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कला, विज्ञान, गणित… 1000 साल तक सब फूले-फले, फिर ‘कुल (जाति) की राजनीति’ में डूब गया सबसे ताकतवर गणराज्य: क्या जातीय जनगणना पर सियासत करने वाले इससे सीखेंगे?

देश में जाति जनगणना का मुद्दा गर्माया हुआ है। विपक्ष इसे एक ब्रह्मास्त्र के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी ने तो यहाँ तक धमकी दे दी कि इसे किसी भी कीमत पर कराना ही होगा। वहीं, बिहार की लालू यादव की पार्टी राजद भी इसे जातीय अस्मिता से जोड़ने का प्रयास कर रही है, जो कि लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

बिहार की पूर्व राजद-जदयू सरकार ने बिहार में जाति सर्वे कराया भी और इसको आधार बनाकर बिहार में जातिगत आरक्षण की सीमा को 65 प्रतिशत तक दिया था। हालाँकि, आरक्षण की इस सीमा को कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब राजद के तेजस्वी यादव और कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी इस जाति जनगणना को पूरे देश में लागू कराने की माँग कर रहे हैं।

अगर जातिगणना हो और उसके आधार पर समाज के निचले पायदान पर लोगों के सरकार कल्याणकारी नीतियाँ बनाए तो यह समाज और लोकतंत्र के बेहद सराहनीय कदम होगा। रॉबर्ट डाहल ने भी कहा है, “किसी देश में स्थिर लोकतंत्र की संभावनाएँ बेहतर होती हैं, यदि उसके नागरिक और नेता लोकतांत्रिक विचारों, मूल्यों और प्रथाओं का दृढ़ता से समर्थन करते हैं।”

हालाँकि, सत्ता पाने के लिए जिस तरह से जातीय गणना को जाति अस्मिता से जोड़ा जा रहा है और उससे समाज में वैमनस्यता और कटुता फैलती जा रहा है। देश में जिस तरह से इस विवाद को हवा दी जा रही है, वैसे में भारत जैसे बहुला वाले देश यह कदम भयावह साबित हो सकता है। वर्तमान में कुछ राजनेताओं की महत्वकांक्षा को देखते हुए यह समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाला साबित हो सकता है।

अमेरिकी राजनेता, वकील, राजनयिक एवं लेखक ज़ॉन ऐडम ने लगभग 250 वर्ष पहले कहा था, “मैं यह नहीं कहता कि लोकतंत्र समग्र रूप से और लंबे समय में राजतंत्र या अभिजाततंत्र से ज़्यादा हानिकारक रहा है। लोकतंत्र कभी भी अभिजाततंत्र या राजतंत्र जितना टिकाऊ नहीं रहा है और न ही हो सकता है। लेकिन, जब तक यह टिका रहता है, यह इन दोनों से ज़्यादा ख़ूनी होता है। याद रखें, लोकतंत्र कभी भी लंबे समय तक नहीं टिकता। यह जल्द ही बर्बाद हो जाता है, थक जाता है और खुद को मार डालता है। अभी तक ऐसा कोई लोकतंत्र नहीं आया जिसने आत्महत्या न की हो।”

हालाँकि, जॉन ऐडम जैसे विचारकों का यह दृष्टांत पश्चिमी सभ्यता के संदर्भ में हो सकता है, जहाँ आधुनिक लोकतंत्र या गणतंत्र का उदय ही 17वीं शताब्दी में उदय हुआ। हालाँकि, भारत इस मामले में अलग है। भारत खासकर बिहार, जहाँ जातीय जनगणना का बीज बोया गया, वहाँ सदियों पहले लोकतंत्र का वटवृक्ष फैल चुका था, जो आज की प्रमुख वैश्विक राज प्रणाली का अहम हिस्सा है। लेकिन, कुछ मामलों में यह संदर्भ कथन सटीक बैठता है।

लिच्छवी गणराज्य का उदय एवं अंत

भारत में आज से लगभग 2600 साल पहले बिहार की धरती पर लिच्छवी गणराज्य का उदय हुआ था। यह वज्जि संघ का हिस्सा था। इस गणतंत्र में आज के भारत की तरह की बहुलता थी। यह गणतंत्र बहुत फला-फूला, लेकिन आखिरकार हर गणराज्य कुलों के बीच सत्ता को लेकर आंतरिक विवाद और संघर्ष बढ़ने लगे और आखिरकार इसका पतन हो गया।

दरअसल, मगध साम्राज्य के बगल में लिच्छवी गणराज्य था। इसकी राजधानी वैशाली (बिहार) थी। यहाँ शासन की पद्धति गण या संघ के तौर पर थी। इसे गणराज्य के रूप में आज चित्रित किया जाता है। इस संघ में लगभग 8 कुल के शामिल थे, जिन्हें अष्टकुल कहा जाता है। यह वज्जि संघ नेपाल तक फैला हुआ था। इन सभी राज्यों, जिन्हें महाजनपद कहा जाता है, के प्रमुख यानी राजा इसमें भाग लेते थे।

बौद्ध धर्मग्रंथ ‘दीघ निकाय’ में इस बारे में विस्तृत चर्चा है। ये राजा सभा में एकत्रित होकर गणराज्य के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं रणनीतिक पहलू पर चर्चा करते थे और सर्वसम्मति से गणराज्य की भलाई के लिए काम करते थे। हालाँकि, लिच्छवी सहित जितने भी 16 गणराज्य एवं राजशाही थी, सबका प्रमुख क्षत्रिय (राजपूत) ही होता था। इनमें शाक्य, चेदी आदि गणराज्य भी शामिल हैं।

उस दौरान मगध साम्राज्य का शासक आजातशत्रु लिच्छवी गणराज्य पर आक्रमण करने की योजना बनाई। उन्होंने अपने मंत्री वस्सकार को साथ लेकर भगवान बुद्ध से सलाह लेने के लिए पहुँचे। हालाँकि, भगवान बुद्ध ने इसकी अनुमति नहीं दी। इस तरह लिच्छवी गणराज्य इतना ताकतवर हो गया था, चाहकर भी कोई राज्य इसे जीत नहीं पाता था।

बुद्ध ने लिच्छवि गणतंत्र के भविष्य पर टिप्पणी करते हुए अपने प्रिय शिष्य आनंद से कहा था, “जब तक वे (लिच्छवी गणराज्य के कुल प्रमुख) अपने अपनी सभा में एक साथ मिल-बैठकर निर्णय लेंगे, परस्पर विचार-विमर्श से समस्याओं को सुलझाएँगे, सहमतियों का सृजन करेंगे, अपने वरिष्ठ लोगों का सम्मान करेंगे तब तक उनका गणतंत्र जीवित रहेगा।”

इस तरह यह राज्य आज से लगभग 1000 सालों तक चलता रहा। इस दौरान इस संघ में शामिल राज्यों में हर क्षेत्र में उन्नति हुई। कला, साहित्य, ज्ञान, विज्ञान, आयुर्वेद, चिकित्सा, दर्शन, गणित आदि का खूब विकास हुआ। छोटे-छोटे राज्यों की आपसी शक्ति ने लिच्छवी गणराज्य को अजेय बना दिया था। हालाँकि, आपसी झगड़े ने बाद में इसे कमजोर बना दिया।

गुरुस्वामी अपने एक लेख में लिखते हैं, “गणराज्य का राजा या प्रमुख को हमेशा क्षत्रिय होता था… लिच्छवि, जो वर्तमान नेपाल में काठमांडू घाटी और उत्तरी बिहार के एक बड़े हिस्से पर शासन करते थे, लगभग 7,000 परिवार प्रमुखों एक सभा द्वारा शासित होते थे।” लिच्छवी गणराज्य में तीन प्रमुख पदाधिकारी मिलकर काम करते थे – शासक प्रमुख, उप प्रमुख और सेना प्रमुख।

वज्जि संघ के रूप में लिच्छवी, चेदी, शाक्य आदि जितने भी 8 महाजनपद थे बेहद ताकतवर थे। हालाँकि, गणराज्य होने के कारण इनके प्रमुख युद्ध जैसी राष्ट्रीय महत्व की विषय पर सर्वसम्मति से आगे बढ़ जाते थे, लेकिन आंतरिक राजनीतिक एवं प्रणाली को लेकर उनके बीच अक्सर खींचतान होती रहती थी। लिच्छवी, शाक्य, चेदी गणराज्य में भी यही कहानी थी।

लिच्छवी गणराज्य में कहा जाता है कि कुलीन 7000 परिवार के प्रमुख शामिल थे, जिनमें व्यापारी से लेकर हर वर्ग के लोग शामिल थे। इनमें स्त्रियाँ, ब्राह्मण, दास और नाई को शामिल होने की इजाजत नहीं थी। इस हर वर्ग के लोग अपने-अपने समाज के लिए सभाओं में खींचतान करते। उनके लिए अधिक-अधिक रियायत या फिर अपना प्रभाव चाहते थे।

इससे इन गणराज्यों में वैचारिक विभाजन हो गया। वैचारिक विभाजन के साथ ही उनमें सत्ता संघर्ष भी गहरा होता गया। ये सब कुछ सिर्फ राष्ट्र के बजाय सिर्फ अपने वर्ग को महत्व देने का परिणाम था। परिणाम ये हुआ कि लिच्छवी सहित ये सभी गणराज्य अपनी सत्ता को बचाए रखने पर विशेष ध्यान देने लगे। इससे इनके राजतंत्र वाले मगध एवं कोशल जैसे पड़ोसियों की इन पर निगाह पैनी होती गई।

आपसी खींचतान एवं संघर्ष में लिच्छवी कमजोर हो गए। जो लोकतंत्र की जननी थी, वो अब कमजोर हो चली थी। आखिरकार मगध साम्राज्य के साथ युद्ध में लिच्छवियों की हार हुई। इस तरह मगध ने एक-एक करके सभी जनपदों एवं महाजनपदों को अपने अंदर समाहित कर लिया। इस तरह 16 संघर्ष में लिच्छवि और वज्जियों का नाश हो गया। बाद में गुप्त साम्राज्य में अंतत: नष्ट हो गया।

लिच्छवी सहित अन्य गणराज्यों के पतन का प्रमुख कारण आंतरिक सत्ता संघर्ष एवं प्रभावशाली गुट द्वारा उस सिंहासन पर नियंत्रण की कोशिश के अलावा, उनमें समय के साथ लोकतांत्रिक शासन के प्रति प्रतिबद्धता कम होती गई। आंतरिक सत्ता संघर्ष से लिच्छवियों की एकता और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया कमजोर हो गई। इससे शासन के अधिक निरंकुश और केंद्रीकृत रूपों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

आधुनिक लोकतंत्र के लिए सीख

आपसी तालमेल, सत्ता संघर्ष, राष्ट्र के बजाय गुट को प्राथमिकता के कारण जिस लिच्छवी गणराज्य ने दुनिया को पहला लोकतंत्र दिया, वह कमजोर होकर तबाह हो गया। आज की आधुनिक राजनीति को उससे सीखने की जरूरत है। वर्तमान व्यवस्था को यह सीखने की जरूरत है कि सत्ता में किसी एक गुट का प्रभाव समाज उसे निरंकुश बना देता है। निरंकुश समाज में असंतोष उत्पन्न होता है और आखिरकार यह पतन का रास्ता सुनिश्चित करता है।

आज की राजनीति में जाति जनगणना के नाम पर गुटों का, जिसे जाति कहना उचित होगा, सत्ता संघर्ष चल रहा है। इसका केंद्र जाति जनगणना है। इस जाति जनगणना में किसी नेता ने ये नहीं कहा कि सर्वे इस बात की हो कि विकास में क्रम में कितने परिवार पीछे छूट गए हैं, उनकी संख्या गिनी जाए। जाति के आधार पर आज के समाज में अमीर-गरीब का निर्धारण नहीं हो सकता।

किसी राजनेता ने ये नहीं कहा कि इस देश में कितने ऐसे परिवार हैं, जिन्हें दोनों वक्त का भोजन नहीं मिल रहा है। कितने ऐसे परिवार हैं जिन्हें स्वास्थ्य-शिक्षा नहीं मिल रहा है। हर राजनीतिक दल ने सिर्फ यही बात कही कि जाति जनगणना की जाए, ताकि पता लगाया जा सके जातियों की जनसंख्या कितनी है ताकि उसके अनुपात में आरक्षण व्यवस्था लागू की जा सके।

यह माँग अव्यवहारिक एवं अखंडता के लिए खतरे वाला है। जैसा कि हमने देखा कि लिच्छवी सहित अन्य गणराज्यों में किसी कुल (आज के संदर्भ में जाति) का प्रभाव बढ़ा तो वह सत्ता पर अधिकार की बात सोचने लगा और उसका केंद्रीकरण हुआ। जाति जनगणना को आधार बनाकर पिछड़े वर्ग के लिए और आरक्षण की माँग की जा रही है।

वहीं, समय-समय पर पिछड़े वर्ग में अन्य जातियों को भी जोड़ने की माँग होती रहती है। सत्ता प्राप्ति के लिए इनमें अन्य जातियाँ जोड़ी भी जाति हैं, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि इन वर्गों में जो जातियाँ समृद्ध और सक्षम हो चुकी हैं वे इसका लाभ स्वयं उठा लेती है। इससे आपसी भेद एवं संघर्ष बढ़ने का खतरा हो जाता है।

जाति जनगणना हो, लेकिन निचले पायदान पर खड़े लोगों की भलाई के लिए हो। यह पता लगाने के लिए हो कि इस देश में हर जाति की संख्या कितनी है और उनमें कितने प्रतिशत गरीब एवं अक्षम हैं, ताकि उस वर्ग का संपूर्ण लाभ उठा लेने वाले सक्षम एवं समृद्ध लोगों को बाहर निकाला जा सके। खुद को लोकतंत्र का रक्षक कहने वाले राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव जैसे नेता इसकी गंभीरता समझें।

हम भारत में कई सिंगापुर बनाना चाहते हैं: बोले PM मोदी, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने को दोनों देशों ने मिलाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लुक-ईस्ट नीति के तहत पहले ब्रुनेई, फिर सिंगापुर की यात्रा पर पहुँचे। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत और सिंगापुर के बीच 4 अहम समझौते हुए। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हम भी भारत में अनेक सिंगापुर बनाना चाहते हैं और हमें खुशी है कि हम इस दिशा में मिलकर कोशिश कर रहे हैं। हमारे बीच जो मंत्रियों की राउंड टेबल की बनी है, वो एक पाथ ब्रेकिंग मैकेनिज्म है। डिजिटलाइजेशन, मोबिलिटी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में इनिशिएटिव की पहचान बन गई है।”

सिंगापुर दौरे पर पीएम मोदी ने इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, “हम भारत में कई सिंगापुर बनाना चाहते हैं।” उनका यह बयान न केवल भारत के विकास की दिशा में एक बड़ा संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार देश को एक वैश्विक तकनीकी और आर्थिक हब के रूप में उभरते हुए देखना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग के साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की अग्रणी सिंगापुरी कंपनी एईएम का दौरा किया। उन्हें वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य सीरीज में एईएम की भूमिका, इसके संचालन और भारत के लिए योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।

भारत में “कई सिंगापुर” बनाने का सपना

सिंगापुर अपनी उन्नत अवसंरचना, समृद्ध अर्थव्यवस्था और बेहतरीन शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है। पीएम मोदी के लिए “कई सिंगापुर” बनाने का सपना भारत के शहरों और औद्योगिक केंद्रों को वैश्विक मानकों पर खड़ा करना है। यह सपना केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उद्योग, तकनीकी नवाचार, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक सुधार शामिल हैं। पीएम मोदी का यह विचार भारत के हर क्षेत्र को उन्नत और आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। सिंगापुर की तर्ज पर भारत के बड़े शहरों में वैश्विक स्तर की अवसंरचना और सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे रोजगार, नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा, “मैं आपके गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद यह हमारी पहली मुलाकात है। मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत बधाई। मुझे विश्वास है कि 4G के नेतृत्व में सिंगापुर और भी तेजी से प्रगति करेगा। सिंगापुर सिर्फ एक देश नहीं है, सिंगापुर हर विकासशील देश के लिए प्रेरणा है। हम भारत में भी कई सिंगापुर बनाना चाहते हैं और मुझे खुशी है कि हम इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। हमारे बीच जो मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक हुई है, वह एक पथ-प्रदर्शक व्यवस्था है।”

भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम विकसित करने के प्रयासों और इस क्षेत्र में सिंगापुर की ताकत को देखते हुए, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने का फैसला लिया है। भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज की दूसरी मीटिंग के दौरान, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए सेमीकंडक्टर पर ध्यान केंद्रित करते हुए एडवांस मैन्युफैक्चरिंग को एक पिलर के रूप में जोड़ने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने भारत-सिंगापुर सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम साझेदारी पर समझौता ज्ञापन भी पूरा किया है।

पीएम नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मेरे दोस्त प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के साथ आज भी चर्चा जारी रही। हमारी बातचीत कौशल, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, एआई और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही। हम दोनों ने व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने की जरूरत पर सहमति व्यक्त की है।”

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री: नई आर्थिक क्रांति की शुरुआत

भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विकास पीएम मोदी की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” योजनाओं का अहम हिस्सा है। सेमीकंडक्टर, जिसे तकनीकी दुनिया की रीढ़ कहा जाता है, आधुनिक उपकरणों जैसे स्मार्टफोन, कंप्यूटर, और यहां तक कि ऑटोमोबाइल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का विकास न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह देश को वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा।

पीएम मोदी का यह मानना है कि भारत को सेमीकंडक्टर के निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी बनाकर देश को वैश्विक स्तर पर एक नया पहचान दिलाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर निर्माण का विस्तार भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और इसे तकनीकी विकास के नए युग में प्रवेश करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, भारत अब सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए एक वैश्विक हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका लक्ष्य है कि भारत की सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता को 2030 तक वैश्विक बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धा के रूप में स्थापित किया जाए। इस दिशा में कई कंपनियां पहले ही भारत में अपने उत्पादन केंद्र खोल चुकी हैं, और यह सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है।

पीएम मोदी का “कई सिंगापुर” बनाने का विचार केवल मेट्रोपॉलिटन शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य है कि देश के हर हिस्से में विकास की रोशनी पहुँचाई जाए। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि भारत के हर राज्य में सिंगापुर जैसे उन्नत शहरों के विकास के लिए योजनाएँ बनाई जा रही हैं। इन नए शहरों में आधुनिक अवसंरचना, स्मार्ट सिटी सुविधाएं, और तकनीकी उद्योगों का विकास होगा, जिससे न केवल शहरी इलाकों का विकास होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी।

पीएम मोदी का विज़न केवल घरेलू सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका लक्ष्य है कि भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख भूमिका निभाए। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के विकास के साथ भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। भारत अब वैश्विक निवेशकों और उद्योगपतियों के लिए एक आकर्षक स्थल बनता जा रहा है, जहां तकनीकी विकास और नवाचार के अवसर हैं। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में भारत के कदम से यह सुनिश्चित होगा कि देश वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में अग्रणी बने और अपनी स्थिति को और सशक्त बनाए।

पीएम मोदी का “कई सिंगापुर” बनाने का विज़न और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का विकास भारत को एक नई ऊँचाई पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सेमीकंडक्टर उत्पादन न केवल देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और वैश्विक स्तर पर भारत की साख मजबूत होगी। देश को सिंगापुर जैसी आधुनिक और उन्नत शहरी सुविधाओं से सुसज्जित करने का पीएम मोदी का सपना भारत को एक नई दिशा देगा, जहाँ न केवल तकनीकी विकास होगा, बल्कि समग्र आर्थिक और सामाजिक सुधारों को भी गति मिलेगी।

‘कश्मीर की आजादी’ पर बहस चाहती थी ऑक्सफोर्ड यूनियन, डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने ठुकराया न्योता: कहा- जब तक कश्मीरी पंडित वापस नहीं लौटते, तब नहीं होगी कोई चर्चा

द कश्मीर फाइल्स फिल्म के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने बताया है कि उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनियन का एक न्योता ठुकरा दिया है। उन्हें ऑक्सफोर्ड ने कश्मीर की आजादी पर बात करने के लिए बुलाया था। अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें यह कार्यक्रम भारत और कश्मीर विरोधी लगा, इसलिए उन्होंने यह निमंत्रण ठुकराया।

ऑक्सफोर्ड यूनियन ने कश्मीर के आजाद देश बनने की की वकालत करते हुए एक बहस का आयोजन किया था। विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इसको लेकर कहा कि इस तरह की बहस का आयोजन भारत की संप्रुभता को सीधी चुनौती देना है। अग्निहोत्री ने यह निमंत्रण ठुकराने पर एक पत्र भी लिखा है।

अग्निहोत्री ने ऑक्सफोर्ड यूनियन को लिखे हुआ पत्र में कहा, “ना केवल 140 करोड़ भारतीयों के लिए बल्कि 1990 के कश्मीर नरसंहार के सैकड़ों हज़ारों विस्थापित हिंदू पीड़ितों के लिए मुझे यह ना केवल अप्रिय बल्कि अपमानजनक भी लगता है। इसे बहस के रूप में पेश करना एक त्रासदी को पार्लर गेम में बदलने जैसा है जहाँ लोगों की जिन्दगी दांव पर है और उसकी कीमत कोई स्याही नहीं बल्कि लोगों का खून है।”

अग्निहोत्री ने अपने पत्र में लिखा, “जब तक इस्लामी आतंकवादियों की धमकियों के कारण अपनी मातृभूमि से विस्थापित कश्मीरी हिंदू वापस नहीं लौट पाते, तब तक कश्मीर की संप्रभुता पर कोई बहस नहीं हो सकती।” सोसायटी ने दरअसल कश्मीर को एक आजाद देश बताया था और कहा था कि हिन्दुओं के नरसंहार पर बनी द कश्मीर फाइल्स विवादास्पद है।

ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी ने विवेक अग्निहोत्री को “यह सदन कश्मीर के एक स्वतंत्र राज्य में विश्वास करता है” नाम की एक बहस पर बात करने के लिए आमंत्रित किया था। इसने उनकी फिल्म को विवादास्पद तो बताया था लेकिन कहा था कि वह आज के समय में बात करने के लिए उपलब्ध सबसे उपयुक्त लोगों में से एक हैं।

अग्निहोत्री को भेजे गए निमंत्रण में कहा गया था कि इस मुद्दे पर बहस 24 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 7 नवंबर, 14 नवंबर, 21 नवंबर, 28 नवंबर और 5 दिसंबर को बहस होगी। अग्निहोत्री से पूछा गया था कि वह किस दिन आने में सुविधा महसूस करेंगे। हालाँकि, अग्निहोत्री ने इस बहस में भाग लेने से मना कर दिया।

ये बात गौर करने वाली है कि यह वही सोसाइटी है जिसने वर्ष 2022 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में अग्निहोत्री के कार्यक्रम रद्द कर दिए थे। तब अग्निहोत्री ने कहा था कि ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष पाकिस्तानी थे और उनका नजरिया भारत विरोधी था।

उन्होंने तब कहा था कि उनका कार्यक्रम रद्द करके यूनिवर्सिटी के हिन्दू छात्रों के साथ ज्यादती की गई है और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। अग्निहोत्री ने बताया था कि ऑक्सफोर्ड में उनका कार्यक्रम कुछ घंटे पहले ही रद्द कर दिया गया था।

तब उन्होंने कहा था, “मुझे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में बोलना था क्योंकि ऑक्सफोर्ड यूनियन ने मुझे बहुत पहले आमंत्रित किया था। ईमेल के ज़रिए इस बात पर रजामंदी भी हो गई थी। लेकिन उसके कुछ घंटे पहले ही उन्होंने कहा कि माफ़ करें हमसे गलती हो गई। मुझसे पूछे बिना ही उन्होंने तारीख़ बढ़ा दी जब छात्र यहाँ नहीं होते, ऐसे कार्यक्रम करने का कोई मतलब नहीं है।”

कश्मीर फाइल्स फिल्म

विवेक अग्निहोत्री की द कश्मीर फाइल्स 1990 के दशक में घाटी से कश्मीरी पंडितों के बाहर निकाले जाने पर आधारित है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी। कई राज्यों ने इसे टैक्स-फ्री कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिल्म की तारीफ की थी।

फिल्म को ज्यादातर दर्शकों ने खुले दिल से देखा था। लेकिन, लेकिन समाज के एक वर्ग, खासकर लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथियों ने फिल्म का विरोध किया था, उनका दावा था कि यह अल्पसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।”

director vivek ranjan agnihotri declines invitation of oxford union for debate on kashmir freedom

प्रयागराज के मदरसे पर चलेगा बुलडोजर, सीलिंग के बाद निकाले गए कर्मचारी-छात्र: चल रहा था जाली नोट का कारखाना, दी जाती थी हिंदू विरोधी तालीम

प्रयागराज प्रशासन ने हाल ही में जामिया हबीबिया मदरसा पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया और ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जामिया हबीबिया मदरसा में 2700 वर्गफुट पर अवैध निर्माण किया गया है। इसके अलावा, मदरसे में नकली नोटों की छपाई, आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग, और विदेशों से अवैध रूप से पैसे आने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, जिसके बाद ये मदरसा प्रशासन की नजर में आया था। इस मदरसे में कट्टरपंथी तालीम दी जा रही थी, जिसके लिए विदेशों से फंडिंग आती थी। यही नहीं, ये मदरसा यूपी सरकार के पास पंजीकृत भी नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब प्रयागराज के मदरसा जामिया हबीबिया मस्जिदे आजम को जमींदोज करने की तैयारी हो रही है। अवैध निर्माण के चलते प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने बुधवार (4 सितंबर 2024) को मदरसे को सील कर दिया था। प्रशासन के मुताबिक, यह मदरसा बिना किसी वैध अनुमति के बनाया गया था, और इसके निर्माण के लिए किसी भी सरकारी एजेंसी से मंजूरी नहीं ली गई थी। यह मदरसा करीब 1.5 बीघा जमीन पर बना है, जो नियमों के खिलाफ है। जमीन की अनुमानित कीमत ₹100 करोड़ से अधिक आँकी गई है। सूत्रों के मुताबिक, पीडीए ने मदरसे के जिम्मेदारों को अवैध निर्माण पर जवाब देने के लिए कहा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर मदरसे के अवैध निर्माण पर पीडीए की टीम जल्‍द ही बुलडोजर चला सकती है।

जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज के अतरसुईया में संचातिल जामिया हबीबिया मदरसे में करीब सौ छात्र इस्लामिक शिक्षा ले रहे थे, इसमें से 70 छात्र मौजूद थे, जिन्हें उनके घर भेज दिया गया है। जामिया हबीबिया मदरसा 84 साल पुराना है। इसकी मान्यता यूपी मदरसा बोर्ड से नहीं ली गई थी। यह मदरसा सिर्फ सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन पर संचालित हो रहा था। जामिया हबीबिया मदरसे में 28 अगस्त को नकली नोट की फैक्ट्री पकड़ी गई थी। जिसमें मदरसे का कार्यवाहक प्रिंसिपल मौलवी मोहम्मद तफसीरुल आरीफीन भी गिरफ्तार हुआ था। मदरसे में नकली नोटों की फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद आईबी और दूसरी जाँच एजेंसियाँ भी सक्रिय हो गयी हैं।

आरोप है कि जामिया हाबिया के मदरसे के प्रिंसिपल तफसिरुल और मदरसे के मौलाना ज़ाहिर खान ने ही नकली नोट की फैक्ट्री मदरसे में शुरू की थी। प्रिंसिपल के कमरे से सौ-सौ रुपये के एक लाख 30 हज़ार के नकली नोट बरामद हुए थे, जबकि बाद में प्रिंसिपल के कमरे से स्पीड पोस्ट की पर्चियाँ और कुछ भड़काऊ किताबें मिली थी। इस भड़काऊ किताब को लेकर खुफिया एजेंसियां भी मौलाना और मदसे के प्रिंसिपल के कट्टरपंथी संगठनों से रिश्ते की जाँच कर रही है।

सीलिंग के लगभग आधे घंटे के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण की टीम भी मदरसे पर पहुँची। प्राधिकरण ने वहाँ मदरसे के अवैध होने का बोर्ड लगा दिया। इस बोर्ड पर लिखा था, “अनधिकृत होने के कारण यह निर्माण सील किया गया है। इस निर्माण में सील को तोड़ना, पुनः निर्माण की कोशिश करना तथा किसी प्रकार का क्रय-विक्रय करना अवैधानिक एवं दंडनीय अपराध है।”

प्रयागराज में बिना मान्यता के 72 मदरसे, कार्रवाई होनी तय

इन सब के बीच प्रयागराज में मदरसों पर बड़ा खुलासा हुआ है। प्रयागराज जिले में 72 मदरसे बिना मान्‍यता के संचालित पाए गए हैं। इन भी एक्‍शन की तैयारी शुरू हो चुकी है। मदरसा जामिया हबीबिया मस्जिदे आजम में नकली नोट छापने के खुलासे के बाद प्रयागराज जिले में संचालित 267 मदरसों में 72 बिना मान्‍यता के चलते पाए गए हैं। अल्पसंख्यक विभाग ने बिना मान्यता के मदरसों का डेटा शासन को भेज दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही बिना मान्यता वाले इन मदरसों के खिलाफ एक्शन शुरू होगा।

गौरतलब है कि प्रयागराज पुलिस द्वारा इस मदरसे में नकली नोट छापने का खुलासा किया था। इसके बाद IB और ATS की टीम जाँच में शामिल हो गई है। मदरसे का मौलवी तफसीरुल पिछले 6 वर्षों से बच्चों को RSS विरोधी और मजहबी कट्टरपंथ का पाठ पठा रहा था। जाँच एजेंसियाँ यहाँ से पढ़ाई कर चुके 630 बच्चों की पड़ताल कर रही है।

जाँच के दौरान यह पता चला कि इस मदरसे को विभिन्न इस्लामी मुल्कों से फंडिंग की जा रही थी। जिन मुल्कों से इस मदरसे को फंडिंग मिल रही थी, उनमें तुर्किए, दुबई और अन्य अरब देश भी शामिल हैं। इन देशों से इस मदरसे को करोड़ों रुपए की फंडिंग की जा रही थी। पुलिस के रडार पर वो खातेदार भी हैं, जिनके एकाउंट में विदेशों से पैसे आते थे।

जिस कन्हैया लाल की अस्थि को विसर्जन का इंतजार, उनकी हत्या में गिरफ्तार जावेद को हाई कोर्ट ने दी जमानत: इसकी ही रेकी के बाद उदयपुर में काटा गया था हिंदू दर्जी का गला

उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की हत्या करने में इस्लामी आतंकियों की मदद करने के आरोपित जावेद को जमानत मिल गई है। जावेद कन्हैया लाल के पड़ोस की दुकान पर काम करता था। जावेद कन्हैया लाल की हर एक गतिविधि पर नजर रख रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस प्रवीर भंडारी ने जावेद को जमानत देने का आदेश दिया। जावेद ने इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में जावेद ने कहा था कि उसके खिलाफ मामले में पक्का सबूत नहीं है।

जावेद ने कहा कि उसे NIA ने बिना सबूतों के पकड़ा है। जावेद ने यह भी दावा किया कि उसके विरुद्ध कॉल डिटेल या CCTV फुटेज में सबूत नहीं है और वह लम्बे समय से जेल में बंद है। ऐसे में उसे जमानत दे दी जाए। उसकी अपील का विरोध भी हुआ। कोर्ट में सरकारी वकील ने कहा कि वह हत्यारों के मुखबिर तंत्र में शामिल था और उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकारी वकील की दलील को नहीं माना और जावेद को जमानत दिए जाने का आदेश दिया। इससे पहले एक और आरोपित को इस मामले में जमानत मिल चुकी है। आरोपित फरहाद मोहम्मद को इस मामले में जमानत मिली थी।

गौरतलब है कि 28 जून, 2022 को उदयपुर में दर्जी की दुकान करने वाले कन्हैया लाल तेली की गौस मुहम्मद और रियाज ने हत्या कर दी थी। इस मामले में NIA को जाँच सौंपी गई थी। कन्हैया लाल तेली की हत्या के मामले में मुख्य आरोपितों के अलावा उनके मददगारों को भी गिरफ्तार किया था।

इस मामले में NIA की चार्जशीट में जावेद के रोल के बारे में बताया गया था। NIA चार्जशीट में बताया गया था कि 19 साल के जावेद को कन्हैया लाल की हत्या की साजिश में शामिल किया गया था। जावेद का काम कन्हैया लाल की गतिवधियों पर नजर रखना था।

जावेद कन्हैया लाल की दुकान के पास ही एक चूड़ी की दुकान पर काम करता था। उसने कातिलों को कन्हैया लाल द्वारा दुकान पर की जा रही पूरी दिनचर्या की जानकारी लगातार अपडेट की। आरोप है कि जावेद की जानकारी के आधार पर ही दोनों हत्यारे आगे बढ़े।

कन्हैया लाल हत्याकांड के मामले में अभी तक मुकदमा चल ही रहा है। इस मामले में साजिशकर्ताओं और हत्यारों को सजा नहीं सुनाई गई है। इस कारण से कन्हैया लाल का परिवार निराश हो चुका है। कन्हैया लाल के बड़े बेटे यश साहू ने प्रण लिया था कि वह तब तक अपने पिता के हत्यारों की अस्थियाँ विसर्जित नहीं करेंगे जब तक हत्यारों को फांसी ना हो जाए।

इसके अलावा यश साहू ने नंगे पैर रहने और साथ ही केश ना कटवाने का निर्णय लिया है। ऐसे में अब तक कन्हैया लाल का परिवार न्याय की राह तक रहा है, उनके बेटे नंगे पैर चल रहे हैं और अस्थियाँ गंगाजी में जाने की राह तक रही हैं। लेकिन इस बीच जावेद को जमानत मिल रही है।

नाम है सुमैया खान, लेकिन शालू बनकर लड़कों को फँसाती थी… पहली बार मुस्लिम युवक बना शिकार फिर हुआ हनी ट्रैप गैंग का खुलासा: रुहीना खान करवाती थी मामला सेटल, मास्टरमाइंड है फिरोज

उत्तर प्रदेश के मेरठ से हनी ट्रैप कर उगाही करने वाला ऐसा गिरोह पकड़ा गया है, जो अमीर लड़कों की पहचान करता, उन्हें अपने ट्रैप में फाँसता और फिर लाखों की उगाही करता। इस गिरोह का मास्टरमाइंड फिरोज नाम का युवक है, जिसमें हिंदू पहचान के साथ सुमैया खान उर्फ शालू लड़कों से संबंध बनाती थी और फिर फिरोज के साथ रुहीना खान उर्फ सिमरन और बाकी के सदस्य उगाही किया करते थे। खास बात ये है कि गिरोह अधिकतर हिंदू लड़कों को अपनी जाल में फंसाता था। हालाँकि मेरठ में जिस काँड में वो पकड़े गए, उन्होंने तब आकिल नाम के मुस्लिम युवक को अपना शिकार बनाया था।

ये मामला तब खुला, जब मेरठ के परतापुर थाने में ये गिरोह खुद ही पहुँच गया और रेप का मुकदमा दर्ज करने का दबाव बनाने लगा परतापुर पुलिस को शक होने पर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तब हनी ट्रैप का मामला सामने आ गया। इस दौरान गैंग के सदस्यों ने भागने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। पुलिस ने कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है और गिरोह के पास से कार, बाइक, नकली आधार कार्ड व सात मोबाइल बरामद किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, रात के वक्त गैंग की सदस्य दिल्ली की रहने वाली सुमैया शालू बनकर और दूसरी महिला रूहीना रेकी किए गए नंबर पर मिस्ड कॉल करती थी। मिस्ड कॉल देखकर सामने वाला व्यक्ति कॉल करता था तो उसे सॉरी बोलकर फोन रख दिया जाता था। लेकिन इसके बाद फिर मैसेज या मिस्ड कॉल की जाती थी और यहीं से बातों का सिलसिला आगे बढ़ाया जाता था। मीठी-मीठी बातें करके लोगों को धीरे-धीरे जाल में फंसाया जाता था।

ये गैंग बेहद ही शातिर है, मिस्ड कॉल से शुरू हुई दोस्ती झूठे प्यार में बदलकर अवैध संबंधों तक पहुँच जाती थी। कई बार अवैध संबंध बनने के बाद पैसे की डिमांड शुरू होती थी। जब तक पैसा आ रहा है तो ठीक नहीं तो फिर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी और या मुकदमा दर्ज कराकर ब्लैकमेलिग की डील शुरू होती थी।

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि परतापुर थाना क्षेत्र के एक शादीशुदा युवक ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर एक महिला का फोन आया। महिला ने किसी जरूरी काम से मिलने की बात कही। युवक ने उसका फोन काट दिया। कुछ समय बाद युवक ने महिला को कॉल करके पूछा कि उसका नंबर कहां से मिला है। महिला ने बताया कि आपका नंबर मेरी सहेली रूहीना उर्फ सिमरन ने दिया है। फोन पर बात करते-करते दोनों दोस्ती की बात करने लगे। महिला ने अपना नाम शालू शर्मा बताया। तीन सितंबर की शाम छह वो युवक से मिलने के लिए मेरठ आ गई।

दिल्ली रोड रिठानी स्थित व्यू बैली होटल में दोनों ने कमरा लिया। युवक ने महिला से शारीरिक संबंध बनाए। होटल से बाहर आए तो शालू ने कहा कि यहां तो मेरे भइया, भाभी आ गए हैं। होटल के बाहर एक स्विफ्ट गाड़ी और बाइक खड़ी थी। उन लोगों ने युवक को जबरदस्ती गाड़ी में डाल लिया। दिल्ली रोड पर काफी देर तक घुमाते रहे। पिटाई करते हुए 50 लाख रुपये की माँग करने लगे। पैसे नहीं देने पर जान से मारने और दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। बाद में मामला 10 लाख रुपए में सेट हो गया। लेकिन जब पैसा नहीं मिला, तो दबाव बनाने के लिए युवक अकील को लेकर ये गिरोह परतापुर पुलिस थाने पहुँच गया।

परतापुर थाने पहुँचकर शालू शर्मा ने बताया कि वह यमुना नगर की निवासी है और परतापुर के युवक ने झांसे में लेकर मेरठ बुलाकर उससे रेप किया। बातचीत के दौरान दरोगा मोहित सक्सेना को शक हुआ। पुलिस ने युवक को बुलाया और दूसरी ओर होटल में जांँच शुरू की गई। इस दौरान शालू के साथ भाई-भाभी बनकर आए दोनों लोग थाने से निकल भागे। पुलिस ने पीछा करके इन्हें परतापुर फ्लाईओवर के पास दबोच लिया। जांच शुरू हुई और पीड़ित को थाने लाकर पूछताछ की तो उसने अगवा करने और 50 लाख रुपये की रकम मांगने की बात बताई। इसके बाद खुलासा हुआ कि यह पूरा गैंग हनीट्रैप में फंसाकर लोगों से वसूली करता है।

पुलिस की जांच में हनीट्रैप गैंग का बड़ा खुलासा हुआ। पता चला कि दिल्ली, वेस्ट यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल समेत कई राज्यों में यह गैंग सक्रिय है। 50 से ज्यादा लोगों को यह गैंग हनीट्रैप में फंसाकर वसूली कर चुका है। इस गिरोह में कई महिलाएं और अलग अलग जिलों के लोग शामिल हैं। लोगों को झांसे में लेकर गैंग की महिलाएं यौन संबंध बनाती थी। इसके बाद पीड़ित को उठाकर मुकदमे की धमकी दी जाती और वसूली की जाती थी। हालाँकि मेरठ में इस गिरोह का भंडाफोड़ हो गया।

आकिल की तहरीर पर अपहरण, रंगदारी, धमकी देने समेत कई गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया है। महिला ने बनवाया हुआ था फर्जी आधार कार्ड महिला के पास से पुलिस ने तलाशी में शालू शर्मा नाम का आधार कार्ड बरामद हुआ। इस आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर बनाया गया था। पुलिस ने इस आधार पर बाकी धाराएं भी बढ़ाई हैं। बताया गया कि ये गिरोह अधिकतर हिंदू युवकों को शिकार बनाता था, लेकिन आकिल के मामले में इनकी पोल खुल गई और पकड़े गए।

पुलिस ने इस मामले में 1-आसिफ निवासी बी-426 गली-8, राजीव नगर थाना हर्ष विहार पूर्वी दिल्ली, 2-फिरोज निवासी सी-306 राजीव नगर बैक कालोनी मंडावली, थाना हर्ष विहार दिल्ली, 3-फहीम निवासी 8/जी शहीदनगर साहिबाबाद , गाजियाबाद, 4-अनिकेत निवासी सैनिक कॉलोनी, कसेरूखेडा, थाना लालकुर्त्ती मेरठ 5. दीपक निवासी डीलना, थाना भोजपुर गाजियाबाद के साथ ही सुमैया खान उर्फ शालू शर्मा, रुहीना खान उर्फ सिमरन निवासी दिल्ली को गिरफ्तार किया है।

एसपी सिटी मेरठ आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि इस गिरोह के पास से जो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं उसमें कुछ वीडियो भी मिली हैं जबकि काफी वीडियो गैंग की महिलाओं ने डिलीट भी कर दी थी। पूरे गैंग से पूछताछ में कई बड़ी जानकारियाँ हाथ लगी हैं। कितने लोगों को निशाना बनाया और कितना पैसा ठगा इसकी जाँच कर रहें हैं। हनी ट्रैप में फंसाकर कितने लोगों पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया गया है, उसकी भी जाँच की जा रही है।

हिरोइन को भेजी अपने लिंग की तस्वीर, लिखा- मैं दर्शन से बेहतर… बदले में ऐसी मौत दी कि रूह काँप जाए: पवित्रा गौड़ा के कारण ही रेणुकास्वामी का मर्डर, चार्जशीट पेश

कन्नड़ एक्टर दर्शन, उसकी गर्लफ्रेंड पवित्रा गौड़ा और बाकी साथियों ने गंदे मैसेज भेजने वाले रेणुकास्वामी को यातनाएँ देकर मारा था। रेणुकास्वामी को झूठ के आधार पर बेंगलुरु बुलाया गया था और फिर उसे लगातार अलग-अलग तरह की शारीरिक यातनाएँ दी गईं। जब इससे भी मन नहीं भरा तो हत्या कर दी गई। यह सारे खुलासे इस मामले में दाखिल चार्जशीट से हुए हैं। मामले में पुलिस ने 17 आरोपितों के विरुद्ध 3991 पन्नों की एक चार्जशीट दायर की है।

पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उससे काफी डरावनी जानकारियाँ सामने आई हैं। चार्जशीट के अनुसार, मृतक रेणुकास्वामी एक्टर दर्शन की गर्लफ्रेंड पवित्रा गौड़ा से नफरत करता था। वह दर्शन का बड़ा फैन था और मानता था कि रेणुकास्वामी के कारण दर्शन का पारिवारिक जीवन तबाह हो गया है। वह पवित्रा गौड़ा को दर्शन से दूर करना चाहता था। इसके लिए वह लगातार पवित्रा गौड़ा को परेशान करता था। चार्जशीट में बताया गया है कि वह एक फेक आईडी बना कर पवित्रा गौड़ा को मैसेज करता था।

पवित्रा गौड़ा इससे परेशान थी। एक दिन रेणुकास्वामी ने अपने लिंग की तस्वीर पवित्रा गौड़ा को भेज दी थी। उसने कहा कि वह दर्शन से बेहतर है। वह @gautamks_1990 नाम से एक आईडी बनाकर पवित्रा गौड़ा को परेशान करता था। चार्जशीट में बताया गया है कि पवित्रा ने एक दिन दर्शन के मैनेजर पवन को इस मामले से निपटने को कहा था। पवन ने यह बात दर्शन तक पहुँचा दी। इससे दर्शन आग बबूला हो गया और रेणुकास्वामी को सजा देने के लिए प्लान बनाने लगा।

उसने अपने साथियों के माध्यम से रेणुकास्वामी को बेंगलुरु बुलाने का प्लान बनाया। इसके लिए एक व्यक्ति ने रेणुकास्वामी से बातचीत करना चालू किया। उसने रेणुकास्वामी से वादा किया कि वह उसे दर्शन से मिलवाएगा और फोटो भी खिंचवाएगा। उसने रेणुकास्वामी की सारी जानकारी इन्स्टाग्राम के माध्यम से ही इकट्ठा कर ली। इसके बाद उसने रेणुकास्वामी को चित्रदुर्गा से बुलवा लिया। चित्रदुर्गा से बाहर निकलते ही रेणुकास्वामी को दर्शन के लोगों ने पकड़ लिया।

रेणुकास्वामी को इसके बाद बेंगलुरु लाया गया। यहाँ उसे एक पार्किंग वाली जगह पर रखा गया। रेणुकास्वामी को यहाँ लाने के बाद दर्शन और पवित्रा गौड़ा को बुलाया गया। एक्टर दर्शन का कहना था कि वह रेणुकास्वामी को उसके कामों की सजा देगा। दर्शन ने यहाँ पहुँच कर रेणुकास्वामी को परेशान करना चालू किया। दर्शन और उसके साथियों ने यहाँ रेणुकास्वामी को यातनाएँ देना चालू किया। रेणुकास्वामी को यहाँ बिजली के झटके दिए गए। एक विशेष मशीन से उसके गुप्तांगों को बिजली के लगातार झटके दिए जाते रहे।

चार्जशीट में बताया गया है कि दर्शन समेत बाकी लोगों ने रेणुकास्वामी को आसपास खड़ी गाड़ियों में लड़ाया। उसके शरीर पर कई जगह वार किए, कई अंगों को नुकसान पहुँचाया गया। उसके मुंह में मांसाहारी भोजन डाला गया। रेणुकास्वामी इस बीच गिड़गिडाता रहा। उसने मना किया कि वह मांस नहीं खाता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेणुकास्वामी के सर पर भी चोट निकली है। दर्शन और उसके साथियों की प्रताड़ना के कारण रेणुकास्वामी की मौत हो गई। इसके बाद इन लोगों ने उसकी लाश को फिंकवा दिया।

बेंगलुरु पुलिस की चार्जशीट में कई फोटो भी दाखिल किए गए हैं, जिनमे रेणुकास्वामी बुरी हालत में है। यह तस्वीरें उसको यातनाएँ देने के बाद ली गईं थी। कुछ तस्वीरें वायरल भी हुई हैं। रेणुकास्वामी का खून दर्शन और पवित्रा के कपड़ों पर भी मिला है। यह दोनों इस समय इस मामले में जेल में बंद हैं। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद उनके विरुद्ध मामला चलेगा।

‘यदि भारत नहीं पसंद तो बंद कीजिए अपना धंधा’: जानिए Wikipedia को ब्लॉक करने की क्यों मिली चेतावनी, ANI ने क्यों दिल्ली हाई कोर्ट में किया है केस?

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (5 सितंबर 2024) को विकिपीडिया (Wikipedia) को कोर्ट की अवमानना ​​का नोटिस जारी किया। कोर्ट ने संस्थान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह भारतीय न्यायापालिका की बातों को नहीं मानेगा तो भारत में उसका व्यवसाय बंद करने के लिए सरकार को निर्देश देगा। कोर्ट ने कहा, “अगर भारत पसंद नहीं है तो यहाँ से अपना बंद कर लीजिए।”

दरअसल, यह मामला न्यूज एजेंसी ANI से जुड़े केस से संबंधित है। ANI के विकिपीडिया पेज पर किसी ने अपमानजनक एडिट कर दिया था। इसको लेकर ANI ने प्लेटफॉर्म से कहा था कि वह उस शख्स का नाम बताए, जिसने उसके पेज को एडिट किया था। इसको लेकर कोर्ट में मामला चला और कोर्ट ने ऐसा करने के लिए विकिपीडिया को आदेश दिया। हालाँकि, प्लेटफॉर्म ने कोर्ट के आदेश को नहीं माना था।

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश नवीन चावला ने इस मामले में विकिपीडिया के वकील की इस दलील पर कड़ी आपत्ति जताई कि उन्हें अदालत में पेश होने में समय लगा, क्योंकि यह संस्था भारत में स्थित नहीं है। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस मामले को और बर्दाश्त नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि वह जरूरी हुआ सरकार से इसे देश में बंद करने के लिए कहेगा।

जस्टिस चावला ने कहा, “मैं अवमानना ​​का मुकदमा चलाऊँगा। यह प्रतिवादी विकिपीडिया के भारत में इकाई नहीं होने का सवाल नहीं है। हम यहाँ आपके व्यापारिक लेन-देन बंद कर देंगे। हम सरकार से विकिपीडिया को ब्लॉक करने के लिए कहेंगे। पहले भी आप लोगों ने यह तर्क दिया है। अगर आपको भारत पसंद नहीं है तो कृपया भारत में काम न करें।”

कोर्ट ने विकिपीडिया के अधिकृत प्रतिनिधि को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई कोर्ट ने 25 अक्टूबर 2024 को निर्धारित की है। इससे पहले समन जारी होने के बाद विकिपीडिया का प्रतिनिधि 20 अगस्त 2024 को न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुआ था।

क्या है विकिपीडिया और ANI के बीच विवाद?

समाचार एजेंसी ANI ने विकिपीडिया के ऊपर 2 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दायर किया है। एएनआई का आरोप है कि विकिपीडिया अपने प्लेटफॉर्म पर उसके लिए अपमानजनक एडिटिंग करने की लोगों को अनुमति दे रहा है। ANI के पेज पर उसे समाचार एजेंसी की जगह सरकार का प्रचार उपकरण कह दिया गया है। इसको लेकर ANI ने दिल्ली हाईकोर्ट में केस दायर किया है।

ANI ने आरोप लगाया है कि विकिपीडिया अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद समाचार एजेंसी के पेज पर कथित रूप से अपमानजनक सामग्री प्रकाशित करवा रहा है और उन्होंने कोर्ट से इसी सामग्री को हटाने व रोकने की माँग की है। इसके साथ ही अभी तक जो एडिटिंग करके अपमान किया गया उस पर 2 करोड़ रुपए का हर्जाना देने को कहा।

विकिपीडिया पर लिखा है- ये साइट (ANI) वर्तमान में केंद्र सरकार के लिए प्रचार उपकरण के रूप में काम करने, फर्जी समाचार वेबसाइटों के विशाल नेटवर्क से सामग्री वितरित करने और घटनाओं की गलत रिपोर्टिंग करता है। इसके अलावा विकिपीडिया पर ANI के नए प्रबंधन पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए हैं।

इसके पेज पर यह भी लिखा गया है कि ANI का नया प्रबंधन द्वारा पत्रकारिता का आक्रमक मॉडल इस्तेमाल किया जा रहा है, जहाँ सिर्फ और सिर्फ फोकस अधिक रेवेन्यू पर है। इसके साथ ही इसके कई पूर्व कर्मचारियों ने यहाँ के मैनेजमेंट पर गलत एवं अमानवीय बर्ताव करने का आरोप लगाया है।

घर में माँ-बाप के सामने पड़ा था बेटी का शव और वे दे रहे थे पैसे… क्या यही है बंगाल पुलिस की मानवता: डॉक्टर बिटिया के अपने पूछ रहे सवाल, क्या ममता बनर्जी सरकार के पास है जवाब?

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हुई डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में पीड़ित परिजनों ने गंभीर आरोप लगाकर एक बार फिर कोलकाता पुलिस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतिका के माता-पिता ने जहाँ पुलिस पर घूस देने का आरोप लगाया है। वहीं पीड़िता की मौसी ने कोलकाता पुलिस की मानवता पर सवाल खड़े किए हैं।

सामने आई वीडियो और खबरों के अनुसार, पीड़िता की मौसी ने कहा, “जब घर में माता-पिता के सामने बेटी का शव पड़ा था, तब पुलिस पैसे दे रही थी, क्या यही पुलिस की मानवता है? जब तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ, तब तक 300-400 पुलिसवाले हमें घेरे हुए थे, लेकिन अंतिम संस्कार के बाद वहाँ एक भी पुलिसकर्मी नहीं दिखा। परिवार क्या करेगा, वे कैसे घर जाएँगे, पुलिस ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली। अंतिम संस्कार होने तक पुलिस सक्रिय थी और उसके बाद, वे पूरी तरह से गायब हो गए…क्या यही पुलिस की मानवता है। पुलिस ने कहा कि उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारियाँ पूरी कर दी हैं। क्या इसे ही जिम्मेदारी निभाना कहते हैं।”

बता दें क इससे पहले पीड़िता के माता-पिता ने भी कोलकाता पुलिस की भूमिका पर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, “पुलिस एकदम शुरुआत से ही केस को निपटाने का प्रयास कर रही है। हमें बॉडी को देखने की इजाजत भी नहीं थी। हमें उस समय भी थाने के बाहर इंतजार करना पड़ा जब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था। बाद में जब शव मिला तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हमें पैसे देने की बात कही, जो हमने फौरन नकार दी।”

उन्होंने कहा था, “हमारी बेटी इस अस्पताल में खत्म हो गई। हम चाहते थे कि वह डॉक्टर बने, हमारे पास कई सवाल हैं। सुबह 11 बजे उन्होंने मुझे बताया कि उसने आत्महत्या कर ली है। हमें उसे देखने में 3 घंटे लग गए। हमने पुलिस से उसे देखने के लिए विनती की। उन्हें पोस्टमार्टम करने में देरी क्यों हुई? पीड़िता के पिता ने कहा कि शाम 6.40 से 7 बजे तक मैंने एफआईआर दर्ज की, उन्होंने एफआईआर देर से क्यों दर्ज की? उन्होंने अप्राकृतिक मौत क्यों दर्ज की?”

वहीं रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता के चाचा ने भी बताया कि पुलिस ने उन लोगों से सफेद कागज पर साइन करने को कहा था, लेकिन परिवार ने इससे मना कर दिया और कागजों को फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि बेटी को गए एक महीना होने वाला है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई खुलासा नहीं हुआ।

बता दें कि पिछले महीने 9 अगस्त को आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुई रेप-हत्या मामले में पिछले दिनों बंगाल में काफी बवाल रहा था। महिला डॉक्टर के लिए इंसाफ माँगने जब लोग सड़कों पर उतरे तो उनके ऊपर भीड़ ने हमला कर दिया था। हालाँकि कल, फिर से कोलकाता में न्याय माँगने के लिए लोग सामने आए। इस बार सैंकड़ों की तादाद में इकट्ठा होकर लोगों ने कैंडल मार्च निकाला और पीड़िता को इंसाफ दिलाने की माँग की।

फंड 6 गुना कम, लेकिन ओलंपिक के मुकाबले अब तक जीत चुके हैं 4 गुना अधिक मेडल… पैरालंपिक खिलाड़ियों ने बताया क्या होता है ‘विनिंग माइंडसेट’, जानिए कैसे आया यह बदलाव

फ्रांस की राजधानी पेरिस में वर्तमान में (4 सितम्बर-8 सितम्बर) पैरालंपिक खेलों का आयोजन हो रहा है। इसमें दुनिया भर के दिव्यांग खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। भारत से भी इन खेलों में 84 एथलीट भेजे गए हैं। भारत के इन खिलाड़ियों ने इस बार पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए मेडल की झड़ी लगा दी है। शूटिंग से लेकर तीरंदाजी तक भारत को गोल्ड-सिल्वर मिल रहे हैं। उन खेलों में भी गोल्ड मेडल आए हैं, जिनमें इससे पहले ब्रान्ज तक की कल्पना नहीं की जाती थी।

पैरालंपिक खेलों में गुरुवार (5 सितम्बर, 2024) तक भारतीय खिलाड़ी कुल 24 मेडल जीत चुके थे। इन 24 में से 5 गोल्ड, 9 सिल्वर जबकि 10 ब्रांज मेडल हैं। भारत को तीरंदाजी, शूटिंग और बैडमिन्टन जैसे खेलों में गोल्ड हासिल किए हैं। इसके अलावा शॉटपुट और जैवलिन थ्रो जैसे खेलों में भारत में सिल्वर जबकि कई खेलों में ब्रांज मेडल हासिल हुए हैं। पेरिस पैरालंपिक में भारत ने 2021 के टोक्यो ओलंपिक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

पैरालंपिक में भारत के प्रदर्शन की चारों तरफ चर्चा हो रही है। शीतल देवी और अवनी लखेड़ा जैसे खिलाड़ियों को देशव्यापी स्तर पर ख्याति मिली है। दोनों ही खिलाड़ियों ने गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। भारत के पैरालंपिक में प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी लगातार हौसला बढ़ा रहे हैं। वह मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों से लगातार बातचीत कर रहे हैं। भारत का पैरालंपिक दल भी इस बीच पूरे जोश में है, रिकॉर्ड टूटने के बाद भारत के और अधिक मेडल जुटने की आशा है।

भारत के पैरालंपिक का यह प्रदर्शन इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि बीते कुछ सालों में ही इसमें क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। चाहे इन खेलों की फंडिंग हो या फिर खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, सभी मोर्चों पर बड़े बदलाव हुए हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि पेरिस में होने वाले इन पैरालंपिक खेलों के लिए भारत सरकार ने 2021-24 के बीच ₹74 करोड़ खर्च किए हैं। टोक्यो पैरालंपिक खेलों के लिए केंद्र सरकार ने ₹26 करोड़ खर्च किए थे, यानी इस बार के खेलों के लिए सरकार ने बजट में लगभग 2.8 गुने की बढ़ोतरी कर दी।

पैरालंपिक खेलों की चर्चा मात्र भारत के रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन या फिर उस पर हुए खर्चे के कारण ही नहीं हो रही, इसका एक कारण और भी है। जुलाई-अगस्त माह में पेरिस में हुए ओलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन भी इसका एक बड़ा कारण हैं। इन खेलों में भारत का प्रदर्शन ठीकठाक ही कहा जा सकता है। भारत ने ओलंपिक खेलों में कुल 6 मेडल जीते। इसमें से 5 ब्रांज और 1 सिल्वर मेडल था। भारत ओलंपिक में एक भी गोल्ड मेडल नहीं पा सका। गोल्ड मेडल के लिए भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा भी कुछ कारणों से सिल्वर पर अटक गए।

इसके अलावा विनेश फोगाट का पक्का हो चुका सिल्वर मेडल फाइनल मुकाबले से पहले उनका वजन बढ़ने के कारण हाथ से निकल गया। इस मामले में पेरिस से लेकर दिल्ली तक बवाल हुआ। किसी ने इसमें साजिश की बात कही तो किसी ने विनेश के स्टाफ को दोषी ठहराया। कहीं उनके लिए एक खाप मेडल बनाया गया तो अब उनकी राजनीतिक पारी शुरू होने की बात हो रही है। खैर, इन सब बातों पर दुबारा चर्चा का कोई ख़ास फायदा नहीं है, अंतिम सत्य यह है कि हमने मेडल नहीं मिल सका और विनेश का करियर भी इसी के साथ समाप्त हो गया।

विनेश और नीरज के अलावा कई खिलाडी अंतिम मौके पर चूके और भारत को मेडल नहीं मिले। ओलंपिक में भारत के कुल 117 एथलीट पहुँचे थे, इनमें 5 ही मेडल के साथ वापस लौट सके। 2024 पेरिस ओलंपिक पर केंद्र सरकार ने कुल ₹470 करोड़ खर्चे थे। कई खिलाड़ियों को विदेश में ट्रेनिंग लेने के लिए भेजा गया था, बाकियों को भी सर्वोत्तम सुविधाएँ मुहैया करवाई गईं थी। हालाँकि, अंत में इसका कोई ख़ास अच्छा परिणाम नहीं निकला और भारत मेडल की तालिका में काफी नीचे रहा।

अगर दोनों खेलों की फंडिंग की बात की जाए तो लगभग 6 गुने का अंतर है लेकिन अगर मेडल जीतने की बात की जाए तो पैरालंपिक खिलाड़ियों ने 4 गुने अधिक मेडल हासिल किए हैं। इसमें भी बड़ी बात ये है कि उन्होंने कई गोल्ड मेडल हासिल किए हैं और उन खेलों में किए हैं जहाँ भारत मजबूत नहीं माना जाता रहा है। जहाँ यह बात बिलकुल ठीक है कि किसी भी देश को अपने खिलाड़ियों को किसी खेल में प्रवीण करने के लिए अच्छे इन्फ्रा और ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है और इसके लिए अच्छे खासे फंड भी लगते हैं।

वहीं इस बात को भी मानना होगा कि खिलाड़ियों का अपना मनोबल और जीतने की आकांक्षा और उनका जूनून इससे बड़ा फैक्टर है और पैरालंपिक खिलाड़ियों ने यह मनोबल दिखाया है। उन्होंने यह दिखाया है कि शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी कैसे मानसिक दबाव झेलते हुए जीत हासिल की जाती है। इन खिलाड़ियों ने यह भी दिखाया है कि पुराने प्रदर्शन को और कितना बेहतर किया जा सकता है और जो भी सुविधाएँ उन्हें देश ने दी हैं, उसका सर्वोत्तम उपयोग कैसे किया जा सकता है।

अब देखना ओगा कि क्या ओलंपिक खिलाड़ी अगले खेलों में कैसा प्रदर्शन दिखाते हैं, उनसे आशा की जाएगी कि वह अपने पैरालंपिक के साथियों से सीख लेते हुए मेडल तालिका के रिकॉर्ड तोड़ें और जो भी चूक पेरिस ओलंपिक में हुई, उनको पीछे छोड़ते हुए विनिंग माइंडसेट दिखाएँ।