कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के रेप-मर्डर केस में मुख्य आरोपित संजय रॉय को लेकर इंडिया टुडे की रिपोर्ट में एक और नया दावा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि घटना वाले दिन आरोपित संजय रॉय ने जो बाइक इस्तेमाल की थी उसका रजिस्ट्रेशन उसके नाम पर नहीं बल्कि कोलकाता के पुलिस कमिशनर के नाम पर हो रखा था।
BREAKING: Motorcycle used by Kolkata rape-murder accused Sanjoy Roy was registered in the name of Kolkata Police Commissioner, reports @Sreya_Chattrjee quoting CBI sources https://t.co/WTtG3uhj90
मोटर साइकल से जुड़ी इतनी बड़ी जानकारी वायरल होने के बाद इस संबंध में कोलकाता पुलिस ने सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि कोलकाता पुलिस को मिलने वाली हर गाड़ी कोलकाता कमिशनर के नाम ही रजिस्टर होती है। देख सकते हैं कि कोलकाता पुलिस के ट्वीट में लिखा है- “आर जी कर अस्पताल मामले के मुख्य आरोपित संजय रॉय द्वारा इस्तेमाल की गई बाइक कोलकाता कमिश्नर के नाम पर रजिस्टर थी, जिसे कोलकाता पुलिस ने सीज करके सीबीआई को दे दिया था। कुछ लोग सोशल मीडिया पर इस मसले पर कन्फ्युजन बढ़ा रहे हैं। सबको बता दें कि हर सरकारी गाड़ी यूनिट में असाइन होने से पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर के नाम पर रजिस्टर होती है।”
गौरतलब है डॉक्टर रेप-मर्डर केस में इससे पहले इंडिया टुडे की ही रिपोर्ट में संजय रॉय को लेकर जानकारी सामने आई थी कि वो 8-9 अगस्त की रात में अस्पताल के सेमिनार हॉल में डॉक्टर के साथ दुष्कर्म करके एक पुलिसकर्मी के घर जाकर सोया था। पुलिस वाले का नाम अनूप दत्ता बताया गया था जो राज्य पुलिस में एएसआई के पद पर हैं। इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आई थी कि घटना से पहले जो संजय रॉय रेड लाइट एरिया में अपने दोस्त को लेकर घूमा था, लड़की को छेड़ा था वो भी इसी बाइक पर था। यह बाइक 2014 में पंजीकृत हुई थी। मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने इसे जब्त कर लिया था।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक ने नाम बदल कर हिन्दू लड़की को अपने जाल में फँसा कर रेप किया। आरोपित का नाम ज़ाकिर है जिसने पीड़िता का अश्लील वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल किया। बाद में ज़ाकिर पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का भी दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर पीड़िता और उसके परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी गई। इस करतूत में ज़ाकिर की बहन, भाई और अम्मी भी शामिल बताई गईं हैं। शनिवार (24 जून, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।
यह घटना शामली जिले के थाना क्षेत्र झिंझाना की है। यहाँ शनिवार को पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उसने बताया कि वो दिल्ली के शाहदरा इलाके में पढ़ाई करती है। कभी-कभार दिल्ली से घर आने के लिए पीड़िता ट्रेन पकड़ती थी। कुछ महीने पहले इसी ट्रेन में पीड़िता की मुलाकात बागपत के रहने वाले ज़ाकिर अंसारी से हुई। शुरुआत में ज़ाकिर ने खुद को हिन्दू और अपना नाम जैकी बताया। मीठी-मीठी बातें करने के साथ ज़ाकिर ने पीड़िता से सोशल मीडिया पर भी सम्पर्क साध लिया और कुछ ही दिनों में उसे अपने विश्वास में ले लिया।
एक दिन ज़ाकिर पढ़ाई के सिलसिले में बातचीत के बहाने पीड़िता के दिल्ली स्थित कमरे पर आ गया। वो अपने साथ खाने-पीने के सामान और कोल्डड्रिंक लाया था। आरोप है कि कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ था जिसे पीकर पीड़िता बेसुध हो गई। इसी मौके का फायदा उठा कर ज़ाकिर अंसारी ने पीड़िता से रेप किया और इसकी तमाम वीडियो और फोटो बना डाली। कुछ दिनों बाद ज़ाकिर ने फिर पीड़िता को मिलने के लिए बुलाया पर उसने मना कर दिया। तब आरोपित ने अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने का डर दिखा कर पीड़िता को ब्लैकमेल किया।
मजबूरन पीड़िता ने फिर से ज़ाकिर को अपने कमरे पर आने दिया। तब ज़ाकिर ने एक बार फिर पीड़िता से रेप किया। इसी दिन पीड़िता ने जैकी बने ज़ाकिर के पहचान पत्र देखो तो उसे पहली बार पता चला कि वो मुस्लिम है। रेप के बाद ज़ाकिर पीड़िता पर खुद से निकाह करने का दबाव बनाने लगा। डर के मारे पीड़िता उसकी हाँ में हाँ मिलती रही। एक-दो दिन बाद ज़ाकिर फिर से पीड़िता के कमरे पर आ कर शारीरिक संबंध बनाने की जिद करने लगा। पीड़िता ने मजबूर हो कर उसका नंबर ब्लॉक कर दिया।
कुछ दिनों तक बात न हो पाने से भड़का ज़ाकिर पीड़िता के कोचिंग सेंटर तक पहुँच गया। यहाँ उसने पीड़िता पर फिर से इस्लाम कबूल कर के खुद से निकाह करने का दबाव बनाया। अपनी बात न मानने पर पीड़िता की तमाम अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने और आत्महत्या पर मजबूर कर देने की धमकी दी गई। ज़ाकिर ने आगे कहा, “उत्तर प्रदेश पुलिस मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती।” धमकी दे कर ज़ाकिर वहाँ से चला गया।
आरोप है कि ज़ाकिर के जाने के बाद उसका भाई शाकिर और बहनें निखत व सोनी पीड़िता को कॉल व मैसेज करने लगीं। ये सभी पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगीं। इनकार करने पर ज़ाकिर का भाई और बहनें भी पीड़िता को जान से मार डालने की धमकी देने लगीं। धमकियों से डर कर पीड़िता पढ़ाई छोड़ कर शामली के झिंझाना स्थित अपने गाँव वापस आ गई। इसके बावजूद ज़ाकिर अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और किसी परिचित के साथ पीड़िता के गाँव तक पहुँच गया।
गाँव पहुँच कर ज़ाकिर ने पीड़िता के एक परिजन का फोन बहाने से माँगा। उसने पीड़िता को फोन कर के कहा, “आज तेरे घर के बाहर से तेरे ही भाई के नंबर से कॉल कर रहा हूँ अगली बार इन्हें गोली मार कर तुझे उठा ले जाऊँगा।” आखिरकार पीड़िता इन धमकियों से डर गई और परिजनों को सारी बात बता दी। पीड़िता के परिजनों ने ज़ाकिर को कॉल कर के समझाने की कोशिश की तो वो उलटे लड़की के ही घर वालों से पैसों की डिमांड करने लगा। आरोप है कि बागपत जिले की एक महिला नेत्री भी पीड़िता और उनके परिजनों को आरोपितों की तरफ से धमकी दे रही है।
आखिरकार पीड़िता ने परिजनों की सहमति से पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में ज़ाकिर अंसारी, उसकी बहनों और भाई के साथ धमकी दे रही नेत्री पर भी कार्रवाई की माँग की गई है। पुलिस ने इस शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (2)m, 351 (3), 308 (1) और 123 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफ़ेस (ULI) लाने जा रहा है। इसका पायलट प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहा है। जल्द ही इसे जनता के उपयोग के लिए लाया जाएगा। ULI के जरिए देश में कर्ज लेना आसान हो सकेगा और लोग अपने फोन पर ही यह सुविधा पा सकेंगे। ULI को जल्द ही लाने का ऐलान RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया है।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार (26 अगस्त, 2024) को बेंगलुरु में एक कार्यक्रम में ऐलान किया कि रिजर्व बैंक जल्द ही UPI की तरह ही ULI लाएगा। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष बिना किसी झंझट के कर्ज देने वाले इंटरफ़ेस को लेकर पायलट प्रोजेक्ट चालू किया गया था, अब इसका नाम मैं ULI रख रहा हूँ।
#WATCH | During the inaugural address at Global DPI and Emerging Tech Conference, RBI Governor Shaktikanta Das says, "India’s experience provides an effective digitisation strategy for other central banks…DPI has enabled India to achieve financial inclusion in a decade, which… pic.twitter.com/mHIcarX1Fg
RBI गवर्नर ने कहा, “पायलट प्रोजेक्ट से मिले अनुभव के आधार पर, ULI को जल्द ही पूरे देश में लॉन्च किया जाएगा। जिस तरह UPI ने पेमेंट इकोसिस्टम को बदला है, उसी तरह हम उम्मीद करते हैं कि ULI भारत में लोन क्षेत्र को बदलने में भी ऐसी ही भूमिका निभाएगा।”
क्या है ULI?
ULI का पूरा नाम यूनिफाइड पेमेंट इंटरफ़ेस है। यह RBI का एक प्रोजेक्ट है। ULI को देश में कर्ज देना आसान करने के लिए लाया जा रहा है। ULI के जरिए सभी बैंकों और बाकी हितधारकों को एक साथ लाकर RBI एक ऐसा सिस्टम तैयार करेगी जहाँ तुरंत कर्ज मिल सकेगा। यह UPI की तर्ज पर ही काम करेगा।
जिस तरह UPI ने देश में भुगतान सिस्टम को बदल दिया है, वैसे ही RBI देश में कर्ज क्षेत्र को ULI के जरिए बदलना चाहता है। ULI आने के बाद कोई भी व्यक्ति आसानी से मात्र कुछ ही समय के भीतर कर्ज ले सकेगा और आसानी से उसका भुगतान भी कर सकेगा। इसके लिए उसे बैंकों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी।
RBI ने अभी ULI को लेकर पूरी कार्ययोजना नहीं बताई है। हालाँकि, माना जा रहा है कि इसे स्मार्टफोन एप के जरिए लॉन्च किया जाएगा। ULI आने के बाद लोगों को क्रेडिट कार्ड या फिर अन्य लोन एप से कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। अभी तक इन लोन एप के विषय में हजारों शिकायतें भी आ चुकी हैं।
कैसे करेगा काम ULI?
RBI का कहना है कि ULI में लोन लोगों के आधार, PAN और उनकी लेनदेन के तरीकों के आधार पर निर्धारित होगा। इसमें हर यूजर का पुराने कर्ज और उनके क्रेडिट स्कोर का डाटा भी यहाँ मौजूद होगा। जब कोई व्यक्ति ULI के जरिए कर्ज की माँग करेगा तो इन्हीं मानकों के आधार पर उसको कर्ज देने का फैसला किया जाएगा। अभी इन्हीं डाटा को एक साथ करके एक प्लेटफार्म तैयार करने का प्रयास चल रहा है। यह डाटा अलग-अलग एजेंसी के पास होने के कारण इन्हें साथ में करने में समस्या आ रही है।
ULI से किन्हें होगा फायदा?
ULI से सबसे बड़ा फायदा छोटे कर्जे लेने वालों को होगा। अपनी रोजी रोटी चलाने के लिए छोटे कर्जे लेने वाले लोग सीधे तौर पर अब बैंकों से कर्ज ले पाएँगे। अभी इनकी कर्ज की राशि छोटे होने के कारण बैंक अभी अधिक ध्यान नहीं दे पाते। इसके अलावा कागजी प्रक्रिया में समय लगने के कारण यह लोग कई बार स्थानीय महाजनों या फिर अनाधिकृत सूदखोरों से पैसा लेते हैं। इसके बदले इन्हें मोटा ब्याज चुकाना पड़ता है। ULI आने के बाद यह कागजों के बोझ से मुक्ति पा सकेंगे और कर्ज भी जल्दी मिल सकेगा।
UPI ने लाई थी क्रांति
ULI को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफ़ेस (UPI) की तर्ज पर ही लाया जा रहा है। UPI वर्तमान में भारत में भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम है। इसे 2016 में RBI लेकर आया था। इसके जरिए कोई भी व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को एक फोन के जरिए पैसे भेज सकता है। UPI में 2016 के बाद से अब तक कई फीचर भी जोड़े जा चुके हैं। वर्तमान में भारत में लगभग 35 करोड़ लोग UPI उपयोग करते हैं। UPI का प्रसार भारत के बाहर भी हो चुका है। ULI को भी इसी तर्ज पर आगे बढाने की तैयारी RBI कर रहा है।
अपने पैगंबर की शान में गुस्ताखी का आरोप लगा कर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों ने एकजुट हो कर प्रदर्शन किया है। रविवार (25 अगस्त, 2024) को हुए इस जमावड़े में राज्य के तमाम जिलों से मुस्लिमों ने आ कर शिरकत की। इस दौरान नारेबाजी की गई और ईशनिंदा के खिलाफ कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार को 3 माह का अल्टीमेटम दिया गया। इस प्रदर्शन में आए लोगों ने महाराष्ट्र के संत रामगिरि महराज को गुस्ताख़ ए रसूल बताते हुए जेल भेजने की माँग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों का जमावड़ा शुरू हुआ। वो सब एकजुट हो कर प्रदर्शन करने लगे। इस प्रदर्शन का आयोजन मुस्लिम सेवा संगठन, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द और इमाम-ए-रिसालात जैसे संगठनों ने किया था। जमावड़े का नाम शान ए रिसालत रखा गया था। नारेबाजी के लिए बाक़ायदा मंच लगाया था था जिस पर शहर क़ाज़ी सहित उत्तराखंड के कई मौलाना व मुफ़्ती मौजूद थे।
इसी सभा में एक मंचासीन मुस्लिम ने कहा, “जो नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले हैं उनका एक ही ठिकाना जहन्नुम है।” इसी व्यक्ति ने रामगिरि महाराज नाम का लेते हुए आगे कहा, “वो महाराष्ट्र में, जहाँ भी है वो चैन से नहीं बैठ सकता, ये फैसला है मेरे अल्लाह का। उसके साथ में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ये देख लो भाई।”
नासिक के रामगिरी महाराज का पैग़म्बरे मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में उत्तराखंड देहरादून में मुस्लिम समुदाय का प्रदर्शन।। pic.twitter.com/IPOPJuQWqf
पूरे प्रदर्शन के दौरान सबसे खास बात ये रही कि तमाम बुनियादी मतभेदों के बाद मंच पर देवबंदी और बरेलवी फिरके के उलेमा एक साथ मौजूद थे। भीड़ ने नारेबाजी करते हुए संत रामगिरि को तत्काल जेल भेजने की माँग उठाई। सम्मेलन के दौरान उलेमाओं ने मोदी सरकार से कहा कि वो ईशनिंदा के खिलाफ 3 महीने के अंदर कानून लाएँ। समय सीमा के अंदर कानून न आने पर पूरे जमावड़े के साथ दिल्ली कुछ करने का एलान भी किया गया। मंचासीन लोगों ने आरोप लगाया कि बार-बार इस्लाम पर टिप्पणी अमन चैन खराब करने की साजिश है।
परेड ग्राउंड पर जमा भीड़ रैली की शक्ल में जिलाधिकारी देहरादून के ऑफिस तक जाना चाहती थी। हालाँकि, पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रैली निकालने से रोक दिया। आखिरकार परेड ग्राउंड में ही जिले के सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। इस पूरे जमावड़े की ड्रोन से निगरानी करवाई गई। कई थानों की फोर्स को एहतियातन तैनात किया गया था। बताते चलें कि महाराष्ट्र के संत रामगिरि की एक टिप्पणी को रसूल की शान में ग़ुस्ताख़ी बता कर देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समुदाय प्रदर्शन कर रहा है। कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई है।
बीते दिनों अजमेर सेक्स स्कैंडल पर आए फैसले और उसपर हुई रिपोर्टिंग से लिबरल बुद्धिजीवी बिलबिलाए हुए हैं। उनकी समस्या ये है कि आखिर अजमेर के मामले को उठाकर ये क्यों बताया जा रहा है कि आरोपित कौन थे, उनका क्या नाम था, उनका संबंध कहाँ से था। यकीन न हो, तो फ्रंटलाइन मैग्जीन पर डले वीडियो में लिबरल गिरोह के बुद्धिजीवी वर्ग- योगेंद्र यादव और सबा नकवी की 23 मिनट से लेकर 27:45 मिनट चर्चा सुनिए। दर्द साफ दिखेगा।
योगेंद्र यादव और सबा नकवी अजमेर सेक्स स्कैंडल की घटना पर चर्चा करते हैं और अफसोस जताते हैं कि मीडिया 30+ साल भी इस घटना पर रिपोर्ट कर रहा है। सबा नकवी बातचीत के दौरान कहती हैं कि उन्हें हैरानी है कि देश में इतने सारे रेप की घटनाएँ हो रही हैं, दलित महिलाओं का लगातार शोषण हो रहा है और मीडिया अजमेर सेक्स स्कैंडल को दिखाने में लगा है। वो बताती हैं कि कैसे आजकल के बड़े पत्रकार भी वर्तमान की खबरें दिखाने की जगह इस मामले की याद दिला रही हैं। सिर्फ ये बताने की कोशिश हो रही हैं कि अपराधी मुस्लिम थे।
इसके बाद योगेंद्र यादव इस घटना की करवरेज करने वाले मीडिया पत्रकारों को कोसते दिखते हैं। वो कहते हैं कि एक दिन दुनिया की किताबों में पढ़ाया जाएगा कि देख लो कैसे एक देश का मीडिया परेशानियों की जड़ बनता है। ऐसे मीडिया को इन समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
सबा फिर दोहराती हैं कि मीडिया खबरों में बार-बार ऐसे दिखाया गया कि मुस्लिम दोषी हैं जबकि उस घटना का आज के समय से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं योगेंद्र यादव इस बात से आपत्ति जताते दिखते है कि आखिर दैनिक मीडिया अखबार किस तरीके से अजमेर रेप केस के आरोपितों का नाम सबको बता रहा है। उन्हें मिली सजा की खबर फ्रंट पेज पर दिखा रहा है। इस पर सबा नकवी तड़का लगाने के लिए कहती हैं जरूर इस खबर के लिए इंस्ट्रक्शन दिए गए होंगे कि अजमेर पर जाओ।
इसके बाद योगेंद्र यादव को बातचीत को न्यूट्रल दिखाने के लिए कहते सुना जा सकता है कि चलो सही बात है कि इस मामले में रिपोर्टिंग हुई कि कोई मामला 30+ साल तक खिंचता गया, लेकिन क्या इसे बैनर बनाकर दिखाना सही था कि उसमें आरोपितों के नाम और फोटो भी लगाए जाएँ वो भी मुख्य पृष्ठ पर और ऐसे समय में जब पूरा देश किसी और मुद्दे पर बात कर रहा है।
सबा नकवी गंभीर अंदाज में कहती हैं कि ये मुद्दा ऐसा है जिसपर चिंता की जानी चाहिए। इसके अलावा सबा नकवी एक्सट्रा प्वाइंट जोड़कर कहती हैं कि अब पत्रकार सिर्फ हिंदू-मुस्लिम करते हैं। उन्हें लगता है खबर में मुस्लिम नाम डालकर वह पाठकों में और रूचि जगा देंगे। दलित महिलाओं के रेप में किसी को कोई रूचि नहीं है।
फिर योगेंद्र यादव कहते हैं देखो बिहार, यूपी में आजकल घटना होती है कोई नहीं बोलता जबकि इन घटनाओं का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए, मगर जब तक ये मुद्दे राजनीतिक नहीं बनते तब तक इनकी चिंता कोई नहीं करता, तो ऐसी स्थिति में मैं चाहता हूँ कि चीजों का राजनीतिकरण किया जाए।
चाहे वो पर्यावरण का मुद्दा हो या किसी और चीज का। सबा नकवी कहती हैं तो लोगों को लटकाने के मामले पर भी? इस पर योगेंद्र यादव कहते हैं कि जब तक राजनीतिकरण नहीं होगा तब तक उस पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। इसलिए घटनाओं का राजनीतिकरण होना जरूरी है ताकि उनपर लोगों का ध्यान जाए। आगे अपने आपको निष्पक्ष दिखाते हुए योगेंद्र यादव कहते हैं कि उनके हिसाब से बंगाल का मुद्दा भी उठाया जाना चाहिए लेकिन फिर ऐसे ही ऐसे मामलों में आवाज बिहार के लिए भी उठनी चाहिए।
अजमेर सेक्स स्कैंडल मामला
बता दें कि जिस सेक्स स्कैंडल में दोषी ठहराए गए लोगों के नाम और चेहरा दिखाने से ऐसे लिबरल बुद्धिजीवियों को समस्या है उस केस में आरोपितों के नाम नफीस चिश्ती, अनवर चिश्ती, इकबाल भाटी, सलीम चिश्ती, सोहेल गनी, जमीर हुसैन, अल्मास महाराज, इशरत अली, परवेज अंसारी, मोइजुल्लाह, जउर चिश्ती, कलर लैब का मालिक महेश डोलानी, लैब डेवलपर पुरुषोत्तम उर्फ़ बबली थे। अब हाल में इन्हीं में से 6 को सजा हो गई है। इनके भी नाम जान लीजिए- फीस चिश्ती, नसीम उर्फ़ टार्जन, सलीम चिश्ती, इकबाल भाटी, सोहेल गनी और सैयद जमीर हुसैन।
अगर मीडिया इस केस की जानकारी देते हुए इनके नाम और इनकी तस्वीरें अपनी हेडलाइन में लिखता है तो लिबरलों को समस्या क्या हो सकती है। क्या उनके लिए इतने बड़े मामले में आया अपडेट खबर नहीं है। क्या उनकी आपत्ति का मतलब ये समझें कि उनके हिसाब से मीडिया को उन अपराधियों के नाम छिपाने चाहिए जो मुस्लिम समुदाय से आते हों ताकि सेकुलरिज्म बरकरार रहे या फिर ये भूल जाया जाए कि कैसे सुनियोजित ढंग से आज से तीन दक पहले हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने का काम हुआ था। उनका रेप करके उनकी न्यूड फोटो वायरल कर दी गई थीं। क्या आज के मामलों की तरह अजमेर का मुद्दा जरूरी नहीं है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की माँग को कोलकाता में छात्रों ने नबन्ना अभियान (नबन्ना मार्च) निकालते हुए नबन्ना बिल्डिंग की तरफ कूच किया है, जिसे रोकने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने दमनकारी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। छात्रों के नबन्ना मार्च को तोड़ने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, वॉटर कनन के इस्तेमाल के साथ ही आँसू गैस के गोले भी छोड़े हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को हावड़ा ब्रिज पार करने से रोकने के लिए पुलिस ने जमकर लाठियाँ भाँजी हैं।
यह मार्च ‘छात्र समाज’ ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के विरोध में आयोजित किया है। ‘छात्र समाज’ कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर उभरा एक संगठन है। ममता सरकार ने इस मार्च को अवैध करार देते हुए कहा है कि उसे शरारती तत्वों द्वारा अशांति फैलाने की खुफिया जानकारी मिली है।
#WATCH | West Bengal: Protestors climb atop Police barricades, clash with Police personnel and break away the barricades at Santragachi in Howrah, as they carry out 'Nabanna Abhiyan' march over RG Kar Medical College and Hospital rape-murder case. pic.twitter.com/5fZKLJCQv6
हावड़ा में बैरिकेड्स पर चढ़े प्रदर्शनकारी, लाठीचार्ज
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेप-मर्डर केस में न्याय की माँग और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की माँग को लेकर ‘नबन्ना अभियान’ मार्च निकालते हुए प्रदर्शनकारी हावड़ा के संतरागाछी में पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ गए। यहाँ वो पुलिसकर्मियों से भिड़ गए और बैरिकेडिंग भी तोड़ दी। इसके साथ ही सचिवालय के पास भी आंदोलनकारियों ने बैरिकैडि़ंग तोड़ दी। पुलिस ने भीड़ पर आँसू गैस के गोले दागे। इसके साथ ही लोगों पर लाठीचार्ज भी किया गया।
लाठीचार्ज, वाटर कैनन से बौछारों की बरसात और आँसू गैस के गोले दागे जाने के बाद भी प्रदर्शनकारी हावड़ा ब्रिज से पीछे हटने को तैयार नहीं है। पुलिस-प्रशासन प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहा है, तो आंदोलनकारी हावड़ा ब्रिज पर ही धरने पर बैठ गए हैं। बहुत सारे प्रदर्शनकारियों के पास तिरंगा झंडा है।
#WATCH | West Bengal: Protests continue at Howrah Bridge, as part of 'Nabanna Abhiyan' march, over RG Kar Medical College and Hospital rape-murder case. pic.twitter.com/6K2zGKlHj5
‘नबन्ना मार्च’ में शामिल प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस उन पर आँसू गैस के गोले दाग रही है। प्रदर्शनकारी जैसे ही आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, पुलिस वाटर कैनन से उन्हें पीछे खदेड़ देती है, इस दौरान बीच-बीच में आँसू गैस के गोले भी दागे जाते हैं।
#WATCH | West Bengal: Security personnel lob tear gas shells in a bid to disperse protestors from Howrah Bridge.
A 'Nabanna Abhiyan' march has been called today over RG Kar Medical College and Hospital rape-murder case. pic.twitter.com/zahuiJGDDM
नबन्ना बिल्डिंग कोलकाता के हावड़ा में स्थित है। नबन्ना बिल्डिंग से पूरा राज्य चलाया जाता है, यानी कि पॉवर सेंटर। ये बिल्डिंग 14 मंजिल की है, जिसमें टॉप फ्लोर पर खुद ममता बनर्जी बैठती हैं। 13वें फ्लोर पर मुख्य सचिव तो पाँचवें फ्लोर पर राज्य के गृह मंत्रालय का दफ्तर है। साल 2013 में ही ममता बनर्जी सरकार ने इस बिल्डिंग में एंट्री ली थी। उससे पहले राइटर्स बिल्डिंग में मुख्यमंत्री का कार्यालय हुआ करता था। इस बिल्डिंग में कॉन्फ्रेंस रूप के साथ ही सुरक्षा के तगड़े इंतजाम हैं।
आंदोलनकारियों की कोशिश इसी नबन्ना बिल्डिंग के घेराव की है। वो ममता बनर्जी को अक्षम बता रहे हैं और ममता से इस्तीफा माँग रहे हैं। इस आंदोलन के पीछे अभी तक पूरी तरह से छात्र ही दिख रहे हैं। इस मार्च की अगुवाई रवीन्द्रभारती विश्वविद्यालय के एमए छात्र प्रबीर दास, कल्याणी विश्वविद्यालय के शुभंकर हलदर और सयान लाहिड़ी जैसे युवा छात्र कर रहे हैं। उन्होंने ‘छात्र समाज’ नाम से अनौपचारिक संगठन के बैनर तले इस मार्च का आह्वान किया है। छात्रों की 3 माँग है.- अभया के लिए न्याय, अपराधी के लिए मौत की सजा और ममता बनर्जी का इस्तीफा।
कोलकाता पुलिस ने ‘नबन्ना मार्च’ को देखते हुए 6000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए हैं। शहर में 19 जगहों पर बैरिकेडिंग की है। यही नहीं, नबन्ना बिल्डिंग के बाहर कोलकाता पुलिस और हावड़ा सिटी पुलिस द्वारा 3 लेयर सिक्योरिटी बनाई गई है।
जस्टिस हेमा कमिटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। इसमें मलयालम सिनेमा में महिलाओं के यौन शोषण की कई घटनाओं का जिक्र है। अब अन्य अभिनेत्रियाँ भी आगे आकर अपनी आपबीती सुना रही हैं। इसी बीच अभिनेत्री मीनू मुनीर ने अपने साथ काम करने वाले कई अभिनेताओं पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वो पहले दुबई में लीगल कंसल्टेंसी में काम करती थीं, वो वो चेन्नई में रहीं और अब केरल में रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें मलयालम सिनेमा में काम करने का मौका मिला।
मीनू मुनीर ने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान जब वो टॉयलेट से बाहर निकलीं तो पीछे से आकर किसी ने उन्हें पकड़ कर गले लगा लिया और जबरन किस भी किया। जब उन्होंने देखा तो अभिनेता जयसूर्या थे। उन्होंने बताया कि जयसूर्या ने उनसे आकर ये भी कहा कि अगर वो उनका सहयोग करेंगी तो उनका फायदा होगा। बकौल मीनू मुनीर, उन्होंने इसे नकार दिया। इसी तरह उन्होंने इडवेला बाबू पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने भी उनमें रुचि दिखाई थी।
बकौल मीनू मुनीर, इडवेला बाबू ने खुद को बैचलर बताते हुए रिलेशनशिप का ऑफर दिया था और कहा था कि हम साथ में बहुत कुछ कर सकते हैं। मीनू मुनीर ने बताया कि वो इंडस्ट्री में नई-नई आई थीं, उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। इसी तरह उन्होंने फिल्म निर्माता मणियनपिल्ला राजू पर भी आरोप लगाया कि एक बार वो शूटिंग लोकेशन पर जाने के दौरान उनकी कार में बैठ गए और धीरे-धीरे वो पूछने लगे कि आपके पति विदेश में रहते हैं तो आप यहाँ कैसे मैनेज करती हैं? अभिनेत्री ने कहा कि इन्हें लगता है कि NRI की पत्नी है तो सेक्स चाहती होगी।
उन्होंने मीनू मुनीर को होटल में अपने साथ रहने का ऑफर भी दिया था। साथ ही उन्होंने एक बार ये भी कहा था कि रात में अपने कमरे का दरवाजा खुला रखना। वो उनके कमरे के पास आए और कमरे का दरवाजा खटखटाया, उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। फिर उन्होंने लैंडलाइन पर फोन किया, उन्होंने वो भी रिसीव नहीं किया। फिर सुबह जब वो शूटिंग लोकेशन पर गईं तो मणियनपिल्ला राजू सबके सामने उन पर चिल्लाने लगे। उन्होंने जब अपनी सहकर्मी गायत्री वर्षा से ये सब बताया तो उन्होंने कहा कि ये हर जगह हो रहा है।
उन्होंने ये भी बताया कि एक समिति का फॉर्म भरने के लिए इडवेला बाबू ने उन्हें अपने घर पर बुलाया और उन्हें पकड़ कर गले मिलने लगे, वो फॉर्म नहीं भर पाईं और उन्हें वापस जाना पड़ा। उन्होंने मलयालम सिनेमा से जुड़े एक एसोसिएशन का सदस्य बनना चाहा तो CPI(M) विधायक M मुकेश बाबू ने उन्हें फोन कर के कहा कि उनकी मर्जी के बिना कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि मुकेश ने भी उनका फायदा उठाना चाहा, मना करने पर उन्हें ‘मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ का सदस्य नहीं बनाया गया।
#WATCH | Kochi, Kerala | Malayalam actor Minu Muneer accuses co- stars of sexual harassment, she says, "..Once as I was coming out from the toilet, Jayasurya hugged me from behind and even kissed me forcefully…After that, Idavela Babu expressed his interest in a sexual… pic.twitter.com/jE9N57hdwX
वहीं एक अन्य जूनियर कलाकार ने अभिनेता-अभिनेत्री बाबूराज पर बलात्कार का आरोप लगाया। हेमा कमिटी की रिपोर्ट 2019 में ही राज्य सरकार को सौंप दी गई थी, लेकिन इसे सार्वजनिक किए जाने में 5 वर्ष लगे। एक महिला ने बताया कि एर्नाकुलम के अलुवा स्थित बाबूराज के घर में उन्हें फिल्म के रोल पर चर्चा के लिए बुलाया गया था, जहाँ उनका यौन शोषण हुआ। उन्होंने बताया कि बाबूराज ने उन्हें कहा था कि स्क्रीनराइटर और डायरेक्टर चर्चा के लिए आने वाले हैं, वो वहाँ गईं तो उन्हें आराम करने के लिए एक कमरा दिखाया गया।
वो कमरा लॉक कर के आराम करने लगीं, इस दौरान बाबूराज ने उन्हें डिनर के लिए बुलाया और जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, वो भीतर घुस गए और उनका बलात्कार किया। बाबूराज मलयालम एक्टर्स के संघ AMMA के जॉइंट सेक्रेटरी हैं। उन्होंने कहा है कि सिद्दीकी की जगह वो न ले पाएँ, इसीलिए ये आरोप लगाया गया है। सिद्दीकी AMMA के जनरल सेक्रेटरी थे, उन्हें भी यौन प्रताड़ना के आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इन आरोपों की जाँच के लिए 7 सदस्यीय SIT का गठन किया है।
केरल के कासरगोड में एक अंतरधार्मिक दंपती को मस्जिद में बुला कर बेइज्जत किया गया और उन पर हमला भी किया। हमले से बचने के लिए दंपती ने एक मंदिर में भाग कर शरण ली। इस मामले में दंपती ने पुलिस से शिकायत भी की है। पीड़ित दंपती ने मीडिया से भी अपनी समस्या बताई है।
जनमटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, कासरगोड के अब्दुल निजामुद्दीन और अंजलि ने आपसी सहमति से विवाह किया है। यह दोनों कासरगोड में ही मंजरवाट में एक आईटी कम्पनी में काम करते हैं। इनको एक सहकर्मी रफीक से विवाद सुलझाने के नाम पर पास की मस्जिद में बुलाया गया था।
जब निजामुद्दीन यहाँ अपनी पत्नी अंजलि को लेकर पहुँचा तो मस्जिद में मौजूद कट्टरपंथी भड़क गए। उनका कहना था कि अंजलि मस्जिद में बिना इस्लाम में धर्मान्तरित हुए और बिना बुर्का पहने आई है, जो स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद दोनों पर यहाँ मौजूद लोगों ने हमला कर दिया।
दंपती पर आरोप लगाया कि वह मस्जिद में अपनी हिन्दू पत्नी और बाकी हिन्दुओं को लेकर घुसा जो इस्लाम की तौहीन है। निजामुद्दीन पर हमले के अलावा हमलावरों ने अंजलि के सर पर वार किया और उसको काफी जलील किया। स्थितियाँ बिगड़ने पर दंपती को यहाँ से भाग कर पास के एक मंदिर में शरण लेनी पड़ी।
हमलावरों ने दंपती की गाड़ी पर हमला किया और उसके शीशे तोड़ दिए। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी बनाया और और इसे ईशनिंदा की सजा के रूप में प्रचारित किया गया। हमले के बाद पीड़ित दंपती ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने मामले 19 लोगों को आरोपित बनाया है और आगे जाँच कर रही है। हालाँकि, अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। पीड़ित दंपती ने अपने साथ हुए अत्याचार की कहानी कई मीडिया चैनल के साथ साझा की है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद के थाना महाराजगंज के कुम्भीया गाँव में 4 वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस ने रेप के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी पहचान 35 साल के सलमान के तौर पर हुई है। सलमान घटना अंजाम देने के बाद फरार हो गया था बाद में पुलिस मुठभेड़ में उसे पकड़ा गया। बच्ची अस्पताल में एडमिट है। उसका इलाज कराया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान बीकापुर क्षेत्र का रहने वाला है। 4 साल पहले उसका निकाह महाराजगंज की रुबीना से हुआ था। अपने गंदे व्यवहार के कारण उसकी अपने घरवालों से नहीं बन पाई, जिसके बाद वो अपनी बीवी के साथ ससुराल ही रहने लगा।
दोनों की एक साल की बेटी भी है। पीड़िता उसी बच्ची को खिलाने सलमान के घर जाती थी। हालाँकि घटना वाले दिन जब रुबीना अपने एक रिश्तेदार को देखने अस्पताल गई हुई थी और उस समय पीड़िता उनके घर के बाहर खेल रही थी।
जान-पहचान का फायदा उठाकर सलमान ने पहले बच्ची को घर बुलाया, फिर उसे कमरे में ले गया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची जब 4-5 घंटे घर नहीं लौटी तो परिवार ने खोजबीन की। ढूँढते-ढूँढते जब घरवाले सलमान के दरवाजे पहुँचे तो वहाँ बच्ची आपत्तिजनक स्थिति में मिली।
बच्ची को देखने के बाद घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचे उसे अस्पताल में एडमिट कराया और गाँव में तनाव बढ़ने से पहले ही वहाँ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया।
सीओ सदर संदीप सिंह ने जानकारी दी कि सूचना मिलने के बाद उन्होंने सलमान को ढूँढने के लिए कई टीमों को लगाया। पड़ताल के दौरान पता चला सलमान तारापुर गाँव में छिपा है। पुलिस जब उसे पकड़ने गई तो सलमान ने भागते हुए पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में तारापुर गाँव के पुलिस ने भी गोली चलाई जो सलमान के पाँव में लगी। इसके बाद आरोपित को गिरफ्तार करके अस्पताल ले जाया गया
उत्तराखंड के हरिद्वार में एक मुस्लिम युवक की तालाब में कूदने के कारण मौत हो गई। युवक एक स्कूटी पर पुलिस के गोवंश स्क्वाड से बच कर भाग रहा था। तालाब में कूदने के कारण होने वाली मौत को मुस्लिम हैंडल्स ने मॉब लिंचिंग बता कर प्रचारित किया। अब उतराखंड पुलिस ने इसका फैक्ट चेक करके सच सामने रखा है।
यह घटना रविवार (26 अगस्त, 2024) की है। बताया गया है कि हरिद्वार पुलिस का गोवंश स्क्वाड रुड़की के अंतर्गत पड़ने वाले माधोपुर गाँव गया हुआ था। यहाँ पुलिस को कुछ लोगों के गोहत्या में शामिल होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने आसपास छानबीन चालू की थी।
इसी दौरान पुलिस को एक युवक स्कूटी से आता दिखा, जिसे उसने रोकने की कोशिश की। युवक पर गोमांस लाने का शक था। युवक पुलिस के रोकने पर भी नहीं रुका और उसने स्कूटी भगा दी। जब उसका पुलिस के गोवंश स्क्वाड ने पीछा किया तो वह एक तालाब में कूद गया। इस तालाब में डूबने से उसकी मौत हो गई।
युवक की तलाश के लिए तालाब में गोताखोर भी उतर गए थे लेकिन उनको कोई सफलता नहीं हासिल हुई। सुबह लड़के का शव तालाब में से बरामद हुआ। पुलिस ने लड़के की पहचान बशीर कुरैशी के तौर पर की है। उसका पोस्टमार्टम भी करवाया गया है, उसकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
माधोपुर के तालाब पर सोलपुर गाड़ा (रुड़की ) जिला हरिद्वार में एक लड़का बशीर क़ुरैशी उर्फ़ मोनू को रात में हिंदू संगठन के लड़कों ने मारकर तालाब में फेंक दिया. पैरों पर बांधने के निशान हैं और सारे मुंह पर चोट के निशान है एक आंख फूटी हुयी है दाँत भी टूटे हुये है हजारों लोग जमा #RTpic.twitter.com/QCp2Gb4LI1
तालाब में डूबने के कारण हुई इस मौत को सोशल मीडिया पर इस्लामी हैंडल्स ने भ्रामक जानकारी के साथ प्रचारित करना चालू कर दिया। मुस्लिम हैंडल्स ने इसे गौरक्षकों द्वारा की गई मॉब लिंचिंग बताया। मुस्लिम हैंडल्स ने यह झूठ फैलाया कि युवक के साथ मारपीट करके उसे तालाब में फेंका गया है।
माधोपुर के तालाब पर सोलपुर गाड़ा (रुड़की ) जिला हरिद्वार में एक लड़का बसीर क़ुरैशी उर्फ़ मोनू को रात में हिंदू संगठन के लड़कों ने मारकर तालाब में फेंक दिया.
पैरों पर बांधने के निशान हैं और सारे मुंह पर चोट के निशान है एक आंख फूटी हुयी है दाँत भी टूटे हुये है हजारों की संख्या में… pic.twitter.com/fzdXyopOrM
हालाँकि हरिद्वार पुलिस ने इस दावे का फैक्ट चेक कर दिया। हरिद्वार पुलिस ने बताया कि युवक गोवंश स्क्वाड से बचने के कारण तालाब में कूदा, इससे उसकी मौत हुई। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में धार्मिक एंगल देकर गलत सूचना फैलाई जा रही है।
हरिद्वार पुलिस ने बताया है कि गलत सूचना फ़ैलाने पर तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हरिद्वार पुलिस ने कहा है कि मामले की जाँच अभी जारी है। पुलिस ने इस मामले में भ्रामक जानकारी फैलाने वालो को चेताया है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।