Home Blog Page 829

लक्ष्मी पुरी को ₹50 लाख दो, TOI और ट्विटर पर माफी माँगो: TMC सांसद साकेत गोखले को दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी पर अवैध कमाई से स्विट्जरलैंड में फ्लैट खरीदने का लगाया था आरोप

तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गोखले को आदेश दिया है कि वह केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी कि पत्नी और पूर्व IFS अफसर लक्ष्मी एम पुरी को ₹50 लाख का हर्जाना दें। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि गोखले को लक्ष्मी पुरी से ट्विटर और टाइम्स ऑफ़ इंडिया में लिखित रूप से माफी मांगनी होगी। कोर्ट ने यह निर्णय मानहानि के एक मुकदमे में दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस अनूप जैराम भम्भानी की बेंच ने कहा कि गोखले ने लक्ष्मी पुरी और उनके पति हरदीप सिंह पुरी पर हवा-हवाई आरोप लगाए थे। कोर्ट ने कहा कि उनके इन ट्वीट का परिणाम यह हुआ कि कुछ लोगों ने इसे सच समझ लिया। कोर्ट ने कहा कि गोखले के ट्वीट एकदम फर्जी और गलत मंशा वाले थे।

कोर्ट ने कहा, “इसलिए गोखले द्वारा बिना वेरीफाई किए ऐसे ट्वीट के माध्यम से अपमानजनक बाते लिखना अत्यंत गैरजिम्मेदाराना था। इससे ट्विटर पर गोखले के सभी फॉलोवर्स को लक्ष्मी पुरी के आर्थिक मामलों पर उन आरोपों की जानकारी मिली, जो कि बिलकुल असत्य है।”

कोर्ट ने कहा कि गोखले के ट्वीट काफी अपमानजनक थे और इससे लक्ष्मी पुरी की प्रतिष्ठा को काफी क्षति पहुँची। कोर्ट ने इस बात का उल्लेख किया कि पहले गोखले ने इस मामले में अपना बचाव करने के लिए वकील रखा और खुद भी आए, वहीं कुछ समय के बाद उन्होंने आना छोड़ दिया और उनका वकील भी इस मामले में को छोड़ दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि गोखले के उलट लक्ष्मी पुरी लगातार इस मामले में जोर लगाती रहीं, जो उनकी गंभीरता को दर्शाता है। कोर्ट ने गोखले को लक्ष्मी पुरी की प्रतिष्ठा को हुई क्षति के एवज में ₹50 लाख देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसी के साथ आदेश दिया कि गोखले अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से लक्ष्मी पुरी से माफी माँगे और उसे 6 महीने तक अकाउंट पर ही रखें। इसके साथ ही वह टाइम्स ऑफ़ इंडिया समाचार पत्र में एक सार्वजनिक माफी छपवाएँ।

गौरतलब है कि अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखे गए थ्रेड के माध्यम से साकेत गोखले ने लक्ष्मी पुरी और उनके पति हरदीप सिंह पुरी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। गोखले ने आरोप लगाया था कि पुरी ने स्विटजरलैंड में 2.5 मिलियन डॉलर (लगभग ₹18.6 करोड़ ) की कीमत का एक बंगला खरीदा है।

साथ ही गोखले ने यह भी दावा किया कि इस बंगले की कीमत अदा करने के लिए पुरी दंपति के पास वैध आय के स्तोत्र नहीं हैं। इसके बाद लक्ष्मी ने गोखले को कानूनी नोटिस भेजा था और दिल्ली हाई कोर्ट में इस संबंध में याचिका भी दायर की थी। वहीं गोखले ने कहा था कि कुछ भी हो जाए लेकिन वह इस संबंध में अपना ट्वीट डिलीट नहीं करेंगे।

बाद में चुपके से साकेत गोखले ने अपना ट्वीट हटा लिया था। उनको इससे पहले भी कोर्ट ने काफी लताड़ लगाई थी। कोर्ट ने 2021 में हुई एक सुनवाई के दौरान कहा था कि कोई भी ऐरा गैर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया पर आरोप कैसे लगा सकता है। साकेत गोखले को इस पूरे विवाद के कुछ दिनों के बाद TMC ने राज्यसभा भेज दिया था।

हरदीप सिंह पुरी काम्बे समय तक भारत के राजनयिक रहे हैं और 2021 से ही मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं उनकी पत्नी लक्ष्मी पुरी भी राजनयिक रही हैं। लक्ष्मी पुरी संयुक्त राष्ट्र में सहायक महासचिव, संयुक्त राष्ट्र में उप कार्यकारी निदेशक, हंगरी में भारत की राजदूत और बोस्निया और हर्जेगोविना में भी कार्यभार संभाला है।

हिन्दू लड़की का अपहरण करने घर में घुसी मुस्लिम भीड़, मुरादाबाद प्रशासन ने 4 के घर पर बुलडोजर चलवाया: मुठभेड़ के बाद महफूज और भूरे खां को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में 26-27 जून 2024 की रात मुस्लिम नाम के युवक ने अपने अब्बा नन्हे और रिश्तेदार आले हसन और सुलेमान सहित कुछ अन्य और लोगों के साथ हिन्दू परिवार पर हमला किया था। हमलावरों ने इस दौरान गोलियाँ चलाईं थीं और छुरेबाजी की थी। हमलावर हिन्दू परिवार की लड़की का अपहरण करना चाहते थे। इस हमले में पीड़ित परिवार की एक महिला सहित 2 पुरुष घायल हो गए थे। जाँच के बाद इस घटना में शामिल महफूज, भूरे खां, युसूफ और मुस्लिम के घर अवैध तौर पर बने पाए गए। प्रशासन ने इन चारों आरोपितों के घरों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया है। इसी के साथ रविवार (30 जून 2024) को महफूज और भूरे खाँ को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह मामला मुरादाबाद के थानाक्षेत्र मूंढापांडे का है। 26-27 को घटित घटना के बाद पुलिस ने सभी आरोपितों की सम्पत्तियों की जाँच करवाई। जाँच में मुस्लिम, युसूफ, महफूज और भूरे खां के मकान अवैध तौर पर नियमों के विरुद्ध बने पाए गए। इसी क्रम में रविवार (30 जून) को भी राजस्व विभाग और प्रशासन की टीमें नामजद आरोपितों महफूज, युसूफ और भूरे खाँ के घरों पर पहुँची। महफूज रामपुर जिले के गाँव पैरवा का निवासी है, भूरे खाँ मुरादाबाद के थाँवला जबकि युसूफ मुरादाबाद के गाँव मुड़िया घोसियाना में रहता है।

प्रशासन ने इन तीनों के मकानों पर भी बुलडोजर चलवा दिया। प्रशासन की कार्रवाई के वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन आरोपितों के अन्य आपराधिक करतूतों की जाँच जारी है। इससे पहले 28 जून (रविवार) को प्रशासन ने मुख्य आरोपित मुस्लिम के मकान को ध्वस्त किया था। यह मकान मुरादाबाद के गाँव समदी शिवपुरी में बना हुआ था। इस मौके पर पुलिस प्रशसन के साथ राजस्व विभाग की टीम भी मौजूद रही। मुस्लिम का अब्बा नन्हे भी इस केस में नामजद आरोपित है। फ़िलहाल दोनों फरार चल रहे हैं।

पुलिस पर भी चलाई गोलियाँ

वहीं मुरादाबाद पुलिस ने 26-27 जून की घटना में शामिल 2 आरोपितों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार भी कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम महफूज और भूरे खां हैं। 30 जून (रविवार) को मुरादाबाद की मूंढापांडे पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार 2 संदिग्ध व्यक्ति आते दिखे। जब इन्हें रुकने का इशारा हुआ तो दोनों संदिग्ध बाइक मोड़ कर भागने लगे। शक होने पर पुलिस ने दोनों का पीछा किया। आखिरकार पास के ही एक जंगल में दोनों संदिग्धों को चारों तरफ से घेर लिया गया।

पुलिस ने दोनों को सरेंडर करने के लिए कहा। खुद को घिरता देखकर दोनों संदिग्धों ने पुलिस पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोलियाँ चलाईं। जवाबी कार्रवाई में चली गोली से एक संदिग्ध घायल हो गया। साथी को घायल देख कर दूसरा संग्दिघ भागने लगा जिसे दौड़ाकर पकड़ लिया गया। घायल व्यक्ति की पहचान महफूज के तौर पर हुई। महफूज के साथ गिरफ्तार दूसरे संदिग्ध का नाम भूरे खाँ है। इनकी गोलीबारी में पुलिस का एक हेड कांस्टेबल भी घायल हुआ है।

महजफूज और भूरे खाँ 26-27 जून को हिन्दू परिवार पर हुए जानलेवा हमले में शामिल बताए जा रहे हैं। तलाशी में इन दोनों के पास से 2 तमंचा, 3 जिन्दा कारतूस और 3 खोखा कारतूस बरामद हुए हैं। घायल हेड कांस्टेबल और आरोपित महफूज को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस घटना में फरार अन्य आरोपितों की तलाश के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रहीं हैं। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

क्या था पूरा मामला

बताते चलें कि मुरादाबाद जिले के थानाक्षेत्र मूंढापांडे की रहने वाली एक लड़की की शादी संभल में हुई थी। आरोप है कि 7 मार्च 2024 को लड़की के मायके वाले गाँव का रहने वाला ‘मुस्लिम’ उसकी ससुराल पहुँचा। यहाँ से वो पीड़िता को अपने साथ बहला-फुसला कर भगा ले गया था। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई थी, तब 1 महीने की मशक्क्त के बाद पुलिस ने पीड़िता को तो बरामद कर लिया था लेकिन किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी, तब से पीड़िता अपने मायके में रह रही थी।

26-27 जून की रात को मुस्लिम अपने कुछ साथियों के साथ पीड़िता के घर में घुस गया था। उसने पीड़िता का अपहरण करने का प्रयास किया। जब लड़की के माता-पिता व भाई ने ऐसा न करने के लिए कहा तो उन पर गोलियों की बौछार कर दी गई। साथ में चाकूबाजी भी हुई। घर वालों के प्रतिरोध के चलते अंत में हमलावर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए और जान से मार डालने की धमकी देते हुए फरार हो गए थे। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, तब पुलिस ने यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 458, 147, 148, 149, 307, 363, 366, 511 और 506 के तहत दर्ज किया था।

ब्राह्मणों के खिलाफ जहर, अब फिलिस्तीन के समर्थन में नारे, गड़बड़ रिसर्च: अशोका यूनिवर्सिटी बन चुका है वामपंथियों-वोक का अड्डा

हरियाणा के सोनीपत में स्थित अशोका यूनिवर्सिटी में आयोजित दीक्षांत समारोह में फिलिस्तीन के समर्थन में तख्तियाँ दिखाई गईं। फिलिस्तीन के समर्थन में तख्तियाँ दिखाने वाले अशोका के छात्र थे। तख्तियाँ दिखाने का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में यह सभी छात्र अपने सर के ऊपर तख्तियाँ रख कर ले जा रहे हैं।

यह आयोजन 24 मई, 2024 को किया गया था। इस आयोजन से पहले अशोका यूनिवर्सिटी का छात्र संघ AUSG भारत और इजरायल सम्बन्धों को खत्म करने की माँग कर रहा है। यह इजरायल का विरोध इसकी इस्लामी आतंकी संगठन से लड़ाई के कारण कर रहा है।

बताया गया कि है कि AUSG ने कॉलेज को ने एक याचिका भी दी थी जिसमें इस बात चिंता जताई थी कि अशोका यूनिवर्सिटी के किसी इजरायली शिक्षा संस्थान के साथ संबंध हैं। AUSG ने इजरायली शिक्षा संस्थान के साथ संबंध खत्म करने का दबाव बनाया था।

दरअसल, अशोका यूनिवर्सिटी और तेल अवीव यूनिवर्सिटी के बीच एक रिसर्च को लेकर साझेदारी है। इसके अंतर्गत इजरायल के अध्यापक अशोका में अपने व्याख्यान दे सकते हैं। अशोका यूनिवर्सिटी ने यह याचिका खारिज कर दी थी। उसका कहना था कि वह इस मामले के राजनीतिक पहलू में शामिल नहीं है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब अशोका यूनिवर्सिटी के छात्र गलत कारणों से चर्चा में हैं। मार्च, 2024 में अशोका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने यूनिवर्सिटी में हिंदू विरोधी नारे लगाए थे। इन छात्रों ने ‘ब्राह्मण-बनियावाद मुर्दाबाद’ के नारे लगाए थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ब्राह्मण और बनिया समुदाय को गाली देने के अलावा उन्होंने ‘जय भीम-जय मीम’ और ‘जय सावित्री-जय फातिमा’ नारे भी लगाए थे। उन्होंने अशोका में जाति जनगणना और आरक्षण की भी माँग की।

फरवरी 2024 में, AUSG ने गाजा में इजरायल की कार्रवाई की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया था। AUSG की माँग थी कि गाजा में कथित ‘नरसंहार’ बंद होना चाहिए। सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में 7 अक्टूबर को इजरायली क्षेत्र में हमास इस्लामी आतंकियों द्वारा किए गए भयानक आतंकी हमले को सामने घटनाओं की बताया गया था।

इस पोस्ट में 1,300 इजरायली और विदेशी नागरिकों की हत्या, महिलाओं के साथ रेप और बंधकों को गाजा ले जाने का कोई जिक्र नहीं था। इस पोस्ट में इस्लामी आतंकी संगठन हमास के सभी कुकर्मों को बहुत ही आसानी से दबा दिया गया।

अशोका यूनिवर्सिटी के ना केवल छात्रों, बल्कि प्रोफेसरों तक को भी उनके उल्टे-सीधे रिसर्च के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। अगस्त 2023 में, प्रोफेसर सब्यसाची दास के एक रिसर्च पेपर में दावा किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव में गड़बड़ी की है। इसे कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने बढ़ावा दिया था और सोशल मीडिया पर वायरल किया था।

यह रिसर्च काफी गड़बड़ थी, इसमें कई खामियाँ थी। दास ने इसके बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जहाँ एक ओर दास ने अपने गड़बड़ काम के लिए इस्तीफ़ा दिया था वहीं AUSG ने उनका समर्थन किया था। AUSG ने इसे मॉडर्न बताया था।

नवंबर 2021 में, अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर नीलांजन इरकर ने झूठा दावा किया कि राष्ट्रपति भवन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तस्वीर बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी की है। उन्होंने भाजपा की आलोचना के बहाने भगवान राम का मज़ाक उड़ाने के लिए इस कहानी का इस्तेमाल किया था।

अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर के बाद में डिलीट किए गए ट्वीट में लिखा, “बिल्कुल आश्चर्यजनक! यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं हैं, यह एक फिल्म में नेताजी की भूमिका निभा रहे प्रसिद्ध बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी की तस्वीर है।”

यदि वह यहीं तक रुकते तो यह झूठ ही होता। इसके आगे अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ने कहा, “और यह नेताजी के एक कार्यक्रम में ‘जय श्री राम’ चिल्लाए जाने के बाद हुआ। स्वतंत्रता-युग के नेताओं के राजनीतिक इस्तेमाल का दिवालियापन।”

हाल ही में फिलिस्तीन की तख्तियों का दिखाया जाना, हिन्दुओं के खिलाफ नारे, फर्जी रिसर्च को समर्थन देना हो या फिर इजरायल-हमास विवाद जैसे मुद्दों पर सही संवाद के प्रति संवाद के प्रति घोर उपेक्षा, अशोका यूनिवर्सिटी में वोक संस्कृति की ओर खतरनाक बदलाव का संकेत है। इस संस्थान की एक वर्ष की स्नातक की फीस लगभग ₹10 लाख है।

जिस हमले में गई 331 लोगों की जान, उसमें शामिल आतंकी को ‘श्रद्धांजलि’ देने जुट रहे खालिस्तानी: कनाडा की मेयर से मिल रहा पूरा सपोर्ट

कनाडा के कैलगरी में खालिस्तानी तत्व मिलकर आतंकी तलविंदर सिंह परमार और हरदीप सिंह निज्जर को समर्पित करते हुए बड़ा प्रोग्राम करने वाले हैं। ये जानकारी कनाडाई पत्रकार बेजिरहान मोच्चा ने अपनी रिपोर्ट के जरिए दी है। इस कार्यक्रम को खालिस्तानी आतंकी सगठन सिख फॉर जस्टिस और वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन द्वारा जारी किया जाएगा।

कनाडाई पत्रकार मोच्चा की रिपोर्ट में कैलगरी की मेयर प्रभजोत कौर ‘ज्योति’ गोंदेक के सबंध खालिस्तानी संगठनों से बताए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि इसी की वजह से कैलगरी खालिस्तानियों के प्रोग्राम के लिए सही जगह बन गई है। कार्यक्रम को कैलगरी के मार्टिंडेल में दशमेश सांस्कृति केंद्र में आयोजित किया जाएगा।

6 जुलाई को दशमेश गुरुद्वारा से होते हुए खालिस्तानियों का काफिला अलग-अलग जगहों पर जाएगा। मालूम हो कि इसी दिन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के भी कैलगरी आने की संभावना है। वह जॉर्ज चहल के तीसरा वार्षिक पैनकेक ब्रेकफास्ट कार्यक्रम में शामिल होने आ सकते हैं जो कि उस जेनेसिस सेंटर में है जो दशमेश गुरुद्वारे से कुछ दूरी पर है।

इससे पहले कनाडा का दशमेश गुरुद्वारा अक्सर खालिस्तानी आतंकवादियों की प्रशंसा करने वाले पोस्टर लगाने के लिए सुर्खियों में रहा है। वर्तमान में, इस गुरुद्वारे के बाहर खालिस्तानी आतंकवादी तलविंदर सिंह परमार और अन्य के लिए एक पोस्ट गुरुद्वारे के बाहर लगाया गया है।

इसमें खालिस्तानी रेफरेंडम लिखा है। साथ ही कई खालिस्तानियों को शहीद कहकर श्रद्धांजलि दी गई है। इसमें खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर, लखबीर सिंह रोडे, तलविंदर सिंह परमार, सुरेंद्र सिंह पन्नू, हरजिंदर सिंह और बरबीर सिंह खैरा को शहीद कहा गया है।

यहाँ बता दें कि परमार कनाडा के सबसे घातक आतंवादी हमले ‘कनिष्क एयर इंडिया’ बम विस्फोट के लिए जिम्मेदार था। इस हमले में 331 लोग मारे घए थे, जिसमें से अधिकतर कनाडाई ही थे। बावजूद इसके कनाडा के राजनेता अक्सर खालिस्तानी भावनाओं के समर्थक बने रहते हैं।

विश्व सिख संगठन एक बेहद ताकतवर खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठन है जिसका कनाडा सरकार के सभी विभागों से संबंध है। ये संगठन 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद अस्तित्व में आया था। भारत में इसका एक्स अकॉउंट बैन है। संगठन खुलेआम खालिस्तानियों को प्रोत्साहित करता है।

वहीं सिख फॉर जस्टिस भी एक खालिस्तानी आतंकी संगठन है जिसकी शुरुआत गुरपतवंत सिंह पन्नू ने की थी। पन्नू के लिए सब जानते हैं कि वो भारत विरोधी वीडियोज बनाता है। इसमें वह एक अलग सिख राष्ट्र की माँग करता है। इसके अलावा भारत की सरकारी इमारतों पर खालिस्तानी झंडे फहरवाने के लिए भी वो नकद पुरस्कार की घोषणाएँ कर चुका है।

नोट: इस रिपोर्ट को मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग द्वारा लिखा गया है। आप इसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

ममता बनर्जी के MLA के सीने में धधक रहा जो ‘मुस्लिम राष्ट्र’, वही हर ताजेमुल को तालिबानी बनाता है… मोपला से लेकर चोपरा तक वही कहानी

पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर स्थित चोपरा में एक महिला और एक पुरुष की सरेआम पिटाई की गई। वहाँ एक बड़ी भीड़ जमा दी, जब ‘त्वरित न्याय’ हो रहा था तब चारों तरफ से देख रही भीड़ इसके मजे ले रही थी। ताजेमुल नाम का ‘न्यायाधीश’ हाथ में डंडा लेकर ‘न्याय’ कर रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद देश भर में इसकी कितनी भी निंदा हुई हो, स्थानीय TMC विधायक हमीदुल रहमान ने ‘इस्लामी मुल्क के अचार-विचार’ का हवाला देते हुए इस घटना का बचाव किया और पीड़िता को ही ‘दुष्ट जानवर’ बता दिया।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस ने इस मामले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से रिपोर्ट तलब की है। उन्होने इसे एक बर्बर घटना करार दिया है। हिम्मत देखिए कि सत्ताधारी दल के विधायक को इस तक का भरोसा था कि उक्त महिला या उसके परिजन इस मामले में पुलिस तक नहीं जाएँगे, उन्होंने कह दिया कि सिर्फ मीडिया हल्ला मचा रहा है। इसका अर्थ है कि शरिया के अंतर्गत होने वाले इस न्याय से पीड़ित भी ‘संतुष्ट’ हैं, इसमें प्रशासन-न्यायपालिका को हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

शरिया के सामने सरकार-कानून की कोई हैसियत नहीं

इसका दूसरा मतलब ये भी समझिए कि शरिया के कारण सब कोई खौफ में रहें और मुस्लिमों के लिए भारत सरकार, यहाँ की पुलिस या अदालतें सब ‘बाहरी ताकतें’ हैं। ताजेमुल पहले भी इस तरह के ‘न्याय’ कर चुका है। वीडियो में देखा जा सकता है कि उसने हाथ में बाँस से बनी छड़ी ले रखी है। उक्त महिला और पुरुष प्रेम संबंध में थे, इसीलिए उन्हें ये ‘सज़ा’ दी गई। ताजेमुल हक़ को गिरफ्तार कर के इस्लामपुर में ACJM की अदालत में पेश किया गया।

सचमुच पीड़िता की तरफ से कोई मामला नहीं दर्ज कराया गया, वीडियो देश भर में वायरल होने के बाद पुलिस ने ही स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की। वैसे भी चुनावी हिंसा से पीड़ित भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों के साथ पुलिस क्या करती है, ये सबको पता है। उल्टे पीड़ित कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया जाता है, अतः उन्हें पलायन को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में इस्लामी ताकतों के खिलाफ FIR दर्ज कराने वालों को छोड़ दिया जाता, ये शायद ही संभव हो।

भाजपा भी कह रही है कि जंगलराज कैसा होता है, ये हम पश्चिम बंगाल में देख सकते हैं। पार्टी का कहना है कि ताजेमुल हक़ उर्फ़ JCB संविधान को टुकड़े-टुकड़े कर रहा है। ऐसे समय में जब कॉन्ग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन ने पूरा का पूरा चुनाव ही संविधान बचाने के नाम पर लड़ा हो, पश्चिम बंगाल में भारत के कानून को धता बता कर शरिया के तहत ‘सज़ा’ दिए जाने वाली घटना पर विपक्षी नेताओं की चुप्पी समझ में आती है। अगर वो कुछ बोलेंगे तो पता चल जाएगा कि कौन संविधान बदल रहा है।

सीरिया से लेकर तमिलनाडु तक, शरिया से शासन नई बात नहीं

ऐसा नहीं है कि शरिया अदालतों के उदाहरण हमारे पास नहीं हैं। हमने सीरिया में ISIS को देखा है कि वो कैसे अमेरिकी बंदियों को घुटने के बल बिठा कर उनका गला काट डालते हैं। हमने अफगानिस्तान में तालिबानियों को देखा है कि कैसे वो महिलाओं पर सरेआम कोड़े बरसाते हैं। हमने पाकिस्तान में देखा है कि कैसे ईशनिंदा के नाम पर किसी शख्स को ज़िंदा जला दिया जाता है। हमने बांग्लादेश में देखा है कैसे दुर्गा पूजा के पंडालों को ध्वस्त करते हुए भीड़ ‘काफिरों को सज़ा’ देने के लिए निकल पड़ती है।

और विदेश से उदाहरण क्यों लें? संविधान तो हमारे देश में भी बदला जा रहा है, शरिया चल रही है बहुत जगह। तमिलनाडु के तिरुचिरपल्ली स्थित श्रीरंगम के तिरुचेंदुराई में तो पूरे के पूरे गाँव पर ही वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया। गाँव में मंदिर भी था, उसको भी वो अपनी संपत्ति बताने लगे। कावेरी नदी के तट पर स्थित 1500 वर्ष पुराना सुंदरेश्वर मंदिर भी उनका हो गया, जिनका मजहब ही उतना पुराना नहीं है। सोचिए, कानून का ये लोग किस तरह दुरूपयोग करते हैं।

एक हिन्दू बेचारा जब अपनी जमीन बेचने चला तो प्रशासन से उसे एक नई बात पता चली – उसकी पूरी की पूरी 1.20 एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड की है। उसे 20 पन्नों का दस्तावेज थमा दिया गया। तमिलनाडु का ही एक और उदाहरण लीजिए। पेरम्बलूर स्थित V कलाथुर गाँव में मुस्लिमों ने ‘अपने एरिया’ में हिन्दू शोभा यात्राओं पर ही प्रतिबंध लगा दिया। जहाँ वो बस गए, वो ‘उनका इलाका’ हो गया। वर्षों से ये वार्षिक त्योहार चला आ रहा था, लेकिन 2012 से मुस्लिमों को इससे आपत्ति हो गई और इसे बंद करा दिया गया।

मद्रास हाईकोर्ट को कहना पड़ा कि किसी खास क्षेत्र में कोई खास मजहब बहुलता में है तो इसका अर्थ ये नहीं है कि दूसरे धर्मों को अपना त्योहार न बनाने दिया जाए या शोभा यात्रा न निकालने दिया जाए। उच्च न्यायालय को धार्मिक असहिष्णुता की बात करनी पड़ी। क्या आपने कभी ये खबर सुना है कि किसी हिन्दू बहुल इलाके में ईद, गुरुपर्व या क्रिसमस मनाने से रोका गया हो? आखिर एक ही वर्ग को बार-बार सहिष्णुता का पाठ क्यों पढ़ाना पड़ता है, जब नैरेटिव बनाया जाता है एकदम इसका उलटा।

इतिहास में भी शरिया के कारण हुआ हिन्दुओं का नरसंहार

ऐसा आज से नहीं हो रहा है भारत में भी, यानी ये कोई नई बात नहीं है। आपको केरल में मोपला मुस्लिमों द्वारा बड़े पैमाने पर हिन्दुओं के नरसंहार वाला इतिहास पता होगा। ये हिन्दू समृद्ध थे, लेकिन उनका कत्लेआम हुआ, उनकी बहन-बेटियों का बलात्कार हुआ। उस दौरान केरल में ‘खिलाफत आंदोलन’ का एक नेता था वरियाकुन्नथ कुंजाहम्मद हाजी नाम का, जिसे स्वतंत्रता संग्राम का नायक बता कर पेश किया गया। जबकि वो शरिया कोर्ट चलाता था, कई गाँवों में इस्लामी नियम-कानून चलाता था।

यानी मोपला से लेकर चोपरा, तक – सोच वही है, समूह वही है और परिणाम वही हैं। ये वही पश्चिम बंगाल हैं, जहाँ की लगभग एक तिहाई जनसंख्या मुस्लिम हो चुकी है। ये वही पश्चिम बंगाल है, जहाँ बांग्लादेश और म्यांमार से बड़ी संख्या में घुसपैठिए लेकर बसाए जा रहे हैं। ये वही पश्चिम बंगाल है, जहाँ एक महिला विदेशी घुसपैठिया होने के बावजूद सरपंच बन जाती है। ये वही पश्चिम बंगाल है, जहाँ की सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते हैं।

ज़्यादा पीछे न जाएँ तो ये वही पश्चिम बंगाल है जहाँ बसीरहाट के संदेशखाली में शाहजहाँ शेख नाम का सत्ताधारी पार्टी का गुंडा अपने गुर्गों के साथ जनजातीय समाज की महिलाओं का यौन शोषण करता था। ये सब TMC के दफ्तर में किया जाता था। शाहजहाँ शेख का नाम राशन घोटाले में भी आया था, उसे गिरफ्तार करने गई ED टीम पर ही हमला कर के उसे भगा दिया गया। यही तो है ‘शरिया अदालत’, जहाँ पुलिस-प्रशासन या जाँच एजेंसियों का कोई काम नहीं।

और ज़्यादा पीछे भी चल ही लेते हैं। ये वही बंगाल है जिसका विभाजन ही मजहबी हिंसा की नींव पर हुआ था। 1946 के ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ में 10,000 से अधिक हिन्दुओं को मौत के मुँह में भेज दिया गया था। उस समय भी दंगाइयों को ‘मुस्लिम लीग’ के मुख्यमंत्री हुसैन सुहरावर्दी का समर्थन प्राप्त था। चूँकि तब बंगाल में 54% मुस्लिम थे और 44% हिन्दू, बहुमत में आकर वो क्यों भला अपना अलग मुल्क न बनाएँ, ये तो उनके खून में है। मार-काट कर उन्होंने अपना एक अलग मुल्क ले लिया।

16-19 अगस्त, 1946 के ये दिन कलकत्ता के लिए कत्ल के दिन थे। 16 अगस्त को ही ‘मुस्लिम लीग’ ने पाकिस्तान के गठन के लिए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ का ऐलान किया था। सुहरावर्दी पर आरोप लगा कि लालबाजार पुलिस थाने में जाकर उसने खुद ये सुनिश्चित किया कि दंगाइयों पर कार्रवाई न हो, पुलिस भी हिन्दुओं के खिलाफ हो। गोपाल पाठा जैसे वीर अगर उस वक्त इन दंगों के खिलाफ खड़े न होते और हिन्दुओं को प्रेरित न करते तो शायद आज बंगाल हिन्दूविहीन हो जाता।

माँ काली की भूमि को संतों ने सींचा, आज रामनवमी मनाना भी दूभर

थोड़ा और पीछे चलें, ताकि हम समझें कि पश्चिम बंगाल क्या से क्या हो गया। माँ काली की ये वही भूमि है जहाँ रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकाकंद का जन्म हुआ। ये वही भूमि है जहाँ 16वीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु जैसे महान कृष्णभक्त का जन्म हुआ। श्री अरविन्द ने अपने हिन्दू दर्शन से जिस भूमि को समृद्ध किया, लाहिरी महाशय के चमत्कारों की चर्चा जहाँ गूँजी, जहाँ हरिचंद ठाकुर ने भेदभाव मिटाया, जहाँ स्वामी प्रणवानन्द जैसे योगी की कर्मभूमि रही।

आज स्थिति अलग है। घुसपैठ और हिंसा के लिए कुख्यात पश्चिम बंगाल में आज रामनवमी जैसा त्योहार शांति से नहीं मनाया जा सकता। 2018 में रानीगंज, 2019 में आसनसोल, 2022 में शिवपुर और 2023 में हावड़ा के अलावा इस साल शक्तिपुर क्षेत्र में दंगे हुए। यानी, हिन्दू अपना त्योहार तक ठीक से नहीं बना सकते। शायद पश्चिम बंगाल में स्थिति अभी और भयंकर होने वाली है। हमीदुल रहमान जैसे लोग सत्ता में रहे तो कई ताजेमुल पैदा हो जाएँगे।

और भारत में जहाँ संविधान है, कानून है, यहाँ की पुलिस है, केंद्र-राज्य की सरकारें हैं और न्यायपालिका है – लेकिन इन सबके बावजूद वहाँ के विधायक बात करते हैं ‘इस्लामी मुल्क के अचार-विचार’ की बात करते हैं तो ये सवाल पूछा ही जाएगा कि क्या पश्चिम बंगाल इस्लामी मुल्क है? या फिर सत्ता में बैठे मुस्लिम ही एक और विभाजन का सपना देख रहे हैं। हर जगह इनकी सोच वही है, शिक्षा या सामाजिकता से ये बदलने वाली नहीं है – ये साबित हो चुका है।

आतंकियों में डॉक्टर-इंजीनियर का पकड़ा जाना इसका उदाहरण है कि शिक्षा से इस्लामी सोच नहीं बदल सकती। जब संसद में शपथग्रहण के दौरान असदुद्दीन ओवैसी जैसे 5वीं बार सांसद चुने जाने के बावजूद ‘जय फिलिस्तीन’ कहते हैं तो हमें खिलाफत की बरबस ही याद आ जाती है। तुर्की में कौन खलीफा बैठे, इसका भारत से कोई लेना-देना नहीं था लेकिन इसके बावजूद खून हिन्दुओं का बहाया गया। इस सोच से लड़ने की रणनीति क्या है, इसमें हर तरफ कन्फ्यूजन ही है, सैकड़ों वर्षों से यही संशय का माहौल हमारी भूमि को खंडित करता रहा है।

सोने की तस्करी के लिए यूट्यूबर साबिर अली ने चेन्नई एयरपोर्ट पर खोल ली दुकान, 2 महीने में ही ₹160 करोड़ का गोल्ड कर दिया पार: 9 गिरफ्तार

चेन्नई में सोना तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह को ध्वस्त किया गया है। इस गिरोह ने सोना तस्करी के लिए चेन्नई के एयरपोर्ट पर ही करोड़ों की लागत से फर्जी दुकान खोल ली थी। इसको चलाने वाले एक यूट्यूबर सबीर अली और उसके 7 चेलों को पकड़ा गया है। सामने आया है कि यह लोग 2 महीने में ही ₹167 करोड़ के सोने की तस्करी कर चुके थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चेन्नई एयरपोर्ट पर सोना तस्करी करने के लिए साबिर अली नाम के एक यूट्यूबर ने ₹70 लाख देकर एक दुकान किराए पर ली थी। यह दुकान विदवेदा कम्पनी से किराए पर ली गई थी। यह कम्पनी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के लिए दुकानों का प्रबन्धन करती है।

साबिर अली ने एयरपोर्ट पर गिफ्ट की फर्जी दुकान खोल ली थी। इसमें काम करने के लिए 7 कर्मचारियों को भी रखा गया था। हालाँकि, इस दुकान का असल मकसद विदेश से लाए गए तस्करी के सोने को एयरपोर्ट के बाहर निकालना था। यह सभी कर्मचारी इसी काम में लगे हुए थे।

यह सभी विदेशों से आने वाले यात्रियों से तस्करी का सोना चुपके से लेते थे और उसे एयरपोर्ट से बाहर निकालते थे। यह यात्री भी एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलते थे बल्कि भीतर से ही श्रीलंका चले जाते थे। यह कर्मचारी इन यात्रियों से बाथरूम में सोना लेते थे।

इनको यह सोना एयरपोर्ट से बाहर निकालने में कोई दिक्कत नहीं होती थी क्योंकि इनको सुरक्षा जाँच से काफी छूट मिली हुई थी। इसी कारण यह सोना बाहर ले जाते थे। इनको एयरपोर्ट पर काम करने के लिए विशेष पहचान पत्र मिले हुए थे। पूछताछ में पता चला है कि यह पिछले 2 महीने में ₹167 करोड़ के सोने की तस्करी कर चुके थे।

ऐसे पकड़ा गया सोना तस्करी गैंग

कुछ दिनों पहले इसी दुकान के एक कर्मचारी को गुदा में 1 किलो सोना छुपाते हुए पकड़ा गया था। इस कर्मचारी ने यह सोना पाउडर की शक्ल में अपने गुदा में छुपा रखा था। इसके साथ ही एक यात्री भी पकड़ा गया था जो कि आगे श्रीलंका जा रहा था। इन दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के बाद पूरे गैंग का खुलासा हुआ।

एजेंसियों को पता चला कि साबिर अली ने यहाँ ₹70 लाख की दुकान सिर्फ इसीलिए किराए पर ली थी। यह पूरा तस्करी रैकेट विदेश से चलता है। इस रैकेट ने कुछ समय पहले साबिर अली से सम्पर्क किया था। अबूधाबी में रहने वाले एक श्रीलंकाई ने साबिर को यह दुकान खोलने के लिए तस्करी गैंग ने ₹70 लाख दिए थे।

साबिर अली के साथ ही उसके सभी कर्मचारियों को सोना तस्करी की ट्रेनिंग भी दी गई थी। इनको एयरपोर्ट पर सिविल एविएशन ब्यूरो (BCAS) से मिलने वाले पहचान पत्र भी मिले हुए थे। यह सभी सोना तस्करी करने के लिए ₹3 करोड़ की रिश्वत भी पा चुके थे।

अब सुरक्षा एजेंसियों ने इस गैंग के सरगना साबिर अली और इन आठों कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसी के साथ फर्जी दुकान का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। इन्हें जेल भेज दिया गया है। एयरपोर्ट प्रशासन अब इस मामले में जाँच कर रहा है।

‘यहाँ रखते तो थाने पर हमला हो सकता था’ : महिला को सरेआम पीटने वाले को गिरफ्तार करके बंगाल पुलिस में दिखा खौफ, ताजेमुल (JCB) को इस्लामपुर भेजा गया

पश्चिम बंगाल की सड़क पर महिला से सरेआम मारपीट करने वाले ताजेमुल हक को चोपड़ा जेल में न रखकर इस्लामपुर में शिफ्ट किया गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पुलिस को संदेह था कि अगर उसे चोपड़ा थाने में रखा जाता तो पुलिस थाने पर हमला हो सकता था।

इस संबंध में समाचार एजेंसी को इस्लामपुर पलिस के एसपी जोबी थॉमस ने जानकारी दी। उन्होंने कहा- “अगर हम चोपड़ा में उसे रखते हैं तो थाने पर हमला हो जाता। हमने सुरक्षा लिहाज से उसे इस्लामपुर में रखा है।”

इससे पूर्व मीडिया रिपोर्ट्स में ताजेमुल हक चोपड़ा को टीएमसी विधायक हामिदपुर रहमान का करीबी बताया गया था। साथ ही ये भी कहा गया था कि तालिबान स्टाइल में अपनी ‘इंसाफ सभा’ चलाता है जहाँ तुरंत शरिया मुताबिक कार्रवाई की जाती है।

इसी क्रम में उसने बंगाल के दीनाजपुर में एक महिला को निर्ममता से सरेआम सड़क पर मारा था। महिला की गलती ये थी कि वो शादीशुदा होने के बावजूद किसी और शख्स से मिल रही थी। रविवार को उस महिला को उस युवक के साथ पकड़ा गया तो ताजेमुल अपनी छड़ी लेकर आ गया। उसने महिला को बीच राह में ताबड़तोड़ छड़ी मारनी शुरू की। उसने ऐसा तब तक किया जब महिला बेहोश नहीं हो गई।

घटना की वीडियो वायरल होने के बाद जब सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल हुआ तो पहले तो टीएमसी विधायक हमीदुJ रहमान ने ताजेमुल के एक्शन की निंदा करने की बजाय महिला के चरित्र पर सवाल उठाए।

वहीं बंगाल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित को तो गिरफ्तार किया, लेकिन फिर वो उनके खिलाफ सख्त होने लगी जिन्होंने वीडियो शेयर की थी। तमाम सोशल मीडिया यूजर्स हैं जिनके वीडियो शेयर करने पर बंगाल पुलिस ने एक्स से अनुरोध किया है कि वो उनका पोस्ट हटा दें।

JCB की ‘शरिया कोर्ट’ पर पर्दा डाल रही बंगाल पुलिस? महिला की बर्बर पिटाई का Video हटाने को कहा, राजदीप सरदेसाई की चुप्पी पर पोस्ट भी नहीं पसंद

पश्चिम बंगाल के उत्तर दीनाजपुर से 30 जून 2024 को ताजेमुल उर्फ जेसीबी द्वारा की जा रही एक महिला की निर्ममता से पिटाई की वीडियो वायरल हुई थी। सोशल मीडिया पर इसे तमाम लोगों द्वारा शेयर किया गया था। सवाल उठाए गए थे कि क्या ये तालिबान शासन जैसा नहीं है जहाँ शरिया कोर्ट में महिलाओं के साथ बर्बरता होती है। बाद में बंगाल पुलिस ने वीडियो संज्ञान में आने पर आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उसे अरेस्ट भी किया। हालाँकि अब खबर है कि ताजेमुल नाम के आरोपित की गिरफ्तारी के बाद अब बंगाल पुलिस उन लोगों के खिलाफ एक्शन ले रही है जिन्होंने घटना की वीडियो शेयर करके सबको मामले से अवगत कराया था। इस लिस्ट में कई लोगों के नाम हैं। हैरानी की बात ये है कि इसमें शहजाद जयहिंद भी हैं जिन्होंने इस मामले में सिर्फ टीएमसी सांसद के पति पत्रकार राजदीप सरदेसाई की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।

वीडियो शेयर करने वालों पर कार्रवाई

सबसे पहले रश्मि सामंत का ट्वीट देखिए। रश्मि सामंत ने अपने ट्वीट में वीडियो को शेयर करते हुए कहा था कि सरेआम महिला को मारा जा रहा है ये अफगानिस्तान नहीं बंगाल है।

कुछ देर बाद रश्मि को पता चला कि बंगाल पुलिस ने उनका ट्वीट हटवाने के लिए एक्स को संपर्क किया है। उन्होंने इसका स्कीनशॉट शेयर कर लिखा कि असली तानाशाही ये होती है।

इसी प्रकार अश्विनी श्रीवास्तव ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था ममता का बंगाल महिलाओं के लिए तालिबान से अधिक खतरनाक है।

अश्विन भी थोड़ी देर बाद जानकारी देते हैं आईटी एक्ट के उल्लंघन के तहत उनके इस ट्वीट को हटवाने के लिए बंगाल पुलिस ने एक्स को अनुरोध किया है।

इसी प्रकार से एक नेटिजन्स ऋषि बागरी का तो कहना है कि उनपर इस मामले में बंगाल पुलिस ने केस किया है। अपने ट्वीट में बागरी ने कहा कि उन्होंने सीपीआईएम नेता मोहम्मद सलीम का एक वीडियो को शेयर किया था। अब बंगाल पुलिस ने उनपर केस कर कर लिया है। ऋषि इस संबंध में लिखते हैं- आरोपितों के विरुद्ध एक्शन लेने की बजाय ये लोग जानकारी देने वालों को गिरफ्तार करने में लगे हैं। असल में तानाशाही का रूप ऐसा होता है। मालूम हो कि ऋषि ने अपने ट्वीट में पुलिस से कार्रवाई की बात कही है, मगर उन्होंने स्क्रीनशॉट वैसा ही लगाया है जैसा बाकी यूजर्स ने यानी X द्वारा प्राप्त मेल का।

वहीं वकील शशांक शेखर झा के पोस्ट को भी बंगाल पुलिस ने एक्स से हटाने को कहा है। इस पर शशांक झा लिखते हैं, “बंगाल पुलिस क्या सच में तुम में कोई शर्म नहीं बची है। तुम वाकई इस पोस्ट को डिलीट करवाने को कह रहे हो?”

शुभम नाम का एक यूजर भी एक्स से आए मेल का स्क्रीनशॉट शेयर करके कहता है कि बंगाल पुलिस ने उसके पोस्ट पर भी नोटिस भेजा है। शुभम लिखते हैं- ऐसा लग रहा है कि बंगाल पुलिस को समझना मुश्किल नहीं हैं, वो सिर्फ लोगों को नोटिस भेजकर आवाजें दबाने का काम करते हैं। इनके कड़ी मेहनत को प्रणाम। बंगाल पुलिस 24X7 सेवा में तत्पर है, पर लोगों के नहीं, टीएमसी के।

पत्रकार प्रदीप भंडारी को भी ऐसे वीडियो शेयर करने पर एक मेल आया है। इस पर प्रदीप लिखते हैं- अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई- नहीं, जो पत्रकार अपराध को रिपोर्ट करें उनपर एक्शन- हाँ.. बंगाल में आपका स्वागत है।

इसके अलावा बंगाल पुलिस ने एक्स से ये कार्रवाई भाजपा नेता शहजाद जय हिंद के खिलाफ भी करने को कहा है जबकि उन्होंने अपनी वीडियो में राजदीप सरदेसाई की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सिर्फ ये पूछा था कि आखिर राजदीप इस मामले में 9 बजे कोई डिबेट क्यों नहीं करते जहाँ महिला को मारा गया और टीएमसी करीबी ने इसे जायज ठहराया।

बता दें कि राजदीप सरदेसाई टीएमसी सांसद सागरिका घोष के पति हैं लेकिन साथ में पत्रकार भी हैं। वे अक्सर ऐसे मुद्दों को तब उठाते हैं जब मामला भाजपा शासित प्रदेश का हो, मगर इस बार उन्होंने चर्चा नहीं की। इसी को लेकर शहजाद ने सवाल किया। हालाँकि बंगाल पुलिस को इसमें भी आईटी एक्ट का उल्लंघन दिखा और उन्होंने एक्स से कार्रवाई को बोला। वहीं शहजाद ये मेल पाने के बाद कहते दिखे- “टीएमसी सांसद का ऐसा रुतबा है कि बंगाल पुलिस मुझपर कार्रवाई करना चाहती है। क्या ये लोकतंत्र और सहिष्णुता है। जेल चला जाऊँगा, लेकिन पोस्ट नहीं हटाऊँगा।”

वीडियो में क्या था

उल्लेखनीय है कि रविवार को सामने आई वीडियो में दिख रहा था कि ताजेमुल महिला को डंडे से मार रहा था। महिला बार-बार उसे छोड़ने की गुहार लगा रही थी लेकिन ताजेमुल रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसने महिला को तब तक मारा जब तक वो बेहोश नहीं हो गई। इसके बाद उसने महिला के अचेत होते ही उसे लात मार दी। वीडियो में महिला के अलावा एक अन्य व्यक्ति को भी पीटते हुए देखा जा रहा है।

192 की रफ्तार से चली ‘आँधी’ को थाम चैंपियन बना भारत, पर 210 की स्पीड वाले तूफान में फँसी: टीम इंडिया की नहीं हुई घर वापसी, जिस होटल में कैद वह भी ‘बेरिल’ के खतरे से सटा

बारबाडोस में T20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम चक्रवात के चक्कर में वहीं फँस गई है। भारतीय टीम के खिलाफ एयरपोर्ट बंद होने के कारण अपने देश भारत वापस नहीं आ पा रहे। उनको मजबूरी में होटल में ही रुकना पड़ा है। बारबाडोस से टकराने वाले इस तूफ़ान का नाम बेरिल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (29 जुलाई, 2024) को जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम को सोमवार (1 जुलाई, 2024) को बारबाडोस से वापस आना था। इसके लिए वह पहले बारबाडोस से न्यूयॉर्क जाते जहाँ से उन्हें दुबई जाना था। इसके बाद दुबई से वह भारत की फ्लाइट पकड़ते। हालाँकि, चक्रवात बेरिल के कारण बारबाडोस का एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है।

इस एयरपोर्ट से कोई उड़ान नहीं हो रही है। इस कारण से भारतीय टीम होटल में फँसी हुई है। भारतीय टीम के साथ उनके परिवार भी हैं। इसके अलावा भारतीय टीम का सपोर्ट स्टाफ, कोच राहुल द्रविड़ और BCCI सचिव जय शाह भी यहीं फँसे हुए हैं। यह सभी बारबाडोस के होटल हिल्टन में रुके हैं।

होटल के कामकाज में भी चक्रवात के कारण दिक्कत आ रही है। अब एयरपोर्ट खुलने के बाद ही भारतीय टीम वापस आ सकेगी। यह भी जानकारी सामने आई है कि होटल हिल्टन भी समुद्री तट के काफी नजदीक स्थित है। इसके भी चक्रवात में काफी प्रभावित होने की आशंका है।

BCCI सचिव जय शाह ने इस बीच बारबाडोस से नई दिल्ली के बीच सीधी चार्टर फ्लाइट के प्रयास भी किए हैं। लेकिन इसकी भी उड़ान तभी संभव है जब एयरपोर्ट खुल सके। ऐसे में तब तक उन्हें बारबाडोस में ही रहना होगा। उनके साथ भारत से वर्ल्डकप की कवरेज के लिए गए कई पत्रकार भी यहीं फँसे हैं।

खतरनाक हुआ बेरिल

जिस बेरिल चक्रवात के कारण भारतीय टीम बारबाडोस में फंसी हुई है, वह अत्यंत खतरनाक श्रेणी में डाल दिया गया है। इस चक्रवात के कारण 210 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएँ चलने की आशंका है। यह चक्रवात बारबाडोस के साथ ही अन्य कैरीबियन द्वीपों को प्रभावित करेगा। इसके कारण समुद्र के लहरों के भी 9 फीट तक उठने की आशंका है। इसके टकराने से बारबाडोस समेत तमाम देशों में भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। इस चक्रवात के डर से बारबाडोस के लोगों ने अपने घरों पर सुरक्षा के लिए मजबूत तख्तियाँ लगाना चालू कर दिया है।

गौरतलब है कि भारतीय टीम 29 जून, 2024 को आखिरी गेंद तक चले रोमांचक फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 7 रनों से हरा कर वर्ल्डकप ट्रॉफी पर कब्जा किया था। इस मैच में कई उतार चढ़ाव के मौके आए। दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज हेनरी क्लासेन जब तक बैटिंग कर रहे थे, तब तक भारत पीछे दिखाई दे रहा था।

हेनरी क्लासेन इस दौरान 192 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे। उनके आउट होने के बाद मैच भारत की तारफ पलट गया। भारत ने 13 वर्षों के बाद कोई विश्वकप जीता है। रोहित शर्मा की अगुवाई में यह एक वर्ष के भीतर दूसरा फाइनल मुकाबला था। इस टीम के भारत लौटने पर स्वागत का इंतजाम किया जा रहा है।

‘हिंदू से की शादी तो मोहल्ले वालों के सामने कपड़े छीने, गाँव में नचाया’: मुस्लिम महिला को परिजन दे रहे धमकी, पुलिस से लगाई सुरक्षा की गुहार

रायबरेली में एक मुस्लिम महिला का हिन्दू व्यक्ति से शादी करना उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। महिला के साथ उसके परिजन और मोहल्ले वाले मारपीट और गालीगलौज करते हैं। महिला और उसके पति को मारने की धमकी भी दी गई है। मुस्लिम महिला ने पुलिस से इस मामले में शिकायत की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रायबरेली के खीरों थाना क्षेत्र की रहने वाली एक मुस्लिम महिला सरवरी बेगम ने हाल ही में एक हिन्दू पुरुष नितिन अवस्थी से शादी की है। दोनों इससे पहले प्रेम संबंध में थे। सरवरी बेगम और नितिन अवस्थी ने कोर्ट में शादी की है।

शादी के बाद से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। सरवरी बेगम जब नितिन से शादी करने के बाद अपने घर गईं तो उनके साथ मारपीट की गई। सरवरी बेगम के परिजनों ने मोहल्ले वालों के साथ मिलकर उन पर हमला कर दिया। उनको घर में रहने से मना किया गया।

सरवरी बेगम ने आरोप लगाया कि उनके मोहल्ले वालों ने उनके कपड़े तक छीन लिए और गाँव में घुमाया, यह सब लोगों के हुजूम के आगे हुआ। सरवरी ने बताया कि उनको और उनके पति को जान से मारने की लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। उनको इलाका छोड़ने की धमकी भी दी जा रही है।

सरवरी बेगम के पति ने बताया कि उन्होंने कोर्ट में मई, 2024 में सरवरी बेगम से शादी की थी। उनका यह कदम सरवरी के परिजनों को रास नहीं आया और वह उन्हें मारने पीटने लगे। जब नितिन अपनी पत्नी को बचाने पहुँचे तो उनके साथ भी मारपीट भी की।

सरवरी बेगम के परिजन उनको हिन्दू से विवाह करने के लिए लगातार ताने देते हैं। इसी को लेकर सरवरी बेगम और उनके पति नितिन अवस्थी ने रायबरेली के एसपी से इस मामले में शिकायत की है। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की माँग की है।