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OBC समाज की शिक्षिका पर गुब्बारे बेचने वाला चाँद बाबू बना रहा जबरन निकाह का दबाव, पीड़िता की माँ पर तलवार लेकर दौड़ा: पीछा कर के कुछ छिड़कता है

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक हिन्दू लड़की पर मुस्लिम युवक द्वारा जबरन निकाह का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। एक प्राइवेट स्कूल में टीचर पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित का नाम तनवीर उर्फ़ चाँद बाबू है जो कि सजावट का काम करता है। चाँदबाबू उर्फ़ तनवीर ने पीड़िता की बहन को भी अपशब्द बोले और उलाहना ले कर गए अन्य परिजनों को भी घर से भगा दिया। सोमवार (2 सितंबर 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला गोंडा जिले के कोतवाली शहर का है। यहाँ सोमवार (2 सितंबर) को OBC समुदाय की हिन्दू पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के बाद पीड़िता ने मीडिया से बात की। महिला ने बताया कि वो जब भी स्कूल पढ़ाने जाती है तो तनवीर उर्फ़ चाँद बाबू उसका पीछा करता है। रास्ते में चाँद बाबू पीड़िता के पीछे कुछ छिड़कता जिसका विरोध करने पर वह खुद से निकाह करने का दबाव बनाता है। कई दिनों तक प्रताड़ित होने के बाद पीड़िता ने अपनी माँ को सारी बात बताई।

पीड़िता की माँ चाँद बाबू के घर उलाहना ले कर गई। आरोप है कि तब चाँद बाबू के घर वाले एकजुट हो गए और सभी ने मिल कर पीड़िता की माँ को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए भगा दिया। इसी दौरान चाँद बाबू के घर वालों ने पीड़िता की माँ को तलवार दिखा कर कहा, “निकाह करवा दो वर्ना जान से मार डालेंगे।” महिला टीचर की माँ इस हरकत से डर गईं। उन्होंने खुद को बचाने के लिए वहाँ हामी भरी और भाग कर थाने पहुँच गईं। बकौल पीड़िता पुलिस चौकी और कोतवाली पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

पीड़िता ने आगे बताया कि पुलिस की सुस्ती की वजह से चाँद बाबू और मनबढ़ हो गया। वो पीड़िता के साथ उनकी बहन को भी छेड़ने लगा। उसकी गंदी हरकतें स्कूल के साथ बाजार या मोहल्ले में भी कहीं आते-जाते शुरू हो गईं। पीड़िता की बहन की शादी तय हुई तो चाँद बाबू ने उसको भी तुड़वाने की धमकी दी। चाँद बाबू कोतवाली क्षेत्र की ही एक मस्जिद के पास रहता है। वह फूलों की सजावट का काम करता है और साथ ही में गुब्बारों का ठेला भी लगाता है। चाँद बाबू की ये हरकतें पिछले 2 महीने से लगातार जारी हैं।

शिकायत में महिला टीचर ने आगे बताया कि वो और उनकी बहन जब कहीं भी आते-जाते हैं तब चाँद बाबू सबको दिखा कर उनका वीडियो बनाता है। विरोध करने पर चाँद बाबू पीड़िता के पूरे परिवार का नरसंहार करने की धमकियाँ देता है। बकौल पीड़िता चाँद बाबू को ऐसी सजा मिले कि वो दोबारा किसी और लड़की को परेशान न करे। सोमवार (2 सितंबर, 2024) को गोंडा पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए SHO गोंडा कोतवाली को निर्देशित कर दिया गया है।

‘माफीनामे से भर दो अख़बार का पहला पन्ना’: ‘इंडियन एक्सप्रेस’, TOI और भास्कर को हाईकोर्ट की फटकार, अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर की थी गलत रिपोर्टिंग

गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार (2 सितंबर 2024) तीन अखबारों टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई), इंडियन एक्सप्रेस और दिव्य भास्कर के माफीनामे को खारिज कर दिया। ये माफीनामा कोर्ट की कार्यवाही की गलत रिपोर्टिंग के लिए प्रकाशित किया गया था, जिसे छापने का आदेश गुजरात हाईकोर्ट ने दिया था। गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि ये माफीनामे काफी अस्पष्ट और छोटे थे। ऐसे में 3 दिन के समय में फिर से माफीनामे छापे जाएँ, वो भी सही हेडलाइन और बड़े अक्षरों में, पहले पूरे पन्ने पर। इस दौरान उस पन्ने पर कोई खबर नहीं होनी चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस प्रणव त्रिपेदी की बेंच ने ये आदेश दिया। दरअसल, गुजरात हाई कोर्ट मे 22 अगस्त को आदेश दिया था कि टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई), इंडियन एक्सप्रेस और दिव्य भास्कर अगले ही दिन यानी 23 अगस्त को माफीनामा प्रकाशित करें। तीनों अखबारों ने ऐसा किया भी, लेकिन बहुत छोटी सी जगह पर माफीनामा प्रकाशित कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट में एफिडेविट फाइल कर दिया गया।

TOI और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित माफ़ीनामा

इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने वकील से साफ तौर पर पूछा, “आपने इन माफीनामों को मोटे अक्षरों में क्यों नहीं प्रकाशित किया।” इस पर वकील ने कहा कि ऐसा ही किया गया है। लेकिन चीफ जस्टिस ने साफ कहा कि ये पर्याप्त नहीं है। इसे कोई नहीं पढ़ सकता। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा, “आपको पूरी हेडलाइन देनी चाहिए थी कि माफी किस संबंध में है। कौन समझेगा कि माफी किस बात के लिए है… आपको कहना चाहिए कि गलत रिपोर्ट के लिए माफी। यह बात सामने आनी चाहिए। माफी के साथ रिपोर्ट भी होनी चाहिए।” साथ ही कोर्ट ने इन माफीनामों को रिजेक्ट कर दिया और तीनों अखबारों को नए सिरे से माफीनामा प्रकाशित करने के लिए 3 दिन का समय दिया।

सोमवार (2 सितंबर 2024) को हाई कोर्ट ने निर्देश दिया, “हम उन्हें तीन दिन का अतिरिक्त समय देते हैं कि वे अपने द्वारा प्रकाशित समाचार पत्रों के प्रथम पृष्ठ पर मोटे अक्षरों में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, जिससे आम जनता को स्पष्ट रूप से सूचित किया जा सके कि इस मामले की सुनवाई के बारे में 13 अगस्त, 2024 को प्रकाशित समाचार पत्रों में उनके द्वारा की गई गलत रिपोर्टिंग के बारे में जानकारी दी गई है।” बता दें कि हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2024 को टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस और दिव्य भास्कर के संपादकों को नोटिस जारी कर उनसे सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकारों से संबंधित मामले में कोर्ट की कार्यवाही का “झूठा और अधूरी जानकारी” देने के लिए सफाई माँगी थी।

चीफ जस्टिस ने कहा, “यह कोई मज़ाक नहीं है। आप कोर्ट की प्रतिष्ठा के साथ खेल रहे हैं, आप कोर्ट की कार्यवाही के साथ खेल रहे हैं। आप ऐसा नहीं कर सकते। समाचार पत्रों में कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग जिस तरह से की जा रही है, उस पर हमें कड़ी आपत्ति है।”

वकील द्वारा न्यायालय से ताजा माफीनामा प्रकाशित करने के लिए एक और अवसर देने के अनुरोध पर, मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि ताजा माफीनामा समाचार के साथ बड़े आकार में, मोटे अक्षरों में होना चाहिए तथा उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि माफीनामा संपादकों द्वारा पेश किया जा रहा है। इसके बाद कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अगली बार माफीनामा मुख्य पन्ने पर और बड़ी जगह पर प्रकाशित होनी चाहिए। यही नहीं, इस माफीनामे के अलावा पन्ने पर कुछ और नहीं होना चाहिए।

दिव्य भास्कर की ओर से पेश हुए वकील ने सफाई दी थी कि रिपोर्टर बार और बेंच के बीच के संवाद को गलत समझ लिया होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्टर कोई आम आदमी नहीं है। अगर उन्हें इतनी भी समझ नहीं है, तो उन्हें कोर्ट की रिपोर्टिंग करने से रोका जाए, यानी उनकी रिपोर्टिंग पर बैन लगाई जानी। इस दौरान कोर्ट ने पूछा कि कोर्ट का समय जितना लगा है, उसकी भरपाई कौन करेगा, इसके बाद वकील ने कोर्ट से माफी माँगी और कोर्ट के निर्देशों को पूरा करने पर सहमति जताई। इस मामले में सीनियर वकील देवांग नानवती इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से पेश हुए, तो वकील एसपी मजूमदार इंडियन एक्सप्रेस की ओर से और गरिमा मल्होत्रा ​​टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से पेश हुए। वहीं, दिव्य भास्कर की ओर से वकील मौलिक जी नानावटी पेश हुए।

नईम ने अपनी की बेटी की गर्दन पर गँड़ासे से किया ताबड़तोड़ वार, जब तक मर नहीं गई तब तक मारता रहा: हाथ-पाँव से लेकर काट डाले शरीर के कई अंग

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से ऑनर किलिंग का मामला सामने आया है। यहाँ एक पिता ने अपनी बेटी को कुल्हाड़ी से काट डाला है। हत्या की वजह आरोपित की बेटी का एक युवक से अफेयर बताया जा रहा है। नईम ने अपनी 18 वर्षीया बेटी के हाथ और पैर शरीर के कई अंग गँड़ासे (धारधार हथियार) से काट कर अलग कर दिए थे। घटना सोमवार (2 सितंबर 2024) की है। आरोपित का नाम नईम है जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नईम को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बहराइच जिले के थाना क्षेत्र मोतीपुर की है। यहाँ के गाँव निबिया में नईम अपने परिवार के साथ रहता है। उसकी बड़ी बेटी खुशबू 18 साल की है। खुशबू का गाँव के ही एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के रिश्ते के बारे में उनके घर वालों को जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया। खुशबू पर उसके अब्बा ने तमाम पाबंदियाँ कायम कर दीं। इन पाबंदियों के बावजूद कुछ दिनों पहले खुशबू अपने प्रेमी के साथ घर छोड़ कर कहीं चली गई थी।

तब नईम ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पुलिस ने पीड़िता को बरामद करते हुए आरोपित पर नियमानुसार कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद नईम अपनी बेटी पर सख्त नजर रखने लगा। उसने अपनी बेटी को उसके प्रेमी से दूर रहने की हिदायत दी। हालाँकि इसके बावजूद मृतका अपने प्रेमी से चोरी-छिपे बात करती रही। सोमवार (2 सितंबर) को खुशबू का प्रेमी फिर से अपनी प्रेमिका से मिलने आया। नईम को देख कर वह भाग गया। तब आग बबूला नईम ने सारा गुस्सा अपनी बेटी पर उतार दिया।

आरोप है कि नईम ने गँड़ासा लिया और अपनी बेटी को घर के बाहर बुलाया। बेटी के घर से बाहर आते ही नईम ने उसकी गर्दन पर तब तक वार किए जब तक खुशबू के प्राण पखेरू नहीं उड़ गए। नईम का गुस्सा यहीं नहीं थमा। उसने एक पत्थर पर रख कर बारी-बारी अपनी बेटी के तमाम अंग काट कर अलग किए। नईम ने अपनी बेटी के हाथ, पैर, सिर आदि काट कर अलग कर दिए। कत्ल के बाद नईम के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखी। वह अपनी बेटी की लाश के पास ही बैठा रहा।

इस बीच मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने फ़ौरन मौके पर पहुँच कर नईम को गिरफ्तार कर लिया। मृतका की अम्मी जबरून्निशा ने अपने शौहर नईम के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस के मुताबिक नईम की बेटी अपने प्रेमी के पास पहले भी 2 बार घर से भाग चुकी थी। इन दोनों मौकों पर केस दर्ज कर के पुलिस आरोपित को पकड़ा था। दोनों मामलों की चार्जशीट भी अदालत में दाखिल की जा चुकी है। फिलहाल इस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

एक डॉक्टर की रेप-हत्या में गिरफ्तार, दूसरे ने शराब पीकर घुसाई बाइक, तीसरे ने जज के ही चुरा लिए पैसे… क्या है ममता बनर्जी का ‘सिविक वालंटियर’, कैसे अपराध बनी पहचान?

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में RG कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर का बलात्कार करके उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गई। यह मामला पूरे देश में उठा। इस मामले में एक आरोपित संजय राय को पकड़ा गया। संजय राय कोलकाता में पुलिस की बाइक लेकर घूमता था। उसके कई पुलिस कर्मियों के साथ अच्छे संबंध थे। संजय राज्य कोलकाता पुलिस में सिविक वालंटियर का काम करता है। उसके बारे में और भी जानकारियाँ सामने आई।

इस हत्या और रेप को लेकर छात्रों में गुस्सा भरा हुआ था। छात्रों के प्रदर्शन में भी एक पुलिस के सिविक वालंटियर ने बाइक घुसा दी। शराब के नशे में उसने बैरिकेड तोड़ते हुए प्रदर्शनकारियों के बीच बाइक दौड़ा दी और एक प्रदर्शनकारी छात्र को घायल कर दिया। इस सिविक वालंटियर को भी पकड़ लिया गया।

इससे पहले एक सिविक वालंटियर को एक जज से ₹40,000 चुराने के आरोप में पकड़ा गया। इससे पहले भी सिविक वालंटियरों के अपराध करने की कई घटनाएँ सामने आती रही हैं। बीते कुछ दिनों में इनकी भर्ती को लेकर प्रश्न भी उठे हैं।

क्या होता है सिविक वालंटियर?

जैसा कि नाम से जाहिर है, सिविक वालंटियर ऐसे लोग होते हैं जिन्हें पुलिस-प्रशासन की सहायता के लिए अस्थायी तौर पर भर्ती किया जाता है। बंगाल सहित देश के कई राज्यों में सिविक वालंटियरों की सहायता छोटी-मोटी ड्यूटी के लिए ली जाती है। अधिकांश मामलों में यह स्थानीय युवा होते हैं, इन्हें प्रशासन भर्ती करके इनसे छोटे-मोटे काम लेता है। इसमें ट्रैफिक का संचालन से लेकर त्योहारों में भीड़ का प्रबन्धन जैसे काम शामिल होते हैं। यह स्थानीय पुलिस के निर्देशन में काम करते हैं। इन्हें कई मौकों पर पुलिस-प्रशासन कुछ सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाता है।

पश्चिम बंगाल के सिविक वालंटियर से सम्बन्धित वेबसाइट बताती है कि इनकी ड्यूटी किसी त्यौहार के समय के, ट्रैफिक प्रबन्धन करने में और थानों में सहायता देने के लिए लगाई जा सकती है। इसके अलावा इन्हें अवैध पार्किंग रोकने में भी लगाया जा सकता है। सिविक वालंटियर की भर्ती एक अस्थायी प्रक्रिया है, इसके पीछे का उद्देश्य है कि जब तक पुलिस की संख्या में कमी है, तब तक उनके छोटे-मोटे काम यह वालंटियर करें।

कैसे भर्ती होते हैं, क्या फायदे?

सिविक वालंटियर की भर्ती के लिए स्थानीय युवाओं को तरजीह दी जाती है। पश्चिम बंगाल में सिविक वालंटियर बनने के लिए 8वीं पास की योग्यता होना जरूरी है। वह उसी थाने के निवासी होने चाहिए जहाँ उनकी तैनाती होनी है। इसके अलावा उनका मेडिकल तौर पर फ़िट होना चाहिए और साथ ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। इनका एक सामान्य सा टेस्ट और इंटरव्यू भी लिया जाता है। पश्चिम बंगाल में सिविक वालंटियर बनाए जाने वाले लोगों को 10 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है।

पश्चिम बंगाल में सिविक वालंटियर ₹310 अपनी ड्यूटी का पाते हैं। यह उन्हें काम के दिनों के हिसाब से दिए जाते हैं। इसके अलावा उन्हें ₹6000 का प्रतिमाह मानदेय भी मिलता है। सिविक वालंटियरों को पश्चिम बंगाल में कुछ अधिकार भी दिए गए हैं। इसके अलावा उनसे यदि अपनी ड्यूटी के दौरान कोई गलती होती है तो कार्रवाई का कोई विशेष प्रावधान उनके खिलाफ नहीं होता।

पश्चिम बंगाल में क्या स्थिति?

पश्चिम बंगाल में TMC सरकार आने के बाद से लगातार सिविक वालंटियर की भर्ती में इजाफा हुआ है। पश्चिम बंगाल में सबसे पहले सिविक वालंटियर की भर्ती वर्ष 2008 में हुई थी। तब राज्य वामपंथी सरकार थी। 2011 में जब TMC सरकार आई तो उसने सिविक वालंटियर भर्ती तेज कर दी। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 1.24 लाख से अधिक सिविक वालंटियर काम कर रहे हैं। इनकी संख्या पुलिस से लगभग दोगुनी है। यह समय के साथ बढ़ती ही गई है। पश्चिम बंगाल सरकार लगातार इन सिविक वालंटियर की भर्ती को लेकर सवालों में घिरती रही है।

क्यों उठते हैं सवाल?

जहाँ एक ओर सिविक वालंटियर की भर्ती का उद्देश्य कानून-व्यवस्था में सहायता बताया जाता है, वहीं इस पर लगातार सवाल उठे हैं। सिविक वालंटियर भर्ती प्रक्रिया से लेकर इनके आचरण तक को लेकर लगातार आलोचना की जाती रही है।

ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगता है कि इस संगठन में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को भरा जा रहा है और यह सरकारी खर्चे पर अपनी पार्टी चलाने का प्रयास है। इनकी भर्ती प्रक्रिया में भी पार्टी पदाधिकारियों का बड़े स्तर पर हस्तक्षेप होने का भी आरोप लगाया जाता है।

सिविक वालंटियरों के रवैये और इनके कौशल पर भी सवाल उठते रहे हैं। कभी कभार यह कानून भी हाथ में लेते हैं। कई सिविक वालंटियर अपराधों में लिप्त पाए गए हैं। कुछ आम जनता पर इस पद का रूतबा भी जमाते हैं। आलोचकों का कहना है कि पुलिस की कमी को भर्ती किए गए यह लोग पार्टी का काम करते हैं।

सिविक वालंटियरों को लेकर न्यायालय भी प्रश्न उठाता रहा है। मार्च, 2023 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक आदेश दिया था, इसके अनुसार सिविक वालंटियर को कानून व्यवस्था के कामों में नहीं किया जा सकता है। इसके बाद बंगाल सरकार ने सिविक वालंटियर की तैनाती के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी।

रागिनी नायक की खटाखट स्कीम- ₹10 हजार दो, राहुल गाँधी के साथ फोटो लो… कॉन्ग्रेस की ही पूर्व प्रवक्ता ने खोली पोल, बताया- कॉन्ग्रेस सरकारों में पति को भी मिलता है पद

कॉन्ग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी के विदेश मामलों की विभाग की संयोजक रागिनी नायक पर पार्टी की ही प्रवक्ता रहीं राधिका खेड़ा ने ‘आज तक’ न्यूज़ चैनल पर बहस के दौरान कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं। राधिका खेड़ा ने कहा, “मैं रागिनी नायक बन भी नहीं सकती। मुझे पार्टी से निलंबित नहीं किया गया था। ये 10,000 रुपए NSUI के बच्चों से लेती थी राहुल गाँधी के साथ तस्वीरें क्लिक करवाने के लिए।” बता दें कि ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा है।

राधिका खेड़ा अब भाजपा की प्रवक्ता हैं। उन्होंने इस बहस का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि रागिनी नायक के पति अशोक बसोया छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस सरकार में AAG थे, हिमाचल सरकार में में पिछली कॉन्ग्रेस सरकार में भी बड़े पद पर थे, और अब हिमाचल सरकार की कॉन्ग्रेस सरकार के वकील हैं। उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद ख़ुद के परिवार को कॉन्ग्रेस सरकार में लगातार लाभ दिलवाने वाली, स्वयं पार्टी के अंदर ही भ्रष्टाचार करने वाली ये कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अब उनके परिवार पर झूठे हमले कर रही है—जिनका राजनीति या छत्तीसगढ़ से कोई लेना-देना नहीं है।

राधिका खेड़ा ने आगे लिखा, “बता दूँ, मेरा भाई कभी भी दिल्ली के बाहर पढ़ा ही नहीं! राहुल गाँधी जी, अपनी प्रवक्ता को सिखाइए कि संविधान को पढ़े, जिसे राहुल गाँधी हर जगह लहराते हैं वही संविधान हर भारतीय को ये हक़ देता है कि कोई भी भारतीय कहीं भी पढ़ सकता है। रागिनी नायक, स्कूल तुम्हारे बच्चे भी जाएँगे, लेकिन भाजपा तब भी तुम्हारे बच्चों की पढ़ाई पर सवाल नहीं खड़ा करेगी, वो कही भी जाकरपढ़ें, उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ!”

राधिका खेड़ा ने कहा कि उन्होंने महिला विरोधी सच्चाई को उजागर किया, तो न्याय की जगह ‘डरो मत’ वाले राहुल गाँधी और जयराम रमेश ने ‘डर कर’ उन पर ‘गाली वाली मैडम’ की चाइनीज़ कॉपी को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यही राहुल गाँधी का ‘महिला न्याय’ है। राधिका खेड़ा ने आरोप लगाया कि जब उनके साथ कॉन्ग्रेसियों ने वीभत्स घटना को अंजाम दिया तब उन्होंने उस कमरे से भाग कर अपनी जान बचाई थी और उन्हें न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया गया – आज रागिनी नायक इस पर तंज कस रही हैं।

‘RSS आतंकवादी संगठन, 26/11 हिंदुओं ने किया’: प्रयागराज के जिस मदरसे में चल रहा था नकली नोट का कारखाना, वहाँ मौलवी देते थे नफरती तालीम

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बुधवार (28 अगस्त 2024) को पुलिस ने एक मदरसे में छापा मारा था। यहाँ लगभग सवा करोड़ रुपए के नकली नोट और इसे छापने की मशीन बरामद हुई थी, तब पुलिस ने मदरसे के मौलवी सहित 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। अब छानबीन के बाद दावा किया जा रहा है कि इस मदरसे में बच्चों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को एक आतंकवादी संगठन के तौर पर पढ़ाया जा रहा था। इस बाबत कुछ कट्टरपंथी साहित्य भी बरामद हुए हैं जिसकी जाँच करवाई जा रही है। इनमें से एक किताब रिटायर्ड IPS अधिकारी एस एम मुशर्रफ द्वारा लिखी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस मदरसे में नकली नोट छापने का खुलासा हुआ था उसका नाम जामिया हबीबिया मस्जिद-ए-आज़म है। अब इस मदरसे की तलाशी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के खिलाफ नफरत का प्रचार करने वाली कई पुस्तकें बरामद हुईं हैं। किताबों के साथ कुछ भड़काऊ तस्वीरें भी मिली हैं। ये तमाम चरमपंथी साहित्य, गिरफ्तार हो चुके मदरसे के मौलवी तफसीरुल आफ़ीरीन के कमरे से निकले हैं। इन्हीं किताबों से यहाँ पढ़ने वाले बच्चों को नफरत की तालीम दी जा रही थी।

बताया जा रहा है कि मौलवी तफसीरुल बच्चों का ब्रेनवॉश करता था। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को देश का सबसे बड़ा आतंकी समूह बताया करता था। बरामद किताबों में एक ‘RSS देश का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन’ भी है। यह किताब महाराष्ट्र कैडर के पूर्व IPS अधिकारी एस एम मुशर्रफ ने लिखी है। मौलवी द्वारा मदरसे से कई स्पीड पोस्ट भी किए गए हैं जिसकी पर्चियाँ मौलवी के कमरे से मिली हैं। इन पर्चियों के साथ क्या, कहाँ और क्यों भेजा गया इसकी भी जाँच कराई जा रही है।

मदरसे से बरामद कई किताबें उर्दू में हैं जिनके हिंदी अनुवाद किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक किताब में पाकिस्तानी अख़बार डॉन की तारीफ की गई है। 26/11 के आतंकी हमले को अजमल कसाब के बजाय हिन्दूवादी संगठनों पर भी थोपने का प्रयास एक किताब में किया गया है। मदरसे में बच्चों को बताया जाता था कि मालेगाँव, मोडासा और समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट RSS से जुड़े लोगों ने किए थे। बच्चों को पट्टी पढ़ाते हुए मौलवी RSS के साथ अभिनव भारत को भी कट्टरवादी ब्राह्मण संगठन और दंगे कराने वाला समूह बताया करता था।

हालाँकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मीडिया से बात करते हुए पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच पूरी होने के बाद आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। इस मदरसे में लगभग 70 छात्र दीनी तालीम लेते हैं। ये छात्र उत्तर प्रदेश के अलावा ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से हैं। इनके यहाँ ठहरने आदि के लिए हॉस्टल का भी इंतजाम है। जाँच में सामने आया है कि 84 साल पुराना यह मदरसे बगैर मान्यता के सोसाइटी रजिस्ट्रेशन पर चल रहा था।

भोजपुरी से भी बुरा हाल मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का: जिस महिला आर्टिस्ट ने कई भाषाओं की सिनेमा में किया काम उसने बताया ‘गंदा अनुभव’, एक्टर बाबूराज पर भी रेप केस

यौन शोषण के सामने आ रहे मामलों के कारण मलयालम फिल्म इंडस्ट्री इस समय खूब बदनाम है। आए दिन कोई न कोई पीड़ित इस मामले में खुलासा करते हुए केस दर्ज कराता है और एक नए नाम को सुन लोग अचंभित हो जाते हैं। पिछले दिनों मुकेश,सिद्दीकी, जयसूर्या समेत कई ऐसे नाम सामने आए थे। अब इसी क्रम में एक और नई शिकायत दर्ज हुई जो कि एक्टर बाबूराज के खिलाफ है। वहीं एक मेकअप आर्टिस्ट भी सामने आई हैं जिन्होंने बताया कि उन्होंने हिंदी, भोजपुरी समेत कई इंडस्ट्री में भी काम किया है लेकिन उनका सबसे बुरा अनुभव मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को लेकर ही रहा।

मनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, उनके खिलाफ मामला एक जूनियर आर्टिस्ट ने दर्ज कराया है। कलाकार का कहना है कि उसका शोषण आदिमाली के रिजॉर्ट में और अलुवा स्थित घर में किया गया था। घटना 2019 की है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत सुनने के बाद एक्टर पर रेप केस दर्ज किया है।

पीड़िता ने बताया कि वो बाबूराज के रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करती थी। उसकी मुलाकात सबसे पहले बाबूराज से रिजॉर्ट में उसके जन्मदिन पर हुई। बाद में 2018 में एक्टर ने उसे कोडासा फिल्म में छोटा सा रोल ऑफर किया।

पीड़िता के अनुसार, “2019 में बाबूराज ने मुझे अपनी नई फिल्म पर चर्चा के लिए अलुवा स्थित अपने घर बुलाया था। उन्होंने मुझे बताया कि निर्देशक, निर्माता और एक्टर भी बातचीत के लिए आएँगे। लेकिन जब मैं वहाँ पहुँची तो वहाँ केवल बाबूराज और उनके पुरुष कर्मचारी थे। मैंने पूछा कि बाकी लोग कहा हैं तो इस पर उन्होंने मुझे ग्राउंड फ्लोर पर इंतजार करने को कहा। बाद में वह मुझे अपने कमरे में ले गए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए मेरे साथ बलात्कार किया। उन्होंने मुझे अगले दिन ही बाहर जाने दिया। वह हमारी आखिरी मुलाकात थी। उन्होंने मुझे एक बार ब्लैक कॉफी के लिए पूछा तो मैंने उन्हें साफ मना कर दिया था।”

बता दें कि मलयालम फिल्म उद्योग में हेमा कमेटी रिपोर्ट के सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। तमाम अभिनेता, फिल्म निर्देशक और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के विरुद्ध केस दर्ज हो रहे हैं। पीड़िताओं का कहना है कि उन्होंने शुरुआत में इस बारे में कुछ नहीं बताया था क्योंकि ये नाम बहुत ऊँचे नाम थे और उन्हें डर था कि कहीं लोग उन्हें ही गलत न समझने लगें कि सब कुछ पब्लिसिटी के लिए।

एक रिपोर्ट के अनुसार, मात्र एक हफ्ते में 20 से ज्यादा केस एसआईटी के पास दर्ज हुए हैं। पीड़िताएँ सिर्फ शारीरिक शोषण ही नहीं बल्कि मानसिक शोषण की भी शिकायत कर रही हैं। एक मेकअप आर्टिस्ट ने हाल में मनोरमा की रिपोर्ट पर में अपनी कहानी को साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे मलयालम इंडस्ट्री में नाराजगी दिखाने के लिए कलाकारों पर काम थोपे जाते है। इस तरह का माहौल बना दिया जाता था कि कोई काम न कर पाए।

उन्होंने ये भी बताया कि सिर्फ एक्ट्रेस ही ऐसी चीजों की शिकार नहीं होतीं बल्कि हेयर स्टाइलिस्ट आदि को भी ये सब झेलना पड़ता है। केरल में मेकअप आर्टिस्ट एसोसिएशन की मेंबरशिप पाने वाली पहली महिला मेकअप आर्टिस्ट मिट्टा एंटनी ने बताया, “मैंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, भोजपुरी और मलयालम मिलाकर 40 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। लेकिन उनका सबसे गंदा अनुभव मलयालम इंडस्ट्री को लेकर ही रहा है।”

इधर ममता सरकार पेश कर रही एंटी रेप बिल, उधर TMC की महिला MLA न्याय माँग रहे डॉक्टरों को बता रही ‘कसाई’: जानिए कौन है लवली मोइत्रा

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला डॉक्टर की रेप और हत्या के मामले में पूरे देश में उबाल है। डॉक्टर सुरक्षा की माँग कर रहे हैं और अपराधी को जल्द से जल्द सजा देने की माँग कर रहे हैं। इस बीच, ममता बनर्जी की सरकार ने विधानसभा में एंटी रेप बिल पेश किया है, तो दूसरी तरफ उन्हीं के पार्टी के नेताओं की बदजुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजे मामले में टीएमसी विधायक और अभिनेत्री लवली मैत्रा डॉक्टरों को कसाई कहती नजर आ रही हैं। वो मंच से डॉक्टरों को कसाई कह रही हैं, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में टीएमसी विधायक अरुंधति मैत्रा उर्फ लवली मैत्रा कहती दिख रही हैं, “वे (डॉक्टर) प्रदर्शन के नाम पर क्या कर रहे हैं? गरीब से गरीब लोग जो ग्रामीण इलाकों से आते हैं, वे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। वे अभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा देखभाल की कमी से जूझ रहे हैं। उन्हें कोई इलाज नहीं मिल रहा है। क्या इनके पास इंसानियत है? क्या ये लोग मनुष्य हैं? डॉक्टर अब कसाई में बदल रहे हैं।” लवली मैत्रा के बयान के बाद उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। सोनापुर पुलिस स्टेशन में लवली के खिलाफ शिकायत दी गई है।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाल ने लवली मैत्रा का वीडियो शेयर कर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने एक्स पर लिखा, “टीएमसी विधायक लवली मैत्रा ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की तुलना कसाईयों से की है। वह कोलकाता पुलिस में एक आईपीएस की पत्नी भी हैं, जो डॉक्टरों को नोटिस और समन जारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ इतनी नफरत क्यों? सिर्फ इसलिए कि वे ममता सरकार और उसके पुलिस बल को जवाबदेह ठहरा रहे हैं? उदयन गुहा अरूप चक्रवर्ती कुणाल घोष अब लवली मैत्रा! क्या टीएमसी उन्हें बर्खास्त करेगी या उनका बचाव करेगी, जैसे उसने डॉ. संदीप घोष का बचाव किया था?”

पश्चिम बंगाल बीजेपी से जुड़ी केया घोष ने लवली मैत्रा का बयान शेयर किया और लिखा, “टीएमसी विधायक लवली मैत्रा ने अब डॉक्टरों की तुलना कसाईयों से की है! ईमानदारी से उम्मीद है कि अगर भगवान न करे लवली मैत्रा बीमार पड़ें, तो वह अपने इलाज के लिए इनमें से किसी भी “कसाई” के पास नहीं जाएँगी।”

उन्होंने एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें लवली मैत्रा कहती दिख रही हैं कि उन्हें पता है कि ममता के विरोधियों से कैसे निपटना है। केया ने एक्स पर लिखा, “लवली मैत्रा पार्ट-2 विधायक मैडम ने डॉक्टरों को कसाई कहना ही बंद नहीं किया। उनका दावा है कि उन्हें ममता बनर्जी पर उठने वाली उंगलियों को “नीचे” करना आता है।”

लवली मैत्रा कौन हैं?

लवली मैत्रा का असली नाम अरुंधुति मैत्रा (33 साल) है। वो बंगाली टीवी एक्ट्रेस हैं। लवली मैत्रा ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव में सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। मूलरूप से कोलकाता की रहने वाली लवली मैत्रा सेंट पॉल कॉलेज से अंग्रेजी में ऑनर्स की पढ़ाई की है। महज 30 साल की उम्र में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और पहली ही बार में विधायक बनने में सफल रहीं। लवली मैत्रा की शादी साल 2016 में सौम्य रॉय से हुई। सौम्य राय विधानसभा चुनाव के दौरान हावड़ा (ग्रामीण) के एसपी थे, लेकिन लवली के चुनाव लड़ने की वजह से चुनाव आयोग ने उन्हें ड्यूटी से हटा दिया था। हालाँकि ममता बनर्जी ने सत्ता में लौटती ही सौम्य रॉय को फिर से महत्वपूर्व जगह तैनात कर दिया।

टीएमसी नेता ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को धमकाया

बता दें कि टीएमसी नेता लगातार आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में केस में सक्रिय हैं। इस मामले में प्रिंसिपल संदीप घोष समेत 4 को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, एक टीएमसी नेता आतिश सरकार ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को धमकाया था, जिसके बाद टीएमसी ने आतिश को 1 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। आतिश ने कहा था, “तुम लोग जो दीदी को गाली दे रहे हो, उनका चरित्र हनन करने में लगे हो। अगर हम तुम्हारी माँ और बहनों के अश्लील पोस्टर बनाकर उन्हें दीवारों पर लगा दें तो तुम उसे हटा नहीं पाओगे। मैं तुम्हारी माँ-बहनों की एडिटिड फोटो तुम्हारे दरवाजों पर टाँगूगा तब तुम घर से बाहर तक नहीं निकल पाओगे… संभल जाओ। टीएमसी के लोग सड़कों पर आ गए हैं। अगर हमने हर इलाके में घूमना शुरू कर दिया क्या तुम अपने घरों से निकल पाओगे।”

बता दें कि 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में नाइट ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर से रेप के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में जब अन्य डॉक्टर इंसाफ माँगने प्रदर्शन पर उतरे तो उन्हें उपद्रवियों द्वारा डराया-धमकाया गया था। साथ ही अस्पताल में भी तोड़फोड़ हुई थी। इसके बाद टीएमसी पर काफी सवाल उठे और ममता सरकार द्वारा एक्शन न लिए जाने की निंदा की जाने लगी। इस बीच आतिश सरकार द्वारा ये धमकी आई लेकिन इस पर पार्टी ने एक्शन लेते हुए नेता को पार्टी गतिविधियों से एक साल के लिए दूर कर दिया। हालाँकि पार्टी लवली मैत्रा के मामले में क्या एक्शन लेगी, ये देखने वाली बात है।

सुरेश रैना के फूफा और भाई के 12 हत्यारों को उम्रक़ैद, 2-2 लाख रुपए का जुर्माना: सोते परिवार को सँभलने का भी नहीं दिया था मौका, नाम – शाहरुख़, मोहब्बत, असलम, आमिर…

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना के रिश्तेदारों की हत्या के मामले में पठानकोट की जिला अदालत ने सभी 12 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन सभी पर 2-2 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। सजा पाने वाले मुल्जिमों के नाम शाहरुख़, मोहब्बत, रिहान, असलम, तजवल बीवी, काज़म, चाहत, जबराना, आमिर, सेहजान, बाबू मियाँ और मैचिंग हैं। मंगलवार (3 सितंबर, 2024) को इन सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की सुनवाई पठानकोट के ADJ जितेंद्र पाल खुरमी की कोर्ट में हुई। लगभग 4 साल तक चले इस मुकदमे में बचाव पक्ष ने दर्जन भर आरोपितों के पक्ष में तमाम दलीलें दीं। वहीं अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में वो तमाम सबूत पेश किए जो घटना को आरोपितों द्वारा ही किया जाना साबित किया। लम्बी बहस के बाद अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी सभी 1 दर्जन आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 2-2 लाख रुपए जुर्माना भी ठोंका है।

सज़ा पाए आरोपितों में औरैया UP का निवासी 28 साल का मैचिंग, राजस्थान के छूंजू का निवासी 46 वर्षीय शाहरुख़ खान, 43 वर्षीय जबरना, 26 साल का मोहब्बत और 29 वर्षीय रिहान, पंजाब के अमृतसर का 44 वर्षीय असलम, UP के सहारनपुर की 53 वर्षीया तजवल बीवी और 60 वर्षीय काज़म, 55 वर्षीय आमिर, 18 वर्षीय सेहजान, कानपुर UP का 38 वर्षीय चाहत और बरेली जिले का 70 वर्षीय बाबू मियाँ शामिल हैं। इन सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। सज़ा पाए सभी आरोपितों पर डकैती और हत्या के आरोप साबित हुए हैं।

बताते चलें कि 19 अगस्त, 2020 की रात पठानकोट जिले के गाँव थरियाल में दर्जन भर हमलावरों ने एक घर को निशाना बनाया था। यह घर ठेकेदार अशोक का था जो क्रिकेटर सुरेश रैना के फूफा थे। हमलावरों ने घर में सो रहे सदस्यों पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस दौरान पुरुषों के साथ महिलाओं को भी निशाना बनाया गया था। घटना के समय पीड़ित परिवार के अधिकतर सदस्य छत पर सो रहे थे। इनकी चीख-पुकार सुन कर जब आसपास के लोग जमा होने लगे तो हमलावर भाग निकले थे।

डकैती के मकसद से किए गए इस हमले में सुरेश रैना के 58 वर्षीय फूफा अशोक कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनके 32 वर्षीय बेटे कौशल कुमार ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस हमले में सुरेश रैना की 55 वर्षीय बुआ आशा देवी और उनका 24 साल का बेटा अपिन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों में आशा देवी की 80 वर्षीया सास सत्या देवी भी शामिल थीं। तब पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास व अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू की थी और बारी-बारी सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था।

‘हम करेंगे अपने कंटेंट की समीक्षा, भविष्य में राष्ट्रीय भावनाओं का रखेंगे ध्यान’: मोदी सरकार की फटकार के बाद बोला Netflix, वेब सीरीज में ‘भोला’ और ‘शंकर’ को दिखाया है आतंकी

अनुभव सिन्हा की वेब सीरीज ‘IC814: द कंधार हाईजैक’ Netflix पर रिलीज होने के बाद चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसमें आतंकवादियों के असली नाम की जगह उनके छद्म हिन्दू नामों पर अधिक फोकस रखा गया है। साथ ही उन आतंकियों का ‘मानवीय पक्ष’ दिखा कर उनका महिमामंडन किया गया है। आतंकी जहाज के कैप्टन को मदद का वादा करते हैं, यात्रियों से क्षमा माँगते हैं, भारत सरकार का उस समय रवैया ठीक नहीं था, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह आतंकियों को छोड़ने के खिलाफ थे – यही सब दिखाया गया है।

अब ‘नेटफ्लिक्स इंडिया’ की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल ने भारत सरकार को आश्वासन दिया है कि भविष्य में कंपनी अपने कंटेंट को लेकर संवेदनशील रहेगी। भारत सरकार के अधिकारियों और ‘नेटफ्लिक्स इंडिया’ के बीच लगभग एक घंटे बैठक चली, जिसमें इस वेब सीरीज पर चर्चा हुई। ये वेब सीरीज हरकत-उल-मुजाहिदीन के आतंकियों द्वारा 1999 में भारतीय विमान को हाईजैक कर तालिबान शासित कंधार में ले जाए जाने और यात्रियों के बदले 3 आतंकियों को भारत की जेल से छुड़ाए जाने की घटना पर आधारित है।

‘Netflix India’ ने सरकार को आश्वासन दिया है कि वो अपने कंटेंट की समीक्षा करेगा ताकि आने वाली वेब सीरीज-फिल्मों में राष्ट्रीय भावनाओं का ध्यान रखा जा सके और बच्चों की ज़रूरतों के हिसाब से भी संवेदनशील रहे। कंपनी ने कहा कि अपनी सभी नई रिलीज को लेकर इस आश्वासन का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय संवेदनाओं के साथ खेलने का किसी को भी अधिकार नहीं है, भारत की संस्कृति और सभ्यता का हमेशा सम्मान रहेगा।

भारत सरकार ने चेताया है कि किसी भी चीज को गलत तरीके से दिखाने से पहले सोचना चाहिए। साथ ही बताया कि सरकार इसे काफी गंभीरता से ले रही है। बता दें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने नेटफ्लिक्स को समन किया था। बता दें कि आतंकियों के कोडनेम ‘भोला’ और ‘शंकर’ को वेब सीरीज में अधिक हाइलाइट किया गया है। अनुभव सिन्हा इससे पहले ‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’, ‘भीड़’ और ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों का भी निर्माण कर चुके हैं।