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हुमायूँ वाली ‘सेक्युलर मूर्खता’ की सुधा मूर्ति भी हुईं शिकार, आप जानिए रक्षाबंधन का असली इतिहास: इंद्र-शची और राजा बलि से जुड़ा है इसका महत्व

प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है, जो भाई-बहन के बीच के प्यार को प्रगाढ़ करने वाला त्योहार है। जहाँ बहन अपने भाई की रक्षा के लिए उसे राखी बाँधती है, वहीं बहन अपने भाई की रक्षा का वचन देता है। ‘बृहत्’ नामक YouTube चैनल पर कविता कृष्ण मीगामा ने हिन्दू साहित्य के जानकार डॉ श्रीनिवास जम्मालमदका से बातचीत की, जिन्होंने इस पर्व के इतिहास को लेकर कई जानकारियाँ दी। उन्होंने इससे जुड़ी प्रथाओं की भी बात की। सुधा मूर्ति जैसी राज्यसभा सांसद भी हुमायूँ को कर्णावती द्वारा रखी भेजने की कहानी फैलाती हैं, ऐसे में सच जानना ज़रूरी है।

रक्षाबंधन को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से भी जाना जाता रहा है। ‘श्री कामेश्वरी फाउंडेशन’ के सह-संस्थापक और ‘सिद्धांत नॉलेज फाउंडेशन’ से जुड़े डॉ श्रीनिवास ने बताया कि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों जैसे आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ये त्योहार पहले लोकप्रिय नहीं था। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन सिर्फ सांस्कृतिक प्रथा ही नहीं बल्कि धार्मिक पर्व है जिसका पुराणों में भी जिक्र है। उन्होंने बताया कि ‘भविष्य पुराण’ के उत्तर-पर्व में भी इसका जिक्र है।

उन्होंने बताया कि महर्षि वेद व्यास ने कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद श्रीकृष्ण से कहा था कि वो युधिष्ठिर को व्रतों के लिए मार्गदर्शन करें, ताकि उनसे जो भी पाप हुए हैं वो धुल जाएँ। इसमें रक्षाबंधन का भी जिक्र है। इसी तरह चक्रव्रती बलि का जिक्र है, जिन्हें जब इंद्र ने हराया तो वो गुरु शुक्राचार्य के पास कारण जानने के लिए पहुँचे। शुक्राचार्य ने पाया कि इंद्र की पत्नी शची अपने पति को राखी बाँधती हैं, इसीलिए इंद्र अजेय हैं। शुक्राचार्य ने बलि से 1 वर्ष के लिए आक्रमण न करने को कहा और श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को समझाया कि श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर उपवास करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ये सिर्फ भाई-बहन ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण रिश्तों में भी इसका महत्व है। उन्होंने बताया कि इस दिन मध्याह्न काल के बाद राजा को अपने मंत्रियों के साथ बैठना चाहिए और पुरोहितों को इन सबकी रक्षा के लिए उपवास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि रामटेक में गढ़मंदिर के पुजारी उस दिन आने वाले हर श्रद्धालु की रक्षा के लिए उपवास करते हैं। ये प्रचलन पूर्वजों से ही चला आ रहा था, धर्मशास्त्र में भी इसका जिक्र है। उन्होंने समझाया कि ये शारीरिक रक्षा ही नहीं, मानसिक रूप से साथ देने का त्योहार है।

डॉ श्रीनिवास ने समझाया कि अगर कोई अवसाद में है और कोई उसका साथ दे रहा है तो ये भी रक्षाबंधन का संदेश है। इसका सिर्फ ये अर्थ नहीं है कि महिलाएँ पुरुषों से रक्षा माँग रही हैं। उन्होंने इस दौरान मेवाड़ की रानी कर्णावती द्वारा मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजे जाने की घटना को भी काल्पनिक करार दिया। उन्होंने इस दौरान ‘येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल’ मंत्र का जिक्र करते हुए बताया कि राखी बाँधते समय इसका जाप किया जाना चाहिए।

दक्षिण भारत में रक्षाबंधन के अधिक लोकप्रिय न होने का कारण बताते हुए उन्होंने बताया कि रक्षा से जुड़े कई अन्य त्योहार वहाँ चलते आ रहे हैं। दीक्षा लेने के दौरान भी रक्षा का वचन होता है। यजमान उपवास करता है, फिर पुरोहित रक्षासूत्र बाँधते हैं। उन्होंने बताया कि यजमान समस्याओं से बाहर निकलने का सामर्थ्य विकसित करे, इसीलिए ये बाँधा जाता है। उन्होंने ये भी समझाया कि धर्मशास्त्र कहते हैं कि सभी को एक-दूसरे की रक्षा करना चाहिए। उन्होंने राखी के साथ कुमकुम-हल्दी का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने सूती की जगह केला फाइबर, सिल्क या ऊन इस्तेमाल करने की सलाह दी।

तमिलनाडु के मिशनरी स्कूल में लगाया फर्जी NCC कैम्प, 13 छात्राओं का यौन शोषण: पीड़िता से बोला प्रिंसिपल- चुप रहो, LTTE समर्थक पार्टी के कार्यकर्ता समेत 11 गिरफ्तार

तमिलनाडु के एक स्कूल में नाबालिग छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न किया गया। एक छात्रा के साथ यौन शोषण भी हुआ। यह सारा काम एक फर्जी NCC कैम्प के दौरान हुआ। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने स्कूल के प्रधानाध्यापक और NTK पार्टी के एक कार्यकर्ता समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के कृष्णागिरी में स्थित किंग्सले गार्डन्स मैट्रिक हायर सेकेंडरी स्कूल में यह घटना 9 अगस्त, 2024 को हुई। बताया गया कि इस दिन स्कूल में एक NCC का कथित कैम्प लगाया गया था। इसमें 41 बच्चों ने हिस्सा लिया था। इसी कैम्प में 17 छात्राएँ भी थी।

इसी कैम्प में 13 वर्षीय पीड़िता छात्रा ने भी हिस्सा लिया था। पीड़िता समेत सभी लड़कियों को स्कूल के एक ऑडिटोरियम में ठहराया गया था। इसी ऑडिटोरियम में लड़कों को भी ठहराया गया था। बताया गया कि पीड़िता बच्ची को इस कैम्प के एक संयोजक ने अकेले में बुलाकर उसका यौन शोषण किया। अन्य बच्चियों का भी यौन उत्पीड़न इस कैम्प में हुआ।

बच्ची ने इस संबंध में अपनी साथियों से बात की और इस संबंध में स्कूल के प्रधानाध्यापक से शिकायत की। हालाँकि, स्कूल के प्रधानाध्यापक ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लिए बिना इस सबंध में चुप रहने को कहा। इसके बाद बच्चियों ने अपने परिजनों को इस संबंध में बताया।

बच्ची के परिजनों ने मामले को पुलिस के पास दर्ज करवाया जिसके बाद कार्रवाई चालू हुई। पुलिस की जाँच में पता चला कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपित सिवारमन इस कैम्प का संयोजक था। वह NTK पार्टी का सदस्य है। NTK आतंकी समूह LTTE की समर्थक रही है।

पुलिस जाँच में यह भी सामने आया कि यह NCC कैम्प फर्जी था। जिस स्कूल में NCC कैम्प आयोजित किया गया, वह NCC से सम्बद्ध नहीं है। आयोजकों ने स्कूल के प्रशासन को यह विश्वास दिलाया कि यदि वह NCC जैसा ही कैम्प आयोजित करते हैं तो उन्हें NCC मिल जाएगा।

मामले में पुलिस ने सिवारामन समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने स्कूल के प्रधानाध्यापक को भी मामला दबाने के लिए पकड़ा है। गिरफ्तार होने वालों के नाम सतीश कुमार, शिवरामन, जेनिफर, सैमसन वेस्ले, शक्तिवेल, सिंधु, सत्या और सुब्रमणि हैं।

मामले में स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आ गया है। स्थानीय बाल संरक्षण अधिकारी भी पीड़िताओं के बयान दर्ज करने की तैयारी में है। बाक़ी स्कूलों में भी यौन उत्पीड़न के प्रति जागरूकता के लिए भी अभियान चलाए जाएँगे। पुलिस भी और स्कूलों में ऐसे ही कैम्प लगने के एंगल पर जाँच कर रही है।

मनमोहन राज का प्रस्ताव मोदी सरकार में लागू, अब उसे ‘RSS के लोगों की भर्ती’ बता रहे राहुल गाँधी: जानिए क्या है ‘लेटरल एंट्री’ जिस पर कॉन्ग्रेस कर रही गंदी राजनीति

केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकारी पदों पर लेटरल एंट्री के मामले में कॉन्ग्रेस को घेरा है। अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि UPA सरकार ही उच्च पदों पर लेटरल एंट्री का कॉन्सेप्ट लेकर आई थी, जिसे मोदी सरकार और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ा रही है। कॉन्ग्रेस ने मोदी सरकार के 45 पदों पर लेटरल एंट्री करने को लेकर प्रश्न उठाए थे। नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने इसे UPSC की जगह RSS की भर्ती बताया था और आरोप लगाया था कि इसके जरिए सरकार SC-ST और OBC का आरक्षण छीनना चाहती है।

केंद्र सरकार ने क्या बताया?

केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लिखा, “लेटरल एंट्री मामले में कांग्रेस का पाखंड साफ़ जाहिर है। लेटरल एंट्री की अवधारणा को UPA सरकार ही लेकर आई थी। सेकंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफार्म कमीशन 2005 में UPA सरकार के दौरान स्थापित किया गया था। इसके अध्यक्ष वीरप्पा मोईली थे। UPA के बनाए ARC ने उन पदों को भरने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत बताई थी जहाँ अलग तरह के ज्ञान की जरूरत होती है। NDA सरकार ने इसी सिफारिश को लागू करने के लिए एक पारदर्शी तरीका बनाया है, और UPSC के माध्यम से निष्पक्ष भर्ती होगी।”

इससे पहले राहुल गाँधी ने इसे आरक्षण छीनने की कोशिश बताया था। राहुल गाँधी ने लिखा, “नरेंद्र मोदी संघ लोक सेवा आयोग की जगह ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ के ज़रिए लोकसेवकों की भर्ती कर संविधान पर हमला कर रहे हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर लेटरल एंट्री के ज़रिए भर्ती कर खुलेआम SC, ST और OBC वर्ग का आरक्षण छीना जा रहा है। मैंने हमेशा कहा है कि टॉप ब्यूरोक्रेसी समेत देश के सभी शीर्ष पदों पर वंचितों का प्रतिनिधित्व नहीं है, उसे सुधारने के बजाय लेटरल एंट्री द्वारा उन्हें शीर्ष पदों से और दूर किया जा रहा है।”

क्यों हो रहा विवाद?

दरअसल, हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्र सरकार के 45 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला है। यह भर्ती लेटरल एंट्री के जरिए होनी थी। इस भर्ती के अंतर्गत निजी क्षेत्र, सरकारी उपक्रमों या ऐसे ही किसी संगठन में काम करने वाले भारतीयों को लिया जाना है। भर्ती के लिए आवेदन करने वालों की आयु सीमा 40-55 वर्ष रखी गई है और इन्हें 3 वर्ष की सेवाएँ देने के लिए रखा जाएगा। इसके जरिए सरकार सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी भर्ती करना चाहती है।

भर्ती होने वाले वाले उम्मीदवार केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव जैसे पदों तैनात होंगे। इन पदों पर आवेदन के लिए 10-15 वर्षों तक का अनुभव माँगा गया है। इनकी भर्ती के लिए मात्र इनका साक्षात्कार लिया जाएगा। यह भर्ती निकालने के बाद ही विवाद पैदा हुआ। कॉन्ग्रेस ने इसे जहाँ UPSC की भर्ती प्रक्रिया का उल्लंघन बताया तो वहीं सरकार ने इसे UPA की ही नीति के अंतर्गत उठाया गया कदम बताया। इसके लिए अश्विनी वैष्णव ने UPA सरकार की सिफारिशों का हवाला दिया।

क्या है लेटरल एंट्री?

नौकरशाही मे लेटरल एंट्री सरकार के पीछे सरकार की मंशा है कि निजी क्षेत्र के लोगों के अनुभव का लाभ भी उसे मिले। ऐसे अनुभवी लोगों की भर्ती के लिए ही सरकार यह कदम उठा रही है। इसके अंतर्गत सरकार अनुभव के आधार पर इन लोगों की भर्ती करती है। इनको केंद्र सरकार में सचिव स्तर के पद और सुविधाएँ दी जाती हैं। ऐसे आवेदकों की भर्ती के लिए सरकार उनके अनुभव और साक्षात्कार के आधार पर होती है। इनकी सेवा भी नियमित अवधि के लिए होती है और संविदा पर की जाती है। वर्तमान भर्ती में यह सीमा 3 वर्ष रखी गई है।

किसने दिया था लेटरल एंट्री का सुझाव?

UPA सरकार ने वर्ष 2005 में प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) का गठन किया था। इसके अध्यक्ष केन्द्रीय मंत्री वीरप्पा मोईली थे। वीरप्पा मोईली की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने देश के कई क्षेत्रो में सुधार को लेकर अपने सुझाव दिए थे। इन्हीं सुझावों में एक रिपोर्ट प्रशासनिक सुधारों पर आधारित थी। यह रिपोर्ट नवम्बर 2008 में केंद्र सरकार को सौंपी गई थी। लगभग 380 पन्नों की इस रिपोर्ट में लेटरल एंट्री के सुझाव का जिक्र है। इस रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि ARC नौकरशाही के पदों पर लेटरल एंट्री का सुझाव देती है।

UPA सरकार की रिपोर्ट में लेटरल एंट्री का जिक्र
UPA सरकार की रिपोर्ट में लेटरल एंट्री का जिक्र

रिपोर्ट में केंद्र सरकार के कुछ पदों पर 3 वर्षों के लिए लेटरल एंट्री की बात कही गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि निजी क्षेत्र के लोगों को सरकार में काम करने का मौक़ा दिया जाना चाहिए और इसी तरह सरकारी अफसरों को भी बाहरी क्षेत्र में काम करने की छूट दी जानी चाहिए। लेटरल एंट्री की भर्तियो को लेकर आयोग ने कहा था कि इससे उच्च पदों पर काम करने के लिए सरकार को ऐसे लोग मिलेंगे जो उस क्षेत्र के विशेषज्ञ होंगे। इसके लिए अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों का उदाहरण भी दिया गया था।

कब हुई लेटरल एंट्री की शुरुआत?

कॉन्ग्रेस सरकार के अलावा नीति आयोग ने भी 2017 में ऐसी ही सिफारिश की थी। नीति आयोग ने 40 पदों पर लेटरल एंट्री के जरिए भर्ती करने की सिफारिश की थी। 2018 में मोदी सरकार ने पहली बार लेटरल एंट्री के जरिए विशेषज्ञों को सरकार में शामिल करने के लिए विज्ञापन निकाले थे। इसी क्रम में ही इस बार भी 45 अलग-अलग पदों पर भर्ती निकाली गई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी रेप की पुष्टि, हत्या से पहले कोलकाता की डॉक्टर को दी गई थी प्रताड़ना: पीड़ित पिता बोले- आवाज उठाने वालों को डरा रही ममता सरकार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में रेप करके मार दी गई पीड़िता को हत्या से पहले काफी यातनाएँ दी गई थीं। इसकी पुष्टि उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। रिपोर्ट में पीड़िता के साथ यौन दुराचार की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि पीड़िता की हत्या गला घोंट कर की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर कुल 14 चोट मिलने की बात कही गई है। यह चोटें पीड़िता के सर, मुंह, गले, नाक, कंधे और जननांग पर थी। यह चोटें उसे मारने से पहले गई थीं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पीड़िता को गला घोंट कर मारा गया है।

इसके अलावा उसके साथ रेप की पुष्टि भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। पीड़िता के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए और उसके जननांगों पर भी चोट दी गई। पीड़िता के जननांग से 150 ग्राम सफ़ेद तरल पदार्थ भी मिला है। पीड़िता के शरीर में फ्रैक्चर नहीं मिले हैं।

रिपोर्ट में सामने आया है कि पीड़िता के फेफड़ों में भी खून बहा था और उसके शरीर में खून के थक्के जमे थे। पोस्टमार्टम करने वाली टीम ने पीड़िता के खून और विसरा के नमूने को एकत्र कर लिया है, उन्हें आगे जाँच के लिए भेज दिया गया है। इन सब बातों से साफ हुआ है कि पीड़िता के साथ क्रूरता की गई थी।

वहीं इस मामले की शुरूआती फॉरेंसिक जाँच में आरोपित की खाल के नमूने का मिलान पीड़िता के नाखूनों में मिले अवशेषों से हुई है। बताया गया कि आरोपित के भी चेहरे और बाकी जगहों पर नाखून के निशान हैं। इसका अर्थ है कि पीड़िता ने वापस लड़ने का प्रयास किया था।

यह भी सामने आया कि पीड़िता से जब रेप का प्रयास हुआ तब वह गहरी नींद में थी इसीलिए आरोपित अपनेर मंसूबों में आसानी से सफल हो पाया। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान में लिया है। इस मामले को कोर्ट 20 अगस्त, 2024 को सुनने वाली है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच करेगी। कोर्ट का यह स्वतः संज्ञान का फैसला डॉक्टरों के आग्रह के बाद सामने आया है। डॉक्टर देश भर में इस मामले के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगहों पर हड़ताल अब भी जारी है।

पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी के जल्दी अंतिम संस्कार किए जाने की बात कही है। पीड़िता के पिता ने मीडिया से बताया कि उनकी बेटी का सबसे पहले श्मशान में अंतिम संस्कार कर दिया गया जबकि वहाँ तीन शव रखे हुए थे। पीड़िता के पिता ने कोलकाता पुलिस के आमलोगों को यह मुद्दा उठाने पर नोटिस भेजने को लेकर भी बात की है।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री न्याय दिलाने की बात कर रही हैं, लेकिन न्याय की माँग करने वाले आम लोगों को जेल में डालने की कोशिश की जा रही है। हम ममता बनर्जी से संतुष्ट नहीं हैं और हमने कोई भी मुआवजा लेने से इनकार कर दिया है।” उन्होंने जल्द ही इस मामले में परिणामों की आशा जताई है।

गौरतलब है कि कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली एक PG मेडिकल छात्रा का शव 9 अगस्त को अर्धनग्न अवस्था मिला था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे। पोस्टमार्टम में साफ़ हुआ था कि छात्रा के साथ रेप हुआ है और फिर उसकी नृशंसता से हत्या कर दी गई।

इस मामले में कॉलेज और पुलिस प्रशासन पर शुरुआत में ढिलाई बरतने के के आरोप हैं। मामले में हीलाहवाली से क्षुब्ध होकर इसकी जाँच कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को सौंप दी थी। इस बीच लगातार छात्र इस मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी और न्याय के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। मामले में ममता बनर्जी सरकार पर प्रश्न उठ रहे हैं।

वायनाड पीड़ितों के लिए सुअर का मांस बेच पैसा इकट्ठा कर रहे कम्युनिस्ट, भड़के मुस्लिम: कहा- ये मजहब की तौहीन, पूछा- फंड के लिए ‘वेश्यावृत्ति चैलेंज’ भी होगा

केरल में वामपंथी छात्र संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (DYFI) के सुअर का मांस बेचने पर मुस्लिम भड़क गए हैं। उन्होंने इसे उनके मजहब पर प्रहार और ईशनिंदा बताया है। कम्युनिस्ट छात्र संगठन यह मांस वायनाड आपदा के लिए राहत की धनराशि इकट्ठा करने को बेच रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, DYFI ने कासरगोड के राजापुरम इलाके में 10 अगस्त को सुअर का मांस (पोर्क) बेचा था। उसने यह मांस ‘पोर्क चैलेन्ज’ के नाम से बेचा था। इसी तरह 18 अगस्त को भी सुअर का मांस कोठमंगलम में बेचा गया। DYFI का कहना है कि वह इस मांस की बिक्री से जुटाई गई धनराशि का इस्तेमाल वायनाड भूस्खलन आपदा पीड़ितों के लिए करेगा।

DYFI का कहना है कि केरल भर में इसी तरह सुअर का मांस बेच कर पैसा जुटाएगा और उससे वायनाड में 25 घरों का निर्माण दुबारा करवाएगा। DYFI का कहना है कि वह मात्र सुअर का मांस ही नहीं बल्कि और भी समान बेच कर यह धनराशि इकट्ठा करेगा। उसने 7000 लीटर दूध भी बेचा है।

DYFI का पैसे इकट्ठा करने के लिए सुअर मांस बेचने का फैसला केरल के इस्लामी कट्टरपंथियों को रास नहीं आया है। मुस्लिम मौलानाओं का कहना है कि सुअर का मांस बेचना मुस्लिमों की की मजहबी भावनाओं को आहत करना है। एक सुन्नी संगठन के मौलाना ने कहा कि वायनाड त्रासदी में बचने वाले कुछ लोग सुअर का मांस नहीं खाते, ऐसे में यह उनका अपमान है।

सुन्नी मौलाना नासर फैजी कूदाथई ने कहा है कि वायनाड में बचने वाले अधिकांश परिवार मुस्लिम हैं और उनको मुस्लिम होने के नाते सुअर का मांस खाना मना है। मौलाना नासर ने कहा कि यह जानते हुए भी DYFI उनके लिए सुअर का मांस बेच कर पैसा इकट्ठा कर रही है।

एक और मौलाना ने इसका विरोध फेसबुक के जरिए किया और फिर अपना बयान वापस ले लिया। मौलाना जियाउद्दीन फैजी ने लिखा, “मुसलमानों को किसी ऐसे व्यक्ति से मदद स्वीकार करने से मना नहीं किया जाता है जो हराम और हलाल से कमाया गया हो। यह नियम शराब की दुकान के मालिक, बैंक मैनेजर या पोर्क व्यापारी सहित सभी पर लागू होता है।”

मौलाना ने आगे लिखा, “लेकिन यहाँ सवाल यह है कि क्या गरीबों की मदद के लिए हराम चैलेन्ज आयोजित करने की जरूरत भी है। क्या कल को सूदखोरी चैलेन्ज, वेश्यावृत्ति चैलेन्ज, शराब चैलेन्ज और चोरी चैलेन्ज भी आयोजित किए जाएँगे।” बाद में मौलाना ने अपना बयान वापस ले लिया।

मुस्लिमों के DYFI का विरोध करने पर केरल की वामपंथी सरकार मंत्री केटी जलील ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। केटी जलील ने कहा, “मुसलमानों के लिए ब्याज भी हराम है। लेकिन सूअर के मांस के ये विरोधी यह क्यों नहीं कहते कि बैंकों द्वारा दिया गया दान हराम है? क्या ब्याज से कमाए पैसे का उपयोग सूअर के मांस खाने से भी बड़ा पाप नहीं है? मुसलमानों के लिए शराब वर्जित है। लेकिन ईसाइयों और हिंदुओं के लिए आस्था से जुड़ी शराब चढ़ाना वर्जित नहीं है। ये लोग नहीं कहते कि शराबी स्वर्ग में नहीं जाएँगे।”

गौरतलब है कि वायनाड में हाल ही में बड़ी भूस्खलन आपदा आई थी। इसके कारण 4 गाँव पूरी तरह से बह गए थे। इस भूस्खलन के कारण लगभग 400 लोगों की मौत हो गई थी। इस आपदा में कई घरों को बड़े स्तर पर नुकसान पहुँचा था। वायनाड में दोबारा से जीवन पटरी पर लाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार प्रयास कर रही है।

कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, खुद CJI चंद्रचूड़ करेंगे सुनवाई: विरोध प्रदर्शन में उतरी बंगाली फिल्म इंडस्ट्री

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या की घटना का सुप्रीम कोर्ट ने रविवार (18 अगस्त, 2024) को स्वतः संज्ञान लिया है। आगामी 20 अगस्त को 3 जजों की बेंच में इस मामले की सुनवाई खुद चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे। अन्य न्यायमूर्तियों में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस ज बी परीदवाला होंगे। शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे 2 वकीलों और तेलंगाना के एक डॉक्टर ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की माँग उठाई थी।

इस बीच महिला डॉक्टर संग हुई बर्बरता के विरोध में बंगाली फिल्म जगत के लोग भी उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

ANI के मुताबिक रविवार को उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप और बाद में हत्या की घटना का स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले की सुनवाई के लिए 3 जजों की बेंच का गठन किया है। इस बेंच में डी वाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जे बी परीदवाला शामिल रहेंगे। इस मामले की सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख मुकर्रर की गई है। इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को अवगत भी करवा दिया गया है।

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट के 2 वकीलों रोहित पांडेय और उज्ज्वल गौर ने एक पत्र लिख कर चीफ जस्टिस से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की माँग की थी। पत्र में दोनों वकीलों ने न्यायपालिका को न्याय का अभिभावक और प्रताड़ित हुए हर व्यक्ति की अंतिम उम्मीद बताया था। दोनों वकीलों ने महिला डॉक्टर के साथ हुए घटनाक्रम को असमान्य लिखा था। उनका कहना था कि डॉक्टर अपना जीवन दूसरों को बचाने में ही बिताते हैं ऐसे में जनअपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए इस केस को बेहद संजीदगी से देखा जाना चाहिए।

इन 2 वकीलों के अलावा तेलंगाना के आर्मी कॉलेज ऑफ़ डेंटल सर्विसेज की महिला डॉक्टर मोनिका सिंह ने भी चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कोलकाता की घटना के बाद डॉक्टरों में डर का माहौल बताते हुए अस्पतालों की सुरक्षा में केंद्रीय बलों को तैनात करने की माँग उठाई थी। इसी पत्र में डॉक्टर मोनिका ने पूरे देश में मौजूद मेडिकल संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कराए जाने की माँग भी की है। अंत में चीफ जस्टिस से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की आशा जताई गई थी।

बंगाली फिल्म जगत के लोग भी उतरे विरोध-प्रदर्शन में

इस बीच 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या की घटना के खिलाफ पूरे देश में प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों में अब पश्चिम बंगाल के फिल्म जगत के लोग भी उतर आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 18 अगस्त (रविवार) को कोलकाता में हुए प्रदर्शन में अदाकार पाउली दाम, परमब्रता चटर्जी, शाश्वत चटर्जी, अबीर चटर्जी और अंकुश हजारा भी शामिल हुए। इनके साथ डायरेक्टर कौशिक गांगुली, शिबो प्रसाद मुखोपाध्याय, अर्जुन दत्ता और श्रीजीत मुखर्जी भी शामिल थे।

सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुए इस प्रदर्शन में ‘रे एक्लाई स्वर, जस्टिस फॉर आर जी कर’ के नारे लगाए गए। इसका हिंदी में अर्थ है कि हमारी एक ही माँग है कि पीड़िता को न्याय मिले। अभिनेत्री पाउली दाम ने इस मौके पर कहा कि वो खामोश नहीं बैठ सकती हैं और अब आवाज उठाना ही होगा क्योंकि एक महिला डॉक्टर का रेप कर के हत्या कर दी गई है। यह जुलूस उत्तरी कोलकाता के खन्ना क्रॉसिंग से शुरू हो कर श्यामबाजार मेट्रो स्टेशन पर जा कर समाप्त हुआ।

बुशरा हुसैन बनीं ‘वर्षा वाल्मीकि’, मंदिर में दलित युवक गोलू को चुना जीवनसाथी: अब्बू के टॉर्चर से प्रताड़ित होकर छोड़ा था घर, हवन कर लगाया ‘जय श्री राम’ का नारा

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक मुस्लिम लड़की ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है। लड़की का नाम बुशरा हुसैन है। बुशरा अब वर्षा वाल्मीकि नाम से जानी जाएँगी। उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से अपना शुद्धिकरण करवाया और दलित समुदाय के हिन्दू युवक गोलू वाल्मीकि से वैदिक रीति से विवाह किया। इस मौके पर बजरंग दल के सदस्यों ने लड़की के परिजनों द्वारा होने वाले विधि-विधान निभाए। बुधवार (14 अगस्त) को हुई इस शादी के बाद बुशरा अपने पति के साथ ख़ुशी-ख़ुशी ससुराल चली गईं।

बुशरा ने एक वीडियो जारी कर के अपने परिवार से अपनी सुरक्षा करने के लिए पुलिस के तत्कालीन SHO और बजरंग दल को धन्यवाद भी किया है।

यह मामला मुरादाबाद जिले के थाना क्षेत्र भगतपुर का है। यहाँ के गाँव सकटपुरा में रहने वाले ज़ाहिद हुसैन और अकबरी बेगम की बेटी बुशरा का इसी थानाक्षेत्र के निवासी दलित समुदाय (SC वर्ग) के गोलू से काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। गोलू भी मुरादाबाद के ही भगतपुर थाना क्षेत्र का निवासी है जो मेहनत-मजदूरी कर के अपना परिवार पालता है। बुशरा और गोलू के अफेयर की खबर उनके परिजनों को लगी। तब बुशरा के अब्बा और अन्य परिजनों ने उसे काफी प्रताड़ित किया।

इसी प्रताड़ना से तंग आ कर लगलभ 5 महीने पहले बुशरा घर छोड़ कर कहीं चली गई। उस समय बुशरा नाबालिग थी। उसकी उम्र लगभग 17 साल और 8 महीने थी। तब उसके अब्बा ने पुलिस में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करवाया। पुलिस मामले की जाँच कर ही रही थी कि लगभग 15 दिनों में बुशरा वापस लौट आई। वह सीधे थाना भगतपुर पर गई और अपने परिजनों द्वारा लगाए गए अपहरण के आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। बुशरा ने बताया कि वह अपनी मर्जी से कहीं चली गई थी।

आखिरकार तमाम कानूनी प्रावधानों और काउंसिलिंग के बाद बुशरा को उसके परिजनों को सौंप दिया गया था। कुछ दिनों बाद बुशरा अपने साथ किसी अनहोनी की आशंका से डर कर थाने पहुँची। यहाँ उसने अपने परिजनों के ही खिलाफ अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई। पुलिस ने बुशरा को कानूनी प्रावधानों के तहत एक बार फिर से चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के समक्ष पेश किया। CWC के आगे बुशरा ने फिर से अपने घर जाने से साफ मना कर दिया। मजबूरन CWC ने पुलिस को आदेश दिया कि बुशरा को बालिग़ होने तक लखनऊ स्थित नारी निकेतन में भेज दिया जाए।

इस आदेश का पालन हुआ और बुशरा नारी निकेतन में शिफ्ट कर दी गई। 4 माह तक नारी निकेतन में रहने के बाद जब बुशरा बालिग़ हुई तब वो बाहर आई। यहाँ से वो सीधे अपने प्रेमी गोलू वाल्मीकि के पास पहुँची। गोलू वाल्मीकि और बुशरा ने बजरंग दल से अपनी शादी के लिए मदद माँगी। आखिरकार बुधवार (14 अगस्त) को भगतपुर थानाक्षेत्र के एक मंदिर में दोनों का वैदिक विधि-विधान से विवाह हुआ। इस अवसर पर गोलू के परिजन मौजूद रहे। बुशरा के परिजनों का तमाम क्रिया-कलाप बजरंग दल के सदस्यों ने निभाया।

इस दौरान बजरंग दल पदाधिकारी सुभाष और मंदिर के पुजारी ने नव दम्पति को आशीर्वाद दिया। शादी के दौरान बुशरा ने हवन किया और जय श्री राम का नारा लगाया और हवन किया। इसी स्थान पर बुशरा ने अपना नया नाम वर्षा वाल्मीकि रखा। शादी के बाद वर्षा बनी बुशरा और उनके पति गोलू वाल्मीकि ने एक सामूहिक वीडियो जारी किया है। उन्होंने भगतपुर थानाक्षेत्र के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार और बजरंग दल के सदस्यों को अपनी सुरक्षा करने के लिए धन्यवाद बोला है।

बकौल बुशरा अगर पुलिस व हिन्दू संगठन साथ न देते तो उनके परिवार वाले उन्हें बड़ा नुकसान पहुँचा सकते थे। बुशरा ने अपनी नई शादीशुदा जिंदगी में खुद को बेहद खुश बताया है।

मंदिर में माँ चामुंडा की मूर्ति के आगे फेंका मांस, टाइल्स पर बिखेरे खून के छींटे: 2 बुर्कानशीं महिलाओं पर आरोप, हिन्दू संगठनों ने कार्रवाई के लिए उठाई आवाज़

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक हिन्दू मंदिर के अंदर मांस फेंके जाने का मामला सामने आया है। पुलिस में दी गई इस करतूत का आरोप बुर्के वाली 2 महिलाओं और एक अन्य पुरुष पर लगा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने इसे अपनी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली घटना बताया है। बजरंग दल ने मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है। पुलिस FIR दर्ज कर के जाँच कर रही है। घटना शुक्रवार (16 अगस्त 2024) की है।

यह मामला मुरादाबाद जिले के थाना क्षेत्र काँठ का है। यहाँ ‘बजरंग दल’ सहित कई अन्य हिन्दू संगठनों ने शुक्रवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि गाँव पैगंबरपुर सुखवासीलाल में चामुंडा माता का मंदिर है जो कि आसपास के हिन्दुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। देवी माता के साथ यहाँ कई अन्य देवताओं की मूर्तियाँ भी विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठित की गईं हैं। इस मंदिर में हर दिन पूजा-पाठ होने के साथ खास पर्वों पर अच्छी-खासी भीड़ जमा होती है।

शिकायत में बताया गया है कि 16 अगस्त को इस मंदिर में माँ चामुंडा की मूर्ति के ठीक सामने मांस के टुकड़े मिले। यह माँस मुर्गे का बताया जा रहा है। आरोप है कि यह हरकत बुर्का पहने 2 महिलाओं और एक अन्य अज्ञात पुरुष ने की थी। शिकायतकर्ता ने इस हरकत को हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत करने वाली बताया है। इसी के साथ आरोपितों की पहचान करवा के उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। बताया यह भी गया है कि इस से पहले भी इसी चामुंडा मंदिर से घँटे चोरी हो चुके हैं और मूर्तियों को भी खंडित किया जा चुका है।

घटना के बाद मंदिर का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मंदिर के मुख्य द्वार पर माँस के टुकड़ों सहित टाइल्स पर खून देखा जा सकता है। मुरादाबाद पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ इस मामले की FIR दर्ज कर ली है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस के मुताबिक केस दर्ज कर के मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मजहबी अत्याचार के शिकार 188 पाकिस्तानी हिन्दुओं को मिली भारतीय नागरिकता, बोले अमित शाह – पड़ोसी मुल्कों में किसी भी अल्पसंख्यक नहीं होने देंगे प्रताड़ित

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में रविवार (18 अगस्त, 2024) को गुजरात के अहमदाबाद में 188 पाकिस्तानी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता दी गई। इस अवसर पर उन्होंने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया और CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काने का आरोप लगाया। कॉन्ग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म के आधार पर हुए विभाजन से उठे मुद्दे भुलाए नहीं जा सकते है। इस अवसर पर शरणार्थी हिन्दुओं ने ‘वन्दे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष किया।

पाकिस्तान में मज़हबी अत्याचार के शिकार 188 शरणार्थी हिन्दुओं को नागरिकता देने के इस कार्यक्रम में अमित शाह के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित राज्य के कई अन्य मंत्री मौजूद थे। उस अवसर को अपने लिए बेहद भावुक पल बताते हुए अमित शाह ने CAA कानून की उपलब्धियाँ गिनाईं। उन्होंने CAA को न्याय और अधिकार देने वाला कानून बताया। अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस के शासन काल में पाकिस्तान में प्रताड़ित हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध जब जैसे-तैसे जब भारत में आते थे तो यहाँ भी उनको परेशान किया जाता था।

केंद्रीय गृहमंत्री ने भारत को एकलौता देश बताया जिसे धर्म के आधार पर बाँटा गया है। उन्होंने बताया कि भारत आए शरणार्थी पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अपने साथ हुए अत्याचार को कभी भूल नहीं सकते क्योंकि उनके परिवार तक उजड़ गए। अमित शाह के अनुसार तब दंगों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दुओं ने जो झेला उतनी पीड़ादायक दुनिया में कोई और घटना नहीं है। उनका आरोप है कि शरणार्थी हिन्दुओं को कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने अपने वोट बैंक न खोने के डर से नागरिकता नहीं दी थी। इस राजनीति को अमित शाह ने ‘सबसे बड़ा पाप’ की संज्ञा दी।

अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के तमाम नेताओं से पूछा कि शरणार्थी हिन्दुओं का क्या दोष था। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस की उन्हीं सरकारों ने करोड़ों घुसपैठियों को देश में घुसने दिया। CAA को कॉन्ग्रेस की गलतियों का सुधार बताते हुए अमित शाह ने इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत इच्छाशक्ति का प्रमाण बताया। CAA के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए अमित शाह ने कहा कि मुस्लिमों को भड़काया गया। अंत में उन्होंने कहा कि CAA किसी की नागरिकता लेने वाला नहीं बल्कि शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला कानून है।

इस अवसर पर अमित शाह ने CAA को ले कर फैलाई जा रहीं तमाम अफवाहों का भी खंडन किया। नागरिकता पाने वाले सभी शरणार्थी हिन्दुओं को उन्होंने ‘माँ भारती का परिवार’ बताया। उन्होंने कहा कि कभी बांग्लादेश में रहने वाले 27% हिन्दुओं की आबादी अब न के बराबर इसलिए हो गई क्योंकि वहाँ जबरन धर्म-परिवर्तन करवाया गया। बकौल अमित शाह, पड़ोस के किसी भी देश में रहने वाले अल्पसंख्यक को प्रताड़ित नहीं होने देगी और साथ ही भारत में आने के बाद उनके सम्मान की रक्षा भी करेगी।

जहाँ ‘भीम आर्मी’ का नेता दे रहा था भारत को बांग्लादेश बनाने की धमकी, वहीं दलित छात्रा के सीने पर हाथ रख यौन शोषण: सलीम, फैज़ान, आमिर, अरमान और अकबर ने घेरा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में दलित समुदाय की एक नाबालिग लड़की से छेड़खानी और अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया है। इस मामले में सलीम, आमिर, अरमान, फैज़ान और अकबर को नामजद आरोपित बनाया गया है। इन सभी ने पीड़िता को इस्लाम कबूल करवाने की धमकी दी। पीड़िता द्वारा विरोध करने के बाद आरोपितों ने उसे तमंचे से डराया-धमकाया। घटना शनिवार (17 अगस्त, 2024) की है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के अंदर आमिर और सलीम को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

खास बात ये है कि इसी जिले में भीम आर्मी से जुड़ा एक नेता भारत को बांग्लादेश बनाने की धमकी देने के आरोप में पकड़ा गया है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र आँवला का है। यहाँ शनिवार को 16 वर्षीया नाबालिग पीड़िता के भाई ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि 17 अगस्त को पीड़िता अपनी परीक्षा संबंधी जानकारी लेने पास के ही एक जनसेवा केंद्र पर गई थी। तभी रास्ते में उसे सलीम, फैज़ान, आमिर, अरमान और अकबर ने उसे घेर लिया। इन्होंने पीड़िता के सीने पर हाथ मारा और अश्लील हरकतें करने लगे। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो आमिर तमंचा निकल कर जान से मार डालने की धमकी देने लगा।

आरोप है कि आमिर ने पीड़िता के सीने पर तमंचा रखा और कहा, “तेरा धर्म-परिवर्तन करवा के तुझे मुस्लिम बना दूँगा और तूने कुछ किया तो आँवला को बांग्लादेश बना दूँगा।” आरोपितों से डर कर पीड़िता शोर मचाने लगी तो आसपास से लोग जुटने लगे। लोगों को आता देख कर पाँचों आरोपित हाथों में तमंचा लहराते हुए मौके से फरार हो गए। पीड़ित भाई ने अपनी बहन के साथ हुई प्रताड़ना पर अकबर, सलीम, फैज़ान, अरमान और आमिर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पुलिस ने इस शिकायत पर पाँचों आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 व 352 के साथ पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आमिर और सलीम को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस इन दोनों आरोपितों से हथियार बरामद करवाने मकबरा के पास पहुँची तब इन्होने भागने का प्रयास किया। इसी कोशिश में इन्होने छिपा कर रखे गए हथियार से पुलिस पर गोलियाँ भी बरसानी शुरू कर दीं।

आख़िरकार आत्मरक्षा में पुलिस को भी गोलियाँ चलानी पड़ी। गोलियाँ आमिर और सलीम के पैरों में लगीं और वो दोनों घायल हो गए। पुलिस ने दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस पर हुए हमले की अलग से FIR दर्ज की जा रही है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 262 व 3(5) के साथ आर्म्स एक्ट के सेक्शन 25/27 के तहत दर्ज हुई है। फ़िलहाल पुलिस अरमान उर्फ़ अंटा, फैज़ान और अकबर की तलाश में दबिश दे रही है। मामले में अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लई जा रही है।

भीम आर्मी वाला दे रहा भारत को बांग्लादेश बनाने की धमकी

जहाँ एक तरफ बरेली में मुस्लिम समुदाय के 5 युवकों ने नाबालिग दलित लड़की से छेड़खानी की और इस्लाम कबूल करने के लिए कहा तो वहीं इसी जिले में भीम आर्मी का पदाधिकारी भी भारत को बांग्लादेश बनाने की धमकी दे रहा था। धमकी देने वाले आरोपित का नाम रवि कुमार है जो भीम आर्मी एकता मिशन का बरेली से पदाधिकारी है। उसने अपने एक ट्वीट में लिखा, “दलित महिलाओं पर आज़ाद भारत में शोषण रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

केंद्र सरकार खान खोल कर सुन ले। जब जुल्म की हद होती है तो एक नई क्रान्ति जन्म लेती है। जिस दिन अम्बेडकरवादी गुस्सा हो गया उस दिन मुस्लिम तो नहीं अंबेडकरवादी जरूर इस देश को बांग्लादेश बना देगा।”

इस मामले में बरेली के ही अलीगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर मिथलेश गुप्ता की तहरीर पर FIR दर्ज हुई है। शनिवार (17 अगस्त, 2024) को FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353 (2) के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरोपित रवि कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस इस मामले में भी आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।