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नेपाल से भारत में घुस रहे थे चीनी, कर्नाटक-हिमाचल के पते पर बना था आधार कार्ड: गूंगा बन दे रहे थे चकमा, पकड़े जाने पर बोले- जड़ी-बूटी खोजने आए हैं

भारत-नेपाल की सोनौली सीमा पर बुधवार (31 जुलाई 2024) की रात दो चीनी नागरिक पकड़े गए। उनके साथ एक तिब्बती मूल का शरणार्थी भी मिला। छानबीन में पुलिस को इनके पास पहचान पत्र के तौर पर भारतीय आधार कार्ड मिले। यह कार्ड इन्होंने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के दो अलग-अलग पते पर बनवा रखे थे। इसमें इनकी मदद दिल्ली में रहने वाले तिब्बती मूल के भारतीय नागरिक ने की थी।

खबरों के अनुसार, सुरक्षाबल के हत्थे चढ़ने के बाद ये लोग खुद को मूक दिखाने का प्रयास कर रहे थे। हालाँकि एसएसबी जवानों ने सख्ती से पूछताछ की तो इन्हें बोलना पड़ा। शुरू में इन्होंने बताया कि दवाई बनाने का कारोबार करते हैं और जड़ी-बूटियों की तलाश में भारत आए हैं। हालाँकि सुरक्षाबल को इनपर यकीन नहीं हुआ। पासपोर्ट चेक करने पर इनकी पहचान चीनी नागरिक के तौर पर पता चली।

इसमें एक का नाम जू वाकयांग निकला जबकि दूसरे की पहचान यंग मेंगमेंग के रूप में हुई। इन्होंने भारतीय आधार कार्ड पर अपने नाम विज्ञेन डोर्जी, जू वाकयांग लिखवाया हुआ था। भारत में इनके रहने की व्यवस्था तिब्बती मूल के लवसंग सेरिंग ने की थी।

इसके अलावा भारत में लाने और इन्हें नेपाल के काठमांडू से गोरखपुर पहुँचाने का जिम्मा भी उसी ने उठाया था। तिब्बती मूल के भारतीय नागरिक ने चीनी नागरिकों से इस काम के लिए 40 हजार रुपए लिए थे। पूछताछ में बताया गया कि चूँकि चीनी नागरिकों को हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में जड़ी-बूटी की तलाश करनी थी, इसलिए उनका आधार कार्ड हिमाचल प्रदेश के पते से बनवाया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, चीनी नागरिकों के साथ पकड़े गए तिब्बती मूल के युवक से भी पुलिस ने लंबी पूछताछ की। उसने हिंदी में बात करते हुए अपना नाम लवसंग सेरिंग बताया। उसने कहा कि वह तिब्बती मूल का भारतीय नागरिक है और दिल्ली के कृ्ष्णा नगर में रहता है। उसने चीनी नागरिकों का आधारकार्ड काठमांडू से ही बनवाया था।

इसके बाद वह दोनों चीनी नागरिकों को लेकर कार से काठमांडो से सोनौली सीमा से सटे बेलहिया पहुँचा। यहाँ से पैदल सीमा पार कराने के बाद गोरखपुर रेलवे स्टेशन छोड़ना था। वहाँ से ट्रेन से दिल्ली भेजने की तैयारी थी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अब इस मामले में महराजगंज अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने कहा कि पकड़े गए दोनों चीनी और भारतीय नागरिक के विरुद्ध सोनौली थाने में धोखाधड़ी, कूटरचना और विदेशी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही जिन पते से दोनों चीनी नागरिकों के आधार कार्ड बने हैं, उन पतों का भी पुलिस टीम सत्यापन करेगी। पुलिस ने इन्हें कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया है।

इसे दोगलापन कहें या कुछ और? कॉन्ग्रेस नेता उदित राज कह रहे- SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर कबूल नहीं, CM रेवंत रेड्डी बोल रहे- कोटा के भीतर कोटा लागू करेगा तेलंगाना

सुप्रीम कोर्ट के SC-ST आरक्षण के भीतर आरक्षण लागू करने को वैध ठहराने के निर्णय का तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्वागत किया है। CM रेड्डी ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार सबसे पहले राज्य में आरक्षण में भी कोटा सिस्टम लागू करेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही काम चालू होगा।

गुरुवार (1 अगस्त, 20224) को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद तेलंगाना विधानसभा में CM रेवंत रेड्डी ने यह ऐलान किया। उन्होंने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच का ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ। 7 में से 6 जजों ने कहा कि राज्य सरकारें आरक्षण का वर्गीकरण अपना सकती हैं। राज्य सरकार की ओर से मैं यह घोषणा कर रहा हूँ कि तेलंगाना आरक्षण के भीतर आरक्षण को लागू करने वाला पहला राज्य होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार नौकरियों की अधिसूचना के में मडिगा और अन्य उप-जातियों के लिए आरक्षण लागू करने के लिए उचित कदम उठाएगी। इस संबंध में एक अध्यादेश जारी किया जाएगा।” CM रेवंत रेड्डी ने कहा कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार वर्गीकरण को लेकर काम चालू किया जाएगा।

CM रेवंत रेड्डी ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार SC-ST आरक्षण को A,B,C और D वर्षों में बाँटेगी। कॉन्ग्रेस सरकार के इस फैसले को राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने भी समर्थन देने का ऐलान किया है। तेलंगाना में SC आरक्षण के वर्गीकरण की लम्बे समय से माँग चल रही थी।

जहाँ तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का समर्थन किया है, वहीं उनकी ही पार्टी के नेता उदित राज इसके खिलाफ हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इसमें बदलाव की अनुमति केवल विधायिका को है। उन्होंने कहा कि उन्हें क्रीमी लेयर का निर्णय मंजूर नहीं है।

उदित राज कॉन्ग्रेस के असंगठित कामगारों की विंग के मुखिया हैं। उन्हें 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से कॉन्ग्रेस ने अपना उम्मीदवार भी बनाया था लेकिन वह भाजपा के योगेन्द्र चंदोलिया से हार गए थे। वह 2014 में केवल एक बार भाजपा से सांसद बन पाए थे।

गौरतलब है कि गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय संविधान बेंच ने यह निर्णय दिया है। इस निर्णय में 6 जज एकमत थे जबकि जस्टिस बेला त्रिवेदी ने इस पर अपनी असहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि राज्य SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण के भीतर ऐसी जातियों को ज्यादा तरजीह दे सकते हैं, जो आर्थिक-सामाजिक रूप से अधिक पिछड़ गई हैं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि SC-ST कोई एक एक सजातीय समूह नहीं है और इस बात के सबूत भी हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण के भीतर आरक्षण देने से संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस मामले में 6 निर्णय पहले भी आ चुके हैं और सभी में इस बात को माना गया है कि आरक्षण के भीतर आरक्षण देना सही है।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस BR गवई ने कहा कि यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह अधिक पिछड़ी जातियों को तरजीह दे। उन्होंने कहा कि SC-ST समुदाय में भी केवल कुछ ही लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि SC-ST आरक्षण में भी क्रीमी लेयर पहचानी जाए और जिन जातियों को लाभ मिल चुका है, उन्हें इससे बाहर कर दिया जाए।

कोर्ट का यह निर्णय पंजाब राज्य के बनाए गए एक कानून के मामले में आया है। पंजाब ने 2006 में यह कानून बनाया था कि वह राज्य में SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण में भी वर्गीकरण करेगा। इस कानून को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके बाद पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के पास पहुँची थी।

यह मामला 2020 में संविधान बेंच के पास पहुँचा था। इस मामले में केंद्र सरकार भी पंजाब के पक्ष में थी। इस निर्णय से पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों को फायदा होगा। इन राज्यों में आरक्षण के भीतर कोटा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

भूस्खलन ने वायनाड को बनाया ‘मुर्दाघर’ तो वैज्ञानिकों को ‘जिंदा लाश’ बनाने लगी केरल की वामपंथी सरकार, कहा- मीडिया में साझा न करें विचार: फजीहत के बाद वापस लिया निर्देश

केरल के वायनाड में हुए भूस्खलन हादसे में प्रशासन की लापरवाही सामने आने के बाद अब वामपंथी सरकार दमन में जुट गई है। वामपंथी सरकार ने अपनी गलतियाँ छुपाने के लिए राज्य के वैज्ञानिक समुदाय की जुबान पर ताला लगाने वाला एक आदेश जारी किया। जब इस पर केरल सरकार घिर गई, तो उसने यह वापस ले लिया।

केरल सरकार ने वायनाड हादसे के बाद गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को एक आदेश निकाला है। इस आदेश में कहा गया है कि केरल का कोई भी वैज्ञानिक या भूस्खलन मामलों का जानकार वायनाड ना जाए और ना ही इस मामले को लेकर अपने विचार कहीं रखे।

इस आदेश में लिखा गया है, “केरल राज्य के सभी विज्ञान संस्थानों को निर्देश दिया जाए कि वे मेप्पडी पंचायत, वायनाड, का कोई दौरा न करें। वैज्ञानिक समुदाय को यह भी निर्देश दिया जाए कि वह अपनी राय और अध्ययन रिपोर्ट मीडिया में साझा ना करें।”

वायनाड भूस्खलन

केरल की वामपंथी सरकार ने यह आदेश तब जारी किया जब राज्य के ही कई वैज्ञानिक संस्थाओं ने खुलासा कर दिया कि वायनाड जिला प्रशासन को भूस्खलन सम्बन्धी चेतावनी भेजी गई थी। इसके बाद भी वायनाड जिला प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया और लगभग 300 लोग काल के गाल में समा गए।

वायनाड में 200 से अधिक मौसम निगरानी यूनिट चलाने वाले ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी ने भूस्खलन से दो दिन पहले ही चेतावनी दी थी। इसने उन इलाकों में विशेष रूप से खतरा बताया था जहाँ बाद में यह आपदा आई।

इस सेंटर के मुखिया CK विष्णुदास ने खुलासा किया था किजिला प्रशासन को सोमवार को ही भूस्खलन की चेतावनी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इन गाँवों से लोगों को निकालने की सलाह भी दी गई थी। हालाँकि, इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया आपदा आ गई।

यह जानकारी सामने आने के बाद केरल सरकार और वायनाड प्रशासन पर प्रश्न उठना चालू हुए तो उसने वैज्ञानिकों का ही मुंह बंद करने वाला आदेश निकाल दिया। इससे वह अपनी किरकिरी से बचना चाहती है। केरल सरकार के इस आदेश का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है।

भाजपा नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस अमले में पर कहा, “सबकुछ, हर एक बात जो INDI गठबंधन कहता है या करता है, जैसे कि वैज्ञानिक समुदाय को चुप कराने वाला CPM सरकार का यह आदेश, पाखंड, दोहरे मापदंडों और झूठ पर आधारित होता है।”

राजीव चंद्रशेखर के अलावा भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे केरल सरकार का तालिबानी फतवा बताया है। उन्होंने कहा है कि केरल सरकार अपनी विफलता छुपाना चाहती है, इसलिए वह ऐसे आदेश निकाल रही है।

भारी विरोध और लानत मलानत के बाद केरल की वामपंथी सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस पर सफाई भी दी है। CM विजयन ने कहा कि ऐसी कोई नीति नहीं है जो वैज्ञानिकों को बोलने से रोके।

गौरतलब है कि 30 जुलाई, 2024 की रात को वायनाड के कई गाँवों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ था। इस भूस्खलन के कारण 3-4 गाँव पूरी तरह बह गए थे। इनमें रहने वाले हजारों लोग यहाँ मलबे के बीच फंस गए। इस हादसे में अब तक लगभग 300 लोग मारे जा चुके हैं। सैकड़ों लोग घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है। सेना-वायुसेना और NDRF ने यहाँ हजारों लोगों को बचाया है। अब इन लोगों को फिर से बसाने को लेकर कवायद चल रही है।

जिस ‘पुरुष’ का मुक्का खाते ही रो पड़ी महिला बॉक्सर, उसे ‘पुरुष’ मानने को तैयार नहीं ओलंपिक कमेटी: 46 सेकेंड में खत्म हो गया था बॉक्सिंग का मैच, पूरी दुनिया में छिड़ी बहस

पेरिस ओलंपिक में कल (1 अगस्त 2024) अल्जीरिया की ट्रांस महिला ईमान खलीफ और इटली की महिला बॉक्सर एंजेला कैरिनी के बीच हुआ मैच लगातार चर्चा में है। 46 सेकेंड में खत्म हुए इस मैच में लोगों ने देखा था कि मैच शुरू होने के कुछ देर बाद ही कैरिनी के नाक पर तगड़ा पंच पड़ा था जिसके बाद उन्होंने हाथ उठाकर मुकाबले से हटने का इशारा किया।

ओलंपिक जैसे मंच पर चूँकि मैच इतनी जल्दी खत्म होते नहीं देखे जाते इसलिए सबको अजीब लगा। बाद में कैरिनी की नाक से हल्का खून निकलता देखा गया जिससे लगा कि तेज पंच के कारण उन्होंने निर्णय लिया। उनके हाथ उठाने के बाद ईमान खलीफ को इस मैच का विजेता बताया गया तब एंजेला घुटनों के बल बैठ गई और खलीफ से हाथ मिलाने से भी मना कर दिया।

उनकी हार की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग मामले को समझ गए और तभी एंजेला कैरिनी का बयान भी सामने आया जिसमें उन्होंने कहा था, “मुझे कभी इतना तगड़ा पंच नहीं लगा। बहुत दर्द हो रहा है, डर है कि कहीं नाक की हड्डी न टूट गई हो। हालाँकि मैंने अभी जांच नहीं कराई है। मैं कुछ कहने वाली नहीं हूँ लेकिन ये सब अवैध है।”

उनके इसी बयान के बाद सोशल मीडिया पर ये मुद्दा चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि इसे महिलाओं के खेल का अंत कहा जाता है जहाँ पुरूष अपने नाम मेडल करने के लिए महिला बन जाते हैं। इसी तरह कुछ लोगों का कहना है कि ये सरासर बेईबानी है कि कोई पुरुष बॉक्सिंग में महिला बनकर लड़े और इतनी तेज मुक्के मारे।

आम यूजर्स के अलावा इस मुद्दे को जाने-माने लोगों ने भी उठाया इटली की पीएम मेलोनी ने इस पर कहा कि भेदभाव से बचने के प्रयास में भेदभाव न करने के प्रति सावधान रहना चाहिए। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा वो महिलाओं के खेलों से पुरुषों को दूर करेंगे। एलन मस्क ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने कहा था कि महिलाओं के खेल में पुरुष को अनुमति नहीं होनी चाहिए। इस पर मस्क ने कहा बिलकुल।

सोशल मीडिया पर मामले की आलोचना होने के बाद अब इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने नियम आदि की सफाई देते हुए कहा कि इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी ने अपने बयान में आगे कहा कि हमने कुछ रिपोर्ट्स में दो महिला एथलीटों के ओलंपिक खेल पेरिस 2024 में प्रतिस्पर्धा करने के बारे में भ्रामक जानकारी देखी है। दोनों एथलीट कई सालों से महिला वर्ग में इंटरनेशनल मुक्केबाजी टूर्नामेंट्स में खेल रही हैं, जिनमें ओलंपिक खेल टोक्यो 2020, अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (आईबीए) वर्ल्ड चैंपियनशिप और आईबीए की ओर से अनुमोदित टूर्नामेंट शामिल हैं।

ये दोनों एथलीट IBA के अचानक और मनमाने फैसले के शिकार हुई थीं। 2023 में IBA वर्ल्ड चैंपियनशिप के अंत में उन्हें बिना किसी उचित प्रक्रिया के अचानक अयोग्य घोषित कर दिया गया था। यह निर्णय शुरू में केवल IBA महासचिव और CEO द्वारा लिया गया था। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आईओसी वर्तमान में दो एथलीटों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार से दुखी है।

बता दें कि कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि एक साल पहले खलीफ की महिला के तौर पर खेल में भागीदारी की जाँच भी हुई थी जिसमें वह असफल हो गई थीं। वह पिछले साल नई दिल्ली में महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में लिंग पात्रता परीक्षण को पूरा करने में विफल रहीं थीं। उनके शरीर में पुरुषों के समान गुण पाए गए थे।

मेडिकल की पढ़ाई करने आया, पुणे में बीवी-बच्चे के साथ बस ही गया खालिद मोहम्मद: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- पाकिस्तान जाओ, भारत की उदारता का फायदा न उठाओ

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अवैध रूप से भारत में बीवी-बच्चे के साथ रह रहे एक मुस्लिम प्रवासी से कहा है कि वह शरण लेने के लिए पाकिस्तान जा सकता है। कोर्ट ने उसे भारत में शरण देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि भारत उदार है, इसका फायदा खालिद ना उठाए।

बॉम्बे हाई कोर्ट की रेवती मोहित-डेरे और पृथ्वीराज चव्हान वाली वाली बेंच ने बुधवार(31 जुलाई, 2024) को इस मामले में की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा, “आप पाकिस्तान जा सकते हैं, जो पड़ोस में है या फिर आप किसी खाड़ी देश में जा सकते हैं। भारत के उदार रवैये का गलत फायदा ना उठाइए।”

हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी एक यमनी प्रवासी को लेकर कही। यह यमनी नागरिक खालिद गोमेई मोहमद हसन भारत में कई वर्षों से बिना वीजा रह रहा था। उसके साथ उसकी एक पत्नी और बेटी भी भारत में रह रही थी। उसका वीजा कई वर्ष पहले खत्म हो चुका था लेकिन वह भारत छोड़ नहीं रहा था।

पुणे पुलिस ने इस संबंध में उसे देश छोड़ने का नोटिस थमाया था, इसके खिलाफ वह बॉम्बे हाई कोर्ट चला गया था। खालिद का कहना था कि उसके पास संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिया गय शरणार्थी कार्ड है। उसका कहना था कि यदि उसे भारत से बाहर किया गया तो यह भारतीय संविधान और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन होगा।

खालिद 2014 में पढ़ाई करने के लिए भारत आया था और 2015 में उसकी बीवी भी भारत आ गई थी। उनकी एक बेटी भी है जिसका जन्म भारत में ही हुआ है। उसका वीजा 2017 में खत्म हो गया था। इसके बाद भी वह भारत में रह रहा था। फरवरी, 2024 में उसे पुणे पुलिस ने देश छोड़ने का नोटिस दिया था।

इसके बाद अप्रैल में भी उसे नोटिस दिया गया लेकिन वह यहाँ से नहीं गया। खालिद का कोर्ट से कहना था कि वह ऑस्ट्रेलिया में शरण माँग रहा है, जिसके लिए वह कागज तैयार कर रहा है और जब तक उसे ऑस्ट्रेलिया में शरण न मिले, उसे भारत में रहने दिया जाए।

कोर्ट ने खालिद से कहा कि जब उसके पास UNHCR का दिया कार्ड है तो वह विश्व के 129 देशों में जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि वह खालिद को ज्यादा से ज्यादा 15 दिन दे सकता है ताकि जिसके बाद वह भारत छोड़ दे। खालिद ने इस दौरान अपनी बेटी के लिए भारत की नागरिकता माँग ली, इस पर भी कोर्ट ने उसे कोई राहत नहीं दी।

आसिफ कुरैशी ने राहुल बन हिंदू युवती से बढ़ाई नजदीकी, रेप का वीडियो बना करने लगा ब्लैकमेल: मुस्लिम नहीं बनने पर वायरल करने की देता था धमकी, केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में आसिफ कुरैशी नाम के एक मुस्लिम युवक ने नाम बदलकर एक हिंदू लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। इस दौरान उसने लड़की से कई बार रेप किया और उसकी अश्लील तस्वीरें एवं वीडियो बना ली। बाद में उसने इन अश्लील वीडियो एवं तस्वीरों के जरिए लड़की पर धर्मांतरण करके इस्लाम अपनाने का दबाव डालने लगा। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

मामला मथुरा जिले के डीगगेट थाना क्षेत्र का है। यहाँ की रहने वाली एक युवती ने मंगलवार (30 जुलाई 2024) को थाने में तहरीर दी। उसने आरोप लगाया कि आसिफ कुरैशी उसकी दुकान पर आता था। इस दौरान वह बातचीत करने की कोशिश करता है। उसने अपना नाम राहुल बताया था। एक दिन बहाने से उसने लड़की का मोबाइल नंबर ले लिया और उस पर कॉल करने लगा।

मथुरा के नाटूनगर थाना कोसी का रहने वाला राहुल बना आसिफ कुरैशी धीरे-धीरे युवती से प्यार करने का नाटक करने लगा। वह कहता था कि वह युवती से बहुत प्यार करता है। वह धमकी भी देता था, जिससे लड़की डरकर उसकी बातों में आ गई। परिजनों ने बेटी के साथ लव जिहाद का आरोप लगाते हुए कहा कि आसिफ कुरैशी उनकी बेटी को इमोशनल ब्लैकमेल करता था।

आसिफ कुरैशी ने 2 मई 2024 को युवती को मिलने के लिए बुलाया और बहाने से उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिया। इस दौरान उसने लड़की के वीडियो और तस्वीरें भी छिप करके ले लीं। कुछ दिन बाद लड़की को पता चला कि राहुल का असली नाम आसिफ कुरैशी है। इसके बाद आसिफ उस पर धर्मांतरण करके मुस्लिम बनने का दबाव बनाने लगा।

लड़की का आरोप है कि जब उसने धर्मांतरण करने से इनकार कर दिया, तब आसिफ ने उसके अश्लील फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने लगा। उसके प्रताड़ना से तंग आकर आखिर में लड़की ने थाने पहुँचकर उसके खिलाफ तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने रेप, हत्या की धमकी और धर्मांतरण सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करके आसिफ की तलाश शुरू कर दी है।

‘पहला अपराधी पवन यादव और दूसरा मोहम्मद अरबाज…’: लखनऊ में महिला के साथ बदसलूकी पर CM योगी ने पूरी चौकी को किया सस्पेंड, कहा- अब बुलेट ट्रेन चलाएँगे

लखनऊ के गोमतीनगर में जल-जमाव के बीच बाइक से जा रही लड़की से छेड़छाड़ करने वाले अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये चारों 31 जुलाई 2024 को मरीन ड्राइव के पास पुल के नीचे पानी में हुड़दंग मचा रहे थे। इसके साथ ही उस इलाके की चौकी के पूरे पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन में बेहद गुस्से में दिखे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में गुरुवार (1 अगस्त 2024) को कहा, “गोमतीनगर की घटना की जवाबदेही हमने तय की है। उस घटना के अपराधियों की सूची भी मेरे पास आई है। पहला अपराधी है पवन यादव। दूसरा अपराधी है मोहम्मद अरबाज। ये सद्भावना वाले लोग हैं। अब इनके लिए सद्भावना ट्रेन चलाएँगे। इनके लिए बुलेट ट्रेन चलेगी। चिंता मत करो। उस बुलेट ट्रेन की तैयारी की जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “महिला सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च महत्व रखता है। कोई खिलवाड़ करेगा तो उसका खामियाजा भुगतेगा। इस बारे में हम लोगों ने आश्वस्त किया है एक-एक बेटी को, एक-एक बहन को। इस घटना को हमने बहुत गंभीरता से लिया है और गंभीरता से लेने का परिणाम है कि पूरी चौकी को सस्पेंड किया है।”

बेहद गुस्से में नजर आ रहे सीएम योगी ने सदन में आगे कहा, “हमने इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया है। डिप्टी एसपी… एडिशनल एसपी… और डीसीपी…. इन सबको वहाँ से चेंज करके इनके खिलाफ भी कार्रवाई हमने प्रारंभ की है। हम सबका सम्मान करेंगे, सबको सुरक्षा देंगे, लेकिन जो भी व्यक्ति इस प्रदेश के अंदर अराजकता और अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास करेगा, उसका भुक्तभोगी उसे बनना ही पड़ेगा।”

सीएम योगी ने कहा, “मैं यहाँ नौकरी करने नहीं आया हूँ। मैं यहाँ इस बात के लिए आया हूँ कि जो करेगा वो भुगतेगा। हम इसके लिए लड़ेंगे। ये हमारी सामान्य लड़ाई नहीं है। ना ही प्रतिष्ठा की लड़ाई है। मुझे प्रतिष्ठा प्राप्त करनी होती तो मुझे इससे ज्यादा प्रतिष्ठा अपने मठ में मिल जाती। इसकी कोई आवश्यकता नहीं है मेरे लिए।”

जिन अधिकारियों को हटाया गया है उनके नाम हैं- प्रबल प्रताप सिंह, अमित कुमावत, शशांक सिंह, पंकज कुमार सिंह, कृपा शंकर, राघवेंद्र सिंह, विकास कुमार जायसवाल और अंजु जैन। वहीं, जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है उनमें इंस्पेक्टर गोमतीनगर दीपक कुमार पांडेय, चौकी इंचार्ज दारोगा ऋषि विवेक, दारोगा कपिल कुमार, सिपाही वीरेंद्र कुमार शामिल हैं।

DGP प्रशांत कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि 31 जुलाई को ताज होटल के निकट गोमतीनगर थाना क्षेत्र में बने अंडरपास के पास बारिश से जल भराव हो गया था। वहाँ से आने-जाने वाले राहगीरों और वाहनों के साथ कुछ अराजक तत्वों द्वारा हुड़दंगई तथा आपत्तिजनक गतिविधियाँ की गई थी।

पुलिस ने बताया कि सूचना का संज्ञान लेते हुए थाना गोमती नगर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में फिलहाल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, वीडियो फुटेज के आधार पर बाकी लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, घटना के दिन एक युवती अपने दोस्त के साथ बाइक से जा रही थी। उस दौरान उससे छेड़छाड़ की गई और उसे पानी में गिरा दिया गया था।

सपा MP अवधेश प्रसाद की टीम का मेंबर है OBC बच्ची से रेप करने वाला मोईद खान, साथ खाता-बैठता है: अयोध्या की घटना पर CM योगी, पूछा- इनको माला पहनाएँगे क्या?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी को जवाब देते हुए कहा कि अपराधियों को गोली नहीं मारा जाएगा तो माला पहनाया जाएगा क्या। सीएम योगी ने इस दौरान एक नाबालिग लड़की से रेप करने वाले अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी मोईद खान और अधिवक्ता की हत्या करवाने वाले हरदोई के पूर्व सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव का भी जिक्र किया।

सीएम योगी ने गुरुवार (1 अगस्त 2024) को सदन में समाजवादी पार्टी को जवाब देते हुए कहा, “ये अपराधी समाज के सबसे बड़े कलंक हैं, कोढ़ हैं और इस कोढ़ को जब तक हटाएँगे नहीं, तब तक उत्तर प्रदेश की स्थिति को ठीक करने में कठिनाई होगी।” विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के सदस्यों को जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा, “ऐसे अपराधियों को माला पहनाएँगे क्या?”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अयोध्या का ये मामला है। इसका अपराधी मोईद खान समाजवादी पार्टी का नेता है। अयोध्या के सांसद की टीम का सदस्य है। 12 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के कृत्य में शामिल पाया गया है। अभी तक समाजवादी पार्टी ने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। अब क्या कोई समाजवादी पार्टी का नाम भी ना बोले?”

मोईद खान को लेकर सीएम योगी ने कहा, “आप एक टीम मेंबर हैं। आपके सांसद के साथ बैठना है, खाना है, उनके साथ चलना है। यह एक अति पिछड़ी जाति की बालिका से जुड़ा हुआ मामला है। वो इतनी घटिया हरकत में संलिप्त हैं, इसके बावजूद भी समाजवादी पार्टी द्वारा इसे हल्केपन से लेने का काम होता है।”

हरदोई की घटना का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा, “कल ही हरदोई में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई। इसमें भी वीरे उर्फ वीरेंद्र यादव शामिल है, जो समाजवादी पार्टी का पूर्व जिलाध्यक्ष है। आप देखो कि किस प्रकार के व्यक्ति को आप जिलाध्यक्ष बना रहे हैं। IPC और CrPC की ऐसी कोई धारा ना हो, जो इस पर ना लगी हो। 28 ऐसे मामले हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा नहीं है ये मामले 2017 से 2024 के बीच के हों। इस पर पहला अपराध दर्ज हुआ था 1989 में। दूसरा है 1991 में। तीसरा है 1991 में। चौथा 1991 में। पाँचवाँ 1992 में। 1996-2006-2007-2008-2009-2013-2015 में भी मामले दर्ज हुए हैं। 2013 और 2015 में तो आप (सपा) की ही सरकार थी। 2002 और 2017 में इस पर गुंडा अधिनियम के तहत इस पर कार्रवाई हुई।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “कल एक अधिवक्ता की सरेआम हत्या इस व्यक्ति के द्वारा करवाई गई है। इस प्रकार के अपराधियों को आप कहते हैं कि साहब आप गोली मार रहे हैं। क्या माला पहनाएँगे? ये तो ताजा उदाहरण है। ये समाज के लिए सबसे बड़े कलंक हैं। इस समाज का कोढ़ है। इस कोढ़ को जब तक हटाएँगे नहीं, तब तक उत्तर प्रदेश की स्थिति को ठीक करने में कठिनाई होगी।”

अयोध्या के सपा सांसद का करीबी मोईद खान

समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू पर नाबालिक लड़की से बलात्कार आरोप लगा है। मजदूर परिवार की पीड़िता का अश्लील वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल भी किया गया। पुलिस ने केस दर्ज करके मोईद खान और उसके नौकर राजू को गिरफ्तार कर लिया है। जिस सपा नेता मोईद खान पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा है उसी के घर में लगभग 12 साल से पुलिस चौकी चल रही थी।

घटना अयोध्या के थाना क्षेत्र पूराकलंदर की है। यहाँ के चौकी क्षेत्र भदरसा में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान की बेकरी की दुकान है। यहीं पर एक OBC समुदाय की एक मजदूर महिला और उनकी 12 वर्षीया नाबालिग बेटी रहती है। लगभग 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी कर के लौट रही थी। तभी रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई।

बताया जा रहा है कि दुकान में राजू और उसके मालिक मोईद ने पीड़िता से बारी-बारी सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान आरोपितों द्वारा रेप का वीडियो भी बना लिया गया। किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। बाद में इसी वीडियो से डरा-धमका कर पीड़िता से 2 महीने तक दोनों आरोपितों ने गैंगरेप किया। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की के पेट में दर्द होने पर माँ को शक हुआ। जब यह बात लड़की की माँ को पता चली तो उसने पूरी वजह पूछी। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बता दी। आखिरकार मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

क्या होता है कोटा के भीतर कोटा, कैसे तय होता है क्रीमी लेयर… SC/ST आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट ने खींची है जो नई लकीर उससे फायदा किनको, जानिए सब कुछ

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार (1 अगस्त 2024) को कहा कि दलित और जनजातीय समुदाय को मिलने वाले आरक्षण के भीतर अत्यंत पिछड़े SC-ST जातियों के लिए कोटा लागू किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान बेंच ने कहा है कि सरकार कोटा के भीतर कोटा दे सकती है और किसी एक जाति को 100% आरक्षण ना दिया जाए। 

दरअसल, CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा वाली 7 सदस्यीय संविधान पीठ ने 1 अगस्त 2024 को यह निर्णय दिया। इस निर्णय में 6 जज एकमत थे, जबकि जस्टिस बेला त्रिवेदी ने इस पर अपनी असहमति जताई।

कोर्ट ने कहा कि SC-ST को दिए जाने वाले आरक्षण के भीतर ऐसी जातियों को ज्यादा तरजीह दिया जा सकता है, जो आर्थिक एवं सामाजिक रूप से अत्यधिक पिछड़े हुए हैं। आरक्षण में आरक्षण देने के दौरान जातियों को सूची से अंदर-बाहर करने का निर्णय तुष्टिकरण के लिए ना लिया जाए। इसके लिए आँकड़े और ऐतिहासिक तथ्य जुटाए जाएँ। CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि SC-ST कोई एक सजातीय समूह नहीं है।

वहीं, जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि SC-ST समुदाय में भी केवल कुछ ही लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की पहचान की जाए और जिन जातियों को लाभ मिल चुका है, उन्हें इससे बाहर कर दिया जाए। दरअसल, अत्यंत पिछड़ी जातियों को ज्यादा तरजीह देने और आरक्षण का लाभ उठा चुकी जातियों की हिस्सेदारी करने की माँग लंबे समय से उठ रही थी।

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत अनुसूचित जातियों पर भी उसी तरह लागू होता है, जैसे यह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पर लागू होता है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने देश में दलित वर्ग के लिए आरक्षण का पुरजोर बचाव किया और कहा कि सरकार SC-ST आरक्षण के भीतर सब कैटेगरी के पक्ष में है।

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2000 के अपने फैसले को पलटा

साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की बेंच ने ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई की थी। इसमें बेंच ने फैसला दिया था कि राज्य सरकारें नौकरी में आरक्षण के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की सब-कैटेगरी नहीं बना सकती हैं। इस पर पंजाब सरकार ने तर्क दिया था कि इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया था।

पंजाब सरकार ने कहा था कि इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भीतर सब कैटेगरी की अनुमति दी थी। इस तरह यह स्वीकार्य था। पंजाब सरकार ने उस दौरान कहा था कि OBC की तर्ज पर ही अनुसूचित जाति में भी सब कैटेगरी की अनुमति दी जाए। साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने विचार के लिए इसे बड़ी बेंच के पास भेजने की बात कही।

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने बेंच ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया। इससे अब आंध्र प्रदेश और पंजाब के अलावा देश भर के अत्यंत पिछड़े SC-ST को लाभ मिलेगा। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने पंजाब अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग अधिनियम 2006 और तमिलनाडु अरुंथथियार अधिनियम पर एक तरह से मुहर लगा दी है।

दरअसल, पंजाब सरकार ने साल 1975 में आरक्षित सीटों को दो श्रेणियों में बाँटकर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नीति पेश की थी। एक बाल्मीकि और मजहबी सिखों के लिए और दूसरी बाकी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए। 30 साल तक ये नियम लागू रहा। उसके बाद 2006 में ये मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुँचा और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा और इसे रद्द कर दिया गया।

कोटा में कोटा या आरक्षण के भीतर आरक्षण का अर्थ

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को दी गई आरक्षण सीमा में आरक्षण तय करने से संबंधित है। वर्तमान अनुसूचित जाति को 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति को 7.5 प्रतिशत का आरक्षण मिला हुआ है। अब सरकारें अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के तय आरक्षण में उस वर्ग के अत्यंत पिछड़े या गरीब को आरक्षण दे सकती है।

इसका उद्देश्य आरक्षण का लाभ समाज के सबसे पिछड़े और जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाना है। दोनों वर्गों में जिन जातियों ने आरक्षण का लाभ लिया, उनके ही वर्ग के लोग इसमें आगे बढ़ते गए और जो शुरुआत में पिछड़ गए, वो पिछड़े रह गए। कोटा में कोटा प्रणाली का अर्थ इस खामी को दूर करना है, ताकि अत्यंत पिछड़े एवं आरक्षण का लाभ लेने से वंचित रह गए लोगों या जातियों को इसका लाभ मिल सके।

यदि हम बिहार का उदाहरण लें तो इसे आसानी से समझा जा सकता है। बिहार में ओबीसी में अहीर, ग्वाला, गोप, कोईरी, बनिया हैं। ओबीसी आरक्षण का सबसे अधिक फायदा इन्हीं जातियों ने उठाया और ये सामाजिक एवं आर्थिक रूप से शक्तिशाली बनीं। हालाँकि, ओबीसी की अन्य जातियाँ कानू, कलवार, तुरहा, नोनिया आदि जहाँ दशकों पहले थे, वहीं आज भी हैं।

बाद में इन्हें अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लिया गया। इसके लिए EBC यानी अत्यंत पिछड़ा का एक उप-वर्ग बनाया गया और उसमें शामिल कर लिया गया। हालाँकि, यह कोटा के अंतर्गत कोटा का सटीक उदाहरण नहीं है, लेकिन मसला बिल्कुल ऐसा ही है, जो इसी उद्देश्य की पूर्ति करेगा। अब इन जातियों को धीरे-धीरे ही सही इसका लाभ मिलने लगा है।

तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने SC, ST और OBC श्रेणियों के भीतर विभिन्न उप-श्रेणियों को आरक्षण देने की व्यवस्था की है। तमिलनाडु में पिछड़ा वर्ग (BC), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBC) और अति पिछड़ा वर्ग (Vanniyar) जैसी सब-कैटेगरी में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया है। कर्नाटक में अनुसूचित जाति के भीतर दो सब कैटेगरी कोडवा और माडिगा को अलग-अलग आरक्षण दिया गया है।

क्रीमी लेयर का सिद्धांत

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत अनुसूचित जातियों पर भी उसी तरह लागू होता है, जैसे यह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पर लागू होता है। यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में जिन लोगों ने आरक्षण का लाभ ले लिया है, उन्हीं के बाल-बच्चे भी आगे इसका फायदा उठाते हैं। ऐसा ना हो और सबको मौका मिले, यही कोर्ट का फैसला है।

अपना फैसला सुनाते हुए एक जज ने इसका उदाहरण भी दिया। जज ने कहा कि यह पूरी व्यवस्था एक ट्रेन की बोगी की तरह है। जो व्यक्ति बोगी में घुसने में सफल रहता है, वह बाकी लोगों को अंदर आने से रोकने की कोशिश करता है। जज के कहने का अर्थ है कि जिसे फायदा मिल रहा होता है, वह नहीं चाहता कि उसमें किसी तरह की कटौती या रुकावट हो।

इसी लिए क्रीमी लेयर के सिद्धांत की जरूरत SC-ST के लिए भी है। क्रीमी लेयर का सिद्धांत इसी उद्देश्य के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में लागू किया गया है। क्रीमी लेयर में वो लोग आते हैं, जिनके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से अधिक है। इस आय में कृषि आय शामिल नहीं है। इस श्रेणी में आने वाले लोगों को OBC को मिलने वाले 27% आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है।

इसके साथ उनका OBC का सर्टिफिकेट भी नहीं बनता है। OBC के जो लोग क्रीमी लेयर में नहीं आते, उन्हें सरकारी नौकरी से शिक्षण संस्थानों में नौकरी में छूट, आयु सीमा में छूट, फी में छूट आदि की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के अटेंप्ट में भी छूट मिलती है। क्रीमी लेयर को यह छूट नहीं मिलती।

इसी तरह अनुसूचित जाति और जनजाति में भी क्रीमी लेयर को आरक्षण से निकाल देने के बाद कमजोर तबके को इसका लाभ मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाला जाटव समाज इस श्रेणी का बड़ा लाभार्थी है। वहीं, राजस्थान का मीणा समुदाय अनुसूचित जनजाति वर्ग का सबसे बड़ा लाभार्थी है। क्रीमी लेयर लागू हो जाने या सब कैटेगरी बन जाने के बाद अत्यंत पिछड़े SC एवं ST समाज की जाति के लोगों को उनके संबंधित श्रेणी के आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

संविधान में प्रावधान

भारत के संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का विशेष तौर पर प्रावधान है। SC-ST को विशेष दर्जा देते समय इस बात का जिक्र नहीं किया है कि इसमें कौन-कौन सी जातियाँ आएँगी। यह अधिकार केंद्र के पास है। अनुच्छेद 341 के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित जातियों को एससी और एसटी कहा जाता है।

एक राज्य में SC के रूप में अधिसूचित जाति दूसरे राज्य में SC नहीं भी हो सकती है। बता दें कि भारत सरकार की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 में देश में 1,263 जातियाँ अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की थीं। वहीं अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप में कोई समुदाय इस श्रेणी के अंतर्गत चिह्नित नहीं है।

इस्माइल हानिया ही नहीं, मोहम्मद दायफ का भी हो चुका है काम तमाम: इजरायल ने किया कन्फर्म- मार गिराया गया है हमास का मिलिट्री कमांडर भी, 7 अक्टूबर के हमले का था मास्टरमाइंड

हमास के सरगना इस्माइल हानिया की मौत के एक दिन बाद ही इजरायल डिफेंस फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने आतंकी संगठन के मोहम्मद दायफ को भी मौत के घाट उतार दिया। दायफ हमास के सैन्य विंग का प्रमुख था। उसे इजरायल ने 13 जुलाई को ही मौत के घाट उतारा था लेकिन पुष्टि आज हुई है।

इजरायली सेना की तरफ से ट्वीट करके कहा गया, “हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि मोहम्मद दायफ मार दिया गया है।” एक अन्य बयान में कहा गया, “IDF ऐलान करता है कि 13 जुलाई, 2024 को IDF लड़ाकू विमानों ने खान यूनिस के इलाके में हमला किया और खुफिया आँकलन के बाद यह पुष्टि की जा सकती है कि हमले में मोहम्मद दायफ मारा गया।”

हमास की तरफ से अभी मोहम्मद दायफ की हत्या पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बताया जा रहा है कि मोहम्मद दायफ 7 अक्तूबर को जो हमला इजरायल में हुआ था उसका वो मास्टरमाइंड था जिसमें 1200 लोगों की मौत हुई थी और 250 लोग बंधक बनाए गए थे। इसके बाद ही इजरायल ने हमास के सफाए की कसम खाई और उनपर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए उन्हें 10 महीने हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि मोहम्मद दायफ दशकों से इजरायल की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में रहा है। उसपर आरोप था कि उसने ऐसे आत्मघाती बम विस्फोटकों को करवाया जिसमें कई इजरायलियों की मौत हुई। दायफ पर आरोप है कि वो सुरंगों का नेटवर्क और बम बनाने में एक्सपर्ट था और इजरायली सेना के निशाने पर लंबे समय से था। उसने 1987 में हमास को ज्वाइन किया था। बाद में गाजा की इस्लामी यूनिवर्सिटी से उसने साइंस में डिग्री ली और आरोपितों को 1989 में गिरफ्तार किया गया जिसके बाद उसे 16 महीने गाजा में भी गुजारने पड़े थे।