Home Blog Page 754

MP के मदरसे में बुखार से तड़पती बच्चियों को फर्श पर सुलाया, राजस्थान के मदरसे में दलित नाबालिग को बना दिया मुस्लिम: बिफरा NCPCR, हिन्दू संगठन आक्रोशित

मध्य प्रदेश और राजस्थान के 2 अलग-अलग मदरसों में गैर-कानूनी कृत्यों का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के रतलाम में एक मदरसा अवैध तौर पर बिना मान्यता के चलता पाया गया। इस मदरसे में बच्चियाँ फर्श पर सोती मिलीं। बच्चियों की देखरेख के लिए कोई महिला कर्मचारी भी नहीं थी। वहीं राजस्थान के कोटा में एक नाबालिग दलित बच्ची को इस्लाम कबूल करवाने का आरोप लगा है। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर आंदोलन का एलान किया है।

अवैध मदरसा, जमीन पर सोती बच्चियाँ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला मध्य प्रदेश के रतलाम जिले का है। यहाँ के खरचौंद रोड पर दारुल उलूम आयशा सिद्धीका लिलबिनात नाम का एक मदरसा है। शनिवार (3 अगस्त, 2024) को यहाँ राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम पहुँची। टीम का नेतृत्व आयोग की सदस्य निवेदिता शर्मा कर रहीं थीं। टीम को यहाँ 30 से 35 नाबालिग बच्चियाँ फर्श पर सोती मिलीं। इनमें से 5 साल की एक बच्ची तेज बुखार से पीड़ित थी। बच्चियों की देखरेख के लिए कोई कोई महिला स्टाफ भी मदरसे में मौजूद नहीं थी।

राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने पाया कि मदरसे में मौजूद बच्चियाँ मध्य प्रदेश के कई जिलों से मज़हबी शिक्षा देने के नाम पर लाई गईं थीं। मदरसे के कागजात भी सरकारी तौर पर पूरे नहीं थे। साफ़-सफाई भी ठीक से नहीं थी और बच्चियों के कमरे में CCTV कैमरे लगाए गए थे। यह हरकत बाल संरक्षण आयोग ने निजता का हनन बताया। यह मदरसा मदरसा महाराष्ट्र के ‘जामिया इस्‍लामिया इशाअतुल उलूम अक्‍कलकुआ’ से अटैच पाया गया। कुल छात्राओं की संख्या लगभग 100 बताई गई।

मदरसे में पढ़ने वाली कई छात्राओं के नाम किसी अन्य स्कूल में दर्ज थे। कई कमरों में अन्धेरा था। कुछ बच्चियाँ राजस्थान से भी पाई गईं। मदरसा संचालक अपनी आय और व्यय का भी लेखा-जोखा नहीं दे पाया। कई बच्चियाँ डरी-सहमी भी पाई गईं। निवेदिता शर्मा ने मदरसे के संचालकों को इन मुद्दों को लेकर फटकार लगाई। साथ ही उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो अवैध मदरसे व उसके संचालकों पर कार्रवाई करें। फिलहाल स्थानीय प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुट गया है।

दलित बच्ची को कबूल करवाया इस्लाम

मदरसे से जुड़ा दूसरा मामला राजस्थान के कोटा जिले का है। रिपोर्ट्स के अनुसार यहाँ अनंतपुरा क्षेत्र में एक मदरसा संचालित है। हिन्दू संगठनों के मुताबिक इस मदरसे का संचालित मूल रूप से दारुल उलूम करता है। आरोप है कि इस मदरसे के अंदर पढ़ने वाली एक नाबालिग दलित लड़की को इस्लाम कबूल करवा दिया गया है। मुस्लिम बनाने के बाद पीड़िता का नया नाम शकीना रख दिया गया है। विश्व हिन्दू परिषद ने राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को ज्ञापन दे कर इस मामले की जाँच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है।

‘ज़रूरतमंदों को मेरे अंग दान कर देना’: दिल्ली में रेंट से तंग आकर UPSC की तैयारी कर ही छात्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा – PG वाले लूट रहे

राजधानी दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में UPSC की तैयारी कर रही एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। अभी ‘Rau’s IAS’ नामक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में 3 छात्रों की पानी में डूब कर हुई मौत का मामला थमा भी नहीं था कि ये घटना सामने आ गई है। उक्त छात्रा अवसाद में थी और दबाव झेलने की स्थिति में नहीं थी। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि सरकारी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को खत्म किया जाए। वो हाउसिंग रेंट के कारण भी परेशान थी। उसने सरकार से रोजगार उत्पन्न करने की गुहार भी मरने से पहले लिखे नोट में लगाई है।

अंजलि ने अपनी आत्महत्या वाले पत्र में लिखा है कि वो जीवन की समस्याओं से नहीं जूझ पा रही हैं, साथ ही उसके जीवन में शांति नहीं है। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि ये घटना 3 छात्रों की मौत से पहले की है, लेकिन प्रकाश में अब आई है, अब इस पर चाचा हो रही है। रविवार (21 जुलाई, 2024) की ये घटना है। अंजलि एक कमरे में रहने के लिए 15,000 रुपए प्रति महीना का किराया देती थी, जिसे सीधे बढ़ा कर 18,000 रुपए कर दिया गया था।

उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, “माँ और पापा, मुझे माफ़ कर दो। मैं अपने जीवन से सचमुच तंग आ चुकी हूँ। केवल समस्याएँ हैं, शांति नहीं है। मुझे शांति चाहिए। मैंने इस तथाकथित अवसाद से निकलने की काफी कोशिश की, लेकिन मेरे से नहीं हो पाया। मैंने एक डॉक्टर को भी दिखाया, लेकिन मेरा मानसिक स्वास्थ्य नहीं सुधरा। पहले अटेम्प्ट में ही UPSC क्लियर करना मेरा लक्ष्य था, अब मैं बहुत अस्थिर हो रही हूँ। मुझे पता है मेरी मौत की खबर ब्रेकिंग न्यूज़ बनेगी।”

अंजलि महाराष्ट्र के अकोला की रहने वाली थी। उसने लिखा कि PG वाले छात्र-छात्राओं से पैसे लूट रहे हैं। अंजलि की माँ का कहना है कि उसकी पढ़ाई में लग रहे पैसों के कारण वो चिंता में थी, जबकि परिवार उसे कहता था कि वो इसकी चिंता न करे। अंजलि ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, “मैं जानती हूँ आत्महत्या किसी समस्या का नहीं नहीं।” अपनी एक दोस्त के साथ चैट के दौरान भी उसने रेंट वाली समस्या का जिक्र किया था। अंजलि ने 3 बार UPSC की परीक्षा दी थी, लेकिन उसका चयन नहीं हो पाया था।

एग्रीकल्चर में स्नातक करने वाली अंजलि पढ़ाई में अच्छी थी। 21 जुलाई को उसके चाचा का जन्मदिन था और उसने फोन कॉल कर के शुभकामनाएँ भी दी थीं। अंजलि के पिता एक अधिकारी हैं। चाचा का कहना है कि फोन काल के दौरान सब कुछ सामान्य था। अंजलि के कमरे की एक और चाभी थी, उसके रूममेट्स जब बाजार से वापस आए तो उन्होंने उसे फंदे से लटका हुआ देखा। अंजलि ने अपने सुसाइड नोट में ये भी लिखा है कि उसके अंग ज़रूरतमंदों को दान कर दिए जाएँ।

अखिलेश यादव से मिलाता है हाथ, जज के साथ खाता है केक… कौन है राशिद खान जो अयोध्या गैंगरेप वाले मोईद को बचा रहा, अवधेश प्रसाद को जिताने के लिए की थी मेहनत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में सोमवार (29 जुलाई, 2024) को OBC समुदाय की एक नाबालिग बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया था। इस केस में समाजवादी पार्टी का नेता मोईद खान और उसका नौकर राजू खान नामजद हुआ था। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। इस बीच आरोप है कि पीड़िता को धमकी दे कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। इस नए आरोप में समाजवादी पार्टी के ही 2 अन्य नेताओं पर शुक्रवार (2 अगस्त, 2024) को नई FIR दर्ज दर्ज हुई है। इन आरोपितों ने सपा नेता राशिद खान भी शामिल है जो इस समय भदरसा से नगर पालिका चेयरमैन है।

राशिद खान न सिर्फ सपा के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद बल्कि सुप्रीमों अखिलेश यादव का भी काफी करीबी माना जाता है। ऑपइंडिया ने राशिद खान के सोशल हैंडलों की पड़ताल की। राशिद खान के फेसबुक पर शेयर की गई तस्वीरों से अनुमान लगाया जा सकता है कि उसकी समाजवादी पार्टी में काफी ऊँचे स्तर पर पहुँच है। राशिद खान सीधे अखिलेश यादव से हाथ मिलाता है। अखिलेश यादव के साथ राशिद की धर्मेंद्र यादव व अन्य सपा नेताओं के साथ कई तस्वीरें हैं।

मोईद खान को बताया गणमान्य व्यक्ति, सपा में भर्ती पर जताई थी ख़ुशी

नाबालिग बच्ची से रेप के आरोपित मोईद खान को मोहम्मद राशिद ने 1 अगस्त, 2023 को समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने की सार्वजनिक तौर पर शुभकामनाएँ दी थीं। उसने समाजवादी पार्टी में मोईद खान को भर्ती करने पर जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव को शुक्रिया भी कहा था।

राशिद खान रेप के आरोपित मोईद खान को गणमान्य नागरिक मानता है। 20 जून, 2023 को दोनों एक साथ किसी कार्यक्रम में पारिवारिक तौर पर शिरकत किए थे। इस दौरान उसने मोईद को गणमान्य नागरिक कह कर सम्बोधित किया है।

अखिलेश यादव से मिलाता है हाथ

समाजवादी पार्टी के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद से भी राशिद खान की काफी नजदीकियाँ बताई जा रहीं हैं। कई तस्वीरों में राशिद खान और अवधेश प्रसाद एक साथ दिखाई दे रहे हैं। 31 जुलाई, 2024 को राशिद खान ने अपनी, अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद की सामूहिक तस्वीर शेयर की है। पीछे मुलायम सिंह यादव की मूर्ति बनी हुई है। इस पोस्ट में उसने अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद को जन्मदिन की बधाई दी है। राशिद खान सपा सांसद अवधेश प्रसाद को दलित आइकॉन बताता है।

बकौल मोहम्मद राशिद खान उसकी अखिलेश यादव से मुलाक़ात 16 जुलाई, 2024 को समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय पर हुई थी। तब राशिद खान अयोध्या से लखनऊ समाजवादी पार्टी के कुछ अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गया था।

गैंगरेप पीड़िता OBC बच्ची को धमकी देने के मामले में आरोपित राशिद खान का रुतबा समाजवादी पार्टी ने इतना ऊँचा है कि वो मंचों पर अखिलेश यादव से सीधे मिल कर हाथ मिलाते हैं। 9 जून, 2024 को खुद राशिद खान ने इस आशय की एक पोस्ट शेयर की है।

अवधेश प्रसाद को जिताने के लिए लगाई थी जी-जान

राशिद खान ने 2024 लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अवधेश प्रसाद को जिताने के लिए जीतोड़ कोशिश की थी। उसने कई जनसभाओं का न सिर्फ आयोजन किया था बल्कि उन्हें सम्बोधित भी किया था। इस दौरान कई मौकों पर राशिद खान और अवधेश प्रसाद एक साथ माला आदि पहनाते देखे गए थे।

मुख़्तार अंसारी के जनाजे में भी शरीक

राशिद खान माफिया मुख़्तार अंसारी के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ था। अप्रैल 2024 में वह अपने दल-बल के साथ मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गया था। इस दौरान उसने कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ा था। उसकी मुलाकात अफ़ज़ाल अंसारी आदि लोगों से भी हुई थी।

जिला जज के जन्मदिन में भी शामिल

मोहम्मद राशिद खान ने 25 फरवरी 2024 को कुछ तस्वीरें सामूहिक तौर पर शेयर की हैं। इन तस्वीरों में उसका दावा है कि उसने चित्रकूट के जिला जज राकेश यादव का किसी बड़े होटल में केक काट कर जन्मदिन मनाया था। इस मौके पर सभी ने एक दूसरे को केक काट कर भी खिलाया था।

धर्मेंद्र यादव के साथ भी मंचों पर

नाबालिग बच्ची को धमकाने के आरोप में जिस मोहम्मद राशिद खान पर FIR दर्ज हुई है वो समाजवादी पार्टी में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले धर्मेंद्र यादव के साथ भी अक्सर मंचों पर देखा गया है। एक मंच पर राशिद खान धर्मेंद्र यादव और अवधेश प्रसाद के बीच में खड़ा काफी प्रसन्न मुद्रा में दिख रहा है। यह तस्वीर फरवरी 2016 की है।

बताते चलें कि इस से पहले बजरंग दल ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी का नेता मोहम्मद राशिद खान साल 2012 में हुए भदरसा दंगों में भी संलिप्त रहा था। उसकी कई पुलिस अधिकारियों के साथ भी तस्वीरें मौजूद हैं। वह जनसुनवाई में पुलिसकर्मियों के बगल बैठ कर सुनवाई भी करता देखा जा सकता है। पीड़िता को सुलह के लिए धमकाने में मोहम्मद राशिद के अलावा जय सिंह राणा और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति को आरोपित बनाया गया है। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

‘BJP हिंदू पार्टी है, उससे जुड़े व्यक्ति के जनाजे में कोई मौलवी नमाज पढ़ाने नहीं जाएगा’: शिकायत के बाद इमाम राशिद सहित सपा से जुड़े लोगों पर भी FIR

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक मस्जिद के मौलवी ने एक मुस्लिम की मौत के बाद उसके जनाजे की नमाज़ पढ़वाने से इनकार कर दिया, क्योंकि मृतक भाजपा समर्थक था। मामले की शिकायत DM से की गई तो पुलिस ने शनिवार (3 अगस्त 2024) को 5 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया। उधर, मौलवी ने खुद को बेकसूर बताते हुए इसे अपने खिलाफ एक साजिश बता दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुरादाबाद जिले के कुंदरकी थाना क्षेत्र की है। यहाँ के कायस्थान मोहल्ले के रहने वाले दिलनवाज़ ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में दिलनवाज़ ने बताया कि उनके अब्बा अलीदाद खाँ काफी समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। 23 जुलाई को हार्ट अटैक से उनका इंतकाल हो गया।

दिलवाज ने कहा कि पास में ही स्थित नवाज़ खान मस्जिद में इमाम मोहम्मद राशिद को जनाजे की नमाज़ पढ़वाने के लिए बुलवाया गया तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया। आरोप है कि इमाम राशिद ने मृतक के बेटे से कहा, “तुम्हारे अब्बू तो बीजेपी को वोट देते थे। बीजेपी हिंदू पार्टी है। हम और हमारे साथ का कोई भी इमाम या मौलवी नमाज़ पढ़ने नहीं जाएगा।”

पीड़ितों ने मौलवी के साथ इस करतूत में समाजवादी पार्टी के नेता असलम, शमीम खान, शराफत और मतीन को भी नामजद किया है। आखिरकार इमाम द्वारा इनकार के बाद गाँव के एक अन्य मौलवी को बुलवाया गया और उनसे जनाज़े की नमाज़ पढ़वाई गई। शनिवार को पुलिस ने इन सभी लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मुरादाबाद के जिलाधिकारी IAS अनुज सिंह और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण IPS संदीप मीणा ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। इन्होंने बताया कि जाँच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, खुद पर लगे आरोपों को मस्जिद के इमाम मोहम्मद राशिद ने निराधार बताया है।

मौलवी ने मस्जिद की CCTV फुटेज में अपनी बेगुनाही का सबूत होने का दावा करते हुए खुद को फँसाने की साजिश करार दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता नाज़िम सैफी ने भी मृतक के बेटे के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने आरोपित इमाम को अपने सिर का ताज बताते हुए लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित कहा है।

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पौराणिक मंदिर में बनाई अश्लील वीडियो, दिलशाद और अजीम पर यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR: बाइकों से शहर में भरता है कुलाँचे

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में हिन्दुओं के एक पौराणिक मंदिर के अंदर अश्लील रील बनाने का मामला सामने आया है। रील बनाने का आरोप अमरोहा के 2 मुस्लिम यूट्यूबरों- दिलशाद और अजीम पर लगा है। इस घटना से हिन्दू समाज में नाराजगी फ़ैल गई है। पुलिस ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को FIR दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मामला अमरोहा के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ शुक्रवार को पुलिस सब इंस्पेक्टर परशुराम ने अपने ही थाने में एक तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने बताया कि गुरुवार (1 अगस्त) से पब्लिक एप पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक मंदिर जैसे दिखाई देने वाले एक भवन में 2 युवक दिखाई दे रहे हैं। इसमें से एक युवक ने महिलाओं के कपड़े पहन रखे हैं।

शिकायतकर्ता द्वारा जब इस वीडियो की जाँच की गई तो वीडियो बनाने वाली जगह अमरोहा शहर के पौराणिक वासुदेव मंदिर के तौर पर चिन्हित हुई। पुलिस का मानना है कि दोनों आरोपितों ने धर्मस्थल पर अश्लील वीडियो बनाए हैं। साथ ही इसे इंटरनेट पर वायरल भी किया जा रहा है। आगे की जाँच में पुलिस को पता चला कि वीडियो में दिख रहे एक आरोपित का नाम दिलशाद है।

दिलशाद के अब्बा का नाम कमरुद्दीन है। वहीं दूसरे आरोपित का नाम अजीम है। अजीम और दिलशाद, दोनों ही अमरोहा जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं। पुलिस ने धर्मस्थल पर इन दोनों द्वारा दिखाई गई अश्लीलता को अपराध की श्रेणी में माना है। इसके बाद परशुराम की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार (2 अगस्त) को दिलशाद और अजीम को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली।

दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 के साथ आईटी एक्ट की धारा 67 लगाई गई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपितों के खिलाफ जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरोपितों द्वारा अश्लील वीडियो मंदिर के परिसर में बनाया गया है। दिलशाद लड़की बने अजीम से मंदिर में घुमाने की भी बात करता सुना जा सकता है।

फर्राटे मारता है बिना नंबर की बाइक से

अश्लीलता फैलाने का मुख्य आरोपित दिलशाद सोशल मीडिया पर जॉर्डन DS नाम से हैंडल चलाता है। वह फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर ख़ासा सक्रिय रहता है। दिलशाद ने कई हिन्दू लड़कियों के साथ भी रील्स बनाई हैं। वह स्पोर्ट्स बाइक से अमरोहा में फर्राटे मारते हुए सोशल मीडिया पर रील शेयर करता है। रील्स में इस्तेमाल बाइक पर रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं दिखता है।

दिलशाद की रील्स में लाल रंग की एक स्पोर्ट्स बाइक और सफेद रंग की दूसरी बाइक अक्सर दिखाई पड़ती है। उसने रील्स बनाने के लिए अमरोहा में अपना खुद का स्टूडियों बना रखा है। यहीं से वो गानों के साथ अपनी बनाई गई रील्स की एडिटिंग करता है। फिलहाल इस मामले में नेटिजंस ने भी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

अमरोहा में हिन्दुओं का सबसे पवित्र धर्मस्थल है वासुदेव मंदिर

जिस मंदिर में दिलशाद और अजीम ने रील के नाम पर फूहड़ता फैलाई है, वह अमरोहा के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर शहर और आसपास के हिन्दुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। इस मंदिर को भगवान कृष्ण के समय का माना जाता है। कहा जाता है कि वासुदेव मंदिर में साक्षात् कृष्ण का वास होता है।

‘श्रीराम के अस्तित्व का कोई सबूत नहीं, रामायण-महाभारत में अच्छी शिक्षा नहीं’: बोले तमिलनाडु के मंत्री, बचाव में DMK नेता ने कहा – हिन्दू प्रथाओं से हमारी लड़ाई

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने का आह्वान किया था। अब राज्य के परिवहन मंत्री SS शिवकुमार ने भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उन्होंने कहा कि न तो इसका कोई इतिहास है और न ही कोई सबूत है कि श्रीराम का कोई अस्तित्व था। सम्राट राजेंद्र चोल की जयंती के अवसर पर उन्होंने ये बात कही। अरियालुर स्थित गंगईकोंडा चोलपुरम में हर साल इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष K अन्नामलाई ने DMK नेता के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे भगवान श्रीराम को कुछ दिनों पहले ही तमिलनाडु के कानून मंत्री S रघुपति ने ‘सामाजिक न्याय के सर्वोच्च झंडाबरदार’ बताया था, वहीं अब कुछ ही दिन में DMK की याददाश्त गुम हो गई है। उन्होंने दोनों मंत्रियों को आपस में बैठ कर मामला सुलझाने की सलाह दी। SS शिवशंकर ने कहा था कि ये तमिलों का कर्तव्य है कि वो राजेंद्र चोल जैसे महान सम्राट को सम्मान दें, वरना हमें ऐसी चीजों की पूजा करने के लिए कहा जाएगा जिनसे हमारा कोई लेना-देना नहीं।

2022 से ही राजदंड चोल की जयंती को सरकारी कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है। मंत्री ने कहा कि हम उनके द्वारा बनाए गए मंदिरों, ताम्बे के प्लेट्स और उनकी प्रतिमाओं को सबूत के रूप में देखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि श्रीराम को अवतार बताया जाता है, जबकि अवतार का कभी जन्म नहीं हो सकता और अगर किसी का ईश्वर के रूप में जन्म हुआ है तो वो अवतार नहीं है। उन्होंने कहा कि रामायण महाभारत तमिल लोगों के लिए नहीं है, उनमें कोई नैतिकता नहीं है।

अब DMK नेता TKS एलंगोवन ने अपने मंत्री के बयान का बचाव करते हुए कहा है कि राम भगवान नहीं थे, बल्कि मनुष्य थे। उन्होंने राम को ‘कृष्ण का अवतार’ बताया, जबकि राम और कृष्ण दोनों ही विष्णु के अवतार थे। उन्होंने कहा कि मंत्री SS शिवशंकर ने ये नहीं कहा कि कोई राम को न मानें। उन्होंने कहा कि DMK एकमात्र पार्टी है जो 90% हिन्दुओं के भले के लिए काम कर रही हैं जिनका धार्मिक लोगों ने शोषण किया, उन्हें मंदिर में घुसने की इजाजत नहीं थी। TKS एलंगोवन ने OBC और SC/ST की बात करते हुए कहा कि हम हिन्दू परंपराओं के खिलाफ लड़ रहे हैं।

मोईद खान की बेकरी पर चला योगी का बुलडोजर, OBC बच्ची के रेप के मामले में एक्शन: परिवार से मिल कर रो पड़े मंत्री संजय निषाद

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में OBC समाज की नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने वाले सपा नेता मोईद खान के खिलाफ प्रशासन ने बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार (3 अगस्त 2024) की दोपहर मोईद खान की बेकरी की दुकान पर बुलडोजर पहुँच चुका है और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इसके अलावा, प्रशासन उसकी कई अन्य सम्पत्तियों की भी जाँच में जुटा है।

इस बीच आज़ाद निषाद पार्टी से विधायक और योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री संजय निषाद पीड़िता के घर पहुँचे। वो वहाँ फूट-फूट कर रोए और उन्होंने पीड़ित परिवार को आरोपितों पर कठोर कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को अयोध्या के प्रशासनिक अधिकारी पूराकलंकदर थाना क्षेत्र के भदरसा में मोईद खान की बेकरी शॉप पर पहुँच गए थे।

प्रमुख अधिकारियों के पहुँचने और कुछ देर की कागजी कार्रवाई करने के बाद मौके पर बुलडोजर आया। बुलडोजर ने मोईद खान द्वारा करवाए गए कई अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है। इस बीच मोईद की बेकरी को सील करके वहाँ ताला लगा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा उपायुक्त ने मोईद खान की बेकरी का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है। बेकरी से कुछ ही दूर पर मोईद खान का घर है।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, बेकरी शॉप को ढहाने से पहले उसमें रखे बिस्किट आदि को बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद शॉप को सील किया गया। इसके बाद में अवैध तौर पर बने मकान के कुछ बाहरी और आंतरिक हिस्सों पर बुलडोजर चलाया गया। कार्रवाई की जद में आई सम्पत्ति की अनुमानित लागत लाखों रुपयों में बताई जा रही है।

गैंगरेप का मुख्य आरोपित मोईद खान का घर और बेकरी मिश्रित आबादी वाले इलाके में है। यानी इस इलाके में हिंदू और मुस्लिमों की आबादी लगभग बराबर है। इस वजह से वहाँ प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए है। फिलहाल प्रशासन मोईद खान की अन्य नामी और बेनामी सम्पत्तियों की टोह ले रहा है। इसके साथ ही उसके नजदीकियों की थी थाह ले रहा है।

सपा सांसद ने दिया मोईद का साथ

इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और आज़ाद निषाद पार्टी के विधायक संजय निषाद ने पीड़िता के परिजनों से मुलाक़ात की। उन्होंने आरोप लगाया है कि अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने रेप के आरोपित मोईद खान की प्रशासन में पैरवी की, जिसकी वजह से केस दर्ज होने में देरी हुई। उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यालय के आगे धरना देने का एलान किया है।

उन्होंने पीड़िता के परिवार की कानूनी लड़ाई में हर सम्भव मदद करने का भी भरोसा दिया है। संजय निषाद ने मीडिया से भी इस लड़ाई में मदद की आशा जताई है। मंत्री संजय निषाद के इस बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मोईद खान पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए वो तमाम मीडियाकर्मियों के आगे फूट-फूट कर रोने लगे। वहाँ मौजूद लोगों ने सपा के खिलाफ नारेबाजी की।

राहुल-प्रियंका की चुप्पी पर सवाल

इस बीच कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व नेता प्रमोद कृष्णम ने अयोध्या की नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी पर राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा की ख़ामोशी पर सवाल उठाए हैं। प्रमोद कृष्णम ने कहा कि डिम्पल यादव ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों और कॉन्ग्रेस के छद्म सेक्युलरिज़्म पर को एकतरफा हिन्दू विरोधी करार दिया है।

प्रमोद कृष्णम ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से अपील की है कि वो इंसानियत को सियासत से ऊपर रखें और मोईद खान को अपनी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाएँ। बताते चलें कि नाबालिग पीड़िता से गैंगरेप के बाद इस केस में उस पर सुलह का दबाव बनाने वाले समाजवादी पार्टी के नेता राशिद खान पर कुछ अन्य सहयोगियों के साथ पुलिस ने FIR दर्ज करा दी है।

इन सभी पर आरोप है कि सपा से जुड़े तीनों आरोपितों के अस्पताल में जाकर लड़की को जान से मारने की कोशिश की। इतना ही नहीं, पूराकलंदर थाने के एसएचओ रतनलाल शर्मा और चौकी इंचार्ज अखिलेश गुप्ता को भी सस्पेंड कर दिया गया है। इन पर मोईन खान को बचाने का आरोप लगाते हुए बजरंग दल ने एसएसपी और जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखी थी।

सिर्फ आरोप से राजनीति नहीं, DNA टेस्ट कराओ… अयोध्या में बलात्कार, अखिलेश यादव का ट्वीट, फिर कर दिया एडिट: क्या सन्देश देना चाह रही सपा?

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खाँ द्वारा बेकरी की दुकान में निषाद समाज की एक बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार की खबर आई। वहीं एक अन्य सपा नेता राशिद खान ने पीड़ित को जान से मार डालने की कोशिश की। मोईद खान फैज़ाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी है, जिन्हें विपक्षी नेता ‘अयोध्या का राजा’ कह कर संबोधित करते हैं। उसकी संपत्ति पर अब योगी सरकार का बुलडोजर चला है। अब यूपी में अयोध्या के बाद जौनपुर से रेप की खबर आई है, जिसके बहाने अखिलेश यादव राजनीति खेल रहे हैं।

अखिलेश यादव के इस ट्वीट को लोग अयोध्या वाले मामले से भी जोड़ कर देख रहे हैं। इसका कारण ये है कि उन्होंने इस ट्वीट में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है और जिस तरह से वो अयोध्या वाली घटना को लेकर चुप हैं, वो उनकी दोहरी रणनीति को दिखाता है। बता दें कि जौनपुर में दलित समाज की एक लड़की से 9 घंटे तक चलती कार में गैंगरेप का आरोप लगा है। पीड़िता सड़क के किनारे खून से लथपथ पाई गई। उसका कहना है कि 3 बदमाशों ने उसका अपहरण किया था।

अब अखिलेश यादव ने जो ट्वीट किया वो देखिए, “कुकृत्य के मामले में जिन पर भी आरोप लगा है उनका DNA टेस्ट कराकर इंसाफ़ का रास्ता निकाला जाए, न कि केवल आरोप लगाकर सियासत की जाए। जो भी दोषी हो उसे क़ानून के हिसाब से पूरी सज़ा दी जाए, लेकिन अगर DNA टेस्ट के बाद आरोप झूठे साबित हों तो सरकार के संलिप्त अधिकारियों को भी न बख्शा जाए। यही न्याय की माँग है।” अखिलेश यादव की इस ट्वीट का जब विरोध होने लगा, तब उन्होंने एडिट कर के इसमें जौनपुर की खबर का स्क्रीनशॉट लगा दिया।

जैसा कि आपने देखा, ‘DNA TEST’ इस ट्वीट में दो-दो बार कैपिटल लेटर में लिखा हुआ है, यानी इस शब्द पर जोर दिया गया है। दूसरी बात, वो कह रहे हैं कि सिर्फ आरोप लगा कर राजनीति न की जाए। क्या अखिलेश यादव का इशारा कहीं और है, लोग सवाल पूछ रहे हैं। जौनपुर वाले मामले में पीड़िता के पिता भाजपा के ही नेता हैं। अब तक रेप की पुष्टि नहीं हुई है, मेडिकल टेस्ट के बाद आधिकारिक रूप से कुछ कहा जा सकेगा। बच्ची के साथ मारपीट की बात पुलिस ने कबूली है।

चारों तरफ चर्चा में अयोध्या की घटना है, इसी बीच सपा के मुखिया का ट्वीट आता है, विरोध होने के बाद ट्वीट एडिट कर के जौनपुर वाली खबर लगा दी जाती है – इसे क्या समझा जाए? क्या अखिलेश यादव सिर्फ इसीलिए अयोध्या वाले मेल पर चुप हैं और उस पर अपने रुख को दर्शाने के लिए जौनपुर के एक अलग मामले को अपने बयान से जोड़ रहे हैं क्योंकि आरोपित मुस्लिम समुदाय से हैं और पीड़िता हिन्दू निषाद समाज से है? बता दें कि कभी उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने रेप की एक घटना को लेकर ‘लड़के हैं, गलती हो जाती है’ वाला बयान दिया था। अब अखिलेश यादव ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है।

फारूक, खालिद, रहमत, इरशाद, सैफ, नजम… आतंकियों की फंडिंग कर रहे थे 5 पुलिसकर्मी और 1 शिक्षक, LG ने किया बर्खास्त: कश्मीर में अब तक 70 ‘सरकारी गद्दार’ हटाए गए

जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने 6 ऐसे सरकारी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जो आतंकियों के साथ मिल कर काम कर रहे थे। ये पूरा का पूरा गिरोह आतंकी फंडिंग से जुड़ा हुआ था। ये ड्रग्स का धंधा कर के उन पैसों से आतंकियों की मदद करते थे। इसीलिए, इन सभी कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। ये सब पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI द्वारा बनाए गए टेरर नेटवर्क से जुड़ा होगा।

जिन सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, उनमें 5 पुलिसकर्मी और एक शिक्षक शामिल है। पाकिस्तान ने पंजाब की तरह ही जम्मू कश्मीर में भी युवाओं को ड्रग्स का आदी बनाने की साजिश कर रखी है, जिसके तहत प्रदेश में ड्रग्स की सप्लाई की जाती है और इस अवैध धंधे से हुई कमाई का इस्तेमाल आतंकी वारदातों के लिए की जाती है। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) में निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें पद से उठाया है।

जिन सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, उनमें शामिल हैं – कॉन्स्टेबल फारूक अहमद शेख, खालिद हुसैन शाह, रहमत शाह, इरशाद अहमद चाकू, सैफ दीन और सरकारी शिक्षक नज़म दीन। संविधान में उपर्युक्त अनुच्छेद के तहत प्रावधान है कि अगर कोई देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करता है तो राष्ट्रपति या LG बिना किसी जाँच के उसे तत्काल सेवा से हटा सकते हैं। 2019 में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद से लेकर अब तक 70 ऐसे गद्दार कर्मचारी बर्खास्त किए जा चुके हैं।

जून 2024 में भी ऐसे 4 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई थी। इनमें भी 2 पुलिसकर्मी शामिल थे। इनमें कॉन्स्टेबल मुख़्तार अहमद पीर और इम्तियाज अहमद लोन के अलावा शिक्षा विभाग में बतौर जूनियर असिस्टेंट कार्यरत रहे अहमद मीर और ग्रामीण विकास विभाग के मोहम्मद ज़ैद शामिल थे। पाकिस्तान से बड़े पैमाने में ब्राउन शुगर और हेरोइन जम्मू कश्मीर में तस्करी कर के लाई जा रही है। फारूक अहमद शेख 2000 से ही सेवा में था और कुपवाड़ा में पदस्थापित था, खालिद हुसैन शाह 2009 से वहीं ड्यूटी में था, वहीं इरशाद अहमद चालकू 2009 से अनंतनाग में पदस्थापित था, नज़म दीन 2006 से ही पुँछ में काम कर रहा था और सैफ दीन तो 1995 से ही पुलिस में था। इन सबके पास से ड्रग्स भी बरामद हुए हैं।

बस में हनुमान जी की फोटो देख भड़का कट्टर मुस्लिम, कर्नाटक सरकार कराएगी जाँच: मुस्लिम तुष्टिकरण के बाद अब हिंदू-घृणा पर उतरी कॉन्ग्रेस सरकार

कर्नाटक में अभी कॉन्ग्रेस की सरकार है। मतलब मुस्लिम तुष्टिकरण चरम पर। और यह सिर्फ आरोप नहीं है, ना ही किसी राजनीतिक दल ने ऐसा आरोप लगाया है। मुस्लिम तुष्टिकरण सच में वहाँ किया जा रहा है, वो भी विभागीय स्तर पर। एक सरकारी बस पर बजरंग बली की फोटो क्यों और कैसे लगी, किसने लगाई… ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट अब इसकी जाँच करेगी।

KA-10 F-0455, यह एक बस का नंबर है। कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC: Karnataka State Road Transport Corporation) की यह बस गुंडलूपेट से चिकमगलूर तक चलती है। इस बस पर बजरंग बली की फोटो क्यों लगी, विभाग अब इसकी जाँच करेगा।

बजरंग बली की फोटो से दिक्कत किसे? क्यों कर्नाटक का ट्रांसपोर्ट विभाग इसकी जाँच करने जा रहा? यह सब हुआ आरिफ अरवाह नाम के एक कट्टर इस्लामी की वजह से। 31 जुलाई 2024 को आरिफ को यह बस दिख गई। उसने इसकी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। साथ ही KSRTC को टैग करके उसने हनुमान जी की फोटो से संबंधित सवाल भी पूछ लिया।

हिंदू-घृणा से सना कोई कट्टर मुस्लिम हनुमान जी की फोटो देखे और फट पड़े, यह आश्चर्य की बात नहीं। लेकिन खबर यह है कि ऐसे कट्टर मुस्लिम और उसकी सोच को कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की तरफ से जवाब भी मिला। जवाब भी ऐसा, जिससे हिंदू-घृणा की बू आए।

आरिफ अरवाह के ट्वीट पर KSRTC ने जवाब दिया, “आपने जो पोस्ट किया, उसके लिए धन्यवाद। हम इसे (हनुमान जी की फोटो लगे बस को) संबंधित डिपो में फॉर्वर्ड कर रहे हैं, इसकी जाँच करवाएँगे।”

कौन है आरिफ अरवाह?

सोशल मीडिया पर उसने जो प्रोफाइल लगाई है, उसके अनुसार वो चिकमगलूर विधानसभा क्षेत्र में SDPI (Social Democratic Party of India) का महासचिव है। आखिर SDPI क्या है? भारत में जिस आतंकी संगठन PFI को बैन किया जा चुका है, SDPI उसी की राजनीतिक फ्रंट है।

आरिफ अरवाह के एक्स हैंडल पर जो हेडर में लगा फोटो/ग्राफिक्स है, उसमें वो फ्री फिलिस्तीन की उम्मीद लगाए बैठा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जो डीपी इसने लगाई है, उसमें यह भूख और भय से आजादी की बात करता है। अगर ऐसा है तो हनुमान जी की फोटो देख कर कॉन्ग्रेसी आकाओं तक को क्यों याद करने लगे आरिफ?

कर्नाटक, कॉन्ग्रेस और मुस्लिम तुष्टिकरण

जनता की याददाश्त अपने घर-परिवार संभालने के चक्कर में 2-4-10 दिनों की ही होती है। इसलिए याद दिलाना जरूरी है कि कर्नाटक में मुस्लिम रिजर्वेशन की शुरुआत कॉन्ग्रेस पार्टी ने ही किया था। जब इसे BJP की सरकार ने खत्म कर दिया तो साल 2023 में कॉन्ग्रेस ने इस आरक्षण को फिर से देने की बात अपने मेनिफेस्टो में भी कह डाली थी।

कर्नाटक में 2011 की जनगणना के हिसाब से मुस्लिम कुल जनसंख्या का 12% हैं। आरक्षण के नियमों की कैटेगरी 2B में मुस्लिमों की सभी जातियों को शामिल किया गया है। कैटेगरी 2A में भी मुस्लिमों की 19 जातियाँ हैं। जबकि कैटेगरी 1 में 17 जातियाँ इस्लामी हैं। स्थानीय निकाय के चुनावों में भी जो सीटें OBC समाज के लिए आरक्षित हैं, वहाँ भी मुस्लिमों को चुनाव लड़ने की इजाजत है।