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‘श्रीलंका-बांग्लादेश के बाद भारत का नंबर’: मोहम्मद अफसर ने स्टेटस में लिखा- डरा नहीं रहा बल्कि आगाह कर रहा हूँ; पुलिस ने आरोपित को दबोचा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में अफसर नाम के एक मुस्लिम युवक द्वारा व्हाट्सएप पर बांग्लादेश से जुड़े आपत्तिजनक स्टेटस डालने का मामला सामने आया है। अफसर एक पैथोलॉजी चलाता है। उसने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद अब भारत का नंबर आने की बात लिखी है। विश्व हिन्दू परिषद की शिकायत के बाद पुलिस ने अफसर को दबोच लिया है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र सिरौली का है। यहाँ अफसर नाम का युवक नगर पंचायत ऑफिस के आगे एक पैथोलॉजी चलाता है। बरेली के विश्व हिन्दू परिषद कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने बुधवार (7 अगस्त) को अपने X हैंडल के माध्यम से इसकी शिकायत पुलिस से की। हिमांशु ने अपने ट्वीट में बरेली ADG, DGP सहित मुख्यमंत्री कार्यालय को भी टैग किया है।

हिमांशु ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल @himanshupatelrs से इस संबंध में लिखा, “थाना सिरौली क्षेत्र में नगर पंचायत के सामने केयर लैब चलाने बाला अफसर व्हाट्सएप पर बेहद धमकी भरा स्टेटस लगाया है। भारत देश से हिंदुओं को भागने की खुली धमकी दे रहा हैं।” हिमांशु पटेल ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किया है, उसमें मोबाइल नंबर अफसर लैब के नाम से दिख रहा है।

इस मोबाइल नंबर पर एक ह्वाट्सएप स्टेटस दिख रहा। इस स्टेटस में अफसर ने लिखा है, “श्रीलंका हो गया, बांग्लादेश हो गया। अब नंबर भारत का है? 5 करोड़ का हवाई जहाज कैसे तैयार है। झोला भी तैयार है। अंधभक्तों डरा नहीं रहा हूँ, आगाह कर रहा हूँ। बांग्लादेश में वहाँ तो सिर्फ छात्र परेशान थे।”

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर बरेली पुलिस ने बताया है कि थाना प्रभारी सिरौली को जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया गया है। अफसर मूलतः UP के ही रामपुर जिले का रहने वाला है। ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता हिमांशु पटेल से बात की। उन्होंने असफर की डिग्री और उसके पैथोलॉजी के वैधता की जाँच कराने की माँग की है।

उसका ह्वाट्सएप स्टेटस वायरल होने के बाद से अफसर अपने लैब का शटर गिराकर फरार हो गया है। हालाँकि, पुलिस ने बुधवार (7 अगस्त) को दबोच लिया। विहिप नेता पटेल ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के कई लोग अफसर का समर्थन कर रहे हैं और उसके शब्दों को जायज ठहरा रहे हैं। हिमांशु ने अफसर के तमाम समर्थकों पर भी कार्रवाई की माँग की है।

‘अब कुछ नहीं हो सकता, विनेश फोगाट को मेडल मिलना असंभव’: बोले UWW चीफ, भारतीय टीम के डॉक्टर ने बताया – 2.70 kg ज़्यादा था वजन, रात भर लगे रहे

अधिकतम तय मानक से वजन 100 ग्राम अधिक होने के कारण विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक 2024 में अयोग्य घोषित कर दिया गया और फाइनल में पहुँचने के बावजूद उन्हें कोई मेडल नहीं मिला। अब UWW (यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग) के अध्यक्ष नेनाद लोलोविक ने कहा है कि विनेश फोगाट को मेडल मिलना असंभव है। उन्होंने विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित किए जाने पर दुःख भी जताया। अमेरिका की सारा हिल्डब्रांड्ट के साथ विनेश फोगाट का 50 किलोग्राम वर्ग में आखिरी मुकाबला होना था।

नेनाद लालोविक ने कहा कि हमें नियम-कायदों का सम्मान करना होगा, विनेश फोगाट के साथ जो भी हुआ उसके लिए वो दुःखी हैं। उन्होंने कहा कि काफी कम मात्रा से वो ओवरवेट निकलीं, लेकिन नियम तो नियम होते हैं और सारे नियम सार्वजनिक हैं। उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ी वहाँ पर हैं और ये लगभग असंभव है कि वजन का मानक पूरा न कर पाने वाले को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने दिया जाए। उन्होंने कहा कि अब कुछ भी नहीं किया जा सकता है। अमेरिकी महिला पहलवान का फाइनल मुकाबला अब क्यूबा की यूसनेलिस गुज़मान से होगा। IOA अध्यक्ष PT उषा UWW चीफ से मुलाकात करेंगी।

भारतीय टीम के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ दिनशॉ पार्दीवाला ने कहा कि अधिकतम तय मानक से विनेश फोगाट का वजन सेमीफाइनल खत्म होने के बाद 2.7 किलोग्राम अधिक पाया गया था। उन्होंने कहा कि कम पानी दिए जाने के साथ-साथ उन्हें उपवास पर भी रखा गया था। विनेश फोगाट ने पसीना बहाना शुरू किया। डॉ पार्दीवाला ने कहा कि हमारे पास अधिक समय नहीं था, रात भर के 12 घंटे के समय में पूरी टीम प्रक्रिया में लगी रही, मेडिकली जो भी संभव था सब किया गया।

डॉ दिनशॉ पार्दीवाला ने आगे बताया कि जब विनेश फोगाट और पसीना नहीं बहा पाईं तब उनके बाल काटे गए, शायद कुछ घंटे और होते तो उनका वजन फिर तय मानक के हिसाब से हो जाता। उनके अयोग्य घोषित होने के बाद मेडिकल टीम ने रिहाइड्रेशन के लिए उनकी नसों से होकर द्रव्य चढ़ाया। इसके बाद उन्होंने भोजन किया और पानी भी पिया। अब उनकी स्थिति ठीक है, सावधानी के लिए उनका ब्लड टेस्ट कराया गया है। वामपंथी प्रपंची इस मामले में IOA की सदस्य नीता अम्बानी को घसीट रहे हैं।

जिस मैदान पर वक्फ बोर्ड ने कर रखा था कब्जा, वो बनेगा फुटबॉल स्टेडियम: महाराष्ट्र के आमखास मैदान में जमात-ए-इस्लामी लगाता था मजमा

जमीनों को कब्ज़ाने के लिए कुख्यात वक्फ बोर्ड पर कार्रवाई की संभावना वाली खबरों के बीच महाराष्ट्र में इससे जुड़ी एक खबर सामने आई है। यहाँ छत्रपति संभाजीनगर में वक्फ बोर्ड द्वारा कब्जा किए गए एक मैदान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मैदान बनाने की तैयारी कर ली गई है। बुधवार (7 अगस्त 2024) को इस आशय की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस स्थान को फुटबॉल स्टेडियम बनाने की तैयारी चल रही है उसका नाम आमखास मैदान है। ये मैदान संभाजी शहर से सटा हुआ है। लम्बे समय से इस पर वक्फ बोर्ड अपना दावा ठोकता आ रहा था। अब इसे विश्वस्तरीय फुटबॉल मैदान बनाने के फैसले से पहले महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक हुई थी।

बैठक की अध्यक्षता मंत्री अब्दुल सत्तार ने की है। इस दौरान राज्य सरकार के खेल मंत्री संजय बनसोडे भी मौजूद थे। आखिरकार अब्दुल सत्तार ने अपने फैसले से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया।संरक्षक मंत्री अब्दुल सत्तार ने संभाजीनगर के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वो आमखास मैदान पर अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल मैदान बनाने का प्रस्ताव जल्द-से-जल्द खेल विभाग के पास भेजें।

इस निर्देश की सूचना जिले के एक अधिकारी द्वारा बुधवार (7 अगस्त 2024) को सार्वजनिक की गई। अब्दुल सत्तार के मुताबिक, इस प्रयास से महाराष्ट्र में खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर लाने में सहायता मिलेगी। खेल मंत्री संजय बनसोडे ने भी इस निर्णय की सराहना की है और इस पर जल्द काम शुरू होने का भरोसा दिया है।

आमखास मैदान का प्रयोग सभा आदि का आयोजन करने के लिए किया जाता था। साल 2018 में इसी मैदान में आयोजित सभा में लाखों मुस्लिम शामिल हुए थे। तब देश भर से आए मौलवी-मौलानाओं ने इस मैदान में अपनी तकरीरें की थीं। इसका आयोजन दावत-ए-इस्लामी ने किया था। AIMIM पार्टी का मुखिया और सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी राजनैतिक रैलियाँ इसी मैदान पर करते रहे हैं।

बताते चलें कि देश के लगभग 30 राज्यों में वक्फ बोर्ड हैं। केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड को विनियमित करने के लिए विधेयक लाने जा रही है। इसके पीछे वक्फ बोर्ड के कार्यों को पारदर्शी बनाना व जवाबदेही तय करना है। विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ लामबंदी शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक को तैयार करने के दौरान कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों से रायशुमारी की गई है।

अब यूँ ही नहीं कोई संपत्ति बन जाएगी वक्फ की, एक नहीं बल्कि 2 बिल लेकर आ रही है मोदी सरकार: बोर्ड और परिषद में गैर-मुस्लिम भी होंगे

पूर्व महाराजाओं के किलों से लेकर हिंदुओं के पूरे गाँव को वक्फ संपत्ति बताने वाले वक्फ बोर्ड के पर कतरने की तैयारी केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है। सरकार वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन से जुड़ा दो बिल संसद में जल्दी ही पेश कर सकती है। इसके तहत वक्फ बोर्ड अधिनियम में 44 संशोधन किए जा सकते हैं। वक्फ बोर्ड में संशोधनों को लेकर सरकार ने बिल की एक कॉपी की है।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सरकार वक्फ से जुड़े दो बिल संसद में पेश करेगी। एक बिल के जरिए वह मुस्लिम वक्फ कानून 1923 को समाप्त करेगी, जबकि दूसरे बिल के जरिए वक्फ कानून 1995 में बेहद महत्वपूर्ण संशोधन किए जाएँगे। वक्फ संशोधन बिल 2024 के जरिए केंद्र की मोदी सरकार 44 संशोधन करेगी। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संचालन है।

केंद्र सरकार का कहना है कि बिल में वक्फ कानून 1995 के सेक्शन 40 को हटाया जाएगा। इस धारा के तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने का अधिकार दिया गया है। संशोधन बिल के जरिए वक्फ कानून 1995 का नाम बदल कर एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम 1995 किया जाएगा।

केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम के साथ-साथ गैर-मुस्लिमों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसमें दो महिलाओं को रखना भी अनिवार्य होगा। इसमें मुस्लिम समुदाय के अन्य पिछड़ा वर्ग- शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, 3 सांसद, मुस्लिम संगठनों के 3 प्रतिनिधि, मुस्लिम कानून के 3 जानकार, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के 2 पूर्व जज, एक वकील, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 4 लोग, भारत सरकार के सचिव आदि होंगे।

नए संशोधनों के अनुसार, वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए सर्वे कमिश्नर का अधिकार कलेक्टर या कलेक्टर द्वारा नामित डिप्टी कलेक्टर को होगा। बोहरा और आगाखानी के लिए ‘औकाफ़’ (दान की गई संपत्ति और वक्फ के रूप में अधिसूचित) के लिए अलग से बोर्ड की स्थापना की जाएगी।

वक्फ काउंसिल किसी संपत्ति पर दावा नहीं ठोक सकता। वहीं, वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ के रूप में दर्ज करना चाहता है तो पहले उसे सभी संबंधितों पक्षों को नोटिस जारी करना होगा। यह पंजीकरण एक केंद्रीकृत वेबसाइट पर होना चाहिए। एक केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के माध्यम से वक्फ के पंजीकरण के तरीके को सुव्यवस्थित करने की भी इसमें व्यवस्था की गई है।

नए संशोधनों के अनुसार, केवल प्रैक्टिस करने वाले मुस्लिमों को ही अपनी चल या अन्यथा संपत्ति वक्फ परिषद या बोर्ड को दान करने की अनुमति होगी। दान करने फैसला सिर्फ कानूनी मालिक ही ले सकता है।वर्तमान कानून के तहत, किसी भी वक्फ संपत्ति को ऐसी संपत्ति नहीं माना जा सकता है, यदि इसके बारे में कोई विवाद हो, खासकर यदि इसके सरकारी संपत्ति होने के बारे में कोई सवाल हो।

ऐसे विवादों में अधिकारी जाँच करेंगे और राज्य को एक रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके बाद रिकॉर्ड समायोजित किए जाएँगे। नए कानून में वक्फ बोर्ड को मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल विधवाओं, तलाकशुदा और अनाथों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए और वह भी सरकार द्वारा सुझाए गए तरीके से। एक प्रमुख प्रस्ताव यह भी है कि महिलाओं की विरासत की रक्षा और सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बांग्लादेश में बड़े कारोबारी और उसके हीरो बेटे की हत्या: बचने के लिए पिस्टल से गोली चलाई, भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला – शेख मुजीबुर रहमान पर भी बना चुके थे मूवी

बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सत्ता परिवर्तन की वजह बना। शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। वहाँ भीड़ ने कई हिन्दुओं की हत्याएँ कर दी हैं और मंदिरों पर भी हमले किए गए हैं। अब ‘लक्ष्मीपुर मॉडल यूनियन परिषद’ के अध्यक्ष सेलीम खान और उनके फिल्म स्टार बेटे शंतो खान को भीड़ ने मार डाला है। घटना सोमवार (5 अगस्त, 2024) के दोपहर की है। दोनों भीड़ से बचने के लिए चाँदपुर सदर उपजिला स्थित अपने आवास से भाग रहे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया।

बलिया यूनियन स्थित फोरक्काबाद बाजार में भीड़ ने उन्हें देख लिया और पहचान लिया। उन्होंने खुद को बचाने के लिए पिस्टल से गोलियाँ भी चलाई, लेकिन सब बेकार। वो किसी तरह आगे बढ़ कर बागरा बाजार तक पहुँचे, लेकिन वहाँ फिर से भीड़ ने उन्हें घेर लिया। वहाँ भीड़ ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, सेलीम खान कई वर्षों से नौसैन्य सीमा में पद्मा-मेघना नदी से सैकड़ों ड्रेजरों की मदद से अवैध रूप से रेत निकाल रहे थे और करोड़ों टका जमा कर रहे थे।

उन्हें इन गतिविधियों के कारण जेल भी हुई थी। बांग्लादेश के ‘एंटी-करप्शन कमीशन’ (ACC) में उनके खिलाफ अभी भी केस चल रहा है। चाँदपुर सदर मॉडल पुलिस स्टेशन के ऑफिस-इन-चार्ज (OIC) मोहम्मद शेख मोहसिन आलम ने कहा कि पुलिस को दोनों पिता-पुत्र की मौत के बारे में पता चला है, लेकिन घटना के दौरान उन्हें कोई सूचना नहीं मिली। पुलिस अधिकारी ने ये भी बताया कि जवान अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर नहीं गए। सेलीम खान ‘शापला मीडिया’ के भी संस्थापक हैं।

‘शापला मीडिया’ के बैनर तले कई फिल्मों का निर्माण भी हो कर चुके थे। इस कंपनी के ‘शहंशाह’ और ‘विद्रोही’ नामक फ़िल्में काफी लोकप्रिय हुई थीं। उन्हें शेख हसीना का करीबी माना जाता था, उन्होंने शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर रहमान की बायोपिक फिल्म ‘बंग बंधु’ का निर्माण भी किया था। उन्होंने अपने बेटे को लॉन्च करने के लिए शेख मुजीबुर रहमान के बचपन पर आधारित फिल्म ‘तुंगी परार मियाँ भाई’ बनाई थी। अभिनेत्री कौशानी मुखोपाध्याय ने शंतो खान की मौत पर दुःख जताते हुए कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है। कई अन्य बंगाली फिल्म हस्तियों ने दुःख जताया है।

हाथ में थूक उगलकर युसूफ ने दी ग्राहक को फेस मसाज, हरकत वायरल होने के बाद कन्नौज पुलिस में केस दर्ज: Video देख आ जाएगी घिन

थूक जिहाद को लेकर आजकल सोशल मीडिया पर चर्चा आम है। इस बीच एक और वीडियो वायरल होना शुरू हुई है। इसमें देखा जा रहा है कि एक नाई हाथ में थूक लगाकर अपने ग्राहक को फेस मसाज दे रहा है। कथित वीडियो को ग्राहक ने ही बनाकर वायरल किया है। वीडियो के बीच में देख सकते हैं कि नाई मसाज करते हुए पहले घूमकर पीछे की ओर होता है, फिर हाथ पर थूकने के बाद उसी से चेहरे में मसाज करने लग जाता है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। पुलिस ने जानकारी होने पर केस दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, ये मामला कन्नौज के तालग्राम का है। सैलून में थूक लगाकर मसाज करने वाले नाई का नाम यूसुफ बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि जिस समय पर वो थूक लगाकर मसाज दे रहा था उस समय पर ग्राहक की आँखे बंद थीं। इसी का फायदा उठाते हुए ये हरकत की गई।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो करीब 10 दिन पुराना है मगर अब वायरल हो रहा है। इस वीडियो पर तमाम लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कन्नौज के पूर्व बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक ने भी इसे शेयर करते हुए ये मुद्दा उठाया है। उन्होंने अपने एक्ट अकॉउंट पर इस हरकत को थूक जिहाद बताया।

सुब्रत पाठक ने इस संबंध में लिखा, “ये थूक जिहाद की घटना कन्नौज के तालाग्राम की है। पुलिस तो अपना काम करेगी ही लेकिन हमें सावधान रहना होगा।” पूर्व सांसद की पोस्ट पर ही कन्नौज पुलिस ने भी जवाब दिया। उन्होंने सूचना दी कि अभियोज पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। मामले में एडीजी जोन कानपुर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भी केस में कार्रवाई की बात कही है।

‘ये हिंदू लड़के हैं, इन्हें मारना ही है…’ – मंडप बनाने वाले हिन्दू परिवार पर हमला: राजकोट में अफजल, सिकंदर समेत 4 गिरफ्तार

गुजरात के राजकोट में पूजा मंडप बनाने वाले हिन्दू परिवार पर 4 मुस्लिम हमलावर हो गए। हिन्दू परिवार को घेर कर मुस्लिमों ने हमला किया जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करके 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना राजकोट बी डिवीजन पुलिस स्टेशन के अंतर्गत भगवतीपारा स्ट्रीट नंबर 9 में रविवार (4 अगस्त, 2024) को हुई। यहाँ रहने वाले जगदीशभाई वाघेला मंडप बनाने का काम करते हैं। उनका बड़ा बेटा मिहिर और छोटा बेटा आशीष फास्ट फूड बेचते हैं।

इस घटना की रिपोर्ट मिहिर ने दर्ज करवाई है। मिहिर की गई शिकायत के अनुसार, वह और उनका भाई अपनी खाने की दुकान पर मौजूद थे, इसी दौरान उनकी माँ यहाँ दौड़ती हुई आईं और उन्हें घर बुलाया। दोनों जब घर पहुँचे तो उनके पिता ने बताया कि वह जब दशम व्रत के लिए मंडप लगाने गए थे, तो आशाबापीर दरगाह के पास सिकंदर सहित अन्य लोगों से उनकी बहस हो गई। मिहिर अपनी पिता से बात कर ही रहे थे और इसी दौरान हमलावर उनके घर पर पहुँच गए।

शिकायत के मुताबिक, उनके घर आए हमलावरों ने मारपीट चालू कर दी। इसके बाद उनके भाई आशीष को पेट में चाकू मार दिया गया। हमले के कारण आशीष की हालत गंभीर बनी हुई है, उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। परिवार के बाकी सदस्यों को भी चोट आई है। इस मामले में राजकोट बी डिवीजन पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है। मामले की FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

घेर कर मारा, फिर घोंप दिया चाकू

इस मामले में अधिक जानकारी पाने के लिए ऑपइंडिया ने पीड़ित परिवार के मिहिर वाघेला से संपर्क किया। ऑपइंडिया से बात करते हुए मिहिर ने बताया, “मैं और मेरा भाई अपनी दुकान पर थे , तभी मेरी माँ हमें बुलाने के लिए दौड़ती हुई आईं। जब हमने जाकर पूछताछ की, तो मेरे पिता ने हमें बताया कि वह एक व्यक्ति के साथ आसबापीर की दरगाह के पास रहने वाले एक हिंदू परिवार के दशामाता व्रत के लिए मंडप लगाने के लिए जा रहे थे। तभी रास्ते में सिकंदर, अफ़ज़ल, दरेद और समीर नाम के मुस्लिम युवकों ने हमें रोक लिया।”

मिहिर ने आगे बताया, ”उन्होंने मेरे पिता को सड़क पर रोक कर कहा कि हमारी गली मत छोड़ो। मेरे पिता और उनके साथ के लोग वहाँ से लौट आये थे। हम खड़े होकर बात कर रहे थे तभी चारों भाई सिकंदर, अफजल, दरेद और समीर धारदार हथियार लेकर आ गए। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया जब मेरे माता-पिता हमें बचाने के लिए बीच में आए, तो उन्हें भी पीटा गया।”

हमले में घायल मिहिर

मिहिर ने बताया, ”इसी बीच सिकंदर और दरेद ने मेरे छोटे भाई को पकड़ लिया और अफजल ने अपने पास रखा चाकू मेरे भाई के पेट में घोंप दिया। वह लोग कह रहे थे कि यह हिंदू लड़के हैं, हिंदू हैं, उन्हें मारना ही है तो घायल कर दो। ऐसी चोट लगे कि गिर पड़े। मेरा भाई इसके बाद लहूलुहान हो गया। उसके पेट से खून निकल रहा था। तभी आसपास के लोग आ गए और चारों हमलावर भाग निकले। चूंकि मेरे भाई की हालत अभी गंभीर है, इसलिए हमने उसे तुरंत इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।” मिहिर ने बताया कि हमलावर हत्या करने आए थे।

परिवार की हर मदद की जाएगी- विश्व हिंदू परिषद

इस घटना को लेकर स्थानीय हिंदू समाज और संगठनों में भी गुस्सा है। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद के राजकोट जिला मंत्री आशीष सेठ ने ऑपइंडिया को बताया, ”परिवार पहले भगवतीपारा थाने में शिकायत दर्ज कराने गए थे। वहाँ PSI शेख ने हल्की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसलिए परिवार में असंतोष था। बाद में जब वह बी डिवीजन पुलिस स्टेशन गए तो मामले को लेकर सही से सुनवाई हुई।”

उन्होंने आगे बताया, ”विश्व हिंदू परिषद ने परिवार से इस मामले में संपर्क किया है और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। जहाँ भी जरूरत होगी, परिषद समेत सभी हिंदू संगठन उनके साथ रहेंगे। हमने पुलिस से भी बात की है और उनसे नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।”

चार आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई शुरू

शिकायत दर्ज होने के चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने चारों भाइयों सिकंदर राउमा, अफजल राउमा, दरेद उर्फ ​​डालियो राउमा और समीर राउमा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 118(2), 115(2), 352 और 54NS और GPA की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया है। ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस से सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। आगे की जानकारी मिलते ही खबर अपडेट कर दी जाएगी।

हिंदुओं की सूची, महिलाओं के नाम… भागने के हर रास्ते पर बंदूक लेकर कट्टरपंथी: बांग्लादेश में टारगेट पर काफिर, 2200 जमात-ए-इस्लामी आतंकी जेल से रिहा

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हिंसा का दौर जारी है। इस हिंसा में वहाँ के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इनमें हिन्दू समुदाय प्रमुख है। हिन्दुओं के घरों और मंदिरों में तोड़फोड़ और आगजनी की जा रही है। कई हिन्दुओं को प्रताड़ना देकर मार डाला गया। शासन-प्रशासन, मानवता या नियम-कानून नाम की कोई चीज कहीं नहीं दिख रही है। ऐसे में ऑपइंडिया ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के कुछ हिन्दुओं से बात करके वहाँ के ताजा हालातों की जानकारी जुटाई।

उनके परिवार के जान-माल की सुरक्षा दाँव पर लगी है। उन्होंने बताया कि शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद इ्स्लामी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के दंगाई हिंदू के घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की लिस्ट बना रहे हैं। एक हिन्दू ने हमें बताया, “कुछ ही स्थानीय लोग हमारी मदद कर रहे हैं, जबकि हजारों की तादाद में हिंसक भीड़ हम लोगों की हत्या करने पर तुली हुई है।”

कुछ अन्य पीड़ितों ने बताया कि हिंसा रात भर जारी रही और डर से हिन्दू घरों में छिपे रहे। बताते चलें कि विश्व हिंदू महासंघ, बांग्लादेश चैप्टर ने भी बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं की एक सूची जारी की है। इस लिस्ट में कम-से-कम 3 ऐसी हिंदू महिलाओं के नाम शामिल हैं, जिनका इस्लामी दंगाइयों ने अपहरण कर लिया है। उनका कहना है कि बांग्लादेश में रहने वाले हिन्दू सहमे हुए हैं।

सुरक्षा कारणों से अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कुछ हिंदुओं ने यह भी कहा कि वो कहीं सुरक्षित जगह भागकर जा भी नहीं पा रहे हैं, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी समूह और अन्य चरमपंथी संगठनों के उपद्रवी बंदूक लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट को बीच-बीच में बंद कर दिया जा रहा है, जिससे वो अपने अन्य परिजनों का हाल-चाल भी नहीं ले पा रहे हैं।

बांग्लादेशी हिन्दुओं का आरोप है कि उन्हें जान-बूझ कर एक-दूसरे से दूर रखने की साजिश की जा रही है, ताकि वे साथ ना आ पाएँ। हमें बताया गया कि बांग्लादेश में हिंसा जारी है और महज कुछ ही घटनाएँ लोगों तक पहुँच पा रही हैं। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश की जेलों में बंद जमात के 2,200 से अधिक कट्टरपंथियों को जमानत दे दी गई। इससे हिन्दुओं की हालत और खराब हो सकती है।

कुछ अन्य क्षेत्रों में रहने वाले हिन्दुओं ने ऑपइंडिया को बताया कि उनकी तरफ हिंसा कुछ थमी सी लग रही है, लेकिन यह तूफ़ान आने से पहले की शांति है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा अभी भी जारी है। BBC की रिपोर्ट में स्कूल चलाने वाली एक हिन्दू माँ ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी द्वारा बनाई गई हिन्दुओं की सूची में उनका नाम भले अभी तक नहीं है, लेकिन रिश्तेदारों ने उन्हें सावधान रहने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि भारत सरकार के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई है। इससे पहले ऑपइंडिया ने बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद द्वारा जारी किए गए कई हमलों की सूची और बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार द्वारा रिपोर्ट किए गए हमलों के बारे में बताया था। सोशल मीडिया पर हिंदुओं पर हमलों के कई वीडियो और तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं।

कॉन्ग्रेस सांसद को नज़र आया बृजभूषण शरण सिंह का षड्यंत्र, विनेश फोगाट के अयोग्य घोषित होने के बाद बोले ससुर – सड़क जाम और तोड़फोड़ होगी तो हमारी गारंटी नहीं

भारत की महिला पहलवान विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक 2024 में अयोग्य घोषित कर दिया गया है, क्योंकि उनका वजन अधिकतम तय मानक से 100 ग्राम अधिक पाया गया। वो 50 किलोग्राम वर्ग में खेल रही थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें देश का गर्व और प्रेरणा बताते हुए IOA अध्यक्ष PT उषा से बात की और IOC के समक्ष विरोध दर्ज कराने के लिए कहा। हालाँकि, विनेश फोगाट के ससुर को इसमें केंद्र सरकार और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की साजिश नज़र आ रही है। उन्होंने कहा कि बाल काट दिए जाते तो शायद 100 ग्राम कम हो जाते।

शायद उन्हें पता नहीं है कि 1 दिन पहले विनेश फोगाट का वजन 2.15 किलोग्राम अधिक था, टीम ने तय मानक तक पहुँचने के लिए भरसक प्रयास किया। उनके बाल काटे गए, उनका खून तक निकालने की मेडिकल टीम ने कोशिश की। उन्होंने रात भर जाग कर व्यायाम किया, लेकिन फिर भी वजन 100 ग्राम अधिक रह गया। भारतीय सपोर्ट टीम का कहना है कि और अधिक प्रयास कर के विनेश फोगाट के जीवन को खतरे में नहीं डाला जा सकता था। अयोग्य घोषित किए जाने के बाद विनेश फोगाट डिहाइड्रेशन के कारण बेहोश हो गईं, अस्पताल में उनकी स्थिति स्थिर है।

उधर महाराष्ट्र के अमरावती से कॉन्ग्रेस सांसद बलवंत वानखेड़े ने कहा है कि विनेश फोगाट ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, इसलिए उन्होंने अपना मेडल खो दिया। उन्होंने इसे एक साजिश बताते हुए कहा कि पूरे देश को पता था कि उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था और अब जीत के बाद उनका सम्मान बढ़ जाता है और कुछ लोगों को ये पसंद नहीं आता। बता दें कि WFI (भारतीय कुश्ती महासंघ) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। फिर भी इसे उन्हीं की साजिश बताया जा रहा है।

उधर विनेश फोगाट के ससुर राजपाल राठी ने कहा है कि अगर लोग सड़क जाम करते हैं या तोड़फोड़ करते हैं तो परिवार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विनेश फोगाट के साथ जो सपोर्ट स्टाफ हैं उन्होंने कोई मदद नहीं की। राजपाल राठी ने कहा कि विनेश फोगाट अपने पसंद के जिन लोगों को साथ ले गई थीं उन्हें पोडियम तक जाने ही नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि विनेश फोगाट ने पहले भी बार-बार कहा है कि उनके साथ षड्यंत्र रचा जा सकता है, अब ये साबित हो गया है। 

दीनी तालीम लेने जाती थीं 2 नाबालिग बहनें; मुल्ला हारून ने बड़ी से रेप और छोटी से अश्लील हरकत की: मुँह खोलने पर कत्ल की धमकी, मेरठ पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में 2 नाबालिग बच्चियों से यौन शोषण का मामला सामने आया है। यहाँ मुल्ला हारून नाम के एक मौलवी पर दीनी तालीम लेने वाली एक नाबालिग लड़की से रेप और दूसरी लड़की के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। दोनों पीड़िताएँ सगी बहनें हैं। मुँह खोलने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई है। पुलिस ने बुधवार (6 अगस्त 2024) को हारून को गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में एक महिला ने 31 जुलाई को शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसकी 2 नाबालिग बेटियाँ उमर गार्डन में रहने वाले मौलवी मुल्ला हारून से दीनी तालीम लेने जाती थीं। 55 साल का मुल्ला हारून दोनों बहनों पर गलत नजर रखता था। 30 जुलाई को जब वह पढ़ने गई तो उसकी बड़ी बेटी के साथ मौलवी ने रेप किया।

बलात्कार के बाद मौलवी हारून ने पीड़िता को मुँह खोलने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इस वजह से 11 वर्षीय पीड़िता डरी-सहमी रही और इस बारे में किसी को नहीं बताया। बेटी को परेशान देखकर माँ ने वजह पूछी तो डरते हुए पीड़िता ने पूरी बात उसे बता दी। महिला ने अपनी छोटी बेटी से भी मौलवी की करतूतों के बारे में पूछताछ की। छोटी बेटी ने भी मौलवी की हरकतों से खुद को परेशान बताया।

पिता से भी अधिक उम्र के मुल्ला हारून की हरकतों की पोल खुलने के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। अपने खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद मौलवी हारून फरार हो गया था, जिसकी तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी गई। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

आखिरकार पुलिस ने 6 अगस्त 2024 (मंगलवार) को मुल्ला हारून को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित मौलवी पर पॉक्सो एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। मुल्ला हारून को जेल भेज दिया गया है। दोनों पीड़िताओं का मेडिकल टेस्ट के साथ काउंसिलिंग भी करवाई जा रही है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।