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बाढ़ के पानी में जनता को बचाने उतर गई बीजेपी की महिला MLA, वीडियो देख नेटिजन्स बोले- अच्छे नेता की यही पहचान: क्रिकेटर रवींद्र जडेजा ने कहा- मुझे आप पर गर्व

गुजरात बीते 4-5 दिनों से भारी बारिश के कारण बाढ़ से प्रभावित है। कई गाँवों में तो 10 से 12 फीट पानी आ गया है। 30 से ज्यादा लोग बाढ़ के कारण दम तोड़ चुके हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी की विधायक रिवाबा रवींद्र सिंह जडेजा की एक वीडियो सामने आई है।

इस वीडियो में वो बाढ़ के पानी में उतरकर फँसे लोगों को बचाती नजर आ रही हैं। देख सकते हैं कि वो बाढ़ के पानी के भीतर हैं और घर में फँसे लोगों को रेस्क्यू करवाने का काम कर रही हैं। वीडियो को खुद रिवाबा ने शेयर करते हुए कहा- अगर हमारा काबू नियति पर न हो तो हम लोगों की मदद तो कर ही सकते हैं।

उनकी वीडियो देखने के बाद लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। उनके पति रवींद्र सिंह जडेजा ने वीडियो देख कहा कि उन्हें अपनी पत्नी पर गर्व है। वहीं लोग कह रहे हैं- “अच्छे लीडर की यही पहचान है …मुसीबत में जनता का साथ देना।”

एक यूजर ने कहा- आप हीरा हैं। सालों बाद जामनगर को कोई आप जैसा नेता मिला है। आपको बहुत दूर तक जाना है ।

कुलदीप रावत लिखते हैं- विधायक हो तो ऐसा। गुजरात के जामनगर में लोगों की मदद के लिए पानी में उतर गईं।

एडी बॉस इस वीडियो को देख कहते हैं- “भारत का हर विधायक-सांसद अगर ऐसे ही सुख दुःख में जनता के साथ रहे तो रामराज्य आने से कौन रोकेगा।”

बता दें कि भारी बारिश के कारण गुजरात में बिगड़ते हालातों के कारण वहाँ एनडीआरएफ, सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय तट रक्षक बलों की सहायता से राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। प्रधानमंत्री ने स्थिति का जायजा लेने के लिए गुजरात सीएम भूपेंद्र पटेल से बात की है।

इस समय में गुजरात में 11 जिले रेड अलर्ट, 22 जिले येलो अलर्ट पर हैं। वहीं मरने वालों की संख्या 35 हो गई हैं। बचाव कार्य में जुटी टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों से 17800 लोगों को निकाला है। गुजरात का अहमदाबाद, जामनगर, देवभूमि द्वारिका, पंचमहाल, अरवल्ली, डांग, सुरेंद्रनगर, दाहोद, खेडा, भरुच, आणंद, महीसागर, वडोदरा, गांधीनगर तथा मोरबी इस समय बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है।

जिनकी धर्म में आस्था हो, जिन्हें वेद-शास्त्रों का ज्ञान हो उनके नियंत्रण में होने चाहिए मंदिर: इलाहाबाद हाई कोर्ट, कहा- वकीलों और जिला प्रशासन से मुक्ति का समय आ गया

एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हार्ई कोर्ट ने कहा है कि मथुरा के मंदिरों के प्रबंधन एवं उसके नियंत्रण से अधिवक्ताओं और जिला प्रशासन को बाहर रखना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों का प्रबंधन एवं उसका संचालन धार्मिक बिरादरी के व्यक्तियों द्वारा न करके बाहरी लोगों द्वारा किया जाएगा तो लोगों की आस्था खत्म हो जाएगी।

देवेंद्र कुमार शर्मा और अन्य बनाम रुचि तिवारी एसीजे मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा कि मंदिरों से जुड़े विवादों से जुड़े मुकदमों का जल्द से जल्द निपटारा करने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मथुरा के मंदिरों एवं ट्रस्टों के प्रबंधन में रिसीवर बनने को लेकर वकीलों में होड़ मची हुई है। 

पीठ ने कहा कि मंदिरों को ‘मथुरा न्यायालय के अधिवक्ताओं के चंगुल’ से मुक्त करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को एक रिसीवर नियुक्त करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए, जो मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा हो और जिसका देवता के प्रति धार्मिक झुकाव हो। इसके साथ ही उसे वेदों और शास्त्रों का भी अच्छा ज्ञान होना चाहिए।

दरअसल, न्यायालय के संज्ञान में आया कि मथुरा की अदालतों में मंदिरों से संबंधित कुल 197 दीवानी मुकदमे लंबित हैं। इस पर न्यायालय ने कहा कि 197 मंदिरों में से वृंदावन, गोवर्धन, बलदेव, गोकुल, बरसाना और मठ में स्थित मंदिरों से संबंधित मुकदमे 1923 से 2024 तक के हैं।

कोर्ट ने कहा, “वृंदावन, गोवर्धन और बरसाना के प्रसिद्ध मंदिरों में मथुरा न्यायालय के अधिवक्ताओं को रिसीवर नियुक्त किया गया है। रिसीवर का हित मुकदमे को लंबित रखने में निहित है। सिविल कार्यवाही को समाप्त करने का कोई प्रयास नहीं किया जाता है, क्योंकि मंदिर प्रशासन का पूरा नियंत्रण रिसीवर के हाथों में होता है। अधिकांश मुकदमे मंदिरों के प्रबंधन और रिसीवर की नियुक्ति के संबंध में हैं।”

अदालत ने कहा कि मथुरा में ‘रिसीवरशिप’ एक नया मानदंड बन गया है, क्योंकि अधिकांश प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर कानूनी लड़ाई की चपेट में हैं। इसके कारण अदालतों ने मंदिर ट्रस्ट, उसके शेबैत और समिति को उनके मामलों का प्रबंधन करने से रोक दिया है। उन्होंने कहा कि एक प्रैक्टिसिंग वकील मंदिरों को पर्याप्त समय नहीं दे सकता।

हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में कौशल के साथ-साथ पूर्ण समर्पण और समर्पण की आवश्यकता होती है। न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा, “मुकदमे को लंबा खींचने से मंदिरों में विवाद और बढ़ रहे हैं। इससे मंदिरों में अधिवक्ताओं एवं जिला प्रशासन की अप्रत्यक्ष भागीदारी हो रही है, जो हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के हित में नहीं है।”

फर्जीवाड़ा रोकने को UPSC ने बदला वेरिफिकेशन प्रोसेस, अब होगा आधार सत्यापन: हाई कोर्ट में बोलीं पूजा खेडकर- मेरी नियुक्ति रद्द करने का इन्हें अधिकार नहीं

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित भर्तियों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय़ लिया है। उन्होंने अब अब अभ्यर्थियों के पंजीकरण और परीक्षा के विभिन्न चरणों में स्वैच्छिक आधार पर अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण की अनुमति दे दी।

केंद्र सरकार ने यह फैसला पूजा खेडकर मामला सामने आने के बाद लिया है। पूजा खेडकर ने आईएएस बनने के लिए धोखाधड़ी की थी। इसके बाद यूपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे जिसके बाद अब कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने अधिसूचना जारी की।

नई अधिसूचना के अनुसार, यूपीएससी अब ‘वन टाइम रजिस्ट्रेशन’ पोर्टल पर पंजीकरण के समय और परीक्षा के विभिन्न चरणों में अभ्यर्थियों की पहचान का सत्यापन आधार के माध्यम से करेगा। अभ्यर्थियों के पास आधार सत्यापन के लिए हाँ या ना का विकल्प होगा।

बता दें कि जिन पूजा खेडकर की वजह से यूपीएससी परीक्षा में यह बदलाव हुआ है वो पिछले दिनों काफी ज्यादा सुर्खियों में थीं। उनपर ट्रेनी अधिकारी होते हुए वीआईपी ट्रीटमेंट के लिए आईएएस को परेशान करने के आरोप लगे थे। इसके अलावा उनके ऊपर यूपीएससी में धोखे से एडमिशन लेने की बात भी सामने आई थी। घटना के बाद उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था।

अब वही पूजा खेडकर ने अपनी गलतियाँ मानने की बजाय अपने निलंबन को चुनौती दी है। उन्होंने कहा यूपीएससी के पास उनके खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति नहीं है। यूपीएससी की चार्जशीट पर पूजा खेडकर ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि एक बार नियुक्ति होने के बाद यूपीएससी उम्मीदवारी को अयोग्य घोषित करने की शक्ति खो देता है।

पूजा खेडकर ने कहा कि इस मामले में डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) अकेले ही एक्शन ले सकता है। उन्होंने कहा कि डीओपीटी सीएसई 2022 नियमों के नियम 19 के अनुसार अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1954 और प्रोबेशनर नियमों के तहत कार्रवाई कर सकता है।

उधार की बिजली से बांग्लादेश में जल रही बत्ती, भारतीय कंपनियों का नहीं चुका पा रहा बकाया: ₹9500+ करोड़ की उधारी, सबसे ज्यादा अडानी पावर का

भारत की बिजली कम्पनियों के बांग्लादेश पर ₹9500 करोड़ से अधिक बकाया हैं। बांग्लादेश में हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह पैसा लटका हुआ है। बांग्लादेश पर सबसे बड़ा बकाया अडानी पॉवर का है। भारतीय कम्पनियाँ बांग्लादेश को बड़े बकाए के बावजूद उधार बिजली की आपूर्ति कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश पर अडानी पॉवर, PTC इंडिया, NTPC, SEIL और पॉवर ग्रिड जैसी कम्पनियों के लगभग 1.15 बिलियन डॉलर (लगभग ₹9600 करोड़) बकाया हैं। इनमें से सबसे बड़ा बकाया अडानी पॉवर का है। उसके लगभग 800 मिलियन डॉलर (लगभग ₹6700 करोड़) बांग्लादेश पर बाकी हैं।

अडानी पॉवर के बाद सबसे अधिक पैसा SEIL एनर्जी का हैं। इसके बांग्लादेश पर लगभग ₹150 मिलियन (लगभग ₹1200 करोड़) बाक़ी हैं। इसी तरह PTC इंडिया के 84.5 मिलियन डॉलर (लगभग ₹600 करोड़) और NTPC की तीन यूनिट के कुल 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹800 करोड़) बाक़ी हैं।

भारतीय बिजली कम्पनियों के यह बकाए 30 जून, 2024 तक के हैं। यह कम्पनियाँ बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और बड़ी राशि उधार होने के बावजूद अभी तक बिजली आपूर्ति कर रही हैं। ऐसा वह भारत-बांग्लादेश के पुराने रिश्तों को देखते हुए कर रही हैं।

यदि बांग्लादेश का उधार बढ़ता है, तो इन कम्पनियों को अपने फैसले पर दुबारा विचार करना पड़ सकता है। भारतीय कम्पनियाँ लम्बे समय से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति करती आई हैं। अडानी पॉवर झारखंड के गोड्डा में एक प्लांट के जरिए बांग्लादेश को बिजली देता है।

अडानी पॉवर का यह प्लांट 1.6 गीगावाट क्षमता का है। इसकी पूरी बिजली बांग्लादेश को जाती है। इसने जनवरी 2023 में अपना उत्पादन चालू किया था और यह एक अलग ग्रिड से बांग्लादेश को बिजली देता है। वहीं PTC जैसी कम्पनियाँ बांग्लादेश को 2013 से ही बिजली बेच रही हैं।

इसके अलावा NTPC भी बांग्लादेश को बिजली बेचती है। NTPC ने बांग्लादेश में ही एक प्लांट लगा रखा है जो कि 1300 मेगावाट से अधिक बिजली पैदा करता है। भारत द्वारा दी गई बिजली बांग्लादेश के लिए जरूरी है क्योंकि उसका कपड़ा उद्योग बिजली पर ही आधारित है।

हालाँकि, बढ़ते बकाए के कारण अब आगे इसमें चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने बांग्लादेश को आपूर्ति की जाने वाली बिजली को लेकर नियम बदले थे। इनके तहत अडानी पॉवर यह बिजली भारत में भी बेच सकता है। पहले यह इसे केवल बांग्लादेश को ही दे सकता था।

बिजली आपूर्ति का पैसा बकाया होने की समस्या गंभीर होने के पीछे बांग्लादेश का वर्तमान आर्थिक संकट भी है। सत्ता बदलने के अलावा बांग्लादेश आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। बांग्लादेश की नई सरकार देश में ब्याज दरें बढ़ाने जा रही है ताकि महँगाई से निजात पाई जा सके।

बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा के भण्डार पर भी संकट आ रहा है। इसके लिए बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भी पहुँचा है। IMF से भी बांग्लादेश मदद ले रहा है। इन सबके बीच बांग्लादेश में लगातार हो रही हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा और सड़कों पर अशांति के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर फर्क पड़ा है।

अमेरिकी कंपनी को सेना ने दिया 73 हजार असॉल्ट राइफल का ऑर्डर, भारत की हथियार निर्माता कंपनी हुई निराश: कहा- हमें स्वदेशी उत्पादों पर गर्व नहीं

भारतीय सेना ने अमेरिकी हथियार निर्माता फर्म सिग सॉर को 73,000 अत्याधुनिक असाल्ट राइफल का आर्डर दिया है। यह राइफल सीमा पर तैनात भारतीय सेना के सैनिकों को दी जाएँगी। इससे पहले भी इसी कम्पनी को 72,000 राइफल का ऑर्डर 2019 में दिया जा चुका है।

राइफल का ऑर्डर दोबारा मिलने पर जहाँ अमेरिकी फर्म ने ख़ुशी जताई है, वहीं एक भारतीय हथियार निर्माता ने अपनी निराशा व्यक्त की है। भारतीय फर्म ने कहा है कि हम अपने बनाए सामान में गर्व करना भूल चुके हैं। उन्होंने कई बातें अपनी राइफलों के विषय में बताई हैं।

राइफल निर्माता सिग सॉर ने सोमवार (26 अगस्त, 2024) को एक प्रेस रिलीज में बताया है कि उसे भारतीय सेना की तरफ से 73,000 राइफल का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर सिग सॉर कि SIG-716 राइफल के लिए दिया गया है। फर्म ने बताया है कि वह भारत और अमेरिकी रक्षा एजेंसियों के लिए हथियार बनाती है।

फर्म ने बताया है कि वह ऐसी ही 72,400 राइफल पहले ही भारतीय सेना को बेच चुकी है और नया ऑर्डर पूरा होने पर 1.45 राइफल भारतीय सेना के पास होंगी। फर्म ने कहा है कि वह भारतीय सेना के आधुनिकीकरण प्रोग्राम में हिस्सा बनने पर काफी प्रसन्न हैं।

7.62×51 मिलीमीटर कैलिबर वाली राइफलों के इस ऑर्डर की कुल कीमत ₹837 करोड़ है। इन राइफलों को LOC और LAC पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को दिया जाएगा। अभी यह सैनिक पुरानी INSAS या फिर AK-47 उपयोग कर रहे हैं।

सेना इन पुरानी राइफलों में आने वाली दिक्कत के चलते इन्हें बदल रही है। इसी क्रम में इन विदेशी राइफलों को खरीदा गया है। सिग सॉर के अलावा रूसी AK-203 राइफलों का उत्पादन भारत में ही हो रहा है और इस तरह की 35,000 राइफल सेना को इसी वर्ष मिल गई हैं।

अमेरिकी फर्म से होने वाले इस सौदे को दिसम्बर, 2023 में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली डिफेन्स एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मंजूरी दी थी। अब इस सौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस सौदे के बाद भारत के रक्षा विशेषज्ञों ने अलग-अलग राय दी है।

विशेषज्ञों ने इसे सेना का विदेशी उत्पादों को तरजीह देने का मामला बताया है। वहीं ऐसी ही राइफल बनाने वाली एक फर्म SSS डिफेन्स के CEO विवेक कृष्णन ने भी इसको लेकर अपनी राय दी है। उन्होंने अपनी राइफल और विदेशी राइफलों का खुले तौर पर टेस्ट करने को कहा है।

SSS डिफेन्स के CEO विवेक कृष्णन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट लिख कर कहा, “मेरी इच्छा थी कि सरकार ने इनका और ऑर्डर ना दिया होता। बातचीत करने और भारतीय डिज़ाइन और सामग्री पर ज़ोर देने से आसानी से ही से एक या कई कम्पनी सामने आ जातीं। पहले से ली जा चुकीं राइफल के सामने इसका टेस्ट करना काफ़ी आसान होता।”

उन्होंने कहा कि भले ही यह ऑर्डर विदेशी कम्पनी को मिल गया हो लेकिन हम इससे निराश नहीं होंगे। विवेक कृष्णन ने कहा कि उनकी कम्पनी काफी पहले ही भारत ही नहीं दुनिया भर में हथियार बेचने का फैसला कर चुकी है। उन्होंने बताया कि उनके अलावा और कई कम्पनियाँ भी छोटे हथियार बना रही हैं और मेक इन इंडिया में योगदान दे रही हैं।

विवेक कृष्णन ने कहा है कि जैसी परिस्थतियाँ भारत के सामने हैं, उनमें सेना को उनकी कम्पनी से एक ना एक दिन हथियार खरीदने पड़ेंगे। विवेक कृष्णन ने यह भी कहा कि भारत में पहले केवल सरकारी कम्पनियाँ हथियार बनाती रही हैं और इस कारण से हम अपने उत्पादों पर गर्व नहीं कर पाते।

उन्होंने विदेशी राइफल और अपनी राइफल के टेस्ट की माँग भी की है। विवेक कृष्णन ने कहा, ”हम लंबे समय से अपने खरीददार (सेना) से सुनते आ रहे हैं कि हमारे मेटल उतने अच्छे नहीं हैं या हमारे डिजाइन समय से पीछे हैं। मेरा बस इतना कहना है कि हमारे स्वदेशी हथियार को हर कैलिबर में वैश्विक हथियार के सामने रखें और उसका टेस्ट करें। इसके परिणाम खुले तौर पर बताए जाएँ जैसे बाकी सेनाएँ करती हैं। यह दोनों पक्षों के लिए बढ़िया होगा। क्या यह कोई मुश्किल काम है?”

गौरतलब है कि SSS डिफेन्स P-72 नाम से सिग सॉर वाली श्रेणी में ही राइफल बनाती है। वह इसके अलावा कई प्रकार की स्नाइपर राइफल भी बनाती है। SSS डिफेन्स बीते कुछ समय से लगातार सेना से नए ऑर्डर लेने की कोशिश कर रही है लेकिन सरकारी सौदों की धीमी चाल और अन्य कई वजहों से यह संभव नहीं ही सका है।

बेटी कहकर होटल बुलाया, मिलने पहुँची तो किया यौन शोषण: हिरोइन के खुलासे के बाद एक्टर सिद्दीकी पर रेप का केस, जयसूर्या और वामपंथी MLA मुकेश पर भी FIR

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री इन दिनों खासी बदनाम हो रखी है। डायरेक्टर से लेकर अभिनेता हर कोई सवालों के घेरे में है। हाल में मशहूर फिल्म एक्टर सिद्दीकी के ऊपर भी गंभीर इल्जाम लगा। एक युवा अभिनेत्री ने उनके खिलाफ म्यूजियम पुलिस थाने में रेप की शिकायत दर्ज कराई। मामले को आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत दर्ज किया गया है।

अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि 2016 में वो और उसके माता पिता एक मूवी प्रीमियर के दौरान सिद्दीकी से मिलने गए थे। इसके बाद वो तिरुवनंतपुरम के होटल में गई। जहाँ उनका यौन शोषण हुआ था। युवती ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में 2019 में बताने की कोशिश की थी लेकिन तब उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग झेलनी पड़ी थी। एक्ट्रेस ने अब शिकायत देते हुए पूरे केस की डिटेल दी।

उन्होंने बताया- “मैंने बस प्लस टू कम्प्लीट ही किया था, जब सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने मुझे कॉन्टैक्ट किया। मुझे लगा वह फेक अकाउंट है, लेकिन बाद में पता चला कि वह उनका रियल अकाउंट है। उनकी फिल्म सुखामायीरिकत्ते का प्रीव्यू शो खत्म हुआ था, तब उन्होंने मस्कट होटल में मुझे डिस्कशन के लिए बुलाया था। मैं तब 21 साल की थी। उन्होंने मुझे ‘मोल’ (मलयालम में बेटी) कहकर बुलाया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह मेरे साथ ऐसा करेंगे। जब मैं वहाँ गई, तो उन्होंने मुझे सेक्सुअली हैरेस किया।”

अभिनेत्री कहती हैं कि सिद्दीकी का उन्हें बेटी कहना सब एक जाल था। लेकिन वो होटल से बच निकलने में कामयाब हो गई थीं। उनके अनुसार, सिद्दीकी नंबर एक क्रिमिनल हैं। वह जो भी कर रहे हैं सब झूठ हैं जब हेमा कमेटी रिपोर्ट रिलीज हुई थी, तब मैंने उन्हें बात करते सुना था। अगर वह खुद को आईने में देखें, तो एक क्रिमिनल दिखेगा। उनकी वजह से मैंने अपने सपने और मेंटल हेल्थ खोई है। मैंने जहाँ कहीं भी मदद माँगी, कहीं से मदद नहीं मिली।

बता दें कि सिद्दीकी के खिलाफ शिकायत दर्ज होने से पहले 26 अगस्त 2024 को सिद्दीकी ने भी एक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि एक महिला उनके खिलाफ साजिश रचकर झूठे इल्जाम लगा रही है। हालाँकि शिकायत के एक दिन बाद उन्हें एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) से इस्तीफा देना पड़ा। अब पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की जाँच करेगी। वहीं इससे पहले मलयालम फिल्म अभिनेता जयसूर्या और सीपीआईएम विधायक मुकेश के खिलाफ भी महिला अभिनेत्रियों ने शिकायत दर्ज कराई थी।

मनोरमा की न्यूज के मुताबिक दोनों एक्टर्स के विरुद्ध गैर जमानती धाराओं में केस को दर्ज किया गया था। बताया गया था कि महिला अभिनेत्री को होटल के कमरे में बुलाकर गलत काम काम किया। शिकायतकर्ता ने मामले में शिकायतकर्ता ने सात लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं- मुकेश, जयसूर्या, मनियानपिला राजू,मनियानपिला राजू, एडावेला बाबू, एडवोकेट चंद्रशेखरन, प्रोडक्शन कंट्रोलर विचू और नोबल। शिकायत दर्ज होने के बाद अब इस केस की जाँच की जाँच जारी है।

ट्रेन पलटाने के लिए ट्रैक पर रख दिया लकड़ी का लट्ठा, 2 गिरफ्तारों में ‘किसान नेता’ का बेटा भी: साजिशों पर बोले रेल मंत्री- जाँच जारी, कुछ घटनाएँ परेशान करने वाली

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में ट्रेन की पटरी पर लकड़ी का लट्ठा रखने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक युवक एक किसान नेता का बेटा है। इनकी इस कारस्तानी से एक रेल दुर्घटना होते-होते बची थी। इन दोनों की गिरफ्तारी तब हुई है, जब हाल ही में एक पाकिस्तानी आतंकी ने भारत के भीतर ट्रेनों को पलटाने के मंसूबों पर बात की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे एक गंभीर मुद्दा बताया है और कहा है कि यह गंभीर चलन है।

फर्रुखाबाद पुलिस ने रेल पटरी पर लकड़ी रखने वाले दो युवक देव सिंह राजपूत और मोंटी कश्यप को गिरफ्तार किया है। इनमें से देव सिंह राजपूत भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के नेता कमलेश कुमार का बेटा है। दोनों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह प्रसिद्धि पाने के लिए लकड़ी रख ट्रेन पलटना चाहते थे।

दोनों ने 24 अगस्त, 2024 की रात को कासगंज-फर्रुखाबाद रेल लाइन पर लड़की का बोटा डाला था। इन दोनों ने शराब के नशे में यह काम किया था। बताया गया कि फर्रुखाबाद के भटासा हालत के पास इन्होने यह बोटा डाला था। यहाँ पर पहले आम के कुछ पेड़ गिरे थे, जिनकी लड़की यहीं पड़ी थी। इसी में एक बड़ा टुकड़ा उठा कर इन दोनों ने पटरी पर डाल दिया था।

इसके कुछ ही देर के बाद यहाँ से एक रेलगाड़ी भी गुजरी। इस रेलगाड़ी के इंजन में यह लकड़ी का टुकडा टकरा के फंस गया था। लोको पायलट ने ट्रेन को बचाने के लिए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए थे। इसके बाद इंजन से इसे निकाल कर ट्रेन को आगे रवाना किया गया था। इस दौरान बड़ा हादसा होने से बचा था क्योंकि इस रेलगाड़ी में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे।

घटना के बाद पुलिस ने इस मामले की जाँच चालू की थी। जाँच में सामने आया था कि अरियारा गाँव के निवासी इन दोनों युवकों का यह कारनामा है। इन दोनों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि यह प्रसिद्धि पाने के लिए ट्रेन पलटना चाहते थे और जब ऐसा नहीं हुआ तो यह दिल्ली भागने वाले थे। हालाँकि, यह पहले ही गिरफ्त में आ गए।

यह साजिश ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तानी आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने अपने स्लीपर सेल से ट्रेनों को निशाना बनाने को कहा है। फरहतुल्लाह गोरी ने एक वीडियो जारी करके भारत में ट्रेनों को पलटने के लिए प्रेशर कुकर बम और अन्य तरीके अपनाने को कहा है। गोरी ने ट्रेनों के अलावा पेट्रोलियम पाइपलाइनों को निशाना बनाने को भी कहा है।

उसके बयान के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं। रेल मंत्रालय भी ऐसी घटनाओं पर नजर बनाए हुए है और जाँच भी कर रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसको लेकर कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है, हम हर घटना की विस्तृत जाँच कर रहे हैं। कई घटनाओं में एक चिंताजनक चलन दिख रहा है। रेलवे कोई आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं है। रेलवे और रक्षा ऐसी संस्था हैं जो राजनीति के ऊपर हैं। इसमें कहीं पर कोई भी नकारात्मक घटना होती है तो इस पर सरकार, विपक्ष और मीडिया को साथ आना चाहिए। हम रेलवे को सामान्यतः चलाने का प्रयास कर रहे हैं।”

फर्रुखाबाद के अलावा अलीगढ़ और राजस्थान में भी रेल पटरियों पर सीमेंट के ब्लॉक और पहिया रखने की घटनाएँ सामने आई थीं। राजस्थान में वन्दे भारत ट्रेन पलटने की साजिश की जा रही थी। वहीं अलीगढ़ वाले मामले में अहसान नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया गया था।

कोई मौलवी, कोई आलिम… सब फेक करेंसी से कर रहे थे ‘मजहब’ मजबूत, प्रयागराज के मदरसे में छापे जा रहे थे जाली नोट: ₹100 देने पर मिलते थे 3 नकली नोट

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बुधवार (28 अगस्त 2024) को पुलिस ने नकली नोट बनाने के एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह एक मदरसे से ऑपरेट हो रहा था जहाँ 100-100 रुपए के जाली नोट छापे जा रहे थे। पुलिस ने मदरसे में छापा मार कर 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। इस केस में ओडिशा के जाहिर खान सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों में मदरसे का मौलवी तफसीरुल भी शामिल है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रयागराज जिले के अतरसुइया इलाके की है। यहाँ पर एक मदरसा है जिसका नाम जामिया हबीबिया मस्जिद-ए-आज़म है। पुलिस को पिछले कई दिनों से यहाँ पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। यहाँ पर कई बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था। पुलिस ने इस मदरसे पर बारीक नजर रखनी शुरू कर दी। जब पुलिस को इत्मीनान हो गया कि मदरसे में सब सही नहीं चल रहा तब बुधवार (28 अगस्त) को यहाँ दबिश दी गई।

पुलिस मदरसे के अंदर घुसी तब वहाँ एक प्रिंटिंग मशीन पर 3 लोग कुछ छापते नजर आए। जाँच के बाद पता चला कि तीनों नकली नोटों की छपाई कर रहे थे। इन तीनों से पूछताछ हुई तो इन्होंने इस गैरकानूनी काम में मदरसे के प्रिंसिपल की भी मिलीभगत बताई। 25 वर्षीय प्रिंसिपल का नाम मोहम्मद तफसीरुल है जो पेशे से मौलवी है। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अन्य आरोपितों में 18 वर्षीय मोहम्मद अफ़ज़ल, 18 वर्षीय मोहम्मद शाहिद और 23 वर्षीय जाहिर खान का नाम है।

ज़ाहिर खान उर्फ़ अब्दुल ज़ाहिर मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है। वह मदरसे में आलिम है। पढ़ाई के बाद जाहिर मदरसे में ही पढ़ाने लगा था। वहीं हाईस्कूल पास मोहम्मद अफ़ज़ल के अब्बा मोईद अहमद कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। कक्षा 8 पास मोहम्मद शाहिद मदरसे में मौलवी बनने आया था लेकिन बाद में वह नकली नोट छापने वाले रैकेट से जुड़ गया। हाईस्कूल पास मौलवी तफसीरुल के अब्बा भी मदरसे में पढ़ाते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वो पिछले 3 महीनों से नकली नोटों के इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।

मदरसे की तलाशी ली गई तो वहाँ से 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद हुए। नकली नोट बनाने के लिए प्रिंटर और अन्य मशीनें ओडिशा के भद्रक निवासी अब्दुल ज़ाहिर ने अपने भाई से मँगवाई। ज़ाहिर का भाई भी पहले प्रयागराज में आधार कार्ड बनवाने का काम कर चुका है। 100 रुपयों के नोट में लोग ज्यादा जाँच पड़ताल नहीं करते, यही सोच कर आरोपितों ने इसे छापना शुरू किया था। अधिकतर नोटों को प्रयागराज के अलग-अलग हिस्सों में दुकानरों को धोखे से दिया जाता था।

आरोपितों ने बाजार में कितनी नकली नोट चलाए हैं इसकी जाँच पुलिस कर रही है। अनुमानित राशि लगभग 5 लाख रुपए बताई जा रही है। पकड़े गए आरोपित अपने काले कारोबार को चलाने के लिए युवाओं को अपने साथ जोड़ रहे थे। उनको 100 रुपए असली देने पर 300 रुपए नकली दिए जाते थे। अब पुलिस टीमें इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पड़ताल कर रही है। नकली नोट छापने वाले प्रिंटर व अन्य मशीनों को जब्त कर लिया गया है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इन सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा सिविल लाइंस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 178, 179, 180, 181 और 182 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले की जाँच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम भी पहुँच गई है।

‘मेरे भी घर में बहन-बेटियाँ, कैसे चुप बैठता?’: सुनिए भगवाधारी संन्यासी को, जो तिरंगा लेकर बंगाल पुलिस के सामने डटे रहे

कोलकाता में छात्रों द्वारा बुलाए गए ‘नबन्ना मार्च’ को रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। सड़क पर प्रदर्शनकारियों को पानी की बौछारों से पीछे ढकेलने की कोशिश की गई। इस बीच, एक वीडियो सामने आया, जिसमें हावड़ा पुल पर भगवा वस्त्र पहने एक बुजुर्ग तिरंगा लेकर पुलिस के सामने डटे रहे और पानी की बौछारें झेलते रहे, लेकिन भागे नहीं।

इस मामले में टीएमसी ने सवाल उठाया कि छात्रों के प्रदर्शन में इन बुजुर्ग का क्या काम था? हालाँकि अब वो बुजुर्ग मीडिया के सामने आए हैं। उनका नाम है बलराम बोस। बलराम बोस ने कहा कि छात्रों ने अपने प्रदर्शन में हर घर से एक व्यक्ति को प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया था। मेरे भी घर में बेटी है, बहन हैं। ऐसे में मैं कैसे घर में बैठ सकता था।

बलराम घोष ने एएनआई से बातचीत में कहा, “आंदोलन का आह्वान छात्रों ने किया था, लेकिन कहा गया था कि हर घर से एक व्यक्ति इसमें शामिल हो। मेरे घर में भी महिलाएँ हैं। इसलिए हमें उनकी सुरक्षा के बारे में चिंतित होना चाहिए। अगर समाज अच्छा और सुरक्षित रहेगा, तो महिलाओं का सम्मान होगा। जहाँ महिलाओं का सम्मान नहीं होता, वहाँ भगवान नहीं रहते…आंदोलन में हिस्सा लेते हुए, मेरा मानना ​​था कि हमें अपनी आवाज नबन्ना तक पहुँचानी है।”

उनसे पूछा गया कि वो प्रदर्शन के दौरान पुलिस वालों को क्या इशारा कर रहे थे, इसके जवाब में बलराम घोष ने कहा, “जब पानी का बौछार हो रहा था, तब मेरे मन में अरविंद घोष की बात याद आई कि अगर कोई काम मन से करना हो, तभी करना चाहिए। ऐसे में मेरे मन में उनकी बात आई कि अगर नबन्ना तक हमें अपनी बात पहुँचाती है, तो फिर पहुँचानी है। मैं अगर मर भी जाता, तो कोई बात नहीं। मैं पुलिस वालों से कह रहा था कि जो पुलिस लोग सिस्टम की गुलामी करते हैं, मैं उस गुलामी की हथकड़ी को छोड़कर बाहर आने के लिए कह रहा था। कि आप हमारे साथ नबन्ना चलो, नहीं तो पानी की बौछार हमारे ऊपर करते रहो।”

उन्होंने कहा, “एक सनातनी हूँ, भगवान शिव का भक्त हूँ…मैं नहीं चाहता कि कोई राजनीतिक दल इस आंदोलन को प्रभावित करे या भटकाए। हमें न्याय चाहिए और कुछ नहीं।”

बीजेपी नेत्री लॉकेट चटर्जी ने बलराम घोष का वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए लिखा था, “अराजकता का अंत करो, फासीवाद का अंत करो। हम सभी टीएमसी के अत्याचार का अंत करने की माँग करते हैं। पानी की बौछारों के बीच हाथ में तिरंगा लेकर यह व्यक्ति अत्याचार के खिलाफ अपने दृढ़ निश्चय को दर्शा रहा है। ममता बनर्जी, मैं उनके साथ खड़ी हूँ, राज्य के लोग उनके साथ खड़े हैं और पूरा देश उनके साथ खड़ा है।”

बता दें कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के मामले में न्याय की माँग करते हुए छात्रों ने प्रदर्शन का आह्वान किया था। छात्रों ने ममता बनर्जी के इस्तीफे की माँग करते हुए मंगलवार (27 अगस्त 2024) ‘नबन्ना अभियान’ की घोषणा की थी और नबन्ना बिल्डिंग कूच करने का ऐलान किया था। इस प्रदर्शन को रोकने के लिए कोलकाता पुलिस ने छात्रों पर जमकर लाठीचार्ज किया था और पानी की बौछारों, बैरिकेडिंग की सहायता ली थी। यही नहीं, छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार भी किया गया है, जिसके खिलाफ बीजेपी ने पूरे दिन प्रदर्शन किया और बुधवार (28 अगस्त) को भी ये प्रदर्शन जारी रहा।

स्कूल जा रहीं 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर जंगल में ले गया शादाब और अनस, फिर किया बलात्कार: रोते-रोते परिजनों को बताया हाल

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियों से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप अनस और शादाब पर लगा है। घटना के समय दोनों पीड़िताएँ स्कूल जा रहीं थीं। रास्ते से शादाब और अनस ने पीड़िता को अपहरण कर के बलात्कार किया। पुलिस ने इस केस में केस दर्ज कर के दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (24 अगस्त, 2024) की है।

यह घटना गोंडा जिले थाना क्षेत्र खोंडरे का है। यहाँ 24 अगस्त को एक पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दी है। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि उनकी 13 वर्षीया बेटी सुबह अपनी सहेली के साथ स्कूल गई थी। पीड़िता की सहेली भी हिन्दू है जिसकी मर 16 वर्ष है। आरोप है कि इसी दौरान रास्ते में ही अनस और शादाब नाम के 2 युवकों ने दोनों सहेलियों का अपहरण कर लिया। अनस और शादाब के साथ 2 अन्य अज्ञात लोग भी इस घटना में शामिल थे। अपहरण के लिए बाइकों का प्रयोग किया गया था।

जब पीड़िताओं के परिजनों को इस घटना की जानकारी हुई तो उन्होंने अपनी बेटियों की खोजबीन शुरू कर दी। खोजबीन चल ही रही थी कि जंगल के पास एक पेट्रोल पम्प पर दोनों आरोपित देखे गए। इनके साथ दोनों पीड़िताएँ भी मौजूद थीं। अपने परिजनों को देख कर पीड़िताएँ रोने लगीं। उन्होंने बताया कि अनस और शादाब ने उनके साथ जंगल में रेप किया है। जब पीड़िताओं के परिजनों ने दोनों आरोपितों को पकड़ना चाहा तो वो हाथ छुड़ा कर फरार हो गए। शिकायत में पीड़िता के पिता ने दोनों आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने इस शिकायत पर अनस और शादाब को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं धाराओं 137 (2), 87 और 70 (2) के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। सोमवार (26 अगस्त) को गोंडा पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।