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24 घंटे में ही सर्वे-सुनवाई सब कर के दे दिया मुस्लिमों में आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में खुलासा, पश्चिम बंगाल की OBC लिस्ट में 65% इस्लामी जातियाँ

पश्चिम बंगाल सरकार ने आवेदन के 24 घंटे के भीतर ही कई मुस्लिम जातियों को OBC आरक्षण दे दिया। आरक्षण देने के लिए की जाने वाली तीन चरण की जाँच भी इसी एक दिन में पूरी हो गई। कुछ मामलों में कोई मुस्लिम जाति आरक्षण माँगे, इससे पहले ही उस जाति का ब्योरा तैयार कर लिया गया।

यह खुलासा पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में दिए गए एक हलफनामे में किया है। बंगाल सरकार ने दावा किया है कि उसने 77 जातियों को आरक्षण देने में कोई गड़बड़ी नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले इस मामले में सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल से आरक्षण से सम्बन्धित जानकारी को कोर्ट के सामने रखने को कहा था।

पश्चिम बंगाल 24 घंटे में मुस्लिम पा गए आरक्षण

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पिछड़ा आयोग ने ऐसे ही एक मामले में खोट्टा मुस्लिम समुदाय को एक ही दिन में आरक्षण देने की सिफारिश कर दी। इस खोट्टा मुस्लिम जाति ने 13 नवम्बर, 2009 को OBC आरक्षण माँगा था। पिछड़ा आयोग ने 24 घंटे के भीतर ही OBC आरक्षण देने की सिफारिश कर दी। नियमानुसार, जब कोई जाति आरक्षण के लिए आवेदन देती है, तो इस संबंध में दो सर्वे और एक बार पिछड़ा आयोग सुनवाई करता है। परन्तु इस मामले में यह सब कार्रवाई 24 घंटे के भीतर पूरी हो गई।

इसी तरह मुस्लिम जमादार समुदाय ने 21 अप्रैल, 2010 को OBC आरक्षण माँगा और उसे इसी दिन आरक्षण मिल गया। इस संबंध में तीन चरणों की प्रक्रिया 24 घंटे की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इसके अलावा मुस्लिमों की जाति गाएन और भाटिया को भी एक दिन के भीतर ही OBC आरक्षण में जोड़ दिया। चुटोर मिस्त्री मुस्लिम समुदाय के लिए पिछड़ा आयोग ने मात्र 4 दिन लिए वहीं 10 से अधिक मुस्लिम जातियों को यही लाभ देने के लिए एक महीना से कम का समय लिया।

प्रक्रिया के उल्लंघन के हैं आरोप

24 घंटे के भीतर आरक्षण देने की इस कदम पर इसलिए प्रश्न उठे हैं क्योंकि यह काफी लम्बी प्रक्रिया होती है। नियमानुसार, जब कोई जाति आरक्षण के लिए आवेदन देती है तो उसे अपनी आबादी, अपनी आबादी वाले क्षेत्र, और अपनी जाति के इतिहास समेत सामाजिक-आर्थिक स्थिति के संबंध में प्रमाण देने पड़ते हैं। इसके बाद पिछड़ा आयोग अपने सदस्यों या फिर राज्य के संस्कृति संस्थान के जरिए इनका एक सर्वे करता है। इसके अलावा एक सर्वे एंथ्रोपोलॉजिस्ट के जरिए भी होता है।

यह दोनों सर्वे पूरे होने के बाद पिछड़ा आयोग इस संबंध में सुनवाई करता है। यदि किसी जाति को आरक्षण दिए जाने के विरोध में कोई दावा प्रस्तुत किया जाता है तो उस पर भी सुनवाई होती है। इसके लिए पहले सार्वजनिक जानकारी भी दी जाती है। इस सर्वे में आरक्षण सम्बन्धी दावे का परीक्षण होता है। इसके बाद यदि आयोग को लगता है कि आवेदक जाति सही में आर्थिक-सामाजिक रूप से पिछड़ी है और इसके प्रमाण हैं तो उसे आरक्षण दिए जाने की सिफारिश की जाती है।

हालाँकि कई मुस्लिम जातियों के आरक्षण के आवेदन करने के 24 घंटे के भीतर यह तीनों चरण पिछड़ा आयोग ने पूरे कर लिए और उन्हें आरक्षण देने की सिफारिश की। पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में दावा किया कि इन तीन चरणों की प्रक्रिया का पालन भी किया गया भले ही आरक्षण 24 घंटे के भीतर ही क्यों ना मिला हो।

मुस्लिम माँगे आरक्षण, उससे पहले ही कर लिया सर्वे

24 घंटे और 4 दिनों के आरक्षण के अलावा कुछ मामलों में मुस्लिम जातियों के आवेदन देने से पहले ही प्रक्रिया पूरी कर ली गई। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की काजी, कोटल, हजारी, लायेक और खस का सर्वे जून, 2015 में ही पूरा हो गया। इन जातियों ने आरक्षण के लिए आवेदन इसके 1-2 वर्ष के बाद दिया। ऐसे में जब उन्होंने आरक्षण माँगा तो ज्यादा समय नहीं लगा। इन मामलों में भी बंगाल सरकार तीन चरण प्रक्रिया पूरे किए जाने का दावा कोर्ट के सामने किया है।

हाई कोर्ट ने रद्द किया था 77 जातियों का आरक्षण

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मई, 2024 में पश्चिम बंगाल में 2010 के बाद जारी हुए 77 जातियों के OBC प्रमाण पत्र रद्द कर दिए थे। इनमें से 75 जातियाँ मुस्लिम थीं। हाई कोर्ट ने यह आरक्षण देने में प्रक्रिया का पालन ना किए जाने की बात कही थी। इन 77 जातियों को OBC आरक्षण दिए जाने पर रोक के खिलाफ ममता बनर्जी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच कर रही है। ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट का फैसला पलटने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 5 अगस्त, 2024 को ममता सरकार से इन जातियों को आरक्षण दिए जाने के आधार को लेकर हलफनामा दायर करने को कहा था। इसी के बाद यह हलफनामा दायर हुए जिसमे 24 घंटे में आरक्षण देने की बात सामने आई।

पश्चिम बंगाल के OBC सूची में हिन्दू से अधिक मुस्लिम जातियाँ

पश्चिम बंगाल के पिछड़ा विभाग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी दिखाती है कि 1994 में पहली बार वामपंथी सरकार ने किसी मुस्लिम जाति को OBC में शामिल करके आरक्षण दिया था। दिसम्बर 1994 में मुस्लिमों की जोलाह (अंसारी-मोमिन) जाति को OBC में शामिल किया गया था। 1995 तक राज्य में कुल 26 जातियों को OBC आरक्षण का लाभ मिलता था।

धीमे धीमे OBC आरक्षण में हिन्दुओं का हिस्सा घटने लगा। वामपंथी सरकार ने 1996 में 1 और मुस्लिम जाति फ़कीर/सेन को OBC आरक्षण दे दिया। इसके बाद 1997 में 4, 1999 में 2 और मुस्लिम जातियों को OBC का दर्जा दे दिया गया। इसके बाद यह सिलसिला तेजी से चालू हो गया। 2002 में 2 और 2009 में 2 और मुस्लिम जातियों को आरक्षण दिया गया।

2010 में वामपंथी सरकार ने 41 मुस्लिम जातियों को OBC में शामिल कर दिया। जहाँ 1994 में 26 में से 1 OBC जाति मुस्लिम थी, वहीं 2010 आते-आते कुल 108 OBC जातियों में से 53 मुस्लिम हो गईं। 2010 के बाद वामपंथी सरकार पश्चिम बंगाल की सत्ता से बेदखल हो गई और ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस की राज्य में सत्ता बनी।

मुस्लिमों को OBC में शामिल किए जाने के रवैये में फिर भी कोई बदलाव नहीं आया। ममता सरकार ने भी यही नीति जारी रखी। ममता सरकार ने 2011 से लेकर 2013 तक 33 और मुस्लिम जातियों को OBC में शामिल कर दिया। इसके बाद राज्य की OBC सूची में शामिल कुल जातियों की संख्या 143 हो गई, इनमें से 86 मुस्लिम थीं।

यह सिलसिला इसके बाद भी जारी रहा। 2014 से लेकर 2022 तक ममता सरकार ने 36 और जातियों को OBC में शामिल किया। इनमें से 32 मुस्लिम जातियाँ थी। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 179 जातियों को OBC आरक्षण मिलता है, इनमें से 117 जातियाँ मुस्लिम हैं।

दिल्ली मेयर के खिलाफ BJP-कॉन्ग्रेस ही नहीं AAP ने भी किया विरोध प्रदर्शन, अपनी ही पार्टी की पार्षद ने घेरते हुए कहा – जनता हमसे नाराज़, आँख मूँदी हुई हैं शैली ओबेरॉय

दिल्ली के मेयर शैली ओबेरॉय के खिलाफ न सिर्फ भाजपा, बल्कि उनकी अपनी ही पार्टी AAP के पार्षद भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा, कॉन्ग्रेस और AAP के पार्षदों – तीनों दलों ने एक सुर में कहा कि दिल्ली की मेयर उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों की तरफ आँख मूँदे हुए हैं। इन पार्षदों का कहना है कि इस कारण उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। भाजपा और कॉन्ग्रेस के अलावा 3 AAP पार्षदों ने मेयर के विरोध में आवाज़ उठाई है। मेयर ने 4 भाजपा पार्षदों को 15 दिन के लिए निलंबित कर दिया है।

बुधवार (21 अगस्त, 2024) को जब MCD की बैठक हुई तो इसमें पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पोस्टर लहराया – “मेयर इंसाफ करो, मैं चुप नहीं रहूँगी। मेरी आवाज़ सुनो।” इसके अलावा ‘आतिशी-शैली ओबेरॉय इस्तीफा दो’ वाले पोस्टर भी लहराए गए। AAP के 3 प्रदर्शनकारी पार्षदों में दिलशाद कॉलोनी की बहन प्रीति भी इसमें शामिल थीं। उन्होंने बताया कि वो पिछले 20 वर्षों से कॉर्पोरेशन के साथ जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस तरह से प्रशासन चलाया जाना उन्होंने कभी नहीं देखा। इस बैठक में मेयर देरी से भी पहुँचीं।

बता दें कि प्रीति इससे पहले 3 बार बतौर निर्दलीय पार्षद MCD में अपनी कॉलोनी का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पहले हम जन-कल्याण के मुद्दों को हाउस में उठाते थे, लेकिन अब ये एक शादी समारोह की तरह हो गया है जहाँ पार्षद जुटते हैं, गाना गाते हैं, ताली बजाते हैं, खाते-पीते हैं और नारेबाजी कर के निकल जाते हैं लेकिन कोई काम नहीं होता। उन्होंने अपने वार्ड में महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण एवं मरम्मत की माँग की।

उन्होंने बताया कि उनके प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। नाराज़ AAP पार्षद ने कहा कि एक तरफ उनकी पार्टी महिलाओं के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करती है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के कल्याण के लिए कुछ करने की बारी आती है तो वो प्रस्ताव को रद्द कर देती है। उन्होंने बताया कि पिछले साल के 75 लाख रुपए की जगह इस वर्ष सिर्फ 18 लाख रुपए के फंड्स आए हैं। मंगलपुरी के AAP पार्षद नरेंद्र कुमार गिरसा ने कहा कि जल-जमाव को लेकर कोई एक्शन नहीं हुआ है, डेंगू के मामले 400 के पार हो गए हैं। मोतीनगर की अलका ढींगरा भी AAP पार्षद हैं, उन्होंने भी मेयर पर आरोप लगाए।

मुंबई में होने वाला था इजरायली फिल्म फेस्टिवल, नसीरुद्दीन शाह जैसों के विरोध के बाद रद्द: 25 वामपंथियों के पत्र के बाद झुका NFDC और NMIC

नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NFDC) ने मुंबई में प्रस्तावित किए जाने वाले इजरायली फिल्म फेस्टिवल को रद्द कर दिया है। यह आयोजन 21-22 अगस्त, 2024 को होना था। इसे नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अन्य लिबरल पत्रकारों-एक्टरों की अपील के बाद रद्द किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इजरायली फिल्म फेस्टिवल मुंबई स्थित नेशनल म्यूजियम ऑफ़ इंडिया सिनेमा में आयोजित किया जाना था। इसमें इजरायली कलाकारों और फिल्मों से उड़े लोगों को को भी शामिल होना था। इसके अलावा इस फेस्टिवल के दौरान इजरायली फिल्मों की स्क्रीनिंग भी होती।

इजरायली फिल्म फेस्टिवल का आयोजन NFDC और NMIC ही मिल कर कर रहा था। हालाँकि, इस फेस्टिवल के आयोजन से पहले ही सिनेमा की लिबरल-वामपंथी लॉबी ने इसका विरोध चालू कर दिया। उन्होंने इसे इजरायल और हमास की लड़ाई से जोड़ दिया और रद्द करने की माँग की।

देश में ‘डर का माहौल’ की बात करने वाले नसीरुद्दीन शाह और सेट पर सेक्स की बात करने वाली उनकी पत्नी रत्ना पाठक शाह ने इस फिल्म फेस्टिवल को रद्द करने की माँग NFDC से की। नसीरुद्दीन के अलावा डाक्यूमेंट्री बनाने वाले आनंद पटवर्धन, नक्सलियों को बचाने का प्रयास कर चुके तुषार गाँधी और किसान आन्दोलन में फेक न्यूज फ़ैलाने वाली कॉन्ग्रेस परस्त एक्टिविस्ट शबनम हाशमी शामिल हैं।

लगभग 25 वामपंथी-लिबरल विचारधारा रखने वाले पत्रकारों, एक्टरों और लेखकों ने इस संबंध में एक पत्र लिखा है। इस पत्र में दावा किया गया है कि इजरायल गाजा के भीतर 1.8 लाख लोगों को मार चुका है। इस आँकड़े के लिए एक स्टडी का हवाला दिया गया है, जिस पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

इस पत्र में कहा गया है, “NFDC द्वारा यह स्क्रीनिंग से ऐसे समय में आयोजित की जा रही है, जब पूरी दुनिया इजरायल के युद्ध अपराधों, गाजा और पूरे फिलिस्तीन में चल रहे नरसंहार की गवाह बन रही है।” इस पत्र में कहा गया है कि भारत फिलिस्तीन को देश मानता है और इजरायल-हमास के बीच लड़ाई में शांति की बात करता रहा है, ऐसे में यह फिल्म फेस्टिवल रद्द हो।

विरोध के बाद बुधवार (21 अगस्त,2024) को यह सूचना सामने आई कि NFDC ने इजरायली फिल्म फेस्टिवल को रद्द कर दिया है। हालाँकि, NFDC की तरफ से इस सम्बन्ध में कोई आधिकारिक बयान नहीं सामने आया है।

उमर एजाज ने महिलाओं के 13000 अश्लील वीडियो बनाए, 2 साल की बच्ची को भी नहीं छोड़ा: अमेरिका में भारतीय मूल का डॉक्टर गिरफ्तार

अमेरिका में पुलिस ने उमर एजाज नाम के भारतीय डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 40 साल के उमर एजाज महिलाओं का अचेत अवस्था में यौन शोषण करता था और हिडेन कैमरे लगाकर उनकी न्यूड तस्वीरें व वीडियोज भी लेता था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को उमर एजाज के पास से जाँच के दौरान एक ही हार्ड ड्राइव से 13000 से ज्यादा वीडियोज मिले हैं जबकि 15 बाहरी डिवाइस भी जब्त हुए हैं। पुलिस इनकी जाँच कर रही है। अभी तक यही पता चला है कि उमर ने 2 साल तक की बच्चियों के वीडियो रिकॉर्ड किए हुए थे।

बताया जा रहा है कि ये मामला उस समय प्रकाश में आया जब एजाज की बीवी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उमर एजाज द्वारा रिकॉर्डेड चिंताजनक सामग्री उपलब्ध कराई। इन्हें देखने के बाद ही पुलिस ने वारंट जारी कर उमर एजाज को गिरफ्तार किया। अब मामले में आगे की जाँच चल रही है। अमेरिका पुलिस शेरीफ माइक बुचार्ड का कहना है कि 40 वर्षीय उमर एजाज किन-किन अपराधों में शामिल है, इसका पता लगाने के लिए तो महीना लग जाएँगे, लेकिन पुलिस पड़ताल कर रही है।

गौरतलब है कि उमर एजाज साल 2011 में वर्किंग वीजा पर बेंगलुरु से अमेरिका आया था। उसके बाद उसने अमेरिका में कई जगह काम किया। एजाज ने एक स्विमिंग क्लब यू चेंजिंग रूम में उसने बच्चों और उनकी माँ के कई वीडियो रिकॉर्ड किए। इतना ही नहीं उसने एक अस्पताल के कमरे में मरीजों के साथ मारपीट भी की थी।अब वह एक फिजिशियन के तौर पर एक कंपनी के साथ पार्टनरशिप में काम कर रहा था और इलाज करने के नाम पर अलग-अलग अस्पतालों में जाता था।

‘महंत ने चाकू दिखाकर मुझे हिन्दू बना दिया’: जो हिना लगा रही थी ये आरोप उसके पति ने बताया- इस्लाम कबूल करवाया, मेरा जबरन खतना कराना चाहती थी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 11 जुलाई 2024 को हिना बी नाम की मुस्लिम लड़की ने विधि-विधान से घर वापसी करने के बाद पलटी मार दी है। हिना ने हिंदू धर्म में घर वापसी कराकर प्रेमी के साथ उसकी शादी कराने वाले पंडित पर उसने जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया है। उधर, लड़की के अब पति बन चुके प्रेमी ने आरोप लगाया है कि हिना और उसके घरवालों ने उसे जबरन मुस्लिम बना दिया है।

दरअसल, 09 जुलाई 2024 को हिना ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म में घर वापसी की थी और अपना नाम बदलकर प्रियंका गुप्ता रख लिया था। इस संबंध में उसने बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम के महंत पंडित केके शंखधर को अपना शपथ पत्र भी दिखाया था। इस शपथ पत्र के आधार पर पंडित शंखधर ने प्रियंका बनी हिना की शादी प्रेम शंकर गुप्ता नाम के उसके प्रेमी के साथ शादी कराई थी।

दोनों की शादी के लगभग डेढ़ महीने बाद हिना ने पंडित शंखधर पर जबरन घर वापसी कराने का आरोप लगाते हुए बरेली पुलिस को शिकायत दी है। इतना ही नहीं, हिनाने अपने पति प्रेम शंकर गुप्ता और अपने जेठ पर भी धोखे में रखकर शादी कराने का आरोप लगाया है। बता दें कि हिना मूलतः उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की रहने वाली है। वहीं, प्रेम शंकर बरेली का निवासी है।

हिना बी द्वारा दिए गए शपथ पत्र का हिस्सा

हिना के आरोपों पर कई इस्लामी और वामपंथी सोशल मीडिया हैंडलों ने हवा दी। हालाँकि, अब इस घटना में नया मोड़ आ गया है। प्रेम शंकर गुप्ता ने अपनी पत्नी हिना बी पर खुद को हिन्दू से मुस्लिम बनाने का आरोप लगाया है। प्रेम शंकर की तरफ से भी बरेली पुलिस को शिकायती पत्र दिया गया है। इस बावत प्रेम शंकर ने पुलिस को सबूत भी मुहैया कराए हैं।

अगत्स्य मुनि आश्रम में हुआ था विवाह

ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले की पड़ताल की है। दरअसल, पीलीभीत की रहने वाली हिना बी ने 11 जुलाई 2024 को बरेली के रहने वाले प्रेम शंकर गुप्ता के साथ अगत्स्य मुनि आश्रम में शादी की थी। तब हिना ने स्टाम्प पेपर पर बना शपथ पत्र देकर बताया था कि उन पर कोई दबाव नहीं है। साथ ही हिना ने खुद को बालिग बताया था और बाकायदा विधि-विधान से हवन-पूजन भी किया था।

पंडित केके शंखधर ने इस पूरे कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई थी। इन तमाम वीडियो फुटेज में हिना बी ने खुशहाल और अपने पति प्रेम शंकर गुप्ता को मिठाई आदि खिलाते देखाई दे रही है। उस कार्यक्रम में UP पुलिस का एक जवान भी मौजूद था, जो पंडित शंखधर की सुरक्षा में तैनात है। ऑपइंडिया के पास इस शादी से संबंधित फोटो एवं वीडियो की कॉपी उपलब्ध है।

शादी के डेढ़ माह बाद पलटी हिना, इस्लामी-वामपंथी हैंडलों ने बनाया माहौल

डेढ़ माह पहले खुद को ख़ुशी-ख़ुशी प्रियंका बताने वाली हिना बी 15 अगस्त के बाद अचानक ही अपनी तमाम बातों और यहाँ तक कि दिए गए शपथ पत्र से पलट गईं। हिना ने बरेली पुलिस में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि प्रेम शंकर गुप्ता और उनके भाई ने खुद को मुस्लिम बताकर अपने जाल में फँसाया था। इसके बाद उसने पंडित केके शंखधर को भी निशाने पर लिया।

शिकायत में हिना का आरोप है कि पंडित केके शंखधर ने उसकी गर्दन पर चाकू रखकर जबरन घर वापसी करवाई थी। हिना की शिकायत का संज्ञान लेकर बरेली पुलिस ने गहराई से जाँच शुरू कर दी है। पुलिस की कोई भी रिपोर्ट आने से पहले ही त्यागी उपनाम लगाने वाले ज़ाकिर अली और वसीम अकरम जैसे हैंडलों ने पंडित केके शंखधर और प्रेम शंकर गुप्ता को दोषी ठहरा दिया।

प्रेम शंकर का जबरन निकाह और जबरन खतना

हिना बी की शिकायत पर अभी पुलिस जाँच कर ही रही थी कि पति प्रेम शंकर गुप्ता ने बरेली के एसएसपी को तहरीर दे दी। तहरीर में उसने कहा है कि शादी के सप्ताह भर बाद हिना ने अपने अब्बा के जहर खा लेने की झूठी कहानी गढ़कर उसे अपने साथ घर ले गई। वहाँ हिना के परिजनों ने बदनामी की बात कहकर प्रेम शंकर को इमोशनल किया।

हिना ने प्रेम शंकर पर इस्लामी तौर तरीकों से फिर से निकाह करने का दबाव बनाया। प्रेम शंकर ने इनकार किया तो 18 जुलाई को उसकी कनपटी पर तमंचा सटाकर हत्या की धमकी दी गई और आखिरकार उसे डराकर शाहजी की मजार पर ले जाया गया। वहाँ पर हिना के साथ उसका जबरन निकाह करवाया गया।

प्रेम शंकर ने बताया कि वहाँ पर पहले से कागजात तैयार करके रखे गए थे। उस पर उसके हस्ताक्षर ले लिया गया उस कागजात पर उसका नाम निहाल खान और धर्म मुस्लिम बताया गया था। इसके बाद वह हिना को लेकर अपने घर आया। हिना ने प्रेम शंकर के घर में इतना क्लेश किया कि उसे अपना परिवार छोड़ना पड़ा।

खतना कराने की कोशिश और आत्महत्या का ख्याल

इसी बीच हिना ने एक मौलवी बुलवाया और अपने पति का जबरन खतना करवाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, प्रेम शंकर के आधार कार्ड बदलवाने की तैयारी कर ली गई थी। खुद को चारों तरफ से घिरता देखकर आखिरकार 12 अगस्त 2024 को प्रेम शंकर गुप्ता जैसे-तैसे करके हिना के घर से भागने में कामयाब रहा। इस दौरान वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया।

भागने के दौरान प्रेम शंकर ने अपने और हिना को एक ऑडियो संदेश भेजा और आत्महत्या कर लेने की बात कही। प्रेम शंकर के परिजन इससे परेशान हो गए और उन्होंने थाना सितारगंज में इसकी शिकायत दे दी। सितारगंज पुलिस हिना के घर पहुँची और प्रेम शंकर के बारे में पूछताछ की। हालाँकि वहाँ से भाग कर तब तक प्रेम शंकर अपने घर बरेली पहुँच चुके थे।

एक्सीडेंट में हत्या की तैयारी का आरोप

अपनी शिकायत में प्रेम शंकर ने आशंका जताई है कि हिना के घर वाले उसे किसी वाहन से कुचल कर हत्या करने की साजिश रच रहे हैं। प्रेम शंकर ने बताया कि यह सब किसी मुस्लिम नेता के इशारे पर किया जा रहा है। पीड़ित ने पुलिस से अपनी और अपने परिवार की जान-माल की रक्षा की गुहार लगाई है। इसके साथ ही धर्मान्तरण की कोशिश कराने में लगे मौलवियों पर भी कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

प्रेम शंकर ने एसएसपी को जो शिकायत पत्र दिया है, उसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। हिना के बाद अब उसके पति प्रेम शंकर द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद बरेली पुलिस इस मामले की भी गहनता से जाँच कर रही है। पुलिस अब दोनों पक्षों की शिकायतों की सत्यता की जाँच कर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

ईश्वर पर पूरा विश्वास और कानून का पूरा सम्मान

ऑपइंडिया ने हिना की शिकायत में आरोपित किए गए अगत्स्य मुनि आश्रम के महंत केके शंखधर से भी बात की। उन्होंने कहा कि बरेली के कुछ कट्टरपंथी हिना को बरगला कर अपना उल्लू सीधा करने और सामाजिक माहौल खराब करने की फ़िराक में हैं। महंत का दावा है कि उनके पास ऐसे तमाम सबूत हैं, जिससे साबित हो जाएगा कि हिना की शिकायत में लगाए गए आरोप झूठे और निराधार हैं।

पंडित शंखधर ने बताया कि उन्होंने वो तमाम वीडियो फुटेज पुलिस को भेज दिए हैं, जिसमें शादी के दौरान हिना बेहद खुश थी। इसी से उसके गले पर चाकू रखने जैसे आरोप निराधार साबित हो रहे हैं। महंत शंखधर ने ऑपइंडिया को भी हिना की शादी के कई फुटेज भेजे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे कार्यक्रम के दौरान उन्हें सुरक्षाकर्मी के तौर पर मिला पुलिस का सरकारी गनर मौके पर मौजूद रहा।

पंडित शंखधर ने पूछा कि क्या पुलिसकर्मी के आगे ही वो किसी की गर्दन पर चाकू रख कर धमकी दे सकते हैं और वह लड़की फोटो एवं वीडियो में खुश नजर आ सकती है? महंत ने खुद को ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखने वाला और कानून का सम्मान करने वाला व्यक्तित्व बताया। हालाँकि, वो अपने खिलाफ झूठी अफवाह उड़ाने वालों के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

टूटेगी झामुमो, झारखंड के पूर्व CM चंपई सोरेन ने किया नई पार्टी बनाने का ऐलान: बोले – नहीं लूँगा संन्यास, अच्छा दोस्त मिले तो साथ बढ़ेंगे आगे

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री खुलकर मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वो नई राजनीतिक पार्टी बना रहे हैं, साथ ही किसी सहयोगी का भी साथ लेंगे। चंपई सोरेन ने बुधवार (21 अगस्त 2024) को हाता क्षेत्र में समर्थकों से मुलाकात के बाद अलग संगठन खड़ा करने की घोषणा कर दी है। उन्होंने ने कहा है कि सात दिन के भीतर पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।

चंपई सोरेन ने कहा कि मैंने तीन विकल्प बताए थे, रिटायरमेंट, संगठन या दोस्त। मैं रिटायर नहीं होऊँगा। मैं पार्टी को मजबूत करूँगा, नई पार्टी बनाऊँगा। पूर्व सीएम चंपई सोरेन ने कहा, “अगर रास्ते में कोई अच्छा दोस्त मिलता है, तो उसके साथ आगे बढ़ूँगा।”

इस दौरान, चुनाव नजदीक होने और नई पार्टी को खड़ा करने के लिए समय कम होने के सवाल पर चंपई सोरेन थोड़ा भड़क उठे। उन्होंने रिपोर्टर से कहा कि उससे आपको क्या परेशानी है? इस बात को उन्होंने दो बार रिपीट भी किया है और कहा कि जब हमारे एक दिन कहने पर यहाँ पर 30-40 हजार कार्यकर्ता आ गए तो आपको क्या परेशानी है?

बता दें कि चंपाई सोरेन अलग-अलग जगहों पर जाकर समर्थकों से मिल रहे हैं। चुनाव नजदीक होने और नई पार्टी को खड़ा करने के लिए समय कम होने के सवाल पर चंपई सोरेन ने कहा कि अगर लोग उनके लिए यहाँ पहुँचे हैं, तो संगठन भी खड़ा हो जाएगा। चंपई सोरेन ने कहा, “मंगलवार से रोड पर हजार-हजार कार्यकर्ता हैं और आज भी 30-40 हजार कार्यकर्ता हैं। ऐसे में नया बनाने में हमको क्या तकलीफ है? इसलिए हम नया भी बना सकते हैं और अच्छा दोस्त मिला तो उसके साथ आगे भी बढ़ सकते हैं।”

चंपई सोरेन से जब यह पूछा गया कि नई पार्टी के बारे में सबकुछ कब तक साफ हो जाएगा? मीडिया के इस सवाल पर चंपई सोरेन ने कहा 15 दिन में। चंपई की इस घोषणा से भाजपा में शामिल होने के कयासों पर अब विराम लग गया है। हालाँकि उन्होंने अभी तक नहीं बताया है कि उनकी पार्टी का क्या नाम होगा।

बता दें कि चंपई सोरेन ने अलग झारखंड राज्य आंदोलन में लंबी लड़ाई लड़ी थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा में कई बार विभाजन के बाद भी वो शिबू सोरेन के साथ डटे रहे थे। पहली बार साल 1991 में वो विधायक बने थे। साल 1991 में उन्होंने निर्दलीय जीत दर्ज की थी बाद में वो जेएमएम में शामिल हो गए। साल 2000 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था लेकिन 2005 के बाद से वो लगातार जीतते रहे हैं।

गौरतलब है कि चंपई सोरेन ने दो फरवरी को झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया था, उनके पूर्ववर्ती हेमंत सोरेन ने धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए जाने से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया था।

हेमंत सोरेन को 28 जून को हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया था। तीन जुलाई को हेमंत सोरेन झामुमो विधायक दल का नेता चुना गया था। इसके बाद चंपई सोरेन ने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया, जिससे हेमंत सोरेन के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। हालाँकि इसके बाद चंपई सोरेन ने खुद के साथ गलत व्यवहार का आरोप लगाते हुए जेएमएम छोड़ने की घोषणा कर दी थी।

जानते हैं ‘स्त्री 2’ का ‘सरकटा’ कौन है? जम्मू कश्मीर के 7.6 फुट लंबे कॉन्स्टेबल ने निभाया ऐसा रोल, देख कर सिनेमा हॉल में सिहर उठे लोग

बॉक्स ऑफिस पर ‘स्त्री 2’ फिल्म सफलता के झंडे गाड़ रही है। इस फिल्म में श्रद्धा कपूर, राजकुमार राव, अपारशक्ति खुराना, पंकज त्रिपाठी जैसे एक्टर दमदार भूमिका हैं। स्त्री-2 फिल्म स्त्री सीरीज की दूसरी फिल्म है, और मैडोक सुपरनेचुरल यूनिवर्स की पाँचवीं फिल्म। इस फिल्म के पहले हिस्से में जहाँ स्त्री का आतंक दिखाया गया था, तो दूसरे हिस्से में ‘सिरकटे का आतंक’ छाया है। ये फिल्म लोगों में डर के साथ गुदगुदी भी पैदा कर रही है।

ये फिल्म देखने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि फिल्म के केंद्र में जो भारी-भरकम कैरेक्टर सिरकटा दिखता है, उसका किरदार आखिर निभाया किसने है? क्यों ये कैरेक्टर न केवल डरावना है, बल्कि बेहद भीमकाय भी है। ऐसे में लोगों के मन में जो सवाल उठ रहा है, उसका जवाब जानना भी जरूरी है। लीजिए, जान लीजिए कि आखिर ‘सिरकटा’ किरदार निभाने वाला एक्टर है कौन?

स्त्री 2 में अपने भीमकाय शरीर से लोगों में सिहरन पैदा करने वाले एक्टर का नाम है सुनील कुमार, जो द ग्रेट खली से भी लंबे हैं। जी हाँ, सुनील कुमार की लंबाई पूरे 7 फुट 6 इंच है। वो जम्मू-कश्मीर पुलिस में बतौर कॉन्स्टेबल काम करते हैं। सुनील कुमार WWE भी जा चुके हैं और स्पोर्ट्स कोटे से जम्मू-कश्मीर पुलिस में नौकरी कर रहे हैं। दरअसल, सुनील कुमार का चेहरा इस फिल्म में इस्तेमाल ही नहीं किया गया, जिसकी वजह से इनके चेहरे को वो चर्चा नहीं मिली, जो इनके भीमकाय शरीर की वजह से इन्हें मिल रही है।

बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील कुमार जम्मू से आते हैं। अपनी लंबाई की वजह से सुनील ‘द ग्रेट खली ऑफ जम्मू’ के नाम से भी जाने जाते हैं। सुनील कुमार को वॉलीबॉल और हैंडबॉल के खिलाड़ी हैं, जिसके दम पर उन्हें स्पोर्ट्स कोटा के तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस में नौकरी मिली है। वो साल 2019 में सुनील WWE ट्राईआउट का हिस्सा रह चुके हैं।

फिल्म के डायरेक्टर अमर कौशिक ने बताया कि कास्टिंग टीम ने सुनील को खोजा था। उन्होंने कहा कि हमें उन्हीं की हाइट जैसा कोई शख्स चाहिए था। कौशिक ने कहा कि हमने उनके बॉडी शॉट्स इस्तेमाल किए हैं। वहीं, सरकटा के चेहरे को सीजीआई यानी ग्राफिक की मदद से बनाया गया है।

‘…तो ज़ाकिर नाइक पर करेंगे कार्रवाई’: मलेशिया के प्रधानमंत्री बोले – आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेगा देश

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भगोड़े प्रचारक जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण को लेकर अपना मत साफ किया है। उन्होंने इस मामले में कहा अगर इस मामले में सबूत मिलने पर आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा है कि अगर भगोड़े कट्टरपंथी इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक से जुड़े मामले में पर्याप्त सबूत पेश किए जाते हैं तो देश ‘आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देगा’।

मंगलवार (20 अगस्त 2024) को 50वें सप्रू हाउस व्याख्यान को संबोधित करते हुए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भगोड़े कट्टरपंथी इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के मामले में कहा, “प्रधानमंत्री ने इस मामले को पहले उठाया था। अब मुद्दा यह है कि मैं किसी एक व्यक्ति के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ, मैं उग्रवाद की भावना, ऐसे सबूतों के बारे में बात कर रहा हूं जो बताते हैं कि किसी व्यक्ति, समूह या गुट या पार्टियों की तरफ से अत्याचार किए गए हैं। ये हमारे लिए चिंता का विषय हैं।” अनवर इब्राहिम ने कहा कि किसी एक मामले की वजह से भारत-मलेशिया के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत होने से नही रोका जा सकेगा।

गौरतलब है कि जुलाई 2016 में बांग्लादेश के ढाका में बम धमाके के बाद जाकिर नाइक भारत से भाग गया था। इस धमाके में 29 लोगों की मौत हुई थी। हमले में शामिल आतंकियों ने कहा था कि वो नाइक के भाषणों से प्रभावित थे। भारत में भगोड़ा घोषित होने के बाद से उसने मलेशिया में शरण ली हुई है। भारत सरकार मलेशिया की सरकार से उसके प्रत्यर्पण के लिए लगातार बातचीत कर रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई परिणाम नहीं आया है। 

जाकिर नाइक पर भारत में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को बढ़ावा देने, धर्मांतरण से जुड़ाव, समाज में नफरत फैलाने, हेट स्पीच सहित कई गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2019 में जाकिर को हिंदुओं और चीनी मलेशियाई लोगों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणी करने के बाद मलेशिया में भाषण देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस सिलसिले में उनसे घंटों पूछताछ भी की गई थी।

पिछले साल ऑपइंडिया ने अपने एक रिपोर्ट में बताया कि कैसे उसने पहले इंग्लैंड के मिडलैंड्स क्षेत्र में लीसेस्टर में हिंसा भड़काने वालों के साथ हाथ मिलाया था। फीफा वर्ल्ड कप 2022 के दौरान कतर ने जाकिर नाइक को निमंत्रण भेजा था। भारत द्वारा इस पर कड़ी आपत्ति जताने के बाद कतर ने सफाई दी थी। कतर ने कहा था कि जाकिर नाइक को दोहा में आयोजित फीफा विश्व कप के कार्यक्रम में आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया गया था।

चलती ऑटो में प्राइवेट पार्ट निकालकर दिखा रहा था ड्राइवर बदरूजमाँ फारूक: गंदी नियत भाँपकर गाड़ी से कूदी PhD की छात्रा, यूनिवर्सिटी के छात्रों ने आरोपित को दबोचा

असम के सिलचर जिले में ऑटो रिक्शा में बैठकर यूनिवर्सिटी से घर लौट रही एक लड़की को ऑटो ड्राइवर बदरूजमाँ फारूक ने अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया। आरोपित की हरकतों से डरकर पीड़िता चलती ऑटो से कूद गई। घटना सोमवार (19 अगस्त 2024) की है। पीड़िता ने इस मामले में पुलिस में दर्ज करवाई गई है। आरोपित ऑटो ड्राइवर को कॉलेज के छात्रों ने खोजकर पुलिस के हवाले कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना रक्षाबंधन के दिन की है। असम यूनिवर्सिटी में PhD की छात्रा ने क्लास खत्म होने के बाद अपने घर इरोनगमारा जाने के लिए निकली। यूनिवर्सिटी के गेट बाहर खड़े एक ऑटो में वह बैठ गई। इस ऑटो को बदरूजमाँ फारूक चला रहा था। ऑटो ड्राइवर बदरूजमाँ ने पीछे की सीट खाली होने के बाद छात्रा को अपने ठीक पीछे बैठने को कहा।

उसकी नियत से अनजान छात्रा वहाँ बैठ गई। जब ऑटो चलने लगी तो रास्ते में बदरूजमाँ ने छात्रा को कई बार गलत तरीके से छूने की कोशिश की। कुछ देर बाद आरोपित ने अपनी पैंट की चेन खोल ली और अपना प्राइवेट पार्ट निकालकर छात्रा को दिखाने लगा। ऑटो ड्राइवर की इस हरकत से छात्रा डर गई और खुद को बचाने के लिए वह चलती हुई ऑटो से बाहर कूद गई।

हालाँकि, ऑटो की रफ्तार कम थी। इसलिए छात्रा को कोई गंभीर चोट नहीं आई। ऑटो से कूदने के बाद पीड़िता सीधे अपने कॉलेज पहुँची और इसके बारे में उन्हें बताया। इसके साथ उसके साथी छात्र-छात्राओं ने इस मामले की जानकरी कॉलेज प्रशासन को दी। इस घटना की जानकारी कॉलेज के अन्य छात्र-छात्राओं को मिली तो वे भड़क गए। उन्होंने एक ग्रुप बनाकर ऑटो ड्राइवर को खोजना शुरू कर दिया।

मंगलवार (20 अगस्त 2024) को छात्रों ने ड्राइवर बदरुजमाँ फारूक को खोज निकाला और उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपित काचर इलाके के बक़िमनगर का रहने वाला है। इस घटना के बाद से कॉलेज के छात्र-छात्राओं में गुस्सा है। उन्होंने पुलिस से छात्राओं की सुरक्षा पुख्ता करने की माँग की है। पुलिस ने आरोपित ड्राइवर को गिरफ्तार करके आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मुस्लिम सहपाठी ने चाकू घोंप कर मार डाला, लेकिन हत्या को ‘जख्म’ बता रहा ‘The Wire’: न्याय माँग रहे हिन्दू संगठनों पर ही मढ़ा दोष, चलाया DM का पुराना बयान

राजस्थान के उदयपुर में एक मुस्लिम छात्र ने अपने हिन्दू सहपाठी को चाकू मार दिया, 4 दिन तक अस्पताल में जूझने के बाद उसकी मौत हो गई। लेकिन, प्रपंची मीडिया संस्थान ‘The Wire’ इसे ‘जख्म’ कह कर प्रचारित कर रहा है, हत्या वाली बात छिपा रहा है। उदयपुर में उक्त छात्र का कड़ी सुरक्षा में अंतिम संस्कार कराया गया। हजारों लोग इसमें शामिल हुए। लेकिन, ‘The Wire’ के लिए ये घटना सिर्फ ‘Injury’ वाली है। इतना ही नहीं, वो हमलावर छात्र के परिवार का ‘दुःख-दर्द’ भी दिखा रहा है।

बता दें कि प्रशासन ने पाया था कि उस घर का एक हिस्सा वन विभाग की जमीन को कब्ज़ा कर बनाया गया है, जिसके बाद बुलडोजर से उसे ध्वस्त कर दिया गया। ‘The Wire’ की खबर की हेडिंग देखिए – ‘क्या ये न्याय है? किराएदार के नाबालिग बेटे ने सहपाठी को घायल कर दिया तो ऑटो ड्राइवर के घर पर बुलडोजर चला दिया गया’। सोचिए, हत्या को ‘घायल कर दिया’ लिख कर चलाया जा रहा है। उसका कहना है कि इस घटना को हिन्दू संगठन ‘सांप्रदायिक रंग’ दे रहे हैं।

उसका कहना है कि कक्षा 10 के 2 छात्रों के बीच झगड़ा हिन्दू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद ‘सांप्रदायिक’ बन गया। सबसे बड़ी बात, ‘The Wire’ ने डीएम का 16 अगस्त का बयान 19 अगस्त शेयर कर के कहा कि दावा किया कि छात्र की स्थिति स्थिर है और ये बच्चों का झगड़ा था। इसके कुछ ही घंटे बाद बच्चे की मौत हो गई, लेकिन रिपोर्ट को अपडेट नहीं किया गया। साथ ही बुलडोजर एक्शन के लिए भी इसने हिन्दू संगठनों को ही जिम्मेदार ठहराया।

इसका लॉजिक ये है कि कार्रवाई के लिए हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया, इसीलिए बुलडोजर चला। बता दें कि सूरजपोल पुलिस थाना अंतर्गत स्कूल में साढ़े 10 बजे लंच टाइम के समय मुस्लिम छात्र ने कई बार चाकू से अपने हिन्दू सहपाठी को चाकू मारा। कई क्षेत्रों में इस कारण दुकानें बंद रहीं। 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद करनी पड़। इस घटना के बाद स्कूलों में चाकू व अन्य नुकीली चीजों को लेकर बैन लगाया गया। साथ ही बच्चों के थैले की तलाशी लेने का आदेश शिक्षा विभाग ने जारी किया।