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जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के 4 नेताओं के साथ ही अफजल गुरु का भाई भी चुनाव मैदान में: मोदी सरकार की नीतियों ने तोड़ा अलगाववादियों का हौसला, भारत की संप्रभुता-अखंडता की खा रहे कसम

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी संगठनों के नेता भी चुनाव मैदान में उतर रहे हैं, जिसने 1987 के बाद से लगातार लोकतांत्रिक कार्यकलापों का बहिष्कार किया है। यही नहीं, इस चुनाव में आतंकवादी अफजल गुरु का भाई एजाज गुरु भी अपनी किस्मत आजमा रहा है। यही नहीं, पूर्व अलगाववादियों ने तहरीक-ए-आवाम नाम की राजनीतिक पार्टी भी बनाई है।

आतंकवाद की नर्सरी से जुड़े लोगों का लोकतंत्र में लौटा विश्वास!

कश्मीर में आतकंवाद और अलगाववाद की जननी और पोषक कही जाने वाले प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के चार पूर्व नेताओं ने चुनावी दंगल में उतरते हुए बतौर निर्दलीय अपना-अपना नामांकन जमा कराया। इसमें पुलवामा विधानसभा सीट से जमात-ए-इस्लामी के पूर्व नेता तलत मजीद, कुलगाम विधानसभा क्षेत्र से जमात-ए-इस्लामी से जुड़े सयार अहमद रेशी, देवसर विधानसभा क्षेत्र से जमात-ए-इस्लामी से जुड़े रहे नजीर अहमद बट ने नामांकन कराया है।

इसके अलावा सरजन अहमद बागे उर्फ सरजन बरकती उर्फ आजादी चाचा ने शोपियाँ के जेनपोरा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय पर्चा भरता है। वो टेरर फंडिंग के मामले में जेल में है। तो संसद हमले में फाँसी की सजा पाने वाले आतंकी अफजल गुरु का भाई एजाज गुरु भी उत्तरी कश्मीर में सोपोर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। हालाँकि इन लोगों ने तहरीक-ए-आवाम नाम की पार्टी बनाई है, लेकिन अभी तक चुनाव आयोग से पार्टी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, ऐसे में सभी निर्दलीय ही मैदान में हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, तलत मजीद कहा कि मौजूदा वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए,जम्मू कश्मीर में जो हालात हैं, उन्हें देखते हुए मेरा मानना है कि हमारा चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का वक्त आ चुका है। कश्मीर मुद्दे पर आज से पहली मेरी क्या राय थी, वह सार्वजनिक है। जमात-ए-इस्लामी और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्यकों ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। बतौर कश्मीरी हमें अतीत में नहीं बल्कि वर्तमान में जीना चाहिए और एक बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।

बता दें कि 1987 तक जमात-ए-इस्लामी ने जम्मू-कश्मीर में हुए लगभग हर विधानसभा चुनाव में भाग लिया है। जम्मू कश्मीर में 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के 22 में से 5, 1977 के विधानसभा चुनाव में 19 में एक प्रत्याशी ने जीत दर्ज की जबकि 1983 के चुनाव में इसने 26 उम्मीदवार मैदान में उतारे और सभी हार गए। इसके बाद 1987 में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले कश्मीर में चुनाव लड़ने वाले जमात के 4 सदस्यों ने जीत हासिल की थी। तब से जमात ए इस्लामी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।

यहाँ ये बात फिर से ध्यान दिलाना जरूरी है कि भारत में वही व्यक्ति राजनीतिक गतिविधियों में भाग ले सकता है, जिसने भारत की एकता और अखंडता की शपथ ली हो। खासकर राजनीतिक पार्टियों से जुड़े मामलों में ऐसा ही है। भारत के 16वें संविधान संसोधन के मुताबिक, वही राजनीतिक दल भारत के लोकतंत्र का हिस्सा बन सकेंगे, जिन्होंने भारत की संप्रभुता और अखंडता के प्रति शपथ लिया हो। भारत के 16वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1963 के तहत, भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में भाषण और अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा, और संघ की आज़ादी पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अलावा, विधायकों, मंत्रियों, न्यायाधीशों, और सीएजी को जो शपथ और घोषणाएं लेनी होती हैं, उनमें भी संप्रभुता और अखंडता की अवधारणाएँ जोड़ी गईं।

प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने उतारे उम्मीदवार

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य राजनीतिक पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। बीजेपी ने 2 तिहाई सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं, तो कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस साथ में चुनाव लड़ रहे हैं। पीडीपी भी अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर रही है। अन्य छोटे-मोटे दल भी अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार रहे हैं। माकपा ने कॉन्ग्रेस-नेकॉं के साथ गठबंधन किया है, तो पैंथर्स पार्टी भी उनके साथ है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को होंगे। नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएँगे। पहले चरण के लिए नामांकन 27 अगस्त, दूसरे चरण के लिए 5 सितंबर और तीसरे चरण के लिए 12 सितंबर से दाखिल किए जाएँगे। इस चुनाव में कश्मीरी प्रवासियों के लिए दिल्ली,  जम्मू और उधमपुर में स्पेशल पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।

जम्मू-कश्मीर में कुल 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनमें से 74 जनरल, 9 अनुसूचित जाति और 7 अनुसूचित जनजाति के लिए हैं। केंद्रशासित प्रदेश में मतदाताओं की संख्या कुल 87.09 लाख हैं जिसमें 44.46 लाख पुरुष और 42.62 लाख महिला मतदाता हैं। जम्मू-कश्मीर में युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख है। पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

जनजातीय महिलाओं का यौन शोषण, शरिया अदालत, बलात्कार-हत्या, डॉक्टरों की पिटाई, BJP नेता पर गोलीबारी… अराजकता की किस हद के बाद लगता है राष्ट्रपति शासन?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की राजधानी स्थित कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की भयानक घटना से वो निराश और भयभीत हैं। उन्होंने छात्रों और डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन का संज्ञान लेते हुए कहा है कि अपराधी कहीं छिप कर बैठे हुए हैं। उन्होंने याद किया है कि कैसे उन्हें राखी बाँधने आई छात्रों ने उनसे आश्वासन माँगा था कि देश में फिर से ‘निर्भया’ (2012 में दिल्ली में गैंगरेप) जैसी घटना फिर नहीं दोहराई जाएगी।

राष्ट्रपति ने उन बच्चों को बताया था कि जहाँ एक तरफ ये राज्य की जिम्मेदारी है कि वो हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे, सबको, खासकर लड़कियों को, आत्मरक्षा के तकनीक और मार्शल आर्ट्स सीखने चाहिए। अपने बयान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि ये वो मानसिकता है जो महिलाओं कमतर आँकती है – कम योग्य, कम ताकतवर, कम प्रतिभावान। अब आप सोचिए, हालात कितने भयावह हैं जब राष्ट्रपति को एक घटना को लेकर इस तरह का बयान जारी करना पड़ा हो।

पूरा मामला कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का है। वहाँ एक महिला डॉक्टर का बलात्कार कर उसे बेरहमी से मार डाला गया। इस घटना में शामिल संजय रॉय नामक एक शराबी शख्स को गिरफ्तार किया गया जो कोलकाता पुलिस का वॉलंटियर था। वो जिस बाइक का इस्तेमाल कर रहा था वो भी पुलिस कमिश्नर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पीड़िता को इतनी बेरहमी से मारा गया था कि उसके आँख-नाक से खून निकल रहे थे, प्राइवेट पार्ट क्षत-विक्षत था और पाँव 90 डिग्री पर मुड़े हुए थे।

परिवार को पहले बताया गया कि ये आत्महत्या है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि FIR दर्ज करने में देरी हुई। पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए, जो समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद भी हैं। पीड़िता के परिवार ने भी कहा था कि हड़बड़ी में अंतिम संस्कार पुलिस-प्रशासन ने कराया। जब डॉक्टर प्रदर्शन करने उतरे तो RG Kar मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल में आधी रात के दौरान गुंडों की भीड़ पहुँची और घटनास्थल को तहस-नहस कर दिया, प्रदर्शनकारियों की पिटाई की गई।

इधर TMC के नेता CBI के पास जाँच जाने के बाद CBI को भला-बुरा कहने लगे। मोदी सरकार को तानाशाह बताने वाली महुआ मोइत्रा जैसी सांसद अपनी पुलिस की गलतियाँ छिपाने लगीं। कोलकाता पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रकरण में न्याय माँगने वालों को चुन-चुन कर नोटिस भेजा। पत्रकार सागरिका घोष जो TMC की राज्यसभा सांसद भी हैं, वो चुप हैं। उनके पति और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई रोज कुछ न कुछ ट्वीट कर के सरकार का बचाव करते हैं।

इधर पश्चिम बंगाल में युवा सड़कों पर उतरे और ‘नबन्ना अभियान’ चलाया, यानी विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने आँसू गैस के गोलों से लेकर पानी की बौछार और लाठीचार्ज तक का सहारा लिया। बांग्लादेश में हिन्दू विरोधी हिंसा को ‘क्रांति’ कहने वालों की जुबान पर लगाम लग गया और वो यहाँ प्रदर्शनकारियों को ही गुंडा बताने लगे। पुलिसिया दमन के खिलाफ अगले दिन भाजपा ने बंद बुलाया तो भाटपारा में भाजपा नेता प्रियांगु पांडेय की गाड़ी को घेर कर उन पर गोलीबारी की गई, बम फेंके गए।

RG Kar मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में इससे पहले भी कई संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं, दबी जुबान से वहाँ सेक्स-ड्रग्स रैकेट चलने की बातें हुईं। हालाँकि, CBI की चार्जशीट से पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। फिर भी, जिस तरह से प्रिंसिपल संदीप घोष का तुरंत ट्रांसफर किया गया, जिस तरह उनके रसूख की बात सामने आई और पता चला कि इससे पहले 2 बार वो अपना ट्रांसफर रुकवा चुके हैं – दाल में बहुत कुछ काला है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक दिन पैदल मार्च कर के न्याय की माँग कर इतिश्री कर ली, जब वो सिर्फ CM ही नहीं बल्कि राज्य की गृह और स्वास्थ्य मंत्री भी हैं।

अब भाजपा के बंद के बाद ममता बनर्जी असम, ओडिशा, बिहार, झारखंड और दिल्ली को जलाने की बातें कह रही हैं। उन्होंने उलटे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ही भला-बुरा कहना शुरू कर दिया और पूछने लगीं कि वो पहलवान आंदोलन पर क्यों चुप थीं। सवाल करने लगीं कि क्या भाजपा के खिलाफ बोलना कठिन है? ये पश्चिम बंगाल ही है जहाँ संदेशखली में शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों ने मिल कर जनजातीय समाज की महिलाओं का यौन शोषण किया था। उसे गिरफ्तार करने गई ED की टीम पर हमला हुआ था।

पश्चिम बंगाल ही था वो जहाँ चोपरा में TMC नेता ताजेमुल को शरिया अदालत लगा कर महिलाओं को बाँध कर उनकी पिटाई करते हुए देखा गया था। ये वही पश्चिम बंगाल है जहाँ इस घटना का बचाव करते हुए सत्ताधारी दल के विधायक हमीदुल रहमान ने राज्य को ‘मुस्लिम राष्ट्र’ करार दिया था। और पीछे जाएँ तो ये वही पश्चिम बंगाल है जहाँ चुनावों के दौरान विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा होती है, उनके घरों को तबाह कर दिया जाता है, उन्हें पलायन को मजबूर होना पड़ता है।

हमने भाजपा के दफ्तरों में परिवार सहित रातें बिताते लोगों के वीडियो देखे हैं। पश्चिम बंगाल में सरकार के विरोध की स्वतंत्रता नहीं है। हमने देखा है कैसे प्रदर्शनकारी चिकित्साकर्मियों को तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं ने धमकाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ उठने वाली हर उँगली तोड़ दी जाएगी। एक अन्य नेता ने कहा कि जब डॉक्टरों को लोग पीटेंगे तो उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। बदहाली से जूझते पश्चिम बंगाल में उद्योग-धंधे भी चौपट हैं, चुनाव दर चुनाव हिंसा होती रहती है तो क्या अब वहाँ राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जाना चाहिए?

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों तक में भी जम कर हिंसा होती है। सवाल ये है कि क्या वहाँ लोकसभा और विधानसभा चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो पाते होंगे? चुनाव बाद अर्धसैनिक बलों के रहते भी हिंसा जारी रहती है, यानी पूरा पुलिस-प्रशासन सत्ताधारी दल की मुट्ठी में है। शिक्षक भर्ती से लेकर राशन तक में घोटाला हुआ है। आखिर अराजकता की वो कौन सी सीमा है जिसे पार करने के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है? अब पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा कर निष्पक्ष चुनाव कराए जाएँ बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों को लगा कर, यही एक उपाय बचा है।

‘राहुल गाँधी का अपना कोई विचार नहीं, सिर्फ कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं’: कंगना रनौत बोलीं- इंदिरा गाँधी से उनकी तुलना सिर्फ मजाक

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने राहुल गाँधी को ‘बिना विचार’ वाला करार दिया और कहा कि उनके पास अपना कोई विचार नहीं है। कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गाँधी सिर्फ कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं, जबकि उन्हें खुद नहीं पता कि उन्हें क्या चाहिए।

इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में कंगना रनौत ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी का अपना कोई रास्ता नहीं है। कंनगा ने कहा, “वह (राहुल गाँधी) एक गड़बड़झाला है। वह अपने भाषणों और अपने आचरण में एक गड़बड़झाला है।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गाँधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए संसद में भगवान शिव की तस्वीर का इस्तेमाल करने से संबंधित विवाद के दौरान, वह केवल यही सोचती थीं कि राहुल गाँधी की “ड्रग जाँच होनी चाहिए।”

कंगना रनौत ने राहुल के लिए Total mess शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि राहुल के पास कोई विजन नहीं है। उनका खुद का कोई रास्ता नहीं है। वह टोटल Mess हैं। वह अपने व्यवहार में भी इसी तरह के हैं और उनके भाषणों में भी इसी तरह की गड़बड़ी देखने को मिलती है।

हिमाचल की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कहा कि हाल ही में उन्होंने किसान आंदोलन को लेकर जो बयान दिया था, उसे लेकर पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में अपने शब्दों के चयन को लेकर अधिक सावधान रहेंगी। कंगना ने कहा कि मुझे अभी बहुत आगे जाना है। मैं आगे पार्टी के हिसाब से ही बात करने की कोशिश करूँगी। उन्होंने कहा, “मैं रहूँ या न रहूँ, भारत रहना चाहिए”

बता दें कि कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी 6 सितंबर 2024 को रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल के बारे में है।

कंगना रनौत से जब राहुल की तुलना इंदिरा गाँधी से करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह एक मजाक है। प्लीज देश के साथ इस तरह के मजाक मत करिए।” कंगना ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तुलना में राहुल का रास्ता बिल्कुल अलग है। ऐसा लगता है कि उनके पास किसी तरह के ठोस विचार नहीं हैं, जिस तरह के किसी नेता के होने चाहिए। वह सिर्फ कुर्सी के पीछे हैं और हर बार अपना रास्ता बदल लेते हैं।

इंदिरा गाँधी के बारे में बात करते हुए रनौत ने कहा कि उनकी विचारधाराएँ और राजनीति उनके पिता जवाहरलाल नेहरू से अलग थी, जिन्हें रनौत ने “लिबरलों का प्रिय” करार दिया। वहीं, रनौत ने इंदिरा गाँधी के बारे में कहा, ‘वो सोशलिस्ट नहीं थीं।” उन्होंने इंदिरा गाँधी को ध्रुवीकरण करने वाली शख्सियत करार दिया। कंगना ने कहा कि “उन्हें सबसे ज्यादा प्यार किया जाता था और (फिर भी) सबसे ज्यादा नफरत भी की जाती थी।”

जिस मुस्तफा को दोस्त समझ कर घर बुलाता था, उसी ने किया 3 साल की बच्ची का बलात्कार: अस्पताल में जूझ रही नाबालिग, मजदूरी करता है परिवार

गुजरात के वलसाड जिले में एक नाबालिग हिन्दू बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। पीड़िता की उम्र 3 साल है। आरोपित का नाम गुलाम मुस्तफा है जो पीड़िता के पापा का दोस्त है। रेप के बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने गुलाम मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया है। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर के आरोपित को फाँसी देने की माँग की है। घटना मंगलवार (27 अगस्त, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना वलसाड जिले के उमरगाम तालुका में आने वाले देवधर इलाके की है। यहाँ एक हिन्दू परिवार मेहनत मजदूरी कर के जीवन यापन करता था। इस परिवार में पति-पत्नी और 3 साल की एक बच्ची है। बच्ची के पिता की दोस्ती गुलाम मुस्तफा नाम के युवक से थी। गुलाम मुस्तफा का आना-जाना अक्सर पीड़िता के घर लगा रहता था। 27 अगस्त (मंगलवार) को आरोपित एक बार फिर से पीड़िता के घर उसके पापा से मिलने के बहाने आया था।

गुलाम मुस्तफा ने बच्ची को अकेला देखा और उसे उठा कर बाथरूम में ले गया। यहाँ वो पीड़िता से रेप करने लगा। इधर जब बच्ची घर पर नहीं दिखी तो उसके परिजनों ने खोजबीन शुरू कर दी। कुछ ही देर में पीड़िता की चीखें सुनाई देने पर उसकी माँ उधर गई। यहाँ बच्ची के साथ रेप की कोशिश करते गुलाम मुस्तफा को देखा गया। पीड़िता की माँ को आता देख कर गुलाम मुस्तफा मौके से भाग निकला। गुलाम मुस्तफा की करतूत से पीड़िता की तबियत काफी खराब हो गई। इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

इधर बच्ची के परिजनों ने गुलाम मुस्तफा के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी। उमरगाम पुलिस ने आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने आरोपित की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश डालनी शुरू की। आखिरकार पुलिस को मुखबिरों से पता चला कि गुलाम मुस्तफा ने फरार होने के लिए ट्रेन पकड़ ली है। पुलिस ने इस सूचना पर आरोपित को मुंबई जाने वाली ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है।

इस बीच गुलाम मुस्तफा की करतूत उजागर होते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हिन्दू संगठन के सदस्यों सहित तमाम अन्य लोगों का थाने के बाहर जमावड़ा शुरू हो गया। सभी एक स्वर में गुलाम मुस्तफा को फाँसी देने की माँग कर रहे थे। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे कर लोगों का गुस्सा शाँत करवाया। पीड़िता की माँ से भी बयान लिए गए हैं। पुलिस इसी आधार पर आगे की जाँच व जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में ला रही है।

अमेरिकी महाद्वीप की तीसरी सबसे ऊँची प्रतिमा हनुमान जी की: ‘Statue Of Union’ को ‘आधा मानव, आधा बंदर’ बता रहा Newsweek, कट्टर ईसाई कह रहे ‘शैतान’

टेक्सास में हनुमान जी की 90 फुट ऊँची प्रतिमा का निर्माण हुआ है। वहाँ के ईसाई रूढ़िवादियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। उधर Newsweek नामक अमेरिकी पत्रिका ने इसकी खबर प्रकाशित करते हुए अपने शीर्षक में हनुमान जी को ‘आधा बंदर, आधा मानव’ लिखा। बता दें कि गुरुवार (15 अगस्त, 2024) को इस प्रतिमा का अनावरण किया गया था। शुगर लैंड के श्री अष्टलक्ष्मी आश्रम में ये कार्य चल रहा था। इसे ‘Statue Of Union’ नाम दिया गया है।

पूरे अमेरिकी महाद्वीप की ये सबसे लंबी मूर्ति है। 151 फुट ऊँची ‘स्टेचू ऑफ लिबर्टी’ इससे ऊँची है। वहीं फ्लोरिडा स्थित हॉलैंडेल बीच पर जो पेगासस एन्ड ड्रैगन स्टेचू है वो 110 फुट की है। Newsweek का दावा है कि कुछ ईसाईयों ने इस प्रतिमा पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘शैतानी’ बताया है। ‘वन गॉड’ नाम से कपड़ों की ब्रांड चलाने वाली मॉर्गन एरियल ने इस मूर्ति का वीडियो शेयर करते हुए इसे ‘गंदगी’ बता दिया। ‘एन्ड टाइम हेडलाइंस’ नामक मीडिया संस्थान ने भी इसे ‘शैतानी’ लिखा।

साथ ही उसने हनुमान जी को ‘मंकी गॉड’ भी बताया। ‘AF पोस्ट’ ने भी इसी तरह हनुमान जी को ‘हिन्दू शैतान’ बता दिया। हालाँकि, ‘X’ पर कम्युनिटी नोट्स में लोगों ने स्पष्ट लिख दिया कि हनुमान जी हिन्दू धर्म में एक देवता हैं, जो बुद्धिमत्ता, शक्ति और साहस के प्रतीक हैं। लोगों ने लिखा कि वो अमर हैं, श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और ईसाई एंजेल्स से इनकी तुलना करना ठीक नहीं होगा लेकिन वो कुछ इसी तरह हैं, ईश्वर के दूत का भी यहाँ सम्मान किया जाता है।

कुछ कट्टर ईसाई मीडिया संस्थान इतने पगला गए कि वो लिखने लगे कि जहाँ-तहाँ ‘शैतानों’ की मूर्तियाँ लगाए जाने से क्षेत्र को ‘असली गॉड’ के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि ये मूर्ति आश्रम की निजी जमीन पर बनी है। दक्षिणी-पश्चिमी हॉस्टन में ये मूर्ति कांस्य से बनी हुई है। कई लोगों ने इसकी आलोचना करने वालों को जवाब दिया है कि हनुमान जी 120 करोड़ हिन्दुओं की श्रद्धा के प्रतीक हैं, जगह-जगह उनके मंदिर हैं। भक्ति भाव और बुद्धिमत्ता के लिए उनका उदाहरण दिया जाता है।

दिल्ली में 9 साल की बच्ची से कब्रिस्तान में काम करने वाले मोहम्मद शरीफ ने किया रेप, ‘तांत्रिक-बाबा’ बता मीडिया ने किया गुमराह: पत्रकारिता का यह कैसा मजहब?

दिल्ली के कंझावला इलाके में एक 9 साल की बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप कब्रिस्तान में काम करने वाले एक पीर पर लगा है जिसका नाम मोहम्मद शरीफ है। पीड़िता को झाड़-फूँक के बहाने आरोपित कब्रिस्तान में ले गया था। यहीं पर उसने पीड़िता को हवस का शिकार बनाया। पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सोमवार (26 अगस्त 2024) की है। टाइम्स नाउ ने आरोपित मोहम्मद शरीफ को अपनी रिपोर्ट में ‘तांत्रिक’ लिखा है।

चित्र- टाइम्स नाउ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिल्ली के कंझावला थानाक्षेत्र का है। यहाँ मंगलवार (27 अगस्त) को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि वो फलों का ठेला लगाते हैं। उनकी 2 बेटियाँ और 1 बेटा है। कुछ दिनों से पीड़िता के पिता किसी बीमारी से परेशान थे। इसी बीमारी को झाड़-फूँक से ठीक करने के बहाने 52 वर्षीय मोहम्मद शरीफ पीड़िता के घर अक्सर आता-जाता था। बताया जा रहा है कि आरोपित की नीयत बच्चियों पर खराब हो चुकी थी।

सोमवार (26 अगस्त 2024) को एक बार फिर से मोहम्मद शरीफ पीड़िता के घर आया। उसने राशन देने का बहाना करके पीड़िता को अपने घर बुलाया। हालाँकि राशन लेने पीड़िता का भाई गया। पहला प्लान फेल होने के बाद आरोपित ने पीड़िता को झाड़-फूँक के बहाने अपने पास बुलाया। यहाँ से वो बच्ची को कब्रिस्तान के पास बनी झाड़ियों में ले गया। झाड़ियों में मोहम्मद शरीफ ने पीड़िता से बलात्कार किया। जब पीड़िता रोने लगी तो उसे मुँह बंद रखने के लिए रुपयों का लालच दिया गया।

आरोप है कि मोहम्मद शरीफ ने पीड़िता को धमकाते हुए यह भी कहा कि अगर उसने कहीं बताया तो उसके अब्बा का कत्ल कर दिया जाएगा। पीड़िता घर आई और डर से चुप रही। मंगलवार (27 अगस्त) को अचानक पीड़िता की तबियत खराब हो गई। उसकी बड़ी बहन को शक हुआ तो उसने पूछताछ की। आखिरकार पीड़िता ने सारी बात बता दी। लड़की के पिता ने थाने में तहरीर दी जिसके आधार पर मोहम्मद शरीफ पर FIR दर्ज हो गई। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुई।

अपने खिलाफ केस दर्ज होने की जानकारी मिलते ही मोहम्मद शरीफ फरार होने की फिराक में लग गया। हालाँकि उससे पहले ही उसे पुलिस ने दबोच लिया। पीड़िता और आरोपित एक ही समुदाय से हैं। बताते चलें कि टाइम्स नाउ ने कब्रिस्तान पर काम करने और झाड़-फूँक करने वाले मोहम्मद शरीफ को अपनी रिपोर्ट में तांत्रिक कहकर सम्बोधित किया है। ऐसा पहली बार नहीं है कि मीडिया ने किसी झाड़-फूँक वाले को तांत्रिक नाम दिया हो। पहले भी कई मामले देखे गए हैं जब आरोपित का मजहब छिपाने के नाम पर ऐसे प्रयास पत्रकारिता में देखे गए हों।

जो हीरो लेफ्ट पार्टी का MLA, उस पर भी सेक्सुअल अब्यूज के आरोप: मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में अब तक 17 मीटू केस, शिकायत करने वाली हिरोइन को मिल रही धमकियाँ

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के उत्पीड़न पर आधारित जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट जारी होने के बाद से अब तक यौन उत्पीड़न के 17 मामले सामने आ चुके हैं। इस मामले में अब केरल की वामपंथी सरकार भी कदम उठाने को मजबूर हो गई है और अंतत: सत्ताधारी पार्टी सीपीआई-एम के विधायक मुकेश पर गाज गिराई है। एक्टर मुकेश को सिनेमा की नीतियाँ बनाने से जुड़े सरकारी पैनल से हटा दिया गया है। मुकेश के साथ ही एक्टर जयसूर्या पर मीनू मुनीर ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

एक्ट्रेस मीनू मनीर ने आरोप लगाए थे कि मुकेश और जयसूर्या ने साल 2013 में एक फिल्म के सेट पर उनके साथ गलत व्यवहार किया था, साथ ही जब उन्होंने फिल्मी संगठन-AMMA में शामिल होने के लिए मुकेश की मदद माँगी थी, तो उन्होंने गलत प्रयास किए थे। मीनू मुनीर ने कहा, “इस उद्योग में बहुत शोषण होता है। मैं इसकी गवाह और पीड़ित दोनों हूँ। जब मैं चेन्नई आई तो किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया और न ही पूछा कि क्या हुआ था…” हालाँकि मुकेश ने आरोपों को गलत बताया है और जाँच की माँग की है।

इस बीच, दिग्गज एक्टर मोहनलाल ने AMMA के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, इसके साथ ही एम्मा को भंग कर दिया गया। वहीं, हेमा कमेटी की रिपोर्ट के बीच, बढ़ते दबाव की वजह से केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इन ममालों की जाँच के लिए 7 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है।

मीटू के 17 मामले आए सामने, एक्ट्रेस को मिल रही धमकी

अब तक एक्टरों और फिल्म प्रोड्यूसरों के खिलाफ कुल 17 मामले सामने आ चुके हैं। आरोपितों में सिद्दीकी और रंजीत बालकृष्णन भी शामिल हैं। सिद्दीकी पर बंगाली एक्ट्रेस श्रीलेखा मित्रा ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “हर कोई इसके बारे में (महिलाओं के यौन शोषण और दुर्व्यवहार के बारे में) जानता है। यह कोई नई बात नहीं है… इस उद्योग में यह आम बात है। समस्या यह है कि इसे सामान्य बात बना दिया गया है।”

वहीं, एम मुकेश, जयसूर्या, मनियानपिला राजू और इदावेला बाबू पर फिल्मों की शूटिंग के दौरान उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली एक्ट्रेस मीनू मुनीर ने कहा है कि उन्हें सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर मिले धमकी भरे संदेश का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया। मामले की जांच कर रही एसआईटी जल्द ही उनका बयान दर्ज करेगी।

एनडीटीवी से बातचीत में मुनीर ने अपना डरावना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, “फिल्म की शूटिंग के दौरान मुझे एक कड़वा अनुभव हुआ। मैं शौचालय गई थी और जब मैं बाहर आई, तो जयसूर्या ने मुझे पीछे से गले लगाया और मेरी सहमति के बिना मुझे चूमा। मैं चौंक गई और भाग गई।” उन्होंने आगे कहा कि जयसूर्या ने उन्हें और काम देने की पेशकश की, अगर वह उनके साथ रहने को तैयार हों।

अभिनेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि एएमएमए की पूर्व सचिव इदावेला बाबू ने उन्हें AMMA की सदस्यता दिलाने में मदद करने के बहाने अपने फ्लैट पर बुलाया और उनका उत्पीड़न किया। वहीं, सत्तारूढ़ सीपीएम के विधायक और अभिनेता मुकेश ने उनकी पेशकश ठुकराने के बाद उन्हें सदस्यता देने से इनकार कर दिया है।

ताजा शिकायत एक्ट्रेस सोनिया मल्हार ने दर्ज कराई है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि 2013 में एक एक्टर ने फिल्म सेट पर उनके साथ छेड़छाड़ की थी। एक्ट्रेस ने केरल सरकार द्वारा गठित एसआईटी के सामने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया है कि अभिनेता जयसूर्या को उनके आरोपों से न जोड़ा जाए। उन्होंने साफ कर दिया कि उनके साथ बदसलूकी करने वाला दूसरा एक्टर है।

गौरतलब है कि तीन सदस्यीय जस्टिस हेमा कमेटी का गठन सरकार ने साल 2017 में किया था। जस्टिस हेमा कमेटी ने साल 2019 में अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी थी, लेकिन ये रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई थी। गवाहों और आरोपितों के नाम हटाने के बाद प्रकाशित 235 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को 10-15 पुरुष निर्माता, निर्देशक और अभिनेता नियंत्रित करते हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की काली-करतूतें सामने आने लगी हैं।

उत्तराखंड से 4000 महिलाओं की भर्ती करेगा टाटा समूह, कर्नाटक और तमिलनाडु में देगा नौकरी: तनख्वाह के अलावा रहने-खाने की करेगा व्यवस्था

टाटा समूह पर्वतीय राज्य उत्तराखंड से 4000 महिलाओं को नौकरी देने जा रहा है। टाटा समूह कर्नाटक और तमिलनाडु में स्थित अपने प्लांट के लिए उत्तराखंड से 4000 महिलाओं को भर्ती करेगा। इसकी जानकारी टाटा समूह ने राज्य की पुष्कर धामी सरकार को दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा समूह ने नेशनल आपरेंटिस प्रमोशन स्कीम (NAPS) और नेशनल आपरेंटिस ट्रेनिंग स्कीम (NATS) के तहत इन महिलाओं को भर्ती करने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी धामी सरकार को सोमवार (26 अगस्त, 2024) को दी गई है। धामी सरकार पहले से ही युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए बड़े कारोबारी घरानों से सम्पर्क करती आई है।

टाटा समूह उत्तराखंड की इन महिलाओं को भर्ती करके इन्हें तमिलनाडु के होसूर और कर्नाटक के कोलार में स्थित अपने प्लांट में नौकरी देगा। नौकरियों के 10वीं और 12वीं को योग्यता माना गया है। 12वीं की योग्यता वालों को NAPS जबकि जिन महिलाओं ने ITI किया है उन्हें NATS के तहत नौकरी दी जाएगी।

टाटा समूह इनकी भर्ती के लिए कुछ टेस्ट लेगा और सफल उम्मीदवारों को होसूर और कोलार में नौकरी दी जाएगी। टाटा समूह इन महिलाओं को बाजार के अनुसार तनख्वाह देने के अलावा इनके रहने और खाने-पीने का भी प्रबंध करेगा। इन्हें फैक्ट्री के पास ही हॉस्टल में ठहराया जाएगा। इसके अलावा इनके फैक्ट्री में आने-जाने का प्रबंध भी टाटा समूह करेगा।

टाटा समूह इन महिलाओं को प्लांट में टेक्नीशियन के तौर पर नौकरी देगा। इन्हें बड़ी मशीनें चलाने का अनुभव दिया जाएगा। इन मशीनों से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाए जाते हैं। टाटा समूह लगातार इलेक्ट्रॉनिक निर्माण में अपना हिस्सा बढ़ा रहा है।

टाटा समूह ने कुछ समय पहले ही ताईवानी कम्पनी विस्ट्रॉन का अधिग्रहण किया है। यह कम्पनी एप्पल के आईफोन बनाती है। अब टाटा समूह भी इसके जरिए आईफोन निर्माण में उतर आया है। इससे पहले फॉक्सकॉन भारत में बड़े पैमाने पर आईफोन बना रही है।

घरवालों से नाराज होकर अस्पताल पहुँची 14 साल की नाबालिग, 2 स्टाफ ने चाय-नाश्ता करवाकर किया रेप: CCTV फुटेज में दिखने के बाद हुए गिरफ्तार, जोधपुर की घटना

राजस्थान के जोधपुर जिले से गैंगरेप का मामला सामने आया है। यहाँ घर से नाराज होकर बाहर निकली एक नाबालिग को 2 युवकों ने हवस का शिकार बनाया है। घटना एक सरकारी अस्पताल के पास घटी है। दोनों आरोपितों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। घटना रविवार (25 अगस्त 2024) की है। दोनों आरोपित अस्पताल के संविदाकर्मी बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जोधपुर के महात्मा गाँधी अस्पताल का है। रविवार की रात जोधपुर में सूरसागर थानाक्षेत्र की रहने वाली एक 14 वर्षीया नाबालिग लड़की को उसकी माँ ने किसी बात पर डाँट दिया था। इसी से नाराज होकर लड़की ने घर छोड़ दिया और भटकते हुए वो शहर के महात्मा गाँधी अस्पताल पहुँच गई। यहाँ पीड़िता को अस्पताल के 2 संविदाकर्मी मिले। इन्होंने लड़की को पहले विश्वास में लिया और बाद में उसके साथ गैंगरेप किया। गैंगरेप को अस्पताल के पीछे बने क्वार्टर के पास अंजाम दिया गया।

अगले दिन 26 अगस्त को पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर लिया। पीड़िता को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। यहाँ उसने अपने घर वालों को बताया कि अस्पताल के 2 स्टाफ ने उसके संग बलात्कार किया है। मामले की सूचना फ़ौरन पुलिस को दी गई। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया, साथ ही उसकी काउंसिलिंग भी करवाई गई। इस बीच पुलिस आरोपितों की पहचान करने में जुट गई।

जाँच के दौरान पुलिस ने अस्पताल के CCTV फुटेज खँगाले। इसी के एक फुटेज में पीड़िता अस्पताल की कैंटीन में 2 युवकों के साथ बैठी नजर आई। यहाँ सभी तीनों लोग मिल कर चाय नाश्ता कर रहे थे। आखिरकार दोनों आरोपितों को चिन्हित करके उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी गई। अब दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।

ऐसे ही नहीं भारत में घुसकर बस जाते हैं बांग्लादेशी… जिस नजीबुल ‘टोपी वाला’ को ATS ने दबोचा उसे क्लीनचिट दे चुका था देवबंद का इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने 11 अक्टूबर, 2023 को भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ करवाने में मदद कर रहे एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान पुलिस ने आदिल उर रहमान अशर्फी, नजीबुल शेख और अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया था। इसमें आदिल उर रहमान बांग्लादेशी घुसपैठिया था जो फर्जी पहचान पत्र बनवा कर भारत में रह रहा था। नजीबुल शेख और अबू हुरैरा पश्चिम बंगाल के निवासी थी जो फिलहाल देवबंद में ही रह रहे थे। नजीबुल पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में शरण देने, उनके पहचान पत्र बनवाने और उनके लिए पैसे जुटाने में मदद करने का आरोप है।

खास बात यह है कि इस गिरफ्तारी से पहले नजीबुल शेख का नाम पहले भी 2 बार प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से UP ATS ने अपनी कार्रवाई में लिया था लेकिन दोनों बार उसको सहारनपुर पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया था। ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की तो पता चला कि पूर्व में दर्ज जिन केसों में नजीबुल शेख गिरफ्तारी से बच गया था उसकी जाँच इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने की थी। तब इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन देवबंद थाना कोतवाली में इंस्पेक्टर क्राइम के पद पर तैनात थे।

क्या हैं नजीबुल पर आरोप

UP ATS की इस FIR में बताया गया था कि देवबंद दारुल उलूम के सामने परफ्यूम और टोपी बेचने वाला नजीबुल शेख भारत विरोधी कार्यों में फंडिंग कर रहा है। इन कार्यों में बांग्लादेशी घुसपैठियों का फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाना प्रमुख था। नजीबुल शेख द्वारा भारत में बसाए गए लगभग आधे दर्जन घुसपैठियों का जिक्र ATS की FIR में है। देश विरोधी कार्यों को करने के लिए नजीबुल शेख को हवाला से पैसे भी मिले थे। किस रोहिंग्या या बांग्लादेशी को कौन से शहर में बसाना है यह भी नजीबुल अपने आकाओं के साथ मिल कर तय करता था।

तब ATS ने नजीबुल और उसके अन्य साथियों पर पर विदेशी अधिनियम के अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 370, 471, 467, 468, 419, 420 और 120 बी के तहत FIR दर्ज की थी। पिछले लगभग 10 महीनों से नजीबुल जेल में है। ATS द्वारा पेश किए गए सबूतों की वजह से उसकी जमानत अर्जी हाईकोर्ट से ख़ारिज हो चुकी है।

दारुल उलूम के मदरसे में पढ़ा, फिर शिफ्ट हुआ देवबंद

ऑपइंडिया ने नजीबुल के बारे में जानकारियाँ जुटाईं। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का निवासी है। नजीबुल के अब्बा का नाम शेख अब्दुल कातिर है। नजीबुल की पढ़ाई पश्चिम बंगाल के हरोआ स्थित एक मदरसे से हुई थी। यह मदरसा देवबंद से कनेक्टेड है। इस मदरसे का संचालन अबू सालेह करता था जिसे UP ATS ने जनवरी 2024 में टेरर फंडिंग केस में गिरफ्तार किया है। सालेह पर आतंकी फंडिंग के लिए कुख्यात ब्रिटेन की उम्माह वेलफेयर ट्रस्ट से करोड़ों रुपए लेने का आरोप है।

अबू सालेह के मदरसे में पढ़ते हुए नजीबुल शेख देवबंद दारुल उलूम से जुड़े कई लोगों के सम्पर्क में आया। उसका देवबंद में आना-जाना भी हो गया। माना जाता है कि पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत शेख नजीबुल पश्चिम बंगाल के मदरसे की पढ़ाई कर के देवबंद में शिफ्ट हो गया था। यहाँ उसने दारुल उलूम के ठीक सामने सेंट और टोपी की दुकान खोल ली। इस दुकान पर दारुल उलूम देवबंद में पढ़ने वाले दुनिया भर के छात्र खरीदारी के लिए आने लगे। शेख नजीबुल इन सबमें अपने काम के लोग तलाशने लगा।

दुकान बस नाम की, असल धंधा हवाला का

ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, नजीबुल शेख की सेंट और इस्लामी टोपी की दुकान केवल नाम भर के लिए थी। उसके पास विदेशों से हवाला का पैसा आने लगा। इसमें सबसे ज्यादा पैसे बांग्लादेश से आए। इन पैसों का उपयोग नजीबुल भारत में घुसपैठ कर के आए बांग्लादेशियों के पहचान पत्र और अन्य कागजात बनाने में करता था। नजीबुल ने कई घुसपैठियों को देवबंद व आसपास रहने की भी व्यवस्था करवाई थी। उसके खाते में कई संदिग्ध लेन-देन भी पाए गए हैं।

ATS का यह भी आरोप है कि हवाला से मिले पैसों से भारत में अवैध मस्जिदें बनवाने का भी काम हो रहा था। पैसों के इस लेन-देन में अब्दुल्ला गाजी, अब्दुल अव्वल और गफ्फार का नाम भी सामने आया था। साथ ही देवबंद के तार दिल्ली से भी जुड़े पाए गए थे। नजीबुल के साथ गिरफ्तार हुए आदिल उर रहमान ने भी पूछताछ में कई खुलासे किए थे। उसने बताया कि उसके भी फर्जी पहचान पत्र बनवाने में नजीबुल ने बड़ा रोल अदा किया था। नजीबुल का एक भाई सीमा सुरक्षा बल (BSF) में भी तैनात बताया जा रहा है।

इसकी टोपी उसके सर

यहाँ ये गौर करने योग्य है कि जो टोपियाँ नजीबुल अपनी दुकान में बेचता था वो ज्यादातर बांग्लादेश में बनी होती थी। इन्ही टोपियों को खरीदने के नाम पर नजीबुल बांग्लादेश में पैसे का लेन-देन करता था। बांग्लादेश में मौजूद घुसपैठियों के रिश्तेदार और परिजन टोपी के थोक विक्रेता को वहीं पर पैसे दे दिया करते थे। उन पैसों के बदले वहाँ से टोपियाँ देवबंद में नजीबुल की दुकान पर आ जाती थीं। इन्हीं टोपियों को फिक्स जगह बेच कर नजीबुल यहाँ मौजूद घुसपैठियों को पैसे बाँट देता था।

2022 में ही पकड़ा जाता नजीबुल, अगर इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने न दी होती क्लीन चिट

जिस नजीबुल को UP ATS ने अक्टूबर 2023 में जेल भेजा उसे साल 2022 में ही गिरफ्तार कर लिया गया होता लेकिन तब सहारनपुर पुलिस के थाना देवबंद की जाँच में उसका नाम निकाल दिया गया था। ये बात है 28 अप्रैल, 2022 की। तब UP ATS के इंस्पेक्टर सुधीर कुमार उज्ज्वल ने सहारनपुर जिले के थाना देवबंद में एक FIR दर्ज करवाई थी। इस FIR में उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त किया था। तब उन्होंने अपनी FIR में स्पष्ट रूप से दारुल उलूम देवबंद के आगे सेंट और टोपी बेचने वाले दुकानदार का जिक्र किया था।

FIR में दुकान का बाकायदा पता भी मेन रशीदिया मार्किट लिखा हुआ था। सुधीर कुमार उज्ज्वल की इस FIR में बताया गया था कि दारुल उलूम देवबंद के आगे सेंट टोपी बेचने वाला दुकानदार बांग्लादेशी घुसपैठियों से कनेक्टेड है। तब इसकी जाँच देवबंद में तैनात रहे इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने की थी। सिराजुद्दीन ने अपनी जाँच रिपोर्ट में सेंट और टोपी वाले दुकानदार के खिलाफ सबूत नहीं पाने का जिक्र किया। उन्होंने कोर्ट में चार्जशीट भी लगा दी। इस चार्जशीट से नजीबुल का हौसला और बढ़ गया। हालाँकि, वो अपने आपराधिक कार्यों को और सतर्कता से करने लगा था।

दूसरी FIR में भी साफ़ बच गया था नजीबुल

इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन की जाँच रिपोर्ट में पहली बार बच निकलने के बाद दूसरी बार नजीबुल फिर उसी देवबंद थाने से फँसते-फँसते बचा। तब 19 जुलाई 2024 को UP ATS के इंस्पेक्टर सुधीर कुमार उज्ज्वल ने एक और FIR दर्ज करवाई थी। इस FIR में उन्होंने 2 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया था जिनके नाम हबीबुल्लाह और अहमदुल्लाह हैं। इन दोनों के पास फर्जी कागजातों से बनवाए गए भारतीय पहचान पत्र और मोबाइल सिम बरामद हुए थे।

बताया जा रहा है कि हबीबुल्लाह नामक घुसपैठिए के सेंट और टोपी की दुकान लगाने वाले नजीबुल से संबंध थे। इस केस की भी जाँच देवबंद थाने में तैनात रहे इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन को दी गई थी। हालाँकि इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन लगातार दूसरी बार इस पूरे मामले में नजीबुल शेख की भूमिका तलाशने में असफल रहे थे। इसी वजह से एक ही विवेचक द्वारा की गई लगातार 2 जाँचों के बावजूद नजीबुल बचता रहा। ये तब का मामला है जब UP ATS का अपना खुद का थाना नहीं था। तब ATS को जाँच व अन्य कार्र्रवाई के लिए उस थानाक्षेत्र पर निर्भर रहना पड़ता था जहाँ घटनास्थल होता था।

ATS का खुला अपना थाना तो दबोच लिया गया नजीबुल शेख

देवबंद कोतवाली में दर्ज हुए 2 अलग-अलग मुकदमों में बच जाने के बाद नजीबुल काफी हद तक रिलेक्स हो गया था। इस बीच उत्तर प्रदेश ATS का अपना खुद का थाना लखनऊ में खुल गया। तब न सिर्फ FIR बल्कि जाँच का भी अधिकार ATS के पास आ गया। आखिरकार 11 अक्टूबर 2023 को UP ATS ने नजीबुल शेख को उसके साथी सहित दबोच लिया। नजीबुल शेख के खिलाफ ATS ने कोर्ट में कई सबूत पेश किए हैं। पिछले लगभग 10 महीनों से नजीबुल लखनऊ जेल में बंद है। उसकी जमानत अर्जी हाईकोर्ट से भी ख़ारिज हो चुकी है।