी कुमार पांडेय ने बताया, “एक पीड़िता ने वीरेंद्र बहादुर पाल के खिलाफ थाना कोतवाली नगर में दुष्कर्म और मारपीट के आरोप में तहरीर थी। इसको लेकर बीते 7 सितंबर को केस दर्ज कर लिया गया है। शिकायत में महिला ने बताया कि आरोपित पेशे से अधिवक्ता है।” पुलिस का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद से आरोपित फरार है।

पीड़ित महिला ने यह भी दावा किया है कि शुरू में स्थानीय पुलिस उसकी शिकायत दर्ज नहीं कर रही थी। उसने जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई तब जाकर उसकी शिकायत पर कार्रवाई हुई। मऊ पुलिस ने अब वीरेंद्र पाल को पकड़ने के लिए टीम बनाई है।

अयोध्या और कन्नौज के बलात्कारी सपाई हो चुके हैं गिरफ्तार

इससे पहले अयोध्या और कन्नौज में सपा के दो नेताओं के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज हुआ है। दोनों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। अयोध्या के पूरा कलंदर थाना इलाके में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के बाद मोईद खान और उसके सहयोगी ने लड़की का अश्लील वीडियो बना लिया था। इसके जरिए उसे ब्लैकमेल करके बारी-बारी से उसका रेप करते रहे।

जब इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब निषाद समाज से आने वाली पीड़िता दो महीने की गर्भवती थी। पीड़िता के परिजनों ने पुलिस से इस मामले की शिकायत की। इस मामले में पुलिस ने समाजवादी पार्टी के भदरसा नगर अध्यक्ष मोईद खान और उसकी बेकरी पर काम करने वाले राजू को गिरफ्तार किया। मोईद की अवैध बेकरी को बुलडोजर से ढहा दिया गया है।

ऐसा ही एक मामला कन्नौज से सामने आया है। यहाँ सपा नेता एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव पर एक नाबालिग ने रेप का आरोप लगा है। नाबालिग ने आरोप लगाया था कि उसे नौकरी देने के बहाने बुलाकर नवाब ने उसका रेप किया। बीते 11 अगस्त की रात के इस मामले में पुलिस ने नवाब को गिरफ्तार कर लिया है।

नवाब का बचाव करते हुए अखिलेश यादव ने डीएनए जाँच कराने की माँग की थी। डीएनए जाँच में पीड़िता का नवाब के साथ सैंपल मैच हो गया है। पुलिस ने नवाब के करीबी रिश्तेदार के कोल्ड स्टोरेज की अवैध दीवार को भी बुलडोजर से ढहा दिया है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अखिलेश यादव की सांसद पत्नी डिंपल यादव का नवाब प्रतिनिधि भी रह चुका है।

ढाबे में थूक-थूक कर रोटी बना रहा था यामीन का बेटा चाँद, वीडियो वायरल होने के बाद यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

खाने-पीने की चीजों पर थूकने का एक और मामला उत्तर प्रदेश के नोएडा से सामने आया है। यहाँ के वायरल हो रहे एक वीडियो में यामीन का बेटा चाँद एक ढाबे पर बन रही रोटियों पर थूकता नजर आ रहा है। चाँद इसी ढाबे पर खाना बनाने के लिए कारीगर के तौर पर नियुक्त था। शनिवार (7 सितंबर, 2024) को पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज कर ली है। चाँद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह घटना नोएडा के थानाक्षेत्र रबूपुरा की है। यहाँ शनिवार को सब इंस्पेक्टर हरेंद्र कुमार ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो मिला है। यह वीडियो रबूपुरा मार्किट में ही A-One ढाबे का है जो शुक्रवार (6 सितंबर) को रात लगभग 8:30 पर बनाया गया है। वीडियो में यामीन का बेटा चाँद दिखाई दे रहा है। रोटियाँ बनाते हुए चाँद उन पर थूक रहा है। चाँद की इस करतूत की सोशल मीडिया पर भी काफी आलोचना हो रही है।

वीडियो में चाँद एक ही नहीं बल्कि कई बार अलग-अलग रोटियों पर थूकता दिख रहा है। अपनी शिकायत में दरोगा हरेंद्र ने रोटियों पर थूक रहे चाँद की करतूत को कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन बताया है। उन्होंने आशंका जताई है कि चाँद की हरकत से संक्रामक बीमारी फैल सकती है जो मानव जीवन के लिए खतरा बन सकती है। पुलिस ने इस तहरीर पर चाँद को नामजद करते शनिवार को हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 (बी), 271 और 271 के तहत दर्ज की गई है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। चाँद मूल रूप से नोएडा के ही रबूपुरा का रहने वाला है। ग्रेटर नोएडा के ADCP अशोक कुमार ने इस घटना पर बयान दिया है। उन्होंने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। बताते चलें कि दुकानों का नाम A-One अधिकतर मुस्लिम वर्ग के लोग रखते हैं। बोलचाल की भाषा में इसे A (अल्लाह) One (एक ही है) भी कहा जाता है।

उत्तराखंड के कई गाँवों में मुस्लिमों की एंट्री बैन, ग्रामीणों ने बोर्ड लगा कर जारी की चेतावनी: घर की इज्जत बचाने के लिए फैसला, विरोध में उतरे वामपंथी-इस्लामी

उत्तराखंड के कुछ गाँवों में स्थानीय निवासियों ने मुस्लिमों की इंट्री बैन करने का फैसला किया है। तमाम ग्रामीणों ने एकमत हो कर गाँव के बाहर इस आशय का बोर्ड लगा दिया है। बोर्ड में मुस्लिम फेरीवालों को गाँव में न घुसने की हिदायत दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोई बाहरी मुस्लिम वहाँ सामान बेचने आया तो उस से जुर्माना वसूला जाएगा। रविवार (8 सितंबर, 2024) से यह बोर्ड सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालाँकि स्थानीय निवासियों ने अपनी सफाई में इसे सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया निर्णय बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चमोली जिले के नंदप्रयाग इलाके में एक नाबालिग हिन्दू लड़की से मुस्लिम समुदाय के सैलून संचालक द्वारा की गई अश्लील हरकतों के बाद लोगों में काफी गुस्सा है। अब हिन्दू संगठनों की पहल पर गाँव स्तर पर लोगों ने बाहर से आने वाले मुस्लिमों की इंट्री बैन करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर रुद्रप्रयाग जिले में देखा जा सकता है। यहाँ के ग्रामसभा गौरीकुंड, त्रियुगीनारायण, मेखंडा, शेरसी और नयालसू आदि में ग्रामीणों ने गाँव के बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगा कर चेतावनी जारी कर दी है।

इस बोर्ड में लाल रंग से मोटे शब्दों में हेडलाइन के तौर पर ‘चेतावनी’ लिखा हुआ है। इसके बाद गौरीकुंड ग्रामसभा के बोर्ड में लिखा, “गैर हिन्दू/रोहिंग्या मुसलमानों व फेरी वालों का गाँव में व्यापार करना/घूमना वर्जित है। अगर गाँव में कहीं भी मिलता है तो दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” इस बोर्ड में आदेश समूची ग्रामसभा द्वारा लिया जाना बताया गया है। बहरी व्यक्तियों को हिदायत देता लगभग यही बोर्ड न्यालसू, मेखंडा, त्रियुगीनारायण और शेरसी आदि ग्रामसभाओं में भी लगाया गया है।

बताया जा रहा है कि बोर्ड पर दी गई हिदायत का उल्लंघन करने वालों पर ग्रामीणों की तरफ से 5000 रुपए के जुर्माने का भी एलान किया गया है। ग्रामीणों की इस पहल का कई इस्लामी और वामपंथी हैंडलों द्वारा विरोध किया जा रहा है। आए दिन हिन्दू विरोधी पोस्ट करने वाले अली त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माँग की है कि वो बोर्ड लगाने वालों पर कार्रवाई करें। हालाँकि, ग्रामीणों ने मीडिया से बात करते हुए यह बोर्ड लगाने के पीछे की वजह स्पष्ट कर दी है।

गाँव शेरसी के एक स्थानीय निवासी ने राजसत्ता पोस्ट से बताया कि अधिकतर समय गाँव के पुरुष घरों के बाहर रह कर विभिन्न शहरों में कमाई करने चले जाते हैं जिसके बाद घरों में सिर्फ महिलाएँ रह जाती है। स्थानीय निवासी ने आगे कहा, “जिनका सत्यापन नहीं है वो गाँव में जाते हैं। उनके पास कोई परिचय पत्र नहीं है। घरों में महिलाएँ हैं। गाँव में हमारे मंदिर है जिसमें कभी ताले नहीं लगते। पूर्व में भी हमारे मंदिर में चोरी हुई है।”

गोंडाल में और स्थानीय गढ़वाल ज्वेलर्स की दुकान में ताला तोड़ कर हुई चोरी का उदहारण भी ग्रामीण द्वारा दिया गया। स्थानीय निवासी ने आगे बताया कि ऐसी घटनाओं के चलते लोग सचेत हुए हैं। बोर्ड को ग्रामीण ने जागरूकता के लिए लगा बताया है। बताया गया कि लोगों को समझाया गया है कि बिना पहचान पत्र के दिखने वाले किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ कर पुलिस के हवाले करें। ग्रामीणों ने इसे सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया सामूहिक निर्णय बताया है।

कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और बंगाल… भारत से काटने की प्लानिंग करने वाला रहमानी कौन: अलकायदा से है लिंक, देश में जड़े जमा रहा उसका संगठन ABT

बांग्लादेश की जेल से रिहा होने के तीन हफ़्ते बाद कट्टरपंथी मुहम्मद जसीमुद्दीन रहमानी ने जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की बात कही है। उसने अपने नापाक एजेंडे के लिए पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान स्थित कट्टरपंथियों से भी मदद माँगी है। रहमानी कट्टरपंथी संगठन ‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT)’ का नेता है और इस्लामी आतंकी संगठन ‘अलकायदा’ का मुखर समर्थक है।

ऑनलाइन मीडिया हाउस The Print ने शनिवार (7 सितंबर) को एक रिपोर्ट में ये खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रहमानी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन से आजादी की घोषणा करने का भी आग्रह किया था। इतना ही नहीं, उसने खालिस्तानियों के समर्थन से भारत के विघटन में सहायता करने का वादा किया था।

शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद BNP एवं जमात जैसे ट्टरपंथियों के सहयोग से बांग्लादेश में बनी मुहम्मद यूनुस सरकार द्वारा छोड़े गए रहमानी का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लेकर द प्रिंट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “अस्पताल के कमरे जैसी दिखने वाली जगह से की गई उसकी भड़काऊ टिप्पणी यूट्यूब पर पोस्ट की गई है और अब यह सोशल मीडिया पर घूम रही है।”

द प्रिंट की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

इस वीडियो में इस्लामी कट्टरपंथी मुहम्मद जसीमुद्दीन रहमानी यह कहता हुआ दिख रहा है, “मैं भारत को चेतावनी दे रहा हूँ… बांग्लादेश कोई सिक्किम या भूटान जैसा नहीं है। यह 18 करोड़ मुसलमानों का देश है… अगर आप बांग्लादेश की तरफ़ एक कदम भी बढ़ाते हैं तो हम चीन से कहेंगे कि चिकन नेक बंद कर दो।”

वीडियो में वह आगे कहता दिख रहा है, “हम सात बहनों (सेवन सिस्टर कहलाने वाले पूर्वोत्तर भारत के राज्य) से कहेंगे कि वे स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हों… कश्मीर से कहेंगे कि वह आजादी के लिए तैयार हो जाए। पाकिस्तान और अफगानिस्तान मिलकर कश्मीर को आजादी दिलाने में मदद करेंगे। हम कश्मीर की आजादी के लिए काम करेंगे।”

कट्टरपंथी रहमानी का ममता बनर्जी से विशेष आग्रह

इस्लामी कट्टरपंथी मुहम्मद जसीमुद्दीन रहमानी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा, “हम पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी से कहेंगे कि वह बंगाल को मोदी के शासन से मुक्त करें और आजादी की घोषणा करें।” उसने उन खालिस्तानी चरमपंथियों के साथ भी एकजुटता व्यक्त की, जो पंजाब को भारत से अलग करने का ख्वाब देखते हैं।

आतंकी संगठन ABT को दिल्ली पर कब्जे की उम्मीद

वीडियो में रहमानी आगे कहता है, “मैं सिखों से कहूँगा कि तुम्हारा समय आ गया है। अब आजादी का आह्वान करो। भारत के हर प्रांत में जो सिख खालिस्तानी हैं, उनका समय आ गया है।” आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के सरगना ने बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना को अलोकतांत्रिक तरीके से हटाए जाने से प्रेरित होकर दिल्ली पर कब्जे की उम्मीद जताई है।

उसने कहा, “अगर हमें चुनौती दी गई, अगर हमें नजरअंदाज किया गया, अगर हमारे देश में अराजकता पैदा की गई तो बांग्लादेश की तौहीद आबादी जैसे हसीना के खिलाफ उठी है, बांग्लादेश की आजादी की रक्षा के लिए, बांग्लादेश में इस्लाम की रक्षा के लिए, तौहीद एकजुट होकर आपका सामना करेंगे। वह दिन दूर नहीं जब आपका देश भी टूट जाएगा और दिल्ली के ऊपर तौहीद के झंडे लहराएँगे।”

कौन है जसीमुद्दीन रहमानी?

बरगुना में लोगों को हिंसा के लिए उकसाने के मामले में रहमानी को 12 अगस्त 2013 को गिरफ्तार किया गया था। अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के 30 सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया था। 2013 में गिरफ्तारी के बाद से रहमानी जेल में ही था। उस पर छह अलग-अलग मामले चल रहे हैं और पुलिस ने उनके खिलाफ सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

ढाका की एक अदालत ने 31 दिसंबर 2015 को ब्लॉगर राजीब हैदर की हत्या से जुड़े एक मामले में उसे 5 साल की सजा सुनाई थी। यह मामला पल्लबी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। उसने यह सजा पूरी कर ली है। इस चरमपंथी समूह ने कम से कम चार ब्लॉगर्स और लेखकों की हत्या की है।

इस मामले के अलावा मोहम्मदपुर पुलिस स्टेशन में दो, गुलशन पुलिस स्टेशन में एक, बरगुना सदर पुलिस स्टेशन में एक और उत्तर पश्चिम पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया था। इन सभी मामलों में मुकदमा लंबित है। दो मामलों में उसे 2020 और 2022 में ढाका के आतंकवाद-रोधी विशेष न्यायाधिकरण द्वारा जमानत दी गई थी।

साल 2022, 2023 और जनवरी 2024 में उसे अन्य तीन मामलों में जमानत दी गई थी। फरवरी 2013 में राजीब हैदर की हत्या के साथ अंसारुल्लाह बांग्ला टीम सुर्खियों में आई थी। मई 2015 में बांग्लादेश सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया। ABT ने 2016 में LGBT अधिकार कार्यकर्ता ज़ुल्हाज़ मन्नान और उनके दोस्त खांडोकर महबूब रब्बी टोनॉय की हत्या में भी शामिल थे।

भारत में अंसारुल्लाह बांग्ला टीम

बांग्लादेश में स्थित अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) अंतरराष्ट्रीय इस्लामी आतंकी संगठन अल कायदा से संबद्ध है। यह बांग्लादेश। के साथ-साथ भारत और म्यामांर में अपनी जड़े जमाने की फिराक में है। साल 2017 में भारत में पैर जमाने की कोशिश कर रहे पाँच एबीटी आतंकवादियों को असम में पकड़ा गया था।

जुलाई 2022 में असम में एबीटी से जुड़े दो मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया था। 2022 में फिर से एबीटी से जुड़े दो इमामों को गिरफ्तार किया गया था। दोनों इमामों को असम के गोलपाड़ा पुलिस ने एबीटी और इस्लामिक आतंकवादी समूह अल कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) के खिलाफ अभियान के तहत गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस द्वारा कई घंटों तक पूछताछ करने के बाद तिलपारा नतून मस्जिद के 49 साल के इमाम जलालुद्दीन शेख और मोरनोई के टिंकुनिया शांतिपुर मस्जिद के 43 वर्षीय इमाम अब्दुस सुभान को पुलिस हिरासत में ले लिया गया था। जाँच के दौरान दोनों इमामों के घरों से आतंकी संगठनों से जुड़े सामान बरामद हुए थे।

अधिकारियों ने बताया कि जब दोनों इमामों के घरों की तलाशी ली गई तो उन्हें AQIS से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत मिले थे। इसके अलावा उनके यहाँ से जिहादी साहित्य, पोस्टर, किताबें और मोबाइल फोन, सिम कार्ड और आईडी कार्ड सहित अन्य सामग्री भी मिली थीं। गिरफ्तार किए गए दोनों इमाम बारपेटा और मोरीगाँव में ABT इकाइयों के संपर्क में थे।

अगस्त 2022 में असम के मुख्यमंत्री ने बताया था कि पुलिस ने बांग्लादेशी आप्रावासियों के कई जिहादी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इनमें AQIS से जुड़ा अंसारुल्लाह बांग्ला टीम सबसे अधिक सक्रिय था। पिछले कुछ महीनों में राज्य में एबीटी के पाँच मॉड्यूल पकड़े गए हैं। इन समूहों का भंडाफोड़ खुफिया सूचनाओं के आधार पर किया गया।

‘पश्चिम बंगाल को मोदी से आज़ाद करें ममता बनर्जी’: जिस मौलाना को मुहम्मद यूनुस ने रिहा किया वो बोला – चीन से कह कर चिकेन्स नेक कटवा देंगे

बांग्लादेश में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ने के बाद से ही हिन्दू विरोधी हिंसा चरम पर है और हिंदुओं पर हमले की सैकड़ों घटनाएँ हो चुकी हैं। वहाँ के नेताओं ने शेख हसीना को शरण देने को लेकर भारत को धमकाया भी है। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में अंतरिम सरकार चल रही है। नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस की सरकार ने जशीमुद्दीन रहमानी नामक कट्टरपंथी मौलाना को जेल से छोड़ दिया। अब उसने भी भारत के खिलाफ ज़हर उगला है।

‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम’ (ABT) के मुखिया मौलाना जशीमुद्दीन रहमानी ने अब जम्मू कश्मीर की ‘आज़ादी’ के लिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान से मदद माँगी है। वो अलकायदा और इससे जुड़े भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय संगठन AQIS का भी कट्टर समर्थक है। उसने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी अपील की है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन से राज्य को ‘आज़ाद’ करें। साथ ही उसने खालिस्तानियों की मदद से भारत को खंडित करने का इरादा भी जाहिर किया है।

सोशल मीडिया पर उसका ये बयान सर्कुलेट हो रहा है, जो किसी अस्पताल के कमरे से दिया गया हुआ लगता है। इससे पहले भी वो और उसका संगठन कई जिहादी कंटेंट का प्रसार कर चुका है। अब उसने कहा है कि बांग्लादेश कोई सिक्किम या भूटान नहीं बल्कि 18 करोड़ मुस्लिमों का मुल्क है, अगर तुम बांग्लादेश की तरफ बढ़ोगे तो हम चीन से कह कर चिकेन्स नेक (पूर्वोत्तर और शेष भारत के बीच का क्षेत्र) को काटने के लिए कहेंगे। उसने कहा कि अब वो सिखों से कहेगा कि उनका समय आ गया है।

2013 से ही जशीमुद्दीन रहमानी को गाज़ीपुर स्थित काशिमपुर सेन्ट्रल जेल में रखा गया था। नास्तिक ब्लॉगर अहमद राजीब हैदर की हत्या के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था। कई अन्य नास्तिक ब्लॉगरों की हत्या में भी उसका नाम आया था। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार शेख हसीना के शासनकाल के बंदियों को रिहा कर रही है। जमात-ए-इस्लामी और उसके संगठन ‘इस्लामी छात्र शिबिर’ पर से भी प्रतिबंध हटा लिया गया है। रहमानी का ABT इसी संगठन से सदस्यों को भर्ती करता रहा है।

आमिर बाँधता था हाथ में कलावा, खुद को बताता था राजा… कक्षा 9 की 14 साल की हिंदू लड़की को ब्लैकमेल कर किया रेप, इस्लाम कबूलने का भी दबाव

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक नाबालिग हिन्दू लड़की से रेप और धर्मान्तरण की कोशिश की गई है। पीड़िता को उसके पिता ने हिन्दू संगठन के सदस्यों के साथ होटल के एक कमरे से पकड़ा है। मामले का मुख्य आरोपित आमिर है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आमिर खुद को राजा बताता था और हाथ में कलावा बाँधा करता था। घटना शनिवार (7 सितंबर 2024) की है।

आगरा के ताजगंज थानाक्षेत्र की 14 वर्षीय पीड़िता अपने परिवार के साथ रहती है। वह कक्षा 9 की छात्रा है। शनिवार को पीड़िता अपने घर से कोचिंग के लिए निकली पर काफी देर तक नहीं लौटी। परेशान घर वालों ने पीड़िता की खोजबीन शुरू कर दी। इसी दौरान पीड़िता के पिता को पता चला कि आमिर नाम का युवक उनकी बेटी को लम्बे समय से परेशान और ब्लैकमेल कर रहा था। जानकारी यह भी मिली कि शनिवार को वह पीड़िता के साथ शहर के एक होटल में गया है।

इस सूचना पर पीड़िता के पिता ने हिन्दू संगठनों से मदद माँगी। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत अध्यक्ष रौनक ठाकुर अपने साथियों सहित पीड़िता के पिता के साथ हो लिए। ये सब होटल पहुँचे और बंद पड़े एक कमरे को खुलवाया गया। सूचना सही पाई गई। अंदर आमिर पीड़िता के साथ मौजूद मिला। पीड़िता अपने पिता के साथ घर चली गई जबकि राष्ट्रीय बजरंग दल कर कार्यकर्ताओं ने आमिर को पुलिस के हवाले कर दिया। बाद में पीड़िता के पिता की तहरीर पर आमिर को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली गई है।

तहरीर में पीड़िता के पिता ने आमिर पर अपनी बेटी को लम्बे समय से ब्लैकमेल करने और इस्लाम कबूल करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। आरोप है कि उसने होटल में पीड़िता से रेप भी किया। पुलिस ने आमिर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65 (1) के साथ पॉक्सो एक्ट व उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर ली है। आमिर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जाँच और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में राष्ट्रीय बजरंग दल के पदाधिकारी रौनक ठाकुर से बात की। रौनक ने हमें बताया कि आमिर सोशल मीडिया के फेसबुक और इंस्टाग्रम हैंडलों पर काफी एक्टिव रहता है। वह हाथ में कलावा बाँध कर रहता है और खुद को राजा बताता है। बकौल रौनक आमिर ताजमहल के आसपास घूम कर लड़कियों का पीछा करता है। आमिर काफी लम्बे समय से पीड़िता का पीछा कर रहा था और आखिरकार उसने लड़की का नंबर हासिल करके ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था।

अंग्रेजों से पहले नहीं था भारत? सैफ अली खान जैसों को लेखक अमीश त्रिपाठी ने बताया अरब से लेकर चीनी यात्रियों तक ने क्या लिखा, विष्णु पुराण में भी देश का भूगोल

कुछ लोग कहते हैं कि आज जो भारत है ये अंग्रेजों की देन है, यानी अंग्रेजों के आने से पहले भारत था ही नहीं। ऐसा मानने वालों में अभिनेता सैफ अली खान भी शामिल हैं। अब शिवा ट्राइलॉजी के लेखक अमीश त्रिपाठी ने एक वीडियो सीरीज शुरू की है, जिसमें उन्होंने तथ्यों एवं तर्कों के सहारे ऐसा मानने वालों को जवाब दिया है। पहले एपिसोड में ही उन्होंने बताया कि अंग्रेजी प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल का भी ऐसा ही मानना था। इस दौरान उन्होंने पॉलिटिकल कंसल्टेंट दिलीप चेरियन का बयान दिखाया, जिन्होंने कहा था कि आपस में दुश्मन रखने वाले कबीलों को एक झंडे के नीचे एकत्रित किया गया।

इसी तरह उन्होंने खुद को ‘हिस्ट्री बफ’ बताने वाले सैफ अली खान का बयान दिखाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘इंडिया’ का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं था अंग्रेजों से पहले। अमीश त्रिपाठी ने इसका विश्लेषण किया है कि आज पढ़े-लिखे लोग भी ऐसा क्यों सोचते हैं। उन्होंने इस दौरान JNU में ‘सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज’ के प्रोफेसर राकेश बतबयाल का बयान दिखाया, जिन्होंने कहा था कि सैफ अली खान ने किताबों में पढ़ा होगा कि अंग्रेजों ने प्रशासनिक रूप से भारत के एक बड़े क्षेत्र को एक किया।

अमीश त्रिपाठी कहते हैं कि हमारी शिक्षा प्रणाली हमें ऐसी बातें सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि 200 वर्षों तक भारत अंग्रेजों व अन्य यूरोपियन देशों के गुलाम रहे जिन्होंने इतिहास अपने हिसाब से लिखा और हमारे सोच व नैरेटिव को अपने एजेंडे के लिए इस सोच से भर दिया कि हम एक राष्ट्र थे ही नहीं। उन्होंने हमारी आवाज़ों को दबा दिया और आज भी हमारी शिक्षा व्यवस्था गुलामी के कालखंड वाली ही है। हम चीजों को उसी तरह देखते हैं जैसा अंग्रेज चाहते थे। अमिश त्रिपाठी इसे Gaslighting कहते हैं, यानी पीड़ित के मन में ये बिठा देना कि उसका शोषण उसी की गलती है।

अमीश त्रिपाठी ने बताया कि भारत को अंग्रेजों ने बँटा हुआ बताया और उन्हें इसका फायदा हुआ, जैसे एक तमिल को कहा जाएगा कि पंजाबी उससे अलग हैं तो वो क्यों भारत की आज़ादी के लिए लड़ेंगे। उन्होंने एलेक्जेंडर डाओ की एक पुस्तक का जिक्र करते हुए बताया कि उसने लिखा था कि भारत कई टुकड़ों में बँटा हुआ है और ये आपस में लड़ते रहते हैं। JR सिली ने भी लिखा कि सबके अलग धर्म और रीति-रिवाज हैं। अंग्रेज मानते थे कि भारत को सभ्य बनाने के लिए इसे गुलाम बनाने की ज़रूरत थी।

अमीश त्रिपाठी ने कहा, “अंग्रेजों ने भारत को असभ्य, नियम का पालन न करने वाला और उपद्रवी बताया। रेडयार्ड किपलिंग ने कहा कि भारत को सभ्य बनाने की जिम्मेदारी अंग्रेजी की थी। इसके बदले हमारी संस्कृति और हमारे जीवन पर भी उन्होंने अपना दावा ठोक दिया। जिन भारतीयों का अंग्रेजीकरण हो गया है, वो आज भी इस पर विश्वास करते हैं। ब्रिटिश प्रशासन भी यही कर रहा था। कैम्ब्रिज में एक अंग्रेज अधिकारी ने कहा कि भारत कभी संगठित नहीं था। जबकि हम आज भी यही हैं और रहेंगे।”

उन्होंने इस दौरान ‘शोले’ के ‘गब्बर सिंह’ का उदाहरण दिया, जिसमें वो गाँव वालों की हिफाजत के लिए उनसे अनाज वगैरह लेने को जायज ठहराता है। लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि अगर हम खुद को कमज़ोर मान लेते तो उनसे लड़ नहीं पाते और उन्हें हम पर राज करने में आसानी होती। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे मात्र 1 लाख अंग्रेजों ने 35 करोड़ भारतीयों पर 200 वर्ष राज किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे भारत सबसे पुरानी सभ्यता है जो आज तक जीवित है, हमारे पूर्वज भारत को एक राष्ट्र के रूप में मानते थे।

उन्होंने इस दौरान विष्णु पुराण का उदाहरण दिया, जिसे आधुनिक इतिहासकार 1500 वर्ष पुराना तक बताते हैं, उसमें साफ़-साफ़ लिखा है कि जिस राष्ट्र के उत्तर में हिमालय और दक्षिण में समुद्र है उसे भारत कहते हैं और यहाँ भरत के वंशज रहते हैं। इसी ग्रन्थ में भारत के 7 महत्वपूर्ण पर्वतों के बारे में भी दिया गया है, जिनमें 2 दक्षिण भारत के हैं। इसमें चंद्रभागा से लेकर गोदावरी तक की नदियों के नाम है। इसमें लिखा है कि भारत के पश्चिम में ग्रीक और पूर्व में चीनी रहते हैं।

उन्होंने समझाया कि प्राचीन तमिल ग्रन्थ ‘तोलकप्पियम’ में लिखा है कि ये वेदों से प्रेरित है। अमीश त्रिपाठी ने विदेशियों की यात्रा वृत्तांत का जिक्र करते हुए भी बताया कि वो भी भारत को एक देश के रूप में देखते थे। 2000 वर्ष पूर्व सिंधु नदी पार कर के भारत आए लोगों ने कहा कि वो ‘इंडिका’ आए हैं, मेगस्थनीज ने भी लिखा कि उत्तर में पहाड़ है और दक्षिण में समुद्र। इसी तरह रोमन यात्री ने भारत में लोकतांत्रिक सरकार होने की बात कही, लिखा कि लोगों के पास अधिकार है, वो न्याय का सम्मान करते हैं, सच्चे हैं, लेकिन उनके पास राजा-मंत्री भी हैं जिनकी सेना है।

अमीश त्रिपाठी ने समझाया कि अंग्रेजों से 2000 वर्ष पूर्व भारत आए रोमन भी इसे एक राष्ट्र में देखते थे, वो रोमन जिनसे प्रेरित इमारतें इंग्लैंड में भी हैं। सन् 400 में भारत आए एक चीनी संत ने लिखा कि यहाँ उत्तर के पहाड़ों से लेकर दक्षिण के सागर तक भगवान बुद्ध उन्हें महसूस हुए। श्रीलंका से आए बौद्ध तमिलनाडु में उतरे जो गौतम बुद्ध के जन्मस्थान से 2500 किलोमीटर दूर है लेकिन उन्हें पता था कि वो भारत में आए हैं। यहाँ तक कि अरब यात्रियों ने भी भारत को एक सभ्यता माना, उन्होंने लिखा कि भारत कई कबीलों से भरा है लेकिन वो एक हैं, अपने पूर्वजों के प्रति उनमें एक जैसी श्रद्धा है।

उन्होंने बताया कि कैसे कोलंबस भी भारत को खोजने निकला था लेकिन अमेरिका पहुँच गया, वो भी भारत को एक राष्ट्र के रूप में ही देखता था। उन्होंने सवाल दागा कि अंग्रेजों ने फिर भारत का नाम ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ क्यों रखा? उन्होंने बताया कि 17वीं शताब्दी में यूरोप में युद्ध को रोकने के लिए एक संधि हुई और परिभाषित किया गया कि जिसकी एक भाषा, एक रिलिजन और एक नस्ल है वही देश है। वहाँ ईसाई मजहब में प्रोटेस्टेंट और कैथोलिक दो अलग-अलग पंथ थे।

अमीश त्रिपाठी ने कहा कि शायद भारत इस परिभाषा में फिट नहीं बैठ रहा था लेकिन एक सभ्यता की परिभाषा में फिट बैठता है जो एक सांस्कृतिक धागे से बँधा हो। उन्होंने बताया कि एक सभ्यता एक राष्ट्र से बहुत बड़ा होता है, जैसे ब्रिटेन एक राष्ट्र है लेकिन पश्चिमी सभ्यता का भाग है, UAE-सऊदी भी अलग-अलग देश हैं लेकिन अरब सभ्यता का भाग हैं। नेशन स्टेट का कॉन्सेप्ट 1648 से आया, जबकि सभ्यता पुरानी है। सभ्यता विविधता के साथ फलती-फूलती है, नेशन स्टेट में एक सरकार के सारे नियम होते हैं लेकिन सभ्यता किसी राजनीतिक शक्ति नहीं बल्कि नैतिकता से चलती है, जैसे भारत में धर्म है।

आजादी के बाद 10000 हिंदू पहली बार डाल पाएँगे वोट, अनुच्छेद-370 के कारण वाल्मीकि हो गए थे ‘अछूत’: जीतने पर अब्दुल्ला-मुफ्ती फिर मारेंगे हिंदुओं का हक?

जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा का चुनाव होे जा रहा है। इस दौरान वहाँ बहुत कुछ बदल गया है। राज्य में अब ना ही धारा 370 और ना ही पूर्ण राज्य का दर्जा। जम्मू-कश्मीर अब केंद्रशासित प्रदेश है। इसके साथ ही यहाँ का सामाजिक परिदृश्य भी बदल गया है। यहाँ के वाल्मीकि समुदाय के लोग पहली बार मतदान करेंगे। इससे पहले उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं था।

जम्मू-कश्मीर में रह रहे लगभग 350 वाल्मीकि परिवार के लोग इससे बेहद उत्साहित हैं। अनुच्छेद 370 और 35A हटने के बाद उन्हें अन्य नागरिकों की तरह ही सारे अधिकार मिल गए हैं। इन परिवारों के पूर्वजों को 1957 में तत्कालीन सरकार द्वारा महामारी के दौरान सफाई कर्मचारी के रूप में काम करने के लिए पंजाब से जम्मू लाया गया था।

यह परिवार यहीं का होकर रह गया। इसके बावजूद इन्हें राज्य के स्थायी निवासी का कभी दर्जा नहीं दिया गया। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सबसे अहम हिस्सा मतदान तक से वंचित यह तबका जम्मू-कश्मीर में दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रह रहा था। इन्हें राज्य के अन्य निवासियों के लिए उपलब्ध अन्य अधिकारों से भी वंचित कर दिया गया था।

केंद्र की मोदी सरकार ने जब 5 अगस्त 2019 को राज्य से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया तो इनकी स्थिति अचानक से बदल गई। इनके राज्य में आने के लगभग छह दशक बाद वाल्मीकि समुदाय के सदस्यों को आखिरकार 2020 में स्थायी निवास प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस तरह इन परिवारों के लिए यह एक नया सवेरा था।

वाल्मीकि समुदाय के इन परिवारों के लगभग 10,000 सदस्य राज्य विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदान करेंगे। वाल्मीकि समाज के अध्यक्ष घारू भट्टी ने इंडिया टुडे से बातचीत में संवैधानिक बदलावों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति समुदाय की ओर से गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा यह सपना सच होने जैसा है।

दरअसल, मतदान के साथ-साथ वाल्मीकि समुदाय के बच्चों के वहाँ की सरकारी नौकरियों में आवेदन भी नहीं कर सकते थे, क्योंकि उनके पास स्थायी निवासी प्रमाण पत्र नहीं था। इससे उन लोगों में भारी निराशा होती है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे वाल्मीकि समुदाय में खुशी की लहर छा रही है।

पाकिस्तान जैसी हालत थी वाल्मीकि समुदाय की

पाकिस्तान में सफाईकर्मियों की नौकरी के लिए गैर-मुस्लिम होना जरूरी है। इस तरह के वहाँ विज्ञापन भी निकलते रहते हैं। नाले-पेशाब-पखाना साफ करते हिंदू दलितों की जो हालत आज पाकिस्तान में है, वही हालत अनुच्छेद 370 के उन्मूलन से पहले भारत के जम्मू-कश्मीर में थी। इनके लिए जम्मू-कश्मीर का कोई भी राजनीतिक दल आवाज नहीं उठाया।

1957 में जम्मू-कश्मीर राज्य ने राज्य विधानसभा के शासनादेश से सफाई कर्मी के नाम पर वाल्मीकि समाज के लोगों को पंजाब के पठानकोट, अमृतसर, जालंधर, होशियारपुर इत्यादि से लाकर जम्मू-कश्मीर राज्य के भिन्न-भिन्न स्थानों पर उनकी कॉलोनी बना कर बसाया गया। सरकारी दस्तावेजों में इस नौकरी को ‘भंगी पेशा’ नाम दिया गया था।

वाल्मीकि समुदाय के लोगों को सफाई-कर्म के अलावा कोई भी अन्य नौकरी करना आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित था। देश-विदेश तक से शिक्षित इस समुदाय के लोग न ही किसी सरकारी उच्च शिक्षा या प्रोफेशनल कोर्स, जैसे मेडिकल या इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन ले सकते थे, न ही विधानसभा में चुनाव लड़ सकते थे और वोट भी नहीं डाल सकते थे।