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जिन्होंने हिजाब पर लगाई रोक उन शिक्षक को टीचर्स डे पर मिलना था ‘बेस्ट प्रिंसिपल’अवॉर्ड, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने ‘तकनीकी दिक्कत’ बता रोकी: इस्लामी कट्टरपंथी कर रहे थे विरोध

कर्नाटक के शिक्षा विभाग ने मंगलवार को बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड देने की घोषणा की थी। इसके लिए राज्य के दो प्रिंसिपल का नाम चुना गया था। इनमें से एक BG रामकृष्णा हैं। रामकृष्णा उडुपी के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। रामकृष्णा के अलावा एक और शिक्षक का नाम चुना गया था।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य के एक प्रिंसिपल को बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड देने पर रोक लगा दी है। पहले उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया था, लेकिन प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI के विरोध के बाद इस पर रोक लगा दी गई। SDPI ने प्रिंसिपल के खिलाफ हिजाब पहनने से रोकने की बात कही है।

कर्नाटक के शिक्षा विभाग ने मंगलवार (3 सितम्बर, 2024) को बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड देने की घोषणा की थी। इसके लिए राज्य के दो प्रिंसिपल का नाम चुना गया था। इनमें से एक BG रामकृष्णा हैं। रामकृष्णा उडुपी के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। रामकृष्णा के अलावा एक और शिक्षक का नाम चुना गया था।

इन दोंनो को शिक्षक दिवस के दिन यह अवार्ड दिया जाना था। हालाँकि, कर्नाटक सरकार का यह फैसला कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI ने इसको लेकर विरोध जता दिया। SDPI ने तर्क दिया कि रामकृष्णा ने अपने कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहन कर आने से रोका था।

SDPI ने कहा कि जिस स्कूल में रामकृष्णा प्रिंसिपल हैं, वहाँ छात्राओं को हिजाब पहने के कारण कक्षा में नहीं घुसने दिया गया था, ऐसे में रामकृष्णा को यह अवार्ड नहीं दिया जाना चाहिए। SDPI के अलावा भी कई कथित एक्टिविस्टों ने इस पर बवाल मचाया।

दक्षिण कन्नड़ा के SDPI अध्यक्ष अनवर सादात ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कुंडापुर सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल रामकृष्ण ने मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने पर गेट से बाहर रखा और महीनों तक धूप में रखा। वह मुस्लिम विरोधी हैं और प्रोफ़ेसर होने के बाद भी साम्प्रदायिक हैं, ऐसे व्यक्ति को कॉन्ग्रेस सरकार अवार्ड दे रही है।”

SDPI के बवाल के बाद कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार इस पर झुक गई। कर्नाटक के शिक्षा विभाग ने BG रामकृष्णा को दिए जाने वाले अवार्ड को अभी के लिए रोक दिया है। शिक्षा विभाग ने इसके पीछे के कारण स्पष्ट नहीं किए हैं। उसने कहा है कि यह फैसला तकनीकी कारणों से लिया गया है।

कर्नाटक में मुस्लिम छात्राओं का क्लास में हिजाब पहनने की जिद को लेकर यह बवाल काफी लंबा चला था। 2022 में चालू हुआ यह बवाल 2023 तक जारी रहा था। इसकी शुरुआत एक कॉलेज में 6 छात्राओं को हिजाब पहन कर कक्षा में बैठने से रोकने पर हुई थी। इसके बाद छात्राएँ अड़ गई थीं।

विवाद बढ़ने पर कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में ड्रेस लागू करने के नियम बनाए थे। इसमें कहा गया था कि हिजाब ड्रेस का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकता। इसके विरोध में हिजाब पक्ष हाई कोर्ट तक पहुँच गया था। हाई कोर्ट ने भी कर्नाटक सरकार के फैसले को सही बताया था।

राज्य में 2023 में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने ऐलान किया था कि अब स्कूलों में हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं रहेगी। भाजपा ने इसे कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए उठाया गया कदम बताया था। अब इसी विवाद के जिन्न के बोतल से बाहर आने पर एक शिक्षक का अवार्ड रोक दिया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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