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‘क्या ये हमारा देश नहीं है? अब हम असहाय महसूस कर रहे’: बांग्लादेश की हिंदू विरोधी हिंसा से सदमे में हिंदू छात्र, शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन में थे शामिल

बांग्लादेश हिंदुओं के लिए नरक बन गया है। वहाँ हर तरफ डर का साया है। ढाका विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र 26 वर्षीय निलय कुमार बिस्वास का कहना है कि आरक्षण विरोधी आंदोलन धीरे-धीरे एक ऐसे आंदोलन में बदल गया है, जिसमें देश में हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता में रातों को सो नहीं पाता हूँ।”

निलय बिस्वास बांग्लादेश में जारी हिंदू विरोधी हिंसा एवं धार्मिक घृणा के एकमात्र शिकार हिंदू समुदाय के छात्र निलय कुमार बिस्वास नहीं हैं। वहाँ, का हर हिंदू कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और खालिदा जिया की पार्टी के निशाने पर आ गया है। हालात ये हैं कि अब बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 24% से घटकर 8% रह गई है। निलय ने भी शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लिया था।

यहाँ महत्वपूर्ण बात ये है कि पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और प्रतिबंधित बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों ने भी छात्र आंदोलन की आड़ में हाथ मिला लिया। इसके परिणामस्वरूप शेख हसीना को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा और जल्दी-जल्दी में बांग्लादेश को छोड़कर भारत आना पड़ा।

उस समय से कट्टरपंथी इस्लामी हिंदुओं को लगातार निशाना बना रहे हैं। उनके मंदिरों को नष्ट कर रहे हैं। उनके घरों को आग लगा रहे हैं। उनकी महिलाओं का शोषण कर रहे हैं। यह सब एक लोकतांत्रिक क्रांति के नाम पर किया जा रहा है। 5 अगस्त के बाद से ये घटनाएँ और भी बढ़ गई हैं, जब सोशल मीडिया और समाचार आउटलेट पर हिंदुओं पर कई हमलों की चिंताजनक रिपोर्टें सामने आई हैं।

बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन में जोश के साथ हिस्सा लेने वाले हिंदू छात्र-छात्राओं को अब सड़कों पर अल्पसंख्यकों का खून बहाने वाले इस्लामवादियों का सामना करना पड़ रहा है। यह बदसूरत सच्चाई हिंदू छात्रों के लिए एक झटका है, जो अपने खिलाफ हो रहे बेवजह दंगों से उतने ही चिंतित और हैरान हैं।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद निलय कुमार बिस्वास पूरी रात सो नहीं पाए हैं। उन्होंने कहा कि वे ढाका में काफी सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन रात में वे बांग्लादेश की राजधानी के बाहर रहने वाले दोस्तों और परिवार के लोगों की परेशानी भरी कॉल की वजह से सो नहीं पाते।

उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार की स्थापना तक बांग्लादेशी लोगों, खासकर हिंदुओं को एक-दूसरे का ख्याल रखने की जरूरत है। द प्रिंट को उन्होंने कहा, “अधिकांश पुलिस स्टेशन खाली रहते हैं। जब हत्यारी भीड़ उत्पात मचाती है तो आम बांग्लादेशी असहाय होकर देखते हैं। अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ऐसे समय में विशेष रूप से असहाय महसूस करता है, क्योंकि हम आसान लक्ष्य होते हैं।”

पिछले साल ढाका विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन और पत्रकारिता विभाग से सामाजिक विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त करने वाले बिस्वास ने बताया कि बड़ी संख्या में हिंदू छात्रों ने कोटा सुधार प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था, जिसके कारण शेख हसीना को बाहर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम ही नहीं, बल्कि कई हिंदू छात्र चाहते थे कि सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली में सुधार किया जाए।

बिस्वास ने कहा, “प्रदर्शन के दौरान हम अपने साथी मुस्लिम छात्रों के साथ चले, उम्मीद के गीत गाए, फासीवाद के खिलाफ नारे लगाए और पुलिस की लाठी और गोलियों का सामना किया। आज बांग्लादेश में फैली अराजकता में हिंदू मंदिरों पर हमला किया जा रहा है, हमारे घरों को लूटा जा रहा है, आग लगाई जा रही है, हमारी जान खतरे में है।”

कोटा के खिलाफ आंदोलन में हिंदू छात्रों ने खून बहाया: बिस्वास

उन्होंने दावा किया कि हिंदुओं पर हमलों के बीच हिंदू अपने साथी मुस्लिमों के पास मदद के लिए गए हैं। उन्होंने कहा, “मेरे मुस्लिम दोस्त भीड़ को मंदिरों और हिंदू घरों में तोड़फोड़ करने और आग लगाने से रोकने के लिए पहरा दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर नेकदिल मुस्लिम नागरिकों की अपील है कि देश को अंधकार में न जाने दें। यह साथी मुसलमान ही हैं जो हमारी रक्षा कर सकते हैं। हम और किससे मदद माँगे?”

बिस्वास को डर है कि अगर अंतरिम प्रशासन जल्दी से स्थापित नहीं किया गया तो विनाश और हो सकता है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश को मुस्लिमों, हिंदुओं और सभी अन्य धर्मों के नागरिकों के साथ एक नई शुरुआत की जरूरत है। लोग सांप्रदायिक दंगों से प्रभावित जिलों की सूची बना रहे हैं। मैं यही प्रार्थना कर सकता हूँ कि सूची और लंबी न हो। पहले ही समुदाय बहुत कुछ खो चुका है।”

प्रदर्शन में भाग लेने वाली छात्रा का दर्द

बिस्वास की तरह ही यूनिवर्सिटी की छात्रा आरिया भौमिक ने भी शेख हसीना के पद से हटने का स्वागत करते हुए बांग्लादेश के झंडे के साथ जश्न मनाई थी और इसकी कई तस्वीरें भी पोस्ट की थीं। उन्होंने लिखा था, “बंगाल के लोग अब आज़ाद हैं।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं हिंदू हूँ और बांग्लादेश में हर धर्म के मेरे दोस्त मेरी रक्षा के लिए यहाँ हैं। हमने मिलकर बांग्लादेश को बनाया है। हम एकजुट हैं।”

आरिया की गलतफहमी कट्टरपंथियों ने तुरंत दूर कर दी। उन्हें मुस्लिम बहुल देश में एक हिंदू के जीवन की कीमत का एहसास हुआ तो उन्होंने एक अन्य पोस्ट में अपील की, “हम धर्म की परवाह किए बिना एकजुट हैं। हमने धर्म नहीं, केवल मानवता देखी है और अब हम हिंदुओं पर हमला किया जा रहा है। यह समय है कि हम अपनी आवाज़ उठाएँ, इस अन्याय के खिलाफ़ अपना रुख़ स्पष्ट और मज़बूत करें।”

हालाँकि, आरिया को यह एहसास नहीं था कि भले ही यह यह उनके लिए सच हो, लेकिन एक इस्लामवादी दुनिया को इस्लाम के चश्मे से देखता है। विरोध प्रदर्शन उनके लिए हिंदुओं पर हमला करने का एक साधन मात्र है। आरिया ने कई समाचार लेखों के स्क्रीनशॉट भी अपलोड किए, जिनमें हिंदुओं, उनके घरों और मंदिरों पर हुए हमलों का विवरण दिया गया था।

इनमें प्रसिद्ध बांग्लादेशी संगीतकार राहुल आनंद भी शामिल हैं। कट्टरपंथियों ने उनके घर को आग लगा दी और उनके सामान को लूट लिया था। इस तरह, जिन हिंदू छात्र-छात्राओं ने बांग्लादेश को अपना देश माना और आंदोलन में खड़े रहे, वे आज अपने परिवारों, मित्रों और साथी हिंदुओं के जीवन और सम्मान की भीख माँगने पर मजबूर हो गए हैं कि उन्हें बख्श दिया जाए।

हिंसा की आग में जल रहे बांग्लादेश से भागे हिंदू, बंगाल बॉर्डर पर BSF ने रोका: नो मैन्स लैंड में सैकड़ों लोगों ने शरण ली, वापस लौटने से किया इनकार

बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच वहाँ के नागरिक भारत में अवैध रूप से घुसने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर बंगाल में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बुधवार (7 अगस्त 2024) को ऐसी कई कोशिशों को नाकाम कर दिया। BSF ने बताया कि बांग्लादेश के ठाकुरगाँव जिले के करीब 200 ग्रामीणों ने भारत में घुसने की कोशिश की। इनमें से ज्यादातर अवामी लीग के सदस्य और हिंदू हैं। बीएसएफ ने इन्हें रोकने के लिए हवा में गोलियाँ चलाईं।

उत्तर बंगाल फ्रंटियर BSF ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए अपने पोस्ट में लिखा, “बीएसएफ उत्तर बंगाल फ्रंटियर ने आज भारत-बांग्लादेश सीमा के पास बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ को प्रभावी ढंग से रोका। सतर्कता और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) के साथ समन्वय किया और उन्होंने इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की और किसी भी सीमा उल्लंघन को रोका।”

हालाँकि, ग्रामीणों ने बांग्लादेश लौटने से इनकार कर दिया, क्योंकि भीड़ आवामी लीग के सदस्यों और हिंदुओं की तलाश कर रही थी। वहाँ से भागे लोग दोनों देशों के बीच स्थित नो-मैन्स लैंड में ही रुके रहे। सीमा का वह हिस्सा बिना बाड़ का है। इसलिए बीएसएफ को उन्हें भारत से बाहर रखने के लिए एक मानव अवरोध बनाना पड़ा।

BSF के DIG (उत्तर बंगाल फ्रंटियर) अमित त्यागी ने कहा, “गाँव वाले अभी भी वहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा से 200 मीटर से 500 मीटर की दूरी पर हैं।” करीब 600 बांग्लादेशी उत्तरी बंगाल में जलपाईगुड़ी के पास नो-मैन्स लैंड छोड़ने से इनकार कर रहे हैं और भारत में प्रवेश की माँग कर रहे हैं। BSF और BGB, दोनों उन्हें वापस जाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन वे मना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दिख रहा है कि भारत में प्रवेश करने के लिए ठाकुरगाँव जिले के टेम्काभिता गाँव में नदी पार कर रहे बांग्लादेशी हिंदुओं और अन्य लोगों को भीड़ द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। गाँव के सभी लोग अपना घर-बार छोड़कर जरूरी सामान के साथ पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनजापुर जिले की सीमा पर पहुँचे है। वहाँ, उन्हें BSF ने उन्हें रोक रखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा पर कई जगहों पर ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं। एक अन्य स्थान पर BSF ने छह लोगों को जीरो पॉइंट पर रोका है। उस क्षेत्र में सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ नहीं होने के कारण यह अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने के लिए आकर्षक जगह बन गई है। इसके कारण BSF कर्मियों पर बहुत अधिक दबाव पड़ रहा है।

मंगलवार (6 अगस्त 2024) की रात को स्थिति तब और बिगड़ गई जब आवामी लीग के पूर्व सांसद कमरुल अरेफिन, उनकी पत्नी और दो बेटियों ने पेट्रापोल-बेनापोल सीमा क्रॉसिंग पर बिना वैध वीजा के भारत में प्रवेश करने का प्रयास किया। उन्होंने अपने देश में जान का खतरा बताते हुए भारत में प्रवेश की अपील की थी।

हालाँकि, BSF ने उन्हें रोक दिया और वापस बांग्लादेश भेज दिया। वहाँ BGB ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उसी तरह बुधवार (7 अगस्त 2024) को बीजीबी ने दर्शना सीमा चौकी पर अवामी लीग के दो और राजनेताओं को रोक लिया।

भारत को भी हिंसा के आग में जलते देखना चाहता है विपक्ष, मणिशंकर अय्यर बोले- बांग्लादेश की तरह ही हुई धांधली: जानिए कैसे आग से खेल रही कॉन्ग्रेस

शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में अराजकता और हिंदू विरोधी हिंसा फैल गई है। ऐसे में भारत के राजनीतिक गिद्धों को उम्मीद है कि यहाँ भी इसी तरह का ‘विद्रोह’ होगा। कुछ कॉन्ग्रेसी नेताओं ने बांग्लादेश की स्थिति की तुलना भारत में चल रहे काल्पनिक मोदी विरोधी ‘अंडरकरंट’ से करनी शुरू कर दी है। जिस बांग्लादेश में प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना के आवास गोनो भवन पर धावा बोलकर लूटपाट की, उसी तरह की कल्पना वे भारत के लिए भी कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के मुखर वक्ता मणिशंकर अय्यर ने 7 अगस्त को हिंसाग्रस्त बांग्लादेश की स्थिति की तुलना भारत से की। चुनावों के दौरान विपक्ष द्वारा लगाए गए ईवीएम हैकिंग के आरोपों को दोहराते हुए अय्यर ने इशारा किया कि भारतीय चुनाव किसी भी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं थे। उन्होंने कहा, “बांग्लादेशी विपक्षी दल इसलिए इससे दूर रहे क्योंकि उन्हें लगा कि यह प्रक्रिया न तो स्वतंत्र है और न ही निष्पक्ष।”

अपने अपमानजनक एवं पाकिस्तान परस्त बयानों के लिए कुख्याति अय्यर ने कहा कि भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति नहीं है। यहाँ विपक्ष स्वतंत्रता के साथ चुनावों में भाग लेता है, लेकिन कुछ चिंताएँ हैं और कुछ ‘संदेह’ उत्पन्न हुए हैं, जिसको लेकर कुछ समूहों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में करीब 79 सीटों पर पहले एवं बाद के आँकड़ों में काफी अंतर है।

अय्यर ने दावा किया कि जिस तरह बांग्लादेश के लोगों के मन में वहाँ के चुनाव नतीजों को लेकर संदेह पैदा हुआ, उसी तरह कई भारतीयों को भी ‘गड़बड़ी’ का संदेह है। अय्यर ने कहा, “इस तरह की आशंकाएँ यहाँ अभी जताई गई हैं, लेकिन बांग्लादेश में ये चरम पर हैं।” उन्होंने बांग्लादेश से सबक लेने की बात कहते हुए कहा, “हम विकसित भारत होंगे, लेकिन क्या यह स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत होगा?”

जाहिर है कि मणिशंकर अय्यर के निराधार दावों की जड़ें एक संदिग्ध ऑनलाइन रिपोर्ट में हैं। हालाँकि, चुनाव आयोग ने हाल ही में इन दावों का खंडन किया था और कहा था कि ‘मानव जाति के इतिहास में अब तक हुए सबसे बड़े चुनावों को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों (उम्मीदवारों के अलावा) द्वारा झूठा अभियान चलाया जा रहा है।”

भारतीय चुनाव आयोग ने कहा था, “इसके हर चरण में उम्मीदवारों/हितधारकों को शामिल किया गया है। मतदान के दिन शाम 7 बजे के (जब कई केेद्रों पर मतदान बंद हो रहे होते हैं और/या मतदाता कतार में प्रतीक्षा कर रहे होते हैं) अनुमानित मतदान के आँकड़े की तुलना मतदान के एक दिन बाद उपलब्ध ‘मतदान समाप्ति’ के आँकड़े से करने का निराधार प्रयास किया जा रहा है।”

चुनावी डेटा और नतीजे RPA की धाराओं के तहत वैधानिक रूपों और प्रक्रियाओं के अनुसार हैं। वहीं, किसी उम्मीदवार या मतदाता द्वारा चुनावी नतीजों को चुनौती देने का वैध तरीका RPA 1951 के तहत चुनाव याचिका के माध्यम से है। चुनाव आयोग ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 में 138 ईपी के मुकाबले लोकसभा चुनाव 2024 में 79 पीसी में कम संख्या में EP दायर किए गए हैं।

कॉन्ग्रेस नेता निराधार और दुर्भावनापूर्ण दावों का इस्तेमाल न केवल मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर हमला करने के लिए कर रहे हैं, बल्कि भारत में बांग्लादेश जैसी अराजकता को बढ़ावा देने के लिए भी कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता सज्जन वर्मा ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब लोग शेख हसीना की तरह पीएम मोदी के सरकारी आवास पर लोग धावा बोलेंगे। उन्होंने कहा, “पहले श्रीलंका में जनता अपने प्रधानमंत्री के आवास में घुस गई, फिर बांग्लादेश में और अब भारत का नंबर है।”

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी धमकी दी है। एक पुस्तक विमोचन समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा, “कश्मीर में सब कुछ सामान्य लग सकता है। चुनाव परिणामों के बाद दिल्ली में भी सब कुछ सामान्य लग सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि सतह के नीचे कुछ और है। बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह यहाँ भी हो सकता है। हमारे देश का विस्तृत भूभाग बांग्लादेश जैसी घटनाओं को होने से रोकता है।”

कॉन्ग्रेस नेताओं के इस तरह के बयान न केवल बेचैन करने वाले हैं, बल्कि स्थिर भारत में अशांति और अराजकता भड़काने की खतरनाक प्रवृत्ति का भी संकेत देते हैं। कॉन्ग्रेस की बयानबाजी उसकी बार-बार की राजनीतिक असफलताओं से निकली हताशा को दिखाती है। भारत के लोगों ने लगातार तीन चुनावों में मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को चुना है, जो नेतृत्व और नीतियों के मजबूत पसंद का संकेत है।

हालाँकि, भाजपा की सीटें कम जरूर हुई हैं, लेकिन लोकतंत्र में यह आश्चर्यजनक नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने और रचनात्मक विपक्ष में भाग लेने के बजाय, कॉन्ग्रेस की धमकी लोकतंत्र को कमजोर करती है। जाति और क्षेत्रीय आधार पर देश में दरार पैदा करने की पूरी कोशिशों के बावजूद कॉन्ग्रेस अपनी सीटों की संख्या में कुछ ही इज़ाफा कर पाई है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन बड़ी बढ़त हासिल करने के बावजूद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को नहीं हरा पाया। इसके बाद कॉन्ग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को हटाने के लिए नागरिक विद्रोह की उम्मीद कर रही है। इस बीच, ‘मोहब्बत की दुकान’ के स्वयंभू मालिक एवं संचालक राहुल गाँधी ने अपनी पार्टी के नेताओं के भड़काऊ बयानों पर चुप्पी साध रखी है।

अब अखाड़े में नहीं, कोर्ट में होगा विनेश फोगाट के मेडल का फैसला: 4 वकील CAS में रखेंगे भारत की महिला पहलवान का पक्ष, क्या मिलेगा सिल्वर?

भारतीय पहलवान विनेश फोगाट के ओलंपिक से अयोग्य घोषित होने के बाद भी सिल्वर मेडल की उम्मीदें बची हुई हैं। उनके सिल्वर मेडल को लेकर ओलंपिक खेलों का एक कोर्ट फैसला करेगा। विनेश ने इस कोर्ट में अपनी अपील दाखिल की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विनेश फोगाट ने बुधवार (7 अगस्त, 2024) को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद ओलंपिक खेलों में विवादों के निपटारे के लिए स्पोर्ट्स आर्ब्रीट्रेशन कोर्ट (CAS) में अपील दाखिल की थी। विनेश फोगाट ने पहले कोर्ट से माँग की थी कि उन्हें फाइनल मुकाबला खेलने दिया जाए।

बताया गया कि इसके लिए उन्होंने दोबारा वजन तोलने की माँग की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी अपील को बदल लिया और माँग की कि उन्हें दूसरी खिलाड़ी के साथ संयुक्त सिल्वर मेडल दिया जाए। उनकी इस अपील को CAS ने स्वीकार कर लिया है और इस पर गुरुवार (8 अगस्त, 2024) को सुनवाई करेगी। इसके बाद अंतरिम फैसला दिया जाएगा।

बताया गया कि CAS ने विनेश फोगाट की फाइनल मैच खेलने की अपील मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह इस संबंध में कोई बदलाव नहीं करेगा। CAS ने कहा था कि वह ओलंपिक खेलों का क्रम नहीं बदलेगी।

CAS के फैसले से ही पता चलेगा कि कि क्या विनेश को कोई पदक दिया जाएगा या फिर वह बिना पदक के ही ओलंपिक से लौटेंगी। विनेश ने इससे पहले गुरुवार को अपने संन्यास का ऐलान भी कर दिया। उन्होंने एक ट्वीट लिख कर अपना दुख व्यक्त किया और कुश्ती से संन्यास की घोषणा की।

CAS खेलों के मामले विवाद हल करने के लिए बनाई गई एक संस्था है। ओलंपिक खेलों में होने वाले विवाद इसी में जाते हैं। इसका मुख्यालय स्विटज़रलैंड में है लेकिन पेरिस में इसकी एक अस्थायी शाखा भी खोली गई है, ताकि यहाँ उपजे विवादों को हल किया जा सके। विनेश फोगाट का मामला पेरिस के ही चार वकील रख रहे हैं।

गौरतलब है कि बुधवार (7 अगस्त, 2024) को विनेश फोगाट ने एक जापानी खिलाड़ी को हरा दिया था और इसके बाद सेमीफाइनल में पहुँची थी। इसके बाद उन्होंने सेमीफाइनल में क्यूबा की एक खिलाड़ी को हराया था और फाइनल में पहुँच गई थी। उनका फाइनल में मुकाबला अमेरिकी खिलाड़ी से होना था।

फाइनल मुकाबले से पहले विनेश फोगाट का वजन तय सीमा से अधिक पाया गया था। उनका वजन तय सीमा से 100 ग्राम अधिक था। इसके बाद वह अयोग्य घोषित कर दी गईं थी। इसके बाद उन्होंने कोर्ट जाने का निर्णय लिया जिसका अब फैसला आना है।

DNA टेस्ट के लिए सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान का लिया सैंपल, अयोध्या की OBC लड़की से गैंगरेप का मामला: गर्भपात के बाद पीड़िता अस्पताल में भर्ती

अयोध्या गैंगरेप मामले में पीड़िता के गर्भपात के बाद अब डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जाँच के लिए गैंगरेप के आरोपित सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान का सैंपल ले लिया गया। पीड़िता अभी लखनऊ के अस्पताल में ही एडमिट है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।

बता दें कि इससे पहले डॉक्टरों की सलाह और घरवालों की मंजूरी से अयोध्या गैंगरेप पीड़िता का अबॉर्शन लखनऊ के केजीएमयू में हुआ था। गर्भपात के समय लड़की 12 सप्ताह की गर्भवती थी। डॉक्टरों ने कहा था कि उसका शरीर डिलीवरी लायक नहीं है इसलिए अबॉर्शन ही एक मात्र तरीका है।

इसके बाद बच्ची का अबॉर्शन करवाया गया और भ्रूण का डीएनए संभाल कर रखा गया ताकि आरोपित के बारे में पता चल सके। अब इसी जाँच को पूरा करने के लिए दोनों आरोपित के भी डीएनए टेस्ट ले लिए गए।

उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई को अयोध्या में ओबीसी समाज की एक बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया था। रेप का आरोप सपा नेता मोईद खान पर लगा था जिन्हें अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी भी कहा जाता है।

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि घटना खुलने के करीब 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी कर के लौट रही थी। तभी रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई।

इसके बाद वहीं राजू और मोईद खान ने बारी बारी से उसके साथ रेप किया। इस दौरान उन्होंने बच्ची की वीडियो भी बनाई जिसे दिखाकर वह उसे ब्लैकमेल करते रहे और रेप भी किया। बाद में लड़की जब प्रेगनेंट हो गई तब ये पूरा मामला खुला।

लड़की की माँ ने सख्ती से पूछा तो बेटी ने सब कुछ बता दिया इसके बाद ये केस दर्ज पुलिस थाने में दर्ज हुआ और मोईद खान व राजू खान दोनों लोग गिरफ्तार किए गए।

मालूम हो कि मोईद खान की नजदीकी सपा सांसद अवधेश प्रसाद से होने के चलते अवधेश प्रसाद से भी कई सवाल हुए। हालाँकि उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। वहीं अखिलेश यादव ने इस मामले में डीएनए टेस्ट की माँग की थी।

विनेश फोगाट पर कॉन्ग्रेस की राजनीति को उनके ताऊ ने किया फुस्स, कहा- भूपेंद्र हुड्डा ने CM रहते बबीता-गीता के साथ किया भेदभाव, आज राज्यसभा की कर रहे बात

ओलंपिक में वजन ज्यादा होने के कारण अयोग्य करार दी गईं विनेश फोगाट के मुद्दे पर विपक्ष जमकर राजनीति कर रहा है। इसी क्रम में हरियाणा के पूर्व सीएम हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अगर उनकी सरकार होती तो वो विनेश को राज्यसभा में सीट देते। अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के इसी बयान पर विनेश फोगाट के ताऊ और गीता फोगाट व बबीता फोगाट के पिता महावीर फोगाट ने करारा जवाब दिया है।

उन्होंने समाचार एजेंसियों से बात करते हुए कहा, “2005 और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता ने गोल्ड मेडल लिया था और बबीता ने सिल्वर मेडल लिया था। पहली महिला पहलवान थी जिन्होंने हिंदुस्तान की तरफ से ये मेडल लिया। इसके बाद 2012 में गीता ने बतौर पहली महिला ओलंपिक क्वालीफाई किया था। जब भूपेंद्र हुड्डा की सरकार और गीता और बबीता को DSP का पद मिलना था लेकिन हुड्डा साहब ने भेदभाव करके गीता को इंस्पेक्टर और बबीता को सब इंस्पेक्टर लगाया।”

आगे उन्होंने कहा, “कोर्ट में केस डालने के बाद कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया। जब भूपेंद्र हुड्डा की सरकार थी तब गीता ने कई रिकॉर्ड बनाए तब उन्हें राज्यसभा क्यों नहीं भेजा?” महावीर फोगाट ने कैमरे के सामने कहा कि उन्हें लगता है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ये सब सिर्फ राजनीति के चलते कहा है।

बता दें कि विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक 50 किग्रा कुश्ती स्पर्धा के फाइनल से पहले वजन अधिक पाए जाने के कारण बुधवार (8 अगस्त 2024) को ओलंपिक से अयोग्य घोषित किया गया था। इसके बाद पूरा देश उनके साथ खड़ा हुआ। इस बीच हरियाणा सरकार ने ऐलान किया कि वो विनेश को वो सारे सम्मान देगी जो मेडल आने पर खिलाड़ी को दिए जाते हैं।

चुन-चुनकर हो रही हिंदुओं की हत्या, लेकिन ‘स्क्रॉल’ के लिए यह ‘सामान्य हिंसा’; NYT बता रहा ‘मुस्लिमों का बदला’: बांग्लादेश पर प्रपंच में जुटा विदेशी-वामपंथी मीडिया

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता इस्लामी कट्टरपंथियों के विरोध के बाद खत्म हो गई है। शेख हसीना खुद इस्तीफ़ा देकर भारत आ गई हैं। इस बीच में बांग्लादेश में हो रही सरकार विरोधी हिंसा को हिन्दू विरोधी हिंसा में बदल दिया गया है। इस हिन्दू विरोधी हिंसा में मंदिर तोड़े जा रहे हैं, हिन्दुओं को सरेआम मारा जा रहा है। हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहा है, घर भी इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ लूट रही है। इन सबके बीच इस्लामी हिंसा पर पर्दा डालने और उसको सही ठहराने के लिए देसी-विदेशी मीडिया आगे आ गया है।

बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा

बांग्लादेश से हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा की लगातार हिंसा की कहानियाँ सामने आ रही हैं। बांग्लादेश के पिरोजपुर जिले में हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ है। इस्लामी भीड़ ने उनके गहने भी लूट लिए, इसकी कहानी खुद इन महिलाओं ने सुनाई है। एक महिला ने बताया, “रात में वो लोग आए। उन्होंने हमारे घरों में तोड़फोड़ की और सब कुछ लूट लिया। हम इस दौरान छिप गए थे। उन्होंने मेरे साले की पत्नी को पकड़ लिया और उसे दूसरे कमरे में ले गए। उन्होंने उसके साथ रेप किया। बाद में, हमें वह मिली।”

हिन्दू महिलाओं के अलावा मंदिर भी निशाने पर हैं। बांग्लादेश के खुलना में एक हिन्दू मंदिर को इस्लामी कट्टरपंथियों ने आग लगा दी। इसके बाद यहाँ रखी भगवान की मूर्तियाँ तोड़ दी। मंदिर में आग लगने से काफी नुकसान हुआ। खुलना में ही एक काली मंदिर को भी नुकसान पहुँचाया गया। देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे-छोटे मंदिर भी निशाने पर आए। कई जगह मूर्तियों को भी तोड़ा गया, आग लगाई गई या फिर पूरे मन्दिर को नष्ट करने का प्रयास हुआ।

इस्लामी कट्टरपंथी हिन्दुओं को चुन-चुन कर मार रहे हैं। हसीना सरकार में कर्मचारी रहे हिन्दुओं को इस्लामी कट्टरपंथी सार्वजनिक रूप से मार रहे हैं। ऐसे ही एक हिन्दू पुलिस अधिकारी की नृशंस तरीके से कट्टरपंथियों ने हत्या की। पुलिस अधिकारी संतोष साहा के क्षत विक्षत शव की तस्वीर सामने आई है। एक हिन्दू पत्रकार और एक पार्षद की भी बांग्लादेश में हत्या की गई है।

हिन्दू हिंसा की चपेट में, मीडिया प्रोपेगेंडा फैलाने में जुटा

बांग्लादेश में हिन्दू महिलाओं के साथ रेप, मंदिरों के टूटने और सार्वजनिक हत्याओं के बीच मीडिया इन सब पर पर्दा डालने में जुट गया है। हमेशा भारत और हिन्दुओं के विरोध में खड़ा रहने वाला मीडिया हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा को जायज ठहरा रहा है। इसके लिए बड़े बड़े कॉलम लिखे जा रहे हैं। अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स जहाँ एक ओर हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा को मुस्लिमों का बदला बता रहा है, वहीं भारतीय वामपंथी मीडिया पोर्टल स्क्रॉल बांग्लादेशी के हिन्दुओं के ऊपर हिंसा का दोष भारत के हिन्दुओं के ऊपर डालने में जुट गया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया बदला, बाद में बदली हेडलाइन

अमेरिकी वामपंथी मीडिया न्यूयॉर्क टाइम्स ने बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को बदले के कारण हुए हमले बताया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि पहले हिन्दुओं ने इस्लामी कट्टरपंथियों के साथ अन्याय किया था, जिसका अब बदला लिया जा रहा है। उसने अपनी खबर की हेडलाइन में यह बात लिखी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, “प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर बदले की कार्रवाई।”

इस खबर में न्यू यॉर्क टाइम्स ने बताया कि हिन्दुओं पर हमला इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि हमला करने वाले कट्टरपंथी इस्लामी हैं, बल्कि उन पर हमला इसलिए हो रहा है क्योंकि वह शेख हसीना के समर्थक के तौर पर देखे जाते हैं।

यानि न्यूयॉर्क टाइम्स यह कहना चाहता है कि हिन्दुओं पर हमले उनके धर्म के कारण नहीं बल्कि उनके राजनीतिक समर्थन के कारण हो रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के इस हेडलाइन को लेकर सोशल मीडिया पर आक्रोश व्यक्त किया गया।

सोशल मीडिया साईट एक्स (पहले ट्विटर) पर अभिनव अग्रवाल ने लिखा, “यदि किसी नरसंहार को छुपाना हो, नरसंहार का बचाव करना हो, बच्चों का यौन शोषण करने वालों को बचाना हो, तो कुख्यात न्यूयॉर्क टाइम्स पर आँख बंद करके भरोसा कर लीजिए।”

X यूजर बाला ने भी इसको लेकर गुस्सा जताया। उन्होंने लिखा, “न्यूयॉर्क टाइम्स ने बांग्लादेशी हिंदुओं के नरसंहार को ‘बदले का हमला’ बताया है। NYT हिंदुओं की हत्याओं को शेख हसीना के समर्थकों के खिलाफ़ हमले बताकर उन्हें दबाने की कोशिश कर रहा है।”

न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस विरोध के बाद यह हेडलाइन चुपके से बदल दी और बदले की बात हटा दी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसके बाद इस हेडलाइन में लिखा, ”प्रधानमंत्री के जाने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले।” जहाँ हेडलाइन बदल गई है, इसके अंदर के तर्क अब भी हिन्दू विरोधी ही हैं।

स्क्रॉल ने हिन्दुओं पर हमले को बताया उनकी ही गलती

जहाँ एक ओर न्यू यॉर्क टाइम्स ने हिन्दुओं पर हमले को राजनीतिक बदला सिद्ध करने की कोशिश की तो वहीं भारतीय वामपंथी मीडिया पोर्टल स्क्रॉल ने इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की। स्क्रॉल ने एक लेख में इस हिंसा का जिम्मेदार भारत के हिन्दुओं को बताने की कोशिश की। स्क्रॉल में गुरुवार (8 अगस्त, 2024) को नीलाद्रि चटर्जी, मुहम्मद आसिफुल बसर और एरिल्ड एनजेल्सन ने यह लेख लिखा है।

इस लेख में इन्होंने लिखा, “सत्ता सफलतापूर्वक उखाड़ फेंकने के बाद भी, तानाशाह अवामी लीग सरकार के खिलाफ़ गुस्सा हिंसक घटनाओं के रूप में बाहर निकल रहा है। यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है, क्योंकि किसी भी विद्रोह के बाद किसी न किसी तरह की हिंसा होती है, बांग्लादेश कोई अपवाद नहीं है।” स्क्रॉल ने यह लिख स्पष्ट कर दिया कि हर सत्ता के पलटने के बाद हिंसा होती ही है कि वह हिंसा को असामान्य चीज नहीं मानता।

हिंसा को सही ठहराने के बाद स्क्रॉल ने इसका दोष भारतीय हिन्दुओं पर मढ़ा। स्क्रॉल ने दावा किया कि भारतीय मीडिया में मौजूद दक्षिणपंथी बांग्लादेश में हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा की खबरें दिखा कर स्थिति को बिगाड़ रहे हैं। यानी जो हिंसा इस्लामी कट्टरपंथी और जमात के लोग कर रहे हैं, उसके लिए भी हिन्दू जिम्मेदार हैं।

जब इतने से भी स्क्रॉल का मन नहीं भरा तो उसने यह भी बताया कि कैसे कट्टरपंथी अच्छे लोग हैं और उनकी गलत तस्वीर भारत में पेश की जा रही है। स्क्रॉल ने यहाँ मंदिरों के बाहर कथित तौर पर मानव श्रृंखला बनाने वाले मुस्लिमों का उदाहरण दिया।

कुल मिलाकर स्क्रॉल यह कहना चाहता है कि हिंसा होती ही है और बांग्लादेश में हो रही हिंसा कोई अलग चीज नहीं। दूसरा उसने हिन्दुओं पर हमले को धार्मिक आधार पर ना बताकर यह सिद्ध करना चाहा कि यह हमले आवामी लीग का समर्थक होने को लेकर हो रहे हैं। इसके बाद उसने यह भी बता डाला हिन्दुओं पर हमले इसलिए हो रहे हैं क्योंकि दंगाई लूट करना चाहते हैं।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे हमलों पर लीपापोती करने और उन्हें ही अपराधी सिद्ध करने देने की यह बात कोई नई नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसा ही हो चुका है। वामपंथी मीडिया ने इससे पहले 2023 में हरियाणा के नूंह में हिन्दू यात्रा पर मुस्लिमों के हमले का दोष भी हिन्दुओं पर मढ़ दिया था। वामपंथी मीडिया ने बताया था कि मुस्लिमों ने हमला इसलिए किया क्योंकि हिन्दू यहाँ मंदिर में जल चढाने आए थे, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था, क्योंकि यह एक ‘मुस्लिम एरिया’ था।

कॉन्ग्रेस ने बताया ‘नफरती’, ओवैसी बोले- अब नमाज भी नहीं पढ़ने देंगे: जदयू ने कहा- यह मुस्लिम विरोधी नहीं, लोकसभा में पेश हुआ वक्फ संशोधन बिल

भारत में किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करने वाले वक्फ बोर्ड के शक्तियों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में गुरुवार (8 अगस्त) को वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पेश किया। यह विधेयक अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजीजू ने सदन में पेश किया। वहीं, विपक्षी सांसदों ने इसे ‘असंवैधानिक’ और ‘कठोर’ बताते हुए इसका विरोध किया है।

किरेन रिजीजू द्वारा बिल को सदन में रखने के बाद सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उसका स्वागत किया। वहीं, विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन में हंगामा करके इसका विरोध किया। कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक संविधान पर ‘मौलिक हमला’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक समुदायों के बीच धार्मिक विभाजन और नफरत पैदा करेगा।

उन्होंने कहा, “प्रत्येक मस्जिद में विवाद होता है, जहाँ कोई लिखित दस्तावेज नहीं होता है। आपका मूल विचार संघर्ष पैदा करना और समुदायों के बीच गुस्सा पैदा करना और हर जगह हिंसा करना है।” वेणुगोपाल ने कहा, “यह विधेयक संविधान पर एक मौलिक हमला है। इस विधेयक के माध्यम से वे (सत्ता पक्ष) एक प्रावधान डाल रहे हैं कि गैर-मुस्लिम भी वक्फ गवर्निंग काउंसिल के सदस्य होंगे।”

विधेयक को ‘धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला’ बताते हुए वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “इसके बाद आप (सत्ता पक्ष) ईसाइयों की ओर जाएँगे, फिर जैनों की तरफ। भारत के लोग अब इस तरह की विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे।” वक्फ संशोधन विधेयक को महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ा।

उन्होंने आगे कहा, “हम हिंदू हैं, लेकिन साथ ही हम अन्य धर्मों की आस्था का भी सम्मान करते हैं। यह विधेयक महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों के लिए विशेष है। आप यह नहीं समझते कि पिछली बार भारत के लोगों ने आपको स्पष्ट रूप से सबक सिखाया था। यह एक संघीय व्यवस्था पर हमला है।”

डीएमके की सांसद कनिमोझी ने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन करता है, जो अल्पसंख्यकों को उनके संस्थानों का प्रबंधन करने से संबंधित है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक एक विशेष धार्मिक समूह को निशाना बनाता है।” वहीं, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने इस विधेयक को वापस लेने या स्थायी समिति के भेजने की माँग की।

वहीं, AIMIM के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने भी बिल का विरोध किया। ओवैसी ने कहा, “यह विधेयक न्यायपालिका के सभी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। सरकार वक्फ बोर्ड के प्रबंधन को प्रतिबंधित कर रही है। हिंदू बोर्ड उपयोग और रीति-रिवाज से मान्यता प्राप्त हैं। आप मुझे नमाज पढ़ने से रोक रहे हैं।”

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से लोकसभा के सांसद असदुद्दीन औवैसी ने केंद्र की मोदी सरकार को मुस्लिम विरोधी बताया। ओवैसी ने आगे कहा, “एक हिंदू अपनी पूरी संपत्ति दे सकता है, लेकिन मैं इसे अल्लाह के नाम पर नहीं दे सकता। हिंदू बोर्ड या गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।”

इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह ने अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष को जमकर धोया। जदयू नेता ललन सिंह ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है। यह विधेयक समावेशी है और धार्मिक विभाजन को बढ़ावा नहीं देता है। उन्होंने कहा, “यहाँ मंदिर का तर्क दिया जा रहा है। अगर आपको मंदिर और संस्था में फर्क नहीं समझ में आ रहा है तो क्या कहा जाए।”

ललन सिंह ने कहा, “एक निरंकुश संस्था में पारदर्शिता लाने के लिए यह कानून बनाया जा रहा है। विपक्ष इसकी तुलना मंदिरों से कर रहा है। वे मुख्य मुद्दे से भटक रहे हैं। केसी वेणुगोपाल को बताना चाहिए कि हजारों सिख कैसे मारे गए। किस टैक्सी ड्राइवर ने इंदिरा गाँधी की हत्या की? अब, वे बात कर रहे हैं अल्पसंख्यक की।”

प्रस्तावित संशोधन

वक्फ संशोधन बिल 2024 के जरिए केंद्र की मोदी सरकार 44 संशोधन करेगी। बिल में वक्फ कानून 1995 के सेक्शन 40 को हटाया जाएगा। इस धारा के तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने का अधिकार दिया गया है। संशोधन बिल के जरिए वक्फ कानून 1995 का नाम बदल कर एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम 1995 किया जाएगा।

केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम के साथ-साथ गैर-मुस्लिमों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसमें दो महिलाओं को रखना भी अनिवार्य होगा। इसमें मुस्लिम समुदाय के अन्य पिछड़ा वर्ग- शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, 3 सांसद, मुस्लिम संगठनों के 3 प्रतिनिधि, मुस्लिम कानून के 3 जानकार, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के 2 पूर्व जज, एक वकील, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 4 लोग, भारत सरकार के सचिव आदि होंगे।

नए संशोधनों के अनुसार, वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए सर्वे कमिश्नर का अधिकार कलेक्टर या कलेक्टर द्वारा नामित डिप्टी कलेक्टर को होगा। बोहरा और आगाखानी के लिए ‘औकाफ़’ (दान की गई संपत्ति और वक्फ के रूप में अधिसूचित) के लिए अलग से बोर्ड की स्थापना की जाएगी।

वक्फ काउंसिल किसी संपत्ति पर दावा नहीं ठोक सकता। वहीं, वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ के रूप में दर्ज करना चाहता है तो पहले उसे सभी संबंधितों पक्षों को नोटिस जारी करना होगा। यह पंजीकरण एक केंद्रीकृत वेबसाइट पर होना चाहिए। एक केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के माध्यम से वक्फ के पंजीकरण के तरीके को सुव्यवस्थित करने की भी इसमें व्यवस्था की गई है।

नए संशोधनों के अनुसार, केवल प्रैक्टिस करने वाले मुस्लिमों को ही अपनी चल या अन्यथा संपत्ति वक्फ परिषद या बोर्ड को दान करने की अनुमति होगी। दान करने फैसला सिर्फ कानूनी मालिक ही ले सकता है।वर्तमान कानून के तहत, किसी भी वक्फ संपत्ति को ऐसी संपत्ति नहीं माना जा सकता है, यदि इसके बारे में कोई विवाद हो, खासकर यदि इसके सरकारी संपत्ति होने के बारे में कोई सवाल हो।

ऐसे विवादों में अधिकारी जाँच करेंगे और राज्य को एक रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके बाद रिकॉर्ड समायोजित किए जाएँगे। नए कानून में वक्फ बोर्ड को मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल विधवाओं, तलाकशुदा और अनाथों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए और वह भी सरकार द्वारा सुझाए गए तरीके से। एक प्रमुख प्रस्ताव यह भी है कि महिलाओं की विरासत की रक्षा और सुनिश्चित की जानी चाहिए।

राज्यसभा में विपक्ष की ‘घटिया हरकत’ के बाद सभापति ने कुर्सी छोड़ी: TMC सांसद से बोले- आपकी हिम्मत कैसे हुई चिल्लाने की, जयराम रमेश को भी रगड़ा

राज्यसभा सत्र के दौरान सदन में उठा आज विनेश फोगाट का मामला गरमागर्मी पर पहुँच गया जब सभापति जगदीप धनखड़ से तृणमूल कॉन्ग्रेस सांसद डेरेक ओब्रेन ने अभद्रता की। इस घटना के बाद जगदीप धनखड़ अपनी कुर्सी छोड़ चले गए।

दरअसल, विनेश फोगाट को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था- “हमें कारण जानना है कि आखिर क्या ऐसा हुआ कि एकदम से विनेश को बाहर किया गया और हमने कुछ नहीं किया।: खड़गे के सवाल के बाद टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रेन को चिल्लाकर विरोध किया। इस बात से सभापति जगदीप धनखड़ काफी नाराज हो गए।

धनखड़ ने कहा, “आपकी हिम्मत कैसी हुई अध्यक्ष पर चिल्लाने। आपकी हरकत सबसे घटिया हरकत है। मैं इसकी निंदा करता हूँ। अगली बार मैं आपको सदन से बाहर कर दूँगा। आपने अध्यक्ष की ओर हाथ करके चिल्लाने की हिम्मत कैसे की।”

सभापति जगदीप धनखड़ के इस बयान के बाद विपक्ष के कुछ नेता वॉकआउट कर गए। इसके बाद जगदीप धनखड़ ने कहा, “हमने सदन के अंदर अभी सबसे खराब स्थिति को देखा। हमने आपातकाल के दौरान अपने संविधान का सबसे काला दौर देखा था। हमें पता है यह कैसे शुरू हुआ था। यह सबसे संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने के साथ शुरू हुआ था। जून 1975 में चुनौती थी। अभी भी गंभीर चुनौती है। क्या इस तरह के व्यवहार की कोई सही ठहरा सकता है।”

विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट पर जगदीप धनखड़ ने कहा, विपक्ष के लोग इस पवित्र सदन की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं। इसे आराजकता का केंद्र बना रहे हैं। ये सांसद गलत आचरण तो दिखा ही रहे हैं, साथ ही शारीरिक रूप से भी सभापति के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने आहत मन से कहा, “पवित्र सदन को अराजकता का केंद्र बनाना, भारतीय प्रजातंत्र के ऊपर कुठाराघात करना। अध्यक्ष की गरिमा को धूमिल करना, शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण करना, यह अमर्यादित आचरण नहीं है, यह हर सीमा को लांघित करने वाला आचरण है। यह सदन इस समय देश की रूलिंग पार्टी के अध्यक्ष को यहाँ सदन के नेता को रूप में देख रहा है। यह सदन प्रतिपक्ष ने अध्यक्ष को भी यहाँ नेता प्रतिपक्ष के रूप में यहाँ देख रहा है। कॉन्ग्रेस पार्टी की वरिष्ठतम नेता भी इस सदन की सदस्य हैं। जो मैं हाल के दिनों में देख रहा हूँ, और जिस तरह से चुनौती शब्दों से, पत्र के द्वारा, अखबार के माध्यम के द्वारा, एक प्रमुख अखबार, नाम नहीं लेना चाहता हूँ, कितनी गलत टिप्पणी की है।”

उन्होंने कहा, “मैंने देखा है। मेरे को ये चुनौती नहीं दी जा रही है। यह चुनौती सभापति के पद को दी जा रही है, और ये चुनौती इसलिए दी जा रही है क्योंकि जो व्यक्ति इस पद पर बैठा है, वो इसके लायक नहीं है। ऐसा ये सोचते हैं। मुझे हाउस का समर्थन जितना चाहिए उतना नहीं मिला है। मैंने प्रयास में कोई कमी नहीं की है।”

आगे उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश को भी फटकारा। सभापति ने कहा, “जयराम जी आप हँसिए नहीं… मैं आपकी आदत जानाना हूँ। अब मेरे पास एक ही विकल्प है। सदन में बहुत से वरिष्ठ सदस्य हैं। अब भी उपस्थित हैं उनका सम्मान करता हूँ। उन्होंने राजनीति मेरे से बहुत ज्यादा देखी है। दुखी मन से…मैं अपनी शपथ से दूर नहीं भाग रहा हूँ। पर जो आज मैंने देखा है। जिस तरह का व्यवहार सदस्यों ने किया है। शारीरिक रूप से किया है। जिस तरह का व्यवहार इधर से (विपक्ष की ओर इशारा करते हुए) भी हुआ है। कुछ समय के लिए मैं यहा बैठने में अपने आपको सक्षम नहीं पा रहा हूँ।” इसके बाद वह सदन छोड़कर चले गए।

दिल्ली में लगे इस्लामी और खालिस्तानी आतंकियों के पोस्टर, सूचना देने वालों को मिलेगा ईनाम: स्वतंत्रता दिवस से पहले पुलिस अलर्ट

स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए दिल्ली पुलिस अलर्ट हैं। देश इस बार 78वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस के जवानों ने गुरुवार (8 अगस्त 2024) को खान मार्केट सहित अन्य इलाकों में कुख्यात आतंकियों के पोस्टर लगाए हैं। ये आतंकी अलकायदा और खालिस्तानी संगठनों से जुड़े हैं और सुरक्षाबलों को लंबे समय से इनकी तलाश है।

इस पोस्टर्स में रियाज, जुनैद और परमजीत जैसे कई खतरनाक आतंकियों की तस्वीरें है। इस पोस्टर में कहा गया है कि इन खूंखार आतंकियों को देखते हुए पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत सूचित करें। ऐसा करने वाले व्यक्ति को उचित ईनाम दिया जाएगा। इसके साथ ही उसका नाम एवं पता भी गुप्त रखा जाएगा। पोस्टर के कुल 9 आतंकियों के नाम एवं तस्वीरें हैं। इनमें 6 आतंकी अलकायदा के हैं।

पुलिस दिल्ली की सीमा से सटे राज्यों पर भी निगरानी रख रही है। बता दें कि इससे पहले जानकारी मिली थी कि 15 अगस्त पर खालिस्तानी संगठन के साथ-साथ इस्लामी संगठन किसी बड़ी को साजिश रच रहे हैं। इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हैं। सब-इंस्पेक्टर कोमल ने कहा, “हम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए आगामी 15 के मद्देनजर आतंकवादियों के पोस्टर लगा रहे हैं।”

पुलिस का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के चलते सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को जागरूक करने के लिए आतंकियों को पोस्टर लगाए जा रहे हैं। उधर, दिल्ली पुलिस के कमिश्नर संजय अरोड़ा ने बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक संकट के चलते पुलिस अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली राजधानी क्षेत्र में रहने वाले बांग्लादेशियों की पहचान करने के लिए कहा गया है।

पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र के मोटर वर्कशॉप और गैराज में जाकर पिछले 10 दिनों में किसी वाहन में हुए बदलाव में पता लगाने के लिए भी कहा है। पुलिस मुख्यालय में आयोजित बैठक में पुलिस कमिश्नर अरोड़ा ने पिछले दो महीनों में कूरियर कंपनियों के जरिए बिना स्पष्ट जानकारी वाले पतों पर की गई डिलीवरी के बारे में भी पता लगाने के लिए कहा है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित लाल किले से देश को संबोधित करेंगे। इस दौरान परिसर में सैकड़ों गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाला यह देश का सबसे बड़ा कार्यक्रम माना जाता है। ऐसे में सुरक्षाबल राजधानी के चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी रख रही है।