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जबलपुर के तुल्ला बाबा पहाड़ी पर मिले 57 पशुओं के अवशेष, गोकशी के संदेह में हिंदुओं का प्रदर्शन: सिवनी में भी मिले थे 50+ गोवंश के कटे सिर

मध्य प्रदेश के में जगह-जगह गोवंश मिल रहे हैं। इसको लेकर हिंदू समुदाय आंदोलित हो गया है। सिवनी के बाद अब जबलपुर जिले के कटंगी में 50 से अधिक पशुओं के अवशेष मिले हैं। इसको लेकर हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। हिंदू संगठनों ने शुक्रवार (28 जून 2024) को बंद बुलाया और सड़कों को जाम रखा।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जबलपुर-दमोह मार्ग पर लगभग 4 घंटे तक जाम लगाए रखा। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना और एसपी आदित्य प्रताप सिंह मौके पर पहुँचे। दोनों अधिकारियों ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।

हिंदू संगठनों का प्रदर्शन खत्म होने के बाद मार्केट भी खुल गया। इस विरोध प्रदर्शन में व्यापारियों ने भी हिंदू संगठनों का साथ दिया। बजरंग दल और दूसरे हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे पुलिस-प्रशासन की जाँच से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी माँग पर कलेक्टर ने दोबारा जाँच करवाने की बात कही है।

बता दें कि कटंगी इलाके के तुल्ला बाबा पहाड़ी में बुधवार (26 जून 2024) की दोपहर को 57 पशुओं के सिर एवं अवशेष मिले थे। ये अवशेष अलग-अलग स्थानों पर पड़े हुए थे। लोगों ने इन अवशेषों को गोवंश का अवशेष बताया। वहीं, जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से सिर्फ 5 अवशेष ही गोवंश के हैं। अवैध कटान से इनकार किया गया था।

वहीं, चिकित्सकों की रिपोर्ट में ये भी साफ हुआ है कि तीन अवशेष की जाँच में पता चला है कि उन्हें धारदार हथियार से काटा गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस बात के साक्ष्य भी नहीं मिले हैं कि तुल्ला बाबा की पहाड़ी में मृत जानवरों को लाकर फेंका जाता रहा है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पालतू एवं जंगली जानवर विचरण करते हैं। 

बजरंग दल के सुमित सिंह ठाकुर, रघुराज यादव समेत कई नेताओं ने ज्ञापन देते हुए माँग उठाई कि गोवंश की हत्या करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। आरोपितों के मकानों पर बुलडोजर चलाया जाए।वहीं, गोवंशों की तस्करी के इस्तेमाल होने वाले वाहनों को नष्ट किया जाए।

बता दें कि मध्य प्रदेश के सिवनी में 19 जून 2024 को गोवंश के 57 कटे शव मिले थे। प्रशासन ने मवेशी डॉक्टर को बुलाकर शवों का परीक्षण करवाने के बाद शवों कों दफना दिया था। इनकी पोस्टमॉर्टम से पता चला कि इनका गला 17 और 18 जून के बीच रेता गया। पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, नागपुर के तीन आरोपितों को चिह्नित किया है।

दरअसल, पुलिस की सख्ती के कारण ये गो तस्करों ने इनके गले काटकर शवों को फेंक दिए। पुलिस और ग्रामीणों को ऐसे 54 गोवंश मिले थे। एसपी राकेश सिंह का कहना है कि गोवंश का गला काटकर तस्कर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ना चाहते थे, ताकि पुलिस की सख्ती ढीली पड़ जाए और दूसरे रास्ते से अन्य गोवंशों को ले जाने का मौका मिल जाए।

हिन्दू विवाहिता को अगवा करने गैंग के साथ पहुँचा मुस्लिम: विरोध करने पर माँ-बाप और भाई को मारी गोली, फरारी के बाद घरों पर चला बुलडोजर

मुरादाबाद में हिन्दू विवाहिता को अगवा करने के प्रयास में उसके माँ-बाप और भाई को गोली मारने वाले आरोपित मुस्लिम के घर पर यूपी पुलिस ने बुलडोजर चला दिया। यह सभी आरोपित अभी फरार हैं। पीड़ित अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस आरोपितों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला मुरादाबाद जिले के मूढा पांडे थाने के शिवपुरी गाँव का है। यहाँ शुक्रवार रात 2 बजे मुस्लिम, उसका पिता नन्हे, आले हसन औरसुलेमान त्म्चा लेकर सुनील कुमार के घर में घुस गए। इन सभी ने सुनील कुमार की 22 वर्षीय विवाहिता और 17 वर्षीय अविवाहित बेटी के अपहरण का प्रयास किया।

दोनों लड़कियों ने चिल्ला कर जब इसका विरोध किया तो उनके घर वाले भी यहाँ इकट्ठा हो गए। इसके बाद लड़की के माता-पिता और भाई ने दोनों को बचाने का प्रयास किया। अपने काम में विफल होते देख इन लोगों ने गोलियाँ चलाना चालू कर दिया। गोली लगने से सुनील कुमार, उसका बेटा पद्म सिंह और पत्नी प्रभा देवी घायल हो गए।

इसके बाद आरोपित यहाँ से फायरिंग करते हुए भाग गए। लड़कियों के घायल परिजनों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मामले में FIR भी दर्ज कर ली गई है। इसमें मुख्य आरोपित मुस्लिम समेत 7 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ है। सारे आरोपित अभी फरार हैं। पुलिस घटना की जाँच कर रही है।

आरोपितों को पकड़ने के लिए पाँच अलग-अलग टीमे बनाई गई हैं। यह जगह जगह छापेमारी कर रही हैं। इसी क्रम में पुलिस ने आरोपितो के अवैध कब्जे पर भी कार्रवाई की है। पुलिस उनके गाँव बुलडोजर लेकर पहुँची और ग्राम समाज की जमीन पर बने निर्माण को ढहा दिया। पुलिस ने कहा है कि जो भी आरोपितों को शरण देगा उसके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।

बताया गया है कि यह आरोपित पहले भी दो बार विवाहिता को अगवा कर चुका है। वह लगातार उसे परेशान करता था। विवाहिता का ससुराल बहजोई में है। उसकी शादी पिछले वर्ष ही की गई थी। आरोपित मार्च माह में बहजोई जाकर विवाहिता को अगवा कर लाया था। इसके बाद पुलिस ने लड़की को बरामद किया था। इसके बाद वह अपने मायके में रह रही थी।

घटना के बाद मुरादाबाद के डीएम और एसपी समेत तमाम बड़े अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात करके उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मामले में कुछ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है, उन्हें निलंबित कर दिया गया है।

50 साल का मोहम्मद उस्मान 30 साल की शादीशुदा बहन के चरित्र पर करता था शक, कुल्हाड़ी से गला काटकर मौत के घाट उतारा: थाने में किया सरेंडर

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 50 साल के मोहम्मद उस्मान ने 30 साल की अपनी विवाहिता बहन जमीला बानो की कुल्हाड़ी से गला काटकर हत्या कर दी। उस्मान अपनी बहन के चरित्र पर शक करता था। उसकी बहन अपने शौहर से होकर मायके में ही रहती थी। घटना को अंजाम देने के बाद उस्मान थाने पहुँचा और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

सफदरगंज थाना के नई बस्ती मोहल्ले में शुक्रवार (28 जून 2024) की सुबह को उस्मान ने इस घटना को अंजाम दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके साथ ही पास पड़ी खून से सनी कुल्हाड़ी को भी अपने कब्जे में ले लिया। एसपी दिनेश सिंह ने घटनास्थल का मुआयना किया।

पुलिस आरोपित उस्मान और उसकी अम्मी से पूछताछ कर रही है। जमीला की अम्मी जोहरा का कहना है कि वह शुक्रवार (28 जून 2024) की सुबह सोकर उठी तो कमरे में जमीला का खून से लथपथ शव देखा। इसके बाद वह जोर-जोर से रोने लगी। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग एकत्रित हो गए। उधर, उस्मान थाने चला गया।

जमीला बानो का निकाह करीब ढाई वर्ष पूर्व मसौली थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर गाँव के रहने वाले मोहम्मद आसिफ के साथ हुआ था। जमीला लगभग 3 महीने पहले अपने मायके आकर रहने लगी थी। उस्मान को शक था कि उसकी बहन का किसी अन्य युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है। उसने सोती हुई अपनी बहन पर कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर उसकी हत्या कर दी।

आसपास को लोगों का कहना है कि मोहम्मद उस्मान को अपनी बहन को लेकर कई बातों का शक था। उस्मान उसे चरित्रहीन समझता था और मानता था कि उसका किसी के साथ अवैध संबंध है। दो दिन पहले मोहम्मद आसिफ अपनी बीवी जमीला को साथ ले जाने के लिए ससुराल भी आया था, लेकिन वह उसके साथ नहीं गई। इसके बाद से उस्मान का शक पुख्ता हो गया।

संबंधित मामले में प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह सफदरगंज का कहना है कि हत्या का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। शुरुआती जांच में बहन के कैरेक्टर पर शक करने की बात सामने आ रही है। आरोपित मोहम्मद उस्मान व उसकी माँ जोहरा से पूछताछ की जा रही है। वहीं, फरेंसिक और डॉग स्क्वायड टीम के साथ घटना स्थल का निरीक्षण किया है।

शबाना ने हिंदू सहेली की कादिर से कराई दोस्ती: रुपयों की उगाही और इस्लाम अपनाने का बनाने लगा दबाव, ‘द केरला स्टोरी’ जैसे मामले में 3 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में लव जिहाद का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो दोस्तों पर से विश्वास देगी। यह पूरी कहानी लव जिहाद पर आधारित ‘द केरला स्टोरी’ जैसी है। इसमें एक मुस्लिम लड़की ने अपनी एक हिंदू सहेली को अपने मजहब के लड़के से दोस्ती कराई। इसके बाद वह लड़का धमकी देकर लड़की से रुपयों की उगाही करने के साथ-साथ धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा।

मामला छिंदवाड़ा के शिवपुरी का है। शिवपुरी थाना के प्रभारी छत्तू सिंह सरेयाम ने बताया कि रावनवाड़ा की रहने वाली युवती ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि युवती ने कादिर, साबिर और शबाना खातून के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है और तीनों आरोपितों को दबोच लिया है।

दरअसल, युवती और साबिर, कादिर, शबाना खातून एक ही स्कूल में पढ़ते थे। शबाना उसकी सहेली है। एक दिन शबाना ने लड़की को कादिर का मोबाइल नंबर दिया और कहा कि यह बहुत अच्छा लड़का है। इससे दोस्ती करके बात करो। उसकी बातों में आकर युवती कादिर से बात करने लगी। लगभग पाँच महीने पहले कादिर ने उससे कुछ रुपए उधार माँगे।

युवती ने दोस्त समझकर उसे रुपए दे दिए। इसके बाद कादिर उससे और रुपए माँगने लगा। युवती ने फिर से उसे दे दिए। इसके बाद कादिर की डिमांड बढ़ती गई। इस बार युवती ने रुपए नहीं दिए। इतना ही नहीं, उसने कादिर को दिए उधार को भी वापस माँगा। इससे कादिर भड़क गया। उसने कहा कि उसने उसे कोई पैसे नहीं दिए।

इससे कादिर नाराज हो गया और युवती को धमकाने लगा। कादिर ने कहा कि अगर और रुपए नहीं दिए और इस्लाम अपनाकर मुस्लिम नहीं बनती है तो वह उसके पिता और भाई को वह मार देगा। इस घटना से युवती बेहद डर गई। उसने सारी बात अपने परिजनों को बताई। परिजनों ने ढाँढस बँधाया और उसे लेकर थाने पहुँचे।

थाने में युवती ने तहरीर दी। युवती की तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ उगाही की धारा 386, आपराधिक षड्यंत्र रचने की धारा 120-बी, जान से मारने की धमकी 506, 34 और मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 2021 की धारा 5 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपितों की तलाश में दबिश देनी शुरू कर दी। आखिरकार पुलिस ने तीनों को दबोच लिया। कादिर को पुलिस ने नागपुर से पकड़ा। वहीं, शबाना खातून को परासिया में उसके कार्यस्थल से पकड़ा गया है। इसके साथ ही साबिर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।

भारत से व्यापार के लिए चीन गया था राजस्थान का युवक: किडनैप करके माँगी ₹1 करोड़ की फिरौती, नहीं दिया तो बिल्डिंग से फेंक कर मारा

राजस्थान के जालौर के एक युवक की चीन में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। युवक अपने धंधे के सिलसिले में चीन गया हुआ था। उसके परिवार से पहले फिरौती की माँग की गई और बाद में उसे एक बिल्डिंग से नीचे फेंक कर मार दिया गया। हत्या के पीछे व्यापारिक विवाद माना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जालौर के भीनमाल का रहने वाला एक 26 वर्षीय सतीश माली लगातार चीन जाता रहता था। वह चीन से मोबाइल के पार्ट लाकर भारत बेचता था। इसी संबंध में वह चीन गया हुआ था। 21 जून, 2024 को चीन से ही सतीश के एक दोस्त को फोन करके जानकारी दी गई कि सतीश का अपहरण हो गया है।

सतीश के दोस्त ने यह पूरी घटना सतीश के परिवार को बताई। इन अपहरणकर्ताओं ने सतीश के परिवार से ₹1 करोड़ की माँग की थी। उन्होंने यह पैसा 22 जून तक मुंबई के एक व्यापारी पारस चौधरी को हवाला के जरिए पहुंचाने को कहा। उन्होंने धमकी दी थी कि यदि पैसा समय से नहीं पहुँचा तो सतीश को मार दिया जाएगा।

सतीश के पिता ने पैसे का इंतजाम करने के लिए समय माँगा। उन्होंने मुंबई के व्यापारी पारस से ₹50-60 लाख लेकर अपने बेटे को छोड़ने की बात कही। हालाँकि, ₹1 करोड़ का इंतजाम ना होने पर सतीश को उसके अपहरणकर्ताओं ने एक बिल्डिंग पर से फेंक दिया जिससे उसकी मौत हो गई।

सतीश की हत्या चीन गुआंगझाऊ शहर में हुई है। यहाँ वह मोबाइल के पार्ट लेने लगातार जाता था। सतीश ने यह काम मुंबई के एक अपने दोस्त के कहने पर चालू किया था। उसे काम में चचा मुनाफा हो रहा था। कुछ समय पहले चीन में अपना बिजनेस पार्टनर बदला था। बताया जा रहा है कि उसका नए पार्टनर से कुछ विवाद हुआ और इसी कारण उसकी हत्या करवाई गई।

सतीश की हत्या के बाद उसका परिवार चकित है। सतीश का शव लाने के लिए भी परिवार प्रयास कर रहा है। सतीश के परिवार ने सांसद लुम्बाराम चौधरी से मदद माँगी है। उन्होंने इस मामले में विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। मामले में सतीश का परिवार विदेश मंत्री से मिलने भी जा रहा है।

देहरादून में हसीन ने तलाकशुदा प्रेमिका रेशमा और 2 बेटियों को मौत के घाट उतारा: मुजफ्फरनगर में अरबाज ने बीवी के प्रेमी को मारा, गला और पंजे काटकर नदी में डाला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रेम विवाह करने वाले शौहर अरबाज ने अवैध संबंधों के शक में बीवी चाहत को मौत के घाट उतार दिया। उसने चाहत का गला काट दिया और हाथ के पंजों को भी। अरबाज ने अपने दोस्त के साथ मिलकर बीवी के शव को नदी में ठिकाने लगा दिया और फरार हो गया। वहीं, देहरादून में हसीन नाम के युवक ने तलाकशुदा प्रेमिका रेशमा और उसकी 2 बच्चियों को मौत के घाट उतार दिया। शव को कूड़े के ढेर में फेंक दिया। रेशमा और एक बेटी का शव तीसरे दिन बरामद हुआ, तो 18 घंटों के बाद दूसरी बेटी का शव भी कूड़े के ढेर से ही बरामद हुआ। दोनों ही मामलों में हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। हैरानी की बात है कि दोनों ही हत्याएँ प्रेम प्रसंग से जुड़ी हैं और वीभत्सता की सारी हदें तोड़ दी गई हैं।

देहरादून में ट्रिपल मर्डर, माँ और 2 बेटियों को मौत के घाट उतारा

देहरादून में शिमला बाईपास स्थित बड़ोवाला में कूड़े के ढेर में पड़े मिले महिला और दो बच्चियों के शव मिलने के मामले का खुलासा हो गया है। उनकी हत्या महिला के प्रेमी ने ही की थी। देहरादून में गद्दा फैक्ट्री में काम करने वाले और बिजनौर जिले के निवासी हसीन ने ही अपनी तलाकशुदा प्रेमिका रेशमा और उसकी 2 बेटियों की हत्या की थी। बताया जा रहा है कि रेशमा की बड़ी बेटी 15 साल की थी, जबकि दूसरी 8 माह की थी और वो इसी हसीन से पैदा हुई थी। हसीन के मुताबिक, रेशमा के खर्चे काफी बढ़ गए थे और वो उससे निकाह की जिद कर रही थी, जिसकी वजह से उनकी हत्या कर दी। हसीन ने तीनों की हत्या गद्दा फैक्ट्री में ही की, फिर शवों को कूड़े के ढेर में फेंक आया था, जो तीन दिनों बाद सड़ी-गली हालत में मिला था। माँ और एक बेटी के शव मिलने के 18 घंटे बाद दूसरी बेटी का शव वहीं कूड़े के ढेर से बरामद हुआ।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपित हसीन निवासी फरीदपुर, नहटौर, जिला-बिजनौर (उत्तर प्रदेश) को संदेह के आधार पर बुधवार देर रात हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने पूरा घटनाक्रम बयाँ कर दिया। एसएसपी ने बताया कि नहटौर निवासी रेशमा तलाकशुदा थी। उसके दो साल से आरोपित हसीन के साथ प्रेम-सबंध थे। तलाक के बाद रेशमा के साथ उसकी 15 वर्षीय बेटी रह रही थी। आठ महीने पहले रेशमा ने एक और बेटी को जन्म दिया।

रेशमा का दावा था कि हसीन से प्रेम संबंध के कारण यह बेटी हुई है। रेशमा लगातार हसीन पर शादी का दबाव बना रही थी। साथ ही वह बेटी के पालन-पोषण का खर्चा भी हसीन से माँग रही थी। मैसेज कर पुलिस से शिकायत की धमकी दे रही थी। जिससे तंग आकर उसने रेशमा व उसकी दोनों बेटियों की हत्या का षड्यंत्र रचा और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। तीनों शवों को फैक्ट्री के पीछे नाले में कूड़े के ढेर में छिपा दिया। पुलिस ने आरोपित हसीन के विरुद्ध हत्या व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया। जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

मुजफ्फरनगर में बीवी की गला रेतकर हत्या, शव को नदी में फेंका

यूपी के मुजफ्फरनगर में अरबाज ने अपने साथी के साथ मिलकर अवैध संबंधों के शक बीवी चाहत की गला और हाथ के पंजे काटकर निर्मम हत्या कर दी, फिर शव को बोरे में भरकर नदी में फेंक दिया। इस घटना के कुछ दिन बाद अरबाज फिर से नदी के पास पहुँच गया और चाहत के शव को पानी के बहाव में फेंकने लगा। तभी पुलिस को इसकी भनक लग गई और शौहर को नियाजीपुरा गाँव में स्थित काली नदी में शव को बहाने के दौरान गिरफ्तार किया।

अरबाज ने पूछताछ में बताया कि 8 महीने पहले उसने उत्तराखंड की 21 वर्षीय चाहत के साथ प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद अरबाज अपनी बीवी चाहत को घर वालों से छुपा कर किराए के मकान में रह रहा था, लेकिन अरबाज का कहना है कि उसकी बीवी चाहत के किसी अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध थे और वह खर्चा भी बहुत करती थी। इन सबसे परेशान होकर यह सब बातें जब उसने अपने दोस्त शाहरुख को बताई तो दोनों ने चाहत की हत्या करने का प्लान बनाया, आरोपित शौहर अरबाज ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और शव की पहचान न हो, इसलिए चाकू से चाहत का गला और हाथ के पंजे काट दिए फिर शव को बोरे में भरकर अरबाज और शाहरुख नियाजीपुरा गांव स्थित काली नदी में उसे ठिकाने लगा आए।

अरबाज ने बताया कि नदी में जलकुंभी होने की वजह से शव पानी में आगे नहीं बहा था, जिसके बाद बुधवार की रात वो और शाहरुख शव को आगे बढ़ाने के लिए काली नदी में पहुँचे। यहीं से वो पुलिस के हत्थे चढ़ गए। मामले में एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति ने बताया कि थाना नगर कोतवाली पुलिस को मुखबिर द्वारा इनके बारे में सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अरबाज को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसका साथी भागने में कामयाब रहा। उसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

माधुरी दीक्षित के पोस्टर पर आतंक समर्थक पाकिस्तानी इवेंट मैनेजर का नाम, सोशल मीडिया पर हुईं ट्रोल: लेकिन सच्चाई कुछ और

बॉलीवुड अभिनेत्री एक पोस्टर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गई हैं। माधुरी दीक्षित के इस पोस्टर में लिखा है कि वह आगामी दिनों में अमेरिका के ह्यूस्टन में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इस इवेंट के पाकिस्तानी इवेंट मैनेजर रेहान सिद्दीकी द्वारा आयोजित किए जाने का आरोप है। इसी को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया।

रेहान सिद्दीकी इससे पहले भी अमेरिका भीतर बॉलीवुड सितारों के कार्यक्रम आयोजित करवाता रहा है। उस पर अब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की भी नजर है। बताया गया है कि वह अमेरिका में आयोजित इन कार्यक्रम से इकट्ठा पैसे को अमेरिका में कश्मीरी आतंक और भारत विरोधी गतिविधियों के समर्थन में खर्च करता है।

इससे पहले वर्ष 2020 में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने ह्यूस्टन में होने वाला अपना एक कार्यक्रम रद्द कर दिया था क्योंकि इसके तार रेहान सिद्दीकी से जुड़ने की बात सामने आई थी।पोस्टर के अनुसार, माधुरी दीक्षित का यह कार्यक्रम 16 अगस्त, 2024 को प्रस्तावित था। इसी पोस्टर के आधार पर दीक्षित को निशाने पर लिया गया।

सोशल मीडिया पर माधुरी दीक्षित के खिलाफ दिखाई गई नाराजगी को फ्री प्रेस जनरल और नवभारत टाइम्स जैसे संस्थानों ने भी कवर किया। हालाँकि, ऑपइंडिया ने पाया है कि एक पोस्टर के अलावा ह्यूस्टन या अमेरिका में कहीं भी रेहान सिद्दीकी द्वारा आयोजित माधुरी दीक्षित के किसी भी कार्यक्रम का कोई अन्य पोस्टर या पम्फलेट नहीं है।

इसके अलावा, पोस्टर के डिज़ाइन से लगता है कि यह नकली हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसे माधुरी दीक्षित के अगले महीने अमेरिका के कई शहरों के दौरे के दूसरे पोस्टर का उपयोग करके बनाया गया लगता है। माधुरी इस दौरे के दौरान ह्यूस्टन नहीं जाएँगी।

इस पोस्टर में टैगलाइन ‘फॉरएवर क्वीन ऑफ बॉलीवुड माधुरी दीक्षित’ लिखा हुआ है और बताया गया है कि शुक्रवार (16 अगस्त, 2024) को होने वाले इवेंट के लिए टिकट सुलेखा नाम की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। हालाँकि, जब हमने सुलेखा की वेबसाइट चेक की तो हमें इस इवेंट को लेकर कोई जानकारी नहीं दिखी।

सुलेखा वेबसाइट के इवेंट सेक्शन में अगस्त में माधुरी दीक्षित के अमेरिका दौरे के टिकट मौजूद हैं, लेकिन इसमें ह्यूस्टन या टेक्सास का कोई इवेंट शामिल नहीं है। इसके अनुसार, माधुरी दीक्षित 8 अगस्त को न्यूयॉर्क, 10 अगस्त को वर्जीनिया, 11 अगस्त को अटलांटा और 15 अगस्त को न्यू जर्सी में कॉन्सर्ट में हिस्सा लेंगी।

यह टूर वर्ल्ड स्टार एंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित किया जाता है, जो एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी है और बॉलीवुड अभिनेताओं, गायकों आदि के कार्यक्रम आयोजित करती है। इस कंपनी का संचालन अतीक शेख नाम का आदमी करता है। वर्ल्ड स्टार एंटरटेनमेंट के इंस्टाग्राम पेज पर सुलेखा पर डाले गए इवेंट के अलावा दौरे के दौरान माधुरी दीक्षित के कुछ अन्य इवेंट का भी जिक्र है। यह 9 अगस्त को डलास में और 10 अगस्त को शिकागो में हैं।

इस बात की भी संभावना है कि रेहान सिद्दीकी ने अगस्त में माधुरी दीक्षित की अमेरिका में मौजूदगी के दौरान ह्यूस्टन में इस कार्यक्रम को रखा हो। हालाँकि, यह बात कई तथ्यों के आधार पर फिट नहीं बैठती। इससे लगता है कि पोस्टर नकली हो सकता है।

सबसे पहले, रेहान सिद्दीकी के इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज पर ऐसे किसी इवेंट का जिक्र नहीं है। उसके पोस्ट से पता चलता है कि वह पाकिस्तानी सितारों के साथ नियमित रूप से कार्यक्रम आयोजित करता रहा है, लेकिन हालिया सालों में उसने किसी भारतीय कलाकार को नहीं बुलाया है।

यह बात साफ है कि रेहान के आतंकियों के साथ लिंक के आरोप के बाद से भारतीय सितारे उसके द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। ऑनलाइन सर्च करने पर भी ह्यूस्टन में माधुरी दीक्षित के साथ आयोजित कार्यक्रम के बारे में कुछ नहीं मिला।

इसके अलावा, शेयर किए जा रहे पोस्टर का डिज़ाइन और टैगलाइन वर्ल्ड स्टार एंटरटेनमेंट पोस्टर के जैसा ही है, जिसका मतलब है कि यह नकली है। रेहान सिद्दीकी लंबे समय से इवेंट मैनेजमेंट में है, और यह संभव नहीं है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी के पोस्टर को अपने इवेंट के लिए कॉपी करेगा।

इस पोस्टर में फॉरएवर क्वीन ऑफ बॉलीवुड माधुरी दीक्षित टैगलाइन का इस्तेमाल किया गया है, जो उनके असली टूर के पोस्टर की तरह ही है। सरसरी निगाह डालने पर पता चलता है कि यह पोस्टर माधुरी दीक्षित के 10 अगस्त को वर्जीनिया में होने वाले कॉन्सर्ट के पोस्टर का इस्तेमाल करके बनाया गया है। टैगलाइन के साथ माधुरी दीक्षित की तस्वीर एक ही है जबकि बैकग्राउंड और बाकी जानकारी को बदल दिया गया है।

असली पोस्टर में माधुरी दीक्षित की तस्वीर सिर से कमर तक की है, ‘ह्यूस्टन पोस्टर’ में तस्वीर को काट दिया गया है, इसमें केवल सिर से छाती तक का हिस्सा रखा गया है। ऐसा असली पोस्टर में लिखी जानकारी को हटाने के लिए किया गया प्रतीत होता है।

इसलिए, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि रेहान सिद्दीकी 16 अगस्त को ह्यूस्टन में माधुरी दीक्षित के कार्यक्रम की मेजबानी नहीं कर रहा। यह पोस्टर बॉलीवुड स्टार को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। हालाँकि, माधुरी दीक्षित ने अभी तक इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

महाभारत का दुर्योधन सरकार को देता है जमीन का टैक्स, उसके नाम पर है इलाके की भूमि: केरल में है भव्य मंदिर, ‘सौम्य’ देवता के लिए चढ़ता है ताड़ी

केरल के कोल्लम जिले के एक गाँव में महाभारत के खलनायक दुर्योधन का अनोखा मंदिर है। स्थानीय लोग दुर्योधन को अपना रक्षक मानकर पूजा करते हैं और उसे प्यार से ‘दादा’ कहकर बुलाते हैं। इतना ही नहीं, इस मंदिर द्वारा दुर्योधन के नाम से भारत सरकार को टैक्स भी दिया जाता है। माना जाता है कि दुर्योधन को समर्पित यह भारत का एकमात्र मंदिर है।

यह मंदिर कोल्लम जिले के पोरुवाझी गाँव में स्थित है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस मंदिर की जमीन के लिए दुर्योधन के नाम से टैक्स भी भरा जाता है। यह टैक्स मंदिर की आय पर नहीं लगाया जाता है, क्योंकि देश में मंदिर की आय पर कर नहीं लगता है। यह कर मंदिर के नाम पर गाँव और उसके आसपास स्थित 15 एकड़ जमीन पर लगाया जाता है।

एक स्थानीय अधिकारी के मुताबिक, “जब मंदिर के लिए पट्टयम जारी किया गया तो यह जमीन मंदिर के देवता के नाम पर पंजीकृत थी। सर्वे में जमीन का स्वामित्व दुर्योधन के नाम पर है। जब से केरल में करों की शुरुआत हुई, तब से इस मंदिर की जमीनों का कर दुर्योधन के नाम पर चुकाया जाता है।” मंदिर समिति के सचिव के अनुसार, 15 एकड़ जमीन में 8 एकड़ धान का खेत है, बाकी वन भूमि है।

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि अपनी यात्रा के दौरान दुर्योधन इस गाँव में रूका था। उसे प्यास लगी थी, लेकिन पानी नहीं मिल रहा था। उसी दौरान एक दलित महिला ने उन्हें ताड़ी (देशी मद्य) पिलाई। दुर्योधन ने खुशी-खुशी ताड़ी पी ली। इसके बाद दुर्योधन ने महिला और उसके गाँव को आशीर्वाद दिया। साथ ही दुर्योधन ने गाँव वालों को जमीनें भी दान में दीं।

दुर्योधन के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए ग्रामीणों ने उनका मंदिर बनवा दिया। दुर्योधन के इस मंदिर का नाम ‘पेरिविरुथी मलानाडा’ है। इस मंदिर की खास बात ये है कि यहाँ दुर्योधन की मूर्ति नहीं है, बल्कि उसके शस्त्र गदा की पूजा की जाती है। साथ यहाँ ताड़ी एवं अन्य नशीले पदार्थों का भोग लगता है। प्रसाद के रूप में ताड़ी बाँटा जाता है। लोगों का कहना है कि इससे देवता प्रसन्न रहते हैं।

कोल्लम और आसपास के लोग दुर्योधन को सौम्य एवं दयालु देवता मानते हैं। उनका मानना है कि दुर्योधन आज भी उनकी रक्षा करता है। इसलिए गाँव के लोग उसे ‘अप्पूपा’ (दादा) कहकर बुलाते हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, मंदिर और उसके आसपास की जमीन दुर्योधन की है। वहीं, दुर्योधन हर साल भारत सरकार को टैक्स चुकाता है।

मी लॉर्ड! माना वह फुटबॉल अच्छा खेलता था, रोज नमाज पढ़ता है… पर रेप के बाद 6 साल की बच्ची की हत्या भी तो उसने ही की: ‘अल्लाह के बंदे’ पर ये दरियादिली न्याय पर आघात तो नहीं?

आपके आसपास बहुत सारे छोटे बच्चे होंगे। उनमें से शायद कोई 4-5 साल की बच्ची भी हो। इस बच्ची को गौर से देखिएगा। उसकी मासूमियत देखिएगा। उसकी बातें सुनिएगा। उसकी तुतलाती आवाज में उसे बड़े होकर क्या बनना है, क्या करना है सब सुनिएगा। फिर ओडिशा का एक मामला सोचिएगा। एक ऐसा मामला जो आपको भीतर तक झकझोर दे और आप समझ पाएँ कि इस बच्ची के सपने पूरे होने के लिए कितना जरूरी है कि उसे आसिफ अली जैसों से बचाकर रख जाए।

बात साल 2014 की है। दोपहर के 2 बजे एक 6 साल की छोटी बच्ची अपने एक कजन के साथ पास की चॉकलेट की दुकान पर चॉकलेट लेने गई। घरवालों को लगा दुकान पास है तो दोनों बच्चे जल्दी आ जाएँगे, लेकिन देखते ही देखते घड़ी में 3 बजने लगे। परिवार के लोग चिंतित हो गए। उन्होंने बच्ची को ढूँढना शुरू किया। आसपास लोगों को पता चला तो वो भी निकले। इसी छानबीन में ग्रामीणों को बच्ची का शव अचेत अवस्था में मिला। साथ ही उसके नाभि पर नोचने के निशान थे, पीठ पर नाखून लगे थे और जांघ से लेकर घुटनों तक खून बह रहा था। परिजनों ने उसे देखा तो दौड़कर अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने उसकी हालत देखी तो फौरन उसे एससीबी मेडिकल कॉलेज भेजा। परिजन इस उम्मीद में थे कि वहाँ के डॉक्टर बच्ची को देखेंगे तो शायद उनकी बेटी आँख खोल लेगी। लेकिन हुआ ऐसा कुछ नहीं।

डॉक्टरों ने उसे देखा और मृत घोषित कर दिया। परिवार डॉक्टरों की बात सुन सन्न था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि घर से चॉकलेट लेने निकली बिटिया के साथ आखिर ये क्या हो गया। तब तक डॉक्टर ने उन्हें बताया कि किसी ने उनकी बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसका गला दबाकर उसे मार डाला है। परिवार रोता-रोता बेटी का शव लेकर गाँव आ गया। मामले में शिकायत दी गई। पुलिस भी सक्रिय हुई।

बच्ची के कजन से पूछताछ हुई तब उसने डरते हुए बताया कि जब वो दोनों चॉकलेट लेकर आ रहे थे उस समय किसी ने बहन का मुँह दबाकर उसे उठा लिया था। बाद में वह उसे लेकर अपने साथ चला गया। सारे बिंदु जानने के बाद ये साफ था कि बच्ची का दुष्कर्म हुआ है। थाने में दर्ज एफआईआर में धारा 376(ए), 376(2)(f)(g) जोड़ी गई। साथ ही पॉक्सो की धारा 6 भी केस में लगाई गई। पुलिस ने जाँच के दौरान 21 अगस्त 2014 की रात टीम को सबूत जुटाने भेजा। इस दौरान एक अकील अल्ली भी गिरफ्तार हुआ। उसे वहाँ से मेडिकल ऑफिसर के पास भेजा गया और अगली सुबह घटनास्थल की जाँच के दौरान बच्ची के अंडर गार्मेंट, तौलिया, सिगरेट, चप्पल, 40 दारू की बोतल, सोने की ईयरिंग आदि चीजें मिलीं। सबकी फॉरेंसिक जाँच हुई। शराब की बोतल से तीन तरह के फिंगल प्रिंट मिले। प्यूबिक हेयर मिले और सीमन के सैंपल मिले।

जाँच के बाद अकील को कोर्ट में पेश किया गया और बाकी दोनों आरोपितों की तलाश भी शुरू हुई। बड़ी मशक्कत के बाद 5 सितंबर 2014 को आबिद और आसिफ अली को पकड़ा। कुल मिलाकर इस मामले में 21 अक्तूबर को जो चार्जशीट दाखिल की गई उसमें आबिद अली, आसिफ अली और अकील अली का नाम था।

बच्ची के कजन ने भी कन्फर्म किया कि अकील अली ने ही बच्ची का मुँह पकड़ा था जबकि आसिफ उसे उठाकर लेकर गया था। इसके बाद उसके साथ रेप किया हुआ। सबूतों के अभाव में आबिद अली को उसी समय छोड़ दिया गया जबकि बाकियों को आईपीसी की दारा 302,376-ए, डी और पॉक्सो की धारा 6 के तहत दोषी बनाया गया और इनको सजाए-ए-मौत मुकर्रर हुई।

समय बीता और फिर इन आरोपितों ने अपनी रिहाई के लिए कोर्ट में फिर गुहार लगाई। इस बार मामला ओडिशा हाई कोर्ट में सुना गया। हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपित आसिफ अली का जेल में बर्ताव पिछले 10 साल में काफी अच्छा रहा है। कोर्ट ने कहा कि 10 साल जेल में रहने के दौरान आसिफ ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे जेल के स्टाफ को दिक्कत का सामना करना पड़ा हो इसलिए उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जाता है। वहीं कोर्ट ने दूसरे आरोपित अकील अली को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

जजो ने इस दौरान जो कहा वो हैरान करने वाला है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अदालत ने इस दौरान हैरान करने वाली टिप्पणी की। जैसे एक जगह कहा गया “वह एक पारिवारिक व्यक्ति है और उसकी 63 साल की बूढ़ी माँ और दो अविवाहित बहनें हैं। वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला था और मुंबई में पेंटर का काम करता था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है।”

इसके अलावा कहा गया “स्कूल में उसका चरित्र और आचरण अच्छा था और उसने वर्ष 2010 में मैट्रिक पास किया था। परिवार में आर्थिक समस्याओं के कारण वह अपनी उच्च शिक्षा जारी नहीं रख सका। वह अपनी किशोरावस्था के दौरान क्रिकेट और फुटबॉल का अच्छा खिलाड़ी था। यद्यपि वह लगभग दस वर्षों से न्यायिक हिरासत में है, जेल अधीक्षक और मनोचिकित्सक की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि जेल के अंदर उसका आचरण और व्यवहार सामान्य है, सह-कैदियों के साथ-साथ कर्मचारियों के प्रति उसका व्यवहार सौहार्दपूर्ण है और वह जेल प्रशासन के हर अनुशासन का पालन कर रहा है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में दोषी की सजा कम करते हुए कहा, “वह दिन में कई बार अल्लाह से दुआ करता है। वह दंड स्वीकार करने को भी तैयार है क्योंकि उसने अल्लाह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इस अपराध को ‘दुर्लभतम’ की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए, जिसमें सिर्फ मृत्युदंड की सजा दी जा सकती है।”

अब आसिफ अली की सजा कम होने के बाद जो कोई इस बारे में सुन रहा वो इस निर्णय पर तमाम तरह के सवाल उठा रहा है, जोकि उठाना जायज भी हैं। लोगों की भावनाओं को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि 5-6 साल की बच्ची को देख उसकी मासूमियत बने रहने की हर कोई प्रार्थना करता है। कोई सोचना भी नहीं चाहता है कि बच्चियोंं को रास्ते में कभी कोई आसिफ जैसे हैवान मिलें। जैसे 2014 में उस बच्ची को आसिफ के रूप में मिला।

सोचकर देखिए, आसिफ अली भले ही 10 साल से जेल में रहते हुए अच्छा व्यवहार कर रहा हो, अपने नमाज पढ़ने से लोगों को ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा हो या शायद उसकी बातों में मिठास आ गई हो… लेकिन क्या इन सब बदलावों का अर्थ ये है कि इस बात को भुला दिया जाए कि उसने किया क्या था। 10 साल का समय बहुत लंबा समय होता है। सजा मिलने के बाद एहसास होना और व्यवहार में बदलाव आना सामान्य है। मगर ये सोचकर कानूनी रूप से किसी को रिहा किया जाना उस परिवार के लिए पीड़ादायक है जिन्होंने अपनी बच्ची खो दी सिर्फ इसलिए क्योंकि 10 साल पहले आसिफ के भीतर ये ईमान नहीं था। ये सच कोई नहीं बदल सकता कि मामले में दोषियों ने हैवान बनकर उस बच्ची को नोचा था। आज उनका हृदयपरिवर्तन होने से गुनाह कम नहीं होते। जैसे आसिफ के लिए ये 10 साल का समय बीता है वैसा उस परिवार के लिए भी तो बीता है। आज अगर वो मासूम होती तो वो भी 15-16 साल की होती। अपनी किशोवस्था में अपने सपने पूरा करने के लिए कुछ न कुछ कर रही होती। हो सकता है वो भी नमाज पढ़ती, सबसे अच्छे से व्यवहार करती… क्या उस बच्ची के होने के मायने कुछ नहीं होते।

4 साल बाद ट्रंप ने बायडेन से हिसाब किया चुकता, प्रेसिडेंशियल डिबेट में अबकी बार धो डाला: अमेरिकी राष्ट्रपति की कई बार जुबान लड़खड़ाई, टेंशन में डेमोक्रेट

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाली बहस में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति जो बायडेन के छक्के छुड़ा दिए। डेमोक्रेट राष्ट्रपति बायडेन, रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प के सामने कई मुद्दों पर अटकते नजर आए और बोल भी नहीं सके। इस बहस की कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं और बायडेन की आलोचना की जा रही है।

राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों के बीच यह बहस अमेरिकी मीडिया चैनल CNN ने आयोजित करवाई थी। इस दौरान हर मुद्दे पर ट्रम्प, बायडेन से आगे दिखे और स्पष्टता से अपनी बातें रखी। वहीं बायडेन अधिकांश मुद्दों पर बात करते हुए अटकते रहे और कई बार बोल ही नहीं पाए। यहाँ तक कि वह कई मुद्दों पर बात करते हुए काफी चीजें भूल भी गए।

ट्रम्प और बायडेन के बीच हुई बहस में अमेरिका में मेक्सिको की सीमा से घुसने वाले अवैध प्रवासियों का मुद्दा तेजी से उठा। इस पर बोलते हुए बायडेन ने दावा किया कि ट्रम्प के जाने के बाद यह घट गया है और इस पर वह एक्शन जारी रखेंगे। बायडेन ने दावा किया कि ट्रम्प के शासनकाल के मुकाबले अवैध प्रवासियों की संख्या में 40% की गिरावट आई है। इसके बाद जवाब देते हुए उनकी जुबान लड़खड़ा गई और वह कुछ देर तक बोल ही नहीं सके।

इसी मुद्दे पर ट्रम्प ने बायडेन को घेर लिया। उन्होंने कहा कि बायडेन ने जो कुछ भी कहा ना उन्हें समझ में आया, और शायद बायडेन खुद ना जान पाए हों। इसके बाद ट्रम्प ने कहा कि बायडेन ने अमेरिका की सीमा को मानसिक रोगियों और पागलों और यहाँ तक कि आतंकियों के लिए तक खोल दिया। ट्रम्प ने कहा कि वर्तमान में अमेरिका में सबसे अधिक संख्या में आतंकी मौजूद हैं। ट्रम्प ने कहा कि पूरी दुनिया से अवैध प्रवासी बायडेन के काल में अमेरिका में आए।

अवैध प्रवासियों के अलावा ट्रम्प ने बायडेन को अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर भी घेरा। बायडेन ने दावा किया कि उनके सत्ता में आने के दौरान अमेरिका में भारी बेरोजगारी थी। कोरोना महामारी के कारण देश पटरी से उतरा था, जिसे वापस लाया गया। वहीं इसी मुद्दे पर ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने अपने शासनकाल में देश के टैक्स में सबसे बड़ी कमी की। इस कारण से लाखों नई नौकरियाँ पैदा हुईं।

ट्रम्प ने बताया कि उनके क़दमों के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था संभल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि बायडेन ने अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर देश में खूब पैसा भाया जिससे महंगाई बढ़ गई और 14 महीने लगातार महंगाई का स्तर 9% रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि जितनी भी नौकरियाँ बायडेन काल में दी गई, वह सभी अवैध प्रवासी ले गए।

ट्रम्प इस दौरान अमेरिका में स्वास्थ्य के मुद्दे पर भी भारी पड़े। ट्रम्प ने कहा कि उनके शासनकाल में कोविड का सबसे बुरा दौर था लेकिन तब भी उतने लोगों की मौत नहीं हुई जितने बायडेन के शासनकाल में मरे। उन्होंने आरोप लगाया कि बायडेन शासनकाल में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल हो गया। वहीं इस पर जवाब देते हुए बायडेन इधर उधर की बात करने लगे और थोड़ी देर में एक शब्द ‘मेडीकेयर’ पर अटक गए। उन्होंने अंत में कहा कि हमने मेडीकेयर को परास्त किया। ट्रम्प ने इसका फायदा उठाया और कहा कि बायडेन ने मेडीकेयर को खत्म कर दिया।

पूरी बहस के दौरान जहाँ ट्रम्प अपने जवाबों को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वास में दिखे वहीं बायडेन ना ही स्पष्ट उत्तर दे सके और लगातार उनकी जुबान लड़खड़ाती रही। वह कई मुद्दों के दौरान बात करते हुए भटक भी गए। बायडेन के इस बहस में खराब प्रदर्शन के कारण अब उनकी पार्टी डेमोक्रेट्स चिंता में है।

डेमोक्रेट्स अब इस बात को लेकर भी बहस कर रहे हैं कि बायडेन को यह चुनाव भी लड़ना चाहिए या नहीं। उनकी आयु 81 वर्ष हो चुकी है और वह कई चीजे भूल गए। डेमोक्रेट्स इसके बाद लगातार बायडेन का बचाव भी करते दिखे। वहीं ट्रम्प के समर्थक सोशल मीडिया पर उनकी प्रशंसा करते दिखे। उन्होंने कहा कि बायडेन को पूरी तरह से ट्रम्प ने पराजित कर दिया। यह बहस देखने वाले 67% लोगों ने कहा कि ट्रम्प आगे रहे। वहीं 2020 में हुई ट्रम्प और बायडेन की बहस में बायडेन आगे रहे थे।

अमेरिका में नवम्बर, 2024 में चुनाव होने हैं। जनवरी, 2025 में अमेरिका को नया राष्ट्रपति मिलेगा। वर्तमान राष्ट्रपति बायडेन और पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच राष्ट्रपति पद के लिए यह दूसरा मुकाबला होगा। पिछली बार बायडेन के हाथों ट्रम्प को शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस बार के चुनावों में ट्रम्प का पलड़ा भारी लग रहा है।