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‘RSS आतंकवादी संगठन, 26/11 हिंदुओं ने किया’: प्रयागराज के जिस मदरसे में चल रहा था नकली नोट का कारखाना, वहाँ मौलवी देते थे नफरती तालीम

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बुधवार (28 अगस्त 2024) को पुलिस ने एक मदरसे में छापा मारा था। यहाँ लगभग सवा करोड़ रुपए के नकली नोट और इसे छापने की मशीन बरामद हुई थी, तब पुलिस ने मदरसे के मौलवी सहित 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। अब छानबीन के बाद दावा किया जा रहा है कि इस मदरसे में बच्चों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को एक आतंकवादी संगठन के तौर पर पढ़ाया जा रहा था। इस बाबत कुछ कट्टरपंथी साहित्य भी बरामद हुए हैं जिसकी जाँच करवाई जा रही है। इनमें से एक किताब रिटायर्ड IPS अधिकारी एस एम मुशर्रफ द्वारा लिखी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस मदरसे में नकली नोट छापने का खुलासा हुआ था उसका नाम जामिया हबीबिया मस्जिद-ए-आज़म है। अब इस मदरसे की तलाशी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के खिलाफ नफरत का प्रचार करने वाली कई पुस्तकें बरामद हुईं हैं। किताबों के साथ कुछ भड़काऊ तस्वीरें भी मिली हैं। ये तमाम चरमपंथी साहित्य, गिरफ्तार हो चुके मदरसे के मौलवी तफसीरुल आफ़ीरीन के कमरे से निकले हैं। इन्हीं किताबों से यहाँ पढ़ने वाले बच्चों को नफरत की तालीम दी जा रही थी।

बताया जा रहा है कि मौलवी तफसीरुल बच्चों का ब्रेनवॉश करता था। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को देश का सबसे बड़ा आतंकी समूह बताया करता था। बरामद किताबों में एक ‘RSS देश का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन’ भी है। यह किताब महाराष्ट्र कैडर के पूर्व IPS अधिकारी एस एम मुशर्रफ ने लिखी है। मौलवी द्वारा मदरसे से कई स्पीड पोस्ट भी किए गए हैं जिसकी पर्चियाँ मौलवी के कमरे से मिली हैं। इन पर्चियों के साथ क्या, कहाँ और क्यों भेजा गया इसकी भी जाँच कराई जा रही है।

मदरसे से बरामद कई किताबें उर्दू में हैं जिनके हिंदी अनुवाद किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक किताब में पाकिस्तानी अख़बार डॉन की तारीफ की गई है। 26/11 के आतंकी हमले को अजमल कसाब के बजाय हिन्दूवादी संगठनों पर भी थोपने का प्रयास एक किताब में किया गया है। मदरसे में बच्चों को बताया जाता था कि मालेगाँव, मोडासा और समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट RSS से जुड़े लोगों ने किए थे। बच्चों को पट्टी पढ़ाते हुए मौलवी RSS के साथ अभिनव भारत को भी कट्टरवादी ब्राह्मण संगठन और दंगे कराने वाला समूह बताया करता था।

हालाँकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मीडिया से बात करते हुए पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच पूरी होने के बाद आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। इस मदरसे में लगभग 70 छात्र दीनी तालीम लेते हैं। ये छात्र उत्तर प्रदेश के अलावा ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से हैं। इनके यहाँ ठहरने आदि के लिए हॉस्टल का भी इंतजाम है। जाँच में सामने आया है कि 84 साल पुराना यह मदरसे बगैर मान्यता के सोसाइटी रजिस्ट्रेशन पर चल रहा था।

भोजपुरी से भी बुरा हाल मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का: जिस महिला आर्टिस्ट ने कई भाषाओं की सिनेमा में किया काम उसने बताया ‘गंदा अनुभव’, एक्टर बाबूराज पर भी रेप केस

यौन शोषण के सामने आ रहे मामलों के कारण मलयालम फिल्म इंडस्ट्री इस समय खूब बदनाम है। आए दिन कोई न कोई पीड़ित इस मामले में खुलासा करते हुए केस दर्ज कराता है और एक नए नाम को सुन लोग अचंभित हो जाते हैं। पिछले दिनों मुकेश,सिद्दीकी, जयसूर्या समेत कई ऐसे नाम सामने आए थे। अब इसी क्रम में एक और नई शिकायत दर्ज हुई जो कि एक्टर बाबूराज के खिलाफ है। वहीं एक मेकअप आर्टिस्ट भी सामने आई हैं जिन्होंने बताया कि उन्होंने हिंदी, भोजपुरी समेत कई इंडस्ट्री में भी काम किया है लेकिन उनका सबसे बुरा अनुभव मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को लेकर ही रहा।

मनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, उनके खिलाफ मामला एक जूनियर आर्टिस्ट ने दर्ज कराया है। कलाकार का कहना है कि उसका शोषण आदिमाली के रिजॉर्ट में और अलुवा स्थित घर में किया गया था। घटना 2019 की है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत सुनने के बाद एक्टर पर रेप केस दर्ज किया है।

पीड़िता ने बताया कि वो बाबूराज के रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करती थी। उसकी मुलाकात सबसे पहले बाबूराज से रिजॉर्ट में उसके जन्मदिन पर हुई। बाद में 2018 में एक्टर ने उसे कोडासा फिल्म में छोटा सा रोल ऑफर किया।

पीड़िता के अनुसार, “2019 में बाबूराज ने मुझे अपनी नई फिल्म पर चर्चा के लिए अलुवा स्थित अपने घर बुलाया था। उन्होंने मुझे बताया कि निर्देशक, निर्माता और एक्टर भी बातचीत के लिए आएँगे। लेकिन जब मैं वहाँ पहुँची तो वहाँ केवल बाबूराज और उनके पुरुष कर्मचारी थे। मैंने पूछा कि बाकी लोग कहा हैं तो इस पर उन्होंने मुझे ग्राउंड फ्लोर पर इंतजार करने को कहा। बाद में वह मुझे अपने कमरे में ले गए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए मेरे साथ बलात्कार किया। उन्होंने मुझे अगले दिन ही बाहर जाने दिया। वह हमारी आखिरी मुलाकात थी। उन्होंने मुझे एक बार ब्लैक कॉफी के लिए पूछा तो मैंने उन्हें साफ मना कर दिया था।”

बता दें कि मलयालम फिल्म उद्योग में हेमा कमेटी रिपोर्ट के सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। तमाम अभिनेता, फिल्म निर्देशक और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के विरुद्ध केस दर्ज हो रहे हैं। पीड़िताओं का कहना है कि उन्होंने शुरुआत में इस बारे में कुछ नहीं बताया था क्योंकि ये नाम बहुत ऊँचे नाम थे और उन्हें डर था कि कहीं लोग उन्हें ही गलत न समझने लगें कि सब कुछ पब्लिसिटी के लिए।

एक रिपोर्ट के अनुसार, मात्र एक हफ्ते में 20 से ज्यादा केस एसआईटी के पास दर्ज हुए हैं। पीड़िताएँ सिर्फ शारीरिक शोषण ही नहीं बल्कि मानसिक शोषण की भी शिकायत कर रही हैं। एक मेकअप आर्टिस्ट ने हाल में मनोरमा की रिपोर्ट पर में अपनी कहानी को साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे मलयालम इंडस्ट्री में नाराजगी दिखाने के लिए कलाकारों पर काम थोपे जाते है। इस तरह का माहौल बना दिया जाता था कि कोई काम न कर पाए।

उन्होंने ये भी बताया कि सिर्फ एक्ट्रेस ही ऐसी चीजों की शिकार नहीं होतीं बल्कि हेयर स्टाइलिस्ट आदि को भी ये सब झेलना पड़ता है। केरल में मेकअप आर्टिस्ट एसोसिएशन की मेंबरशिप पाने वाली पहली महिला मेकअप आर्टिस्ट मिट्टा एंटनी ने बताया, “मैंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, भोजपुरी और मलयालम मिलाकर 40 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। लेकिन उनका सबसे गंदा अनुभव मलयालम इंडस्ट्री को लेकर ही रहा है।”

इधर ममता सरकार पेश कर रही एंटी रेप बिल, उधर TMC की महिला MLA न्याय माँग रहे डॉक्टरों को बता रही ‘कसाई’: जानिए कौन है लवली मोइत्रा

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला डॉक्टर की रेप और हत्या के मामले में पूरे देश में उबाल है। डॉक्टर सुरक्षा की माँग कर रहे हैं और अपराधी को जल्द से जल्द सजा देने की माँग कर रहे हैं। इस बीच, ममता बनर्जी की सरकार ने विधानसभा में एंटी रेप बिल पेश किया है, तो दूसरी तरफ उन्हीं के पार्टी के नेताओं की बदजुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजे मामले में टीएमसी विधायक और अभिनेत्री लवली मैत्रा डॉक्टरों को कसाई कहती नजर आ रही हैं। वो मंच से डॉक्टरों को कसाई कह रही हैं, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में टीएमसी विधायक अरुंधति मैत्रा उर्फ लवली मैत्रा कहती दिख रही हैं, “वे (डॉक्टर) प्रदर्शन के नाम पर क्या कर रहे हैं? गरीब से गरीब लोग जो ग्रामीण इलाकों से आते हैं, वे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। वे अभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा देखभाल की कमी से जूझ रहे हैं। उन्हें कोई इलाज नहीं मिल रहा है। क्या इनके पास इंसानियत है? क्या ये लोग मनुष्य हैं? डॉक्टर अब कसाई में बदल रहे हैं।” लवली मैत्रा के बयान के बाद उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। सोनापुर पुलिस स्टेशन में लवली के खिलाफ शिकायत दी गई है।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाल ने लवली मैत्रा का वीडियो शेयर कर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने एक्स पर लिखा, “टीएमसी विधायक लवली मैत्रा ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की तुलना कसाईयों से की है। वह कोलकाता पुलिस में एक आईपीएस की पत्नी भी हैं, जो डॉक्टरों को नोटिस और समन जारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ इतनी नफरत क्यों? सिर्फ इसलिए कि वे ममता सरकार और उसके पुलिस बल को जवाबदेह ठहरा रहे हैं? उदयन गुहा अरूप चक्रवर्ती कुणाल घोष अब लवली मैत्रा! क्या टीएमसी उन्हें बर्खास्त करेगी या उनका बचाव करेगी, जैसे उसने डॉ. संदीप घोष का बचाव किया था?”

पश्चिम बंगाल बीजेपी से जुड़ी केया घोष ने लवली मैत्रा का बयान शेयर किया और लिखा, “टीएमसी विधायक लवली मैत्रा ने अब डॉक्टरों की तुलना कसाईयों से की है! ईमानदारी से उम्मीद है कि अगर भगवान न करे लवली मैत्रा बीमार पड़ें, तो वह अपने इलाज के लिए इनमें से किसी भी “कसाई” के पास नहीं जाएँगी।”

उन्होंने एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें लवली मैत्रा कहती दिख रही हैं कि उन्हें पता है कि ममता के विरोधियों से कैसे निपटना है। केया ने एक्स पर लिखा, “लवली मैत्रा पार्ट-2 विधायक मैडम ने डॉक्टरों को कसाई कहना ही बंद नहीं किया। उनका दावा है कि उन्हें ममता बनर्जी पर उठने वाली उंगलियों को “नीचे” करना आता है।”

लवली मैत्रा कौन हैं?

लवली मैत्रा का असली नाम अरुंधुति मैत्रा (33 साल) है। वो बंगाली टीवी एक्ट्रेस हैं। लवली मैत्रा ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव में सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। मूलरूप से कोलकाता की रहने वाली लवली मैत्रा सेंट पॉल कॉलेज से अंग्रेजी में ऑनर्स की पढ़ाई की है। महज 30 साल की उम्र में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और पहली ही बार में विधायक बनने में सफल रहीं। लवली मैत्रा की शादी साल 2016 में सौम्य रॉय से हुई। सौम्य राय विधानसभा चुनाव के दौरान हावड़ा (ग्रामीण) के एसपी थे, लेकिन लवली के चुनाव लड़ने की वजह से चुनाव आयोग ने उन्हें ड्यूटी से हटा दिया था। हालाँकि ममता बनर्जी ने सत्ता में लौटती ही सौम्य रॉय को फिर से महत्वपूर्व जगह तैनात कर दिया।

टीएमसी नेता ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को धमकाया

बता दें कि टीएमसी नेता लगातार आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में केस में सक्रिय हैं। इस मामले में प्रिंसिपल संदीप घोष समेत 4 को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, एक टीएमसी नेता आतिश सरकार ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को धमकाया था, जिसके बाद टीएमसी ने आतिश को 1 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। आतिश ने कहा था, “तुम लोग जो दीदी को गाली दे रहे हो, उनका चरित्र हनन करने में लगे हो। अगर हम तुम्हारी माँ और बहनों के अश्लील पोस्टर बनाकर उन्हें दीवारों पर लगा दें तो तुम उसे हटा नहीं पाओगे। मैं तुम्हारी माँ-बहनों की एडिटिड फोटो तुम्हारे दरवाजों पर टाँगूगा तब तुम घर से बाहर तक नहीं निकल पाओगे… संभल जाओ। टीएमसी के लोग सड़कों पर आ गए हैं। अगर हमने हर इलाके में घूमना शुरू कर दिया क्या तुम अपने घरों से निकल पाओगे।”

बता दें कि 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में नाइट ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर से रेप के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में जब अन्य डॉक्टर इंसाफ माँगने प्रदर्शन पर उतरे तो उन्हें उपद्रवियों द्वारा डराया-धमकाया गया था। साथ ही अस्पताल में भी तोड़फोड़ हुई थी। इसके बाद टीएमसी पर काफी सवाल उठे और ममता सरकार द्वारा एक्शन न लिए जाने की निंदा की जाने लगी। इस बीच आतिश सरकार द्वारा ये धमकी आई लेकिन इस पर पार्टी ने एक्शन लेते हुए नेता को पार्टी गतिविधियों से एक साल के लिए दूर कर दिया। हालाँकि पार्टी लवली मैत्रा के मामले में क्या एक्शन लेगी, ये देखने वाली बात है।

सुरेश रैना के फूफा और भाई के 12 हत्यारों को उम्रक़ैद, 2-2 लाख रुपए का जुर्माना: सोते परिवार को सँभलने का भी नहीं दिया था मौका, नाम – शाहरुख़, मोहब्बत, असलम, आमिर…

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना के रिश्तेदारों की हत्या के मामले में पठानकोट की जिला अदालत ने सभी 12 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन सभी पर 2-2 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। सजा पाने वाले मुल्जिमों के नाम शाहरुख़, मोहब्बत, रिहान, असलम, तजवल बीवी, काज़म, चाहत, जबराना, आमिर, सेहजान, बाबू मियाँ और मैचिंग हैं। मंगलवार (3 सितंबर, 2024) को इन सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की सुनवाई पठानकोट के ADJ जितेंद्र पाल खुरमी की कोर्ट में हुई। लगभग 4 साल तक चले इस मुकदमे में बचाव पक्ष ने दर्जन भर आरोपितों के पक्ष में तमाम दलीलें दीं। वहीं अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में वो तमाम सबूत पेश किए जो घटना को आरोपितों द्वारा ही किया जाना साबित किया। लम्बी बहस के बाद अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी सभी 1 दर्जन आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 2-2 लाख रुपए जुर्माना भी ठोंका है।

सज़ा पाए आरोपितों में औरैया UP का निवासी 28 साल का मैचिंग, राजस्थान के छूंजू का निवासी 46 वर्षीय शाहरुख़ खान, 43 वर्षीय जबरना, 26 साल का मोहब्बत और 29 वर्षीय रिहान, पंजाब के अमृतसर का 44 वर्षीय असलम, UP के सहारनपुर की 53 वर्षीया तजवल बीवी और 60 वर्षीय काज़म, 55 वर्षीय आमिर, 18 वर्षीय सेहजान, कानपुर UP का 38 वर्षीय चाहत और बरेली जिले का 70 वर्षीय बाबू मियाँ शामिल हैं। इन सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। सज़ा पाए सभी आरोपितों पर डकैती और हत्या के आरोप साबित हुए हैं।

बताते चलें कि 19 अगस्त, 2020 की रात पठानकोट जिले के गाँव थरियाल में दर्जन भर हमलावरों ने एक घर को निशाना बनाया था। यह घर ठेकेदार अशोक का था जो क्रिकेटर सुरेश रैना के फूफा थे। हमलावरों ने घर में सो रहे सदस्यों पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस दौरान पुरुषों के साथ महिलाओं को भी निशाना बनाया गया था। घटना के समय पीड़ित परिवार के अधिकतर सदस्य छत पर सो रहे थे। इनकी चीख-पुकार सुन कर जब आसपास के लोग जमा होने लगे तो हमलावर भाग निकले थे।

डकैती के मकसद से किए गए इस हमले में सुरेश रैना के 58 वर्षीय फूफा अशोक कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनके 32 वर्षीय बेटे कौशल कुमार ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस हमले में सुरेश रैना की 55 वर्षीय बुआ आशा देवी और उनका 24 साल का बेटा अपिन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों में आशा देवी की 80 वर्षीया सास सत्या देवी भी शामिल थीं। तब पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास व अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू की थी और बारी-बारी सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था।

‘हम करेंगे अपने कंटेंट की समीक्षा, भविष्य में राष्ट्रीय भावनाओं का रखेंगे ध्यान’: मोदी सरकार की फटकार के बाद बोला Netflix, वेब सीरीज में ‘भोला’ और ‘शंकर’ को दिखाया है आतंकी

अनुभव सिन्हा की वेब सीरीज ‘IC814: द कंधार हाईजैक’ Netflix पर रिलीज होने के बाद चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसमें आतंकवादियों के असली नाम की जगह उनके छद्म हिन्दू नामों पर अधिक फोकस रखा गया है। साथ ही उन आतंकियों का ‘मानवीय पक्ष’ दिखा कर उनका महिमामंडन किया गया है। आतंकी जहाज के कैप्टन को मदद का वादा करते हैं, यात्रियों से क्षमा माँगते हैं, भारत सरकार का उस समय रवैया ठीक नहीं था, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह आतंकियों को छोड़ने के खिलाफ थे – यही सब दिखाया गया है।

अब ‘नेटफ्लिक्स इंडिया’ की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल ने भारत सरकार को आश्वासन दिया है कि भविष्य में कंपनी अपने कंटेंट को लेकर संवेदनशील रहेगी। भारत सरकार के अधिकारियों और ‘नेटफ्लिक्स इंडिया’ के बीच लगभग एक घंटे बैठक चली, जिसमें इस वेब सीरीज पर चर्चा हुई। ये वेब सीरीज हरकत-उल-मुजाहिदीन के आतंकियों द्वारा 1999 में भारतीय विमान को हाईजैक कर तालिबान शासित कंधार में ले जाए जाने और यात्रियों के बदले 3 आतंकियों को भारत की जेल से छुड़ाए जाने की घटना पर आधारित है।

‘Netflix India’ ने सरकार को आश्वासन दिया है कि वो अपने कंटेंट की समीक्षा करेगा ताकि आने वाली वेब सीरीज-फिल्मों में राष्ट्रीय भावनाओं का ध्यान रखा जा सके और बच्चों की ज़रूरतों के हिसाब से भी संवेदनशील रहे। कंपनी ने कहा कि अपनी सभी नई रिलीज को लेकर इस आश्वासन का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय संवेदनाओं के साथ खेलने का किसी को भी अधिकार नहीं है, भारत की संस्कृति और सभ्यता का हमेशा सम्मान रहेगा।

भारत सरकार ने चेताया है कि किसी भी चीज को गलत तरीके से दिखाने से पहले सोचना चाहिए। साथ ही बताया कि सरकार इसे काफी गंभीरता से ले रही है। बता दें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने नेटफ्लिक्स को समन किया था। बता दें कि आतंकियों के कोडनेम ‘भोला’ और ‘शंकर’ को वेब सीरीज में अधिक हाइलाइट किया गया है। अनुभव सिन्हा इससे पहले ‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’, ‘भीड़’ और ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों का भी निर्माण कर चुके हैं।

बांग्लादेश में बीच सड़क पर सोहेल ने रातोंरात खड़ी कर दी घर, 25 हिन्दू परिवारों का रास्ता ब्लॉक: पीड़ित बोले- अब अस्पताल भी नहीं जा सकते

बांग्लादेश में हिंदुओं पर जारी इस्लामी हमलों के बीच, 25 हिन्दू परिवार एक जगह बंध कर रह गए हैं। यहाँ एक स्थानीय गुंडे ने इन 25 हिन्दू परिवारों का आने-जाने का रास्ता रोक लिया है। उसने रास्ते के बीचों-बीच अपना घर खड़ा कर लिया है।

यह घटना बांग्लादेश के गोपालगंज जिले के कोटालीपारा उपजिला के बंदाल गांव में हुई है। जमुना टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ के हिंदू इलाके में कच्ची सड़क 50 साल से ज्यादा समय से मौजूद है। लेकिन अब यहाँ के लोगों का जीवन एक ही जगह ठहर गया है। इस मामले पर बात करते हुए ज्योत्सना करमाकर नाम की एक महिला ने अपना दर्द बताया। महिला ने बताया, “हम अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने सड़क पर घर बना लिया है।”

एक बुजुर्ग महिला ने बताया, “हमारे पास यहाँ पर ज़मीन है। सोहेल हाजरा ने रातों-रात इस जमीन को जोत दिया और उस पर घर बना दिया। हम्मरे बीच पहले से कभी कोई विवाद नहीं रहा है। हमें कुछ भी नहीं पता कि उसने कब यहाँ घर बना दिया। सड़क यहाँ पर अंग्रेजों के जमाने से बनी है। बचपन में तक हमने इसे देखा था।”

हिन्दू परिवारों की जमीन पर कब्जा करने वाले गुंडे का नाम सोहेल हाजरा है। उसने उस रास्ते पर अपना घर खड़ा कर लिया है। जब उसके इस कदम का हिन्दू परिवारों ने विरोध किया तो सोहेल उन्हें धमकाने लगा और उन्हें मारने पीटने की धमकी दी। सोहेल की धमकी के बाद बंदल गाँव में हिंदू समुदाय अब डर के साये में जी रहा है।

एक और व्यक्ति ने बताया, ”स्थिति इतनी खराब है कि हम किसी को भी आपात स्थिति में अस्पताल तक नहीं ले जा सकते। हमें अपने लोगों को कंधे पर लाद कर अस्पताल ले जाना पड़ेगा। सड़क की यह हालत है। यहाँ सोहेल और मेरी दोनों की जमीन है।”

सोहेल हाजरा से पीड़ित लोगों ने कहा, “हमारे पास आवाजही के लिए और कोई सड़क नहीं है, अगर सड़क पर से अतिक्रमण नहीं हटाया गय तो हमें घरों में नजरबंद रहना होगा। हम यही अन्दर ही रहने पर मजबूर होंगे।” पीड़ितों ने बताया कि कि सोहेल हाजरा और उसके आदमियों ने उन्हें धारदार हथियारों के साथ धमकाया भी।

एक महिला ने इस बात पर दुख जताया कि कैसे सोहेल ने उनके इलाके को बर्बाद कर दिया है। महिलाने बताया कि वह हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच लगातार तनाव पैदा करवा रहा है। वहीं दूसरी ओर आरोपित सोहेल हाजरा का दावा है कि जिस जमीन पर उसने रोड बनाई है, वह उसकी खुदकी है।

सोहेल का रोड रोकने का मामला स्थानीय प्रशासन के पास भी पहुँच गया है। शिकायत के बाद, अधिकारी मौके पर पहुँचे हैं। उन्होंने अभी दोनों पक्षों की बातचीत करवाके समझौता करवाने का प्रयास किया है। यहाँ पर लोगों के आने-जाने के के लिए एक संकरा रास्ता बना दिया है। यहाँ अस्थायी घर अब भी बना है।

नहीं डाला संपत्ति का ब्यौरा तो योगी सरकार ने रोकी 2.44 लाख कर्मचारियों की सैलरी, दलील सुनने के बाद दिया और समय: अधिकारी बना रहे त्योहारों-परीक्षाओं का बहाना

उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति का ब्यौरा न देने वाले 2.44 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया था। हालाँकि बाद में योगी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को थोड़ी और राहत दे दी है और सैलरी भी जारी कर दी है। इस बार जो समय दिया गया है, वो आखिरी है। बढ़ाए गए समय में भी अगर कोई कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं देता है, तो उसका वेतन रोक दिया जाएगा।

फिलहाल इस महीने के लिए ऐसे सभी कर्मचारियों को राहत मिल गई है, जिन्होंने किसी न किसी वजह के चलते अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया था। इस मामले में पुलिस विभाग के मुखिया के दफ्तर से सरकार से अपील की गई थी कि पुलिस वाले तमाम परीक्षाओं, त्यौहारों के चलते व्यस्त रहे, ऐसे में इस विभाग को और समय दिया जाए, जिसके सरकार ने मान लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा हर हाल में 31 अगस्त 2024 तक देने के लिए कहा था। इसमें चल और अचल संपत्तियों की पूरी जानकारी दी थी। यह ब्यौरा HR पोर्टल (मानव संपदा पोर्टल) पर दिया जाना था, लेकिन राज्य के कुल 71 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों ने ही अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया था, बाकियों ने नहीं दिया था। जिसके बाद योगी सरकार ने बाकी के 2.44 लाख से ज्यादा कर्मचारियों का वेतन रोक दिया था।

बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग के साथ पुलिस वाले अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने में फिसड्डी साबित हुए थे। जिसके बाद मुख्य सचिव के आदेश के चलते सबके वेतन रोके गए थे। वहीं, डीजीपी मुख्यालय ने नियुक्ति विभाग को पत्र भेजकर पलिसकर्मियों के लिए संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए कुछ अतिरिक्त समय दिए जाने का अनुरोध किया था। पत्र में कहा गया था कि त्योहारों और पुलिस भर्ती परीक्षा के कारण तमाम पुलिस कर्मी समय से अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दे पाए। हालाँकि अब सरकार ने अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग समय दिया है।

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार के पास 8 लाख 46 हजार 640 कर्मचारी हैं, जिसमें से 6 लाख 2 हजार 75 कर्मचारी अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा दे चुके हैं। संपत्ति का ब्यौरा देने में टेक्सटाइल, सैनिक कल्याण, ऊर्जा, खेल, कृषि और महिला कल्याण विभाग के कर्मचारी सबसे आगे रहे।

‘कपिल देव पर थूकेंगे, धोनी को माफ नहीं करूँगा’: योगराज सिंह की जहरीली वीडियो पर भड़के लोग, युवराज सिंह का वीडियो शेयर कर मानसिक स्थिति पर उठा रहे सवाल

भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। हाल में उन्होंने भारतीय टीम के पूर्व कप्तानों कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी के बारे में भी अपशब्द कहे हैं। उनकी वीडियो वायरल होने के बाद उनकी जगह-जगह आलोचना हो रही है वहीं लोग जवाब में युवराज सिंह की ही एक पुरानी वीडियो साझा करके योगराज सिंह की मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

वायरल वीडियो में योगराज सिंह को पहले कपिल देव को उलटा-सीधा कहते सुना जा सकता है। वो कहते हैं, “हमारे समय के सबसे महान कप्तान कपिल देव… मैंने उनसे कहा, मैं तुम्हें ऐसी स्थिति में छोड़ दूँगा कि दुनिया तुम पर थूकेगी…आज, युवराज सिंह के पास 13 ट्रॉफी हैं, और तुम्हारे पास केवल एक, विश्व कप है…चर्चा समाप्त हो गई है।”

वहीं कपिल देव के अलावा योगराज सिंह ने धोनी के लिए भी जहर उगला। योगराज कहते दिखे, “मैं धोनी को कभी माफ नहीं कर सकता उसके कारण ही मेरे बेटे युवराज सिंह का करियर जल्दी खत्म हुआ है। युवी 4 से 5 साल और खेल सकता था लेकिन वो धोनी था जिसने ऐसा नहीं होने दिया… युवराज सिंह को तो भारत रत्न मिलना चाहिए। कैसर से लड़कर उसने भारत को विजेता बनाया।”

योगराज सिंह वीडियो में ये भी कहते दिखे कि उनके घरवालों ने उन्हें कह दिया था- ‘तेरे जैसा कु&^, ह$म*&^ आदमी नहीं पैदा हो सकता।’ उन्होंने एक प्रदीप मैग्जीन का जिक्र करते हुए कहा कि वो उस आदमी को ढूँढ रहे हैं क्योंकि उसने अपनी मैग्जीन में लिखा था कि योगराज सिंह सठिया गया है। आगे वो खुद बताते हैं कि उन्होंने अपनी बीवी को घर से निकलने को कहा था और कहा था कि वो युवराज सिंह को भी अपने साथ ले जाएँ। वो दूसरी शादी करके दूसरा बच्चा पैदा करेंगे, फिर उसको लीजेंड बनाएँगे और सबको दिखाएँगे कि आखिर योगराज सिंह चीज क्या है।

अब योगराज की इस वीडियो के जवाब में लोग युवराज सिंह के उस इंटरव्यू की क्लिप्स को लगा रहे हैं जहाँ उन्होंने कहा था- “मुझे लगता है कि मेरे पिता को एक मानसिक समस्या है और वह इसे स्वीकार नहीं करना चाहते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि कुछ ऐसा है जिस पर उन्हें ध्यान देने की आवश्यकता है, वह इसे स्वीकार नहीं करते हैं, जैसे मैं स्वीकार करता हूँ कि मुझे थैरेपी की आवश्यकता है, लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं करते हैं।”

युवराज की वीडियो क्लिप बीयर बाइसेप्स के पॉडकॉस्ट की है। यहाँ युवराज सिंह ने अपने जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की थी। इसी क्रम में पिता से संबंधों वाले सवाल पर उन्होंने अपनी बात रखी थी।

हिमाचल प्रदेश में 53 साल में जो न हुआ, वह कॉन्ग्रेस ने कर दिखाया: 1 सितंबर को न आई सैलरी-न मिला पेंशन, जानिए कितना भीषण है प्रदेश का आर्थिक संकट

कॉन्ग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है। आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि 2 लाख कर्मचारी सितम्बर महीने में अपनी सैलरी का इंतजार कर रहे हैं। राज्य के पेंशनर भी अपनी पेंशन से वंचित हैं। हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार इस संकट से उबरते नहीं दिखाई दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के 2 लाख कर्मचारियों और 1.5 लाख पेंशनरों को अगस्त महीने की सैलरी सितम्बर माह के 3 दिन होने के बाद भी नहीं मिली है। सामान्यतः हर महीने की 1 तारीख को आने वाली सैलरी और पेंशन सितम्बर माह में नहीं आई। 1 तारीख को रविवार होने के कारण इसे बैंकिंग व्यवस्था में देरी मानी गई।

कर्मचारियों और पेंशनरों को आश्चर्य तब हुआ जब उन्हें 2 तारीख को पैसा भी नहीं मिला, इस दिन सोमवार था और बैंक खुले थे। बताया गया है कि सैलरी और पेंशन में देरी सरकार की आर्थिक स्थिति के कारण हुई है। 3 सितम्बर, 2024 को भी 3.5 लाख लोगों को पैसा मिलने की कोई सूचना नहीं है।

हिमाचल प्रदेश में सैलरी-पेंशन ना मिल पाने की स्थिति राज्य के गठन के बाद पहली बार आई है। 1971 में बने हिमाचल प्रदेश में लगभग पाँच दशक में कभी ऐसी स्थिति पहले नहीं आई है जब कर्मचारियों को अपनी तनख्वाह और पेंशन के लिए इंतजार करना पड़ा हो।

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति बीते कुछ समय में लगातार बिगड़ रही है। राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार आने के बाद से कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आने के बाद से लगभग ₹20,000 करोड़ का कर्ज बढ़ा चुकी हैं। हालाँकि, इससे भी कोई स्थिति नहीं सुधर रही। हाल ही में CM सुक्खू ने 2 महीने की सैलरी ना लेने का ऐलान भी किया था।

हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है, इसके आय के साधन सीमित हैं। इसका खर्चा अपनी आय और केंद्र से मिलने वाली सहायता से पूरा होता है। बाकी की कमी कर्ज लेकर पूरी की जाती है। इन सब के बीच राज्य का कर्ज इतना बढ़ गया है कि उसको चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं। हिमाचल की आर्थिक स्थिति को आँकड़ों से समझा जाना चाहिए।

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया की है स्थिति

हिमाचल की बदहाल आर्थिक स्थिति इसके 2024-25 के बजट से समझी जा सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹58,444 करोड़ का बजट सुक्खू सरकार ने पेश किया था। इस बजट में भी सरकार का राजकोषीय घाटा (सरकार की आय और खर्चे के बीच का अंतर, जिसे कर्ज लेकर पूरा किया जाता है) ₹10,784 करोड़ है।

इस बजट का बड़ा हिस्सा तो केवल पुराने कर्जा चुकाने और राज्य के कर्मचारियों की पेंशन और तनख्वाह देने में ही चला जाएगा। इस बजट में से ₹5479 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज चुकाने, ₹6270 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज का ब्याज देने में करेगी। यानी पुराने कर्जों के ही चक्कर बजट का लगभग 20% हिस्सा चला जाएगा।

इसके अलावा सुक्खू सरकार तनख्वाह और पेंशन पर ₹27,208 करोड़ खर्च करेगी। इस हिसाब से देखा जाए तो ₹38,957 का खर्च तो केवल कर्ज, ब्याज, तनख्वाह और पेंशन पर ही हो आएगा। यह कुल बजट का लगभग 66% है। अगर नए कर्ज को हटा दें तो यह हिमाचल के कुल बजट का 80% तक पहुँच जाता है। यानी राज्य को बाकी खर्चे करने की स्वतंत्रता ही नहीं है।

हिमाचल प्रदेश 2024-25 में लगभग ₹1200 करोड़ सब्सिडी पर भी खर्च करने वाला है। यह धनराशि सामान्य तौर पर छोटी लग सकती है, लेकिन आर्थिक संकट में फंसे हिमाचल के लिए यह भी भारी पड़ रही है। इस सब्सिडी में सबसे बड़ा खर्चा बिजली सब्सिडी का है।

क्यों बन गए आर्थिक संकट के हालात

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट की इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। इसका एक बड़ा कारण सुक्खू सरकार का आय के नए स्रोतों पर ध्यान ना देना भी हो सकता है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश ने अपने चुनावी वादे के अनुसार पुरानी पेंशन स्कीम लागू कर दी थी। इस कारण से उसको मिलने वाली मदद में भी कमी आई है।

स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि हिमाचल सरकार NPS में डाला गया कर्मचारियों का पैसा भी वापस माँग रही है। इसके अलावा वह बिगड़े आर्थिक हालातों के बीच राज्य की महिलाओं को भी ₹1500 दे रही है। यह भी उसके बजट पर असर डाल रहा है। हिमाचल सरकार 125 यूनिट बिजली भी मुफ्त देती है, यह भी राज्य पर एक बोझ बन रहा है।

आगे भी नहीं सुधरेगी स्थिति

राज्य सरकार ने हाल ही में बताया है कि वर्ष 2030-31 तक उसका पेंशन पर होने वाला खर्च ₹19,728 करोड़ हो जाएगा। यह वर्तमान में लगभग ₹10,000 करोड़ से भी कम है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल ₹90,000 करोड़ का खर्चा हिमाचल प्रदेश को पेंशन पर ही करना पड़ेगा।

कॉन्ग्रेस के OPS के वादे से राज्य के अन्य विकास कार्यों के बजट में कटौती होने की आशंका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य के बजट में पहले पेंशन का हिस्सा मात्र 13% था जो कि OPS के बाद बढ़कर 17% हो जाएगा। पुरानी पेंशन के कारण होने वाला यह खर्च राज्य सरकार के कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह पर खर्च के लगभग बराबर होगा।

2026-27 में राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को ₹20,639 करोड़ तनख्वाह देगी। 2026-27 में दी जाने वाली पेंशन की धनराशि ₹16,728 करोड़ होगी। राज्य में पेंशन पाने वालों की संख्या भी आने वाले सालों में नौकरी कर रहे कर्मचारियों से ज्यादा हो जाने के कयास हैं।

यह भी बात सामने आई है कि 2030-31 तक राज्य में 2.38 लाख पेंशनर हो जाएँगे। यह संख्या आने वाले समय में राज्य कर्मचारियों से भी अधिक होगी क्योंकि औसतन हर वर्ष 10,000 कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। इसकी तुलना में नए कर्मचारी भर्ती नहीं हो रहे।

हिमाचल प्रदेश को 2026-27 से 2030-31 बीच तनख्वाह और पेंशन पर कुल मिलाकर ₹2.11 लाख करोड़ खर्चने पड़ेंगे। राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि वह इस बोझ को अकेले सहन नहीं कर पाएगी। इसके लिए उसे विशेष मदद की जरूरत होगी।

कॉन्ग्रेस ने 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से पुरानी पेंशन स्कीम का वादा किया था और इसे राजनीतिक हथियार बनाया था। हालाँकि, अब इसके दुष्परिणाम सामने दिखने लगे हैं। आर्थिक बोझ के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।

कर्ज का बढ़ रहा है बोझ

कॉन्ग्रेस सरकार का धुआंधार तरीके से कर्ज लेने का मुद्दा इस बीच जोर पकड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में ₹88,000 करोड़ से भी अधिक का कर्ज है। कॉन्ग्रेस सरकार बीते डेढ़ वर्ष में ही लगभग ₹19,000 करोड़ का कर्ज राज्य पर चढ़ाया है। लोकसभा में दिया गया जवाब बताता है वित्त वर्ष 2024-25 खत्म होते-होते राज्य का कर्ज ₹94000 करोड़ के पार हो जाएगा।

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद माना है कि उनके राज्य को कर्ज चुकाने के लिए ही नया कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य का कर्ज उसकी GDP का 40% से अधिक हो चुका है। उसका राजकोषीय घाटा भी GDP का लगभग 5% है। जबकि नियमों के मुताबिक़, किसी भी राज्य का कर्ज GDP का 20% जबकि राजकोषीय घाटा 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

राज्य की सत्ता में रेवड़ी वादे करके आई कॉन्ग्रेस अब राजनीतिक स्टंट में जुटी है। कॉन्ग्रेस शासित अन्य राज्यों का भी हाल कोई ख़ास अच्छा नहीं है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार भी दलितों के विकास के फंड में से अपनी गारंटियाँ पूरी करने में जुटी हुई हैं। यह राजनीति राज्यों के लिए घातक तो है ही, देश के आर्थिक विकास में भी रोड़े डालने वाली है।

‘तुम्हारी मां-बहनों की गंदी तस्वीरें तुम्हारे ही दरवाजे पर लगाऊँगा’: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों को TMC नेता ने धमकाया, CBI ने संदीप घोष सहित 4 को गिरफ्तार किया

कोलकाता के आर जी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर से हुए रेप और हत्या मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई ने 4 लोगों को हिरासत में लिया हैं। ये एक्शन इस मामले में अब तक बड़ी कार्रवाइयों में से एक है। जानकारी के मुताबिक, इन चार लोगों में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का भी नाम है। इसके अलावा बिप्लव सिंहा (वेंडर), सुमन हजारा (वेंडर) और अफसर अली (संदीप घोष के अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी) भी हिरासत में लिए गए हैं।

अब आगे सीबीआई इस मामले की जाँच करेगी। एक ओर इस मामले में संदीप घोष की संलिप्ता पर लगातार सवाल उठ रहे है तो दूसरी तरफ हीं अस्पताल में हुई अन्य गड़बड़ियों के कारण अस्पताल विवादों में हैं।

वित्तीय अनियमतताओं से जुड़े मामले में तो ईडी ने भी नजर बनाई हुई है। वहीं 4 लोगों पर कार्रवाई की सूचना से पहले इस मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भी एक एक्शन लिया था। उन्होंने अपने उस नेता को पार्टी से एक साल से निलंबित कर दिया था जिसने आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के लिए इंसाफ माँगने वाले प्रदर्शनकारियों को धमकाया था।

नेता का नाम आतिश सरकार है। टीएमसी ने उसे एक साल के लिए पार्टी से निलंबित किया है। नॉर्थ 24 परगना के अशोक नगर से आने वाले आतिश ने प्रदर्शनकारियों को धमकाते हुए कहा था,

“तुम लोग जो दीदी को गाली दे रहे हो, उनका चरित्र हनन करने में लगे हो। अगर हम तुम्हारी माँ और बहनों के अश्लील पोस्टर बनाकर उन्हें दीवारों पर लगा दें तो तुम उसे हटा नहीं पाओगे। मैं तुम्हारी माँ-बहनों की एडिटिड फोटो तुम्हारे दरवाजों पर टाँगूगा तब तुम घर से बाहर तक नहीं निकल पाओगे… संभल जाओ। टीएमसी के लोग सड़कों पर आ गए हैं। अगर हमने हर इलाके में घूमना शुरू कर दिया क्या तुम अपने घरों से निकल पाओगे।”

बता दें कि 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में नाइट ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर से रेप के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में जब अन्य डॉक्टर इंसाफ माँगने प्रदर्शन पर उतरे तो उन्हें उपद्रवियों द्वारा डराया-धमकाया गया था। साथ ही अस्पताल में भी तोड़फोड़ हुई थी। इसके बाद टीएमसी पर काफी सवाल उठे और ममता सरकार द्वारा एक्शन न लिए जाने की निंदा की जाने लगी। इस बीच आतिश सरकार द्वारा ये धमकी आई लेकिन इस पर पार्टी ने एक्शन लेते हुए नेता को पार्टी गतिविधियों से एक साल के लिए दूर कर दिया।