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किश्तवाड़ में जिनके पिता-चाचा को आतंकियों ने उतारा मौत के घाट, उन शगुन परिहार को BJP ने चुना अपना उम्मीदवार: बोलीं- बहुत भावुक हूँ, PM मोदी का धन्यवाद

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट के जारी होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ‘शगुन परिहार’ के नाम की है।

शगुन को किश्तवाड़ा से भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। वो भाजपा द्वारा जारी पहली लिस्ट में एकलौती महिला हैं। उनके पिता और चाचा को आतंकियों ने मार डाला था। उनके चाचा अनिल परिहार जम्मू-कश्मीर में भाैजपा के दिग्गज नेता थे।

उनके पास राज्य में भाजपा के सचिव पद की जिम्मेदारी थी। वो अपने राजनीतिक करियर में आगे बढ़ ही रहे थे कि इस्लामी कट्टरपंथियों की नजर में वो खटकने लगे और साल 2018 में अनिल परिहार के साथ उनके भाई व शगुन परिहार के पिता को मौत के घाट उतार दिया गया।

शगुन कहती हैं, “वह काला दिन आज भी मेरी आँखों में बसा है, जिस दिन मेरा घर वीरान कर दिया गया। मेरे परिवार ने अपने खून का कतरा-कतरा किश्तवाड़ के लिए दे दिया, यह चुनाव उनके लिए है।” शगुन ने इस मौके के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा और बाकी सभी लोगों का धन्यवाद किया जो इतने वर्ष उनके साथ खड़े रहे।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि किश्तवाड़ा के लोग किश्तवाड़ा की बेटी को खुले दिल से स्वीकार करेंगे। यह चुनाव केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए हैं जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकती। बहुत भावुक हूँ। टिकट का ऐलान होने के बाद मुझे मेरे पिता की बहुत याद आई।”

कैसे हुई थी अनिल परिहार और अजीत परिहार की हत्या

नवंबर 2018 की बात है। बीजेपी की राज्य इकाई के सचिव अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार किश्तवाड़ में अपनी दुकान से लौट रहे थे कि इसी दौरान उन पर करीब से गोलीबारी हुई।

बाद में पता चला कि हमलावर हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी थे जो उस रात रास्ते में खड़े होकर सिर्फ दोनों भाइयों के लौटने का इंतजार कर रहे थे। इस घटना के बाद किश्तवाड़ा में हालात ऐसे हो गए थे कि कर्फ्यू लगाना पड़ा था और इंटरनेट बंद करने पड़े थे। पड़ताल के बाद इस मामले में तीन आतंकी गिरफ्तार हुए थे।

बायडेन सरकार ने मुझ पर बनाया दबाव, फेसबुक-इंस्टाग्राम से जानकारी हटाने को कहा: मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग ने किया खुलासा

फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफ़ॉर्म की मालिक मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने खुलासा किया है कि बायडेन प्रशासन उन पर दबाव बना रहा था। उन्होंने एक पत्र में बताया है कि मेटा पर कोविड काल के दौरान सूचनाएँ दबाने का दबाव बनाया गया। इस दौरान व्यंग्य तक हटाने को लेकर बायडेन प्रशासन उन पर दबाव बनाता रहा। मार्क जुकरबर्ग के । उन्होंने इसमें बायडेन की डेमोक्रेट पार्टी को चंदा देने पर भी सफाई दी है।

सोमवार (26 अगस्त, 2024) को मार्क जुकरबर्ग ने पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस पत्र में उन्होंने लिखा, “2021 में, व्हाइट हाउस सहित बायडेन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यंग्य सहित कुछ COVID-19 सामग्री को सेंसर करने के लिए महीनों तक हमारी टीमों पर बार-बार दबाव डाला और जब हम सहमत नहीं हुए तो हमारी टीमों के ऊपर निराशा जताई। अंततः, यह हमारा निर्णय था कि किसी सामग्री को हटाना है या नहीं और हम अपने निर्णयों के लिए जिम्मेदार हैं।”

आगे उन्होंने लिखा, “मेरा मानना ​​है कि सरकारी दबाव गलत था, और मुझे इस बात पर दुख है कि हम इसके बारे में ज्यादा बोले नहीं। मुझे यह भी लगता है कि हमने कुछ ऐसे फैसले भी लिए हैं, जिन्हें हम आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो नहीं लेते क्योंकि अब नई जानकारी भी हमारे पास आ गई है। जैसा कि मैंने उस समय अपनी टीमों से कहा था, मुझे से लगता है कि हमें किसी भी हालत में किसी भी प्रशासन के दबाव के कारण अपने मानकों से समझौता नहीं करना चाहिए और अगर ऐसा कुछ फिर से होता है तो हम विरोध करेंगे।”

मार्क जुकरबर्ग ने यह सब बातें अमेरिकी संसद की न्यायपालिका कमिटी को लिखे गए एक पत्र में लिखी है। यह कमिटी सोशल मीडिया जानकारियों को कैसे सही तरीके से साझा किया जाए, इसको लेकर काम कर रही है। यह कमिटी सोशल मीडिया पर दबाव, उस पर फैलाई जाने वाली भ्रामक सूचनाओं और इससे सम्बन्धित बातों की जाँच भी कर रही है।

मार्क जुकरबर्ग ने यह भी खुलासा किया है कि उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के समय बायडेन परिवार को लेकर छापी गई एक स्टोरी को भी अपने प्लेटफार्म से रोका था। उन्होंने बताया कि ऐसा FBI के कहने पर किया गया था। जुकरबर्ग ने कहा है कि वह अब ऐसा नहीं करेंगे और कोई भी स्टोरी नहीं रोकेंगे।

इस पत्र में जुकरबर्ग ने डेमोक्रेट पार्टी को दिए गए चंदे पर भी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा है कि 2020 के समय उन्होंने कई समूहों को चन्दा देने का फैसला किया था। यह चंदा उनकी पत्नी के ट्रस्ट से दिया गया था। जुकरबर्ग का कहना है कि वह इसे कई पक्षों में सही से बांटना चाहते थे लेकिन फिर भी यह एक पार्टी को ज्यादा गया। उन्होंने कहा है कि यह दोबारा नहीं होगा।

गौरतलब है कि फेसबुक समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार कई सूचनाओं को दबाने का आरोप लगता आया है। कोविड महामारी के समय भी ऐसी ही कई सूचनाओं को दबाने के आरोप सामने आए थे। कई चुनावों को भी प्रभावित करने का आरोप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगा है। जुकरबर्ग के इस खुलासे ने इसकी पुष्टि की है।

डिफेंस एयरोस्पेस की सरकारी जमीन, दे दी गई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार को: BJP सांसद के सवाल पर कॉन्ग्रेस मंत्री ने कहा- कुछ गलत नहीं किया

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पर जमीन आवंटन में गड़बड़ी करने के आरोप लग रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के सांसद का दावा है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे राहुल खड़गे को नियमों के खिलाफ कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड की साइट दी गई है। वहीं कॉन्ग्रेस मंत्री एमबी पाटिल और प्रियांक खड़गे का कहना है कि जमीन आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।

बता दें कि इस मामले को भाजपा सांसद लाहर सिंह सिरोया ने उठाया था। उनका आरोप था कि मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे राहुल खड़गे की अध्यक्षता वाले सिद्धार्थ विहार एजुकेशन ट्रस्ट को बेंगलुरु के पास हाईटेक डिफेंस एयरोस्पेस पार्क में 5 एकड़ जमीन दी गई है।

सिरोया ने अपने बयान में कहा, एक रिपोर्ट से यह पता चला है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार द्वारा संचालित ट्रस्ट (सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट) को बेंगलुरु के पास हाईटेक डिफेंस एयरोस्पेस पार्क में एससी कोटे के तहत नागरिक सुविधाओं के लिए कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) की कुल 45.94 एकड़ जमीन में से 5 एकड़ जमीन आवंटित की गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस ट्रस्ट के ट्रस्टियों में खुदखुद खड़गे, उनकी पत्नी राधाबाई खड़गे, उनके दामाद और गुलबर्गा के सांसद राधाकृष्ण डोड्डामणि, बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे और एक अन्य बेटे राहुल खड़गे शामिल है।

अपने इन आरोपों के साथ सिरोया ने डॉक्यूमेंट साझा किए हैं। उन्होंने सवाल किया है कि आखिर प्रदेश उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने मार्च 2024 इसकी अनुमति दी कैसे? इसके साथ उन्होने खड़गे परिवार से सवाल करते हुए पूछा कि वो जमीन के पात्र होने के लिए एयरोस्पेस उद्यमी कब बन गए? उन्होंने आशंका जताई कि ये मामला सत्ता दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद और हितों के टकराव से जुड़ा हुआ है।

बता दें कि सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को साइट आवंट की पुष्टि खुद उद्योग मंत्री एबी पाटिल ने की है। उनका कहना है कि जमीन आवंटित करते समय बिलकुल भी नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है। साइट को निर्धारित मूल्य और बिना किसी छूट के दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह आवंटन राज्य स्तरीय समिति की सिफारिशों पर किया जाता है। उन्होंने जानकारी दी राहुल खड़गे आईआईटी स्नातक हैं और वे आवंटित भूमि पर रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करना चाहते हैं। KIADB मानदंडों के अनुसार, CA प्लॉट का उ उपयोग रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, उत्कृष्टता केंद्र, तकनीकी सहायता, कौशल विकास केंद्र, सरकारी कार्यालय, अस्पताल, होटल, पेट्रोल स्टेशन, कैंटीन आवासीय सुविधाएँ स्थापित करने के लिए किया जा सकता है।

वहीं प्रियांक खड़गे ने भी सिरोया के आरोपों को नकारा। उन्होंने कहा अल्प ज्ञान खतरनाक होता है। सबसे पहले बताना चाहेंगे कि आवंटित स्थल औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए बनाया गया कोई औद्योगिक भूखंड नहीं है। यह शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ट्रस्ट का इरादा CA साइट पर मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने का है। क्या यह गलत है? KIADB ने CA साइट के लिए ट्रस्ट पर मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करना है।

PM मोदी-राष्ट्रपति बायडेन के बीच बांग्लादेशी हिन्दुओं की बातचीत, लेकिन अमेरिका ने छुपाया: हिंदू-घृणा पर पहले भी रहा है मौन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन से फोन पर बातचीत की है। यह बातचीत सोमवार (26 अगस्त, 2024) को हुई। दोनों वैश्विक नेताओं की बातचीत के केंद्र में यूक्रेन-रूस संघर्ष और बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार रहे।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बातचीत के बाद इस बात को स्पष्ट रूप से जाहिर किया वहीं अमेरिकी पक्ष ने इसे बातचीत की प्रेस रिलीज से गायब कर दिया। अमेरिका इससे पहले भी बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर मौन रहा है और इस पर बोलने से कतराता रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी की बातचीत की प्रेस रिलीज में बताया गया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति बायडेन को अपनी हालिया पोलैंड और यूक्रेन यात्रा के विषय में जानकारी दी। इसमें बताया गया कि पीएम मोदी ने ने यूक्रेन-रूस संघर्ष का बातचीत से हल हो, इसके लिए अपना पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने जल्द शान्ति बहाली की आशा जताई है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए प्रेस रिलीज में आगे बताया गया कि दोनों नेताओं ने बांग्लादेश में बिगड़े हालातों पर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने यहाँ कानून का राज दुबारा कायम करने और अल्पसंख्यकों विशेष कर हिन्दुओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने पर जोर दिया है।

हालाँकि, जब इसी बातचीत को लेकर अमेरिकी पक्ष ने अपनी प्रेस रिलीज जारी की तो इसमें अपने रणनीतिक हित वाले मुद्दे ही रखे। अमेरिकी पक्ष द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा, यूक्रेन-रूस संघर्ष के शांतिपूर्ण हल को लेकर बात हुई।

इसके अलावा भारत और अमेरिका समेत 4 देशों के समूह QUAD को लेकर भी दोनों नेताओं की बातचीत को लेकर भी इस प्रेस रिलीज में जानकारी दी गई। हालाँकि, इस प्रेस रिलीज से बांग्लादेश पर हुई बातचीत को पूरी तरीके से गायब कर दिया गया।

ना ही इसमें बांग्लादेश में बिगड़े हालातों को लेकर कुछ कहा गया, ना ही बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हुए अत्याचार या उनकी सुरक्षा की बातचीत का जिक्र किया गया। अमेरिका इससे पहले भी लगातार बांग्लादेश में हिन्दुओं के उत्पीड़न पर बोलने से इनकार करता रहा है।

12 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों की कई खबरों के बीच जब अमेरिका के व्हाईट हाउस से पूछा गया कि उसका इस पर क्या रुख है तो उसकी प्रवक्ता ने कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया था। व्हाईट हाउस की प्रवक्ता जीन पियरे ने कहा था कि वह स्थितियों को देख रहे हैं और इससे ज्यादा कुछ नहीं कह पाएँगे।

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफ़ा देना पड़ गया था। उनके खिलाफ बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक महीने तक विरोध प्रदर्शन और हिंसा की थी। इसके बाद उन्हें सत्ता छोड़ कर भारत आना पड़ा था। इस दौरान बांग्लादेश में हिन्दुओं पर भी हमले चालू हो गए थे। हालाँकि, विश्व समुदाय इस पर चुप्पी साधे रहा है।

MP में बांग्लादेशी घुसपैठिया गिरफ्तार, सीधी के एक ढाबे से पुलिस ने दबोचा: नहीं दिखा पाया कोई कागजात, IB भी कर रही है पूछताछ

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक बांग्लादेशी घुसपैठिया पकड़ा गया है। मुस्लिम समुदाय का ये घुसपैठिया एक ढाबे से पकड़ा गया है। पकड़े गए घुसपैठिए से पुलिस के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भी पूछताछ कर रही है। अभी तक आरोपित के पास से कोई कागजात बरामद नहीं हुए हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई सोमवार (26 अगस्त 2024) को की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना सीधी जिले के थानाक्षेत्र जमोड़ी की है। सोमवार (26 अगस्त) को यहाँ के एक ढाबे के पास लोगों को एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया। जब लोगों ने उससे बात करने की कोशिश की तो वो हिंदी भाषा नहीं समझ पा रहा था। मामले को संदिग्ध देखते हुए लोगों ने पुलिस को सम्पर्क किया। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर बांग्लादेशी को हिरासत में ले लिया। मामले की सूचना इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को दे दी गई है। फिलहाल अभी तक घुसपैठिए से कोई कागजात बरामद नहीं हो पाए हैं।

पुलिस ने अभी तक मामले में कोई भी बयान जारी नहीं किया है। इस बात का भी अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है कि घुसपैठिया किस सीमा से अंदर घुसा और मध्य प्रदेश के सीधी जिले तक कैसे पहुँच गया। पकड़े गए युवक से पूछताछ में भाषा की दिक्कत आ रही है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल में जुटी है कि कहीं आरोपित का कोई स्थानीय कनेक्शन तो नहीं है। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि गिरफ्तार किया गया शख्स कुछ दिनों से गली-गली घूम रहा था।

बताते चलें कि शेख हसीना सरकार का तख्तापलट होने के बाद बांग्लादेश अशांति के दौर से गुजर रहा है। वहाँ पर लगातार हिंसक झड़पे हो रहीं हैं, जिसमें हिन्दुओं को खासतौर पर निशाना बनाया गया है। भारत की सीमा में घुसपैठ की आशंका को देखते हुए बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (BSF) ने पहरा कड़ा कर दिया है। समुद्री मार्ग पर भी सख्त नजर रखी जा रही है। कई बांग्लादेशी बॉर्डर के रास्ते भारत में घुसने की फिराक में देखे गए हैं।

दीनी तालीम के लिए ट्यूशन पढ़ाने आता था जो मौलवी, वो नाबालिग लड़की को भगा ले गया: पुलिस ने दबोचा, भाइयों ने भी दिया था साथ

उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद जिले में दीनी और मज़हबी तालीम देने वाले एक मौलवी पर अपनी ही छात्रा को भगा कर ले जाने का आरोप लगा है। घटना बुधवार (21 अगस्त, 2024) की है। इस कृत्य में मौलवी का साथ उसके भाइयों ने दिया। शनिवार (24 अगस्त) को पीड़िता जैसे-तैसे बच कर आरोपितों के चंगुल से बच कर अपने घर आई और परिजनों को सारी बात बताई। परिजनों की तहरीर पर मौलवी मुसईयुव खान के साथ उसके भाइयों सोहिब और सोहिल पर FIR दर्ज कर ली गई है। सोमवार (26 अगस्त) को पुलिस ने आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना फ़िरोज़ाबाद जिले के थाना क्षेत्र रसूलपुर की है। यहाँ शनिवार को 19 वर्षीया पीड़िता के अब्बा ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को उर्दू और अरबी भाषा सिखाने के लिए मुसईयुव नाम के एक मौलवी को नियुक्त किया था। पीड़िता के पड़ोसी गाँव का रहने वाला ये मौलवी लड़की के घर जा कर मज़हबी तालीम दे रहा था। आरोप है कि धीरे-धीरे उसने पीड़िता को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। उसकी करतूत की भनक पीड़िता के परिजनों को नहीं लगी।

शिकायत में आगे बताया गया है कि बुधवार (21 अगस्त) को मौलवी मुसईयुव पीड़िता को अपने साथ बहला-फुसला कर भगा ले गया। इस काम में मौलवी का साथ उसके भाइयों सोहिल और सोहिब ने भी दिया। पीड़ित परिजन अपनी बेटी की खोजबीन में जुट गए। इस दौरान 24 अगस्त (शनिवार) को पीड़िता मौलवी के चंगुल से निकल कर जैसे-तैसे खुद ही घर पहुँच गई। उसने अपने परिजनों को पूरी बात बताई। इसी दिन पीड़िता के अब्बा ने पुलिस में तहरीर दे कर मौलवी और उसके भाइयों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पीड़िता के अब्बा की तहरीर पर पुलिस ने मौलवी मुसईयुव और उसके 2 भाइयों सोहिल और सोहिब को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन तीनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 और 137 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने दबिश दे कर सोमवार (26 अगस्त) को मौलवी मुसईयुव को गिरफ्तार कर लिया है। DSP सिटी के मुताबिक पीड़िता के मेडिकल टेस्ट और बयानों के आधार पर केस में और धाराएँ बढ़ाई जा रहीं हैं। मामले में आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘हम कई पीढ़ियों से यहीं’: तमिलनाडु के जिस गाँव की पूरी जमीन वक्फ ने हड़पी डरे हुए हैं उसके ग्रामीण, बोला बोर्ड – 1500 साल पुराना चोल मंदिर भी हमारा

हाल ही में संसद में लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पेश किया गया, जिसे बाहरी विरोध के बाद JPC (संयुक्त संसदीय समिति) के समक्ष भेज दिया गया है। बिल पेश करते समय केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजुजू ने तमिलनाडु के तिरुचिपल्ली स्थित तिरुचेंदुरई का उदाहरण दिया, जहाँ पूरे गाँव को ही वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति बता दी और ग्रामीण अपनी जमीन बेच तक नहीं पा रहे हैं। इतना ही नहीं, डेढ़ हजार वर्ष प्राचीन मंदिर भी इस गाँव में है, जो इस्लाम के जन्म से भी पुराना है।

अब ‘इंडिया टुडे’ ने इस पर एक ग्राउंड रिपोर्ट किया है। ये उसका उदाहरण है कि कैसे रातोंरात पूरे गाँव के नागरिकों की जमीनें चली गईं। ये एक शांत गाँव है, जो अब चर्चा में है। इसका खुलासा तब हुआ जब पैसों की ज़रूरत के कारण एक किसान अपनी जमीन बचने गया। प्रशासन ने उसे बताया कि उसकी जमीन वक्फ बोर्ड की है, इसीलिए उसे वहाँ से NOC लाना पड़ेगा। यहाँ जो मंदिर है, वो चोल राजवंश द्वारा निर्मित है। एक 72 वर्षीय महिला ने बताया कि वो जन्म से यहीं रह रही हैं।

उन्होंने बताया कि जब से उन्हें बताया गया है कि ये जमीनें वक्फ बोर्ड की हैं तब से सभी ग्रामीण डरे हुए हैं। एक अन्य बुजुर्ग महिला ने कहा कि हम पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं और अचानक से उन्हें कहा जा रहा है कि ये जमीनें उनकी नहीं है, वो जानती भी नहीं कि ये कौन लोग हैं। एक अन्य महिला ने बताया कि उनकी सास ने उन्हें दशकों पुरानी तस्वीरें दिखाईं, उससे भी पहले से ये लोग यहाँ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सब निराश हैं। तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के मुखिया अब्दुल रहमान ने इस पर सफाई दी है।

उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड इस गाँव में 430 एकड़ जमीन का मालिक है, जिसमें मंदिर भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जमीन दान करने वालों के कहे के हिसाब से वक्फ बोर्ड मंदिर को नहीं छुएगा। लेकिन, सवाल ये है कि जमीन दान देने वाले ये कौन लोग हैं और क्या आगे लंबे समय तक मंदिर बचा रहेगा? मंदिर के पुजारी ने कहा कि उनके पास कुछ दस्तावेज हैं, लेकिन पता नहीं वो सही हैं या गलत क्योंकि 1955 से पहले कोई वक्फ बोर्ड नहीं था। तिरुचिपल्ली के जिलाधीश ने कहा कि जमीन का मालिकाना हक़ विवादित है।

हालाँकि, उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को जमीन खरीदने-बेचने से नहीं रोका जा रहा है। वक्फ बोर्ड ने कहा कि जमीनों का पंजीकरण किया जा सकता है, जब तक जमीन का मालिकाना हक़ साबित नहीं हो जाता। गाँव में कुछ ही मुस्लिम समाज के लोग हैं, लेकिन उनके पास पैसे नहीं हैं। पुजारी ने कहा कि वक्फ दिन प्रतिदिन अमीर होता जा रहा है, वो ताजमहल को भी अपना बताते हैं। उक्त मंदिर में लिखा है कि राजाराज चोल की बहन ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

वहीं कुछ रिपोर्ट्स में कहना है कि 18वीं शताब्दी में मंगम्मल नाम की रानी ने कुछ मुस्लिम राजाओं से दोस्ती के कारण उन्हें कई गाँव दे दिए थे। डीएम ने इस सूचना पर कहा कि ये पुष्ट सूचना नहीं है कि जमीनें औरंगजेब को दी गई थीं या नहीं, 1927 के बाद के ही दस्तावेज उपलब्ध हैं। मंदिर की दीवारों पर ऐतिहासिक अभिलेख हैं। कुछ भी हो, गाँव के लोग अनिश्चितता में जी रहे हैं। अब देखना है कि वक्फ संशोधन विधेयक कब कानून बनता है और लोगों को इससे कब राहत मिलती है।

पश्चिम बंगाल से UP आ कर नाबालिग दलित लड़की को बनाया हवस का शिकार, पकड़ने पहुँचे पुलिस वालों पर भी बरसाईं गोलियाँ: मुठभेड़ के बाद मेहताब आलम गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद जिले में दलित समुदाय की एक नाबालिग लड़की से रेप का मामला सामने आया है। बलात्कार का आरोप 20 वर्षीय मेहताब आलम नाम के युवक पर लगा है जो कि मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले का निवासी है। आरोपित ने बंगाल से आ कर एक होटल में पीड़िता से रेप किया था। घटना शनिवार (24 अगस्त, 2024) की है। खुद को घिरता देख कर मेहताब ने पुलिस पर भी गोलियाँ बरसाईं। जवाबी कार्रवाई में महताब के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

यह मामला फ़िरोज़ाबाद उत्तरी थाना क्षेत्र का है। यहाँ 25 अगस्त (रविवार) को अनुसूचित जाति (SC वर्ग) के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी 15 साल की बेटी से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले का निवासी मेहताब आलम लम्बे समय से फोन पर बात कर रहा था। शनिवार (24 अगस्त) को मेहताब पीड़िता से मिलने फ़िरोज़ाबाद आया। यहाँ से पीड़िता को बहला-फुसला कर अपने साथ हाइवे पर बने एक होटल में ले गया। होटल में मेहताब ने पीड़िता से रेप किया।

आरोप है कि इसी दौरान मेहताब ने पीड़िता को धमकी भी दी कि अगर उसने किसी से शिकायत की तो उसका कत्ल कर दिया जाएगा। अपनी बेटी को लापता देख कर शिकायतकर्ता ने खोजबीन शुरू कर दी। आखिरकार 25 अगस्त (रविवार) को मेहताब उनकी बेटी के साथ फ़िरोज़ाबाद के अटल पार्क में दिखा। पीड़िता के पिता को देख कर मेहताब वहाँ से भाग निकला। पीड़िता ने अपने पिता से रो-रो कर सारी बात बताई। आखिरकार मेहताब के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई।

शिकायत में मेहताब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई। पुलिस ने मेहताब को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137 (2), 64 (1) और 351 (3) के साथ SC /ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। आरोपित की तलाश में पुलिस टीमें लगा दी गईं। 25 अगस्त (रविवार) को रात लगभग 9:20 के आसपास पुलिस को महताब आलम के फ़िरोज़ाबाद के ही बैंदी पुलिया के पास होने की सूचना मिली। इसी सूचना पर मेहताब की घेराबंदी की गई।

पुलिस को अपनी तरफ आता देख कर मेहताब आलम ने गोलियाँ बरसानी शुरू की। खुद को बचाते हुए पुलिस ने भी आत्मरक्षा में गोली चलाई जो मेहताब के पैर में लगी। गोली लगते ही मेहताब बोला, “अरी अम्मी, मैं मर गया।” इसके बाद मेहताब जमीन में गिर पड़ा जिसका पुलिस ने गिरफ्तार कर के अस्पताल में इलाज करवाया। उसके पास से तमंचा और कारतूस बरामद हुआ। इलाज के बाद मेहताब को जेल भेज दिया गया है। पुलिस पर हमला करने के मामले में भी मेहताब पर एक अलग से FIR दर्ज हुई है। इस मामले में उस पर BNS की धारा 109 (1) के साथ आर्म्स एक्ट लगाया गया है।

मंदिर में घुस कर काटा माँ काली की मूर्ति का सिर, त्रिपुरा में हिंसा में आधा दर्जन घायल: कई वाहनों और घरों में आगजनी-तोड़फोड़

त्रिपुरा के पश्चिमी क्षेत्र स्थित रानीरबाजार में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ काली माता के मंदिर में घुस कर तोड़फोड़ के बाद अशांति फैल गई। गुस्साए लोगों ने घरों और वाहनों में तोड़फोड़ की है। लगभग आधे दर्जन लोगों को चोटें आईं हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना रविवार (25 अगस्त, 2024) की है। इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है और हालात काबू करने के लिए घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना रानीरबाजार इलाके के कटराइबारी गाँव की है। यहाँ बना काली माता का एक मंदिर आसपास के ग्रामीणों की श्रद्धा का मुख्य केंद्र है। यह मंदिर 30 साल पुराना बताया जा रहा है। रविवार (25 अगस्त) की सुबह जब श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुँचे तो उन्होंने देवी काली की मूर्ति का सिर कटा हुआ पाया। थोड़ी ही देर में इस घटना की खबर आसपास फ़ैल गई। लोग मंदिर पर जुट कर विरोध-प्रदर्शन करते हुए आरोपित को खोज कर कठोर कार्रवाई की माँग करने लगे।

इसी बीच हालत बेकाबू हो गए। कुछ लोगों के एक समूह ने घरों में आगजनी और तोड़फोड़ शुरू कर दिया। इस से क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव फ़ैल गया। हिंसक भीड़ ने कटराइबारी, दुर्गा नगर और आस्था मंगल गाँवों को निशाना बनाया। करीब 9 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। आधे दर्जन अन्य मकानों में लूटपाट की गई है। इसी हिंसा में लगभग 1 दर्जन दो और चार पहिया वाहनों को जला दिया गया। हिंसा की चपेट में आ कर 5-6 लोग घायल भी हुए हैं।

हालात खराब होता देख कर मौके पर भारी पुलिस फ़ोर्स पहुँची। तनाव को देखते हुए तमाम सीनियर अधिकारियों के साथ फायर ब्रिगेड के साथ CRPF और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) की टीमें भी तैनात कर दी गईं हैं। हालात को सामान्य करने के लिए दोनों पक्षों के बुजुर्गों ने पहल की कोशिश की। हालाँकि यह पहन कामयाब नहीं रही और तनाव बरकरार रहा। कुछ लोगों का कहना है कि हमलावर स्थानीय नहीं बल्कि बाहरी थे। प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

कर्फ्यू का आदेश

इस मामले में सोमवार (26 अगस्त) को तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों के बुजुर्गों की एक बार फिर से मीटिंग हुई। पुलिस के तमाम सीनियर अधिकारियों के साथ भारतीय जनता पार्टी के मंत्री सुशांत चौधरी ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा दिया। प्रशासन ने लोगों से शाँति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। घटना का स्वतः संज्ञान ले कर पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई कर रही है। हमलावरों को चिन्हित कर के उनकी धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है।

‘…सबका विश्वास, सबका प्रयास’: BJP ने ‘किसान आंदोलन’ पर कंगना रनौत के बयान से जताई असहमति, कहा – उन्हें पार्टी की नीतियों पर बोलने की अनुमति नहीं

भाजपा ने अपने सांसद कंगना रनौत के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने ‘किसान आंदोलन’ के संबंध में कहा था कि उस दौरान बलात्कार और हत्या की घटनाएँ हुई थीं। अब भाजपा ने आधिकारिक बयान जारी कर के खुद को इससे अलग कर लिया है। भाजपा ने कहा है कि सांसद कंगना रनौत द्वारा ‘किसान परिप्रेक्ष्य’ में दिया गया बयान पार्टी का मत नहीं है। साथ ही पार्टी ने कंगना रनौत के बयान से असहमति भी व्यक्त की है।

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि पार्टी की ओर से नीतिगत विषयों पर बोलने के लिए न तो कंगना रनौत को अनुमति है और न ही वो बयान देने के लिए अधिकृत हैं। साथ ही BJP ने कंगना रनौत को ये भी निर्देश दिया है कि भविष्य में वो इस प्रकार का बयान न दें। पार्टी ने दोहराया कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ तथा सामाजिक समरसता के सिद्धांतों पर चलने के लिए कृतसंकल्पत है। कॉन्ग्रेस लगातार कंगना रनौत के बयान का विरोध कर रही थी।

‘तनु वेड्स मनु’ और ‘क्वीन’ की अभिनेत्री ने कहा कि यहाँ भी बांग्लादेश की स्थिति आते देर नहीं लगती। अगर हमारे शीर्ष नेतृत्व सशक्त नहीं होती तो यहाँ जो ‘किसान आंदोलन’ हुआ वहाँ पर लाशें तकली हुई थीं और बलात्कार हो रहे थे। जब किसानों के हितकारी बिल वापस लिए गए थे तो पूरा देश हैरान रह गया था। वो किसान आज भी वहाँ बैठे हुए हैं। उनकी लंबी प्लानिंग थी, जैसी बांग्लादेश में हुई थी। चीन और अमेरिका जैसी विदेशी शक्तियाँ यहाँ काम कर रही हैं। फ़िल्मी लोगों को लगता है कि देश जाए भाँड़ में, उनकी दुकान चलती रहे।

कंगना रनौत ने इस दौरान ये भी कहा था कि फ़िल्मी लोगों को पता होना चाहिए कि देश नहीं रहेगा तो वो भी नहीं बचेंगे। अब कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि भाजपा को कंगना रनौत को पार्टी से निकालना चाहिए। बता दें कि इन्हीं सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत के लिए लोकसभा चुनाव के समय अश्लील शब्द का प्रयोग किया था। इसके बाद उन्हें इंस्टाग्राम पोस्ट डिलीट करना पड़ा था। अब वही कॉन्ग्रेस पार्टी कंगना रनौत के नाम पर भाजपा को घेर रही है।