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एक ने फुटपाथ पर रेप किया, दूसरा बचाने की जगह बनाता रहा वीडियो, तीसरी कॉन्ग्रेस कर रही राजनीति: उज्जैन को सबने मिलकर किया शर्मसार

मध्य प्रदेश के उज्जैन में फुटपाथ पर दिन-दहाड़े एक महिला से बलात्कार किया गया है। राहगीरों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है। हालाँकि, आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, विपक्षी दल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार में प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। बता दें कि यही कॉन्ग्रेस अयोध्या और कोलकाता जैसे रेप कांड पर मौन साधे हुए है।

पुलिस के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के विधानसभा क्षेत्र उज्जैन के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक कोयला फाटक के फुटपाथ पर बुधवार (4 सितंबर 2024) को दिन-दहाड़े एक महिला के साथ बलात्कार किया गया। इस घटना की राहगीरों ने तस्वीरें खींच ली। हालाँकि, किसी राहगीर ने उस महिला को बचाने की कोशिश नहीं की। पीड़ित महिला भीख माँगकर और कूड़ा बीनकर गुजारा करती है।

उज्जैन के नगर पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश मिश्रा ने बताया, “कल (गुरुवार 5 सितंबर) दोपहर करीब साढ़े तीन बजे एक महिला थाने आई और उसने बताया कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। इसके तुरंत बाद एक महिला अधिकारी को बुलाया गया और उसकी कहानी सुनी गई। इसके बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करके एफआईआर दर्ज की गई।”

पुलिस ने बताया कि महिला ने अपनी शिकायत में लोकेश नामक व्यक्ति को आरोपित बताया है। पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया, “तुरंत एक टीम गठित की गई और लोकेश की तलाश में भेजा गया। एफआईआर दर्ज होने के दो घंटे के भीतर लोकेश को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित लोकेश ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।”

SP मिश्रा ने कहा कि कोर्ट में महिला का बयान दर्ज करवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस घटना का एक वीडियो भी बनाया गया था, जो पुलिस के पास भी आया है। पुलिस ने इसे सबूत के तौर पर अपने पास रख लिया है। पुलिस का कहना है कि इस घटना का वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की भी तलाश की जा रही है। उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

ओमप्रकाश मिश्रा ने कहा कि वारदात बुधवार दोपहर 2 से 3 बजे के बीच की है। चिमनगंज थाना क्षेत्र में एक मंदिर के आसपास रहने वाली 45 साल की महिला कचरा-प्लास्टिक बीनने का काम करती है। उसने पुलिस को बताया कि घटना के दिन दोपहर को वह कोयला फाटक के पास कचरा बीन रही थी, तभी उसे एक युवक मिला। उसने अपना नाम लोकेश बताया।

आरोपित लोकेश लहोरिया ने ​महिला को बहला-फुसला कर शराब पिलाई और उससे कहा कि वह उससे शादी करेगा और अपने साथ रखेगा। इसके बाद वह महिला को बहाने से सड़क पर लगे डस्टबिन की आड़ में ले गया और फुटपाथ पर ही महिला से दुष्कर्म किया। दुष्कर्म करने के बाद वह धमकी देकर भाग गया। आरोपित लोकेश मजदूरी के साथ-साथ सब्जी का ठेला लगाता है।

पीड़िता का परिवार रोजी-रोटी की तलाश में करीब 8 साल पहले उज्जैन आया था। महिला का 18 साल का एक बेटा भी है, जो कोतवाली थाना क्षेत्र में रहता है। वह मजदूरी करता है। उसने पुलिस को बताया कि वह अपनी माँ को अपने साथ रहने के लिए कहता रहता है, लेकिन वह बार-बार बिना बताए कहीं चली जाती है।

रेप पर कॉन्ग्रेस की राजनीति

इस घटना को लेकर कॉन्ग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है। प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जब भाजपा आरजी कर बलात्कार-हत्याकांड को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रही थी, तब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में फुटपाथ पर एक महिला के साथ बलात्कार किया गया।

पटवारी ने कहा, “मध्य प्रदेश में हर दिन 18 महिलाओं के साथ बलात्कार होता है या उन्हें किसी न किसी तरह से उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। हदें तब पार हो गईं जब मुख्यमंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र में फुटपाथ पर एक महिला के साथ बलात्कार किया गया। मध्य प्रदेश में जंगल राज है।” वहीं, भाजपा ने कॉन्ग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

बता दें कि यही कॉन्ग्रेस जब अयोध्या में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान पर एक नाबालिग लड़की से रेप का आरोप लगा तो कॉन्ग्रेस और उनके नेता चुप्पी साधे रहे। इसी तरह कन्नौज में सपा नेता नवाब यादव ने एक नाबालिग किशोर का यौन शोषण किया तब भी कॉन्ग्रेस चुप्पी साधे रही।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। सारा देश सड़कों पर उतर आया। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस और उसके एक भी नेता ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सवाल नहीं किया।

दरअसल, तृणमूल की मुखिया ममता बनर्जी और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव INDI ब्लॉक के साझेदार हैं। इसलिए कॉन्ग्रेस अपराध में राजनीति देखती है। वह उन मुद्दों पर कभी खुलकर नहीं बोलती, जो उनके गठबंधन के हिस्सेदार के राज्यों में या उनकी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं द्वारा अंजाम दिए जाते हैं।

ऐसे में रेप जैसे घृणित अपराध पर कॉन्ग्रेस का यह बयान पूरी तरह राजनीति पर आधारित है, ना कि महिलाओं के प्रति उनके सम्मान एवं अपराध के प्रति उसके जीरो टोलरेंस की नीति का। रेप जैसी घटनाएँ समाज के नासूर हैं और इसके लिए सभी पार्टियों को साथ बैठकर इस पर कठोर निर्णय लेने चाहिए, लेकिन कॉन्ग्रेस इसमें राजनीति देखती है।

7 साल से BJP के प्रदेश अध्यक्ष, फिर भी पास में केवल ₹1000: क्या रवींद्र रैना को जानते हैं आप, जमीन-घर-गाड़ी-सोना कुछ भी नहीं उस नेता के पास जो रह चुका है MLA भी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जम्मू और कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना हाल ही में चुनावी हलफनामे में देश के सबसे गरीब उम्मीदवार के रूप में सामने आए हैं। यह जानकारी उनके द्वारा दाखिल किए गए चुनावी दस्तावेजों से प्राप्त हुई है, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति शून्य बताई है। रवींद्र रैना की यह घोषणा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि आमतौर पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संपत्ति करोड़ों में होती है।

रैना के हलफनामे में इस बात का उल्लेख है कि उनके पास ना तो जमीन है और ना ही बैंक में जमा राशि। उन्हें कोई पैतृक संपत्ति भी नहीं मिली है और न ही उन्होंने कोई निवेश किया है। रवींद्र रैना के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास जम्मू के गाँधी नगर में सिर्फ सरकारी आवास है, यह भी उन्हें 2014 में विधायक चुने जाने के बाद आवंटित हुआ था। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास सिर्फ 1000 रूपये ही कैश हैं। ऐसे में 2014 के मुकाबले उनके 20 हजार रुपये की कमी आई है।

इसके अलावा उन पर किसी प्रकार का बिजली, फोन और पानी का बिल भी बकाया नहीं है। रविंद्र रैना साइंस से ग्रैजुएट हैं और ड्यूटीज एजुकेशन में डिप्लोमा किया है। वे जम्मू-कश्मीर में भाजपा के शीर्ष नेताओं में से एक हैं पार्टी के लिए चुनावी कैंपेन करने में जुटे हैं। रवींद्र रैना साल 2017 से ही बीजेपी की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष हैं। भाजपा में आने से पहले संघ में सक्रिय रहे। रैना ने 2014 के विधानसभा चुनाव में पीडीपी के सुरिंदर चौधरी को 9 हजार 503 वोटों से पराजित किया था।

रैना की इस जानकारी के बाद उनके समर्थक इसे उनकी सादगी और ईमानदारी का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि कुछ विपक्षी दल इसे एक राजनीतिक चाल करार दे रहे हैं। रैना ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह एक साधारण जीवन जीते हैं और जनता की सेवा करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। समर्थकों की राय बीजेपी के समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता इस बात को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं कि उनका प्रदेश अध्यक्ष ईमानदार और गरीबों के प्रति संवेदनशील है। रवींद्र रैना की छवि एक जमीनी नेता की रही है, जो समाज के हर वर्ग से जुड़े हुए हैं।

रवींद्र रैना से जुड़ी इस जानकारी ने एक बार फिर से भारतीय राजनीति में पारदर्शिता और ईमानदारी की बहस को गर्म कर दिया है। देखना होगा कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा किस तरह से असर डालता है और क्या जनता इस बात को उनके पक्ष में देखेगी।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव तीन चरणों में होने हैं, जिसमें पहले चरण के लिए मतदान 18 सितंबर को होगा, दूसरे चरण के लिए 25 सितंबर को और तीसरे चरण के लिए एक अक्टूबर को मतदान होगा। रवींद्र रैना एक बार फिर से नौशेरा से ही चुनाव मैदान में हैं।

भारत की बढ़ती धमक से बौखलाया ब्रिटेन का मीडिया: अमेरिका-यूक्रेन से भिड़ाने की कर रहा कोशिश, दावा- तेल के बदले मिले रुपयों से रूस ने की गुपचुप खरीदारी

यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने के लिए भारत के शांति प्रयासों पर विदेशी मीडिया पानी फेरना चाह रहा है। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कीव दौरे के कुछ ही दिनों के बाद विदेशी मीडिया संस्थान फाइनेंशियल टाइम्स ने दावा किया है कि भारत इस युद्ध के बीच रूस को युद्ध में काम आने वाले साजोसामान बेच रहा है।

फाइनेंशियल टाइम्स ने इस बात को लेकर ‘रशिया बिल्ट कोवर्ट ट्रेड चैनल विद इंडिया, लीक्स रिवील’ शीर्षक से 4 अगस्त, 2024 को एक लेख प्रकाशित किया है। इस लेख में फाइनेंशियल टाइम्स ने आरोप जड़ा है कि रूस ने तेल बेच कर जुटाए भारतीय करेंसी के बड़े रिजर्व के सहारे भारत से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदे हैं।

फाइनेंशियल टाइम्स इससे पहले भी लगातार कई बार भारत विरोधी लेख छापता रहा है। इसने इस बार दावा किया है कि भारत और रूस के बीच हुआ यह कथित लेनदेन पश्चिमी सरकारों से छुपा कर रखी गई थी और इस सामान का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में हुआ।

फाइनेंशियल टाइम्स ने अपने इस लेख में अपने दावे का आधार ऐसे दस्तावेज और स्रोत बताए हैं जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। फाइनेंशियल टाइम्स ने आरोप लगाया कि रूस उन सामानों को पहले गैर दोस्ताना देशों से लिए गए सामान के तौर पर वर्गीकृत करता है।

रूस से कच्चे तेल की खरीद भारत और अमेरिका के बीच लगातार समस्या की जड़ बना रहा है। इस मुद्दे को लेकर अमेरिका के डिप्टी NSA ने भारत से परिणाम भुगतने तक को कह दिया था। हालांकि भारत को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और उसने रूस से तेल खरीदना जारी रखा।

अब भी औपनिवेशिक मानसिकता में डूबा है फाइनेंशियल टाइम्स

अमेरिका और भारत के बीच रूसी तेल की खरीद के मुद्दे को फाइनेंशियल टाइम्स ने भुनाने का प्रयास अपने लेख में किया। फाइनेंशियल टाइम्स ने दावा किया कि भारत ने तेल खरीद के लिएजो पैसे रूस को दिए, उनका इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन युद्ध में उपयोग होने वाले हथियार खरीदने के लिए किया।

फाइनेंशियल टाइम्स ने दावा किया, “रूस और उसके भारतीय साझेदारों ने ऐसी तकनीकों की खरीद बिक्री की है जो आम जीवन में और सैनिकों के लिए उपयोग में लाई जाती हैं। इनमें से कई सामानों पर पश्चिमी देशों ने रोक लगाई हुई है। लीक फाइलों के अनुसार, रूस भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान को भारत के साथ मिलकर बनाने के प्रयास में भी था।”

ब्रिटिश अख़बार फाइनेंशियल टाइम्स ने यह बड़े बड़े दावे किए लेकिन उसने ये बात मानी कि उसे यह नहीं मालूम है कि यह खरीद कितनी बड़ी है। इसके उसने यह बताया कि रूस और भारत के रिश्ते इस लेनदेन के बाद और गहरे हो गए है। हास्यास्पद बात यह है कि इन सभी दावों के बीच यह भी नहीं बता सका कि यह सामान क्या हैं।

अपनी औपनिवेशिक सोच को प्रदर्शित करते हुए फाइनेंशियल टाइम्स ने दोहराया कि अमेरिका भारत को कई बार धमकियाँ दे चुका है लेकिन इस बीच यह भूल गया कि भारत विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अपने हितों के हिसाब से निर्णय लेता है।

तेल खरीद पर फिर रोने लगा फाइनेंशियल टाइम्स

भारत सरकार लगातार 2022 से ही साफ़ करती आ रही है कि रूस से होने वाली तेल की खरीद उसकी कुल खरीददारी का मात्र एक हिस्सा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसको लेकर एक बार पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये को भी उजागर किया था। उन्होंने एक सार्वजनिक बातचीत में कहा था, ”हम कुछ कच्चा तेल-गैस खरीदते हैं, जो हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है। लेकिन मुझे आँकड़ों को देखकर ये लगता है कि जितना हम एक महीने में खरीदते हैं उससे ज्यादा यूरोप एक दिन में खरीद लेता है।”

फाइनेंशियल टाइम्स का प्रोपेगेंडा इस बात को नजरअंदाज करते हुए सामने आ ही गया। फाइनेंशियल टाइम्स ने दावा किया कि भारत ने रूस खरीद करके उसे युद्ध चालू रखने की अप्रत्यक्ष मदद दी है। इसने कहा कि भारत का रूस से तेल खरीदना रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद वरदान बन कर आया।

फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा, “भारत रूसी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है और दोनों देशों का कुल व्यापार 2023-24 में 66 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो यूक्रेन-रूस से पहले के वर्ष की तुलना में पाँच गुना वृद्धि है। इसमें से कुछ व्यापार रुपये में किया गया है, जिससे रूस के पास रिजर्व पड़ा हुआ है। कारोबार से जुड़े लोगों और पश्चिमी देशों के अधिकारियों के अनुसार, रूसी कंपनियों ने प्रतिबंधों से बचने के लिए सोने का व्यापार करने और सामान खरीदने के लिए इस रुपये के रिजर्व का इस्तेमाल किया है।”

फाइनेंशियल टाइम्स ने लगाया भारत पर यूक्रेन युद्ध में मदद का आरोप

रिपोर्ट में ब्रिटिश अखबार ने दावा किया कि अक्टूबर 2022 में अलेक्जेंडर गैपोनोव (रूस के उद्योग और व्यापार मंत्रालय के रेडियो इलेक्ट्रॉनिक्स डिवीजन के उपप्रमुख) ने भारत से ड्रोन और मिसाइलों में इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने की योजना बनाई थी। इसने दावा किया कि गैपोनोव ने डिजिटल मुद्रा और भारतीय रूपए का उपयोग करके भारत से ‘दोहरे उपयोग वाले सामान’ खरीदने और पश्चिमी देशों की जाँच से बचने के लिए एक संगठन का इस्तेमाल किया।

लीक हुए दस्तावेजों का हवाला देते हुए, ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने आरोप लगाया कि सर्वर, टेलिकॉम और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए पुर्जों की खरीद पर 100 अरब रुपये खर्च किए गए। यह भी आरोप लगाया गया कि रूस ने अपने महत्वपूर्ण संसाधनों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कारखानों को मजबूत करने में भी पैसा खर्च किया।

फाइनेंशियल टाइम्स के इन दावों पर विश्वास करना कठिन है क्योंकि रूस को यह सभी सामान चीन से उपलब्ध थे और उसे यह बिना निवेश के खरीद सकता था। यदि रूस को यह समान खरीदने ही होते तो वह चीन से खरीद इसलिए करता क्योंकि चीन एक तो उसे सस्ता सामान दे सकता था और दूसरा दोनों देशों के बीच आपूर्ति की दिक्कत नहीं होती।

पश्चिमी देश दे रहे यूक्रेन को हथियार- समझौते के आसार नहीं

फाइनेंशियल टाइम्स की यह रिपोर्ट भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर खराब करने के लिए रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को बढ़ावा देने वाले के रूप में बदनाम करने का प्रयास प्रतीत होती है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और पश्चिमी देश में इस संघर्ष को अरबों डॉलर और हथियार दे रहे हैं। यूक्रेन को अमेरिका और यूरोप ने मिलाकर अब तक 185 बिलियन यूरो दिए हैं।

93.3 बिलियन यूरो की अतिरिक्त सैन्य सहायता अभी और दिए जाने का विचार चल रहा है। जहाँ ब्रिटिश अखबार मात्र दावों के आधार पर भारत को युद्ध बढ़ाने का दोषी सिद्ध करना चाहता है, वहीं जिन देशों का मुखपत्र है, उन्हें इस युद्ध में हथियारों की सप्लाई से नहीं रोक पा रहा है।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में दिबाकर दत्ता ने लिखा है। इसे यहाँ क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।)

14 महीने के पोते को दाँतों से काटा, इतना पीटा कि हो गई मौत… गुजरात की हत्यारिन दादी कुलसन सैयद गिरफ्तार: बच्चे के गाल-सिर-हाथ-पैर हर जगह थे काटने के निशान

गुजरात के अमरेली में कुलसन सैयद नाम की एक बुजुर्ग महिला ने 14 महीने के अपने पोते को दाँतों से काटकर और पीट-पीटकर हत्या कर दी। दरअसल, बच्चा रो रहा था। इससे सैयद इतनी भड़क गई और उसने उस मासूम को दाँतों से 7 जगहों पर काटा। उसके पेट पर लात मारा और तब तक पीटती रही, जब तक की उसकी मौत नहीं हो गई।

बच्चे की मौत के बाद उसके दादा हुसैन सैयद ने थाने में जाकर इसकी जानकारी दी। पुलिस जाँच में जो बात सामने आई, वह हैरान करने वाली है। अमरेली के एसपी हिमकर सिंह ने बताया कि आरोपित दादी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की पूछताछ में उसने बच्चे की पिटाई की बात कबूल की है। हालाँकि, उसने यह भी कहा कि वह बच्चे की जान नहीं लेना चाहती थी।

पुलिस अधीक्षक हिमकर सिंह ने बताया कि मामला अमरेली के राजस्थली गाँव की है। 3 सितंबर 2024 को करीब 5 बजे दादी कुलसन सैयद के कमरे में 14 महीने का बच्चा अपनी बहन के साथ खेल रहा था। खेल के दौरान वह जोर-जोर से रोने लगा। कुलसन ने बच्चे को चुप कराने की कोशिश की, लेकिन वह चुप नहीं हुआ और रोता रहा। इसके बाद कुलसन के सिर पर खून सवार हो गया।

उसने बच्चे को बेरहमी से पीटा। इतना ही नहीं, उसने गुस्से में बच्चे के शरीर पर कई जगह दाँतों से काटा। उसने बच्चे के पेट पर जोर से लात भी मारी। इससे बच्चा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा। इसके बाद भी वह नहीं रूकी। वह बच्चे के लगातार रोने-चिल्लाने के बावजूद उसे लगातार पीटती रही। आखिरकार उस बच्चे ने दम तोड़ दिया।

इस घटना के बाद परिवार के लोग चुप रहे। हालाँकि, बच्चे के दादा हुसैन सैयद बुधवार (4 सितंबर 2024) को दोपहर अमरेली (रूरल) थाने पहुँच गए और अपने पोते की मौत की जानकारी दी। पेशे से ट्रक ड्राइवर हुसैन के बयान के आधार पर पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर लिया और घटनास्थल पर पहुँचकर शव को कब्जे में ले लिया।

पुलिस ने देखा कि बच्चे के गाल, सिर, हाथ और पैर पर काटने के निशान थे। मुँह, जाँघों और हाथों पर भी गंभीर चोट के निशान थे। इसके बाद पुलिस ने शव की फोरेंसिक जाँच के लिए उसे अस्पताल भेज दिया, जहाँ बच्चे के साथ क्रूरता की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करके आरोपित दादी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की पूछताछ में परिजनों ने बताया कि दादी कुलसन ने पोते को काटा और पीटा था। पूछताछ में कुसलन ने भी बच्चे को पीटने की बात स्वीकार की। हालाँकि, उसने यह भी कहा कि वह बच्चे को मारना नहीं, चुप कराना चाहती थी। उसने बताया कि वह कई दिनों से सो नहीं पा रही थी। इस वजह से चिड़चिड़ी हो गई थी। बच्चे के रोने से नींद खुली तो उसे गुस्सा आ गया।

कुकर्म और समलैंगिकता को ‘अप्राकृतिक यौन अपराध’ के रूप में नहीं पढ़ेंगे डॉक्टर, MBBS पाठ्यक्रम में बदलाव को NMC ने लिया वापस: बदलावों पर हो रहा था विरोध

नेशनल मेडिकल कमिशन ने कॉम्पिटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन पाठ्यक्रम (CBME) 2024 की गाइडलाइन्स को वापस ले लिया है। हाल ही में जारी नए पाठ्यक्रम गाइडलाइन्स पर काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद इसे वापस ले लिया गया।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधित फॉरेंसिक मेडिसिन पाठ्यक्रम में समलैंगिकता को अप्राकृतिक यौन अपराध बताने के अलावा हाइमन का महत्व, वर्जीनिटी की परिभाषा और इसके मेडिकल-कानूनी पहलुओं को शामिल किया गया था। एक आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि नई गाइडलाइन्स पर पुनर्विचार किया जाएगा और उसके बाद इसे दोबारा अपलोड किया जाएगा। नेशनल मेडिकल कमिशन ने समलैंगिकता को अपराध बताने को, पाठ्यक्रम से साल 2022 में हटा लिया था, लेकिन इसी साल इसे दोबारा पाठ्यक्रम में शामिल किया गया।

बता दें कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने हाल ही में MBBS पाठ्यक्रम में किए गए संशोधन को वापस ले लिया है, जिसमें लेस्बियन या गे-सेक्स जैसे यौन कृत्यों को ‘अप्राकृतिक अपराध‘ की श्रेणी में रखा गया था। LGBTQ+ समुदाय के संगठनों और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस पाठ्यक्रम को ‘पुराने जमाने का और पूर्वाग्रह से भरा’ करार दिया था।

LGBTQ+ समुदाय और मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी कई संस्थाओं ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा कि यह कदम समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखता है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के बाद से असंवैधानिक है। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को रद्द कर दिया था, जिससे समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया।

कड़ी आलोचना के बाद, NMC ने पाठ्यक्रम से संबंधित संशोधन को वापस लेने की घोषणा की। आयोग ने कहा कि यह पाठ्यक्रम को फिर से तैयार करेगा ताकि यह समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों को प्रतिबिंबित कर सके और लैंगिक समानता को बढ़ावा दे सके। NMC के इस फैसले का स्वागत करते हुए, LGBTQ+ संगठनों ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही इस बात पर जोर दिया कि आगे भी मेडिकल एजुकेशन में समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए और कदम उठाए जाने चाहिए।

21 साल की जिस लड़की के पिता रहे राष्ट्रपति, उससे 16वीं बार शादी करेंगे 56 साल के राजा: बीवी बनने से पहले 5000 लोगों के सामने ‘वुमनहुड’ एंट्री, जानिए क्या है ‘लिफोवेला’

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा (Jacob Zuma) की 21 साल की बेटी नोमसेबा जूमा (Nomcebo Zuma) की शादी की चर्चा इस समय हर जगह है। कारण है उनका दूल्हा। जैकब जूमा की बेटी जिससे शादी कर रही हैं वह इस्वातिनी (Eswatini) के 56 साल के राजा मस्वाति तृतीय हैं।

इस शादी में खास बात दूल्हा और दुल्हन के बीच उम्र का अंतर नहीं है बल्कि राजा से जुड़ी कुछ अन्य दिलचस्प बातें हैं। नोमसेबा जिनकी उम्र मात्र 21 साल है वो इस्तानिवी (अफ्रीका के इकलौते बचे राजघराने (गणराज्य) के राजा की 16 वीं पत्नीं होंगी। राजा के पास वर्तमान में ही 11 पत्नियाँ हैं जबकि उनके पास बच्चे 25 हैं।

जूमा और राजा मस्वाति की सगाई एक पारंपरिक ‘लिफोवेला’ समारोह में हुईं। समारोह में 5000 लोग थे जहाँ पहले लड़कियों ने डांस किया और उसके बाद इस शादी का ऐलान हुआ। मस्वाति इस देश के राजपाठ की कमान 1986 से संभाल रहे हैं। उन्हें उनके लैविश जीवनयापन, बहुविवाह और विवादित फैसलों के कारण खूब जाना जाता है।

उन्होंने साल 2001 में एड्स से लड़ने के लिए नियम बनाया था कि 18 साल से कम उम्र वाली लड़की से सेक्स अवैध होगा। हालाँकि 2 महीने बाद उन्होंने खुद 17 साल की लड़की से शादी कर ली जो उनकी 9वीं बीवी बनी। उस समय उन्होंने अपने ऊपर एक गाय का जुर्माना लगाया था।

इसी प्रकार उनकी 10वीं बीवी जिससे उन्होंने 2003 में शादी की वो मात्र 18 साल की थी और ए लेवल एग्जाम दे रही थी जब उसका अपहरण हुआ। परिवार ने उसे छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सब प्रयास असफल हुए। अब जैकब जूमा की बेटी से वो 16वीं शादी कर रहे हैं। जैकब जूमा खुद भी 6 बार शादी कर चुके हैं और उनकी अभी भी 4 बीवियाँ और 20 से ज्यादा बच्चे हैं।

बीबीसी को दी गई जानकारी के अनुसार, इस्तानिवी के प्रवक्ता ने बताया कि राजा और जूमा की शादी किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि लव मैरिज है। इस्तानिवी के प्रवक्ता ने ये भी कहा कि प्यार में देखने या उम्र गिनने की आँखें नहीं होतीं। प्यार दो लोगों के बीच होता है।

इस्वातिनी देश

बता दें कि दक्षिण अफ्रीका का इस्वातिनी एक बहुत छोटा देश है। पहले इसे स्वाजीलैंड के नाम से जाना जाता था। यहाँ की आबादी 26 अगस्त 2024 तक के आँकड़े के अनुसार 12 लाख के आसापास है। यहाँ दुनिया के सबसे ज्यादा एचआईवी/एड्स संक्रमण के केस मिलते हैं। यहाँ गरीबी इतनी है कि राज्य की लगभग 60 प्रतिशत आबादी रोजाना 169 रुपए ($1.90) से भी कम पर जीवन यापन करती है।

लिफोवेला क्या होता है

इस्वातिनी के एक शहर लोबाम्बा में एक पारंपरिक समारोह को ‘लिफोवेला’ कहा जाता है। इसमें लड़कियाँ पारंपरिक परिधान पहनकर नृत्य करती हैं लेकिन सीने पर इनके कोई कपड़ा नहीं होता। इस दौरान इनके पास तलवारें, मोटे-मोटे एंकलेट, शील्ड समेत अन्य रंग-बिरंगी चीजें होती हैं। इस समारोह के जरिए नारीत्व को सेलिब्रेट किया जाता है। इसी में जूमा ने भी लिफोवेला के रूप में डांस किया था और उसके बाद शादी का ऐलान हुआ। इस बार इस कार्यक्रम में 5000 से भी ज्यादा लोग शामिल थे।

झारखंड के आतंकी डॉक्टर ने पहाड़ियों के बीच अल-कायदा का आत्मघाती दस्ता तैयार करने का बनाया था प्लान, भारत में इस्लामी हुकूमत लाने का था इरादा: दिल्ली पुलिस की पूछताछ में खुलासा

झारखंड के राँची से पकड़ा गया अल कायदा का आतंकी डॉक्टर इश्तियाक फिदायीन आतंकी दस्ता तैयार कर रहा था। इश्तियाक ने इसके लिए एक पहाड़ी इलाका चुना था। यहाँ वह अपने साथी आतंकियों को लाकर हमले की ट्रेनिंग देने वाला था। यह सारे खुलासे दिल्ली पुलिस के सामने इश्तियाक और उसके साथी आतंकियों ने किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल डॉक्टर इश्तियाक और उसके साथी आतंकियों को इनामुल अंसारी, शाहबाज अंसारी, मोतिउर्रहमान और अल्ताफ को राँची लेकर हाल ही में पहुँची थी। दिल्ली पुलिस की टीम इनसे इनकी तैयारी के बारे जानना चाहती थी।

इन आतंकियों ने दिल्ली पुलिस को जानकारी दी कि वह राँची के चान्हो नकटा जंगल में जाते थे। यह घना जंगल है और आसपास बसाहट भी नहीं है। यहाँ होने वाली गतिविधियाँ मुश्किल से ही किसी को पता चल पाती हैं। इसीलिए आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए यह सबसे मुफीद जगह मानी गई थी।

दिल्ली पुलिस को आतंकियों ने बताया है कि उनको यहाँ हथियार चलाने के साथ ही फिदायीन बनने की ट्रेनिंग भी दी जानी थी। यह सारे आतंकी डॉक्टर इश्तियाक के ही आदेशों पर काम कर रहे थे और उन्हें ट्रेनिंग देने का काम भी आतंकी डॉक्टर का ही था। यह सभी भारत में इस्लामी राज लाना चाहते थे।

यह सारे आतंकी राँची रैडिकल ग्रुप का हिस्सा थे, इसे इश्तियाक चलाता था। बताया गया है कुछ आतंकियों को ट्रेनिंग के लिए राजस्थान भी भेजा गया था। बताया गया कि दिल्ली पुलिस की यह टीम पहाड़ के अलावा एक मदरसे में भी पहुँची थी। यहाँ भी टीम ने छानबीन की थी।

गौरतलब है कि 22 अगस्त, 2024 को झारखंड ATS ने छापेमारी की थी। इसमें डॉक्टर इश्तियाक और उपरोक्त आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। यह सभी अल कायदा इंडिया सब कॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े हुए थे। यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की टिप के आधार पर हुई थी।

डॉक्टर इश्तियाक ने अपने आतंकी मॉड्यूल को उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला लिया था। इश्तियाक ने बिहार के लखीसराय से हथियार खरीदे थे। इस मामले में राजस्थान में भी छापेमारी हुई थी। यहाँ से ए के 47 राइफल, प्वाइंट 38 बोर की रिवाल्वर और छह जिंदा कारतूस , .32 बोर की 30 जिंदा कारतूस, एके 47 की 30 कारतूस, डमी इंसास, एयर राइफल, आयरन एल्बो पाइप, हैंड ग्रेनेड समेत अन्य चीजें जब्त की गई थीं।

‘सेक्स स्लेव’ बना किसी से 1 साल तक रेप करता रहा फिल्म डायरेक्टर, किसी ने भागकर खुद को बचाया: मॉलीवुड हो या बॉलीवुड, हिरोइनों का एक जैसा शोषण

हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद टीवी इंडस्ट्री में हलचल मच गई है। इंडस्ट्री से जुड़ी पुरानी और नई अभिनेत्रियाँ खुलकर अपने साथ हुए यौन शोषण पर शिकायतें कर रहीं। लोग आरोपितों के नाम पढ़-सुनकर हैरान हुए जा रहे हैं। किसी को यकीन नहीं हो पा रहा कि इतनी ऊँचाई पर पहुँचे लोगों का सच कितना काला है। हाल में मलयालम की एक और अभिनेत्री ने तमिल डायरेक्टर के खिलाफ मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। वहीं हिंदी टीवी इंडस्ट्री का जाना-माना नाम शिल्पा शिंदे ने भी खुलासा किया है कि करियर के शुरुआती दिनों में उनका यौन शोषण हुआ था।

पहले बात करते हैं मलयालम एक्ट्रेस सौम्या के आरोपों की। सौम्या ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि एक तमिल डायरेक्टर जो दुनिया के आगे उन्हें बेटी बेटी कहता था उसी ने उसका मानसिक, शारीरिक और यौन शोषण किया। सौम्या ने एनडीटीवी को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वो जब 18 साल की थीं तब पहली बार उस डायरेक्टर से मिली थीं। वो दुनिया के सामने उन्हें बेटी कहता था और दूसरी तरफ उनका रेप करता था।

बेटी बोलकर प्राइवेट पार्ट में डालता था रॉड

सौम्या के मुताबिक, उस डायरेक्टर ने उन्हें बिलकुल सेक्स स्लेव बनाकर रखा था जिसके साथ वो जो चाहे वो कर कर रहा था। वह अपने आनंद के लिए उनके प्राइवेट पार्ट में रॉड तक डालता था। उन्होंने बताया, “मैं 18 साल की थी। कॉलेज के प्रथम वर्ष में। मेरे घरवालों को फिल्मों के बारे में कुछ भी ज्यादा नहीं पता था। मुझे मेरे कॉलेज थिएटर वाले कॉन्टैक्ट से फिल्म करने का अवसर मिला।” उन्होंने बताया कि घर में विद्रोही स्वभाव का होने की वजह से उन्हें डायरेक्टर के परिवार में अच्छा लगने लगा था क्योंकि वो उन्हें खाना-पीना आदि देते थे। लेकिन एक दिन जब डायरेक्टर की पत्नी घर पर नहीं थी, तब डायरेक्टर ने उन्हें अपने पास बुलाया और बेटी बोलकर किस किया।

एक्ट्रेस के मुताबिक वो इस घटना से सदमे में आ गई थीं। उन्हें इस बारे में अपने दोस्तों को बताना था लेकिन वो शर्मा से किसी को कुछ नहीं बता पाईं। उन्हें लगा शायद उन्हें ही कुछ कुछ गलत लगा है वो लगातार उस व्यक्ति से अच्छा बर्ताव करती रहीं और प्रैक्टिस पर जाना भी बंद नहीं दिया। धीरे-धीरे उस व्यक्ति ने मेरे शरीर का फायदा उठाना शुरू कर दिया। एक समय आया उसने मेरे साथ जबरदस्ती की और मेरा रेप किया। बाद में ये सब एक साल तक चलता रहा।

सौम्या के अनुसार, वो दुनिया के आगे तो उन्हें बेटी कहता था लेकिन अकेले में उनका रेप करता था। उनका दिमाग इसी सोच में रहता था कि आखिर ये सब चल क्या रहा है। उनके साथ हो क्या रहा है। इस इंटरव्यू में उन्होंने ये भी बताया वो डायरेक्टर इनके प्राइवेट पार्ट में रॉड तक डाल देता था। सौम्या ने बोला कि उनके साथ ये सब होता था और इसमें उस डायरेक्टर को मजा आता था। उन्होंने बताया कि जिस डायरेक्टर ने उनके साथ ये सब किया वो उस समय 40 साल का था और वो 18 की थीं। उन्हें इस घटना से उभरने में 30 साल लग गए।

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहीं भी सौम्या ने उस डायरेक्टर के नाम का खुलासा नहीं किया जिसने उनके साथ ऐसी घिनौनी हरकत की थीं। उन्होंने कहा है कि वे डायरेक्टर के नाम का खुलासा स्पेशल पुलिस फोर्स के सामने करेंगी। इसका गठन केरल सरकार ने हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद किया है।

शिल्पा शिंदे हुईं यौन शोषण की शिकार

इसी तरह शिल्पा शिंदे ने 26 साल पहले हुई घटना के बारे में बताया। उन्होंने न्यूज18 शोशा से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि एक बार उन्हें ऑडिशन की आड़ में एक फिल्ममेकर को रिझाने के लिए कहा गया था। उस समय उनके मुताबिक वह बहुत मासूम थीं और सीन के लिए तैयार हो गई थीं। हालाँकि, मामला जब आगे बढ़ने लगा, तो एहसास हुआ कि प्रोड्यूसर ने लिमिट क्रास कर दी है। इसके बाद उन्होंने तुरंत उस डायरेक्टर को धक्का दिया और वो बाहर आ गईं।

बातचीत में 46 साल की एक्ट्रेस ने कहा, “यह मेरे संघर्ष के दिनों के दौरान घटना है। 1998-99 के आसपास की बात है। मैं नाम नहीं ले सकती, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा, ‘आप ये कपड़े पहनो और ये सीन करो।’ सीन में मैंने वो कपड़े नहीं पहने। उसने मुझसे कहा कि वह मेरा बॉस है और मुझे उसे आकर्षित करना है। मैं तब बहुत मासूम थी, इसलिए मैंने यह सीन किया।’ उस शख्स ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और मैं बहुत डर गई। मैंने उसे धक्का दिया और बाहर भाग गई। सुरक्षा कर्मचारियों को एहसास हुआ कि क्या हुआ था और उन्होंने मुझे तुरंत जाने के लिए कहा। उन्होंने सोचा कि मैं बखेड़ा बनाऊँगी।” शिल्पा कहती हैं, “मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ, लेकिन मैं उनका नाम नहीं ले सकती। उनके बच्चे शायद मुझसे थोड़े छोटे हैं और अगर मैं उनका नाम रखूँगी तो उन्हें भी तकलीफ होगी।”

गौरतलब है कि फिल्मी दुनिया में महिला कलाकारों के साथ होने वाले यौन शोषण की कई घटनाएँ मीडिया में सामने आ चुकी हैं, लेकिन हेमा कमेटी रिपोर्ट के आने के बाद लगातार खुलासे हो रहे हैं जो हैरान करने वाले हैं। इससे पहले जब सोशल मीडिया पर meetoo अभियान चला था उस समय ऐसे खुलासे हुए थे।

CBI के बाद ED ने भी संदीप घोष पर कसा शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग में घर पर मारा छापा: इनके ही प्रिंसिपल रहते RG कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर की रेप के बाद हुई थी हत्या

कोलकाता में RG कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। यह छापेमारी उनके वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी करने के आरोपों के बाद की गई है। संदीप घोष के ठिकानों पर लगभग 100 मेम्बरों की एक टीम छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (6 सितम्बर, 2024) को यह छापेमारी सुबह से ही चालू हो गई थी। ED ने संदीप घोष के तीन ठिकानों की तलाश चालू की है। बताया गया है कि इनमें से एक संदीप घोष के रिश्तेदार का घर भी शामिल है। संदीप घोष के खिलाफ ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। यह छापेमारी इसी कड़ी में हुई है।

ED ने उनके खिलाफ यह मामला अस्पताल में वित्तीय गड़बड़ी करने के आरोपों के बाद दर्ज किया था। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल की मेडिकल सप्लाई और बायोमेडिकल वेस्ट तस्करी करके बांगलादेश भेजा। उनके संदीप घोष के ऊपर यहाँ तक आरोप है कि वह लाशों की तस्करी करते हैं।

संदीप घोष के खिलाफ RG मेडिकल कॉलेज के ही पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली ने शिकायत दर्ज करवाई थी। अख्तर अली ने उनके वित्तीय अनिमितताओं के अलावा यह भी आरोप लगाया था कि वह यहाँ ठेके देने में पक्षपात करते हैं। संदीप घोष के ऊपर भाई-भतीजावाद का भी आरोप लगा था।

अख्तर अली की शिकायत के बाद इस मामले की जाँच कोलकाता पुलिस कर रही थी। बाद में इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि इसकी जाँच भी CBI करे। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की बात होने के कारण ED भी जुड़ गई थी। अब ED की जाँच आगे बढ़ गई है।

इस मामले के केंद्र रहने वाले संदीप घोष 1994 डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करके सर्जन बने थे। उन्होंने इसी RG मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई की है।  साल 2021 में वो आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल बने। इससे पहले, उन्होंने कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज में उप-प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया था।

हालाँकि संदीप घोष के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिसिंपल बनने के पीछे अलग कहानी थोड़ी आसामान्य है। आजतक के मुताबिक, जब प्रिसिंपल के पद को लेकर इंटरव्यू चल रहे थे, तो संदीप घोष का नाम 16वें स्थान पर था। लेकिन रातोंरात वो सभी कैंडिडेट्स को पीछे छोड़कर लिस्ट में टॉप पर पहुँच गए और प्रिंसिपल के पद पर नियुक्त हो गए।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को RG कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। उसका शव कॉलेज में ही पड़ा हुआ मिला था। इस मामले में कॉलेज और पुलिस पर पहले परिजनों को गुमराह करने का आरोप लगा था। मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया था। इस मामले में संदीप घोष भी हिरासत में हैं।

संजौली से कसुम्पटी तक सड़क पर हिंदू, क्या शिमला में मस्जिदों पर चलेगा बुलडोजर? जानिए अपने ही मंत्री का कॉन्ग्रेसी क्यों कर रहे विरोध, रोहिंग्या मुस्लिमों-लव जिहाद से क्या है कनेक्शन

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बनी एक अवैध मस्जिद को लेकर हिन्दू सड़कों पर हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इस अवैध निर्माण को तोड़ने की माँग कर रहे हैं। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने भी माना है कि यह मस्जिद अवैध रूप से बनाई गई है। राज्य सरकार मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने हिमाचल प्रदेश में रोहिंग्या और बांग्लादेशी आ गए हैं। उन्होंने इसको लेकर कार्रवाई की बात की है। वहीं कॉन्ग्रेस के ही एक विधायक इस मस्जिद के बचाव में उतरे हैं।

संजौली मस्जिद को लेकर क्या है विवाद?

राजधानी शिमला में बनी संजौली की मस्जिद में अवैध निर्माण को हटाने की लम्बे समय से माँग चल रही है। यह मामला हाल ही में मारपीट की एक घटना के बाद और गरमा गया। दरअसल, 31 अगस्त, 2024 को एक स्थानीय युवक यशपाल की मल्याना में मुस्लिम लड़कों से कहासुनी हुई। इसके बाद मुस्लिम हिंसक हो गए, उन्होंने यशपाल पर हमला कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमला करने वाले यह युवक कुछ देर बाद संजौली की मस्जिद में छुप गए।

इसके बाद आसपास के लोगों का गुस्सा भड़क गया। स्थानीय लोग यहाँ इकट्ठा होकर इन युवकों पर कार्रवाई करने की माँग करने लगे। इसको लेकर पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को पकड़ा, जिसमें 2 नाबालिग हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम गुलनवाज, सारिक, सैफ अली और रोहित हैं। इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है।

अवैध निर्माण को लेकर उठी आवाज

इस पूरे विवाद के केंद्र में शिमला के संजौली में बनी अवैध मस्जिद आई। इसको लेकर हिन्दू संगठन और स्थानीय संगठन सड़कों पर उतरे और इसे तोड़ने की माँग की। उन्होंने कहा कि इसका निर्माण पूरी तरीके से अवैध है और इसकी अनुमति प्रशासन से नहीं ली गई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली की यह मस्जिद पहले कच्ची थी और मात्र दो मंजिल की थी। लेकिन 2010 के बाद इसमें तेजी से पक्का निर्माण किया जाने लगा। देखते देखते यह मस्जिद पाँच मंजिल तक पहुँच गई।

इस मामले में राज्य सरकार ने बताया कि 2010 में जब इस मस्जिद में अवैध निर्माण चालू हुआ तो शिमला नगर निगम ने नोटिस भी भेजे लेकिन निर्माण नहीं रुका। मस्जिद के निर्माण रोकने को लेकर 30-35 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके आसपास एक अवैध निर्माण को शिमला नगर निगम ने तोड़ा भी था। फिर भी यह पाँच मंजिल मस्जिद शहर के बीचों-बीच खड़ी कर दी गई।

स्थानीय लोग इस निर्माण से गुस्सा हैं। उनका कहना है कि यहाँ नमाज पढ़ने के लिए आने वालों की सँख्या लगातार बढ़ रही है। यहाँ आने वाले कुछ लोगों पर आसपास के घरों में ताकाझाकी के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यहाँ बाहरी लोग आकर माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। संजौली की इस मस्जिद को लेकर कोर्ट में भी मामला चल रहा है। बताया गया है कि इस मस्जिद के निर्माण में सलीम खान नाम के व्यक्ति का सबसे बड़ा रोल है। वह सहारनपुर का बताया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस के मंत्री-विधायक आपस में भिड़े

अवैध मस्जिद और राज्य में अवैध लोगों की घुसपैठ को लेकर हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के विधायक और मंत्री ही आपस में टकरा गए हैं। कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इसको लेकर विधानसभा में स्थिति साफ़ की है। अनिरुद्ध सिंह ने इसको लेकर कहा, “ये कैसी स्थिति उत्पन्न हो रही प्रदेश में, लगातार बाहरी लोग आ रहे हैं, जमात के लोग आ रहे हैं। क्या यह रोहिंग्या मुस्लिम हैं। मैं खुद ऐसे लोगों को जानता हूँ जो बांग्लादेशी हैं। इन सबका सत्यापन होना चाहिए।”

अनिरुद्ध सिंह ने बताया, “2010 में इस मस्जिद को लेकर काम चालू हुआ, मेरे पास रिकॉर्ड है। इसमें अवैध निर्माण किया गया। 2500 स्क्वेयर फीट का निर्माण किया गया। इसके बाद 2012 में भी यही बात आई। 2010 में मामला चल रहा था लेकिन 2019 तक चार और मंजिल चल गई…संजौली बाजार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है। चोरियाँ हो रही हैं। लव जिहाद जैसी घटनाएँ हो रही हैं, जो प्रदेश और देश के लिए खतरनाक हैं। इस मस्जिद का अवैध निर्माण हुआ है।”

अनिरुद्ध सिंह ने खुले तौर पर मस्जिद को अवैध बताया है और इस पर कार्रवाई की बात कही है। उनके अलावा कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी इसे अवैध बताया है। जहाँ कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री इस मामले में स्थाने लोगों की बातों का समर्थन कर रहे हैं वहीं कॉन्ग्रेस के ही एक विधायक इसे बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। कॉन्ग्रेस विधायक हरीश जनारथा ने कहा है कि तनाव मस्जिद की वजह से नहीं हुआ है और यह मस्जिद काफी पुरानी है। उन्होंने कहा मस्जिद वक्फ बोर्ड की जमीन पर है।

भाजपा ने कहा- कार्रवाई एक दिन का काम

अवैध मस्जिद के मुद्दे पर भाजपा भी अब हमलावर हो गई है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, “बाहर से लोग आए हैं, उनका सत्यापन बहुत जरूरी है। जहाँ तक मस्जिद की बात है, इसके बारे में स्पष्ट है कि 2010 में नगर निगम में शिकायत हुई है, इन्हें नोटिस भेजे गए हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य 4 मंजिल तक पहुँच गया। एक दरजी आया था, उसने यह इमारत खड़ी कर दी। धीरे धीरे उसने अपने लोगों को बुलाया और अब वहाँ बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा, “जो लोग बाहर से आते हैं, उनकी कोई पहचान नहीं है। निर्माण सरकारी जमीन पर है, निर्माण अवैध है और उनके पास कोई मंजूरी नहीं है। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार इस मामले को रफा दफा करना चाहती है। कॉन्ग्रेस संविधान की बात करती है, उस दिन संविधान बचेगा ही नहीं जब हिन्दू कम हो जाएँगे।”

शिमला की इस मस्जिद का यह मामला अब गरमाया हुआ है और हिन्दू संगठन अवैध निर्माण को हटाने के लिए प्रतिबद्ध हो गए हैं। वहीं कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी इस पर मुखर हैं। हालाँकि, अभी तक मस्जिद पर कार्रवाई की कोई बात सामने नहीं आई है। इस बीच शिमला के कसुम्पटी में भी एक मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर विवाद चालू हो गया है।