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‘हमारे इलाके में हार गई TMC, इसलिए पानी की आपूर्ति बंद की’: बंगाल के कुल्टी में जल संकट, ममता सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल के आसनसोल शहर के कुल्टी इलाके के निवासियों ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने उनके इलाके में पानी की आपूर्ति बंद कर दी है। यह बंदी लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम आने के बाद की गई है। निवासियों का कहना है कि इस इलाके में लोकसभा चुनाव में भाजपा को बढ़त मिली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस इलाके में लंबे समय से पानी का गंभीर संकट है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकार ने चुनावों से पहले इलाके में पानी की कमी को घटाने के लिए कई पानी के टैंकर भेजे थे। यहाँ के निवासियों ने बताया कि चुनाव परिणामों के बाद कुल्टी में भेजे जाने वाले पानी के टैंकरों की संख्या में कमी कर दी गई है। इसके साथ ही, एक दिन में पाइप से होने वाली पानी की आपूर्ति 30 मिनट से घटाकर 15-20 मिनट कर दी गई है।

मजबूर होकर कुल्टी के निवासियों ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ अब आंदोलन शुरू कर दिया है। उन्होंने मांग की है कि इलाके में जल संकट का तत्काल समाधान किया जाए। इस जल संकट को सत्तारूढ़ पार्टी TMC ने और बढ़ा दिया है। समस्या हल ना किए जाने पर पानी की कमी से पीड़ित लोगों ने आसनसोल बराकर जीटी रोड पर पेड़ गिराकर जाम लगा दिया और बैरिकेड लगा दिए।

इस दौरान भाजपा विधायक (पश्चिम बर्धमान) अजय कुमार पोद्दार भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस मामले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “जल ही जीवन है। इस इलाके के लोगों को पानी नहीं मिल रहा है…नतीजतन, लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। यह विरोध किसी राजनीतिक पार्टी के इशारे पर नहीं किया जा रहा है। पहले रोजाना चार पानी के टैंकर आते थे, अब यह घटकर एक रह गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “वे इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं बना पाए हैं। लोगों के घरों में पाइप लगे हैं, लेकिन पानी नहीं है। TMC इस क्षेत्र में हार गई और इसलिए उन्होंने हमारी पानी की आपूर्ति काट दी।” इस बीच, TMC ने इन आरोपों से इनकार किया है।

आसनसोल के मेयर बिधान उपाध्याय ने दावा किया, “भाजपा द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। भाजपा ने आसनसोल दक्षिण में भी अच्छा प्रदर्शन किया। तब वहाँ भी पानी बंद हो जाता। असली कारण यह है कि तूफान और बारिश ने पानी की लाइनों में समस्याएँ पैदा की हैं। लेकिन सब ठीक हो जाएगा। हमारी सरकार और नगर पालिका किसी राजनीतिक मकसद से काम नहीं करती है। भाजपा चुनाव हारने के बाद बहाने बनाने के लिए जानी जाती है। यही उनका काम है।”

TMC ने भाजपा के पक्ष में मतदान करने पर हाउसिंग सोसाइटी के बाहर कूड़ा फेंका

हाल ही में, एक ट्विटर यूजर ने जानकारी दी कि कोलकाता में एक हाउसिंग सोसाइटी के लोगों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में मतदान करने के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सरकार द्वारा दंडित किया जा रहा है। यूजर ने बताया कि सेंट्रल कोलकाता के बेलेघाटा इलाके के ‘सनराइज हाइट्स’ के बाहर कूड़ा फेंका जा रहा है, क्योंकि हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के 543 निवासियों ने TMC के खिलाफ मतदान किया था।

इसके तुरंत बाद, TMC के राज्य महासचिव नीलांजन दास ने ट्विटर पर इस घटनाक्रम की पुष्टि की। उन्होंने हाउसिंग सोसाइटी के बाहर कूड़ा फेंकने की कार्रवाई को ‘बदला लेने का अहिंसक तरीका’ करार दिया। भाजपा ने TMC की इस बेहूदी हरकत की कड़ी निंदा की है।

भाजपा ने इस मामले में कहा “TMC के राज्य महासचिव ने बेशर्मी से दावा किया कि उन्होंने कोलकाता हाउसिंग सोसायटी के सामने कूड़ा फेंक दिया, क्योंकि उन्होंने उनके खिलाफ वोट करने की हिम्मत की।” पार्टी ने कहा, “क्या यही ‘लोगों की सेवा’ करना है? शुद्ध धमकी।” सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद नीलांजन दास ने अपना विवादित ट्वीट हटा दिया।

निकाह करो, वरना बाप-भाई को मार देंगे… स्कूल जाने वाली हिन्दू बहनों को तमंचा दिखाकर धमकाता था राजुद्दीन और सलमान, इनकार करने पर फाड़े कपड़े: अलीगढ़ में FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में ग्रूमिंग जिहाद की साजिश का मामला सामने आया है। यहाँ राजुद्दीन और सलमान नाम के 2 युवकों पर हिन्दू धर्म की 2 सगी बहनों पर निकाह का दबाव बनाने का आरोप लगा है। कहा गया है कि आरोपित लड़के दोनों बहनों को स्कूल आते-जाते समय तमंचा दिखाकर डराते थे। वहीं जब लड़कियों ने बात नहीं मानी तो पिटाई करके उनके कपड़े भी फाड़ दिए गए।

इसके अलावा पीड़ित बहनों के पिता आरोपितों के पास शिकायत लेकर गए तो उनको भी पीटा गया। फिलहाल शिकायत के आधार पर 3 आरोपित नामजद किए गए हैं जो आपस में रिश्तेदार हैं। पुलिस ने रविवार (16 जून 2024) को राजुद्दीन और सलमान को गिरफ्तार कर लिया है। तीसरे आरोपित प्रेमुद्दीन अलवी की तलाश की जा रही है।

यह मामला अलीगढ़ जिले के थानाक्षेत्र इगलास का है। यहाँ रविवार (9 जून) को पीड़ित बहनों के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनकी 2 बेटियाँ पास के ही सरकारी इंटर कॉलेज में पढ़ती हैं। स्कूल के रास्ते में वेल्डिंग का काम करने वाले राजुद्दीन की दुकान है। राजुद्दीन की बुआ का बेटा सलमान भी इसी दुकान पर काम करता है।

आरोप है कि राजुद्दीन और सलमान ने दोनों बहनों को लव जिहाद में फँसाने की कोशिश की। लड़कियों ने जब उनकी नहीं सुनी तो उन्हें धमकी दी गई कि वह उनके भाई और पिता को मार देंगे।

इसके साथ ही राजुद्दीन और सलमान के पास पीड़िताओं की कुछ तस्वीरें हैं। दोनों आरोपित ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल कर लड़कियों को डरा रहे हैं और खुद से निकाह न करने पर धमकी दे रहे हैं। इन्होंने पीड़िताओं के भाई को भी एक वीडियो भेज कर धमकी दी है। दावा है कि धमकी में ये आरोपित हाथों में कट्टा (तमंचा) लहरा रहे हैं। इन धमकियों से डर कर दोनों बहनें की पढ़ाई छूटने की नौबत आ गई है। ये दोनों इस साल का एग्जाम देने भी नहीं गईं।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि शुक्रवार (7 जून) को शाम 7 बजे दोनों बहनें कुछ खरीदारी करने इगलास बाजार गईं थीं। इसी दौरान राजुद्दीन और सलमान वहाँ पहुँच गए। ये दोनों पीड़िताओं को जबरदस्ती पकड़ कर दुकान के अंदर ले गए। यहाँ दोनों बहनों के साथ अश्लील हरकतें करने का प्रयास किया गया।

इस दौरान दोनों बहनों के कपड़े फट गए। थोड़ी देर बाद राजुद्दीन और सलमान दोनों बहनों को गंदी-गंदी गालियाँ व जान से मार डालने की धमकी देते हुए वहाँ से चले गए। लौटने एक दौरान दोनों ने लड़कियों को 1 मोबाइल फोन दिया और आगे से अपने सम्पर्क में रहने के लिए कहा।

डरी सहमी दोनों बहनों ने घर आ कर पूरी बात बताई। घटना सुन कर लड़कियों के पिता अपने बेटे के साथ राजुद्दीन की दुकान पर उलाहना ले कर गए। यहाँ उन्हें राजुद्दीन का भाई प्रेमुद्दीन मिला। प्रेमुद्दीन ने अपनी भाई की गलती सुनने के बजाय पीड़िताओं के परिजनों को ही धमकाना और गालियाँ देनी शुरू कर दी। उसने पीड़िताओं के भाई और पिता को पीटा। आसपास के लोग जमा हो गए तो आरोपित रुका। बाद में लोहे की एक सरिया से धमकाते हुए प्रेमुद्दीन अलवी ने पीड़ित बाप-बेटे को अपनी दुकान से भगा दिया।

आखिरकार पीड़िताओं के पिता ने पुलिस ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने राजुद्दीन, सलमान और प्रेमुद्दीन को नामजद करते हुए इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इन तीन आरोपितों पर IPC की धारा 354 (ख), 342, 504 और 506 के अलावा आईटी एक्ट के सेक्शन 67a के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। रविवार को पुलिस ने राजुद्दीन और सलमान को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

पावागढ़ की पहाड़ी पर ध्वस्त हुईं तीर्थंकरों की जो प्रतिमाएँ, उन्हें फिर से करेंगे स्थापित: गुजरात के गृह मंत्री का आश्वासन, महाकाली मंदिर ने शुरू भी कर दिया काम

गुजरात के पावागढ़ में जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाओं को ध्वस्त किए जाने का मामला गर्मा गया है। जैन समाज के विरोध प्रदर्शन के बाद अब राज्य सरकार ने भी आश्वासन दिया है कि उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। गुजरात सरकार में खेल, युवा मामलों एवं सांस्कृतिक गतिविधि, एक्साइज एन्ड प्रोहिबिशन, सीमा सुरक्षा एवं जेल और गृह, पुलिस हाउसिंग व आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सँभाल रहे हर्ष संघवी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने पावागढ़ को ऐतिहासिक स्थल बताते हुए कहा कि यहाँ की पहाड़ी पर कई जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी ट्रस्ट, संस्था या व्यक्ति को अधिकार नहीं है कि इस पवित्र स्थल पर जैन तीर्थंकरों की ऐतिहासिक प्रतिमाओं को ध्वस्त करे। साथ ही गुजरात के गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि जैन समाज की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचने दिया जाएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की तरफ से उन्होंने ये आश्वासन दिया है।

गुजरात सरकार ने आश्वासन दिया है कि जिन प्रतिमाओं को ध्वस्त किया गया है, उन्हें पूर्ववत ही उनके स्थान पर स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यहाँ तक कहा कि कुछ ही घंटों में ये काम कर लिया जाएगा। पावागढ़ पुलिस थाने के बाहर भी बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। जैन समाज का कहना है कि तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के ध्वस्तीकरण पर लगाम लगे। ‘वरोदड़ा समस्त जैन संघ’ ने जिले के DM से मिल कर भी अपनी बात रखी।

जैन समाज की ये भी माँग है कि जिनलोगों ने तीर्थंकरों की प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया है उन पर कार्रवाई भी की जाए। सूरत में भी एडिशनल कलक्टर विजय रावल को जैन समाज ने ज्ञापन सौंपा। जिन प्रतिमाओं को ध्वस्त किया गया, उनमें 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ भी शामिल थे। प्रतिमाओं को न सिर्फ तोड़ा गया, बल्कि कचरे में भी फेंक दिया गया था। असल में 20 दिन पहले से ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू है। उनका कहना है कि ये मूर्तियाँ हजारों वर्ष पुरानी हैं।

असल में पावागढ़ स्थित महाकाली मंदिर वाले क्षेत्र को भी विकसित किया जा रहा है, उसी क्रम में ये सब हुआ। ‘महाकाली मंदिर ट्रस्ट’ और जैन समाज के बीच आखिरकार करार भी हो गया है। शक्तिपीठ की तरफ जाने वाले रास्ते में दादरा के दोनों तरफ इन मूर्तियों को मंदिर ट्रस्ट ने हटाया था। जैन समाज को महाकाली मंदिर में सुविधाएँ बढ़ाए जाने से दिक्कत नहीं है, उनका कहना है कि श्वेताम्बर प्रतिमाओं को फिर से लगाया जाए। अब विवाद का निपटारा होता दिख रहा है।

रेड सिग्नल पार करने वाली ट्रेनों को भी रोक देता है कवच, फिर क्यों कंचनजंगा एक्सप्रेस से भिड़ गई मालगाड़ी: जानिए सब कुछ

पश्चिम बंगाल के न्यूजलपाईगुड़ी में एक भीषण रेल हादसा हुआ है। सोमवार (17 जून, 2024) को सुबह 9 बजे सियालदह से अगरतला जा रही कंचनजंगा एक्सप्रेस में एक मालगाड़ी पीछे से जाकर भिड़ गई। इस हादसे में 15 लोगों की मौत की सूचना है। 60 लोग घायल हुए हैं। हादसे में मालगाड़ी के लोको पायलट और एक्सप्रेस के गार्ड की मौत हो गई। इस घटना का आरम्भिक कारण मानव भूल को माना जा रहा है। हादसे की जगह पर राहत बचाव का काम चल रहा है। केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव घटनास्थल पर पहुँचे हैं।

हादसे के बाद रेलवे बोर्ड की चेयरमैन जया वर्मा सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि जिस हावड़ा गुवाहाटी रूट पर यह हादसा हुआ है, उस पर कवच सिस्टम नहीं लगा था। इस रूट पर आगे कवच सिस्टम लगाए जाने की योजना है। मामले की जाँच अभी जारी है, रेल हादसे का असल कारण क्या है, इसको लेकर जाँच की जाएगी। इस रेल हादसे के बाद फिर से एक बार कवच सिस्टम चर्चा में आ गया है। हादसे के बाद प्रश्न उठ रहे हैं कि इस रूट पर कवच की क्या स्थिति है और इससे इस दुर्घटना पर क्या असर पड़ता।

क्या है कवच, कैसे करता है काम

कवच एक एंटी कोलिजन डिवाइस नेटवर्क है जो कि रेडियो कम्युनिकेशन, माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबर पोजिशनिंग सिस्टम तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक की मदद से रेलवे ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा। इसके तहत जब दो आने वाली ट्रेनों पर इसका उपयोग होगा तो ये तकनीक उन्हें एक दूसरे की आपस में दूरी का आकलन करने में और टकराव के जोखिम को कम करने में ऑटोमेटिक ब्रेकिंग एक्शन शुरू कर देगी। इससे ट्रेनें टकराने से बच सकेंगीं।

यदि ड्राइवर ऐसी स्थिति में स्पीड कंट्रोल करना या ब्रेक लगाना भूल जाता है तो कवच (Kavach) प्रणाली ब्रेक इंटरफेस यूनिट द्वारा ट्रेन को रोक देगी। कवच प्रणाली द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य विशेषताओं में रेलवे फाटकों पर स्वत: सीटी बजाना और खतरे की स्थिति में अन्य ट्रेनों को नियंत्रित एवं सावधान करने के लिए ऑटो-मेनुअल SOS प्रणाली को तुरंत सक्रिय करना शामिल है। इसके अंतर्गत आसपास की ट्रेनों को अपने आप ही इसका सन्देश पहुँच जाएगा।

कवच सिस्टम के एक्टिवेट होते ही आसपास के क्षेत्र में सभी ट्रेनों का संचालन तुरंत रुक जाता है। यह तकनीक इतनी सुरक्षित है कि इसके 10000 बार में मात्र 1 बार विफल होने की संभावना होती है। इसको ट्रेन और स्टेशन दोनों पर लगाया जाता है। इसे भारत में ही पूरी तरीके से विकसित किया गया है। इसकी कीमत ऐसे विदेशी सिस्टम के मुकाबले आधी से भी कम है।

कहाँ-कहाँ लग गया कवच

कवच को रेलवे देश भर में चरणबद्ध तरीके से लगाने की योजना पर काम कर रही है। सबसे ताजा आँकड़ों के अनुसार, देश में 1,465 किलोमीटर रेलवे रूट पर कवच को लगाया जा चुका है। इसे 139 ट्रेन इंजनों में अभी तक लगाया गया है। इसके अलावा 3000 किलोमीटर रेलवे रूट पर कवच लगाने के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं।

यह टेंडर देश के सबसे व्यस्ततम रूट दिल्ली- हावड़ा और दिल्ली-मुंबई के लिए जारी किए गए हैं। इन दोनों रूट को सबसे पहले कवच सुविधा से युक्त किया जाएगा। इस रूट पर भी 3000 किलोमीटर से अधिक में ऑप्टिकल फाइबर केबल डाली जा चुकी है और 170 इंजन भी इससे लैस किए जा चुके हैं। इसके साथ ही देश के अन्य रूट पर भी कवच लगाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए भी टेंडर अलग-अलग चरण में हैं।

बालासोर हादसे के बाद भी मचा था शोर

2 जून, 2023 को ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे के बाद भी कवच सिस्टम को लेकर प्रश्न उठाए गए थे। तब भी इसकी स्थिति पर प्रश्न उठे थे। बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस एक मालगाड़ी और एक एक्सप्रेस ट्रेन से टकराई थी। इस रेल हादसे में 200 से अधिक लोगों को मौत हो गई थी।

तब यह स्पष्ट किया गया था कि जिस रूट पर हादसा हुआ वहाँ भी कवच सिस्टम नहीं लगा था। इस हादसे के बाद कवच सिस्टम को तेजी से लगाए जाने की माँग उठी थी। कवच सिस्टम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई थी। इस पर रेलवे ने जवाब भी दिया और सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की प्रशंसा भी की थी।

इलेक्ट्रिक शॉक, जबड़ा तोड़ा, खोपड़ी फोड़ी… पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आई साउथ के हीरो दर्शन की बर्बरता, बोले किच्चा सुदीप- हत्या से बदनाम हुई कन्नड़ इंडस्ट्री

अपनी गर्लफ्रेंड के चक्कर में फैन की हत्या करवाने वाले कन्नड़ अभिनेता दर्शन तुगुदीपा की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में नया खुलासे हुए हैं। ताजा रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रेणुकास्वामी को मारने से पहले उसे इलेक्ट्रिक शॉक देकर प्रताड़ित किया गया था। पुलिस ने उन उपकरणों को बरामद कर लिया है। वहीं दूसरी ओर कन्नड़ अभिनेता किच्चा सुदीप ने इस मामले में मृतक के न्याय की गुहार लगाई है।

किच्चा सुदीप ने दर्शन की गिरफ्तारी मामले में कुछ कहने से मना किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जाँच चल रही है। ऐसे में वो अधिकारियों की जाँच से हटकर कुछ कहें वो उचित नहीं है। हालाँकि उन्होंने कहा, “रेणुकास्वामी के परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए। उनकी पत्नी को इंसाफ मिलना चाहिए। उनके अजन्मे बच्चे को इंसाफ मिलना नहीं चाहिए। सबसे बड़ी बात हर किसी को इंसाफ पर भरोसा हो सके इसलिए इंसाफ जरूर मिलना चाहिए।”

किच्चा ने कहा, “उस परिवार के साथ सभी की संवेदनाएँ हैं। माहौल ठीक नहीं है। फिल्म इंडस्ट्री को भी न्याय मिलना चाहिए। सारा दोष फिल्म इंडस्ट्री पर मढ़ा जा रहा है। इंडस्ट्री को क्लीन चिट की जरूरत है। इसमें कई कलाकार शामिल हैं। सिनेमा सिर्फ एक या दो लोगों का नहीं है। अगर दोषी को सजा मिले तो फिल्म इंडस्ट्री को राहत मिलेगी।”

बता दें कि किच्चा सुदीप और दर्शन एक समय में बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे लेकिन कुछ व्यक्तिगत कारणों से उनमें मतभेद हो गया। दर्शन का नाम इस केस में मीडिया में उछला तो सुदीप की यह प्रतिक्रिया आई। अभी तक इस मामले में 17 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दर्शन को मैसूर से उठाया गया था वो वहाँ शूटिंग के लिए गए थे। इसके अलावा इन 17 लोगों में दर्शन की गर्लफ्रेंड पवित्रा गौड़ा भी शामिल हैं।

कैसे हुई रेणुकास्वामी की हत्या?

बता दें कि रेणुकास्वामी की निर्मम हत्या से जुड़ा पूरा मामला हैरान करने वाला है। रेणुकास्वामी, दर्शन का बहुत बड़ा फैन था। वो नहीं चाहता था कि पवित्रा गौड़ा के कारण दर्शन की शादीशुदा जिंदगी बिगड़े। उसने इसी सोच में पवित्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने शुरू कर दिए। दर्शन को जब इसका पता चला तो वो इस पर बहुत गुस्सा हुआ। उसने अपने सोर्स से रेणुकास्वामी का पता निकलवाया और फिर अपने साथियों को रेणुकास्वामी को लाने को भेजा।

8 जून को रेणुकास्वामी का अपहरण चित्रदुर्ग से हुआ। इसके बाद उसे बेंगलुरु के पट्टानागरे इलाके के शेड में लेकर जाया गया जहाँ उसको घंटों टॉर्चर किया गया। वहाँ रेणुकास्वामी के साथ न सिर्फ मारपीट हुई, बल्कि लोहे की गर्म छड़ से उसे दाहा गया, उसे इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए, उसे बंधक बनाकर रखा गया, उसे बेल्ट से मारा गया। बाद में उसका शव उठाकर फेंक दिया गया।

दर्शन ने गुर्गों से कहा था कि वो इस मामले में आत्मसमर्पण कर दें और इसके बदले पैसे ले लें। हालाँकि पूरा मामला मोबाइल से खुल गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि रेणुकास्वामी की नाक, जीभ काट डाली गई थी और उसका जबड़ा भी तोड़ दिया गया था। इसके अलावा उसके शरीर की हड्डियों को भी तोड़ दिया गया था।

बीवी करती थी निगरानी, मौलवी करता था बलात्कार… मस्जिद में दीनी तालीम के लिए जाने वाली बच्ची का अश्लील वीडियो भी बनाया, 2 महीने से हो रहा था यौन शोषण

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक मस्जिद के अंदर 10 साल की नाबालिग बच्ची से रेप किए जाने का मामला सामने आया है। बलात्कार का आरोप मस्जिद के मौलवी रिज़वान पर लगा है। पीड़िता रिज़वान से मज़हबी व दीनी तालीम लेने जाया करती थी। आरोप है कि रिज़वान की बीवी रिज़वाना भी इस अपराध में अपने शौहर का साथ देती थी। मौलवी ने नाबालिग छात्रा का अश्लील वीडियो भी बना लिया था जिसे वो वायरल करने की धमकी दे कर ब्लैकमेल भी कर रहा था। रविवार (16 जून, 2024) को मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है। मौलवी और उसकी बीवी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र की है। यहाँ रविवार को 10 वर्षीया बच्ची के परिजनों ने शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि उनके घर के पास ही एक मस्जिद है। इस मस्जिद में बने एक कमरे में मुज़फ्फरनगर जिले का मूल निवासी मौलाना रिज़वान अपनी बीवी रिज़वाना के साथ रहता है। वह आसपास के बच्चों को दीनी तालीम देता है जिसमें नाबालिग पीड़िता भी शामिल है। लगभग 2 महीने पहले रिज़वान ने नाबालिग लड़की से रेप किया।

आरोप है कि इस दौरान उसने पीड़िता की अश्लील वीडियो भी बना डाली। वीडियो बनाने में मौलवी की बीवी रिज़वाना ने अपने शौहर का साथ दिया। इसके बाद मौलवी पीड़िता से लगातार 2 महीने तक रेप करता रहा। विरोध करने पर उसका अश्लील वीडियो वायरल करने की भी धमकी दी जाती थी। काफी समय की ख़ामोशी के बाद आखिरकार शनिवार (15 जून, 2024) को पीड़िता ने अपने परिजनों को सारी बात बता दी। मौलवी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए परिजनों ने रविवार को भी अपनी बच्ची को मस्जिद में भेजा और पीछे से खुद भी चुपके से पहुँच गए।

पीड़िता को देख कर मौलवी उसे अपने कमरे में ले गया। इस दौरान उसकी बीवी बाहर से निगरानी करने लगी। तभी लड़की के परिजन अंदर पहुँच गए। उन्होंने रिज़वाना से अपनी बेटी के बारे में पूछा तो वो कुछ जवाब नहीं दे पाई। लड़की के परिजनों का शोर सुन कर आसपास के लोग जमा हो गए। सभी ने जबरन रिज़वान का कमरा खुलवाया तो अंदर वह आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया। लोगों ने मौलवी की धुनाई कर दी। मामले की जानकारी पुलिस को हुई तो वो भी मौके पर पहुँची।

पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मौलवी रिज़वान और उसकी बीवी रिज़वाना के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। इन दोनों पर रेप और धमकी दी धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है। मियाँ-बीवी के मोबाइल और लैपटॉप को भी जब्त कर लिया गया है। डिप्टी एसपी आशुतोष ने मीडिया से बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

रोज सुरंग से भारत में घुसते हैं 10 रोहिंग्या मुस्लिम, भाषा-हुलिया बदलने की ट्रेनिंग दे 14 राज्यों में बसाए जा रहे: रिपोर्ट में बताया- त्रिपुरा से चल रहा गिरोह

भारत घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहा है, खासकर के बांग्लादेश-म्यांमार से आने वाले रोहिंग्या घुसपैठियों ने देश की नाक में दम कर रखा है। उन्हें हटाने के लिए जब भारत सरकार NRC जैसा कानून लेकर आती है तो विपक्षी दल इन इस्लामी घुसपैठियों के समर्थन में उठ खड़े होते हैं। एक अनुमान है कि भारत में 40,000 से अधिक रोहिंग्या घुसपैठिए बैठे हुए हैं। वहीं एक और अनुमान है कि प्रति महीने 200 से भी अधिक रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों को भारत में घुसाया जा रहा है।

देश के एक दर्जन से भी अधिक राज्यों में इन रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों को बसाया जा रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह भी इसमें लगा हुआ है। NIA की टीम ने हाल ही में इसके मास्टरमाइंड जलील मियाँ को गिरफ्तार किया है। अधिकतर रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रान्त से आते हैं। 1982 में ही वहाँ इन्हें नागरिकता से वंचित कर दिया गया था, 2015 के बाद इनमें से 9 लाख बांग्लादेश-भारत समेत कई देशों में भाग चुके हैं। 1 लाख का इनामी जलील मियाँ गिरोह के मुखिया जिबोन रूद्र पाल उर्फ़ सुमन का साथी है।

वो पहले ही NIA की शिकंजे में आ चुका था। वहीं इनके अन्य साथी जज मियाँ और शंतो अब तक फरार हैं। NIA इस गिरोह के 29 लोगों को गिरफ्तार कर चुका है। नवंबर 2023 में भी जलील मियाँ को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब वह फरार हो गया था। रोहिंग्या मुस्लिमों को 10-20 लाख रुपए (14-28 लाख बांग्लादेशी टका) के पैकेज के तहत भारत में फर्जी दस्तावेज देकर बसाया जा रहा है। केंद्र सरकार इन्हें अवैध अप्रवासी बता चुकी है, साथ ही इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तक घोषित कर चुकी है।

हालाँकि, UN इन्हें शरणार्थी बताता है। रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत में बसाने के लिए हिंदी-असमी जैसी भाषाओं का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। बोलने के लहजे के कारण वो पकड़े न जाएँ, इसीलिए ऐसा किया जाता है। ये गिरोह प्रतिदिन 5-10 रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में घुसाता था। पहचान छिपाने के लिए घुसपैठियों का हुलिया तक बदल दिया जाता है। दिल्ली में ऐसे कई शिविर हैं, जहाँ रोहिंग्या रह रहे हैं। सिर्फ 2 वर्ष में भारत में रोहिंग्या मुस्लिमों की जनसंख्या दोगुनी हो गई है।

केंद्र सरकार कह चुकी है कि देश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए किसी कैम्प की व्यवस्था नहीं है। मुस्लिम बहुल जम्मू कश्मीर में इनकी संख्या 10,000 बताई जाती है। कई अपराधों में भी ये रोहिंग्या शामिल रहे हैं। शाहन बाग़ और जफराबाद में CAA के खिलाफ हुए आंदोलन में इन्होंने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था। भारत पहले से ही दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भी है, ऊपर से आतंकवादी लगातार हमले की फिराक में रहते हैं। ऐसे में रोहिंग्या देश के लिए खतरे से कम नहीं।

बांग्लादेश से त्रिपुरा 856 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। करीब 16 महीने में अकेले त्रिपुरा से 1018 घुसपैठिए पकड़े गए हैं। 2023 में त्रिपुरा से पकड़े गए 337 बांग्लादेशियों में 93 औरतें और 24 बच्चे थे। साल 2023 में BSF ने 744 घुसपैठिए पकड़े थे। 2022 में 369 घुसपैठिए धराए थे। इसी तरह 2021 में 208 घुसपैठिए दबोचे गए थे, जिनमें 93 बांग्लादेशी थे। सुदूर दक्षिण में स्थित चेन्नई तक इन घुसपैठियों को बसाया जा रहा है।

सिग्नल पर नहीं रुकी मालगाड़ी, एक-दूसरे पर चढ़ गई ट्रेनें: कंचनजंगा एक्सप्रेस की बोगियों के उड़े परखच्चे, मृतकों में लोको पायलट और गार्ड भी

पश्चिम बंगाल के न्यूजलपाईगुड़ी में भीषण रेल हादसा हुआ है। यहाँ सोमवार (17 जून, 2024) रंगपानी स्टेशन के समीप खड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस ट्रेन में एक मालगाड़ी पीछे से टकरा गई। इस हादसे में 15 लोगों की मौत और 60 लोगों के घायल होने की सूचना है। मालगाड़ी के लोको पायलट और एक्सप्रेस के गार्ड की मौत भी इस हादसे में हो गई। घटनास्थल पर राहत बचाव का काम चल रहा है। हादसा का प्रारम्भिक कारण सिग्नल का अनदेखा किया जाना बताया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा सुबह 9 बजे हुआ जब सियालदह से अगरतला जाने वाले कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) रंगापानी स्टेशन के नजदीक खड़ी थी। इसी दौरान इसमें पीछे से आ रही एक मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। इसके कारण एक्सप्रेस के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए और भारी रूप से क्षतिग्रस्त हो गए।

हादसे के बाद एक डिब्बा मालगाड़ी के इंजन के ऊपर चढ़ गया। हादसे के बाद मौके पर राहत बचाव टीमें रवाना की गईं। हादसा इतना भयंकर था कि मालगाड़ी के इंजन में बैठे लोको पायलट की मौके पर ही दब कर मृत्यु हो गई। लोको पायलट के साथ एक्सप्रेस ट्रेन के गार्ड की भी मौत हो गई।

हादसे में अभी तक 15 लोगों की मौत और 60 लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घटना के बाद राहत बचाव की जानकारी दी है और खुद घटनास्थल पर रवाना हो गए हैं।

रेल मंत्री ने लिखा, “NFR जोन में दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना हुई है। बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। रेलवे, NDRF और SDRF मिलकर काम कर रहे हैं। घायलों को अस्पताल पहुँचाया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए हैं।” उन्होंने इस घटना में मुआवजे का भी ऐलान किया है। हादसे में मरने वालों के आश्रितों को ₹10 लाख, गंभीर घायलों को ₹2.5 लाख जबकि कम घायलों को ₹50,000 का मुआवजा दिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड की चेयरमैन जया वर्मा सिन्हा ने भी इस मामले में जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि प्रारम्भिक जाँच में मानव भूल का मामला सामने आया है। इस बात की संभावना है कि मालगाड़ी के लोको पायलट ने सिग्नल को अनदेखा कर दिया और इससे दोनों ट्रेनों की भिडंत हो गई। उन्होंने कहा कि आगे जाँच के बाद ही पूरी बात सामने आएगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस घटना को लेकर दुख जताया है। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हुए रेल हादसे में लोगों की मौत की खबर बेहद दुखद है। मेरी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने और राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता की कामना करती हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस घटना को लेकर दुख जताया है। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में रेल दुर्घटना दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति संवेदना। मैं प्रार्थना करता हूँ कि घायल जल्द से जल्द ठीक हो जाएँ। अधिकारियों से बात करके स्थिति का जायजा लिया है। प्रभावितों की सहायता के लिए बचाव अभियान जारी है। रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी भी दुर्घटना स्थल पर जा रहे हैं।”

इस रेल दुर्घटना में घायल और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। घटना के मूल कारण की बात के लिए अब रेलवे जाँच करेगा।

जागरण समूह के अखबारों में झूठ फैलाने की प्रतिस्पर्धा, अब दैनिक जागरण ने मोहन भागवत-जेपी नड्डा पर छापी फर्जी खबर: EVM पर फेक न्यूज पकड़ाते पकड़ा गया था मिड-डे

ऐसा लगता है जागरण समूह के अखबारों में झूठी खबर छापने की प्रतिस्पर्धा है। पहले अंग्रेजी के मिड-डे अखबार ने ईवीएम पर झूठ फैलाया। अब हिंदी समाचार पत्र भी आरएसएस संघ प्रमुख पर फर्जी न्यूज देते पकड़ा गया है।

अपनी रिपोर्ट में दैनिक जागरण ने सरसंघचालक मोहन भागवत के नाम पर बयान छापा और जेपी नड्डा के संघ पर दिए बयान को व्यक्तिगत विचार कहा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि देश में हर नागरिक को अपने विचार खुलकर रखने की स्वतंत्रता है। उनके बयान से संगठन का कोई सरोकार नहीं है। ऐसे में उनके बयान को पार्टी व संगठन की नीतियों से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है।

अब इसी खबर का अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने खंडन किया है। उन्होंने कहा है, “दैनिक जागरण में प्रकाशित यह समाचार पूर्णतः निराधार है। पूजनीय सरसंघचालक जी ने गोरखपुर में कोई सार्वजनिक वक्तव्य नहीं दिया है। वे वर्तमान में संघ के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु देशव्यापी प्रवास पर हैं।”

सुनील आंबेकर के ट्वीट के बाद जागरण ने अपने खबर में उनका बयान जोड़ा… बाकी कंटेंट वैसा ही रहने दिया। इसमें दावा किया गया कि संघ प्रमुख ने ये सारी बातें गोरखपुर में कहीं। इस दौरान उन्होंने धर्मांतरण, लव जिहाद पर बात रखी। साथ ही फेक न्यूज के खिलाफ सचेत रहने को भी कहा।

जेपी नड्डा ने क्या कहा था और क्या फैलाया गया

18 मई 2024 को प्रकाशित ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के इंटरव्यू बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष से पूछा गया था, “बीजेपी पिछले 10 वर्षों से सत्ता में है, और आरएसएस आपकी वैचारिक माता-पिता है। अब आप मजबूत हैं और देशभर में आपका व्यापक नेटवर्क है। बीजेपी-आरएसएस के बीच अब स्थिति क्या है? हमें सरकार में आरएसएस की अधिक उपस्थिति नहीं दिखती, और न ही यह नीतियों में नजर आती है, जैसा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में देखा गया था।”

इस पर जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा, “देखिए, हमने भी प्रगति की है। हर किसी का अपना-अपना काम है। आरएसएस एक सांस्कृतिक संगठन है और हम एक राजनीतिक संगठन हैं। शुरुआत में हम अक्षम होंगे, थोड़े कम होंगे, आरएसएस की जरूरत पड़ती थी… आज हम बढ़ गए हैं, सक्षम हैं… तो बीजेपी खुद को चलाती है। यही अंतर है।” (बयान में कहीं भी जेपी नड्डा ने ये नहीं कहा है कि उन्हें आरएसएस की जरूरत नहीं है।”

मिड-डे का ईवीएम पर झूठ

बता दें कि इससे पहले जागरण समूह के मिड डे ने ईवीएम पर झूठ छापा था। खबर का मूल था, “ईवीएम को फोन पर आए ओटीपी से अनलॉक किया जा सकता है।” हालाँकि बाद में रिटर्निंग ऑफिसर के बयान के बाद इस खबर को त्रुटि बताकर हटा दिया गया, लेकिन संस्थान ने फर्जी जानकारी फैलाने पर माफी नहीं माँगी जबकि इस रिपोर्ट के आधार पर विपक्षी नेता झूठ फैलाना शुरू कर चुके थे, लोकतंत्र पर सवाल उठाया जाने लगा था।

‘चाय-नाश्ता कर वापस जाएँ यादव-मुस्लिम, उनका काम नहीं करूँगा’: जानिए बिहार के एक सांसद ने MY से क्यों की तौबा

बिहार की सीतामढ़ी सीट से जेडीयू सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर ने कहा है कि वह यादवों और मुस्लिम लोगों को का कोई काम नहीं करवाएँगे। उन्होंने यह बयान हालिया लोकसभा चुनाव में हुई वोटिंग को लेकर दिया है और आरोप लगाया है कि इन दोनों समाज ने उन्हें वोट नहीं दिया जबकि वह पूर्व में इन्हें फायदा पहुँचाते रहे हैं। देवेश ठाकुर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

वायरल वीडियो में देवेश चन्द्र ठाकुर ने कहा, “कल ही सुबह में मुस्लिम समाज के एक व्यक्ति आए, उनका दुर्भाग्य था कि वह पहली बार मेरे पास आए। उन्होंने मुझे काम बताया। मैंने उनसे कहा कि अभी हाल ही में वोटिंग हुई है जिसमें आपने निश्चित रूप से लालटेन को वोट दिया होगा। उन्होंने यह बात स्वीकारी।”

देवेश चन्द्र ठाकुर ने इसके बाद कहा, “लालटेन को वोट देने के बाद भी आप मेरे पास हिम्मत करके आए हैं। किस विचार से आए हैं। मैं किसी को छोड़ता नहीं हूँ। आप पहली बार आए हैं इसलिए चाय मँगाता हूँ, मिठाई मँगाता हूँ और उसके बाद आपको विदा कर दूँगा, काम नहीं कर पाऊँगा।”

देवेश चन्द्र ठाकुर ने कहा कि उन्हें मुस्लिम वोट इसलिए नहीं मिला क्योंकि यह वोट पीएम नरेन्द्र मोदी को जाता। उन्होंने कहा कि ऐसे में वह उस व्यक्ति का काम करवाते समय उसमें लालू यादव की पार्टी का चुनाव चिन्ह लालटेन क्यों ना देखें।

पहली बार सांसद बने देवेश ठाकुर ने इस बात को लेकर दुख भी जताया कि उन्हें पहली बार ऐसा करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में उन्होंने हर व्यक्ति का काम करवाया है और व्यक्तिगत कामों के सबसे बड़े लाभार्थी मुस्लिम और यादव समाज रहे हैं।

उन्होंने यादवों और मुस्लिमों से अपील की कि वह उनसे मिलने आएँ लेकिन किसी काम को लेकर सिफारिश ना करें। देवेश ठाकुर ने कहा कि उन्हें अगर इस आधार पर कोई वोट ना दे कि उन्होंने कम काम किया है या किसी को कोई कष्ट पहुँचाया है तो ठीक भी है लेकिन सिर्फ इसलिए कि वह भाजपा से जुड़े हैं, इस आधार पर वोट ना देना सही नहीं है।

देवेश चन्द्र ठाकुर 2024 लोकसभा चुनाव में बिहार की सीतामढ़ी सीट से जेडीयू से सांसद निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने राजद के अर्जुन राय को 51,356 वोट के अंतर से हराया है। उन्हें इस चुनाव में 5.15 लाख जबकि अर्जुन राय को 4.64 लाख वोट मिले हैं।

सांसद बनने तक देवेश चन्द्र ठाकुर बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष थे। वह बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। उन्हें जेडीयू ने इस बार सुनील कुमार पिंटू की जगह इस सीट से मौका दिया था। अब उनका यह बयान सामने आया है।