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उधर बहनें बाँध कर गईं राखी, इधर देवराज ने तोड़ दिया दम… मुस्लिम छात्र ने गोदा था चाकू, 4 दिन से जीवन-मौत के बीच जूझ रहा था: दलित परिवार में क्रंदन

राजस्थान के उदयपुर में शुक्रवार (16 अगस्त, 2024) को एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले दलित छात्र को उसके सहपाठी ने चाकू घोंप दिया था। आरोपित मुस्लिम समुदाय से है। इस घटना ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया था और शहर के कई हिस्सों में आगजनी की घटनाएँ हुईं थी। गंभीर हालत में पीड़ित छात्र को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहाँ आज सोमवार (19 अगस्त, 2024) को उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद अस्पताल के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मृतक छात्र की माँ ने आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घायल देवराज का इलाज उदयपुर के MB हॉस्पिटल में चल रहा था। पीड़ित की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। सोमवार की दोपहरी में लगभग सवा दो बजे घायल छात्र की सगी बहन सुहानी और चचेरी बहनों ने अस्पताल में आ कर अपने भाई को राखी बाँधी थी। तब उन्होंने देवराज के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की थी। कुछ ही देर बाद लगभग 3 बजे एक बार फिर से देवराज की तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने देवराज को बचाने की बहुत कोशिश की। हालाँकि, ये कोशिशें नाकाम रहीं और देवराज की मृत्यु हो गई।

कुछ ही देर में यह खबर पूरे शहर में फ़ैल गई और लोग अस्पताल के बाहर जुटने लगे। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हॉस्पिटल के साथ-साथ शहर के बाकी हिस्सों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। दलित छात्र की मौत की खबर सुन कर अस्पताल में जिले के तमाम सीनियर प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुँच गए हैं। इसमें उदयपुर ग्रामीण से भाजपा विधायक फूल सिंह मीणा भी शामिल हैं। राजस्थान के गृहमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने बताया कि सरकार सभी जरूरी कार्रवाई कर रही है।

फ़िलहाल देवराज का शव मॉर्च्युरी में रखा गया है। देवराज की माँ मीडिया के सामने आईं हैं। उन्होंने आरोपित को कठोर सजा की माँग की है। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक आरोपित को फाँसी नहीं मिल जाती तब तक वो अपने बच्चे का शव नहीं लेंगी। इस बीच हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों ने अस्पताल के गेट पर नारेबाजी शुरू कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें गुमराह किया है। आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित को कभी दिल्ली तो कभी जयपुर ले जाने के झूठे दावे करते रहे। प्रशासन ने अफवाह न फैलाने की हिदायत देते हुए के लिए शहर के कुछ हिस्सों में इंटरनेट बंद कर दिया है।

बताते चलें कि मृतक और आरोपित दोनों छात्रों की उम्र लगभग 15 साल है। दोनों राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भटि्टयाणी चौहट्‌टा में एक ही क्लास में पढ़ते थे। लंच के दौरान दोनों स्कूल के बाहर निकल गए। इस दौरान मुस्लिम छात्र ने देवराज पर चाकू के दो-तीन वार किए थे। स्कूल की प्रिंसिपल ईशा धर्मावत ने बताया कि लंच के करीब 5 से 7 मिनट बाद स्कूल के बाहर से कुछ छात्र चिल्लाते हुए अंदर आए। उन्होंने कहा, “मैंने तुरंत बाहर जाकर देखा तो एक स्टूडेंट घायल अवस्था में पड़ा था। मेरी स्कूटी पर बैठाकर स्टाफ ने उसे तुरंत हॉस्पिटल पहुँचाया।

RG Kar मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में इससे पहले 5 रहस्यमयी मौतें: दावा – ‘अस्पताल में चल रहा सेक्स-ड्रग्स रैकेट, क्रूर हत्या के बाद शराबी को लाश का रेप करने भेजा’

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक जूनियर महिला डॉक्टर की बलात्कार के बाद क्रूर तरीके से हत्या के बाद पूरा देश उद्वेलित है। पश्चिम बंगाल में तो सभी डॉक्टर और मेडिकलकर्मी हड़ताल पर हैं। इसी बीच अरूप चक्रवर्ती और उदयन गुहा जैसे TMC नेता प्रदर्शनकारियों को ही धमका रहे हैं, आवाज़ उठाने वालों को पश्चिम बंगाल पुलिस गिरफ्तार कर रही है। इस बीच उस अस्पताल को लेकर कई ऐसी बातें पता चली हैं जो दिल दहलाने वाली हैं।

घटना के समय कॉलेज का प्रधानाध्यापक रहे संदीप घोष भी घेरे में हैं, क्योंकि इससे पहले दो-दो बार उनका ट्रांसफर हुआ था और उन्होंने इसे रुकवा दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी कोलकाता पुलिस की जाँच प्रक्रिया पर सवाल उठाया। ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) ने पाया कि अस्पताल में कई खामियाँ थीं, जैसे – रात को ठीक से प्रकाश की व्यवस्था न होना, गार्ड्स की व्यवस्था न होना, गंदे शौचालय। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आंतरिक सूत्रों से कई तरह की बातें पता चल रही हैं।

गरीबों के मददगार थे डॉ राधागोविंद कर

राधागोविंद कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का इतिहास गौरवशाली भी है, साथ ही कलंकित भी है। इसका निर्माण एक ऐसे डॉक्टर के नाम पर हुआ है, जो गरीबों का इलाज करने के लिए कड़ी धूप में भी साइकिल पर कोलकाता में घूमा करते थे। उनके मरीज ऐसे होते थे जो फीस देना तो दूर की बात, दवा खरीदने में भी असमर्थ थे। डॉ राधागोविंद कर विदेश से पढ़ाई कर के लौटे थे। उन्होंने विदेश से डिग्री लेने के बावजूद गाँवों में लोगों का इलाज करना चुना।

वो न सिर्फ गरीबों का फ्री में इलाज करते थे, बल्कि दवा के लिए उन्हें रुपए भी दे देते थे। मार्च 1899 में जब कोलकाता में प्लेग फैला तो डॉ राधागोविंद कर और सिस्टर निवेदिता ने ही इस महामारी में लोगों की सेवा की थी। ब्रिटिश शासित बंगाल में उन्हें चिकित्सा विज्ञान के पुनर्जागरण का श्रेय दिया जाता है। हावड़ा के बेतर में 23 अगस्त, 1852 को जन्मे डॉक्टर RG कर के पिता दुर्गादास ने ढाका में मिडफोर्ड हॉस्पिटल की स्थापना की थी। डॉ RG कर ने हेयर स्कूल से प्रवेश परीक्षा पास कर के सन् 1880 में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था।

इससे पहले भी हो चुकी हैं रहस्यमयी मौतें

अब बात करते हैं इस अस्पताल के कलंकित इतिहास की। यहाँ पहले भी रहस्यमयी मौतें हो चुकी हैं। कभी मेडिकल प्रोफेशनल तो कभी प्रोफेसर तो कभी हाउस स्टाफ तक मरे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संचालित इस अस्पताल अस्पताल में देह-व्यापार का धंधा चलने से लेकर यहाँ ड्रग्स तस्करों तक के सक्रिय रहने की बातें होती रही हैं। 25 अगस्त, 2001 को ऐसी एक घटना हुई थी जब चौथे वर्ष के छात्र सौमित्र विश्वास को छात्रावास के कमरे में ही फंदे से मृत लटका हुआ पाया गया था।

उनकी मौत को भी प्रशासन ने आत्महत्या बताया था, लेकिन तब भी हॉस्टल में अश्लील फिल्मों के निर्माण की बात उड़ी थी। अरोमिता दास और अमित बाला नामक उसके 2 सहपाठियों की गिरफ़्तारी के बावजूद ये मामला अनसुलझा रहा, जबकि कलकत्ता हाईकोर्ट ने CID जाँच का आदेश दिया था। इसी तरह 5 फरवरी, 2003 को अरिजीत दत्ता नामक हाउस स्टाफ ने आत्महत्या की थी। बताया गया कि उसने पहले खुद को हाथ में एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया, फिर कलाई की नस काट ली और फिर छत से कूद गया।

वो बीरभूम के सिउरी के रहने वाले थे। न कोई सुसाइड नोट मिला, न आत्महत्या का कारण पता चला। इस घटना के कुछ ही दिन बाद 16 फरवरी को प्रवीण गुप्ता ने आत्महत्या का प्रयास किया। हरियाणा के प्रवीण मानिकतल्ला स्थित लालमोहन हॉस्टल में रहते थे, उन्होंने अपनी दोनों कलाई की नस काटने का प्रयास किया था। प्रवीण के पिता ने बेटे के किसी बात से परेशान होने की बात कही थी, वहीं पुलिस ने प्रेम-प्रसंग बता कर कहा कि उसने अपनी प्रेमिका को सुसाइड नोट भेजा था। हालाँकि, उसके साथियों ने उसे कभी अवसादग्रस्त नहीं पाया।

इसी तरह 24 अक्टूबर, 2016 को 52 वर्षीय मेडिसिन के प्रोफेसर गौतम पाल का सड़ा-गला शव दक्षिणी दमदम स्थित उनके किराए के घर से बरामद हुआ था। दरवाजा अंदर से बंद था तो हार्ट अटैक से अचानक मौत की बात कह पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया। कोरोना महामारी के दौरान स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा पौलमी साहा की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस ने अस्पताल की छठी मंजिल से कूद कर आत्महत्या की बात कही, सहपाठियों ने उसके अवसाद में होने की बात कही थी। आज तक ये भी रहस्य है।

सौमित्र की माँ ने बताया था कि उनके बेटे को अस्पताल में अवैध गतिविधियों की भनक लगी थी। एक कमरे में ट्राइपॉड और रिफ्लेक्टर भी मिले थे। कॉलेज में शवों के यौन शोषण तक की खबरें आई थीं। 25 वर्षीय पौलमी भी अभी की पीड़िता की तरह ट्रेनी थी। यूपी के ‘यूनाइटेड रेजिडेंट एंड डॉक्टर्स असोसिएशन’ के अध्यक्ष डॉ नीरज मिश्रा ने कहा कि अस्पताल में सेक्स वर्क की बात पता सबको है, लेकिन कोई मुँह नहीं खोलना चाहता।

ऑडियो में दावा – बंगाल के हर मेडिकल कॉलेज में चल रहा घपला

सौमित्र विश्वास की फॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है, ऊपर से नायलन के जिस छोटे धागे से लटके मिले थे वो भी पतला-छोटा था और कहा गया था कि उन्होंने इसे खुद नहीं लगाया होगा। फिर भी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कुछ नहीं निकला। उनके गले में रुमाल ठूँसे होने की बात भी पता चली थी। वहीं लेखिका मधु पूर्णिमा किश्वर ने उक्त कॉलेज की एक डॉक्टर शोमा मुखर्जी के बंगाली ऑडियो का अंग्रेजी अनुवाद शेयर किया है, जिसमें कई खुलासे हुए हैं।

इसमें बताया गया है कि पश्चिम बंगाल के हर कॉलेज में प्रोफेसर छात्रों को पास कराने के लिए पैसे लेते हैं। डॉ संदीप घोष पर सेक्स और ड्रग्स रैकेट चलाने का आरोप है। करोड़ों रुपए फार्मा कंपनियों से वसूले जाते थे और पार्टी फंड में पैसे जाते थे। प्रिंसिपल को TMC का करीबी बताया जा रहा है, वहीं मृत छात्रा का थीसिस जानबूझकर अप्रूव नहीं किया जा रहा था। जानबूझकर 36 घंटे की ड्यूटी पर लगाया गया था। इस घटना में एक लेडी डॉक्टर का हाथ भी सामने आ रहा है। शराबी संजय रॉय को डेड बॉडी का रेप करने के लिए भेजा गया था, ताकि मामले पर पर्दा पड़ जाए।

जिस नवाब सिंह यादव से सपा ने झाड़ा पल्ला, कन्नौज में अखिलेश यादव के साथ उसकी तस्वीरों वाले होर्डिंग: रिपोर्ट में बताया- पीड़िता पर बयान बदलने का बनाया दबाव

नाबालिग से रेप की कोशिश के आरोप में नवाब सिंह यादव की गिरफ्तारी होते ही समाजवादी पार्टी ने उससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी। लेकिन दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है कि कन्नौज में आज भी अखिलेश यादव के साथ नवाब सिंह यादव की तस्वीरों वाले होर्डिंग लगे हुए हैं। इतना ही नहीं उसने अपने रसूख का इस्तेमाल कर पीड़िता पर बयान बदलने का दबाव भी डाला था।

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के इस मामले में रविवार (11 अगस्त 2024) को नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार किया गया था। उसकी पहचान समाजवादी पार्टी के नेता का तौर पर रही है। लेकिन सपा ने केस दर्ज होने के महज 24 घंटों में उससे पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन एक मीडिया संस्थान की ग्राउंड रिपोर्ट में निकल कर सामने आया है कि जिस कॉलेज में रेप की कोशिश का आरोप नवाब सिंह यादव पर है, उसका भी उद्घाटन अखिलेश यादव ने ही किया था।

दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है कि घटना की शिकायत के बाद नवाब सिंह ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर पीड़िता का 24 घंटे मेडिकल नहीं होने दिया। कहा यह भी जा रहा है कि नवाब सिंह लगभग 200 अलग-अलग लोगों की नौकरियाँ लगवा चुका है। नवाब सिंह के रुतबे को देखते हुए ही बड़ी संख्या में पुलिस बल घटनास्थल पर भेजा गया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि जब पुलिस पहुँची तब पीड़िता डरी-सहमी थी। कॉल डिटेल में सामने आया है कि घटना के दिन नवाब सिंह की पीड़िता की बुआ से फोन पर 20 बार बात हुई थी।

बताते चलें कि गिरफ्तारी के समय एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें पीड़िता की बुआ नवाब सिंह से 8000 रुपए का जिक्र कर रही थी। वीडियो में वो बोलीं, “8000 में ले कर आए हैं।” पीड़िता की बुआ और नवाब सिंह दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे, लेकिन पुलिस को देखते ही दोनों सकपका गए थे। पुलिस के बार-बार पूछने पर दोनों अपने रिश्ते के बारे में नहीं बता सके थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कई लोगों इस मामले में इसलिए चुप हैं क्योंकि उन्हें डर है कि जेल से निकलने के बाद नवाब सिंह यादव उनका जीना मुहाल कर देगा। कुछ स्थानीय लोगों ने तो पीड़िता की बुआ पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आधी रात में महिला के अपनी भतीजी के साथ कॉलेज में आने की घटना को संदिग्ध बताया है। कॉलेज के प्रिंसिपल के मुताबिक पुलिस वहाँ लगे CCTV फुटेज को खंगालने के लिए DVR अपने साथ ले गई है। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच और कार्रवाई पूरी निष्पक्षता से चल रही है।

होर्डिंग में अखिलेश यादव के साथ नवाब सिंह यादव

बताते चलें कि नवाब सिंह की गिरफ्तारी के माहज 24 घंटे के अंदर समाजवादी पार्टी ने उनसे पल्ला झाड़ लिया था। सपा के कन्नौज जिलाध्यक्ष ने पत्र जारी कर नवाब सिंह को पार्टी विरोधी बताया था। लेकिन कन्नौज के स्थानीय निवासियों के गले यह बात उतर नहीं रही है। आज भी कन्नौज के चौराहों पर नवाब सिंह की होर्डिंग्स लगी है। इन होर्डिंग्स में अखिलेश यादव सहित समाजवादी पार्टी के तमाम बड़े नेताओं की भी तस्वीरें लगी रहती हैं। सबसे ताजा होर्डिंग तो रक्षाबंधन की बधाई देते हुए लगाई गई है।

कन्नौज में समाजवादी पार्टी कार्यालय के स्टाफ श्याम सुंदर यादव ने भास्कर को बताया कि भले उनके (नवाब) के पास पद नहीं था, लेकिन वो हमेशा सक्रिय हो कर प्रचार किया करते थे। श्याम सुंदर का यह भी दावा है कि नवाब सिंह यादव पार्टी को फंडिंग भी करते थे। नवाब सिंह के कॉलेज में बने कार्यालय में भी मुलायम सिंह यादव की बड़ी सी तस्वीर लगी रहती है। बताया जा रहा है कि यहीं से नवाब सिंह यादव अपनी राजनैतिक गतिविधियाँ भी चलाता था।

कोई कह रहा उँगली तोड़ने की बात तो कोई कह रहा पब्लिक करेगी डॉक्टरों पर हमला: धमकी पर उतरे TMC नेता, आलोचना करने पर वाली छात्रा गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बलात्कार एवं हत्या के मामले में राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस ने अब इस घटना पर आवाज़ उठाने वालों पर ही निशाना साधना शुरू कर दिया है। अब TMC सांसद अरूप चक्रवर्ती ने प्रदर्शनकारियों को धमकाते हुए कहा है कि हड़ताल से नाराज़ होकर अगर लोग हमला कर देते हैं तो सरकार डॉक्टरों को नहीं बचाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के नाम पर आप तो अपने घर जा सकते हैं या कोई अपने बॉयफ्रेंड के साथ जा सकती है।

अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि अगर कोई मरीज हड़ताल की वजह से मरता है कि इन डॉक्टरों को जनाक्रोश का सामना करना पड़ेगा, फिर हम आपको नहीं बचाएँगे। उन्होंने बाँकुरा में एक रैली के दौरान ये बयान दिया। रैली के बाद भी वो मीडिया के सामने अपने बयान को लेकर कायम रहे। उन्होंने कहा विरोध के नाम पर ये डॉक्टर बाहर जा रहे हैं। 14 अगस्त को घटनास्थल पर गुंडों की एक भीड़ पहुँच गई थी। प्रदर्शनकारियों को पीटा गया है, साथ ही अस्पताल में तोड़फोड़ मचाई गई थी।

इसी तरह TMC नेता उदयन गुहा ने कहा था कि ममता बनर्जी की तरफ जो लोग उँगलियाँ उठा रहे हैं, उनकी उँगलियाँ तोड़ दी जाएँगी। उधर पश्चिम बंगाल पुलिस इस घटना को लेकर आवाज़ उठाने वालों को ही गिरफ्तार कर रही है। एक बीकॉम के द्वितीय वर्ष की छात्रा को ममता बनर्जी को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। कीर्ति शर्मा नामक छात्रा ‘kirtisocial’ यूजरनेम से इंस्टाग्राम अकाउंट चलाती थी। कोलकाता पुलिस ने उस पर मृतका का नाम और तस्वीर उजागर करने का आरोप भी लगाया है।

कीर्ति शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में ममता बनर्जी की तुलना देश में आपातकाल लगाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से की थी। पुलिस का कहना है कि ये टिप्पणियाँ आपत्तिजनक थीं और इनसे समाजिक सामंजस्य बिगड़ने की आशंका है। कोलकाता पुलिस ने सुखेंदु शेखर रे को नोटिस भेज दिया था। साथ ही भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी को भी समन भेजा गया है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जिन्हें-जिन्हें भी नोटिस मिला है वो उन्हें ईमेल के माध्यम से सूचित करें, उन सबको कानूनी मदद मुहैया कराई जाएगी।

17 साल की बेटी का 1 साल से रेप कर रहा था अब्बा, मुँह खोलने पर कत्ल की देता था धमकी: विरोध करने पर बीवी को दिया तीन तलाक, अब UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक नाबालिग लड़की के अब्बा पर अपनी ही बेटी से रेप का आरोप लगा है। यह आरोप पीड़िता की अम्मी ने ही लगाया है। आरोप है कि पीड़िता का अब्बू पिछले 1 साल से अपनी ही बेटी को हवस का शिकार बना रहा था। वह अपनी बेटी को मुँह बंद रखने की धमकी भी देता था। इस मामले के निबटारे के लिए स्थानीय स्तर पर पंचायत भी हुई थी। इसी पंचायत में आरोपित अपनी बीवी को तीन तलाक दे कर फरार हो गया था। शनिवार (17 अगस्त, 2024) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना बिजनौर जिले के थाना क्षेत्र अफजलगढ़ की है। यहाँ 16 अगस्त (शुक्रवार) को 17 वर्षीया पीड़िता की अम्मी ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि पीड़िता कुल 3 बहनें और 2 भाई हैं। लगभग 15 दिन पहले पीड़िता ने अपनी अम्मी को बताया कि उसका अब्बू उसके साथ लगभग 1 साल से बलात्कार कर रहा है। इनकार करने पर आरोपित अपनी ही बेटी को डरा-धमका कर चुप करवा देता था। उसने कहीं भी मुँह खोलने पर अपनी बेटी का कत्ल करने की धमकी दी थी।

जब महिला को ये सब पता चला तो उसने अपने शौहर से इस बावत पूछताछ की। इस से आरोपित नाराज हो गया। उसने अपनी बीवी सहित पूरे परिवार को ही खत्म करने की धमकी दी और सबसे मुँह बंद रखने को कहा। आखिरकार पीड़िता की अम्मी ने गुरुवार (15 अगस्त) को इलाके के कुछ मानिंद लोगों को इकट्ठा किया। इस पंचायत में मामले को रखा गया। तब आरोपित ने कोई बात मानने के बजाय सबके आगे ही अपनी बीवी को तीन तलाक दे दिया। इसके बाद वह वहाँ से फरार हो गया।

बिजनौर पुलिस प्रेस नोट

अपने शौहर की इन करतूतों से परेशान हो कर पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और शुक्रवार (16 अगस्त) को मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 और 351 (3) के अलावा तीन तलाक कानून व पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली। फरार आरोपित की तलाश शुरू कर दी गई। आखिरकार शनिवार (17 अगस्त) को आरोपित को दबोच लिया गया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

ममता बनर्जी ने तय किया है ‘रेट कार्ड’, डॉक्टर के रेप-मर्डर में भी डील की कोशिश: पीड़ित पक्ष के वकील का दावा, कहा- कोलकाता पुलिस पूरी तरह फेल

कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर से रेप और हत्या मामले के वकील ने CM ममता बनर्जी पर बड़ा आरोप लगाया है। पीड़िता के वकील ने दावा किया है कि CM ममता बनर्जी ने पैसे देकर यह मामला ठंडा करने की कोशिश की। पीड़िता के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि CM ममता बनर्जी ने रेप पीड़िताओं के लिए रेटकार्ड बनाया है और वह इसके जरिए उनको शांत करवाती हैं। वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस ने कहा है कि राज्य अब महिलाओं के सुरक्षित नहीं है।

कोलकाता की पीड़िता के परिजनों के वकील बिकाश रंजन भट्टाचार्या ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का रोल निंदनीय है। जब भी कहीं कोई रेप की घटना होती है, वह तुरंत ही पीड़ित के परिवार के सम्पर्क में आती हैं और उन्हें पैसा देकर कहती हैं कि सब कुछ हो गया। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि उन्होंने रेप के लिए रेट कार्ड फिक्स कर दिए हैं। रेप पीड़िताओं को जरूर मुआवजा मिलना चाहिए लेकिन वह सब जाँच के बाद होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “ममता बनर्जी गवाहों को खरीदने का प्रयास करती हैं, इस वाले मामले (आर जी कर मेडिकल कॉलेज) में भी यह प्रयास किया गया था। पीड़िता के अभिभावकों ने इसको लेकर मना कर दिया था। उन्होंने मामले को कोर्ट में ले जाने की बात कही थी। जिसके बाद यह मामला CBI के पास चला गया और अब उस की जाँच चल रही है।”

पीड़िता के वकील ने राज्य की पुलिस पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा, “पुलिस कमिश्नर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की कोई जरूरत नहीं थी, वह मामले को नियंत्रण में असफल रहे हैं। घटना के बाद भी पुलिस का रवैया असंतोषजनक था। जब पुलिस लोगों के विचार को रोकने लगे तो साफ़ हो जाता है कि उन्होंने अपना काम ढंग से नहीं किया।”

मामले में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस ने भी राज्य के हालातों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि बंगाल की सरकार फेल हो गई है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “बंगाल महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। बंगाल की सरकार महिलाओं को सुरक्षित करने में फेल रही है। बंगाल को फिर से उस समय में लाना होगा जब महिलाओं का समाज में सम्माननीय स्थान होता था। महिलाएँ गुंडों से डरी हुई हैं। राज्य की सरकार इस मुद्दे को लेकर असंवेदनशील है।”

राज्यपाल CV आनंद बोस ने कहा कि मामले में हाई कोर्ट ने भी अपनी चिंताएँ जताई हैं। उन्होंने कहा कि मैं राज्यपाल के रूप में अपना कर्तव्य निभाऊंगा। राज्यपाल बोस ने पीड़िता के परिवार के प्रति अपनी संवेदना भी प्रकट की है। इससे पहले इस मामले में पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें पीड़िता को मारने से पहले उसके साथ बर्बरता का जिक्र था।

गौरतलब है कि कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली एक PG मेडिकल छात्रा का शव 9 अगस्त को अर्धनग्न अवस्था मिला था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे। पोस्टमार्टम में साफ़ हुआ था कि छात्रा के साथ रेप हुआ है और फिर उसकी नृशंसता से हत्या कर दी गई।

इस मामले में कॉलेज और पुलिस प्रशासन पर शुरुआत में ढिलाई बरतने के के आरोप हैं। मामले में हीलाहवाली से क्षुब्ध होकर इसकी जाँच कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को सौंप दी थी। इस बीच लगातार छात्र इस मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी और न्याय के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। मामले में ममता बनर्जी सरकार पर प्रश्न उठ रहे हैं।

‘तू च$री है, औकात ही क्या है’: डॉक्टर शाहनवाज ने जाटव समाज की नर्स से क्लीनिक में ही किया बलात्कार, बुर्के वाली मेहनाज और जुनैद ने दिया साथ

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक अस्पताल के अंदर वंचित जाति (SC वर्ग) की नर्स से रेप का मामला सामने आया है। जाटव बिरादरी की महिला से बलात्कार का आरोप अस्पताल के डॉक्टर शाहनवाज पर लगा है। मस्जिद के सामने चलने वाले हॉस्पिटल के स्टाफ जुनैद और एक अन्य महिलाकर्मी मेहनाज़ पर भी दुष्कर्म में साथ देने का आरोप लगा है। घटना शनिवार (17 अगस्त, 2024) की है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना मुरादाबाद जिले के थाना क्षेत्र ठाकुरद्वारा की है। 18 अगस्त, 2024 (रविवार) को पीड़िता की माँ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि उनकी 20 वर्षीया बेटी धोबियों वाली मस्जिद के सामने चलने वाले ABM हॉस्पिटल में पिछले 10 महीने से नर्स का काम कर रही है। 17 अगस्त को पीड़िता नाइट ड्यूटी पर शाम 7 बजे अस्पताल गई थी। अस्पताल में अक्सर बुर्के में दिखने वाली एक अन्य स्टाफ मेहनाज़ ने पीड़िता को कुछ जरूरी काम बताते हुए डॉक्टर शाहनवाज के पास जाने के लिए कहा।

पीड़िता ने मना कर दिया तो मेहनाज़ ने फिर से उन्हें डॉक्टर शाहनवाज के अस्पताल के ऊपर बने कमरे में जाने के लिए कहा। इस बार अस्पताल के एक अन्य स्टाफ जुनैद ने भी पीड़िता पर शाहनवाज के पास जाने का दबाव बनाया। आरोप है कि मना करने के बाद मेहनाज़ जबरन पीड़िता को शाहनवाज के कमरे में ले गई। रात में लगभग 12:30 पर कमरा बंद कर दिया गया। इसके बाद शाहनवाज ने पीड़िता से बलात्कार किया। पीड़िता ने विरोध किया और चीखी-चिल्लाई लेकिन न तो आरोपित पर उसका कोई फर्क पड़ा और न ही अन्य किसी ने उसकी मदद की।

बलात्कार के बाद शाहनवाज ने पीड़िता को धमकाते हुए कहा कि अगर कहीं मुँह खोला तो जान से हाथ धोना पड़ेगा। इसी के साथ उसने चुप रहने के लिए पैसों का भी लालच दिया। आरोपित डॉक्टर ने पीड़िता नर्स का मोबाइल भी अपने पास छिपा लिया। सुबह जब सीनियर नर्स अस्पताल आई तो पीड़िता ने अपने साथ हुआ पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद सुबह 10 बजे पीड़िता अपने घर पहुँची। इस दौरान पीड़िता की तबियत काफी खराब थी। उन्होंने अपनी माँ आरोपितों की सारी करतूत बता दी।

शिकायत में पीड़िता की माँ ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर शाहनवाज ने उनकी बेटी से कहा, “तू च$री है। तुम लोगों की औकात ही क्या है।” रात भर अपनी बेटी को बंधक बनाने और उसके साथ प्रताड़ना और रेप की शिकायत करते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने शाहनवाज, मेहनाज और जुनैद पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (2), 64, 351 (2) और 127 (2) के साथ SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

हुमायूँ वाली ‘सेक्युलर मूर्खता’ की सुधा मूर्ति भी हुईं शिकार, आप जानिए रक्षाबंधन का असली इतिहास: इंद्र-शची और राजा बलि से जुड़ा है इसका महत्व

प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है, जो भाई-बहन के बीच के प्यार को प्रगाढ़ करने वाला त्योहार है। जहाँ बहन अपने भाई की रक्षा के लिए उसे राखी बाँधती है, वहीं बहन अपने भाई की रक्षा का वचन देता है। ‘बृहत्’ नामक YouTube चैनल पर कविता कृष्ण मीगामा ने हिन्दू साहित्य के जानकार डॉ श्रीनिवास जम्मालमदका से बातचीत की, जिन्होंने इस पर्व के इतिहास को लेकर कई जानकारियाँ दी। उन्होंने इससे जुड़ी प्रथाओं की भी बात की। सुधा मूर्ति जैसी राज्यसभा सांसद भी हुमायूँ को कर्णावती द्वारा रखी भेजने की कहानी फैलाती हैं, ऐसे में सच जानना ज़रूरी है।

रक्षाबंधन को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से भी जाना जाता रहा है। ‘श्री कामेश्वरी फाउंडेशन’ के सह-संस्थापक और ‘सिद्धांत नॉलेज फाउंडेशन’ से जुड़े डॉ श्रीनिवास ने बताया कि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों जैसे आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ये त्योहार पहले लोकप्रिय नहीं था। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन सिर्फ सांस्कृतिक प्रथा ही नहीं बल्कि धार्मिक पर्व है जिसका पुराणों में भी जिक्र है। उन्होंने बताया कि ‘भविष्य पुराण’ के उत्तर-पर्व में भी इसका जिक्र है।

उन्होंने बताया कि महर्षि वेद व्यास ने कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद श्रीकृष्ण से कहा था कि वो युधिष्ठिर को व्रतों के लिए मार्गदर्शन करें, ताकि उनसे जो भी पाप हुए हैं वो धुल जाएँ। इसमें रक्षाबंधन का भी जिक्र है। इसी तरह चक्रव्रती बलि का जिक्र है, जिन्हें जब इंद्र ने हराया तो वो गुरु शुक्राचार्य के पास कारण जानने के लिए पहुँचे। शुक्राचार्य ने पाया कि इंद्र की पत्नी शची अपने पति को राखी बाँधती हैं, इसीलिए इंद्र अजेय हैं। शुक्राचार्य ने बलि से 1 वर्ष के लिए आक्रमण न करने को कहा और श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को समझाया कि श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर उपवास करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ये सिर्फ भाई-बहन ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण रिश्तों में भी इसका महत्व है। उन्होंने बताया कि इस दिन मध्याह्न काल के बाद राजा को अपने मंत्रियों के साथ बैठना चाहिए और पुरोहितों को इन सबकी रक्षा के लिए उपवास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि रामटेक में गढ़मंदिर के पुजारी उस दिन आने वाले हर श्रद्धालु की रक्षा के लिए उपवास करते हैं। ये प्रचलन पूर्वजों से ही चला आ रहा था, धर्मशास्त्र में भी इसका जिक्र है। उन्होंने समझाया कि ये शारीरिक रक्षा ही नहीं, मानसिक रूप से साथ देने का त्योहार है।

डॉ श्रीनिवास ने समझाया कि अगर कोई अवसाद में है और कोई उसका साथ दे रहा है तो ये भी रक्षाबंधन का संदेश है। इसका सिर्फ ये अर्थ नहीं है कि महिलाएँ पुरुषों से रक्षा माँग रही हैं। उन्होंने इस दौरान मेवाड़ की रानी कर्णावती द्वारा मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजे जाने की घटना को भी काल्पनिक करार दिया। उन्होंने इस दौरान ‘येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल’ मंत्र का जिक्र करते हुए बताया कि राखी बाँधते समय इसका जाप किया जाना चाहिए।

दक्षिण भारत में रक्षाबंधन के अधिक लोकप्रिय न होने का कारण बताते हुए उन्होंने बताया कि रक्षा से जुड़े कई अन्य त्योहार वहाँ चलते आ रहे हैं। दीक्षा लेने के दौरान भी रक्षा का वचन होता है। यजमान उपवास करता है, फिर पुरोहित रक्षासूत्र बाँधते हैं। उन्होंने बताया कि यजमान समस्याओं से बाहर निकलने का सामर्थ्य विकसित करे, इसीलिए ये बाँधा जाता है। उन्होंने ये भी समझाया कि धर्मशास्त्र कहते हैं कि सभी को एक-दूसरे की रक्षा करना चाहिए। उन्होंने राखी के साथ कुमकुम-हल्दी का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने सूती की जगह केला फाइबर, सिल्क या ऊन इस्तेमाल करने की सलाह दी।

तमिलनाडु के मिशनरी स्कूल में लगाया फर्जी NCC कैम्प, 13 छात्राओं का यौन शोषण: पीड़िता से बोला प्रिंसिपल- चुप रहो, LTTE समर्थक पार्टी के कार्यकर्ता समेत 11 गिरफ्तार

तमिलनाडु के एक स्कूल में नाबालिग छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न किया गया। एक छात्रा के साथ यौन शोषण भी हुआ। यह सारा काम एक फर्जी NCC कैम्प के दौरान हुआ। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने स्कूल के प्रधानाध्यापक और NTK पार्टी के एक कार्यकर्ता समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के कृष्णागिरी में स्थित किंग्सले गार्डन्स मैट्रिक हायर सेकेंडरी स्कूल में यह घटना 9 अगस्त, 2024 को हुई। बताया गया कि इस दिन स्कूल में एक NCC का कथित कैम्प लगाया गया था। इसमें 41 बच्चों ने हिस्सा लिया था। इसी कैम्प में 17 छात्राएँ भी थी।

इसी कैम्प में 13 वर्षीय पीड़िता छात्रा ने भी हिस्सा लिया था। पीड़िता समेत सभी लड़कियों को स्कूल के एक ऑडिटोरियम में ठहराया गया था। इसी ऑडिटोरियम में लड़कों को भी ठहराया गया था। बताया गया कि पीड़िता बच्ची को इस कैम्प के एक संयोजक ने अकेले में बुलाकर उसका यौन शोषण किया। अन्य बच्चियों का भी यौन उत्पीड़न इस कैम्प में हुआ।

बच्ची ने इस संबंध में अपनी साथियों से बात की और इस संबंध में स्कूल के प्रधानाध्यापक से शिकायत की। हालाँकि, स्कूल के प्रधानाध्यापक ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लिए बिना इस सबंध में चुप रहने को कहा। इसके बाद बच्चियों ने अपने परिजनों को इस संबंध में बताया।

बच्ची के परिजनों ने मामले को पुलिस के पास दर्ज करवाया जिसके बाद कार्रवाई चालू हुई। पुलिस की जाँच में पता चला कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपित सिवारमन इस कैम्प का संयोजक था। वह NTK पार्टी का सदस्य है। NTK आतंकी समूह LTTE की समर्थक रही है।

पुलिस जाँच में यह भी सामने आया कि यह NCC कैम्प फर्जी था। जिस स्कूल में NCC कैम्प आयोजित किया गया, वह NCC से सम्बद्ध नहीं है। आयोजकों ने स्कूल के प्रशासन को यह विश्वास दिलाया कि यदि वह NCC जैसा ही कैम्प आयोजित करते हैं तो उन्हें NCC मिल जाएगा।

मामले में पुलिस ने सिवारामन समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने स्कूल के प्रधानाध्यापक को भी मामला दबाने के लिए पकड़ा है। गिरफ्तार होने वालों के नाम सतीश कुमार, शिवरामन, जेनिफर, सैमसन वेस्ले, शक्तिवेल, सिंधु, सत्या और सुब्रमणि हैं।

मामले में स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आ गया है। स्थानीय बाल संरक्षण अधिकारी भी पीड़िताओं के बयान दर्ज करने की तैयारी में है। बाक़ी स्कूलों में भी यौन उत्पीड़न के प्रति जागरूकता के लिए भी अभियान चलाए जाएँगे। पुलिस भी और स्कूलों में ऐसे ही कैम्प लगने के एंगल पर जाँच कर रही है।

मनमोहन राज का प्रस्ताव मोदी सरकार में लागू, अब उसे ‘RSS के लोगों की भर्ती’ बता रहे राहुल गाँधी: जानिए क्या है ‘लेटरल एंट्री’ जिस पर कॉन्ग्रेस कर रही गंदी राजनीति

केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकारी पदों पर लेटरल एंट्री के मामले में कॉन्ग्रेस को घेरा है। अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि UPA सरकार ही उच्च पदों पर लेटरल एंट्री का कॉन्सेप्ट लेकर आई थी, जिसे मोदी सरकार और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ा रही है। कॉन्ग्रेस ने मोदी सरकार के 45 पदों पर लेटरल एंट्री करने को लेकर प्रश्न उठाए थे। नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने इसे UPSC की जगह RSS की भर्ती बताया था और आरोप लगाया था कि इसके जरिए सरकार SC-ST और OBC का आरक्षण छीनना चाहती है।

केंद्र सरकार ने क्या बताया?

केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लिखा, “लेटरल एंट्री मामले में कांग्रेस का पाखंड साफ़ जाहिर है। लेटरल एंट्री की अवधारणा को UPA सरकार ही लेकर आई थी। सेकंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफार्म कमीशन 2005 में UPA सरकार के दौरान स्थापित किया गया था। इसके अध्यक्ष वीरप्पा मोईली थे। UPA के बनाए ARC ने उन पदों को भरने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत बताई थी जहाँ अलग तरह के ज्ञान की जरूरत होती है। NDA सरकार ने इसी सिफारिश को लागू करने के लिए एक पारदर्शी तरीका बनाया है, और UPSC के माध्यम से निष्पक्ष भर्ती होगी।”

इससे पहले राहुल गाँधी ने इसे आरक्षण छीनने की कोशिश बताया था। राहुल गाँधी ने लिखा, “नरेंद्र मोदी संघ लोक सेवा आयोग की जगह ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ के ज़रिए लोकसेवकों की भर्ती कर संविधान पर हमला कर रहे हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर लेटरल एंट्री के ज़रिए भर्ती कर खुलेआम SC, ST और OBC वर्ग का आरक्षण छीना जा रहा है। मैंने हमेशा कहा है कि टॉप ब्यूरोक्रेसी समेत देश के सभी शीर्ष पदों पर वंचितों का प्रतिनिधित्व नहीं है, उसे सुधारने के बजाय लेटरल एंट्री द्वारा उन्हें शीर्ष पदों से और दूर किया जा रहा है।”

क्यों हो रहा विवाद?

दरअसल, हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्र सरकार के 45 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला है। यह भर्ती लेटरल एंट्री के जरिए होनी थी। इस भर्ती के अंतर्गत निजी क्षेत्र, सरकारी उपक्रमों या ऐसे ही किसी संगठन में काम करने वाले भारतीयों को लिया जाना है। भर्ती के लिए आवेदन करने वालों की आयु सीमा 40-55 वर्ष रखी गई है और इन्हें 3 वर्ष की सेवाएँ देने के लिए रखा जाएगा। इसके जरिए सरकार सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी भर्ती करना चाहती है।

भर्ती होने वाले वाले उम्मीदवार केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव जैसे पदों तैनात होंगे। इन पदों पर आवेदन के लिए 10-15 वर्षों तक का अनुभव माँगा गया है। इनकी भर्ती के लिए मात्र इनका साक्षात्कार लिया जाएगा। यह भर्ती निकालने के बाद ही विवाद पैदा हुआ। कॉन्ग्रेस ने इसे जहाँ UPSC की भर्ती प्रक्रिया का उल्लंघन बताया तो वहीं सरकार ने इसे UPA की ही नीति के अंतर्गत उठाया गया कदम बताया। इसके लिए अश्विनी वैष्णव ने UPA सरकार की सिफारिशों का हवाला दिया।

क्या है लेटरल एंट्री?

नौकरशाही मे लेटरल एंट्री सरकार के पीछे सरकार की मंशा है कि निजी क्षेत्र के लोगों के अनुभव का लाभ भी उसे मिले। ऐसे अनुभवी लोगों की भर्ती के लिए ही सरकार यह कदम उठा रही है। इसके अंतर्गत सरकार अनुभव के आधार पर इन लोगों की भर्ती करती है। इनको केंद्र सरकार में सचिव स्तर के पद और सुविधाएँ दी जाती हैं। ऐसे आवेदकों की भर्ती के लिए सरकार उनके अनुभव और साक्षात्कार के आधार पर होती है। इनकी सेवा भी नियमित अवधि के लिए होती है और संविदा पर की जाती है। वर्तमान भर्ती में यह सीमा 3 वर्ष रखी गई है।

किसने दिया था लेटरल एंट्री का सुझाव?

UPA सरकार ने वर्ष 2005 में प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) का गठन किया था। इसके अध्यक्ष केन्द्रीय मंत्री वीरप्पा मोईली थे। वीरप्पा मोईली की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने देश के कई क्षेत्रो में सुधार को लेकर अपने सुझाव दिए थे। इन्हीं सुझावों में एक रिपोर्ट प्रशासनिक सुधारों पर आधारित थी। यह रिपोर्ट नवम्बर 2008 में केंद्र सरकार को सौंपी गई थी। लगभग 380 पन्नों की इस रिपोर्ट में लेटरल एंट्री के सुझाव का जिक्र है। इस रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि ARC नौकरशाही के पदों पर लेटरल एंट्री का सुझाव देती है।

UPA सरकार की रिपोर्ट में लेटरल एंट्री का जिक्र
UPA सरकार की रिपोर्ट में लेटरल एंट्री का जिक्र

रिपोर्ट में केंद्र सरकार के कुछ पदों पर 3 वर्षों के लिए लेटरल एंट्री की बात कही गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि निजी क्षेत्र के लोगों को सरकार में काम करने का मौक़ा दिया जाना चाहिए और इसी तरह सरकारी अफसरों को भी बाहरी क्षेत्र में काम करने की छूट दी जानी चाहिए। लेटरल एंट्री की भर्तियो को लेकर आयोग ने कहा था कि इससे उच्च पदों पर काम करने के लिए सरकार को ऐसे लोग मिलेंगे जो उस क्षेत्र के विशेषज्ञ होंगे। इसके लिए अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों का उदाहरण भी दिया गया था।

कब हुई लेटरल एंट्री की शुरुआत?

कॉन्ग्रेस सरकार के अलावा नीति आयोग ने भी 2017 में ऐसी ही सिफारिश की थी। नीति आयोग ने 40 पदों पर लेटरल एंट्री के जरिए भर्ती करने की सिफारिश की थी। 2018 में मोदी सरकार ने पहली बार लेटरल एंट्री के जरिए विशेषज्ञों को सरकार में शामिल करने के लिए विज्ञापन निकाले थे। इसी क्रम में ही इस बार भी 45 अलग-अलग पदों पर भर्ती निकाली गई है।