Home Blog Page 831

पश्चिम बंगाल ही नहीं, अब झारखंड में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोट बेतहाशा बढ़ने का शक: चुनाव आयोग से शिकायत, विधायक बोले- घट रहे हिन्दू मतदाता

झारखंड के पश्चिम बंगाल के सीमाई इलाकों में बेतहाशा वोट वृद्धि की शिकायत मिली है। यह सामने आया है कि एक बूथ पर मतदाताओं की संख्या में 100% से अधिक बढ़ोतरी हुई है, जो असामान्य है। इसको लेकर राज्य चुनाव आयोग अब जाँच करवाने जा रहा है। इन बूथ पर बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम जुड़ने का शक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयोग जल्द ही एक टीम साहेबगंज जिले की राजमहल विधानसभा क्षेत्र में भेजने जा रहा है। यह टीम यहाँ वोटों की संख्या में वृद्धि की जाँच करेगी। राजमहल विधानसभा का बड़ा इलाका पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है।

यहाँ एक बूथ पर तो वोट 2019 के मुकाबले दोगुने हो गए हैं। राजमहल प्रखंड बूथ पर 117% की वृद्धि देखने को मिली है। 2019 में इस बूथ पर मतदाताओं की सँख्या 689 थी जो 2024 में बढ़ कर 1400 के पार पहुँच गई है। जिन बूथ पर बढ़ोतरी हुई है, उनमें से अधिकाँश गंगा के पार दियारा क्षेत्र में स्थित हैं और इनकी सीमा पश्चिम बंगाल से सटी हुई है।

राजमहल विधानसभा में वोटरों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी को लेकर स्थानीय भाजपा विधायक अनंत ओझा ने राज्य के चुनाव आयोग से शिकायत की है। विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया ने इस मामले में जानकारी भी साझा की है।

विधायक ओझा ने बताया कि 2014 से 2019 के बीच जिन इलाकों में 9000 वोट बढ़ा था वहाँ 2019 से 2024 के बीच 24000 वोट बढ़ गया, जो कि आशंकित करता है। ओझा ने बताया कि उनकी विधानसभा में जहाँ पश्चिम बंगाल के सीमाई इलाकों में वोट बेतहाशा बढ़े हैं, वहीं हिन्दू बहुल बूथ पर यह वोट कम हो गए हैं।

उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि 17 ऐसे बूथ हैं, जहाँ हिन्दुओं के वोट पिछले पाँच वर्ष में घट गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 लोकसभा चुनाव में कई ऐसे हिन्दू वोटर थे, जिनके पास वैध मतदाता पहचान पत्र होने के बाद भी उन्हें वोट नहीं डालने का मौका मिला। उनका नाम लिस्ट से गायब था।

विधायक ओझा ने बताया कि ऐसे वोट ना डाल पाने वाले मामले बड़ी संख्या में हैं और इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो खुद उपमुखिया हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर हमने राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की है। चुनाव आयोग से 73 ऐसे बूथ की शिकायत की गई है।

अब चुनाव आयोग इस विषय में जाँच करने जा रहा है। मतदाताओं के भौतिक सत्यापन के कयास भी इस मामले में लगाए जा रहे हैं। यह शक जताया जा रहा है कि कहीं बांग्लादेशी अवैध घुसपैठिये तो इस इलाके में बंगाल के रास्ते आकर कब्ज़ा कर रहे हैं। इसी को लेकर चिंताएँ और बढ़ गई हैं।

इस मामले में राज्य सरकार के कर्मचारियों पर भी प्रश्न उठे हैं। विधायक अनंत ओझा ने कहा है कि स्थानीय कर्मचारियों ने इस मामले में लापरवाही बरती है, अगर वह ऐसा ना करते तो ना ही वोट बेतहाशा बढ़ते और ना ही हिन्दू वोटर वो न डाल पाने की शिकायतें करते।

अगरतला में पकड़े गए 11 बांग्लादेशी घुसपैठिए

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में 11 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें 6 पुरुष जबकि 5 महिलाएँ हैं। यह सभी अगरतला रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार हुए हैं। इन्हें RPF और GRP के संयुक्त ऑपरेशन में पकड़ा गया है। यह सभी अगरतला से बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई समेत अलग-अलग हिस्सों में जाने की फिराक में थे।

इन घुसपैठियों की पहचान सुजान राणा (20), अजीजुल शेख (30), लिमोन (19), नरगिस अख्तर (34), मोहम्मद यूसुफ अली (35), मोहम्मद साहिदुल इस्लाम (26), निपा मंडल (27), अखे बेगम (35), ओमी अख्तर (35), साजिब अली (19) और अस्मा बिस्वास (36) के रूप में हुई है। अगरतला GRP ने इस संबंध में मामला दर्ज किया है और अब इनके खिलाफ कार्रवाई चालू की जाएगी। पुलिस इस मामले में मानव तस्करी के एंगल से भी जाँच कर रही है। इनमे से कोई भी वैध कागज दिखने में सफल नहीं हुआ है।

यह पहला मौका नहीं है जब बांग्लादेशी घुसपैठियों को यहाँ से पकड़ा गया हो। जानकारी के अनुसार, पिछले दो महीने से भी कम समय में त्रिपुरा से 72 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए हैं, जिनमें से ज़्यादातर महिलाएँ हैं। यह सभी घुसपैठिए देश के अलग-अलग हिस्सों में काम की तलाश में अवैध तरीकों से भारत में घुसे थे।

काँवड़ के लिए 20 दिन रास्ते बंद हो सकते हैं तो नमाज के लिए 20 मिनट क्यों नहीं: सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर ‘रावण’ ने खाई हमेशा मुस्लिमों का साथ देने की कसम

भीम आर्मी के मुखिया एवं यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ ने कहा मुस्लिमों के सड़कों पर नमाज पढ़ने का समर्थन किया है। इसके साथ ही उन्होंने हिंदुओं की काँवड़ यात्रा के दौरान दी जाने वाली सुविधाओं पर भी सवाल उठाया है। चंद्रशेखर ने कहा कि अगर हिंदुओं की काँवड़ यात्रा के लिए 20 दिन तक सारे रास्ते बंद किए जा सकते हैं तो 20 मिनट की नमाज के लिए आपत्ति क्यों है।

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर ने कहा, “जो लोग 20 मिनट नमाज पढ़ने पर आपत्ति जता सकते हैं, वो किसी धर्म के साथ नहीं हो सकते।” उन्होंने कहा कि किसी भी दल के बड़े नेता में यह सवाल करने की हिम्मत नहीं है, जो उन्होंने उठाई है। चंद्रशेखर के इस बयान पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

चंद्रशेखर ने 23 जून 2024 को नगीना लोकसभा स्थित नजीबाबाद के चंदनपुर गाँव में एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “हिंदुओं की काँवड़ यात्रा के लिए 20 दिन तक सारे रास्ते बंद किए जाते हैं। अस्पताल भी बंद किए जाते हैं। उस पर किसी को दिक्कत नहीं होती। ऐसे में 20 मिनट की नमाज पर आपत्ति क्यों है?”

इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में सांसद चंद्रशेखर यह कहते हुए दिख रहे हैं, “हम सभी धर्म का सम्मान करते हैं। जो लोग 20 मिनट नमाज पढ़ने पर आपत्ति जता सकते हैं, वह किसी धर्म का सम्मान नहीं कर सकते।” इस दौरान उन्होंने हाथ में जल लेकर मुस्लिमों को भरोसा दिया कि वे हमेशा मुस्लिमों के साथ रहेंगे।

बता दें कि बकरीद से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बैठक की थी और इसमें अधिकारियों को निर्देश दिया था कि सड़कों पर नमाज पढ़ने की नई परंपरा ना शुरू की जाए। नमाज मस्जिद या किसी अधिकृत जगह पर ही पढ़ी जाए। इसके साथ ही बकरीद के दिन सार्वजनिक जगहों पर और प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी नहीं देने की अपील की थी।

सीएम योगी की इस अपील का पूरे प्रदेश में सख्ती से पालन हुआ था। खुद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने आगे बढ़कर लोगों से इन निर्देशों का पालन करने के लिए कहा था। इसका परिणाम यह हुआ था कि इस बार किसी तरह की झड़प आदि खबरें सुनने को नहीं मिलीं। ये निर्देश बकरीद के बाद आने वाले हिंदू त्योहारों को ध्यान में रखकर दिया गया था।

ज़ुबैर (बदला हुआ नाम) ने अपनी बहन को ही बनाया शिकार, फिर बहनोई को सौंप दिया: बलात्कार कर-कर के वीडियो भी बनाता था, एक्शन में यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक मुस्लिम लड़की को रिश्ते में लगने वाले उसके भाई ने ही हवस का शिकार बना लिया है। जुबैर (बदला हुआ नाम) ने पहले अपनी बहन के अश्लील वीडियो बनाए और बाद में इसी का डर दिखा कर कई बार बलात्कार किया। जुबैर के बहनोई शादाब (बदला हुआ नाम) ने भी पीड़िता से रेप की कोशिश की। शुक्रवार (28 जून, 2024) को पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला मुरादाबाद जिले के थाना क्षेत्र मैनाठेर का है। यहाँ शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय की एक लड़की ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़िता ने बताया कि 5 मई 2024 को वो घर में अकेली थी। इसी दौरान उसकी बुआ के देवर का बेटा जुबैर (बदला हुआ नाम) घर पर आया। घर में जुबैर ने पीड़िता से रेप किया और नंगी फोटो-वीडियो बना डालीं। आरोपित मूलतः UP के अमरोहा जिले का रहने वाला है। आरोप है कि अश्लील वीडियो वायरल करने का डर दिखा कर आरोपित ने कई बार अपनी ही रिश्ते में लगने वाली बहन की इज्जत लूटी।

एक दिन जुबैर ने पीड़िता को वीडियो डिलीट करने के बहाने अपने पास बुलाया। यहाँ से वो लड़की को अमरोहा के डिडौली थाना क्षेत्र में अपने बहनोई शादाब (बदला हुआ नाम) के घर ले गया। यहाँ भी उसने लड़की से रेप के बाद उसे अपने बहनोई के पास छोड़ दिया। आरोप है कि जुबैर के बहनोई ने पीड़िता से कहा, “तुम मुझे खुश कर दो, मैं तुम्हारी वीडियो डिलीट करा दूँगा।” इसके बाद शादाब ने पीड़िता को पकड़ लिया और रेप की कोशिश की। जैसे-तैसे पीड़िता वहाँ से निकल कर भाग पाई।

शिकायत में आगे बताया गया है कि तमाम मिन्नतों के बावजूद जुबैर ने उसकी अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं। इस हरकत से पीड़िता ने खुद को बेहद मानसिक तनाव में बताया है और पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने जीजा-साले को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376, 354 (ख) और 452 के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने मामले में जाँच और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

झारखंड में गिरा करोड़ों की लागत से बन रहा वो पुल, जिसे JMM-कॉन्ग्रेस सरकार बनवा रही थी: नहीं झेल पाया एक भी बारिश

झारखंड के गिरिडीह जिले में करोड़ों की लागत से बनाया जा रहा एक पुल बारिश के बीच गिर गया। निर्माणाधीन पुल बारिश की एक मार भी नहीं झेल सका और उसका बड़ा हिस्सा गिर गया। अब पुल के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरिडीह के देवरी थाना क्षेत्र में अरगा नदी पर एक पुल का निर्माण हो रहा था। जिस सड़क के लिए यह पुल बनाया जा रहा था, वह इस इलाके के डुमरीटोला और कारिपहरी गाँवों को जोड़ती है। इसके निर्माण के बीच ही शनिवार (29 जून, 2024) को तेज बारिश हुई जिससे अरगा नदी का जलस्तर बढ़ गया।

नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण इस पुल के लिए डाला गया गार्डर गिर गया। यह गार्डर एक पिलर से सहारे खड़ा था, पिलर नदी में पानी बढ़ने के कारण नीचे धंस गया, इसके कारण इसका ढाँचा अस्थिर हो गया। इसके कुछ देर बाद ही यह गिर कर नदी में समा गया।

इस पुल का निर्माण झारखंड का पथ निर्माण विभाग कर रहा था। इसके लिए ओम नमः शिवाय नाम की एक कम्पनी को ठेका मिला हुआ था। यह भी जानकारी सामने आई है कि यह पुल ₹5.5 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा था।

अब इस पुल के गिरने के बाद इसकी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर प्रश्न झारखंड सरकार पर प्रश्न उठ रहे हैं। इससे पहले बारिश के कारण बिहार में पुल गिरने पर भी खूब बवाल हुआ था। इन पुलों के गिरने को लेकर बिहार सरकार को घेरा गया था। मामले में स्थानीय अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया है।

गिरिडीह के पथ प्रमंडल विभाग के इंजीनियर बिनय कुमार भी इस घटनास्थल पर पहुँचे हैं। ऑपइंडिया को बिनय कुमार ने बताया है कि बड़ा नुकसान नहीं है। मामले की जाँच के लिए आगे बातचीत चल रही है। निर्माण का जिम्मा लेने वाली कम्पनी ने अपने खर्च पर दोबारा पुल तैयार करने की सहमति दी है।

वीडियो में देखिए पश्चिम बंगाल की ‘शरिया अदालत’, भीड़ के सामने महिला को जमीन पर पटक कर पीटता ताजेमुल उर्फ़ JCB: भाजपा बोली – TMC विधायक हमीदुल रहमान का है करीबी

पश्चिम बंगाल से हिंसा का एक और वीडियो सामने आया है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान यहाँ TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के गुंडों द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की खबरें आई थीं। कइयों को पलायन करना पड़ा था, भाजपा ने एक जाँच समिति बना कर भी वहाँ भेजा था जिसकी रिपोर्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा को भी सौंपी जा चुकी है। अब नया वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के IT सेल के मुखिया व राज्य में प्रभारी अमित मालवीय ने निशाना साधा है।

उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन का ये एक एक भयावह चेहरा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ के बीच एक महिला और एक पुरुष को जमीन पर पटक कर पीटा जा रहा है। आरोपित की पहचान ताजेमुल के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोग JCB नाम से बुलाते हैं। वो ‘त्वरित न्याय’ देने के लिए जाना जाता है, उसकी नज़र में पुलिस-कोर्ट की कोई हैसियत नहीं। अमित मालवीय ने बताया है कि चोपरा के विधायक हमीदुल रहमान का वो करीबी है।

अमित मालवीय ने कहा, “भारत को TMC द्वारा संचालित पश्चिम बंगाल में शरिया अदालतों की वास्तविकता से अवगत होना चाहिए। हर गाँव में एक संदेशखाली है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी महिलाओं के लिए अभिशाप हैं। पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था का कोई नामोनिशान नहीं है। क्या ममता बनर्जी इस राक्षस के खिलाफ कार्रवाई करेंगी या उसका बचाव करेंगी जैसे उन्होंने शेख शाहजहाँ के लिए खड़ी हुई थीं?” बता दें कि संदेशखाली में जनजातीय समाज की महिलाओं का यौन शोषण करने वाले शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों को बचाने के लिए बंगाल सरकार ने दिन-रात एक कर दिया था।

ये घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर स्थित चोपरा के लक्ष्मीकांतपुर की बताई जा रही है। ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) को भी इससे अवगत करा दिया गया है। पश्चिम बंगाल में इस तरह से एक इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा ‘कंगारू कोर्ट’ चलाए जाने का वीडियो आने के बाद एक बार फिर से राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा के कई कार्यकर्ता अब तक पार्टी दफ्तर में परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। गाँव के गाँव खाली हो गए हैं।

‘फेसबुक-इंस्टाग्राम से रोकना भी क्रूरता, कोई निश्चित परिभाषा नहीं’: पत्नी रहती थी मायके, तेलंगाना हाई कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका स्वीकार की

तेलंगाना हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एक पति या पत्नी द्वारा दूसरे की प्रति प्रतिष्ठा या सामाजिक कार्यों की संभावनाओं को नुकसान पहुँचाने वाला कोई भी कार्य क्रूरता के अंतर्गत आएगा। कोर्ट ने कहा कि विवाह केवल वचनों के आदान-प्रदान या एक समारोह से कहीं बढ़कर है। इसके लिए ईंट-दर-ईंट से एक साझा घर बनाने की आवश्यकता होती है, जो एक साथ जीवन जीने की निरंतर इच्छा से जुड़ा होता है। जब विश्वास दरक जाए तो उस संबंध का कोई अर्थ नहीं होता।

तेलंगाना हाई कोर्ट की न्यायाधीश मौसमी भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति एमजी प्रियदर्शिनी की पीठ ने कहा कि यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि जीवनसाथी को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रहने से वंचित करना भी क्रूरता के समान हो सकता है। इसके बाद पीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक माँगने की पति की अपील को स्वीकार कर लिया।

न्यायालय ने कहा कि विवाह को व्यक्तियों पर जबरन थोपा नहीं जा सकता। हाई कोर्ट ने यह भी कहा, “यह तथ्य कि दो व्यक्ति अब एक साथ जीवन की कल्पना नहीं कर सकते, विवाह को भंग करने और तलाक का आदेश देने के लिए पर्याप्त आधार के रूप में देखा जाना चाहिए।” कोर्ट ने माना की विवाह में संबंध में इतना टूट चुका है कि उसे सुधारा नहीं जा सकता।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत की खंडपीठ ने कहा, “पूरे मामले में न्यायालय की भूमिका सीमित है और उसे जल्लाद या परामर्शदाता के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए, ताकि पक्षकारों को पति-पत्नी के रूप में बने रहने के लिए मजबूर किया जा सके। उनके बीच मन की बात हमेशा के लिए समाप्त हो गई हो। इस तरह की कवायद अनुचित और निरर्थक है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि मानसिक क्रूरता को एक निश्चित सूत्र में परिभाषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि जिसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है, उसे ऐसे व्यवहार के रूप में देखा जा सकता है जो परेशान करने वाला या अवांछित हो, लेकिन क्रूर न हो। दरअसल, पति ने मानसिक एवं शारीरिक क्रूरता के आधार पर अपनी पत्नी से तलाक माँगा था।

दरअसल, यह मामला एक पति-पत्नी से जुड़ा हुआ है जिनकी शादी साल 2010 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच गंभीर वैवाहिक कलह शुरू हो गई। पत्नी ने साल 2011 में ससुराल छोड़ दिया और अपने पति के खिलाफ पाँच आपराधिक मामले दर्ज कराए। इनमें धारा IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप भी शामिल हैं।

मई 2015 में पत्नी कुछ दिनों के लिए अपीलकर्ता पति के साथ रहने आई, लेकिन जल्द ही घर छोड़कर चली गई। इसके बाद उसने पति के खिलाफ और भी आपराधिक मामले दर्ज कराए। इनमें से कुछ मामलों में पति को बरी कर दिया गया। इसके बाद पति ने न्यायालय में तलाक की अर्जी दाखिल की। नवंबर 2021 में ट्रायल कोर्ट ने पत्नी के व्यवहार को क्रूरता नहीं मानते हुए तलाक देने से मना कर दिया।

इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को अपीलकर्ता ने तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी। पति ने दलील दी कि उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ एक के बाद एक आपराधिक मामला दर्ज कराके शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है। वहीं, पत्नी के वकील ने तर्क दिया कि पति को पत्नी की वित्तीय जरूरतों के लिए जिम्मेदार है और उसे भरण-पोषण सुनिश्चित किए बिना तलाक नहीं दिया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने माना कि पत्नी की हरकतें मानसिक क्रूरता के बराबर थीं और विवाह इतना टूट चुका था कि उसे सुधारा नहीं जा सकता था। हाई कोर्ट ने कहा, “क्रूरता ढहते ढाँचे के टुकड़ों में से एक है, जहाँ विवाह का आधार इस तरह से टूट गया है कि उस ढाँचे को न तो बचाया जा सकता है और न ही फिर से बनाया जा सकता है।”

संविधान का करो संशोधन, और ज्यादा आरक्षण के लिए कोर्ट की लगाई 50% सीमा हटाओ, जाति जनगणना भी हो: कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस मीडिया इंचार्ज और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा है कि संसद में कानून लाकर 50% आरक्षण की सीमा को खत्म कर दिया जाए। उन्होंने कहा है कि सरकार ऐसा कानून लाए जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण पर लगाई गई 50% की सीमा टूट जाए। उन्होंने साथ ही में जातिगत जनगणना की माँग भी है।

जयराम रमेश ने कहा है कि आरक्षण की सीमा को 50% से बढाकर उसे संविधान की नवीं अनुसूची में डालना पर्याप्त नहीं है क्योंकि देश के कोर्ट इसकी समीक्षा कर सकते हैं और इस पर रोक लग सकती है। उन्होंने कहा है कि संविधान में संशोधन करके 50% आरक्षण की सीमा हटाकर SC-ST और OBC को आरक्षण दिया जाए।

मीडिया से बात करते हुए जयराम रमेश ने कहा, “अलग-अलग राज्यों के आरक्षण को संविधान को नवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। तमिलनाडु का आरक्षण नवीं अनुसूची में शामिल है लेकिन 2007 में न्यायपालिका ने कहा है कि वह नवीं अनुसूची का भी परीक्षण कर सकती है। हमने अपने घोषणा पत्र में भी 50% सीमा को संविधान संशोधन से हटाने का वादा किया था।”

जयराम रमेश ने आगे कहा, “संविधान में कहीं नहीं लिखा कि आरक्षण 50% होना चाहिए। यह न्यायपालिका के दिए गए निर्णयों से आया है। हम चाहते हैं कि संविधान का संशोधन हो और आरक्षण की 50% सीमा हटा दी जाए। इसके अलावा राज्यों को अधिकार दिए जाएँ।”

जयराम रमेश ने आरक्षण के लिए संशोधन पर बात करते हुए जेडीयू पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जेडीयू ने 65% आरक्षण के लिए नवीं अनुसूची की बात की है लेकिन वह भाजपा पर इस बात के लिए दबाव नहीं डाल रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी प्रश्न पूछे।

जयराम रमेश ने देश भर में जातिगत जनगणना की माँग भी की है। जयराम रमेश ने कहा कि जातिगत जनगणना जरूरी है। उनका कहना है कि देश होने वाली आगामी जनगणना में जाति का नाम भी शामिल कर लिया जाए।

गौरतलब है कि हाल ही में पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार के 65% आरक्षण देने के फैसले पर रोक लगा दी थी। पटना हाई कोर्ट ने इसके पीछे 50% सीमा का हवाला दिया था। इसके बाद से जातिगत आरक्षण पर बहस दोबारा से चालू हो गई है।

जिस रियासी में आतंकी हमला कर 10 को मार डाला था, अब वहाँ शिव मंदिर में तोड़फोड़: अमरनाथ यात्रा के बीच वीडियो से तनाव, हिन्दुओं का प्रदर्शन

जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है। हमलावरों ने शिव मंदिर को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शनिवार-रविवार (29-30 जून, 2024) की रात हुए इस तोड़फोड़ में दीवालों पर टंगी देवी-देवताओं की तस्वीरों तक को नहीं छोड़ा गया है। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर नाराज़गी जताते हुए आक्रोश रैली निकाली है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। इस करतूत को अमरनाथ यात्रा के दौरान तनाव बढ़ाने की साजिश भी माना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना रियासी के धर्ममाड़ी इलाके की है। यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर है जो आसपास के हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक है। शिवरात्रि व अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ काफी भीड़ जमा होती है। रविवार (30 जून, 2024) को स्थानीय लोगों ने सुबह देखा कि मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। तोड़फोड़ के वीडियो और फोटो बनाए गए जो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इन तस्वीरों को देखते हुए पूरे जम्मू में तनाव फ़ैल गया। रियासी में बंद का एलान कर दिया गया।

मंदिर की दीवालों पर लगे चित्रों को उखाड़ कर जमीन में पटक दिया गया। मंदिर में पूजा-पाठ और अन्य उपयोगी साजोसामान को एक जगह ला कर बड़े बेढंगे तरीके से फेंक दिया गया है। शिवलिंग को भी नुकसान पहुँचाया गया है। घटना के विरोध में रियासी जिले में सड़क पर उतर कर प्रदर्शन हुआ है। उन्होंने पुलिस से माँग की है कि वो तत्काल मामले का खुलासा करेंगे और आरोपित को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के जुर्म में फाँसी की सजा दिलाएँ। कार्रवाई के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। हालात देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

बताते चलें कि 29 जून से अमरनाथ यात्रा की भी शुरुआत हो चुकी है। इसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जम्मू के रास्ते अमरनाथ पहुँच रहे हैं। ऐसे में जम्मू के रियासी में हुई इस घटना को अमरनाथ यात्रा में व्यवधान डालने व इस दौरान साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश माना जा रहा है। इस घटना के विरोध में रियासी के RSS (राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ) कार्यालय में भी एक बैठक हुई। इस बैठक के बाद एक आक्रोश जुलूस निकाला गया। इस बीच पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है साथ ही जल्द खुलासे का भरोसा भी दिया है।

‘मुख से जो कुछ निकला, उसके लिए भक्त क्षमा करें’: प्रदीप मिश्रा ने बरसाना में राधा रानी के सामने जमीन पर नाक रगड़ माँगी माफ़ी, प्रेमानंद महाराज सहित साधु-संत थे आक्रोशित

मध्य प्रदेश के सीहोर के कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने राधा रानी के बारे में कुछ दावे किए थे, जिसके बाद मथुरा के वृन्दावन स्थित श्रीहित आश्रम के प्रेमानंद महाराज उनसे नाराज़ हो गए थे। अब प्रदीप मिश्रा ने वृन्दावन स्थित राधा रानी के दरबार में पहुँच कर दण्डवत प्रणाम कर के उनसे क्षमा माँगी है। उन्होंने बरसाना स्थित मंदिर में नाक रगड़ कर श्रीकृष्ण की प्रिय राधा से माफ़ी माँगी। श्रीकृष्ण में श्रद्धा रखने वाले कई साधु-संत उनका विरोध कर रहे थे। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि उनके मुख से जो कुछ निकला, उसके लिए राधा रानी और उनके भक्त उन्हें माफ़ करे।

इतना ही नहीं, प्रदीप मिश्रा ने कहा कि वो अपनी हर कथा में इसे दोहराएँगे। उनके बरसाना दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। ‘ब्रजतीर्थ देवालय न्यास’ की तरफ से उनके खिलाफ महापंचायत भी बुलाई थी और प्रदीप मिश्रा को ब्रज में न घुसने देने का ऐलान करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का भी आह्वान किया था। असल में प्रदीप मिश्रा ने कहा था कि राधा रानी का जन्म बरसाना नहीं, बल्कि रावलगाँव में हुआ था।

उन्होंने बताया था कि राधा के पिता बरसाना में कचहरी लगाते थे। उन्होंने बताया था कि राधा रानी साल में 1 बार बरसाना जाती थीं, न तो श्रीकृष्ण की रानियों में राधा का नाम आता है और न राधा के पति के नाम में श्रीकृष्ण आता है। उन्होंने राधा के पति का नाम अनय घोष, उनकी सास का नाम जटिला और उनकी ननद का नाम कुटिला था। उन्होंने दावा किया था कि राधा का विवाह छात्रा गाँव में हुआ था। उन्होंने अब पूरे विवाद का पटाक्षेप होने की कामना की है।

प्रेमानंद महाराज ने कहा था कि आजकल ऐसे प्रवक्ता लोग हैं जो प्रसंग को छुए बिना ही कुछ भी बोल देते हैं, प्रसंग को पहले जानना चाहिए। उन्होंने कहा था कि आप एक गृहस्थ कथावाचक हो, हम श्रीजी के गुलाम हैं। प्रेमानंद मिश्रा ने कहा कि तू बस यहाँ पर साष्टांग दण्डवत होकर बैठ जा, तुझे यहाँ की रज कण बता देगी कि श्रीजी कौन हैं। उन्होंने शास्त्रों को पढ़ने की सलाह देते हुए कहा था कि हम लाड़ली जी के लिए जीते हैं। प्रेमानंद महाराज के गुस्से वाला वीडियो भी खूब वायरल हुआ था।

अब प्रदीप मिश्रा ने उनके कहे का न सिर्फ अनुसरण किया है, बल्कि हाथ जोड़ कर ब्रजवासियों का अभिनन्दन भी किया है। उन्होंने ब्रजवासियों के प्रेम का जिक्र करते हुए कहा कि राधा रानी ने स्वयं ही इशारा कर के उन्हें बुलाया है। उन्होंने सभी से निवेदन किया कि सब राधे-राधे कहें, हर-हर महादेव कहें। प्रेमानंद महाराज ने उनके लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि 4 लोगों से पैर पुजवा कर खुद को भागवताचार्य समझता है, तू नरक में जाएगा।

मोहम्मद अजहर ने 15 साल की हिंदू लड़की का रेप किया, मार डाला… जज ने दिया था मृत्युदंड: अब उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पलटा फैसला, आरोपों से कर दिया बरी

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक नाबालिग हिंदू लड़की की रेप के बाद हत्या के मामले में मृत्युदंड पाए मोहम्मद अजहर खान की सजा पर रोक लगाते हुए आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही आरोपित को जेल से तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। ट्रायल कोर्ट ने मोहम्मद अजहर की मौत की सजा दी थी। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में कई खामियाँ बताईं और कहा कि आरोपित की भूमिका ‘संदिग्ध’ थी।

उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने कहा कि आरोपित के चोटों को देखते हुए असंभव लगता है कि वह मोटरसाइकिल चलाकर मृतका को घटनास्थल पर ले गया हो, बलात्कार किया हो और फिर उसकी हत्या करने के बाद शव को वापस लाकर पेड़ से लटका दिया हो।

इसको देखते हुए हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के पूरे बयान को संदिग्ध माना। इसके बाद देहरादून के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश / एफटीसी / विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) द्वारा पारित निर्णय और आदेश को खारिज कर दिया। इसमें आरोपित को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने यह फैसला 11 जून 2024 को दिया है।

दरअसल, 1 जनवरी 2016 को 15 साल की नाबालिग मृतका लापता हो गई थी। अगले दिन देहरादून के त्यूणी में सेता बेंड के पास एक पेड़ पर उसका लटका हुआ शव बरामद हुआ था। मृतका के भाई ने दावा किया था कि उसने अपनी बहन को आखिरी बार आरोपित मोहम्मद अजहर और उसके एक किशोर साथी के साथ देखा था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सके बाद मोहम्मद अजहर खान को पुलिस ने 5 जनवरी 2024 को गिरफ्तार कर लिया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि नाबालिग से बलात्कार करने के बाद आरोपित ने उसकी हत्या कर दी और इसे आत्महत्या का मामला दिखाने के लिए उसके शव को पेड़ से लटका दिया था।

सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा कि यह बात संदिग्ध है कि रेप-मर्डर करने वाला व्यक्ति शव को ऐसी जगह लटकाएगा, जहाँ से सभी उसे देख सकें। कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतका के भाई ने ट्रायल कोर्ट में कहा था कि पिछली दुर्घटना के कारण आरोपित चारपहिया वाहन नहीं चला सकता था। इस तरह उसके मोटरसाइकिल चलाने पर भी संदेह है। इस पर शव को लाने का दावा किया गया है।

खंडपीठ ने कहा, खंडपीठ ने कहा, “यह बयान अत्यधिक संदिग्ध है। यदि उसने (आरोपित ने) बलात्कार और हत्या की होती तो वह शव को वहीं छोड़ देता। विशेष रूप से उसे लगी चोटों को ध्यान में रखते हुए यह संदिग्ध लगता है कि वह शव को मोटरसाइकिल पर लाकर उसे पेड़ पर लटका दे।” कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतका के कपड़ों पर वीर्य के अंश नहीं मिले हैं। इसलिए मामला संदिग्ध है।