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बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट की राजनीति को मिला अखाड़ा, हरियाणा के दंगल में टीम कॉन्ग्रेस की ओर लगाएँगे दाँव: रिपोर्ट में दावा- विधानसभा चुनाव लड़ने की सीट फाइनल

पहलवान बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट हरियाणा में विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। दोनों कॉन्ग्रेस के टिकट से विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी ठोकेंगे। दोनों के चुनाव लड़ने की बात कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से मुलाकात के बाद तय हुई है। दोनों की सीटों पर भी फैसला हो गया है।

लाइवहिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (4 सितम्बर, 2024) को दिल्ली में राहुल गाँधी से मुलाक़ात के बाद बजरंग पूनिया को बादली सीट से टिकट दिया जाएगा। यह झज्जर जिले में स्थित है। इसके अलावा विनेश फोगाट को जुलाना सीट से टिकट दिया जाएगा, यह जींद जिले में पड़ती है। इस बात का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

दोनों पहलवानों ने राहुल गाँधी के अलावा कॉन्ग्रेस के संगठन महासचिव से भी मुलाकात की है। इसके बाद दोनों के टिकट पर बात फाइनल हुई है। विनेश के जिस सीट से लड़ने की बात मीडिया रिपोर्ट्स में कही गई है, उसके अंतर्गत उनका ससुराल पड़ता है। इस सीट पर अच्छी खासी संख्या जाट मतदाताओं की बताई जाती है।

वहीं बादली सीट झज्जर जिले में है जो बजरंग पूनिया का गृह जनपद है। वर्तमान में जहाँ बादली सीट पर कॉन्ग्रेस तो वहीं जुलाना सीट पर जजपा का कब्जा है। बादली सीट पर कॉन्ग्रेस सीट के कुलदीप वत्स विधायक हैं, वह हरियाणा के बड़े ब्राम्हण नेताओं में शुमार किए जाते है। ऐसे में बादली सीट पर टिकट के लिए कॉन्ग्रेस को यह सीट खाली करवानी होगी।

इससे राज्य में उसके वोटों का अंकगणित बिगड़ सकता है। वहीं जुलाना सीट पर उसे लड़ाई में आना होगा। 2019 में वह इस सीट पर तीसरे नम्बर पर रही थी। उसे इस सीट पर मात्र 10% वोट ही हासिल हुए थे। ऐसे में यहाँ से विनेश फोगाट की लड़ाई मुश्किल हो सकती है।

विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया लगातार केंद्र सरकार का विरोध करते आए हैं। दोनों पहलवान कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन के नेता रहे हैं। दोनों के प्रदर्शन और उनके रुख को कॉन्ग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा का खुला समर्थन रहा है।

विनेश फोगाट हाल ही में पेरिस ओलम्पिक से वजन अधिक होने के कारण बाहर हो गईं थी। विनेश फोगाट बिना मेडल के देश लौटी थीं। हालाँकि खापों ने उन्हें एक मेडल दिया था। उनकी वापसी पर उनका स्वागत भी भूपिंदर हुड्डा के बेटे और सांसद दीपेंदर हुड्डा ने किया था।

MCD कमेटियों का चुनाव लटका रही थी AAP की मेयर, राष्ट्रपति ने दिल्ली के LG की ताकत बढ़ा दी: अब बोर्ड-आयोग गठन और नियुक्तियों का भी होगा अधिकार

दिल्ली में एमसीडी की वार्ड समितियों के चुनाव को लटकाने की कोशिश पर केंद्र सरकार ने पानी फेर दिया। ये चुनाव आज (4 सितंबर 2024) को हो रहे हैं, जिसके लिए पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति एलजी को करनी पड़ी। इस नियुक्ति के लिए दिल्ली के एलजी को अधिकार सीधे राष्ट्रपति से मिले। जिसके बाद बुधवार (4 सितंबर 2024) को एमसीडी की 12 वार्ड समितियों का चुनाव कराया जा रहा है। समाचार लिखे जाने तक 7 वार्डों के चुनाव हो गए थे, जिसमें 3 पर बीजेपी तो 4 पर आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की।

आखिर राष्ट्रपति को क्यों देनी पड़ी एलजी को ज्यादा ताकत?

दरअसल, मंगलवार (3 सितंबर 2024) को देर शाम मेयर शैली ओबेरॉय ने एमसीडी की समितियों के चुनाव को लटकाने के लिए आखिरी समय में पैंतरा चलते हुए कहा कि वो पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति ही नहीं करेंगी, क्योंकि चुनाव कराने के लिए समय ही नहीं है। ऐसे में उन्होंने पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति करने से इनकार कर दिया। शैली का कहना था कि उनकी अंतरात्मा उन्हें ‘अलोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया’ में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं देती है। इसके बाद मामले में राष्ट्रपति ने हस्तक्षेप किया और एलजी को पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति के अधिकार दे दिए।

केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति ने दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियाँ बढ़ा दी और इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। दिल्ली के उप-राज्यपाल के पास अब दिल्ली महिला आयोग, दिल्ली विद्युत नियामक आयोग जैसे किसी भी प्राधिकरण, बोर्ड और आयोग के गठन का पूर्ण अधिकार आ गया है। गजट ​नोटिफिकेशन के मुताबिक, “राष्ट्रपति ने संसद द्वारा अधिनियमित कानूनों के तहत दिल्ली के लिए किसी भी प्राधिकरण, बोर्ड, आयोग या वैधानिक निकाय का गठन और सदस्यों की नियुक्ति करने की शक्ति उपराज्यपाल को सौंपी है।”

राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शासन अधिनियम, 1991 (1992 का 1) की धारा 45डी के साथ संविधान के अनुच्छेद 239 के खंड (1) के तहत जारी की गई है। अधिसूचना में कहा गया है, राष्ट्रपति निर्देश देती हैं कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल, राष्ट्रपति के नियंत्रण के अधीन रहते हुए तथा अगले आदेश तक उक्त अधिनियम की धारा 45डी के खंड (क) के अधीन राष्ट्रपति की शक्तियों का प्रयोग किसी प्राधिकरण, बोर्ड, आयोग या किसी वैधानिक निकाय के गठन के लिए करेंगे। चाहे उसे किसी भी नाम से जाना जाता हो या ऐसे प्राधिकरण, बोर्ड, आयोग या किसी वैधानिक निकाय में किसी सरकारी अधिकारी या पदेन सदस्य की नियुक्ति के लिए करेंगे।

इसके बाद दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने एमसीडी की वार्ड समितियों के चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति करते हुए आदेश जारी किया और कहा कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और स्थायी समिति के सदस्यों के पदों के लिए चुनाव निर्धारित कार्यक्रम (4 सितंबर) के अनुसार ही होंगे। इसके बाद बुधवार को चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई।

समाचार लिखे जाने तक, 7 वार्ड समितियों के चुनाव नतीजे आ चुके हैं, जिसमें सिटी सदर-पहाड़ गंज, करोलबाग और रोहिणी जोन में आम आदमी पार्टी को और केशवपुरम, नजफगढ़ और शाहदरा में बीजेपी को जीत मिली है।

  • शाहदरा साउथ जोन से संदीप कपूर चेयरमैन पद पर निर्वाचित हुए हैं, जबकि डिप्टी चेयरमैन पद पर संजीव सिंह और स्थायी समिति के सदस्य के तौर पर नीमा भगत निर्वाचित हुए हैं। संदीप कपूर को 211, संजीव सिंह को 190 और नीमा भगत को 133 वोट मिले।
  • नजफगढ़ जोन में चेयरमैन के पद पर अमित खरखरी, डिप्टी चेयरमैन तिलोत्मा चौधरी और स्थायी समिति के सदस्य के तौर पर पूनम भारद्वाज निर्वाचित हुई हैं। अमित खरखरी को 127, तिलोत्मा चौधरी को 130 और पूनम भारद्वाज को 133 वोट मिले।
  • रोहणी जोन पर आप की ओर से चेयरमैन पद पर सुमन अनिल राणा, डिप्टी चेयरमैन धर्म रक्षक, स्थायी समिति सदस्य पर दौलत राम की जीत हुई है। सुमन अनिल राणा को 22, धर्म रक्षक को 49 और दौलत राम को 44 वोट मिले।
  • केशवपुरम जोन के चेयरमैन पद पर बीजेपी के योगेश वर्मा, डिप्टी चेयरमैन पद पर बीजेपी के सुशील और स्टैंडिंग कमेटी मेंबर शिखा भारद्वाज जीतीं। योगेश वर्मा को 64, सुशील को 67 और शिखा भारद्वाज को 58 वोट मिले।
  • करोल बाग में आम आदमी पार्टी के राकेश जोशी को चेयरमैन, ज्योति गौतम को डिप्टी चेयरमैन पद पर जीत मिली, सदस्यों में अंकुर नारंग को जीत मिली। राकेश जोशी को 89, ज्योति गौतम को 140 और अंकुर नारंग को 87 वोट मिले।
  • सिटी सदर-पहाड़ गंज जोन से मोहम्मद सादिक चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन पर किरण बाला जीतीं। स्थायी समिति मेंबर पौरदीप सिंह की जीत हुई है। मोहम्मद सादिक को 79, किरण बाला को 77 और पौरदीप सिंह को 74 वोट मिले।
  • वेस्ट जोन में चेयरमैन पद पर आप उम्मीदवार शाहिब कुमार, डिप्टी चेयरमैन पद पर मंजू सेतिया और स्थायी समिति के सदस्य के तौर पर परवीन कुमार ने जीत दर्ज की है।

दिल्ली सरकार ने किया विरोध

राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा दिल्ली के एलजी को दिल्ली में बोर्ड और पैनल बनाने और सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार दिए जाने पर आप नेता और दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, “जब जिम्मेदारी और जवाबदेही की बात आती है, तो एलजी साहब काम नहीं कर रहे हैं। हजारों डॉक्टरों की भर्ती करनी है। अस्पतालों में पद सृजित करने हैं। हजारों बेचारे बस मार्शल बेरोजगार हो गए हैं। एलजी साहब ने यह सब बंद कर दिया है। और जब अधिकार प्राप्त करने की बात आती है, तो वे अधिक से अधिक अधिकार ले रहे हैं। वे क्यों ले रहे हैं? ताकि वे अधिकारों का दुरुपयोग कर सकें।”

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा, “वे (एलजी) सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के माध्यम से प्रसिद्ध होने के लिए सालाना 1.5 करोड़ रुपये में एक सोशल मीडिया कंपनी को काम पर रख रहे हैं। चुनी हुई सरकार की शक्तियाँ छीनी जा रही हैं और नियुक्त लोगों को शक्तियाँ दी जा रही हैं। जहाँ तक ​​केंद्र सरकार का सवाल है, वो चाहती है कि पूरी दिल्ली एलजी द्वारा चलाई जाए। क्योंकि भाजपा चुनाव जीतने में सक्षम नहीं है। इसलिए भाजपा पिछले दरवाजे से दिल्ली पर नियंत्रण करना चाहती है, लेकिन ऐसा नहीं होगा…”

आपको बता दें कि बुधवार यानि 4 सितंबर को सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक 12 वार्ड कमेटियों का चुनाव होना था इसके लिए निगम प्रशासन ने दिशा निर्देश जारी किए थे। दिल्ली नगर निगम के 12 जोन में से 7 जोन में बीजेपी तो 5 जोन में आम आदमी पार्टी को बहुमत है। अभी तक के चुनाव में 3-4 वार्ड में दोनों पार्टियों ने जीत हासिल की है। बाकी बचे वार्ड में कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है।

‘गर्मी की छुट्टियों की सैलरी लेते हुए मुझे बहुत बुरा लगता है’: सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश BV नागरत्ना ने क्यों कहा ऐसा, जानिए डिटेल

सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना ने मंगलवार (3 सितंबर 2024) को कहा कि कोर्ट की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान वेतन लेने में वह असहज महसूस करती हैं। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि अवकाश के दौरान जज कोर्ट की कार्यवाही में उपस्थित नहीं होते हैं। उन्होंने यह टिप्पणी बर्खास्त की गई 6 महिला जजों के वेतन से संबंधित सुनवाई के दौरान की।

दरअसल, यह मामला मध्य प्रदेश के कई सिविल न्यायाधीशों को उनका पिछला वेतन देने से इनकार करने के संबंध में अदालती चर्चा से संबंधित था। इन जजों को मध्य प्रदेश सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उन्हें बहाल कर दिया गया था। हालाँकि, बहाली के बाद बर्खास्तगी के दौरान का उनका वेतन नहीं दिया जा रहा था।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने न्यायमूर्ति नागरत्ना और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की बेंच को बताया कि चार जजों की बर्खास्तगी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पलट दिया है, जबकि दो अन्य की बर्खास्तगी को पूर्ण न्यायालय ने बरकरार रखा है। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि जजों के सेवा में न रहने की अवधि का बकाया वेतन उन्हें दिया जाए।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने तर्क दिया कि चूँकि न्यायाधीशों ने अपनी बर्खास्तगी के दौरान काम नहीं किया था, इसलिए उन्हें पिछले वेतन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आप हमारे काम की प्रकृति जानते हैं। जिन्हें बहाल किया जा रहा है, वे उस समय के वेतन की उम्मीद नहीं कर सकते, जब वे जज के रूप में काम नहीं कर रहे थे।”

न्यायाधीश नागरत्ना ने आगे कहा कि इस तरह का भुगतान उनके विवेक के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “मुझे गर्मी की छुट्टियों के दौरान का अपना वेतन लेने में बहुत बुरा लगता है, क्योंकि मैं जानती हूँ कि हमने उस दौरान काम नहीं किया है।” बता दें कि 6 महिला जजों में से सरिता चौधरी और अदिति कुमार शर्मा को बहाल नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का नियम फॉलो किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया कि बहाल किए गए चारों न्यायिक अधिकारियों को उनकी मूल वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता तथा लाभों के साथ बहाल किया जाए, सिवाय उस अवधि के बकाया वेतन के।

दरअसल, यह मामला मध्य प्रदेश राज्य की न्यायिक सेवाओं में नियुक्त 6 महिला न्यायाधीशों से संबंधित है। इन जजों को पिछले साल मध्य प्रदेश सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया था। राज्य सरकार के इस फैसले से पहले हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति की बैठक में इनकी बर्खास्त करने की सिफारिश की गई थी। बर्खास्तगी आदेश में प्रोबेशन अवधि में इनके द्वारा किया गया असंतोषजनक कार्य शामिल था।

स्मार्टफोन सुन रहा आपकी हर बातचीत, फेसबुक और गूगल की पार्टनर कंपनी ने माना: फोन के माइक से सुनते हैं हर जानकारी, एड दिखाने में करते हैं इस्तेमाल

मार्केटिंग फर्म कॉक्स मीडिया ग्रुप ने माना है कि वह लोगों के स्मार्टफोन माइक्रोफोन से उनकी बातें सुनती है। यह कंपनी फेसबुक और गूगल के साथ काम करती है। CMG ने कहा है कि वह माइक्रोफोन से सुनी गई जानकारी का उपयोग लोगों को विज्ञापन दिखाने के लिए करेगा। उन्हें उनकी बातचीत के आधार पर विज्ञापन दिखाए जाते हैं।

यह खुलासा 26 अगस्त, 2024 को हुआ है। इस दिन CMG ने अपने निवेशकों को बताया कि वह बातचीत को सुनता है। CMG ने पिच डेक के दौरान बताया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग अपने एक सॉफ्टवेयर पर करती है जो लाइव बातचीत को सुनता है और इसमें से अपने लिए डाटा जुटाता है।

कंपनी ने बताया है कि इससे लोगों की आदतों का पता चलता है और फिर इसी आधार पर उन्हें विज्ञापन दिखाए जाते हैं। CMG ने कहा कि लोग ‘अपनी बातचीत और ऑनलाइन व्यवहार के आधार पर एक डेटा ट्रेल छोड़ते हैं’ जिसे AI से चलने वाले सॉफ़्टवेयर द्वारा एकत्र करके उसका विश्लेषण किया जाता है।

कंपनी ने बताया है कि यह डाटा 470 से अधिक चैनलों से प्राप्त किया जाता है। फिर इसका उपयोग एड बनाने में किया जाता है। इस खुलासे के बाद, Google ने कथित तौर पर CMG को अपनी ‘पार्टनर प्रोग्राम’ वेबसाइट से हटा दिया है।

Google के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “सभी विज्ञापनदाताओं को सभी कानूनों और वनियमों के साथ-साथ हमारी Google विज्ञापन नीतियों का पालन करना होता है, इन नीतियों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों या विज्ञापनदाताओं की पहचान करेंगे तो हम उन पर कार्रवाई करेंगे।

इसके अलावा, फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने कहा कि वह CMG के इस बयान के बाद समीक्षा कर रही है कि क्या इस कंपनी ने किसी नियम का उल्लंघन किया है। मेटा के प्रवक्ता ने कहा, “मेटा विज्ञापनों के लिए आपके फ़ोन के माइक का उपयोग नहीं करता है और हम इस बारे में सालों से सार्वजनिक रूप से बता रहे हैं।”

मेटा के प्रवक्ता ने कहा कि हम कॉक्स मीडिया ग्रुप से संपर्क कर रहे हैं ताकि वे साफ़ कर सकें कि उनका प्रोग्राम मेटा के डाटा पर आधारित नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि अब हटा दिए गए ब्लॉग पोस्ट में, CMG ने यह बताया कि लोगों की बातचीत सुनने की कानूनी वैधता पर सवाल भी उठे हैं।

इस पोस्ट में कहा गया, “फ़ोन और डिवाइस के लिए आपकी बात सुनना पूरी तरह से कानूनी है। जब कोई नया ऐप डाउनलोड या अपडेट लोगों को उपयोग के समझौते दिखाता है तो उसमें कहीं ना कहीं उनकी बातचीत सुनने की शर्त अक्सर शामिल होती है।”

इससे पहले भी ऐसी कई रिपोर्टें आई हैं, जिनमें यूजर्स ने आरोप लगाया है कि उन्हें यात्रा और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से लेकर कई चीजों के बारे में बातचीत करने के बाद तुरंत उसके विज्ञापन दिखाई देते हैं। ये विज्ञापन तब भी दिखाई देते हैं, जब उन्होंने इन चीजों के बारे में इन्टरनेट पर खोज नहीं की होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या माइक से लैस डिवाइस यूजर्स की बात सुन रहे हैं।

विभव कुमार को बेल से CM अरविंद केजरीवाल की पत्नी को मिला ‘सुकून’, फोटो देख भड़कीं स्वाति मालीवाल: बताया- जब मुझे पीटा गया, तब सुनीता भी घर पर ही थीं

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट मामले में सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद बिभव कुमार की एक तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में बिभव आराम से सोफे पर बैठे दिख रहे हैं। फोटो को शेयर करते हुए सुनीता केजरीवाल ने लिखा- “सुकून भरा दिन।” अब उनके इसी ट्वीट पर स्वाति मालीवाल ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी।

स्वाति मालीवाल ने ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा- “मुख्यमंत्री जी की पत्नी, जो मेरी पिटाई के दौरान घर पे ही थीं, उनको बड़ा ‘सुकून’ महसूस हो रहा है।” स्वाति ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सुनीता केजरीवाल को बिभव को देख सुकून इसलिए मिल रहा है क्योंकि बिभव शर्तिया जेल पर बाहर आया है जिसने उन्हें (स्वाति मालीवाल) को उनके (सुनीता केजरीवाल) घर में पीटा और अभद्रता की।

उन्होंने कहा, “सबको ये साफ़ संदेश है, महिलाओं को मारो पीटो, उसके बाद हम पहले गंदी ट्रोलिंग करवा देंगे, पीड़िता को पूरी तरह से बर्बाद करेंगे और कोर्ट में उस आदमी को बचाने के लिए देश के सबसे महँगे वकीलों की फ़ौज खड़ी कर देंगे!”

स्वाति मालीवाल ने आगे अपने ट्वीट में लिखा- “जिनको ऐसे लोगों को देखकर सुकून मिलता है उनसे बहन बेटियों की इज़्ज़त की क्या उम्मीद रखनी। प्रभु सब देख रहे हैं, इंसाफ़ होकर रहेगा।”

बिभव कुमार को सशर्त बेल

गौरतलब है कि 3 सितंबर को बिभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने 4 शर्तों पर रिहा किया था। कोर्ट ने कहा था कि बिभव कुमार के जेल से रिहा होने के बाद उनको मुख्यमंत्री के निजी सचिव या किसी आधिकारिक पद पर बहाल नहीं किया जाएगा, बिभव तब तक मुख्यमंत्री आवास नहीं जाएँगे जब तक गवाहों की जाँच पूरी नहीं हो जाती, वो इस मामले को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे और इस मामले में सबसे पहले उन गवाहों के बयान दर्ज होंगे जो डरे हुए हैं। इन चार शर्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने बिभव को रिहा किया था।

बिभव कुमार ने मुख्यमंत्री आवास पर की थी मारपीट

बता दें कि बिभव की रिहाई जेल में 100 दिन बिताने के बाद हुई है। उनपर आरोप था कि उन्होंने 13 मई, 2024 को CM केजरीवाल से मिलने आई AAP की राज्यसभा सांसद से मारपीट की। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया था कि उन पर बिभव कुमार ने हमला किया और उनको जमीन पर गिरा कर मारा। स्वाति मालीवाल ने कहा कि उनकी पिटाई के दौरान CM केजरीवाल के आवास में मौजूद लोगों ने उनकी मदद नहीं की।

ब्रुनेई के सुल्तान बोल्‍किया से मिले PM मोदी, बताया ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का महत्वपूर्ण हिस्सा: कहा- सांस्कृतिक परम्पराएँ हमारे मजबूत संबंधों का आधार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी तीन दिवसीय विदेश यात्रा के पहले चरण में दक्षिणपूर्वी एशिया के देश ब्रुनेई पहुँचे है। प्रधानमंत्री इसके बाद सिंगापुर जाएँगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 सितम्बर, 2024 को ब्रुनेई पहुँचे हैं, जहाँ उनका स्वागत राज्य के राजकुमार ने किया। पीएम मोदी ने अपने दौरे के दूसरे दिन ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोल्किया से भी मुलाक़ात की है।

पीएम मोदी और सुल्तान बोल्किया की मुलाक़ात 4 सितम्बर, 2024 को यहाँ के राजमहल में हुई है। पीएम मोदी ने इस मुलाक़ात के बाद सुल्तान हसन बोल्किया का शुक्रिया भी जताया और दोनों देशों के सम्बन्धों पर बात की। पीएम मोदी ने कहा, “आपके भावपूर्ण शब्द, गर्मजोशी भरे स्वागत और आतिथ्य के लिए आपको और पूरे शाही परिवार का आभार व्यक्त करता हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा, “पीएम मोदी ने कहा, “मैं आपको और ब्रुनेई के लोगों को आजादी की 40वीं वर्षगाँठ पर 140 करोड़ भारतीयों की तरफ से बधाई देता हूँ। हमारे सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं। हमारी मित्रता का आधार हमारी महान सांस्कृतिक परंपरा है। आपके नेतृत्व में हमारे संबंध दिनोंदिन प्रगाढ़ होते रहे हैं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मुझे अत्यंत ख़ुशी है कि अपने तीसरे कार्यकाल के शुरुआत में ही आपसे मिलने और भविष्य के विषय में बात करने का अवसर मिला। यह सुख संयोग है कि हम द्विपक्षीय साझेदारी की 40वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो पैसिफिक विजन में ब्रुनेई एक महत्वपूर्ण साझेदार है, जो हमारे लिए उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।”

इससे पहले अपने दौरे के पहले दिन पीएम मोदी कई कार्यक्रमों में शामिल हुए। पीएम मोदी 3 सितम्बर, 2024 को यहाँ भारत के दूतावास में बनी नई बिल्डिंग का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने ब्रुनेई में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी मुलाक़ात की।

ब्रुनेई में वर्तमान में लगभग 14,000 भारतीय रहते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यहाँ रहने वाले भारतीय दोनों देशों के रिश्तों के बीच एक सेतु का काम करते हैं। इसी दिन पीएम मोदी ब्रुनेई की राजधानी बन्दर सेरी बागवान में स्थित उमर अली सैफुद्दीन मस्जिद भी पहुँचे। 1958 में बनी मस्जिद काफी बड़ी है और वास्तुकला का एक नायाब नमूना है।

पीएम मोदी 4 सितम्बर को ब्रुनेई से सिंगापुर जाएँगे। यहाँ वह सिंगापुर के नेतृत्व से बातचीत में शामिल होंगे। सिंगापुर भारत का पुराना साझीदार रहा है और बड़ी संख्या में भारतीय यहाँ रहते हैं। पीएम मोदी का यह दौरा 5 सितम्बर, 2024 को खत्म होगा

फिल्म में काम देने का किया वादा, ड्रग्स देकर दुबई में किया यौन शोषण: अब मलयाली हीरो निविन पॉली के खिलाफ रेप का केस दर्ज, एक्टर बोले- सारे आरोप बेबुनियाद

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के एक और एक्टर पर यौन शोषण का आरोप लगा है। एक्टर का नाम निविन पॉली है। निविन के खिलाफ केरल के एर्नाकुलम स्थित ओन्नुकल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई है। उनके अलावा पीड़िता ने एक महिला समेत अन्य लोगों का नाम भी शिकायत में दिया है। निविन केस में छठे आरोपित हैं। पीड़िता के अनुसार, उनके साथ दुबई में दुष्कर्म हुआ था। वहीं एक्टर के मुताबिक सारे आरोप निराधार हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि वह सबसे पहले आरोपित महिला श्रेया के संपर्क में आई थी, जिसने उन्हें यूरोप में केयरगिवर की नौकरी देने का वादा किया था। हालाँकि पीड़िता ने वो नौकरी नहीं की। बाद में महिला ने उन्हें फिल्म का ऑफर दिया। इसके बाद ड्रग्स देकर उनका यौन शोषण हुआ।

महिला के मुताबिक, उनके साथ गलत करने वाले 6 लोग थे। इन सबने अलग-अलग मौकों पर उनके साथ कुछ न कुछ किया। पुलिस ने 40 वर्षीय पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद एक्टर और अन्य 5 (एके सुनील, श्रेया, बीनू, बशीर और कुत्तन) के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 376, 450, 342, 506 और 32 के तहत केस दर्ज किया ह

वहीं इस खबर के मीडिया में सामने आने के बाद निविन ने भी सोशल मीडिया पर सफाई पोस्ट की है। “मुझे अपने बारे में एक झूठी खबर है पता चली है, जिसमें मुझ पर शोषण करने का आरोप लगाया गया है। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि ये एकदम झूठ है। मैं इन आरोपों को बेबुनियाद साबित करने के लिए पूरी कोशिश करने वाला हूँ। आप लोगों की परवाह के लिए धन्यवाद। आगे सबकुछ कानूनी रूप से देखा जाएगा।”

हेमा कमेटी रिपोर्ट आने के बाद मलयालम इंडस्ट्री बदनाम

गौरतलब है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। कई एक्टर्स, डायरेक्टर और प्रोड्यूसरों के खिलाफ अब तक यौन शोषण के इल्जाम लग चुके हैं। पिछले दिनों मलयाली फिल्मों के मशहूर एक्टर सिद्दीकी पर दुष्कर्म का आरोप लगा था। वहीं फिल्म निर्देशक रंजीत पर भी रेप केस दर्ज हुआ था। उनसे पहले जयसूर्या और मुकेश के खिलाफ भी महिलाओं ने सामने आकर शिकायत दी थीं। पीड़िताओं का कहना था कि उन्होंने आरोपितों के नाम-पहचान की वजह से कभी अपनी आपबीती किसी को नहीं बताई थी, उन्हें लगता था कि इतने बड़े नामों पर इल्जाम लगाने से उन्हीं पर उंगली उठेगी। हालाँकि हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उन्हें हिम्मत मिली।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अस्पताल की सुरक्षा में तैनात हुई CISF, पर ममता बनर्जी की सरकार नहीं कर रही सहयोग: केंद्र ने बताया, यहीं हुई थी महिला डॉक्टर की रेप-हत्या

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के सहयोग ना करने की बात करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोलकाता के RG मेडिकल कॉलेज में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के बाद सहयोग नहीं कर रहा है। गृह मंत्रालय ने माँग की है कि सुप्रीम कोर्ट बंगाल सरकार को आदेश दे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। गृह मंत्रालय ने कहा कि RG कर मेडिकल कॉलेज में तैनात CISF सुरक्षाकर्मियों को सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि CISF सुरक्षाकर्मियों को RG कर मेडिकल कॉलेज के आसपास रहने की जगह नहीं मिली है।

गृह मंत्रालय ने बताया कि CISF सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल से 1 घंटे की दूरी पर रहना पड़ रहा है। उन्हें आने-जाने में रोज काफी टाइम लगता है, इस कारण उनके काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। गृह मंत्रालय ने कहा कि इससे आपात स्थिति से निपटने में भी CISF को दिक्कत हो रही है।

गृह मंत्रालय ने बताया है कि इसने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से भी रहने की जगह और कुछ उपकरण भी माँगे थे, जो उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। गृह मंत्रालय ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह आदेश की अवमानना के लिए बंगाल सरकार पर कार्रवाई करे।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त, 2024 को कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह CISF की तैनाती करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश कोलकाता पुलिस की मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था में विफल रहने पर किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने एक यूनिट की तैनाती यहाँ कर दी थी।

अब गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से सहयोग ना मिलने की बात कही है। गृह मंत्रालय की दलील है कि उसका CISF को सहयोग ना देना सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवमानना है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। मामले की सुनवाई अभी सुप्रीम कोर्ट में होनी बाक़ी है।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में एक डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में इसे पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने आत्महत्या बताने का प्रयास किया था। इस घटना के बाद देश भर में बवाल हुआ था और डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। RG कर मेडिकल कॉलेज में भी इस घटना के बाद तोड़फोड़ हुई थी, इसे कोलकाता पुलिस नहीं रोक पाई थी। इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ की सुरक्षा के लिए CISF तैनात करने का आदेश दिया। मामले में अभी CBI जाँच चल रही है।

‘च$रिन के औलाद तुम मेरा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे’: गोंडा में दलित महिला को अकेला देख घर में घुसे इस्लाम और निजामुद्दीन, छेड़खानी के बाद फाड़े कपड़े, बेरहमी से पीटा

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक दलित समुदाय की एक महिला के यौन शोषण का मामला सामने आया है। पीड़िता के कपड़े फाड़ दिए गए और छेड़छाड़ की गई। विरोध करने पर उनको जातिसूचक शब्द बोले गए और बेरहमी से मारा गया। 18 अगस्त को घटी इस घटना में आरोपितों के नाम इस्लाम, निजामुद्दीन, क़याम खाँ और मुज़्ज़ीम हैं। मंगलवार (3 सितंबर 2024) को पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

वकील राम वचन वर्मा ने इस मामले की शिकायत मंगलवार (3 सितंबर 2024) को अपने X हैंडल से UP पुलिस को टैग करते हुए की है। शिकायत के मुताबिक घटना गोंडा जिले के थानाक्षेत्र कौड़िया की है। यहाँ के एक गाँव में रहने वाली SC समुदाय (अनुसूचित जाति) की पीड़िता ने 23 अगस्त 2024 को गोंडा जिले के पुलिस अधीक्षक के नाम एक शिकायती पत्र लिखा है। पत्र में पीड़िता ने बताया है कि उनका घर गाँव में पट्टे की जमीन पर बना हुआ है। 18 अगस्त को पीड़िता के पति कहीं बार गए थे और वो घर में अकेली थीं।

आरोप है कि रात में लगभग 9 बजे पीड़िता के घर में इस्लाम, निजामुद्दीन, क़याम खाँ और मुज्जीम घुस गए। इन सभी ने पीड़िता से छेड़खानी शुरू कर दी। विरोध करने पर पीड़िता के कपड़े फाड़ दिए गए बेरहमी से पीटा गया। इसके बाद सभी आरोपितों ने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ दीं और जातिसूचक शब्द बोले। शिकायत के मुताबिक आरोपितों ने कहा, “च$रिन के औलाद, तुम मेरा कुछ उखाड़ नहीं पाओगे।” पीड़िता को पिटता देख कर आसपास के लोग डर गए।

बताया जा रहा है कि पीड़िता के पड़ोस में रहने वाले कुछ बच्चों ने मदद के लिए गुहार लगाई तो लोग जुटने शुरू हो गए। लोगों को आता देख कर आरोपित भाग निकले। जाते-जाते भी आरोपितों ने पीड़िता को धमकाते हुए कहा, “अभी तो इतना मारा-पीटा है। अगर FIR लिखवाओगे तो जान से मार डालूँगा।” पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। मंगलवार (3 सितंबर) को गोंडा पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई के लिए SHO कौड़िया को निर्देशित कर दिया है।

आर्यन मिश्रा का पीछा कर जिन्होंने चलाई गोलियाँ, उनके गोरक्षक होने के प्रमाण नहीं: फरीदाबाद पुलिस, बताया- कार में शैंकी भी था जिस पर पहले से हत्या के प्रयास का केस

हरियाणा के पलवल में आर्यन मिश्रा नाम के एक युवक की हत्या गलतफहमी के कारण हुई थी। युवक को गोली मारने वाले आरोपितों ने उसे अपराधी समझ लिया था और उनके गौरक्षक होने के अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। यह जानकारी फरीदाबाद पुलिस ने दी है।

फरीदाबाद पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर अमन यादव ने 3 सितम्बर, 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले में बताया, “24 अगस्त की रात हुई एक वारदात में एक युवक आर्यन मिश्रा की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस संदर्भ में फरीदाबाद पुलिस ने FIR दर्ज करके हत्या के पाँच बाद 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम अनिल, कृष्ण, वरुण, आदेश और सौरभ हैं। वारदात में उपयोग की गई गाड़ी को बरामद कर लिया गया है। यह सभी आरोपित फरीदाबाद के रहने वाले हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “अभी तक की जाँच में गलतफहमी के कारण गोली चलने की बात सामने आई है। गोली मारने वालों को लगा कि यह आपराधिक व्यक्ति हैं जो अपराध करने के लिए आए हैं। इसीलिए उन्होंने फायरिंग की। मामला जाँच के अंतर्गत है। आरोपितों के दावों को अभी सत्यापित किया जा रहा है।”

पुलिस ने यह भी बताया कि जिस गाड़ी में आर्यन मिश्रा पर गोली चलाई गई, उसमें कुल पाँच लोग सवार थे, इसी में एक युवक सागर उर्फ़ शैंकी भी था। पुलिस ने बताया कि इस युवक के विरुद्ध पहले से हत्या के प्रयास का एक मामला दर्ज है और जब गाड़ी का पीछा पाँच लोगों ने किया तो उन्हें लगा कि उनके दुश्मन गुट के लोग उनका पीछा कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि इसीलिए गाड़ी भगाने का प्रयास आर्यन और उसके साथियों ने किया होगा। इसी कारण से पीछा कर रहे लोगों का शक और गहराया। इसी के बाद यह घटना हुई।

मृतक आर्यन मिश्रा और उसके साथियों तथा हत्या के आरोपितों के बीच पुरानी रंजिश होने के दावे से पुलिस ने इनकार किया है। पुलिस ने कहा है कि अभी ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। पुलिस ने हत्या आरोपितों के गौरक्षक होने को लेकर कहा कि अभी यह बात भी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि अभी तक की जाँच में यह सामने नहीं आया है कि हत्या के आरोपित किसी संगठन से जुड़े हुए थे। उनकी पृष्ठभूमि की जाँच भी चल रही है।

गौरतलब है कि 24 अगस्त, 2024 की रात फरीदाबाद-पलवल रास्ते में डस्टर गाड़ी में सवार पाँच युवकों पर फायरिंग की गई थी। इस फायरिंग में गाड़ी में सवार युवक आर्यन मिश्रा (19) को कंधे के पास गोली लगी थी। उसे अस्पताल पहुँचने पर मृत घोषित कर दिया गया था। इस मामले में मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आर्यन को गौरक्षकों ने धोखे से गोतस्कर समझ लिया और गोली चलाई। इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जाँच में इन लोगों के गौरक्षक होने की बात अभी तक सामने नहीं आई है।