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हिन्दुओं के गाँव से लेकर फाइव स्टार होटल तक, समझिए कैसे जमीन हड़पता है वक्फ बोर्ड: कई मंदिरों पर भी इन्हीं का कब्जा, हिन्दुओं के लिए ऐसा कोई कानून नहीं

वक्फ के माध्यम से जमीन हड़पना कोई कल्पना नहीं है। ऐसी खबरें आये दिन सुनने को मिलती रहती हैं, जहाँ वक्फ बोर्ड ने सार्वजनिक या निजी भूमि को वक्फ के रूप में पंजीकृत करने की माँग की है। इसमें तमिलनाडु में एक पूरा हिंदू गाँव, सूरत में सरकारी इमारतें, बेंगलुरु में तथाकथित ईदगाह मैदान, हरियाणा में जठलाना गाँव, हैदराबाद का पाँच सितारा होटल आदि शामिल हैं।

भूमि हड़पने के तीन सबसे सामान्य रूप हैं- किसी भूमि पर कब्रिस्तान के रूप में दावा करना, मजार/दरगाह बनाना और सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढ़ना शामिल है। सार्वजनिक जमीनों पर शायद इसलिए नमाज पढ़ी जाती है, ताकि उसे वक्फ संपत्ति के रूप में दावा किया जा सकता है। पिछली कुछ स्थितियाँ एवं दावे इनसे संबंधित और इससे भी बढ़कर मिले हैं।

इन घटनाओं से पता चलता है कि गैर-समायोजित कानून और इसके द्वारा बनाया गया भूमि हड़पने वाला भ्रष्ट अभिजात वर्ग सामाजिक संघर्ष और सांप्रदायिक वैमनस्य के लिए हिन्दुओं की सम्पतियों के खिलाफ एक सोचा-समझा तंत्र है। वक्फ संस्था कानूनी रूप से अनावश्यक है। वक्फ की कानूनी संस्था और बोर्ड की नौकरशाही का अस्तित्व सिर्फ इस्लामवादी राजनीति के लिए एक गढ़ के रूप में ही समझ में आता है।

हालाँकि, यहाँ ध्यान दिया जा सकता है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में केवल एक तर्कसंगत कानूनी प्रणाली को आम हित में काम करना चाहिए, सिर्फ ‘पहचान को चिह्नित करने वाले’ के रूप में नहीं। वक्फ का कानून आज जिस स्थिति में है, वह सार्वजनिक शांति, सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरनाक है। यह निजी संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन करता है और संभावित रूप से चरमपंथी राजनीति को प्रोत्साहित करता है।

वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ न्यायशास्त्र आज जिस स्थिति में है, वह स्पष्ट रूप से संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है। यह अधिनियम एक समुदाय की संपत्तियों और धार्मिक प्रतिष्ठानों के एक वर्ग को बहिष्कृत करने के लिए प्रक्रियात्मक और वास्तविक सुरक्षा की एक विशेष प्रणाली बनाता है।

वक्फ मशीनरी कैसे काम करती है, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि मिस्टर X का मिस्टर Y की ज़मीन के पास एक ज़मीन है। भूमि का अच्छी तरह से सीमांकन नहीं किया गया है और संभवतः विवादित भी है, क्योंकि इसे वक्फ उपयोगकर्ता द्वारा विवादित बनाया जा सकता है। इसके लिए किसी दस्तावेज़ की आवश्यकता भी नहीं है। फिर वह इसे वक्फ बोर्ड में पंजीकृत कराता है।

बोर्ड भूमि के बारे में पूछताछ करने के लिए बाध्य है और यदि मिस्टर X को पता चलेगा तो वह पंजीकरण का विरोध भी कर सकता है। हालाँकि, एक बार फिर बोर्ड के पास यह निर्णय लेने की पूरी शक्ति है कि वह भूमि वास्तव में वक्फ संपत्ति है या नहीं। जैसा कि पहले निर्दिष्ट किया गया है, वक्फ बोर्ड एक राजनीतिक निकाय है, जिसे वक्फ की रक्षा और बढ़ावा देने का अधिकार है।

इसलिए, निकाय के समक्ष कार्यवाही का मध्यकालीन व्यवस्था क़ाज़ी के समक्ष की तुलना में उचित परिणाम निकलने की अधिक संभावना नहीं है। राज्य प्रशासन वक्फ बोर्ड के निर्देश का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। ऐसे में मिस्टर X के पास ट्रिब्यूनल में एक छोटी सी अपील होगी। यह इकाई भारी पूर्वाग्रह से ग्रस्त होगी। इसके निर्णय के खिलाफ कोई और वैधानिक अपील नहीं है।

ऐसे में मिस्टर X के लिए यह विशेष रूप से कठिन होगा, यदि भूमि को अधिनियम की धारा 4 के तहत वक्फ के राज्य सर्वेक्षण द्वारा (बोर्ड द्वारा पंजीकरण के आधार पर) वक्फ के रूप में सीमांकित किया गया है। इस सबके बीच, मिस्टर X का सामना न केवल मिस्टर Y से होगा, बल्कि वक्फ फंड और हजारों कर्मचारियों द्वारा समर्थित पूरी वक्फ नौकरशाही से होगा।

इस दौरान मिस्टर X को आपराधिक मुकदमे से भी डराया जाएगा और बताया जाएगा कि यह साल 2013 के संशोधनों को अधिनियम में जोड़ा गया है। बेशक, मिस्टर X वक्फ अधिकारियों को रिश्वत की पेशकश कर सकते हैं और इस लहर से बाहर निकल सकते हैं या फिर उन्हें अपनी जमीन को मिस्टर Y के हाथ में जाते हुए देखते रह जाना होगा।

वक्फ बोर्ड भ्रष्टाचार का एक अद्भुत स्रोत है। भारत में इस्लाम फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस की सरकार ने वक़्फ़ बोर्ड का गठन किया था। इतिहास के अनुसार, इस्लाम की उत्पत्ति 7वीं शताब्दी ईस्वी में मक्का और मदीना में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के मिशन से हुई थी। 622 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद यतुरिब शहर (अब मदीना कहा जाता है) चले गए। वहाँ उन्होंने अरब की जनजातियों को एकजुट करना शुरू किया।

इस्लाम के तहत नियंत्रण लेने के लिए वे साल 630 में मक्का लौट आए और सभी बुत (मूर्तियों) को नष्ट करने का आदेश दे दिया। लगभग 632 ईस्वी में जब उनकी मृत्यु हुई तब तक अरब की लगभग सभी जनजातियाँ नष्ट हो चुकी थीं। शुरुआती मुस्लिम कबीले इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए विश्व भर मे फैलने के लिए निकले।

8वीं शताब्दी ईस्वी तक उमय्याद खिलाफत में इस्लाम पश्चिम में लाइबेरिया से लेकर पूर्व में सिंधु नदी तक फैल गया। वहीं, सनातन इस्लाम के आने से सदियों पुराना है। ये वही सनातन धर्म है, जिसके मुख्य मंदिरों पर मुस्लिमों का कब्ज़ा है। आज के समय मे वे हमारे मंदिरों को वक़्फ़ की प्रॉपर्टी कहते हैं। जैसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि, श्री काशी विश्वनाथ का असली स्वयंभू शिवलिंग, जो ज्ञानवापी परिसर में स्थित है।

देश भर में ऐसे हज़ारों मंदिर एवं धर्मस्थान हैं, जिन्हें खंडित करके उन पर मस्जिद थोप दिए गए। मथुरा का शाही ईदगाह, वाराणसी का ज्ञानवापी मस्जिद, अयोध्या में कभी रहा बाबरी मस्जिद, धार का भोजशाला आदि ये सब जगह नमाज पढ़ने के लिए नहीं थी, बल्कि मुस्लिम आक्रांताओं की विजय की निशानियों में हमारे मुख्य तीर्थस्थलों को परिवर्तित किया गया था। आज ये सब वक़्फ़ के कब्जे मे है।

‘कच्छा पहन कर क्लास में आते हैं अवध ओझा सर, सेक्स की बातें करते हैं’: UPSC की छात्रा ने कैमरे के सामने खोली पोल, पूछा – क्या हम एंटी-नेशनल हैं?

देश की राजधानी दिल्ली में अपने सपनों को पंख लगाने लाखों बच्चे तैयारी के लिए आते हैं। उन्हीं बच्चों में से तीन की ओल्ड राजेंद्र नगर की लाइब्रेरी में पानी भरने से जान चली गई। एक छात्र की करंट लगने से मौत हो गई, तो एक छात्रा ने मकान मालिक की वसूली से तंग आकर जान दे दी। इन सबके बीच यूपीएससी एस्पिरेंट्स सड़कों पर हैं। वो न्याय माँग रहे हैं। वो व्यवस्था सुधार की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें आंदोलन को ‘बिना नेता’ वाला कहकर खारिज करने की बात भी सामने आ रही है। इस बीच, अवध ओझा, विकास दिव्यकीर्ति जैसे मशहूर शिक्षकों के खिलाफ छात्र आवाज भी उठा रहे हैं।

नवयुग टीवी नाम के यू-ट्यूब चैनल का एक क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक छात्रा ने अवध ओझा को गुंडा करार दिया। यही नहीं, छात्रा ने कहा कि वो कहने को इतिहास पढ़ाते हैं, लेकिन करते हैं सिर्फ ज्ञान की बातें, उनका सिलेबस तक पूरा नहीं है। छात्रा ने कहा कि वो अवध ओझा से पढ़ चुकी है, लेकिन अवध ओझा क्लास में कच्छा पहनकर ही आ जाता है। छात्रा ने कहा कि जब उसने इस पर आपत्ति की, तो बस, मुस्कराकर टाल दिया गया।

प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा कि यू-ट्यूब वाले वायरल करने के लिए पैसे लेते हैं। वायरल टीचर्स का पढ़ाई में योगदान शून्य होता है। उन्हें देखकर देश के कोने-कोने से बच्चे दिल्ली आ रहे हैं और ओल्ड राजेंद्र नगर जैसी जगहों पर फंस जाते हैं। यहाँ बच्चों को सिर्फ कमोडिटी समझा जाता है। कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है।

एक छात्र ने पूरी क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा, “बच्चे यू-ट्यूब वालों के चक्कर में यहाँ आ जाते हैं। फिर उनसे उगाही शुरू हो जाती है। रूम रेंट वाला दलाल एक महीने का किराया लेता है। 15-20 हजार रुपए महीने के लगते हैं। 1500 रुपए माह की लाइब्रेरी हादसे के बाद 5000-6000 रुपए में कर दी गई है। 10 हजार से ज्यादा खाने-पीने में चला जाता है। हर महीने 35-40 हजार रुपए माँ-बाप अपनी प्रॉपर्टी बेचकर बर्बाद कर रहे हैं।”

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विकास दिव्यकीर्ति हों या अवध ओझा, इन्हें छात्रों से मुलाकात करके उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए, न कि एएनआई, लल्लनटॉप, अनकट जैसे संस्थानों में अपनी बात रख देने से। उन्हें तो तीन दिन तक यही नहीं पता चला कि असल में हुआ क्या है।

कई छात्रों ने दावा किया है कि उनके मकान मालिकों ने, पीजी संचालकों ने, कोचिंग सेंटर चलाने वालों ने कहा कि ये सारा मामला 15-20 दिनों में शांत हो जाएगा, क्योंकि उनके पास पैसा है और सबकुछ मैनेज हो जाएगा। ऐसे में कुछ बदलने वाला नहीं है। एक छात्र ने कहा कि यहाँ किस लेवल की वसूली हो रही है, इसे इसी बात से समझ सकते हैं कि कुछ लाइब्रेरी में ताला लगते ही लाइब्रेरी की फीस 1500 रुपए से बढ़ाकर 5 हजार से 6000 रुपए प्रति माह कर दी गई है। यहाँ छात्रों से हर कोई सिर्फ पैसे लूटना चाहता है। जिंदगी की कोई कीमत ही नहीं है।

बच्चों से अपने प्राइवेट पार्ट पर मालिश करवाता था मदरसा टीचर चाँद मोहम्मद, दीनी तालीम के बहाने कमरे में बुलाता था: ग्रामीणों का प्रदर्शन, कहा – संचालक ने करवा दिया फरार

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्र से कुकर्म किए जाने का मामला सामने आया है। कुकर्म का आरोप यहाँ पढ़ाने वाले मौलाना पर लगा है जिसका नाम चाँद मोहम्मद बताया जा रहा है। चाँद मोहम्मद पर यह भी आरोप है कि वो बच्चों से अपने प्राइवेट पार्ट में तेल की मालिश करवाता था। पीड़ित छात्र अनाथ बताया जा रहा है। घटना के बाद मौलाना फरार है जिसे मदरसे से निकाल दिया गया है। पुलिस इस घटना को बच्चों का आपसी झगड़ा बता रही है।

यह घटना शामली जिले के थाना क्षेत्र गढ़ी पुख्ता की है। यहाँ के मुमताजनगर में आने वाले गाँव गुराना में ‘जामिया अरबिया तालीमुल कुरआन’ नाम का मदरसा है। इस मदरसे में बाहरी और गाँव के तमाम छात्र दीनी और मज़हबी तालीम लेते हैं। मदरसे का संचालक इस्रायल है। इसी में एक अनाथ छात्र भी पढ़ता है जिसके माता-पिता अब दुनिया में नहीं हैं। वो अपने ननिहाल में पाला जा रहा है। आरोप है कि मदरसे में पढ़ाने के लिए नियुक्त मौलाना चाँद मोहम्मद ने अनाथ छात्र के साथ कई बार अप्राकृतिक सेक्स किया।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मौलाना की हवस के शिकार कुछ अन्य छात्र भी बने हैं। बताया गया कि पढ़ाई खत्म होने के बाद वह छात्रों को अपने कमरे में बुलाता था। यहाँ वो बच्चों से अपने प्राइवेट पार्ट की मालिश करवाया करता था। इसके बाद वो छात्रों से कुकर्म किया करता था। कुकर्म के बाद चाँद मोहम्मद बच्चों को जान से मारने की धमकी दे कर मुँह बंद रखने को कहता था। कुछ छात्रों की आपसी बातचीत से यह खबर पूरे गाँव में फ़ैल गई। ग्रामीणों ने घटना पर गुस्सा जताना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि मामला बढ़ता देख कर मदरसा संचालक इस्रायल ने मौलाना चाँद मोहम्मद को चुपके से फरार करवाए दिया। कुछ ग्रामीण मीडिया के सामने भी आए और उन्होंने फरार मौलाना के साथ मदरसा संचालक पर भी कानूनी कार्रवाई की माँग की है। वहीं इस मामले में गढ़ी पुख्ता के थाना प्रभारी प्रवेश कुमार ने मीडिया से बताया कि पुलिस को मौखिक शिकायत मिली थी। इस शिकायत पर जाँच की गई तो मामला बच्चों में आपसी झगड़े का निकल कर सामने आया है।

हालांकि इस मामले में ग्रामीणों की राय पुलिस से जुदा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मदरसा संचालक केस को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। मदरसे के मैनेजमेंट के अन्य सदस्यों ने भी घटना को सही बताते हुए फरार मौलाना पर कार्रवाई की माँग उठाई है। उन्होंने यह भी कहा कि चाँद मोहम्मद की नियुक्ति या निकाले जाने से पहले मदरसा संचालक ने मैनेजमेंट के किसी अन्य सदस्य से राय मशविरा भी नहीं किया।

जिस मोईद खान को बचा रहे अखिलेश यादव, वह भदरसा दंगों का आरोपित, सपा नेता की पढ़ाई कक्षा दूसरी तक… कमाई करोड़ों में: दोस्त राशिद और उसके अब्बू भी दंगों में रहे शामिल

अयोध्या में OBC समाज की नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने वाले समाजवादी पार्टी के नेता एवं स्थानीय सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी मोईद खान बेहद कम समय में करोड़ों का मालिक बन बैठा है। मोईद खान सिर्फ दूसरी कक्षा तक पढ़ा-लिखा है और वह मदरसे में। इसके बावजूद उसने पिछले 15 सालों में 50 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति बना ली है। वह 2012 के भदरसा दंगे का भी आरोपित रहा है।

रेप की घटना सामने आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित से मुलाकात की थी। उसके बाद उन्होंने स्थानीय एसएचओ रतनलाल शर्मा और अखिलेश गुप्ता को निलंबित करने का आदेश जारी करने के साथ ही मोईद खान की संपत्तियों की जाँच का भी आदेश दिया था। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम सक्रिय हो गई और जाँच शुरू कर दी। हालाँकि, अखिलेश यादव मोईन के पक्ष में खुलकर खड़े हो गए हैं।

ADM प्रशासन अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने बताया कि अभी मोईद खान की एक करोड़ रुपए की जमीन चिह्नित हुई है। उसकी बेकरी सरकारी तालाब की जमीन पर 3000 स्क्वायर फीट में बनी थी। इसको प्रशासन ने तोड़ दिया है। इस बीच पिछले 48 घंटे में अयोध्या और आसपास के कई लोग शिकायत लेकर आए हैं कि उनकी जमीन पर मोईद खान ने जबरन कब्जा किया है। इन सबकी जाँच चल रही है।

भदरसा के मुख्य बाजार में भी मोईद खान की एक बिल्डिंग है। वहाँ भी प्रशासन पहुँचा था, लेकिन उसे अभी तोड़ा नहीं गया है, क्योंकि उसमें पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक ब्रांच संचालित हो रही है। जिला प्रशासन ने PNB बैंक को इस मकान को खाली करने का नोटिस दिया है। माना जा रहा है कि बैंक द्वारा मकान खाली करने के बाद इसे भी तोड़ दिया जाएगा।

दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि समाजवादी पार्टी का नेता मोईद खान साल 2012 में हुए भदरसा दंगे का आरोपित रह चुका है। मोईद खान साल 2012 से ही समाजवादी पार्टी का नगर अध्यक्ष है। सपा से पहले वह कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव का काम-काज देखता था। साल 2012 से उसका राजनीतिक और आर्थिक रसूख बढ़ता गया है।

इतना ही नहीं, मोईद खान का दोस्त और भदरसा नगर पंचायत अध्यक्ष राशिद खान भी भदरसा दंगे का आरोपित रहा है। राशिद खान समाजवादी पार्टी का नेता है। उसकी अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद के साथ तस्वीरें वायरल हो रही हैं। अयोध्या गैंगरेप का खुलासा होने के बाद राशिद खान ने मोईद को बचाने के लिए पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है।

पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि मोहम्मद राशिद खान ने पीड़िता के घर घुसकर उस पर सुलह करने का दबाव डाला था। उसने धमकी देते हुए कहा था, “सुलह नहीं करोगी तो जान से जाओगी।” इसको लेकर शिकायतकर्ता ने पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

भदरसा दंगा जब हुआ था, उस समय नगर पंचायत का अध्यक्ष मोहम्मद अहमद था। मोहम्मद अहमद वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद राशिद का अब्बू था। अहमद दंगा भड़काने का मुख्य आरोपित था। उस पर मिट्टी का तेल बँटवाकर दंगे को भड़काने का आरोप लगा था। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। लोगों का कहना है कि सपा नेता होने का फायदा मोईद खान को मिला और वह बच गया।

मोईद खान के मोहल्ले वालों का कहना है कि वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। वह मदरसे में दो साल ही गया था। इसके बाद पढ़ाई छोड़कर व्यवसाय करने में लग गया। उसने कई व्यवसाय किए, लेकिन कुछ चला नहीं। इसके बाद उसने जमीनों का काम करने लगा। इस काम में उसने जमकर पैसा बनाया। उस दौरान वह 18 साल था और कॉन्ग्रेस के दफ्तर में बैठने लगा था। 2012 में वह सपा में शामिल हो गया।

जिस बेकरी को प्रशासन ने तोड़ा है, उसे मोईद खान ने 6 साल पहले शुरू की थी। वहीं, एक और बेकरी की दुकान को सील कर दिया गया है। मोईन बेकरी वाली को भी कब्जा किया था। मोईद खान कब्रिस्तान, चकबंदी की सरकारी जमीनें और लोगों की जमीनों पर कब्जा कर उन्हें बेच देता था। पिछले कुछ दिनों में कई लोगों ने पुलिस प्रशासन में मोईन द्वारा उनकी जमीनों पर कब्जे की शिकायत की है।

मोईन खान के 4 बेटे हैं। उसके सबसे बड़े बेटे का नाम जहीर, फिर नदीम, नफीस और सबसे छोटे बेटे का नाम जावेद है। उसकी 2 बेटियाँ भी हैं। उसके 3 बेटे उसके साथ मिलकर बेकरी का काम संभालते हैं बड़ा जहीर बेटा दुकान चलाता है और 2 बेटे- नदीम एवं नफीस बेकरी को बेचने के लिए सेल्समैन का काम करते हैं। वहीं, छोटा बेटा जावेद अभी पढ़ाई कर रहा है।

परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर… मरने के बाद भी 5 रोगियों को जीवन दे गए 25 साल के काँवड़ यात्री सचिन, सड़क दुर्घटना में हो गया था देहांत

कबीरदास ने कभी एक प्रसिद्ध दोहा कहा था, जिसकी पंक्ति थी – ‘परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर’ अर्थात सज्जन लोगों का जन्म ही दूसरों की भलाई के लिए होता है। यह दोहा आज के समय में भी चरितार्थ किया है 25 साल के काँवड़ यात्री सचिन खंडेलवाल ने, जिनका सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया है। 25 साल के छोटे से जीवन में महादेव शिव के परम भक्त द्वारा जो भी समय हुआ वो उन्होंने समाज के हित में किया। अब मृत्यु के बाद उनकी देह से दान किए गए अंगों से 5 गंभीर रूप से बीमार लोगों को नया जीवन मिला है।

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के मुताबिक, काँवड़ यात्री सचिन खंडेलवाल हरिद्वार से गंगाजल ले कर वापस अपने घर हरियाणा के महेंद्रगढ़ की तरफ लौट रहे थे। रास्ते में रुड़की के पास एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इस हादसे में सचिन गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए ऋषिकेश स्थित AIIMS में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सचिन को बचाया नहीं जा सका। सचिन का शोक संतृप्त परिवार एम्स में शव लेने आया तो डॉक्टरों ने वहाँ परिजनों से उनकी अंगदान के बारे में इच्छा पूछी।

सचिन के घर वालों ने उन मरीजों की तरफ देखा जो जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे थे। परिजन फ़ौरन तैयार हो गए। दान के तौर पर सचिन की किडनी, पैंक्रियाज, लीवर और आँखों को चयनित किया गया। सचिन की किडनी, अग्नाशय और लीवर को चंडीगढ़ के पोस्ट-ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च और दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में भेजा गया। इसी के साथ मृतक काँवड़ यात्री द्वारा दान की गई आँखों से अब उत्तराखंड के 2 नेत्र रोगी शनिवार (3 अगस्त) से इस दुनिया को देख रहे हैं।

कुल मिला कर सचिन खंडेलवाल के अंगदान से 5 अलग-अलग लोगों को नई जिंदगी मिली है। एम्स ऋषिकेश की डॉ. मीनू सिंह ने कहा, “सचिन ने कई लोगों को जीवन का तोहफा दिया है। एम्स उन्हें हमेशा एक साइलेंट हीरो के तौर पर याद रखेगा।” दिवंगत काँवड़ यात्री के भाई पंकज खंडेलवाल ने कहा, “यही एक रास्ता था जिससे सचिन कुछ और साल जी सकता था। मेरा मानना ​​है कि जो लोग अंगदान कर सकते हैं, उन्हें अपने प्रियजनों को मृत्यु के बाद भी जीवित रखना चाहिए।” अंगदान के बाद एम्स में सचिन के शव को पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिया है।

मुस्लिम देश बांग्लादेश को अस्थिर कर रहा इस्लामी आतंकवाद, सिर्फ मुखौटा है ‘छात्र आंदोलन’: पाकिस्तान, ISI, जमात सब खा रहे मलाई

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन की आड़ में पूरे देश को जला दिया गया। कर्फ्यू, गोलीबारी, लूट, हत्याओं का सिलसिला चल उठा। कोर्ट के आदेश से लागू हुए आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से हटा लिया, जिसके बाद आरक्षण विरोधी हिंसा की आग में जल रहे बांग्लादेश में शाँति आ जानी चाहिए थे, लेकिन बांग्लादेश में शांति की जगह अब प्रदर्शनकारी सरकार के इस्तीफे की माँग पर उतर आए हैं।

ऐसे में अब ये बात धीरे-धीरे ही सही, सामने आ रही है कि जो आरक्षण विरोधी हिंसा और प्रदर्शन हुए थे, वो सिर्फ छात्रों का गुस्सा नहीं, बल्कि उनके गुस्से को इस्तेमाल करने वाले इस्लामिक आतंकवादी थे। विपक्षी पार्टी बीएनपी थी। पाकिस्तानी आईएसआई के इशारे चलने वाली जमात थी, जिसपर बांग्लादेश ही नहीं, रूस भी प्रतिबंध लगा चुका है।

छात्र आंदोलन के 157 संयोजकों में से एक नाहिद इस्लाम ने 4 अगस्त 2024 से ‘पूर्ण अहसयोग‘ आंदोलन का ऐलान किया है, जिसमें शेख हसीना और उनके मंत्रिमंडल का इस्तीफा माँगा गया है। कथित छात्र आंदोलन की तरफ से इस राजनीतिक असहयोग आंदोलन के छेड़ने के पीछे के चेहरे अब बेनकाब हो रहे हैं। जो बताता है कि आरक्षण विरोधी प्रदर्शन और हिंसा के पीछे राजनीतिक, कट्टरपंथी इस्लामिक ताकतें और देश विरोधी ताकतों ने हाथ मिलाया हुआ है।

बता दें कि 3 अगस्त को ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आंदोलनकारी छात्रों से विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने और हिंसा को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री आवास पर वार्ता के लिए बुलाया था। ये बातचीत बिना शर्त होनी थी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों को भी रिहा करने के लिए कहा था। लेकिन ‘आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन’ के कन्वेनरों ने बातचीत के पीएम हसीना के न्यौते को ठुकरा दिया। नाहिद इस्लाम ने कहा कि आपातकाल या कर्फ्यू को कोई बांग्लादेशी स्वीकार नहीं करेगा और न ही हम कोई बातचीत करेंगे।

नाहिद ने ये जरूर कहा कि सरकार आंदोलनकारियों के देखते ही गोली मार देने वाला आदेश वापस ले, साथ ही कहा कि ‘हत्यारी सरकार’ के साथ अब कोई बातचीत नहीं होगी, क्योंकि काफी समय बीत चुका है। यही नहीं, उन्होंने अख्तर हुसैन और आरिफ सोहेल को रिहा करने की भी माँग की।

ऐसे ही एक कन्वेनर अबू बकर मजूमदार ने बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र ‘प्रथन अलो’ से कहा कि अब बातचीत का मौका नहीं है। फैसला सड़कों से आएगा। कन्वेनर आसिफ महमूद ने भी सोशल मीडिया पर ‘हत्यारी सरकार’ और आवामी लीग के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए हम तैयार नहीं हैं। यही नहीं, इस असहयोग आंदोलन के लिए 15 सूत्री दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं, जिसमें…

  • 1- किसी को भी कोई टैक्स नहीं देना चाहिए।
  • 2- किसी भी तरह का यूटिलिटी बिल न भरें, मसलन पानी-बिजली का बिल।
  • 3-सभी सरकारी और निजी संस्थान, कार्यालय, न्यायालय, मिलें और कारखाने बंद रहेंगे। कर्मचारियों को महीने के अंत में अपना वेतन लेना चाहिए।
  • 4- शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे।
  • 5- प्रवासी लोगों को बैंकिंग माध्यम से कोई भी धन प्रेषण नहीं भेजना चाहिए।
  • 6- सभी सरकारी बैठकों, सेमिनारों और कार्यक्रमों का बहिष्कार करें।
  • 7- बंदरगाह कर्मचारियों को कोई भी सामान नहीं उतारना चाहिए।
  • 8- मिलें और कारखाने बंद रहेंगे। आरएमजी श्रमिकों को काम पर नहीं जाना चाहिए।
  • 9- सार्वजनिक परिवहन स्थगित रहेगा। श्रमिकों को काम पर नहीं जाना चाहिए।
  • 10- बैंक सिर्फ जरूरी लेन-देन के लिए रविवार को खुलेंगे।
  • 11- पुलिस अपने स्टेशनों पर केवल नियमित ड्यूटी करेगी तथा प्रोटोकॉल, दंगा या प्रदर्शनों को रोकने से जुड़ी ड्यूटी नहीं करेगी।
  • 12- देश से कोई भी धन बाहर नहीं ले जाया जाना चाहिए, तथा कोई भी विदेशी लेनदेन नहीं होना चाहिए।
  • 13- बीजीबी (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) और नौसेना को छोड़कर, अन्य बल अपनी छावनियों में ही रहेंगे। बीजीबी और नौसेना अपने बैरकों और तटीय क्षेत्रों में रहेंगे।
  • 14- नौकरशाह सचिवालय नहीं जाएँगे। डीसी या उपजिला अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में नहीं जाएँगे।
  • 15- लक्जरी सामान की दुकानें, शोरूम, होटल, मोटल और रेस्तराँ बंद रहेंगे।

बता दें कि कथित आरक्षण और भेदभाव विरोधी प्रदर्शनों के कन्वेनर ने जब प्रधानमंत्री की बातचीत की पेशकश को ठुकराया, उससे कुछ समय पहले ही अल-कायदा से जुड़ी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रचारक डेविड बर्गमैन ने पीएम के प्रस्ताव को अस्वीकार करने की अपील की थी। ये इस बात का अच्छा-खासा संकेत है कि आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पूरी तरह से सरकार विरोधी प्रदर्शन हैं, जिन्हें बर्गमैन का बॉस तारिक रहमान मैनेज कर रहा है। तारिक रहमान इस्लामिक आतंकवादी है और सजायाफ्ता भी, जो साल 2007 से बांग्लादेश से फरार है और यूके में रह रहा है।

बर्गमैन के अलावा भी बीएनपी ने जॉन डैनिलोविच जैसे पूर्व अमेरिकी राजनयिकों को भी झूठ फैलाने के लिए काम पर लगाए हुए हैं, जो काफी सालों तक अलकायदा से जुड़ी पार्टी-बीएनपी के लिए काम कर चुका है। यही नहीं, बीएनपी का महासचिव फखरुल इस्लाम आलमगीर तो अवामी लीग सरकार को तुरंत माफी माँगने और इस्तीफा देने के लिए भी कह चुका है। बताया जा रहा है कि लंदन में रहने वाला तारिक रहमान बीएनपी के धनी मेंबर्स से सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को पैसे देने के लिए और छात्र आंदोलन के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहने का निर्देश दे चुका है। तारिक रहमान जैसे इस्लामिक आतंकवादी पर 2008 से ही अमेरिका ने वीजा-बैन लगाया हुआ है।

बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था को नष्ट करना है मकसद?

कथित आरक्षण विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं की ओर से जारी 15 सूत्रीय एजेंडे पर नजर डालें तो एक ही लक्ष्य नजर आता है- बांग्लादेश की समृद्ध अर्थव्यवस्था को नष्ट करना और देश को पाकिस्तान जैसे दिवालिया राष्ट्र में बदलना।

देशव्यापी हिंसा और आतंकवादी कारनामों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश सरकार ने जमात-ए-इस्लामी और इसकी छात्र शाखा इस्लामी छात्र शिबिर पर बैन लगा दिया और इन्हें आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 की धारा 18/1 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया। जमात-ए-इस्लामी का मतलब है “इस्लाम का समूह” और छात्र शिबिर का मतलब है “छात्र शिविर”।

रूस के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र रोसिस्काया गजेटा के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी को भी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है और रूस में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

बांग्लादेश को बर्बाद करने के लिए अमेरिकी सीआईए और पाकिस्तानी आईएसआई द्वारा रची गई इन तथाकथित छात्र विरोध प्रदर्शनों का असली चरित्र अब सामने आ चुका है, जिससे ये साफ है कि बांग्लादेश को इस्लामवादी, जिहादी और आतंकवादी तत्वों के गठजोड़ से गंभीर खतरा है, जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं।

शांतिपूर्ण बातचीत को नकारना और विनाशकारी निर्देश जारी करना एक ऐसे एजेंडे को दर्शाता है जिसका उद्देश्य बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाना और अराजकता को भड़काना है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण समय में प्रधानमंत्री शेख हसीना और बांग्लादेश के देशभक्त नागरिकों को देश की संप्रभुता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए निर्णायक और अडिग कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि नरमी बरतने का समय बीत चुका है। एक स्थिर और समृद्ध राज्य के रूप में बांग्लादेश का अस्तित्व इन सुनियोजित आतंकवादी कामों से कड़ाई से निपटने की वजह से ही बच पाएगा।

ये मेरे करियर का आखिरी मैच… ‘अनेकहस्त’ PR श्रीजेश की बदौलत पेरिस ओलंपिक के सेमीफइनल में भारतीय टीम, कप्तान हरमनप्रीत सिंह के टूर्नामेंट में 7 गोल

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय हॉकी टीम सेमीफाइनल में पहुँच गई है। ये कमाल गोलकीपर PR श्रीजेश के कारण संभव हुआ, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया में अलग-अलग मीम्स शेयर हो रहे हैं। इन तस्वीरों में उनकी क्षमता को प्रदर्शित करते हुए उन्हें कई हाथों वाला दिखाया जा रहा है। भारत ने रविवार (4 अगस्त, 2024) को ग्रेट ब्रिटेन को हरा कर सेमीफाइनल का टिकट कटाया। भारतीय टीम पेनल्टी शूटआउट के जरिए सेमीफाइनल में पहुँची। इसके बाद देश के खेल समर्थकों में जश्न का माहौल है।

क्वार्टरफाइनल का ये मैच माफ़ी मजेदार रहा, क्योंकि दोनों टीमें आक्रामक रुख के साथ खेल रही थीं। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर कन्वर्जन के जरिए भारत के लिए 22वें मिनट में खाता खोला। इस तरह इस ओलंपिक में ये उनके लिए 7वाँ गोल रहा। इस गोल से कुछ ही देर पहले अमित रोहिदास को रेड कार्ड दिखाया गया था और भारत 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेल रहा था। 27वें मिनट में ग्रेट ब्रिटेन ने भी ली मोर्टन के गोल के जरिए बराबरी हासिल की।

जब फर्स्ट हाफ खत्म हुआ, तब तक भारत और ग्रेट ब्रिटेन 1-1 के स्कोर के साथ बराबरी पर था। इसके बाद तीसरे और चौथे क्वार्टर में ग्रेट ब्रिटेन ने अटैकिंग गेम खेला। लेकिन, 11 हर गोल के लिए हिट करने के बावजूद एक को भी वो कन्वर्ट नहीं कर पाए। भारत का डिफेन्स एकदम झकास रहा और इस तरह गेम पेनल्टी शूटआउट में चला गया। PR श्रीजेश ने एक बार फिर से साबित किया कि वो भारतीय हॉकी टीम की ‘दीवार’ हैं, वो तमगा जो क्रिकेट में कभी राहुल द्रविड़ को मिला था।

इस गेम में भारत लगभग 43 मिनट तक 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेला। PR श्रीजेश ने जीत के बाद कहा, “मैंने खुद से कहा कि ये मेरा अंतिम मैच हो सकता है, या फिर अगर मैंने गोल बचा लिया तो मुझे 2 गेम और खेलने को मिलेंगे।” श्रीजेश संन्यास का ऐलान कर चुके हैं, ऐसे में ये उनके लिए आखिरी ओलंपिक गेम है। भारत ने पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से ये गेम अपने नाम किया। पिछले टोक्यो ओलंपिक में हॉकी टीम ने 41 वर्षों बाद पदक अपने नाम किया था।

माथे पर तिलक और हाथ में कलावा… Instagram पर ‘राजू’ बन ड्राइवर मुश्ताक ने 8वीं की हिन्दू छात्रा को फाँसा, फिर भगा ले गया: घर के गहने भी गायब

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक पर नाबालिग हिन्दू लड़की से इंस्टाग्राम पर नाम बदल कर दोस्ती करने और बाद में बहला-फुसला कर भगा ले जाने का आरोप लगा है। आरोपित का नाम मुश्ताक है जो राजू बन कर माथे पर तिलक लगाता था और हाथ में कलावा बाँधा करता था। हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराज़गी जताई है और पुलिस को अल्टीमेटम देते हुए पीड़िता को जल्द से जल्द बरामद करने को कहा है। घटना मंगलवार (30 जुलाई, 2024) की है।

यह मामला आगरा के थाना क्षेत्र सदर का है। यहाँ 30 जुलाई को 14 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि कक्षा 8 में पढ़ने वाली उनकी बेटी मंगलवार की सुबह 7 बजे हर दिन की तरह स्कूल गई थी। आरोप है कि रास्ते में उसे फर्रुखाबाद का रहने वाला राजू उर्फ़ मुश्ताक मिला। मुश्ताक ने पीड़िता को बहलाया-फुसलाया और अपने बाद में अपने साथ ले गया। पीड़िता के पिता ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस शिकायत पर आगरा पुलिस ने मुश्ताक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) और 87 के तहत केस दर्ज कर लिया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। फरार आरोपित के साथ पीड़िता की भी तलाश के लिए पुलिस की टीमों का गठन कर दिया गया है। फिलहाल अभी तक आरोपित पकड़ से बाहर है। पुलिस ने मुश्ताक को जल्द गिरफ्तार करने और पीड़िता को सही सलामत बरामद कर लेने का भरोसा दिया है।

लगाता था तिलक, बांधता था कलावा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसला कर ले जाने वाले मुश्ताक ने इंस्टाग्राम पर राजू नाम से ID बना रखी है। वह खुद को हिन्दू बताया करता था और माथे पर तिलक लगाने के साथ हाथ में कलावा भी बाँधता था। आगरा में वह एक डॉक्टर की कार चलाता था। पीड़िता के परिजनों का यह भी आरोप है कि उनकी बेटी घर से जाते समय सोने और चाँदी के गहने भी अपने साथ ले कर गई है। इस बीच हिन्दू संगठनों ने इस मामले में पुलिस से पीड़िता को जल्द बरामद करने और आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

MP के सागर में दीवार गिरने से 9 बच्चों की मौत, 4 गंभीर रूप से घायल: CM मोहन यादव ने की ₹4-4 लाख मुआवजे की घोषणा

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक दिल को दहलाने वाली खबर सामने आई है। शाहपुर में स्थित हरदौल मंदिर के पास एक दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। इसमें 9 बच्चों की दबकर मौत हो गई है। वहीं, कुछ बच्चों के घायल हो गए हैं, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। दीवार 50 वर्ष पुरानी है। सीएम मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए देने की घोषणा की है।

बताया जा रहा है कि सानौधा थाना क्षेत्र के शाहपुरा के हरदौल मंदिर में शिवलिंग निर्माण और भागवत कथा का आयोजन हो रहा था। मृतक बच्चे वहाँ शिवलिंग बना रहे थे। इस दौरान दीवार भरभरा कर गिर गई और ये बच्चे मलबे में दब गए। जेसीबी मँगवाकर को मलबा हटाया गया और मृतक एवं घायल बच्चों को निकाला गया। मृतक बच्चों की उम्र 9 से लेकर 17 साल तक बताई जा रही है।

रविवार (3 अगस्त 2024) को स्कूलों में छुट्टी होने के कारण मंदिर में आयोजित शिवलिंग निर्माण और भागवत कथा में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हुए थे। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुँचा। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताया है और मृतक बच्चों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों का इलाज कराया जा रहा है।

सीएम मोहन ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “आज सागर जिले के शाहपुर में हुई अतिवृष्टि के कारण जर्जर मकान की दीवार गिरने से 9 मासूम बच्चों के काल कवलित होने की खबर सुनकर मन व्यथित है। घायल बच्चों के उचित इलाज के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया है। भगवान से करबद्ध प्रार्थना है कि दिवंगत बच्चों की आत्मा को शांति प्रदान करें।”

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा करते हुए आगे लिखा, “हादसे में घायल अन्य बच्चों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। जिन परिवारों ने मासूम बच्चों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ हैं। मृतक बच्चों के परिजनों को शासन की तरफ से 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।”

कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि जो दीवार गिरी है वह मंदिर की है। वहीं, कुछ रिपोर्ट में मंदिर से सटे मुलू कुशवाहा नाम के एक व्यक्ति के मकान की दीवार बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि पिछले 24 घंटे से बारिश होने के कारण यह दीवार खड़ी ना रह सकी और गिर गई। इसकी हालत पहले से जर्जर बनी हुई थी।

‘जो किताब बाजार में उपलब्ध, उस पर चर्चा मानहानि नहीं’: माँ अमृतानंदमयी के खिलाफ शो को हाईकोर्ट ने नहीं माना आपत्तिजनक, कहा – ये अभिव्यक्ति की आज़ादी

केरल उच्च न्यायालय ने ‘अम्मा’ के नाम से लोकप्रिय आध्यात्मिक साध्वी माता अमृतानंदमयी से जुड़ी पुस्तक पर टिप्पणी को मानहानि नहीं माना है, साथ ही एक मीडिया चैनल के खिलाफ दायर केस को भी रद्द कर दिया है। उक्त चैनल ने ‘बिग स्टोरी’ शो के माध्यम से ‘अम्मा’ अमृतानंदमयी और उनके मठ पर टिप्पणी की थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि मीडिया सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध पुस्तकों पर चर्चा कर सकता है और ऐसा करने को निष्पक्ष टिप्पणी या आलोचना के अंतर्गत ही माना जाएगा।

केरल हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि ये अभिव्यक्ति की आज़ादी (FoE) के तहत आता है। चैनल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रकाश और डायरेक्टर एवं चीफ एडिटर MV नीकेश कुमार ने याचिका दायर की थी। इन्होंने गेल ट्रेडवेलकी किताब ‘Holy Hell’ पर अपना एक शो बनाया था। आरोप है कि इसमें माता अमृतानंदमयी और उनके आश्रम का अपमान किया गया है। ऐसे में 2014 में IPC की धारा 499 और 500 के तहत मामला दर्ज कराया गया था।

जस्टिस PV कुन्हीकृष्णन ने कहा कि उक्त किताब Amazon सहित अन्य सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध है और मलयालम में भी इसका अनुवाद हुआ है। साथ ही कहा कि मीडियाकर्मियों को इस पर चुप रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, माता अमृतानंदमयी या उनके शिष्यों ने किताब या उसके लेखक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि ये मीडियाकर्मियों का कर्तव्य है कि ऐसे मुद्दों को जनता तक लेकर जाएँ, इस पर रोक लगाया जाना FoE को भंग करने जैसा होगा।

माता अमृतानंदमयी के एक अनुयायी ने इस संबंध में केस दायर किया था। वही याचिकाकर्ताओं ने कहा कि शिकायतकर्ता को इससे कोई क्षति नहीं पहुँची है, ऐसे में वो मानहानि का मामला दायर नहीं करवा सकता। कोर्ट ने उक्त अनुयायी को ‘शो से प्रभावित होने वालों’ की सूची में नहीं माना। हालाँकि, हाईकोर्ट ने कहा कि उसे ये पता नहीं है कि किताब के विरुद्ध माता अमृतानंदमयी या उनके मठ ने कोई शिकायत दायर की है या नहीं, वो ऐसा करने को स्वतंत्र हैं।

माता अमृतानंदमयी के बारे में बता दें कि दुनिया भर में उन्हें कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। 71 वर्षीय महिला साध्वी कई सामाजिक कार्यों के लिए भी जानी जाती हैं। वो ‘अमृता विश्व विद्यापीठम’ की कुलपति भी हैं। ‘हिन्दू पार्लियामेंट’ उन्हें ‘विश्व रत्न’ से सम्मानित कर चुका है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें ‘स्वच्छ भारत’ में योगदान के लिए सम्मानित कर चुके हैं। कोच्चि में वो ‘अमृता इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ का भी संचालन करती हैं।