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कॉन्ग्रेस ने बताया ‘नफरती’, ओवैसी बोले- अब नमाज भी नहीं पढ़ने देंगे: जदयू ने कहा- यह मुस्लिम विरोधी नहीं, लोकसभा में पेश हुआ वक्फ संशोधन बिल

भारत में किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करने वाले वक्फ बोर्ड के शक्तियों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में गुरुवार (8 अगस्त) को वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पेश किया। यह विधेयक अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजीजू ने सदन में पेश किया। वहीं, विपक्षी सांसदों ने इसे ‘असंवैधानिक’ और ‘कठोर’ बताते हुए इसका विरोध किया है।

किरेन रिजीजू द्वारा बिल को सदन में रखने के बाद सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उसका स्वागत किया। वहीं, विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन में हंगामा करके इसका विरोध किया। कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक संविधान पर ‘मौलिक हमला’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक समुदायों के बीच धार्मिक विभाजन और नफरत पैदा करेगा।

उन्होंने कहा, “प्रत्येक मस्जिद में विवाद होता है, जहाँ कोई लिखित दस्तावेज नहीं होता है। आपका मूल विचार संघर्ष पैदा करना और समुदायों के बीच गुस्सा पैदा करना और हर जगह हिंसा करना है।” वेणुगोपाल ने कहा, “यह विधेयक संविधान पर एक मौलिक हमला है। इस विधेयक के माध्यम से वे (सत्ता पक्ष) एक प्रावधान डाल रहे हैं कि गैर-मुस्लिम भी वक्फ गवर्निंग काउंसिल के सदस्य होंगे।”

विधेयक को ‘धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला’ बताते हुए वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “इसके बाद आप (सत्ता पक्ष) ईसाइयों की ओर जाएँगे, फिर जैनों की तरफ। भारत के लोग अब इस तरह की विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे।” वक्फ संशोधन विधेयक को महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ा।

उन्होंने आगे कहा, “हम हिंदू हैं, लेकिन साथ ही हम अन्य धर्मों की आस्था का भी सम्मान करते हैं। यह विधेयक महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों के लिए विशेष है। आप यह नहीं समझते कि पिछली बार भारत के लोगों ने आपको स्पष्ट रूप से सबक सिखाया था। यह एक संघीय व्यवस्था पर हमला है।”

डीएमके की सांसद कनिमोझी ने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन करता है, जो अल्पसंख्यकों को उनके संस्थानों का प्रबंधन करने से संबंधित है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक एक विशेष धार्मिक समूह को निशाना बनाता है।” वहीं, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने इस विधेयक को वापस लेने या स्थायी समिति के भेजने की माँग की।

वहीं, AIMIM के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने भी बिल का विरोध किया। ओवैसी ने कहा, “यह विधेयक न्यायपालिका के सभी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। सरकार वक्फ बोर्ड के प्रबंधन को प्रतिबंधित कर रही है। हिंदू बोर्ड उपयोग और रीति-रिवाज से मान्यता प्राप्त हैं। आप मुझे नमाज पढ़ने से रोक रहे हैं।”

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से लोकसभा के सांसद असदुद्दीन औवैसी ने केंद्र की मोदी सरकार को मुस्लिम विरोधी बताया। ओवैसी ने आगे कहा, “एक हिंदू अपनी पूरी संपत्ति दे सकता है, लेकिन मैं इसे अल्लाह के नाम पर नहीं दे सकता। हिंदू बोर्ड या गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।”

इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह ने अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष को जमकर धोया। जदयू नेता ललन सिंह ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है। यह विधेयक समावेशी है और धार्मिक विभाजन को बढ़ावा नहीं देता है। उन्होंने कहा, “यहाँ मंदिर का तर्क दिया जा रहा है। अगर आपको मंदिर और संस्था में फर्क नहीं समझ में आ रहा है तो क्या कहा जाए।”

ललन सिंह ने कहा, “एक निरंकुश संस्था में पारदर्शिता लाने के लिए यह कानून बनाया जा रहा है। विपक्ष इसकी तुलना मंदिरों से कर रहा है। वे मुख्य मुद्दे से भटक रहे हैं। केसी वेणुगोपाल को बताना चाहिए कि हजारों सिख कैसे मारे गए। किस टैक्सी ड्राइवर ने इंदिरा गाँधी की हत्या की? अब, वे बात कर रहे हैं अल्पसंख्यक की।”

प्रस्तावित संशोधन

वक्फ संशोधन बिल 2024 के जरिए केंद्र की मोदी सरकार 44 संशोधन करेगी। बिल में वक्फ कानून 1995 के सेक्शन 40 को हटाया जाएगा। इस धारा के तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने का अधिकार दिया गया है। संशोधन बिल के जरिए वक्फ कानून 1995 का नाम बदल कर एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम 1995 किया जाएगा।

केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम के साथ-साथ गैर-मुस्लिमों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसमें दो महिलाओं को रखना भी अनिवार्य होगा। इसमें मुस्लिम समुदाय के अन्य पिछड़ा वर्ग- शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, 3 सांसद, मुस्लिम संगठनों के 3 प्रतिनिधि, मुस्लिम कानून के 3 जानकार, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के 2 पूर्व जज, एक वकील, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 4 लोग, भारत सरकार के सचिव आदि होंगे।

नए संशोधनों के अनुसार, वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए सर्वे कमिश्नर का अधिकार कलेक्टर या कलेक्टर द्वारा नामित डिप्टी कलेक्टर को होगा। बोहरा और आगाखानी के लिए ‘औकाफ़’ (दान की गई संपत्ति और वक्फ के रूप में अधिसूचित) के लिए अलग से बोर्ड की स्थापना की जाएगी।

वक्फ काउंसिल किसी संपत्ति पर दावा नहीं ठोक सकता। वहीं, वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ के रूप में दर्ज करना चाहता है तो पहले उसे सभी संबंधितों पक्षों को नोटिस जारी करना होगा। यह पंजीकरण एक केंद्रीकृत वेबसाइट पर होना चाहिए। एक केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के माध्यम से वक्फ के पंजीकरण के तरीके को सुव्यवस्थित करने की भी इसमें व्यवस्था की गई है।

नए संशोधनों के अनुसार, केवल प्रैक्टिस करने वाले मुस्लिमों को ही अपनी चल या अन्यथा संपत्ति वक्फ परिषद या बोर्ड को दान करने की अनुमति होगी। दान करने फैसला सिर्फ कानूनी मालिक ही ले सकता है।वर्तमान कानून के तहत, किसी भी वक्फ संपत्ति को ऐसी संपत्ति नहीं माना जा सकता है, यदि इसके बारे में कोई विवाद हो, खासकर यदि इसके सरकारी संपत्ति होने के बारे में कोई सवाल हो।

ऐसे विवादों में अधिकारी जाँच करेंगे और राज्य को एक रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके बाद रिकॉर्ड समायोजित किए जाएँगे। नए कानून में वक्फ बोर्ड को मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल विधवाओं, तलाकशुदा और अनाथों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए और वह भी सरकार द्वारा सुझाए गए तरीके से। एक प्रमुख प्रस्ताव यह भी है कि महिलाओं की विरासत की रक्षा और सुनिश्चित की जानी चाहिए।

राज्यसभा में विपक्ष की ‘घटिया हरकत’ के बाद सभापति ने कुर्सी छोड़ी: TMC सांसद से बोले- आपकी हिम्मत कैसे हुई चिल्लाने की, जयराम रमेश को भी रगड़ा

राज्यसभा सत्र के दौरान सदन में उठा आज विनेश फोगाट का मामला गरमागर्मी पर पहुँच गया जब सभापति जगदीप धनखड़ से तृणमूल कॉन्ग्रेस सांसद डेरेक ओब्रेन ने अभद्रता की। इस घटना के बाद जगदीप धनखड़ अपनी कुर्सी छोड़ चले गए।

दरअसल, विनेश फोगाट को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था- “हमें कारण जानना है कि आखिर क्या ऐसा हुआ कि एकदम से विनेश को बाहर किया गया और हमने कुछ नहीं किया।: खड़गे के सवाल के बाद टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रेन को चिल्लाकर विरोध किया। इस बात से सभापति जगदीप धनखड़ काफी नाराज हो गए।

धनखड़ ने कहा, “आपकी हिम्मत कैसी हुई अध्यक्ष पर चिल्लाने। आपकी हरकत सबसे घटिया हरकत है। मैं इसकी निंदा करता हूँ। अगली बार मैं आपको सदन से बाहर कर दूँगा। आपने अध्यक्ष की ओर हाथ करके चिल्लाने की हिम्मत कैसे की।”

सभापति जगदीप धनखड़ के इस बयान के बाद विपक्ष के कुछ नेता वॉकआउट कर गए। इसके बाद जगदीप धनखड़ ने कहा, “हमने सदन के अंदर अभी सबसे खराब स्थिति को देखा। हमने आपातकाल के दौरान अपने संविधान का सबसे काला दौर देखा था। हमें पता है यह कैसे शुरू हुआ था। यह सबसे संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने के साथ शुरू हुआ था। जून 1975 में चुनौती थी। अभी भी गंभीर चुनौती है। क्या इस तरह के व्यवहार की कोई सही ठहरा सकता है।”

विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट पर जगदीप धनखड़ ने कहा, विपक्ष के लोग इस पवित्र सदन की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं। इसे आराजकता का केंद्र बना रहे हैं। ये सांसद गलत आचरण तो दिखा ही रहे हैं, साथ ही शारीरिक रूप से भी सभापति के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने आहत मन से कहा, “पवित्र सदन को अराजकता का केंद्र बनाना, भारतीय प्रजातंत्र के ऊपर कुठाराघात करना। अध्यक्ष की गरिमा को धूमिल करना, शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण करना, यह अमर्यादित आचरण नहीं है, यह हर सीमा को लांघित करने वाला आचरण है। यह सदन इस समय देश की रूलिंग पार्टी के अध्यक्ष को यहाँ सदन के नेता को रूप में देख रहा है। यह सदन प्रतिपक्ष ने अध्यक्ष को भी यहाँ नेता प्रतिपक्ष के रूप में यहाँ देख रहा है। कॉन्ग्रेस पार्टी की वरिष्ठतम नेता भी इस सदन की सदस्य हैं। जो मैं हाल के दिनों में देख रहा हूँ, और जिस तरह से चुनौती शब्दों से, पत्र के द्वारा, अखबार के माध्यम के द्वारा, एक प्रमुख अखबार, नाम नहीं लेना चाहता हूँ, कितनी गलत टिप्पणी की है।”

उन्होंने कहा, “मैंने देखा है। मेरे को ये चुनौती नहीं दी जा रही है। यह चुनौती सभापति के पद को दी जा रही है, और ये चुनौती इसलिए दी जा रही है क्योंकि जो व्यक्ति इस पद पर बैठा है, वो इसके लायक नहीं है। ऐसा ये सोचते हैं। मुझे हाउस का समर्थन जितना चाहिए उतना नहीं मिला है। मैंने प्रयास में कोई कमी नहीं की है।”

आगे उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश को भी फटकारा। सभापति ने कहा, “जयराम जी आप हँसिए नहीं… मैं आपकी आदत जानाना हूँ। अब मेरे पास एक ही विकल्प है। सदन में बहुत से वरिष्ठ सदस्य हैं। अब भी उपस्थित हैं उनका सम्मान करता हूँ। उन्होंने राजनीति मेरे से बहुत ज्यादा देखी है। दुखी मन से…मैं अपनी शपथ से दूर नहीं भाग रहा हूँ। पर जो आज मैंने देखा है। जिस तरह का व्यवहार सदस्यों ने किया है। शारीरिक रूप से किया है। जिस तरह का व्यवहार इधर से (विपक्ष की ओर इशारा करते हुए) भी हुआ है। कुछ समय के लिए मैं यहा बैठने में अपने आपको सक्षम नहीं पा रहा हूँ।” इसके बाद वह सदन छोड़कर चले गए।

दिल्ली में लगे इस्लामी और खालिस्तानी आतंकियों के पोस्टर, सूचना देने वालों को मिलेगा ईनाम: स्वतंत्रता दिवस से पहले पुलिस अलर्ट

स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए दिल्ली पुलिस अलर्ट हैं। देश इस बार 78वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस के जवानों ने गुरुवार (8 अगस्त 2024) को खान मार्केट सहित अन्य इलाकों में कुख्यात आतंकियों के पोस्टर लगाए हैं। ये आतंकी अलकायदा और खालिस्तानी संगठनों से जुड़े हैं और सुरक्षाबलों को लंबे समय से इनकी तलाश है।

इस पोस्टर्स में रियाज, जुनैद और परमजीत जैसे कई खतरनाक आतंकियों की तस्वीरें है। इस पोस्टर में कहा गया है कि इन खूंखार आतंकियों को देखते हुए पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत सूचित करें। ऐसा करने वाले व्यक्ति को उचित ईनाम दिया जाएगा। इसके साथ ही उसका नाम एवं पता भी गुप्त रखा जाएगा। पोस्टर के कुल 9 आतंकियों के नाम एवं तस्वीरें हैं। इनमें 6 आतंकी अलकायदा के हैं।

पुलिस दिल्ली की सीमा से सटे राज्यों पर भी निगरानी रख रही है। बता दें कि इससे पहले जानकारी मिली थी कि 15 अगस्त पर खालिस्तानी संगठन के साथ-साथ इस्लामी संगठन किसी बड़ी को साजिश रच रहे हैं। इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हैं। सब-इंस्पेक्टर कोमल ने कहा, “हम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए आगामी 15 के मद्देनजर आतंकवादियों के पोस्टर लगा रहे हैं।”

पुलिस का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के चलते सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को जागरूक करने के लिए आतंकियों को पोस्टर लगाए जा रहे हैं। उधर, दिल्ली पुलिस के कमिश्नर संजय अरोड़ा ने बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक संकट के चलते पुलिस अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली राजधानी क्षेत्र में रहने वाले बांग्लादेशियों की पहचान करने के लिए कहा गया है।

पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र के मोटर वर्कशॉप और गैराज में जाकर पिछले 10 दिनों में किसी वाहन में हुए बदलाव में पता लगाने के लिए भी कहा है। पुलिस मुख्यालय में आयोजित बैठक में पुलिस कमिश्नर अरोड़ा ने पिछले दो महीनों में कूरियर कंपनियों के जरिए बिना स्पष्ट जानकारी वाले पतों पर की गई डिलीवरी के बारे में भी पता लगाने के लिए कहा है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित लाल किले से देश को संबोधित करेंगे। इस दौरान परिसर में सैकड़ों गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाला यह देश का सबसे बड़ा कार्यक्रम माना जाता है। ऐसे में सुरक्षाबल राजधानी के चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी रख रही है।

बांग्लादेश में भड़की हिंदू विरोधी हिंसा का डर पाकिस्तान तक पहुँचा, 21 लोग अटारी बॉर्डर से भारत आए: बोले- अब वहाँ कभी नहीं जाएँगे

पाकिस्तान से हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें आना कोई नया नहीं है। वहाँ के अल्पसंख्यक अकसर अपने भविष्य को बचाने के लिए भारत आते दिखते हैं। इस बार भी अमृतसर के पास अटारी बॉर्डर से हिंदू परिवारों ने भारत में एंट्री ली है। बुधवार (7 अगस्त 2024) को बाहर से आने वाले इस जत्थे में कुल 21 लोग हैं। ये लोग बांग्लादेश में सरकार गिरने के बाद जो हिंदुओं पर हिंसा शुरू हुई उसके कारण भारत आए।

अब बताया जा रहा है कि अटारी बॉर्डर से भारत में आने बाद ये लोग जोधपुर जाएँगे और वहीं पर रहेंगे। इन्हें लेने जोधपुर का एक शख्स भी पहुँचा था। उसका कहना था कि इनमें से 16 लोग उसकी पत्नी के रिश्तेदार हैं। इसके अलावा अन्य 5 लोग भी उनसे ही जुड़े हुए एक परिवार के हैं।

उन्होंने बताया कि ये सारे लोग पाकिस्तान के पंजाब सूबे के सहीम यार खान में रहते थे, मगर खराब होते माहौल को देखते हुए इन लोगों ने पलायन का निर्णय लिया और वो भारत आ गए।जोधपुर से आए व्यक्ति ने यह भी बताया कि उनके बहनोई दर्शन और ससुर बिरया राम ने अब पाकिस्तान वापस न लौटने का फैसला किया है, उन्होंने इसका कारण नहीं बताया है, बस वो अब भारत ही रहेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अटारी बॉर्डर से जो लोग भारत आए उन्होंने बताया कि आने वाले समय में कई और हिंदू परिवार भारत आ सकते हैं। यही नहीं एक ने कहा कि बांग्लादेश में जिस तरह से हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं उसे देखते हुए हमें लगा कि जल्दी ही भारत की तरफ चले जाना चाहिए। इसलिए उन्होंने भारत का रुख किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन दो परिवारों ने टूरिस्ट वीजा के लिए एप्लाई कर दिया है और बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ उसे देखते हुआ उसे देख वो सब अब भारत में रहेंगे।

मालूम हो कि ऐसा नहीं है कि बांग्लादेश में सरकार गिरने से स्थिति खराब होना ही पाकिस्तानी हिंदुओं के पलायन का अकेला कारण नहीं है, पाकिस्तान से जुड़ी खबरें यदि देखेंगे तो पता चलेगा कि कैसे पाकिस्तान में हिंदुओं पर हत्याचार किया जाता है। कैसे वहाँ हिंदुओं की बहन-बेटियों के अपहरण के बाद उनके साथ बलात्कार होता है, उनसका निकाह करवा दिया जाता है, धर्मांतरण करवा दिया जाता है और हिंदू लड़कों को बेरहमी से मारने की भी कई घटनाएँ हमारे सामने आ चुकी हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान से समय-समय पर हिंदुओं का पलायन होता रहा है।

मुँह बाँधकर किया रेप, काटना चाहते थे गला: बांग्लादेश की हिंदू महिलाओं ने बताई दुर्दशा, कहा- बेटियों को बचाने के लिए हमने अपना सब कुछ दे दिया

बांग्लादेश में सत्ता विरोधी प्रदर्शन हिंदू विरोधी हिंसा में तब्दील हो चुके हैं। हिंदुओं के घरों और मंदिरों को खास तौर पर दुश्मनी में हमले हो रहे हैं। शेख हसीना के इस्तीफे के बाद, हिंदुओं के घरों में लूटपाट, तोड़फोड़ और हिन्दू महिलाओं के साथ रेप की कई घटनाएँ भी सामने आई हैं। बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्याएँ और मंदिरों में तोड़फोड़ बड़े स्तर पर जारी है।

ढाका के नाटोरे, धामराई, पटुआखाली के कालापारा, शरीयतपुर और फरीदपुर में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही जेसोर, नोआखाली, मेहरपुर, चाँदपुर और खुलना में भी हिन्दू घरों को भी निशाना बनाया गया है। दिनाजपुर में 40 हिंदू दुकानों में तोड़फोड़ की गई है।

बांग्लादेश की कई हिंदू महिलाएँ इस्लामी भीड़ के हाथों हुए अत्याचार की कहानी बताने के लिए आगे आई हैं। गुरुवार (8 अगस्त, 2024) को हिंदू वॉयस द्वारा एक वीडियो साझा किया गया है। यह वीडियो बांग्लादेश के पिरोजपुर जिले के विभिन्न इलाकों में रहने वाली कई हिंदू महिलाओं का है। इसमें उन हिन्दू महिलाओं को अपनी दुर्दशा बताते हुए सुना जा सकता है।

इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथों हिंसा का शिकार हुई एक हिंदू महिला ने बताया, “वह तलवारों और धारदार हथियारों के साथ आए थे। उन्होंने सब कुछ लूट लिया। अपनी बेटियों को बचाने के लिए, हमने उन्हें अपना सब कुछ दे दिया।”

एक अन्य हिंदू महिला ने रोते हुए बताया, “रात में वो लोग आए। उन्होंने हमारे घरों में तोड़फोड़ की और सब कुछ लूट लिया। हम इस दौरान छिप गए थे। उन्होंने मेरे साले की पत्नी को पकड़ लिया और उसे दूसरे कमरे में ले गए। उन्होंने उसके साथ रेप किया। बाद में, हमें वह मिली। उसका चेहरा कपड़ों से बंधा हुआ था। वह उसका गला भी काटना चाहते थे। उसे बचाने के लिए, हमने उन्हें सारे सोने के जेवर दे दिए।”

एक दूसरी पीड़ित महिला ने बताया, “उन्होंने हमें चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे पचास लोगों ने तुम्हारे घर को घेर लिया है, तुम्हारे पास भागने का कोई रास्ता नहीं है। इसके बाद उन्होंने सब कुछ लूट लिया। उन्होंने मुझे पकड़ लिया और बिस्तर पर ले गए। उन्होंने जान से मारने की धमकी दी। मैंने उनसे विनती की कि या तो मुझे छोड़ दें या मुझे मार दें। दंगाइयों ने मुझसे कहा कि मेरे पास जो भी कीमती सामान है, उन्हें दे दूँ। इसके बाद मैंने उन्हें अपने सारे गहने दे दिए, इसलिए वह सभी मुझे छोड़कर चले गए।”

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले लगातार जारी

इससे पहले, ऑपइंडिया ने कुछ बांग्लादेशी हिंदुओं से बात की थी। उन्होंने हमें बताया कि हिंदुओं के लिए स्थिति और लगतार खराब होती जा रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए बांग्लादेश के हिंदुओं ने बताया कि शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से जमात-ए-इस्लामी के सदस्य हिंदू व्यवसायों और हिंदू घरों की लिस्ट बना रहे हैं।

अपनी सुरक्षा के लिए डरते हुए उन्होंने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कई लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने में असमर्थ हैं। उन्होंने बताया कि जमात-ए-इस्लामी और अन्य इस्लामी कट्टरपंथी बंदूकों के साथ सड़कों पर घूम रहे हैं, इससे उनके लिए सुरक्षित स्थानों पर जाना असंभव हो गया है।

5 अगस्त को बताया गया था कि जिहादियों ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की आड़ में बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमला किया था। प्रधानमंत्री पद से हसीना के इस्तीफे के बावजूद, विरोध प्रदर्शन जारी रहे और हिंदुओं पर हमले भी हुए।

भारतीय महिला पहलवान अंतिम पंघाल को पेरिस ओलंपिक के खेल गाँव से निकाला, इनके कारण ही 53 से 50 किग्रा भार वर्ग की कुश्ती में आईं विनेश फोगाट

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के लिए एक के बाद एक बुरी खबर आ रही है। कल (7 अगस्त 2024) विनेश फोगाट को ओवरवेट के कारण अयोग्य करार दिया गया था जिसके बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास का ऐलान कर दिया। वहीं अब आज (8 अगस्त 2024) भारतीय पहलवान अंतिम पंघाल की पेरिस ओलंपिक गाँव की मान्यता को रद्द कर दिया गया है।

दरअसल, 7 अगस्त को अंतिम पंघाल को ओलंपिक में डेब्यू में मिली हार के बाद वह अपने निजी कोच और स्पैरिंग पार्टनर से मिलने गई थीं। इस दौरान उन्होंने अपनी बहन निशा से कहा था कि वह उनका एक्रिडिटेशन कार्ड का उपयोग करने पेरिस गेम्स विलेज से अपना सामान ले आए।

निशा जिस समय अपना सामान लेने जा रही थी। उस समय उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया। उन्होंने इस अपराध के लिए कुछ देर हिरासत में रखा गया। बाद में IOA के हस्तक्षेप पर उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। हालाँकि इस हरकत के लिए IOA ने अंतिम से कहा कि वह अपने कोच, भाई और बहन के साथ पेरिस छोड़ें।

अंतिम पंघाल वही पहलवान हैं जिनके कारण विनेश फोगाट को 50 किग्रा वर्ग की कुश्ती में उतरना पड़ा था क्योंकि इस वर्ग में अंतिम पंघाल को कोटा मिलने के कारण पहले ही एंट्री मिल गई थी। विनेश ने इसके बाद अपना वजन 50 किलो के खेल के लिए तैयार किया और ओलंपिक में गईं।

इस चयन से पहले एक बार और अंतिम पंघाल का विनेश फोगाट के साथ सामना हुआ था। ये बात है एशियन गेम्स की। तब, अंतिम पंघाल को नेशनल ट्रायल जीतने के बाद भी एशियन गेम्स के लिए स्टैंड बाय पर रखा गया था। उनकी जगह विनेश फोगाट को बिना ट्रायल ही एशियन गेम्स में डायरेक्ट एंट्री दी गई थी।

इसके बाद अंतिम पंघाल हाई कोर्ट भी गईं थीं। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। बाद में विनेश फोगाट ने चोट के कारण अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद कुश्ती संघ ने अंतिम पंघाल का नाम एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा गया था।

बाद में भारत की युवा पहलवान अंतिम पंघाल ने विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। अंतिम ने दो बार की यूरोपियन चैंपियन एम्मा मालमग्रेन को हराकर यह जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही उन्होंने तभी 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल कर लिया था। वो ऐसा करने वाली पहली भारतीय पहलवान थी।

हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बना रहे इस्लामी कट्टरपंथी, बांग्लादेश की पुलिस केवल दे रही भरोसा: माखन के घर पर 400 की भीड़ ने किया हमला, कॉल कर बोले- हमें बचा लो

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और भारत आने के बाद से लगातार हिन्दुओं के विरुद्ध इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा जारी है। हिन्दुओं के घरों पर इस्लामी भीड़ हमला कर उन्हें जला रही है। हिन्दू अपनी जान बचाने को भाग और छिप रहे हैं। उन्हें बचाने के लिए कोई व्यवस्थाएँ काम नहीं कर रहीं। व्ह अपनी आपबीती मीडिया से बता रहे हैं।

बांग्लादेश के नारायणपुर जिले के रघुनाथपुर में रहने वाले माखन सरकार ने अमर उजाला को अपनी आपबीती फोन पर सुनाई। उन्होंने बताया कि नारायणगंज स्थित उनके घर पर लगभग 400 लोगों की भीड़ ने हमला किया और उनका घर लूट लिया। उनके घर में तोड़फोड़ भी की गई।

माखन सरकार अपने परिवार सहित जान बचाने के लिए यहाँ से भाग गए। वर्तमान में वह किसी जगह छुपे हुए हैं, उनको प्रशासन और सेना से कोई सहायता नहीं मिल रही है। उन्हें सेना और पुलिस कोई नहीं बचा रहा है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। वह बचाने की अपील कर रहे हैं।

नारायणपुर जिले की घटना कोई अकेली नहीं है। लगातार सोमवार से ही हिन्दू बांग्लादेश में निशाने पर हैं।  शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद इ्स्लामी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के दंगाई हिंदू के घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की लिस्ट बना रहे हैं। एक हिन्दू ने ऑपइंडिया को बताया,”कुछ ही स्थानीय लोग हमारी मदद कर रहे हैं, जबकि हजारों की तादाद में हिंसक भीड़ हम लोगों की हत्या करने पर तुली हुई है।”

कुछ अन्य पीड़ितों ने बताया कि हिंसा रात भर जारी रही और डर से हिन्दू घरों में छिपे रहे। बताते चलें कि विश्व हिंदू महासंघ, बांग्लादेश चैप्टर ने भी बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं की एक सूची जारी की है। इस लिस्ट में कम-से-कम 3 ऐसी हिंदू महिलाओं के नाम शामिल हैं, जिनका इस्लामी दंगाइयों ने अपहरण कर लिया है।

उनका कहना है कि बांग्लादेश में रहने वाले हिन्दू सहमे हुए हैं। सुरक्षा कारणों से अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कुछ हिंदुओं ने यह भी कहा कि वो कहीं सुरक्षित जगह भागकर जा भी नहीं पा रहे हैं, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी समूह और अन्य चरमपंथी संगठनों के उपद्रवी बंदूक लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट को बीच-बीच में बंद कर दिया जा रहा है, जिससे वो अपने अन्य परिजनों का हाल-चाल भी नहीं ले पा रहे हैं।

बांग्लादेशी हिन्दुओं का आरोप है कि उन्हें जान-बूझ कर एक-दूसरे से दूर रखने की साजिश की जा रही है, ताकि वे साथ ना आ पाएँ। हमें बताया गया कि बांग्लादेश में हिंसा जारी है और महज कुछ ही घटनाएँ लोगों तक पहुँच पा रही हैं। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश की जेलों में बंद जमात के 2,200 से अधिक कट्टरपंथियों को जमानत दे दी गई। इससे हिन्दुओं की हालत और खराब हो सकती है। इस्लामी कट्टरपंथी बांग्लादेश की प्रसिद्द हस्तियों को भी नहीं छोड़ रहे।

उन्होंने बांग्लादेश के प्रसिद्ध गायक राहुल आनंद का घर जला दिया। राहुल आनंद का घर धानमंडी 32 पर स्थित था। इस्लामी भीड़ ने उनके 140 साल पुराने इस आवास को लूटने के बाद जलाया। इस लूटपाट और आगजनी में उनके 3000 म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स भी बर्बाद हो गए जिनमें से कई को उन्होंने अपने हाथ से बनाया था।

राहुल आनंद गीत बैंट जोलेर गान चलाते हैं। इस बैंड से जुड़े एक पुराने साथी सैफुल जरनल ने मीडिया को बताया, “हमारे प्रिय राहुल दा के 3000 से अधिक संगीत वाद्ययंत्र, जिन्हें उन्होंने वर्षों से प्यार और देखभाल के साथ डिजाइन और बनाया था, नष्ट कर दिए गए हैं और जलाए गए वाद्ययंत्रों और अन्य घरेलू चीजों का अनुमानित मूल्य 10 लाख टका से अधिक है।”

इससे पहले बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने इस दौरान देश में हिंदू मंदिरों, घरों और दुकानों पर हुए हमलों की एक लिस्ट जारी की थी। इसमें बताया गया था कि देश भर में 54 जगह पर हिन्दुओं को निशाना बनाया गया।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में जुलाई महीने से ही आरक्षण खत्म करने की माँग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इस प्रदर्शन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाइजैक कर लिया और इसके बाद भारी हिंसा हुई। यह हिंसा अगस्त में और बढ़ गई और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार (5 अगस्त, 2024) को ढाका छोड़ कर भारत आ गईं। वर्तमान में वह भारत में हैं।

24 साल के हिंदू युवक को कुल्हाड़ी से काट डाला, क्योंकि मुस्लिम युवती से किया प्रेम विवाह: डेढ़ महीने पहले ही हुई थी बेटी, गुजरात के द्वारका की घटना

गुजरात की देवभूमि द्वारका में 24 साल के एक हिंदू युवक को मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह करने पर कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतार दिया गया। पुलिस ने इस मामले में लड़की के चाचा, भाई, एक नाबालिग आरोपित समेत उसके परिवार के 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना 3 अगस्त 2024 को भनवाड़ से करीब 15 किलोमीटर दूर शेडाखाई गाँव में अंजाम दी गई थी।

जानकारी के मुताबिक, हिंदू युवक याग्निक ने डेढ़ साल पहले अपने गाँव की एक मुस्लिम युवती रजमा से प्रेम विवाह किया था। चूँकि घरवाले इसके खिलाफ थे तो उन्हें उस समय गाँव छोड़ना पड़ा। हालाँकि डेढ़ महीने पहले जब दोनों माता-पिता बने तो दोबारा घरवालों के पास गाँव में लौट आए। उन्हें लगा कि दोनों का रिश्ता रजमा के घरवाले स्वीकार लेंगे लेकिन दोनों पति-पत्नी रजमा के घरवालों की साजिश से अंजान थे। उनके मन में बदले की आग जल रही थी।

पिछले शनिवार दोपहर करीब तीन बजे याग्निक अपने घर से निकला और अपने एक दोस्त के साथ गाँव के बस स्टेशन गया। उसे देखकर रजमा का भाई साजिद, नाबालिग आरोपित और उसका चाचा सलीम हुसैन, आमेद मूसा, जुमा मूसा, उस्मान मूसा और कासिम मिलाकर कुल सात लोग कुल्हाड़ी, चाकू और लोहे के पाइप जैसे घातक हथियार लेकर उसके पीछे दौड़ पड़े। इन सभी का मकसद सिर्फ याग्निक को मारना था और याग्निक इनके मनसूबों से अंजान था। वो जब तक अपने सामने हथियार लेकर दौड़ रहे लोगों को देख कुछ समझ पाता उस पर अंधाधुंध चाकू से वार होने शुरू हो गए।

रजमा के परिजनों का कहना था, उसने हमारी लड़की से शादी की है। हम उसे जिंदा नहीं जाने देंगे। ये कहते हुए सब उस पर टूट पड़े। एक ने पहले याग्निक को नीचे गिरा दिया। उसके पास कुल्हाड़ी से उसके पैर काट डाले। पीड़ित इस दौरान अपनी बीवी और मासूम बच्ची के नाम पर रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन मुस्लिम परिवार ने उसकी एक न सुनी। उसे चाकुओं से गोदा गया, कुल्हाड़ी से काटा गया। याग्निक के दोस्त ने उसे बचाने के प्रयास किए, लेकिन उन दरिंदों के आगे वह असहाय था। उसने मृतक के परिवार को हमले के बारे में बताया।

जैसे ही मां और पत्नी रजमा को घटना के बारे में पता चला, वे मौके पर पहुँचीं। हालाँकि, उन लोगों के पहुँचने से पहले रजमा के भाई और चाचा युवक को बेरहमी से मार चुके थे। पत्नी ने हड़बड़ी में 108 नंबर पर कॉल की। एक एंबुलेंस आई और युवक को  युवक को लहूलुहान हालत में खंभालिया अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि, उनकी हालत बहुत गंभीर होने के कारण उन्हें आगे के इलाज के लिए जामनगर के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया। फिर परिजन उन्हें एंबुलेंस में लेकर जामनगर के लिए निकले। लेकिन सिक्का गाँव के पास ही याग्निक ने अपना दम तोड़ दिया। जामनगर के जीजी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने भी उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हत्या की बाबत हिंदू युवक की माँ ने भारवाड़ थाने में एक ही मुस्लिम परिवार के सात लोगों के बारे में जानकारी दी है, जिनमें साजिद ईशा देथा, सलीम हुसैन देथा, जुमा मूसा देथा, एडम मूसा उर्फ ​​अदु, उस्मान मूसा उर्फ ​​भाको उस्मान, होथी कासम उर्फ ​​दादो देथा और एक शामिल हैं।

पुलिस ने इस मामले को बीएनएस की धारा 103(2), 189(2), 189(4), 1991(2), 191(3), 190 और जीपी एक्ट धारा 135(1) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं। वहीं रजमा ने मीडिया के सामने आकर अपने पति के लिए न्याय माँगा। पुलिस भी मामला हिंदू मुस्लिम होने के कारण सतर्क है। गाँव को छावनी में बदल दिया गया है। एक नाबालिग समेत 7 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

बहन करती थी हिंदू लड़के से प्यार, हसीन ने बीच सड़क पर गला दबाकर मार डाला… बच्चे से बुर्के वाली तक देखते रहे तमाशा: Video वायरल, मेरठ की घटना

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक मुस्लिम युवक ने अपनी ही नाबालिग बहन की बीच सड़क पर गला दबा कर हत्या कर दी। लड़की का बड़ा भाई उसके हिन्दू लड़के से प्यार करने को लेकर नाराज था। इसीलिए उसने ऑनर किलिंग की इस घटना को अंजाम दिया। घटना का एक वीडियो भी वायरल है। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के नगला शेखू गाँव में यह घटना बुधवार (7 अगस्त, 2024) को हुई। यहाँ बीच सड़क पर हसीन ने अपनी बहन अमरीशा की गला दबा हत्या कर दी। इस बीच वह चिल्लाता रहा कि इस लड़की ने मेरे बाप की इज्जत खराब कर दी, मेरे बाप की इज्जत खा गई। जब यह घटना हुई तो आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

किसी ने इसका वीडियो बना कर वायरल कर दिया। इसमें दिखता है कि एक युवक एक लड़की के सीने पर चढ़ कर बैठा है और उसका गला दबा रहा है। लड़की की हत्या के पीछे उसका हिन्दू लड़के से प्रेम प्रसंग और उसके साथ भाग जाना बताया गया है।

दरअसल, जिस अमरीशा की हत्या हुई, वह पास के ही एक गाँव के एक हिन्दू युवक मोहित से प्रेम करती थी। मोहित की बहन अमरीशा के गाँव में ब्याही है, वह यहाँ आता जाता था। इसी बीच दोनों में प्रेम हो गया। इसके बाद अमरीशा ने मोहित के साथ भागने का प्लान बना लिया।

अमरीशा तीन बार घर से भाग चुकी है। वह मार्च में भी भाग कर मोहित के पास चली गई थी और उसे पुलिस द्वारा बरामद किया गया था। इसके बाद वह मई में भी मोहित के पास गई और वापस लाई गई। अगस्त में भी वह प्रेम के पास जाकर वापस आई थी। इसी को लेकर उसका भाई हसीन गुस्सा था।

हसीन का कहना था कि अमरीशा ने बार-बार भाग कर परिवार की इज्जत खराब कर दी है और उनके पिता की इससे बदनामी हुई है। बताया गया कि बुधवार को भी अमरीशा अपने प्रेम के पास जाना चाह रही थी और इसी बात को लेकर उसकी हसीन से लड़ाई हुई। इसके बाद हसीन ने उसकी पिटाई कर दी।

हसीन उसे घर से खींचते हुए सड़क पर ले आया। इसके बाद यहाँ आकर चिल्लाने लगा। हसीन ने कहा, “इसने मेरे बाप की इज्जत खराब कर दी। ये मेरे बाप को खा जाएगी। मैं इसे नहीं मारता तो मेरा बाप मर जाता। ये तीन बार घर से भागी है, ऐसी को ना मारता तो क्या करता।” हत्या के दौरान मौके पर कई महिलाएँ और पुरुष खड़े थे लेकिन किसी ने हसीन को नहीं रोका।

अपनी बहन का हत्यारा हसीन दो बच्चों का बाप है। वह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ा है। हसीन ने जिस अमरीशा की हत्या की, वह सबसे छोटी थी। यह सभी मिलकर 8 भाई-बहन हैं। हसीन खुद बाहर काम करता है, वह बहन के घर से भागने की खबर को सुनकर वापस आया था। इसके बाद उसने हत्या कर दी।

मामले में पुलिस ने आरोपित हसीन को गिरफ्तार कर लिया है। उसके विरुद्ध FIR भी दर्ज हो गई है। हसीन ने अपना अपराध भी पुलिस के सामने मान लिया है। हसीन का कहना है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया क्योंकि उसकी बहन भाग जाने की धमकी देती थी। हसीन ने बताया कि अमरीशा हिन्दू लड़के से शादी का दबाव डाल रही थी।

‘अब तुम्हारी जरूरत नहीं, टाइमपास के लिए रखा था’: अनवारुल मुस्तफा ने यादव समाज की शादीशुदा महिला को फँसाकर किया रेप, बच्चे के जन्म के बाद हत्या की धमकी

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में अनवारूल मुस्तफा द्वारा यादव जाति की एक महिला से वर्षों तक रेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िता शादीशुदा और एक बच्चे की माँ है। अनवारुल ने पीड़िता को शादी का झाँसा देकर उसका यौन शोषण किया। रेप के बाद पीड़िता ने एक बच्ची को भी जन्म दिया है। सोमवार (5 अगस्त 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बस्ती जिले के थानाक्षेत्र वाल्टरगंज का है। यहाँ 1 अगस्त को पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में महिला ने बताया कि वह मूल रूप से UP के संतकबीरनगर जिले की रहने वाली है। साल 2013 में उसकी शादी बस्ती जिले में हुई थी। इस शादी से उसे 9 साल का एक बेटा है।

महिला की ससुराल वालों को दवा देने के लिए वाज़िद अली का बेटा अनवारुल मुस्तफा आया करता था। अनवारुल बस्ती जिले के गाँव सिसवारी का रहने वाला है और मेडिकल स्टोर चलाता है। पीड़िता ने बताया कि ससुराल में आते-जाते रहने की वजह से उसकी बातचीत अनवारुल से होने लगी। 3 साल पहले अनवारुल ने उसे अपने प्यार के जाल में फँसा लिया।

इसके बाद उसने पीड़िता को अपने मेडिकल स्टोर पर ले जाकर उससे रेप किया। जब महिला ने विरोध किया तो आरोपित ने उससे निकाह करने का झाँसा दिया। इस दौरान उसने खुद को कुँवारा बताया। कई बार रेप की वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई तो अनवारुल ने उसे संतकबीरनगर जिले में एक कमरा किराए पर ले कर रख दिया। कुछ दिनों बाद के पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया।

बच्ची के जन्म के बाद पीड़िता अनवारुल मुस्तफा पर निकाह के लिए दबाव बनाने लगी। हालाँकि, आरोपित किसी न किसी बहाने से यह सब टालता रहा। इस बीच पीड़िता दूसरी बार गर्भवती हो गई। अनवारुल द्वारा बार-बार शादी की बात टालने से पीड़िता को कुछ गलत होने की आशंका हुई। पीड़िता ने आरोपित के घर की पड़ताल की तो पता चला कि वह पहले से शादीशुदा है।

पोल खुलने के बाद जब पीड़िता ने उससे पूछा तो अनवारुल ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। पिटाई की वजह से पीड़िता के पेट में पल रहा गर्भ भी गिर गया। बकौल पीड़िता, आरोपित ने कहा कि ‘जहाँ मन में आए जाओ शिकायत कर दो। मैंने तुम्हें टाइमपास के लिए रखा था। अब तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है। शादी का दबाव बनाओगी तो तुम्हें और तुम्हारी बेटी को जान से मार दूँगा’।

आखिरकार पीड़िता ने थाने में जाकर मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवा कर आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने अनवारुल मुस्तफा के खिलाफ IPC की धारा 376 (2)(n) और 506 के तहत FIR दर्ज कर ली है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।