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पहले खालिदा जिया को जेल से छोड़ा, अब अंतरिम सरकार का मुखिया बनते ही मोहम्मद यूनुस भ्रष्टाचार में बरी: शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ते ही विरोधियों के जुर्म ‘माफ’

मोहम्मद यूनुस इससे पहले अंतरिम सरकार में प्रमुख पद पर शपथ लेते कोर्ट से उन्हें केसों में राहत मिलनी शुरू हो गई थी। 7 अगस्त 2024 को भी श्रम कानून उल्लंघन मामले में बरी किया गया था। उस समय उनके साथ ग्रामीण टेलीकॉम के तीन शीर्ष अधिकारियों को भी 25.22 करोड़ टके की हेरफेर मामले में राहत मिली थी।

बांग्लादेश में जारी हिंदू विरोधी हिंसा और पुलिस थानों पर हमले के बीच एक तरफ मुल्क की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, वहीं इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख चुने जाने वाले अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस के ऊपर से एक के बाद एक आपराधिक केस हट रहे हैं।

12 अगस्त 2024 को खबर आई है कि उनके ऊपर से भ्रष्टाचार मामले का केस हट गया है। 84 साल के अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने चंद दिन पहले ही अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली थी। उनका नाम उन्हीं छात्रों द्वारा सुझाया गया था जिन्होंने बांग्लादेश में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

मोहम्मद यूनुस इससे पहले अंतरिम सरकार में प्रमुख पद पर शपथ लेते कोर्ट से उन्हें केसों में राहत मिलनी शुरू हो गई थी। जैसे- 7 अगस्त 2024 को भी श्रम कानून उल्लंघन मामले में बरी किया गया था। उस समय उनके साथ ग्रामीण टेलीकॉम के तीन शीर्ष अधिकारियों को भी 25.22 करोड़ टके की हेरफेर मामले में राहत मिली थी। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में मोहम्मद यूनुस को कई अन्य मामलों में भी रिहाई मिल सकती है।

इस मामले में भी ढाका के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रबीउल आलम ने मोहम्मद यूनुस के साथ नूरजहाँ और अन्य 12 आरोपितों को बरी किया है। भ्रष्टाचार मामले में आरोपितों में से एक नूरजहाँ को भी अंतरिम सरकार में जगह मिली है।0

इन लोगों के अलावा बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, जिन्हें शेख हसीना और भारत की धुर विरोधी कहा जाता है उन्हें भी हसीना सरकार के जाते ही रिहाई मिल गई। वो 2018 से भ्रष्टाचार मामले में जेल में बंद थीं। शेख हसीना के जाने के बाद जब उनको रिहाई मिली तो यही अनुमान लगाए गए कि संभव है अगली प्रधानमंत्री देश की खालिदा जिया ही बनें।

प्रेस बयान में उनकी रिहाई को लेकर कहा गया था कि ये फैसला राष्ट्रपति ने विपक्षी पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक किया है। वह बांग्लादेश में मार्च 1991 से मार्च 1996 तक और फिर जून 2001 से अक्टूबर 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही थीं और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। साल 2007 में बांग्लादेश में हो रहे चुनाव के दौरान फैली हिंसा के दौरान बनी कार्यकारी सरकार ने खालिदा जिया और उनके दो बेटों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया था. इसी मामले में साल 2018 में उनको सजा सुनाई गई थी

बता दें कि एक ओर बांग्लादेश में भ्रष्टाचार मामले में इस तरह तमाम आरोपित रिहा होते जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मुल्क के केंद्रीय बैंक निर्णय कैश की कमी के कारण परेशान हैं। उन्होंने पहले निर्णय लिया था कि वो किसी को 2 लाख टके से ज्यादा निकालने की अनुमति नहीं देंगे। बाद में ये रकम और ज्यादा घटाकर 1 लाख टका कर दी गई जिसके कारण आमजन से लेकर व्यापारी तक परेशान हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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