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‘इस्लाम में अभय मुद्रा की कोई धारणा नहीं, हम मूर्तिपूजा में नहीं मानते’: राहुल गाँधी पर भड़के इस्लामी काउंसिल के अध्यक्ष, दुआ माँगने को कॉन्ग्रेस के चुनाव चिह्न से जोड़ा था

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सोमवार (1 जुलाई, 2024) को संसद में बतौर नेता प्रतिपक्ष पहला संबोधन देते हुए हिन्दुओं को हिंसक बता दिया और अग्निपथ योजना को लेकर झूठ फैला दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिन्दू देवी-देवता ‘अभय मुद्रा’ में आशीर्वाद देते हैं, ये हर मजहब में है। उन्होंने इसके लिए गुरु नानक और जीसस क्राइस्ट की तस्वीर दिखाई। साथ ही उन्होंने इस्लाम को भी ‘अभय मुद्रा’ से जोड़ दिया, जिसके बाद मुस्लिम समाज ही अब उनके खिलाफ उतर आया है।

राहुल गाँधी के इस संबोधन पर ‘ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल’ के अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा, “मेरी भी जानकारी में आया है और मैंने थोड़ा-बहुत देखा भी है कि राहुल गाँधी ने संसद में ‘अभय मुद्रा’ का जिक्र किया और मुस्लिमों द्वारा दुआ माँगे जाने से इसकी तुलना करते हुए कहा है कि ये इस्लाम में भी है। ‘अभय मुद्रा’ हिन्दू धर्म के अंदर विभिन्न मुद्राओं का जिक्र है और विभिन्न देवी-देवता हैं उसमें हो सकता है।”

इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में मूर्तिपूजा या पूजा-पाठ का कोई जिक्र नहीं है, न ही किसी किस्म के ‘अभय मुद्रा’ का जिक्र है। सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि वो नहीं जानते हैं कि किस स्थिति में उन्होंने इसे इस्लाम से जोड़ा है और जस्टिफिकेशन देने की कोशिश की है कि कॉन्ग्रेस के चुनाव चिह्न से इस्लाम में दुआ माँगने के तौर-तरीके से जोड़ा है। ‘ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल’ के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में ऐसा कुछ भी नहीं है, वो इसका खंडन करते हैं।

संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गाँधी को करारा जवाब देते हुए कहा था कि वो इस्लामी विद्वानों से ‘अभय मुद्रा’ के बारे में पूछ लें, साथ ही ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी’ से भी गुरु नानक की तस्वीर दिखाने से पहले इस संबंध में सलाह ले लें। राहुल गाँधी ने संसद में कहा कि खुद को हिन्दू बताने वाले हिंसा करते हैं, नफरत फैलाते हैं और असत्य बोलते हैं। पीएम मोदी ने खुद इसका जवाब देते हुए कहा कि ये गंभीर विषय है, इस पर उन्हें माफ़ी माँगनी चाहिए।

बलिदानी ‘अग्निवीर’ के परिवार को ₹3 करोड़ तक का मुआवजा: संसद में राहुल गाँधी ने भारतीय सेना को भी नहीं छोड़ा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले – UK-US में भी ऐसी योजना

बतौर नेता प्रतिपक्ष लोकसभा में अपने पहले ही संबोधन में हिन्दुओं को हिंसक बताने वाले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भारतीय सेना को बदनाम करने की भी कुचेष्टा की है। उन्होंने केंद्र सरकार पर एक जवान और दूसरे जवान के बीच फूट डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक को पेंशन मिलेगी और वो बलिदानी कहाएगा, लेकिन दूसरा बलिदानी नहीं कहाएगा और उसे पेंशन नहीं मिलेगी। इस दौरान उन्होंने एक अग्निवीर के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि उसे कुछ नहीं मिला।

हालाँकि, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि वो गलतबयानी कर के सदन को गुमराह कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी ‘अग्निवीर’ के बलिदान होने पर परिवार को 1 करोड़ रुपए की धनराशि मुआवजे के रूप में दी जाती है। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गाँधी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो देश से माफ़ी माँगें। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह की योजना UK-US में भी है।

बता दें कि ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भारतीय सेना में 4 साल के लिए भर्ती हुए ‘अग्निवीर’ अगर बलिदान होते हैं तो उसके परिजनों को कम से कम 1.25 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा मिलता है। आइए, बताते हैं कैसे। परिवार को 48 लाख रुपए बीमा का मिलता है, 44 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाती है, 8 लाख रुपए ‘सशस्त्र बल युद्ध हताहत कोष’ से, ‘सेवा निधि’ से 11.71 लाख रुपए और 40,000 रुपए से लेकर 17 लाख तक की धनराशि बचे हुए कार्यकाल के कुल वेतन के हिसाब से मिलती है।

भारतीय सेना और बैंक के बीच हुए MoU के तहत भी धनराशि मिलती है। लुधियाना के एक ‘अग्निवीर’ के बलिदान होने के बाद उसके परिवार को इसके तहत 50 लाख रुपए मिले थे। वहीं इन सबके अलावा राज्य सरकार के फंड से भी कुछ मिलता है। लुधियाना वाले मामले में ये अमाउंट 1 करोड़ रुपए था। साथ ही अगर कोई ‘अग्निवीर’ दिव्यांग हो जाता है तो उसे भी 15, 25 या 44 लाख की धनराशि मुआवजे के रूप में मिलती है, जो दिव्यांगता के प्रतिशत से निर्धारित होती है।

‘सड़क का काम रोको’: नारेबाजी करते हुए मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर किया हमला, ज़ाहिर दर्जी की छत से दनादन चले पत्थर, पीड़ितों में अधिकतर दलित

नेपाल के सर्लाही जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ मुस्लिम भीड़ ने सरकार द्वारा करवाए जा रहे विकास काम को रोक दिया। थोड़े समय बाद जब बाधा डाल रहे लोगों को भगाया गया तो उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाके में हिन्दुओं के घरों पर हमला कर दिया। पत्थरबाजी जाहिर दर्जी के छत से हुई है। अन्य आरोपितों के नाम नवाजुद्दीन, जाबिर, तारिक, इमामुल और गुलाम आदि हैं। पीड़ित हिन्दुओं में अधिकतर वो जातियाँ हैं जो भारत में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में आती हैं।

हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराज़गी जताते हुए प्रशासन पर हमलावर मुस्लिमों को संरक्षण देने और मामले को दबाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

यह घटना नेपाल में सर्लाही जिले के गोदैता बाजार की है। यहाँ के वार्ड संख्या 8 में मंगलवार (25 जून, 2024) को एक नेपाल सरकार द्वारा पारित एक सड़क का निर्माण करवाया जा रहा था। आरोप है कि इस दौरान मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग वहाँ पहुँच गए। उन्होंने ठेकेदार और मजदूरों को धमकी देते हुए काम बंद करने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर मुस्लिम पक्ष काम को रोकना चाहता था वहाँ न तो उनकी कोई जमीन थी और न ही उसके पास कोई भी आधिकारिक कागजात।

इसी निर्माण को रोकने के लिए पहुँची थी मुस्लिम भीड़

कुछ देर में दोनों पक्षों में तनातनी हो गई। मजदूरों को भी धमकाया जाने लगा। इन हरकतों के बावजूद ठेकेदार ने काम बंद करने से मना कर दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों पक्षों में गाली-गलौज और हाथापाई भी हुई। आखिरकार लोगों ने एकजुट हो कर बाधा डालने गई भीड़ को भगा दिया। मामले की सूचना प्रशासन को भी दे दी गई। ‘हिन्दू सम्राट सेना’ का आरोप है कि तुष्टिकरण की राजनीति से प्रभावित नेपाली प्रशासन ने सरकारी काम में रुकावट डालने गए लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

इधर काम रुकवाने में असफल होने से मुस्लिम भीड़ नाराज हो गई। भीड़ में शामिल लोग सर्लाही के उन इलाकों में पहुँचे जो मुस्लिम बाहुल्य हैं। इसमें पासवान टोला आदि मोहल्ले शामिल हैं। आरोप है कि यहाँ पहुँच कर भीड़ ने अपना गुस्सा उन बेकसूर हिन्दुओं पर उतारा जिनका सरकारी निर्माण कार्य रोकने या चलने से कोई मतलब ही नहीं था। भीड़ ने नारेबाजी करते हुए हिन्दुओं के घरों पर पत्थरबाजी की। काफी देर तक तो पीड़ित हिन्दुओं को हमले की वजह ही समझ में नहीं आई। हमले के शिकार अधिकतर हिन्दू उन जातियों से हैं जो भारत में दलित समुदाय में गिनी जाती हैं।

अचानक हुए इस हमले में हिन्दू समुदाय के लोगों के कच्चे घरों के खपरैल टूट गए। कुछ लोगों की बाइकें क्षतिग्रस्त हो गईं। वायरल हो रहे एक वीडियो में विनोद नाम के व्यक्ति को कहते सुना गया कि उनके घर को तहस-नहस कर दिया गया जबकि उनका कोई दोष नहीं था। इस मामले को कुछ नेताओं ने साम्प्रदायिक विवाद न बता कर आपसी झगड़ा बताया है। हालाँकि, पीड़ित हिन्दू विनोद इन दावों का खंडन कर रहा है। विनोद ने कहा, “क्या हमने किसी को गाली दी थी या किसी का अपमान किया था? फिर हमारे घर को निशाना क्यों बनाया गया?” हमले में पीड़ित हिन्दुओं के नाम विनोद महतो, जय किशोर महतो, चन्दर दास और राजेंद्र दास आदि सपरिवार हैं।

ये पत्थरबाजी जाहिर दर्जी के छत से हुई है। कपड़े सिलने का काम करने वाला जाहिर सर्लाही का ही निवासी है। अन्य हमलावरों के नाम नवाजुद्दीन, जाबिर, तारिक, इमामुल और गुलाम आदि हैं। चश्मदीदों को उसके छत पर दर्जनों लोग पथराव करते दिखे। इस वीडियो में पीड़ित विनोद बता रहा है कि अचानक हुई पत्थरबाजी में वो खुद घायल हो गया था और जैसे-तैसे खुद को बचा पाया। आरोप है कि हमले के कुछ लोगों के गैस सिलेंडर तक फोड़ डाले गए। पीड़ित पक्ष का दावा है कि हिंसा में एकतरफा पीड़ित हिन्दू हैं और हमलावर मुस्लिम पक्ष से। सवाल कर रहे व्यक्ति ने किसी चालक का नाम लिया जिसके बारे में पीड़ित विनोद को जानकारी नहीं थी।

ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी ‘हिन्दू सम्राट सेना’ के के एक पदाधिकारी से ली। हमें बताया गया कि अगर नेपाल के सरकारी विकास कार्य को रोकने वालों पर ही प्रशासन कड़ी कार्रवाई कर देता तो बाद में ये घटना घटित न होती। उन्होंने बताया कि नेपाल में हिन्दुओं पर लगातार हमले होने की वजह वर्तमान वामपंथी सरकार द्वारा लागू की गई मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति है। राजेश यादव का दावा है कि अभी तक हिन्दुओं के घरों पर पत्थरबाजी करने वालों पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। ‘हिन्दू सम्राट सेना’ ने मुस्लिम बाहुल्य इलाके में रहने वाले हिन्दुओं की सुरक्षा की भी माँग की।

महिला को रस्सी से बाँध कर परेड निकाला, डंडे से पीटा, जमीन पर छटपटाती रही… बंगाल में ताजेमुल की ‘शरिया अदालत’ का दूसरा वीडियो, TMC विधायक बताते हैं ‘मुस्लिम राष्ट्र’

पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर स्थित चोपरा में सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के विधायक हमीदुल रहमान के करीबी ताजेमुल का एक और वीडियो सामने आया है। इससे पहले वायरल हुए एक वीडियो में देखा गया था कि वो एक महिला और उसके प्रेमी की खुलेआम भीड़ के सामने पिटाई कर रहा है। वहीं अब पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष व नंदीग्राम के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने उसका नया वीडियो जारी किया है, जो रविवार (16 जून, 2024) का है।

ये वीडियो रात के समय का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला को रस्सी से बाँध कर उसका परेड निकाला जा रहा है। उक्त महिला के साथ-साथ एक पुरुष के भी कपड़े उतार कर ये रस्सी उसने शरीर में बाँध दी गई है। रास्ते में परेड निकाले जाने वक्त दोनों की डंडे से पिटाई भी की जा रही है। साथ में कई अन्य लोग भी तमाशा देखते हुए चल रहे हैं। इसके बाद इन दोनों को एक पेड़ के पास जमीन पर बिठा कर पीटा गया। कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बना रहे होते हैं।

फिर एक कमरे में ले जाकर महिला और उस पुरुष को जमीन पर लिटा कर पीटा गया, इस दौरान वो छटपटाती रही। कोई उन्हें बचाने की कोशिश नहीं करता है। शुभेंदु अधिकारी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “स्ट्रीट जस्टिस का दूसरा एपिसोड। इसमें TMC नेता ताजिमुल उर्फ ​​JCB जज, जूरी और जल्लाद की भूमिका में हैं। ममता बनर्जी के बंगाल में एक और दिन, जहां ‘मुस्लिम राष्ट्र’ की परंपराओं का मनमाने ढंग से पालन किया जाता है।”

इससे पहले जो वीडियो सामने आया था, उसमें भी एक महिला और उसके प्रेमी को बाँस के डंडे से पीटते हुए ताजेमुल दिखा था। उसका बचाव करते हुए चोपरा के विधायक हमीदुल रहमान ने कहा था कि ‘मुस्लिम राष्ट्र’ के कुछ आचार-विचार होते हैं। ऐसे में सवाल पूछे जाने लगे थे कि चैतन्य महाप्रभु और रामकृष्ण परमहंस की धरती क्या अब ‘मुस्लिम राष्ट्र’ है? शरिया भारत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है, जहाँ मनमाने ढंग से भारत के संविधान और कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

मेधा पाटकर को 5 महीने की जेल, दिल्ली के उप-राज्यपाल VK सक्सेना की मानहानि का है मामला: 24 साल पहले एक प्रेस नोट में कहा था – ‘राष्ट्रभक्त नहीं, डरपोक’

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार (1 जुलाई, 2024) को पर्यावरण एक्टिविस्ट पाटकर को 5 महीने जेल की सज़ा सुनाई है। ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के नाम पर जनता को भड़काने के लिए कुख्यात रहीं मेधा पाटकर के खिलाफ 2001 में दिल्ली के उप-राज्यपाल VK सक्सेना ने आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। अदालत ने कहा कि मेधा पाटकर की उम्र और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें अधिक सज़ा नहीं दी जा रही है।

हालाँकि, अगले 1 महीने तक ये सज़ा निलंबित रहेगी। इस दौरान वो ऊपरी अदालतों का रुख कर सकती हैं। साकेत कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने ने इसके अलावा विनय कुमार सक्सेना की छवि को नुकसान पहुँचाने की एवज में मेधा पाटकर को उन्हें 10 लाख रुपए भुगतान करने का भी आदेश दिया। 2001 में जब ये मामला आया था, तब VK सक्सेना अहमदाबाद स्थित NGO ‘नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज’ के अध्यक्ष थे।

25 नवंबर, 2000 को जारी किए गए एक प्रेसनोट की वजह से ये मामला शुरू हुआ था, जिसका शीर्षक था – ‘राष्ट्रभक्त का असली चेहरा’। इसमें मेधा पाटकर ने लिखा था, “हवाला लेनदेन से दुःखी VK सक्सेना मालेगाँव आए और NBA की तारीफ़ करते हुए 40,000 रुपए का चेक सौंपा। लोक समिति ने जल्दबाजी में इसकी रसीद भी भेज दी। जो ईमानदारी और रिकार्ड्स में चीजें रखने की नीति को दर्शाता है। लेकिन, चेक को कैश में तब्दील नहीं किया जा सका और ये बाउंस हो गया। जाँच में पता चला कि ऐसा कोई बैंक खाता मौजूद ही नहीं है।”

मेधा पाटकर ने इस प्रेस नोट में VK सक्सेना को डरपोक कहा था और लिखा था कि वो राष्ट्रभक्त नहीं हैं। उन्हें दोषी ठहराते हुए अदालत ने कहा कि उनके कृत्य जानबूझकर किया गया था और ये दुर्भावनापूर्ण था। जज ने कहा कि VK सिंह की छवि को धूमिल करने के लिए ऐसा किया गया, इससे उनकी साख को नुकसान पहुँचा है। मेधा पाटकर अपने दावों को लेकर कोर्ट में कोई भी साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहीं। मेधा पार्टनर ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो सिर्फ अपना काम कर रही थीं, किसी को बदनाम नहीं। उन्होंने कहा कि वो ऊपरी अदालत में जाएँगे, सत्य को पराजित नहीं किया जा सकता।

लात-घूँसे ही नहीं, तलवार और काँच की बोतल भी मारी: पुणे में दलित युवक के साथ चलती सड़क पर मारपीट, अफरीदी, एजाज समेत 4 पर केस दर्ज

महाराष्ट्र के पुणे में 26-27 जून 2024 को एक 19 वर्षीय दलित युवक पर हमला हुआ था। हमले का आरोप एजाज, अफरीदी, सादिक और उमेश भंडारी पर लगा था। इन सभी के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। हमले में लात-घूंसों के अलावा काँच की बोतलों और तलवार का प्रयोग किया गया था। घायल का इलाज अस्पताल में चल रहा है। ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस से अब तक हुई कार्रवाई जानने के लिए करनी चाही लेकिन कोई सम्पर्क नहीं हो पाया।

यह घटना पुणे शहर के थानाक्षेत्र बिबवेवाड़ी की है। 27 जून 2024 (गुरुवार) को यहाँ दलित समुदाय के एक पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि एक दिन पहले 26 जून की रात वो बाइक से किसी रिश्तेदार के घर जा रहा था। रास्ते में गंगधा इलाके में उसकी बाइक को ऑटो रिक्शा सवार आरोपितों ने रोका। इन सभी ने पहले पीड़ित को धमकियाँ दीं और बाद में जातिसूचक शब्द बोलने शुरू कर दिए। कुछ देर बाद आरोपितों के हाथों में काँच की बोलतें और तलवारें दिखने लगीं।

शिकायत के मुताबिक हमलावरों के नाम एजाज, अफरीदी, सादिक शेख और उमेश भंडारी हैं। इन्होंने पीड़ित को लात घूंसों के साथ तलवारों और काँच की बोतलों से मारा। पीड़ित को सिर से लेकर पैर पर घाव दिए गए। इसी के साथ पीड़ित की बाइक में ऑटो रिक्शा से टक्कर भी मारी गई। चारों में से अफरीदी नाम के हमलावर ने पीड़ित को धमकाते हुए कहा कि पीड़ित के भाई ने उसके खिलाफ पुलिस में झूठी शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी जान बचाने के लिए पीड़ित ने भागने की कोशिश की तो उसे दौड़ा कर पीटा गया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पीड़ित युवक की निर्ममता से काफी देर तक पिटाई के बाद आखिरकार हमलावर ऑटो से भाग निकले। जाते-जाते उन्होंने पीड़ित को जान से मारने की धमकियाँ भी दीं। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अफरीदी, एजाज, सादिक और उमेश को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR IPC (भारतीय दंड संहिता ) की धारा 307, 504, 341, 506, और 34 के साथ SC/ST एक्ट व महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के विभिन्न सेक्शनों के तहत दर्ज हुई है। अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने पुलिस को सम्पर्क किया तो फोन लग नहीं पाया। पुलिस का पक्ष आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

र॒क्षस॒: सं पि॑नष्टन… हिन्दुओं को हिंसक बताने वाले राहुल गाँधी, शिव का त्रिशूल अंधकासुर जैसों के शरीर में गाड़ने के लिए भी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद चल रहे पहले संसद सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने एक बार फिर से पूरे हिन्दू समाज को निशाना बनाया है। उन्होंने एक तरह से हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोगों को हिंसक बता दिया। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की इस कारस्तानी ने प्रधानमंत्री ने खुद उठ कर जवाब दिया। हिन्दू धर्म को लेकर राहुल गाँधी की घृणा अब छिपी हुई बात नहीं है। उन्होंने इससे पहले कहा था कि जो लोग मंदिर जाते हैं वो लड़कियाँ छेड़ते हैं।

आज उन्हीं राहुल गाँधी ने एक बार फिर से हिन्दू धर्म के प्रति अपनी घृणा का प्रदर्शन करते हुए संसद के नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ा दीं। उन्होंने संपूर्ण हिन्दू समाज को कलंकित करने के लिए भगवान शिव की तस्वीर का भी सहारा लिया। राहुल गाँधी ने आपत्तियों के बावजूद अपने कहे पर माफ़ी नहीं माँगी और इसे सही ठहराने के लिए भाजपा-RSS का नाम लेकर इन्हें भी हिंसक बताने लगे। साथ ही ‘अभय मुद्रा’ का भी मजाक बनाया। इस दौरान पीएम मोदी सदन में मौजूद थे।

राहुल गाँधी ने हिन्दू घृणा के लिए भगवान शिव का किया इस्तेमाल

संसद में राहुल गाँधी ने कहा, “ये देश अहिंसा का देश है, डर का देश नहीं है। हमारे सारे महापुरुषों ने अहिंसा की बात की, डर मिटाने की बात की – डरो मत, डराओ मत। शिवजी भी यही कहते हैं, अभयमुद्रा दिखाते हैं। अहिंसा की बात करते हैं। त्रिशूल को जमीन में गाड़ देते हैं। और जो लोग खुद को हिन्दू कहते हैं वो 24 घंटे हिंसा-हिंसा-हिंसा, नफरत-नफरत-नफरत, असत्य-असत्य-असत्य करते हैं। आप हिन्दू हो ही नहीं। हिन्दू धर्म में साफ़ लिखा है – सत्य के साथ खड़ा होना चाहिए, सत्य से पीछे नहीं हटना चाहिए, अहिंसा हमारा प्रतीक है।”

इस दौरान राहुल गाँधी लगातार ‘अभय मुद्रा’ के नाम पर अपनी हथेली दिखाते रहे, एक तरह से उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के चुनाव चिह्न को हिन्दू धर्म से जोड़ने की कोशिश की। भाजपा सांसदों ने इसका कड़ा विरोध किया, जिस पर राहुल गाँधी ने कहा कि तीर इनके दिल में जाकर लगा है ये इसीलिए चिल्ला रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्युत्तर में पूरे हिन्दू समाज को हिंसक कहना गंभीर विषय है। इस पर राहुल गाँधी ने कहा, “BJP को, आपको, RSS को, नरेंद्र मोदी पूरा हिन्दू समाज नहीं है, भाजपा-संघ पूरा हिन्दू समाज नहीं है। ये ठेका नहीं है BJP का।”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी कहा कि लोग शिव को भगवान मानते हैं, ऐसे में यहाँ उन्हें इस तरह से चित्रित करना ठीक नहीं है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से किसी की भावनाओं को ठेस न पहुँचाने के लिए कहा। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस दौरान नियमों का हवाला देकर कहा कि राहुल गाँधी लोकसभा अध्यक्ष की तरफ पीठ कर के खड़े हैं जो नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने इस दौरान पूरे हिन्दू समाज पर आरोप लगाया गया है, जो नियम के हिसाब से गलत है।

इस दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी गुस्से में दिखे और स्पष्ट कहा कि शोर-शराबा कर के इतने बड़े वाकये को छिपाया नहीं जा सकता, नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि जो अपने-आप को हिन्दू कहते हैं वो हिंसा कहते हैं। उन्होंने राहुल गाँधी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि इस देश में करोड़ों लोग अपने-आप को गर्व से हिन्दू कहते हैं, क्या वो सभी हिंसक हैं? अमित शाह ने कहा कि सदन में संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा हिंसा की भावना को किसी धर्म के साथ जोड़ना ठीक नहीं है और इसे लेकर माफ़ी माँगनी चाहिए।

इस दौरान उन्होंने ‘अभय मुद्रा’ पर इस्लामी विद्वानों का मत लेने की सलाह दी, साथ ही कहा कि गुरु नानक की ‘अभय मुद्रा’ पर भी राहुल गाँधी SGPC का मत ले लें। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को अभय की बात करने का कोई अधिकार नहीं है, आपातकाल के दौरान इन्होंने लाखों लोगों को जेल में डाल कर पूरे देश को भयभीत किया। उन्होंने इस दौरान दिल्ली में 1984 सिख नरसंहार की भी याद दिलाई। राहुल गाँधी इस दौरान संसद में भगवान शिव की तस्वीर लहराने लगे।

राहुल गाँधी ने इस दौरान अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को खड़ा कराया और कहा कि अयोध्या ने भाजपा को संदेश भेजा है। अमित शाह ने इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से कहा कि उनके निर्देश के बावजूद भगवान की तस्वीर लहराई जा रही है, क्या कुछ लोगों पर नियम लागू नहीं होते? उन्होंने कहा कि सदन ऐसे नहीं चल सकता। राहुल गाँधी इसके बाद कहने लगे कि अयोध्या की जनता के दिल में नरेंद्र मोदी ने भय बिठा लिया – उनकी जमीन ले ली, उनके घर गिरा दिए, अयोध्या के गरीबों को मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में नहीं आने दिया।

भगवान शिव ने त्रिशूल सिर्फ दिखाने के लिए नहीं रखा है

राहुल गाँधी ने इस दौरान बड़ा झूठ बोला कि भगवान शिव अपने त्रिशूल का इस्तेमाल नहीं करते। जब शिव योग में लीन होते है, साधना में तन्मय होते हैं और ध्यानमग्न होते हैं – तब स्पष्ट है कि वो त्रिशूल का उपयोग नहीं करेंगे और वो एक तरफ रखा रहेगा। लेकिन, जब सृष्टि के लिए खतरा बनने वाले राक्षसों के संहार की बात आती है, तब वो अवश्य ही त्रिशूल का इस्तेमाल करते हैं। महादेव का त्रिशूल तो सृष्टि के प्रादुर्भाव, पोषण और संहार का प्रतीक है, सत्व, राजस और तमोगुण का प्रतीक है, भूत, वर्तमान और भविष्य का, भू, स्वर्ग और पाताल लोक का प्रतीक है।

जिस तरह राहुल गाँधी एक बार झूठ बोलते हैं, फिर कॉन्ग्रेस के सारे नेता इस झूठ को बार-बार दोहराते हैं और प्रोपेगंडा फैलाते हैं, ऐसे में हमें अंधक-असुर की कथा जाननी चाहिए। अंधक-असुर मार्कण्डेय पुराण के दुर्गा सप्तशती में वर्णित रक्तबीज के समान ही था। अंधकासुर के रक्त की एक बूँद जमीन पर गिरती थी तो उससे एक और अंधकासुर पैदा हो जाता था। तब शिव ने उसके वध के लिए अपने त्रिशूल का उपयोग किया था और उसके रक्त से पैदा होने वाला अंधकासुरों का भक्षण करने के लिए कई मातृकाओं का निर्माण किया – मस्त्य पुराण में ऐसी कथा है।

बहुत कम लोगों को ये पता होगा, लेकिन भगवान शिव ने त्रिशूल से भी अधिक अपने धनुष का उपयोग किया है। जब संपूर्ण सृष्टि पर त्रिपुरासुर नामक राक्षस कहर बरपा रहा था, तब महादेव ने धनुष से पशुपति-अस्त्र संधान कर उसका वध किया था। शिव के धनुष का नाम ‘पिनाक’ है, इसीलिए उन्हें ‘पिनाकी’ भी कहा गया। जब राक्षसों का आतंक होता है, तब युद्ध आवश्यक हो जाता है। बिना युद्ध के वो लोग शांत नहीं होते, जो राक्षस प्रवृत्ति के हैं।

और सिर्फ भगवान शिव ही क्यों, हनुमान जी के पास गदा है, श्रीहरि के पास सुदर्शन चक्र है, देवराज इंद्र के पास वज्र है, श्रीराम के पास धनुष है, माँ दुर्गा के पास तो सारे अस्त्र-शस्त्र हैं। शास्त्र की रक्षा भी तभी हो पटी है, जब आपके पास शास्त्र हों। वन में ऋषि-मुनियों की यज्ञ-तपस्या में विघ्न डालने वाले राक्षसों के सफाए के लिए विश्वामित्र श्रीराम को लेकर गए थे। पुण्यात्माओं की रक्षा के लिए शस्त्रधारियों का अस्तित्व आवश्यक है। शिव का त्रिशूल उनके बदल में नहीं रहेगा तो उनकी साधना में विघ्न डालने वाले भी वहाँ पहुँच जाएँगे।

हिंसा-हिंसा-हिंसा… फिर हिन्दू धर्म की गलत व्याख्या कर रहे राहुल गाँधी

राहुल गाँधी कहते है कि हिंसा हिन्दुओं का स्वभाव है। दूसरी बात वो ये कहते हैं कि हिन्दू धर्म में हिंसा के लिए मना किया गया है। वो दोनों ही मामलों में गलत हैं। हिन्दू धर्म में नियम-कानून तभी हैं, जब सामने वाला भी उन पर चल रहा हो। अब जो सीमा पर हमारे जवान खड़े हैं, उन पर पाकिस्तान की तरफ से गोलीबारी होगी तो हम अपने जवानों को अहिंसा का सन्देश नहीं देंगे। आतंकी गोलीबारी करते हुए घुसपैठ करेंगे तो उन्हें रोकने के लिए सेना को शस्त्र का इस्तेमाल करना होगा।

ये देश तभी सुरक्षित है, जब 50 लाख से भी अधिक भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के जवान अपने हाथों में शस्त्र लेकर तैनात हैं। तभी राहुल गाँधी भी बकैती कर पा रहे हैं और अहिंसा का सन्देश दे रहे हैं। जब किसी द्रौपदी को भरी सभा में अपमानित किया जाता है, तब महाभारत होता है। जब किसी सीता का बलात् अपहरण होता है, तब राम-रावण युद्ध होता है, जब पाकिस्तान घुसपैठ करता है तब कारगिल होता है, जब नक्सली नरसंहार करते हैं तब सुरक्षा बलों को लगाया जाता है।

यही हिन्दू धर्म है, अहिंसा के पालन के लिए आपको हिंसा के छत्र की ज़रूरत होती है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को ही ले लीजिए, क्या आप सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह या फिर चंद्रशेखर आज़ाद को हिंसक कहेंगे? कतई नहीं। क्या आप भारतीय सेना के जवानों को हिंसक कहेंगे? एकदम नहीं। क्या आप राम-कृष्ण को हिंसक कहेंगे – बिलकुल नहीं। राहुल गाँधी तो सिर्फ इन्हें ही नहीं, बल्कि संपूर्ण हिन्दू समाज को हिंसक बता रहे हैं। हिन्दू धर्म से उनकी कैसी घृणा है?

ये वही कॉन्ग्रेस है, जिसने UPA काल में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दिया था कि श्रीराम काल्पनिक हैं। राहुल गाँधी ने इसी तरह लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार अभियान के दौरान माँ दुर्गा का अपमान किया था। उन्होंने ‘शक्ति का विनाश करने’ की बात की थी। यही सपना महिषासुर, चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज ने भी देखा था। 2022 में राहुल गाँधी को तमिलनाडु में एक पादरी से ज्ञान लेते हुए भी देखा गया था, जिसमें उसने शक्ति सहित अन्य हिन्दू देवी-देवताओं को नकारते हुए जीसस क्राइस्ट को एकमात्र भगवान बताया था।

राहुल गाँधी के सोशल मीडिया हैंडलों से जब भी किसी हिन्दू पर्व-त्योहार की शुभकामना दी जाती है तो किसी भी देवी-देवता की तस्वीर नहीं लगाई जाती है। जैसे, रामनवमी पर तीर-धनुष और जन्माष्टमी पर बाँसुरी की तस्वीर डाल कर इतिश्री कर ली जाती है। आखिर इस घृणा का कारण क्या है? इतनी घृणा है तो वो चुनाव के समय मंदिरों का दौरा क्यों करते हैं? कॉन्ग्रेस की साथी पार्टी DMK के उदयनिधि स्टालिन कहते हैं कि सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया है, इसे खत्म करना होगा। सोचिए, इस तरह के लोग केंद्र की सत्ता में आ जाएँगे तो क्या होगा।

हिन्दू धर्म कट्टर नहीं है, ‘अभय मुद्रा’ के लिए शस्त्र आवश्यक है

राहुल गाँधी को ये समझना चाहिए कि हिन्दू धर्म में अहिंसा या हिंसा का कोई कट्टर सिद्धांत नहीं है। रामायण में कथा है कि कैसे जब श्रीराम भी 3 दिन तक समुद्र से अनुनय-विनय कर रास्ता माँगते रहे लेकिन वो टस से मस नहीं हुआ। फिर उन्होंने धनुष पर बाण का संधान किया और इस तरह समुद्र तुरंत त्राहि-त्राहि कर प्रकट हुआ। आपके पास शक्ति नहीं है, शस्त्र नहीं है तो आप पुण्यकारी कार्यों में भी असमर्थ होंगे। ”राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की इन पंक्तियों को देखिए:

यानी, आपके अहिंसा वाले सिद्धांतों को कोई नहीं पूछेगा अगर उसके पीछे कोई शक्ति न हो, आपने अनुनय-विनय पर कोई नहीं पसीजेगा अगर आपमें जीत की शक्ति न हो। खासकर सामने राक्षस प्रवृत्ति के लोग हों तो ये सब मायने नहीं रखता। हम हिन्दुओं का प्राचीनतम ग्रन्थ ऋग्वेद है। उसमें भी मारुतों से प्रार्थना की गई है कि वो यज्ञ में बाधा बनने वाले राक्षसों को पीस डाले, इंद्र से निवेदन किया गया है कि वो वज्र से राक्षसों को नष्ट करें। क्या राहुल गाँधी अब ऋग्वेद का भी पुनर्लेखन कराएँगे वामपंथी इतिहासकारों द्वारा? आइए, राहुल गाँधी को उदाहरण भी दे देते हैं:

इसका अर्थ है – “जो राक्षस कुत्तों के समान झपटते हैं एवं जो अहिंसनीय इंद्र की हिंसा करना चाहते हैं, इंद्र उन कपटियों को मारने के लिए अपना वज्र तेज करते हैं। इंद्र उन राक्षसों के ऊपर अपना वज्र शीघ्र फेंकें।” यानी, ऋग्वेद भी सन्देश देता है कि न्यायशील जनों की रक्षा के लिए वज्र आवश्यक है। ऋग्वेद ‘र॒क्षस॒: सं पि॑नष्टन‘ का संदेश देता है, यानी राक्षसों के सर्वनाश का। अतः, राहुल गाँधी को समझना चाहिए कि त्रिशूल सिर्फ जमीन में गाड़ने के लिए नहीं है, अंधकासुर जैसों के वध के लिए भी है।

लक्ष्मी पुरी को ₹50 लाख दो, TOI और ट्विटर पर माफी माँगो: TMC सांसद साकेत गोखले को दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी पर अवैध कमाई से स्विट्जरलैंड में फ्लैट खरीदने का लगाया था आरोप

तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गोखले को आदेश दिया है कि वह केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी कि पत्नी और पूर्व IFS अफसर लक्ष्मी एम पुरी को ₹50 लाख का हर्जाना दें। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि गोखले को लक्ष्मी पुरी से ट्विटर और टाइम्स ऑफ़ इंडिया में लिखित रूप से माफी मांगनी होगी। कोर्ट ने यह निर्णय मानहानि के एक मुकदमे में दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस अनूप जैराम भम्भानी की बेंच ने कहा कि गोखले ने लक्ष्मी पुरी और उनके पति हरदीप सिंह पुरी पर हवा-हवाई आरोप लगाए थे। कोर्ट ने कहा कि उनके इन ट्वीट का परिणाम यह हुआ कि कुछ लोगों ने इसे सच समझ लिया। कोर्ट ने कहा कि गोखले के ट्वीट एकदम फर्जी और गलत मंशा वाले थे।

कोर्ट ने कहा, “इसलिए गोखले द्वारा बिना वेरीफाई किए ऐसे ट्वीट के माध्यम से अपमानजनक बाते लिखना अत्यंत गैरजिम्मेदाराना था। इससे ट्विटर पर गोखले के सभी फॉलोवर्स को लक्ष्मी पुरी के आर्थिक मामलों पर उन आरोपों की जानकारी मिली, जो कि बिलकुल असत्य है।”

कोर्ट ने कहा कि गोखले के ट्वीट काफी अपमानजनक थे और इससे लक्ष्मी पुरी की प्रतिष्ठा को काफी क्षति पहुँची। कोर्ट ने इस बात का उल्लेख किया कि पहले गोखले ने इस मामले में अपना बचाव करने के लिए वकील रखा और खुद भी आए, वहीं कुछ समय के बाद उन्होंने आना छोड़ दिया और उनका वकील भी इस मामले में को छोड़ दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि गोखले के उलट लक्ष्मी पुरी लगातार इस मामले में जोर लगाती रहीं, जो उनकी गंभीरता को दर्शाता है। कोर्ट ने गोखले को लक्ष्मी पुरी की प्रतिष्ठा को हुई क्षति के एवज में ₹50 लाख देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसी के साथ आदेश दिया कि गोखले अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से लक्ष्मी पुरी से माफी माँगे और उसे 6 महीने तक अकाउंट पर ही रखें। इसके साथ ही वह टाइम्स ऑफ़ इंडिया समाचार पत्र में एक सार्वजनिक माफी छपवाएँ।

गौरतलब है कि अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखे गए थ्रेड के माध्यम से साकेत गोखले ने लक्ष्मी पुरी और उनके पति हरदीप सिंह पुरी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। गोखले ने आरोप लगाया था कि पुरी ने स्विटजरलैंड में 2.5 मिलियन डॉलर (लगभग ₹18.6 करोड़ ) की कीमत का एक बंगला खरीदा है।

साथ ही गोखले ने यह भी दावा किया कि इस बंगले की कीमत अदा करने के लिए पुरी दंपति के पास वैध आय के स्तोत्र नहीं हैं। इसके बाद लक्ष्मी ने गोखले को कानूनी नोटिस भेजा था और दिल्ली हाई कोर्ट में इस संबंध में याचिका भी दायर की थी। वहीं गोखले ने कहा था कि कुछ भी हो जाए लेकिन वह इस संबंध में अपना ट्वीट डिलीट नहीं करेंगे।

बाद में चुपके से साकेत गोखले ने अपना ट्वीट हटा लिया था। उनको इससे पहले भी कोर्ट ने काफी लताड़ लगाई थी। कोर्ट ने 2021 में हुई एक सुनवाई के दौरान कहा था कि कोई भी ऐरा गैर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया पर आरोप कैसे लगा सकता है। साकेत गोखले को इस पूरे विवाद के कुछ दिनों के बाद TMC ने राज्यसभा भेज दिया था।

हरदीप सिंह पुरी काम्बे समय तक भारत के राजनयिक रहे हैं और 2021 से ही मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं उनकी पत्नी लक्ष्मी पुरी भी राजनयिक रही हैं। लक्ष्मी पुरी संयुक्त राष्ट्र में सहायक महासचिव, संयुक्त राष्ट्र में उप कार्यकारी निदेशक, हंगरी में भारत की राजदूत और बोस्निया और हर्जेगोविना में भी कार्यभार संभाला है।

हिन्दू लड़की का अपहरण करने घर में घुसी मुस्लिम भीड़, मुरादाबाद प्रशासन ने 4 के घर पर बुलडोजर चलवाया: मुठभेड़ के बाद महफूज और भूरे खां को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में 26-27 जून 2024 की रात मुस्लिम नाम के युवक ने अपने अब्बा नन्हे और रिश्तेदार आले हसन और सुलेमान सहित कुछ अन्य और लोगों के साथ हिन्दू परिवार पर हमला किया था। हमलावरों ने इस दौरान गोलियाँ चलाईं थीं और छुरेबाजी की थी। हमलावर हिन्दू परिवार की लड़की का अपहरण करना चाहते थे। इस हमले में पीड़ित परिवार की एक महिला सहित 2 पुरुष घायल हो गए थे। जाँच के बाद इस घटना में शामिल महफूज, भूरे खां, युसूफ और मुस्लिम के घर अवैध तौर पर बने पाए गए। प्रशासन ने इन चारों आरोपितों के घरों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया है। इसी के साथ रविवार (30 जून 2024) को महफूज और भूरे खाँ को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह मामला मुरादाबाद के थानाक्षेत्र मूंढापांडे का है। 26-27 को घटित घटना के बाद पुलिस ने सभी आरोपितों की सम्पत्तियों की जाँच करवाई। जाँच में मुस्लिम, युसूफ, महफूज और भूरे खां के मकान अवैध तौर पर नियमों के विरुद्ध बने पाए गए। इसी क्रम में रविवार (30 जून) को भी राजस्व विभाग और प्रशासन की टीमें नामजद आरोपितों महफूज, युसूफ और भूरे खाँ के घरों पर पहुँची। महफूज रामपुर जिले के गाँव पैरवा का निवासी है, भूरे खाँ मुरादाबाद के थाँवला जबकि युसूफ मुरादाबाद के गाँव मुड़िया घोसियाना में रहता है।

प्रशासन ने इन तीनों के मकानों पर भी बुलडोजर चलवा दिया। प्रशासन की कार्रवाई के वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन आरोपितों के अन्य आपराधिक करतूतों की जाँच जारी है। इससे पहले 28 जून (रविवार) को प्रशासन ने मुख्य आरोपित मुस्लिम के मकान को ध्वस्त किया था। यह मकान मुरादाबाद के गाँव समदी शिवपुरी में बना हुआ था। इस मौके पर पुलिस प्रशसन के साथ राजस्व विभाग की टीम भी मौजूद रही। मुस्लिम का अब्बा नन्हे भी इस केस में नामजद आरोपित है। फ़िलहाल दोनों फरार चल रहे हैं।

पुलिस पर भी चलाई गोलियाँ

वहीं मुरादाबाद पुलिस ने 26-27 जून की घटना में शामिल 2 आरोपितों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार भी कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम महफूज और भूरे खां हैं। 30 जून (रविवार) को मुरादाबाद की मूंढापांडे पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार 2 संदिग्ध व्यक्ति आते दिखे। जब इन्हें रुकने का इशारा हुआ तो दोनों संदिग्ध बाइक मोड़ कर भागने लगे। शक होने पर पुलिस ने दोनों का पीछा किया। आखिरकार पास के ही एक जंगल में दोनों संदिग्धों को चारों तरफ से घेर लिया गया।

पुलिस ने दोनों को सरेंडर करने के लिए कहा। खुद को घिरता देखकर दोनों संदिग्धों ने पुलिस पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोलियाँ चलाईं। जवाबी कार्रवाई में चली गोली से एक संदिग्ध घायल हो गया। साथी को घायल देख कर दूसरा संग्दिघ भागने लगा जिसे दौड़ाकर पकड़ लिया गया। घायल व्यक्ति की पहचान महफूज के तौर पर हुई। महफूज के साथ गिरफ्तार दूसरे संदिग्ध का नाम भूरे खाँ है। इनकी गोलीबारी में पुलिस का एक हेड कांस्टेबल भी घायल हुआ है।

महजफूज और भूरे खाँ 26-27 जून को हिन्दू परिवार पर हुए जानलेवा हमले में शामिल बताए जा रहे हैं। तलाशी में इन दोनों के पास से 2 तमंचा, 3 जिन्दा कारतूस और 3 खोखा कारतूस बरामद हुए हैं। घायल हेड कांस्टेबल और आरोपित महफूज को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस घटना में फरार अन्य आरोपितों की तलाश के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रहीं हैं। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

क्या था पूरा मामला

बताते चलें कि मुरादाबाद जिले के थानाक्षेत्र मूंढापांडे की रहने वाली एक लड़की की शादी संभल में हुई थी। आरोप है कि 7 मार्च 2024 को लड़की के मायके वाले गाँव का रहने वाला ‘मुस्लिम’ उसकी ससुराल पहुँचा। यहाँ से वो पीड़िता को अपने साथ बहला-फुसला कर भगा ले गया था। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई थी, तब 1 महीने की मशक्क्त के बाद पुलिस ने पीड़िता को तो बरामद कर लिया था लेकिन किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी, तब से पीड़िता अपने मायके में रह रही थी।

26-27 जून की रात को मुस्लिम अपने कुछ साथियों के साथ पीड़िता के घर में घुस गया था। उसने पीड़िता का अपहरण करने का प्रयास किया। जब लड़की के माता-पिता व भाई ने ऐसा न करने के लिए कहा तो उन पर गोलियों की बौछार कर दी गई। साथ में चाकूबाजी भी हुई। घर वालों के प्रतिरोध के चलते अंत में हमलावर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए और जान से मार डालने की धमकी देते हुए फरार हो गए थे। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, तब पुलिस ने यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 458, 147, 148, 149, 307, 363, 366, 511 और 506 के तहत दर्ज किया था।

ब्राह्मणों के खिलाफ जहर, अब फिलिस्तीन के समर्थन में नारे, गड़बड़ रिसर्च: अशोका यूनिवर्सिटी बन चुका है वामपंथियों-वोक का अड्डा

हरियाणा के सोनीपत में स्थित अशोका यूनिवर्सिटी में आयोजित दीक्षांत समारोह में फिलिस्तीन के समर्थन में तख्तियाँ दिखाई गईं। फिलिस्तीन के समर्थन में तख्तियाँ दिखाने वाले अशोका के छात्र थे। तख्तियाँ दिखाने का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में यह सभी छात्र अपने सर के ऊपर तख्तियाँ रख कर ले जा रहे हैं।

यह आयोजन 24 मई, 2024 को किया गया था। इस आयोजन से पहले अशोका यूनिवर्सिटी का छात्र संघ AUSG भारत और इजरायल सम्बन्धों को खत्म करने की माँग कर रहा है। यह इजरायल का विरोध इसकी इस्लामी आतंकी संगठन से लड़ाई के कारण कर रहा है।

बताया गया कि है कि AUSG ने कॉलेज को ने एक याचिका भी दी थी जिसमें इस बात चिंता जताई थी कि अशोका यूनिवर्सिटी के किसी इजरायली शिक्षा संस्थान के साथ संबंध हैं। AUSG ने इजरायली शिक्षा संस्थान के साथ संबंध खत्म करने का दबाव बनाया था।

दरअसल, अशोका यूनिवर्सिटी और तेल अवीव यूनिवर्सिटी के बीच एक रिसर्च को लेकर साझेदारी है। इसके अंतर्गत इजरायल के अध्यापक अशोका में अपने व्याख्यान दे सकते हैं। अशोका यूनिवर्सिटी ने यह याचिका खारिज कर दी थी। उसका कहना था कि वह इस मामले के राजनीतिक पहलू में शामिल नहीं है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब अशोका यूनिवर्सिटी के छात्र गलत कारणों से चर्चा में हैं। मार्च, 2024 में अशोका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने यूनिवर्सिटी में हिंदू विरोधी नारे लगाए थे। इन छात्रों ने ‘ब्राह्मण-बनियावाद मुर्दाबाद’ के नारे लगाए थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ब्राह्मण और बनिया समुदाय को गाली देने के अलावा उन्होंने ‘जय भीम-जय मीम’ और ‘जय सावित्री-जय फातिमा’ नारे भी लगाए थे। उन्होंने अशोका में जाति जनगणना और आरक्षण की भी माँग की।

फरवरी 2024 में, AUSG ने गाजा में इजरायल की कार्रवाई की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया था। AUSG की माँग थी कि गाजा में कथित ‘नरसंहार’ बंद होना चाहिए। सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में 7 अक्टूबर को इजरायली क्षेत्र में हमास इस्लामी आतंकियों द्वारा किए गए भयानक आतंकी हमले को सामने घटनाओं की बताया गया था।

इस पोस्ट में 1,300 इजरायली और विदेशी नागरिकों की हत्या, महिलाओं के साथ रेप और बंधकों को गाजा ले जाने का कोई जिक्र नहीं था। इस पोस्ट में इस्लामी आतंकी संगठन हमास के सभी कुकर्मों को बहुत ही आसानी से दबा दिया गया।

अशोका यूनिवर्सिटी के ना केवल छात्रों, बल्कि प्रोफेसरों तक को भी उनके उल्टे-सीधे रिसर्च के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। अगस्त 2023 में, प्रोफेसर सब्यसाची दास के एक रिसर्च पेपर में दावा किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव में गड़बड़ी की है। इसे कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने बढ़ावा दिया था और सोशल मीडिया पर वायरल किया था।

यह रिसर्च काफी गड़बड़ थी, इसमें कई खामियाँ थी। दास ने इसके बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जहाँ एक ओर दास ने अपने गड़बड़ काम के लिए इस्तीफ़ा दिया था वहीं AUSG ने उनका समर्थन किया था। AUSG ने इसे मॉडर्न बताया था।

नवंबर 2021 में, अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर नीलांजन इरकर ने झूठा दावा किया कि राष्ट्रपति भवन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तस्वीर बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी की है। उन्होंने भाजपा की आलोचना के बहाने भगवान राम का मज़ाक उड़ाने के लिए इस कहानी का इस्तेमाल किया था।

अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर के बाद में डिलीट किए गए ट्वीट में लिखा, “बिल्कुल आश्चर्यजनक! यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं हैं, यह एक फिल्म में नेताजी की भूमिका निभा रहे प्रसिद्ध बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी की तस्वीर है।”

यदि वह यहीं तक रुकते तो यह झूठ ही होता। इसके आगे अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ने कहा, “और यह नेताजी के एक कार्यक्रम में ‘जय श्री राम’ चिल्लाए जाने के बाद हुआ। स्वतंत्रता-युग के नेताओं के राजनीतिक इस्तेमाल का दिवालियापन।”

हाल ही में फिलिस्तीन की तख्तियों का दिखाया जाना, हिन्दुओं के खिलाफ नारे, फर्जी रिसर्च को समर्थन देना हो या फिर इजरायल-हमास विवाद जैसे मुद्दों पर सही संवाद के प्रति संवाद के प्रति घोर उपेक्षा, अशोका यूनिवर्सिटी में वोक संस्कृति की ओर खतरनाक बदलाव का संकेत है। इस संस्थान की एक वर्ष की स्नातक की फीस लगभग ₹10 लाख है।