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हरियाणा चुनाव से पहले एक जुझारू महिला खिलाड़ी को मोहरा बनाते ‘गिद्ध’, जिस गिरोह ने योगेश्वर-उषा-बबीता को दी थी गाली, अब वो नीता अंबानी से क्यों चिढ़ा?

विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक 2024 में अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिस कारण फाइनल में पहुँचने के बावजूद उन्हें मेडल नहीं मिल पाया। जहाँ पूरे भारत के खेल प्रशंसक IOA के इस फैसले से हैरान हैं, वहीं वामपंथी तंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ‘रिलायंस फाउंडेशन’ की अध्यक्ष नीता अंबानी को भला-बुरा कह कर अपना उल्लू सीधा कर रहा है। वहीं विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा से वॉकआउट कर ‘विनेश फोगाट को न्याय दो’ नारा लगाते हुए हंगामा किया। ऐसे में सवाल उठता है – क्या एक महिला खिलाड़ी को हथियार बना कर राजनीति की जा रही है?

आइए, पहले संक्षेप में समझते हैं कि पूरा मामला है क्या। बुधवार (7 अगस्त, 2024) को विनेश फोगट का मुकाबला रात साढ़े 11 बजे अमेरिका की सारा एन हिल्डेब्रांट से होना था, लेकिन उससे पहले ही उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया क्योंकि उनका वजन अधिकतम तय मानक से 100 ग्राम अधिक पाया गया। विनेश फोगाट 50 किलोग्राम वर्ग में खेल रही हैं। 53 Kg वर्ग में भारत की तरफ से अंतिम पंघाल ने क्वालीफाई किया था। विनेश फोगाट के डॉक्टर ने बताया कि 1 दिन पहले विनेश फोगाट का वजन 2.70 किलोग्राम ज़्यादा हो गया था।

इस तरह रात भर पूरी की पूरी टीम लगी रही, विनेश फोगाट ने भी जम कर पसीना बहाया। जिस दिन पहलवानी का मुकाबला होता है, उसी दिन सुबह में प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे पहलवानों का वजन मापा जाता है। ‘इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन’ (IOA) के ‘चीफ मेडिकल ऑफिसर’ (CMO) डॉ दिनशॉ पार्दीवाला ने बताया कि अधिकतर पहलवान अपने स्वभाविक वजन से कम के वर्ग में खेलते हैं, ताकि प्रतिद्वन्द्वी के ऊपर उन्हें लाभ हासिल हो, ऐसे में पहलवानों को वजन बनाए रखने के लिए खाने-पीने पर नियंत्रण करना होता है, साथ ही वास्प-स्नान के अलावा व्यायाम कर के पसीना भी बहाना होता है।

इससे पहलवान को कमजोरी भी हो सकती है, इसीलिए उसे कम मात्रा में पानी और हाई-एनर्जी ड्रिंक्स दिए जाते हैं। डॉक्टर ने बताया कि रात भर में बाल काटने से लेकर अन्य कई तरह के प्रयास किए गए, लेकिन फिर भी वजन 100 ग्राम अधिक रह गया। 1 दिन पहले ही उन्होंने सेमीफाइनल सहित 3 मुकाबले खेले थे। 29 वर्षीय महिला पहलवान ने जापान की युई सुसाकी को हराया था, जो पिछले ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता हैं। हालाँकि, उनका मेडल का सपना अधूरा रह गया।

जैसे ही ये खबर सामने आई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत IOA अध्यक्ष PT उषा से सारे विकल्प आजमाने के लिए कहा, साथ ही IOC के समक्ष कड़ा विरोध भी उनके कहने पर दर्ज कराया गया। इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर ट्वीट डाल कर विनेश फोगाट को देश के लिए गर्व और प्रेरणा करार दिया, उन्होंने कहा कि ऐसे क्षण आते रहते हैं लेकिन वो एक जुझारू खिलाड़ी हैं और इससे बाहर निकलेंगी। याद कीजिए, जब पिछले ओलंपिक में उन्हें मेडल नहीं मिल पाया था तब भी पीएम मोदी ने उनसे मुलाकात कर उन्हें ढाँढस बँधाया था।

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी संसद में बयान देते हुए बताया कि उनकी आवश्यकताओं के अनुसार हरसंभव सहायता प्रदान की, उनके लिए अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ लोग नियुक्त किए गए। उन्होंने बताया कि कैसे हंगरी के कोच वॉलर एकॉस की सेवा ली गई, फिजियो अश्विनी पाटिल हमेशा उनके साथ रहते हैं, अतिरिक्त व्यक्तिगत सहायक स्टाफ के लिए वित्तीय सहायता भी दी गई। मेंटल कंडीशनिंग कोच वेन लोम्बारड को भी लगाया गया। साथ ही उन्होंने अन्य कोचों व सहायक स्टाफ के नाम भी गिनाए।

उन्होंने बताया कि कैसे भारत सरकार ने कुछ 70.45 लाख रुपए विनेश फोगाट पर खर्च किए हैं। स्पेन में 10 दिन तक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और फ़्रांस में ओलंपिक की तैयारी के लिए उन्हें वित्तीय सहायता दी गई। हंगरी स्थित टाटा ओलंपिक सेंटर में भी अतिरिक्त सहायक स्टाफ के लिए उन्हें सहायता दी गई। इसके अलावा रेहाब प्रक्रिया के लिए आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए भी उन्हें वित्तीय सहायता दी गई। साथ ही 2020 में टोक्यो ओलंपिक के दौरान भी उन्हें 1 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई थी।

जैसा कि आपने देखा, शुरू से भारत सरकार विनेश फोगाट के साथ थी। सोचिए, खेल या कला क्षेत्र के किसी भी ऐसे व्यक्ति के प्रति कॉन्ग्रेस या TMC जैसी पार्टियाँ कभी भी सहिष्णु रह सकती हैं, खासकर जब उस हस्ती ने इन दलों का विरोध किया हो? इतिहास में उदाहरण हैं। आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी की बात न मानने पर गायक किशोर कुमार को ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) ने प्रतिबंधित कर दिया था। बॉलीवुड में कई लोकप्रिय गाने लिखने वाले मजरूह सुल्तानपुरी को एक कविता के कारण जवाहरलाल नेहरू ने जेल में डलवा दिया था।

खैर, ये पुरानी बातें हैं। ताज़ा प्रकरण पर आते हैं। लगभग 3 महीने बाद, यानी अक्टूबर 2024 के दूसरे चरण में हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पहले पिछले 9 साल से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को हटा कर प्रदेश अध्यक्ष रहे नायब सिंह सैनी को CM बनाया। लोकसभा चुनाव में 5-5 से इस बार कॉन्ग्रेस और भाजपा का मुकाबला टाई रहा, जबकि पिछले साल BJP ने सारी 10 सीटें जीत कर क्लीन स्वीप किया था। 10 साल के भाजपा शासन के बाद कॉन्ग्रेस अब हरियाणा में मौका देख रही है।

मनोहर लाल खट्टर को केंद्र में विद्युत के अलावा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री बनाया गया है। मार्च 2005 से लेकर अक्टूबर 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपिंदर सिंह हुड्डा फ़िलहाल नेता प्रतिपक्ष हैं, राहुल गाँधी के करीबियों में से एक हैं। हाल ही में कुछ किसान नेताओं से उन्होंने राहुल गाँधी की मुलाकात कराई थी। ध्यान दिलाते चलें कि ‘पहलवान आंदोलन’ में उनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है, साथ ही पंजाब-हरियाणा के शम्भू बॉर्डर पर अभी भी कई किसान डेरा जमाए बैठे हैं, जिस कारण हाइवे तक बंद करना पड़ा है।

वामपंथी गिरोह तभी सक्रिय हो गया था जब विनेश फोगाट का मेडल पक्का नहीं हुआ था। उनके सेमीफाइनल में पहुँचने के साथ ही माँग की जाने लगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें बधाई दें। पीएम मोदी सभी खिलाड़ियों को बिना भेदभाव किए मेडल जीतने पर बधाई देते हैं। इन्होंने ये तक नहीं सोचा कि विनेश फोगाट का स्वर्ण पदक वाला मैच बाकी था, ऐसे में पहले ही पीएम मोदी पहले ही बधाई कैसे दे देते। खैर, जश्न मनाने के नाम पर एक ऐसा खेल शुरू हुआ कि पूछिए मत।

आरोप भले कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर हो, लेकिन इसी बहाने सारे भाजपा नेताओं को घेरा जाने लगा। भाजपा नेताओं ने विनेश फोगाट को जम कर बधाई दी, बिना राजनीति किए। लेकिन, गिरोह विशेष के लोगों ने जश्न के नाम पर सबको चिढ़ाना शुरू कर दिया। महिला पहलवान को सलाह दी जाने लगी कि वो पीएम मोदी का फोन न उठाएँ, सरकार द्वारा उन पर किए जा रहे खर्च को नकारा जाने लगा। राहुल गाँधी ने भी सीधी बधाई न देते हुए विनेश फोगाट को ‘खून के आँसू रुलाए जाने’ का आरोप मढ़ दिया।

ख़ुशी मनाना बहुत अच्छी बात है, लेकिन किसी महिला खिलाड़ी को सेलिब्रेट करते समय उन्हें संरक्षण देने वाले भारत सरकार, उन्हें वित्तीय मदद मुहैया कराने वाले खेल मंत्रालय, उनके साथ हमेशा खड़ा रहने वाले IOA और हर कदम पर उनकी सहायता करने वाले कोच से लेकर सपोर्टिंग कर्मचारियों सबको गाली दी जाने लगी। हमने तस्वीर देखी है कैसे IOA अध्यक्ष PT उषा इस दुःख के क्षण में विनेश फोगाट के साथ हैं। पीटी उषा खुद एक खिलाड़ी रही हैं, महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, याद कीजिए कैसे रेलरस प्रोटेस्ट के समय उन्हें भी गाली दी गई थी।

पहलवानों के आरोपों की जाँच के लिए जो कमिटी बनी थी उसमें ओलंपिक से लेकर कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स तक में मैच जीतने वाले पहलवान योगेश्वर दत्त को भी शामिल किया गया था। लेकिन अफ़सोस, योगेश्वर दत्त पर भी भद्दी-भद्दी टिप्पणियाँ की गईं। विनेश फोगाट की बहन बबीता फोगाट भाजपा में आ गई हैं, सिर्फ इसी कारण से उन्हें भी निशाना बनाया गया। क्या ये सब खिलाड़ी नहीं थे? आज पूरा देश विनेश फोगाट के साथ खड़ा है, लेकिन क्या योगेश्वर दत्त, बबीता फोगाट और पीटी उषा को भला-बुरा कहने वालों ने माफ़ी माँगी?

इतना ही नहीं, नीता अंबानी को भी नहीं छोड़ा गया। सिर्फ इसीलिए, क्योंकि वो IOC की सदस्य हैं और पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करती हैं। कोई पूछने लगा कि नीता अंबानी हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहीं, तो कोई कहने लगा कि अंबानी परिवार तो पीएम मोदी का मित्र है। इससे घटिया स्तर क्या हो सकता है गिरने का? नीता अंबानी ही ‘रिलायंस फाउंडेशन यूथ स्पोर्ट्स’ भी चलाता है, जिसके तहत देश भर के सैकड़ों शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे किशोर व युवा खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को निखारा जाता है।

इतना ही नहीं, असम की बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन और हरियाणा की ही पहलवान निशा दहिया भी इसी RFYS के सौजन्य से खेलती रही हैं। ऐसे कई खिलाड़ियों को रिलायंस की इस संस्था ने मदद मुहैया कराया है। असल में वामपंथी गिरोह चाहता है कि आलोचना के डर से देश के उद्योगपति खेल के क्षेत्र में सहायता करना छोड़ दें, ताकि कल को ये मोदी सरकार को खेल में दुर्गति के लिए निशाना बना सकें। लेकिन, ऐसी स्थिति आई ही नहीं है अभी।

आखिर विनेश फोगाट को लेकर संसद में प्रदर्शन का क्या कारण है? उधर पंजाब के मुख्यमंत्री व AAP नेता भगवंत मान ने विनेश के चाचा महावीर फोगाट से मुलाकात की, इसके लिए उन्होंने अपने पहले से तय कार्यक्रमों में बदलाव किए। दीपेंद्र हुड्डा ने पेरिस गए खेल अधिकारियों पर उँगली उठा दी। एक महिला पहलवान को माध्यम बना कर राजनीति कर रहे विपक्ष से और उम्मीद ही क्या की जा सकती है। विधानसभा चुनाव के लिए खेल को राजनीति में घसीटा जा रहा है।

मदरसे के संचालक के बेटे हसन ने नाबालिग को पकड़ खींचा, लेटाकर रेप की कोशिश की: अरबी की पढ़ाई के लिए मदरसे के हॉस्टल में रहती थी 14 साल की नाबालिग

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में मदरसे में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा से छेड़खानी और रेप की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप मदरसा संचालक के बेटे हसन उर्फ़ कल्लू पर लगा है। 14 वर्षीया पीड़िता मदरसे के ही हॉस्टल में रहती थी। यह शाहनवाज नाम के मौलवी द्वारा संचालित है। मौलवी के बेटे ने पीड़िता को इंजेक्शन भी लगाया था। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। बाप-बेटे फरार हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बिजनौर के थाना क्षेत्र शहर कोतवाली की है। यहाँ के बुरहानुद्दीनपुर इलाके में जामियातुल बनात नाम का एक मदरसा चलता है। मौलवी शाहनवाज द्वारा संचालित इस मदरसे में अरबी के कोर्स करवाए जाते हैं। यहाँ छात्राओं के रहने के लिए अलग से हॉस्टल भी बना हुआ है। यहाँ लगभग 200 छात्राएँ रहती हैं। इसी हॉस्टल में 14 साल की पीड़ित नाबालिग भी रहकर पढ़ती थी।

पीड़िता साल 2019 से यहाँ रहकर मौलवीयत का कोर्स कर रही है। पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि शुक्रवार (2 अगस्त) को वह बीमार थी। इस दौरान मौलवी के बेटे हसन उर्फ़ कल्लू ने उसे जबरन इंजेक्शन लगाया। वह गंदी नीयत से उसका हाथ पक लिया। इसके बाद वह पीड़िता के बगल में बिस्तर पर लेट गया। फिर पीड़िता को दबोच कर रेप का प्रयास किया।

पीड़िता ने बताया कि उसने खुद को जैसे-तैसे बचाया और भाग कर हसन के अब्बू मौलवी शाहनवाज के पास चली गई। उसने हसन को लेकर उसके अब्बू से शिकायत की, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता का आरोप है कि आरोपित हसन को ही सही बताते हुए उसे चुप रहने के लिए डाँट पड़ी। उसे यह बात किसी को नहीं बताने के लिए कुरान की कसम भी खिलाई गई।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपित की माँ ने उसकी पिटाई भी की है। आरोपित की अम्मी ने पीड़िता से कहा, “इतनी खूबसूरत लड़कियाँ रहती हैं, उनके साथ न करके तेरे ही साथ करेगा वो?” आखिरकार पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। पुलिस ने हसन को नामजद करते हुए केस दर्ज कर लिया है।

आरोपित हसन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और 115(2) के अलावा पॉक्सो एक्ट के अधिनियम 9f/10 के तहत करवाई की गई है। बिजनौर के एडिशनल एसपी ने बताया कि मामले की जाँच और उसमें जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मदरसा संचालक और उनका बेटा फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश की जा रही है। उधर, पीड़िता भी मदरसा छोड़ कर अपने घर चली गई है।

इस घटना को लेकर मदरसे में पढ़ाने वाले कारी शफीक ने पीड़िता को ही ग़लत ठहराया। उन्होंने कहा कि ये सारे आरोप बेबुनियाद है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में एक महिला आशंका जता रही है कि पहले भी इस मदरसे में किसी लड़की के साथ यौन शोषण की घटना हो चुकी है। यह मदरसा लगभग 20 साल से संचालित हो रहा है।

I.N.D.I. गठबंधन के 7 सांसदों को पाकिस्तान ने भेजे आम, देखिए किस-किस पर मेहरबान हुआ पड़ोसी मुल्क: अनुराग ठाकुर बोले – इन्हें यूपी के आम में नज़र आता है खोट

पाकिस्तान ने भारत के साथ ‘आप कूटनीति’ शुरू की है। जानने वाली बात ये है कि ये ‘आम डिप्लोमेसी’ भारत के साथ नहीं है, बल्कि भारत के विपक्षी दलों के नेताओं के साथ है। I.N.D.I. गठबंधन के 7 ‘ख़ास’ सांसदों को पाकितान की तरफ से मीठे-मीठे और पके हुए आम भेजे गए हैं। ये आम पाकिस्तान हाई कमीशन के माध्यम से भेजे गए हैं। बता दें कि इससे पहले भी आम का इस्तेमाल कूटनीति के लिए होता रहा है, बांग्लादेश की PM रहीं शेख हसीना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हर साल आम भिजवाती थीं।

जिन 7 सांसदों को आम भेजा गया है, वो ये हैं – कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी, पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर, माफिया मुख़्तार अंसारी का भाई अफजाल अंसारी, देश के सबसे महँगे वकीलों में से एक कपिल सिब्बल, दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट मस्जिद के इमाम मोहिब्बुलाह नदवी, BHU में ‘इस्लामिक स्टडीज’ का कोर्स शुरू करने की माँग करने वाले जियाउर रहमान बर्क और पूर्व सांसदों चौधरी मुनव्वर हसन और बेगम तबस्सुम हसन की बेटी इकरा। इन सभी को पाकिस्तान ने आम भेजे हैं।

राहुल गाँधी केरल के वायनाड से सांसद हैं। वहीं ब्रिटिश इंडिया पर कई किताबें लिख चुके शशि थरूर तिरुवनंतपुरम से कॉन्ग्रेस सांसद हैं। मोहिब्बुलाह नदवी रामपुर, जियाउर रहमान बर्क सम्भल और इकरा हसन कैराना से सांसद हैं। देश के HRD मंत्री रहे कपिल सिब्बल पहले कॉन्ग्रेस में थे, लेकिन अब वो भी समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। मऊ से विधायक रहे मुख़्तार अंसारी की जेल में मौत के बाद अफजाल अंसारी सहानुभूति लहर में फिर से गाजीपुर से MP बना।

पूर्व केंद्रीय मंत्री व हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने इस ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ पर निशाना साधते हुए कहा, “जिनका प्रेम जहाँ पर है, वहाँ से आम आएँगे। कुछ लोगों को उत्तर प्रदेश के आम का स्वाद अच्छा नहीं लगता था, खोट नज़र आता था। एक नेता जब दक्षिण भारत से चुनाव जीत कर आए तब भी उन्हें उत्तर भारत के लोगों में खोट नज़र आता था और आज भी उत्तर प्रदेश के आम में मिठास उन्हें नज़र नहीं आती लेकिन पाकिस्तान के आम उनको कुछ ज़्यादा पसंद आ रहे हैं।”

‘श्रीलंका-बांग्लादेश के बाद भारत का नंबर’: मोहम्मद अफसर ने स्टेटस में लिखा- डरा नहीं रहा बल्कि आगाह कर रहा हूँ; पुलिस ने आरोपित को दबोचा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में अफसर नाम के एक मुस्लिम युवक द्वारा व्हाट्सएप पर बांग्लादेश से जुड़े आपत्तिजनक स्टेटस डालने का मामला सामने आया है। अफसर एक पैथोलॉजी चलाता है। उसने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद अब भारत का नंबर आने की बात लिखी है। विश्व हिन्दू परिषद की शिकायत के बाद पुलिस ने अफसर को दबोच लिया है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र सिरौली का है। यहाँ अफसर नाम का युवक नगर पंचायत ऑफिस के आगे एक पैथोलॉजी चलाता है। बरेली के विश्व हिन्दू परिषद कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने बुधवार (7 अगस्त) को अपने X हैंडल के माध्यम से इसकी शिकायत पुलिस से की। हिमांशु ने अपने ट्वीट में बरेली ADG, DGP सहित मुख्यमंत्री कार्यालय को भी टैग किया है।

हिमांशु ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल @himanshupatelrs से इस संबंध में लिखा, “थाना सिरौली क्षेत्र में नगर पंचायत के सामने केयर लैब चलाने बाला अफसर व्हाट्सएप पर बेहद धमकी भरा स्टेटस लगाया है। भारत देश से हिंदुओं को भागने की खुली धमकी दे रहा हैं।” हिमांशु पटेल ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किया है, उसमें मोबाइल नंबर अफसर लैब के नाम से दिख रहा है।

इस मोबाइल नंबर पर एक ह्वाट्सएप स्टेटस दिख रहा। इस स्टेटस में अफसर ने लिखा है, “श्रीलंका हो गया, बांग्लादेश हो गया। अब नंबर भारत का है? 5 करोड़ का हवाई जहाज कैसे तैयार है। झोला भी तैयार है। अंधभक्तों डरा नहीं रहा हूँ, आगाह कर रहा हूँ। बांग्लादेश में वहाँ तो सिर्फ छात्र परेशान थे।”

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर बरेली पुलिस ने बताया है कि थाना प्रभारी सिरौली को जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया गया है। अफसर मूलतः UP के ही रामपुर जिले का रहने वाला है। ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता हिमांशु पटेल से बात की। उन्होंने असफर की डिग्री और उसके पैथोलॉजी के वैधता की जाँच कराने की माँग की है।

उसका ह्वाट्सएप स्टेटस वायरल होने के बाद से अफसर अपने लैब का शटर गिराकर फरार हो गया है। हालाँकि, पुलिस ने बुधवार (7 अगस्त) को दबोच लिया। विहिप नेता पटेल ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के कई लोग अफसर का समर्थन कर रहे हैं और उसके शब्दों को जायज ठहरा रहे हैं। हिमांशु ने अफसर के तमाम समर्थकों पर भी कार्रवाई की माँग की है।

‘अब कुछ नहीं हो सकता, विनेश फोगाट को मेडल मिलना असंभव’: बोले UWW चीफ, भारतीय टीम के डॉक्टर ने बताया – 2.70 kg ज़्यादा था वजन, रात भर लगे रहे

अधिकतम तय मानक से वजन 100 ग्राम अधिक होने के कारण विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक 2024 में अयोग्य घोषित कर दिया गया और फाइनल में पहुँचने के बावजूद उन्हें कोई मेडल नहीं मिला। अब UWW (यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग) के अध्यक्ष नेनाद लोलोविक ने कहा है कि विनेश फोगाट को मेडल मिलना असंभव है। उन्होंने विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किए जाने पर दुःख भी जताया। अमेरिका की सारा हिल्डब्रांड्ट के साथ विनेश फोगाट का 50 किलोग्राम वर्ग में आखिरी मुकाबला होना था।

नेनाद लालोविक ने कहा कि हमें नियम-कायदों का सम्मान करना होगा, विनेश फोगाट के साथ जो भी हुआ उसके लिए वो दुःखी हैं। उन्होंने कहा कि काफी कम मात्रा से वो ओवरवेट निकलीं, लेकिन नियम तो नियम होते हैं और सारे नियम सार्वजनिक हैं। उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ी वहाँ पर हैं और ये लगभग असंभव है कि वजन का मानक पूरा न कर पाने वाले को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने दिया जाए। उन्होंने कहा कि अब कुछ भी नहीं किया जा सकता है। अमेरिकी महिला पहलवान का फाइनल मुकाबला अब क्यूबा की यूसनेलिस गुज़मान से होगा। IOA अध्यक्ष PT उषा UWW चीफ से मुलाकात करेंगी।

भारतीय टीम के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ दिनशॉ पार्दीवाला ने कहा कि अधिकतम तय मानक से विनेश फोगाट का वजन सेमीफाइनल खत्म होने के बाद 2.7 किलोग्राम अधिक पाया गया था। उन्होंने कहा कि कम पानी दिए जाने के साथ-साथ उन्हें उपवास पर भी रखा गया था। विनेश फोगाट ने पसीना बहाना शुरू किया। डॉ पार्दीवाला ने कहा कि हमारे पास अधिक समय नहीं था, रात भर के 12 घंटे के समय में पूरी टीम प्रक्रिया में लगी रही, मेडिकली जो भी संभव था सब किया गया।

डॉ दिनशॉ पार्दीवाला ने आगे बताया कि जब विनेश फोगाट और पसीना नहीं बहा पाईं तब उनके बाल काटे गए, शायद कुछ घंटे और होते तो उनका वजन फिर तय मानक के हिसाब से हो जाता। उनके अयोग्य घोषित होने के बाद मेडिकल टीम ने रिहाइड्रेशन के लिए उनकी नसों से होकर द्रव्य चढ़ाया। इसके बाद उन्होंने भोजन किया और पानी भी पिया। अब उनकी स्थिति ठीक है, सावधानी के लिए उनका ब्लड टेस्ट कराया गया है। वामपंथी प्रपंची इस मामले में IOA की सदस्य नीता अम्बानी को घसीट रहे हैं।

जिस मैदान पर वक्फ बोर्ड ने कर रखा था कब्जा, वो बनेगा फुटबॉल स्टेडियम: महाराष्ट्र के आमखास मैदान में जमात-ए-इस्लामी लगाता था मजमा

जमीनों को कब्ज़ाने के लिए कुख्यात वक्फ बोर्ड पर कार्रवाई की संभावना वाली खबरों के बीच महाराष्ट्र में इससे जुड़ी एक खबर सामने आई है। यहाँ छत्रपति संभाजीनगर में वक्फ बोर्ड द्वारा कब्जा किए गए एक मैदान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मैदान बनाने की तैयारी कर ली गई है। बुधवार (7 अगस्त 2024) को इस आशय की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस स्थान को फुटबॉल स्टेडियम बनाने की तैयारी चल रही है उसका नाम आमखास मैदान है। ये मैदान संभाजी शहर से सटा हुआ है। लम्बे समय से इस पर वक्फ बोर्ड अपना दावा ठोकता आ रहा था। अब इसे विश्वस्तरीय फुटबॉल मैदान बनाने के फैसले से पहले महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक हुई थी।

बैठक की अध्यक्षता मंत्री अब्दुल सत्तार ने की है। इस दौरान राज्य सरकार के खेल मंत्री संजय बनसोडे भी मौजूद थे। आखिरकार अब्दुल सत्तार ने अपने फैसले से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया।संरक्षक मंत्री अब्दुल सत्तार ने संभाजीनगर के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वो आमखास मैदान पर अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल मैदान बनाने का प्रस्ताव जल्द-से-जल्द खेल विभाग के पास भेजें।

इस निर्देश की सूचना जिले के एक अधिकारी द्वारा बुधवार (7 अगस्त 2024) को सार्वजनिक की गई। अब्दुल सत्तार के मुताबिक, इस प्रयास से महाराष्ट्र में खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर लाने में सहायता मिलेगी। खेल मंत्री संजय बनसोडे ने भी इस निर्णय की सराहना की है और इस पर जल्द काम शुरू होने का भरोसा दिया है।

आमखास मैदान का प्रयोग सभा आदि का आयोजन करने के लिए किया जाता था। साल 2018 में इसी मैदान में आयोजित सभा में लाखों मुस्लिम शामिल हुए थे। तब देश भर से आए मौलवी-मौलानाओं ने इस मैदान में अपनी तकरीरें की थीं। इसका आयोजन दावत-ए-इस्लामी ने किया था। AIMIM पार्टी का मुखिया और सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी राजनैतिक रैलियाँ इसी मैदान पर करते रहे हैं।

बताते चलें कि देश के लगभग 30 राज्यों में वक्फ बोर्ड हैं। केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड को विनियमित करने के लिए विधेयक लाने जा रही है। इसके पीछे वक्फ बोर्ड के कार्यों को पारदर्शी बनाना व जवाबदेही तय करना है। विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ लामबंदी शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक को तैयार करने के दौरान कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों से रायशुमारी की गई है।

अब यूँ ही नहीं कोई संपत्ति बन जाएगी वक्फ की, एक नहीं बल्कि 2 बिल लेकर आ रही है मोदी सरकार: बोर्ड और परिषद में गैर-मुस्लिम भी होंगे

पूर्व महाराजाओं के किलों से लेकर हिंदुओं के पूरे गाँव को वक्फ संपत्ति बताने वाले वक्फ बोर्ड के पर कतरने की तैयारी केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है। सरकार वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन से जुड़ा दो बिल संसद में जल्दी ही पेश कर सकती है। इसके तहत वक्फ बोर्ड अधिनियम में 44 संशोधन किए जा सकते हैं। वक्फ बोर्ड में संशोधनों को लेकर सरकार ने बिल की एक कॉपी की है।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सरकार वक्फ से जुड़े दो बिल संसद में पेश करेगी। एक बिल के जरिए वह मुस्लिम वक्फ कानून 1923 को समाप्त करेगी, जबकि दूसरे बिल के जरिए वक्फ कानून 1995 में बेहद महत्वपूर्ण संशोधन किए जाएँगे। वक्फ संशोधन बिल 2024 के जरिए केंद्र की मोदी सरकार 44 संशोधन करेगी। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संचालन है।

केंद्र सरकार का कहना है कि बिल में वक्फ कानून 1995 के सेक्शन 40 को हटाया जाएगा। इस धारा के तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने का अधिकार दिया गया है। संशोधन बिल के जरिए वक्फ कानून 1995 का नाम बदल कर एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम 1995 किया जाएगा।

केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम के साथ-साथ गैर-मुस्लिमों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसमें दो महिलाओं को रखना भी अनिवार्य होगा। इसमें मुस्लिम समुदाय के अन्य पिछड़ा वर्ग- शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, 3 सांसद, मुस्लिम संगठनों के 3 प्रतिनिधि, मुस्लिम कानून के 3 जानकार, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के 2 पूर्व जज, एक वकील, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 4 लोग, भारत सरकार के सचिव आदि होंगे।

नए संशोधनों के अनुसार, वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए सर्वे कमिश्नर का अधिकार कलेक्टर या कलेक्टर द्वारा नामित डिप्टी कलेक्टर को होगा। बोहरा और आगाखानी के लिए ‘औकाफ़’ (दान की गई संपत्ति और वक्फ के रूप में अधिसूचित) के लिए अलग से बोर्ड की स्थापना की जाएगी।

वक्फ काउंसिल किसी संपत्ति पर दावा नहीं ठोक सकता। वहीं, वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ के रूप में दर्ज करना चाहता है तो पहले उसे सभी संबंधितों पक्षों को नोटिस जारी करना होगा। यह पंजीकरण एक केंद्रीकृत वेबसाइट पर होना चाहिए। एक केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के माध्यम से वक्फ के पंजीकरण के तरीके को सुव्यवस्थित करने की भी इसमें व्यवस्था की गई है।

नए संशोधनों के अनुसार, केवल प्रैक्टिस करने वाले मुस्लिमों को ही अपनी चल या अन्यथा संपत्ति वक्फ परिषद या बोर्ड को दान करने की अनुमति होगी। दान करने फैसला सिर्फ कानूनी मालिक ही ले सकता है।वर्तमान कानून के तहत, किसी भी वक्फ संपत्ति को ऐसी संपत्ति नहीं माना जा सकता है, यदि इसके बारे में कोई विवाद हो, खासकर यदि इसके सरकारी संपत्ति होने के बारे में कोई सवाल हो।

ऐसे विवादों में अधिकारी जाँच करेंगे और राज्य को एक रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके बाद रिकॉर्ड समायोजित किए जाएँगे। नए कानून में वक्फ बोर्ड को मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल विधवाओं, तलाकशुदा और अनाथों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए और वह भी सरकार द्वारा सुझाए गए तरीके से। एक प्रमुख प्रस्ताव यह भी है कि महिलाओं की विरासत की रक्षा और सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बांग्लादेश में बड़े कारोबारी और उसके हीरो बेटे की हत्या: बचने के लिए पिस्टल से गोली चलाई, भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला – शेख मुजीबुर रहमान पर भी बना चुके थे मूवी

बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सत्ता परिवर्तन की वजह बना। शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। वहाँ भीड़ ने कई हिन्दुओं की हत्याएँ कर दी हैं और मंदिरों पर भी हमले किए गए हैं। अब ‘लक्ष्मीपुर मॉडल यूनियन परिषद’ के अध्यक्ष सेलीम खान और उनके फिल्म स्टार बेटे शंतो खान को भीड़ ने मार डाला है। घटना सोमवार (5 अगस्त, 2024) के दोपहर की है। दोनों भीड़ से बचने के लिए चाँदपुर सदर उपजिला स्थित अपने आवास से भाग रहे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया।

बलिया यूनियन स्थित फोरक्काबाद बाजार में भीड़ ने उन्हें देख लिया और पहचान लिया। उन्होंने खुद को बचाने के लिए पिस्टल से गोलियाँ भी चलाई, लेकिन सब बेकार। वो किसी तरह आगे बढ़ कर बागरा बाजार तक पहुँचे, लेकिन वहाँ फिर से भीड़ ने उन्हें घेर लिया। वहाँ भीड़ ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, सेलीम खान कई वर्षों से नौसैन्य सीमा में पद्मा-मेघना नदी से सैकड़ों ड्रेजरों की मदद से अवैध रूप से रेत निकाल रहे थे और करोड़ों टका जमा कर रहे थे।

उन्हें इन गतिविधियों के कारण जेल भी हुई थी। बांग्लादेश के ‘एंटी-करप्शन कमीशन’ (ACC) में उनके खिलाफ अभी भी केस चल रहा है। चाँदपुर सदर मॉडल पुलिस स्टेशन के ऑफिस-इन-चार्ज (OIC) मोहम्मद शेख मोहसिन आलम ने कहा कि पुलिस को दोनों पिता-पुत्र की मौत के बारे में पता चला है, लेकिन घटना के दौरान उन्हें कोई सूचना नहीं मिली। पुलिस अधिकारी ने ये भी बताया कि जवान अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर नहीं गए। सेलीम खान ‘शापला मीडिया’ के भी संस्थापक हैं।

‘शापला मीडिया’ के बैनर तले कई फिल्मों का निर्माण भी हो कर चुके थे। इस कंपनी के ‘शहंशाह’ और ‘विद्रोही’ नामक फ़िल्में काफी लोकप्रिय हुई थीं। उन्हें शेख हसीना का करीबी माना जाता था, उन्होंने शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर रहमान की बायोपिक फिल्म ‘बंग बंधु’ का निर्माण भी किया था। उन्होंने अपने बेटे को लॉन्च करने के लिए शेख मुजीबुर रहमान के बचपन पर आधारित फिल्म ‘तुंगी परार मियाँ भाई’ बनाई थी। अभिनेत्री कौशानी मुखोपाध्याय ने शंतो खान की मौत पर दुःख जताते हुए कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है। कई अन्य बंगाली फिल्म हस्तियों ने दुःख जताया है।

हाथ में थूक उगलकर युसूफ ने दी ग्राहक को फेस मसाज, हरकत वायरल होने के बाद कन्नौज पुलिस में केस दर्ज: Video देख आ जाएगी घिन

थूक जिहाद को लेकर आजकल सोशल मीडिया पर चर्चा आम है। इस बीच एक और वीडियो वायरल होना शुरू हुई है। इसमें देखा जा रहा है कि एक नाई हाथ में थूक लगाकर अपने ग्राहक को फेस मसाज दे रहा है। कथित वीडियो को ग्राहक ने ही बनाकर वायरल किया है। वीडियो के बीच में देख सकते हैं कि नाई मसाज करते हुए पहले घूमकर पीछे की ओर होता है, फिर हाथ पर थूकने के बाद उसी से चेहरे में मसाज करने लग जाता है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। पुलिस ने जानकारी होने पर केस दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, ये मामला कन्नौज के तालग्राम का है। सैलून में थूक लगाकर मसाज करने वाले नाई का नाम यूसुफ बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि जिस समय पर वो थूक लगाकर मसाज दे रहा था उस समय पर ग्राहक की आँखे बंद थीं। इसी का फायदा उठाते हुए ये हरकत की गई।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो करीब 10 दिन पुराना है मगर अब वायरल हो रहा है। इस वीडियो पर तमाम लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कन्नौज के पूर्व बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक ने भी इसे शेयर करते हुए ये मुद्दा उठाया है। उन्होंने अपने एक्ट अकॉउंट पर इस हरकत को थूक जिहाद बताया।

सुब्रत पाठक ने इस संबंध में लिखा, “ये थूक जिहाद की घटना कन्नौज के तालाग्राम की है। पुलिस तो अपना काम करेगी ही लेकिन हमें सावधान रहना होगा।” पूर्व सांसद की पोस्ट पर ही कन्नौज पुलिस ने भी जवाब दिया। उन्होंने सूचना दी कि अभियोज पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। मामले में एडीजी जोन कानपुर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भी केस में कार्रवाई की बात कही है।

‘ये हिंदू लड़के हैं, इन्हें मारना ही है…’ – मंडप बनाने वाले हिन्दू परिवार पर हमला: राजकोट में अफजल, सिकंदर समेत 4 गिरफ्तार

गुजरात के राजकोट में पूजा मंडप बनाने वाले हिन्दू परिवार पर 4 मुस्लिम हमलावर हो गए। हिन्दू परिवार को घेर कर मुस्लिमों ने हमला किया जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करके 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना राजकोट बी डिवीजन पुलिस स्टेशन के अंतर्गत भगवतीपारा स्ट्रीट नंबर 9 में रविवार (4 अगस्त, 2024) को हुई। यहाँ रहने वाले जगदीशभाई वाघेला मंडप बनाने का काम करते हैं। उनका बड़ा बेटा मिहिर और छोटा बेटा आशीष फास्ट फूड बेचते हैं।

इस घटना की रिपोर्ट मिहिर ने दर्ज करवाई है। मिहिर की गई शिकायत के अनुसार, वह और उनका भाई अपनी खाने की दुकान पर मौजूद थे, इसी दौरान उनकी माँ यहाँ दौड़ती हुई आईं और उन्हें घर बुलाया। दोनों जब घर पहुँचे तो उनके पिता ने बताया कि वह जब दशम व्रत के लिए मंडप लगाने गए थे, तो आशाबापीर दरगाह के पास सिकंदर सहित अन्य लोगों से उनकी बहस हो गई। मिहिर अपनी पिता से बात कर ही रहे थे और इसी दौरान हमलावर उनके घर पर पहुँच गए।

शिकायत के मुताबिक, उनके घर आए हमलावरों ने मारपीट चालू कर दी। इसके बाद उनके भाई आशीष को पेट में चाकू मार दिया गया। हमले के कारण आशीष की हालत गंभीर बनी हुई है, उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। परिवार के बाकी सदस्यों को भी चोट आई है। इस मामले में राजकोट बी डिवीजन पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है। मामले की FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

घेर कर मारा, फिर घोंप दिया चाकू

इस मामले में अधिक जानकारी पाने के लिए ऑपइंडिया ने पीड़ित परिवार के मिहिर वाघेला से संपर्क किया। ऑपइंडिया से बात करते हुए मिहिर ने बताया, “मैं और मेरा भाई अपनी दुकान पर थे , तभी मेरी माँ हमें बुलाने के लिए दौड़ती हुई आईं। जब हमने जाकर पूछताछ की, तो मेरे पिता ने हमें बताया कि वह एक व्यक्ति के साथ आसबापीर की दरगाह के पास रहने वाले एक हिंदू परिवार के दशामाता व्रत के लिए मंडप लगाने के लिए जा रहे थे। तभी रास्ते में सिकंदर, अफ़ज़ल, दरेद और समीर नाम के मुस्लिम युवकों ने हमें रोक लिया।”

मिहिर ने आगे बताया, ”उन्होंने मेरे पिता को सड़क पर रोक कर कहा कि हमारी गली मत छोड़ो। मेरे पिता और उनके साथ के लोग वहाँ से लौट आये थे। हम खड़े होकर बात कर रहे थे तभी चारों भाई सिकंदर, अफजल, दरेद और समीर धारदार हथियार लेकर आ गए। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया जब मेरे माता-पिता हमें बचाने के लिए बीच में आए, तो उन्हें भी पीटा गया।”

हमले में घायल मिहिर

मिहिर ने बताया, ”इसी बीच सिकंदर और दरेद ने मेरे छोटे भाई को पकड़ लिया और अफजल ने अपने पास रखा चाकू मेरे भाई के पेट में घोंप दिया। वह लोग कह रहे थे कि यह हिंदू लड़के हैं, हिंदू हैं, उन्हें मारना ही है तो घायल कर दो। ऐसी चोट लगे कि गिर पड़े। मेरा भाई इसके बाद लहूलुहान हो गया। उसके पेट से खून निकल रहा था। तभी आसपास के लोग आ गए और चारों हमलावर भाग निकले। चूंकि मेरे भाई की हालत अभी गंभीर है, इसलिए हमने उसे तुरंत इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।” मिहिर ने बताया कि हमलावर हत्या करने आए थे।

परिवार की हर मदद की जाएगी- विश्व हिंदू परिषद

इस घटना को लेकर स्थानीय हिंदू समाज और संगठनों में भी गुस्सा है। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद के राजकोट जिला मंत्री आशीष सेठ ने ऑपइंडिया को बताया, ”परिवार पहले भगवतीपारा थाने में शिकायत दर्ज कराने गए थे। वहाँ PSI शेख ने हल्की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसलिए परिवार में असंतोष था। बाद में जब वह बी डिवीजन पुलिस स्टेशन गए तो मामले को लेकर सही से सुनवाई हुई।”

उन्होंने आगे बताया, ”विश्व हिंदू परिषद ने परिवार से इस मामले में संपर्क किया है और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। जहाँ भी जरूरत होगी, परिषद समेत सभी हिंदू संगठन उनके साथ रहेंगे। हमने पुलिस से भी बात की है और उनसे नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।”

चार आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई शुरू

शिकायत दर्ज होने के चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने चारों भाइयों सिकंदर राउमा, अफजल राउमा, दरेद उर्फ ​​डालियो राउमा और समीर राउमा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 118(2), 115(2), 352 और 54NS और GPA की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया है। ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस से सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। आगे की जानकारी मिलते ही खबर अपडेट कर दी जाएगी।