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वायनाड के अनाथों को दूध पिलाने 350 किमी दूर से आई भावना, पर राहुल-प्रियंका के कारण रिलीफ कैंप में जाने नहीं दिया: जिस बच्ची का स्कूल बहा उसने पहले ही लिख दी थी तबाही की कहानी

केरल के वायनाड में भूस्खलन के कारण भारी नुकसान हुआ है। 300 से अधिक लोगों को इस भूस्खलन में अपनी जान गँवानी पड़ी है जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता है। कई गाँव पूरे के पूरे बर्बाद हो चुके हैं। इस बीच एक बच्ची की कहानी सामने आई है, जिसे उसने आपदा से एक दिन पहले ही लिखा था। बच्ची के पिता भी इस हादसे में काल के गाल में समा गए हैं। एक महिला इस बीच बच्चों को स्तनपान करवाने के लिए आगे आई है।

बच्ची की कहानी जैसी आई आपदा

केरल के जिस वायनाड में यह घटना घटी है, वहीं के एक स्कूल वेल्लारमाला की एक बच्ची ने यह कहानी लिखी थी। यह कहानी इस स्कूल की मैगजीन के लिए लिखी गई। बच्ची की यह कहानी 29 जुलाई की सुबह प्रकाशित हुई थी। अगली रात को यहाँ भूस्खलन हो गया। इस बच्ची का नाम लाया AS है। कहानी में बच्ची ने लिखा है कि एक बच्ची बहते पानी में डूब जाती है। लेकिन कुछ दिनों बाद वह एक चिड़िया बन कर लौटती है और लोगों को पानी के पास जाने से रोकती है।

बच्ची की कहानी में यह चिड़िया इसलिए लोगों को चेता रही ताकि वह ना डूबें। चिड़िया बताती है कि पहाड़ी से पानी आ रहा है और जल्द ही कोई बड़ा खतरा आने वाला है। बच्ची की कहानी के छपने के 24 घंटे के भीतर यह भूस्खलन हुआ। दुखद बात यह है कि इस हादसे में बच्ची के पिता भी मारे गए हैं। आपदा के बाद बच्ची की कहानी की लगातार चर्चा हो रही है।

स्तनपान करवाने पहुँची महिला

वायनाड में आई इस त्रासदी के बीच एक समाजसेवी महिला यहाँ उन बच्चों को स्तनपान करवाने पहुँची है, जिनके माता-पिता इस हादसे में हताहत हुए हैं। इडुक्की की रहने वाली भावना और उनके पति ने इस घटना के विषय में जानकारी पाने के बाद सोशल मीडिया पर उन्होंने ऐलान किया कि वह मदद के लिए तैयार हैं।

भावना और उनके पति अपने घर से 350 किलोमीटर दूर वायनाड पहुँच भी गए हैं। भावना ने बताया कि उन्हें, मैसेज पोस्ट करने के बाद एक फोन आया था। हालाँकि, जब वह वायनाड पहुँची तो यहाँ उन्हें वैसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, ना ही उसने फोन उठाया। भावना ने बताया कि यह फोन फर्जी था। वर्तमान में वह सुल्तान भतेरी में एक रिश्तेदार के यहाँ रुके हुए हैं।

भावना ने बताया कि जब तक वह यहाँ एक बच्चे की मदद नहीं कर देते, तब तक वापस नहीं जाएँगे। उन्होंने बताया कि गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को वह किसी भी रिलीफ कैम्प में नहीं जा पाए क्योंकि यहाँ राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी आए हुए थे।

OBC बच्ची से रेप करने वाले सपा नेता मोईद खान ने अयोध्या में दलितों की जमीन पर कर रखा है कब्जा: बजरंग दल ने की शिकायत, कहा- दंगों में शामिल राशिद खान दे रहा था संरक्षण

अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी मोईद खान द्वारा पिछड़े समाज की नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने के मामले में बजरंग दल ने शिकायत दर्ज कराई है। बजरंग दल ने कहा कि मोइद खान के दोस्त एवं नगर पंचायत अध्यक्ष राशिद खान और थाना प्रभारी रतनलाल शर्मा की संपत्ति एवं गतिविधियों की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है। हिंदू संगठन का कहना है कि मोइद खान का दोस्त राशिद 2012 के दंगों में शामिल रहा है।

बजरंग दल ने एसएसपी को लिखे पत्र में कहा है कि 14 साल की एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर पिछले दो वर्षों से मोइद खान और राजू खान दुराचार कर रहे थे। लड़की का स्वास्थ्य खराब हुआ तो इसकी जानकारी हुई। पत्र में कहा गया है कि मामला सामने आने के बाद पीड़िता के परिजनों द्वारा इसकी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस द्वारा आनाकानी की गई।

बजरंग दल ने कहा कि हिंदू संगठनों के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में मामला दर्ज किया गया, लेकिन उसे गिरफ्तार करने के बजाय पुराकलंदर थाने के प्रभारी रतनलाल शर्मा द्वारा आरोपित का संरक्षण किया जा रहा था। हिंदू संगठन ने यह भी कहा कि थाना प्रभारी रतनलाल शर्मा के अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद राशिद खान भी मोइद खान को संरक्षण दे रहा था।

राशिद खान के बारे में कहा गया है कि वह साल 2012 में भदरसा के हिंदू विरोधी दंगों में राशिद खान की सक्रिय भूमिका रही है। इसके अलावा कई हत्या के कई मामलों में आरोपित है। पत्र में राशिद खान और थाना प्रभारी रतनलाल शर्मा के खिलाफ उच्चस्तरीय जाँच की माँग की गई है। कहा गया है कि रतनलाल शर्मा हिंदू विरोधी गतिविधियों को संचालित करने वाले अपराधियों को संरक्षण देते हैं।

ऑपइंडिया के पास उपलब्ध पत्र के अनुसार, अयोध्या के जिलाधिकारी को लिखे गए एक अन्य पत्र में कहा गया है कि मोइद खान ने कई सरकारी जमीनों और दलित समाज की जमीनों पर कब्जा जमा रखा है। भदरसा भाहर में मोइद की बेकरी भी दलित समाज के व्यक्ति जानकी प्रसाद नाम के एक व्यक्ति की जमीन पर बनी है, जिसका गाटा संख्या 1675 और 1676 है। यह सरकारी चकरोट पर बिल्डिंग बनी है।

जिलाधिकारी को लिखे पत्र में बजरंग दल ने आरोप लगाया है कि स्थानीय सरकारी प्राथमिक विद्यालय के कमरों को तोड़ करके जामिया अरबिया बहरूल उल्लूम इस्लामिक विद्यालय बनाया जा रहा है। यहाँ सरकारी जमीन पर मदरसा चलाया जा रहा है। वहीं, पुलिस चौकी मोइद खान की पॉपर्टी में चल रही थी। हिंदू संगठन ने राशिद खान और रतनलाल शर्मा की संपत्तियों की जाँच की भी माँग की है।

दरअसल, ओबीसी लड़की से रेप का मामला अयोध्या के थाना क्षेत्र पूराकलंदर की है। यहाँ के चौकी क्षेत्र भदरसा में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान की बेकरी की दुकान है। यहीं पर एक OBC समुदाय की एक मजदूर महिला और उनकी 14 वर्षीया नाबालिग बेटी रहती है। लगभग 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी करके लौट रही थी।

उस दौरान रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई। बताया जा रहा है कि दुकान में राजू और उसके मालिक मोईद ने पीड़िता से बारी-बारी सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान आरोपितों द्वारा रेप का वीडियो भी बना लिया गया।

किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। बाद में इसी वीडियो से डरा-धमका कर पीड़िता से 2 महीने तक दोनों आरोपितों ने गैंगरेप किया। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की के पेट में दर्द होने पर माँ को शक हुआ। जब यह बात लड़की की माँ को पता चली तो उसने पूरी वजह पूछी। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बता दी।

पीड़ित परिवार जब मामला दर्ज कराने पहुँचा तो थाना प्रभारी रतनलाल शर्मा टाल-मटोल करने लगे। इसका कारण था कि पिछले 12 साल से पुलिस चौकी मोईद खान की प्रॉपर्टी में संचालित हो रहा थी। घटना की बाबत शिकायत देने के करीब 30 घंटे बाद इस पर एक्शन हुआ और मामला सबसे संज्ञान में आया। इसके बाद 30 जुलाई को मोइद खान और उसका नौकर राजू खान जाकर गिरफ्तारी हुए।

‘शिवलिंग’ की जगह आरफा खानुम शेरवानी ने लगा दिया ‘कूड़ेदान’, शिकायत दर्ज: पहले भी हिंदू घृणा दिखाती रही है ‘द वायर’ की इस्लामवादी पत्रकार

सोशल मीडिया पर शिवलिंग की जगह कूड़ेदान को दिखाने वाली आरफा खानुम शेरवानी के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। हिंदुओं की भावना आहत करने के आरोप में लीगल हिंदू डिफेंस नाम के सोशल हैंडल से इस संबंध में एक्शन लिया गया। उन्होंने साइबर क्राइम के तहत पुलिस में शिकायत देते हुए कहा कि शेरवानी द्वारा की गई हरकत से हिंसा भड़क सकती है और समाज में अराजकता आ सकती है।

आईपीसी की धारा 173 और 174 के तहत आरफा खानुम शेरवानी के खिलाफ यह शिकायत की गई है। इसमें माँग है कि झूठी जानकारी फैलाने के आरोप में आरफा के विरुद्ध एफआईआर हो। उनके ऊपर फर्जी जानकारी और अफवाह फैलाने के आरोप हैं।

शिकायत में लिखा है, “आरोपित के बयान से समाज में अशांति फैल सकती है। आरोपित के बयान प्रथम दृष्टया झूठे हैं, जिन्हें सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से दोहराया गया। इससे सार्वजनिक समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ती है।” शिकायत में आगे कहा गया है कि मामले को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352, 353 (2) और 293 के तहत दर्ज किया जाना चाहिए।”

इस शिकायत की कॉपी को साझा करते हुए एलडीएफ ने कहा शिवलिंग का अपमान करने वाली आरफा बेगम के खिलाफ लीगल हिंदू का परचम लहराएगा। इस मामले में पुलिस को शिकायत दे दी गई है।

गौरतलब है कि गुरुवार (1 अगस्त 2024) को ‘द वायर’ की आरफा खानुम शेरवानी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया था। इस पोस्ट में उन्होंने बाहुबली फिल्म से प्रभास की वो तस्वीर ली जिसमें वो शिवलिंग कांधे पर उठाता है। इस तस्वीर में आरफा ने शिवलिंग को डस्टबिन के साथ रिप्लेस किया जिसे देख सोशल मीडिया यूजर भड़क गए।

अपनी कुंठा निकालने के लिए आरफा ने ये ट्वीट किया था। इसमें दिखाया कूड़ेदान पकड़े ओम बिड़ला को दिखाया गया था और लिखा था कि विजन 2047 यही है। उनके इसी ट्वीट पर काफी बवाल हुआ और लोगों ने सवाल खड़े किए। अंत में हिंदुओं की भावना आहत करने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई।

मालूम हो कि ये पहली बार नहीं है कि आरफा खुद तो सेकुलर दिखाने के चक्कर में हिंदुओं को बदनाम करती दिखीं हों। उनका लंबा इतिहास रहा है कि न्यूट्रल रहने के नाम पर वो इस्लाम की समर्थक और हिंदुओं की आवाज उठाने वालों का विरोध करती रही हैं। इससे पहले वो कई बार गौमूत्र, गोबर के नाम पर हिंदुओं का मजाक बना चुकी हैं। इसके अलावा वह 2022 में टीवी डिबेट के दौरान नुपूर शर्मा द्वारा कही गई बात के खिलाफ भी टिप्पणी करती देखी जा चुकी हैं।

7 साल के बच्चे का कलावा कटवाया, कहा- हलाल मीट खाओ, शरीर मजबूत होगा: लंदन के स्कूल में हिंदू बच्चे को इस्लामी पाठ पढ़ा रहे थे साथी, 3 मुस्लिम छात्र सस्पेंड

इंग्लैंड के एक स्कूल में एक बच्चे का धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया गया। यह प्रयास उसके साथ पढ़ने वाले बच्चों ने किया। हिन्दू बच्चे के साथ पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों ने उसे बताया कि यदि वह हलाल मीट खाएगा तो उसका शरीर मजबूत हो जाएगा। हिन्दू बच्चे के पिता ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है।

इंग्लैंड की एक समाचार वेबसाइट के अनुसार, एक हिन्दू बच्चे के पिता ने उसके 7 वर्षीय बालक को इस्लाम में धर्मांतरित किए जाने की शिकायत की है। मुस्लिम छात्रों ने अपने हिन्दू साथी को मुहम्मद नाम रखने के लिए राजी करवा लिया और उसका कलावा भी कटवा दिया।

बच्चे के पिता ने जानकारी दी कि हिन्दू बच्चे को मुस्लिम छात्रों ने बताया कि यदि वह मांस खाएगा तो उसका शरीर मजबूत होगा। उन्होंने उसे बताया कि यदि वह हलाल मांस खाएगा तो उसका शरीर और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा। बच्चे ने एक दिन अपने घर में अपना नाम मुहम्मद रखे जाने की मांग भी की।

बच्चे के पिता ने जब इस मामले में की शिकायत उसकी कक्षाध्यापक से की तो उसने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बदले में उसने कहा कि बच्चे नई चीजें सीख रहे हैं। हिन्दू बच्चे को इस्लामी छात्रों ने धमकाया कि यदि वह अपना नाम मुहम्मद नहीं रखता है तो वह उससे दोस्ती नहीं रखेंगे।

बच्चे के पिता ने इस बात की शिकायत इसके बाद स्कूल की प्रधानाध्यापिका से की है। इस शिकायत के बाद तीनों इस्लामी छात्र स्कूल से निलंबित कर दिए गए हैं। पीड़ित बच्चे के पिता ने बताया है कि वह अपने घर पर धर्म सम्बन्धी बात नहीं करते है। उन्होंने बताया कि वह घर में हिन्दू धर्म के विषय में तक बात नहीं करते लेकिन इस्लामी छात्र उनके बच्चे को निशाना बना रहे हैं।

इस्लामी छात्रों पर एक्शन के बाद बच्चे के पिता ने आसपास के परिवारों से भी बात की है और उन्हें भी इस स्थिति के बारे में चेताया है। हिन्दू के पिता ने यह भी जानने का प्रयास किया है कि उसके बच्चे को धर्मांतरण के निशाने पर क्यों लिया गया।

जिस अवधेश को लेकर नाचे राहुल-अखिलेश, ‘अयोध्या की बेटी’ को नोंचता था उसका खास मोईद खान: अपने रेपिस्ट नेता पर सपा मौन, पीड़िता की माँ से मिले CM योगी

लोकसभा चुनाव के बाद अयोध्या के जो नतीजे सामने आए उसके बाद से अयोध्या की सीट बहुत चर्चा में रही। यहाँ से सांसदी जीते समाजवादी पार्टी के नेता अवधेश प्रसाद को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जहाँ अयोध्या का राजा बताया तो वहीं कॉन्ग्रेसी भी इसे अपनी जीत समझते दिखाई दिए। अब उसी अयोध्या में एक मामला ओबीसी लड़की से रेप का मामला चर्चा में है, जिसके आरोपित मोईद खान के तार सपा पार्टी से जुड़े हैं और मीडिया में उसे सांसदग अवधेश प्रसाद से जोड़कर बताया जा रहा है। सोशल मीडिया में दोनों की एक साथ तस्वीर वायरल हो रही है, लेकिन न अखिलेश यादव अब इस मामले में कुछ बोल रहे हैं और न ही राहुल गाँधी… वहीं अवधेश प्रसाद भी लगातार पत्रकारों को ये कहकर किनारे कर रहे हैं कि उन्हें घटना का कुछ पता ही नहीं।

रिपब्लिक भारत पर इस संबंध में एक रिपोर्ट भी आई है। इस रिपोर्ट में दिखाया गया कि कैसे अवधेश प्रसाद पत्रकारों के सवालों को टालते दिखे। जब रिपब्लिक पत्रकार ने उनसे घटना की बाबत पूछा तो वह बोले कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता, रूम में जाकर जब इस पर कोई बात होगी तब वो कुछ बोल पाएँगे। पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या वो उसके बाद कोई एक्शन लेंगे। इस पर भी अवधेश प्रसाद ये कहने की बजाए कि आरोप सही पाए गए तो कार्रवाई होगी कि जगह सवाल को घुमाते दिखे। उन्होंने कहा कि वो सदन में शामिल हो रहे हैं अभी इस मामले में वो कुछ नहीं कह पाएँगे। जानकारी होने पर ही वो एक भी शब्द बोलेंगे।

हैरानी की बात है कि अवधेश प्रसाद जिस रेप आरोपित से जुड़े सवाल होने पर खुद को मीडिया के आगे मामले अनभिज्ञ दिखा रहे हैं वो व्यक्ति उनका करीबी लगता है, जिसके साथ उनकी तस्वीरें शेयर हो रही हैं। इन फोटोज में वह अवधेश प्रसाद के साथ एकदम बगल में बैठा है। बावजूद इसके अवधेश प्रसाद या कोई सपा नेता इस पर कुछ नहीं बोल रहा।

इस मुद्दे को सीएम योगी आदित्यनाथ ने संसद में भी उठाया और निजी तौर पर पीड़िता के परिजनों से मुलाकात भी की। कल सदन में उन्होंने ओबीसी लड़की से गैंगरेप के आरोप सामने आने के बाद कहा था कि अयोध्या गैंगरेप का आरोपित तो फैजाबाद सांसद अवधेश प्रसाद की टीम का सदस्य है। वह उनके साथ उठता, बैठता और खाता-पीता है। बावजूद इसके समाजवादी पार्टी की तरफ से कुछ भी नहीं कहा गया। इतना ही नहीं न कोई एक्शन लिया गया है, जबकि मामला एक अति ओबीसी लड़की से जुड़ा हुआ है। वहीं आज उन्होंने पीड़िता की माँ से सीएम आवास में मुलाकात की, बच्ची की हालत के बारे में जाना और आरोपितों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया।

बता दें कि जिस मामले के संज्ञान में आने के बाद सीएम योगी ने ओबीसी बच्ची के परिजनों को आश्वासन दिया है कि वो आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करेंगे। उस ओबीसी बच्ची की शिकायत भी कुछ दिन पहले दर्ज नहीं हो रही थी। कारण था कि पुलिस चौकी ही मोईद खान की प्रॉपर्टी के भीतर पिछले 12 साल से संचालित हो रहा थी। गुहार लगाने पर भी उसकी नहीं सुनी जा रही थी। घटना की बाबत शिकायत देने के करीब 30 घंटे बाद इसपर एक्शन हुआ और मामला सबसे संज्ञान में आया। इसके बाद 30 जुलाई को मोईद खान और उसका नौकर राजू जाकर गिरफ्तारी हुए। अब पुलिस मोईद खान के विरुद्ध जाँच करने में जुटी है।

ओबीसी लड़की के साथ मोईद खान और नौकर राजू खाँ ने किया रेप

उल्लेखनीय है कि ओबीसी लड़की से रेप का मामला अयोध्या के थाना क्षेत्र पूराकलंदर की है। यहाँ के चौकी क्षेत्र भदरसा में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान की बेकरी की दुकान है। यहीं पर एक OBC समुदाय की एक मजदूर महिला और उनकी 12 वर्षीया नाबालिग बेटी रहती है। लगभग 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी कर के लौट रही थी। तभी रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई।

बताया जा रहा है कि दुकान में राजू और उसके मालिक मोईद ने पीड़िता से बारी-बारी सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान आरोपितों द्वारा रेप का वीडियो भी बना लिया गया। किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। बाद में इसी वीडियो से डरा-धमका कर पीड़िता से 2 महीने तक दोनों आरोपितों ने गैंगरेप किया। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की के पेट में दर्द होने पर माँ को शक हुआ। जब यह बात लड़की की माँ को पता चली तो उसने पूरी वजह पूछी। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बता दी। आखिरकार मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ निषाद पार्टी के सदस्य भी थाने पर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। मौके पर पुलिस फोर्स पहुँची और नाराज लोगों को समझा कर शाँत करवाया। जाँच के दौरान यह भी पता चला कि जिस भदरसा पुलिस चौकी क्षेत्र की यह घटना है वह आरोपित मोईद खान की ही प्रॉपर्टी में चल रही थी। रात भर में ही पुलिस चौकी को मोईद खान की प्रॉपर्टी से अलग जगह शिफ्ट किया गया।।

बाइक टच होने पर माजिद चौधरी ने पति-बच्चों के सामने गोली मार सिमरनजीत की हत्या की, दिल्ली पुलिस ने एनकाउंटर के बाद दबोचा: पहले से भी दर्ज हैं 3 मुकदमे

दिल्ली के गोकुलपुरी में सिमरनजीत नाम की महिला की हत्या करने वाले 28 साल के माजिद चौधरी को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित माजिद इलाके में अपने एक रिश्तेदार से मिलने के लिए गया था। उसके बाद पुलिस ने उसे घेर लिया। एनकाउंटर के दौरान आरोपित के दोनों पैरों में गोली लगी है। पुलिस ने उसे घायलावस्था में गिरफ्तार कर लिया है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपित माजिद के पास से एक 7.65 एमएम की पिस्तौल बरामद की है, जिसकी मैगजीन में 2 राउंड और चैम्बर में 3 राउंड हैं। इसके अलावा, गाँधी नगर के पुराने सीलमपुर इलाके से चोरी की गई एक मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है। माजिद चौधरी बुधवार (31 जुलाई 2024) की घटना के दिन से ही फरार चल रहा था।

दरअसल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में बाइक टच हो जाने के बाद मामूली कहासुनी के बीच माजिद चौधरी ने सिमरनजीत कौर नाम की महिला की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद से वह फरार हो गया था। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ रहा था। पुलिस को जानकारी मिली की माजिद गोकलपुरी में अपने किसी जानकार से मिलने आया है।

इसके बाद गोकुलपुरी इलाके के गंदे नाले के पास पुलिस ने जाल बिछा दिया। रात को लगभग 3 बजे जैसे ही माजिद अपनी बाइक से गुजरने लगा तो पुलिस ने उसे रुकने के लिए कहा। इस पर रुकने के बजाय उसने पुलिस टीम पर एक के बाद एक करके तीन राउंड गोली चला दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और इसमें माजिद के दोनों पैरों में गोली लग गई। इसके बाद वह घायल होकर वहीं गिर पड़ा।

पुलिस का कहना है कि गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके के रहने वाले माजिद का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड है। वह 2015 में साहिबाबाद में एक हत्या में शामिल था। इस मामले में वह 6 साल बाद बेल पर ?आया। साल 2022 में एक शख्स की हत्या की कोशिश में फिर से 6 महीने जेल में रहा। जेल से बाहर निकलने के उसने फिर से एक और हत्या की कोशिश की। इस मामले में वह 5 महीने जेल में रहा।

अब उसने मामूली-सी बात के बाद बच्चों और पति के सामने एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। माजिद ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि 31 जुलाई 2024 को वह अपनी बाइक से गोकुलपुरी फ्लाईओवर से जा रहा था। इस दौरान उसकी बाइक हीरा सिंह की बाइक से टच हो गई। हीरा सिंह अपनी 30 साल की पत्नी सिमरनजीत कौर और 12 एवं 4 साल के 2 बेटों के साथ मौजपुर जा रहे थे।

इस बीच हीरा सिंह और माजिद चौधरी के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद हीरा सिंह और उनका परिवार फ्लाईओवर की ओर बाई तरफ सड़क पर चलता रहा। वहीं, माजिद फ्लाईओवर पर चढ़ गया। माजिद ने फ्लाईओवर पर अपनी बाइक रोकी और 30-35 फीट की दूरी से नीचे एक गोली चला दी। गोली सिमरनजीत कौर के सीने और गर्दन के बीच जा लगी। अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई।

लोहे के पाइप से पीटा, तलवार से गर्दन काटी, आँखें फोड़ी… सुनील-पुनीत-सुधीर की हत्या में 16 साल बाद 10 दोषी: शीबा के इश्क में इजलाल कुरैशी ने दिया था अंजाम

उत्तर प्रदेश के मेरठ में 2008 में तीन हिन्दू युवकों की हत्या के मामले में आरोपित इजलाल को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। उसके साथ ही उसकी गर्लफ्रेंड शीबा सिरोही समेत 10 लोगों को दोषी माना गया है। इस हाई प्रोफाइल मामले में लगातार 16 वर्षों से मामला चल रहा है।

कोर्ट ने सुनवाई पूरी करके गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को 10 आरोपितों को दोषी करार दिया है। इस मामले में सजा 5 अगस्त को सुनाई जाएगी। अब तक इजलाल इस मामले में जमानत पर घूम रहा था। उसे अब जेल जाना होगा। अदालत ने इजलाल की गर्लफ्रेंड शीबा सिरोही को भी दोषी करार दिया है, उसके ही चक्कर में यह तिहरा हत्याकांड हुआ था।

क्या था पूरा मामला

मुख्य आरोपित इजलाल का मेरठ की एक लड़की शीबा सिरोही से प्रेम प्रसंग था। शीबा सिरोही सामान्य परिवार से थी जबकि इजलाल काफी प्रभावशाली परिवार से था। इजलाल के पास मीट की फैक्ट्री, कोल्ड स्टोरेज और अन्य कई धंधे थे। इजलाल का चचेरा भाई शाहिद अखलाक 2008 में बसपा का मेरठ से सांसद भी था।

शीबा और इजलाल का लम्बे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। शीबा की घरवालों ने सेना के एक अफसर के साथ शादी करवाई थी लेकिन वह वहाँ रह ना पाई और मेरठ वापस चली आई थी। इजलाल उस पर काफी पैसे लुटाता था। लेकिन इस बीच शीबा पर इजलाल को शक हो गया।

दरअसल, शीबा सुधीर नाम उज्ज्वल नाम के एक लड़के से बात करती थी। यह बात इजलाल को पसंद नहीं आई। सुधीर, इजलाल का पहले से पहचान वाला था। इजलाल ने इसीलिए सुधीर को मारने का प्लान बनाया और इसके लिए 23 मई, 2008 की रात मेरठ के गुदड़ी बाजार में स्थित एक घर में उसे बुलाया।

सुधीर के साथ पुनीत गिरी और सुनील ढाका नाम के दो और युवक भी आए। इस घर में इजलाल ने पहले इन युवकों को शराब पिलाई और फिर इन पर हमला बोल दिया। इजलाल ने इन तीनों को पीट-पीट कर मार दिया। इसके बाद इनकी आँखे निकाल लीं। इनके शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया। मीट काटने वाले छुरे से इनके शव काटे भी गए।

इसके बाद शवों को घर में ही फेंक दिया गया। इजलाल ने मोटर चला कर घर को धोया भी। लेकिन तीनों के शरीर से बहा खून बाहर सड़क पर आ गया और मुहल्ले के लोगों को पता चल गया। इजलाल ने इसके बाद शव ठिकाने लगाने की सोची।

लाश सड़क किनारे छोड़ी

इजलाल ने मामला बिगड़ता देख फोन कर गाड़ियों का काफिला मंगवा लिया। इसके बाद तीनों शवों को निकाल कर एक एस्टीम गाड़ी में रखा गया और उन्हें लेकर वह ठिकाने लगा चला गया। इजलाल के मँगवाए काफिले में एक लाल बत्ती की गाड़ी भी थी। इज्लाला मेरठ से यह लाशें लेकर निकला और तीनों लाशों को बागपत में हिंडन नदी के किनारे लेकर पहुँचा।

इजलाल की गाड़ी का यहाँ तेल खत्म हो गया। इसके बाद उसने गाड़ी यहीं छोड़ दी। जब तीनों के घरवालों ने तलाश चालू की तो मामले का खुलासा हुआ। इस मामले से धार्मिक तनाव भी बन गया क्योंकि हत्यारा मुस्लिम और मारे जाने वाले तीनों हिन्दू थे। मामले में पुलिस ने इजलाल को बागपत से गिरफ्तार किया था।

उसे कुछ समय के बाद जमानत मिल गई थी। इजलाल अब तक जेल से बाहर ही रह रहा था। अब उसे दोषी ठहराया गया है, उसको सजा 5 अगस्त को सुनाई जाएगी। कोर्ट ने इजलाल के अलावा शीबा सिरोही, अफजाल, वसीम, रिजवान, बदरुद्दीन, महराज, इजहार और अब्दुल रहमान को दोषी ठहराया है। इस मामले में एक गवाह पर भी हमला हो चुका है।

नहीं बदलेंगे संभाजीनगर और धाराशिव का नाम: सुप्रीम कोर्ट ने शेख मसूद सहित कई लोगों की याचिका खारिज की, कहा- इसका अधिकार सरकार के पास

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (2 अगस्त 2024) को महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को हरी झंडी दे दी, जिसमें औरंगाबाद और उस्मानाबाद शहरों का नाम बदला गया था। राज्य सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव किया था। शेख मसूद इस्माइल शेख एवं अन्य ने सरकार के इस फैसले को चुनौती दी थी, जिसे शीर्ष न्यायालय ने खारिज कर दिया।

जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि उच्च न्यायालय का निर्णय पूरी तरह से तर्कसंगत था। दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले के विरुद्ध बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “देखिए, किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए स्थान के नाम को लेकर हमेशा सहमति और असहमति होती है। क्या न्यायालयों को इसे न्यायिक समीक्षा के माध्यम से हल करना चाहिए? यदि उनके पास (सरकार के पास) नाम रखने का अधिकार है तो वे नाम बदल भी सकते हैं। यह (बॉम्बे उच्च न्यायालय का) एक तर्कसंगत आदेश है। इसमें गलती क्यों होनी चाहिए।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने दोनों शहरों के नाम बदलने से पहले कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का व्यापक रूप से पालन किया था। बता दें कि इस साल मई में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के इन दोनों शहरों के नाम बदलने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था और सरकार के फैसले को सही ठहराया था।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पिछली महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने 29 जून 2021 की कैबिनेट बैठक में औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदलने का फैसला किया था। जब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली नई सरकार ने महाराष्ट्र में पद भार ग्रहण किया, उसके बाद 16 जुलाई 2022 को एमवीए सरकार के निर्णय को फिर से लागू किया।

इसके बाद संबंधित जिलों के निवासियों सहित कई व्यक्तियों ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर कीं। सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने तर्क दिया कि ‘उस्मानाबाद’ का नाम बदलकर ‘धाराशिव’ करने से न तो कोई धार्मिक या सांप्रदायिक द्वेष पैदा हुआ और न ही इससे धार्मिक समूहों के बीच कोई दरार पैदा हुई। इसके बाद हाई कोर्ट ने संबंधित याचिकाएँ खारिज कर दीं।

ट्रेन के जनरल बोगी जैसे हो गया आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट के दलित जज ने समझाई SC/ST कोटा की हकीकत, कहा- जो भीतर आ जाता है वह दूसरे को घुसने नहीं देता

SC-ST वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण के मामले पर 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट की 7 न्यायधीशों की संविधान पीठ ने 6-1 के बहुत से ऐतिहासिक फैसला दिया। पीठ ने इस दौरान आरक्षण के भीतर आरक्षण तय करने पर मुहर लगाई। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट ने एससी, एसटी वर्ग के आरक्षण में से क्रीमीलेयर को चिन्हित कर बाहर किए जाने की जरूरत है ताकि समानता आ सके। इस फैसले के दौरान 7 जजों में से एक मात्र दलित जस्टिस बीआर गवई ने पूरे मामले पर बहुत महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की।

जस्टिस बीआर गवई ने कहा आरक्षण का सही उद्देश्य है कि देश में समानता को समझा जाए। असमानता वाले समूह में आखिर कैसे सबको एकसमान माना जाता है। इस दलील के आधार पर बेंच ने कहा कि एससी और एसटी में भी क्रीमी लेयर को लागू करना चाहिए। जस्टिस गवई ने कहा, “सरकार को क्रीमी लेयर की पहचान करने के लिए कोई नीति बनानी चाहिए और लाभ पा चुके लोगों को उससे बाहर करना चाहिए। समानता को पाने का यही एकमात्र तरीका है।”

जस्टिस गवई ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या एक आईएएस और आईपीएस के बच्चे या किसी सिविल सर्विस अधिकारी के बच्चे की तुलना एक ऐसे शख्स से करना उचित है जिसे आरक्षण का लाभ न मिला हो या वो ग्राम पंचायत या जिला परिषद के स्कूल में पढ़ता हो। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी बन चुके व्यक्ति के बच्चे को जाहिर है कि अच्छी शिक्षा मिलेगी। शायद उन्हें अतिरिक्त कोचिंग आदि भी मिले और घर का माहौल भी अच्छा मिले। वहीं दूसरे बच्चे को हर चीज उसके मुकाबले कम मिलेगा या उसके पास अच्छी शिक्षा उपलब्ध के स्रोत ही उपलब्ध नहीं होंगे। वह ऐसे माता-पिता के साथ रहेगा जो खुद इतने पढ़े-लिखे नहीं है कि बच्चे को पढ़ा सकें।

उन्होंने यह गौर भी कराया कि असमानताएँ और सामाजिक भेदभाव आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक प्रचलित हैं। शहर और महानगरों में इनका असर कम होने लगता है। उन्होंने अपनी टिप्पणी के दौरान स्पष्ट कहा, “मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि सेंट पॉल हाई स्कूल और सेंट स्टीफन कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे और देश के पिछड़े और दूरदराज के क्षेत्र के एक छोटे से गाँव में पढ़ने वाले बच्चे को एक ही श्रेणी में रखना संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को नकार देगा।”

उन्होंने यह कहा कि अगर आज ये कहा जाए कि एससी-एसटी समुदाय से आने वाले दोनों श्रेणी के बच्चे एक समान हैं तो गलत होगा। वो बच्चा जिसके माता-पिता में से कोई आरक्षण के लाभ से उच्च पद पर पहुँच गया है और सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा नहीं है उसे गाँव में मजदूरी करने वाले के बेटे से तुलना करना संवैधानिक आदेश को पराजित करेगा।

आगे उन्होंने इस बात को भी ध्यान में रखा कि संविधान स्वयं अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को समाज का सबसे पिछड़ा वर्ग मानता है इसलिए इस श्रेणी में आने वाले व्यक्ति को आरक्षण से अलग करने के मापदंड एक जैसे नहीं हो सकते। ऐसे में यदि इस श्रेणी का कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ पाकर चपरासी या शायद सफाई कर्मचारी का पद प्राप्त कर लेता है, तो वह सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग से संबंधित रहेगा। साथ ही, इस श्रेणी के लोग, जो आरक्षण का लाभ उठाकर जीवन में उच्च पदों पर पहुँच गए हैं, उन्हें सकारात्मक कार्रवाई का लाभ उठाने के लिए सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा नहीं माना जा सकता। वे पहले ही उस स्थिति में पहुँच चुके हैं जहाँ उन्हें अपनी मर्जी से विशेष प्रावधानों से बाहर निकल जाना चाहिए और योग्य और जरूरतमंद लोगों को रास्ता देना चाहिए।

आदेश में जस्टिस गवई की टिप्पणी

इस दौरान जस्टिस गवई ने एक उदाहरण देकर कहा कि आज के समय में एससी-एसटी कोटे में वर्गीकरण का विरोध करना ऐसा ही है जैसे ट्रेन के जनरल कोच में संघर्ष होता है कि जो पहले बाहर रहता है वह भीतर आने के लिए संघर्ष करता है और अंदर आने के बाद फिर हर संभव प्रयास करता है कि बाहर वाला अंदर न आ पाए।

जस्टिस बीआर गवई के इन तर्कों को सुन जस्टिस पंकज मिथल ने कहा आरक्षण सच में केवल एक पीढ़ी तक ही सीमित होना चाहिए। अगर पहली पीढ़ी में कोई सदस्य आरक्षण पाकर ऊँचे पद पर पहुँच गया है तो दूसरी पीढ़ी को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। वहीं जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने भी जस्टिस गवई की बातों पर सहमति दी। उन्होंने कहा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के रूप में क्रीमी लेयर की पहचान का मुद्दा राज्य के लिए संवैधानिक अनिवार्यता बनता जा रहा है। वहीं न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने भी कहा कि वो जस्टिस बीआर गवई के मत से सहमत हैं। क्रीमी लेयर’ सिद्धांत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर भी लागू होता है, तथा सकारात्मक कार्रवाई के उद्देश्य से क्रीमी लेयर को बाहर करने के मानदंड अन्य पिछड़ा वर्गों पर लागू मानदंडों से भिन्न हो सकते हैं।

मरने से पहले पायजामा में ही हगने-मूतने लगा था माफिया अतीक अहमद, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट से खुलासा: पुलिस को क्लीनचिट, मीडिया की भूमिका पर उठाए सवाल

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल, 2023 को उत्तर प्रदेश प्रयागराज के एक अस्पताल के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह घटना मीडिया के कैमरों के सामने हुई थी। इस घटना को लेकर कई प्रश्न उठे थे।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जाँच एक पाँच सदस्यीय न्यायिक आयोग को सौंपी थी। इस न्यायिक आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोंसले को सौंपी गई थी। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की।

न्यायिक आयोग ने इस मामले में पुलिस की लापरवाही नहीं पाई है। आयोग ने पुलिस को क्लीनचिट दी है। इसके अलावा न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में अतीक अहमद के स्वास्थ्य के विषय में भी बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अतीक अहमद कई बार अपनी पैंट (पायजामा) गंदी कर रहा था। इसके अलावा रिपोर्ट में मीडिया के रोल पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। यह पूरी रिपोर्ट ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

न्यायिक आयोग में कहा गया है कि इस घटना में पुलिस की कोई संलिप्तता नहीं है और ना ही यह पुलिस के इशारे पर की गई थी। न्यायिक आयोग ने बताया है कि यह घटना पूर्व नियोजित भी नहीं थी। आयोग ने कहा है कि यह घटना रोकी नहीं जा सकती थी।

आयोग ने यह भी बताया है कि पुलिस ने अतीक और अशरफ और को अस्पताल लाने में भी सावधानी बरती थी। अतीक और अशरफ की हत्या के दौरान पुलिस ने जिस तरह प्रतिक्रिया दी और जो कार्रवाई की, उसे गलत नहीं माना है। आयोग ने कहा कि घटना 9 सेकंड में पूरी हो गई और ऐसे में पुलिस ने तीनों हमलावरों पर गोली नहीं चलाई और यह सही था।

अपनी जाँच में आयोग ने कुल मिलाकर पुलिस को सही पाया है। इसके अलावा हत्या के पहले अतीक के स्वास्थ्य के बारे में भी आयोग की रिपोर्ट में खुलासे हुए हैं। आयोग को पुलिस ने बताया है कि अतीक लगातार घटना से पहले साँस और पेट की बीमारी से ग्रसित था।

अतीक ने घटना से एक दिन पहले 14 अप्रैल, 2024 को अपनी पैंट में ही शौच कर दी थी। इसके बाद डॉक्टर को बुला कर भी अतीक और अशरफ की जाँच करवाई गई थी। 14 अप्रैल, 2024 को अतीक को अस्पताल भी ले जाया गया था और यहाँ से रास्ते में लौटते वक्त अतीक ने अपनी पैंट में ही दोबारा शौच कर दी थी।

न्यायिक आयोग की जाँच रिपोर्ट का वह हिस्सा, जिसमें अतीक अहमद के बार-बार पैंट गन्दी करने की बात कही गई है।
न्यायिक आयोग की जाँच रिपोर्ट का वह हिस्सा, जिसमें अतीक अहमद के बार-बार पैंट गन्दी करने की बात कही गई है।

अतीक को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर थी। वह लगातार कई बार अपनी पैंट गंदी कर रहा था। इस बात की सूचना उसके साथ रहने वाले पुलिस कर्मियों ने अपने उच्चाधिकारियों को दी थी। आयोग ने इस हमले के दौरान मीडिया की भूमिका पर प्रश्न उठाए हैं।

आयोग ने कहा है कि आतीक और अशरफ की बाईट लेने के लिए चक्कर में मीडिया द्वारा आत्मसंयम का परिचय नहीं दिया गया। इसके अलावा मीडिया की फ़्लैशलाईट के कारण अतीक और अशरफ की सुरक्षा में मौजूद पुलिस वाले कुछ भी देख नहीं पा रहे थे। इसी दौरान हमला हुआ। आयोग ने कहा कि इस मामले में मीडिया की भूमिका संतोषजनक नहीं रही है।