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‘पिछड़े समूहों के जन-कल्याण के लिए हो आँकड़ों का इस्तेमाल’: जानिए कैसे कॉन्ग्रेस ने जाति जनगणना पर RSS को लेकर फैलाया झूठ, संगठन को बता दिया इसके खिलाफ

जातीय जनगणना देश में बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है, राहुल गाँधी लगातार संसद से लेकर अपनी सभाओं तक में कह चुके हैं कि जातीय जनगणना होनी चाहिए। ये अलग बात है कि जब संसद में राहुल गाँधी की जाति पूछ दी गई थी तो सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भड़क गए थे। अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक वीडियो शेयर कर के ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (RSS) को जातीय जनगणना के खिलाफ बताया है। बता दें कि केरल के पलक्कड़ में संघ की समन्वय बैठक भी चल रही है।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में दावा किया कि RSS ने जातिगत जनगणना का खुल कर विरोध करते हुए कहा है कि इससे समाज की एकता और अखंडता को ख़तरा हो सकता है। साथ ही पार्टी ने ‘आजतक’ की खबर का एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। कॉन्ग्रेस ने कहा कि इस बयान से साफ़ है कि RSS और भाजपा जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहते, वो दलितों, पिछड़ों और जनजातीय समाज को उनका अधिकार नहीं देना चाहते हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस वीडियो में राहुल गाँधी का एक बयान भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा था, “अब लिखो लो। अगर कोई सोचे कि जाति जनगणना को रोका जा सकता है तो वो सुन ले, इसको रोका नहीं जा सकता है। ये होगा ही होगा।” इस वीडियो में कॉन्ग्रेस ने आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी शेयर की। साथ ही RSS को गलत तरीके से चित्रित करते हुए कार्टून दिखाया। हालाँकि, सच्चाई कॉन्ग्रेस के इस दावे के उलट है।

‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के ‘अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख’ सुनील आम्बेकर ने कहा था कि RSS ने पहले भी जातीय जनगणना पर टिप्पणी की है, हिन्दू समाज में जाति और जातियों के बीच संबंध एक संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा था कि ये बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, लेकिन ये हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा भी है। उन्होंने ये भी कहा था कि इस मुद्दे के साथ बेहद गंभीरता से निपटा जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने जो कहा वो महत्वपूर्ण है।

RSS की तरफ से विचार रखते हुए सुनील आम्बेकर ने स्पष्ट कहा कि जातीय जनगणना का इस्तेमाल सिर्फ चुनाव और चुनावी राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए। यानी, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि RSS मानता है कि जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए, खासकर उन जातियों/समूहों के लिए जो पीछे छूट गए हैं, अगर कुछ वर्गों पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है तो इसके लिए सरकार को आँकड़ों की ज़रूरत होती है।

RSS का मानना है कि पीछे छूटे समूहों को जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अगर सरकार को आँकड़ों की ज़रूरत है तो वो ये आँकड़े इकट्ठा कर सकती है। संगठन ने याद दिलाया कि पहले भी ऐसा हो चुका है। सुनील आम्बेकर ने कहा कि जातीय जनगणना का एक चुनावी या राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सिर्फ लोगों को आगाह किया था। यानी, RSS गरीबों को लाभ के लिए जातिगत जनगणना के पक्ष में है, विरोध में होने वाली बात झूठ है।

रिजवान, वसीम और उसके भाई ने मिल कर किया नाबालिग हिन्दू लड़की का बलात्कार, उठाने के लिए पहुँच गया घर: परिजनों के साथ गाली-गलौज और हाथापाई

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक नाबालिग हिन्दू लड़की से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप रिज़वान, वसीम और उसके भाई रोशू पर लगा है। इन तीनों ने मिल कर पीड़िता का उसके घर से अपहरण का भी प्रयास किया। नाबालिग को इस्लाम कबूल करवाने की भी कोशिश की गई। पुलिस ने शनिवार (31 अगस्त, 2024) को मामले में FIR दर्ज कर ली है। रविवार (1 सितंबर) को मुख्य आरोपित रिज़वान को गिरफ्तार कर लिया गया है। फरार चल रहे वसीम और उसके भाई रोशू की तलाश में दबिश दी जा रही है।

यह घटना बागपत के शहर कोतवाली क्षेत्र की है। यहाँ शनिवार (31 अगस्त) को यहाँ पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि शनिवार की शाम लगभग 7 बजे उनकी नाबालिग बेटी अचानक कहीं लापता हो गई। परिजनों ने खोजबीन शुरू की तो पीड़िता पास के ही वसीम नाम के व्यक्ति के घर में मिली। इस घर के एक कमरे में पीड़िता के साथ रिज़वान आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया। पीड़िता का पिता डाँट-फटकार कर अपनी बेटी को वापस घर ले आया।

आरोप है कि कुछ ही देर बाद रिज़वान, वसीम और उसका भाई रोशू लाठी-डंडे ले कर पीड़िता के घर तक पहुँच गए। इन सभी ने घर में घुस कर पीड़ित परिवार को गालियाँ देनी शुरू कर दीं और लड़की को दोबारा उठा का ले जाने की धमकियाँ दीं। जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज व हाथापाई भी की गई। पीड़िता के पिता का दावा है कि उनकी पत्नी ने घर में अपनी बेटी को कई बार नमाज़ पढ़ते भी देखा है। इस वजह से उन्होंने अपनी बेटी को कई बार डाँटा भी, पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा।

शिकायत में पीड़िता के पिता का दावा है कि उनकी बेटी घर में अक्सर धर्म-परिवर्तन की बातें किया करती थी। आरोप है कि नाबालिग को धर्म परिवर्तन के लिए रिज़वान लम्बे समय से उकसा रहा था। रिज़वान को ‘लव जिहाद’ का साजिशकर्ता बताते हुए पीड़िता के पिता ने उस पर कई बार अपनी बेटी से रेप करने का आरोप भी लगाया है। बकौल शिकायतकर्ता पीड़िता के जरिए रिज़वान ने घर में रखे 48 हजार रुपए और सोने की एक अंगूठी भी हड़प ली है। साथ ही रिज़वान पीड़िता को अपने साथ कही भगा कर भी ले जाना चाहता था।

पीड़ित परिवार ने इस शिकायत के साथ आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने FIR में रिज़वान, रोशू और उसके भाई वसीम को नामजद किया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137 (2), 333, 352, 115 (2), 64 (2) के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम व पॉक्सो एक्ट के तहत करवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। रविवार (1 सितंबर) को पुलिस ने रिज़वान को गिरफ्तार कर लिया है। DSP बागपत के मुताबिक फरार आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

15 साल की उम्र से ही नौकरानी का बलात्कार कर रहा था कॉन्ग्रेस नेता मुफ़्ती मेहँदी, अश्लील वीडियो बना कर देता था चुप रहने की धमकी: यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में पुलिस ने अपनी नौकरानी से रेप के आरोप में कॉन्ग्रेस पार्टी के एक नेता को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम मुफ़्ती मेहँदी है जो कॉन्ग्रेस के शहर उपाध्यक्ष भी रह चुका है। पीड़िता पिछले 10 वर्षों से मुफ़्ती मेहँदी के घर झाड़ू-पोंछा कर रही थी। जब पीड़िता महज 15 साल की थी तब मुफ़्ती मेहँदी ने उनके साथ रेप किया था। शुक्रवार (31 अगस्त, 2024) को मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने सोमवार (2 सितंबर) को आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है।

यह मामला जौनपुर जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली का है। शुक्रवार को यहाँ पीड़िता ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़िता ने बताया कि वो पिछले 10 वर्षों से मुफ़्ती मेहँदी के घर पर झाड़ू-पोंछे का काम कर रही है। कुछ समय बाद मुफ़्ती मेहँदी ने पीड़िता को मीठी-मीठी बातें कर के प्यार के जाल में फँसा लिया। उसने पीड़िता को चप्पल और कपड़े आदि दिला कर अपने विश्वास में लिया। इसी दौरान मेहँदी ने 15 साल की नाबालिग पीड़िता से रेप किया। जब पीड़िता ने विरोध किया तो कॉन्ग्रेस नेता ने निकाह का वादा कर के उसे चुप करवा दिया।

कई वर्षों तक यौन शोषण का शिकार होती रही पीडिता ने आखिरकार मुफ़्ती मेहँदी पर शादी का दबाव बनाना शुरू किया। शुरू में तो आरोपित ने टाल-मटोल किया लेकिन बाद वो पीड़िता को खुलेआम धमकियाँ देने लगा। आरोप है कि मेहँदी ने पीड़िता की तमाम आपत्तिजनक तस्वीरें खींच रखी थीं। इसी को दिखा कर वह पीड़िता को मुँह बंद रखने की धमकियाँ दिया करता था। एक दिन मेहँदी ने ने पीड़िता से कहा, “तेरा जीना हराम कर देंगे।” धमकियाँ दे कर मेहँदी पीड़िता से रेप करता रहा।

शिकायत में आगे बताया गया है कि मुफ़्ती मेहँदी पीड़िता पर अन्य लोगों के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने का दबाव दिया करता था। जब लड़की इस से मना करती थी तो उसकी पिटाई होती थी। 27 अगस्त (मंगलवार) को मेहँदी ने एक बार फिर से पीड़िता से रेप किया। विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटा। जाते-जाते मेहँदी ने पीड़िता से कहा, “पुलिस से बताओगी तो तुम्हें और तुम्हारे पूरे परिवार को जान से खत्म कर दूँगा।” डरी सहमी पीड़िता ने आखिरकार सारी बात अपनी माँ को बता दी।

मामले की जानकारी मिलते ही पीड़िता की माँ अपनी बेटी को ले कर पुलिस स्टेशन पहुँची। यहाँ पीड़िता ने तहरीर दे कर मेहँदी पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस तहरीर पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64, 115 (2) और 351 (3) के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। सोमवार (2 सितंबर) को दबिश दे कर मुफ़्ती मेहँदी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित मुफ़्ती मार्च 2022 तक कॉन्ग्रेस पार्टी में जौनपुर शहर का उपाध्यक्ष था। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

किसी ने नहीं लिया नाम फिर भी मोहनलाल को टारगेट कर रही पत्रकार धन्या राजेंद्रन, ड्रग्स पार्टियों पर चुप्पी: क्या मलयालम इंडस्ट्री के ‘गुनहगारों’ को बचा रहा है ‘The News Minute’

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री एक कठिन दौर से गुजर रही है। पिछले कई दशकों से मोहनलाल, ममूटी, जयराम और सुरेश गोपी जैसे अभिनेता केरल सिनेमा की रीढ़ हैं। पृथ्वीराज सुकुमारन, फहाद फासिल और दिलकीर सलमान के रूप में युवा अभिनेताओं की एक खेप आई है जो खासी प्रतिभावान है। इन सबके बीच अचानक से इंडस्ट्री में यौन शोषण के मामले खुलने लगे। ये सब जस्टिस हेमा कमिटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने के बाद शुरू हुआ। पिछले 5 वर्षों से ये रिपोर्ट ठण्डे बस्ते में धूल फाँक रही थी।

WCC और हेमा कमिटी रिपोर्ट

मलयालम फिल्मों में महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने का दावा करने वाला एक संगठन है – ‘Women in Cinema Collective’ (WCC) नाम की, जिसे नवंबर 2017 में एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया था। इसका गठन उसी साल मई में हुआ था, जिसमें मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की कई अभिनेत्रियाँ, महिला निर्देशक और टेक्नीशियन शामिल थीं। मनु वॉरियर, पार्वती, भावना, अंजलि मेनन, गीतू मोहनदास, विधु विन्सेंट, रीमा कल्लिंगल रेम्या नम्बीशन, दीदी दामोदरन और सुरभि लक्ष्मी जैसी महिलाएँ इसमें शामिल थीं।

इन महिलाओं ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मुलाकात कर अपनी माँगें सौंपी थीं। इनका कहना था ये ये संस्था मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए बनाई गई है। 2017 में केरल में एक मामला सामने आया। कार्तिका मेनन उर्फ़ भावना नामक अभिनेत्री का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया और चलती कार में उनका यौन शोषण हुआ। इसमें अभिनेता दिलीप का नाम आया। भावना को फिल्म इंडस्ट्री छोड़नी पड़ी थी।

इसके बाद WCC की पहल पर केरल उच्च न्यायालय की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जस्टिस हेमा कमिटी बनी, जिसने दिसंबर 2019 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। अब तक इस पर कुछ नहीं हुआ था, अब इसे सार्वजनिक किया गया है। इसके बाद एक-एक कर के ऐसी कई घटनाओं की तह खुली और पीड़िताओं ने भी सार्वजनिक रूप से आवाज़ उठाई। एक तरह से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री ठहर सी गई। अभी भी रोज कुछ न कुछ आरोप सामने आते ही जा रहे हैं।

एक के बाद एक आरोप, AMMA अध्यक्ष मोहनलाल का इस्तीफा

अभिनेत्री मीनू मुनीर ने अभिनेता जयसूर्या, मुकेश और एडवेला बाबू पर आरोप लगाए। अभिनेत्री शर्मिला ने फिल्म निर्देशक हरिहरन पर आरोप लगाया। एक युवा अभिनेता ने निर्देशक रंजीत पर आरोप लगाया। एक अभिनेत्री ने अभिनेता सिद्दीकी पर आरोप लगाया। CPI(M) विधायक M मुकेश का भी FIR में नाम है। मणियनपिल्लई राजू, निर्देशक VK प्रकाश और प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव विचू व नोबेल अन्य लोग हैं जिनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। इन सबके बीच एक और खबर आई।

वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल ने ‘एसोसिएशन ऑफ मलयालम फिल्म आर्टिस्ट्स’ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। मोहनलाल ने सोशल मीडिया में चल रही बातों का जवाब देते हुए कहा कि वो नहीं भागे नहीं थे बल्कि काफी दिनों से केरल से बाहर से और अपनी आने वाली फिल्म Barroz 3D में व्यस्त थे। उन्होंने हेमा कमिटी रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि AMMA कोई ट्रेड यूनियन नहीं है बल्कि 500 लोगों का एक परिवार है। मोहनलाल ने कहा कि इंडस्ट्री में जो हो रहा है उसके लिए सभी लोग जवाबदेह हैं।

मोहनलाल ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को यहाँ तक पहुँचाया है, ऐसे में उन्होंने कहा कि इस एक मुद्दे को विषय बना कर फिल्म इंडस्ट्री को तबाह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “पुलिस और अदालत आरोपितों की धर-पकड़ के लिए हैं। इसे केरल से एक बड़े अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए, अन्य भाषाओं के फ़िल्मी लोग मुझे फोन करते हैं तो मैं कहता हूँ कि वो भी ऐसी कमिटी बनाएँ। ये मलयालम फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है, दक्षिण भारतीय फ़िल्में दुनिया भर में अच्छा कर रही हैं। कानून अपना काम करे, इंडस्ट्री को बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।”

मोहनलाल को बदनाम करने के लिए पीछे पड़ा ‘The News Minute’?

मोहनलाल कोई साधारण अभिनेता नहीं हैं। पिछले 44 वर्षों से वो फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। 1986 आते-आते उन्होंने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में स्टार का तमगा हासिल कर लिया था। 90 के दशक में उन्होंने ममूटी के साथ खुद को मलयालम सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया। उनके फैंस उन्हें प्यार से ‘Lalettan’ कहते हैं। 2016 में एक ऐसा समय आया जब उनकी फिल्मों ने मिल कर 378 करोड़ रुपए का कारोबार किया, उनसे आगे सिर्फ बॉलीवुड के आमिर खान, सलमान खान और अक्षय कुमार ही थे।

अब आते हैं दक्षिण भारत के एक मीडिया पोर्टल ‘The News Minute’ पर। ‘द न्यूज मिनट’ को धन्या राजेंद्रन नामक पत्रकार चलाती हैं। ये वही धन्या राजेंद्रन हैं जिन्होंने भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड्स में मिले पैसे को लेकर निशाना साधा था, वहीं DMK को मिले पैसों का बचाव किया था। जब मुस्लिम महिलाएँ वॉशरूम में हिन्दू महिलाओं के वीडियो शूट कर रही थीं तो इसे उन्होंने प्रैंक बताया था। उनका मीडिया संस्थान अक्सर भाजपा के खिलाफ लिखने के लिए जाना जाता रहा है।

आपने मोहनलाल के बारे में जाना, धन्या राजेंद्रन के बारे में जाना। अब असली बात पर आते हैं। असल में केरल की फिल्म इंडस्ट्री में यौन शोषण की घटनाओं पर ‘The News Minute’ ने खबर छापी। इस खबर में मोहनलाल की तस्वीर लगा दी गई। न तो मोहनलाल पर यौन शोषण का कोई आरोप लगा है, किसी महिला अभिनेत्री ने उन्हें लेकर अपना खराब अनुभव साझा किया है और न ही उन्होंने किसी आरोपित का बचाव किया है – फिर भी उनकी तस्वीर के साथ यौन शोषण से जुड़ी खबर को प्रकाशित करने का तुक लोगों को समझ नहीं आया।

धन्या राजेंद्रन ने अपने मीडिया संस्थान का एक लिंक शेयर किया। इसमें फीचर इमेज मोहनलाल की लगी थी। शेयरिंग टेक्स्ट में उन्होंने लिखा कि अभिनेत्री राधिका शरतकुमार ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में पुरुषों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। खबर में तस्वीर मोहनलाल की लगी है लेकिन जब आप लिंक खोल कर देखेंगे तो पूरे पेज पर एक बार भी Mohanlal शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे Character Assassination बताया जा रहा है, जो सही भी लग रहा है।

जिसे मान रहे भाजपा-RSS का करीबी उन सभी को बनाया जा रहा निशाना?

मोहनलाल के फैंस को ये बुरा लगा। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अभिनेता को बदनाम करने के लिए ऐसा किया गया। वैसे समय-समय पर मोहनलाल भाजपा के साथ नजदीकियों के कारण भी चर्चा में रहे हैं, शायद इसीलिए भी उन्हें निशाना बनाया जा रहा हो। सितंबर 2018 में मोहनलाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर अपने ‘विश्वशांति फाउंडेशन’ द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी दी थी। जन्माष्टमी के दिन ये मुलाकात हुई थी। कई बार चर्चा चलती है कि RSS मोहनलाल को भाजपा के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करने का इच्छुक है।

मलयालम सिनेमा के एक अन्य दिग्गज अभिनेता सुरेश गोपी ने केरल के त्रिशूर से जीत दर्ज की है। ये पहली बार हुआ है जब भाजपा ने केरल में खाता खोला हो। केरल वामपंथ का गढ़ है जहाँ कई RSS-BJP कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को बचाने के लिए हुए आंदोलन में शामिल लोगों पर थोक में केस दर्ज हुए। वहाँ मुस्लिमों और ईसाइयों का प्रभाव बढ़ता ही चला जा रहा है। इन सबके बीच मलयालम फिल्म के एक बड़े स्टार्ट का भाजपा से जीत का अर्थ है कि और भी फ़िल्मी हस्तियाँ पार्टी के साथ आ सकती हैं।

दक्षिण भारत में फिल्मों का क्रेज है। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री रहे MGR अभिनेता थे, करूणानिधि कहानी लेखक थे और जयललिता अभिनेत्री थीं। आंध्र प्रदेश में अभिनेता NTR मुख्यमंत्री बने, अभी पवन कल्याण डिप्टी CM हैं। केरल में पिछले कई दशकों से कॉन्ग्रेस और CPM गठबंधन की ही जीत होती रही है। ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि मोहनलाल को बदनाम करने के पीछे ये मंशा भी हो सकती है कि उन्हें भाजपा का करीबी बताए जाने की चर्चाएँ बंद हों, बाकी अभिनेता भी डरें।

कुछ फैंस का कहना है कि सिनेमा के कोच्चि और तिरुवनंतपुरम समूह के बीच टकराव चल रहा है, इसीलिए इस मुद्दे से कोई वास्ता न होने के बावजूद मोहनलाल और सुरेश गोपी निशाना बनाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि मलयालम सिनेमा में जितना तिरुवनंतपुरम समूह का दबदबा कम होगा और कोच्चि समूह का बढ़ेगा, फिल्म इंडस्ट्री और भी Woke हो जाएगी। बड़ी बात ये है कि हेमा कमिटी रिपोर्ट में ड्रग्स और पार्टियों के जरिए फिल्म इंडस्ट्री में एक समानांतर अर्थव्यवस्था चलाने की बातें हैं, उस पर कई मीडिया संस्थान चुप्पी साधे हुए हैं।

ड्रग्स माफिया पर चुप क्यों हैं धन्या राजेंद्रन और उनका ‘The News Minute’

आपको ‘The News Minute’ पर ऐसी खबरें नहीं मिलेंगी। क्या जानबूझकर मोहनलाल को इस पूरे मामले में उनका नाम न आने के बावजूद फँसाया जा रहा है और ड्रग्स कार्टेल वाले बड़े लोगों को बचाया जा रहा है? हेमा कमिटी की रिपोर्ट में इंडस्ट्री में अंदर तक जम चुके ड्रग्स माफिया की भी बातें हैं, कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अधिकतर अपराध नशे में किए गए हैं। कई युवा अभिनेता ड्रग्स के आदी हैं। यौन शोषण के मामलों की जाँच तो हो रही है, ड्रग्स वाली बात पर अब तक सरकार भी चुप है।

ख़ुफ़िया विभाग ने भी बताया है कि कई हालिया मलयालम फिल्मों की शूटिंग के दौरान सेट पर ही ड्रग्स चलते हैं और शूटिंग खत्म होने के बाद होने वाली पार्टियों में खुलेआम ड्रग्स का इस्तेमाल होता है। स्थानीय मीडिया की खबरों की मानें तो पुलिस और एक्साइज विभाग के पास इसकी सूचनाएँ हैं फिर भी कार्रवाई नहीं होती। ड्रग्स का इस्तेमाल पिछले एक दशक से इस तरह से हो रहा है। मिमिक्री आर्टिस्ट व अभिनेता tini टॉम ने कहा था कि उन्होंने एक फिल्म में एक अभिनेता के बेटे के रोल के लिए अपने बेटे के पास आए ऑफर को ठुकरा दिया, क्योंकि सेट पर ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है।

अब देखिए, गायिका सुचित्रा ने मलयालम अभिनेत्री रीमा कल्लिंगल पर ड्रग्स पार्टियाँ आयोजित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों में ऐसी चीजें इस्तेमाल की गईं, जो एडल्ट पार्टियों में भी इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन पार्टियों में मादक पदार्थों के इस्तेमाल में पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल थे। निर्माता-निर्देशक आशिक बाबू पर भी ऐसे ही आरोप लगे। और जानने वाली बात ये भी है कि रीमा WCC की भी सदस्य हैं, जो संगठन यौन शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने का दावा कर रहा है।

‘The News Minute’ में इससे जुड़ी खबर आपको नहीं मिलेगी। कारण – धन्या और रीमा मित्र हैं। एक वैश्विक टूर के दौरान इन दोनों की एक तस्वीर भी आप नीचे देख सकते हैं। यानी, केरल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा ये मुदा उनके लिए व्यक्तिगत है, व्यक्तिगत हित से जुड़ा प्रतीत होता है। मित्र-मंडली के खिलाफ लगे आरोपों को छिपाया जा रहा है और जिसका इन सब में कोई किरदार नहीं उसकी तस्वीर लगा कर कहबर बेचीं जा रही है ताकि इनका सब्सक्रिप्शन मॉडल सफल हो।

विदेश में साथ में हैंगआउट करती हुईं धन्या, रीमा और पार्वती

उन्होंने हेमा कमिटी रिपोर्ट मुद्दे पर अपने एक शो में रीमा से बातचीत भी की। धन्या राजेंद्रन और उनका मीडिया संस्थान ‘The News Minute’ इस पर चुप क्यों हैं? क्या मलयालम फिल्म इंडस्ट्री पर हिन्दू विरोधी समूह के आधिपत्य के लिए ऐसा खेल किया जा रहा है? धन्या राजेंद्रन और जैसे धूर्त जब मोहनलाल की तस्वीर का बिना अर्थ इस्तेमाल करें, तो इसका अर्थ सिर्फ क्लिकबेट नहीं हो सकता। इसके पीछे कुछ न कुछ बड़ी मंशा है। ड्रग कार्टेल के खिलाफ चुप्पी, भाजपा के करीबियों को धमकी – यही है उद्देश्य।

कन्नौज वाले नवाब सिंह से मैच हुआ रेप पीड़िता का DNA, अखिलेश-डिंपल यादव का रहा है करीबी: नाबालिग की शिकायत के बाद सपा ने झाड़ लिया था पल्ला

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में नाबालिग पीड़िता से रेप केस के आरोपित समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता नवाब सिंह यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं। फॉरेंसिक जाँच और FSL रिपोर्ट में पीड़िता के साथ बलात्कार किए जाने की पुष्टि हो गई है। नवाब सिंह के DNA सैम्पल का मिलान भी पीड़िता से हो गया है। सोमवार (2 सितंबर 2024) को कन्नौज के पुलिस अधीक्षक IPS अमित कुमार आनंद ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

नवाब सिंह के केस में सोमवार (2 सितंबर 2024) को कन्नौज के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने ANI से बात की। उन्होंने बताया, “घटनास्थल से फॉरेंसिक सबूत जुटाए गए थे। इन्हें FSL भेजा गया था। FSL से रिपोर्ट प्राप्त हो गई है जिसमें दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि हुई है। इसमें कन्नौज पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।” बताया जा रहा है कि अब पुलिस सपा के पूर्व नेता पर रेप के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी चार्जशीट दाखिल करेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि FSL की इसी रिपोर्ट में नवाब सिंह यादव और पीड़िता के DNA का मिलान हो गया है। बताते चलें कि यह मामला 11 अगस्त 2024 का है। तब अपनी बुआ के साथ लखनऊ से कन्नौज लौट रही पीड़िता को कथित तौर पर सपा के पूर्व नेता नवाब सिंह यादव ने अपने कॉलेज बुलाया था। यहाँ पीड़िता को रात में रुकने की बात कहते हुए नवाब सिंह यादव ने बलात्कार किया। रेप के बाद पीड़िता ने पुलिस बुला ली थी। पुलिस ने नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया।

बाद में पीड़िता की बुआ की भी इस केस में संलिप्तता निकली थी। पुलिस ने पीड़िता की बुआ को भी जेल भेज दिया था। नवाब सिंह यादव पर रेप का आरोप लगते ही समाजवादी पार्टी ने फ़ौरन ही उनसे अपना पल्ला झाड़ लिया था। कन्नौज सपा ने एक आधिकारिक पत्र जारी करते हुए नवाब सिंह यादव को पार्टी विरोधी हरकतें करने वाला बता दिया था। हालाँकि स्थानीय लोगों सहित नवाब सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से खुद को डिम्पल यादव का प्रतिनिधि बताया था।

अवैध निर्माणों की ढाल नहीं बनेगा सुप्रीम कोर्ट, UP सरकार की तारीफ कर कहा- बुलडोजर एक्शन पर बनेगी देशव्यापी गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में बुलडोजर एक्शन को लेकर गाइडलाइन बनाने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति केवल आरोपित है तो उसका घर कैसे गिराया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह अवैध इमारतों को किसी भी तरीके से नहीं बचाएँगे।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने सोमवार (2 सितम्बर, 2024) को देश भर में पुलिस-प्रशासन के बुलडोजर एक्शन लेने पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को देशव्यापी स्तर पर सुलझाए जाने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा इस मामले में गाइडलाइन बनाया जाना जरूरी है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी राज्यों से सुझाव माँगे हैं जिन्हें इमारतें तोड़ने सम्बन्धित नई गाइडलाइन में सम्मिलित किया जा सकता है। हालाँकि, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई। कोर्ट ने कहा, “किसी का घर सिर्फ इसी आधार पर कैसे गिराया जा सकता है कि वह किसी अपराध का आरोपित है? उसका घर तो तब भी नहीं तोड़ा जा सकता जब अपराध सिद्ध हो जाए।” कोर्ट ने यह भी कहा कि हम अवैध इमारतों को किसी भी तरह नहीं बचाएँगे।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश ने भी अपना पक्ष रखा। उत्तर प्रदेश की तरफ से पेश सोलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “किसी अचल संपत्ति को सिर्फ इसलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोपित किसी अपराध में शामिल है और वह इसलिए तोड़ा जा सकता है जब इमारत अवैध हो।”

उत्तर प्रदेश ने यह भी कहा कि वही इमारतें गिराई गई हैं, जो अवैध हैं और उन्हें तब ही गिराया गया जब इनके मालिकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के स्टैंड की तारीफ भी की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गाइडलाइन बनने तक बुलडोजर एक्शन पर नियंत्रण रखा जाए।

सुप्रीम कोर्ट यह सुनवाई उन याचिकाओं के संबंध में सुन रहा है, जिनमें कहा गया है कि उनका घर सिर्फ इसलिए गिराया गया क्योंकि उसमें आरोपित रहता था। सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिकाएँ मध्य प्रदेश और राजस्थान से दायर की गई हैं। राजस्थान की याचिका में कहा गया है कि उनका घर सिर्फ इसलिए गिराया गया क्योंकि उसमे रहने वाले किराएदाएर ने अपराध किया था।

इसके अलावा दिल्ली में भी घर गिराने को लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुँची। हरियाणा के नूंह में भी घर गिराए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाएँ पहुँची थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे सुनवाई करके गाइडलाइन जारी करेगा।

31 साल की महिला डॉक्टर के ‘उपचार’ से डरी पाकिस्तान सरकार, मार्च करने निकली तो 2 लाख लोग साथ हो लिए: बलूचिस्तान की आवाज महरंग बलोच को जानिए

पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ बलूचिस्तानियों के संघर्ष का इतिहास पुराना रहा है। आज भी बलोच के लोग अपने अधिकारों के लिए पाकिस्तान सरकार से लड़ाई लड़ रहे हैं। कुछ ने इस क्रम में हिंसा का रास्ता अपना लिया है तो कुछ ऐसे भी हैं जो अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए भी पाकिस्तान सरकार के नाक में दम किए हुए। 31 साल की महरंग बलोच इनमें सबसे ज्यादा जाना-माना नाम है।

कौन हैं महरंग बलोच

1993 में जन्मीं महरंग पेशे से डॉक्टर हैं लेकिन वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर होती है। उन्हें बलूचिस्तान के लोगों के हकों के लिए लड़ते-लड़ते एक दशक से ज्यादा का समय बीत गया है।

इस लड़ाई में वो अपने अब्बा को खो चुकी हैं और भाई के अचानक गायब होने के दर्द को जानती हैं। उन्होंने वैसे तो बलोच लोगों के लिए 2006 से ही आवाज उठाना शुरू कर दिया था लेकिन कुछ समय बाद उनके अब्बा का अपहरण कर लिया गया और फिर 2011 में उनका शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।

महरंग उस समय तक इतना सक्रियता से प्रदर्शनों में नहीं जुड़ीं थीं, लेकिन 2017 में जब भाई भी अचानक किडनैप कर लिया गया, तब उन्होंने मैदान में आने की ठानी। महरंग ने अपने भाई के लिए प्रदर्शन किए, मार्च में शामिल हुई, बैठकों में गईं। उनके आवाज उठाने का ये लाभ हुआ कि अपहरणकर्ताओं को 2018 में उनके भाई को लौटाना पड़ा।

राजनीति में कैसे हुई एंट्री

महरंग इस बीच ये समझ चुकी थीं कि ये दर्द जो उन्होंने सहा वो उनके अकेले के साथ हुई घटना नहीं है बल्कि बलूचिस्तान में कई परिवार इस दर्द को झेल रहे हैं। नतीजतन भाई के आने के बाद भी महरंग ने अपना काम नहीं छोड़ा। वह अपहरण होने वाले लोगों के लिए इंसाफ को माँगती रहीं। बाद में 2019 में उन्होंने अपनी एक पार्टी बनाई- बलूच यकजहती समिति (बीवाईसी)।

पार्टी बनाने के बाद उन्होंने छोटी-छोटी बैठकें शुरू कीं। दरवाजे पर जा जाकर ऐसे लोगों को जोड़ा। धीरे-धीरे उनके साथ घर की बुजुर्ग औरतों से लेकर घर की बेटियाँ तक जुड़ने लगीं। उनके साथ चलने वाला काफिला बड़ा होने लगा।

महरंग का बलूचिस्तानियों पर असर

महरंग का असर आज बलूचिस्तान पर ऐसा है कि हाल में उनके नेतृत्व में एक मार्च हुआ था जिसमें अनुमान था कि करीबन 2 लाख लोग आए होंगे। इन लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्च किया, आंसू गैस छोड़े, तमाम प्रयत्न किए, लेकिन लोगों ने हार नहीं मानी।

महरंग को सुनने जटी भीड़

उलटा लोग महरंग की हिम्मत देख उनके कायल हो गए। युवा लड़कियों ने बताया कि वो मार्च में महरंग को देखकर आई हैं। उन्होंने कहा कि मार्च में उन्हें पहली बार पता चला कि बलूचिस्तानी लोग अपने परिजनों को खोने से दर्द में हैं। लड़की ने कहा कि महरंग सच में लोगों के दिल और दिमाग जीत रही हैं। उन्हीं के कारण सबको पता चला कि आखिर बलूचिस्तानियों के साथ उनके अपने देश में क्या हो रहा है।

वहीं महरंग है जिन्हें आए दिन अपने लोगों की आवाज उठाने के लिए मारने की धमकियाँ मिलती हैं, लेकिन महरंग कहती हैं, “पहले मुझे मृत्यु से डर लगता था। यहाँ तक मैं अंतिम संस्कार में भी नहीं जाती थी। मगर 2011 में पहली बार मुझे अपने पिता के क्षत-विक्षत शव की पहचान करनी पड़ी। पिछले 15 वर्षों में अपने लोगों के दर्जनों शवों को देखा है। अब मुझे मौत से भी डर नहीं लगता है।”

डरती है पाकिस्तान सरकार

बता दें कि महरंग के पिता मजदूर थे, लेकिन उन्होंने एमबीबीएस हासिल करके डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की और आज वो जिन बलोच लोगों के लिए संघर्ष कर रही हैं वो उन तमाम लोगों के दर्द को बयान करता है जिन्होंने पाकिस्तानी फौज के कारण अपने अपनों को खोया और जिन्हें पता भी नहीं कि उनके अपने जीवित हैं भी या नहीं। आज उनके नाम और काम के बारे में सिर्फ बलूचिस्तानी ही नहीं जानते बल्कि अलग-अलग जगह के लोग, जो इंसानियत की पैरवी करते हैं वो उनके मुरीद हैं। उनकी लोकप्रियता तेजी से मुल्क में बढ़ रही है। वहीं सरकार कोशिश कर रही है कि महरंग का असर देश के अन्य जगहों पर न पड़े। इसी कारण से मुल्क की सरकार लोगों को महरंग के साथ जुड़ने से रोक रही है। इंटरनेट बंद कराया जा रहा है और जवान तैनात किए जा रहे हैं ताकि प्रदर्शन पर काबू पाया जा सके।

इमरान ने कुरान जला कर पी सिगरेट, कहा – इसमें काफिरों का क़त्ल का फरमान: जिन संत के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे, उनका किया समर्थन – हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में कुरान जलाने का मामला सामने आया है। यह आरोप इमरान नाम के एक युवक पर लगा है जो पेशे से वकील है। आरोपित ने एक वीडियो जारी कर के इस्लाम मज़हब पर कई आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की हैं। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें इमरान बता रहा है कि कुरान की 26 आयतों में काफिरों के कत्ल का फरमान है। इमरान ने इस्लाम त्याग कर सनातन धर्म में घर वापसी का भी एलान किया है। रविवार (1 सितंबर, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के इमरान को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बुलंदशहर के थाना क्षेत्र शिकारपुर की है। यहाँ रविवार को कस्बे के ही रहने वाले शाहिद ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शाहिद ने बताया कि शनिवार को ही शिकारपुर के रहने वाले इमरान के यूट्यूब पर एक आपत्तिजनक वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में इमरान न सिर्फ कुरान को जला रहा है बल्कि इस्लाम पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहा है। शाहिद ने इमरान पर नबी की शान में गुस्ताखी का भी आरोप लगाया है। अपनी भावनाएँ आहत होने और लोगों में रोष फैलने की दलील देते हुए शाहिद ने इमरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि आरोपित इमरान वकील है। पुलिस ने इस शिकायत पर अधिवक्ता इमरान के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192, 299, 302 और 353 के तहत तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। सोमवार (2 सितंबर) को पुलिस ने बताया कि आरोपित इमरान को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमरान क़ुरान को जलाते हुए बोला, “जबान के जायके के लिए अल्लाह का नाम लेकर। कुरान की 26 शैतानी आयतें जो काफिरों के नाम पर इंसानों का कत्ल करने का खुल्लम-खुल्ला आदेश देती हैं। इमरान ने आगे तीन तलाक, हलाला और ईरान में 9 साल की बच्ची से निकाह को भी शरिया बना देने जैसी बातें भी कहीं हैं। वीडियो में उसे पैगंबर मुहम्मद का भी नाम लिया है।

वीडियो में आगे एडवोकेट इमरान ने दावा किया कि शरिया के नाम पर हो रहे ऐसे कामों की निंदा पूरी दुनिया कर रही है। इमरान आगे बोला, “स्वामी रामगिरि महाराज ने कुछ भी गलत नहीं किया। मैं सही को सही और गलत को गलत समझने के इल्म से बख़ूबी वाकिफ हूँ।” अपनी हरकत को इमरान ने ‘अपने अक़ीदे को जला कर खत्म करने’ की संज्ञा दी है। बांग्लादेश का भी जिक्र करते हुए इमरान आगे बोला, “अभी आपने देखा होगा कि बांग्लादेशी हिन्दुओं का क्या अंजाम किया। यह है शांतिप्रिय मज़हब। और फिर उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।”

इसी के जलते पन्नों से इमरान ने सिगरेट बना कर भी पी। इस पर चप्पल भी रखी। एडवोकेट इमरान ने अपने वीडियो में क़ुरान पर बैन लाने की वकालत की है। उन्होंने दावा किया कि आज वो घर वापसी कर रहे हैं। पूरे वीडियो के दौरान इमरान ने सिर पर खास टोपी लगा रखी है। वह लगातार मुस्करा रहा था।

शंभू बॉर्डर खुलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमिटी, कहा- बात कर किसानों-ट्रैक्टर को हटवाइए, हाइवे खोलिए: राजनीति नहीं करने की दी हिदायत

शंभू बॉर्डर पर महीनों से जमे किसान प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमिटी का गठन कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पाँच सदस्यीय कमिटी को किसानों और सरकार का पक्ष सुन कर किसी नतीजे पर पहुँचने को कहा है। कोर्ट ने कमिटी से कहा है कि वह सबसे पहले किसानों से बात करके हाइवे खुलवाए।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 सितम्बर, 2024) को इस मामले में सुनवाई करते हुए इस कमिटी का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस नवाब सिंह को इसका चेयरमैन नियुक्त किया है। इसके अलावा इसमें हरियाणा के पूर्व DGP पीएस संधू, कृषि प्रोफ़ेसर देविंदर शर्मा और कृषि अर्थशास्त्री सुखपाल सिंह को इसका सदस्य नियुक्त किया है।

इनके अलावा इस कमिटी में प्रोफ़ेसर बीआर कम्बोज को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। कमिटी से सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह पहले पंजाब और हरियाणा की सरकार से बातचीत करे तय करे कि मुद्दे क्या हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी हिदायत दी कि किसी भी मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी से यह भी कहा है कि वह शंभू बॉर्डर पर बैठे किसानों से भी बातचीत करे। कोर्ट ने कह़ा, “शंभू बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों से बातचीत कर उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग से अपने ट्रैक्टर और अन्य सामान तुरंत हटाने के लिए मनाएँ ताकि ताकि दोनों राज्य हाइवे खोलने में सक्षम हो सकें।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कमिटी इस मामले को देखेगी और बाकी लोग इन मुद्दों को खाली में ना उठाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरियाणा और पंजाब में बड़ी आबादी ऐसी है जो खेती पर आश्रित है और काफी गरीब तबके से है, ऐसे में इनके मुद्दे इस कमिटी को देखने होंगे।

कोर्ट का यह फैसला हरियाणा की एक याचिका पर दिया गया है। इससे पहले जुलाई में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा को आदेश दिया था कि वह शंभू बॉर्डर खोल दे। हालाँकि, हरियाणा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तबसे ही इस मामले की सुनवाई कर रहा है।

इससे पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब से कमिटी के लिए नाम देने को कहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी का गठन कर दिया। अब कमिटी सभी पक्ष से बातचीत करके किसान आंदोलन के लिए समाधान बताएगी।

‘Emergency की Uncut वर्जन ही रिलीज करूँगी’: सेंसर ने रोकी फिल्म तो बोलीं कंगना रनौत – ‘खालिस्तानी’ शब्द का इस्तेमाल करने पर भी है मनाही

अभिनेत्री कंगना रनौत की फिल्म ‘Emergency’ की रिलीज डेट टल गई है। फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड ने भी पास नहीं किया है। फिल्म आपातकाल और इंदिरा गाँधी पर आधारित है। बता दें कि कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा की सांसद भी हैं। अब अभिनेत्री ने शुभंकर मिश्रा के YouTube चैनल पर उनसे बात करते हुए अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि समस्या ये है कि फिल्म में ‘खालिस्तानी’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, सिखों को इंदिरा गाँधी को मारते हुए नहीं दिखाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि ये ऐसे मुद्दे हैं जिनसे अराजक तत्वों को समस्या है और वो याचिका डाल कर फिल्म को रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं। कंगना रनौत ने कहा कि ऐसे लोगों को उनके अस्तित्व से भी समस्या हो सकती है, कि वो जीवित ही क्यों हैं। बकौल कंगना रनौत, वो हमेशा से अकेली हैं। अभिनेत्री ने कहा कि उन्होंने किसी पार्टी के लिए, किसी को नीचा दिखाने के लिए या फिर किसी समुदाय को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि बेहद ही ईमानदार तरीके से ये फिल्म बनाई है।

कंगना रनौत ने कहा कि जिन चीजों को लेकर आपत्ति है वो फिल्म का छोटा सा हिस्सा है, उसे पकड़ कर हंगामा खड़ा किया जा रहा है। कंगना रनौत ने कहा कि लोग हर चीज पर डराते रहते हैं, फिर हम झाड़ियों के पीछे रोमांस वाली फ़िल्में ही बनाते रह जाएँगे। कंगना रनौत ने कहा, “सेंसर बोर्ड ने हमारा सर्टिफिकेट रोका हुआ है लेकिन मैं प्रतिबद्ध हूँ कि फिल्म का Uncut वर्जन ही रिलीज करूँगी। मैं कोर्ट में लड़ कर Uncut रिलीज करूँगी। मैं अचानक से ये नहीं दिखा सकती कि इंदिरा गाँधी अचानक ही मर गईं।” वीडियो में 12:45 के बाद ये सुना जा सकता है।

धमकियों को लेकर ‘तनु वेड्स मनु’ सीरीज और ‘क्वीन’ की अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि उन्हें इतनी हद तक निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 4 इतिहासकारों की मदद से ये फिल्म बनाई गई है, जिनमें उस ज़माने के दिग्गज पत्रकार भी शामिल हैं जो जेल भी गए थे। बकौल कंगना रनौत, Gun Point पर रख कर सिस्टम को चलाने वाली धारणा चल रही है। कंगना रनौत ने कहा कि ये महाराष्ट्र से शुरू हुआ, जब उनके लिए गाली का इस्तेमाल किया गया और फिर सबको आदत पड़ जाती है, पंजाब से भी उन्हें गाली पड़ती है, ‘X’ व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी गाली पड़ती है।