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पाकिस्तान में बैन, अब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का चुनाव लड़ेंगे इमरान खान: जेल से ही चांसलर बनने के लिए दिया आवेदन, 800 साल में पहली बार ऑनलाइन मतदान

पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चांसलर बनने के लिए आवेदन दे दिया है। ये जानकारी इमरान खान के सलाहकार सैयद जुल्फिकार बुखारी ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। 1972 में दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र की पढ़ाई ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी से करने वाले इमरान खान को लेकर बुखारी ने पुष्टि की कि वह यूनिवर्सिटी के चांसलर पद का चुनाव लड़ने को तैयार हो गए हैं।

बुखारी ने बताया कि इमरान खान ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चांसलर इलेक्शन 2024 का आवेदन फॉर्म जमा कर दिया है। अब चुनाव 28 अक्टूबर को होने हैं। बुखारी ने बताया, “अगर इमरान खान चांसलर बनते हैं, तो वह एशियाई मूल के पहले व्यक्ति होंगे। यह सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया और बाकी दुनिया के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।”

इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने भी इस संबंध में ट्वीट किया है। उन्होंने बताया, “पाकिस्तान के राष्ट्रीय हीरो और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, पाकिस्तान की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी पीटीआई के संस्थापक और अध्यक्ष, एक क्रिकेट लीजेंड, एक परोपकारी और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, जेल में रहते हुए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के चांसलर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

मालूम हो कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के 800 सालों के इतिहास में पहली बार चांसलर चुनाव के लिए ऑनलाइन मतदान होगा। इसके लिए आवेदक को 18 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत थी। अब अक्टूबर की शुरुआत में उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की जाएगी।

रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस पद के लिए पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, थेरेसा मे और बोरिस जॉनसन ने भी नामांकन किया है। इसके अलावा कई महिला आवेदन भी इस लिस्ट में शामिल हैं। अगर उनमें से भी कोई चांसलर पद के लिए निर्वाचित होता है तो पहली बार कोई ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में महिला चांसलर बनेगा।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर लॉर्ड क्रिस पैटन थे। उन्होंने इसी साल फरवरी में अपने पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। उन्होंने चांसलर पद की कमान 2003 में संभाली थी। इसके बाद 2024 यानी 21 साल वो इस पद पर रहे और हाल में उन्होंने अपना इस्तीफा दिया। वो इससे पहले हांगकांग के 28वें और अंतिम ब्रिटिश गवर्नर के तौर पर भी काम कर चुके थे

त्रिपुरा में घुसते 7 बांग्लादेशी पकड़े गए, अमेरिकी डॉलर भी मिले: एक अन्य अभियान में 5 भारतीय मददगार समेत 18 घुसपैठिए गिरफ्तार

त्रिपुरा के रास्ते भारत में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ में तेजी आई है। त्रिपुरा पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शनिवार से सोमवार तक 18 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इनकी मदद कर रहे 5 भारतीयों को भी पकड़ा गया है। इस बीच, एक ग्रुप के पास से 1.5 लाख टका और 300 अमेरिकी डॉलर भी रिकवर हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसएफ ने हरनाखोला बॉर्डर ऑउटपोस्ट इलाके से शनिवार (19 अगस्त 2024) की रात 7 बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पार करते समय गिरफ्तार किया है। इनमें से 2 लोग बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिले के हैं, तो पाँच लोग ब्राह्मणबरिया के हैं, जिनमें एक महिला और एक बच्चा भी शामिल है। इनके पास से 1.5 लाख टका बरामद हुई है, तो 300 डॉलर भी इनके कब्जे से बरामद हुआ है। इन्हें पश्चिम त्रिपुरा जिले की सिधाई पुलिस के हवाले कर दिया गया।

शनिवार-रविवार को 18 घुसपैठिए, 5 भारतीय सहायक गिरफ्तार

वहीं, अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिपुरा में शनिवार और रविवार को पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया। त्रिपुरा पुलिस ने सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए 3 अलग-अलग जगहों से 18 बांग्लादेशियों और उनके सहायक 5 भारतीयों को भी गिरफ्तार किया है। सहायक महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) अनंत दास ने कहा, “पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि त्रिपुरा के गुमती जिले के लामप्रपारा में बांग्लादेशी नागरिकों का एक दल मौजूद है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने रविवार को छापेमारी शुरू की और आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।”

इसके अलावा शनिवार (17 अगस्त 2024) को भी बांग्लादेश के सात नागरिकों और उनकी मदद करने वाले पाँच भारतीय नागरिकों को पश्चिमी त्रिपुरा जिले के सिधई क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था, तो एक अलग अभियान के दौरान पश्चिम त्रिपुरा के एमबीबी हवाई अड्डा क्षेत्र से सोमवार को तीन बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया।

बता दें कि बांग्लादेश से सटी सीटा पर 4096 किमी इलाके की रक्षा का जिम्मा बीएसएफ पर है। इसमें असम, मेघायल, त्रिपुरा, मिजोरम और बंगाल का हिस्सा भी शामिल है। पूर्वोत्तर के कई संगठनों ने भी बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए कदम उठाने की माँग को लेकर केंद्र से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि अवैध प्रवासन ने जनसांख्यिकीय गड़बड़ी पैदा की है और पूर्वोत्तर में स्वदेशी समुदायों की पहचान और संस्कृति के लिए खतरा पैदा किया है।

गौरतलब है कि त्रिपुरा के रास्ते भारत में बांग्लादेशियों के घुसपैठ की खबरें आम हैं। अगरतला रेलवे स्टेशन के सहारे लगातार अवैध तरीके से बांग्लादेशी और रोहिंग्या लगातार देश भर में जा रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में ही त्रिपुरा में घुसपैठ करने वाले हजारों बांग्लादेशी और रोहिंग्या को सुरक्षाबलों ने पकड़ा है। बांग्लादेशी घुसपैठिए अगर से ट्रेन के सहारे देश के अन्य हिस्सों में घुस जाते हैं। वो सुरक्षा बलों से बचने के लिए सेकंड क्लास के डिब्बे में सफर करते हैं, इस टिकट के लिए कोई पहचान पत्र नहीं दिखाना होता और फिर वो आगे के सफर पर निकल जाते हैं। हालाँकि त्रिपुरा में लगातार सख्ती की वजह से अब तक हजारों घुसपैठियों को पकड़ा जा चुका है।

इंटरनेट, स्कूल-कॉलेज… सब बंद, फिर भी देवराज की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़ा उदयपुर: कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार, मुस्लिम छात्र ने मार दिया था चाकू

राजस्थान के उदयपुर के सरकारी स्कूल में हुई चाकूबाजी में हिंदू छात्र की सोमवार (19 अगस्त 2024) को मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार उसके पिता और चचेरे भाई ने किया। इस दौरान शव य़ात्रा में जमा हुई भीड़ नारेबाजी करती नजर आई। स्थिति संभालने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात था।

16 अगस्त 2024 को हुई घटना के बाद छात्र एमबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन 19 अगस्त को करीबन 3 बजे उसकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। छात्र की मौत के बाद 24 घंटे तक पूरे उदयपुर शहर, बेदला, बड़गाँव, बलीचा, देबारी, एकलिंगपुरा, कानपुर, ढीकली और बुवाणा में इंटरनेट सेवा निलंबित कर दी गई हैं। बताया जा रहा है कि नेटबंदी इन क्षेत्रों में आज भी रहेगी।

मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया गया है कि मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। इसके अलावा मृतक के परिजनों को 51 लाख रुपए का मुआवाजा और नौकरी देने की बात हुई है। सामने आए विजुअल्स में इलाके में भारी पुलिस बल को तैनात देखा जा सकता है।

क्या हुआ 19 अगस्त को

बताया जा रहा है कि छात्र की मौत से कुछ देर पहले ही उसकी बहन ने उसके हाथ पर राखी बाँधी थी मगर उसके बाद यानी 3 बजे के आसपास छात्र की तबीयत बिगड़ने लगी। 5:30 बजे बच्चे की मौत की खबर आई। 6:00 बजे तक अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बार विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। 7:00 बजे के आसपास परिजनों की माँग पर सहमति बनी और फिर अंतिम संस्कार हुआ।

ड्रोन से रखी गई अंतिम संस्कारी की निगरानी

छात्र की अंतिम यात्रा में उदयपुर रेंज आईजी अजयपाल लांबा समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। प्रशासन ड्रोन से अंतिम संस्कार के दौरान निगरानी रख रहा था। इस घटना के बाद स्कूल-कॉलेजों में सुरक्षा लिहाज से छुट्टी रखी गई है। वहीं समाज के सभी नेताओं ने शांति की अपील भी की है। इस पूरे मामले में आरोपित को पकड़ने के बाद बाल सुधार गृह भेजा गया है। वहीं उसके घर पर बुलडोजर कार्रवाई हुई है

दावा- मुस्लिम छात्र ने किया था चाकू से हमला

गौरतलब है कि उदयपुर शहर के भटियाणी चौहट्टा में शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को सुबह एक सरकारी स्कूल के बाहर एक छात्र ने देवराज नाम के छात्र को चाकू मारकर घायल कर दिया था। बाद में जानकारी आई कि हमला करने वाला छात्र मुस्लिम समुदाय का था। हमले की जानकारी मिलते ही स्कूल के शिक्षक घायल हिंदू छात्र को लेकर महाराणा भूपाल सिंह हॉस्पिटल पहुँचे। वहीं हिंदू संगठन भी इस खबर की जानकारी होते ही सड़कों पर आ गए। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई। देखते ही देखते लोगों में आक्रोश बढ़ता गया और हिंदू कार्यकर्ता बाजार पहुँच गए। इसके बाद लोगों ने घटना के विरोध में बाजार बंद करा दिया और बाद में आरोपित को पकड़कर कार्रवाई हुई।

मध्य प्रदेश में रेलवे ट्रैक पर रखे थे 15 फीट लंबे 3 सरिए, टक्कर होते ही ड्राइवर ने लगाए इमरजेंसी ब्रेक: इसी तरह कानपुर में पलटी थी साबरमती एक्सप्रेस, IB कर रही है जाँच

मध्य प्रदेश में ट्रेन को बेपटरी कर बड़े हादसे की साजिश का मामला सामने आया है। यहाँ रेलवे ट्रैक पर 15 फिट के 3 सरिए रखे गए थे, जिनसे टकराकर ट्रेन डिरेल होकर ट्रैक से उतर सकती थी। ऐसा होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। हालाँकि ट्रेन सरिया के ऊपर से गुजर गई, लेकिन धीमी गति में होने की वजह से कोई हादसा नहीं हुआ। अगर ट्रेन पटरी से उतर जाती, तो जन-धन की बड़ी हानि हो सकती थी।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे को अंजाम देने की कोशिश जबलपुर और नागपुर डिवीजन के बीच स्थित कछपुरा स्टेशन के पास हुई। यहाँ रविवार (18 अगस्त 2024) को नैनपुर-जबलपुर ट्रेन को बेपटरी करने की साजिश रची गई थी। इस ट्रेन के सामने 15 फिट की 3 सरिया ट्रैक पर रखी हुई थी। हालाँकि ट्रेन की स्पीड काफी कम थी, जिसकी वजह से बेपटरी होने की जैसी दुर्घटना नहीं हुई।

कानपुर के बाद निशाने पर एमपी?

बता दें कि कानपुर में शनिवार (17 अगस्त) की रात पटना से अहमदाबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश की गई थी। साबरमती एक्सप्रेस के नीचे करीब 2.30 बजे गोविंदपुरी और भीमसेन स्टेशन के बीच रेलवे की ही पटरी का टुकड़ा रख दिया गया था। पटरी का ये टुकड़ा करीब 3 फिट लंबा था, जिसकी वजह से इंजन ही पटरी से उतर गई थी। रेल की पटरी से टक्कर लगते ही तेज धमाका हुआ था, जिसके बाद ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए थे और ट्रेन बेपटरी हो गई थी। 20 डिब्बे भी पटरी से उतर गए थे। इस हादसे की जानकारी मिलते ही आईबी ने जाँच शुरू कर दी थी, तो एटीएस भी मामले की जाँच कर रही है।

ठीक इसी तर्ज पर एक दिन बाद मध्य प्रदेश में भी ऐसी ही साजिश रची गई थी, जिसमें ट्रेन के सामने 15 फिट की 3 छड़ें रखी गई थी। हालाँकि ट्रेन की रफ्तार काफी कम थी, इसलिए कोई नुकसान नहीं पहुँचा और न ही ट्रेन पटरी से उतरी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

जिस RG Kar अस्पताल में रेप के बाद डॉक्टर की हुई हत्या, उसमें कितने राज दफन? ममता सरकार ने SIT का किया गठन, BJP बोली- ये संदीप घोष को बचाने की चाल

पश्चिम बंगाल के आर जी कर अस्पताल महिला डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद अब वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामले में सुर्खियों में है। पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद ममता सरकार ने निर्णय लिया है कि वो अस्पताल में साल 2021 से लेकर अब तक हुई वित्तीय अनियमतताओं की जाँच कराएँगे। इस क्रम में उन्होंने एक विशेष जाँच दल गठित करने का ऐलान किया, जिसके बाद बीच भाजपा नेता अमित मालवीय ने सवाल उठाए कि पुलिस कब से वित्तीय गड़बड़ की जाँच करने लगी। उन्होंने अंदेशा जताया कि संभव है ये सब सिर्फ बचाने के लिए किया जा रहा हो।

आधिकारिक बयान के अनुसार, बताया गया कि इस एसआईटी को प्रणव कुमार द्वारा हेड किया जाएगा जबकि मुर्शिदाबाद रेंज के डीआईजी वकार रजा, सीआईडी ​​के डीआईजी सोमा दास मित्रा और कोलकाता पुलिस की डीसीपी इंदिरा मुखर्जी इस एसआईटी का हिस्सा होंगे। पैनल को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

इसी जानकारी के सामने आने के बाद बंगाल भाजपा के सह प्रभारी अमित मालवीय ने कहा है- “अब, पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बदनाम प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष द्वारा वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया है। 4 आईपीएस अधिकारी एसआईटी का हिस्सा हैं। पुलिस अधिकारी वित्तीय अपराधों की जाँच कैसे कर सकती है।”

आगे वह लिखते हैं- “यह कुछ और नहीं बल्कि ममता बनर्जी की घोष को बचाने की चाल है। कोलकाता पुलिस संदीप घोष को समय रहते गिरफ्तार कर लेगी, ताकि सीबीआई उन्हें हिरासत में न ले सके… जब तक ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं दे देती तब तक महिला डॉक्टर के रेप और मर्डर की निष्पक्ष जाँच हो ही नहीं सकती। उन्हें इस्तीफा देना ही देना चाहिए।”

गौरतलब है कि बंगाल सरकार द्वारा एसआईटी का गठन ऐसे समय में किया गया है जब आर जीकर मामले की जाँच के दौरान केंद्रीय जाँच ब्यूरो पिछले चार दिनों से अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से पूछताछ कर रही है। इसी घटनाक्रम को देखते हुए माकपा के राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने दावा किया कि एसआईटी का गठन इसलिए किया गया है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पूछताछ के दौरान घोष ने सीबीआई के सामने कई राज उजागर किए होंगे।

2.5 किमी तक स्कूटी सवार युवती का पीछा, धक्का मार गिराने की कोशिश… जिसने भी रोका उसे धमकाया: यूसुफ-फिरोज गिरफ्तार, Video वायरल

आगरा में रक्षा बंधन से ठीक पहले की शाम को यूसुफ और फिरोज ने एक स्कूटी सवार युवती का करीब ढ़ाई किमी तक पीछा किया। वो उसे परेशान करते रहे। यहाँ तक कि स्कूटी में पैर मारकर उन्हें गिराने का भी प्रयास किया। हालाँकि बाद में आगरा पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला रविवार का है। जब शाम के समय विक्टोरिया पार्क से बेलनगंज की ओर जा रही युवती की स्कूटी का पेट्रोल खत्म हो गया। उसने मदद माँगी तो बाइक सवार तीन युवकों ने अपने पैर से स्कूटी को धक्का देकर पेट्रोल पंप तक पहुँचाने में मदद करने लगे। इस बीच, बाइक पर सवार होकर 2 युवक वहाँ पहुँचे और चलती बाइक से ही फब्तियाँ कसने लगे।

युवती की मदद करने वाले युवकों ने विरोध की कोशिश की, तो दोनों दबंगों ने उन्हें धमका दिया। और फिर ट्रैफिक पुलिस के सिपाही राजीव कुमार ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो फिरोज और यूसुफ उनसे भी बहस करने लगे। इसके बाद कॉन्स्ट्रेबल राजीव कुमार ने अपनी बाइक बढ़ाकर आगे पुलिस चौकी को सूचित कर दिया, जिसने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

फिलहाल, आगरा की छत्ता पुलिस ने एंटी रोमिया स्क्वॉड की तरफ से दर्ज कराए गए मामले के आधार पर यूसुफ और फिरोज को जेल भेज दिया है, क्योंकि पीड़ित युवती ने केस दर्ज कराने से इनकार कर दिया था।

दरअसल, कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि पाँचों युवकों ने युवती से छेड़छाड़ की, लेकिन इसमें सच ये है कि बाइक सवार 3 युवक बाईं तरफ से लड़की की मदद के लिए उसकी स्कूटी में धक्का लगा रहे थे, ताकि वो पेट्रोल पंप तक पहुँच जाए, तो बाइक सवार दाईं तरफ से चल रहे 2 युवक छेड़छाड़ कर रहे थे।

इस मामले में छत्ता थाना एसीपी द्वारा वीडियो बाइट भी जारी की गई, जिसमें विस्तार से जानकारी दी गई है। पुलिस ने बताया है कि आरोपित दोनों युवकों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है।

‘दरगाह के मुफ़्ती जावेद ने भारतीय मुद्रा को पैरों से कुचला’: वीडियो वायरल होने के बाद रामपुर पुलिस में शिकायत दर्ज, प्रशासन ने शुरू की जाँच

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में भारतीय मुद्रा के अपमान का मामला सामने आया है। यह अपमान जिले की एक दरगाह पर हुआ है जिसका आरोप यहाँ के सज्जादनशीन पर लगा है। बताया जा रहा है कि आरोपित ने उर्स के मौके पर भारतीय मुद्रा को अपने पैरों तले कुचला है। एक घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शुक्रवार (16 अगस्त, 2024) को राष्ट्रीय शिवशक्ति सेना ने इस वीडियो के आधार पर प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लिया है। एसपी रामपुर ने इस घटना पर केस दर्ज कर के जाँच कराए जाने का आश्वासन दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला रामपुर जिले के थाना क्षेत्र मिलक का है। शुक्रवार को ‘राष्ट्रीय शिवशक्ति सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय गुप्ता पुलिस अधीक्षक रामपुर के कार्यालय पर पहुँचे। उन्होंने एसपी को एक शिकायत पत्र दिया। संजय गुप्ता ने बताया कि भारतीय मुद्रा को पैरों तले रौंदना देशद्रोही और जहालत भरा कृत्य है। संजय गुप्ता के साथ मौजूद एक वकील ने बताया कि मुद्रा को पैरों से मुफ़्ती जावेद ने रौंदा है जिसकी करतूत वायरल वीडियो में साफ देखी जा सकती है। वकील ने इस हरकत से हिन्दू समाज में गुस्सा बताया है।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि पुलिस अधीक्षक रामपुर ने उनकी शिकायत का संज्ञान ले लिया है और मामले की जाँच के साथ जरूरी कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए हैं। पुलिस अधीक्षक रामपुर IPS विद्यासागर मिश्रा ने इस मामले में मीडिया से बताया कि उन्होंने वायरल वीडियो का संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि मिलक थाने के SHO को उचित धाराओं में FIR दर्ज कर के जाँच और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। बकौल पुलिस अधीक्षक पूरे वीडियो की गहराई से पड़ताल करवाई जाएगी और भारतीय मुद्रा के अपमान में शामिल प्रत्येक आरोपित पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

क्या है वायरल वीडियो में

वायरल हो रहा वीडियो मिलक थानाक्षेत्र में आने वाली एक बड़ी दरगाह का है। इसे सालाना उर्स के दौरान बनाया गया बताया जा रहा है। उर्स में कई स्थानों से लोग दरगाह पर जमा होते हैं। बीच में एक जगह खाली है जिसमें आसपास इस्लामी परिधान में मौजूद तमाम लोग नोट फेंक रहे हैं। नोट फेंकने के दौरान कुछ लोग उछल कूद कर रहे हैं तो कुछ लोगों को नाचते देखा जा सकता है। बीच में मुस्लिम ड्रेस में मौजूद एक व्यक्ति फेंके जा रहे उन नोटों को कुचल रहा है।

बैकग्राउंड म्यूजिक में कव्वाली जैसी आवाज आ रही है। इसमें ‘हम दर पे तुम्हारे आए हैं’ भी बोला जा रहा है। बताया जा रहा है कि नोटों को कुचल रहा व्यक्ति दरगाह का सज्जादनशीन मुफ़्ती जावेद है। हालाँकि ये वीडियो कब और कहाँ का है इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ऑपइंडिया वायरल हो रहे इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। प्रशासन की तरफ से इस मामले में आगे की गई कार्रवाई की जानकारी फ़िलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रशासन का पक्ष आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

‘नहीं निकलने देंगे यहाँ से काँवड़, जिसे बुलाना है बुला लाओ’: मुस्लिम बहुल इलाके में नाबालिग ‘भोले’ को मारा थप्पड़, मार्ग में खड़ी कर दी बाइकें

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों द्वारा काँवड़ यात्रियों को रोके जाने के बाद हंगामा खड़ा हो गया। कांवड़ियों ने सड़क पर जाम लगा दिया। इस दौरान हिन्दू एकता जिंदाबाद के नारे लगाए गए। आरोप है कि कांवड़ यात्रा के मार्ग में बाइक लगा कर चुनौती दी गई कि जिसे बुलाना है बुला लोग। पुलिस ने मामले का समाधान करवाया और बाद में कांवड़िये आगे की तरफ बढ़ गए। इस मामले में पुलिस जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है। मामला सोमवार (19 अगस्त 2024) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना अमरोहा जिले के थाना क्षेत्र हसनपुर की है। सोमवार की सुबह लगभग 7 बजे यहाँ लगभग 50 काँवड़ यात्रियों का एक जत्था मुख्य मार्ग से गुजर रहा था। उनके साथ DJ भी चल रहा था जिसमें धार्मिक गाने बज रहे थे। आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने DJ बंद करने के लिए कहा। काँवड़ियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो दोनों तरफ से तनातनी होने लगी। आरोप है कि इस दौरान काँवड़ यात्रा के मार्ग में बाइक खड़ी कर दी गई। साथ ही कांवड़ियों को चुनौती दी गई अब यात्रा इधर से नहीं निकलने देंगे चाहे जिसको बुला लो।

विरोध प्रदर्शन में शामिल कांवड़िया दीपक चौहान ने बताया कि वो हर साल उसी रास्ते के काँवड़ ले कर आते थे लेकिन इस साल उनके रास्ते को रोका गया। आरोप है कि एक नाबालिग बच्चे को चाँटा भी मारा गया है। दीपक ने कहा कि हमें चिंता है कि आने वाले कल में क्या होगा। काँवड़ यात्रियों ने इस अभद्रता के खिलाफ सड़क पर जाम लगा दिया। वो ‘हर हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ के साथ हिन्दू एकता जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।

इस बीच मामले की जानकारी पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को हुई तो वो फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँचे। प्रशासन ने कांवड़ यात्रियों को समझाया और जाम को खुलवाया। कांवड़ियों को प्रशासन ने भरोसा दिया कि आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आखिरकार कांवड़ यात्री फिर से अपने मार्ग पर आगे बढ़ गए। बताया जा रहा है कि पुलिस ने कुल 3 आरोपितों को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक हालात सामान्य हैं और जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

8 साल की छात्रा को मोबाइल पर दिखाया पॉर्न फिर कई बार की गंदी हरकत, मस्जिद में मदरसा बना कर नमाज़ियों के बच्चों को देता था दीनी तालीम: मौलवी शब्बीर धराया

उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक मदरसे के अंदर मौलवी द्वारा नाबालिग छात्रा से छेड़खानी का मामला सामने आया है। पीड़िता की उम्र 8 साल है जिसे आरोपित मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखा कर गंदी हरकतें करता था। आरोपित का नाम शब्बीर रज़ा है जिसने बच्ची को कहीं शिकायत करने पर जान से मार डालने की धमकी भी दी थी। जिस मदरसे में यह वारदात हुई है वो अस्थाई तौर पर संचालित हो रहा था। मामले की शिकायत शुक्रवार (16 अगस्त, 2024) को की गई है। पुलिस ने शब्बीर रज़ा को हिरासत में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना रुद्रपुर के गाँव मलसी की है। यहाँ पर पीलीभीत के थाना क्षेत्र जहानाबाद का रहने वाला मौलवी शब्बीर रज़ा एक अस्थाई मदरसा चलाता है। यह मदरसा एक मस्जिद के अंदर कमरे में बना कर रखा गया है। इसी कमरे में वह ज्यादातर नमाज़ियों के बच्चों को उर्दू के साथ मज़हबी तालीम दिया करता था। 16 अगस्त को एक महिला ने पुलिस में मौलवी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उनकी भी 8 वर्षीया बेटी मौलवी शब्बीर के मदरसे में दीनी तालीम लेने जाती थी।

आरोप है कि मौलवी शब्बीर रज़ा उनकी बेटी को अपने कमरे में ले जाया करता था। यहाँ वो बच्ची को पहले अपने मोबाइल में अश्लील वीडियो दिखाता था फिर उनके साथ गंदी-गंदी हरकतें करता था। जब छात्रा इसका विरोध करती थीं तो उनको चुप रहने का दबाव बनाया जाता था। इसी के साथ किसी से शिकायत करने पर शब्बीर रज़ा छात्रा को कत्ल करने की भी धमकी दिया करता था। मौलवी की इस करतूत से परेशान पीड़िता की तबियत खराब रहने लगी। वो घर लौट कर गुमसुम रहा करती थी।

अपनी बेटी की हालत खराब होती देख कर उसकी अम्मी ने इसकी वजह पूछी लेकिन पीड़िता ने कुछ भी बताने से मना कर दिया। छात्रा की सहेलियों से पूछताछ की गई तो सारी जानकारी सामने आई। उन्होंने मौलवी की सारी करतूत पीड़िता की माँ को बता दी। सहेलियों ने बताया कि छुट्टी होने के बाद मौलवी पीड़िता के अलावा कुछ अन्य बच्चियों को भी अपने कमरे में ले जाया करता था। आखिरकार पीड़िता की माँ ने शब्बीर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाया।

DSP निहारिका ने बताया कि आरोपित मौलवी शब्बीर को हिरासत में ले लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘हिन्दू काफिर और मुशरिक, बहुदेववादियों को मिलेगी सजा’: बिहार सरकार से फंडिंग पा रहे मदरसों में पढ़ाई जा रहीं पाकिस्तान में छपी किताबें, UN से हस्तक्षेप की माँग

बिहार के कुछ मदरसों में मज़हबी कट्टरपंथ की शिक्षा दिए जाने का मामला सामने आया है। रविवार (18 अगस्त, 2024) को यह खुलासा राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने किया है। उन्होंने बताया कि इन मदरसों में हिन्दुओं को काफिर बताया जाता है। यहाँ पढ़ाई जाने वाली कई पुस्तकें तो पाकिस्तान में छपी पाई गईं हैं। खास बात तो ये है कि इन मदरसों को राज्य सरकार पैसे भी दे रही है। प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड को भंग करने की भी माँग उठाई है।

प्रियांक कानूनगो ने रविवार को अपने ‘X’ हैंडल पर कई स्क्रीनशॉट शेयर किए। इन स्क्रीनशॉट के साथ उन्होंने कैप्शन के तौर पर लिखा, “बिहार राज्य में सरकारी फ़ंडिंग से चलने वाले मदरसों में तालिमुल इस्लाम व ऐसी ही अन्य किताबें पढ़ाई जा रहीं हैं। इस किताब में ग़ैर इस्लामिकों को काफ़िर बताया गया है। इन मदरसों में हिंदू बच्चों को भी दाख़िला दिए जाने की सूचना मिली है परंतु बिहार सरकार संख्या अनुपात की अधिकारिक जानकारी नहीं दे रही है।”

प्रियांक कानूनगो ने बिहार मदरसा बोर्ड के हवाले से आगे बताया कि मदरसे का पाठ्यक्रम यूनिसेफ ने तैयार किया है। उन्होंने इसे यूनिसेफ और मदरसा बोर्ड द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण की पराकाष्ठा करार दिया है। बकौल प्रियांक बच्चों के संरक्षण के नाम पर दान और सरकारों से मिले अनुदान से कट्टरवादी पाठ्यक्रम बनाना यूनिसेफ़ का काम नहीं है। उन्होंने यह हरकत भारत के संविधान के खिलाफ बताते हुए मामले की जाँच और निगरानी संयुक्त राष्ट्र द्वारा कराए जाने की माँग उठाई है।”

प्रियांक कानूनगो के मुताबिक बिहार में मौजूद मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल अनेक किताबें पाकिस्तान में छपवाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि मदरसा किसी भी रूप में बच्चों की बुनियादी शिक्षा की जगह नहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई स्कूलों में कराए जाने की वकालत करते हुए उन्होंने कम से कम हिन्दू बच्चों को मदरसरों में न पढ़ाने की अपील की है। अंत में प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड भंग करने की माँग की है। अपने इस ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ उनके कार्यालयों व संयुक्त राष्ट्र संघ को टैग किया है।

क्या छपा है किताबों में

प्रियांक कानूनगो ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं उसके ऊपर तालीम उल इस्लाम (इस्लाम की शिक्षा) हेडलाइन दी गई है। इसके पहले सवाल में ‘तुम्हें किसने बनाया है’ के जवाब में लिखा है ‘अल्लाह ने मुझे और दुनिया की हर चीज बनाई’। एक अन्य सवाल था कि अल्लाह ने दुनिया कैसे बनाई जिसके जवाब में लिखा गया है कि अपनी ताकत और हुक्म से। जो अल्लाह को नहीं मानते उन्हें इस किताब में ‘काफिर’ और किसी और को पूजने वाले लोगों को मुशरिक बताया गया है।

इसी किताब में एक और सवाल कर के पूछा गया है कि क्या बहुदेववादी (एक से ज्यादा देवताओं को मानने वाले) मोक्ष को प्राप्त होते हैं? इसके जवाब में लिखा गया है कि ‘कभी नहीं’। साथ ही कहा गया है कि बहुदेववादियों को सजा मिलती है। इसके अलावा किताबों के कई पन्नों पर इस्लामी प्रतीक छपे हुए हैं। इन प्रतीकों में सऊदी अरब की मस्जिद अल नवाबी भी शामिल है।