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बांग्लादेश में बीच सड़क पर सोहेल ने रातोंरात खड़ी कर दी घर, 25 हिन्दू परिवारों का रास्ता ब्लॉक: पीड़ित बोले- अब अस्पताल भी नहीं जा सकते

बांग्लादेश में हिंदुओं पर जारी इस्लामी हमलों के बीच, 25 हिन्दू परिवार एक जगह बंध कर रह गए हैं। यहाँ एक स्थानीय गुंडे ने इन 25 हिन्दू परिवारों का आने-जाने का रास्ता रोक लिया है। उसने रास्ते के बीचों-बीच अपना घर खड़ा कर लिया है।

यह घटना बांग्लादेश के गोपालगंज जिले के कोटालीपारा उपजिला के बंदाल गांव में हुई है। जमुना टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ के हिंदू इलाके में कच्ची सड़क 50 साल से ज्यादा समय से मौजूद है। लेकिन अब यहाँ के लोगों का जीवन एक ही जगह ठहर गया है। इस मामले पर बात करते हुए ज्योत्सना करमाकर नाम की एक महिला ने अपना दर्द बताया। महिला ने बताया, “हम अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने सड़क पर घर बना लिया है।”

एक बुजुर्ग महिला ने बताया, “हमारे पास यहाँ पर ज़मीन है। सोहेल हाजरा ने रातों-रात इस जमीन को जोत दिया और उस पर घर बना दिया। हम्मरे बीच पहले से कभी कोई विवाद नहीं रहा है। हमें कुछ भी नहीं पता कि उसने कब यहाँ घर बना दिया। सड़क यहाँ पर अंग्रेजों के जमाने से बनी है। बचपन में तक हमने इसे देखा था।”

हिन्दू परिवारों की जमीन पर कब्जा करने वाले गुंडे का नाम सोहेल हाजरा है। उसने उस रास्ते पर अपना घर खड़ा कर लिया है। जब उसके इस कदम का हिन्दू परिवारों ने विरोध किया तो सोहेल उन्हें धमकाने लगा और उन्हें मारने पीटने की धमकी दी। सोहेल की धमकी के बाद बंदल गाँव में हिंदू समुदाय अब डर के साये में जी रहा है।

एक और व्यक्ति ने बताया, ”स्थिति इतनी खराब है कि हम किसी को भी आपात स्थिति में अस्पताल तक नहीं ले जा सकते। हमें अपने लोगों को कंधे पर लाद कर अस्पताल ले जाना पड़ेगा। सड़क की यह हालत है। यहाँ सोहेल और मेरी दोनों की जमीन है।”

सोहेल हाजरा से पीड़ित लोगों ने कहा, “हमारे पास आवाजही के लिए और कोई सड़क नहीं है, अगर सड़क पर से अतिक्रमण नहीं हटाया गय तो हमें घरों में नजरबंद रहना होगा। हम यही अन्दर ही रहने पर मजबूर होंगे।” पीड़ितों ने बताया कि कि सोहेल हाजरा और उसके आदमियों ने उन्हें धारदार हथियारों के साथ धमकाया भी।

एक महिला ने इस बात पर दुख जताया कि कैसे सोहेल ने उनके इलाके को बर्बाद कर दिया है। महिलाने बताया कि वह हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच लगातार तनाव पैदा करवा रहा है। वहीं दूसरी ओर आरोपित सोहेल हाजरा का दावा है कि जिस जमीन पर उसने रोड बनाई है, वह उसकी खुदकी है।

सोहेल का रोड रोकने का मामला स्थानीय प्रशासन के पास भी पहुँच गया है। शिकायत के बाद, अधिकारी मौके पर पहुँचे हैं। उन्होंने अभी दोनों पक्षों की बातचीत करवाके समझौता करवाने का प्रयास किया है। यहाँ पर लोगों के आने-जाने के के लिए एक संकरा रास्ता बना दिया है। यहाँ अस्थायी घर अब भी बना है।

नहीं डाला संपत्ति का ब्यौरा तो योगी सरकार ने रोकी 2.44 लाख कर्मचारियों की सैलरी, दलील सुनने के बाद दिया और समय: अधिकारी बना रहे त्योहारों-परीक्षाओं का बहाना

उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति का ब्यौरा न देने वाले 2.44 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया था। हालाँकि बाद में योगी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को थोड़ी और राहत दे दी है और सैलरी भी जारी कर दी है। इस बार जो समय दिया गया है, वो आखिरी है। बढ़ाए गए समय में भी अगर कोई कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं देता है, तो उसका वेतन रोक दिया जाएगा।

फिलहाल इस महीने के लिए ऐसे सभी कर्मचारियों को राहत मिल गई है, जिन्होंने किसी न किसी वजह के चलते अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया था। इस मामले में पुलिस विभाग के मुखिया के दफ्तर से सरकार से अपील की गई थी कि पुलिस वाले तमाम परीक्षाओं, त्यौहारों के चलते व्यस्त रहे, ऐसे में इस विभाग को और समय दिया जाए, जिसके सरकार ने मान लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा हर हाल में 31 अगस्त 2024 तक देने के लिए कहा था। इसमें चल और अचल संपत्तियों की पूरी जानकारी दी थी। यह ब्यौरा HR पोर्टल (मानव संपदा पोर्टल) पर दिया जाना था, लेकिन राज्य के कुल 71 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों ने ही अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया था, बाकियों ने नहीं दिया था। जिसके बाद योगी सरकार ने बाकी के 2.44 लाख से ज्यादा कर्मचारियों का वेतन रोक दिया था।

बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग के साथ पुलिस वाले अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने में फिसड्डी साबित हुए थे। जिसके बाद मुख्य सचिव के आदेश के चलते सबके वेतन रोके गए थे। वहीं, डीजीपी मुख्यालय ने नियुक्ति विभाग को पत्र भेजकर पलिसकर्मियों के लिए संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए कुछ अतिरिक्त समय दिए जाने का अनुरोध किया था। पत्र में कहा गया था कि त्योहारों और पुलिस भर्ती परीक्षा के कारण तमाम पुलिस कर्मी समय से अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दे पाए। हालाँकि अब सरकार ने अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग समय दिया है।

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार के पास 8 लाख 46 हजार 640 कर्मचारी हैं, जिसमें से 6 लाख 2 हजार 75 कर्मचारी अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा दे चुके हैं। संपत्ति का ब्यौरा देने में टेक्सटाइल, सैनिक कल्याण, ऊर्जा, खेल, कृषि और महिला कल्याण विभाग के कर्मचारी सबसे आगे रहे।

‘कपिल देव पर थूकेंगे, धोनी को माफ नहीं करूँगा’: योगराज सिंह की जहरीली वीडियो पर भड़के लोग, युवराज सिंह का वीडियो शेयर कर मानसिक स्थिति पर उठा रहे सवाल

भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। हाल में उन्होंने भारतीय टीम के पूर्व कप्तानों कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी के बारे में भी अपशब्द कहे हैं। उनकी वीडियो वायरल होने के बाद उनकी जगह-जगह आलोचना हो रही है वहीं लोग जवाब में युवराज सिंह की ही एक पुरानी वीडियो साझा करके योगराज सिंह की मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

वायरल वीडियो में योगराज सिंह को पहले कपिल देव को उलटा-सीधा कहते सुना जा सकता है। वो कहते हैं, “हमारे समय के सबसे महान कप्तान कपिल देव… मैंने उनसे कहा, मैं तुम्हें ऐसी स्थिति में छोड़ दूँगा कि दुनिया तुम पर थूकेगी…आज, युवराज सिंह के पास 13 ट्रॉफी हैं, और तुम्हारे पास केवल एक, विश्व कप है…चर्चा समाप्त हो गई है।”

वहीं कपिल देव के अलावा योगराज सिंह ने धोनी के लिए भी जहर उगला। योगराज कहते दिखे, “मैं धोनी को कभी माफ नहीं कर सकता उसके कारण ही मेरे बेटे युवराज सिंह का करियर जल्दी खत्म हुआ है। युवी 4 से 5 साल और खेल सकता था लेकिन वो धोनी था जिसने ऐसा नहीं होने दिया… युवराज सिंह को तो भारत रत्न मिलना चाहिए। कैसर से लड़कर उसने भारत को विजेता बनाया।”

योगराज सिंह वीडियो में ये भी कहते दिखे कि उनके घरवालों ने उन्हें कह दिया था- ‘तेरे जैसा कु&^, ह$म*&^ आदमी नहीं पैदा हो सकता।’ उन्होंने एक प्रदीप मैग्जीन का जिक्र करते हुए कहा कि वो उस आदमी को ढूँढ रहे हैं क्योंकि उसने अपनी मैग्जीन में लिखा था कि योगराज सिंह सठिया गया है। आगे वो खुद बताते हैं कि उन्होंने अपनी बीवी को घर से निकलने को कहा था और कहा था कि वो युवराज सिंह को भी अपने साथ ले जाएँ। वो दूसरी शादी करके दूसरा बच्चा पैदा करेंगे, फिर उसको लीजेंड बनाएँगे और सबको दिखाएँगे कि आखिर योगराज सिंह चीज क्या है।

अब योगराज की इस वीडियो के जवाब में लोग युवराज सिंह के उस इंटरव्यू की क्लिप्स को लगा रहे हैं जहाँ उन्होंने कहा था- “मुझे लगता है कि मेरे पिता को एक मानसिक समस्या है और वह इसे स्वीकार नहीं करना चाहते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि कुछ ऐसा है जिस पर उन्हें ध्यान देने की आवश्यकता है, वह इसे स्वीकार नहीं करते हैं, जैसे मैं स्वीकार करता हूँ कि मुझे थैरेपी की आवश्यकता है, लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं करते हैं।”

युवराज की वीडियो क्लिप बीयर बाइसेप्स के पॉडकॉस्ट की है। यहाँ युवराज सिंह ने अपने जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की थी। इसी क्रम में पिता से संबंधों वाले सवाल पर उन्होंने अपनी बात रखी थी।

हिमाचल प्रदेश में 53 साल में जो न हुआ, वह कॉन्ग्रेस ने कर दिखाया: 1 सितंबर को न आई सैलरी-न मिला पेंशन, जानिए कितना भीषण है प्रदेश का आर्थिक संकट

कॉन्ग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है। आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि 2 लाख कर्मचारी सितम्बर महीने में अपनी सैलरी का इंतजार कर रहे हैं। राज्य के पेंशनर भी अपनी पेंशन से वंचित हैं। हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार इस संकट से उबरते नहीं दिखाई दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के 2 लाख कर्मचारियों और 1.5 लाख पेंशनरों को अगस्त महीने की सैलरी सितम्बर माह के 3 दिन होने के बाद भी नहीं मिली है। सामान्यतः हर महीने की 1 तारीख को आने वाली सैलरी और पेंशन सितम्बर माह में नहीं आई। 1 तारीख को रविवार होने के कारण इसे बैंकिंग व्यवस्था में देरी मानी गई।

कर्मचारियों और पेंशनरों को आश्चर्य तब हुआ जब उन्हें 2 तारीख को पैसा भी नहीं मिला, इस दिन सोमवार था और बैंक खुले थे। बताया गया है कि सैलरी और पेंशन में देरी सरकार की आर्थिक स्थिति के कारण हुई है। 3 सितम्बर, 2024 को भी 3.5 लाख लोगों को पैसा मिलने की कोई सूचना नहीं है।

हिमाचल प्रदेश में सैलरी-पेंशन ना मिल पाने की स्थिति राज्य के गठन के बाद पहली बार आई है। 1971 में बने हिमाचल प्रदेश में लगभग पाँच दशक में कभी ऐसी स्थिति पहले नहीं आई है जब कर्मचारियों को अपनी तनख्वाह और पेंशन के लिए इंतजार करना पड़ा हो।

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति बीते कुछ समय में लगातार बिगड़ रही है। राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार आने के बाद से कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आने के बाद से लगभग ₹20,000 करोड़ का कर्ज बढ़ा चुकी हैं। हालाँकि, इससे भी कोई स्थिति नहीं सुधर रही। हाल ही में CM सुक्खू ने 2 महीने की सैलरी ना लेने का ऐलान भी किया था।

हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है, इसके आय के साधन सीमित हैं। इसका खर्चा अपनी आय और केंद्र से मिलने वाली सहायता से पूरा होता है। बाकी की कमी कर्ज लेकर पूरी की जाती है। इन सब के बीच राज्य का कर्ज इतना बढ़ गया है कि उसको चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं। हिमाचल की आर्थिक स्थिति को आँकड़ों से समझा जाना चाहिए।

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया की है स्थिति

हिमाचल की बदहाल आर्थिक स्थिति इसके 2024-25 के बजट से समझी जा सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹58,444 करोड़ का बजट सुक्खू सरकार ने पेश किया था। इस बजट में भी सरकार का राजकोषीय घाटा (सरकार की आय और खर्चे के बीच का अंतर, जिसे कर्ज लेकर पूरा किया जाता है) ₹10,784 करोड़ है।

इस बजट का बड़ा हिस्सा तो केवल पुराने कर्जा चुकाने और राज्य के कर्मचारियों की पेंशन और तनख्वाह देने में ही चला जाएगा। इस बजट में से ₹5479 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज चुकाने, ₹6270 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज का ब्याज देने में करेगी। यानी पुराने कर्जों के ही चक्कर बजट का लगभग 20% हिस्सा चला जाएगा।

इसके अलावा सुक्खू सरकार तनख्वाह और पेंशन पर ₹27,208 करोड़ खर्च करेगी। इस हिसाब से देखा जाए तो ₹38,957 का खर्च तो केवल कर्ज, ब्याज, तनख्वाह और पेंशन पर ही हो आएगा। यह कुल बजट का लगभग 66% है। अगर नए कर्ज को हटा दें तो यह हिमाचल के कुल बजट का 80% तक पहुँच जाता है। यानी राज्य को बाकी खर्चे करने की स्वतंत्रता ही नहीं है।

हिमाचल प्रदेश 2024-25 में लगभग ₹1200 करोड़ सब्सिडी पर भी खर्च करने वाला है। यह धनराशि सामान्य तौर पर छोटी लग सकती है, लेकिन आर्थिक संकट में फंसे हिमाचल के लिए यह भी भारी पड़ रही है। इस सब्सिडी में सबसे बड़ा खर्चा बिजली सब्सिडी का है।

क्यों बन गए आर्थिक संकट के हालात

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट की इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। इसका एक बड़ा कारण सुक्खू सरकार का आय के नए स्रोतों पर ध्यान ना देना भी हो सकता है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश ने अपने चुनावी वादे के अनुसार पुरानी पेंशन स्कीम लागू कर दी थी। इस कारण से उसको मिलने वाली मदद में भी कमी आई है।

स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि हिमाचल सरकार NPS में डाला गया कर्मचारियों का पैसा भी वापस माँग रही है। इसके अलावा वह बिगड़े आर्थिक हालातों के बीच राज्य की महिलाओं को भी ₹1500 दे रही है। यह भी उसके बजट पर असर डाल रहा है। हिमाचल सरकार 125 यूनिट बिजली भी मुफ्त देती है, यह भी राज्य पर एक बोझ बन रहा है।

आगे भी नहीं सुधरेगी स्थिति

राज्य सरकार ने हाल ही में बताया है कि वर्ष 2030-31 तक उसका पेंशन पर होने वाला खर्च ₹19,728 करोड़ हो जाएगा। यह वर्तमान में लगभग ₹10,000 करोड़ से भी कम है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल ₹90,000 करोड़ का खर्चा हिमाचल प्रदेश को पेंशन पर ही करना पड़ेगा।

कॉन्ग्रेस के OPS के वादे से राज्य के अन्य विकास कार्यों के बजट में कटौती होने की आशंका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य के बजट में पहले पेंशन का हिस्सा मात्र 13% था जो कि OPS के बाद बढ़कर 17% हो जाएगा। पुरानी पेंशन के कारण होने वाला यह खर्च राज्य सरकार के कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह पर खर्च के लगभग बराबर होगा।

2026-27 में राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को ₹20,639 करोड़ तनख्वाह देगी। 2026-27 में दी जाने वाली पेंशन की धनराशि ₹16,728 करोड़ होगी। राज्य में पेंशन पाने वालों की संख्या भी आने वाले सालों में नौकरी कर रहे कर्मचारियों से ज्यादा हो जाने के कयास हैं।

यह भी बात सामने आई है कि 2030-31 तक राज्य में 2.38 लाख पेंशनर हो जाएँगे। यह संख्या आने वाले समय में राज्य कर्मचारियों से भी अधिक होगी क्योंकि औसतन हर वर्ष 10,000 कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। इसकी तुलना में नए कर्मचारी भर्ती नहीं हो रहे।

हिमाचल प्रदेश को 2026-27 से 2030-31 बीच तनख्वाह और पेंशन पर कुल मिलाकर ₹2.11 लाख करोड़ खर्चने पड़ेंगे। राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि वह इस बोझ को अकेले सहन नहीं कर पाएगी। इसके लिए उसे विशेष मदद की जरूरत होगी।

कॉन्ग्रेस ने 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से पुरानी पेंशन स्कीम का वादा किया था और इसे राजनीतिक हथियार बनाया था। हालाँकि, अब इसके दुष्परिणाम सामने दिखने लगे हैं। आर्थिक बोझ के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।

कर्ज का बढ़ रहा है बोझ

कॉन्ग्रेस सरकार का धुआंधार तरीके से कर्ज लेने का मुद्दा इस बीच जोर पकड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में ₹88,000 करोड़ से भी अधिक का कर्ज है। कॉन्ग्रेस सरकार बीते डेढ़ वर्ष में ही लगभग ₹19,000 करोड़ का कर्ज राज्य पर चढ़ाया है। लोकसभा में दिया गया जवाब बताता है वित्त वर्ष 2024-25 खत्म होते-होते राज्य का कर्ज ₹94000 करोड़ के पार हो जाएगा।

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद माना है कि उनके राज्य को कर्ज चुकाने के लिए ही नया कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य का कर्ज उसकी GDP का 40% से अधिक हो चुका है। उसका राजकोषीय घाटा भी GDP का लगभग 5% है। जबकि नियमों के मुताबिक़, किसी भी राज्य का कर्ज GDP का 20% जबकि राजकोषीय घाटा 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

राज्य की सत्ता में रेवड़ी वादे करके आई कॉन्ग्रेस अब राजनीतिक स्टंट में जुटी है। कॉन्ग्रेस शासित अन्य राज्यों का भी हाल कोई ख़ास अच्छा नहीं है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार भी दलितों के विकास के फंड में से अपनी गारंटियाँ पूरी करने में जुटी हुई हैं। यह राजनीति राज्यों के लिए घातक तो है ही, देश के आर्थिक विकास में भी रोड़े डालने वाली है।

‘तुम्हारी मां-बहनों की गंदी तस्वीरें तुम्हारे ही दरवाजे पर लगाऊँगा’: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों को TMC नेता ने धमकाया, CBI ने संदीप घोष सहित 4 को गिरफ्तार किया

कोलकाता के आर जी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर से हुए रेप और हत्या मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई ने 4 लोगों को हिरासत में लिया हैं। ये एक्शन इस मामले में अब तक बड़ी कार्रवाइयों में से एक है। जानकारी के मुताबिक, इन चार लोगों में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का भी नाम है। इसके अलावा बिप्लव सिंहा (वेंडर), सुमन हजारा (वेंडर) और अफसर अली (संदीप घोष के अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी) भी हिरासत में लिए गए हैं।

अब आगे सीबीआई इस मामले की जाँच करेगी। एक ओर इस मामले में संदीप घोष की संलिप्ता पर लगातार सवाल उठ रहे है तो दूसरी तरफ हीं अस्पताल में हुई अन्य गड़बड़ियों के कारण अस्पताल विवादों में हैं।

वित्तीय अनियमतताओं से जुड़े मामले में तो ईडी ने भी नजर बनाई हुई है। वहीं 4 लोगों पर कार्रवाई की सूचना से पहले इस मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भी एक एक्शन लिया था। उन्होंने अपने उस नेता को पार्टी से एक साल से निलंबित कर दिया था जिसने आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के लिए इंसाफ माँगने वाले प्रदर्शनकारियों को धमकाया था।

नेता का नाम आतिश सरकार है। टीएमसी ने उसे एक साल के लिए पार्टी से निलंबित किया है। नॉर्थ 24 परगना के अशोक नगर से आने वाले आतिश ने प्रदर्शनकारियों को धमकाते हुए कहा था,

“तुम लोग जो दीदी को गाली दे रहे हो, उनका चरित्र हनन करने में लगे हो। अगर हम तुम्हारी माँ और बहनों के अश्लील पोस्टर बनाकर उन्हें दीवारों पर लगा दें तो तुम उसे हटा नहीं पाओगे। मैं तुम्हारी माँ-बहनों की एडिटिड फोटो तुम्हारे दरवाजों पर टाँगूगा तब तुम घर से बाहर तक नहीं निकल पाओगे… संभल जाओ। टीएमसी के लोग सड़कों पर आ गए हैं। अगर हमने हर इलाके में घूमना शुरू कर दिया क्या तुम अपने घरों से निकल पाओगे।”

बता दें कि 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में नाइट ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर से रेप के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में जब अन्य डॉक्टर इंसाफ माँगने प्रदर्शन पर उतरे तो उन्हें उपद्रवियों द्वारा डराया-धमकाया गया था। साथ ही अस्पताल में भी तोड़फोड़ हुई थी। इसके बाद टीएमसी पर काफी सवाल उठे और ममता सरकार द्वारा एक्शन न लिए जाने की निंदा की जाने लगी। इस बीच आतिश सरकार द्वारा ये धमकी आई लेकिन इस पर पार्टी ने एक्शन लेते हुए नेता को पार्टी गतिविधियों से एक साल के लिए दूर कर दिया।

विमान अगवा करने वाले आतंकियों के हिंदू नाम का विवाद हाई कोर्ट पहुँचा, कहा- ‘IC 814’ वेब सीरिज पर लगे बैन: नेटफ्लिक्स के अधिकारी की होगी पेशी

नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज की गई IC814: द कंधार हाइजैक वेब सीरिज पर प्रतिबंध लगाने के लिए जनहित याचिका (PIL) लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि इस वेब सीरिज में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है और विमान अपहरण करने वाले इस्लामी आतंकियों के नाम बदले गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस वेब सीरिज ने हिन्दुओं की भावनाओं को आहत किया है।

दिल्ली हाई कोर्ट में यह PIL हिन्दू सेना नाम के एक संगठन ने लगाई है। याचिका में माँग की गई है कि सेंसर बोर्ड इस वेबसीरिज का प्रमाण पत्र रद्द कर दे और इसके प्रसारण पर रोक लगा दी जाए। याचिका को हिन्दू सेना के सुरजीत सिंह यादव ने दायर किया है।

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई इस याचिका में कहा गया, “यह सीरिज अपहरण के दौरान आतंकवादियों के छोड़ने जाने के लम्बे समय पर पड़ने वाले प्रभावों को नजरअंदाज करती है, इससे असली में हुई घटना की गंभीरता पर फर्क पड़ता है। आतंकवादियों की असली पहचान छिपाना और उनके लिए भोला और शंकर जैसे नामों का उपयोग करना असली तथ्यों और घटनाओं को पूरी तरह से विकृत करता है और इससे हिंदू समुदाय का अपमान होता है क्योंकि भोला और शंकर भगवान शिव के दूसरे नाम हैं।”

याचिका में कहा गया कि जिन आतंकियों के नाम जहूर मिस्त्री, शाकिर, शाहिद और इब्राहिम अख्तर आदि थे उनके नाम भोला-शंकर या फिर बदल कर दिखाए गए, इससे हिन्दुओं की भावनाएँ आहत होती हैं। इस वेबर सीरिज को लेकर पहले से विवाद चला आ रहा है। सीरिज में पहचान बदले जाने को लेकर हाल ही में केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी नेटफ्लिक्स के कंटेंट हेड को तलब किया था। इस मामले में वह मंगलवार (3 सितम्बर, 2024) को मंत्रालय के सामने अपना पक्ष रखेंगे।

1999 में काठमांडू से दिल्ली आ रहे इस विमान अपहरण की घटना पर वेब सीरिज डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने बनाई है। इस वेब सीरिज को 29 अगस्त, 2024 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया था। तब से यह विवादों में घिर गई है। इसके बचाव में भी लिबरल गैंग उतर आया है। इससे पहले भी कई बार वेबसीरिज में हिन्दू भावनाओं को आहत करने की बात होती आई है।

दिल्ली CM के घर नहीं जा सकते बिभव कुमार, स्वाति मालीवाल से मारपीट में 4 शर्तों पर मिली बेल: शराब घोटाले में विजय नायर को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट करने के आरोप में जेल में 100 दिन से बंद बिभव कुमार को बेल मिल गई है। उनके अलावा सोमवार (2 सितंबर 2024) को AAP के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर को भी जमानत मिली है। उनकी गिरफ्तारी आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी।

बिभव कुमार केस में असिस्टेंट सॉलिस्टर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने आशंका जताई कि बिभव सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने उन्हें बेल देते हुए कहा कि केस में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। मालीवाल को आई चोटें सामान्य हैं। केस में जमानत मिलनी चाहिए। ऐसे किसी को जेल में नहीं रखा जा सकता।

इसके बाद कोर्ट ने बिभव को चार शर्तों पर जमानत दी। कोर्ट ने निर्देश दिए कि बिभव को मुख्यमंत्री के निजी सचिव या किसी आधिकारिक पद पर बहाल नहीं किया जाएगा, बिभव तब तक मुख्यमंत्री आवास नहीं जाएँगे जब तक गवाहों की जाँच पूरी नहीं हो जाती, वो इस मामले को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे, इस मामले में सबसे पहले उन गवाहों के बयान दर्ज होंगे जो डरे हुए है।

इसी प्रकार 23 महीने से जेल में बंद विजय नायर के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेष राय की पीठ ने की। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और लिबर्टी का अधिकार मिला हुआ है और यह अधिकार बेहद पवित्र अधिकार है। सख्त और कड़े प्रावधान वाले मामले में भी इसका आदर होना चाहिए।

कोर्ट ने कहा, इस केस में आरोपित जेल में 13 नवंबर 2022 से (23 महीने) से बंद है। ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में सजा के तौर पर जेल में उन्हें नहीं रखा जा सकता है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में विजय नायर पिछले 23 महीने से जेल में बंद हैं और मामले में अधिकतम सजा जहाँ 7 साल है। बेल नियम और जेल अपवाद का सिद्धांत है। यह सिद्धांत पराजित हो जाएगा, अगर आरोपित को इस तरह से जेल में रखा जाए।

बता दें कि बिभव कुमार से जुड़ा मामला जहाँ राज्यसभा सांसद से मारपीट से जुड़ा है। उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 354 बी, 308, 323, 504 और 509 के तहत केस दर्ज हुआ था और 500 पन्नों की इस चार्जशीट में करीब 50 गवाहों के बयान जोड़े गए थे। इस केस में वो खुद मुख्य आरोपित है जबकि विजय नायर से जुड़े आबकारी नीति मामले में कई अन्य लोगों के नाम शामिल है। इस केस में पिछले दिनों के कविता और मनीष सिसोदिया को जमानत मिल गई है। वहीं मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल को भी राहत मिल चुकी है। हालाँकि सीबीआई की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार केस में केजरीवाल अभी जेल में ही हैं।

‘कंपनियों के लिए थी जमीन, कॉन्ग्रेस सरकार ने पार्टी अध्यक्ष के फैमिली ट्रस्ट को दे दी’: कर्नाटक के राज्यपाल ने माँगी रिपोर्ट, हाई कोर्ट में सिद्धारमैया के परिवार का ‘लैंड स्कैम’

कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे के ट्रस्ट को कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा जमीन दिए जाने के मामले में जानकारी माँगी है। वहीं कर्नाटक हाई कोर्ट को बताया गया है कि CM सिद्दारमैया की पत्नी को मैसुरु विकास प्राधिकरण (MUDA) ने जमीन देने का फैसला तब किया जब वह CM थे। कॉन्ग्रेस जमीन घोटाले के इन आरोपों से अब चौतरफा घिर गई है और उससे जवाब देते नहीं बन रहा है।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार (2 सितम्बर, 2024) को CM सिद्दारमैया कि पत्नी को जमीन दिए जाने के मामले में सुनवाई की। इस मामले में एक्टिविस्ट ने CM सिद्दारमैया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्टिविस्ट के वकील ने कोर्ट को बताया, “नवंबर 2017 में निर्णय लिया गया था। यह मानते करते हुए कि विकास लेआउट बनाने के लिए डी नोटिफाइड जमीन का उपयोग करने में उसने गलती की थी, MUDA ने याचिकाकर्ता (CM सिद्दारमैया) की पत्नी पार्वती को वैकल्पिक जमीन देने का फैसला किया। यही पूरी बात का निष्कर्ष है।”

आगे एक्टिविस्ट ने बताया,”यह भूमि याचिकाकर्ता के बहनोई द्वारा खरीदी गई थी, बाद में इसे डी-नोटिफाई किया गया। इसके बाद इसे गिफ्ट के तौर पर बहन को दिया गया। फिर यह MUDA ने ले ली और इसे विकसित किया और इसके बदले में नियम संशोधित करके मुआवजा भी दे दिया गया। यह सब तब हुआ जब CM सिद्दारमैया राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री थे। उनका पहला कार्यकाल 2013 से 2018 तक था। इस तरह से उनका इस मामले से संबंध है।”

इस मामले में एक्टिविस्ट ने कहा कि CM सिद्दारमैया के रोल की जाँच होनी चाहिए। एक्टिविस्ट ने कहा कि हो सकता है कि भले ही आखिर में सबको चिट मिल जाए, लेकिन अगर थोड़ा सा भी रोल CM सिद्दारमैया का निकला तो ये पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार का मामला होगा। इस मामले में बीते माह राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने CM सिद्दारमैया के विरुद्ध मामला चलाने की अनुमति दी थी। इसके खिलाफ CM सिद्दारमैया ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका डाली है। इसी पर सुनवाई में यह आरोप लगाए गए। अब इस मामले में सुनवाई 9 सितम्बर, 2024 को होगी।

खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन पर राज्यपाल ने माँगी जानकारी

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन को दिए जाने पर सरकार से जानकारी माँगी है। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कॉन्ग्रेस सरकार को पत्र लिख कर इस मामले में जानकारी माँगी है। राज्यपाल ने खरगे परिवार के ट्रस्ट को बेंगलुरु के औद्योगिक इलाके में सरकार द्वारा जमीन दिए जाने पर जवाब की माँग की है। यह जमीन सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को दी गई थी, इसके मुखिया राहुल खरगे हैं, जो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं।

इस मामले में कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया गया है कि खरगे परिवार के ट्रस्ट को यह जमीन ऐसे इलाके में दी गई, जो एयरोस्पेस कम्पनियों के लिए थी। भाजपा नेता लहर सिंह सिरोया ने पूछा है कि आखिर खरगे परिवार कबसे एयरोस्पेस कम्पनी चलाने लगा। खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन दिए जाने के मामले में कर्नाटक सरकार के मंत्री एमबी पाटिल की भूमिका की भी जाँच किए जाने की माँग की गई है। यह जमीन खरगे परिवार के ट्रस्ट को मार्च, 2024 में दी गई थी।

बेंगलुरु में जमीन दिए जाने के अलावा कलबुर्गी में भी एक जमीन के आवंटन का मामला भी सामने आया है। भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया ने एक ट्वीट करके इस मामले में सवाल पूछे हैं। लहर सिंह सिरोया ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पूछा है, “कागजो से पता चला है कि गुलबर्गा में अंतर्राष्ट्रीय पाली, संस्कृत और तुलनात्मक दर्शन संस्थान को 19 एकड़ सरकारी जमीन मुफ्त में दी गई थी, जिसका संचालन श्री मल्लिकार्जुन खरगे परिवार से सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।”

सांसद सिरोया ने बताया, “मार्च 2014 में सिद्धारमैया की कॉन्ग्रेस सरकार ने पाली इंस्टीट्यूट को 30 साल के लिए 16 एकड़ सरकारी जमीन लीज पर दी थी। कुछ सालों में 16 एकड़ की लीज में 03 एकड़ की जमीन और जोड़ दी गई। आखिरकार, मार्च 2017 में, कॉन्ग्रेस सरकार ने खरगे परिवार द्वारा संचालित संस्थान को सभी 19 एकड़ जमीन मुफ्त में ट्रांसफर कर दी। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि खरगे के बेटे, प्रियांक खरगे, तत्कालीन कर्नाटक सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, जैसे कि वे वर्तमान में हैं।”

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार इन सभी मामलों में नियमों के पालन की बात कह रही है। जहाँ सिद्दारमैया मामले में वह कोर्ट में गई है, खरगे परिवार मामले में अभी जुबानी जंग ही चल रही है। आगे यह मामला यदि जाँच के लिए जाता है तो राज्य राजनीतिक उथलपुथल और बढ़ने के संकेत हैं।

‘घर के आगे करते हैं पेशाब, रोकने पर देते हैं सबको मार डालने की धमकियाँ’: बागपत में हिन्दू महिलाओं की पुलिस से गुहार, साथियों संग चाँद-सोहैल के खिलाफ जाँच शुरू

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में कई हिन्दू महिलाओं ने मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों पर अश्लीलता करने और जान से मार डालने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िताओं का आरोप है कि उनके घरों के आगे पेशाब की जाती है और विरोध करने पर इलाके से भगा देने की धमकियाँ मिलती हैं। इसी के साथ महिलाओं को इलाके अपनी अपनी तादाद ज्यादा होने की धौंस भी दी जाती है। रविवार (1 सितंबर 2024) को दी गई इस शिकायत पर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बागपत जिले के थानाक्षेत्र खेकड़ा का है। यहाँ रविवार को लक्ष्मीनगर मोहल्ले के वार्ड 4 में रहने वाली 3 हिन्दू महिलाओं ने सामूहिक तौर पर खेकड़ा थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया उनके मोहल्ले के चाँद, अनीस, सोहैल, साहिल, जावेद और साद उनके घरों के आगे बैठ कर आए दिन सट्टा, जुआ और नशा करते हैं। इन आरोपितों के साथ 10-15 अन्य अज्ञात असामाजिक तत्व भी होते हैं। ये लोग अश्लील गाने गाते हैं और आपस में जोर-जोर से गाली-गलौज किया करते हैं।

पीड़िताओं ने आगे बताया कि आपस में गालियाँ देने के साथ ये सभी मोहल्ले की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी भी करते हैं। 31 अगस्त (शनिवार) को हर दिन की तरह उपद्रव कर रहे आरोपितों को पीड़िताओं ने टोक दिया। इस से नाराज हो कर रात में लगभग 9 बजे सभी आरोपित पीड़िता के घर तक चढ़ गए। यहाँ वो महिलाओं को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे। विरोध करने पर इन आरोपितों के परिवार की औरतें भी जमा हो गईं। इन्होने कहा, “तुम हिन्दुओं, बहुत चढ़ रही है। आज इन्हे देख लेंगे।”

आरोप है कि इसके बाद पीड़ित परिवारों से अश्लील बातें करते हुए मारपीट करने की कोशिश की गई। इसी विवाद के बीच आरोपितों ने आगे कहा, “यहाँ से भाग जाओ। यहाँ पर तुम्हारा रहना दूभर कर देंगे। यहाँ हमारी तादात ज्यादा है, तुम लोग क्या कर सकते हो ?” चारों तरफ से घिरता देख कर पीड़िता हिन्दू महिलाओं ने रात 9:45 के आसपास पुलिस बुला ली। पुलिस ने सुबह सबको थाने आ कर लिखित तहरीर देने के लिए कहा। इसके बाद अगले दिन पीड़ित हिन्दुओं ने थाने में तहरीर दी।

तहरीर में पीड़िताओं ने लिखा, “विपक्षियों ने हमारा जीना हराम कर रखा है। आए दिन हमें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है और जान से मारने की धमकी भी दी जाती है।” कई बार पीड़िताओं ने आरोपितों की करतूतों को मोबाइल में रिकॉर्ड करने का प्रयास किया। इसे देख कर उन्होंने धमकाते हुए कहा, “हाँ कर लो रिकॉर्ड। हम किसी से नहीं डरते और ज्यादा कानूनी कार्रवाई की तो तुम्हें तुम्हारे जवान बच्चों सहित को घर से ही उठा लिया जाएगा।”

आरोपितों की तरफ से पीड़ित हिन्दू परिवारों को हथियार होने की भी धमकी दी जाती है। शिकायत में पीड़िताओं ने लिखा कि आरोपितों ने उनसे कहा, “हमारे पास हथियार और तंमचे भी हैं। उनको चलाना भी हमें आता है। या तो तुम यहाँ चुपचाप रहो और जो हम कर रहे उसे सहते रहो, तुम सब लोग यहाँ से अपने-अपने घर छोड कर चले जाओ वर्ना तुम सबको जान से मार दिया जाएगा।” बकौल पीड़िता सुबह से लेकर रात 11 बजे तक उनके घरों के आगे जुआ, नशा और सट्टा आदि होता रहता है।

शिकायतकर्ता हिन्दू महिलाओं ने आरोपितों से अपने जान-माल का खतरा जताया है और कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। एक वीडियो बयान में पीड़िताओं ने बताया कि आरोपित उनके घरों के आगे अक्सर पेशाब करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन जल्द ही उन सभी को अत्याचार से मुक्ति दिलाएगा। बागपत पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। सोमवार (2 सितंबर) को पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी खेकड़ा को निर्देशित कर दिया गया है।

अपहरण, जंगल में 24 घंटे बंधक बना कर गैंगरेप, जातिसूचक गालियाँ… सलीम के बेटों ने साथियों संग मिल कर दलित नाबालिग लड़की से की हैवानियत, 2 धराए

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में नाबालिग दलित लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। गैंगरेप का आरोप सलीम के बेटे समीर और राजा पर लगा है। केस में कुछ अन्य अज्ञात आरोपित भी शामिल बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। घटना गुरुवार (29 अगस्त, 2024) की है। घटना की जानकारी मिलने के बाद हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के लिए थाने पर प्रदर्शन किया है। पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है जिसमें समीर भी शामिल है।

यह घटना मेरठ के थानाक्षेत्र फलावदा की है। यहाँ शनिवार (31 अगस्त) को अनुसूचित जाति (SC वर्ग) के एक व्यक्ति ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि गुरुवार (29 अगस्त) की दुपहरी में लगभग 1:30 पर उनकी 15 वर्षीया बेटी गाँव के पास बगीचे में शौच के लिए गई थी। तभी पीड़िता के ही गाँव का रहने वाले सलीम के बेटे राजा और समीर वहाँ पहुँच गए। इनके साथ कुछ अन्य अज्ञात लोग भी थे जिनके नाम शिकायतकर्ता नहीं जानता।

आरोप है कि समीर और राजा के साथ उसके अन्य साथियों ने पीड़िता को अकेला पा कर दबोच लिया। ये सभी पीड़िता को ले कर जंगल में अंदर तक घसीट ले गए। यहाँ बारी-बारी सभी ने नाबालिग से रेप किया। जब पीड़िता ने इन हरकतों का विरोध किया तो उसे च$री सहित अन्य जातिसूचक शब्द बोले गए और गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं। आरोप है कि इसके बाद सभी ने पीड़िता का अपहरण कर लिया और कहीं बंधक बना कर रखा। इधर अपनी बेटी को लापता देख कर पीड़ित पिता ने खोजबीन शुरू कर दी।

घटना के अगले दिन शुक्रवार (30 अगस्त) को पीड़िता के पिता को कहीं से अपनी बेटी के आरोपितों के पास होने की भनक लगी। पीड़िता की सुरक्षा की फ़िक्र में उनके पिता ने समीर के परिजनों से अपनी बेटी को वापस लौटाने की गुहार लगाई। जब सामने से कोई जवाब नहीं मिला तो पीड़ित पिता ने खुद ही अपने समाज के लोगों के साथ मिल कर अपनी बेटी को खोजना शुरू कर दिया। आखिरकार पीड़िता जंगल के एक हिस्से में बदहवास हालत में पड़ी मिली। यहाँ पीड़िता ने अपने साथ हुआ पूरा घटनाक्रम परिजनों को बताया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक जंगल के जिस हिस्से में उनकी बेटी बदहवास मिली वहीं कुछ ही दूरी पर अपहरणकर्ता भी एक साथ बैठे थे। पीड़िता के परिजनों की आने की भनक लगते ही उसमें से समीर ने गोली चला दी। पीड़िता के परिजन इस गोली से बाल-बाल बचे। इसी दौरान समीर और उसके साथियों ने कहीं भी शिकायत करने पर पीड़िता के पूरे परिवार के नरसंहार की धमकी दी। जैसे-तैसे पीड़िता को ले कर उसके परिजन घर पहुँचे। अगले दिन शनिवार को इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

शिकायत में पीड़िता के पिता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने समीर और राजा को नामज़द व उसके साथियों को अज्ञात में बताते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 (1), 70 (2), 351 (2), 351 (3), 115 (2), 352 और 109 के साथ SC/ST व पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कार्रवाई की माँग के साथ थाने का घेराव किया है। पुलिस ने समीर सहित एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।