बिहार के पूर्णिया में 2 जून, 2024 को हुई एक व्यवसायी गोपाल यादुका की हत्या की सुपारी राजद नेता बीमा भारती के बेटे राजा ने दी थी। उसने ही व्यापारी को मारने के लिए शूटरों का इंतजाम किया था। हत्या का खुलासा होने के बाद से राजा फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। बीमा भारती ने हाल ही में राजद के टिकट से लोकसभा चुनाव लड़ा था।
पूर्णिया पुलिस ने हार्डवेयर व्यापारी गोपाल यादुका की हत्या का खुलासा करते हुए पूरा घटनाक्रम बताया है। पुलिस ने बताया है कि संजय नाम के एक शख्स से गोपाल यादव का जमीनी विवाद था। वह गोपाल यादुका की हत्या करवाने के लिए शूटर तलाश रहा था। संजय, राजा का दोस्त है। जब उसे शूटर नहीं मिले तो उसने अपनी यह परेशानी बीमा भारती के बेटा राजा को बताई, इसके बाद राजा ने हत्या करवाने के लिए शूटर उपलब्ध करवाए।
हत्या के लिए ₹5 लाख में डील तय हुई थी। इसके लिए विशाल नाम के शूटर को सुपारी दी गई थी। विशाल ने एक विकास यादव नाम के एक और अपराधी को अपने साथ इस हत्या के लिए शामिल किया था। दोनों ने 2 जून, 2024 को सुबह ही गोपाल यादुका की हत्या कर दी। इस दौरान वह भवानीपुर में अपनी दूकान खलने गए हुए थे। हत्या के दौरान ब्रजेश यादव और संजय भी मौजूद थे। ब्रजेश यादव भी राजा का दोस्त है।
इस हत्या के बाद यह चारों राजा के पास कडवा वासा इलाके में इकट्ठा हुए जहाँ सबने मिलकर मटन पार्टी की। राजा ने इस दौरान ब्रजेश यादव को ₹48,00 और विकास यादव को ₹50,000 दिए। विकास को हत्या से पहले भी ₹76,000 भेजे जा चुके थे। पुलिस ने हत्या के खुलासे के बाद विकास यादव, ब्रजेश यादव और संजय को गिरफ्तार कर लिया है। राजा इस हत्या के खुलासे के बाद फरार हो गया है। उसकी तलाश की जा रही है।
इस मामले में राजा के शामिल होने की सूचना सामने आने के बाद बीमा भारती पर प्रश्न उठ रहे हैं। बीमा भारती ने पूर्णिया से लोकसभा चुनाव 2024 राजद के टिकट पर लड़ा था। उन्हें मात्र 27,120 वोट यहाँ से मिले थे। वह रुपौली विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार विधायक रही हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के पहले वह जदयू छोड़ कर राजद में आ गईं थी। रुपौली सीट पर फिर से उपचुनाव होने वाला है। लोकसभा चुनाव हारने के बाद बीमा भारती यहाँ से टिकट के लिए प्रयासरत हैं।
#WATCH | Patna: RJD leader Bima Bharti says, "…Today evening we will get the symbol (Rupauli by-poll)…There is a lot of difference between Lok Sabha & Vidhan Sabha elections…Either I or my husband will contest the election…" pic.twitter.com/EQRUj1JInf
बीमा भारती ने मंगलवार (18 जून, 2024) को बीमा भारती ने स्पष्ट किया है कि उन्हें राजद विधानसभा उपचुनाव के लिए भी टिकट दे रही है। उन्होंने कहा है कि इस सीट से वह खुद या उनके पति चुनाव लड़ेंगे। अपने बेटे के हत्या में शामिल होने को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा है। बीमा भारती का बेटा राजा लोकसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव के बगल में खड़ा देखा गया था।
यूके के संसदीय चुनाव में कश्मीर की ‘आजादी’ की आवाज उठाने को मुद्दा बनाकर वोट माँगा जा रहा है। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता ने अपने इलाके के मुस्लिमों को हिंदू घृणा, नरेंद्र मोदी से नफरत और भारत विरोधी प्रचारों के जरिए आकर्षित करने की कोशिश की है। इस नेता का नाम मार्को लोंगी है, जो इस्लामियों से वोट माँग रहा है, ताकि वो ब्रिटेन की संसद में कश्मीर “आज़ादी” का मुद्दा उठा सकें।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डुडले में ब्रिटिश पाकिस्तानी और कश्मीरी समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कंजर्वेटिव पार्टी के नेता मार्को लोंगी ने पहले तो बकरीद की शुभकामनाएँ दी, उसके बाद भारत विरोधी आग उगलना शुरू किया। उसने कहा, ‘भारत में बीजेपी फिर से चुनी गई है, इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में ‘कश्मीर के लोगों के लिए कठिन समय’ होगा। नरेंद्र मोदी ने हाल में साफ कहा कि वो कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्ज देने जा रहे हैं, जिसका मतलब होगा कि कश्मीरियों की संप्रभुता का अधिकार और स्पेशल स्टेटस छिन जाएगा।’ इस दौरान हिंदू विरोधी, भारत विरोधी पर्चा भी बाँटा गया।
कंजर्वेटिव पार्टी में टोरियों के तौर पर माने जाने वाले मार्को लोंगी ने कहा कि वो साल 2019 में सांसद बने थे, तो ‘कश्मीरी पर हो रहे भारत सरकार के अत्याचारों’ को लेकर मुखर रहे थे। लोंगी ने दावा किया कि उन्होंने कश्मीर से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और कश्मीर में भारत सरकार की कार्रवाईयों की निंदा की।
इस पर्चे में लेबर पार्टी की संसदीय उम्मीदवार सोनिया कुमार पर विशेष तौर पर निशाना साधा गया है और उनके उपनाम ‘कुमार’ को हाईलाइट किया गया है। पर्चे में लिखा है, “मैं यह फैसला आप पर छोड़ता हूँ। अगर आप मुझे वोट देते हैं, तो मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं संसद में कश्मीर के लिए अपनी आवाज और भी बुलंद करूँगा और संसद में कश्मीरियों के लिए खड़े होने में सबसे आगे रहूँगा।”
लीसेस्टर ईस्ट में लेबर संसदीय उम्मीदवार राजेश अग्रवाल ने लोंगी द्वारा जारी किए गए पर्चे की निंदा की और कहा, “यह समुदायों को विभाजित करने का एक शर्मनाक प्रयास है और मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों के लिए अपमानजनक है। लोंगी जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, वो बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से लोंगी का समर्थन वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा, “ऋषि सुनक को पार्टी से पहले देश को प्राथमिकता देनी चाहिए और लोंगी के अभियान के लिए अपनी पार्टी का समर्थन तुरंत वापस लेना चाहिए और ब्रिटिश भारतीयों को अलग-थलग करने के प्रयास के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए।”
Rishi Sunak should put country before party and immediately remove his Party’s support for Mr Longhi campaign and apologise for attempting to alienate British Indians.” (2/2)
दूसरी ओर, मार्को लोंगी ने पर्चे का बचाव करते हुए कहा कि वह बस “अपने निर्वाचन क्षेत्र में अपने कश्मीरी समुदाय का मुखर समर्थन कर रहे थे।” उसने आगे तर्क दिया कि डुडले में बहुत ही मिश्रित समुदाय है और वह बहुत से लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, “अतीत में उनमें से कई लोगों ने मुझसे कहा है कि वे कश्मीर में जो कुछ हो रहा है, उससे बहुत चिंतित हैं।”
लोंगी ने इस बात पर जोर दिया कि यह पर्चा “राजनीति” का हिस्सा है, “यह राजनीति है, है न? क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को चाहते हैं जो लगातार कश्मीरियों का समर्थन करता रहा है, जहाँ मानवाधिकारों का हनन हुआ है या आप सोनिया कुमार नामक किसी ऐसे व्यक्ति को चाहते हैं, जिसके बारे में किसी ने कभी सुना ही न हो? मुझे नहीं लगता कि मेरे लिए अपने कश्मीरी समुदाय के सदस्यों के सामने इस बात को उजागर करना कोई समस्या है।” जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने कुमार के उपनाम को क्यों उजागर किया, तो उन्होंने कहा, “उनके पास सिर्फ़ स्टारमर का एक पर्चा है। मैं चाहता हूँ कि लोग जानें कि मैं स्टारमर के खिलाफ़ नहीं खड़ा हूँ, मैं कुमार के खिलाफ़ खड़ा हूँ।”
लोंगी ने आगे दावा किया कि वह केवल व्यापक समुदायों के भीतर एक समूह का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और यह विशेष रूप से कश्मीरियों का प्रतिनिधित्व कर रहा था। सोनिया कुमार ने पर्चे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
बॉलीवुड की मशहूर गायिकाओं में से एक अलका याग्निक को एक दुर्लभ बीमारी डायगनोस हुई है। इसका खुलासा उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर किया है। अपने पोस्ट में उन्होंने बताया है कि वो इस समय सुन नहीं पा रही हैं।
इंस्टाग्राम पर इस समस्या के बारे में बताते हुए अलका ने लिखा, “मेरे सभी फैन्स, दोस्तों, फॉलोअर्स और शुभचिंतकों, कुछ हफ्ते पहले, जब मैं एक फ्लाइट से बाहर निकल रही थी तो मुझे अचानक लगा कि मैं कुछ सुन नहीं पा रही हूँ। इस एपिसोड के बाद के हफ्तों में थोड़ी हिम्मत जुटाने के बाद, अब मैं अपने दोस्तों और शुभचिचिंतकों के लिए, इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ना चाहती हूँ, जो मुझसे लगातार पूछ रहे हैं कि मैं कहाँ गायब हूँ।”
अलका ने आगे बताया, “मेरे डॉक्टर्स ने इसे एक रेयर सेंसरी नर्व हियरिंग लॉस डायग्नोज किया है, जो एक वायरल अटैक की वजह से हुआ है। इस अचानक से हुए बड़े सेटबैक ने मुझे शॉक कर दिया है। मैं उसे स्वीकार करने की कोशिश कर रही हूँ, इस बीच अप मुझे अपनी दुआओं में याद रखिएगा।”
अपने पोस्ट में अलका याग्निक ने युवाओं को भी संदेश दिया। उन्होंने लिखा, “मेरे फैन्स और यंग साथियों को मैं हेडफोन्स और लाउड म्यूजिक को लेकर एक चेताना चाहती हूँ। किसी दिन मैं अपनी प्रोफेशनल लाइफ से, हेल्थ को होने वाले नुकसान पर बात जरूर करूँगी। आप सबके प्यार और सपोर्ट से, मैं फिर से अपना जीवन पटरी पर लाने की आशा करती हूँ और जल्द ही फिर आपके सामने आने की कामना करती हूँ। इस क्रिटिकल समय में आपका सपोर्ट और अंडरस्टैंडिंग मेरे लिए बहुत मायने रखती है।”
क्या है लक्षण, कैसे होती है ठीक हियरिंग लॉस की बीमारी
बता दें कि जिस रेयर सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस का शिकार अलका याग्निक हुई हैं वो अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। सामान्य तौर पर ये सिर में कोई गंभीर चोट लगी है, या आप रोजाना तेज ध्वनी के संपर्क में आने से अचानक सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता हैं। इसके अतिरिक्त रक्तप्रवाह में रुकवाट आने से भी हियरिंग लॉस होता है और बहुत सी बात गलत दवाइयों के कारण ऐसा सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस हो जाता है। वायरल संक्रमण के कारण भी सुनने की क्षमता अचानक ही कम हो जाती है।
डॉक्टर इस बीमारी से बचने के लिए सलाह देते हैं कि कभी भी किसी साउंड सिस्टम को जरूरत से ज्यादा तेज आवाज में न चालू करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो सबसे पहले तो ईयर प्रोटेक्टर पहलें। ईयर वैक्स को ठीक से हटाएँ। फिर भी अगर किसी को अचानक इस तरह बहरेपन के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे ऑडियोमैट्री टेस्ट कराना चाहिए, इसके अलावा एमआरआई और सीटी स्कैन से भी बीमारी का पता लगने में सहायता होती है। बीमारी डिटेक्ट होने के बाद दवाई देकर, ऑक्सीजन थेरेपी देकर इस बीमारी का इलाज संभव होता है।
बकरीद के मौके पर बकरों को कुर्बानी से बचाने के लिए जैन समाज ने ₹11 लाख खर्च करके 100 से अधिक बकरों को खरीद लिया। जैन समाज ने आपसी सहयोग के माध्यम से यह कदम उठाया और अब यह बकरे आगे भी काटे जाने से बचें, इसका भी इंतजाम कर दिया है।
यह पूरा मामला दिल्ली का है। यहाँ बकरीद (17 जून, 2024) के मौके पर काटे जाने के लिए बकरों की खरीद बिक्री के बीच जैन समाज से जीव हत्या को रोकने के लिए एक शानदार निर्णय लिया। दिल्ली धर्मपुरा जैन मंदिर से जुड़े लोगों ने यह पहल की।
धर्मपुरा जैन मंदिर के युवा जैन संगठन ने इसके लिए समाज से अपील की कि वह जीव हत्या रोकने के लिए सहयोग करें। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुपों में सहयोग की अपील की गई। देखते-देखते इस अपील के कारण ₹11 लाख जमा हो गए और इसके बाद बकरों की खरीददारी चालू हो गई।
जैन समाज ने जमा की गई इस धनराशि से बाजार में कुर्बानी के लिए बिक रहे 127 बकरे खरीदे और उनका जीवन बचा लिया। उनको कटने से बचाने के बाद जैन समाज ने उन्हें एक जगह इकट्ठा करके जीवसेवा के लिए रखा है। यहाँ उन्हें लगातार दाना पानी दिया जा रहा है। सभी बकरों की मेडिकल जाँच भी करवाई गई है।
बकरों के खाने-पीने के अलावा, उनको भविष्य में कोई कुर्बानी के लिए दोबारा ना खरीद सके, इसके भी इंतजाम किए गए हैं। इन बकरों को आगे सहारनपुर स्थित एक पशुशाला में भेजा जाएगा, यहाँ इनको पाला जाएगा। इन्हें आगे अब कभी बेंचा नहीं जाएगा।
बकरों को बचाने वाले युवाओं ने बताया कि उन्हें देश-विदेश से इस पुनीत कार्य के लिए चन्दा मिला है। उन्होंने बताया कि इस कम में जैन समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों ने भी पैसा दिया है। अब इनकी आगे की व्यवस्था की जा रही है। जैन मंदिर से जुड़ी समाजसेवी महिला ने बताया कि उनका धर्म अहिंसा की प्रेरणा देता है और इसीलिए उन्होंने यह कदम उठाया।
युवाओं ने बताया कि इस बकरीद पर यह केवल एक छोटे प्रयास के रूप में चालू किया गया था। आगे इसका दायरा बढ़ाया जाएगा ताकि और भी बेजुबानों की रक्षा हो सके। इसमें देश विदेश के लोगों को जोड़ा जाएगा। इसको अब बड़े स्तर पर किया जाएगा।
गौरतलब है कि बकरीद के पहले देश भर में बकरों की काफी बिक्री होती है, इन्हें मुस्लिम कुर्बान करने के लिए खरीदते हैं। इन्हें कुछ दिन पहले खरीदने के बाद कुर्बान कर दिया जाता है। इस दौरान बकरों की कीमत भी बाजार में बढ़ जाती है।
मुस्लिमों के 5 सबसे बड़े धार्मिक कार्यों में से एक हज है। सऊदी अरब के मक्का-मदीना के बीच की मजहबी यात्रा को अपने जीवन में एक बार जरूर करना हर मुस्लिम का फर्ज है। लेकिन सऊदी अरब में इस साल हज यात्रा पूरा होने की जगह लोगों की जिदगियाँ पूरी हो रही हैं। भयंकर गर्मी की वजह से लोगों की मौतें हो रही हैं। अब तक 22 हज यात्रियों की मौत हो गई है। तो हीटस्ट्रोक की वजह से 2700 से ज्यादा लोगों की हालत खराब है।
इस साल, हज यात्रा पर 1.8 मिलियन लोग यानी 18 लाख लोग पहुँचे हैं। इसमें से 16 लाख लोग विदेशी हैं। भारी भीड़ और भीषण गर्मी-लू की वजह से जॉर्डन के 17, ईरान के 5 लोगों की मौत हो गई। इस बीच, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो सऊदी अरब का बताया जा रहा है।
इस वीडियो को शेयर किया है पत्रकार मोहम्मद ताहा ने। इस वीडियो को बनाने वाला व्यक्ति सड़क पर पड़े हुए शवों को दिखाता है और दावा करता है कि घंटों तक कोई एंबुलेंस नहीं आई। इस वीडियो में कई शव सड़कों के किनारे डिवाइडर और फुटपाथ पर रखे देखे जा सकते हैं। यही नहीं, व्यक्ति वीडियो बनाते समय कई शवों को पास से भी दिखाता है और बताता है कि बस, ट्रेन, टैक्सी जैसी कोई भी सुविधा नहीं है और लोग मर रहे हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
मोहम्मद ताहा ने वीडियो को पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा, “इस वीडियो में कई हज यात्रियों के कई शव देखे जा सकते हैं। क्या सऊदी शासन को जवाब देह ठहराया जाएगा? वे इस इस्लामी पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और इससे अरबों कमाते हैं। लेकिन अभी तक, मैंने इस पर मीडिया में ज़्यादा कवरेज नहीं देखी है!”
#BREAKING ⚠️ GRAPHIC IMAGES. Several dead bodies of #Hajj pilgrims can be seen in this video now viral on social. Will the #Saudi regime be held accountable? They promote this Islamist tourism & make billions from it. But as of yet, I haven't seen much media coverage of this! pic.twitter.com/wfOO9OFGKv
मिस्र की 61 वर्षीय तीर्थयात्री अजा हामिद ब्राहिम ने समचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्होंने सड़क के किनारे पड़ी हुई लाशें देखीं। ऐसा लग रहा था कि जैसे कयामत का दिन आ गया है। बड़ी संख्या में मौतों और उसके बाद शवों को लेकर हो रही बदइंतजामी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग सऊदी अरब की आलोचना कर रहे हैं।
काबा में 51 डिग्री सेल्सियस तपामान
सऊदी मौसम सेवा के अनुसार, सोमवार (17 जून 2024) को मक्का की ग्रैंड मस्जिद में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस पहुँच गया। इस जगह पर तीर्थयात्री काबा की परिक्रमा करते हैं। ग्रैंड मस्जिद के पास स्थित मीना में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस था। इस जगह पर हज यात्रियों ने तीन कंक्रीट की दीवारों पर शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा की। यहाँ गर्मी और भीड़ ने स्थिति को विकट बना दिया था।
खुद को परमाणु ताकत बताकर अक्सर भारत के आगे उछलने वाले पाकिस्तान के लिए चिंताजनक खबर है। एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि इस साल यानी 2024 में भारत परमाणु शक्ति के मामले में उनसे आगे निकल गया है। ये रिपोर्ट स्वीडिश थिंक-टैंक (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट) ने जारी की है। रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि परमाणु से लैस देश परमाणु हथियारों को बढ़ा रहे हैं और उनका आधुनिकीकरण कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास 2024 में 172 परमाणु हथियार हैं जबकि पाकिस्तान के पास इसकी संख्या 170 ही है। रिपोर्ट दिखाती है कि भारत ने 2023 वर्ष में अपने परमाणु हथियारों की संख्या को बढ़ाया है। 2023 में भारत के पास 164 परमाणु हथियार थे लेकिन 2024 में ये संख्या 172 हो गई है। वहीं पाकिस्तान के पास अब भी पिछले साल जितने परमाणु हथियार हैं। 170 के 170।
सिपरी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का मुख्य लक्ष्य जहाँ भारत को टारगेट करना है, तो वहीं भारत लगातार लंबी दूरी की मिसाइलों को बनाने की कोशिश में है, ताकि चीन के पूरे क्षेत्र तक अपनी पहुँच बना सके।
उल्लेखनीय है कि SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में परमाणु शक्ति संपन्न देशों में भारत, चीन, पाकिस्तान के साथ अलावा अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, उत्तर कोरिया और इजरायल भी आते हैं। इनमें से अमेरिका के पास 3708 हथियार हैं। वहीं रूस के पास 4380 हथियार हैं। ब्रिटेन पर 225, फ्रांस पर 290 है, नॉर्थ कोरिया पर 50 और इजरायल पर 90।
इन सबके अलावा चीन की बात करें तो चीन भी लगातार अपने पास परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ा रहा है। 2023 में उनके पास 410 परमाणु हथियार थे। हालाँकि अब उनके पास 2024 में 500 हथियार हैं। इसका मतलब साफ है कि उन्होंने एक साल में 90 परमाणु हथियारों का निर्माण किया है।
ये वृद्धि उस समय देखने को मिली है जब हाल ही में कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में परमाणु नीति कार्यक्रम और कार्नेगी चीन के एक वरिष्ठ फैलो टोंग झाओ ने कहा था कि 2027 तक 700 से अधिक और दशक के अंत तक 1,000 से अधिक वारहेड हो सकते हैं।
रिपोर्ट ये भी जानकारी देती है कि युद्ध के दौर के हथियारों के खत्म होने के कारण दुनिया भर में परमाणु हथियारों की कुल संख्या में कमी आ रही है, लेकिन संघर्ष की स्थिति में तुरंत इस्तेमाल किए जा सकने वाले ऑपरेशनल वॉरहेड की संख्या में साल-दर-साल लगातार वृद्धि हो रही है। दुनियाभर में लगभग 2,100 तैनात परमाणु हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइलों पर लगाकर उच्च परिचालन अलर्ट की स्थिति में रखा गया है। इनमें से लगभग सभी रूस और अमेरिका के हैं।
खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को मारने की साजिश में गिरफ्तार भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने खुद को दोषी नहीं माना है। निखिल गुप्ता ने एक अमेरिकी कोर्ट में पेशी के दौरान यह किया। निखिल गुप्ता को इससे पहले चेक गणराज्य से प्रत्यर्पित करके लाया गया था।
जानकारी के अनुसार, सोमवार (17 जून, 2024) को निखिल गुप्ता को न्यूयॉर्क में एक कोर्ट में पेश किया गया। यहाँ सुनवाई के दौरान निखिल ने खुद को निर्दोष बताया। निखिल गुप्ता को 28 जून, 2024 तक हिरासत में भेजा गया है। निखिल गुप्ता को जमानत नहीं दी गई।
निखिल गुप्ता के वकील जेफरी चेब्रोवी ने कहा कि यह काफी जटिल मामला है और इसमें दोनों देश (अमेरिका और भारत) जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि हमें मामले को समझे बगैर ऐसे ही इसके निष्कर्षों पर नहीं जाना चाहिए। जेफरी ने कहा कि वह कोर्ट ने निखिल को बचाने का पूरा प्रयास करेंगे।
#WATCH | Visuals of Nikhil Gupta who was extradited to the US
Nikhil Gupta, an Indian national is accused by the United States of being involved in a murder-for-hire plot against Sikh separatist Gurpatwant Singh Pannun.
इस बीच निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें कुछ पुलिसकर्मी निखिल गुप्ता को एक एयरपोर्ट पर ले जाते हुए दिखते हैं। निखिल गुप्ता को शुक्रवार को चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। इस बात की पुष्टि चेक गणराज्य के न्याय मामलों के मंत्री ने भी की।
Na základě mého rozhodnutí z 3.6.2024 byl v pátek 14.6.2024 vydán k trestnímu stíhání do USA indický občan Nikhil Gupta, který je podezřelý ze spáchání trestného činu spiknutí za účelem spáchání nájemné vraždy s úmyslem způsobit smrt. Díky všem složkám, které se na realizaci…
इससे पहले निखिल गुप्ता ने चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण रोकने के लिए वहाँ के स्थानीय कोर्ट में याचिका भी लगाई थी लेकिन मई, 2024 में कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ़ कर दिया था। इससे पहले फरवरी, 2024 में इस पर रोक लगाई गई थी।
कोर्ट ने इस दौरान कहा था कि गुप्ता को प्रत्यर्पित किए जाने से उनके मूलभूत अधिकारों को लेकर कोई खतरा नहीं उत्पन्न होता है, ऐसे में उन्हें प्रत्यर्पित जा सकता है। इसके बाद उनके अमेरिका जाने का रास्ता साफ़ हो गया था। अब यह खबर आई है कि उसे अमेरिका भेज दिया गया है। निखिल गुप्ता जून 2023 से ही चेक गणराज्य में था।
गौरतलब है कि अमेरिका के जस्टिस विभाग ने आरोप लगाए थे कि निखिल गुप्ता अमेरिका में खालिस्तानी आतंकी गुरवतपन्त सिंह पन्नू को मरवाने की साजिश में शामिल था। निखिल गुप्ता पर आरोप था कि उसने अमेरिका में पन्नू को मारने के लिए एक हत्यारे को सुपारी दी।
अमेरिका ने आरोप लगाया था कि निखिल गुप्ता ने 1 लाख डॉलर (लगभग ₹83 लाख) पन्नू को मारने के लिए दिए थे। निखिल गुप्ता पर अमेरिका की एजेंसियों की आरोप ने लगाया था कि वह भारतीय खुफिया एजेंसियों से मिल कर काम कर रहा था और और यह सुपारी उसने भारतीय एजेंटों के कहने पर ही दी थी। इसके लिए 15,000 डॉलर का अग्रिम भुगतान किया गया था।
निखिल गुप्ता ने जिसको पैसे दिए थे वह अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का ही सदस्य था। इसी कारण से पूरा मामला खुलने की बात कही गई थी। निखिल गुप्ता के परिवार ने इस बीच आरोप लगाया था कि निखिल को बीफ और पोर्क खिलाया जा रहा था जो उनके धार्मिक मूल्यों के विरुद्ध है।
इस मामले में भारत ने अमेरिका के आरोपण को खारिज किया है कि वह पन्नू को मारने की साजिश जैसी कोई बात थी और इस पूरे मामले में जाँच के लिए एक कमेटी गठित की है। निखिल गुप्ता के अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने को लेकर विदेश मंत्रालय ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
बीजेपी नेता पंकजा मुंडे की लोकसभा चुनाव 2024 में नजदीकी हार से परेशान कम से कम 4 कार्यकर्ता अपनी जान दे चुके हैं। पंकजा मुंडे की हार के बाद कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस बीच, पंकजा मुंडे ने अपने कार्यकर्ताओं से अतिरंजना में आत्महत्या जैसे कदम न उठाने की अपील की है, इस अपील के बाद भी कार्यकर्ताओं के सुसाइड की खबरें आ चुकी हैं। बता दें कि पंकडा मुंडे को लोकसभा चुनाव में महज 6553 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से उनके समर्थक और बीजेपी कार्यकर्ता काफी नाराज हैं।
पंकजा मुंडे की हार की वजह से सचिन कोंडीबा मुंडे (उम्र 30, जिला लातूर), पांडुरंग रामभाऊ सोनवणे (अंबाजोगाई जिला बीड), पोपट वैभसे (जिला बीड) और गणेश उर्फ हरिभाऊ भाऊसाहेब बड़े (उम्र 35,जिला बीड) आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से सचिन मुंडे ने 7 जून को, 9 जून को पांडुरंग सोनावणे, 10 जून को पोपटराव वैभासे और गणेश बाडे ने 16 जून को अपनी जान दे दी।
पंकजा मुंडे के कट्टर समर्थक रहे गणेश बाडे को बीड लोकसभा चुनाव में पंकजा मुंडे की हार से झटका लगा था। इसके बाद उसने अवसाद के चलते फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। खबर सामने आने के बाद पंकजा मुंडे ने मृतक के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी, जहां उन्हें फूट-फूट कर रोते देखा गया। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है।
महाराष्ट्र के बीड से पंकजा मुंडे बीजेपी की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ीं थीं. लेकिन वो यहां से हार गईं. इस हार को उनके समर्थक सहन नहीं कर पाए और 4 समर्थकों ने अपनी जान दे दी. परिजनों से मिलने पहुंचीं पंकजा मुंडे तो फूट फूटकर रो पड़ीं. देखें वीडियो#maharashtra#Beed#bjp… pic.twitter.com/BFAknk7bWT
इस मामले में पंकजा मुंडे ने समर्थकों से भावुक अपील की है कि वो अति-गुस्से में कोई भी ऐसा कदम न उठाएँ, जो उनके और उनके परिवार के लिए दुखदाई हो। पंकजा मुंडे ने पोपटराव वैभासे के घर पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आज (16 जून 2024) आष्टी तालुका के चिंचेवाड़ी में मेरे कार्यकर्ता श्री पोपट वैभासे के परिवार के सदस्यों के साथ शोक सभा आयोजित की गई। पोपटराव एक सक्रिय कार्यकर्ता थे, जिन्होंने खुद को समर्पित कर रखा था एक योद्धा की तरह, लेकिन उनके इस तरह के निर्णय की वजह से चले जाने के चलते न सिर्फ उनता परिवार बल्कि मैं भी कमजोर हुई हूँ। आज पोपटराव वैभासे के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है जो कभी कम नहीं होगा, मैं उनके दुख को बाँटने की कोशिश करती रहूँगी। मैं उनके मासूम बच्चों और परिवारों की सारी जिम्मेदारी भी उठाऊँगी, लेकिन यह जिम्मेदारी मेरे लिए दर्दनाक है। उनके बच्चों की आँखों में अस्थिर भाव मुझे परेशान कर रहे हैं।
मेरा सभी से अनुरोध है कि “हम निश्चित रूप से इतने कमजोर नहीं हैं कि हार से निराश हो जाएँ, लेकिन यह दर्द मेरे लिए असहनीय है। अपनी जान न दें, यदि आपको साहस के साथ लड़ने वाला नेता चाहिए, तो मुझे भी साहस के साथ लड़ने वाला कार्यकर्ता चाहिए। मैं अपने लोगों को नहीं खोना चाहती। मैं हार से हतोत्साहित नहीं हूँ, लेकिन ऐसी घटनाएँ (आत्महत्याएँ) मुझे हिला टुकी हैं। मैं बहुत परेशान हूँ।”
माझा कार्यकर्ता स्व.पोपट वायभासे यांच्या कुटुंबियांची आज आष्टी तालुक्यातील चिंचेवाडी येथे सांत्वनपर भेट घेतली. पोपटराव प्रत्येक कार्यात स्वतःला झोकून देणारा सक्रिय कार्यकर्ता…खरतर लढाऊ वृतीचा, पण असा टोकाचा निर्णय घेऊन कुटुंबाला सोडून जाण मला कमकुवत करणार आहे.
— Pankaja Gopinath Munde (@Pankajamunde) June 16, 2024
इससे पहले उन्होंने 12 जून 2024 को भी समर्थकों से अपील का एक वीडियो शेयर किया था और समर्थकों से कहा था कि वो कोई भी आत्मघाती कदम न उठाएँ। उन्हें अपने बहादुर साथियों की जरूरत है। उन्होंने कहा था, “मेरा मानना है कि किसी को भी किसी नेता से इतना प्यार नहीं करना चाहिए कि वो उसके लिए अपनी जान दे दे। अगर आपको साहस से लड़ने वाला नेता चाहिए तो मुझे भी साहस से लड़ने वाला कार्यकर्ता चाहिए। अब अगर किसी ने मेरी लिए जान दी तो मैं राजनीति छोड़ दूँगी। क्योंकि, मुझे लगता है कि राजनीति के कारण ऐसा हो रहा है। मैं हारी हुई नहीं हूँ, लेकिन इस तरह की चीजें मुझे झकझोर देती हैं। मैं खुद इस घटना से बहुत परेशान हूँ।”
— Pankaja Gopinath Munde (@Pankajamunde) June 12, 2024
गौरतलब है कि पंकजा मुंडे ने बीड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। जहाँ उन्हें महाविकास आघाड़ी के संयुक्त उम्मीदवार बजरंग सोनवणे के हाथों नजदीकी हार का सामना करना पड़ा। 4 जून 2024 को आए लोकसभा चुनाव चुनाव के नतीजों में पंकजा मुंडे को 6553 वोटों से हार मिली थी। इस बार बीजेपी ने दो बार की मौजूदा सांसद प्रीतम मुंडे की जगह उनकी बहन पंकजा मुंडे को टिकट दिया था। उनकी हार के बाद से एक के बाद एक 4 समर्थक अपनी जान दे चुके हैं।
पंकजा मुंडे महाराष्ट्र में बीजेपी के कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। वो महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। उनके पिता गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्हें महाराष्ट्र में ‘लोकनेता’ की उपाधि दी जाती रही है। वो मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री भी बने थे, लेकिन दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से उनकी बेटियाँ पंकजा मुंडे ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली है। पंकजा मुंडे बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव भी हैं।
झारखंड के पाकुड़ में बकरीद पर गोवंश की हत्या आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। यह हत्या खुलेआम एक व्यक्ति की जमीन पर की गई और मना किए जाने पर मारपीट और बमबाजी की गई। कुछ लोगों के घरों को तोड़े जाने की भी सूचना है। घटनास्थल पर अब सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकुड़ के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के गोपीनाथपुर इलाके में बकरीद (17 जून, 2024) को कुछ लोगों ने एक प्रतिबंधित पशु को दूसरे की जमीन पर काटना चालू कर दिया। जमीन के स्वामी ने जब इस बात को मना किया गया तो पशु काटने वाले हमलावर हो गए।
पशु काटने वालों ने पास के गाँव, जो कि पश्चिम बंगाल में आता है, से बड़ी संख्या में हमलावरों को बुला लिया। इन हमलावरों ने गाँव के लोगों को मारा पीटा और पथराव चालू कर दिया। इसके बाद इन लोगों ने गाँव में बमबाजी भी की। पश्चिम बंगाल से आए इन हमलावरों ने कई घरों को भी क्षतिग्रस्त किया।
विवाद की सूचना मिलने के बाद पश्चिम बंगाल और झारखंड की पुलिस यहाँ पहुँची। झारखंड के मुफस्सिल थाना क्षेत्र की पुलिस ने यहाँ पहुँच कर मामला शांत करवाया। गाँव में विवाद को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यह अभी तनाव कम करने के लिए गाँव में डटे हुए हैं।
मुफस्सिल थाना के पुलिस अधिकारी ने ऑपइंडिया को इस विषय में बताया है कि मामला दो गाँवों के बीच लड़ाई का है। एक गाँव झारखंड में जबकि दूसरा पश्चिम बंगाल में है, इसके बीच में नहर है। उनका कहना है कि दूसरे व्यक्ति की जमीन पर हत्या से पूरा विवाद चालू हुआ। उन्होंने बताया दोनों गाँवों के बीच विवाद की सूचना के 20-25 मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुँच गई थी।
उन्होंने बताया कि गाँव वालों ने यहाँ गौवंश काटने का आरोप मुस्लिम व्यक्तियों पर लगाया है लेकिन पुलिस को मौके पर मांस बरामद नहीं हुआ है। दूसरी तरफ झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की कानून व्यवस्था धराशायी होने की बात कही है। उन्होंने राज्य की झामुमो कॉन्ग्रेस सरकार पर घुसपैठियों पर एक्शन ना लेने का आरोप लगाया है।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है इस इलाके में घुसपैठिए उत्पात मचा रहे हैं, आदिवासियों की जमीनें हड़प रहे हैं, बहन-बेटियों की इज्ज़त लूट रहे हैं और स्थानीय लोगों के संसाधनों पर हक़ जता रहे हैं, इसके बाद भी सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
मुंबई के मीरा रोड इलाके में बकरीद से एक दिन पहले रविवार (16 जून 2024) को कुर्बानी के लिए लाए गए बकरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। यहाँ मुस्लिम तबके के लोग सोसाइटी परिसर में कुर्बानी देने पर आमादा थे लेकिन हिन्दू पक्ष इसका विरोध कर रहा था। आरोप है कि इस विरोध की वजह से हिन्दुओं को धमकियाँ मिलीं और उनके घर की महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया गया। मामले की शिकायत पुलिस में भी दी गई लेकिन इस पर अभी तक FIR दर्ज नहीं हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मीरा रोड के काशीगांव थानाक्षेत्र में पड़ने वाली जेपी नॉर्थ सेलेस्टे सोसायटी की है। 16 जून (रविवार) को यहाँ रहने वाला एक मुस्लिम परिवार कुर्बानी के लिए कुछ बकरे खरीद कर लाया। सोसाइटी में रहने वाले हिन्दू परिवारों ने इसका विरोध किया। वो चाहते थे कि मुस्लिम परिवार कुर्बानी सोसाइटी कैम्पस के बाहर करे। इस दलील के साथ विरोध कर रहे परिवारों ने सोसाइटी के नियम भी दिखाए जिसमें अंदर बकरियाँ लाना मना बताया गया था। हालाँकि मुस्लिम परिवार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। वह सोसाइटी कैम्पस में ही कुर्बानी की जिद्द पर अड़ा रहा।
शिकायत कॉपी
मामले की जानकारी मिलने पर हिन्दू संगठन भी हस्तक्षेप के लिए पहुँचे। इन सदस्यों ने मुस्लिम परिवार से वो अनुमति दिखाने के लिए कहा जिसके तहत बकरे सोसाइटी के अंदर लाए गए थे। इसी के साथ बकरों की मेडिकल जाँच रिपोर्ट भी माँगी गई। संतोषजनक जवाब न मिलने पर हिन्दू संगठन के सदस्यों ने सोसाइटी के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनकी माँग थी कि बकरों को सोसाइटी से बाहर किया जाए। इसी के साथ एक शिकायत स्थानीय काशीगाँव थाने में शिकायत दी गई।
लोगों को समझाता पुलिस बल
इस शिकायत में हिन्दू पक्ष ने सोसाइटी में बकरे काटने पर रोक लगाने की माँग की है। अपनी सफाई में मुस्लिम पक्ष पुलिस को एक आपसी समझौते का एक लेटर दिखा रहा है। इस लेटर में सोसाइटी में बकरे लाने पर हिन्दुओं के सहमत होने का दावा किया गया है। हालाँकि हिन्दू पक्ष ऐसा कोई भी समझौता होने से इनकार कर रहा है और इस लेटर को एक छिपी साजिश बता रहा है।
आसपास पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएँ
बताते चलें कि जिस इलाके में जेपी नॉर्थ सेलेस्टे सोसाइटी है उसके आसपास इस प्रकार की घटनाएँ पहले भी हुईं हैं। इसी इलाके में मौजूद ‘हिल गैलेक्सी अपार्टमेंट’ में 16 जून को एक सिख परिवार ने पाँचवे सिख गुरु, गुरु अर्जन देव की पुण्यतिथि पर एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित किया था, तब सिख परिवार की महिलाएँ आसपास के लोगों को ‘सरबत प्रसाद’ बाँट रही थीं। इसी दौरान उन्होंने देखा कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग सोसाइटी परिसर में कथित तौर पर कुर्बानी के लिए 14 बकरियाँ ले जा रहे हैं।
जब महिलाओं ने पूछा तो इन बकरों को सोसाइटी के बाहर ले जाने का जवाब मिला। सिख परिवार का आरोप है कि उनसे झूठ बोला गया था। उन्होंने बताया कि वो बकरे बाहर नहीं बल्कि सोसाइटी के अंदर कुर्बानी के लिए ले जाए जा रहे थे। दावा यह भी किया गया कि बाद में कुर्बानी के लिए 4 बकरे और लाए गए थे। आरोप है कि इसका विरोध करने पर मुस्लिम पक्ष द्वारा ‘जो करना हो कर लो’ की घुड़की के साथ हिन्दुओं को माँ की गालियाँ दी गईं।
ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय मीडिया ने सिख महिला के हवाले से बताया कि हिल गैलेक्सी अपार्टमेंट में तमाम विरोधों के बावजूद पिछले 4 वर्षों से मुस्लिम समुदाय के लोग बकरों की कुर्बानी कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि रोके जाने पर महिलाओं तक को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
भगवान गणेश को दी गई गाली, हिन्दुओं को धमकाया
सोमवार (17 जून) को हिल गैलेक्सी आपर्टमेंट के एक निवासी ने काशीगाँव थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। इस शिकायत में बताया गया है कि बकरों की कुर्बानी से मना करने पर हिन्दू धर्म का अपमान किया गया। ऑपइंडिया को मिली शिकायत कॉपी में लिखा गया है कि मुस्लिमों ने हिन्दुओं को धमकाया और कहा कि मुस्लिम सोसायटी परिसर में ही बकरे काटेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। विरोध करने वालों को “जो कर सकते हो कर लो’ जैसे ताव दिए गए। इसी शिकायत में हिन्दुओं को माँ की गाली दिए जाने का भी जिक्र है।
हिन्दू संगठनों का प्रदर्शन
शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि मुस्लिम पक्ष के लोगों ने गाली-गलौज के साथ भगवान गणेश का भी अपमान किया है। उन्होंने हिन्दुओं से कहा, “तुम लोग जब गणेश उत्सव मनाते हो तब क्या हम कुछ कहते हैं? तुम्हारे भगवान गणेश को देख कर हमें गुस्सा के साथ उल्टी आने लगती है। अब हम भी देखेंगे कि तुम लोग यहाँ अपना गणपति उत्सव कैसे मनाते हो।”
जिम की जगह बता कर बना दी अवैध मस्जिद
बकौल शिकायतकर्ता उन्होंने सोसाइटी के बिल्डर (आर आर बिल्डर्स) और मेंटेनेंस देखने वाले रसूल, इरफान, जुनैद और जब्बार शेख को भी फोन किया था। तब इन सभी को मुस्लिम पक्ष द्वारा हिन्दुओं के देवताओं को दी गई गालियों की शिकायत की गई थी। हालाँकि बिल्डर की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला था। उन्होंने खुद को शहर से बाहर बताते हुए इस मामले से खुद को दूर ही रखने जैसा जवाब दिया था। आरोप यह भी है कि इमारत परिसर में एक अवैध मस्जिद भी बना दी गई है।
सोसाइटी में बनी मस्जिद
जिस जगह मस्जिद बनी है वहाँ पहले जिम या क्लब बनाने का झाँसा दिया गया था। ऑपइंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक बिल्डर रसूल शेख ने शुरुआत में हिंदुओं को घर दिए थे, लेकिन बाद में बाकी कई घर मुस्लिमों ने बुक करवा लिए। जेपी नॉर्थ सेलेस्टा और हिल गैलेक्सी मिला कर कुल लगभग 130-150 घर हैं। इनमे करीब 15-20 घर ही हिंदुओं के हैं जबकि 100 से ज़्यादा घरों पर मुस्लिमों का कब्ज़ा है।
मुस्लिमों द्वारा प्रताड़ित एक सिख महिला का तो यहाँ तक दावा है कि वहाँ अन्य सोसाइटियों के मुस्लिम भी नमाज़ पढ़ने आते रहते हैं जिससे उन्हें कई बार असुविधा का सामना करना पड़ता है। शिकायत में आगे जिक्र किया गया है कि सोसाइटी में बनी अवैध मस्जिद के अंदर नमाज़ अदा करने के लिए आने वाली भीड़ अक्सर हंगामा करती रहती है। इस हंगामे की शिकायतों पर बिल्डर कोई ध्यान नहीं देता। आए दिन हिन्दू परेशान होते हैं। सोसाइटी के हिन्दुओं ने पुलिस से मामले में हस्तक्षेप की माँग की है।
मुस्लिम बहुल सोसाइटी के हिन्दुओं से ऑपइंडिया ने की बात
ऑपइंडिया ने इन सोसाइटी में रहने वाले कुछ हिन्दुओं से बात की। उन्होंने कहा कि वो अपनी आँखों के आगे बकरे कटते देख कर असहज हो जाते हैं। सोसायटी के हिन्दुओं ने फिर अपील की है कि कुर्बानी उन जगहों पर की जाए जिन्हें सरकार ने चिन्हित किया है। वहीं एक दूसरे हिन्दू ने हमें बताया कि मुस्लिम बहुल सोसाइटी होने की वजह से यहाँ हिन्दुओं को परेशान किया जा रहा है। इन लोगों का दावा है कि कोई भी लिखित कानून सोसाइटी का नहीं है और तमाम बातें सुविधा के अनुसार तय होती हैं।
एक हिन्दू कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया को बताया कि पुलिस मुस्लिम पक्ष के बजाय हिन्दुओं से ही शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन मुस्लिमों के बजाय हिन्दुओं के ही दमन पर लगा हुआ है। इस तमाम आपाधापी के बीच कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और सोसाइटी के अंदर बकरा काटने की अनुमति देने से मना कर दिया है। हालाँकि अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
जब हमने इसकी पुष्टि के लिए स्थानीय थाने के सीनियर पीआई राहुल पाटिल को फोन किया तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। प्रशासन की इसी सुस्ती की वजह से कई इस्लमी हैंडल इस मामले में हिन्दुओं को ही बदनाम करने में जुट गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह दुष्प्रचार शुरू कर दिया है कि 16 जून को जेपी नॉर्थ सेलेस्टा सोसायटी में हंगामा मुस्लिमों ने नहीं बल्कि हिंदुओं ने किया था।
Members of the Bajrang Dal created a ruckus outside the JP North Celeste society on Mira Road in Maharashtra when some Muslim families brought lambs for Eid sacrifice. pic.twitter.com/wSHRd3jLgt
भाजपा विधायक ने सोसाइटी में पशु वध न होने का दिया भरोसा
इस पूरे मामले में मीरा भयंदर से भारतीय जनता पार्टी की विधायक गीता जैन का बयान सामने आया है। उन्होंने भरोसा दिया है कि सोसाइटी के अंदर किसी भी प्रकार का पशु वध नहीं किया जाएगा। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि सोसाइटी के अंदर कुर्बानी के लिए बकरे लाए गए थे लेकिन पुलिस और स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप से ऐसा नहीं हो पाया। गीता जैन ने मुस्लिम पक्ष द्वारा हिन्दू महिलाओं से दुर्व्यवहार की घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं से अभद्रता करने वाले को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
भाजपा विधायक गीता जैन, चित्र साभार- ANI
MLA गीता जैन ने बताया कि इस प्रकार की घटनाओं की तादाद बढ़ रही है। हालाँकि उनका मानना है कि पुलिस इसे अंदरूनी मामला बता रही है। भाजपा MLA ने पुलिस की कार्रवाई को हिन्दू भावनाओं के अनुरूप नहीं माना है। वो चाहती हैं कि हिन्दू महिलाओं से अभद्रता करने वाले व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की जाए। बताते चलें कि मुंबई का मीरा रोड इलाका पिछले कुछ समय से इसी प्रकार की अलग-अलग घटनाओं से प्रभावित रहा है।
नोट: सिद्धि सोमानी की यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है। विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।