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राज नाम रख हिंदू लड़की को फाँसा सिपाही चाँद खाँ ने, 2 साल तक सेक्स-संबंध… 2 बार गर्भपात, अब धर्म बदल निकाह का दबाव: इससे पहले 2 बार कर चुका है निकाह

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में चाँद खाँ नाम के सिपाही ने ‘राज’ बनकर हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फंसा लिया। उसने उसे पुलिस लाइन के अपने सरकारी क्वॉर्टर पर बुलाया और नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने इसका वीडियो भी बना लिया और ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने लगा। बाद में लड़की को पता चला कि उसका ‘राज’ कोई चाँद खाँ है, तो पैरों तले जमीन खिसक गई।

इसके बाद पता चला कि चाँद खाँ 2 निकाह पहले भी कर चुका है और दूसरी बीवी गुलशन आरा उर्फ जेबा उसके साथ रहती है, वो भी इस साजिश में शामिल थी। दोनों हिंदू लड़की पर धर्म परिवर्तन कर निकाह का दबाव डाल रहे थे, यही नहीं, करीब 6 माह पहले दोनों अपने कारनामों को अंजाम देने के बिल्कुल करीब भी पहुँच गए थे, और उसने मौलवी को भी बुला लिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदू लड़की पीलीभीत कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली है। 2 साल पहले वो कोचिंग में पढ़ती थी, वहीं पर एक लड़के की छेड़छाड़ का विरोध करते हुए उसने पुलिस से सहायता माँगी थी। उसकी सहायता के लिए पहुँचे चाँद खाँ ने अपना परिचय राज के रूप में दिया और लड़की का नंबर ले लिया। इसके बाद चाँद खाँ ने लड़की को शादी के जाल में फंसाया और 2 साल से उसका यौन उत्पीड़न करता रहा। हिंदू लड़की गर्भवती हो गई, तो 2 बार उसने दवाइयों की सहायता से उसका गर्भपात भी करा दिया।

यही नहीं, अब चाँद खाँ और उसकी दूसरी बीवी गुलशन आरा उस पर धर्म परिवर्तन कर चाँद खाँ से निकाह करने का दवाब डाल रहे हैं, जबकि चाँद खाँ दो निकाह पहले ही कर चुका है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इंस्पेक्टर नरेश त्यागी ने कहा कि शनिवार (3 जुलाई 2024) को कोतवाली में चाँद खाँ और बीवी गुलशन आरा उर्फ जेबा के खिलाफ दुष्कर्म, विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन संप्रेषण अधिनियम, षड्यंत्र रचने एवं ब्लैकमेलिंग की धारा में प्राथमिकी पंजीकृत की गई है।

बताया जा रहा है कि आरोपित चाँद खाँ का तबादला मुरादाबाद जीआरपी में हो चुका है। इसके बावजूद वो वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे की उगाही करता रहता है। हाल ही में उसने पीड़ित लड़की से एक लाख रुपए लिए थे और 50 हजार की माँग अलग से कर रहा था। फिलहाल पुलिस ने जाँच के लिए मुरादाबाद एक टीम भेजने वाली है।

ब्रिटेन में 3 बच्चियों की चाकू से हत्या के बाद 9 शहरों में हिंसा, दुकानों में तोड़फोड़-आगजनी: प्रवासी लोग, फिलिस्तीनी झंडे और पलायन का जानिए कनेक्शन

ब्रिटेन में तीन बच्चियों की हत्या के बाद कई शहर हिंसा से झुलस रहे हैं। स्थानीय समय के अनुसार, शनिवार (3 अगस्त) की रात को कुछ उपद्रवियों ने कई शहरों में सड़कों पर दुकानों को आग लगा दी। यह देश में 13 साल में सबसे बड़ा दंगा बताया जा रहा है। दरअसल, हिंसा की यह आग तब भड़की जब उत्तर-पश्चिमी इंग्लैंड में तीन बच्चियों की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। इसके कई वीडियो सामने आए हैं।

साउथपोर्ट में सोमवार (29 जुलाई 2024) को टेलर स्विफ्ट थीम वाली डांस क्लास में तीन लड़कियों- 6 वर्षीय बेबे किंग, 7 वर्षीय एल्सी डॉट स्टैनकॉम्ब और 9 वर्षीय एलिस डेसिल्वा अगुइआर की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इसके 6 दिन के बाद ब्रिटेन के कम-से-कम नौ शहरों में हिंसा शुरू हो गई है। शुरू में अफवाह फैली की कि इस घटना को प्रवासी लोगों ने अंजाम दिया है।

बच्चियों की हत्या के विरोध में 22 प्रमुख कस्बों और शहरों में ‘एनफ इज एनफ’ यानी ‘बस बहुत हो गया’ का प्रदर्शन निकाला गया। प्रदर्शन के दौरान हजारों पुलिसकर्मी तैनात रहे। लोगों में अंदर ही अंदर गुस्सा पनपता रहा और आखिरकार शनिवार को ब्रिटेन के लिवरपूल, मैनचेस्टर, सुंदरलैंड, पोर्ट्समाउथ, हल, ब्लैकपूल, ब्रिस्टल, बेलफास्ट स्टोक, नॉटिंघम और लीड्स में दंगा भड़क उठा।

इस दौरान दंगाइयों दुकानों में जमकर लूटपाट और तोड़फोड़ की। सामानों को सड़कों पर फेंक दिया और दुकानों में आग लगा दी। दंगाइयों ने जूते की दुकानों से लेकर शराब की दुकानों तक, किसी को भी नहीं छोड़ा। सड़कों पर लगी हुई स्ट्रीट लाइटों में भी तोड़फोड़ की। खंभों को उखाड़ने की कोशिश की और बैरिकेटिंड को ध्वस्त कर दिया। पुलिस ने लगभग 200 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है।

उत्तरी आयरलैंड के बेलफ़ास्ट में जारी प्रदर्शनों के बीच पागलपन भरे दृश्य भी देखने को मिले। सामने आए वीडियो में साफ दिख रहा है कि प्रदर्शन के दौरान एक तरफ़ ब्रिटिश और आयरिश राष्ट्रवादी ब्रिटिश और आयरिश झंडे लेकर खड़े दिखाई दिए तो दूसरी तरफ़ फ़िलिस्तीनी और एंटीफ़ा झंडे लिए प्रदर्शनकारी दिखाई दिए। इस वीडियो को लोग सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं।

हिंसा को देखते हुए ब्रिटेन की सरकार ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और हिंसा को नियंत्रित करने पर चर्चा की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठी चार्ज किया है। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। भीड़ में 18 से लेकर 58 साल तक के लोग शामिल हैं। हत्या को लेकर विरोध मार्च आगे भी प्रस्तावित है, जिसको लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क है।

दरअसल, इस सप्ताह सबसे पहला दंगे साउथपोर्ट में हमलावर की पहचान की अफवाह को लेकर भड़का था। यह अफवाह फैलाई गई कि हमलावर एक प्रवासी था। हालाँकि, पुलिस ने बताया कि संदिग्ध व्यक्ति कार्डिफ़ में पैदा हुआ था। इसके बाद हिंसा को शांत करने के प्रयास में जज ने 17 वर्षीय संदिग्ध की पहचान उजागर करने का फ़ैसला सुनाया।

इसके बाद बुधवार (31 जुलाई) को मर्सीसाइड शहर में चाकू से हमला करने वाले किशोर के रूप में एक्सेल मुगनवा रुदाकुबाना का नाम सामने आया। दरअसल, न्यायाधीश ने उसके 18वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले उसकी रिपोर्टिंग पर से प्रतिबंध हटा दिए थे। बता दें कि 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के नाम का खुलासा करने की इजाजत नहीं है।

गुजरात कॉन्ग्रेस का नेता गिरफ्तार, दलित महिला IB अधिकारी को जमीन पर गिरा कर कहा था – ‘तुम कुर्सी के लायक नहीं’

गुजरात के भुज शहर में कॉन्ग्रेस विधायक एवं कथित दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक महिला खुफिया अधिकारी को कुर्सी से हटाकर जमीन पर गिरा दिया गया। इस मामले में कॉन्ग्रेस नेता एचएस अहीर को गिरफ्तार कर लिया गया है। अहीर वहीं व्यक्ति हैं, जिन्होंने कंगना रनौत को मंडी से भाजपा का टिकट मिलने पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

महिला अधिकारी के साथ इस हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता एचएस अहीर को दलित खुफिया अधिकारी रीना चौहान की कुर्सी खींचते हुए देखा जा सकता है। इससे महिला अधिकारी जमीन पर गिर गई और घायल हो गई। इस दौरान अहीर ने महिला अधिकारी का मजाक उड़ाया और अपमानित करते हुए कहा कि वह कुर्सी पर बैठने के लायक नहीं है।

भुज शहर के सर्किट हाउस उम्मेद भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में विधायक जिग्नेश मेवाणी कच्छ में दलितों को आवंटित भूमि पर कब्जा देने के बारे में मीडिया से बात कर रहे थे। उसी दौरान 34 साल की महिला IB अधिकारी मोबाइल में मेवाणी की तस्वीर खींचने के लिए खड़ी हुईं। इस बीच अहीर ने उनकी कुर्सी खींच ली। इससे अनजान महिला अधिकारी कुर्सी पर बैठने की कोशिश की तो वह जमीन पर गिर गईं।

दलित महिला अधिकारी रीना इस घटना के संबंध में भुज शहर के ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। दर्ज कराई गई FIR की कॉपी में कहा गया है कि इस हरकत में सहायक खुफिया अधिकारी रीना चौहान की रीढ़ की हड्डी में मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में रीना चौहान ने आगे कहा कि जब वह नीचे गिरीं तो अहीर जोर से हँसे और कहा कि वह कुर्सी के लायक नहीं हैं और उनके लिए कोई कुर्सी नहीं हो सकती। रीना चौहान ने कहा कि कॉग्रेस किसान सेल के समन्वयक एचएस अहीर (हरेश शिवजीभाई अहीर) उन्हें पहले से जानते थे और वह यह भी जानते थे कि वह दलित हैं।

जिस समय यह घटना हुई, उस समय महिला अधिकारी अपनी ड्यूटी पर थीं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता अहीर महिला अधिकारी को अच्छी तरह से जानते थे। उन्हें पता था कि वह अनुसूचित जाति से आती हैं और फिलहाल वह ड्यूटी पर हैं। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस नेता ने महिला अधिकारी का अपमान करने की इरादे से ऐसी हरकत की।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि महिला खुफिया अधिकारी फिलहाल मानसिक आघात, सदमे और अवसाद से गुजर रही हैं। कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 121(1), 221 और 133 तथा एससी/एसटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, भाजपा ने इसे कॉन्ग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता बताया है।

बताते चलें कि अहीर ने कंगना रनौत के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। साल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट के लिए भाजपा द्वारा कंगना को टिकट दिए जाने पर अहीर ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “मंडी से र*डी।” वहीं, कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की संपादक मृणाल पांडे ने भी यही टिप्पणी की थी।

हालाँकि, विवाद बढ़ने के बाद मृणाल पांडे सहित अहीर ने भी अपनी पोस्ट डिलीट कर दी थी। साथ ही इसका दोष अपनी सोशल मीडिया टीम पर मढ़ दिया था। हालाँकि, बाद में एचएस अहीर ने पोस्ट को डिलीट कर दिया था और कहा था, “मेरे एक्स खाते तक पहुँच रखने वाले किसी व्यक्ति ने बिल्कुल घृणित और आपत्तिजनक पोस्ट की थी, जिसे हटा दिया गया है।” अहीर गुजरात कॉन्ग्रेस में किसान मोर्चा के राज्य सह-संयोजक पद पर हैं।

पड़ोसी हिंदू लड़की को लेकर भाग गया सद्दाम अली, भड़के लोगों ने उसके घर-दुकान में लगाई आग: बरेली में 3 पुलिसकर्मी निलंबित

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गाँव में मुस्लिम शख्स द्वारा हिंदू लड़की को लेकर भागने के बाद शुक्रवार (2 अगस्त 2024) की रात को हिंसा भड़क उठी। लड़की पक्ष वालों के साथ गाँव वालों ने आरोपित मुस्लिम व्यक्ति के घर और किराने की दुकान में तोड़फोड़ की और उसमें आग लगा दी। दरअसल, पिछले सप्ताह जिस हिंदू महिला को लेकर सद्दाम अली लेकर भागा है, वह उसकी पड़ोसी थी।

अधिकारियों कहना है कि गुस्साए लोगों ने आरोपित मुस्लिम व्यक्ति की गिरफ्तारी में देरी करने के कारण पुलिस की जीप पर भी हमला किया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। इसके बाद जिला प्रशासन ने तीन पुलिसकर्मियों को भी निलंबित कर दिया है। आखिरक सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि यह घटना हिंदू बहुल गाँव शिवनगर की है। कहा जा रहा है कि 24 साल के सद्दाम अली का 20 साल की पड़ोसी हिंदू लड़की के साथ प्रेम संबंध थे। वह पिछले सप्ताह महिला को लेकर भाग गया। इसको लेकर गाँव के लोग भड़क गए। महिला के परिजनों ने 29 जुलाई को सिरौली थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें सद्दाम अली पर महिला के अपहरण का आरोप लगाया गया था।

एक अधिकारी ने बताया, “गाँव में करीब 10 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी है। यहाँ का मुख्य व्यवसाय खेती है। हिंदू लड़की और सद्दाम ने साथ में स्कूल की पढ़ाई की है और दो साल पहले दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे थे। 29 जुलाई को वे दोनों एक साथ भाग गए और महिला के पिता ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।” इसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी।

पुलिस को पता चला कि दोनों सिरौली में छिपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस 1 अगस्त 2024 को भागने के 6 दिन बाद दोनों को वापस लेकर आई। लड़की को पुलिस ने उनके रिश्तेदारों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में परिवार को सौंप दिया। वहीं, सद्दाम अली को पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर सिरौली थाने लेकर चली गई। इस घटना से गुस्साए लोगों ने अली के घर में तोड़फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया।

बरेली पुलिस ने बताया कि इस मामले में लड़की के परिवार के सदस्यों समेत 62 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, सद्दाम अली के घर में आगजनी के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। वहीं, अन्य आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। लोगों के गुस्सा को देखते हुए गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है।

बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य ने कहा कि भागने की घटना के बाद दो समुदायों के बीच तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए बरेली मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित गाँव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर लव सिरोही, SI सतवीर सिंह और एक कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है।

एसएसपी आर्य ने कहा, “सद्दाम अली पुलिस की हिरासत में था, लेकिन अफ़वाहें फैलीं कि पुलिस उसे बचा रही है। इसके बाद ग्रामीणों ने उसकी घर और दुकान जला दी और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। पुलिस अधिकारियों पर हमले और घर में आग लगाने के मामले में सिरौली पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।”

वक्फ बोर्ड पर मोदी सरकार की कैंची, अब नहीं हड़प पाएगा दूसरों की संपत्ति: कभी हिंदुओं के पूरे गाँव, तो कभी फाइव स्टार होटल को बताया अपनी जायदाद

कुछ समय पहले खबर आई थी कि वक्फ बोर्ड ने पूरे गाँव को ही अपनी संपत्ति होने का दावा दिया। सरकारी जमीनों पर दावा करने के तो मामले अक्सर आते ही रहते हैं। वक्फ बोर्ड के ऐसे दावों को नियंत्रित करने के लिए सरकार उसकी शक्तियों को पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है। मोदी सरकार संसद के जारी मानसून सत्र में सोमवार (5 अगस्त 2024) को वक्फ एक्ट में संशोधन बिल पेश कर सकती है।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 2 अगस्त को कैबिनेट ने वक्फ़ अधिनियम में लगभग 40 संशोधन को मंजूरी दे दी। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य वक्फ़ बोर्ड की किसी भी संपत्ति को ‘वक्फ संपत्ति’ बनाने की शक्तियों पर अंकुश लगाना है। वक्फ के इन दावों के कारण अक्सर विवाद और समानांतर कानून-व्यवस्था चलाने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। केंद्र इस निरंकुशता को खत्म करना चाहता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान एनडीए सरकार इस संशोधन को 5 अगस्त 2024 को संसद में रख सकती है। बता दें कि 5 अगस्त का दिन विशेष महत्व रखता है। मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का बिल संसद में पेश किया था। इसके बाद पीएम मोदी द्वारा 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया था।

प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, वक्फ़ बोर्डों द्वारा संपत्तियों पर किए गए या किए जाने वाले दावों का सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। वक्फ़ बोर्ड की विवादित संपत्तियों के लिए भी सत्यापन करना अनिवार्य होगा। इससे विभिन्न राज्यों के वक्फ बोर्डों द्वारा जमीनों एवं अन्य संपत्तियों को किए जाने वाले दावों पर अंकुश लगेगी। इससे विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

वक्फ के पास 9.4 लाख एकड़ संपत्ति

सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों, महिलाओं और शिया एवं बोहरा जैसे विभिन्न फिरकों की ओर से मौजूदा कानून में बदलाव की माँग की गई थी। संशोधन लाने की तैयारी 2024 के लोकसभा चुनावों से काफी पहले ही शुरू हो गई थी। सूत्र ने यह भी कहा कि ओमान, सऊदी अरब जैसे किसी भी इस्लामी देश में इस तरह की इकाई को इतने अधिकार नहीं दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों के वक्फ़ बोर्डों के पास इस समय करीब 8.7 लाख संपत्तियाँ हैं। इन संपत्तियों का क्षेत्रफल करीब 9.4 लाख एकड़ है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्य में वक्फ बोर्डों की इस शक्ति के दुरुपयोग का संज्ञान लिया था। वक्फ बोर्डों द्वारा किसी भी संपत्ति पर दावा करने पर अधिकांश राज्यों में इन संपत्ति के सर्वे में देरी होती थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों की निगरानी में जिला मजिस्ट्रेटों को शामिल करने की संभावना पर भी विचार किया था। वक्फ बोर्ड के किसी भी फैसले के खिलाफ अपील सिर्फ कोर्ट के पास हो सकती है। ऐसी अपीलों पर फैसले के लिए कोई समय-सीमा नहीं होती है। कोर्ट का निर्णय अंतिम होता है। वहीं हाईकोर्ट में PIL के अलावा अपील का कोई प्रावधान नहीं है।

कॉन्ग्रेस ने वक्फ को दिए असीमित अधिकार

यहाँ बताना जरूरी है कि साल 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के समय वक्फ अधिनियम पारित किया गया। इसके बाद इसका केंद्रीकरण हुआ। वक्फ एक्ट 1954 वक्फ की संपत्तियों के रखरखाव का काम करता था। इसके बाद से इसमें कई बार संशोधन हुआ। साल 2013 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने बेसिक वक्फ़ एक्ट में संशोधन करके वक्फ बोर्डों को और अधिकार दिए थे।

दरअसल, वक्फ अरबी भाषा का शब्द है और इसका अर्थ संपत्ति को जन-कल्याण के लिए समर्पित करना है। इस्लाम में में वक्फ उस संपत्ति को कहते हैं, जो इस्लाम को मानने वाले लोगों द्वारा जकात के रूप में दान की जाती है। ये धन-संपत्ति सिर्फ मुस्लिमों के हित या इस्लाम के प्रसार-प्रसार के लिए काम में लाया जा सकता है। ये दौलत वक्फ बोर्ड के तहत आती है।

हिंदुओं के पूरे गाँव को ही वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था

बता दें कि सितंबर 2022 में तमिलनाडु से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था, जहाँ वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं के पूरे गाँव 1100 साल पुराने मंदिर पर दावा ठोक दिया था। तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने त्रिची के नजदीक स्थित तिरुचेंथुरई गाँव को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था। जब राजगोपाल नाम के व्यक्ति ने अपनी जमीन बेचने का प्रयास किया तो यह मामला समाने आया था।

राजगोपाल जब अपनी जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचे तो उन्हें पता चला कि जिस जमीन को बेचने के बारे में वह सोच रहे हैं वह उनकी है ही नहीं बल्कि, जमीन वक्फ हो चुकी है और अब उसका मालिक वक्फ बोर्ड है। इतना ही नहीं, सारे गाँव वालों की जमीन ही वक्फ संपत्ति घोषित हो चुकी थी। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खी बनी थी।

वक्फ बोर्ड ने 5 स्टार होटल पर ठोक दिया दावा

इसी तरह अप्रैल 2024 में हैदराबाद से आया था। तेलंगाना वक्फ बोर्ड ने राजधानी के एक नामी 5 स्टार होटल मैरियट को ही अपनी जागीर घोषित कर दिया था। हालाँकि, हाई कोर्ट ने उसके इस मंसूबे को धाराशायी कर दिया था। दरअसल, साल 1964 में अब्दुल गफूर नाम के एक व्यक्ति ने तब वायसराय नाम से चर्चित इस होटल पर अपना हक जताते हुए मुकदमा कर दिया था।

मुकदमे में वक्फ अधिनियम 1954 का हवाला दिया गया था, जिसकी वजह से होटल मैरियट की सम्पत्ति विवादित घोषित हो गई थी। लगभग 50 वर्षों तक वक्फ बोर्ड ने यह मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझाए रखा। साल 2014 में एक बार फिर से तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड होटल मैरियट के खिलाफ सक्रिय हुआ। मामला हाईकोर्ट में पहुँचा तो अंतिम फैसला होटल मैरियट के पक्ष में आया।

‘मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी…’: बरेली के हसीब अंसारी ने WhatsApp स्टेट्स लगा कर किया मौलवियों और फिरकों का जिक्र, जाँच शुरू

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में भड़काऊ व्हाट्सएप्प स्टेट्स लगा कर माहौल खराब करने का मामला सामने आया है। यहाँ हिन्दू संगठनों ने हसीब अंसारी नाम के एक युवक की शिकायत पुलिस से की है। स्टेट्स में हसीब ने मुस्लिमों के एकजुट हो जाने के बाद सभी के काबू से बाहर हो जाने जैसी बातें लिखी हुई हैं। हसीब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठ रही है। शनिवार (3 अगस्त, 2024) को पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र नवाबगंज का है। यहाँ के रहने वाले हसीब अंसारी ने शनिवार को अपने व्हाट्सएप्प पर भड़काऊ स्टेटस लगाया। इस में हसीब ने लिखा, “मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी रोक नहीं मिलेगा। शुक्र मनाओ कि मुसलमान फिरके-फिरके में पड़े हुए हैं और ये मौलवी इन्हें एक नहीं होने दे रहे हैं।” हसीब अंसारी ने इस स्टेट्स के ऊपर बड़े-बड़े शब्दों में लिख कर लोगों से इसे हर हाल में शेयर करने की गुजारिश भी की है।

हसीब अंसारी की इस हरकत को ‘कट्टर हिन्दू गौ सेवक बरेली उत्तर प्रदेश’ नाम के हैंडल ने अपने X प्रोफ़ाइल @Surenda83898725 से शेयर किया है। उन्होंने इस हरकत को माहौल को खराब करने वाली बताया और बरेली पुलिस को टैग करते हुए हसीब अंसारी पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है। बरेली पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी नवाबगंज को निर्देशित किया जा चुका है।

जिस स्टेट्स को हसीब अंसारी ने अपने व्हाट्सएप पर लगाया है उसके बैकग्राउंड में किसी मज़हबी इबादतगाह के आगे कुछ लोग खड़े दिख रहे हैं। एक लाल रंग का झंडा भी दिखाई दे रहा है। बैकग्राउंड में दिख रहा दृश्य कहाँ और कब की घटना है इस बारे में अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। बरेली के VHP कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने जानकारी दी कि हसीब अंसारी ने मौलाना वाली पढ़ाई कर रखी थी, और पूर्व में मौलाना वाला कार्य भी कर चुका है।

MP के मदरसे में बुखार से तड़पती बच्चियों को फर्श पर सुलाया, राजस्थान के मदरसे में दलित नाबालिग को बना दिया मुस्लिम: बिफरा NCPCR, हिन्दू संगठन आक्रोशित

मध्य प्रदेश और राजस्थान के 2 अलग-अलग मदरसों में गैर-कानूनी कृत्यों का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के रतलाम में एक मदरसा अवैध तौर पर बिना मान्यता के चलता पाया गया। इस मदरसे में बच्चियाँ फर्श पर सोती मिलीं। बच्चियों की देखरेख के लिए कोई महिला कर्मचारी भी नहीं थी। वहीं राजस्थान के कोटा में एक नाबालिग दलित बच्ची को इस्लाम कबूल करवाने का आरोप लगा है। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर आंदोलन का एलान किया है।

अवैध मदरसा, जमीन पर सोती बच्चियाँ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला मध्य प्रदेश के रतलाम जिले का है। यहाँ के खरचौंद रोड पर दारुल उलूम आयशा सिद्धीका लिलबिनात नाम का एक मदरसा है। शनिवार (3 अगस्त, 2024) को यहाँ राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम पहुँची। टीम का नेतृत्व आयोग की सदस्य निवेदिता शर्मा कर रहीं थीं। टीम को यहाँ 30 से 35 नाबालिग बच्चियाँ फर्श पर सोती मिलीं। इनमें से 5 साल की एक बच्ची तेज बुखार से पीड़ित थी। बच्चियों की देखरेख के लिए कोई कोई महिला स्टाफ भी मदरसे में मौजूद नहीं थी।

राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने पाया कि मदरसे में मौजूद बच्चियाँ मध्य प्रदेश के कई जिलों से मज़हबी शिक्षा देने के नाम पर लाई गईं थीं। मदरसे के कागजात भी सरकारी तौर पर पूरे नहीं थे। साफ़-सफाई भी ठीक से नहीं थी और बच्चियों के कमरे में CCTV कैमरे लगाए गए थे। यह हरकत बाल संरक्षण आयोग ने निजता का हनन बताया। यह मदरसा मदरसा महाराष्ट्र के ‘जामिया इस्‍लामिया इशाअतुल उलूम अक्‍कलकुआ’ से अटैच पाया गया। कुल छात्राओं की संख्या लगभग 100 बताई गई।

मदरसे में पढ़ने वाली कई छात्राओं के नाम किसी अन्य स्कूल में दर्ज थे। कई कमरों में अन्धेरा था। कुछ बच्चियाँ राजस्थान से भी पाई गईं। मदरसा संचालक अपनी आय और व्यय का भी लेखा-जोखा नहीं दे पाया। कई बच्चियाँ डरी-सहमी भी पाई गईं। निवेदिता शर्मा ने मदरसे के संचालकों को इन मुद्दों को लेकर फटकार लगाई। साथ ही उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो अवैध मदरसे व उसके संचालकों पर कार्रवाई करें। फिलहाल स्थानीय प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुट गया है।

दलित बच्ची को कबूल करवाया इस्लाम

मदरसे से जुड़ा दूसरा मामला राजस्थान के कोटा जिले का है। रिपोर्ट्स के अनुसार यहाँ अनंतपुरा क्षेत्र में एक मदरसा संचालित है। हिन्दू संगठनों के मुताबिक इस मदरसे का संचालित मूल रूप से दारुल उलूम करता है। आरोप है कि इस मदरसे के अंदर पढ़ने वाली एक नाबालिग दलित लड़की को इस्लाम कबूल करवा दिया गया है। मुस्लिम बनाने के बाद पीड़िता का नया नाम शकीना रख दिया गया है। विश्व हिन्दू परिषद ने राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को ज्ञापन दे कर इस मामले की जाँच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है।

‘ज़रूरतमंदों को मेरे अंग दान कर देना’: दिल्ली में रेंट से तंग आकर UPSC की तैयारी कर ही छात्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा – PG वाले लूट रहे

राजधानी दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में UPSC की तैयारी कर रही एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। अभी ‘Rau’s IAS’ नामक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में 3 छात्रों की पानी में डूब कर हुई मौत का मामला थमा भी नहीं था कि ये घटना सामने आ गई है। उक्त छात्रा अवसाद में थी और दबाव झेलने की स्थिति में नहीं थी। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि सरकारी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को खत्म किया जाए। वो हाउसिंग रेंट के कारण भी परेशान थी। उसने सरकार से रोजगार उत्पन्न करने की गुहार भी मरने से पहले लिखे नोट में लगाई है।

अंजलि ने अपनी आत्महत्या वाले पत्र में लिखा है कि वो जीवन की समस्याओं से नहीं जूझ पा रही हैं, साथ ही उसके जीवन में शांति नहीं है। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि ये घटना 3 छात्रों की मौत से पहले की है, लेकिन प्रकाश में अब आई है, अब इस पर चाचा हो रही है। रविवार (21 जुलाई, 2024) की ये घटना है। अंजलि एक कमरे में रहने के लिए 15,000 रुपए प्रति महीना का किराया देती थी, जिसे सीधे बढ़ा कर 18,000 रुपए कर दिया गया था।

उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, “माँ और पापा, मुझे माफ़ कर दो। मैं अपने जीवन से सचमुच तंग आ चुकी हूँ। केवल समस्याएँ हैं, शांति नहीं है। मुझे शांति चाहिए। मैंने इस तथाकथित अवसाद से निकलने की काफी कोशिश की, लेकिन मेरे से नहीं हो पाया। मैंने एक डॉक्टर को भी दिखाया, लेकिन मेरा मानसिक स्वास्थ्य नहीं सुधरा। पहले अटेम्प्ट में ही UPSC क्लियर करना मेरा लक्ष्य था, अब मैं बहुत अस्थिर हो रही हूँ। मुझे पता है मेरी मौत की खबर ब्रेकिंग न्यूज़ बनेगी।”

अंजलि महाराष्ट्र के अकोला की रहने वाली थी। उसने लिखा कि PG वाले छात्र-छात्राओं से पैसे लूट रहे हैं। अंजलि की माँ का कहना है कि उसकी पढ़ाई में लग रहे पैसों के कारण वो चिंता में थी, जबकि परिवार उसे कहता था कि वो इसकी चिंता न करे। अंजलि ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, “मैं जानती हूँ आत्महत्या किसी समस्या का नहीं नहीं।” अपनी एक दोस्त के साथ चैट के दौरान भी उसने रेंट वाली समस्या का जिक्र किया था। अंजलि ने 3 बार UPSC की परीक्षा दी थी, लेकिन उसका चयन नहीं हो पाया था।

एग्रीकल्चर में स्नातक करने वाली अंजलि पढ़ाई में अच्छी थी। 21 जुलाई को उसके चाचा का जन्मदिन था और उसने फोन कॉल कर के शुभकामनाएँ भी दी थीं। अंजलि के पिता एक अधिकारी हैं। चाचा का कहना है कि फोन काल के दौरान सब कुछ सामान्य था। अंजलि के कमरे की एक और चाभी थी, उसके रूममेट्स जब बाजार से वापस आए तो उन्होंने उसे फंदे से लटका हुआ देखा। अंजलि ने अपने सुसाइड नोट में ये भी लिखा है कि उसके अंग ज़रूरतमंदों को दान कर दिए जाएँ।

अखिलेश यादव से मिलाता है हाथ, जज के साथ खाता है केक… कौन है राशिद खान जो अयोध्या गैंगरेप वाले मोईद को बचा रहा, अवधेश प्रसाद को जिताने के लिए की थी मेहनत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में सोमवार (29 जुलाई, 2024) को OBC समुदाय की एक नाबालिग बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया था। इस केस में समाजवादी पार्टी का नेता मोईद खान और उसका नौकर राजू खान नामजद हुआ था। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। इस बीच आरोप है कि पीड़िता को धमकी दे कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। इस नए आरोप में समाजवादी पार्टी के ही 2 अन्य नेताओं पर शुक्रवार (2 अगस्त, 2024) को नई FIR दर्ज दर्ज हुई है। इन आरोपितों ने सपा नेता राशिद खान भी शामिल है जो इस समय भदरसा से नगर पालिका चेयरमैन है।

राशिद खान न सिर्फ सपा के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद बल्कि सुप्रीमों अखिलेश यादव का भी काफी करीबी माना जाता है। ऑपइंडिया ने राशिद खान के सोशल हैंडलों की पड़ताल की। राशिद खान के फेसबुक पर शेयर की गई तस्वीरों से अनुमान लगाया जा सकता है कि उसकी समाजवादी पार्टी में काफी ऊँचे स्तर पर पहुँच है। राशिद खान सीधे अखिलेश यादव से हाथ मिलाता है। अखिलेश यादव के साथ राशिद की धर्मेंद्र यादव व अन्य सपा नेताओं के साथ कई तस्वीरें हैं।

मोईद खान को बताया गणमान्य व्यक्ति, सपा में भर्ती पर जताई थी ख़ुशी

नाबालिग बच्ची से रेप के आरोपित मोईद खान को मोहम्मद राशिद ने 1 अगस्त, 2023 को समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने की सार्वजनिक तौर पर शुभकामनाएँ दी थीं। उसने समाजवादी पार्टी में मोईद खान को भर्ती करने पर जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव को शुक्रिया भी कहा था।

राशिद खान रेप के आरोपित मोईद खान को गणमान्य नागरिक मानता है। 20 जून, 2023 को दोनों एक साथ किसी कार्यक्रम में पारिवारिक तौर पर शिरकत किए थे। इस दौरान उसने मोईद को गणमान्य नागरिक कह कर सम्बोधित किया है।

अखिलेश यादव से मिलाता है हाथ

समाजवादी पार्टी के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद से भी राशिद खान की काफी नजदीकियाँ बताई जा रहीं हैं। कई तस्वीरों में राशिद खान और अवधेश प्रसाद एक साथ दिखाई दे रहे हैं। 31 जुलाई, 2024 को राशिद खान ने अपनी, अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद की सामूहिक तस्वीर शेयर की है। पीछे मुलायम सिंह यादव की मूर्ति बनी हुई है। इस पोस्ट में उसने अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद को जन्मदिन की बधाई दी है। राशिद खान सपा सांसद अवधेश प्रसाद को दलित आइकॉन बताता है।

बकौल मोहम्मद राशिद खान उसकी अखिलेश यादव से मुलाक़ात 16 जुलाई, 2024 को समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय पर हुई थी। तब राशिद खान अयोध्या से लखनऊ समाजवादी पार्टी के कुछ अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गया था।

गैंगरेप पीड़िता OBC बच्ची को धमकी देने के मामले में आरोपित राशिद खान का रुतबा समाजवादी पार्टी ने इतना ऊँचा है कि वो मंचों पर अखिलेश यादव से सीधे मिल कर हाथ मिलाते हैं। 9 जून, 2024 को खुद राशिद खान ने इस आशय की एक पोस्ट शेयर की है।

अवधेश प्रसाद को जिताने के लिए लगाई थी जी-जान

राशिद खान ने 2024 लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अवधेश प्रसाद को जिताने के लिए जीतोड़ कोशिश की थी। उसने कई जनसभाओं का न सिर्फ आयोजन किया था बल्कि उन्हें सम्बोधित भी किया था। इस दौरान कई मौकों पर राशिद खान और अवधेश प्रसाद एक साथ माला आदि पहनाते देखे गए थे।

मुख़्तार अंसारी के जनाजे में भी शरीक

राशिद खान माफिया मुख़्तार अंसारी के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ था। अप्रैल 2024 में वह अपने दल-बल के साथ मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गया था। इस दौरान उसने कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ा था। उसकी मुलाकात अफ़ज़ाल अंसारी आदि लोगों से भी हुई थी।

जिला जज के जन्मदिन में भी शामिल

मोहम्मद राशिद खान ने 25 फरवरी 2024 को कुछ तस्वीरें सामूहिक तौर पर शेयर की हैं। इन तस्वीरों में उसका दावा है कि उसने चित्रकूट के जिला जज राकेश यादव का किसी बड़े होटल में केक काट कर जन्मदिन मनाया था। इस मौके पर सभी ने एक दूसरे को केक काट कर भी खिलाया था।

धर्मेंद्र यादव के साथ भी मंचों पर

नाबालिग बच्ची को धमकाने के आरोप में जिस मोहम्मद राशिद खान पर FIR दर्ज हुई है वो समाजवादी पार्टी में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले धर्मेंद्र यादव के साथ भी अक्सर मंचों पर देखा गया है। एक मंच पर राशिद खान धर्मेंद्र यादव और अवधेश प्रसाद के बीच में खड़ा काफी प्रसन्न मुद्रा में दिख रहा है। यह तस्वीर फरवरी 2016 की है।

बताते चलें कि इस से पहले बजरंग दल ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी का नेता मोहम्मद राशिद खान साल 2012 में हुए भदरसा दंगों में भी संलिप्त रहा था। उसकी कई पुलिस अधिकारियों के साथ भी तस्वीरें मौजूद हैं। वह जनसुनवाई में पुलिसकर्मियों के बगल बैठ कर सुनवाई भी करता देखा जा सकता है। पीड़िता को सुलह के लिए धमकाने में मोहम्मद राशिद के अलावा जय सिंह राणा और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति को आरोपित बनाया गया है। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

‘BJP हिंदू पार्टी है, उससे जुड़े व्यक्ति के जनाजे में कोई मौलवी नमाज पढ़ाने नहीं जाएगा’: शिकायत के बाद इमाम राशिद सहित सपा से जुड़े लोगों पर भी FIR

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक मस्जिद के मौलवी ने एक मुस्लिम की मौत के बाद उसके जनाजे की नमाज़ पढ़वाने से इनकार कर दिया, क्योंकि मृतक भाजपा समर्थक था। मामले की शिकायत DM से की गई तो पुलिस ने शनिवार (3 अगस्त 2024) को 5 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया। उधर, मौलवी ने खुद को बेकसूर बताते हुए इसे अपने खिलाफ एक साजिश बता दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुरादाबाद जिले के कुंदरकी थाना क्षेत्र की है। यहाँ के कायस्थान मोहल्ले के रहने वाले दिलनवाज़ ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में दिलनवाज़ ने बताया कि उनके अब्बा अलीदाद खाँ काफी समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। 23 जुलाई को हार्ट अटैक से उनका इंतकाल हो गया।

दिलवाज ने कहा कि पास में ही स्थित नवाज़ खान मस्जिद में इमाम मोहम्मद राशिद को जनाजे की नमाज़ पढ़वाने के लिए बुलवाया गया तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया। आरोप है कि इमाम राशिद ने मृतक के बेटे से कहा, “तुम्हारे अब्बू तो बीजेपी को वोट देते थे। बीजेपी हिंदू पार्टी है। हम और हमारे साथ का कोई भी इमाम या मौलवी नमाज़ पढ़ने नहीं जाएगा।”

पीड़ितों ने मौलवी के साथ इस करतूत में समाजवादी पार्टी के नेता असलम, शमीम खान, शराफत और मतीन को भी नामजद किया है। आखिरकार इमाम द्वारा इनकार के बाद गाँव के एक अन्य मौलवी को बुलवाया गया और उनसे जनाज़े की नमाज़ पढ़वाई गई। शनिवार को पुलिस ने इन सभी लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मुरादाबाद के जिलाधिकारी IAS अनुज सिंह और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण IPS संदीप मीणा ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। इन्होंने बताया कि जाँच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, खुद पर लगे आरोपों को मस्जिद के इमाम मोहम्मद राशिद ने निराधार बताया है।

मौलवी ने मस्जिद की CCTV फुटेज में अपनी बेगुनाही का सबूत होने का दावा करते हुए खुद को फँसाने की साजिश करार दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता नाज़िम सैफी ने भी मृतक के बेटे के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने आरोपित इमाम को अपने सिर का ताज बताते हुए लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित कहा है।