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विनेश फोगाट अयोग्य घोषित, नहीं मिलेगा कोई मेडल: फाइनल में पहुँचने के बाद हुईं डिस्क्वालिफाई, 50kg से ज्यादा निकला वजन

महिला कुश्ती के 50 किग्रा. वर्ग के फाइनल में पहुँचने के बाद भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को ओलंपिक में अयोग्य करार दे दिया। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि उनका वजन 50 किलो से ज्यादा होने की वजह से उन्हें डिस्क्वालिफाई किया गया। नियमों के अनुसार, किसी भी रेसलर को किसी भी वर्ग में सिर्फ 100 ग्राम ज्यादा वजन की छूट दी जाती है लेकिन विनेश का वेट इससे ज्यादा था।

भारतीय ओलंपिक संघ ने इस संबंध में मीडिया में कहा भारतीय पहलवान विनेश फोगट को अधिक वजन होने के कारण महिला कुश्ती 50 किग्रा से अयोग्य घोषित कर दिया गया। भारत को उनके अयोग्य करार दिए जाने पर खेद है। रात भर टीम द्वारा किए गए बेहतरीन प्रयासों के बावजूद, आज सुबह उनका वजन 50 किग्रा से कुछ ग्राम अधिक पाया गया। टीम द्वारा आगे इस समय कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी। भारतीय टीम अनुरोध करती है कि अब विनेश की निजता का सम्मान किया जाए और आने वाले खेलों पर ध्यान दिया जाए।

स्वाति मालीवाल की पिटाई के बाद बिभव कुमार के साथ मौजूद थे CM केजरीवाल, दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में खुलासा: संजय सिंह और आतिशी के बयान बदलने को लेकर भी जाँच

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपने पूर्व सचिव बिभव कुमार के साथ राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर हमले के बाद मौजूद थे। यह जानकारी दिल्ली पुलिस की चार्जशीट से निकल कर आई है। बिभव कुमार ने दिल्ली मुख्यमंत्री आवास में AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर हमला किया था।

आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस इस मामले में जाँच करके पता लगा रही है कि क्या स्वाति मालीवाल पर हमले के पीछे कोई बड़ी साजिश थी। दिल्ली पुलिस ने मामले के सभी एंगल को जाँचते हुए हाई कोर्ट में चार्जशीट दायर की है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में बताया गया है कि जब बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल को पीट दिया, उसके बाद CM केजरीवाल भी घटनास्थल पर आ गए। चार्जशीट में बिभव पर स्वाति मालीवाल को 7-8 चांटे मारने का आरोप लगा है।

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद AAP नेताओं ने अपने बयान बदले। दिल्ली पुलिस ने कहा कि AAP राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना ने पहले बिभव कुमार की निंदा की लेकिन बाद में पूछताछ के दौरान अपने पुराने बयान को नहीं दोहराया और बिभव कुमार को बचाने का प्रयास किया। दिल्ली पुलिस इसी कारण से इस मामले में बड़ी साजिश का एंगल तलाश रही है।

पुलिस ने यह भी कहा है कि जहाँ मारपीट हुई, वहाँ के कुछ CCTV फुटेज मीडिया में जानबूझ कर लीक किए गए। दिल्ली पुलिस ने इसी के साथ उस ऑटो ड्राईवर का बयान भी इस घटना के विषय में लिया है, जिसने मारपीट के बाद स्वाति मालीवाल को CM आवास से उनके घर तक पहुँचाया था।

इससे पहले बिभव कुमार के CM आवास में मौजूद होने को लेकर कोर्ट ने भी प्रश्न उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बिभव कुमार की इस मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि एक गुंडे की CM आवास में क्या जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वाति मालीवाल पर हमले को लेकर बिभव कुमार से शर्म करने को कहा था और जमानत याचिका ठुकरा दी थी।

बिभव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 13 मई, 2024 को CM केजरीवाल से मिलने आई AAP की राज्यसभा सांसद से मारपीट की। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि उन पर बिभव कुमार ने हमला किया और उनको जमीन पर गिरा कर मारा। स्वाति मालीवाल ने कहा कि उनकी पिटाई के दौरान CM केजरीवाल के आवास में मौजूद लोगों ने उनकी मदद नहीं की।

बांग्लादेश में पुलिस भी नहीं सुरक्षित, 29 थाने जलाए, 50 सुरक्षाकर्मियों की हत्या: जो पहले संभालता था ट्रैफिक, अब वो बना पुलिस का मुखिया

बांग्लादेश में जारी इस्लामी कट्टरपंथी हिंसा के कारण पुलिस भी असुरक्षित महसूस कर रही है। हिंसक भीड़ देश भर में चुन चुन कर पुलिस थानों को निशाना बना रही है। बांग्लादेश में लगभग 30 थानों में तोड़फोड़ और आगजनी की है। राजधानी ढाका में पुलिस और दंगाइयों के बीच हुई झड़प के कारण एक ही दिन में दर्जनों लोग मारे गए हैं। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पुलिस के मुखिया को हटा कर नए व्यक्ति की नियुक्ति की गई है।

देश भर में पुलिस थानों पर हमला

बांग्लादेश के भीतर सभी जगह पुलिस थानों पर हमला हो रहा है। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, कम से कम 29 थानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया है। यहाँ के सामान और गोला-बारूद को लूट लिया गया है और आगजनी भी की गई है। इसके अलावा भी कई थानों को निशाना बनाया गया है। राजधानी ढाका के अलावा मीरपुर, खुलना और चट्टोग्राम जैसे शहरों में भी पुलिस वालों के खिलाफ हिंसा हुई है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सोमवार (5 अगस्त, 2024) को सत्ता परिवर्तन के बाद से अब तक कम से कम 50 पुलिसवालों को मारा जा चुका है।

देश के अधिकांश थाने खाली पड़े हैं और पुलिसवाले अपनी सुरक्षा के लिए भाग गए हैं। अधिकांश अपने रिश्तेदारों के यहाँ छुपे हुए है। इस्लामी भीड़ के हमले से बांग्लादेश पुलिस का मुख्यालय भी अछूता नहीं रहा है। इसे भी हमलवारों ने तोड़फोड़ दिया है। इस्लामी कट्टरपंथी पुलिस से बदला लेना चाहते हैं क्योंकि शेख हसीना के राज के दौरान पुलिस ने उनके दंगे रोकने की कोशिश की थी। ढाका के जत्राबाड़ी स्टेशन को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया जबकि मीरपुर से हथियार लूट लिए गए। कई जगह थानों के बाहर पुलिस वालों की लाशें मिली हैं।

पुलिस के साथ झड़प में 31 की मौत

ढाका के सवर इलाके में पुलिस के साथ झड़प में 31 लोग मारे गए हैं। यहाँ एक पिकप में जा रहे दो लोगों को जला कर मार दिया गया, यह संभवतः पुलिसकर्मी थे। इस हिंसा के दौरान कई आम लोगों के गोलीबारी से मौत होने की बात भी सामने आई है। सिलहट में भी तीन पुलिसकर्मियों को मार दिया गया है। बताया गया कि शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद भी लगभग 100 मौतें हुई हैं। पुलिस के अलावा आम लोगों को भी इस्लामी कट्टरपंथी मार रहे हैं। ढाका में ही दो लोगों को मर कर उनकी लाश लटका दी गई।

पुलिस के मुखिया को भी हटाया

बांग्लादेश में झड़प और पुलिस के आवामी लीग सरकार के लिए काम करने के आरोपों के बीच पुलिस मुखिया IGP चौधरी अब्दुल्लाह अल ममून को हटा दिया गया है। वह लगातार कई साल से इस पद पर बने हुए थे। उनकी जगह ट्रैफिक के मुखिया मैनुल इस्लाम को अब IGP पुलिस बनाया गया है। उनकी नियुक्ति वर्तमान में सत्ता संभाल रही सेना और अंतरिम सरकार ने की है। पुराने मुखिया को इसीलिए हटाया गया है क्योंकि उनकी नियुक्ति हसीना सरकार में हुई थी।

हिंसा करने वाले 2400 जेल से छूटे

बांग्लादेश में हसीना सरकार गिरने के बाद जमात-ए-इस्लामी और BNP के कट्टर इस्लामी नेताओं समेत 2400 लोगों को जेल से रिहा कर दिया गया है। इन लोगों को जून-जुलाई माह में बांग्लादेश में हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन सभी को हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ जैसे 178 मामलों में गिरफ्तार किया गया था। इनमें से कई पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोपित भी थे। जिन लोगों को छोड़ा गया है, उनमें जमात के कई बड़े नेता हैं।

देश में जरूरी सेवाएँ ध्वस्त

बांग्लादेश में जारी हिंसा और तोड़फोड़ के कारण अधिकांश जरूरी सेवाएँ ध्वस्त हो चुकी हैं। सबसे बुरा प्रभाव बैकिंग सेवाओं पर पड़ा है। बैंक और ATM में पैसा नहीं मिल रहा है। ATM में भी इसलिए पैसे नहीं डाले जा रहे क्योंकि लगातार लूटपाट की घटनाएँ हो रही हैं। जो बैंक खुल भी रहे हैं उनमें काम नहीं हो पा रहा। बैंकों के अलावा अधिकांश दुकानें भी बंद हैं। इसके कारण आम जनता को खाने-पीने के सामान को लेकर भी दिक्कत हो रही है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में जुलाई महीने से ही आरक्षण खत्म करने की माँग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इस प्रदर्शन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाइजैक कर लिया और इसके बाद भारी हिंसा हुई। यह हिंसा अगस्त में और बढ़ गई और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार (5 अगस्त, 2024) को ढाका छोड़ कर भारत आ गईं। वर्तमान में वह भारत में हैं।

ट्रंप को मारने आया था पाकिस्तानी, ईरान ने दी थी ट्रेनिंग: US के कई बड़े नेता थे निशाने पर, हुआ गिरफ्तार

अमेरिका के न्याय विभाग ने पिछले महीने एक पाकिस्तानी को गिरफ्तारी किया था। पाकिस्तानी का नाम आसिफ मर्चेंट है। उसके ऊपर आरोप है कि उसने ईरान के साथ मिलकर अमेरिका से जुड़े कई नेताओं की हत्या की साजिश रची।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ मर्चेंट को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए अमेरिका भेजा गया था। वह अमेरिका जाने से पहले लंबे वक्त तक ईरान में रहा। बाद में इसी साल अप्रैल में उसे पाकिस्तान से अमेरिका भेजा गया।

बताया जा रहा है कि 46 साल के आसिफ मर्चेंट ने अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए दो लोगों को ढूँढकर 5000 डॉलर का भुगतान भी किया था। हालाँकि बाद में पता चला कि वो दो लोग कोई और नहीं बल्कि एफबीआई के सीक्रेट एजेंट थे।

उन्होंने आसिफ मर्चेट की सूचना पुलिस को दी और फिर उसे हिरासत में लिया गया। 16 जुलाई को अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया। आसिफ मर्चेंट की गिरफ्तारी को लेकर FBI के डायरेक्टर क्रिस्टोफर ने कहा मर्चेंट एक खतरनाक हत्या की साजिश रच रहा था, जिसे नाकाम कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि मर्चेंट का ईरान से सीधा कनेक्शन है। उसे ईरान ने ही अमेरिकी नेताओं की हत्या करने के लिए भेजा था। पूछताछ में उसने अमेरिका से अपने कनेक्शन पर कहा कि उसकी दो बीवियाँ हैं एक पाकिस्तान में और दूसरी ईरान में। दोनों जगह उसके बच्चे हैं इसलिए वो आता जाता है।

हालाँकि मीडिया रिपोर्टों में जो अदालती दस्तावेज का हवाला देते हुए जानकारी दी गई है उसमें कहा गया है कि साजिश में कुछ निश्चित घरों से यूएसबी ड्राइव व डॉक्यूमेंट्स को चुराना, नेताओं की हत्या करना, प्रदर्शन करना आदि शामिल था।

उसने इन सभी करतूतों को अंजाम देने के लिए कोड नेम बनाए थे। जैसे-  विरोध प्रदर्शन के लिए “टी-शर्ट”, दस्तावेजों की चोरी के लिए “फलालैन शर्ट”, हत्या के लिए “ऊन जैकेट” और उनकी बैठकों के लिए “यार्न-डाई।”

अदालत में पेश किए गए दस्तावेज में भले ही किसी अकेले नेता की हत्या की साजिश का नाम नहीं है लेकिन मीडिया में इसे ट्रंप से जोड़कर बताया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आसिफ को सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए भेजा गया था और जब सुलेमानी को मारा गया था उस समय डोनाल्ड ट्रंप ही अमेरिका के राष्ट्रपति थे। इसलिए इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप का नाम उन नेताओं की लिस्ट में रखकर देखा जा रहा है जो आसिफ के निशाने पर थे।

इसके अलावा ईरान ने पिछले साल भी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को मारने की धमकी दी थी। ईरान के रिवॉल्यूश्नरी गार्ड एयरोस्पेस फोर्स के हेड अमीराली हाजीजादेह ने कहा था, “अल्लाह ने चाहा तो हम ट्रम्प को जरूर मारेंगे। हम उन सभी मिलिट्री कमांडर को मारना चाहते हैं, जो ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या में शामिल थे।”

गौरतलब है कि ईरान द्वारा रची जा रही ट्रंप की हत्या की साजिश पर इसलिए भी इतनी बात हो रही है क्योंकि कुछ समय पहले ही ट्रंप पर एक रैली के दौरान जानलेवा हमला हुआ था। इसके अलावा ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान को लेकर कहा भी था अगर ईरान ने ईरान कभी भी उनकी हत्या करने में कामयाब होता है तो उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका उसे खत्म कर देगा।

24 लोगों को जिंदा जलाया, बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों की बर्बरता: होटल में सामान लूटने वालों की भी मौत, शेख हसीना की पार्टी के नेता का था होटल

बांग्लादेश में जारी हिन्दू विरोधी हिंसा के बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने जशूर शहर में एक होटल में आग लगा दी। इस होटल में आग लगने के कारण 24 लोग जल गए। जिस होटल में आग लगाई गई, वह इस्तीफ़ा देकर भारत आने वाली प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के एक नेता का था।

बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (5 अगस्त, 2024) को जशूर में स्थित जबीर होटल को इस्लामी दंगाइयों ने आग के हवाले किया। यह एक फाइव स्टार होटल था। इसके मालिक आवामी लीग के नेता शाहीन चकलादर हैं। वह जशूर में पार्टी के महासचिव थे। दंगाई इस होटल में घुसे और पेट्रोल डाल कर आग लगाई।

यह घटना शाम 4 बजे के करीब हुई। इस्लामी कट्टरपंथियों ने होटल के निचले हिस्से में घुस कर उत्पात मचाया और लूटपाट भी की। इसके बाद वह एजी लगाकर यहाँ से चले गए। इस होटल में इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। होटल में आग लगने और दम घुटने के कारण 24 लोगों की मौत हुई।

कुछ ऐसे लोग भी होटल के भीतर मारे गए, जो यहाँ लूट मचाने के लिए घुसे थे। वह भी यहाँ फंस गए और जल कर मर गए। जल कर मरने वालों में एक पीड़ित इंडोनेशियाई नागरिक है। इस घटना में 150 से अधिक लोग घायल हुए हैं, उनका इलाज चल रहा है।

राहत बचाव टीमें मौके पर पहुँच कर केवल 25-30 लोगों को बचा पाई। होटल के जलने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें दिखता है कि होटल में ऊपर से नीचे तक आग लगी हुई है और काफी धुआँ उठ रहा है। होटल के अलावा इस इलाके में आवामी लीग का दफ्तर भी जलाया गया।

होटल जलने की घटना से एक भारतीय नागरिक भी बाल बाल बचा। असम के रहने वाले शाहिद और उनके भाई फैजान इसी होटल में रुके हुए थे। उन्हें होटल के मेनेजर ने अंदर ही रुकने की सलाह दी थी क्योंकि बाहर भारी हिंसा जारी थी। शाहिद के भाई फैजान इस दौरान भारत वापसी के लिए टिकट लेने गए थे।

शाहिद ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि वह जब शोर सुन कर बाहर आए तो देखा कि होटल में आग लग चुकी है। वह होटल की तीसरी मजिल पर रुके हुए थे। नीचे की मंजिलों पर आग लगने के कारण उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझा। इसके बाद शाहिद ने छलाँग लगाने का फैसला किया।

ऊँचाई से कूदने के कारण शाहिद के दोनों पाँव टूट गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालाँकि शाहिद ने बांग्लादेश में इलाज ना लेकर एक एम्बुलेंस ली और भारत आ गए। वर्तमान में उनका कोलकाता में इलाज चल रहा है। उन्होंने बांग्लादेश से बाहर आने पर खुद को भाग्यशाली बताया है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में जुलाई महीने से ही आरक्षण खत्म करने की माँग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इस प्रदर्शन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाइजैक कर लिया और इसके बाद भारी हिंसा हुई। यह हिंसा अगस्त में और बढ़ गई और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार (5 अगस्त, 2024) को ढाका छोड़ कर भारत आ गईं। वर्तमान में वह भारत में हैं।

बांग्लादेश में इस्लामी भीड़ ने हिंदू गायक के 140 साल पुराने घर में लगाई आग, 3000 वाद्ययंत्र जलकर खाक: दावा- 200-300 हिंदुओं के घरों और दुकानों में हो चुकी तोड़फोड़

बांग्लादेश में हसीना सरकार के विरोध में शुरू प्रदर्शन अब हिंदू विरोधी हिंसा में तब्दील हो चुका है। जगह-जगह हिंदू मंदिरों और हिंदुओं के घरों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी क्रम में इस्लामी कट्टरपंथियों की एक भीड़ कल बांग्लादेश के मशहूर गायक राहुल आनंद के घर में जा घुसी। यहाँ उन्होंने पहले घर से जमकर लूटपाट की उसके बाद इसे आग के हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है कि भीड़ के घर में घुसने से पहले राहुल अपने पत्नी और बेटे के साथ एक जोड़े कपड़े में कही और चले गए थे जिसकी वजह से वो शारीरिक रूप से तो सुरक्षित हैं लेकिन उनके साथ घटित घटना के कारण मानसिक रूप से तबाह हो गए हैं। सोशल मीडिया के अनुसार राहुल आनंद ने जीवन भर सेकुलर होने का रास्ता अपनाया। अपने मुल्क के मुस्लिमों से प्यार किया। मगर बदले में उन्हें क्या मिला।

राहुल आनंद का घर धानमंडी 32 पर स्थित था। इस्लामी भीड़ ने उनके 140 साल पुराने इस आवास को लूटने के बाद जलाया। इस लूटपाट और आगजनी में उनके 3000 म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स भी बर्बाद हो गए जिनमें से कई को उन्होंने अपने हाथ से बनाया था।

राहुल आनंद गीत बैंट जोलेर गान चलाते हैं। इस बैंड से जुड़े एक पुराने साथी सैफुल जरनल ने मीडिया को बताया, “हमारे प्रिय राहुल दा के 3000 से अधिक संगीत वाद्ययंत्र, जिन्हें उन्होंने वर्षों से प्यार और देखभाल के साथ डिजाइन और बनाया था, नष्ट कर दिए गए हैं और जलाए गए वाद्ययंत्रों और अन्य घरेलू चीजों का अनुमानित मूल्य 10 लाख टका से अधिक है।”

लोग इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर दुख जता रहे हैं। कहा जा रहा है कि बांग्लादेश का यह बहुत बड़ा नुकसान है। यह असहनीय है। बिलकुल गलत है। वो घर नहीं रचनात्मक केंद्र था। गायक ने वहाँ खुद अपने हाथ से उन संगीत वाद्ययंत्रों को बनाया था। भीड़ ने उन वाद्ययंत्रों को जलाया है जिनमें बांग्लादेश की ध्वनि कैद थी।

मालूम हो कि जिन राहुल आनंद के घर को आग में झोंककर बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथी इतना नाज कर रहे हैं वो घर लंबे समय तक बांग्लादेश का नाम विदेशों में रौशन करता रहा था। पिछले साल फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो यहाँ आए थे। ये खबर हर मीडिया हाउस में चली भी थी। आज सांंप्रदायिकता की आग में कट्टरपंथियों ने इसे एक हिंदू का घर समझ जला डाला क्योंकि शेख हसीना के इस्तीफे के बाद उनकी नजर सिर्फ हिंदुओं के घर-मकान-दुकान लूटने पर ही है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की स्थिति पर हाल में बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिस्चियन यूनिटी काउंसिल (BHBCUC) ने कहा कि कई घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बनाया गया है। BHBCUC का दावा है कि करीब 200-300 हिंदू घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की जा चुकी है। महासचिव राणा दासगुप्ता ने रॉयटर्स को बताया था कि बांग्लादेश में करीब 15-20 हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुँचाया गया था और समुदाय के करीब 40 लोग घायल हैं।

बांग्लादेश से भारतीय सीमा पर पहुँचा शरणार्थियों का पहला जत्था, सभी गरीब और पिछड़े समूह के: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भी इस्लामी क्रूरता के खिलाफ उठाई आवाज़

बांग्लादेश में सत्ता विरोधी आंदोलन को शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और मुल्क छोड़ने के साथ ही खत्म हो जाना चाहिए था, लेकिन इसने आखिरकार हिन्दू विरोधी दंगों का रूप ले लिया। हिन्दू पार्षद और पत्रकार की हत्या की गई, ISKCON और काली मंदिरों पर हमले किए गए और हिन्दुओं को वहाँ से भगाया जाने लगा। इसके साथ ही प्रताड़ित हिन्दू शरणार्थियों का पहला जत्था भारतीय सीमा पर पहुँच गया है। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भी इस वीडियो पर ‘!!’ लिख कर दुःख जताया है।

पोलैंड के मीडिया संस्थान ‘Visegrád 24’ ने इसका वीडियो शेयर किया, जिस पर ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने रिप्लाई दिया। ‘Visegrád 24’ ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “बांग्लादेश से पहले हिंदू शरणार्थी उत्तरी बांग्लादेश में भारत की सीमा पर पहुँचे। इस्लामवादियों द्वारा हिंसा से प्रभावित हज़ारों हिंदू अपने गाँवों से बाहर निकाले जाने के बाद भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जो बांग्लादेशी हिंदुओं ने 1971 के बाद से पहले कभी नहीं देखा था।” ISKCON के प्रवक्ता राधारमण दास ने भी हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने हेतु एलन मस्क को धन्यवाद दिया है।

उन्होंने लिखा, “बांग्लादेशी हिंदू, बौद्ध और ईसाई अल्पसंख्यकों की चीखें सुनने के लिए एलन मस्क का बहुत-बहुत धन्यवाद। कृपया उनकी चीखें सुनें ताकि बहरी दुनिया अपनी नींद से जाग सके।” इस दौरान लोगों ने रिप्लाई में एलन मस्क को ये जानकारी भी दी कि भारत में बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वाले ‘X’ हैंडलों को प्रतिबंधित किया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि बांग्लादेश से भारतीय सीमा पर शरण के लिए पहुँचे हिन्दुओं में अधिकतर ग़रीब हैं, पिछड़े हैं।

उधर बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने ‘एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट्स मूवमेंट’ के प्रतिनिधियों के साथ ‘बंग भवन’ में मुलाकात की। अंतरिम सरकार के गठन को लेकर छात्र नेताओं ने राष्ट्रपति के साथ चर्चा की। 16 जुलाई से लेकर अब तक 500 लोगों के मारे जाने की खबर है। बांग्लादेश में 15 साल की तानाशाही का अंत बता कर इस आंदोलन को सफल बताया जा रहा है। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार हो सकते हैं। वो अमेरिका के करीबी हैं। इस आंदोलन में भी अमेरिका का हाथ बताया जाता है।

जिन्होंने पाकिस्तान की क्रूरता से बचा कर अलग मुल्क दिया, उनके नाम पर बने कल्चरल सेंटर को फूँक दिया: बांग्लादेश में बचा इंदिरा गाँधी का सिर्फ G, A और N

जब पूर्वी पाकिस्तान को मुक्त कराया गया और बांग्लादेश नामक एक अलग मुल्क का गठन हुआ, तब भारत में इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री थीं। उनके द्वारा सैन्य मदद का निर्णय लिए जाने के कारण ही शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में चले मुक्ति आंदोलन को विजय प्राप्त हुई। बांग्लादेश को अलग मुल्क का दर्जा दिलाने के लिए भी भारत ने प्रयास किया। आज उसी बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इंदिरा गाँधी के नाम पर बने ‘कल्चरल सेंटर’ को जला दिया गया है। ‘इंदिरा गाँधी कल्चरल सेंटर’ को आग के हवाले कर दिया गया है।

फिर भी भारत में पत्रकारों का एक गिरोह पड़ोसी मुल्क में चल रही इस अराजकता को ‘लोकतंत्र की जीत’ और ‘युवा शक्ति की विजय’ बताते नहीं थक रहा। इंदिरा गाँधी के नाम का सिर्फ G, N और A ही दिख रहा है अब कल्चरल सेंटर के ऊपर। कहीं टूटी हुई खिड़कियाँ दिख रही हैं तो कहीं मोड़ डाले गए रॉड्स। भीतर कचरों का ढेर लगा हुआ है। कुछ फाइलें जल कर राख हो गई हैं। वहाँ एक गिफ्ट शॉप भी था, उसे भी आग के हवाले कर दिया गया। आर्काइव सेक्शन में कई टेप पड़े हुए थे, वो भी जला दिए गए। ‘इंदिरा गाँधी कल्चरल सेंटर’ का उद्घाटन 2010 में हुआ था।

यहाँ सेमिनार और वर्कशॉप के अलावा भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए योग क्लास और संगीत व कत्थक-मणिपुरी जैसी नृत्य विधाओं की शिक्षा भी दी जाती थी। इसे ‘इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन्स’ द्वारा संचालित किया जाता था। बता दें कि इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में ही पाकिस्तान को 2 हिस्सों में विभाजित कर वहाँ की 60% जनसंख्या को बांग्लादेश दिया गया था। तब पाकिस्तान के जनरल टिक्का खान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार हो रहा था, इंदिरा गाँधी ने जर्मनी, फ़्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम और अमेरिका का दौरा कर इस क्रूरता के बारे में वहाँ के नेताओं को बताया।

इंदिरा गाँधी ने कोलकाता से ‘आवामी लीग’ को निर्वासन वाला सरकार चलाने की अनुमति दी, हालाँकि तब इसे आधिकारिक दर्जा नहीं दिया गया था। दिसंबर 1971 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया। युद्ध शुरू होने के 3 दिन बाद ही इंदिरा गाँधी ने बांग्लादेश को अलग राष्ट्र होने की मान्यता दे दी। युद्ध शुरू होने के 13 दिन बाद कमांडर जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी ने ढाका सरेंडर कर दिया। जिन इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में ये सब हुआ, आज बांग्लादेश उन्हीं नेता के नाम पर बने कल्चरल सेंटर को जला रहे हैं।

‘केंद्र सरकार को आपके कंटेंट से आपत्ति है’: भारत में बैन किए जा रहे बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वाले हैंडल, पूछा – इस्लामी क्रूरता के खिलाफ आवाज़ उठाना गलत?

बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोध में हुए प्रदर्शनों की आड़ में हिन्दुओं पर भी जम कर हमले किए जा रहे हैं। एक हिन्दू पार्षद और एक हिन्दू पत्रकार को मार डाला गया है। सबसे बड़ी बात कि सोशल मीडिया पर जो लोग इन पीड़ित हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें भारत में प्रतिबंधित किया जा रहा है। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर ‘Voice of Bangladeshi Hindus’ ने जानकारी दी है कि ‘VoiceOfHindu71’ और ‘Hindu8789’ यूजरनेम वाले 2 हैंडलों को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

‘वॉइस ऑफ बांग्लादेशी हिंदूज’ ने बताया कि ‘Hindu8789’ नामक हैंडल को उसके द्वारा ही चलाया जा रहा था। इस हैंडल से बांग्लादेश में मंदिरों पर लगातार हो रहे हमलों की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे थे। साथ ही उसने वो लीगल नोटिस भी शेयर किया है, जो उसे ‘X’ ने भेजा है। ‘VoiceOfHindu71’ हैंडल को बताया गया है कि भारत सरकार की तरफ से उसके हैंडल को हटाए जाने के लिए नोटिस आया है। जिस कंटेंट पर भारत सरकार ने आपत्ति जताई उसे भारत में बैन कर दिया गया है।

अब हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वाले पूछ रहे हैं कि आखिर भारत सरकार हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने से क्यों रोक रही है। बांग्लादेशी हिन्दुओं की आवाज़ बनने वाले हैंडल ने पूछा है कि जब उसका भारतीय मुस्लिमों, बुद्धिजीवियों और वामपंथियों से कोई लेना-देना नहीं है, वो बस अपने समुदाय के साथ बांग्लादेश में हो रही क्रूरता के लिए आवाज़ उठा रहा है, फिर भारत सरकार को क्यों समस्या है? वो भी तब जब भारत में भाजपा की सरकार है जो हिन्दू हितैषी पार्टी है।

सोशल मीडिया पर जारी की गई तस्वीरों में बताया गया है कि बांग्लादेश में एक डॉक्टर के घर में इस्लामी भीड़ ने आग लगा दी। इसके अलावा हिन्दुओं की दुकानों पर भी हमले किए जा रहे हैं। एक हिन्दू डॉक्टर के मेडिकल शॉप पर हमला किया गया। जबकि मोहम्मद ज़ुबैर जैसे भारत के इस्लामी कट्टरपंथी तस्वीरों के जरिए ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि बांग्लादेश के मुस्लिम मंदिरों को बचा रहे हैं। हालाँकि, वो ये नहीं बता रहे कि किससे।

मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान देना चाहते हैं बांग्लादेश के प्रदर्शनकारी , अमेरिका के करीबी नोबेल विजेता अभी हैं पेरिस में: उधर ‘विदेशी हाथ’ पर बोले S जयशंकर

बांग्लादेश में अराजकता के बीच संसद भंग कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को सत्ता की कमान सौंपी जाए। प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का कहना है कि वो फ़ौज के नेतृत्व वाले शासन को पसंद नहीं करेंगे। संसद भंग किए जाने के बाद इस्लामी मुल्क में फिर से चुनाव हो सकते हैं। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा और उनके भारत में शरण लेने के बाद बांग्लादेश में सड़कों पर प्रदर्शनकारी जश्न मनाते हुए निकले। बताया जा रहा है कि अब तक लगभग 500 लोग ताज़ा हिंसा में मारे जा चुके हैं।

प्रदर्शन के संयोजकों में से एक नाहिद इस्लाम ने कहा कि छात्र किसी भी सूरत में फौज के नेतृत्व वाले या फिर फौज द्वारा बनाई गई सरकार का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन से अपील की कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनिस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई जाए। मुहम्मद यूनुस माइक्रोलेंडिंग का कॉन्सेप्ट लाने के लिए लोकप्रिय हैं, जिससे बांग्लादेश में कई लोग गरीबी से बाहर निकले। छात्र नेताओं ने उनसे बात भी की है, 84 वर्षीय अर्थशास्त्री अंतरिम सरकार के नेतृत्व के लिए राजी हैं। वो फ़िलहाल पेरिस में हैं।

वहीं से उन्होंने बयान जारी किया कि हमारे ऊपर जो शैतान बैठा हुआ था वो अब चला गया है, अब हम सब आज़ाद हैं। उन्होंने इसे एक ज्वालामुखी विस्फोट बताते हुए कहा कि युवा शक्ति के रूप में एक नई ताकत का जन्म हुआ है। बता दें कि शेख हसीना की सरकार में मुहम्मद यूनुस पर धोखाधड़ी से लेकर भ्रष्टाचार तक के कई मामले चल रहे थे। उन्होंने इन मुकदमों को फर्जी बताते हुए उम्मीद जताई कि अब इन्हें वापस लिया जाएगा। फौज ने सरकार का साथ देना बंद कर दिया था, जिसके बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा।

बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद को ढाका एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया है, वो मुल्क छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। उधर बांग्लादेश की अराजकता में विदेशी हाथ होने के राहुल गाँधी के सवाल पर केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर ने कहा कि एक पाकिस्तानी राजनयिक ने अपने सोशल मीडिया हैंडल की फीचर इमेज बांग्लादेश के आंदोलन के समर्थन में बदली थी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश की सेना से भी संपर्क में है, साथ ही शेख हसीना से बातचीत से पहले उन्हें समय दिया जा रहा है क्योंकि वो अभी भी परेशान हैं।

मुहम्मद यूनुस को अमेरिका का करीबी माना जाता है। अमेरिका के व्हार्टन बिजनेस स्कूल ने उन्हें दुनिया की शीर्ष 25 बिजनेस हस्तियों में रखा था, वहीं Time ने मैगजीन ने उन्हें शीर्ष 12 बिजनेस लीडर्स में रखा था। अमेरिका के ‘मिडल टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी’ में वो पढ़ा चुके हैं। उन्होंने वाशिंगटन में एक बार हिलेरी क्लिंटन सहित कई वैश्विक नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें गरीबी से लड़ने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। उस दौरान शेख हसीना ने उनकी तारीफ़ की थी। वो बांग्लादेश के ‘ग्रामीण बैंक’ के संस्थापक भी हैं।