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BJP की एक महिला नेता की हार के बाद 4 लोगों ने की आत्महत्या, पीड़ित परिवार से मिल खुद भी फूट-फूटकर रोईं: देखिए Video, कहा- भावुक होकर कदम न उठाएँ

बीजेपी नेता पंकजा मुंडे की लोकसभा चुनाव 2024 में नजदीकी हार से परेशान कम से कम 4 कार्यकर्ता अपनी जान दे चुके हैं। पंकजा मुंडे की हार के बाद कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस बीच, पंकजा मुंडे ने अपने कार्यकर्ताओं से अतिरंजना में आत्महत्या जैसे कदम न उठाने की अपील की है, इस अपील के बाद भी कार्यकर्ताओं के सुसाइड की खबरें आ चुकी हैं। बता दें कि पंकडा मुंडे को लोकसभा चुनाव में महज 6553 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से उनके समर्थक और बीजेपी कार्यकर्ता काफी नाराज हैं।

पंकजा मुंडे की हार की वजह से सचिन कोंडीबा मुंडे (उम्र 30, जिला लातूर), पांडुरंग रामभाऊ सोनवणे (अंबाजोगाई जिला बीड), पोपट वैभसे (जिला बीड) और गणेश उर्फ हरिभाऊ भाऊसाहेब बड़े (उम्र 35,जिला बीड) आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से सचिन मुंडे ने 7 जून को, 9 जून को पांडुरंग सोनावणे, 10 जून को पोपटराव वैभासे और गणेश बाडे ने 16 जून को अपनी जान दे दी।

पंकजा मुंडे के कट्टर समर्थक रहे गणेश बाडे को बीड लोकसभा चुनाव में पंकजा मुंडे की हार से झटका लगा था। इसके बाद उसने अवसाद के चलते फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। खबर सामने आने के बाद पंकजा मुंडे ने मृतक के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी, जहां उन्हें फूट-फूट कर रोते देखा गया। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

पंकजा मुंडे ने की समर्थकों से भावुक अपील

इस मामले में पंकजा मुंडे ने समर्थकों से भावुक अपील की है कि वो अति-गुस्से में कोई भी ऐसा कदम न उठाएँ, जो उनके और उनके परिवार के लिए दुखदाई हो। पंकजा मुंडे ने पोपटराव वैभासे के घर पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आज (16 जून 2024) आष्टी तालुका के चिंचेवाड़ी में मेरे कार्यकर्ता श्री पोपट वैभासे के परिवार के सदस्यों के साथ शोक सभा आयोजित की गई। पोपटराव एक सक्रिय कार्यकर्ता थे, जिन्होंने खुद को समर्पित कर रखा था एक योद्धा की तरह, लेकिन उनके इस तरह के निर्णय की वजह से चले जाने के चलते न सिर्फ उनता परिवार बल्कि मैं भी कमजोर हुई हूँ। आज पोपटराव वैभासे के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है जो कभी कम नहीं होगा, मैं उनके दुख को बाँटने की कोशिश करती रहूँगी। मैं उनके मासूम बच्चों और परिवारों की सारी जिम्मेदारी भी उठाऊँगी, लेकिन यह जिम्मेदारी मेरे लिए दर्दनाक है। उनके बच्चों की आँखों में अस्थिर भाव मुझे परेशान कर रहे हैं।

मेरा सभी से अनुरोध है कि “हम निश्चित रूप से इतने कमजोर नहीं हैं कि हार से निराश हो जाएँ, लेकिन यह दर्द मेरे लिए असहनीय है। अपनी जान न दें, यदि आपको साहस के साथ लड़ने वाला नेता चाहिए, तो मुझे भी साहस के साथ लड़ने वाला कार्यकर्ता चाहिए। मैं अपने लोगों को नहीं खोना चाहती। मैं हार से हतोत्साहित नहीं हूँ, लेकिन ऐसी घटनाएँ (आत्महत्याएँ) मुझे हिला टुकी हैं। मैं बहुत परेशान हूँ।”

इससे पहले उन्होंने 12 जून 2024 को भी समर्थकों से अपील का एक वीडियो शेयर किया था और समर्थकों से कहा था कि वो कोई भी आत्मघाती कदम न उठाएँ। उन्हें अपने बहादुर साथियों की जरूरत है। उन्होंने कहा था, “मेरा मानना ​​है कि किसी को भी किसी नेता से इतना प्यार नहीं करना चाहिए कि वो उसके लिए अपनी जान दे दे। अगर आपको साहस से लड़ने वाला नेता चाहिए तो मुझे भी साहस से लड़ने वाला कार्यकर्ता चाहिए। अब अगर किसी ने मेरी लिए जान दी तो मैं राजनीति छोड़ दूँगी। क्योंकि, मुझे लगता है कि राजनीति के कारण ऐसा हो रहा है। मैं हारी हुई नहीं हूँ, लेकिन इस तरह की चीजें मुझे झकझोर देती हैं। मैं खुद इस घटना से बहुत परेशान हूँ।”

गौरतलब है कि पंकजा मुंडे ने बीड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। जहाँ उन्हें महाविकास आघाड़ी के संयुक्त उम्मीदवार बजरंग सोनवणे के हाथों नजदीकी हार का सामना करना पड़ा। 4 जून 2024 को आए लोकसभा चुनाव चुनाव के नतीजों में पंकजा मुंडे को 6553 वोटों से हार मिली थी। इस बार बीजेपी ने दो बार की मौजूदा सांसद प्रीतम मुंडे की जगह उनकी बहन पंकजा मुंडे को टिकट दिया था। उनकी हार के बाद से एक के बाद एक 4 समर्थक अपनी जान दे चुके हैं।

पंकजा मुंडे महाराष्ट्र में बीजेपी के कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। वो महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। उनके पिता गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्हें महाराष्ट्र में ‘लोकनेता’ की उपाधि दी जाती रही है। वो मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री भी बने थे, लेकिन दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से उनकी बेटियाँ पंकजा मुंडे ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली है। पंकजा मुंडे बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव भी हैं।

झारखंड के पाकुड़ में बकरीद पर कुर्बानी के बाद पथराव-बमबारी, स्थानीय लोगों ने गोवंश काटने का लगाया आरोप: पुलिस ने दो गाँवों की लड़ाई बताई

झारखंड के पाकुड़ में बकरीद पर गोवंश की हत्या आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। यह हत्या खुलेआम एक व्यक्ति की जमीन पर की गई और मना किए जाने पर मारपीट और बमबाजी की गई। कुछ लोगों के घरों को तोड़े जाने की भी सूचना है। घटनास्थल पर अब सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकुड़ के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के गोपीनाथपुर इलाके में बकरीद (17 जून, 2024) को कुछ लोगों ने एक प्रतिबंधित पशु को दूसरे की जमीन पर काटना चालू कर दिया। जमीन के स्वामी ने जब इस बात को मना किया गया तो पशु काटने वाले हमलावर हो गए।

पशु काटने वालों ने पास के गाँव, जो कि पश्चिम बंगाल में आता है, से बड़ी संख्या में हमलावरों को बुला लिया। इन हमलावरों ने गाँव के लोगों को मारा पीटा और पथराव चालू कर दिया। इसके बाद इन लोगों ने गाँव में बमबाजी भी की। पश्चिम बंगाल से आए इन हमलावरों ने कई घरों को भी क्षतिग्रस्त किया।

विवाद की सूचना मिलने के बाद पश्चिम बंगाल और झारखंड की पुलिस यहाँ पहुँची। झारखंड के मुफस्सिल थाना क्षेत्र की पुलिस ने यहाँ पहुँच कर मामला शांत करवाया। गाँव में विवाद को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यह अभी तनाव कम करने के लिए गाँव में डटे हुए हैं।

मुफस्सिल थाना के पुलिस अधिकारी ने ऑपइंडिया को इस विषय में बताया है कि मामला दो गाँवों के बीच लड़ाई का है। एक गाँव झारखंड में जबकि दूसरा पश्चिम बंगाल में है, इसके बीच में नहर है। उनका कहना है कि दूसरे व्यक्ति की जमीन पर हत्या से पूरा विवाद चालू हुआ। उन्होंने बताया दोनों गाँवों के बीच विवाद की सूचना के 20-25 मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुँच गई थी।

उन्होंने बताया कि गाँव वालों ने यहाँ गौवंश काटने का आरोप मुस्लिम व्यक्तियों पर लगाया है लेकिन पुलिस को मौके पर मांस बरामद नहीं हुआ है। दूसरी तरफ झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की कानून व्यवस्था धराशायी होने की बात कही है। उन्होंने राज्य की झामुमो कॉन्ग्रेस सरकार पर घुसपैठियों पर एक्शन ना लेने का आरोप लगाया है।

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है इस इलाके में घुसपैठिए उत्पात मचा रहे हैं, आदिवासियों की जमीनें हड़प रहे हैं, बहन-बेटियों की इज्ज़त लूट रहे हैं और स्थानीय लोगों के संसाधनों पर हक़ जता रहे हैं, इसके बाद भी सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।

‘यहीं काटेंगे बकरा… जो करना है कर लो’ : मुंबई के मीरा रोड की सोसायटी में बकरीद पर हंगामा, कुर्बानी का विरोध करने पर हिन्दुओं से अभद्र व्यवहार

मुंबई के मीरा रोड इलाके में बकरीद से एक दिन पहले रविवार (16 जून 2024) को कुर्बानी के लिए लाए गए बकरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। यहाँ मुस्लिम तबके के लोग सोसाइटी परिसर में कुर्बानी देने पर आमादा थे लेकिन हिन्दू पक्ष इसका विरोध कर रहा था। आरोप है कि इस विरोध की वजह से हिन्दुओं को धमकियाँ मिलीं और उनके घर की महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया गया। मामले की शिकायत पुलिस में भी दी गई लेकिन इस पर अभी तक FIR दर्ज नहीं हुई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मीरा रोड के काशीगांव थानाक्षेत्र में पड़ने वाली जेपी नॉर्थ सेलेस्टे सोसायटी की है। 16 जून (रविवार) को यहाँ रहने वाला एक मुस्लिम परिवार कुर्बानी के लिए कुछ बकरे खरीद कर लाया। सोसाइटी में रहने वाले हिन्दू परिवारों ने इसका विरोध किया। वो चाहते थे कि मुस्लिम परिवार कुर्बानी सोसाइटी कैम्पस के बाहर करे। इस दलील के साथ विरोध कर रहे परिवारों ने सोसाइटी के नियम भी दिखाए जिसमें अंदर बकरियाँ लाना मना बताया गया था। हालाँकि मुस्लिम परिवार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। वह सोसाइटी कैम्पस में ही कुर्बानी की जिद्द पर अड़ा रहा।

शिकायत कॉपी

मामले की जानकारी मिलने पर हिन्दू संगठन भी हस्तक्षेप के लिए पहुँचे। इन सदस्यों ने मुस्लिम परिवार से वो अनुमति दिखाने के लिए कहा जिसके तहत बकरे सोसाइटी के अंदर लाए गए थे। इसी के साथ बकरों की मेडिकल जाँच रिपोर्ट भी माँगी गई। संतोषजनक जवाब न मिलने पर हिन्दू संगठन के सदस्यों ने सोसाइटी के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनकी माँग थी कि बकरों को सोसाइटी से बाहर किया जाए। इसी के साथ एक शिकायत स्थानीय काशीगाँव थाने में शिकायत दी गई।

लोगों को समझाता पुलिस बल

इस शिकायत में हिन्दू पक्ष ने सोसाइटी में बकरे काटने पर रोक लगाने की माँग की है। अपनी सफाई में मुस्लिम पक्ष पुलिस को एक आपसी समझौते का एक लेटर दिखा रहा है। इस लेटर में सोसाइटी में बकरे लाने पर हिन्दुओं के सहमत होने का दावा किया गया है। हालाँकि हिन्दू पक्ष ऐसा कोई भी समझौता होने से इनकार कर रहा है और इस लेटर को एक छिपी साजिश बता रहा है।

आसपास पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएँ

बताते चलें कि जिस इलाके में जेपी नॉर्थ सेलेस्टे सोसाइटी है उसके आसपास इस प्रकार की घटनाएँ पहले भी हुईं हैं। इसी इलाके में मौजूद ‘हिल गैलेक्सी अपार्टमेंट’ में 16 जून को एक सिख परिवार ने पाँचवे सिख गुरु, गुरु अर्जन देव की पुण्यतिथि पर एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित किया था, तब सिख परिवार की महिलाएँ आसपास के लोगों को ‘सरबत प्रसाद’ बाँट रही थीं। इसी दौरान उन्होंने देखा कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग सोसाइटी परिसर में कथित तौर पर कुर्बानी के लिए 14 बकरियाँ ले जा रहे हैं।

जब महिलाओं ने पूछा तो इन बकरों को सोसाइटी के बाहर ले जाने का जवाब मिला। सिख परिवार का आरोप है कि उनसे झूठ बोला गया था। उन्होंने बताया कि वो बकरे बाहर नहीं बल्कि सोसाइटी के अंदर कुर्बानी के लिए ले जाए जा रहे थे। दावा यह भी किया गया कि बाद में कुर्बानी के लिए 4 बकरे और लाए गए थे। आरोप है कि इसका विरोध करने पर मुस्लिम पक्ष द्वारा ‘जो करना हो कर लो’ की घुड़की के साथ हिन्दुओं को माँ की गालियाँ दी गईं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय मीडिया ने सिख महिला के हवाले से बताया कि हिल गैलेक्सी अपार्टमेंट में तमाम विरोधों के बावजूद पिछले 4 वर्षों से मुस्लिम समुदाय के लोग बकरों की कुर्बानी कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि रोके जाने पर महिलाओं तक को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

भगवान गणेश को दी गई गाली, हिन्दुओं को धमकाया

सोमवार (17 जून) को हिल गैलेक्सी आपर्टमेंट के एक निवासी ने काशीगाँव थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। इस शिकायत में बताया गया है कि बकरों की कुर्बानी से मना करने पर हिन्दू धर्म का अपमान किया गया। ऑपइंडिया को मिली शिकायत कॉपी में लिखा गया है कि मुस्लिमों ने हिन्दुओं को धमकाया और कहा कि मुस्लिम सोसायटी परिसर में ही बकरे काटेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। विरोध करने वालों को “जो कर सकते हो कर लो’ जैसे ताव दिए गए। इसी शिकायत में हिन्दुओं को माँ की गाली दिए जाने का भी जिक्र है।

हिन्दू संगठनों का प्रदर्शन

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि मुस्लिम पक्ष के लोगों ने गाली-गलौज के साथ भगवान गणेश का भी अपमान किया है। उन्होंने हिन्दुओं से कहा, “तुम लोग जब गणेश उत्सव मनाते हो तब क्या हम कुछ कहते हैं? तुम्हारे भगवान गणेश को देख कर हमें गुस्सा के साथ उल्टी आने लगती है। अब हम भी देखेंगे कि तुम लोग यहाँ अपना गणपति उत्सव कैसे मनाते हो।”

जिम की जगह बता कर बना दी अवैध मस्जिद

बकौल शिकायतकर्ता उन्होंने सोसाइटी के बिल्डर (आर आर बिल्डर्स) और मेंटेनेंस देखने वाले रसूल, इरफान, जुनैद और जब्बार शेख को भी फोन किया था। तब इन सभी को मुस्लिम पक्ष द्वारा हिन्दुओं के देवताओं को दी गई गालियों की शिकायत की गई थी। हालाँकि बिल्डर की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला था। उन्होंने खुद को शहर से बाहर बताते हुए इस मामले से खुद को दूर ही रखने जैसा जवाब दिया था। आरोप यह भी है कि इमारत परिसर में एक अवैध मस्जिद भी बना दी गई है।

सोसाइटी में बनी मस्जिद

जिस जगह मस्जिद बनी है वहाँ पहले जिम या क्लब बनाने का झाँसा दिया गया था। ऑपइंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक बिल्डर रसूल शेख ने शुरुआत में हिंदुओं को घर दिए थे, लेकिन बाद में बाकी कई घर मुस्लिमों ने बुक करवा लिए। जेपी नॉर्थ सेलेस्टा और हिल गैलेक्सी मिला कर कुल लगभग 130-150 घर हैं। इनमे करीब 15-20 घर ही हिंदुओं के हैं जबकि 100 से ज़्यादा घरों पर मुस्लिमों का कब्ज़ा है।

मुस्लिमों द्वारा प्रताड़ित एक सिख महिला का तो यहाँ तक दावा है कि वहाँ अन्य सोसाइटियों के मुस्लिम भी नमाज़ पढ़ने आते रहते हैं जिससे उन्हें कई बार असुविधा का सामना करना पड़ता है। शिकायत में आगे जिक्र किया गया है कि सोसाइटी में बनी अवैध मस्जिद के अंदर नमाज़ अदा करने के लिए आने वाली भीड़ अक्सर हंगामा करती रहती है। इस हंगामे की शिकायतों पर बिल्डर कोई ध्यान नहीं देता। आए दिन हिन्दू परेशान होते हैं। सोसाइटी के हिन्दुओं ने पुलिस से मामले में हस्तक्षेप की माँग की है।

मुस्लिम बहुल सोसाइटी के हिन्दुओं से ऑपइंडिया ने की बात

ऑपइंडिया ने इन सोसाइटी में रहने वाले कुछ हिन्दुओं से बात की। उन्होंने कहा कि वो अपनी आँखों के आगे बकरे कटते देख कर असहज हो जाते हैं। सोसायटी के हिन्दुओं ने फिर अपील की है कि कुर्बानी उन जगहों पर की जाए जिन्हें सरकार ने चिन्हित किया है। वहीं एक दूसरे हिन्दू ने हमें बताया कि मुस्लिम बहुल सोसाइटी होने की वजह से यहाँ हिन्दुओं को परेशान किया जा रहा है। इन लोगों का दावा है कि कोई भी लिखित कानून सोसाइटी का नहीं है और तमाम बातें सुविधा के अनुसार तय होती हैं।

एक हिन्दू कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया को बताया कि पुलिस मुस्लिम पक्ष के बजाय हिन्दुओं से ही शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन मुस्लिमों के बजाय हिन्दुओं के ही दमन पर लगा हुआ है। इस तमाम आपाधापी के बीच कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और सोसाइटी के अंदर बकरा काटने की अनुमति देने से मना कर दिया है। हालाँकि अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

जब हमने इसकी पुष्टि के लिए स्थानीय थाने के सीनियर पीआई राहुल पाटिल को फोन किया तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। प्रशासन की इसी सुस्ती की वजह से कई इस्लमी हैंडल इस मामले में हिन्दुओं को ही बदनाम करने में जुट गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह दुष्प्रचार शुरू कर दिया है कि 16 जून को जेपी नॉर्थ सेलेस्टा सोसायटी में हंगामा मुस्लिमों ने नहीं बल्कि हिंदुओं ने किया था।

भाजपा विधायक ने सोसाइटी में पशु वध न होने का दिया भरोसा

इस पूरे मामले में मीरा भयंदर से भारतीय जनता पार्टी की विधायक गीता जैन का बयान सामने आया है। उन्होंने भरोसा दिया है कि सोसाइटी के अंदर किसी भी प्रकार का पशु वध नहीं किया जाएगा। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि सोसाइटी के अंदर कुर्बानी के लिए बकरे लाए गए थे लेकिन पुलिस और स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप से ऐसा नहीं हो पाया। गीता जैन ने मुस्लिम पक्ष द्वारा हिन्दू महिलाओं से दुर्व्यवहार की घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं से अभद्रता करने वाले को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

भाजपा विधायक गीता जैन, चित्र साभार- ANI

MLA गीता जैन ने बताया कि इस प्रकार की घटनाओं की तादाद बढ़ रही है। हालाँकि उनका मानना है कि पुलिस इसे अंदरूनी मामला बता रही है। भाजपा MLA ने पुलिस की कार्रवाई को हिन्दू भावनाओं के अनुरूप नहीं माना है। वो चाहती हैं कि हिन्दू महिलाओं से अभद्रता करने वाले व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की जाए। बताते चलें कि मुंबई का मीरा रोड इलाका पिछले कुछ समय से इसी प्रकार की अलग-अलग घटनाओं से प्रभावित रहा है।

नोट: सिद्धि सोमानी की यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है। विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

जिस जगन्नाथ मंदिर में फेंका गया था गाय का सिर, वहाँ हजारों की भीड़ ने जुट कर की महा-आरती: पूछा – खुलेआम कैसे घूम रहा था जिला-बदर अपराधी नौशाद?

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में शुक्रवार (14 जून, 2024) को भगवान जगन्नाथ मंदिर परिसर में गाय का कटा सिर फेंका गया था। इस घटना के बाद हिन्दुओं में आक्रोश फ़ैल गया था। पुलिस ने सलमान, शाकिर, नौशाद और शाहरुख (25) को NSA एक्ट के तहत जेल भेजा था और इनके घरों पर बुलडोजर चलाया था। जावरा इलाके के जिस मंदिर में यह हरकत की गई थी वहाँ सोमवार (17 जून, 2024) को महाआरती की गई। हजारों लोगों ने इस आरती में हिस्सा लिया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में असल साजिशकर्ताओं के नाम सामने ला कर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक दिन पहले रविवार को हुई घोषणा के बाद सोमवार को जावरा के जगन्नाथ मंदिर पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जमा होने लगी। सर्वसमाज के हजारों लोगों की इस भीड़ से घंटाघर इलाका भर गया। रतलाम के डीएम और एसपी सहित तमाम बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद थे। सर्वसमाज ने जगन्नाथ मंदिर में महाआरती की। महाआरती के बाद हिन्दू समाज के लोगों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को सम्बोधित करते हुए रतलाम के SDM को एक ज्ञापन सौंपा।

इस ज्ञापन में बताया गया है कि जिन 4 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है वो महज किसी के द्वारा संचालित हो रहे मोहरे हो सकते हैं। सर्व-समाज ने माँग की है कि मंदिर परिवार में गौमांस फेंके जाने के असल मास्टरमाइंड को बेनकाब करते हुए उस पर भी कठोर कार्रवाई की जाए। लोगों ने गिरफ्तार आरोपितों को रिमांड पर ले कर फिर से पूछताछ करने और उनके कॉल व बैंक रिकॉर्ड खँगालने की भी बात दिए गए ज्ञापन में लिखी है। इसी ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया गया है कि जिला बदर अपराधी होने के बावजूद नौशाद इतने आराम से कैसे घूम रहा था।

सर्वसमाज के ज्ञापन में जावरा के महत्वपूर्ण स्थानों पर CCTV कैमरे लगवाने, रतलाम में मौजूद रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की पहचान कर के उनकी गिरफ्तारी करने, मुस्लिमों द्वारा कब्ज़ा की गई सरकारी जमीन को 14 दिनों के अंदर मुक्त करवाने जैसी माँगों को प्रमुखता दी गई है। इसी के साथ नगर में चल रहे अवैध बूचड़खानों को चिह्नित कर के उन्हें तत्काल बंद करने की भी आवाज उठाई गई है।

बकरीद पर लाल हुआ नाले का पानी, हिन्दुओं ने किया विरोध मुस्लिम भीड़ ने कर दिया हमला: पुलिस व मीडिया पर भी पत्थरबाजी, धारा-144 लागू

बकरीद पर ओडिशा के बालेश्वर इलाके में 2 समुदायों के बीच हिंसक झड़प की खबर है। इस दौरान पत्थरबाजी हुई जिसमें कई मीडियाकर्मी सहित पुलिस वाले भी घायल हुए हैं। विवाद की शुरुआत एक नाले के पाने का लाल रंग देख कर हुई। हिन्दू संगठनों ने इस कुर्बानी की वजह से बहा खून बताया और प्रदर्शन शुरू कर दिए। प्रदर्शनकारियों पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया जिस से हालत तनावपूर्ण हो गए। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स भेजी जा रही है। घटना सोमवार (17 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बालेश्वर के सुनहट इलाके की है। यहाँ सोमवार की दोपहर में कुछ स्थानीय लोगों को आबादी के पास से बहने वाले नाले का पानी लाल रंग का दिखा। फ़ौरन ही मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने लाल रंग के पानी के सैम्पल उठाए और जाँच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। पानी को कुर्बानी का खून बताते हुए हिन्दू संगठन के सदस्यों ने मुख्य मार्ग पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान वहाँ मुस्लिम पक्ष के कुछ लोग पहुँच गए। वो प्रदर्शनकारियों से बहस करने लगे।

आरोप है कि इसी दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से पुलिस की मौजूदगी में ही प्रदर्शनकारियों पर पत्थर चलने लगे। कुछ ही देर में विवाद की सूचना पूरे इलाके में फ़ैल गई। आसपास के लोग भी घटनास्थल पर पहुँचने लगे। पुलिस के तमाम प्रयासों के बावजूद पत्थरबाजी जारी रही। पथराव के चलते 1 दर्जन से अधिक दो व चार पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। हिंसा को काबू करने का प्रयास करते हुए 2 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना को कवर कर रहे कुछ पत्रकारों के कैमरे और मोबाइल को तोड़ डाला गया है।

हालात काबू करने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स भेजी गई है। पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ कर जैसे-तैसे हालात पर काबू पाया। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। हिंसा से हुए नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा अभी तक जारी नहीं हुआ है। हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। फ़िलहाल किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि पुलिस द्वारा नहीं की गई है।

केरल की वायनाड सीट छोड़ेंगे राहुल गाँधी, पहली बार लोकसभा लड़ेंगी प्रियंका: रायबरेली रख कर यूपी की राजनीति पर कॉन्ग्रेस का सारा जोर

कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव 2024 में 2 सीटों से जीत दर्ज की – केरल की वायनाड और उत्तर प्रदेश की रायबरेली। उन्हें दोनों ही सीटों पर जीत मिली। अब राहुल गाँधी ने फैसला लिया है कि वो वायनाड सीट छोड़ देंगे और रायबरेली अपने पास रखेंगे। वहीं वायनाड की रिक्त सीट पर कॉन्ग्रेस की तरफ से उनकी बहन प्रियंका गाँधी को लड़ाने का फैसला लिया गया है। वायनाड में मुस्लिमों की अच्छी-खासी जनसंख्या है और IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) कॉन्ग्रेस का समर्थन करती है।

राहुल गाँधी ने रायबरेली में 3.90 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। जहाँ उन्हें 6.87 लाख वोट प्राप्त हुए थे, वहीं उनके सामने खड़े भाजपा के दिनेश प्रति सिंह को 2.97 लाख वोटों से संतोष करना पड़ा था। रायबरेली सीट से 13 बार नेहरू-गाँधी परिवार ने जीत दर्ज की है। इंदिरा गाँधी यहाँ से 3 बार सांसद रहीं, जबकि उनके पति फिरोज गाँधी भी 2 बार जीते थे। सोनिया गाँधी ने यहाँ से लगातार 5 बार जीत दर्ज की। 1999 से ही ये सीट कॉन्ग्रेस के कब्जे में है।

वहीं वायनाड की बात करें तो अबकी राहुल गाँधी ने यहाँ से 3.64 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। पिछली बार वो यहाँ से 4.31 लाख वोटों से जीते थे। अबकी राहुल गाँधी के सामने CPI के उम्मीदवार एनी राजा 2.83 लाख वोटों पर ही रुक गए। वहीं भाजपा के K सुरेंद्रन 1.41 लाख वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। अब प्रियंका गाँधी यहाँ से लड़ेंगी। वायनाड जिले में मुस्लिमों की जनसंख्या 30% के आसपास है, ऐसे में कॉन्ग्रेस को उनका समर्थन जीत दिलाता है।

राहुल गाँधी ने कहा कि रायबरेली और वायनाड से उनका भावनात्मक रिश्ता है, पिछले 5 साल वो वायनाड से सांसद थे और उन्हें वहाँ सभी ने बहुत प्यार दिया। जनता का धन्यवाद जताते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि उनकी बहन प्रियंका वायनाड से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने वादा किया कि हम मिलकर वायनाड से किए हर वादे को पूरा करेंगे। उत्तर प्रदेश में भाजपा इस बार 64 से सीधे 33 सीटों पर आ गई है, ऐसे में विपक्ष का पूरा जोर यहाँ भाजपा को और कमजोर करने में लगा हुआ है।

बिहार के मुजफ्फरपुर में 200 लड़कियों से बलात्कार का दावा, फर्जी कंपनी बना कर देते थे नौकरी का झाँसा: बंधक बना कर बेल्ट से पिटाई, गर्भपात भी कराया

बिहार के मुजफ्फरपुर में नौकरी का झाँसा देकर 200 लड़कियों के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। बता दें कि बिहार पहले से ही बेरोजगारी और पलायन की समस्या से जूझता रहा है क्योंकि यहाँ उद्योग-धंधों की कमी है। कुछ लोगों ने इसी समस्या को अपराध के लिए हथियार बना लिया और एक कंपनी खोली। अहियापुर इलाके में 180 लड़कियों को नौकरी दिए जाने के नाम पर बंधक बनाया गया। उनके साथ मारपीट हुई, उनका यौन शोषण किया गया।

ये वही मुजफ्फरपुर है जहाँ से ‘बालिका गृह कांड’ की घटना सामने आई थी। इसे हम ‘भक्षक’ फिल्म में देख चुके हैं। वहाँ 34 बच्चियों के यौन शोषण का मामला सामने आया था। संचालन ब्रजेश ठाकुर एक स्थानीय अख़बार भी चलाता था। अब इसी मुजफ्फरपुर में हुई वारदात को लेकर छपरा की एक पीड़िता ने मामला दर्ज कराया है। DVR नामक कंपनी ने फेसबुक पर लड़कियों के लिए जॉब ऑफर पोस्ट किया था और वो इससे जुड़ी। अप्लाई करने के बाद चयन हुआ और उससे प्रशिक्षण के नाम पर 20,000 रुपए माँगे गए।

अहियापुर थाना क्षेत्र स्थित बखरी के पास ही पैसा जमा किए जाने के बाद कई लड़कियों को रखा गया था। 3 महीने बीतने के बाद भी इन्हें वेतन नहीं दिया गया, जिसके शिकायत इन लड़कियों ने कंपनी के CMD तिलक सिंह से की। पीड़िता को इसके बाद 50 और लड़कियों को कंपनी से जोड़ने के लिए कहा गया और वादा किया गया कि इसके बाद उसकी सैलरी 50,000 रुपए हो जाएगी। उस दौरान पुलिस ने कंपनी के दफ्तर व हॉस्टल पर छापेमारी की, तिलक सिंह कई लड़कियों को लेकर हाजीपुर शिफ्ट हो गया और वहाँ उसने पीड़िता से शादी कर डाली।

मुजफ्फरपुर में रहने के दौरान भी उसने पीड़िता के साथ जबरन यौन संबंध बनाया था और उसका गर्भपात भी करा दिया था। हाजीपुर में जब वो मौके जाने की जिद करती तो उसे पीटा जाता था। बौरिया क्षेत्र में उसे कुछ आपसी दिए गए और कहा गया कि अब तुम आज़ाद हो। पीड़िता ने बताया कि लड़कियों को बंधक बनाया जाता है, वो भागने न पाए इसके लिए मुस्तंडों को तैनात रखा जाता है। लड़कियों से उनकी रिश्तेदारी व जान-पहचान में स्थित अन्य लड़कियों को फोन कॉल करवाए जाते हैं, उन्हें भी जॉब का ऑफर देकर उनका यौन शोषण होता है

इन लड़कियों को मुँह खोलने पर उनके परिजनों की हत्या की धमकी दी जाती है। कंपनी विज्ञापन में लिखती थी कि ये नौकरी सिर्फ लड़कियों के लिए ही है और मोटी सैलरी की पेशकश की जाती थी। बेल्ट से एक लड़की की पिटाई का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है, आगे की जाँच की बात कही जा रही है। पीड़िता ने बताया कि लड़कियों को कॉल करना सिखाया जाता था। पीड़िता ने बताया कि उसके फोन में कई सबूत थे, आरोपितों ने उसका फोन भी तोड़ डाला, उसे फॉर्मेट कर दिया।

राहत-बचाव कार्य खत्म, अब मरम्मत का हो रहा काम: बाइक से दुर्घटना स्थल पर पहुँचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, अस्पताल जाकर घायलों का भी लिया हालचाल

पश्चिम बंगाल में कंचनजंगा एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद घटनास्थल पर पहुँचे हैं। इस दौरान उन्होंने सिलीगुड़ी स्थित नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज पहुँच कर घायलों से भी उनका हालचाल जाना। वहीं दुर्घटना स्थल तक पहुँचने के लिए उन्होंने बाइक का सहारा लिया। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि रेल मंत्री सिर्फ रील बनाने में व्यस्त हैं और यात्रियों के जीवन की उन्हें कोई चिंता नहीं है।

इस घटना में 9 लोगों को मौत हुई है, जिनमें 2 रेलवे के कर्मचारी भी शामिल हैं। वहीं 9 गंभीर रूप से घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, 32 ऐसे लोग हैं जिन्हें मामूली चोटें आई हैं। सोमवार (17 जून, 2024) की सुबह एक मालगाड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस में घुस गई, जिस कारण दार्जीलिंग जिले में ये हादसा हुआ। सुबह के साढ़े 8 बजे के करीब ये घटना हुई, तब लोगों को ज़ोर की आवाज़ सुनाई दी। कमीशन ऑन रेलवे सेफ्टी को इस मामले की जाँच सौंपी गई है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि राहत व बचाव कार्य ख़त्म कर लिया गया है, अब जो क्षति हुई है उसे ठीक करने का काम किया जा रहा है। ये रेलवे की मेन लाइन है। उन्होंने कहा कि किस चूक के कारण ये घटना हुई उसकी पहचान की जाएगी और भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए प्रबंध किए जाएँगे। ये घटना रंगापानी इलाके में हुई है। ये ट्रेन सियालदह जा रही थी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष जया वर्मा सिन्हा ने कहा कि ये मानवीय भूल से हुई घटना प्रतीत हो रही है, कार्गो ट्रेन के ड्राइवर की भी मौत हो गई है।

जहाँ दुर्घटना हुई, वो जगह जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। कंचनजंगा एक्सप्रेस के 4 और मालगाड़ी के 5 डब्बे इस दौरान पटरी से उतर गए थे। भारतीय रेलवे ने मृतकों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपए की मुआवजा राशि घोषित की है, वहीं गंभीर रूप से घायलों को ढाई लाख रुपए व घायलों के लिए 50,000 रुपए की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दुर्घटना पर दुःख जताया है और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

बकरों के कटने से दिक्कत नहीं, दिवाली पर ‘राम-सीता बचाने नहीं आएँगे’ कह रही थी पत्रकार तनुश्री पांडे: वायर-प्रिंट में कर चुकी हैं काम, अब शाकाहारियों पर भड़कीं

बकरीद के दौरान सोशल मीडिया पर तथाकथित बुद्धिजीवियों के एक वर्ग द्वारा शाकाहारियों को गाली दी जा रही है, जीव-हत्या का विरोध करने वालों को नीचा दिखाया जा रहा है। असल में नलिनी उनगर नामक एक महिला ने शाकाहारी थाली की तस्वीर डाली, जिसमें चावल और पनीर के अलावा कुछ अन्य खाद्य पदार्थ थे। उन्होंने लिखा कि उनकी थाली क्रूरता, आँसू और पाप से मुक्त है। तनुश्री पांडे को ये पसंद नहीं आया। उन्होंने इस ट्वीट पर उन्हें भला-बुरा कहना शुरू कर दिया।

तनुश्री पांडे ने लिखा, “ऐसा कुछ होगा जो बिना तुलना किए, बिना प्रतियोगिता किए और बिना दूसरों को छोटा दिखाए किया जा सकेगा? जो खाना है खाओ। मजे करो और खुश रहो। क्या ये उठा कठिन है? ईद मुबारक है आपको भी।” असल में तनुश्री पांडे को दिक्कत इस बात से है कि बकरीद पर दुनिया भर में कटने वालों लाखों बकरों के संबंध में चर्चा क्यों की जा रही है। कई मुस्लिम बहुल इलाकों में बकरीद वाले दिन खून की नदियाँ बहने लगती हैं।

यहाँ ये जानना ज़रूरी है कि बकरीद के दौरान कोई भी तुलना या प्रतियोगिता न चाहने वाली तनुश्री पांडे हिन्दुओं के त्योहार दीपावली के दौरान पलट जाती हैं। उन्हें दिवाली पर अचानक पशु-पक्षियों की चिंता सताने लगती है और वो पटाखों के विरोध में उतर जाती हैं। ‘मज़े करो और खुश रहो’ वाली उनकी थ्योरी सिर्फ मुस्लिमों के त्योहारों के लिए है। उस दौरान उन्होंने लिखा था, “राम-सीता तुम्हें प्रदूषण से बचाने के लिए नहीं आएँगे। अगली बार साफ़-स्वच्छ दिवाली मनाइए।”

क्या बकरीद पर वो मुस्लिमों को ये सलाह नहीं दे सकतीं कि बिना खून वाली स्वच्छ बकरीद मनाएँ? फिर हिन्दुओं के पर्व पर ही ज्ञान क्यों उड़ेला उन्होंने और मुस्लिमों के वक्त ‘जो जैसा करता है करने दो’ वाली थ्योरी कहाँ से आ गई अचानक? अब लोग तनुश्री पांडे को याद दिला रहे हैं कि दिवाली के दौरान उन्होंने क्या कहा था। वैसे भी वो ‘द वायर’, ‘द प्रिंट’ और पूर्व वाली NDTV में काम कर चुकी हैं, इससे आप समझ सकते हैं कि वो किस तरह की ‘पत्रकार’ होंगी।

हाल ही में जम्मू कश्मीर के रियासी में शिव खोड़ी मंदिर से लौट रहे श्रद्धालुओं की बस पर हुए हमले में बच्चों-महिलाओं समेत 10 मारे गए। तनुश्री पांडे ने इस मामले में भी आतंकवादियों की पैरवी की। उन्होंने आतंकियों को ‘विदेशी’ बताया और श्रद्धालुओं के धर्म की चर्चा तक नहीं की जिस वजह से उन्हें निशाना बनाया गया था। वो खुद फिलिस्तीनियों के लिए ‘All Eyes On Rafah’ का ट्रेंड चलाती हैं, लेकिन जब लोगों ने रियासी हमले को लेकर ये ट्रेंड चलाया तो उन्हें पसंद नहीं आया

इसी तरह उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की के बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में उन्होंने सनसनी फैलाई थी। एक लीक हुए ऑडियो से पता चला था कि तनुश्री पांडे ने मृतका के पिता पर दबाव बनाया था कि व ये कहें कि धमकी के कारण उन्होंने जाँच से संतुष्ट होने की बात कही है। तनुश्री पांडे इसी तरह जहाँगीरपुरी में हनुमान यात्रा पर हुए हमलों को लेकर भी ‘छोटी जाति के हिन्दुओं’ को दोषी बता चुकी हैं। उन्होंने उस दौरान भी पत्थरबाजी की घटना के व्हाइटवॉश का प्रयास किया था

ईदगाह में सुनाई पड़ी शिव मंदिर से आवाज तो भड़क गए नमाजी, माइक उतारने जुटी भीड़: दरभंगा के जमालपुर में बकरीद के दिन बवाल, पुलिस ने मामला शांत कराया

बिहार के दरभंगा जिले में बकरीद के दौरान साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ नमाज़ के दौरान शिव चर्चा का माइक बजने पर 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे का सामान फेंकना शुरू कर दिया। मामले की जानकारी होती ही मौके पर पहुँची पुलिस ने विवाद को शांत करवाया। हालात तनावपूर्व देखते हुए गाँव में पुलिस तैनात कर दी गई है। घटना सोमवार (17 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला दरभंगा के जमालपुर इलाके का है। यहाँ के एक गाँव में बकरीद के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह में जुटकर नमाज़ पढ़ रहे थे। इसी दौरान गाँव के एक शिव मंदिर में शिव चर्चा के लिए हिन्दू समुदाय के लोग जमा हुए थे। इन्होंने शिव चर्चा के लिए माइक लगा रखा था जिसका साउंड टेस्ट करने के लिए थोड़े समय के लिए इसे ऑन किया था। मंदिर पर लगे माइक की आवाज सुनकर मुस्लिम समुदाय के तमाम लोग वहाँ जमा होने लगे।

स्थानीय ग्रामीण सुशील कुमार का आरोप है कि लगभग 50 की संख्या में आए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मंदिर पर लगा माइक खोलना शुरू कर दिया जबकि तब तक माइक खुद से ही बंद करवा दिया गया था। इस दौरान हिन्दू पक्ष ने इस हरकत का विरोध किया तो हालात तनावपूर्ण हो गए। दोनों पक्षों ने एक दूसरे का सामान फेंकना शुरू कर दिया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। बिखरे सामानों के वीडियो वायरल हो रहे हैं। पुलिस ने गाँव में पहुँच कर दोनों पक्षों को समझा कर शांत किया।

इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। कई अधिकारी मौके पर कैम्प कर रहे हैं। दरभंगा पुलिस की अधिकारी काम्या मिश्रा भी मौके पर पहुँची। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठा कर मामले को शांत करवा दिया गया है। आगे से ऐसा न हो इसकी भी पुलिस की तरफ से सख्त हिदायत दी गई है। इस मामले की भी जाँच करवा कर दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।