हाल में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ‘आईसी-814- द कंधार हाईजैक’ फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच सीरिज के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तमाम सवालों पर बात की। इस दौरान नसीरुद्दीन शाह भी मंच पर मौजूद थे। उनसे जब 1999 की घटना पर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि उनपर हाईजैक की खबर सुनने के बाद असर क्या हुआ था।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “मैं उस वक्त 50 साल का था। मैं बहुत परेशान हो गया था, क्योंकि मुझे डर था इससे इस्लामोफोबिया की लहर उठ सकती थी। खुशकिस्मती रही कि तब ऐसा नहीं हुआ, लेकिन मुझे याद है कि मैं स्थिति को लेकर बहुत चिंतित था और सोच रहा था कि यह किस ओर ले जाएगा।”
नसीरुद्दीन शाह ने आगे कहा, “जब पूरी विपदा से निपट लिया गया, तब आखिर में मेरे मन में द्वंद्व चल रहा था। जब डील पूरी हुई, तो मैं असहज था। मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों लगा, लेकिन महसूस किया कि पैसेंजर और पायलेट मुश्किल दौर से गुजरे थे।”
नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद अब एक बार फिर ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या कहीं यही असली वजह तो नहीं है कि जो सीरीज में जानबूझकर आतंकियों के असली नाम बताने की जगह उनके कोडवर्ड को ज्यादा बताया गया और ये दिखाया गया कि वो लोग कितने ज्यादा अच्छे इंसान थे।
Naseeruddin Shah says when IC 814 Hijack happened, he was worried about 'Islamophobia'.
"I feared that it would lead to Islamophobia"
Is this why the Web Series whitewashed the Terrorists and showed them good human beings?
लोगों का कहना है कि अगर कोई अपराध किसी मजहब से जुड़े आतंकियों ने किया है तो फिर उसकी जानकारी देने से इस्लामोफोबिया कैसे फैल जाएगा। इसके अलावा ये भी कहना है कि जिस समय पूरी दुनिया उन यात्रियों की सलामती की दुआ कर रहा था, उस समय में भी ये व्यक्ति सिर्फ इस्लाम के बारे में ही सोच रहा था।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में ऐसा भड़काऊ बयान दिया है, जिस पर हंगामा मचना तय है। अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “साल 2027 में सपा सरकार बनते ही यूपी के सारे बुलडोजरों का रुख गोरखपुर की तरफ होगा।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कहा, “विधानसभा चुनाव में भाजपा का सफाया होगा और देश की राजनीति उसके चुनावी परिणाम से प्रभावित होगी। इस चुनाव में प्रदेश में समाजवादी सरकार बनते ही पूरे प्रदेश के बुलडोजरों का रुख गोरखपुर की तरफ होगा।” अखिलेश यादव ने मंगलवार (3 सितंबर 2024) को सपा के मुख्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान यह बात कही।
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा की सरकार में निर्दोष लोगों को सताया जा रहा हैं। 2027 में समाजवादी सरकार बनते ही पूरे प्रदेश के बुलडोजरों का रूख गोरखपुर की तरफ होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा का राजनीतिक चरित्र ही विकास विरोधी है। पिछले सात वर्षों में भाजपा ने विकास के नाम पर कोई काम नहीं किया है और न ही भाजपा नेतृत्व के पास विकास का कोई विजन है।
अखिलेश ने कहा कि भाजपा का एजेंडा समाज में नफरत फैलाकर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ कर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करना है। समाजवादी पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता भाजपा के इन मंसूबों को कभी भी पूरा नहीं होने देगा। जनता समझ रही है कि उसको समाजवादी सरकार बनने पर ही तमाम समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृहजिला गोरखपुर ही है। गोरखपुर में गोरक्षधाम पीठ के वो महंत हैं। अखिलेश यादव का इशारा किस तरह है, इस बात के कयास लगने शुरू हो गए हैं।
इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अखिलेश यादव के गृह जिला मैनपुरी पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने विकास योजनाओं का उद्धाघन और शिलान्यास किया, साथ ही अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव पर जोरदार हमला बोला। योगी आदित्यनाथ ने मैनपुरी में कहा कि जो मैनपुरी कभी वीवीआईपी जिला माना जाता था, वो आज विकास की दौड़ में पिछड़ कैसे गया? उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले यूपी में हर नौकरी बिकती थी, उसकी नीलामी होती थी। वसूली में चाचा और भतीजा समान भागीदार होते थे।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्र से कुकर्म का मामला सामने आया है। कुकर्म का आरोप मदरसे के ही मौलाना पर लगा है जिसका नाम साकिब है। पीड़ित छात्र की उम्र 13 साल है। मौलाना पीड़ित को अक्सर अपने कमरे में बुलाता था और अप्राकृतिक सेक्स करता था। मंगलवार (3 सितंबर, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला गाजियाबाद के थानाक्षेत्र अंकुर विहार का है। यहाँ की डाबर चौकी क्षेत्र में मंगलवार को पीड़ित छात्र के अब्बा ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनका 13 वर्षीय बेटा पिछले कुछ समय से दीनी तालीम हासिल कर रहा था। छात्र इसी मदरसे के हॉस्टल में कई अन्य सहपाठियों के साथ रहता था। यहाँ पढ़ाने वाला मौलाना नाबालिग पर गंदी नजर रखने लगा। वह छात्र को अक्सर रात में अपने कमरे के अंदर बुला कर कुकर्म करता था।
शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि जब उनका बेटा कुकर्म का विरोध करता था तो मौलाना उसे फेल कर देने की धमकी देते हुए चुप करा देता था। इसी के साथ वह कहीं किसी से बताने पर पीड़ित को मार डालने जैसी बातें भी किया करता था। बच्चे ने इन धमकियों से डर कर काफी समय तक मुँह बंद रखा। आखिरकार कुछ दिनों बाद बर्दाश्त से बाहर होने पर उसने अपने परिजनों को सारी बात बता दी। पीड़ित छात्र के पिता ने पुलिस में तहरीर दी और आरोपित मौलाना साकिब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
पीड़ित के पिता की तहरीर पर पुलिस ने संज्ञान लिया है और FIR दर्ज कर ली है। इस FIR में मौलाना साकिब को नामजद किया गया है। साकिब पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। अंकुर विहार के ACP भास्कर वर्मा ने मंगलवार को इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित मौलाना साकिब को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
फेक न्यूज की फैक्ट्री और ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर ने बीजेपी नेता नुपूर शर्मा को जिहादियों के निशाने पर लाने जैसी ही कोशिश बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के विधायक नितेश राणे के साथ की है। क्लिपकटुए के नाम से बदनाम मोहम्मद जुबैर ने नितेश राणे का संदर्भ को काटकर एक एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया और उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर ला दिया।
मोहम्मद जुबैर के इस पोस्ट के बाद नितेश राणे के खिलाफ भी सोशल मीडिया पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने निशाने पर ले लिया और फिर उसकी इस कोशिश में वामपंथी खेमा भी शामिल हो गया, ठीक उसी तरह, जैसे बीजेपी की प्रवक्ता रही नुपूर शर्मा के खिलाफ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ लग गई थी। दरअसल, नितेश राणे ने महाराष्ट्र में रामगिरी महाराज के खिलाफ जिहादियों की ओर से चलाई जा रही ‘सर तन से जुदा’ की मुहिम के खिलाफ प्रतिक्रिया दी थी और उनका बचाव किया था। इसके बाद जुबैर की कोशिशों के चलते खुद नीतीश राणे अब जिहादियों के निशाने पर आ चुके हैं।
मोहम्मद जुबैर ने नितेश राणे को लेकर एक्स पर लिखा, चुनावी राज्य महाराष्ट्र में, भाजपा विधायक नितेश राणे कहते हैं ‘तुम्हारी मस्जिदों के अंदर आकर चुन चुन कर मारेंगे’। यह पहली बार नहीं है, बल्कि अतीत में उनके द्वारा कई ऐसे मुस्लिम विरोधी नफ़रत भरे भाषण दिए गए हैं। उनके खिलाफ़ पहले भी कई एफआईआर दर्ज की गई हैं, लेकिन वह मुस्लिमों के खिलाफ़ नफ़रत भरे भाषण और नरसंहार की धमकियाँ देना जारी रखते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री @narendramodi और वरिष्ठ भाजपा सदस्य उनके साथ हैं। पीएम नरेंद्र मोदी का सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सिर्फ़ दिखावा है।”
स्रोत-एक्स
जुबैर ने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को टैग करते हुए लिखा, “आपके गठबंधन सहयोगियों का एक विधायक अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय को लगातार धमका रहा है। आप कब तक आँखें मूँदे रहेंगे और ऐसे भाषणों को अनदेखा करते रहेंगे।” उसने विपक्षी दलों के कई नेताओं को भी टैग किया और राणे की बातों की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
नितेश राणे के खिलाफ मैदान में उतर गया वामपंथी इकोसिस्टम
मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के साथ ही सोशल मीडिया पर सक्रिय वामपंथी इकोसिस्टम जिसमें पत्रकार, कार्यकर्ता भी हैं, उन्होंने नितेश राणे को निशाने पर ले लिया। कथित पत्रकार राजदीप सरदेसाई, जिसकी पत्नी टीएमसी की राज्यसभा सांसद है, उसने एक्स पर लिखा, “ध्यान देने वाली खबर: अहमदनगर में बीजेपी विधायक नितेश राणे द्वारा सबसे बेशर्मी से नफरत और हिंसा भड़काने वाला भाषण। दो एफआईआर दर्ज की गईं। उनकी जगह विधानसभा में नहीं बल्कि जेल में है। जो भी कहना है, उसे कहने की यह छूट कहाँ से आती है?” राजदीप ने अपनी पोस्ट गुस्से वाली इमोजी के साथ समाप्त की।
Story that caught the eye: Most brazen hate and incitement to violence speech imaginable by BJP MLA Nitesh Rane in Ahmednagar. Two FIRs filed. His place is not in assembly but in jail. Where does this impunity to say whatever you will come from? ? pic.twitter.com/V8lK1LodnH
इसके बाद फेक न्यूज फैलाने में माहिर जाकिल अली त्यागी ने लिखा, “मुस्लिमों को मारने की धमकी देने वाले नितेश राणे की शिकायत उसके पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान सांसद बाप नारायण राणे से की जा रही थी कि अपने बेटे को समझाए, लेकिन बाप की भी इसी हफ़्ते की वीडियो सामने आ गई जिसमें वो मुस्लिमों को निकालकर मारने की बात कर रहा है!”
मुस्लिमों को मारने की धमकी देने वाले नितेश राणे की शिकायत उसके पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान सांसद बाप नारायण राणे से की जा रही थी कि अपने बेटे को समझाए, लेकिन बाप की भी इसी हफ़्ते की वीडियो सामने आ गई जिसमें वो मुस्लिमों को निकालकर मारने की बात कर रहा है!pic.twitter.com/loTfX956c3
सोशल मीडिया हैंडल इंस्पायरट्रेल ने एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट में लिखा, “BJP विधायक नितेश राणे मुसलमानों को मस्जिदों में घुसकर चुन चुन कर मारने कि खुलेआम बातें करता दिख रहा है… क्या इनपर किसी तरह कि क़ानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं? अगर है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या BJP ने इन जैसों को पूरा समर्थन दें रखा है?”
Must Retweet ⚠️ BJP विधायक नितेश राणे
मुसलमानों को मस्जिदों में घुसकर चुन चुन कर मारने कि खुलेआम बातें करता दिख रहा है…
क्या इनपर किसी तरह कि क़ानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं? अगर है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती?
अल जजीरा के पत्रकार वाजिद खान ने लिखा, “बीजेपी के इस बोने विधायक नीतीश राणा ने मुसलमानों को धमकी दी है, कि वह मस्जिदों में घुस कर मुस्लिमों का क़त्लेआम करेंगे। जब तक इस मलून की गिरफ़्तारी नहीं हो जाती, तब तक मेरे साथ लिखते रहिए। #ArrestNitishRana”
भाजपा के इस बोने विधायक नीतीश राणा ने मुसलमानों को धमकी दी है की वह मस्जिदों में घुस कर मुसलमानो को क़त्लेआम करेंगे .
नितीश राणे ने इस्लामिक कट्टरपंथियों को दी थी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
जुबैर की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर नितेश राणे के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने एक जनसभा में कहा था, “हम तुम्हारी मस्जिदों में घुसेंगे और एक-एक करके तुम्हें मारेंगे। इसे ध्यान में रखना।” हालाँकि बीजेपी ने राणे के इस बयान से खुद को अलग कर लिया है।
महाराष्ट्र के दबंग भाजपा विधायक तथा हमारे भाई @NiteshNRane की Gहादीयो को खुली चुनौती। अगर हमारे राम गिरी महाराज को कुछ किया तो घुस कर मारेंगे।
इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जवाब देने पर बनाया हथियार
दिलचस्प बात यह है कि नितेश राणे पर हमला करने वाले लोग तब चुप थे जब देश भर में रामगिरी महाराज के खिलाफ “सर तन से जुदा” के नारे लगाए जा रहे थे। एक्स यूजर jxh45 ने रामगिरी महाराज के खिलाफ लगाए जा रहे ऐसे नारों का एक थ्रेड बनाया। एक पोस्ट में यूजर ने लिखा, “मोहम्मद जुबैर, राजदीप सरदेसाई और कई अन्य, अहमदनगर में बीजेपी विधायक नितेश राणे के भाषण का संदर्भ दिए बिना गुमराह कर रहे हैं। इस्लामिस्ट और मौलवी पिछले एक महीने से खुलेआम नफरत भरे भाषण और गाली-गलौज कर रहे हैं – जिनमें से अधिकांश को मीडिया द्वारा नजरअंदाज किया जाता है।”
Mohammed Zubair, Rajdeep Sardesai and many others, are misleading without giving context to BJP MLA Nitish Rane speech in Ahmednagar.
Islamists & Maulvis have been openly making hate speeches & behe@dings, since last one month – most of which is ignored by media.
अगस्त के तीसरे सप्ताह में, कर्नाटक के बेलगावी के खानपुर कस्बे में स्थानीय पुलिस स्टेशन/कलेक्टर कार्यालय के बाहर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रामगिरी महाराज की हत्या के लिए नारेबाजी कर उकसाया।
Speech from last week's rally in Khanapur town, in Karnataka's Belagavi.
The speech was outside local Police station/collector's office.
The organizers said – "Is mulk ke Musalman maaf nahi karenge, hum sab ki zimmedari hai, ki humkumat ki zariya se isse maut ke ghat utarenge". pic.twitter.com/y9aHgou4a2
Maulana allegedly said – "A Mujahid had said in a Parliament – they're 80,000, or 80 lakhs, or 80 crores; if it comes to Prophet, we will keep them at our feet".@SpBagalkote, @DgpKarnatakapic.twitter.com/EC8nj2M8Yr
कर्नाटक के कलबुर्गी में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए।
Open rallies to impose Sharia held in Karnataka's Kalaburagi (Gulbarga).
Muslim mobs chanted: "Gustakh nabi ki ek hi saaza, phasi ki saaza"…
Kalaburagi is known to be stronghold of Congress President Mallikarjun Kharge; his son-in-law and son, are MP and MLAs from that place. pic.twitter.com/QLI2afv8An
नितेश राणे ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर पर दी प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के अहमदनगर में नितेश राणे के खिलाफ 2 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इस मामले में बीजेपी विधायक नितेश राणे ने सवाल उठाते हुए कहा, “हिंदू समुदाय को क्यों धमकाया जा रहा है?”
पुलिस के अनुसार, रविवार को अहमदनगर जिले के श्रीरामपुर और तोपखाना पुलिस क्षेत्राधिकार में दो अलग-अलग मौकों पर भड़काऊ भाषण देने के लिए राणे के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए। नितेश राणे ने अहमदनगर में सकल हिंदू समाज आंदोलन के दौरान यह टिप्पणी की। राणे ने सोमवार (2 सितंबर 2024) को एएनआई से कहा, “संविधान और पुलिस को अपना काम करना चाहिए। हिंदू समुदाय को क्यों धमकाया जा रहा है? अगर वे (मुस्लिम) धमकी भरी भाषा में बात कर सकते हैं, तो हम भी ऐसा ही कर सकते हैं। मैं आपको 10 से 15 यूट्यूब चैनल दिखा सकता हूँ, जिन्होंने रामगिरी महाराज को खुलेआम धमकाया है और हिंदुओं के खिलाफ खुलेआम नफरत फैलाई है। कल मैंने हिंदू गब्बर सिंह होने के बारे में जो बयान दिया, उसका मकसद हिंदू समुदाय को यह बताना है कि उन्हें किसी से नहीं डरना चाहिए।”
राणे ने कहा कि वे महंत रामगिरी महाराज के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा, “कल (रविवार) मैं अहिल्यानगर और श्रीरामपुर में था। हम महंत रामगिरी महाराज के समर्थन में वहाँ गए थे। उनके द्वारा दिए गए बयान में कुछ भी नया नहीं था। दस मुस्लिम विद्वान पहले ही इस तथ्य का उल्लेख कर चुके हैं कि रामगिरी महाराज ने क्या कहा।” नितेश राणे ने दावा किया कि जो लोग भी रामगिरी महाराज का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।
नितेश राणे ने कहा, “जो कोई भी रामगिरी महाराज का समर्थन कर रहा है और अपने सोशल मीडिया स्टेटस पर यह बात डाल रहा है, उसे जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। पिछले हफ़्ते पुणे में रामगिरी महाराज के खिलाफ़ एक रैली के दौरान ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए थे। वे ऐसा कह सकते हैं, लेकिन अगर हम उसी भाषा में हिंदू समुदाय के समर्थन में सामने आते हैं, तो हमसे सवाल क्यों किए जाते हैं?”
रामगिरी महाराज ने क्या कहा?
दरअसल, रामगिरी महाराज ने प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों का उल्लेख करते हुए लोगों से धार्मिक जीवन जीने की अपील की थी। उन्होंने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को नासिक के सिन्रर क्षेत्र के पंजले गाँव में एक प्रवचान दिया था, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। उनकी टिप्पणी के बाद मुस्लिम समुदाय भड़क गया और तब से उनके खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाते हुए उनको मौत की सजा देने की माँग की जा रही है।
रामगिरी महाराज ने जो कुछ भी कहा, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि कई बड़े इस्लामिक लोगों ने महिलाओं के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया। उनकी इस टिप्पणी के बाद छत्रपति संभाजीनगर से लेकर नासिक, मुंबई और पुणे समेत महाराष्ट्र के कई जिलों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहा है। उनके खिलाफ मुस्लिमों की मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने को लेकर कई एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
जुबैर ने राणे के साथ वही किया, जैसा उसने नुपूर शर्मा के खिलाफ किया था
ये बात नहीं भूलना चाहिए कि कैसे बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा को इस्लामिक कट्टरपंथियों ने कैसे बलि का बकरा बनाया था। उसकी शुरुआत क्लिपकटुए मोहम्मद जुबैर ने ही की थी। बता दें कि मई 2022 में, जुबैर ने जानबूझकर टाइम्स नाउ पर हुई एक बहस से नूपुर शर्मा की एक क्लिप को एडिट करके शेयर किया था। जुबैर ने उस वीडियो को इस तरह से शेयर किया, जिसमें लग रहा था कि नुपूर इस्लाम को निशाना बना रही थी। खास बात ये है कि उसी डिबेट में तसलीम रहमानी ने भगवान शिव का अपमान किया था, लेकिन क्लिपकटुअ ने उसे नहीं दिखाया।
जुबैर के इस क्लिपकटुए क्रित्य की वजह से नुपूर को ‘ईशनिंदा करने वाला’ घोषित कर दिया गया और तालिबान और अलकायदा समेत कई इस्लामी संगठनों ने उनके लिए मौत की सजा की माँग की। यही नहीं, नुपूर के खिलाफ कई मौलवियों ने भी बयान जारी किए। जुबैर यहीं नहीं रुका। उसने नूपुर की क्लिप को गलत तरीके से इंटरनेशनल लेवल पर शेयर करवाया, जिसकी वजह से कतर और कई इस्लामी संगठनों ने बयान जारी किए।
दुखद बात यह है कि बीजेपी ने नूपुर शर्मा से दूरी बना ली और उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया। उस दौरान और बाद में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए। इस्लामी भीड़ ने अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए हिंसा का रास्ता चुना और सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया। हिंदुओं और नूपुर शर्मा के प्रति नफरत इस हद तक थी कि हिंदू दर्जी कन्हैया लाल और हिंदू व्यापारी उमेश कोल्हे की हत्या इस्लामिक आतंकवादियों ने सिर्फ़ इसलिए कर दी क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर नूपुर का समर्थन किया था। दो साल बाद भी नूपुर शर्मा शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से सामने आई हों। उन्हें अपनी जान की सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच बेहद सावधानी से घूमना पड़ता है। दूसरी ओर भगवान शिव का अपमान करके शर्मा को भड़काने वाला तस्लीम रहमानी बिना किसी परिणाम का सामना किए खुलेआम घूम रहा है और टीवी चैनलों की डिबेट में हिस्सा ले रहा है।
महाशय राजपाल का मामला
इस्लाम के खिलाफ़ दिए गए बयानों के लिए गैर-मुसलमानों को निशाना बनाना कोई नई बात नहीं है; यह हमेशा से से होता आ रहा है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1920 के दशक में “रंगीला रसूल” प्रकाशित करने के लिए महाशय राजपाल की हत्या इसी वजह से की गई थी।
चाहे नितेश राणे हों, नुपुर शर्मा हों या महाशय राजपाल, घटनाओं का सिलसिला एक जैसा ही है। इस्लामी भीड़ द्वारा लगाए गए हिंसक, अपमानजनक और यहाँ तक कि खुलेआम हत्या के नारे को मोहम्मद जुबैर और वामपंथी मीडिया द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन बदले की कार्रवाई या चेतावनी देने वाले किसी भी बयान को अपराध घोषित कर दिया जाता है।
यह समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू लड़की ने सोहैल पर नाम बदल कर निकाह करने और फिर इस्लाम कबूल करने के दबाव का आरोप लगाया है। पीड़िता चंडीगढ़ के एक कॉल सेंटर में जॉब करती थी जिसे मांस खाने और नमाज़ पढ़ने पर भी मजबूर किया गया था। इंकार करने पर सोहैल और उसके परिवार वालों ने मिल कर पीड़िता की पिटाई भी की। मंगलवार (3 सितंबर 2024) को दी गई इस शिकायत पर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला बदायूँ के थाना क्षेत्र बिसौली का है। यहाँ मंगलवार को एक हिन्दू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह मूल रूप से बदायूँ की रहने वाली है। साल 2023 में पीड़िता चंडीगढ़ के एक कॉल सेंटर में जॉब करती थी। यहीं पर पीड़िता को सोहैल पहली बार मिला था जिसने अपना परिचय हिन्दू के तौर पर दिया था। उसने पीड़िता को विश्वास में लिया और साथ रहने वाला। इस दौरान आरोपित ने पीड़िता से कई बार रेप किया जिस से वो गर्भवती हो गई।
पीड़िता ने आगे बताया कि कुछ दिनों बाद उसने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के बाद सोहैल पीड़िता को ले कर बदायूँ आ गया। घर आ कर पीड़िता को सोहैल के मुस्लिम होने और खुद को धोखा मिलने की जानकारी हुई। बदायूं ला कर सोहैल और उसके घर वाले पिछले 3 महीने से पीड़िता को टॉर्चर करने लगे। इस टॉर्चर में सोहैल का अब्बा नियामु, उसकी अम्मी रुखसाना के साथ उसकी बहनें रुबीना और जेबा शामिल हैं। आरोप है कि ये सभी मिल कर पीड़िता को एक बंधक जैसे रखते हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।
प्रकरण के सम्बन्ध में थाना प्रभारी बिसौली को जाँच कर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है ।
शिकायतकर्ता पीड़िता के मुताबिक, उनकी बेटी को माँ से दूर रखा जाता है। छोटी-छोटी बातों पर उसके साथ मारपीट की जाती है। इस दौरान पीड़िता को हिन्दू धर्म त्याग कर इस्लाम कबूल करने के लिए कहा जाता था। जब पीड़िता ने आरोपितों की बात मानने से इंकार कर दिया तो मंगलवार को इन सभी आरोपितों ने पीड़िता को बेरहमी से पीटा और बेटी को छीन कर घर से भगा दिया। पीडिता ने सभी आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बदायूं पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक हिन्दू लड़की पर मुस्लिम युवक द्वारा जबरन निकाह का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। एक प्राइवेट स्कूल में टीचर पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित का नाम तनवीर उर्फ़ चाँद बाबू है जो कि सजावट का काम करता है। चाँदबाबू उर्फ़ तनवीर ने पीड़िता की बहन को भी अपशब्द बोले और उलाहना ले कर गए अन्य परिजनों को भी घर से भगा दिया। सोमवार (2 सितंबर 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला गोंडा जिले के कोतवाली शहर का है। यहाँ सोमवार (2 सितंबर) को OBC समुदाय की हिन्दू पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के बाद पीड़िता ने मीडिया से बात की। महिला ने बताया कि वो जब भी स्कूल पढ़ाने जाती है तो तनवीर उर्फ़ चाँद बाबू उसका पीछा करता है। रास्ते में चाँद बाबू पीड़िता के पीछे कुछ छिड़कता जिसका विरोध करने पर वह खुद से निकाह करने का दबाव बनाता है। कई दिनों तक प्रताड़ित होने के बाद पीड़िता ने अपनी माँ को सारी बात बताई।
पीड़िता की माँ चाँद बाबू के घर उलाहना ले कर गई। आरोप है कि तब चाँद बाबू के घर वाले एकजुट हो गए और सभी ने मिल कर पीड़िता की माँ को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए भगा दिया। इसी दौरान चाँद बाबू के घर वालों ने पीड़िता की माँ को तलवार दिखा कर कहा, “निकाह करवा दो वर्ना जान से मार डालेंगे।” महिला टीचर की माँ इस हरकत से डर गईं। उन्होंने खुद को बचाने के लिए वहाँ हामी भरी और भाग कर थाने पहुँच गईं। बकौल पीड़िता पुलिस चौकी और कोतवाली पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
पीड़िता ने आगे बताया कि पुलिस की सुस्ती की वजह से चाँद बाबू और मनबढ़ हो गया। वो पीड़िता के साथ उनकी बहन को भी छेड़ने लगा। उसकी गंदी हरकतें स्कूल के साथ बाजार या मोहल्ले में भी कहीं आते-जाते शुरू हो गईं। पीड़िता की बहन की शादी तय हुई तो चाँद बाबू ने उसको भी तुड़वाने की धमकी दी। चाँद बाबू कोतवाली क्षेत्र की ही एक मस्जिद के पास रहता है। वह फूलों की सजावट का काम करता है और साथ ही में गुब्बारों का ठेला भी लगाता है। चाँद बाबू की ये हरकतें पिछले 2 महीने से लगातार जारी हैं।
प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर को जांच कर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
शिकायत में महिला टीचर ने आगे बताया कि वो और उनकी बहन जब कहीं भी आते-जाते हैं तब चाँद बाबू सबको दिखा कर उनका वीडियो बनाता है। विरोध करने पर चाँद बाबू पीड़िता के पूरे परिवार का नरसंहार करने की धमकियाँ देता है। बकौल पीड़िता चाँद बाबू को ऐसी सजा मिले कि वो दोबारा किसी और लड़की को परेशान न करे। सोमवार (2 सितंबर, 2024) को गोंडा पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए SHO गोंडा कोतवाली को निर्देशित कर दिया गया है।
गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार (2 सितंबर 2024) तीन अखबारों टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई), इंडियन एक्सप्रेस और दिव्य भास्कर के माफीनामे को खारिज कर दिया। ये माफीनामा कोर्ट की कार्यवाही की गलत रिपोर्टिंग के लिए प्रकाशित किया गया था, जिसे छापने का आदेश गुजरात हाईकोर्ट ने दिया था। गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि ये माफीनामे काफी अस्पष्ट और छोटे थे। ऐसे में 3 दिन के समय में फिर से माफीनामे छापे जाएँ, वो भी सही हेडलाइन और बड़े अक्षरों में, पहले पूरे पन्ने पर। इस दौरान उस पन्ने पर कोई खबर नहीं होनी चाहिए।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस प्रणव त्रिपेदी की बेंच ने ये आदेश दिया। दरअसल, गुजरात हाई कोर्ट मे 22 अगस्त को आदेश दिया था कि टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई), इंडियन एक्सप्रेस और दिव्य भास्कर अगले ही दिन यानी 23 अगस्त को माफीनामा प्रकाशित करें। तीनों अखबारों ने ऐसा किया भी, लेकिन बहुत छोटी सी जगह पर माफीनामा प्रकाशित कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट में एफिडेविट फाइल कर दिया गया।
TOI और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित माफ़ीनामा
इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने वकील से साफ तौर पर पूछा, “आपने इन माफीनामों को मोटे अक्षरों में क्यों नहीं प्रकाशित किया।” इस पर वकील ने कहा कि ऐसा ही किया गया है। लेकिन चीफ जस्टिस ने साफ कहा कि ये पर्याप्त नहीं है। इसे कोई नहीं पढ़ सकता। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा, “आपको पूरी हेडलाइन देनी चाहिए थी कि माफी किस संबंध में है। कौन समझेगा कि माफी किस बात के लिए है… आपको कहना चाहिए कि गलत रिपोर्ट के लिए माफी। यह बात सामने आनी चाहिए। माफी के साथ रिपोर्ट भी होनी चाहिए।” साथ ही कोर्ट ने इन माफीनामों को रिजेक्ट कर दिया और तीनों अखबारों को नए सिरे से माफीनामा प्रकाशित करने के लिए 3 दिन का समय दिया।
सोमवार (2 सितंबर 2024) को हाई कोर्ट ने निर्देश दिया, “हम उन्हें तीन दिन का अतिरिक्त समय देते हैं कि वे अपने द्वारा प्रकाशित समाचार पत्रों के प्रथम पृष्ठ पर मोटे अक्षरों में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, जिससे आम जनता को स्पष्ट रूप से सूचित किया जा सके कि इस मामले की सुनवाई के बारे में 13 अगस्त, 2024 को प्रकाशित समाचार पत्रों में उनके द्वारा की गई गलत रिपोर्टिंग के बारे में जानकारी दी गई है।” बता दें कि हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2024 को टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस और दिव्य भास्कर के संपादकों को नोटिस जारी कर उनसे सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकारों से संबंधित मामले में कोर्ट की कार्यवाही का “झूठा और अधूरी जानकारी” देने के लिए सफाई माँगी थी।
चीफ जस्टिस ने कहा, “यह कोई मज़ाक नहीं है। आप कोर्ट की प्रतिष्ठा के साथ खेल रहे हैं, आप कोर्ट की कार्यवाही के साथ खेल रहे हैं। आप ऐसा नहीं कर सकते। समाचार पत्रों में कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग जिस तरह से की जा रही है, उस पर हमें कड़ी आपत्ति है।”
वकील द्वारा न्यायालय से ताजा माफीनामा प्रकाशित करने के लिए एक और अवसर देने के अनुरोध पर, मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि ताजा माफीनामा समाचार के साथ बड़े आकार में, मोटे अक्षरों में होना चाहिए तथा उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि माफीनामा संपादकों द्वारा पेश किया जा रहा है। इसके बाद कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अगली बार माफीनामा मुख्य पन्ने पर और बड़ी जगह पर प्रकाशित होनी चाहिए। यही नहीं, इस माफीनामे के अलावा पन्ने पर कुछ और नहीं होना चाहिए।
दिव्य भास्कर की ओर से पेश हुए वकील ने सफाई दी थी कि रिपोर्टर बार और बेंच के बीच के संवाद को गलत समझ लिया होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्टर कोई आम आदमी नहीं है। अगर उन्हें इतनी भी समझ नहीं है, तो उन्हें कोर्ट की रिपोर्टिंग करने से रोका जाए, यानी उनकी रिपोर्टिंग पर बैन लगाई जानी। इस दौरान कोर्ट ने पूछा कि कोर्ट का समय जितना लगा है, उसकी भरपाई कौन करेगा, इसके बाद वकील ने कोर्ट से माफी माँगी और कोर्ट के निर्देशों को पूरा करने पर सहमति जताई। इस मामले में सीनियर वकील देवांग नानवती इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से पेश हुए, तो वकील एसपी मजूमदार इंडियन एक्सप्रेस की ओर से और गरिमा मल्होत्रा टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से पेश हुए। वहीं, दिव्य भास्कर की ओर से वकील मौलिक जी नानावटी पेश हुए।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से ऑनर किलिंग का मामला सामने आया है। यहाँ एक पिता ने अपनी बेटी को कुल्हाड़ी से काट डाला है। हत्या की वजह आरोपित की बेटी का एक युवक से अफेयर बताया जा रहा है। नईम ने अपनी 18 वर्षीया बेटी के हाथ और पैर शरीर के कई अंग गँड़ासे (धारधार हथियार) से काट कर अलग कर दिए थे। घटना सोमवार (2 सितंबर 2024) की है। आरोपित का नाम नईम है जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नईम को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बहराइच जिले के थाना क्षेत्र मोतीपुर की है। यहाँ के गाँव निबिया में नईम अपने परिवार के साथ रहता है। उसकी बड़ी बेटी खुशबू 18 साल की है। खुशबू का गाँव के ही एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के रिश्ते के बारे में उनके घर वालों को जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया। खुशबू पर उसके अब्बा ने तमाम पाबंदियाँ कायम कर दीं। इन पाबंदियों के बावजूद कुछ दिनों पहले खुशबू अपने प्रेमी के साथ घर छोड़ कर कहीं चली गई थी।
तब नईम ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पुलिस ने पीड़िता को बरामद करते हुए आरोपित पर नियमानुसार कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद नईम अपनी बेटी पर सख्त नजर रखने लगा। उसने अपनी बेटी को उसके प्रेमी से दूर रहने की हिदायत दी। हालाँकि इसके बावजूद मृतका अपने प्रेमी से चोरी-छिपे बात करती रही। सोमवार (2 सितंबर) को खुशबू का प्रेमी फिर से अपनी प्रेमिका से मिलने आया। नईम को देख कर वह भाग गया। तब आग बबूला नईम ने सारा गुस्सा अपनी बेटी पर उतार दिया।
आरोप है कि नईम ने गँड़ासा लिया और अपनी बेटी को घर के बाहर बुलाया। बेटी के घर से बाहर आते ही नईम ने उसकी गर्दन पर तब तक वार किए जब तक खुशबू के प्राण पखेरू नहीं उड़ गए। नईम का गुस्सा यहीं नहीं थमा। उसने एक पत्थर पर रख कर बारी-बारी अपनी बेटी के तमाम अंग काट कर अलग किए। नईम ने अपनी बेटी के हाथ, पैर, सिर आदि काट कर अलग कर दिए। कत्ल के बाद नईम के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखी। वह अपनी बेटी की लाश के पास ही बैठा रहा।
घटना को संज्ञान में लेते हुए थाना मोतीपुर पुलिस द्वारा सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है व अभियुक्त को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा अन्य विधिक कार्यवाही प्रचलित हैं।
इस बीच मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने फ़ौरन मौके पर पहुँच कर नईम को गिरफ्तार कर लिया। मृतका की अम्मी जबरून्निशा ने अपने शौहर नईम के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस के मुताबिक नईम की बेटी अपने प्रेमी के पास पहले भी 2 बार घर से भाग चुकी थी। इन दोनों मौकों पर केस दर्ज कर के पुलिस आरोपित को पकड़ा था। दोनों मामलों की चार्जशीट भी अदालत में दाखिल की जा चुकी है। फिलहाल इस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में RG कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर का बलात्कार करके उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गई। यह मामला पूरे देश में उठा। इस मामले में एक आरोपित संजय राय को पकड़ा गया। संजय राय कोलकाता में पुलिस की बाइक लेकर घूमता था। उसके कई पुलिस कर्मियों के साथ अच्छे संबंध थे। संजय राज्य कोलकाता पुलिस में सिविक वालंटियर का काम करता है। उसके बारे में और भी जानकारियाँ सामने आई।
इस हत्या और रेप को लेकर छात्रों में गुस्सा भरा हुआ था। छात्रों के प्रदर्शन में भी एक पुलिस के सिविक वालंटियर ने बाइक घुसा दी। शराब के नशे में उसने बैरिकेड तोड़ते हुए प्रदर्शनकारियों के बीच बाइक दौड़ा दी और एक प्रदर्शनकारी छात्र को घायल कर दिया। इस सिविक वालंटियर को भी पकड़ लिया गया।
इससे पहले एक सिविक वालंटियर को एक जज से ₹40,000 चुराने के आरोप में पकड़ा गया। इससे पहले भी सिविक वालंटियरों के अपराध करने की कई घटनाएँ सामने आती रही हैं। बीते कुछ दिनों में इनकी भर्ती को लेकर प्रश्न भी उठे हैं।
क्या होता है सिविक वालंटियर?
जैसा कि नाम से जाहिर है, सिविक वालंटियर ऐसे लोग होते हैं जिन्हें पुलिस-प्रशासन की सहायता के लिए अस्थायी तौर पर भर्ती किया जाता है। बंगाल सहित देश के कई राज्यों में सिविक वालंटियरों की सहायता छोटी-मोटी ड्यूटी के लिए ली जाती है। अधिकांश मामलों में यह स्थानीय युवा होते हैं, इन्हें प्रशासन भर्ती करके इनसे छोटे-मोटे काम लेता है। इसमें ट्रैफिक का संचालन से लेकर त्योहारों में भीड़ का प्रबन्धन जैसे काम शामिल होते हैं। यह स्थानीय पुलिस के निर्देशन में काम करते हैं। इन्हें कई मौकों पर पुलिस-प्रशासन कुछ सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाता है।
पश्चिम बंगाल के सिविक वालंटियर से सम्बन्धित वेबसाइट बताती है कि इनकी ड्यूटी किसी त्यौहार के समय के, ट्रैफिक प्रबन्धन करने में और थानों में सहायता देने के लिए लगाई जा सकती है। इसके अलावा इन्हें अवैध पार्किंग रोकने में भी लगाया जा सकता है। सिविक वालंटियर की भर्ती एक अस्थायी प्रक्रिया है, इसके पीछे का उद्देश्य है कि जब तक पुलिस की संख्या में कमी है, तब तक उनके छोटे-मोटे काम यह वालंटियर करें।
कैसे भर्ती होते हैं, क्या फायदे?
सिविक वालंटियर की भर्ती के लिए स्थानीय युवाओं को तरजीह दी जाती है। पश्चिम बंगाल में सिविक वालंटियर बनने के लिए 8वीं पास की योग्यता होना जरूरी है। वह उसी थाने के निवासी होने चाहिए जहाँ उनकी तैनाती होनी है। इसके अलावा उनका मेडिकल तौर पर फ़िट होना चाहिए और साथ ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। इनका एक सामान्य सा टेस्ट और इंटरव्यू भी लिया जाता है। पश्चिम बंगाल में सिविक वालंटियर बनाए जाने वाले लोगों को 10 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है।
पश्चिम बंगाल में सिविक वालंटियर ₹310 अपनी ड्यूटी का पाते हैं। यह उन्हें काम के दिनों के हिसाब से दिए जाते हैं। इसके अलावा उन्हें ₹6000 का प्रतिमाह मानदेय भी मिलता है। सिविक वालंटियरों को पश्चिम बंगाल में कुछ अधिकार भी दिए गए हैं। इसके अलावा उनसे यदि अपनी ड्यूटी के दौरान कोई गलती होती है तो कार्रवाई का कोई विशेष प्रावधान उनके खिलाफ नहीं होता।
पश्चिम बंगाल में क्या स्थिति?
पश्चिम बंगाल में TMC सरकार आने के बाद से लगातार सिविक वालंटियर की भर्ती में इजाफा हुआ है। पश्चिम बंगाल में सबसे पहले सिविक वालंटियर की भर्ती वर्ष 2008 में हुई थी। तब राज्य वामपंथी सरकार थी। 2011 में जब TMC सरकार आई तो उसने सिविक वालंटियर भर्ती तेज कर दी। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 1.24 लाख से अधिक सिविक वालंटियर काम कर रहे हैं। इनकी संख्या पुलिस से लगभग दोगुनी है। यह समय के साथ बढ़ती ही गई है। पश्चिम बंगाल सरकार लगातार इन सिविक वालंटियर की भर्ती को लेकर सवालों में घिरती रही है।
क्यों उठते हैं सवाल?
जहाँ एक ओर सिविक वालंटियर की भर्ती का उद्देश्य कानून-व्यवस्था में सहायता बताया जाता है, वहीं इस पर लगातार सवाल उठे हैं। सिविक वालंटियर भर्ती प्रक्रिया से लेकर इनके आचरण तक को लेकर लगातार आलोचना की जाती रही है।
ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगता है कि इस संगठन में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को भरा जा रहा है और यह सरकारी खर्चे पर अपनी पार्टी चलाने का प्रयास है। इनकी भर्ती प्रक्रिया में भी पार्टी पदाधिकारियों का बड़े स्तर पर हस्तक्षेप होने का भी आरोप लगाया जाता है।
सिविक वालंटियरों के रवैये और इनके कौशल पर भी सवाल उठते रहे हैं। कभी कभार यह कानून भी हाथ में लेते हैं। कई सिविक वालंटियर अपराधों में लिप्त पाए गए हैं। कुछ आम जनता पर इस पद का रूतबा भी जमाते हैं। आलोचकों का कहना है कि पुलिस की कमी को भर्ती किए गए यह लोग पार्टी का काम करते हैं।
सिविक वालंटियरों को लेकर न्यायालय भी प्रश्न उठाता रहा है। मार्च, 2023 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक आदेश दिया था, इसके अनुसार सिविक वालंटियर को कानून व्यवस्था के कामों में नहीं किया जा सकता है। इसके बाद बंगाल सरकार ने सिविक वालंटियर की तैनाती के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी।
कॉन्ग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी के विदेश मामलों की विभाग की संयोजक रागिनी नायक पर पार्टी की ही प्रवक्ता रहीं राधिका खेड़ा ने ‘आज तक’ न्यूज़ चैनल पर बहस के दौरान कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं। राधिका खेड़ा ने कहा, “मैं रागिनी नायक बन भी नहीं सकती। मुझे पार्टी से निलंबित नहीं किया गया था। ये 10,000 रुपए NSUI के बच्चों से लेती थी राहुल गाँधी के साथ तस्वीरें क्लिक करवाने के लिए।” बता दें कि ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा है।
बिलकुल दीदी, मैं आपके जैसी नहीं बन सकती।
गाली-गलौज की मैडम की चाइनीज़ कॉपी बनना मेरे बस की बात नहीं।
ना तो मैं शहज़ादे के साथ फोटो खिंचवाने के लिए NSUI के बच्चों से पैसे उगाही कर सकती हूँ।
ना ही NSUI चुनावों में भ्रष्टाचार का खेल खेल सकती हूँ।
राधिका खेड़ा अब भाजपा की प्रवक्ता हैं। उन्होंने इस बहस का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि रागिनी नायक के पति अशोक बसोया छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस सरकार में AAG थे, हिमाचल सरकार में में पिछली कॉन्ग्रेस सरकार में भी बड़े पद पर थे, और अब हिमाचल सरकार की कॉन्ग्रेस सरकार के वकील हैं। उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद ख़ुद के परिवार को कॉन्ग्रेस सरकार में लगातार लाभ दिलवाने वाली, स्वयं पार्टी के अंदर ही भ्रष्टाचार करने वाली ये कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अब उनके परिवार पर झूठे हमले कर रही है—जिनका राजनीति या छत्तीसगढ़ से कोई लेना-देना नहीं है।
राधिका खेड़ा ने आगे लिखा, “बता दूँ, मेरा भाई कभी भी दिल्ली के बाहर पढ़ा ही नहीं! राहुल गाँधी जी, अपनी प्रवक्ता को सिखाइए कि संविधान को पढ़े, जिसे राहुल गाँधी हर जगह लहराते हैं वही संविधान हर भारतीय को ये हक़ देता है कि कोई भी भारतीय कहीं भी पढ़ सकता है। रागिनी नायक, स्कूल तुम्हारे बच्चे भी जाएँगे, लेकिन भाजपा तब भी तुम्हारे बच्चों की पढ़ाई पर सवाल नहीं खड़ा करेगी, वो कही भी जाकरपढ़ें, उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ!”
रागिनी नायक के पति अशोक बसोया छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार में AAG थे, पिछली कांग्रेस हिमाचल सरकार में भी बड़े पद पर थे, और अब कांग्रेस हिमाचल सरकार के वकील हैं।
लेकिन ख़ुद के परिवार को कांग्रेस सरकार में लगातार लाभ दिलवाने वाली, स्वयं पार्टी के अंदर ही भ्रष्टाचार करने वाली ये… pic.twitter.com/QJ7ozi3fY1
राधिका खेड़ा ने कहा कि उन्होंने महिला विरोधी सच्चाई को उजागर किया, तो न्याय की जगह ‘डरो मत’ वाले राहुल गाँधी और जयराम रमेश ने ‘डर कर’ उन पर ‘गाली वाली मैडम’ की चाइनीज़ कॉपी को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यही राहुल गाँधी का ‘महिला न्याय’ है। राधिका खेड़ा ने आरोप लगाया कि जब उनके साथ कॉन्ग्रेसियों ने वीभत्स घटना को अंजाम दिया तब उन्होंने उस कमरे से भाग कर अपनी जान बचाई थी और उन्हें न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया गया – आज रागिनी नायक इस पर तंज कस रही हैं।