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हेयर ड्रेसर से लेकर जूनियर आर्टिस्ट तक, मलयालम इंडस्ट्री में लड़के भी शिकार… अभिनेत्री ने बताया – 11वीं में थी जब अकेले कमरे में ले गया था डायरेक्टर

अगस्त 2024 में हेमा कमेटी की रिपोर्ट सामने आई, जिसके बाद पूरी मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में हंगामा मच गया। केरल की फिल्मी दुनिया से जुड़े कलाकारों के यौन शोषण, उत्पीड़न, छेड़छाड़, कास्टिंग काउच के मामले निकलकर सामने आने लगे। अब तक करीब 2 दर्जन मामले सामने आ चुके हैं, तो हेमा कमेटी की रिपोर्ट में कई कलाकारों ने अपनी उत्पीड़न को साझा किया है।

इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद कुछ कलाकार खुलकर सामने आए और आरोपितों को सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा कर दिया। फिल्मी दुनिया के ऐसे कलाकारों, डायरेक्टरों पर आरोप लगे, जो अब तक उस दुनिया के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर जाने जाते थे। इनमें रंजीत जैसे निर्देशक, वीनू जैसे प्रोड्यूसर, जयसूर्या और सिद्दीकी जैसे बड़े एक्टर का नाम सामने आया।

इस बीच, भास्कर की पत्रकार शिवांगी सक्सेना ने केरल की यात्रा की और कई पीड़ितों की आपबीती अपनी रिपोर्ट के माध्यम से साझा की। पीड़ितों ने बताया है कि कैसे उत्पीड़कों के सामने न झुकने और उनके साथ न सोने पर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से ही बैन कर दिया गया। चूँकि ये मामले यौन उत्पीड़न के हैं, इसलिए पीड़ितों के नाम बदल दिए गए हैं। ऑपइंडिया उनमें से कुछ पीड़ितों की आपबीती साझा कर रहा है।

आपबीती नंबर-1: 11वीं की छात्रा से प्रोड्यूसर ने माँगा सेक्सुअल फेवर

मलयालम फिल्म एक्ट्रेस और स्क्रीन राइटर वेदिका (बदला हुआ नाम) ने बताया कि साल 2004 में, जब वो सातवीं कक्षा में थी, तो चाइल्ड एक्ट्रेस के रोल के लिए अपने पिता के साथ एक ऑडिशन में हिस्सा लेने पहुँची थी। वहाँ एक असिस्टेंट डायरेक्टर ने उन्हें फुसलाने और फिर उनके रेप की कोशिश की। किसी तरह से वो बचकर भागी और पिता को बताया, जिसके बाद से उनके घर वालों ने एक्टिंग से दूर रहने की हिदायत दे दी। लेकिन जब वो 11वीं कक्षा में थी, तो जाने माने फिल्म प्रोड्यूसर वीनू के बारे में सुना। वो एक फिल्म के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे। किसी संपर्क के जरिए वीनू से संपर्क किया गया, तो वो सीधे एक्ट्रेस के घर ही पहुँच गए। कुछ सीन की एक्टिंग के ट्रायल के बाद प्रोड्यूसर वीनू उन्हें उनके ही मम्मी-पापा के सामने दूसरे कमरे में लेकर गए और फिर फिल्म में काम देने के बदले सीधे सेक्सुअल फेवर माँग लिया।

एक्ट्रेस ने अपनी आपबीती हेमा कमेटी के सामने भी बयाँ की है। एक्ट्रेस ने बताया, ‘वीनू की सेक्सुअल डिमांड के बारे में माता-पिता को बताया तो उन्हें अपनी ही बेटी पर यकीन नहीं हुआ। वहीं, वीनू मेरे पिता पर दबाव डालते रहे, लेकिन मैंने मना कर दिया।’ इसके बाद इंडस्ट्री में करीब 9 फिल्मों में काम करने के बाद एक्ट्रेस ने इंडस्ट्री ही छोड़ दी। पढ़ाई की और शादी भी हो गई। कई सालों के बाद वो डिप्रेशन में जाने लगीं, तो डॉक्टरों की सलाह पर एक बार फिर से साल 2018 में इंडस्ट्री में वापसी की, लेकिन स्क्रीन राइटर के तौर पर। उन्होंने अपने एक्टिंग के सपनों को ही मार दिया।

एक्ट्रेस वेदिका ने कहा, “अब कास्टिंग काउच का तरीका बदल रहा है। पहले वो आपकी तारीफ करेंगे और बड़े-बड़े सपने दिखाएँगे, और जब आप बड़े सपनों में खोने लगेंगे, तो उन्हें पूरा करने के लिए आपसे सेक्सुअल फेवर माँगा जाएगा।” उन्होंने कहा कि मतलब निकल जाने (संबंध बन जाने) के बाद कोई एक्टर-डायरेक्टर पलटकर देखता तक नहीं और न ही फोन उठाता है।

वेदिका अब केरल की फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था वूमेन कलेक्टिव इन सिनेमा (CWW) से जुड़ी हैं। इसका गठन साल 2017 में मलयालम फिल्मों में सुपरस्टार की हैसियत रखने वाले दिलीप द्वारा बड़ी एक्टर भावना पर हमला करवाने के मामले के सामने आने के बाद हुआ था। ये संस्था महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है। इसी संस्था की माँग पर केरल की सरकार ने हेमा कमेटी गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट सालों तक दबी रही और जब अब सामने आई है, तो मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के स्याह पक्ष को सामने रख रही है। हालाँकि वेदिका ने ये भी कहा कि उन्होंने जब वूमेन कलेक्टिव इन सिनेमा नाम की इस महिलावादी संस्था के साथ अपना नाता जोड़ा, तो इंडस्ट्री से उनका लगभग बहिष्कार ही कर दिया गया।

हैरानी की बात ये है कि एक्टर दिलीप ने जिस एक्ट्रेस भावना पर हमला कराया, उस पीड़ित एक्ट्रेस को मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से ही 5 सालों तक दूर रहना पड़ा, वहीं जेल में रहकर लौटा दिलीप एक से बढ़कर एक बड़ी फिल्में कर रहा है। जेल में कुछ दिन बिताने के अलावा उसका कुछ नहीं बिगड़ा, भले ही उसे इंडस्ट्री में ब्लैकलिस्टेड करने जैसी बातें हुई हो, लेकिन दिलीप इंडस्ट्री में फिर से उसी ताकत के साथ काम कर रहा है, जबकि करीब 5 साल बाद मलयालय सिनेमा में लौटी भावना महज 2 ही फिल्में कर सकीं।

आपबीती नंबर 2: जयसूर्या ने अपनी ओर खींचा, मना करने पर इंडस्ट्री से हुई बैन

जूनियर आर्टिस्ट संजना ने हेमा कमेटी की रिपोर्ट सामने आकर खुल कर अपनी आपबीती मीडिया के सामने रखी है। उन्होंने बड़े एक्टरों में गिने जाने वाले जयसूर्या की सच्चाई बयाँ की। संजना डेढ़ दशक से इंडस्ट्री में हैं। साल 2012 में उनकी पहली फिल्म रिलीज हुई थी। अगले साल यानी 2013 में वो डायरेक्टर अविरा रिबेका की फिल्म पिगमैन की शूटिंग कर रही थी, तभी डायरेक्टर ने उन्हें एक्टर जयसूर्या और एक्ट्रेस राम्या नसीबन से मिलवाया था। पिगमैन फिल्म में ये दोनों लीड रोल में थे। यहाँ से संजना के साथ जो-कुछ भी बीता, वो बेहद परेशान करने वाला रहा।

संजना ने कहा, “एक बाद मैं मेकअप के बाद सेट पर जा रही थी, तभी जयसूर्या ने मुझे अपनी ओर खींच लिया। मैं रोने लगी और धक्का दी, तब जयसूर्या ने मुझे छोड़ा। लेकिन जयसूर्या मेरी तारीफ करके मुझे फाँसने की कोशिश करता रहा। उसने मुझे कहा कि वो मुझे पसंद करता है, साथ ही ‘आई लव यू’ भी कहा, जबकि वो शादीशुदा था।” संजना ने कहा कि उन्होंने अपने पति से भी ये बात बताई थी, जिसके बाद पति ने कहा था कि जयसूर्या बड़ा आदमी है, हम उसका कुछ नहीं कर सकते।

इस घटनाक्रम के बाद संजना को काम मिलना बंद हो गया। यहाँ तक कि साल 2018 में उन्हें जब एक फिल्म ‘वासवदता’ के लिए चुना गया और पोस्टर तक जारी हो गए, तब उस फिल्म के एक प्रोड्यूसर ने मेरे साथ ‘एडजस्टमेंट’ की बात की। संजना ने कहा, “इंडस्ट्री में 2013 की घटना के बाद काम मिलना बंद हो गया। पति की 2015 में मौत हो गई। मुझे ज्यादा उम्र का बोलकर फिल्मों से निकाल दिया गया, लेकिन वासवदता फिल्म के प्रोड्यूसर ने मुझे अपने साथ सोने का ऑफर दिया। मैंने मना कर दिया। मुझे बाद में ये कहकर निकाल दिया गया, कि मैं रोल के लिए फिट ही नहीं हूँ।”

संजना ने सुपरस्टार ममूटी की फिल्म से जुड़ा किस्सा बताया। संजना ने कहा, “साल 2019 में डायरेक्टर बलसि थॉमस ममूटी के साथ फिल्म बना रहे थे। ममूटी के साथ काम करने का मेरा सपना था। मुझे फिल्म में कैंसर के मरीज का रोल करना था। मुझे कहा गया कि मेरा वजन ज्यादा है। 1 महीने में 10 किलो वजन करने का टारगेट दिया गया। मैंने खूब मेहनत की, लेकिन वजन कम नहीं हुआ। जिसके बाद मैंने 2-3 सर्जरी कराई। पेट से फैट निकाला गया, ब्रेस्ट की भी सर्जरी हुई, इसके बावजूद मेरे हाथ से रोल निकल गया, जबकि सर्जरी के साइड इफेक्ट्स मैं आज तक झेल रही हूँ।”

आपबीती नंबर 3: डायरेक्टर रंजीत ने की ‘कुकर्म’ की कोशिश

मलयालम इंडस्ट्री में स्ट्रगल कर रहे एक्टर्स के साथ और भी बुरा व्यवहार होता है। आसिफ नाम के एक्टर ने बताया कि वो सिनेमा लाइन में आने से पहले ही कास्टिंग काउच का शिकार हो गए थे और उनका शिकार करने वाला कोई और नहीं, बल्कि मलयालम इंडस्ट्री के सबसे बड़े डायरेक्टर में से एक रंजीत ही थे। बता दें कि रंजीत कुछ दिन पहले तक मलयालम सिनेमा से जुड़ी सरकारी संस्थान चित्रलेखा के अध्यक्ष थे, लेकिन यौन शोषण के आरोपों के बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा।

आसिफ नाम के एक्टर ने बताया, “साल 2012 में रंजीत की फिल्म की शूटिंग देखने गया था। भीड़ में कहीं से रंजीत की नजर मुझपर पड़ गई। एक क्रू मेंबर के सहारे रंजीत ने मुझे बुलाया और फिल्म में रोल देने की पेशकश की। उसी क्रू मेंबर ने मुझे ऑडिशन के लिए रंजीत के होटल में छोड़ दिया। वहाँ रंजीत ने अपना नंबर टिश्यू पेपर पर लिखकर दिया और हिदायत दी कि सिर्फ मैसेज करना है, कॉल नहीं। इसके बाद रंजीत ने मुझे बेंगलुरु बुलाया और होटल में गलत तरीके से सीढ़ियों के रास्ते चौथे फ्लोर पर एंट्री दिलाई, क्योंकि होटल स्टाफ ने सामने से एंट्री देने से मना कर दिया।” इसके बाद आसिफ ने जो कुछ कहा, वो हैरान करने वाला है।

आसिफ ने कहा, “रंजीत ने मुझसे कपड़े उतारने को कहा और कहा कि वो रंजीत की बॉडी देखना चाहते ङैं। रंजीत ने मेरी तारीफ की और मुझे गलत तरीके से छूने लगे। उन्होंने जबरदस्ती मेरे कपड़े उतरवाए और तस्वीर खींचकर एक एक्ट्रेस को भेजी।” आसिफ ने कहा कि “मैंने साल 2015 में मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (AMMA) में रंजीत की शिकायत के लिए संपर्क किया। वहाँ AMMA के जनरल सेक्रेटरी एडवेला बाबू मिले। उन्होंने मदद का भरोसा दिया। कुछ समय बाद उन्होंने मेरी तस्वीरें माँगी और काम दिलाने का भी भरोसा दिया। उन्होंने मुझे कोच्चि बुलाया, लेकिन मैं समझ गया था कि वो भी रंजीत की तरह मुझे इस्तेमाल करना चाहते थे। मैं नहीं गया। हेमा कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद मैंने बड़ी हिम्मत करके अपनी आपबीती सार्वजनिक की है।”

भास्कर की रिपोर्ट में मेकअप आर्टिस्ट को इंडस्ट्री से बैन करने वाली आपबीती भी साझा की गई है। वहीं, विद्या नाम की एक्ट्रेस ने बताया कि कैसे सेक्सुअल फेवर के लिए कलाकारों को अप्रोच किया जाता है। विद्या ने एक्टर एलिन्सिएर लोपेज पर यौन हमले का आरोप लगाया है। उन्होंने एलिन्सिएर लोपेज के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है। विद्या ने बताया कि लोपेज साल 2018 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान रात के समय मेरे कमरे में घुस आया और मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। मैंने विरोध किया, तो मुझे काम मिलना ही बंद हो गया। पीड़ित ने बताया कि जब उसने एफआईआर दर्ज कराई, तो उसे सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया।

कई पीड़ितों ने बताया है कि उनका सड़कों पर पीछा किया जाता है। वो किससे मिलते हैं, क्यों मिलते हैं, इस पर नजर रखी जाती है। इंडस्ट्री में एजेंट्स की भरमार है। वो मौका ढूँढते हैं कि कब उनके चंगुल में नया शिकार फंसे।

आपबीती नंबर 4: बेटी बोलकर डायरेक्टर ने बनाया सेक्स स्लेव

एक इंटरव्यू में मलयालम एक्ट्रेस सौम्या ने बचपन में अपने साथ हुए यौन और मानसिक शोषण का खुलासा किया था। एक्ट्रेस ने बताया कि 18 साल की उम्र में एक डायरेक्टर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम दिया था। उस डायरेक्टर और उसकी पत्नी ने सौम्या के पेरेंट्स के साथ उन्हें फिल्मों में जाने देने को लेकर जबरदस्ती की। डायरेक्टर सौम्या को अपनी बेटी कहता था, लेकिन अकेले में उनके साथ ऐसी हैवानों वाली हरकतें करता था, जिससे उबरने में एक्ट्रेस को 30 साल लग गए।

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में सौम्या ने बताया, ‘मैं 18 साल की थी। मेरा कॉलेज का पहला साल था। मेरे पेरेंट्स को फिल्मों के बारे में नहीं पता था। मुझे ये मौका (तमिल फिल्म में काम करने का) कॉलेज के थिएटर कॉन्टैक्ट से आया था।’ एक्ट्रेस ने बताया कि उन्हें लेने के लिए डायरेक्टर अपनी पत्नी के साथ आया था। पहले ही दिन से सौम्या उस शख्स के साथ सहज नहीं थीं। एक्ट्रेस ने कहा कि वक्त के साथ उन्हें समझ आया कि डायरेक्टर उन्हें अपने ‘सेक्स स्लेव’ के रूप में तैयार कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ वो उन्हें ‘अपनी बेटी’ भी कहता था।

सौम्या ने बताया कि डायरेक्टर ने मेरे साथ जबरदस्ती की और मेरा रेप किया। उन्होंने बताया, “ये सब एक साल तक चला जब मैं कॉलेज में थी।” सौम्या का कहना ये भी है कि डायरेक्टर ने उनके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली थी। इतना ही नहीं, डायरेक्टर सौम्या को बार-बार ‘बेटी’ कहता था और ये भी कहता था कि वो उनके साथ बच्चा करना चाहता है। सौम्या ने कहा, “ये सब सहने के बाद मुझे ‘शर्म’ की भावना से उबरने में 30 सालों का वक्त लगा। मैं सभी पीड़िताओं से कहती हूँ कि अपने साथ हो रही चीजों की शिकायत करें।” एक्ट्रेस सौम्या ने इंटरव्यू के दौरान डायरेक्टर के नाम का खुलासा नहीं किया। उनका कहना है कि वो जल्द केरल सरकार की बनाई स्पेशल पुलिस टीम के सामने उस शख्स की पहचान का खुलासा करेंगी।

गौरतलब है कि फरवरी, 2017 में मलयालम सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस भावना पर हमला हुआ था। हमले का आरोप एक्टर दिलीप पर लगा था, जो मलयालम सिनेमा के बड़े सुपरस्टार में से एक हैं। भावना की अगले महीने सगाई होने वाली थी, लेकिन दिलीप ऐसा नहीं चाहता था। इस मामले में जुलाई में दिलीप को गिरफ्तार किया गया था। उसके कुछ ही महीनों बाद उसे जमानत मिल गई थी।

भावना मलयालम सिनेमा से 5 साल तक गायब हो गई थी, जबकि दिलीप जेल से छूटने के बाद भी बड़ी फिल्में करता रहा। इसी घटना के बाद CWW नाम का संगठन बनाया गया था। सरकार ने फिर हेमा कमेटी का गठन किया था। हेमा कमेटी ने 2019 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी, लेकिन करीब 5 साल के बाद काफी नामों को छिपाने के बाद ये रिपोर्ट बाहर आई और फिर मलयालम इंडस्ट्री से जुड़े काले पन्ने एक के बाद एक खुलते गए।

‘वहाँ चप्पल को भी दिया जाता है सम्मान, कहते हैं पदवेश’: मोटिवेशनल स्पीकर हर्षवर्धन जैन ने RSS को दिया सफलता का श्रेय, कहा – 16 की उम्र में जाता था शाखा

मोटिवेशनल स्पीकर हर्षवर्धन जैन को अक्सर आपने कई वीडियो में देखा होगा। उनके वीडियो अक्सर वायरल होते हैं, साथ ही उनके द्वारा सुनाए जाने वाले किस्से-कहानियाँ भी ख़ासे रोचक होते हैं। अब हर्षवर्धन जैन ने YouTube पर ‘The Rahul Malodia Podcast’ नामक चैनल पर अपने जीवन की यात्रा को लेकर बात की है। इस दौरान उनसे पूछा गया कि आखिर एक प्रेरक वक्ता बनने की उनकी यात्रा की शुरुआत कहाँ से हुई? इस दौरान उन्होंने बताया कि बचपन में वो काफी नटखट हुआ करते थे।

उन्होंने बताया कि 1995 में 15 वर्ष की उम्र में उन्हें अपने चाचा के यहाँ बीकानेर भेज दिया गया था और उनकी दसवीं की पढ़ाई वहीं से हुई। उन्होंने बताया कि उसी साल उन्हें आटा, दाल और चावल के भा पता चले, वो एक अनुशासित परिवार था और वो अपने घर से दूर थे, ऐसे में उन्हें काफी चीजें सीखने को मिलीं। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष जब वो जयपुर लौटे तो उनके भीतर आज जो वो मोटिवेशनल स्पीकर हैं उसका बीज तब डला जब वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में गए।

हर्षवर्धन जैन ने बताया, “16 साल की उम्र थी। उस दौरान RSS की शाखा मेरे गाँव में लगी। उस दौरान उन्होंने पूछा कि यहाँ खेलता कौन है, तो वो मेरे पास आए। उन्होंने सुबह खेलने के लिए बुलाया। मैं 150 लड़कों के साथ सुबह पहुँचा तो वो ख़ुश हो गए कि ये भीड़ खड़ी कर सकता है। वहाँ चप्पलें खोलने का भी तरीका था, किसी चीज को तवज्जो देने का तरीका था। ध्वज नहीं था तो ध्वज बनाया गया और उन्होंने इसे प्रणाम किया। चप्पलों को पदवेश बोला जाता था। इसे खोलने का भी एक सिस्टम था।

हर्षवर्धन जैन ने कहा कि चप्पलों को भी आदर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि एक शब्द पर अच्छे से पंक्ति बन जाती है। बकौल हर्षवर्धन जैन, उन्होंने RSS की शाखा के उस डेढ़-दो घंटे ने उनका जीवन बदल दिया और जैसे उन्होंने सावधान की मुद्रा में बुलंद आवाज़ में परिचय दिया, वो देख कर उन्होंने भी परिचय दिया और उन्होंने जो बोला वो 200 लोगों तक अंत तक पहुँचा। उन्होंने बताया कि वहीं से गीत-भजन सीखा, चीजों को संगठित करना सीखा और वहीं वक्ता होने का बीज डला। वीडियो में 20 मिनट के बाद आप ये वाला हिस्सा देख सकते हैं।

जंगल में लकड़ी चुनने बेटी को ले गया था सौतेला पिता, वहाँ कर दिया रेप: सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा को घटाकर कर दिया 10 साल

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति की अपनी सौतेली बेटी के साथ बार-बार बलात्कार करने के दोष को बरकरार रखा है। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी सजा को आजीवन कारावास से घटाकर 10 साल कर दिया। उस पर लगाए गए 2 लाख रुपए के जुर्माने को बरकरार रखा। आजीवन कारावास की सजा निचली अदालत ने सुनाई थी, जिसे केरल हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ ने कहा कि व्यक्ति की दोषसिद्धि के संबंध में निचली अदालत और उसके बाद केरल हाई कोर्ट के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। अदालत ने कहा कि सौतेले पिता की आयु 40 वर्ष से अधिक है और वह पहले ही 8 साल से अधिक समय जेल में बीता चुका है। ऐसे में जेल की सजा कम करना उचित है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने 3 सितंबर 2024 के अपने आदेश में कहा, “मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता पर विचार करने के बाद हम सजा को घटाकर 10 वर्ष करते हैं और जुर्माने की राशि को दो लाख रुपए ही बरकरार रखते हैं। अपीलकर्ता (दोषी सौतेला पिता) को आज से एक वर्ष की अवधि के भीतर उक्त जुर्माने की राशि का भुगतान करना होगा।”

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा, “यदि अपीलकर्ता द्वारा निर्धारित समय के भीतर जुर्माना राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो अपीलकर्ता को एक वर्ष (दो वर्ष के सश्रम कारावास के स्थान पर) की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।” दरअसल, दोषी व्यक्ति ने तर्क दिया था कि उसके पास 2 लाख रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भरने के लिए साधन नहीं है। हालाँकि, कोर्ट ने इसे कम करने से इनकार कर दिया।

दरअसल, दोषी सौतेले पिता ने सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की थी। उसे अपनी सौतेली बेटी के साथ जंगल में बलात्कार करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था और इसके लिए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सौतेला पिता अपनी बेटी को जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने के लिए अपने साथ जंगल लेकर गया था।

पीड़िता ने कोर्ट को बताया था कि उसके सौतेले पिता ने पहले भी उसी जंगल में और उसके घर पर उसके साथ बलात्कार किया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 376 (बलात्कार के लिए सजा) के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया था। इसके बाद पिता इस मामले को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

उज्जैन में दिन-दहाड़े रेप की वारदात का मोहम्मद सलीम ने बनाया था वीडियो, व्हाट्सऐप ग्रुप्स में किया था शेयर: मध्य प्रदेश पुलिस ने उसके घर से किया गिरफ्तार

उज्जैन के व्यस्त इलाके में फुटपाथ पर दिन-दहाड़े एक महिला से रेप की वारदात का वीडियो बनाने और उसे वायरल करने वाले शख्स मोहम्मद सलीम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जानकारी मिली थी कि वीडियो बनाने वाला शख्स नागदा की बस से कोयला फाटक चौराहे पर उतरा था। इसके बाद पुलिस ने नागदा जाकर उसके घर से सलीम को गिरफ्तार कर लिया।

वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दल मुख्यमंत्री मोहन यादव पर सवाल उठा रहे थे, क्योंकि उज्जैन उनका ही विधानसभा क्षेत्र है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा था कि इस वारदात का वीडियो बनाने वाले और उसे वायरल करने वालों पर कार्रवाई जाएगी। इसके बाद पुलिस की टीम इन लोगों की खोज में लग गई थी। वहीं, रेप करने वाले शख्स को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि वीडियो बनाने और वायरल करने वाले आरोपित मोहम्मद सलीम को उसके घर नागदा के प्रकाश नगर से गिरफ्तार किया है। जिस मोबाइल से उसने वीडियो बनाया था, पुलिस ने उसे भी जब्त कर लिया है। मामला सामने आने पर वह लगातार अपनी जगह बदल रहा था। शुक्रवार (6 सितंबर) को उसने तीन बार जगह बदली।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, सलीम पहले रतलाम गया। वहाँ से मंदसौर और फिर नागदा पहुँचा। आखिरकार पुलिस ने सलीम को देर रात उसके घर से गिरफ्तार कर लिया और उसे लेकर उज्जैन पहुँची। शर्मा ने बताया किया घटना के दिन सलीम नागदा से आई बस से कोयला फाटक चौराहे पर उतरा था। यहाँ से वह पेट्रोल पंप की ओर आया। इसी बीच महिला से हो रहे दुष्कर्म का वीडियो बना लिया।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपित सलीम ने अपने वॉट्सऐप ग्रुप में इस वीडियो शेयर किया था। अधिकारी का कहना है कि जिन लोगों ने इस वीडियो को वायरल किया था, उन सभी पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। आरोपित सलीम के खिलाफ पुलिस ने आईटी एक्ट में केस दर्ज किया है। उस पर पहले से भी एक केस दर्ज है। पुलिस उसका रिकॉर्ड खंगाल रही है।

घटना को लेकर सिटी एसपी ओमप्रकाश मिश्रा ने कहा था कि वारदात बुधवार (4 सितंबर 2024) को दोपहर 2 से 3 बजे के बीच की है। चिमनगंज थाना क्षेत्र में एक मंदिर के आसपास रहने वाली 45 साल की महिला कचरा-प्लास्टिक बीनने का काम करती है। उसने पुलिस को बताया कि घटना के दिन दोपहर को वह कोयला फाटक के पास कचरा बीन रही थी, तभी उसे एक युवक मिला।

महिला के अनुसार, उस युवक ने अपना नाम लोकेश लहोरिया बताया। लोकेश ने ​महिला को बहला-फुसला कर शराब पिलाई और उससे कहा कि वह उससे शादी करेगा और अपने साथ रखेगा। इसके बाद वह महिला को बहाने से फुटपाथ पर लगे डस्टबिन की आड़ में ले गया और महिला से दुष्कर्म किया। इसके बाद वह धमकी देकर भाग गया। आरोपित लोकेश मजदूरी के साथ-साथ सब्जी का ठेला लगाता है।

चंगेज खान ने OBC महिला का किया यौन शोषण, उठा रहा था दलित विधवा को… हुई दम भर पिटाई: आरोपित के समर्थन में मुस्लिम भीड़ + भीम आर्मी, घेरा थाना

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में गुस्साई भीड़ और चंगेज खान नामक युवक के बीच मारपीट हो रही है। पुलिस ने इस घटना पर FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (1 सितंबर 2024) की है। चंगेज खान पर एक हिन्दू महिला से घर में घुस कर छेड़खानी की FIR पहले से दर्ज है। हालाँकि मुस्लिम समुदाय की एक भीड़ ने पीड़िता महिला के बजाय चंगेज के समर्थन में प्रदर्शन किया है। ऑपइंडिया ने इस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की छानबीन की।

वायरल वीडियो लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड का है। इसे इस्लामी हैंडल चंगेज की ‘मॉब लिंचिंग’ बताते हुए शेयर कर रहे हैं। वीडियो में शुरुआत में नोकझोक के बाद भीड़ द्वारा चंगेज खान की पिटाई की जाती है। वीडियो के अंत में चंगेज अपनी किसी हरकत पर माफ़ी भी माँग रहा है। पीलीभीत पुलिस के मुताबिक इस मामले में केस दर्ज करके जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

चंगेज की अम्मी ने दर्ज करवाई है FIR

चंगेज की अम्मी कैसर जहाँ ने गुरुवार (5 सितंबर 2024) को इस घटना की FIR दर्ज करवाई है। उन्होंने इसे रविवार (1 सितंबर) का मामला बताया। अपने बेटे को रोजी-रोटी कमाने वाला बताते हुए केसर जहाँ ने पिटाई का आरोप संजय मिश्रा, राजू राठौर, धीरज और दीपक सहित 10 अज्ञात लोगों पर लगाया है। केसर जहाँ की शिकायत में इन आरोपितों पर पुलिस को गाली देने, चंगेज की बाइक तोड़ने जैसे कई आरोप लगाए गए हैं।

यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190, 109, 140 (1), 351 (3), 309 (4) और 324 (4) के तहत दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। हालाँकि पूरी शिकायत में केसर जहाँ ने चंगेज की पिटाई की वजह नहीं बताई है।

दलित महिला से कर रहा था जबरदस्ती, पहला हमला उसने किया

केसर जहाँ की FIR में जिस संजय मिश्रा को मुख्य आरोपित बताया गया है, ऑपइंडिया ने उनसे बात करके उनका पक्ष जाना। संजय मिश्रा का दावा है कि चंगेज पिछले लम्बे समय से दलित वर्ग की एक विधवा महिला को परेशान कर रहा था। पीड़िता लगातार चंगेज को अनदेखा कर रही थी। हालाँकि चंगेज की आदतों में कोई सुधार नहीं हुआ। बकौल संजय मिश्रा घटना के दिन 1 सितंबर को चंगेज अपने भाई अमजद के साथ मिल कर रास्ते में पीड़िता के अपहरण का प्रयास कर रहा था। इस हरकत को हिन्दू संगठन से जुड़े एक सदस्य ने देख लिया और विरोध शुरू कर दिया।

संजय का आरोप है कि विरोध कर रहे व्यक्ति को अकेला देख कर चंगेज ने उस पर बाइक चढ़ाने का प्रयास किया। जब इस कोशिश में वह नाकाम रहा तो उसने हाथ में तमंचा लहराया और गोली चलाने का प्रयास करने लगा। चंगेज के साथ इस हरकत में उसका भाई अमजद भी शामिल बताया गया। संजय का दावा है कि हिन्दू संगठन के सदस्यों की तरफ से आत्मरक्षा में प्रयास किए गए, जो बाद में बड़े विवाद के तौर पर बदल गया। उन्होंने चंगेज पर SC/ST एक्ट सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की माँग की है।

बहन ने हिन्दू युवक और भाई ने नेपाली लड़की को कबूल करवाया इस्लाम

संजय मिश्रा का दावा है कि चंगेज का पूरा परिवार हिन्दू विरोधी कार्यों में संलिप्त है। उन्होंने बताया कि चंगेज की बहन का शर्मा समुदाय के लड़के से अफेयर था। दावा है कि पहले उस युवक की प्रॉपर्टी आदि बारी-बारी से बिकवाई गई और बाद में उसे इस्लाम कबूल करवा दिया गया। दूसरी तरफ चंगेज के एक भाई पर भी संजय मिश्रा ने आरोप लगाया है कि उसने नेपाल की रहने वाली हिन्दू लड़की को भारत में लाकर न सिर्फ खुद कई बार रेप किया बल्कि अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी संबंध बनाने पर मजबूर किया।

संजय मिश्रा आगे बताते हैं कि इसी प्रताड़ना से मजबूर होकर नेपाली लड़की ने पहले जहर खाकर मरने की कोशिश की लेकिन बच जाने पर वो जैसे-तैसे नेपाल लौट गई। हमें बताया गया कि महज कुछ हजार रुपयों की नौकरी के बावजूद अपने परिवार से साजिशन मिले पैसे से चंगेज खुद को अमीर दिखाते हुए हिन्दू लड़कियों को अपने जाल में फँसाता है। टैक्सी चलाने वाले चंगेज का भाई अमजद हिन्दू समुदाय की महिला सवारियों का मोबाइल नंबर ले लिया करता है। इसके बाद अमजद ये नंबर चंगेज को दे दिया करता है। दावा किया गया कि चंगेज के चंगुल में कम से कम 1 दर्जन हिन्दू लड़कियाँ फँसी हैं।

छेड़खानी करने हिन्दू महिला के घर में घुस गया था चंगेज

चंगेज के खिलाफ एक और FIR पीलीभीत के ही पूरनपुर थाने में 3 सितंबर 2024 को दर्ज हुई है। यह FIR OBC समुदाय की एक हिन्दू महिला ने दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि चंगेज पिछले लम्बे समय से उनको गंदे-गंदे इशारे कर रहा है। कहीं आते-जाते वह पीड़िता पर अश्लील फब्तियाँ कसता है। एक महीने पहले चंगेज पीड़िता के घर में बदनीयती से घुस गया था। तब पीड़िता घर में अकेली थी, जिस से चंगेज छेड़खानी करने लगा। खुद को बचाने के लिए पीड़िता ने शोर मचा दिया था।

पीड़िता के मुताबिक शोर मचाने से चंगेज नाराज हो गया था। उसने महिला को जान से मार डालने की धमकी दी और वहाँ से भाग गया था। तब पीड़िता ने चंगेज पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई थी। पुलिस ने यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 351 (3) के तहत दर्ज किया था। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस इस मामले की जाँच कर ही रही थी कि आरोपों के मुताबिक चंगेज का अनुसूचित जाति की एक महिला के साथ अभद्रता का मामला सामने आ गया। इसी मामले पर 1 सितंबर को हिन्दू संगठन के सदस्यों से मारपीट हो गई।

पीड़िताओं के बजाय चंगेज के लिए मुस्लिम भीड़ सड़कों पर

शुक्रवार (6 सितंबर) को मुस्लिम समुदाय के तमाम लोगों ने एकजुट होकर पूरनपुर थाने का घेराव किया। ये सभी चंगेज खान के समर्थन में जुटे थे, जो हिन्दू संगठन के सदस्यों पर एक्शन की माँग कर रहे थे। इन सभी ने बजरंग दल व अन्य हिन्दू संगठनों के सदस्यों को काफी भला-बुरा कहा। भीड़ यह भी आरोप लगा रही थी कि पुलिस प्रशासन पारदर्शिता से काम नहीं कर रहा है। इसी भीड़ ने प्रशासन को अल्टीमेटम भी दिया है कि अगर जल्द ही चंगेज के हमलावरों को जेल नहीं भेजा गया तो उग्र आंदोलन करेंगे।

हैरानी की बात यह भी है कि मुस्लिम भीड़ के अलावा भीम आर्मी भी आरोपित चंगेज खान के समर्थन में ट्वीट कर रही है, प्रशासन को धमकी दे रही है। दलितों, पिछड़ों की कथित समर्थक भीम पार्टी का दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष (भीम आर्मी छात्र संघ) जुबेर चौधरी ट्वीट कर लिखता है कि पुलिस-प्रशासन कड़ी कार्यवाही करे वरना आंदोलन किया जाएगा। उसके ट्वीट में यौन शोषण की शिकार दलित-OBC महिला के न्याय के लिए एक शब्द तक का जिक्र नहीं है।

खास बात ये रही कि इस दौरान भीड़ ने एक बार भी चंगेज पर लगे आरोपों की चर्चा नहीं की। पूरे प्रदर्शन में कहीं भी यह नहीं बोला गया कि चंगेज की हरकतों से पीड़ित महिलाओं को भी न्याय मिलना चाहिए। एक स्थानीय व्यक्ति मनवीर सिंह का तो यहाँ तक दावा है कि धरना प्रदर्शन को लीड कर रहे नूर अहमद अज़हरी नाम के व्यक्ति पर ही पुरनपुर थाने में गैंगस्टर, ठगी, लूट और छेड़खानी जैसे कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। मनवीर का दावा है कि अपराधी चंगेज के समर्थन में भीड़ जुटा कर प्रदर्शन कर रहे अजहरी को पूर्व में ज़िला बदर भी घोषित किया जा चुका है।

हिन्दू विरोधी हिंसा को रोकने में नाकाम अंतरिम सरकार, ‘कमजोर’ यूनुस के राज में बंद हो रहीं फैक्ट्रियाँ-खत्म हो रहे रोजगार: 1 साल के भीतर फूटेगा बांग्लादेश की ‘क्रांति’ का गुब्बारा

बांग्लादेश में शेख हसीना द्वारा प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद से ही वहाँ हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा तेज़ हो गई। वैसे तो वहाँ दशकों से हिन्दुओं का कत्लेआम चल रहा है, लेकिन हाल के दिनों में वहाँ हिन्दुओं की इतनी दुर्गति हो गई है कि भारत से लगी सीमा पर हजारों लोग पलायन कर के आ गए, तो कइयों को रंगदारी देनी पड़ी। कई महिलाओं का बलात्कार हुआ है। हाल ही में एक युवक को पुलिस स्टेशन से खींच कर पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी गई। उसके माँ-बाप के सामने से ही ले जाकर उसे मार डाला गया।

शेख हसीन के देश छोड़े 1 महीना हो चुका है। अगले चुनाव में खालिदा जिया के नेतृत्व वाले BNP के सत्ता में आने की संभावना है क्योंकि शेख हसीना की ‘आवामी लीग’ के नेताओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। उससे पहले पश्चिमी देशों के करीबी नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया है। सेनाध्यक्ष वकार-उस-ज़मान भी उनके साथ हैं। JeI का संबंध इजिप्ट स्थित ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से है। हिफाजत-ए-इस्लाम और अंसार-उल-बांग्ला जैसे आतंकी संगठनों से भी इसने हाथ मिला रखा है।

बांग्लादेश में जिस हिन्दू विरोधी आंदोलन को वामपंथियों ने ‘युवा क्रांति’ बताया, उससे निकले छात्र नेता भी इन्हीं कट्टर इस्लामी संगठनों से प्रेरित हैं। ऐसे में कहने को वहाँ लोकतंत्र है लेकिन सत्ता इनके हाथ में ही है। फौज जानबूझकर तमाशबीन बनी हुई है, भले ही उसके सामने हिन्दुओं और ‘आवामी लीग’ के समर्थकों की हत्याएँ होती रहें। वो इस्लामी ताकतों से नहीं उलझना चाहती। भारत में जम्मू कश्मीर सहित कई इलाकों में JeI का प्रभाव है। 1990 के दशक में SIMI के पूरे भारत में प्रसार के पीछे भी जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव था।

इस समूह को बाद में ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ ने हथियारों से लैस किया। जम्मू कश्मीर के युवाओं को हथियार देने और उन्हें प्रशिक्षित करने में भी जमात का हाथ है। बांग्लादेश की सरकार अभी हाल-फ़िलहाल में चुनावों की तारीखों का ऐलान करने नहीं जा रही है, ये कमजोर सरकार भी है। इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ने से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भी गर्त में जा रही है। JeI ने हाल-फ़िलहाल में बांग्लादेश में खुद को और मजबूत किया है। जब तक ‘आवामी लीग’ के डरे हुए कार्यकर्ता व उससे जुड़े समूह एक न हो जाएँ तब तक इन्हें टक्कर नहीं दी जा सकती।

भारत फ़िलहाल ‘वेट एन्ड वॉच’ की स्थिति में है, ऊपर से मोहम्मद यूनुस और उनके सहयोगी भारत को धमका रहे हैं क्योंकि शेख हसीना ने भारत में ही शरण ली हुई है। एक अंतरिम और कमजोर सरकार जब कोई निर्णय ले ही नहीं पाएगी तब जनता उन्हीं युवा नेताओं से असंतुष्ट होगी जिनके लिए वो सड़कों पर उतरी थी। टेक्सटाइल मिल बंद हो रहे हैं, कपड़ा उद्योग के दरकने से रोजगार खत्म हो रहा है। बांग्लादेश पर वैसे भी 100 बिलियन डॉलर का कर्ज है। 1 साल के भीतर वहाँ एक और बड़ा राजनीतिक विस्फोट हो सकता है। जमात वाले बांग्लादेश के लिए अलग झंडे और राष्ट्रगान की माँग भी कर रहे हैं।

कुकी आतंकियों ने घर में घुस कर मैतेई हिन्दू को मार डाला, रॉकेट हमला कर बुजुर्ग पुजारी की हत्या: मणिपुर में फिर से भड़के संघर्ष में 5 की मौत

मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्षों के बीच कूकी आतंकवादियों द्वारा एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। हाल ही में कूकी उग्रवादियों ने एक मेइती व्यक्ति की उसके घर में घुसकर बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना मणिपुर में जारी जातीय तनाव और हिंसा को और गहरा कर रही है, जो पिछले कुछ महीनों से बढ़ते जा रहे हैं। ताजे मामले में मणिपुर के जिरीबाम जिले में कूकी आतंकवादियों ने हमला करके एक व्यक्ति की हत्या कर दी, जिसके बाद भड़की हिंसा में 4 अन्य लोगों की मौत हो गई। इनमें से 3 हथियारबंद कुकी आतंकवादी हैं।

एक दिन पहले ही पड़ोस के बिष्णुपुर जिले में कूकी आतंकवादियों ने रॉकेट हमला करके एक बुजुर्ग पुजारी की हत्या कर दी थी, तो 5 लोग घायल हो गए थे। इसके बाद अब जिरीबाम हिंसा की चपेट में आ गया है। मणिपुर के इस संघर्ष में मेइती और कूकी समुदायों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है, जिसकी वजह से कई निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शनिवार की सुबह (7 सितंबर 2024) जिरीबाम जिले के मुख्यालय से 5 किमी दूर एक व्यक्ति के घर में घुसकर कूकी आतंकवादियों ने उसकी हत्या कर दी। इस हत्या के बाद दोनों तरफ से संघर्ष छिड़ गया, जिसमें 4 अन्य की मौत हो गई। मरने वालों में 3 कुकी आतंकवादी थे। कूकी आतंकवादियों द्वारा मणिपुर के अन्य इलाकों में भी कई हमले किए गए थे, लेकिन जिरीबाम का यह हमला उन हमलों से और ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।

मणिपुर में पिछले कुछ समय से हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इस सप्ताह की शुरुआत में इंफाल वेस्ट के एक गाँव में क्रूड बम के हमले में 2 लोगों की मौत हो गई थी, तो कई लोग घायल हो गए थे। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इन घटनाओं को आतंकवादी हमला करार दिया है।

जातीय संघर्षों का इतिहास

मणिपुर में कूकी और मेइती समुदायों के बीच संघर्ष का इतिहास पुराना है। दोनों समुदायों के बीच भूमि और राजनीतिक अधिकारों को लेकर विवाद हमेशा से रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में यह विवाद और हिंसक हो गया है। 2023 के मध्य से मणिपुर में जातीय संघर्षों ने विकराल रूप ले लिया, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों की जानें गईं और हजारों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी नाजुक हो चुकी है, और हालात नियंत्रण में लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं।

कूकी उग्रवादियों की भूमिका

कूकी आतंकवादी समूह इस जातीय हिंसा में एक प्रमुख भूमिका निभाते आए हैं। इन समूहों ने पिछले कुछ महीनों में कई निर्दोष नागरिकों पर हमले किए हैं, जिनमें महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। कूकी उग्रवादी समूहों का दावा है कि वे अपने समुदाय के अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन उनकी हिंसक गतिविधियाँ लगातार मणिपुर के शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन रही हैं।

सरकार की तरफ से स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास जारी

मणिपुर की सरकार और केंद्र सरकार दोनों इस स्थिति से निपटने के लिए प्रयासरत हैं। राज्य में सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है ताकि कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके। इसके साथ ही, प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है और इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई गई है ताकि अफवाहों और गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके। हालाँकि सरकार के इन प्रयासों के बावजूद मणिपुर में हिंसा और तनाव कम नहीं हो रहा है। दोनों समुदायों के बीच संवाद की कमी और आपसी विश्वास की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि इसे पाटना आसान नहीं दिख रहा है।

मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। एक ओर, कूकी और मेइती समुदायों के बीच स्थायी शांति स्थापित करना और उनके बीच आपसी विश्वास बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर, राज्य में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करना भी महत्वपूर्ण है।

मणिपुर के इस संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जातीय और क्षेत्रीय विवादों को हल करना आसान नहीं है। जब तक दोनों समुदायों के बीच समझ और आपसी सम्मान नहीं होगा, तब तक इस प्रकार की हिंसक घटनाओं का सिलसिला जारी रहने की आशंका है। इसे नियंत्रण में लाने के लिए सरकार और सुरक्षा बलों के सामने बड़ी चुनौती है।

9/11 के बाद अमेरिका पर सबसे क्रूर हमला करना चाहता था पाकिस्तानी शाहजेब खान, ISIS का है समर्थक: कनाडा में गिरफ्तार

कनाडा में रहने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक को कुख्यात आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड अल-शाम (ISIS)’ की मदद और संसाधन देने के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पाकिस्तान नागरिक की पहचान 20 वर्षीय मुहम्मद शाहज़ेब खान उर्फ शाहज़ेब जादून के रूप में हुई है। इस संबंध में न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी।

अमेरिकी न्याय विभाग के अटॉर्नी जनरल मेरिक बी. गारलैंड ने कहा, “आरोपित पर आरोप है कि उसने इस साल 7 अक्टूबर के आसपास न्यूयॉर्क शहर में एक आतंकवादी हमले की योजना बनाई थी। इस हमले का घोषित लक्ष्य ISIS के नाम पर ज़्यादा से ज़्यादा यहूदियों का कत्लेआम करना था। कनाडा के सहयोग से आरोपित पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया गया।”

उन्होंने कहा, “इस देश के सभी समुदायों की तरह यहूदी समुदायों को भी इस बात का डर नहीं होना चाहिए कि उन्हें नफ़रत से प्रेरित आतंकवादी हमले का निशाना बनाया जाएगा।” गारलैंड ने बताया कि शाहजेब आतंकी संगठन हमास पर इजरायल की कार्रवाई का बदला लेना चाहता था। इसके लिए वह अमेरिका में यहूदी लोगों को मारने के लिए संकल्प लिया था।

न्यूयॉर्क में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कनाडा में टोरंटो के नजदीक रहने वाले शाहजेब खान ने कनाडा से न्यूयॉर्क शहर जाने का प्रयास किया। वहाँ उसका इरादा न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में एक यहूदी केंद्र पर ISIS के समर्थन से सामूहिक हमला करना था। इसमें गोलीबारी करने के लिए उसके द्वारा स्वचालित और अर्ध-स्वचालित हथियारों का उपयोग करना था।

शाहजेब खान ने नवंबर 2023 में या उसके आसपास ISIS के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट करना और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन पर बात करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, वह ISIS के प्रोपेगेंडा वीडियो और साहित्य बाँटने एवं प्रसारित करने का काम करता था। इस बीच शाहजेब ने ISIS समर्थक जानकर दो अंडरकवर कानून प्रवर्तन अधिकारियों से बात करना शुरू कर दिया।

बातचीत के दौरान उसने बताया कि वह ISIS का समर्थक है और वह अमेरिकी शहर में हमले करने की योजना बना रहा है। उसने यह भी बताया कि वह सक्रिय रूप से ISIS समर्थकों का एक ‘ऑफ़लाइन सेल’ बनाने का प्रयास कर रहा था, ताकि ऑटोमेटिक राइफलों का उपयोग करके शहर में हमला कर सके और इजरायली एवं यहूदी को निशाना बनाया जा सके।

बातचीत के दौरान शाहजेब खान ने हमलों को अंजाम देने के लिए स्वचालित एवं अर्ध स्वचालित असॉल्ट राइफलें, गोला-बारूद और अन्य सामग्री प्राप्त करने का बार-बार निर्देश दिया। इसके साथ ही उसने अमेरिकी शहर के उन स्थानों की पहचान करने के लिए भी कहा, जहाँ हमले को अंजाम दिया जाना था। उसने यह बताया कि हमले के लिए वह कनाडा से अमेरिका में कैसे घुसेगा।

शाहजेब ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका में यहूदियों को निशाना बनाने के लिए 7 अक्टूबर और 11 अक्टूबर सबसे अच्छे दिन हैं, क्योंकि 7 अक्टूबर को वे विरोध प्रदर्शन करेंगे और 11 अक्टूबर योम किप्पुर है। दरअसल, पिछले साल 7 अक्टूबर को ही हमास ने इजरायल में हिंसक आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया था। इसी लिए वह इस दिन को चुनना चाहता था।

शाहजेब ने अंडरकवर बने अधिकारियों से अपने हमले के लिए राइफलें, गोला-बारूद के साथ-साथ ISIS के कुख्यात स्टाइल में लोगों का गला काटने के लिए कुछ अच्छे चाकू की भी माँग की थी। अमेरिका में घुसने के लिए उसने मानव तस्कर की सहायता लेने की भी बात कही। उसने कहा, “अगर हम अपनी योजना में सफल होते हैं तो यह 9/11 के बाद अमेरिकी धरती पर सबसे बड़ा हमला होगा।”

शाहजेब ने हमले के लिए 4 सितंबर या उसके आसपास अमेरिका-कनाडा सीमा तक पहुँचने का प्रयास किया। ऐसा करने के लिए उसने कनाडा से होते हुए अमेरिका की ओर जाने के लिए तीन अलग-अलग कारों का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसे कनाडा के ऑर्म्सटाउन में या उसके आसपास रोक लिया गया। ऑर्म्सटाउन अमेरिका-कनाडा सीमा से लगभग 12 मील की दूरी पर स्थित है।

पाकिस्तानी नागरिक शाहजेब पर एक विदेशी आतंकवादी संगठन को सहायता और संसाधन प्रदान करने का प्रयास का आरोप लगाया गया है। अगर वह दोषी सिद्ध हो जाता है तो अमेरिकी कानून के तहत उसे अधिकतम 20 साल की जेल हो सकती है। अमेरिकी न्याय विभाग के आपराधिक प्रभाग का अंतर्राष्ट्रीय मामलों का कार्यालय कनाडा से खान के प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है।

120 से ज्यादा स्मारक और धरोहर देश की, लेकिन कब्जे का दावा वक्फ बोर्ड का: संसदीय समिति के सामने ASI ने खोला चिट्ठा

सरकारी जमीनों और यहाँ तक कि हिंदुओं के गाँवों तक को मुस्लिमों की संपत्ति घोषित करने वाले वक्फ बोर्ड पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र मोदी सरकार एक बिल लाई थी। इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया है। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने JPC को ऐसे 120 स्मारकों से अधिक दावा किया है, जो उसके अधीन है लेकिन वक्फ बोर्ड उस पर दावा करता है।

वक्फ (संशोधन) विधेयक की जाँच कर रही संयुक्त संसदीय समिति को ASI ने शुक्रवार (6 सितंबर 2024) के सामने बताया कि ये सभी स्मारक उसके संरक्षण में हैं, लेकिन विभिन्न राज्यों के वक्फ बोर्ड इन स्मारकों पर अपना दावा करते हैं। इनमें कुछ स्मारकों को ASI द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित करने के लगभग एक सदी बाद वक्फ की संपत्ति घोषित किया गया है।

इस सूची में महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित निजाम शाही को स्थापित करने वाले अहमद शाह की कब्र को शामिल किया गया है। इसे एएसआई ने 1909 में संरक्षित स्मारक घोषित किया था। वहीं, साल 2006 में इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया। वक्फ बोर्ड के इसी असीमित अधिकार को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली NDA सरकार संशोधन बिल लेकर आई है।

सूत्रों के मुताबिक, एएसआई के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि वक्फ बोर्ड के साथ देश भर में 132 संपत्तियों को लेकर उनका विवाद है। दरअसल, यह सब कुछ वक्फ (संशोधन) कानून पर विचार करने के लिए बनाई गई जेपीसी की चौथी बैठक के दौरान शुक्रवार को हुई। ASI संस्कृति मंत्रालय के अधीन आता है। इसकी ओर से सचिव ने प्रतिनिधित्व किया। 

वहीं, इस बिल पर मुस्लिमों का पक्ष रखने के लिए जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया और इंटरफेथ कोलिशन फॉर पीस का प्रतिनिधित्व सैयद जफर महमूद ने किया। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एवं एएमयू के पूर्व कुलपति जमीरुद्दीन शाह तथा पैकियम सैमुअल भी संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष पेश हुए। तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड भी समिति के सामने पेश हुआ।

बैठक के दौरान भाजपा एवं ASI के साथ विपक्षी सदस्यों की जबरदस्त नोंक-झोंक हुई। इसमें ASI ने कहा कि वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति पर अपना दावा कर सकता है। इसको लेकर विपक्षी सदस्यों ने ASI की आलोचना की। विपक्षी सदस्यों ने संस्कृति मंत्रालय पर समिति के सदस्यों को गुमराह करने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया।

सूत्रों ने कहा कि मुस्लिम निकायों ने इस विधेयक का विरोध किया और कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है। ASI ने कहा कि विभिन्न वक्फ निकायों ने उसके स्मारकों पर अतिक्रमण किया है और मदरसा-शौचालय जैसे निर्माण किए हैं। इसका कुछ विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया कि और कहा कि ये सुविधाएँ मुस्लिमों के इबादत स्थलों में मौजूद होनी चाहिए।

मुस्लिम संगठनों ने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने, कलेक्टर को ज्यादा अधिकार देने, वक्फ बाई यूजर को हटाने, वक्फ को संपत्ति दान करने के लिए 5 साल का प्रैक्टिसिंग मुस्लिम होने की अनिवार्य शर्त जैसे कई प्रावधानों को पूरी तरह से गलत बताया। इसके बाद भाजपा सांसद ने कहा कि मुस्लिमों की धार्मिक पुस्तक कुरान में वक्फ का कहीं जिक्र नहीं है। इसलिए वक्फ बोर्ड गैर-इस्लामिक संस्था है।

भाजपा सांसद के बयान के बैठक में जबरदस्त हंगामा हुआ। भाजपा सांसद और असदुद्दीन ओवैसी के बीच इस पर तीखी नोक-झोंक भी हुई। वहीं, संस्कृति मंत्रालय ने इस दौरान समिति को 53 स्मारकों की प्रस्तुति दी। उसने कहा कि उसकी प्रस्तुति अभी पूरी नहीं हैं, क्योंकि देश भर से कई स्थानों से रिपोर्ट आनी बाक़ी है। इसलिए उसे आगे भी मौक़ा दिया जाए।

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में संसद की संयुक्त समिति की बैठक में भाग लेने वाले सांसदों में भाजपा के निशिकांत दुबे, बृजलाल, तेजस्वी सूर्या और संजय जायसवाल शामिल थे। वहीं, कॉन्ग्रेस के गौरव गोगोई, मोहम्मद जावेद, सैयद नसीर हुसैन, इमरान मसूद, तृणमूल कॉन्ग्रेस के कल्याण बनर्जी, AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह मौजूद थे।

स्कूल में मास्टर अनवारुल दिखाता था बच्चियों को गंदी वीडियो, करता था अश्लील बातें: सजा के नाम पर झारखंड में किया गया दूसरे स्कूल में ट्रांसफर

झारखंड के गोड्डा में एक सरकारी स्कूल के अंदर छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाने का मामला सामने आया है। इस हरकत का आरोप स्कूल के ही सहायक अध्यापक अनवारुल होदा पर लगा है। बच्चियों के मुताबिक अनवारुल उनसे गंदी-गंदी बातें भी करता है। मामले की जानकारी होते ही गुरुवार (5 सितंबर 2024) को नाबालिग छात्राओं के अभिभावकों ने स्कूल परिसर में हंगामा किया। हंगामे के बाद सहायक टीचर का ट्रांसफर कर दिया गया है। मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड में आने वाले विश्वासखानी पंचायत की है। यहाँ उत्क्रमित उच्च विद्यालय संग्रामपुर में अनवारुल होदा सहायक टीचर के तौर पर तैनात था। यहाँ पढ़ने वाली कई नाबालिग छात्राओं ने अपने-अपने अभिभावकों से टीचर अनवारुल की शिकायत की है। बच्चियों ने अपने घरों में बताया कि उनके मास्टर न सिर्फ उनको मोबाइल पर गंदी फ़िल्में दिखाते हैं बल्कि अश्लील बातें भी करते हैं।

छात्राओं की बात सुन कर उनके परिजन गुस्से में आ गए। गुरुवार को कई बच्चियों के परिजन स्कूल पहुँचे और हंगामा करने लगे। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और हाथापाई तक की नौबत आ गई। हालात को देखते हुए प्रिंसिपल ने नाराज परिजनों से बातचीत की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अनवारुल के विरुद्ध कार्रवाई के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। प्रिंसिपल के आश्वासन के बाद नाराज परिजन घर लौट गए।

अभिभावकों ने साफ कहा था कि जब तक अनवारुल होदा स्कूल में रहेगा, तब वो अपनी बच्चियों को पढ़ने के लिए नहीं भेजेंगे। नाराज अभिभावकों के साथ स्थानीय ग्रामीण भी इस विरोध में शामिल हुए थे। आखिरकार स्कूल प्रिंसिपल ने पूरे मामले की रिपोर्ट अधिकारीयों को भेज दी। इस रिपोर्ट पर DEO (जिला शिक्षा अधिकारी) ने टीचर अनवारुल होदा फिलहाल दूसरे स्कूल में ट्रांसफर कर दिया है। आरोपित के साथ स्कूल प्रिंसिपल से भी मामले में देरी के आरोप में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।