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ट्रैक्टर खड़ा कर दवाई ले रहा था विजेंद्र… कासिम ने रास्ता न मिलने पर मस्जिद में ले जाकर मारा: UP पुलिस ने 4 को पकड़ा

उत्तर प्रदेश के रामपुर के पटवाई थाना क्षेत्र में एक हिंदू युवक को पीटने का मामला सामने आया है। घटना नदनऊ गाँव की है। यहाँ मझरा ग्राम निवासी विजेंद्र के ट्रैक्टर खड़ा करने पर मुस्लिम भीड़ ने उसे घेरकर मारा था और उसका सामान भी लूट लिया था। अब पुलिस ने एक्शन लेते हुए इस मामले में 4 को गिरफ्तार किया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना शनिवार (20 जुलाई 2024) की है। पटवाई थाना के नदनऊ गाँव में विजेंद्र दवाई लेने मेडिकल स्टोर पर रुका तो उसने ट्रैक्टर साइड में खड़ा कर दिया। इसी दौरान कासिम भी सामने से अपना ट्रैक्टर लेकर आ गया। सड़क कम चौड़ी थी इसलिए ट्रैक्टर निकालने में दिक्कत होने लगी।

कासिम ने इतनी सी बात पर विजेंद्र से लड़ाई शुरू कर दी। कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इसके बाद ग्रामीणों ने मामले को सुलझवाकर ट्रैक्टर निकलवा दिए। हालाँकि जब विजेंद्र चौराहे से दोबारा लौटने लगा तो कासिम ने अपने साथियों के साथ उसकी पिटाई की। इस भीड़ ने विजेंद्र को पहले सड़क पर मारा, इसके बाद मस्जिद में ले जाकर कथिततौर पर 200-250 लोगों के बीच उसे पीटा गया। इस दौरान लोहे की रॉड का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा उसके मोबाइल और रुपए आदि भी लूट लिए गए।

अब पटवाई थाना पुलिस ने इस मामले में ट्रैक्टर चलक विजेंद्र की शिकायत पर 250 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें दो लोग नामजद हैं। 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रामपुर पुलिस ने घटना के संबंध में बताया कि सुसंगत धाराओं में केस दर्ज करके 4 आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद हिंदू संगठन भी काफी नाराज हैं। उन्होंने आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग उठाई है।

काँवड़िए नहीं जान पाएँगे दुकान ‘अब्दुल’ या ‘अभिषेक’ की, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक: कहा- बताना होगा सिर्फ मांसाहार/शाकाहार के बारे में

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कांवड़ रूट पर दुकानदारों के नाम दर्शाने वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ दोनों राज्यों को नोटिस जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दुकानों को सिर्फ यह बताना होगा कि वह मांसाहार बेंचते हैं या शाकाहारी खाना।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (22 जुलाई, 2024) को जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस SVN भट्टी ने इस मामले की सुनवाई की। इस संबंध में कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका दाखिल की थी। अभिषेक मनु सिंघवी ने दावा किया कि यात्रा के दौरान नाम दिखाने वाला यह आदेश अल्पसंख्यकों के बायकाट का जरिया बनेगा।

सिंघवी ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि इस संबंध में स्पष्ट आदेश नहीं है बल्कि आदेश को अस्पष्ट भाषा में लिखा गया है। कोर्ट ने इस पर कहा कि अगर किसी को स्वेच्छा से अपना नाम दुकान पर बताने को कहा गया है कि तो इसमें क्या समस्या है। सिंघवी ने इस पर मामले को बढ़ा चढ़ा कर बताया।

कोर्ट ने कहा कि मामले को तूल देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट में जस्टिस रॉय ने इस सुनवाई के दौरान कहा कि वह केरल में एक मुस्लिम द्वारा चलाए जाने वाले मुस्लिम रेस्टोरेंट में जाते थे जबकि हिन्दू द्वारा चलाए जाने वाले में जाने कतराते थे। उन्होंने इसके पीछे साफ़ सफाई का हवाला दिया।

कोर्ट ने कहा कि दुकानों को शाकाहारी या मांसाहारी खाने का प्रकार और उसकी कैलोरी बतानी होंगी। इसके अलावा उन्हें अपना लाइसेंस भी प्रदर्शित करना होगा। कोर्ट ने इसके बाद कहा कि इस आदेश से यह बात पक्की नहीं हो जाएगी कि कांवड़ रूट पर शुद्ध खाना मिले।

कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों राज्यों के इस आदेश को लागू होने से नहीं रोका गया तो इससे सेक्युलरिज्म और संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने यह भी कहा प्रशासन कांवड़ रूट पर शुद्ध भोजन के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आदेश जारी कर सकता है। कोर्ट ने इसी के साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश को नोटिस जारी कर दिया और इन सरकारों के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

गौरतलब है सावन मास में कांवड़ रूट पर खाने की शुद्धता बनाए रखने और काँवड़ियों की सुविधा के लिए दुकानदारों के नाम दिखाने का आदेश उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकार ने दिया था। उत्तर प्रदेश में पहले इसे मुजफ्फरनगर और फिर पूरे प्रदेश में जारी किया गया था जबकि बाद में यह उत्तराखंड में भी लागू किया गया था।

उत्तराखंड पुलिस ने बताया था कि इससे पहले पहचान छुपाने के कारण कई बार विवाद हुए हैं इसलिए नाम दर्शाए जाने चाहिए। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ सिंघवी और कुछ संस्थाएँ कोर्ट चली गई थीं, अब इस मामले में यह निर्णय आया है।

AAP विधायक की वकीलगिरी का हाई कोर्ट ने उतारा भूत: गलत-सलत लिख कर ले गया था याचिका, लग चुका है बीवी को कुत्ते से कटवाने का आरोप

AAP नेता सोमनाथ भारती की दिल्ली उच्च न्यायालय में बेइज्जती हो गई। वो भाजपा सांसद बाँसुरी स्वराज के खिलाफ याचिका लेकर पहुँचे थे। उन्होंने नई दिल्ली लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिया और कहा कि बाँसुरी स्वराज की जीत गड़बड़ी के कारण हुई है। बता दें कि 2024 लोकसभा चुनाव में बाँसुरी स्वराज ने सोमनाथ भारती को ही हराया है। उन्होंने 78,370 मतों से जीत दर्ज की। बाँसुरी स्वराज को 53.48% वोट प्राप्त हुए, वहीं 44.23% वोटों के साथ सोमनाथ भारती पीछे रहे।

बाँसुरी स्वराज को 4.53 लाख वोट मिले थे, वहीं सोमनाथ भारती 3.74 लाख वोट ही पा सके। सोमनाथ भारती का आरोप है कि बाँसुरी स्वराज और उनके पोलिंग एजेंट्स ने 25 मई, 2024 को हुए मतदान में धाँधली की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने लोगों में साड़ी और सूट-सलवार का वितरण किया। उन्होंने कहा कि AAP कार्यकर्ताओं ने उन्हें मतदाताओं को ललचाने से रोका भी, लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। बता दें कि सोमनाथ भारती मालवीय नगर से लगातार तीसरी बार विधायक हैं।

सोमनाथ भारती ने अपनी याचिका में कहा कि मतदान वाले दिन पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज की बेटी के बूथ एजंट्स उन पोस्टरों का वितरण कर रहे थे, जिन पर उनका बैलेट नंबर, तस्वीर और चुनाव चिह्न के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी लगी थी। हाईकोर्ट ने सोमवार (22 जुलाई, 2024) को उनकी ये याचिका रद्द कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि ये याचिका टाइपिंग संबंधी त्रुटियों से भरी पड़ी है। जस्टिस मनमीत PS अरोड़ा ने इसकी सुनवाई की।

उन्होंने सोमनाथ भारती के वकील को 10 दिनों की मोहलत देते हुए कहा कि वो याचिका में सुधार कर के फिर से इसे दायर करें। 13 अगस्त तक इस पर सुनवाई स्थगित कर दी गई है। जस्टिस अरोड़ा ने कहा कि याचिका में कई गलतियाँ हैं, आपको पहले इसे ठीक करना होगा। उन्होंने कहा कि वो नोटिस जारी नहीं कर सकते, उन्हें ये समझ ही नहीं आ रहा है, वो मामला स्थगित करते हैं। साथ ही उन्होंने याचिका में दिए गए रेफरेंस को भी त्रुटिपूर्ण बताया। याचिका में ये भी दावा किया गया था कि BSP के राजकुमार आनंद को भाजपा की मदद करने के लिए खड़ा किया गया था। लोगों ने कोर्ट के आदेश पर मीम्स भी शेयर किए:

याचिका में आरोप लगाया गया कि राजकुमार आनंद दिल्ली सरकार में मंत्री हुआ करते थे और अचानक से इस्तीफा देने से पहले सोमनाथ भारती के लिए ही चुनाव प्रचार कर रहे थे। साथ ही आरोप लगाया गया कि राजकुमार आनंद पर जाँच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया गया और गिरफ़्तारी का डर दिखाया गया। बता दें कि सोमनाथ भारती पर अपनी बीवी को पालतू कुत्ते से कटवाने का आरोप लगा था। वो लैब्राडोर नस्ल का था और उसका नाम ‘डॉन’ था। 16 वर्ष की आयु में जुलाई 2018 में उसकी मौत हो गई थी।

एजाज खान ने किया मुनि नारद का अपमान, बाद में माँगी माफी: कभी कहा था संविधान की जगह चुनेंगे कुरान

हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले बॉलीवुड अभिनेता एजाज खान ने एक बार फिर हिन्दू भावनाओं को आहत किया है। एजाज खान ने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान मुनि नारद पर अभद्र टिप्पणी की। कभी कुरान से पहले संविधान चुनने की बात कहने वाले एजाज खान ने यह सब एक यूट्यूबर पर आरोप लगाने के लिए किया।

एजाज खान ने शनिवार (20 जुलाई, 2024) को मीडिया से बातचीत के दौरान यह आपत्तिजनक टिप्पणी की। एजाज खान ने एक यूट्यूबर लव कटारिया पर अपने एक दोस्त के अपमान और ‘सीक्रेट्स’ लीक करने के आरोप लगाए।

एजाज खान ने कहा, “क्या आप मेरी बात समझ रहे हैं? आप अपनी निजी बात या राज अपने दोस्त से शेयर करते हैं लेकिन वह इसके बारे में दुनिया को बता देता है।” लव कटारिया पर यह आरोप लगाते-लगाते वह इतना आगे निकल गए कि उन्होंने नारद मुनि को लेकर टिप्पणी की।

उन्होंने कहा, “ये तो नारद मुनि के जैसा काम है। नारायण, नारायण। कटारिया को अपना नाम बदलकर नारद मुनि रख लेना चाहिए।” उनकी इस टिप्पणी को लेकर बाद में विवाद हो गया और उनकी आलोचना हुई। लगातार हो रही आलोचना के कारण एजाज खान को माफ़ी माँगनी पड़ी।

एजाज खान ने ट्विटर (एक्स) पर लिखा, “अगर मेरी ‘नारायण’ टिप्पणी से मेरे हिंदू भाइयों और बहनों को ठेस पहुँची हो तो मैं दिल से माफी माँगता हूँ, यह जानबूझकर नहीं था क्योंकि मैं हमेशा कहता हूँ कि आप मेरी कुरान पढ़ें और मैं आपकी गीता पढ़ता हूँ, जो स्पष्ट रूप से हिंदू धर्म के प्रति मेरे सम्मान को दर्शाता है और केवल इतना ही नहीं कि मैं हर धर्म का सम्मान करता हूँ क्योंकि मैं अपने धर्म का सम्मान करता हूँ।”

एजाज खान ने आगे लिखा आगे “उस बयान में मेरा आशय नारद मुनि से था, भगवान नारायण से नहीं… अगर मैंने किसी को ठेस पहुँचाई है तो मैं माफी माँगता हूँ, एक है। जय हिंद।” हालाँकि, एजाज खान का विवादों से पुराना नाता है। 2018 में, एजाज खान ने कहा था कि वह किसी भी दिन भारतीय संविधान की जगह कुरान को चुनेंगे। इससे पहले उन्हें पहले ड्रग तस्करी के लिए जेल भेजा गया था। एजाज खान ने 40 करोड़ मुसलमानों (कानूनी और अवैध वाले) को सड़कों पर उतरने और दंगा फ़ैलाने के लिए उकसाया था।

हज पर मुस्लिम मर्द अपने ही मजहब की बच्चियों-औरतों के साथ करते हैं यौन शोषण: जिन-जिन ने झेला, पढ़िए उनकी कहानी

इस्लाम को मानने वाले हज को लेकर काफी संवेदनशील दिखते हैं। मक्का-मदीना-काबा आदि को लेकर आम बोलचाल में ‘पाक’ शब्द जैसे विशेषण भी लगाते हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि ऊपर जिन कुकर्मों की लिस्ट है, वो सब हज पर किया गया है। 

दिखने/लगने और होने में लेकिन फर्क होता है। हज पर गई औरतों-बच्चियों ने जो-जो भोगा है, उससे इस्लाम के इस ‘पाक’ स्थान पर गए मर्दों की नापाक मानसिकता को समझ सकते हैं। और हाँ, हज पर गए मुस्लिम मर्दों की नापाक हरकतों को उजागर भी मुस्लिम बच्चियों-औरतों ने ही किया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ये वो चंद उदाहरण हैं, जो सामने आए हैं। असंख्य आपबीती पीड़ितों के दिलों में हैं, क्योंकि खुलेआम कह देने से इस्लाम खतरे में आ जाता है। कुछ बहादुर औरतों-बच्चियों ने आपबीती तो सुनाई, लेकिन कट्टर इस्लामी समाज के डर से अपना नाम तक उजागर करने से बचीं।

हज में 13 साल की बच्ची: यौन शोषण, स्तन दबोचा जाना

मिस्र की 13 साल की बच्ची हज पर गई। अपनी बहनों और माँ के साथ। एक दुकानदार ने इतनी कम उम्र की बच्ची को भी वहाँ नहीं छोड़ा। गंदे इशारे करके उसे अपने पास बुलाया। वो चुप रही, खुद पर शर्म महसूस करते रही, अफसोस के साथ। 

दूसरी बार भी यह बच्ची हज पर गई। तब उम्र थी 17 साल। इस बार पिछली बार से भी ज्यादा बुरा हुआ। शैतान को पत्थर मारने वाली जगह पर भीड़ थी। वहीं पर उसने महसूस किया कि किसी ने उसके स्तनों को दबोच लिया है। जब वो पीछे मुड़ कर देखी तो स्तन दबोचने वाला अपनी बीवी के साथ खड़ा था।

10 साल की बच्ची को पीछे से दबोचा, सीने पर हाथ घुमाकर जांघ दबाई

पाकिस्तान की 10 साल की बच्ची अपने अम्मी-अब्बा और बहन के साथ खुशी-खुशी हज पर गई। ये सोचकर कि ये उसकी खुशकिस्मती है। काबा को देख बच्ची और उसकी बहन दोनों बहुत खुश थे, लेकिन तभी भीड़ में से एक शख्स ने उसे पीछे से जकड़ लिया। बच्ची डर गई और माँ के पास चली गई। उसने ये बात माँ को डर से नहीं बताई।

वहाँ से निकल उसे लगा वो सुरक्षित है, लेकिन जैसे ही वो मक्का से मदीना जाने के लिए बस में बैठी उसके पास ड्राइवर आ गया। उसने सीट के पास खड़े होकर उसकी छाती पर हाथ फिराया और फिर उसकी जांघ दबोच ली। बच्ची को घिन्न आ रही थी लेकिन डर से उसने किसी को नहीं बोला। ड्राइवर पर्दे ठीक करने के बहाने अपनी कमर उसके मुँह पर लगाता रहा।

17 साल की लड़की के पीछे दबाया लिंग

इंडोनेशिया से साल 2011 में एक 17 साल की लड़की हज के लिए गई। वहाँ पहले उसे होटल में छेड़खानी का सामना करना पड़ा। फिर काबा में तवाफ के वक्त। लड़की के अनुसार, तवाफ के वक्त कोई शक्स पीछे से आया और अपना लिंग उनके पीछे दबाने लगा।

लड़की को लगा इतनी ‘पाक’ जगह ऐसी हरकत कौन करेगा, लेकिन ऐसा हुआ तो उसका ध्यान इबादत में नहीं लग पाया। वो बस सोचती रही कि कब मक्का से वापस घर जाएँगी। लड़की ने बताया कि उसने इस घटना के बारे किसी को नहीं बताया लेकिन उसे लगता रहा कि जब हम मस्जिद में होते हैं तब ऐसा कुछ हो तो ये सबसे बुरी चीज है।

21 साल की पाकिस्तानी महिला के पकड़े नितंब

21 साल की उम्र में अमेरिका में रहने वाली पाकिस्तानी महिला ने पहली बार हज किया। वहाँ वह काबा को छूने के लिए करीब जाना चाहती थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि उस भीड़ में उसके साथ क्या होने वाला है।

काबा को छूने की इच्छा से भीड़ के बीच गई उस लड़की के किसी ने अचानक नितंब पकड़ लिए। लड़की को पहले लगा सिर्फ ये कोई धक्का है। हालाँकि फिर थोड़ी देर में उसे स्तन दबोच लिए गए। लड़की ने उस शख्स को घूरकर देखा तो वो मुस्कुराता रहा। लड़की चिल्लाई, गार्डों से शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

लड़की बताती है कि वो कई लोगों को जानती है जिनके साथ हज के दौरान ऐसी घटना घटी। अपने भयावह अनुभव के बाद वो दोबारा कभी हज पर नहीं गई। उसने वहाँ भगदड़ झेली और उत्पीड़न देखा।

32 साल की ब्रिटिश महिला और हज: स्तन दबोचे, लिंग पीछे दबाया, उंगली डालने की कोशिश की

2007 में 32 साल की एक ब्रिटिश महिला हज करने गई। उसे पहले ही बताया गया था कि हज के दौरान उसे लोग अनुचित ढंग से छू सकते हैं। हालाँकि उसे लगा कि इतनी पाक जगह ऐसा कौन करेगा… लेकिन जो कहा गया था वैसा हुआ, वो भी मस्जिद में घुसने के साथ ही।

महिला ने बताया कि मस्जिद में घुसने के वक्त ही किसी ने उसके स्तनों को टाइट से दबोचा। महिला समझ गई कि ये अंजाने में नहीं हुआ। महिला ने पीछे घूमकर देखा तो वो व्यक्ति उसे घूर रहा था।

दूसरी घटना महिला के साथ मस्जिद के भीतर हुई। इबादत के वक्त अचानक उसकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में कुछ दबाव महसूस हुआ। पहले महिला ने सोचा कि भीड़ है तो लोग एक दूसरे से टकरा रहे हैं, मगर फिर जब वो दबाव जारी रहा तो वो समझ गई कि एक व्यक्ति अपना लिंग उसमें दबा रहा है। महिला डर गई। उसने पुलिस से शिकायत की, पर कोई सुनवाई तक नहीं हुई। पुलिस वाले ने महिला को अनसुना कर दिया।

तीसरी घटना महिला के साथ तब हुई जब वो हज से संबंधित खरीदारी कर रही थी। महिला के अनुसार, अचानक उसे एक झटका लगा। उसने देखा कि एक बुजुर्ग ने उसके नितंबों के बीच उंगली डाल दी थी। ये इतनी तेजी से किया गया था कि उंगली लगभग उसके अंदर थीं। महिला ने जब इस घटना के बाद उस बुजुर्ग को देखा तो वो उसने माफी माँगने की बजाय मुस्कुराया और अल्हम्दुलिल्लाह कहा।

हज पर गई महिलाएँ हुई गायब

इन कहानियों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग मक्का-मदीना में अपने अनुभवों को साझा कर रहे हैं। इसी क्रम में एक यूजर ने बताया कि वो एक दंपति को जानता है जो हज के लिए गए थे, लेकिन शौहर अकेले ही लौटा क्योंकि बीवी को कैब ड्राइवर ने किडनैप कर लिया था। शौहर ने अपनी बीवी बहुत खोजी लेकिन दोबारा उसे वो महिला नहीं मिली।

इस घटना को जानकर भी लोग हैरानी जता रहे हैं। प्रतिक्रिया में लोगों का कहना है कि ये हादरा उनके दोस्त ने भी उन्हें सुनाया लेकिन उन्होंने इस पर विश्वास नहीं किया था। दोस्त ने बताया था कि लड़की को किडनैप करके बहुत दिन उसका रेप किया गया। बाद में उसे उसी होटल में छोड़ दिया गया पर लड़की ने सुसाइड कर ली थी। एक यूजर ने बताया कि ऐसी घटना उनके पड़ोसियों के रिश्तेदारों के साथ हुई थी। निकाह के बाद जोड़ा मदीना गया लेकिन जैसे ही लड़का उतरा, ड्राइवर ने गाड़ी चला दी और लड़की को लेकर फरार हो गया।

59 साल की महिला हुई मक्का से गायब, 42 साल की महिला की हत्या

दक्षिणी सुलेमानिया प्रांत के कलर शहर की एक महिला सऊदी अरब में उमराह के लिए गई थी, लेकिन वहाँ उसका अपहरण हो गया। महिला की उम्र 59 साल थी। वो अपने परिवार और भाई के साथ मक्का गई थी। वहाँ महिला के भाई ने व्हीलचेयर ली और एक व्यक्ति से कहा कि जब उनका सर्कल पूरा हो जाए तो वो उन्हें उनके पास ले आए। हालाँकि वो आदमी दोबारा महिला को लेकर वापस नहीं लौटा। बहुत छानबीन पर भी महिला का कुछ पता नहीं चला। इसी तरह 42 साल की महिला का अपहरण भी मक्का में हुआ, जिसकी बाद में गला दबाकर हत्या कर दी गई थी।

बता दें कि ये अपहरण और हत्या की घटनाएँ आज से सऊदी अरब से नहीं आ रहीं। ऐसी खबरों की तारीख बहुत पुरानी-पुरानी भी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत की लड़कियाँ भी अरब में ऐसी घटनाओं का शिकार हुई हैं। 2010 में भी वहाँ हैदराबाद से हज करने गई एक लड़की गायब हुई थी। घरवाले बार-बार कह रहे थे कि ये गुमशुदगी का मामला नहीं है उसका अपहरण हुआ है। अगर वो गुम होती तो अपनी अम्मी या अब्बा को कॉल करती। लेकिन उसका अपहऱण ही हुआ है। इसी तरह 2019 में हैदराबाद के मुरादनगर की 23 साल की महिला अपने शौहर, सास के साथ उमराह पर गई, लेकिन अचानक वो वहाँ से गायब हो गई। महिला को खोजने के खूब प्रयास हुए लेकिन कुछ पॉजिटिव रिस्पांस नहीं आया।

बाइडेन बाहर, कमला हैरिस पर संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ओबामा ने चली चाल, समर्थन पर कहा – भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में काफी हलचल है। 21 जुलाई 2024 को जो बाइडेन ने आगामी चुनावों में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से अपनी दूरी का ऐलान किया था और कमला हैरिस का नाम पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाया था। हालाँकि अब खबर आ रही है कि इसी पार्टी से पूर्व में राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा और पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने कमला हैरिस को उम्मीदवार मानने से गुरेज किया है।

जानकारी के मुताबिक बराक ओबामा ने जो बाइडेन के इस फैसले को समर्थन दिया कि वो चुनावों से दूरी बना रहे हैं लेकिन कमला हैरिस के नामांकन पर वो खुशी नहीं जाहिर कर पाए। उन्होंने बाइडेन के ऐलान के बाद उनकी उपलब्धियों को तो गिनाया, लेकिन कमला हैरिस को लेकर वो कहते दिखे, “हम अनजान राहों पर आगे बढ़ रहे हैं और भविष्य में क्या होगा कोई नहीं जानता, लेकिन मुझे उम्मीद है कि हमारी पार्टी के नेता कुछ ऐसा करेंगे, जिससे सर्वश्रेष्ठ नामांकन सामने आएगा। मुझे विश्वास है कि जो बाइडन का एक समृद्ध, उदार और एकजुट अमेरिका का विजन अगस्त में होने वाले डेमोक्रेटिक कन्वेंशन में दिखाई देगा।”

ओबामा बोले “जो बाइडन संघर्ष से पीछे हटने वाले नेता नहीं हैं, मगर अब मशाल अगले दावेदार को थमाना उनके लिए बहुत मुश्किल है, लेकिन उन्हें लगा कि यह अमेरिका के लिए सबसे सही फैसला है। यह बाइडन का देश के प्रति प्यार का सबूत है।” इसी तरह पूर्व हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी ने भी बाइडेन की तारीफ की लेकिन कमला हैरिस के समर्थन में कुछ भी नहीं कहा। दोनों नेताओं की इसी चुप्पी के कारण माना जा रहा है कि वो कमला हैरिस को समर्थन नहीं देना चाहते।

बता दें कि जो बाइडेन के ट्वीट के बाद 59 वर्षीय कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन उससे पहले उन्हें आधिकारिक रूप से उम्मीदवार बनने के लिए अगले महीने प्रस्तावित ‘डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन’ के दौरान डेलीगेट (पार्टी मतदाताओं के प्रतिनिधि) का समर्थन हासिल करना ज़रूरी है। अब चूँकि बाइडन के पास 3,896 ‘प्रतिनिधि’ हैं, और उम्मीदवार बनाने के लिए 1,976 ‘प्रतिनिधि’ की आवश्यकता होती है तो संभव है कमला हैरिस के लिए समर्थन पाना आसान हो। फिलहाल के लिए पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन हैरिस को समर्थन दे चुके हैं। इसीलिए कहा जा रहा है कि 19 अगस्त से शिकागो में शुरू होने वाले ‘डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन’ के दौरान उम्मीदवार चुना जाना और आसान हो गया है। बस अटकलें हैं तो हैरिस के गुरु माने जाने वाले ओबामा के समर्थन पर। उनका कमला को तुरंत सपोर्ट न करना कई सवाल उठाए हुए हैं।

ताकि किसी का न हो रघुवंशी और रंगनाथाचार्य जैसा हाल… मोदी सरकार ने 58 साल पहले RSS पर लगे बैन को हटाया, कॉन्ग्रेसी तिलमिलाए

कॉन्ग्रेस को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से समस्या है ये तो सब जानते हैं लेकिन किसी को ये नहीं पता होगा कि ये समस्या शुरू से इतनी बड़ी रही है कि 60 के दशक में कॉन्ग्रेस ने सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर बैन ही लगा दिया था।

1966 में, केंद्र सरकार में काम करने वाले कर्मचारियों को आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने को लेकर प्रतिबंध लगाया था। अब मोदी सरकार ने इस प्रतिबंध को 58 साल बाद हटाया है। वहीं कॉन्ग्रेस के कई नेता इससे संबंधित नोटिस जारी करते हुए जानकारी दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने  1966 के आदेश की फोटो भी शेयर की और अपनी नाराजगी जताई।

हिंदू विवेक केंद्र में आरएसएस पर लगे बैन पर एक रिपोर्ट प्रकाशित है। इस रिपोर्ट में कई जानकारियाँ दी गई हैं जैसे कब-कब आरएसएस पर बैन लगाया गया और कब-कब आरएसएस संगठन से जुड़े लोगों को टारगेट करने का प्रयास हुआ।

कॉन्ग्रेस के टारगेट पर था RSS

इस रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस को खुलेआम टारगेट करना कॉन्ग्रेस ने तब से शुरू किया जब महात्मा गाँधी की हत्या की गई। कॉन्ग्रेस ने मौके का फायदा उठाते हुए उनपर बैन लगाया। बाद में गृहमंत्री सरदार पटेल ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और साथ ही आरएसएस द्वारा देश भर में सत्यग्रह किए जाने के बाद इस बैन को हटाया गया। हालाँकि बैन हटने का अर्थ ये नहीं था कि कॉन्ग्रेस की नजर इस संगठन से हट गई। 1966 में सरकारी कर्मचारियों को इस संगठन की गतिविधियों में भाग लेने से रोक दिया गया।

फिर 1975 में जब इमरजेंसी लागू हुई तो फिर आरएसएस को बैन किया गया। तब भी, आरएसएस ने अपने ऊपर लगे बैन के खिलाफ आवाज उठाई। 1977 के चुनावों में उनके विरोध में प्रदर्शन किया। नतीजतन न केवल पार्टी हारी, बल्कि इंदिरा गाँधी और उनके बेटे संजय गाँधी तक अपनी सीटों से हार गए। आरएएस से बैन फिर हटाया गया।

1992 में जब अयोध्या में कारसेवा के बाद बाबरी ढाँचा गिरा तो फिर कॉन्ग्रेस को आरएसएस पर बैन लगाने का मौका मिला गया। इस पर आरएसएस पर बैन UAPA 1967 के प्रावधानों के तहत लगाया गया। ढाँचा गिरने का सारा इल्जाम आरएसएस पर लगा दिया गया। बात ट्रिब्यूनल कोर्ट तक पहुँची लेकिन कोर्ट को आरएसएस के विरुद्ध पर्याप्त सबूत नहीं मिले और उन्होंने आरएसएस को बैन करने की माँग हटा दी।

आरएसएस से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी से हटाया

मालूम हो कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की इच्छा जब कॉन्ग्रेस की पूरी नहीं हुई तो फिर उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को इस संगठन की गतिविधियों में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया। उन्होंने पुलिस से कहा कि वो सत्यापित करें कि केंद्र में काम करने वाले लोग आरएसएस से तो नहीं जुड़े, अगर जुड़ें हैं तो उनकी नियुक्ति रद्द कर दो। उन्हें नौकरी देने से मन कर दो, नौकरी से हटा दो।

इसका एक उदाहरण रामशंकर रघुवंशी का मामला बताया जाता है। रिपोर्ट् के अनुसार रघुवंशी स्कूल शिक्षक थे। ऱघुवंशी को पहले पूर्व में हुए सत्यापन पर स्कूल में शामिल कर लिया गया। हालाँकि बाद में पुलिस ने सरकार को बताया कि वो अंएक समय में आरएसएस और जनसंघ की गतिविधियों में शामिल थे तो उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। इसी तरह, रंगनाथाचार्य अग्निहोत्री को कर्नाटक में मुंसिफ के पद के लिए चुना गया था। पुलिस सत्यापन में पता चला कि वे अतीत में येलबुर्गा में आरएसएस के आयोजक थे। सरकार ने उन्हें अपनी नौकरी में प्रवेश देने से मना कर दिया।

एक अन्य मामले नागपुर के चिंतामणि का है। जो कि उप पोस्ट मास्टर थे। उन पर आरोप लगाया गया था कि वे आरएसएस के सदस्य हैं और संक्रांति के अवसर पर आरएसएस कार्यालय गए थे। इतनी सी बात के लिए चिंतामणि को सेवा से हटा दिया गया था। हालाँकि बाद में वो इंसाफ के लिए मैसूर हाई कोर्ट पहुँचे। जहाँ अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा,

  • “प्रथम दृष्टया आरएसएस एक गैर-राजनीतिक सांस्कृतिक संगठन है। इसमें गैर-हिंदुओं के प्रति कोई घृणा या दुर्भावना नहीं है। देश के कई प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्तियों ने इसके कार्यों की अध्यक्षता करने या इसके स्वयंसेवकों के काम की सराहना करने में संकोच नहीं किया है। हमारे जैसे देश में जहाँ लोकतंत्र है (जैसा कि संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है), यह प्रस्ताव स्वीकार करना उचित नहीं होगा कि ऐसे शांतिपूर्ण या अहिंसक संघ की सदस्यता और उसकी गतिविधियों में भागीदारी मात्र से कोई व्यक्ति (जिसके चरित्र और पूर्ववृत्त में कोई अन्य दोष नहीं है) मुंसिफ के पद पर नियुक्त होने के लिए अनुपयुक्त हो जाएगा।”

बाद में उन्होंने विशेष सिविल अपील संख्या 22/52 में बॉम्बे (नागपुर बेंच) में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जहाँ कोर्ट ने कई अहम बातें कहीं।0 न्यायालय ने कहा, “याचिकाकर्ता चिंतामणि के मामले में, पहला आरोप यह है कि वह आरएसएस की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और उसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे है। हालांकि चिंतामणि ने इस आरोप से इनकार किया है, मगर हम मान सकते हैं कि प्रतिवादी के अनुसार आरोप सत्य है… लेकिन ये भी गौर हो आरएसएस ऐसा संगठन नहीं है जिसे गैरकानूनी घोषित किया गया हो। आरोप में यह भी नहीं बताया गया है कि आरएसएस की कौन सी गतिविधियाँ हैं, जिनमें भागीदारी या जिनसे जुड़ाव को विध्वंसक माना जाता है।”

कोर्ट ने चिंतामणि पर लगाए गए आरोपों को लेकर कहा कि सरकार बेहद अस्पष्ट है। जब तक किसी व्यक्ति पर उचित रूप से यह संदेह न हो कि वह कुछ गैरकानूनी काम कर रहा है या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए हानिकारक है, तब तक यह कहना मुश्किल है कि किसी ऐसी संस्था से जुड़ाव मात्र, जिसे न तो गैरकानूनी घोषित किया गया है और न ही किसी असामाजिक या देशद्रोही गतिविधियों या शांति भंग करने वाली गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप या दिखाया गया है, नियम 3 के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है।

बता दें कि ये मामले केवल तीन हैं लेकिन कहा जाता है कि कई उच्च न्यायालयों में इस तरह उन आरएसएस सदस्यों के मामलों की सुनवाई की गई जिन्हें मात्र संगठन से जुड़ने पर नौकरी से निकाले जाने के प्रयास हुए। अब मोदी सरकार के इस फैसले को कॉन्ग्रेस भले ही कितना नकारात्मक दिखाने का प्रयास करे लेकिन जो लोग आरएसएस को जानते समझते हैं वो इस कदम की तारीफ कर रहे हैं।

आम सैनिकों जैसी ड्यूटी, सेम वर्दी, भारतीय सेना में शामिल हो चुके हैं 1 लाख अग्निवीर: आरक्षण और नौकरी भी

उत्तराखंड सरकार ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार अग्निवीरों को न सिर्फ नौकरी देगी, बल्कि आरक्षण की भी व्यवस्था करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की सेवा कर लौटने वाले सभी अग्निवीरों को राज्य सरकार की सेवाओं में समायोजित किया जाएगा। साथ ही उनके लिए आरक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। इस बीच, भारतीय सेना में शामिल अग्निवीरों की संख्या 1 लाख के पार हो गई है, 50 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जा रही है। सेना ने बताया है कि वो आम सैनिकों की तरह सभी ड्यूटी निभा रहे हैं।

उत्तराखंड सरकार की बड़ी घोषणा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया है कि राज्य की नौकरियों में अग्निवीरों को समायोजित किया जाएगा। इसमें (राज्य सरकार की नौकरियों में) उनके लिए (अग्निवीरों के लिए) आरक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। धामी ने एक कार्यक्रम में कहा कि अग्निवीर योजना लाए जाने के बाद उन्होंने सेना के अधिकारियों, पूर्व अधिकारियों, जवानों और अन्य लोगों के साथ बैठक की थी। सरकार ने 15 जून 2022 को ही ऐलान कर दिया था कि उत्तराखंड सरकार अग्निवीरों को राज्य सरकार की नौकरियों में समायोजित करेगी और अब उस दिशा में आधिकारिक तौर पर कदम बढ़ा दिए गए हैं।

धामी ने कहा कि अगर इस काम के लिए विशेष कानून बनाने की जरूरत पड़ी, तो राज्य सरकार ये कदम भी उठाएगी। धामी ने कहा कि उत्तराखंड सैनिकों का राज्य है, यहाँ सैनिकों को अपने आगामी जीवन को लेकर परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने अधिकारियों को ठोस योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अग्निवीरों को प्राथमिकता के तौर पर समायोजित किया जाएगा। बता दें कि हरियाणा सरकार भी राज्य सरकार की नौकरियों में समायोजन और आरक्षण की घोषणा कर चुकी है।

सेना में 1 लाख अग्निवीर हो चुके हैं भर्ती, 50 हजार की भर्ती प्रक्रिया जारी

अग्निपथ योजना की वर्तमान स्थिति और नियोजित अग्निवीरों की संख्या के बारे में भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल चन्नीरा बंसी पोनप्पा ने कहा, “जून 2022 से यह योजना शुरू की गई है और फिर दिसंबर 2022-जनवरी 2023 में हमारे पास पहला बैच था जिसे भर्ती किया गया और नामांकित किया गया। लगभग 1 लाख अग्निवीर सेना में भर्ती हुए हैं। इसमें लगभग 200 महिलाएँ भी शामिल हैं, लगभग 70,000 को पहले ही इकाइयों में भेजा जा चुका है और वे बटालियनों में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं… इसमें लगभग 100 महिला पुलिस भी शामिल हैं। इस वर्ष 2024-25 में लगभग 50,000 वैकेंसी जारी की गई है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया जारी है।”

भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल चन्नीरा बंसी पोनप्पा ने कहा, “अग्निवीर वो सभी काम कर रहे हैं, जो आम सैनिक करते हैं। चाहे वो ऑपरेशन काम हो या अन्य पेशेवर काम। अग्विनीर सेना में पूरी तरह से घुलमिल गए हैं। वे एक जैसी वर्दी पहनते हैं और एक जैसी ड्यूटी करते हैं।”

बता दें कि भारत सरकार ने 2022 में अग्रिवीर स्कीम की घोषणा की थी। जिसमें 4 साल के लिए उनकी भर्ती की जाएगी। इस दौरान उनकी ट्रेनिंग और उच्च शिक्षा की भी व्यवस्था की जाएगी। इसमें से 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में स्थाई कमीशन दिया जाएगा, जबकि 75 अग्निवीरों को वापस देश की सिविलयन लाइफ में भेज दिया जाएगा। इन अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस में आरक्षण दिया जाएगा।

2 की हत्या कर फरार हो गया ड्रग्स तस्कर उमर, तेज़ाब डाल कर बिगाड़ दिया था चेहरा: 12 साल बाद दिल्ली पुलिस ने दबोचा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 51 साल के खूँखार अफीम तस्कर और 2 दोस्तों के हत्यारे मोहम्मद उमर को गिरफ्तार कर लिया है। उसने 2012 में अपने दूसरे दोस्त की हत्या के बाद उसके चेहरे पर तेजाब डाल कर जला दिया था, ताकि उसकी पहचान न होने पाए। इसके बाद उमर अपने परिवार समेत फरार हो गया था और नेपाल जाकर छिप गया था। करीब 12 साल तक उसकी तलाश की गई और उस पर 50 हजार का ईनाम भी घोषित किया गया था, जिसके बाद अब उसे आनंद विहार बस टर्मिनस इलाके से मुखबिर की सूचना पर पकड़ लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पकड़े गए अपराधी की पहचान मोहम्मद उमर उर्फ ​​उमरदीन के रूप में हुई है जो उत्तर प्रदेश के बेहराइच का निवासी है। वह देश छोड़कर नेपाल चला गया था, जहां वह 12 वर्षों से फर्जी पहचान पत्र के साथ रह रहा था।

डीसीपी (स्पेशल सेल) अमित कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने जघन्य मामलों में शामिल घोषित अपराधियों और इनामी अपराधियों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है, जिनका लंबे समय से पता नहीं चल पाया था। पुलिस ने सोनिया विहार थाने में 2012 में दर्ज एक हत्या के मामले में वांछित एक ऐसे ही अपराधी मोहम्मद उमर की पहचान की और उसके बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। पुलिस को 16 जुलाई को उमर की गतिविधि के बारे में सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया और उपरोक्त इनामी अपराधी मोहम्मद उमर को चौधरी चरण सिंह सर्विस रोड, डीडीए कार्यालय, आनंद विहार बस टर्मिनल, दिल्ली के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

डीसीपी ने उमर के बारे में बताते हुए कहा कि आरोपित उमर नईम, तस्लीम, मुकेश और मोती के संपर्क में आया और 2010 में मादक पदार्थ अफीम की तस्करी में शामिल हो गया और लोगों को रियाल (सऊदी मुद्रा) बदलने का लालच देकर धोखा दिया। डीसीपी ने कहा, “वर्ष 2011 में उसे अमरोहा, उत्तर प्रदेश में आर्म्स एक्ट और धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तार किया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने नईम, तस्लीम, मुकेश और मोती के साथ फिर से मादक पदार्थ अफीम की तस्करी शुरू कर दी।” उसके साथियों नईम, तस्लीम और मोती ने उसे बताया कि मुकेश ने अमरोहा पुलिस को उसके बारे में जानकारी दी है। इसलिए मोहम्मद उमर ने नईम, तस्लीम और मोती के साथ मिलकर मुकेश को खत्म करने की योजना बनाई।

डीसीपी ने कहा, “नईम, तस्लीम और मोती ने बागपत उत्तर प्रदेश में मुकेश की हत्या की थी। इस मामले में नईम, तस्लीम और मोती को गिरफ्तार किया गया था। 2012 में उमर ने नईम के साथ मिलकर सोनिया विहार दिल्ली के इलाके में तस्लीम की हत्या कर दी थी और पुलिस को गुमराह करने और उसकी पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर तेजाब डालकर उसका चेहरा बिगाड़ दिया था।” इस घटना के बाद उमर अपने परिवार के साथ नेपाल भाग गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए छद्म पहचान के साथ वहाँ रहने लगा। वह रुपाड़िया सीमा पार नेपाल की तरफ रहता था और काम के सिलसिले में कभी-कभार भारत आता था।

पूरी हुई ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा की तैयारियाँ: 24 घंटे के लिए इंटरनेट-SMS सब पर रोक, पिछले साल मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं और पुलिस को बनाया था निशाना

हरियाणा के मेवात क्षेत्र में आने वाले नूहँ में 24 घंटों के लिए बल्क एमएसएम, मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। यहाँ सोमवार (22 जुलाई 2024) को ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जानी है, जिसे लेकर सरकार अलर्ट पर है। बीते साल, ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदू भक्तों पर मुस्लिमों ने घेर कर हमला किया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी। मुस्लिम भीड़ ने साइबर थाने को भी निशाना बनाया था और आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान 150 से अधिक गाड़ियों को भी आग लगा दी गई थी। इस हमले के बाद हिंसा गुरुग्राम तक फैल गई थी।

ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा पर हुए हमले के काफी समय बाद तक तनाव बना रहा था और पुलिस को अपराधियों-दंगाइयों को पकड़ने के लिए बड़ा अभियान चलाना पड़ा था। इस मामले में आरोपित दंगाई पहाड़ियों पर छिपे थे, जिसके लिए पुलिस को ड्रोन की सहायता लेनी पड़ी और एनकाउंटर के बाद कई अपराधियों को पकड़ा था। इस बार प्रशासन कोई ढील नहीं देना चाहता।

इंटरनेट, बल्क एमएसएम पर 24 घंटों की रोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा के मेवात जिले के नूहँ में इंटरनेट सेवाओं औऱ बल्क एसएमएस पर पाबंदी लगाई है। पुलिस अधीक्षक विजय प्रताप ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने यह कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा से पहले यह फैसला लिया है। इंटरनेट सेवाएँ रविवार शाम 6:00 बजे से लेकर 22 जुलाई शाम 6 बजे तक बाधित रहेगी।

हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अनुराग रस्तोगी के एक आदेश के अनुसार, जिले में इंटरनेट सेवा रविवार शाम 6 बजे से सोमवार शाम 6 बजे तक निलंबित रहेगी। आदेश में कहा गया है कि नूहँ में तनाव, आंदोलन, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और शांति और सौहार्द में खलल पैदा होने की आशंका है। ऐसे में इंटरनेट पर रोक लगाई गई है। यह पाबंदी वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर आदि जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से गलत सूचना और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए किया गया।

हालाँकि सार्वजनिक सुविधा व लोगों की बुनियादी घरेलू जरूरतों के अनुसार व्यक्तिगत एसएमएस, मोबाइल रिचार्ज, बैंकिंग एसएमएस, वॉइस कॉल, कॉर्पोरेट और घरेलू ब्रॉडबैंड व लीज लाइनों द्वारा प्रदान की जाने वाली इंटरनेट सेवाओं को छूट दी गई है।

गौरतलब है कि पिछले साल 31 जुलाई को हरियाणा के नूहँ में मुस्लिम भीड़ द्वारा विश्व हिंदू परिषद के जुलूस को रोकने की कोशिश की गई थी। उन्होंने हिंदुओं पर हमला कर दिया था। इस दौरान मंदिर को घेर कर किए गए हमले में 5 लोगों और दो होमगार्डों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 15 अन्य घायल हो गए थे। ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान धर्म के नाम पर कुछ अराजक तत्व आपसी सौहार्द बिगाड़ने में कामयाब न हो इसको लेकर पुलिस सख्त हो गई है।