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‘मैं भी जींस-टीशर्ट पहन लूँ तो तुम्हारे जैसी बाजारू लड़की मेरे साथ घुमने निकल जाएगी’: लव जिहाद पीड़िता से जज ने पूछे अश्लील सवाल, हो रही निलंबन की माँग

लव जिहाद की शिकार एक हिंदू महिला ने सुनवाई के दौरान अश्लील सवाल पूछने और उसका चरित्र हनन करने का आरोप लगाया था। इसको लेकर महिला संगठनों ने प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति ज्ञापन सौंपकर जज के निलंबन की माँग की है। इसके साथ ही रेप की शिकार लव जिहाद पीड़िता ने अपना केस किसी और कोर्ट में ट्रांसफर कराने के लिए इंदौर के सीजेएम (प्रधान न्यायधीश) के यहाँ आवेदन दिया है।

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसके मामले की सुनवाई के दौरान क्रॉस क्वेशचन करते हुए जज ने उससे अश्लील व्यवहार किया था और उसकी मर्यादा को ठेस पहुँचाई थी। इसको लेकर लड़की ने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई), राष्ट्रीय महिला आयोग और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज को पत्र लिखा था। इसमें महिला ने जज का नाम भी लिखा है।

पीड़िता ने कहा कि उससे सवाल करते समय स्त्री लज्जा का भी ध्यान नहीं रखा गया और उसे बाजारू औरत बता दिया गया। इस दौरान कोर्ट रूम में बैठे हुए लोग ठहाके लगाते रहे और वह शर्म से पानी-पानी होती रही। अपनी शिकायत में पीड़िता ने कोर्ट में पूछे गए सवालों के बारे में बताया है और लिखा कि अगर उसे न्याय नहीं दिया जा सकता है तो उसे इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी जाए।

पीड़िता ने बताया कि सुनवाई के दौरान उसके साथ धोखा देकर रेप करने वाले अशरफ मंसूरी के वकील को सवाल करने थे। इस दौरान जज ने वकील को रोक दिया और कहा, “इस तरह की लड़कियों से क्रॉस क्वेश्चन तो मैं स्वयं करता हूँ।’ उन्होंने सवाल करने से पहले कोर्ट रूम के बंद दरवाजे खुलवा दिए। इसके बाद जज ने पूछा, “एक गाड़ी में कैसे रेप हो सकता है? रेप के बाद तुम्हें रुपए मिल गए थे?”

पीड़िता का कहना है कि जज के सवाल पर उसने अपने वकील के माध्यम से आपत्ति जताई तो जज ने वकील को डाँटकर चुप करा दिया। पीड़िता ने शिकायत में कहा “जज ने कोर्ट रूम का दरवाजा खुलवाकर मेरे बयान लिए। मुझसे ऐसे सवाल पूछे कि सिर शर्म से झुक गया। कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग हँस रहे थे। जज ने मुझे बाजारू लड़की कहा। पूछा कि तुम्हें रेप के बाद पैसे मिल गए कि नहीं‌?”

जज पर सवाल उठाते हुए पीड़िता ने आगे कहा,“उन्होंने खुद के लिए कहा कि मैं भी जींस-टी शर्ट पहनकर निकलूँगा तो तुम्हारे जैसी लड़कियाँ मेरे साथ घूमने निकल जाएँगी। आजकल इस तरह की बाजारू लड़कियों का कोई चरित्र नहीं बचा है और ये रुपए लेने की नीयत से झूठे केस दर्ज कराती हैं। इस तरह के शब्द सुनकर कोर्ट में मौजूद आरोपित के वकील सहित सभी लोग ठहाके मारकर हँस रहे थे।

पीड़िता बोली, “जिन शब्दों के साथ न्यायाधीश महोदय ने मेरे चरित्र और गरिमा का हनन किया है, वह वापस लौटना संभव नहीं है। जिस प्रकार से न्यायाधीश महोदय के द्वारा मेरे साथ अश्लील तरीके से चर्चा की गई है… आरोपित के वकील को जैसा विश्वास दिलाया गया… उससे ऐसा लग रहा है कि मुझे उनके न्यायालय में न्याय नहीं मिलेगा। मुझे न्याय नहीं दिलवा सकते तो इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करें।”

क्या था मामला?

पीड़िता ने बताया था कि साल 2015 में उसकी शादी हुई थी, लेकिन उसके पति किसी और को प्यार करते थे। इसके कारण दोनों साल 2017 में अलग हो गए। 2019 में ‘हेलो’ ऐप के माध्यम से आरोपित अशरफ मंसूरी उसके संपर्क में आया। अशरफ लगातार युवती को मैसेज भेजता था। के बाद एक दिन युवती ने कहा कि वो उससे दोस्ती नहीं कर सकती क्योंकि वो मुस्लिम है। घरवाले रिश्ते के लिए नहीं मानेंगे।

उस दौरान अशरफ ने उसे बहुत मनाने की कोशिश की, लेेकिन युवती ने साफ मना कर दिया था। कुछ दिन के बाद अशरफ ने आशु नाम से आईडी बनाकर युवती से संपर्क किया। उसने खुद को हिंदू बताकर युवती से दोस्ती कर ली। धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकात हुई और रिश्ता आगे बढ़ा। युवती ने कहा कि उसे शादी करनी है टाइम पास नहीं। तब अशरफ ने कहा कि भाई-बहन की शादी के बाद वह शादी करेगा।

अशरफ की सुनकर युवती मान गई। आशु बनकर अशरफ बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ लाकर युवती को घुमाने लगा, दोस्तों के फ्लैट पर ले जाने लगा, संबंध बनाने लगा, मगर एक दिन अचानक उसका फोन बंद हो गया। युवती ने परेशान होकर उसके दोस्त को फोन किया और तब उसे पता चला कि वो आशु नहीं अशरफ मंसूरी है। पीड़िता यह सुन सदमे में आ गई।

कुछ दिन के बार अशरफ का फोन आया तो उसने विरोध किया और अशरफ से बातचीत बंद कर दी। तब अशरफ उसके घर और दफ्तर के बाहर आकर तंग करने लगा। फोटो लीक करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करने लगा। अंत में पीड़िता ने थाने में शिकायत दी। अशरफ के खिलाफ धारा 376, 354, एससी-एसटी एक्ट और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया।

OpIndia इम्पैक्ट: सपा नेता राशिद खान पर FIR, अयोध्या गैंगरेप पीड़िता को जान से मारने की दी धमकी, आरोपित मोईद खान की संपत्ति पर होगा बुलडोजर एक्शन

अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी पार्टी नेता मोईद खान द्वारा एक नाबालिग OBC बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में ऐक्शन जारी है। प्रदेश की योगी सरकार ने थाना प्रभारी रतनलाल शर्मा और चौकी इंचार्ज अखिलेश गुप्ता को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, मोईद खान की संपत्ति की जाँच हो रही है। अब नगर पंचायत अध्यक्ष राशिद खान के खिलाफ भी FIR दर्ज कर ली गई है।

ऑपइंडिया द्वारा लगातार इस खबर को कवर करने के बाद इसके इंपैक्ट दिखने लगे हैं। सरकार एवं प्रशासन इस मामले को बेहद कड़ाई से हैंडल कर रहा है। इसी मामले में अयोध्या के कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराई गई है। उसमें कहा गया है कि भरतकुंड भदरसा के नगर पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद राशिद खान ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रेप पीड़िता की हत्या करने की कोशिश की।

थाने में दी गई शिकायत में कहा गया है, “रेप पीड़िता की हत्या के उद्देश्य से मोहम्मद राशिद अपने साथ जय सिंह तथा एक अज्ञात व्यक्ति को लेकर गुरुवार (1 अगस्त 2024) की रात 11 बजे महिला जिला अस्पताल के कमरे के पास पहुँच गए।” शिकायत में कहा गया है कि इससे पहले भी राशिद ने पीड़िता के घर में घुसकर धमकी दी थी। राशिद भी समाजवादी पार्टी का नेता है।

पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि मोहम्मद राशिद खान ने पीड़िता के घर घुसकर उस पर सुलह करने का दबाव डाला था। उसने धमकी देते हुए कहा था, “सुलह नहीं करोगी तो जान से जाओगी।” इसको लेकर शिकायतकर्ता ने पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की कॉपी के अनुसार, कोतवाली थाना के प्रभारी अश्विनी कुमार पांडेय ने मोहम्मद राशिद खान एवं जय सिंह तथा एक अज्ञात व्यक्ति पर भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की धारा 333 (जबरदस्ती किसी के घर में घुसने) और बीएनएस की धारा 351(3) (आपराधिक धमकी देने) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जाँच SI उमेश वर्मा को सौंपा है।

दरअसल, गैंगरेप पीड़ित नाबालिग लड़की की माँ और पिता ने शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। पूराकलंदर थानाध्यक्ष रतनलाल शर्मा और भदरसा चौकी इंचार्ज अखिलेश गुप्ता को सस्पेंड कर दिया गया है। दोनों ने रेप का मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी की थी। इसके अलावा, मुख्य आरोपित मोईद खान की संपत्तियों की भी जाँच के आदेश दिए गए हैं।

आरोप है कि मोईद खान ने तालाब और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इतना ही नहीं, मोईद खान पर यह भी आरोप है कि उसने कई दलित परिवार की जमीनों पर कब्जा कर रखा है। बजरंग दल ने जिलाधिकारी को लिखे गए एक पत्र में कहा है कि भदरसा भाहर में मोईद की बेकरी भी दलित समाज के व्यक्ति जानकी प्रसाद की जमीन पर बनी है, जिसका गाटा संख्या 1675 और 1676 है।

मोईद खान की संपत्तियों की जाँच के आदेश के बाद राजस्व विभाग ने शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को उसकी जमीन की पैमाईश शुरू कर दी। कहा जा रहा है कि सपा नेता मोईद खान की बेकरी समेत उसकी कई प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चल सकता है। शनिवार (3 अगस्त) को राजस्व की टीम फिर मोईद खान की संपत्तियों के पास फिर पहुँचकर कार्रवाई कर सकती है।

उधर, बजरंग दल ने मोईद खान और थाना प्रभारी रतनलाल शर्मा की संपत्ति एवं गतिविधियों की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है। हिंदू संगठन का कहना है कि पीड़िता के परिजनों ने जब रेप की शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो पुलिस ने आनाकानी की। मोईन खान को पुराकलंदर थाने के प्रभारी रतनलाल शर्मा द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है।

इतना ही नहीं, हिंदू विरोधी गतिविधियों को संचालित करने वाले अपराधियों को भी रतनलाल शर्मा द्वारा संरक्षण देने का आरोप बजरंग दल द्वारा लगाया गया है। बता दें कि पिछले 12 साल से पुलिस चौकी मोईद खान की प्रॉपर्टी में संचालित हो रहा थी। हिंदू संगठनों के हस्तक्षेप के बाद ही थाना प्रभारी शर्मा ने मोईद खान के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

बता दें कि सीएम योगी ने गुरुवार (1 अगस्त 2024) को सदन में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा था, “ये अपराधी समाज के सबसे बड़े कलंक हैं, कोढ़ हैं और इस कोढ़ को जब तक हटाएँगे नहीं, तब तक उत्तर प्रदेश की स्थिति को ठीक करने में कठिनाई होगी।” विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के सदस्यों को जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा, “ऐसे अपराधियों को माला पहनाएँगे क्या?”

पेरिस ओलंपिक में गर्मी से परेशान खिलाड़ियों के लिए भारत सरकार ने लगवाए 40 AC, ओलंपिक आयोजन समिति ने नहीं की थी व्यवस्था

ओलंपिक 2024 पेरिस में चल रहा है। दुनिया भर के खिलाड़ी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन एक दिक्कत है वहाँ। फिलहाल वहाँ का मौसम बहुत ही गर्म और उमस भरा है। शरीर-तोड़ मेहनत और हद से ज्यादा पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों को ऐसे मौसम में भी एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं मिल रही। पेरिस में ओलंपिक आयोजन समिति ने इसकी व्यवस्था ही नहीं की है। ऐसे में अपने खिलाड़ियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए, भारत सरकार ने खुद के खर्चे पर 40 एसी उपलब्ध कराए हैं।

भारत के खिलाड़ी अपना सारा ध्यान सिर्फ खेल पर लगाएँ, इसके लिए भारत सरकार ने कदम उठाया। भारत के खेल मंत्रालय द्वारा 40 पोर्टेबल एयर कंडीशनर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बाद पेरिस ओलंपिक स्थित खेल गाँव में भारत के खिलाड़ी अपने कमरों में AC की ठंडक लिए आराम करते देखे गए।

मंत्रालय के अनुसार, भारतीय ओलंपिक संघ और फ्रांसीसी दूतावास के साथ चर्चा के बाद पेरिस में ओलंपिक खेल गाँव में एयर कंडीशनर भेजे गए।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, “पेरिस में गर्मी और उमस के कारण ओलंपिक खेल गाँव में खिलाड़ियों के सामने आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, खेल मंत्रालय ने खेल गाँव के उन कमरों में 40 एसी उपलब्ध कराने का फैसला किया है, जहाँ भारतीय खिलाड़ी ठहरे हुए हैं।”

आपको बता दें कि वर्तमान में पेरिस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है। साथ में उमस भी बहुत है। ऐसे में दुनिया भर से वहाँ गए खिलाड़ियों को बगैर AC बहुत कठिनाई हो रही है। 

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने अब तक 3 पदक जीते हैं। सभी पदक निशानेबाजी में आए हैं।

ताजमहल के अंदर 2 युवकों ने चढ़ाया गंगाजल, दीवार पर लगाया ऊँ का स्टीकर: पुलिस ने हिरासत में लिया, कुछ दिन पहले एक महिला भी लेकर आई थीं काँवड़

आगरा में स्थित ताजमहल को कुछ लोग तेजोमहालय बताते हैं और कहते हैं कि यह जयपुर के राजा मानसिंह का शिवालय था। इसको लेकर अब दो हिंदू युवकों ने ताजमहल में घुसकर अंदर गंगाजल चढ़ाया है। दोनों ने खुद को हिंदू महासभा का बताया है। दोनों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इससे पहले एक महिला ने ताजमहल में जल चढ़ाने की कोशिश की थी।

ताजमहल में जल चढ़ाने का दोनों युवकों ने वीडियो भी बनाया है। सामने आए वीडियो में दिख रहा कि एक युवक एक लीटर की पानी की बोतल लेकर अंदर जाता है। इस दौरान वह कहता है कि वे अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गए हैं। इसके बाद ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष करते हैं। फिर मकबरे के पास पहुँच कर तहखाने में बोतल से गंगाजल डाल देते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान युवक ने ताजमहल की मुख्य इमारत की दीवार पर ‘ओम’ का स्टीकर चिपकाकर उस पर जल चढ़ा दिया। घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा में लगी CISF ने दोनों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। DCP आगरा सिटी सूरज राय ने कहा कि दो युवक वीडियो बनाकर ले गए हैं। उन्होंने कहा कि गंगाजल चढ़ाने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जाँच की जा रही है।

दोनों युवक ने खुद को अखिल भारतीय हिंदू महासभा का कार्यकर्ता बताया है। हिंदू महासभा सहित हिंदू संगठनों का दावा है कि आज का ताजमहल एक शिव मंदिर है, जिसका नाम तेजोमहालय था। इसे शाहजहाँ ने जबरन हथिया लिया है। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया सिंह ने भी दावा किया था कि ताजमहल उनकी प्रोपर्टी है।

प्रिंसेस दीया कुमारी ने मई 2022 में कहा था, “ताजमहल हमारी प्रॉपर्टी है। यह हमारे परिवार के पैलेस की सम्पत्ति पर बना है। शाहजहाँ ने उस समय इस संपत्ति पर कब्जा कर लिया था। जब शाहजहाँ ने इस कब्जा किया था, उस समय देश में मुगल सरकार थी। इसलिए उसका विरोध नहीं किया जा सका। हमारे राजपरिवार के ट्रस्ट में पोथीखाना है। उससे जुड़े तमाम दस्तावेज उसमें मौजूद हैं।”

पिछले दिनों हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष मीना राठौड़ सोरो से काँवड़ लेकर ताजमहल पहुँची थीं। हालाँकि, पुलिस ने उन्हें पश्चिमी गेट पर ही रोक लिया था। मीना राठौड़ वहाँ करीब चार घंटे तक खड़ी रही थीं। इसके बाद अब शनिवार (3 अगस्त 2024) की सुबह महासभा के मथुरा की जिलाध्यक्ष छाया गौतम के साथ उनके दो कार्यकर्ताओं ने ताजमहल में गंगाजल चढ़ाने का दावा किया है।

काँवड़ मार्ग पर जूस बेचने वाला नदीम कर चुका है आशा देवी का कत्ल, ढाबा मालिक नवाब खाँ ने मारी थी शुक्रमपाल और ओमवीर को गोली: रोटी पर ‘थूक’ वाला कारनामा भी

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में प्रशासन ने काँवड़ यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले सभी दुकानदारों को अपने-अपने असली नामों के साथ दुकानदारी करने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों पर ठीक से अमल भी नहीं हुआ था कि इस मुद्दे को राजनैतिक और चरमपंथी ढंग से तूल दिया जाने लगा। महज नाम लिखने के आदेश को मुस्लिमों पर अन्याय और अत्याचार बताने की कोशिश की जाने लगी। मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया। इस बीच न सिर्फ तमाम साधु-संतों बल्कि हिन्दू दुकानदारों ने भी इस आदेश का विरोध होने पर हैरानी जताई। उन्होंने प्रशासन के इस कदम को समाज में शांति व्यवस्था के लिए उचित बताया।

स्वामी यशवीर महराज ने तो नाम बदल कर दुकानदारी को बड़ी साजिश का हिस्सा करार दिया। ऑपइंडिया ने इन मामलों की जमीनी तौर पर पड़ताल की तो कुछ ऐसे केस निकल कर सामने आए, जो कहीं न कहीं प्रशासन को अतिरिक्त सावधानी और सतर्कता बरतने के लिए एक संकेत हो सकते हैं। पूर्व में कई दुकानों पर ऐसी घटनाएँ घटित हुई हैं, जो समाज की शांति को प्रभावित कर सकती थीं लेकिन प्रशासनिक सतर्कता से कोई बड़ा नुकसान होने से बच गया था।

जूस बेचने वाले नदीम ने की थी आशा देवी की हत्या

गाजियाबाद का मुरादनगर काँवड़ियों का सबसे बड़ा स्टॉप पॉइंट है। यहाँ गंगनहर को लोग छोटा हरिद्वार बताते हैं। मुरादाबाद में लम्बी दूरी से आए काँवड़िये स्नान करते हैं और थकान उतारने के बाद आगे की यात्रा शुरू करते हैं। इसी मुरादनगर के काँवड़ मार्ग पर नदीम साल 2022 तक जूस की दुकान चलाता था। काँवड़िये भी यहाँ जूस पीते थे।

यहाँ जूस पीने आने वाली शादीशुदा आशा देवी को साल 2021 में उसने अपने प्यार के जाल में फँसा लिया था। लगभग 1 साल तक चले इस रिश्ते के बाद नदीम ने सितंबर 2023 में आशा देवी को कुल्हाड़ी से काट डाला था। आशा देवी को मार कर नदीम ने उसके खून से सने कपड़े एक मंदिर के पास छिपा दिए थे।

सबूत मिटाने के लिए नदीम ने आशा देवी का फोन उसी गंगनहर में फेंका था, जहाँ से काँवड़िये जल भरते हैं और स्नान करते हैं। बाद में नदीम को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना के बाद नदीम के परिवार ने अपना कारोबार गाजियाबाद के मुरादनगर से उत्तर प्रदेश के ही मुरादाबाद में शिफ्ट कर लिया था।

नदीम का एक भाई तो मुरादाबाद के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में जूस की दुकान खोलने में सफल भी रहा था। आज भी नदीम के परिवार की दुकान ‘फ्रेश जूस हॉउस’ नाम से मुरादाबाद के थाना सिविल लाइंस के सामने चल रही है। इस मार्ग से गुजरने वाले कई काँवड़िये यहाँ जूस पीते हैं।

2 हिन्दुओं को गोली मार चुका है ढाबा मालिक नवाब खाँ

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में मुख्य काँवड़ मार्ग पर नवाब खाँ ढाबा चलाता था। यह ढाबा मंगलौर बाजार के पास लिब्बरहेड़ी नाम की जगह पर था। इसके ढाबे का नाम भी स्थानीय लोगों के मुताबिक किसी हिन्दू प्रतीक के तौर पर था। नवाब खाँ के ढाबे के पास ही ओमवीर और शुक्रमपाल नाम के 2 भाइयों की दुकान थी।

घटना अगस्त 2018 की है। तब ओमवीर की दुकान में चोरी हुई थी। इसी चोरी के मुद्दे पर ओमवीर और उसके भाई शुक्रमपाल की ढाबा मालिक नवाब से बहस हुई थी। कुछ ही देर की बहस के बाद नवाब खाँ ने एक हथियार से दोनों भाइयों को गोली मार दी थी।

गोली लगने से ओमवीर और शुक्रमपाल बुरी तरह से घायल हो गए थे। अस्पताल में शुक्रमपाल ने दम तोड़ दिया था। ओमवीर का लम्बे समय तक इलाज चला था। उनको गंभीर चोटें आईं थीं। नवाब खाँ का वीडियो भी तब गोली चलाते हुए वायरल हुआ था। पुलिस ने तब FIR दर्ज करके नवाब खाँ को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल उसी स्थान पर अभी भी एक ढाबा चल रहा है।

स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि नवाब के जेल जाने के बाद इसे उसके परिजनों ने लगभग 70 लाख रुपए में किसी को बेच दिया था। हालाँकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई कि अभी भी नवाब खाँ उस ढाबे में हस्तक्षेप रखता है या नहीं।

रोटी पर थूक रहा था मकबूल ताहरी वाला

तीसरा मामला मुज़फ्फरनगर के अति व्यस्त मीनाक्षी चौक का है। यह स्थान शिव चौक के पास ही है, जहाँ हर दिन हजारों काँवड़िये जल चढ़ाते हैं। मीनाक्षी चौक पर मकबूल ताहरी नाम से दुकान है, जो खास मौकों पर लोगों को फ्री में ताहरी खिलाया करता है। विश्वकप क्रिकेट 2023 में भी मकबूल ताहरी की तरफ से विराट कोहली के शतक पर लोगों को फ्री में ताहरी बाँटी गई थी। इसी दुकान का दिसंबर 2023 में एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में दुकान के एक कारीगर पर रोटियों में थूकने का आरोप लगा था।

वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू संगठन के सदस्यों ने पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस ने भी कारीगर को पूछताछ के लिए बुलवाया था। हालाँकि इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

खाने पर थूकने की कुछ अन्य घटनाएँ गाजियाबाद और मेरठ जिलों में भी सामने आईं थीं। इन पर भी पुलिस ने अलग-अलग मौकों पर कानूनी कार्रवाई की है। इसके अलावा ढाबों पर वाद-विवाद जैसे कई अन्य केस भी विभिन्न थानों में दर्ज हुए हैं।

पाकिस्तान-बांग्लादेश से घुसपैठ जारी… तत्काल प्रभाव से हटाए गए BSF चीफ नितिन अग्रवाल, SDG खुरानिया की भी छुट्टी

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बढ़ते घुसपैठ और आतंकी हमलों के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ा ऐक्शन लिया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के प्रमुख नितिन अग्रवाल और डिप्टी स्पेशल डायरेक्टर जनरल योगेश बहादुर खुरानिया को पद से हटा दिया। दोनों को अपने-अपने होम कैडर में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है।

नितिन अग्रवाल का होम कैडर केरल है और खुरानिया का ओडिशा है। इन दोनों अधिकारियों को नई जिम्मेदारी क्या दी गई है, इसके बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है। दोनों को हटाने के संबंध में केंद्र ने 30 जुलाई 2024 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति को आदेश जारी करने के लिए कहा था। इसके बाद डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (DoPT) की डायरेक्टर साक्षी मित्तल ने आदेश जारी कर दिया।

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजह जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से पाकिस्तान होने वाले घुसपैठ में पिछले एक साल में वृद्धि और आतंकी हमलों में वृद्धि है। इस मामले में केंद्र सरकार का अब तक का यह सबसे बड़ा प्रशासनिक फैसला है, जिसमें प्रमुख सुरक्षा बल के सर्वोच्च दो वरिष्ठ अधिकारियों पर गाज गिरी है। खुरानिया पाकिस्तान सीमा पर तैनात बल का नेतृत्व कर रहे थे।

नितिन अग्रवाल 1989 बैच के केरल कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। वे BSF के पहले डीजी हैं, जिन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने नहीं दिया गया। इससे पहले BSF के जितने भी डायरेक्टर जनरल थे, सभी ने अपना कार्यकाल पूरा किया था। नितिन अग्रवाल ने पिछले साल जून में DG का पदभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल 2026 में पूरा होने वाला था।

डिप्टी स्पेशल डायरेक्टर जनरल योगेश बहादुर खुरानिया 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं। वे स्पेशल डीजी (वेस्ट) के रूप में पाकिस्तान बॉर्डर पर सिक्योरिटी इंचार्ज थे। BSF में आने से पहले वे ओडिशा पुलिस के बड़े पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वे एडिशनल DGP के अलावा राउरकेला, मयूरभंज और गंजम में SP भी रह चुके हैं। ​​​​भुवनेश्वर, बेरहमपुर और संबलपुर रेंज के DIG और IG भी रह चुके हैं।

सरकार के इस कठोर कदम के पीछे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े आँकड़े गवाही दे रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, इस साल 21 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में 11 आतंकी हमले और 24 एनकाउंटर हो चुके हैं। इनमें 14 सुरक्षाकर्मियों और 14 नागरिकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, बांग्लादेश सीमा पर भी घुसपैठ पर लगाम कसने में नाकामी को दूसरी प्रमुख वजह बताई जा रही है।

लगभग 2.65 लाख कर्मियों वाला सुरक्षा बल यानी बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर सुरक्षा का काम देखती है। बीएसएफ जम्मू, पंजाब, गुजरात, राजस्थान से लगी 2290 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा की निगरानी करती है। इनमें सीमा से सटे कई इलाके बेहद संवेदनशील हैं। जम्मू का क्षेत्र तो जंगलों और पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है। वहीं, गुजरात का इलाका समुद्र से घिरा है।

अयोध्या में OBC बच्ची से रेप करने वाले सपा नेता मोईद खान की संपत्ति की जाँच शुरू, सरकारी एवं दलितों की जमीनों पर कब्जे का आरोप: SHO एवं चौकी इंचार्ज सस्पेंड

अयोध्या के समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी मोईद खान द्वारा OBC समाज की एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने के मामले में योगी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। शहर के पूराकलंदर थानाध्यक्ष रतनलाल शर्मा और भदरसा चौकी इंचार्ज अखिलेश गुप्ता को सस्पेंड कर दिया गया है। दोनों ने रेप का मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी की थी। इसके अलावा, मुख्य आरोपित मोईद खान की संपत्तियों की भी जाँच के आदेश दिए गए हैं।

दरअसल, गैंगरेप पीड़ित नाबालिग लड़की की माँ और पिता ने आज शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने यह ऐक्शन लिया है। योगी सरकार ने समाजवादी पार्टी के नेता और गैंगरेप के मुख्य आरोपित मोईद खान की संपत्तियों की जाँच के आदेश के बाद राजस्व विभाग ने उसकी जमीन की पैमाईश शुरू कर दी है।

पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद सीएम योगी ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “आज लखनऊ में जनपद अयोध्या के बीकापुर विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक डॉक्टर अमित सिंह चौहान जी के साथ आए अयोध्या की पीड़ित बच्ची के परिजनों से भेंट की। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, उन पर कठोरतम कार्रवाई होगी। बच्ची को हर कीमत पर न्याय दिलाने हेतु हम प्रतिबद्ध हैं।”

आरोप है कि मोईद खान ने तालाब और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इतना ही नहीं, मोईद खान पर यह भी आरोप है कि उसने कई दलित परिवार की जमीनों पर कब्जा कर रखा है। बजरंग दल ने जिलाधिकारी को लिखे गए एक पत्र में कहा है कि भदरसा भाहर में मोईद की बेकरी भी दलित समाज के व्यक्ति जानकी प्रसाद की जमीन पर बनी है, जिसका गाटा संख्या 1675 और 1676 है।

बजरंग दल ने मोईद खान और थाना प्रभारी रतनलाल शर्मा की संपत्ति एवं गतिविधियों की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है। हिंदू संगठन का कहना है कि पीड़िता के परिजनों ने जब रेप की शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो पुलिस ने आनाकानी की। मोईन खान को पुराकलंदर थाने के प्रभारी रतनलाल शर्मा द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है।

इतना ही नहीं, हिंदू विरोधी गतिविधियों को संचालित करने वाले अपराधियों को भी रतनलाल शर्मा द्वारा संरक्षण देने का आरोप बजरंग दल द्वारा लगाया गया है। बता दें कि पिछले 12 साल से पुलिस चौकी मोईद खान की प्रॉपर्टी में संचालित हो रहा थी। हिंदू संगठनों के हस्तक्षेप के बाद ही थाना प्रभारी शर्मा ने मोईद खान के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

बता दें कि सीएम योगी ने गुरुवार (1 अगस्त 2024) को सदन में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा था, “ये अपराधी समाज के सबसे बड़े कलंक हैं, कोढ़ हैं और इस कोढ़ को जब तक हटाएँगे नहीं, तब तक उत्तर प्रदेश की स्थिति को ठीक करने में कठिनाई होगी।” विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के सदस्यों को जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा, “ऐसे अपराधियों को माला पहनाएँगे क्या?”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अयोध्या का ये मामला है। इसका अपराधी मोईद खान समाजवादी पार्टी का नेता है। अयोध्या के सांसद की टीम का सदस्य है। 12 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के कृत्य में शामिल पाया गया है। अभी तक समाजवादी पार्टी ने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। अब क्या कोई समाजवादी पार्टी का नाम भी ना बोले?”

मोईद खान को लेकर सीएम योगी ने कहा था, “आप एक टीम मेंबर हैं। आपके सांसद के साथ बैठना है, खाना है, उनके साथ चलना है। यह एक अति पिछड़ी जाति की बालिका से जुड़ा हुआ मामला है। वो इतनी घटिया हरकत में संलिप्त हैं, इसके बावजूद भी समाजवादी पार्टी द्वारा इसे हल्केपन से लेने का काम होता है।”

मोहम्मद जुबैर ने पुलिस के चुनिंदा बयान को लेकर एक मुस्लिम को बताया कट्टरता का शिकार, ‘हिंदू लड़की’ को तंग करने वाली जानकारी नहीं बताई

सोशल मीडिया पर अपने एजेंडे के तहत आधा-अधूरा जानकारी साझा करके देश में आग लगाने के लिए कुख्यात ऑल्ट न्यूज के सह-संपादक मोहम्मद जुबैर अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा है। उसने एक खबर साझा की है, जिसमें गोपेश नामक एक युवक ने अपने पड़ोसी अहमद का मोबाइल चुराकर यूपी पुलिस को धमकी भरा ईमेल भेजा था। हालाँकि, जुबैर इस पूरे मामले के उस बिंदु को गायब कर दिया, जो बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यानी गोपेश ने ऐसा क्यों किया था, इसे जानबूझकर जुबैर ने छोड़ दिया। इसके पीछे उसके कुछ मकसद हो सकते हैं।

दरअसल, आगरा पुलिस ने धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद गुरुवार (1 अगस्त 2024) को राजस्थान के धौलपुर जिले से 10वीं कक्षा के एक छात्र को गिरफ्तार किया है। ईमेल में कहा गया था कि वह आगरा हवाई अड्डे, जिसे खेरिया हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है, और रेलवे स्टेशन को 50 किलोग्राम आरडीएक्स लगाकर उड़ा देगा। साथ इसे रोकने के लिए पुलिस को चुनौती दी गई थी।

इस घटना का खुलासा 30 जुलाई 2024 को हुआ। उत्तर प्रदेश पुलिस कंट्रोल रूम को के अहमद ([email protected]) नाम के अकाउंट से एक ईमेल मिला था। पुलिस जाँच में पता चला कि गोपेश नाम के लड़के ने अपने पड़ोसी अहमद का फोन चुराया था और उसी फोन से ईमेल भेजा था। आगरा के डीसीपी के X हैंडल से इसके बारे में जानकारी साझा की गई।

इस बारे में बताते हुए आगरा सिटी के डीसीपी ने कहा, “गोपेश अहमद को फँसाना चाहता था, क्योंकि वह लगातार इंस्टाग्राम पर उसकी बहन को परेशान कर रहा था। उसे परेशान न करने के लिए कहे जाने के बावजूद अहमद ने अपना व्यवहार जारी रखा। इसके बाद आरोपित ने उसका फोन चुरा लिया और यूपी पुलिस को आगरा एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने का फर्जी ईमेल भेजा।”

पुलिस अधिकारी ने कहा, “अहमद को फँसाने के लिए गोपेश ने शिमला और दिल्ली में पुलिस को धमकी भरे ईमेल भी भेजे, लेकिन इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसे उम्मीद थी कि उत्तर प्रदेश पुलिस इस मामले को अधिक सख्ती से जवाब देगी। इसलिए उसने हमें बम की धमकी भेजी।”

इस घटना को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने अपने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साजा किया। हालाँकि, जुबैर ने इस घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण विवरण को छोड़ दिया। यहाँ बताना जरूरी है कि मोहम्मद जुबैर अपने एजेंडे के अनुसार ‘फैक्ट-चेक’ करने के लिए कुख्यात हैं।

जुबैर ने पोस्ट किया, “यूपी पुलिस आगरा कंट्रोल रूम को एक ईमेल मिला, जिसमें आगरा एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर बम से हमला करने की धमकी दी गई थी। गुमनाम ईमेल (के अहमद के नाम से ईमेल: [email protected]) में दावा किया गया था कि आगरा एयरपोर्ट पर 50 किलोग्राम आरडीएक्स रखा जाएगा। पुलिस ने राजस्थान के 21 वर्षीय गोपेश को गिरफ्तार किया है।”

जुबैर ने आगे लिखा, “गोपेश ने पहले अहमद का फोन चुराया, एक ईमेल आईडी बनाई और आगरा पुलिस को धमकी भरा ईमेल भेजा। उसने यूपी पुलिस को धमकी भरा ईमेल भेजा, अन्य राज्यों को नहीं क्योंकि उसे भरोसा था कि यूपी पुलिस अहमद के खिलाफ जल्दी कार्रवाई करेगी। बहुत बढ़िया @agrapolice” उन्होंने मामले को समझाते हुए डीसीपी आगरा सिटी का वीडियो भी पोस्ट किया।

हालाँकि, अहमद को फँसाने के पीछे के मकसद के बारे में जुबैर ने नहीं दिया। जुबैर ने पोस्ट में यह संकेत देने की कोशिश की कि एक हिंदू ने धार्मिक कट्टरता के कारण एक मुस्लिम पड़ोसी को निशाना बनाया। हालाँकि, मामला एक लड़के के बारे में था जो अपने पड़ोसी को ‘फँसाने’ की कोशिश कर रहा था। यह पड़ोसी इंस्टाग्राम पर उसकी बहन को लगातार परेशान कर रहा था।

जुबैर ने अपनी पोस्ट में इस बात छिपाकर अपने 10 लाख से अधिक फ़ॉलोअर्स को इस बात की जानकारी नहीं मिली कि कक्षा 10 के छात्र ने अपने पड़ोसी के नाम पर बम की धमकी वाला फर्जी ईमेल क्यों भेजा। वहीं, जुबैर ने उन घटनाओं के क्रम को विस्तार से बताया जिसके कारण आगरा पुलिस ने कक्षा 10 के छात्र को गिरफ़्तार किया, लेकिन उन्होंने इस महत्वपूर्ण विवरण को छोड़ दिया।

नूपुर शर्मा के खिलाफ भी अधूरा वीडियो साझा करके लगाई थी आग

आमतौर पर जुबैर इस्लामवाद के खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ जुबैर इसी तरह की ऑनलाइन निशाना बनाता है। इसका उदाहरण भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा हैं। साल 2022 में मोहम्मद जुबैर ने टाइम्स नाउ की बहस में उनकी प्रतिक्रिया के अधूरे वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके कारण दो समुदायों में लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

शर्मा टाइम्स नाउ पर एक बहस में हिस्सा ले रही थीं, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग को लेकर चर्चा हो रही थी। इसमें इस्लामवादियों ने दावा किया था कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वुजुखाना में पाया गया शिवलिंग एक फव्वारा है। इस दौरान इस्लामवादियों ने हिंदू देवी-देवताओं का मजाक भी उड़ाया। इस पर नूपुर शर्मा ने जवाब दिया।

भाजपा की तत्कालीन प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने उनसे हिंदू देवताओं का अपमान करने से बचने के लिए कहा था। जब वे नहीं माने तो शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम पर उनके धर्मग्रंथों और कुरान का हवाला देते हुए एक टिप्पणी की थी। मोहम्मद जुबैर ने उस बहस का एक अधूरा वीडियो साझा किया था। इसके बाद देश भर में सर तन से जुदा के नारे लगाए थे और कई लोगों की हत्या कर दी गई थी।

सपा सांसद बाबू कुशवाहा की करोड़ों की जमीन जब्त, निर्माण पर चला बुलडोजर: अब तक ₹250 करोड़ की संपत्ति सीज, ₹10,000 करोड़ के घोटाले की ED कर रही जाँच

समाजवादी पार्टी के सांसद बाबू स‍िंह कुशवाहा पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसते हुए लखनऊ के कानपुर रोड स्थित उनकी करोड़ों रुपए की जमीन को जब्त कर लिया है। इसके साथ ही उस जमीन पर कराए गए निर्माण को भी तोड़ दिया गया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले से संबंधित हैं और कुशवाहा इसके आरोपित हैं।

प्रवर्तन न‍िदेशालय की इस मामले में कालाधन से संबंधित धन शोधन अधिनियम (PMLA) के तहत जाँच कर रही है। जब्ती वाली जमीन पर निर्माण को तोड़ने के लिए वह अपने साथ बुलडोजर भी लेकर गई थी। बता दें कि जिस वक्त एनएचआरएम घोटाला हुआ था, उस वक्त बाबू सिंह कुशवाहा उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार में परिवार कल्याण मंत्री थे। इस केस में वे 4 साल तक जेल में भी बंद थे।

जानकारी के अनुसार, जौनपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद बाबू सिंह कुशवाहा की जमीन लखनऊ के सरोजिनी नगर थाना क्षेत्र में स्थित स्कूटर इंडिया के पास है। यह जमीन काफी कीमती बताई जा रही है। बता दें कि ED अब तक बाबू सिंह कुशवाहा की करीब 250 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज कर चुकी है। उसके बाद अब यह कार्रवाई की गई है।

मायावती के मुख्यमंत्री रहने के दौरान यह घोटाला हुआ था। उस समय यह घोटाला 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का बताया गया था। दरअसल, एनएचआरएम के तहत यह कोष केंद्र सरकार ने आवंटित किया था। इसके अलावा कुशवाहा ने उत्तर प्रदेश श्रम निर्माण एवं सहकारी संघ लिमिटेड (लैकफेड) में भ्रष्टाचार करके करोड़ों रुपए की कमाई थी और उनमें बेनामी संपत्तियों में लगाया।

ईडी ने अपनी जाँच में कुशवाहा की अरबों रुपए की संपत्ति का खुलासा किया है। ये संपत्तियाँ कुशवाहा के परिजनों के अलावा उनके रिश्तेदारों एवं करीबियों के नाम पर हैं। जाँच एजेंसियों ने इन अवैध संपत्तियों की पूरी सूची तैयार की है और उनकी जब्ती का काम जारी है। बाबू सिंह कुशवाहा फिलहाल जौनपुर से सपा के सांसद हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले MCD-पुलिस को रगड़ा, फिर UPSC छात्रों की मौत का मामला CBI को सौंपा: ड्राइवर को अरेस्ट करने पर भी लताड़ा, कहा- शुक्र है पानी का चालान नहीं काटा

दिल्ली हाई कोर्ट ने ओल्ड राजेंद्र नगर के राव IAS एकेडमी के बेसमेंट में भरे बारिश के पानी में डूबकर हुई तीन विद्यार्थियों की मौत की जाँच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। कोर्ट ने इस निर्णय के पीछे घटना की गंभीरता और लोकसेवकों के भ्रष्टाचार में संलिप्तता की आशंका को कारण बताया है। हाई कोर्ट ने एमसीडी, दिल्ली पुलिस और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को भी लताड़ा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को इस मामले की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को निर्देश दिया कि वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की मौत के मामले की सीबीआई जाँच की निगरानी करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नामित करे। साथ ही स्थिति की समीक्षा के लिए तीसरे पक्ष से ऑडिट का भी आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह निष्कर्ष निकालना गलत नहीं होगा कि दिल्ली की नागरिक एजेंसियों के पास प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन की कमी है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली का अधिकांश बुनियादी ढाँचा, जैसे कि नालियाँ, पुरानी हो चुकी हैं। इन्हें लगभग 75 साल पहले बनाया गया था। इन सबका अपर्याप्त एवं बेहद खराब रख-रखाव है।

कोर्ट ने आगे कहा कि 8 अप्रैल को 2024 को न्यायालय ने निर्देश दिया था कि अधिक कुशलता से समस्या का समाधान सुनिश्चित करने के लिए किसी एक एजेंसी को केवल वर्षा जल नालियों को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने के लिए तीसरे पक्ष के ऑडिट कराने का भी आदेश दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि हाल की त्रासदियों ने यह दिखा दिया है कि नागरिक एजेंसियों द्वारा न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है। हाई कोर्ट ने दिल्ली में प्रशासनिक स्थिति की आलोचना करते हुए कहा कि विभिन्न अधिकारी केवल जिम्मेदारी बदल रहे हैं और मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के बजाय एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं।

जज ने दिल्ली पुलिस को खरी खोटी सुनाते हुए कहा, “अगर आपको एमसीडी से फाइल नहीं मिल रही है तो आप उनके ऑफिस में जाकर फाइल जब्त कर लीजिए।” कोर्ट ने आगे कहा, “आपके पास एमसीडी अधिकारियों को फोन करने की भी हिम्मत नहीं है। शुक्र है कि आपने पानी का चालान नहीं किया और उससे यह नहीं पूछा कि वह तहखाने में कैसे घुस गया।”

वहाँ से गुजर रहे एक वाहन के चालक को गिरफ्तार करने पर भी हाई कोर्ट के जज नाराज हो गए। उन्होंने कहा, “सड़क से गुजर रहे व्यक्ति को कैसे गिरफ्तार किया गया? पुलिस का सम्मान तब होता है जब आप अपराधी को गिरफ्तार करते हैं और निर्दोष को छोड़ देते हैं। आप निर्दोष को गिरफ्तार करेंगे और दोषी को छोड़ देंगे हैं तो यह बहुत दुखद होगा।”

हाई कोर्ट ने एमसीडी को भी लताड़ा। जज ने कहा, “एमसीडी का हाल तो यह है कि अगर अनधिकृत निर्माण को लेकर उसे किसी बिल्डिंग को सील करने के लिए कहा जाए तो सीलिंग के बाद बिल्डिंग का साइज और बड़ा हो जाता है। हम आदेश पारित करते रहते हैं, पर उन्हें कोई असर नहीं पड़ता है।” सख्त रूख अपनाते हुए कोर्ट ने कहा कि इस घटना की किसी ना किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के प्रशासनिक, वित्तीय, भौतिक बुनियादी ढाँचे पर फिर से विचार करने के लिए जीएनसीटीडी के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति के गठन का निर्देश दिया है। इस समिति में डीडीए के उपाध्यक्ष, एमसीडी के अध्यक्ष और पुलिस आयुक्त सदस्य के रूप में शामिल होंगे। इस समिति को आठ सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।