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जज, ज्यूरी और जल्लाद… सब कुछ खुद बन जाता है ताजेमुल: जानिए बंगाल के तालिबानी को क्यों कहते हैं JCB, पीड़ित महिला बोलीं- मेरी मर्जी के बिना वीडियो बनाया

पश्चिम बंगाल में महिला का सरेआम उत्पीड़न करने वाला ताजेमुल हक इस समय सुर्खियों में है। उसकी गिरफ्तारी के बाद जहाँ उसकी कुछ अन्य वीडियो सामने आ रही हैं तो वहीं ये भी सवाल हो रहा है कि आखिर उसे ‘जेसीबी’ जैसे नाम से क्यों बुलाया जाता है, ये तो मशीन का नाम है जबकि ताजेमुल एक व्यक्ति है। इसके अलावा इस बीच उस महिला का भी बयान आया है जिसे ताजेमुल ने पीटा था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक ताजेमुल को उसके काम करने के तरीके के कारण ‘जेसीबी’ कहा जाता है। एक रिपोर्ट में स्थानीयो से बात करने के बताया गया कि कि चूँकि ताजेमुल का एक्शन एकदम जेसीबी की तरह ही काम करता है इसलिए उसे लोग जेसीबी कहने लगे। स्थानीय ताजेमुल के अत्याचार को लेकर कई कहानियाँ भी सुनाते हैं।

बता दें कि ताजेमुल की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की वीडियो आ रही हैं। एक वीडियो में ताजेमुल को महिला और उसके साथ एक व्यक्ति को हाथ-पाँव बाँधकर परेड करवाकर पीटते हुए दिखाया गया है।

इस वीडियो को भारतीय जनता पार्टी नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी एक वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा, “सड़क पर न्याय का एपिसोड 2, जिसमेंटी एमसी नेता तजमुल उर्फ JCB जज, ज्यूरी और जल्लाद है…।” वहीं सीपीआईएम नेता मोहम्मद सलीम ने भी इस वीडियो को शेयर किया है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे जेसीबी ऐसे अपराध खुलेआम करता था।

मालूम हो कि एक तरफ ताजेमुल की नई वीडियो सामने आने के बाद सवाल हो रहे हैं कि आखिर उसने ऐसे काम और कितने लोगों के साथ किए होंगे तो वहीं जिस महिला की पिटाई की वीडियो वायरल होने के बाद वो गिरफ्तार हुआ है उस महिला का बयान भी मीडिया में आया है। महिला ने अपने साथ हुई ज्यादती पर बोलने की बजाय उस शख्स पर नाराजगी जताई है जिसने उसकी वीडियो बनाई थी और जिसकी वजह से ताजेमुल गिरफ्तार हो पाया।

महिला ने कहा– “मुझे नहीं पता कि आखिर किसने मेरी वीडियो ब मैंने इस संबंध में थाने में शिकायत दर्ज करवाई है जिसने भी मेरी मर्जी के बगैर उस वीडियो को वायरल किया। मैं पुलिस से अपील करती हूँ कि उसे उचित सजा मिले। मेरा पुलिस में पूरा विश्वास है।”

बता दें कि ताजेमुल का मुद्दा सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के गर्माया। इस वीडियो में वो महिला और उसके प्रेमी को बाँस के डंडे से पीटते हुए ताजेमुल दिखा था। वहीं उसका बचाव करते हुए चोपरा के विधायक हमीदुल रहमान ने कहा था कि ‘मुस्लिम राष्ट्र’ के कुछ आचार-विचार होते हैं। ऐसे में सवाल पूछे जाने लगे थे कि चैतन्य महाप्रभु और रामकृष्ण परमहंस की धरती क्या अब ‘मुस्लिम राष्ट्र’ है? शरिया भारत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है, जहाँ मनमाने ढंग से भारत के संविधान और कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

‘संपूर्ण जैव जगत में ईश्वर को देखता है हिन्दू, करता है विश्व के कल्याण की कामना’: जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर ने राहुल गाँधी को पढ़ाया धर्म का पाठ, कहा – माफ़ी माँगो

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए पूरे हिन्दू समाज को हिंसक बता दिया। इस दौरान उन्होंने हिन्दू देवी-देवताओं के ‘अभय मुद्रा’ को इस्लाम और कॉन्ग्रेस पार्टी के चुनाव चिह्न से जोड़ा। अब साधु-संतों ने उनके इस रवैये का विरोध शुरू कर दिया है। स्वामी अवेधशानंद गिरी महाराज ने उन्हें हिन्दू दर्शन का पाठ पढ़ाया है। राहुल गाँधी के भाषण के इन हिस्सों को संसद की कार्यवाही के रिकॉर्ड्स से भी हटा दिया गया है।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि हिन्दू संपूर्ण जैव जगत से प्रेम करता है, सबमें ईश्वर को देखता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू अहिंसक है, समन्वयवादी है और सहिष्णु है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दू समाज संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानता है और सबके कल्याण की कामना करता है। संत ने कहा कि निरंतर पूरे विश्व के सुख-सम्मान की कामना करना अपना धर्म समझता है। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को हिंसक और घृणा फैलाने वाला कहना ठीक नहीं है।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा, “इस प्रकार की बातें कह कर आप पूरे समाज को लांछित और अपमानित कर रहे हैं। हिन्दू समाज अत्यंत उदार है और वो सबका सम्मान करता है। वह सभी जातियों, पंथों, और धर्मों का सम्मान करता है। हमारे लिए सभी प्राणी आदरणीय हैं, हम सबमें ईश्वर को देखते हैं। राहुल गाँधी द्वारा हिन्दुओं को हिंसक और मिथ्या बोलने वाला बताना गलत है, मैं इसकी निंदा करता हूँ, भर्त्सना करता हूँ। राहुल गाँधी विपक्ष के नेता हैं, इसीलिए उन्हें इन शब्दों को वापस लेना चाहिए।”

बता दें कि स्वामी अवधेशानंद गिरी न सिर्फ संत, बल्कि लेखक एवं दार्शनिक भी हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित खुर्जा में जन्मे अवधेशानंद गिरी ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में संन्यास ले लिया था। फ़िलहाल वो दशनामी संप्रदाय के जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर हैं। वो पिछले 26 वर्षों से इस पद पर हैं। साथ ही वो ‘अमरनाथ श्राइन बोर्ड’ के सदस्य भी हैं। वो हरिद्वार स्थित ‘समन्वय सेवा ट्रस्ट’ का संचालन करते हैं, जो वहाँ स्थित ‘भारत माता मंदिर’ का भी प्रबंधन करता है।

संयुक्त राष्ट्र में भी उद्बोधन दे चुके अवधेशानंद गिरी ने अब राहुल गाँधी के बयान का जिक्र करते हुए कहा है कि इससे हिन्दू समाज को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने अत्यंत कोमल और करुणामयी संवेदनाओं पर आधारित मान्यताओं पर प्रहार किया है, जिसके लिए उन्हें क्षमा माँगनी चाहिए। राहुल गाँधी ने संसद में भगवान शिव की भी तस्वीर लहराई और दावा किया कि वो त्रिशूल का उपयोग नहीं करते, उसे जमीन में गाड़ देते हैं। ‘अभय मुद्रा’ को इस्लाम से जोड़ने के कारण इस्लामी विद्वान भी उनसे नाराज़ हैं।

नग्न हो सरेआम एक-दूसरे पर किया पेशाब… ‘प्राइड परेड’ के नाम पर टोरंटो से लेकर सैन फ्रांसिस्को तक दिखाई नंगई, बच्चों को भी प्राइवेट पार्ट दिखाया

बीते वीकेंड विश्व के कई देशों में जगह-जगह LGBTQIA+ समुदाय द्वारा निकाली गई ‘प्राइड परेड’ देखने को मिली। हर जगह इस परेड में शामिल लोगों का अलग अंदाज देखने को मिला। कहीं लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहन इस परेड में अपनी खुशी जाहिर करते दिखाई दिए तो कहीं नंगे होकर दूसरों के साथ चलते दिखे। कुछ जगह इन परेडों में अश्लीलता की हद भी पार की गई। वहीं कई जगह प्राइड परेड में मारपीट की घटना हो गई। सबकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

पहले सैन फ्रांसिसको की प्राइड परेड के हाल देखिए। यहाँ पर लोग इस परेड में खुलेआम ओरल सेक्स करते दिखे। इसके अलावा एक दूसरे से अपने ऊपर पेशाब करवाते भी नजर आए। सामने आए वीडियो में देख सकते हैं कि एक शख्स प्लास्टिक टब को पूल बनाकर लेटा है और महिला उसके ऊपर खुले में पेशाब कर रही है। वहीं दूसरा व्यक्ति अपने प्राइवेट पार्ट पर काले रंग का कपड़ा बाँधकर खड़ा है।

अजीब बात ये है कि वैसे तो इस परेड को 18 से ऊपर उम्र के लोगों के लिए रखा गया था लेकिन इसमें शामिल होने वालों से कोई आईडी कार्ड नहीं लिया जा रहा था। अगली वीडियो में एक व्यक्ति को दूसरे के प्राइवेट पार्ट्स पर मारते हुए देखा जा सकता है। वहीं एक अन्य वीडियो में बड़े लोगों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी रास्ते से गुजरते दिख रहे हैं।

सामने आई एक वीडियो में एक पत्रकार नंगे खड़े लोगों से सवाल पूछ रहा है कि क्या ये सब करना उचित है। ऐसे में परेड में शामिल लोग उसे कह रहे हैं कि इसमें कुछ गलत नहीं है। यहाँ सब कर रहे हैं। उनका मकसद तो सिर्फ अपनी अपनी पहचान पर गर्व करना है।

बता दें कि परेड की वीडियो आने के बाद सैन फ्रांसिसको पुलिस से सवाल हो रहे हैं। वहीं कनाडा के टोरंटो में भी ऐसा नजारा देखने को मिला है जिसे देख लोग हैरान हैं। यहाँ लोग शरीर पर बिन एक भी कपड़ा पहने सड़कों पर घूमते दिखे। एक दूसरे के प्राइवेट पार्ट्स पर मारते दिखे। वीडियो को शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि इस परेड को आयोजित करने से पहले कहा गया था कि चर्च स्ट्रीट स्कूल में परिवार आ सकते हैं। यहाँ चेहरों पर पेंटिंग होगी, स्टोरी सुनाई जाएगी और भी मजेदार काम होंगे… इसलिए लोग अपने बच्चों को भी लेकर आएँ, हालाँकि अब यहाँ क्या हो रहा है इसे आप देख सकते हैं।

इसके बाद बात करें तो न्यूयॉर्क में हुई प्राइड परेड की तो यहाँ से सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि परेड में महिलाओं ने एक दूसरे से मारपीट की। इसके अलावा यहाँ गोली भी चली और एक दूसरे के बाल भी नोचे गए। इस परेड की वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इसके अलावा खबरों की माने तो इस परेड में गोली चलने की घटना भी हुई। बाद में यहाँ खूब हुड़दंग हुआ।

दोस्त के साथ कार में थी 16 साल की छात्रा, गेट खोलते ही गुफरान ने काट दिया गला: मृतका ने ठुकरा दिया था प्रपोजल, कहा था- तुमसे मतलब नहीं रखना चाहती

मध्य प्रदेश के जबलपुर में गुफरान ने एक नाबालिग छात्रा की चाकू मार कर हत्या कर दी। गुफरान ने नाबालिग के गले में चाकू मारा, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। गुफरान, नाबालिग को दूसरे लड़के के साथ देख कर गुस्सा था, इसलिए उसने यह कदम उठाया। गुफरान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (1 जुलाई, 2024) को जबलपुर के नया मोहल्ला रिपटा निवासी नाबालिग छात्रा तमन्ना (16) अपने एक दोस्त के साथ गाड़ी से कहीं घूमने गई थी। नाबालिग छात्रा की आवाजाही को उसी के मोहल्ले का गुफरान (21) देख रहा था। वह उसकी हत्या करने का पहले ही मन बना चुका था।

नाबालिग जैसे ही घूम कर वापस आने के बाद ओमती घंटाघर इलाके में गाड़ी का दरवाजा खोल कर उतरी, गुफरान ने उसके गले में चाकू मार दिया। उसने नाबालिग पर चाकू से कई वार किए। इस कारण नाबालिग गंभीर रूप से घायल हो गई। छात्रा को अस्पताल ले जाया गया जहाँ से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

नाबालिग के साथ कार में मौजूद युवक भी इस हमले के बाद भाग निकला। वहीं हत्यारा गुफरान भी मौके पर मची भगदड़ का फायदा उठा कर भाग गया। बताया गया कि मृतका और आरोपित गुफरान के बीच पहले से जान पहचान थी। गुफरान कपड़े की एक दुकान पर काम करता है।

दोनों एक दूसरे को 1 वर्ष से जानते थे। नाबालिग ने इससे पहले गुफरान का प्रपोजल भी ठुकरा दिया था। नाबालिग ने उससे कहा था कि वह गुफरान से कोई संबंध नहीं रखना चाहती। इसके बाद नाबालिग एक और युवक के साथ आने जाने लगी थी। इस कारण से गुफरान कुपित था और उसने हत्या का यह फैसला लिया।

पुलिस ने इस घटना के बाद मामले में FIR दर्ज करके जाँच चालू कर दी है। घटनास्थल के आसपास के CCTV कैमरों से फुटेज भी निकलवाई गई है। पुलिस ने फरार गुफरान को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया है। जिस कार में नाबालिग बैठकर गई थी, उसे भी जब्त कर लिया गया है।

अग्निवीर पर राहुल गाँधी के झूठ की पोल बलिदानी के परिजनों ने खोली, सदन में गुमराह करने पर कॉन्ग्रेस नेता को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फटकारा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने हाल में अग्निवीर योजना पर सवाल खड़ा करते हुए तमाम तरह के दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि अग्निवीर केवल यूज एंड थ्रो वाले मजदूर होते हैं। उन्हें न तो शहीद का दर्जा मिलता है और न ही उन्हें कोई मुआवजा मिलता है। उनके इसी बयान के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को अग्निवीर योजना की सच्चाई बताई। उन्होंने राहुल गाँधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।

रक्षा मंत्री रानाथ सिंह ने राहुल गाँधी के बयान के बाद तत्काल सीट से खड़े होकर जवाब दिया। उन्होंने राहुल गाँधी के बयान पर आपत्ति जताते कहा, “राहुल गाँधी को गलत बयान देकर सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हमारी सीमाओं की रक्षा करते हुए या युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अग्निवीर के परिवार को एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।”

उन्होंने कहा, “मैं नेता प्रतिपक्ष से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करना चाहता हूँ कि कृपया वो संसद को गुमराह करने की कोशिश न करें। अग्निवीर योजना के संबंध में बहुत सारे लोगों से, 158 संस्थाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया गया, उनके सुझाव लिए गए, तब यह अग्निवीर योजना लाई गई है। बहुत सोच समझकर यह योजना लाई गई है। ऐसे में बिना अग्निवीर योजना के बारे में समझे। बिना उस संबंध में कोई पूरी जानकारी हासिल किए, इस तरीके से सदन को गुमराह करना, इसे कदापि उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

रक्षा मंत्री ने राहुल गाँधी की ऐसी हरकत के लिए लोकसभा अध्यक्ष से अपील की कि वह ऐसा झूठ फैलाने के लिए राहुल गाँधी को सदन से ही बाहर कर दें। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन झूठ बोलने की जगह नहीं। फैक्चुअल पोजिशन रखनी चाहिए अगर नेता प्रतिपक्ष अपने स्टेटमेंट का सत्यापन नहीं करते तो उन्हें माफी माँगनी चाहिए।

इसके अलावा अगर हम टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट देखें तो उससे पता चलता है कि राहुल गाँधी सदन में साफ झूठ बोलते देखे गए। यहाँ अग्रिवीर बलिदानी का परिवार बता रहा है कि उन्हें एक बार 50 लाख रुपए मिले, फिर दोबारा में 50 लाख रुपए मिले और महाराष्ट्र सरकार से भी 10 लाख रुपए भी मिले है। यानी कुल मिलाकर उन्हें अभी तक 1 करोड़ 10 लाख रुपए की सहायता सरकार से मिल चुकी है।

बता दें कि अग्निवीर योजना को बदनाम करने का काम शुरुआत से ही होता रहा है। अब सदन में भी इस पर झूठ फैलाया जा रहा है जबकि हकीकत तो यह है कि इस योजना के तहत सेना में शामिल अग्निवीरों को अगर वीरगति प्राप्त होती है तो उन्हें अंतिम विदाई दी जाती है। अग्निवीर की सेवा शर्तों के मुताबिक युद्ध में बलिदान होने पर परिवार वालों को इंश्योरेंस (नॉन कॉन्ट्रिब्यूटरी) के 48 लाख रुपए, अग्निवीर द्वारा जमा सेवा निधि (30 पर्सेंट) और इतना ही अमाउंट सरकार द्वारा दिया जाएगा। वहीं एक्स ग्रेशिया के तौर पर 44 लाख रुपए, बाकी बचे कार्यकाल की सैलरी (चार साल कुल कार्यकाल) दी जाएगी। साथ ही आर्म्ड फोर्सेस बैटल कैजुअल्टी फंड से 8 लाख रुपए और AWWA की तरफ से तुरंत मदद के तौर पर 30 हजार रुपए दिए जाएँगे। मालूम हो कि यही सेवाएँ सामान्य प्रत्येक सैनिक के लिए होती हैं। इसलिए राहुल गाँधी का सदन मेंकिया दावा गलत होता है।

तौसीफ की दुकान पर गई हिंदू बच्ची, दुकानदार के भांजे ने पैंट खींचकर की गंदी हरकत: पीड़ित पिता बोले- पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई, झारखंड के साहेबगंज का मामला

झारखंड के साहेबगंज जिले में एक पाँच वर्षीय बच्ची के साथ एक मुस्लिम युवक ने छेड़छाड़ की। डरी सहमी बच्ची ने अपने घर आकर पूरी बात बताई। पीड़िता के पिता ने इस मामले में FIR दर्ज करवाने के लिए शिकायत दी है।

पीड़िता के पिता द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, थाना राजमहल के गुणिहारी पंचायत की रहने वाली एक पाँच वर्षीय बालिका सोमवार (1 जुलाई, 2024) को पास की ही एक कबाड़ की दुकान पर गई थी। इस दुकान का संचालन तौसीफ शेख करता है। यहीं दुकान पर उसका भांजा भी मौजूद था। जब बच्ची ने उसे कबाड़ के पैसे माँगे तो उसने इससे मना कर दिया।

शिकायत के अनुसार, इसके बाद जब बच्ची वापस घर जाने लगी तो वह उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। कथित तौर पर उसने बच्ची की पेंट खींच कर गन्दी हरकत की कोशिश की। इससे बच्ची को गहरा आघात लगा। वह किसी तरह खुद को बचाते हुए अपने घर वापस आई और परिजनों को घटना बताई।

बच्ची के परिजनों ने इसके बाद तौसीफ और उसके भांजे के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पुलिस के पास शिकायत की है। बच्ची के पिता द्वारा दी गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। ऑपइंडिया से बात करते हुए बच्ची के पिता ने बताया कि अभी तक इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। वह लगातार इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।

बच्ची की माँ ने बताया, “मेरी बेटी तौसीफ के पास कबाड़ के बाकी ₹25 रुपए लेने के लिए गई थी। इसके बाद तौसीफ के भांजे ने बच्ची की पैंट खोल दी। उसने मुझे घर आकर पूरी घटना बताई। इसके बाद हमने शिकायत की।”

ऑपइंडिया ने इस संदर्भ में राजमहल थाने समेत साहेबगंज जिले के पुलिस अधिकारियों से सम्पर्क करने प्रयास किया है। हालाँकि, खबर लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया है। मामले में नई जानकारी मिलने पर खबर अपडेट कर दी जाएगी।

खेल क्रिकेट का, झगड़ा पार्किंग का… वामपंथी मीडिया ने हिन्दू-मुस्लिम का दिया रंग: पुलिस ने दावे किए खारिज, झगड़े में युवक की मौत

हाल ही में गुजरात के आणंद जिले में हुए एक पार्किंग विवाद में एक मुस्लिम युवक की जान चली गई। विवाद के पीछे क्रिकेट टूर्नामेंट में बाइक की पार्किंग को लेकर हुई बहस थी। पार्किंग के चक्कर में हुई इस घटना को द वायर, मकतूब मीडिया, कश्मीरियत और क्विंट जैसी वामपंथी मीडिया ने हिन्दू-मुस्लिम विवाद के रूप में पेश किया। इन्होंने इस हत्या के मामले में हिन्दू-मुस्लिम विवाद पैदा करने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया है और साथ ही इन वामपंथी मीडिया के दावों को नकार दिया है।

यह घटना 22 जून, 2024 को हुई थी। इसमें मरने वाले युवक का नाम सलमान वोहरा था और वह 23 वर्ष का था। वह आणंद के चिखोदरा में देर शाम आयोजित एक क्रिकेट टूर्नामेंट देखने पहुँचा था, जहाँ यह विवाद हुआ। यहाँ सलमान के साथी युवक इमरोज अब्दुल रहीम का घटना के आरोपित से बाइक पार्किंग को लेकर विवाद हो गया।

थोड़ी ही देर में इस विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया और दोनों के बीच लात घूंसे चलने लगे। इसी बीच सलमान वोहरा ने इमरोज की तरफ से इस लड़ाई में बीच बचाव करने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद आरोपितों ने सलमान पर क्रिकेट बैट और धारदार हथियारों से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सलमान को अस्पताल ले जाया गया जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इस मामले में इमरोज ने पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज करवाई है। इमरोज़ की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पहले इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 2 को बाद में पुलिस ने पकड़ा। 2 आरोपित अब भी फरार हैं।

पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। गिरफ्तर सभी आरोपितों को पुलिस ने कोर्ट के सामने पेश किया हिया, जहाँ से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया। इस मामले में, पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धारा IPC की धारा 143, 147, 148, 149, 302, 324, 323 और 504 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पार्किंग विवाद को हिन्दू-मुस्लिम विवाद बताने लगा वामपंथी मीडिया

इस घटना के विषय में वामपंथी मीडिया पोर्टल्स वायर, द क्विंट, मकतूब मीडिया, कश्मीरियत ने खूब झूठ फैलाया। इन्होने इस पूरी घटना को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया।

इन मीडिया पोर्टल्स ने दावा किया कि घटना से पहले हिंदुत्व समर्थक मुसलमानों पर नाराज थे क्योंकि वह अच्छा खेल रहे थे और इसीलिए उन्होंने एक मुस्लिम लड़के को मार डाला। इन मीडिया पोर्टल्स ने दावा किया कि हिंदू भीड़ में इकट्ठा हुए थे और मैच के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे।

मीडिया के दावे फर्जी: डिप्टी एसपी

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में पूरी सच्चाई जानने की कोशिश की। ऑपइंडिया ने आणंद के DSP जयेश पांचाल से संपर्क किया। ऑपइंडिया ने DSP पंचाल से इस घटना के विषय में जानकारी माँगी। उन्होंने बताया, ”मीडिया जिस तरह के सांप्रदायिक एंगल के विषय में बात कर रहा है, वह पूरी तरह गलत है। घटना के बाद पुलिस लगातार जाँच कर रही है। हमने गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ की है, उन्होंने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है। घटना के दौरान मैदान में मौजूद लोगों के बयान भी लिए गए हैं। किसी ने अपने बयान में ऐसा कुछ नहीं कहा है।”

बातचीत के दौरान, उन्होंने आगे बताया कि खुद शिकायतकर्ता ने भी ऐसी कोई बात FIR में नहीं कही है। ऑपइंडिया ने जय श्री राम और हिन्दू भीड़ के दावों के विषय में भी पूछा। इस पर भी उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी जाँच में कोई भी ऐसी बात सामने नहीं आई है। उन्होंने साफ किया कि यह केवल बाइक पार्किंग को लेकर हुआ एक विवाद था, जो हिंसक हो गया और इसमें लड़के की मौत हो गई। इसके अलावा मीडिया में किए गए सारे दावे फर्जी हैं।

घटना में कोई साम्प्रादायिक एंगल नहीं: स्थानीय मुस्लिम नेता

डिप्टी एसपी से बातचीत के बाद ऑपइंडिया ने एक स्थानीय मुस्लिम नेता इस्माइल भाई से बात की। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया,”मैच के दौरान लगाए गए नारों का हत्या से कोई लेना -देना नहीं है। इस पूरी घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। जो हुआ है वह बहुत गलत है। मृतक की हाल ही में शादी हुई थी। हमलावरों ने उसे गुर्दे में मारा और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। हम सभी चाहते हैं कि जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिले”

जब ऑपइंडिया ने उनसे हत्या में साम्प्रादायिक एंगल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया, ”देखिए, घटना बहुत बुरी और गंभीर है। लेकिन इसमें कोई सांप्रदायिक तत्व नहीं है। कोण दिखाई नहीं देता है।” इस्माइल भाई से बात करने के बाद, ऑपइंडिया ने एक अन्य स्थानीय से बात भी की।

नाम न छापने की शर्त पर, उन्होंने बताया, ”दोनों पक्षों के लोग घटना के समय जमीन पर मौजूद थे। क्रिकेट मैच हमेशा यहाँ आयोजित किए जाते रहे हैं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। जो लोग कह रहे हैं कि यह दो समुदायों के बीच एक मामला है, वह पूरी तरह से गलत हैं। हर कोई यहाँ सद्भाव में रहता है। पूरा झगड़ा एक बाइक की पार्किंग को लेकर था। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार किया है और मामला अब अदालत में है। आशा है कि अदालत न्याय करेगी और आरोपितों को दण्डित करेगी।”

एक दिन हिंदू (बहुसंख्यक) हो जाएँगे अल्पसंख्यक: धर्मांतरण के खतरे से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किया आगाह, ग्रामीणों को ईसाई सभा में ले जाने वाले की जमानत खारिज की

देश में सामने आते धर्मांतरण के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि अगर इसी तरह से धर्मांतरण का खेल जारी रहा तो आने वाले समय में देश में बहुसंख्यक जनसंख्या अल्पसंख्यक हो जाएगी। कोर्ट में ये महत्वपूर्ण टिप्पणी जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने की है। उन्होंने कहा है कि जहाँ भी और जैसे भी भारतीय लोगों का धर्मांतरण करवाया जाता है उसे फौरन रोका जाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि अगर कि इस प्रक्रिया को चलते रहने दिया गया तो देश की बहुसंख्यक आबादी एक दिन अल्पसंख्यक रह जाएगी इसलिए ऐसी चीजों को रोकना बहुत ज्यादा जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आयोजन संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विरूद्ध है। यह अनुच्छेद किसी को भी धर्म मानने व पूजा करने व अपने धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। धर्म प्रचार की स्वतंत्रता किसी को धर्म परिवर्तन कराने की अनुमति नहीं देती।

गौरतलब है कि अदालत ने यह टिप्पणी कई मामले उनके संज्ञान में आने के बाद की, जिससे उन्हें पता चला कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य आर्थिक रूप से वंचित समूहों के लोगों का ईसाई धर्म में अवैध धर्मांतरण पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रहा है। इस दौरान उन्होंने कैलाश नामक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज की। कैलाश पर यूपी पुलिस ने आईपीसी की धारा 365 और यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेद अधिनियम, 2021 की धारा 3/5 (1) के तहत मामला दर्ज किया है। उस पर आरोप है कि वह अपने गाँव वालों को दिल्ली में एक ऐसे समारोह में ले गया था। उस पर आरोप था कि उसने लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका को अदा किया था।

बाद में कैलाश के विरुद्ध शिकायत एक महिला ने दी थी। महिला ने बताया था कि कैलाश उसे ये विश्वास दिलाकर वहाँ ले गया था कि उसका भाई जो मानसिक बीमारी से पीड़ित है वो ठीक हो जाएगा और एक हफ्ते में उसे उसके पैतृक गाँव वापस भेज दिया जाएगा। हालाँकि बाद में उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया गया। शिकायत में कैलाश पर आरोप था कि उसने ईसाई धर्म में कई लोगों को परिवर्तित कराया है।

वहीं जमानत माँगते हुए कैलाश के वकील ने कहा कि मामले में शिकायत करने वाली महिला ने ईसाई धर्म नहीं अपनाया था। लड़का सिर्फ अन्य लोगों के साथ ईसाई धर्म और कल्याण पर केंद्रित सभा में शामिल हुआ था। वकील ने कहा कि ये सब उसके मुअक्किल को फँसाने के लिए हो रहा है।

कोर्ट से यह भी कहा गया कि सभा का आयोजन सोनू पैस्टर ने किया था उसे तो पहले ही अदालत रिहा कर चुकी है। मगर अदालत ने आरोप गंभीर देखते हुए कैलाश को जमानत देने से साफ मना कर दिया। ऐसा करते समय अदालत ने जाँच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए पीड़ितों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखा जिसमें साफ कहा गया था कि आरोपित अन्य ग्रामीणों ऐसी सभा में ले जा रहा था जहाँ लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करवाया जा रहा था।

छात्रों के ललाट पर स्वागत का तिलक देख भड़के मुस्लिम अभिभावक, पुलिस चौकी पहुँच किया हंगामा: प्रिंसिपल को माँगनी पड़ी माफ़ी, करना पड़ा भविष्य में ऐसा न होने का वादा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक स्कूल के अंदर मुस्लिम छात्रों को तिलक लगाने को ले कर विवाद खड़ा हो गया है। मुस्लिम बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल पहुँच कर हंगामा किया। मामला पुलिस तक भी पहुँच गया। आखिरकार स्कूल के प्रिंसिपल को सफाई देने के साथ माफ़ी भी माँगनी पड़ी। उन्होंने कहा कि स्कूल का किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। घटना सोमवार (1 जुलाई 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना मुज़फ्फरनगर के थानाक्षेत्र जानसठ की है। यहाँ के गाँव कवाल में राजकीय इंटर कॉलेज है जिसमें सभी धर्म व मज़हब के बच्चे पढ़ते हैं। गर्मियों की छुट्टियाँ खत्म होने के बाद सोमवार (1 जुलाई) को कई छात्र स्कूल पहुँचे। इस दौरान प्रिंसिपल ने सभी छात्रों का स्वागत माथे पर तिलक लगा के करवाया। छुट्टी होने के बाद जब बच्चे अपने-अपने घरों को गए तो मुस्लिम छात्रों के अभिभावकों ने माथे पर तिलक लगने की वजह पूछी। बच्चों ने सारी बात बताई तो अभिभावक भड़क गए।

कई मुस्लिम अभिभावकों ने इस हरकत को अपनी मज़हबी भावनाएँ आहत करने वाली हरकत करार दे दिया। तमाम लोग मिल कर पुलिस चौकी कवाल पहुँच गए और प्रिंसिपल के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग करने लगे। प्रिंसिपल का नाम रणवीर सिंह है। पुलिस ने हालत देखते हुए सक्रियता बढ़ाई। नाराज लोगों को शाँत करवाने के बाद प्रिंसिपल को पुलिस चौकी बुलवाया गया। प्रिंसिपल ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने शासन के आदेश पर महीने भर की छुट्टी के बाद स्कूल लौटे छात्रों का तिलक लगा कर स्वागत किया था।

प्रिंसिपल की सफाई के बावजूद मुस्लिम छात्रों के अम्मी-अब्बा संतुष्ट नहीं हुए। वो कार्रवाई किए जाने की माँग पर अड़े रहे। आखिरकार प्रिंसिपल रणवीर सिंह ने भविष्य में मुस्लिम छात्रों को तिलक न लगाने का वादा किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद किसी की भी मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचना कतई नहीं था क्योंकि उनके लिए सभी छात्र एक समान हैं। काफी गहमागहमी के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर के मामले को शांत करवाया। बाद में सभी अपने-अपने घरों को लौट गए।

‘आम पर पेशाब कर के बेच रहा था मोहम्मद इस्लाम, वकीलों ने पकड़ा’: वायरल वीडियो में दावा – मेरठ के कचहरी की घटना

उत्तर प्रदेश के मेरठ का बता कर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को कुछ लोगों ने घेर रखा है। आरोप लगाया जा रहा है कि सड़क के किनारे आम बेच रहे व्यक्ति ने फलों पर पेशाब किया है। आरोपित का नाम मोहम्मद इस्लाम बताया जा रहा है। वीडियो में आरोपित लोगों से बार-बार माफ़ी माँग रहा है और वीडियो न बनाने की अपील करता दिख रहा। पुलिस की तरफ से अभी तक इस घटना की पुष्टि नहीं की गई है।

वायरल वीडियो लगभग 21 सेकेंड का है। रविवार (30 जून, 2024) को इसे अजीत सिंह राजपूत ने अपने फेसबुक पर शेयर किया है। इस वीडियो में एक वकील ने कहा, “देखो ये आदमी। इस से कभी भी कोई चीज न खरीदना।” वीडियो बनता देख आम बेच रहा व्यक्ति बाबू जी-बाबू जी कह कर वकील को रोकने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि, वकील ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और कहा, “बाबू जी क्या है? जब तू पेशाब कर रहा था तब सोचता।” भीड़ में अपील की जाती है कि कोई भी व्यक्ति उस से फल न खरीदे क्योंकि वो टॉयलेट कर के बेचता है।

अजीत सिंह राजपूत के अलावा इस वीडियो को कई अन्य मीडिया संस्थानों ने भी शेयर किया है। इसी के बीच में कुछ अन्य लोग ‘जाने दो-छोड़ो’ जैसी बातें कर रहे हैं। सड़क के किनारे काफी आम बिखरे पड़े हैं। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि आरोपित को वकीलों ने रंगे हाथ पकड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वीडियो पर पुलिस भी खुल कर बोलने को तैयार नहीं है। पुलिस के मुताबिक अभी तक मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मेरठ कचहरी थाना क्षेत्र सिविल लाइंस में अंतर्गत आती है। ऑपइंडिया वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।