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‘पाप में जन्मा’ पंचशील समझौता… जिसे नेहरू ने चीन से डील करने भेजा, वो चायनीज महिला के प्यार में फँस गया: तिब्बत पर चीन के कब्जे को मान्यता, सीमा विवाद ज्यों का त्यों रहा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘पंचशील समझौते’ की तारीफ़ की है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ रहे संघर्षों पर लगाम लगाने के लिए इस तरह का समझौता एक उदाहरण है। इसकी 70वीं वर्षगाँठ पर चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि शांतिपूर्ण व्यवहार, सभी देशों के साथ दोस्ती और साझा विकास की भावना पर चीन काम करता रहेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि ‘पंचशील सिद्धांत’ आज अंतरराष्ट्रीय संपत्ति हैं, बेहतर भविष्य का तरीका एकता, सहयोग, कम्युनिकेशन और आपसी समझ को बढ़ावा देना है।

बता दें कि 29 अप्रैल, 1954 को भारत-चीन और चीन-म्यांमार सीमा विवाद सुलझाने के लिए हुए पंचशील के सिद्धांतों में ‘एक-दूसरे की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान’, ‘गैर-आक्रामकता’, ‘एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना’, ‘समानता और पारस्परिक लाभ’, तथा ‘शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व’ हैं। चीन में इसे ‘शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के 5 सिद्धांत’ कहा गया। झ़ोउ एनलाई तब चीन के प्रधानमंत्री थे। इसके बाद ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के नारे लगे और चीन ने पीठ में छुरा घोंपते हुए 1962 में भारत पर हमला बोल दिया।

इसे जवाहरलाल नेहरू की दूरदर्शिता-हीन सोच का परिणाम कहा जा सकता है, क्योंकि वो चीन के फेंके पास के मुग़ालते में आ गए थे और देश की सुरक्षा व्यवस्था में निवेश से लेकर रणनीति बनाने तक के लिए उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया। वर्षों तक ये प्रचारित किया गया कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया ये समझौता ऐतिहासिक था, लेकिन ये एक बड़ी भूल थी। कारोबार और सह-अस्तित्व के नाम पर चीन ने अपने अवैध कब्जे वाले तिब्बत और भारत के बीच समझौते की चाल चली।

चीन की राजधानी बीजिंग में भारत के राजदूत N राघवन और चीन के उप विदेश मंत्री झांग हांफू के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत भारतीयों को चीन नियंत्रित जमीन में स्थित कैलाश मानसरोवर जैसे पवित्र हिन्दू स्थलों में दर्शन के लिए भी अनुमति मिली। 15 मई को संसद में जवाहरलाल नेहरू ने तिब्बत में यथास्थिति को मान्यता देने की बात कही। यानी, एक स्वतंत्र राष्ट्र जिस पर चीन ने कब्ज़ा किया था, उसे उसके अधिकारों से वंचित कर नेहरू ने चीन के साम्राज्यवादी कृत्य को मान्यता दे दी।

जवाहरलाल नेहरू ने इसे वैश्विक शांति के लिए उठाया गया कदम बता दिया, भले अपने देश की सुरक्षा व्यवस्था की उन्हें कोई फ़िक्र नहीं थी। कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ने संसद में खुल कर इस समझौते का समर्थन किया। हालाँकि, आज़ादी के समय कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रहे आचार्य JB कृपलानी ने इस समझौते पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि चीन ने तिब्बत पर अत्याचार किया है। कुछ वर्षों बाद उन्होंने इसे पाप में जन्मा समझौता बताया था।

बीजिंग में 4 महीनों तक इस समझौते के लिए मोलभाव चला, इसके साथ ही भारत तिब्बत को लेकर अपना प्रभाव खोता चला गया। रही बात सीमा विवाद की तो ये तो आज भी वैसे का वैसा ही है। गलवान में जून 2020 में भारत के 20 सैनिक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। 13 मार्च, 1954 को विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी जनरल NT पिल्लई ने जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिख कर बताया कि कैसे भारत ने जिन अधिकारियों को चीन में तैनात कर रखा गया वो वहाँ ऐशोआराम की ज़िंदगी जी रहे हैं।

बीजिंग में पदस्थापित भारत के राजनयिक TN कौल चीन की एक महिला से प्यार में थे और उससे शादी करना चाहते थे। यानी, चीन ने हनीट्रैप के खेल का बखूबी इस्तेमाल किया। NT पिल्लई ने तत्कालीन पीएम को याद दिलाया कि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को विदेशी महिला से शादी से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी ज़रूरी है। एक तो लड़की के बारे में कुछ पता नहीं था, ऊपर से कौल पहले से ही शादीशुदा थे। उनके 2 बच्चे भी थे। सबसे बड़ी बात, वो भारत की तरफ से मोलभाव की जिम्मेदारी सँभाल रहे थे।

तिब्बत के साथ भारत के रिश्ते और चीन के साथ सीमा विवाद, सबका भाग्य इस समझौते पर निर्भर था और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति हनीट्रैप में फँस चुका था। पिल्लई ने कौल द्वारा 2 महीने की छुट्टी माँगे जाने के बाद कहा कि वो भारत आकर वार्ता के संबंध में जानकारी दें। शायद ही ऐसा कहीं देखा गया हो जहाँ कोई राजनयिक एक संवेदनशील वार्ता में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हो और विरोधी देश की लड़की के साथ रोमांटिक रिश्ता बना रहा हो।

तब प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू ने ये सब जानने के बाद TN कौल को तुरंत भारत तलब किया और N राघवन को आगे की वार्ता के लिए अधिकृत किया। इसके बावजूद कौल ने भारत लौटने के लिए 4 सप्ताह का समय लिया। उन्हें फिर चीन मामले का ज्वाइन सेक्रेटरी इंचार्ज बना दिया गया। फिर वो सोवियत यूनियन और अमेरिका में राजदूत रहे, विदेश सचिव भी बने’। ‘पंचशील समझौते’ के तहत जो भारत पहले तिब्बत के साथ सीमा साझा करता था, वो अब चीन के साथ करने लगा।

यही कारण है कि अब जब ‘पंचशील समझौते’ की चीन ने 70वीं वर्षगाँठ मनाई है तो भारत ने इस आयोजन से दूरी बनाए रखी। असल में TN कौल ने जो 2 महीने की छुट्टी माँगी थी, वो इसीलिए थी कि वार्ता खत्म होने के बाद वो चीन की उक्त प्रेमिका के साथ शादी कर हनीमून पर जाना चाहते थे। सोचिए, त्रिलोकी नाथ कौल ने इसके बाद कई पदों पर रहते हुए देश का कितना भला किया होगा? खैर, जब दिक्कत प्रधानमंत्री की नीति से ही थी तो अधिकारी भला क्या करते।

इंस्टाग्राम पर स्कूली लड़कियों को फँसाता था मुहम्मद अमजद, मिलने के बहाने बुला हड़प लेता था गहने: फिर दोस्ती खत्म कर हो जाता था गायब, केरल पुलिस ने दबोचा

केरल पुलिस ने थम्पिल मोहम्मद अजमल नाम के एक जालसाज को गिरफ्तार किया है। 20 साल का मोहम्मद अजमल इंस्टाग्राम पर लड़कियों को अपने जाल में फँसाता था और उनके सोने के आभूषण ठग लेता था। आरोपित अजमल चमरावट्टम का निवासी है। उसे वलनचेरी से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी एक पीड़िता के रिश्तेदार की शिकायत पर हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमल अपना टारगेट इंस्टाग्राम पर सेट करता था। यहाँ वो बातचीत करके लड़कियों से दोस्ती करता और उनका विश्वास जीतने की कोशिश करता था। अजमल के निशाने पर अधिकतर कक्षा 10 में पढ़ने वाली लड़कियाँ होती थीं। कुछ दिनों की दोस्ती के बाद अजमल लड़कियों को मिलने के लिए बुलाता था।

आरोपित मोहम्मद अजमल मिलने आई लड़कियों के गहने ये कहकर ले लिया करता था कि वो उनके लिए नए गहने बनवा देगा। गहने हड़पने के बाद अजमल लड़कियों से दोस्ती खत्म कर लेता था और गायब हो जाता था। माना जा रहा है कि अजमल कई लड़कियों के साथ ऐसी हरकतें कर चुका था। उन्हीं में से एक पीड़िता ने ठगे जाने के बाद अपने माता-पिता को सारी बात बता दी।

आखिरकार मामले की शिकायत कल्पाकंचेरी पुलिस में दर्ज करवाई गई। पुलिस की जाँच में यह बात सामने आई कि मोहम्मद अजमल ने कभी भी ठगी की शिकार लड़कियों को अपना मोबाइल नंबर नहीं दिया। इस वजह से पुलिस को अजमल की खोजबीन में शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ठगी के बाद अजमल सोशल मीडिया का भी प्रयोग सँभल के करता था।

अजमल की चालाकी को देखते हुए पुलिस ने उसे फँसाने के लिए जाल बिछाया। पुलिस ने एक लड़की के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल बनाया। इस प्रोफ़ाइल से अजमल को सम्पर्क किया। कुछ दिनों के बाद अजमल उस ID से लड़की बनी पुलिस के साथ बातचीत करने लगा। बात मिलने-मिलाने तक पहुँच गई। हर बार की तरह इस बार भी अजमल सोने की चाहत में लड़की से मिलने पहुँचा।

यहाँ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अजमल ने बताया कि ठगी का सोना वह अपने दोस्त निफिक को दे देता था। निफिक और अजमल की भी दोस्ती भी सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम के जरिए ही हुई थी। निफिक चमरावट्टम के नरिप्पारम्बिल का रहने वाला है। अजमल की गिरफ्तारी के बाद वह फरार हो गया है। पुलिस ने निफिक की तलाश शुरू कर दी है।

वृद्धा ने TMC नेता को गधा कहा तो जूतों से की पिटाई, अस्पताल में मौत: जो महिला की नातिन को लेकर भाग गया, उसका समर्थन कर रहा था तृणमूल नेता

पश्चिम बंगाल में रविवार (30 जून 2024) को गधा कहने पर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता ने एक वृद्ध महिला की जूतों से इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। बंगाल के पूर्व वर्धमान जिले के केतुग्राम के सीताहाटी पंचायत इलाके की यह घटना है। TMC की मुखिया ममता बनर्जी द्वारा शासित पश्चिम बंगाल में पिछले 11 दिनों में पिटाई से यह छठी मौत है।

मृत वृद्धा के परिजनों ने इसको लेकर TMC के नेता विश्वजीत आचार्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इसके बाद आचार्य को गिरफ्तार कर उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विश्वजीत आचार्य सीताहाटी पंचायत का सदस्य है। एफआईआर में अर्जुन देबनाथ और अभि देबनाथ के भी नाम हैं। हालाँकि, ये दोनों अभी फरार हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इनायतपुर की रहने वाली मृत वृद्धा बिंदुबाला मजूमदार की उम्र लगभग 62 साल थी। महिला की नतिनी प्रेम प्रसंग में पड़ोसी गाँव नैहाटी के एक युवक के साथ फरार हो गई है। इसके बाद लड़की के परिजन अपनी लड़की को लाने के लिए युवक के घर गए। इस दौरान ग्राम पंचायत सदस्य और नैहाटी के रहने वाले टीएमसी नेता विश्वजीत आचार्य ने लड़के का पक्ष लिया।

इतना ही नहीं, टीएमसी नेता विश्वजीत आचार्य ने कहा कि उसे लड़की के परिजनों से उन्हें नहीं मिलने दिया जाएगा। वृद्ध महिला और उसके परिजनों को धमकाया भी। इस पर लड़की की नानी बिंदुबाला गुस्सा गईं। उन्होंने कह दिया कि तृणमूल के नेता गधे होते हैं। उन्होंने आचार्य से पूछा, ‘अगर लड़की तुम्हारे घर की होती तो तुम क्या करते?”

इस पर टीएमसी नेता आचार्य ने बिंदुबाला की जूतों की पिटाई शुरू कर दी। वह लड़की की नानी बिंदुबाला को तब तक मारते रहा, जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गई। इसके बाद बेहोश वृद्धा को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। इसके बाद वृद्धा की बेटी इति दास ने विश्वजीत आचार्य, अर्जुन देबनाथ और अभि देबनाथ के खिलाफ FIR दर्ज करा दी।

इति दास ने जिस लड़के देबनाथ के साथ उसकी लड़की भागी है, उसके पिता अर्जुन देबनाथ को भी आरोपित बनाया है। वहीं, उसी के परिवार का अभि देबनाथ भी है। उधर, केतुग्राम 2 पंचायत समिति के अध्यक्ष विकास विश्वास ने कहा कि बुजुर्ग महिला दिल की मरीज थी। उन्होंने कहा कि महिला की मौत दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई है और टीएमसी नेता को नाहक फँसाया जा रहा है।

 

एक मर्द ने 200 महिलाओं को किया गर्भवती, रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी से बच्चों की हो गई अदला-बदली: ऑस्ट्रेलिया की IVF इंडस्ट्री के लिए नई समस्या

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ एक ही शख्स के स्पर्म से 200 महिलाओं के गर्भवती होने की बात सामने आई है, जिसके अगम्यगमन या कौटुम्बिक व्यभिचार का खतरा बढ़ गया है। अर्थात, ये 200 बच्चे बड़े होंगे तो आपस में इनके शादी-विवाह का डर है, ये फिर इनके बच्चे आपस में शादी कर सकते हैं। मेडिकल विज्ञान मानता है कि खून के रिश्ते में शादी होने के बाद जो बच्चे पैदा होते हैं वो अनुवांशिक रोग से ग्रस्त हो सकते हैं।

वहाँ पर इन सबके लिए जिम्मेदार प्रशासन ने स्पर्म डोनर्स और इससे गर्भवती हुई महिलाओं के जो रिकॉर्ड्स रखे हैं, उनमें गड़बड़ी सामने आई है। जेनेटिक सूचनाओं में गड़बड़ी से बड़ी समस्या सामने आई है। क्वींसलैंड दुनिया की सबसे बड़ी IVF इंडस्ट्री में से है। कोरोना संबंधित दिशानिर्देशों और बढ़ती माँग के बीच अब वहाँ स्पर्म डोनेशन की कमी हो गई है। प्रत्येक 6 में से 1 परिवार ऑस्ट्रेलिया में परिवार शुरू करने में दिक्कतों का सामना करता है।

क्वींसलैंड की ये इंडस्ट्री कई मिलियन डॉलर की है। अब इनमें से 42% स्पर्म डोनेशन के रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी सामने आई है। लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें डोनर की मेडिकल स्थिति के बारे में कुछ नहीं बताया गया। इससे भ्रूण की पहचान में भी गड़बड़ी सामने आई है। कइयों का आरोप है कि वो जिस बच्चे का पालन-पोषण कर रहे हैं उनके बायोलॉजिकल अभिभावक कोई और हैं। बड़ी संख्या में स्पर्म डोनेशन को नष्ट भी किया गया है। ये तय मानक पर खड़े नहीं उतरे।

बड़ी मात्रा में संगहित डोनटेड स्पर्म को नष्ट करने का आदेश जारी किया गया है। ऑडिट में ये भी पता चला है कि निम्न गुणवत्ता वाले स्पर्म का भी बच्चा पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया गया। एक ही डोनर कई क्लीनिकों में जाकर स्पर्म डोनेट करता है, ऐसे में उसके कितने परिवार होंगे इसके कोई रिकॉड्स गड़बड़ी की वजह से सामने नहीं आए हैं। सरकार के पास 200 से अधिक शिकायतें पहुँची हैं। सरकार अब इन परिवारों से बात कर के आगे का कदम उठाएगी।

कहाँ है वो परशुराम कुंड, जिसे अयोध्या की तरह सँवारेगी मोदी सरकार, जानिए क्या है इसका महत्व: पूर्वोत्तर भारत के धार्मिक स्थल के लिए ₹37.87 करोड़ आवंटित

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार (2 जुलाई 2024) ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश स्थित परशुराम कुंड को देश के प्रमुख दर्शनीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विकास केंद्र सरकार और अरुणाचल सरकार मिलकर करेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य की पूर्ति के लिए भगवान ने उन्हें संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय दिया है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि परशुराम कुंड को अयोध्या तथा अन्य देव स्थलों की तर्ज पर विकसित करने का सपना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि भगवान ने इसी मनोकामना की पूर्ति के लिए उन्हें संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय का दायित्व दिलवाया हैं। मेरी कोशिश रहेगी कि इस क्षेत्र का हर संभव विकास हो, ताकि धार्मिक पर्यटन के रूप में परशुराम कुंड भी देश में एक प्रमुख स्थल बनकर उभरे।”

परशुराम कुंड अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित है। इसके विकास के बाद यह स्थान देश के प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो जाएगा। परशुराम कुंड को क्षेत्र के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक बनाने के लिए 37.87 करोड़ रुपये का पर्याप्त अनुदान आवंटित किया गया है। यह आवंटन तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद) योजना के तहत किया गया है।

यहाँ हर साल परशुराम कुंड महोत्सव आयोजित किया जाता है। यहाँ हर बीतते साल के साथ तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जिस जगह पर ऋषि परशुराम की प्रतिमा स्थापित किया जाना है, वहाँ पर नींव का काम पूरा हो चुका है। प्रतिमा की स्थापना का काम जल्द शुरू होने की संभावना है।

इस परियोजना में परशुराम की 51 फीट ऊँची प्रतिमा की स्थापना शामिल है। इसे साल 2021 में एक संस्था द्वारा दान किया गया था। अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने परशुराम कुंड को एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने की देखरेख में सक्रिय भूमिका निभाई है। चौना मीन चोंगखाम-वाकरो निर्वाचन क्षेत्र के स्थानीय प्रतिनिधि हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि इस स्थान पर लोहित नदी के तट पर मकर संक्रांति पर्व के दौरान लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। माना जाता है कि परशुराम कुंड का हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत महत्व है। राज्य के उपमुख्यमंत्री चाउना मीन खुद परशुराम कुंड में परियोजना की देखरेख कर रहे हैं।

बता दें कि परशुराम ने अपने पिता जमदग्नि के कहने पर अपनी माँ रेणुका की हत्या कर दी थी। उन्होंने जो कुल्हाड़ी चलाई थी, वह पाप के कारण उनके हाथ में फँस गई थी। कुछ ऋषियों की सलाह पर परशुराम प्रायश्चित करने के लिए पूरे हिमालय में भटकते रहे। इस दौरान लोहित नदी के पानी में हाथ धोते कुल्हाड़ी उनके हाथ से गिर गई थी।

पुराणों में कहा गया है कि लोहित नदी के किनारे जिस जगह पर ऋषि परशुराम ने अपना हाथ धोया था, उस जगह को परशुराम कुंड कहा जाने लगा। कालांतर में यहाँ हर साल मकर संक्रांति के मौके पर लगने लगा। इस मेले को परशुराम कुंड मेला कहा जाता है। अब इसे पूर्वोत्तर भारत के एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

CM सिद्दारमैया की पत्नी को मैसूर के पॉश इलाके में मिली सरकारी जमीन, इधर DK शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष से हटाने के लिए गुटबाजी शुरू

कर्नाटक की सत्ताधारी पार्टी में कलह के कारण सब कुछ ठीक नहीं है, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं। उधर भाजपा ने आरोप लगाया है कि ‘मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA)’ ने मुख्यमंत्री सिद्दावामैया की पत्नी पार्वती को एक पॉश इलाके में अवैध रूप से जमीन उपलब्ध कराई है। बता दें कि पार्वती के नाम पर स्थित 4 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जिसके एवज में उन्हें वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराई गई है। भाजपा का कहना है कि उन्हें दी गई जमीन की कीमत अधिग्रहित जमीन से कई गुना अधिक है।

वहीं CM सिद्दारमैया का कहना है कि ’50:50 अनुपात’ वाले नियम के तहत उनकी पत्नी को वैकल्पिक जमीन मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि ये नियम पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने ही बनाया था। इस योजना के तहत अगर किसी व्यक्ति की 1 एकड़ अविकसित इलाके में स्थित जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो उसे आधा एकड़ जमीन विकसित इलाके में दी जाती है। वहीं नेता प्रतिपक्ष R अशोक ने सिद्दारमैया की पत्नी को जमीन दिए जाने को अवैध बताया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब ये मामला प्रकाश में आया तो अधिकारियों को निलंबित किए जाने की बजाए उन्हें स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि CBI या रिटायर्ड जज की जगह 2 IAS अधिकारियों को जाँच सौंपी गई है। सिद्दारमैया ने बताया कि उनके साले मल्लिकार्जुन ने 3 एकड़ 36 गुंटा जमीन 1996 में खरीदी थी और अपनी बहन, यानी सीएम की पत्नी को गिफ्ट की थी। एक एकड़ में 40 गुंटा होते हैं। MUDA ने प्लॉट बना-बना कर इस जमीन को बेचा।

मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी पत्नी की जमीन ले ली गई। उन्होंने पूछा कि क्या हमें अपनी जमीन के बदले जमीन नहीं मिलनी चाहिए? उनका कहना है कि इसके बदले अलग-अलग इलाकों में इसके आधी माप की जमीन MUDA ने उनकी पत्नी के नाम की है। एक पैनल बना कर 15 दिन में जाँच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। उधर डिप्टी सीएम DK शिवकुमार ने कर्नाटक में बतौर कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष 4 साल पूरे कर लिए हैं। कोरोना महामारी के दौरान उन्हें KPPC की कमान सौंपी गई थी।

अब मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खेमे के नेताओं का कहना है कि अब प्रदेश अध्यक्ष बदला जाना चाहिए। गृह मंत्री G परमेश्वर का कहना है कि इस माँग में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि डीके शिवकुमार कई पदों पर हैं। उनकी शक्तियाँ कम करने के लिए एक से अधिक उप-मुख्यमंत्री नियुक्त करने की माँग भी की जा रही है। वहीं DK शिवकुमार के गुट के नेता कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री को बदला जाना चाहिए। शिवकुमार ने पार्टी नेताओं की एक बैठक में कहा कि वो झुकने वाले नहीं हैं।

वोक्कालिंगा समाज के इलाकों में लोकसभा चुनाव 2024 में कॉन्ग्रेस की फजीहत के बाद DK शिवकुमार को बदले जाने की मॉंग हो रही है क्योंकि वो इसी समाज से आते हैं। उनके विरोधियों का कहना है कि अब SC-ST वर्ग से आने वाले नेताओं को मौका मिलना चाहिए। KN राजन्ना, सतीश जर्कीहोली और MB पाटिल जैसे मंत्रियों के अलावा विधायक विनय कुलकर्णी भी इस पद के दावेदार हैं। वहीं DK शिवकुमार ने कहा कि वो नकारात्मक आलोचनाओं की जगह लोगों की सेवा को तरजीह देते हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने की जाँच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी बनाने का ऐलान किया है।

इजरायल के शॉपिंग मॉल में संदिग्ध आतंकी ने 2 को चाकू मारा, सुरक्षा बलों ने किया ढेर: अभी तक किसी आतंकी संगठन ने हमले की नहीं ली जिम्मेदारी

इजरायल के एक शॉपिंग मॉल में बुधवार (3 जुलाई 2024) को आतंकी हमले की खबर आई। यहाँ एक चाकूबाज ने अचानक हमला कर के 2 लोगों को घायल कर दिया है। गंभीर हालात में घायल दोनों युवकों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। वहीं, पुलिस ने हमलावर को मार गिराया है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना उत्तरी इजरायल के कार्मेल शहर की है। बुधवार को यहाँ के एक शॉपिंग मॉल में काफी भीड़ थी। इसी दौरान एक हमलावर मॉल में 2 युवकों पर चाकू से हमला कर दिया। दोनों युवक इस हमले से बचने का काफी प्रयास करते दिखे। हालाँकि, कुछ देर में दोनों युवक घायल होकर जमीन पर गिर गए।

घटना के वक्त आसपास के लोग वहाँ पहुँचे और घायलों का अपने स्तर पर इलाज शुरू कर दिया। कुछ ही देर में वहाँ एम्बुलेंस आई और दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचा दिया गया। इनमें से एक हालत गंभीर है। दोनों घायलों की उम्र 20 वर्ष के आसपास बताई जा रही है।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इजरायली अधिकारियों ने इसे एक आतंकी हमला माना है। मौके पर पुलिस पहुँची और हमलावर को मार गिराया गया। इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है। हमलावर की पहचान अभी तक उजागर नहीं की गई है।

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर को दक्षिणी इज़रायल पर हमास के आतंकी हमले के बाद इजरायल गाजा में सैन्य कार्रवाई कर रहा है। गाजा में युद्ध से पहले ही इज़रायली कब्जे वाले पश्चिमी तट पर हिंसा बढ़ गई थी। इज़रायली सैन्य कार्रवाई के बाद हिंसा की घटनाएँ बढ़ गई हैं।

जब एक पादरी के इशारे पर 900 लोगों ने मौत को लगाया गले… कहानी जोंसटाउन वाले जिम जोंस की: सांसद तक की गोली मार हत्या, कहता था – दुनिया की हर लड़की लेस्बियन

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ (WTC) पर 11 सितंबर, 2001 को घातक हवाई हमला किया गया, जिसमें वहाँ मौजूद 2977 लोगों की मौत हो गई। अलकायदा के 17 हमलावर आतंकी भी इस हमले में मारे गए थे। ये अमेरिका में अब तक की सबसे बड़ी अप्राकृतिक त्रासदी है मौतों के हिसाब से। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि इससे पहले 23 वर्षों तक अमेरिका में सबसे अधिक हताहतों वाली जो अप्राकृतिक घटना थी, उसे किसी आतंकी ने अंजाम नहीं दिया था, बल्कि एक पादरी के कारण हुआ था, एक ईसाई कल्ट के कारण।

ये सारा मामला साइन फ्रांसिस्को स्थित एक समूह ‘Peoples Temple’ से जुड़ा हुआ है। तब 900 लोगों ने अपने मजहबी नेता के कहने पर ज़हर पी लिया था और मौत को गले लगा लिया था। उस ईसाई पादरी का नाम था जिम जोन्स। दक्षिण अमेरिका के एक जंगल में स्थित एक जगह पर ये घटना हुई थी। इस घटना की विचलित करने वाली तस्वीरें भी ली गई थीं, जिसमें बच्चों तक को घास में मृत पड़े हुए देखा गया। इस घटना पर कई किताब लिखी जा चुकी हैं, दस्तावेज बने हैं, लेख लिखे गए हैं।

जोंसटाउन की ये कहानी जोंस से शुरू होती है, जो कि एक श्वेत मंत्री था। उसने अमेरिकी-अफ़्रीकी बहुलता वाली सभा में रूढ़ि-विरुद्ध और प्रगतिशील विचारों को फैलाया। 1970 के दशक में जब ‘पीपल्स टेम्पल’ अपनी लोकप्रियता के शिखर पर था तब इसके अनुयायियों की संख्या हजारों में थी। अमेरिका में किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठने वाले पहले समलैंगिक शख्स हार्वे मिल्क सहित कई नेताओं का इसे संरक्षण प्राप्त था। हार्वे मिल्क ‘सैन फ्रांसिस्को बोर्ड ऑफ सुपरवाइजर्स’ के सदस्य थे।

1977 आते-आते जोंस और उसके ‘पीपल्स टेम्पल’ की संदिग्ध गतिविधियों की मीडिया में जम कर चर्चा शुरू हो गई थी, इसीलिए उन्होंने गुयाना में एक खेती-बाड़ी वाली जगह पर अपनी पूरी व्यवस्था को स्थानांतरित कर दिया, वहीं निर्माण कार्य कराए गए। मीडिया स्क्रूटनी से बचने के लिए ये सब किया गया। घने जंगलों के लिए जाना जाने वाला गुयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तरी अटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है जो वेनेजुएला के पूर्व में है।

जंगल में ही छावनी बना दी गई। इसके बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया से ‘हाउस ऑफ रिप्रजेनटेटिव्स’ के तत्कालीन सदस्य लियो रेयान जंगल की उस छावनी में रह रहे लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को चिंतित होने के बाद वहाँ जाँच के लिए पहुँचे। नवंबर 1978 में उन्हें वहीं ‘पेओप्लेस टेम्पल’ के सुरक्षाकर्मियों ने एयरस्ट्रिप पर गोली मार दी। उनके साथ-साथ 4 अन्य लोगों की भी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के कुछ दिन बाद उक्त पादरी ने अपने अनुयायियों को सायनाइड पीने के लिए कहा।

इसमें सबसे पहले बच्चों को ज़हर पिलाया गया। जोंसटाउन में इसके बाद 900 लाशें बिछ गईं। खुद जिम जोंस भी मारा गया। बताया गया कि उसने या तो खुद अपना जीवन ले लिया होगा या फिर उसकी नर्स एन्नी मूरे ने आत्महत्या से पहले गोली मार कर उसकी हत्या कर दी। दशकों बाद भी उस समय के लोग इस घटना को याद करते हैं। ये ऐसे लोग थे जिन्होंने उस चर्च/संस्था को अपना पूरा जीवन दे दिया था। ‘पीपल्स टेम्पल’ का अपना एक अख़बार भी था।

कुछ लोगों ने कहा कि वो सब सही चीजें कर रहे थे, लेकिन गलत जगह पर और गलत नेता के साथ। जिम जोंस सामाजिक और नस्लीय एकता की बातें करता था, ऐसे में लोगों को आश्चर्य हुआ कि वो अचानक से इतना दुष्ट कैसे हो गया। जोंस के बारे में बताया गया कि वो लोगों को नियंत्रण में रखना चाहता था, धोखाधड़ी करता था, जो लोग उसे धोखा देते थे उनसे आक्रोशित रहता था। वो बचपन में इंडियाना में अकेला रहा था। सामान्यतः वो उस समय अपने दोस्तों को अपना दर्शक बना कर रखता था, एक बार उसने सबको बंद कर दिया था।

वो जानवरों के साथ भी एक्सपेरिमेंट्स करता था और उनका अंतिम संस्कार आयोजित करता था। उसके बचपन के दोस्त बताते हैं कि वो मजहब और मौत को लेकर आसक्त था। उसने एक बार एक बिल्ली को चाकू से मार डाला था। अप्रैल 1945 में जब जर्मनी के नाज़ी तानाशाह अडोल्फ हिटलर ने विरोधी सेना से बचने के लिए आत्महत्या की, तो इस घटना से जिम जोंस कभी प्रभावित हुआ था। 1955 में उसने इंडियानापॉलिस में ‘पीपल्स टेम्पल’ की स्थापना की।

उस समय अमेरिका में नस्लवाद का प्रभाव था, ऐसे में ‘Peoples Temple’ नामक चर्च ने बिना नस्ल देखे सदस्यता देनी शुरू की और यही इसकी लोकप्रियता का कारण बना। 1960 के दशक की शुरुआत में जिम जोंस के संज्ञान में एक लेख आया जिसमें दुनिया की 9 ऐसी सुरक्षित जगहों के बारे में बताया गया था जो परमाणु हमले की स्थिति में भी सुरक्षित रहेंगे। ‘Esquire’ नाम पत्रिका के इस लेख में ऐसी एक जगह कैलिफोर्निया के यूरेका का भी जिक्र था।

जिम जोंस ने अपने अनुयायियों को कैलिफोर्निया में शिफ्ट होने के लिए कहा और 15 जुलाई, 1967 को परमाणु हमला होने की आशंका जताई। क़यामत को लेकर जिम जोंस के जो विचार थे, वो चाहता था कि सब इसे मानें। वो सपने देखता था कि प्रलय की स्थिति में वो सभी नस्ल के लोगों को एक साथ बचाएगा। फिर वो अपने परिवार और 70 अनुयायियों के साथ उत्तरी कैलिफोर्निया के रेडवुड वैली चला गया। इसके बाद उसका साम्राज्य 1970 का मध्य आते-आते सैन फ्रांसिस्को और लॉस एंजेल्स में फैल गया।

‘पीपल्स टेम्पल’ के लोग सिर्फ एक आदमी की बात मानते थे और वो था जिम जोंस। इसमें सभी नस्ल के लोग थे जो चर्च की विविधता और एक्टिविज्म वाली विचारधारा से प्रभावित थे। कुछ लोगों को ड्रग्स और अपराध की दुनिया से वापस मुख्यधारा में लाया गया था। कइयों को परोपकारी कार्य से जोड़ा गया। चर्च से जुड़े सभी लोग एक परिवार की तरह महसूस करते थे। जिम जोंस अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए विवादित अश्वेत इंजीलवादी पादरी फादर डिवाइन से भी मिलता-जुलता था, जो ‘पीस मिशन मूवमेंट’ का संस्थापक था।

1880 के दशक में जन्मे फादर डिवाइन ने 1910 के दशक में अपना मजहबी अभियान शुरू किया था और लोग उसे गॉड के रूप में देखने लगे थे। उसे सार्वजनिक उपद्रव के लिए जेल की सज़ा भी सुनाई गई थी, लेकिन ऐसा करने वाला जज ही अचानक से मर गया। वो पेंसिलवानिया के एक एस्टेट में अपनी बीवी मदर डिवाइन के साथ रहता था। वो भी नस्लीय भेदभाव में यकीन नहीं रखता था। 1965 में उसकी मौत के बाद जिम जोंस ने उसकी संस्था पर कब्ज़ा करने की असफल कोशिश भी की।

हालाँकि, थोड़े-बहुत अनुयायियों को वहाँ से अपने साथ ले गया था। दिसंबर 1973 में जिम जोंस को लॉस एंजेल्स के एक फिल्म थिएटर में अशिष्ट आचरण के लिए गिरफ्तार किया गया था। जोंसटाउन में अपने अंतिम दिनों में वो फार्मास्युटिकल ड्रग्स के प्रति भी आसक्त हो गया था। वो शादीशुदा था, उसने अलग-अलग नस्लों के बच्चों को गोद लिया था। इसके बावजूद उसके कुछ महिला और पुरुष अनुयायियों के साथ उसके यौन संबंध थे।

जिम जोंस दुनिया की सभी महिलाओं को लेस्बियन (पुरुष के साथ-साथ महिलाओं के प्रति भी यौन आकर्षण रखने वाली) बताता था और कहता था कि वो दुनिया का एकमात्र Heterosexual (विपरीत लोग के प्रति आकर्षण) शख्स है। साथ ही वो सभी पुरुषों को समलैंगिक बताता था। वो ‘पीपल्स टेम्पल’ में रोमांटिक रिश्तों को पसंद नहीं करता था क्योंकि उसे लगता था कि ये उद्देश्य में बाधक है। जिम जोंस ने एक पालतू चिम्पांजी भी रखा था जिसका नाम ‘मिस्टर मग्स’ था, वो दावा करता था कि उसे वैज्ञानिक परीक्षण से बचा कर लाया गया है।

हालाँकि, अटकलें ये थीं कि उसने इसे किसी दुकान से खरीदा है। इंडियाना के अपने दिनों में जिम जोंस घर-घर जाकर बन्दर बेचा करता था। ‘मिस्टर मग्स’ एक तरह से ‘पीपल्स टेम्पल’ का मैस्कॉट बन गया था। ‘पीपल्स टेम्पल’ के अख़बार में बताया गया था कि 18 महीने की उम्र में ही उस चिम्पांजी की बच्ची 4 साल के बच्चे वाली थी, वो जिम जोंस की हर बात मानता था। जो 900 लोगों की मौत की त्रासदी जो हुई, उसकी शुरुआत 6 साल के एक बच्चे से हुई थी।

असल में ‘पील्स टेम्पल’ के अनुयायियों में पति-पत्नी टिम और ग्रेस भी शामिल थे। टीम चर्च का अटॉर्नी था, वहीं ग्रेस जिम के करीबी लोगों में शामिल थी। 1972 में उनके बेटे जॉन विक्टर स्टोएन का जन्म हुआ। जिम जोंस ने उसके पिता होने का दावा किया, इसकी सहमति जताते हुए टिम को एक एफिडेविट पर भी हस्ताक्षर करना पड़ा। ग्रेस ने 1976 में चर्च छोड़ दिया और बेटे को जिम जोंस के पास ही रहने दिया, क्योंकि उसे अपनी और टिम की जान का खतरा था।

इसके 1 साल बाद टिम ने भी चर्च को अलविदा कह दिया। दोनों ने फिर अमेरिकी कोर्ट का रुख किया, और अपने बेटे को वापस करने की माँग की। कोर्ट के आदेश के बावजूद जिम जोंस ने जॉन को सौंपने से इनकार कर दिया। असल में जोंस को डर था कि जॉन विक्टर स्टोएन को वापस किए जाने के बाद जोंसटाउन के जो अन्य लोग हैं, वो भी अपने परिजनों को वापस माँगने लगेंगे। साथ ही ‘पीपल्स टेम्पल’ के विरोधी भी इसे मुद्दा बना रहे थे, ऐसे में ये उसकी शक्तियों और पहुँच के कम होने का संकेत होगा।

‘Peoples Temple’ में 900 मृतकों में 304 ऐसे थे जिनकी उम्र 17 वर्ष से कम थी, उनमें एक जॉन विक्टर स्टोएन भी शामिल था। लियो रेयान नामक जिस नेता की हत्या हुई थी, उन्हें लेकर लोगों में सकारात्मक विचार थे। एक बार जेल के भीतर स्थितियों की जाँच के लिए वो फॉल्सम स्टेट परिजन में पहुँच गए थे। बेबी सील्स का शिकार रोकने के लिए वो कनाडा गए। शुरू में ‘पीपल्स टेम्पल’ का दौरा करने की उसकी माँग को नकार दिया गया था, लेकिन अंत में मान लिया गया।

इसके बाद वो कुछ संबंधियों और पत्रकारों के साथ जोंसटाउन का दौरा करने पहुँचे। वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि वो वापस अपने घर लौटना चाहते हैं, जिम जोंस इसे ‘धोखा’ मानता था। वापस जाने के लिए जब ये लोग पोर्ट कैटूमा एयरस्ट्रिप पर प्लेन का इंतजार कर रहे थे, उसी दौरान चर्च के सुरक्षाकर्मी एक ट्रक में भर कर आए और उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। रेयान व 4 अन्य लोगों की मौत हो गई। 1983 में रेयान को कॉन्ग्रेसनल गोल्ड मेडल मिला, वहीं 2009 में कैलिफोर्निया के सैन मातेओ में एक डाकघर का उनके नाम पर नामकरण किया गया।

इसके बाद जिम जोंस ने अपने सभी अनुयायियों को आदेश दिया कि वो आत्महत्या करें, वरना गुयाना की सेना आएगी और उनके बच्चों को ले जाएगी। कुछ लोग किसी तरह वहाँ से किसी न किसी बहाने बाहर निकलने में भी कामयाब रहे थे। एक बुजुर्ग महिला सोई थी, जब वो उठी तो उसे चारों तरफ लाशें ही दिखीं। कुछ लोग इसे मास मर्डर भी बताते हैं, वो कहते हैं धोखे से ड्रिंक लोगों को पिलाया गया। ईसाई कल्ट से जुड़ी ये घटना आज तक लोगों को दहलाती है।

मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख और पीड़ितों को ₹1 लाख: CM योगी ने कहा- हाथरस हादसे में साजिश से इनकार नहीं, हाई कोर्ट के रिटायर जज की अगुवाई में जाँच

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को हाथरस जिले का दौरा किया। उन्होंने मंगलवार (2 जुलाई) को भोले बाबा के सत्संग के दौरान मची भगदड़ के पीड़ितों एवं मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ मृतकों के परिजनों के परिजनों 4 लाख और घायलों को 1 हजार रुपए आर्थिक मदद देने की बात कही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हादसे की जाँच के लिए SIT (विशेष जाँच दल) का गठन किया गया है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में घटना की न्यायिक जाँच करवाने का भी फैसला किया है। मीडिया से बात करते हुए CM योगी ने कहा कि ADG आगरा के नेतृत्व में गठित टीम ने अपनी प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट सौंप दी है।

सीएम ने कहा कि इस रिपोर्ट में कई ऐसी बातें सामने आईं है, जिनकी गहराई से जाँच बेहद जरूरी बताई गई हैं। राहत और बचाव कार्यों को पहली प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इसके आयोजकों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। बकौल योगी आदित्यनाथ, इस घटना में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी गई है।

CM योगी ने आशंका जताई है कि इस प्रकार की घटना सिर्फ एक हादसा नहीं हैं। इस घटना के पीछे कोई न कोई जरूर है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर ये हादसा भी है तो उसके पीछे जिम्मेदार कौन है, इसका पता लगाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना के पीछे जो भी होगा उसको खोज कर सजा दी जाएगी। न्यायिक जाँच में शामिल रिटायर्ड जज और पूर्व पुलिस अधिकारी शासन को रिपोर्ट देंगे कि किन कदमों को उठाकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

भोले बाबा को छूने के लिए मची भगदड़

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मृतकों में UP के अलावा मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के लोग भी शामिल हैं। 31 घायलों का एटा, अलीगढ़ और हाथरस के अस्पतालों में इलाज करवाया जा रहा है। इन घायलों में अधिकतर की हालत खतरे से बाहर है।

यह हादसा तब हुआ, जब कथावाचक भोले बाबा अपनी कथा के बाद वापस जा रहे थे। इस दौरान कई महिलाएँ उन्हें छूने के आगे बढ़ीं। इस दौरान सेवादार भी लोगों को धक्का देते रहे। इसी के चलते भीड़ का दबाव बढ़ता चला गया।

मुख्यमंत्री योगी ने आगे बताया कि इस तरह के कार्यक्रम में सेवादार आयोजन के अंदर प्रशासन को अंदर घुसने नहीं देते हैं। घटना के बाद आयोजकों ने इस मामले को दबाने की बहुत कोशिश की थी। जब प्रशासनिक अधिकारी घायलों को अस्पताल ले जाने लगे तो अधिकतर सेवादार वहाँ से भाग निकले।

हादसे पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के कुछ नेताओं की इस हादसे पर राजनीति करने के लिए आलोचना की। उन्होंने कहा कि हर कोई देख रहा है कि सज्जन (भोले बाबा) के साथ फोटो किसके हैं। उनके राजनीतिक संबंध किसके साथ है, ये हर कोई देख रहा है।

बताते चलें कि भोले बाबा उर्फ नारायण के कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीरें और उनके साथ जयकारे लगाते हुए वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि निर्दोषों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों को कठोर सजा मिलेगी।

स्वार्थियों की साजिश के शिकार हुए बेगुनाह

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि धार्मिक आयोजन को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर ज्यादा पुलिस फ़ोर्स तैनात नहीं थी। आयोजकों का मानना था कि अंदर के हालात सेवादार हालात सँभाल लेंगे। उन्होंने बताया कि पुलिस फ़ोर्स बाहर तैनात थी। हादसे के बाद सेवादारों द्वारा घायलों को छोड़कर भागने की घटना को सीएम योगी ने साजिश करार दिया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कुछ स्वार्थी लोगों की साजिश के शिकार कई बेगुनाह बन गए। इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल जाकर इलाज करवा रहे पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर कहा कि हाथरस की दुर्घटना में घायल हुए लोगों से आज अस्पताल में भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना और चिकित्सकों से उनके उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने लिखा, “कुशल चिकित्सकों के नेतृत्व में सभी का समुचित उपचार शीर्ष प्राथमिकता पर किया जा रहा है। इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों और उनके परिवार के साथ खड़ी है। सभी घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति हो, प्रभु श्रीराम से यही प्रार्थना है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। सीएम योगी ने घटनास्थल पर जाकर उसका भी निरीक्षण किया। इस दौरान भारी बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से मैदान में पानी भर गया था। मुख्यमंत्री के साथ पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद था। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को कई निर्देश दिए।

पैरोल पर बाहर निकलेगा खालिस्तानी अमृतपाल सिंह, सांसद बनने के बाद लेगा संविधान की शपथ: असम की जेल से लड़ कर पंजाब में जीता चुनाव

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को लोकसभा सांसद पद की शपथ लेने के लिए के लिए पैरोल मिल गई है। वह 5 जुलाई, 2024 को लोकसभा सांसद पद की शपथ लेगा। अमृतपाल को पंजाब के खडूर साहिब से सांसद चुना गया है। उसके पैरोल की जानकारी दूसरे खालिस्तान समर्थक सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने दी है।

सरबजीत सिंह खालसा ने बताया है कि वह अमृतपाल की शपथ के मुद्दे को लेकर स्पीकर ओम बिरला से मिले थे। स्पीकर ओम बिरला ने खालसा को यह जानकारी दी कि अमृतपाल को दिल्ली में 5 जुलाई, 2024 को शपथ दिलाई जाएगी।

बताया गया है कि अमृतपाल सिंह को 4 दिन के लिए पैरोल दी गई है। उसकी पैरोल के साथ कई शर्तें जोड़ी गई हैं। अभी अमृतपाल सिंह को असम की डिब्रूगढ़ जेल में रखा गया है। इस बात की संभावना है कि उसे डिब्रूगढ़ से सीधे हेलीकॉप्टर के माध्यम से दिल्ली लाया जाएगा, जहाँ उसे सांसद के तौर पर शपथ दिलाई जाएगी। अमृतपाल सिंह की पैरोल को लेकर पंजाब सरकार ने स्पीकर ओम बिरला को आवेदन भेजा था।

अमृतपाल सिंह को दी गई पैरोल को अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने डिब्रूगढ़ के जेल अधीक्षक को बता दिया है। अमृतपाल सिंह, पंजाब के खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद चुना गया था। उसने जेल से ही पर्चा भरा था और यहीं से चुनाव जीत लिया था।

अमृतपाल सिंह को UAPA मामले में डिब्रूगढ़ जेल में बंद किया गया है, वह बीते वर्ष से ही यहाँ बंद है। उसके नेतृत्व में मोहाली में एक थाने पर हमला हुआ था, इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उस पर कार्रवाई की थी। उसके कई साथी भी गिरफ्तार किए गए थे।

अमृतपाल सिंह से पहले जम्मू कश्मीर के बारामुला से सांसद चुने गए निर्दलीय अलगाववादी नेता राशिद को भी शपथ लेने की अनुमति मिली थी। इंजीनियर राशिद को भी 5 जुलाई, 2024 को शपथ दिलाई जानी है। उसे के कोर्ट ने 2 घंटे की पैरोल दी है।