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थाली में चावल और पनीर देख स्वरा भास्कर को मची चुल, कहा- बकरीद पर मत दिखाओ यह सदाचार: शाकाहारियों को बताया ‘आत्ममुग्ध’

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर लंबे समय बाद फिर चर्चा में आई हैं। कारण है बकरीद के दिन किया गया उनका ट्वीट। अपने ट्वीट में उन्होंने शाकाहारियों पर सवाल खड़े किए। साथ ही वेजिटेरियन खाने वाले को आराम से रहने को कहा क्योंकि बकरीद है। उन्होंने लोगों के वेजीटेरियन होने पर सवाल उठाए और एक्स यूजर नलिनी उनागर नाम की फूड ब्लॉगर की फोटो पर कमेंट करके अपनी भड़ास निकाली।

दरअसल, नलिनी ने एक शाकाहारी खाने की थाली को तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, “मुझे वेजीटेरियन होनेपर गर्व है। मेरी प्लेट आँसूओं, क्रूरता, पाप से मुक्त है।”

इसी पर कमेंट करते हुए स्वरा भास्कर ने लिखा, “सच कहूँ तो…मुझे वेजीटेरियन लोगों की आत्ममुग्धता समझ नहीं आती। आप लोगों की सारी डाइट गाय के नन्हें बछड़ों को उनकी माँ के दूध से वंचित करके, गायों को जबरन गर्भवती करके, फिर उन्हें उनके बच्चों से अलग कर देने और उनका दूध चुराने से बनती है। इसके अलावा आप जड़ वाली सब्जियाँ खाते हैं, इससे पूरा पौधा ही खत्म हो जाता है! बेहतर होगा आप लोग रिलैक्स करें क्योंकि आज बकरीद है!”

स्वरा भास्कर अपने इस ट्वीट में दिए तर्क के जरिए ये बताना चाहती थीं कि नॉनवेज खाना कितना सही होता है और शाकाहारी लोग बेवजह ही अपनी डाइट पर गर्व करते हैं। उनके इस ट्वीट के बाद तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ आना शुरू हो गईं। लोगों ने कहना शुरू किया कि स्वरा भास्कर को उड़ता तीर लेने की आदत हो गई है।

लोगों ने उनसे पूछना शुरू कर दिया तो क्या स्वरा भास्कर ये कहना चाहती हैं कि गायों का दूध लेना गलत है, लेकिन गाय को काट लेना और फिर माँस को पकाकर खाना सही है। कुछ लोग ये भी बता रहे हैं कि गाय से दूध लेने के लिए उसे काटने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन मांसाहारियों को भोजन के लिए क्या करना पड़ता है ये सब जानते हैं इसलिए स्वरा ज्यादा ज्ञान न दें।

गौरतलब है कि स्वरा भास्कर ने पिछले साल फहाद अहमद से शादी की थी। कुछ समय बाद दोनों की बेटी हुई। हाल में स्वरा ने खुलासा किया था कि उन्हें उनके ओपिनियनों की वजह से काम मिलना बंद हो गया है। वहीं उनके शौहर भी उन्हें समझाते हैं कि स्वरा को फालतू के ओपिनियन देने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए बल्कि फिल्मों में बतौर एक्ट्रेस काम करने पर ध्यान देना चाहिए।

‘आखिरकार पोप को मिला भगवान से मिलने का मौका’: ईसाइयों का मजाक उड़ाने के बाद केरल कॉन्ग्रेस ने माँगी माफी, PM मोदी से मुलाकात पर दिखाई थी घृणा

कॉन्ग्रेस ने एक्स (पहले ट्विटर) पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप को लेकर की गई एक पोस्ट को लेकर माफी माँगी है। इस पोस्ट में कॉन्ग्रेस की केरल शाखा ने पीएम मोदी को भगवान बताते हुए उनका और पोप का मजाक उड़ाया था। केरल कॉन्ग्रेस ने इसको लेकर 16 जून, 2024 को माफी माँग ली है।

केरल कॉन्ग्रेस ने इस विषय में लिखा, “इस देश की जनता जानती है कि किसी भी धर्म, धर्मगुरुओं और मूर्ति का अपमान करना भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की परंपरा नहीं है। कॉन्ग्रेस एक ऐसा आंदोलन है जो सभी धर्मों और आस्थाओं को एक साथ जोड़ती है और लोगों को एक सौहार्द के माहौल में आगे बढ़ाती है।”

कॉन्ग्रेस ने कहा कि उसका कोई भी कार्यकर्ता पोप की बेइज्जती करने की बात सोच भी नहीं सकता। दूसरी तरफ पीएम मोदी को लेकर कॉन्ग्रेस ने कहा कि उसे पीएम मोदी का मजाक उड़ाने से कोई गुरेज नहीं है क्योंकि उन्होंने खुद को भगवान बताया था।

कॉन्ग्रेस ने लिखा, “कोई भी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता पोप का अपमान करने के बारे में दूर-दूर तक नहीं सोच सकता, जिन्हें दुनिया भर के ईसाई भगवान के समान मानते हैं। हालाँकि, कॉन्ग्रेस को नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाने में कोई हिचक नहीं है, जो खुद को भगवान बताकर इस देश के आस्तिकों का अपमान करते हैं।”

केरल कॉन्ग्रेस ने इसके बाद अपनी विवादास्पद पोस्ट लेकर भाजपा के आलोचना करने को ही गलत ठहरा दिया। कॉन्ग्रेस ने लिखा, “इस तरह से वह लोग मोदी और उनके साथी सुरेन्द्रन की सांप्रदायिक मानसिकता को समझ पाएँगे, जो नरेंद्र मोदी के राजनीतिक खेल को पोप के अपमान के रूप में चित्रित कर रहे हैं।”

आगे कॉन्ग्रेस ने मणिपुर के मुद्दे को इससे जोड़ दिया, “सुरेन्द्रन और उनके सहयोगी ईसाइयों को ऐसे लोगों के समूह के रूप में नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जिनमें कोई आत्मसम्मान नहीं है। अगर ईसाई समुदाय के प्रति सच्चा प्रेम ही है तो मोदी और उनके साथी जो मणिपुर में उनके प्रार्थना स्थलों को जलाए जाने पर चुप रहे, उन्हें पहले ईसाई समुदाय से बिना शर्त माफी माँगनी चाहिए।”

गौरतलब है कि केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने रविवार (16 जून, 2024) को आरोप लगाया कि केरल कॉन्ग्रेस का एक्स हैंडल ‘कट्टरपंथी इस्लामवादियों’ या ‘अर्बन नक्सलियों’ द्वारा चलाया जा रहा है, जिसने राष्ट्रवादी नेताओं पर अपमानजनक पोस्ट करने के बाद अब पोप और ईसाई समुदाय का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है।

यह सब बयानबाजी करने के बाद केरल कॉन्ग्रेस ने माफी का जिक्र किया। पार्टी ने लिखा,”अगर इस पोस्ट से ईसाइयों को कोई भावनात्मक या मानसिक पीड़ा हुई है, तो हम बिना शर्त माफी मांगते हैं।” यह पूरा मामला केरल कॉन्ग्रेस द्वारा रविवार को एक एक्स पोस्ट साझा करने के बाद चालू हुआ, इसमें पीएम मोदी की एक तस्वीर शामिल थी जिसमें वह कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप के साथ एक बातचीत कर रहे थे।

पोप फ्रांसिस के साथ नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ केरल कॉन्ग्रेस ने मज़ाक उड़ाते हुए लिखा, ”आखिरकार, पोप को भगवान से मिलने का मौका मिल ही गया।” कॉन्ग्रेस यह लिखते वक्त भूल गई कि उसने पीएम मोदी की तुलना जीसस से कर दी, क्योंकि पोप के भगवान तो जीसस ही हैं।

पीएम मोदी और पोप की यह तस्वीर हाल ही में संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ली गई थी, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी को भाग लेने के लिए इटली आमंत्रित किया गया था। पोप फ्रांसिस भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे, क्योंकि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पक्ष और विपक्ष के बारे में बात करने के लिए आमंत्रित किया गया था।

5 कॉलम में EVM पर छापा झूठ, 5 लाइन के ‘स्पष्टीकरण’ में पूरी हो गई मिड डे की ‘पत्रकारिता’: बिन माफी माँगे ही आर्टिकल हटाया

EVM को ओटीपी के जरिए अनलॉक करने के मसले पर मिड-डे द्वारा फैलाई गई भ्रामक जानकारी पर समाचार पत्र ने सफाई दी है। उन्होंने बिना कोई माफी माँगे अपने अखबार के फ्रंट पेज के छोटे से कॉर्नर में लिखा है कि उन्होंने पहले जो रिपोर्ट प्रकाशित की थी ‘ईवीएम को फोन पर आए ओटीपी से अनलॉक किया जा सकता है’, वो गलत थी, ऐसा नहीं हो सकता है।

इसके अलावा उन्होंने बड़ी ही खामोशी से अपने ऑनलाइन वर्जन से भी इस स्टोरी को हटा लिया है। उन्होंने बिना कोई माफी माँगे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। अपनी हालिया रिपोर्ट में उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर वंदना सूर्यवंशी से बात करके एक छोटा सी रिपोर्ट की।

साइड कॉर्नर में प्रकाशित छोटी सी सफाई

इसमें वंदना सूर्यवंशी ने बताया कि ईवीएम एक नॉन प्रोग्रामेबल मशीन है और इस अनलॉक करने के लिए कोई ओटीपी जरूरी नहीं होता… इसी बयान के साथ बाद मिड ने अपनी रिपोर्ट के एकदम अंत में लिखा- उन्हें त्रुटि के लिए खेद है और अपनी रिपोर्ट खत्म कर दी।

रिपोर्ट को आधार बनाकर फैलाया गया झूठ

जिस रिपोर्ट को इतनी आसानी से मिड डे ने रफा दफा करने का प्रयास किया है वो कोई सामान्य रिपोर्ट नहीं थी। विपक्षी नेताओं ने उसका इस्तेमाल देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने के लिए किया। 16 जून को मिड डे समाचार पत्र में प्रकाशित 5 कॉलम री रिपोर्ट में दावा किया गया था पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि एनडीए के प्रत्याशी रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने मतदान के वक्त फोन इस्तेमाल कर रहे थे जो कि ईवीएम से कनेक्ट था। इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया था कि प्रत्याशी का रिश्तेदार ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक कर रहा था। पुलिस उसका फोन फॉरेंसिक जाँच को भेज चुकी है।

इसी रिपोर्ट के बाद राहुल गाँधी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए चुनावों में फ्रॉड होने की बात कही थी। साथ ही लोकतंत्र पर प्रश्न खड़े किए।

सुप्रिया श्रीनेत ने बिन किसी जानकारी के कहा कि मुंंबई की पश्चिम सीट से एनडीए प्रत्याशी रवींद्र वायकर 48 वोट से जीते क्योंकि उनके रिश्तेदार का मोबाइल फोन उससे जुड़ा था। इसी से ईवीएम अनलॉक हुई।

प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले में निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए थे। कहा गया था कि एनडीए प्रत्याशी का रिश्तेदार फोन लेकर गया था। अगर चुनाव आयोग इस पर एक्शन नहीं लेता है तो ये बड़ा स्कैम हो सकता है।

इसी प्रकार अन्य नाम भी हैं जो इस रिपोर्ट के आधार पर झूठ फैला रहे थे और प्रश्न उठा रहे थे। हालाँकि, अब जब मिड डे द्वारा अपना आर्टिकल हटा लिया है तो लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या राहुल गाँधी जैसे नेताओं पर बिन सच्चाई जानें झूठी खबर फैलाने के मामले में कार्रवाई होगी। वो लोग अखबार के साथ रिपोर्टर की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

चेक गणराज्य से अमेरिका लाया गया निखिल गुप्ता, खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश रचने का है आरोप

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को अमेरिका में मरवाने के लिए सुपारी देने के आरोपित भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया है। निखिल गुप्ता को अमेरिका की एक जेल में रखा गया है। उसे अमेरिका के एक कोर्ट में पेश किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निखिल गुप्ता को इस सप्ताह के अंत (15-16 जून, 2024) में अमेरिका लाया गया है। अभी उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। निखिल गुप्ता ने चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण से बचने के लिए वहाँ के स्थानीय कोर्ट में याचिका भी लगाई थी लेकिन मई, 2024 में कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ़ कर दिया था। इससे पहले फरवरी, 2024 में इस पर रोक लगाई गई थी।

कोर्ट ने इस दौरान कहा था कि गुप्ता को प्रत्यर्पित किए जाने से उनके मूलभूत अधिकारों को लेकर कोई खतरा नहीं उत्पन्न होता है, ऐसे में उन्हें प्रत्यर्पित जा सकता है। इसके बाद उनके अमेरिका जाने का रास्ता साफ़ हो गया था। अब यह खबर आई है कि उसे अमेरिका भेज दिया गया है। निखिल गुप्ता जून 2023 से ही चेक गणराज्य में था।

गौरतलब है कि अमेरिका के जस्टिस विभाग ने आरोप लगाए थे कि निखिल गुप्ता अमेरिका में खालिस्तानी आतंकी गुरवतपन्त सिंह पन्नू को मरवाने की साजिश में शामिल था। निखिल गुप्ता पर आरोप था कि उसने अमेरिका में पन्नू को मारने के लिए एक हत्यारे को सुपारी दी।

अमेरिका ने आरोप लगाया था कि निखिल गुप्ता ने 1 लाख डॉलर (लगभग ₹83 लाख) पन्नू को मारने के लिए दिए थे। निखिल गुप्ता पर अमेरिका की एजेंसियों की आरोप ने लगाया था कि वह भारतीय खुफिया एजेंसियों से मिल कर काम कर रहा था और और यह सुपारी उसने भारतीय एजेंटों के कहने पर ही दी थी। इसके लिए 15,000 डॉलर का अग्रिम भुगतान किया गया था।

निखिल गुप्ता ने जिसको पैसे दिए थे वह अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का ही सदस्य था। इसी कारण से पूरा मामला खुलने की बात कही गई थी। निखिल गुप्ता के परिवार ने इस बीच आरोप लगाया था कि निखिल को बीफ और पोर्क खिलाया जा रहा था जो उनके धार्मिक मूल्यों के विरुद्ध है।

इस मामले में भारत ने अमेरिका के आरोपण को खारिज किया है कि वह पन्नू को मारने की साजिश जैसी कोई बात थी और इस पूरे मामले में जाँच के लिए एक कमेटी गठित की है। निखिल गुप्ता के अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने को लेकर विदेश मंत्रालय ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

पहले उइगर औरतों के साथ एक ही बिस्तर पर सोए, अब मुस्लिमों की AI कैमरों से निगरानी: चीन के दमन की जर्मन मीडिया ने खोली पोल, सूअर का माँस तक खिला चुका है

चीन का सुरक्षा प्रशासन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों की मदद से उइगर ( अधिकांश मुस्लिमों) पर नजर बनाए हुए है। ये खुलासा जर्मन मीडिया के आउटलेट टेबल.मीडिया ने किया है। टेबल मीडिया के अनुसार जिस दस्तावेज के आधार पर वो ये बता रहे हैं वो दस्तावेज उन्हें शंघाई, झेजियांग प्रांत के विभिन्न शहरों तथा दक्षिण-पश्चिमी महानगर चेंगदू के पुलिस विभागों से प्राप्त हुए हैं। इनसे पुष्टि होती है कि एआई कैमरों के माध्यम से उइगरों पर निगरानी रखी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, प्राप्त दस्तावेज पिछले 6 सालों के हैं जिनमें सबसे हालिया 2023 का है। ये बताता है कि उइगरों के चेहरा एआई कैमरों की जरिए पहचानने के लिए प्रयास चल रहे हैं। इस दस्तावेज के मुताबिक राज्य में वर्षों से उइगरों की पहचान के लिए ऐसी कोशिशें हो रही हैं क्योंकि इस समुदाय के लिए चीन के मन में अब भी बहुत सी आशंकाएँ हैं।

इस मामले में वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय के झिंजियांग विशेषज्ञ ब्योर्न अल्परमैन कहते हैं कि ‘उल्लेखित’ दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि चीनी सुरक्षा अधिकारी व्यवस्थित रूप से उइगरों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करते हैं और उन्हें दोयम दर्जे के नागरिक की तरह उनके साथ बर्ताव करते हैं।

बता दें कि एआई कैमरों के जरिए चीन के सुरक्षाकर्मी ये पहचानने का प्रयास करेंगे कि उइगर विशेष रूप से कहाँ-कहाँ हैं और वो किसके संपर्क में आते हैं। जुहूई में अकेल 3700 कैमरे इस संबंध में निगरानी कर रहे हैं जो तस्वीरें लेते हैं और प्रशासन को सचेत रखते हैं। निगरानी के दौरान चेहरे की तस्वीर और उसका पूरा डेटा आता है। चश्मा लगाए लोग और दाढ़ी बढ़ाकर भी कोई इन चीजों से नहीं बच सकता। एआई इस डेटा को कलेक्ट करके सारी इन्फॉर्मेशन निकालता है और फिर उनसे जुड़ी सारी जानकारी चीन के सुरक्षा अधिकारियों को देता है। फिलहाल जुहूई में ये सिस्टम14 पुलिस थानों, डिटेंशन सेंटर और ट्रैफिक पुलिस कार्यालयों में प्रयोग हो रहा है।

गौरतलब है की चीन में उइगर मुस्लिमों को खतरे की तरह देखा जाता है। इसके संबंध में 2019 से खबरें आ रही हैं कि चीन उइगर मुस्लिमों में से कट्टरपंथ निकालने के नाम पर डिटेंशन सेंटर में डालता है और वहाँ उन्हें अनगिनत प्रताड़नाएँ दी जाती हैं। कई विदेशी मीडिया इस मुद्दे पर रिपोर्ट भी कर चुके हैं, लेकिन चीन के खिलाफ आवाज उठाने का काम कोई इस्लामी मुल्क नहीं करता है।

इस समय चीन में जब हर विरासत का चीनीकरण करने के काम हो रहा है, तब मस्जिदों पर भी हथौड़े चलाकर उसके मीनार और गुंबद तोड़े जा चुके हैं। इसके अलावा मुस्लिम महिलाओं पर भी अत्याचार होते हैं। पुरानी रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे चीन में सुरक्षाकर्मी पुरुषों को डिटेंशन सेंटर में डालकर महिलाओं के साथ हमबिस्तर होने चले जाते थे। इसके अलावा महिलाओं की वहाँ जबरन नसबंदी करा दी जाती थी और शराब पिलाने और पोर्क खिलाने का काम भी होता था।

सेजल, नेहा, पूजा, अनामिका… जरूरी नहीं आपके पड़ोस की लड़की ही हो, ये पाकिस्तान की जासूस भी हो सकती हैं: जानिए कैसे ISI के हनी ट्रैप में उलझ रहे सैनिक-वैज्ञानिक

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जासूस भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए वैज्ञानिकों-इंजीनियरों को निशाना बना रहे हैं। ISI जासूस भारतीय लड़कियों के नाम से सोशल मीडिया पर आईडी बना कर इन वैज्ञानिकों को हनीट्रैप कर रहे हैं। हाल ही में जासूसी के आरोप में उम्रकैद की सजा पाए ब्रम्होस मिसाइल के इंजीनियर निशांत अग्रवाल के साथ भी ऐसा ही हुआ था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के यह जासूस फेसबुक पर सेजल कपूर, नेहा शर्मा, पूजा रंजन, अनामिका शर्मा और अदिति अग्रवाल जैसे भारतीय नामों से फर्जी आईडी बनाते थे। ISI के झाँसे में आने वाले निशांत अग्रवाल ने भी ऐसे ही एक अकाउंट पर भरोसा किया था।

निशांत अग्रवाल ने सेजल नाम की एक फेसबुक आईडी पर भरोसा करके बातचीत चालू की थी। सेजल नाम का यह अकाउंट पाकिस्तान से चलाया जा रहा था। सेजल नाम का यह अकाउंट पाकिस्तान में ISI के अपने सरगनाओं और भारतीय सुरक्षा कर्मियों और वैज्ञानिकों कसे बातचीत कर रहा था। सेजल ने उसे हनीट्रैप कर लिया था।

निशांत अग्रवाल मामले का खुलासा करने वाली उत्तर प्रदेश ATS के एक अधिकारी ने इस मामले में कई जानकारियाँ दी हैं। UP ATS के एक अधिकारी ने बताया है कि सेजल नाम का यह अकाउंट साइबर अटैक के बारे में भी योजना बना रहा था। सेजल ने खुद को इंग्लैंड की एक कम्पनी में भर्ती करने वाले के तौर पर निशांत को बताया था।

निशांत अग्रवाल को सेजल ने बताया था कि वह हेस एविएशन नाम की एक कम्पनी के लिए लोगों को भर्ती कर रही है। इन दोनों की अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से भी बातचीत हुई थी। इस दौरान निशांत अग्रवाल के लैपटॉप पर सेजल ने कुछ सॉफ्टवेयर डलवाए थे। इनके नाम क्यूव्हिस्पर, चैट टू हायर और एक्स ट्रस्ट थे।

सेजल ने बताया था कि यह भर्ती प्रक्रिया का एक हिस्सा हैं। असल में यह सॉफ्टवेयर, वायरस थे जो कि अग्रवाल के लैपटॉप से डाटा चुराने के काम में लिए गए थे। निशांत अग्रवाल के लैपटॉप में ब्रह्मोस से जुड़ा हुआ गोपनीय डाटा था, जिसे पाकिस्तानियों ने इन सॉफ्टवेयर के जरिए चुरा लिया।

पाकिस्तानी जासूसों ने वायुसेना के भी दो पूर्व कर्मचारियों से भारतीय सुरक्षा व्यवस्थाओं के विषय में जानकारी जुटाने की कोशिश की थी लेकिन इसमें वह सफल नहीं हुए थे। इनसे भी फर्जी फेसबुक आईडी के जरिए ही जानकारियाँ जुटाए जाने का प्रयास किया जा रहा था। लखनऊ के एक पूर्व वायुसेना कर्मचारी के साथ यह प्रयास किया गया था।

गौरतलब है कि निशांत अग्रवाल को 2018 में उत्तर प्रदेश ATS ने गिरफ्तार किया था। वह भारत के महत्वपूर्ण रक्षा कार्यक्रम ब्रह्मोस का हिस्सा था। यहाँ वह एक सीनियर सिस्टम इंजीनियर था। उसे नागपुर में चले मुकदमे में गोपनीय जानकारियाँ साझा करने का दोषी पाया गया है। उसे हाल ही में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

बकरीद पर गायों को कटवाना चाहता था जो मौलाना अब्दुल रहीम, ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद उसे पुलिस ने किया गिरफ्तार, धर्मांतरण में पहले भी जा चुका है जेल

गुजरात के भरुच में एक मौलाना ने बकरीद के मौके पर अन्य पशुओं की कुर्बानी के साथ ही गाय की कुर्बानी की बात कही थी। सोशल मीडिया पोस्ट भी इस बारे में वायरल हो रहे थे। इस पूरे मामले की छानबीन ऑपइंडिया गुजराती ने की, जिसके बाद सक्रिय हुई भरुच पुलिस ने आरोपित मौलाना अब्दुल रहीम राठौड़ को गिरफ्तार किया है। वो भरुच के आमोद स्थित दारुल उलूम बरकत ख्वाजा नाम से मदरसा चलाता है।

जानकारी के मुताबिक, आमोद में स्थित इस्लामिक संस्था दारुल उलूम बरकत ख्वाजा के नाम से एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें गाय की कुर्बानी देने का आह्वान किया गया था। इस मामले में भरूच पुलिस ने एक मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की पहचान अब्दुल रहीम राठौड़ के रूप में हुई है, जो आमोद स्थित दारुल उलूम बरकत ख्वाजा चलाता है। पुलिस ने पहले उसके खिलाफ हिरासत में कार्रवाई करने के बाद आईपीसी और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने बताया है कि उसके खिलाफ पहले भी धर्म परिवर्तन का मामला दर्ज किया जा चुका है।

स्थानीय पुलिस अधिकारी ने कहा कि बकरीद के त्योहार को देखते हुए भरुच पुलिस लगातार सोशल मीडिया पर नजर रख रही है। इस बीच, सोशल मीडिया पर ‘कुर्बानी के तरीके’ नाम से एक पोस्ट वायरल हो रही थी, जिसमें बड़े जानवरों की कुर्बानी के तरीके को बताया गया था। इस पोस्ट में गाय का भी जिक्र था। ये पोस्ट दारुल उलूम बरकत ख्वाजा का प्रबंधन करने वाले अब्दुल रहीम राठौड़ ने किया था। जिसके बाद पुलिस ने उचित धाराओं में केस दर्ज उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने कहा कि फिलहाल भरुच जिला एसओजी इस मामले की जाँच कर रही है और जो भी इस काम में मौलवी के साथ शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अवैध धर्मांतरण के केस में भी गिरफ्तार हो चुका है मौलाना

पुलिस के मुताबिक, आरोपित मौलवी के खिलाफ साल 2021 में भी अवैध धर्मांतरण का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में उसके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और मामले में सुनवाई चल रही है। बताया जा रहा है कि मौलाना उस मामले में जेल जा चुका है।

मूल रूप से यह खबर गुजरात में प्रकाशित की गई है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘आखिरी बार IMF से लोन लेने दो… फिर कभी नहीं माँगेंगे’: गिड़गिड़ाए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ

आईएमएफ, यूएई, सऊदी अरब, अमेरिका, चीन जैसे देशों के कर्ज चले दबा पाकिस्तान साँस भी नहीं ले पा रहा, फिर भी उसके हुक्मरान जनता से बड़े बड़े वादे करने में पीछे नहीं हट रहे। पिछले डेढ़ साल से सत्ता संभाल रहे प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने पाकिस्तान की जनता को सपना दिखाने की कोशिश की है कि जल्द ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी। उसे किसी कर्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन उससे पहले आखिरी बार आईएमएफ से कर्ज लेना पड़ेगा।

दरअसल, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है। मुद्रा की हालत खस्ता है। देश कर्ज तले दबा है। आयात करने के लिए विदेशी मुद्रा नहीं है, लेकिन शाहबाज शरीफ पाकिस्तान की जनता को ये कह कर भरोसे में ले रहे हैं कि आईएमएफ से जो कर्ज मिलेगा, उससे पाकिस्तान की गरीबी दूर होगी। ये सरकार पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को इतना मजबूत कर देगी, कि उसे आईएमएफ से फिर से कभी कर्ज नहीं लेना पड़ेगा।

सरकारी टीवी चैनल पर अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के मौके पर वो देश की आवाम को संबोधित कर रहे थे और तब उन्होंने ये दावा और वादा दोनों किया। शरीफ ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि यह बेलआउट पैकेज पाकिस्तान के इतिहास का आखिरी पैकेज होगा। पाकिस्तान की सरकार अपनी धीमी अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए आईएमएफ से एक और बेलआउट पैकेज लेने पर बातचीत कर रही है। यह पैकेज 6 से 8 बिलियन डॉलर का हो सकता है। हाल ही में आए पाकिस्तानी बजट में भी पाकिस्तान ने आईएमएफ की शर्तों के अनुसार ही नीतियाँ बनाने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा इंशाअल्लाह, यह पाकिस्तान के इतिहास का आखिरी बेलआउट पैकेज होगा।

पाक पीएम ने कहा कि इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हम सभी को अपने मुल्क की खातिर परेशानियाँ उठानी पड़ेगी। यह रास्ता मुश्किल भरा है, हमारी सरकार यह बदलाव करने के लिए तैयार है। शरीफ ने कहा कि हम उन सभी संस्थानों, विभागों और मंत्रालयों को बंद करेंगे जो आवाम के लिए कोई काम नहीं करते और देश पर एक बोझ की तरह हैं। अपनी 100 दिन की सरकार की पीठ थपथपाते हुए शरीफ ने दावा किया कि 4 मार्च, जबसे वह सत्ता में बैठे हैं तबसे मंहगाई दर 38 फीसदी से घटकर 12 फीसदी पर आ गई है।

तबाही की कगार पर पहुँचा पाकिस्तान, खजाना खाली

भारत से मुकाबले की कोशिश करता पाकिस्तान तबाही की कगार पर पहुँच चुका है। पाकिस्तान के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम हो रहा है। पाकिस्तान के पास महज इतनी ही विदेशी मुद्रा बची है कि वो सिर्फ 2 माह तक ही सामान खरीद सकता है, लेकिन उसके ऊपर बढ़ता कर्ज सुरसा के मुँह की तरह बढ़ता जा रहा है। उसे विदेशी कर्ज की किश्तें चुकाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, यहाँ तक कि हुक्मरानों को पिछले कई सालों से विदेशी सरकारों से अनुदान माँगने के लिए दौरे करने पड़ रहे हैं। इस बीच, पाकिस्तान का फॉरेक्स रिजर्व महज 9 अरब डॉलर का ही बचा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार गिरावट के साथ 9 अरब डॉलर के करीब बना हुआ है। वहीं, पाकिस्तानी रुपया यूएस डॉलर के मुकाबले 278 पर है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की लेटेस्ट वीकली अपडेट के अनुसार, 7 जून 2024 को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 6 मिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 9.10 अरब डॉलर रहा। यह मुद्रा भंडार 2 महीने से कम के आयात के जितना ही है। अगर पाकिस्तान ने कुछ मजबूत कदम नहीं उठाए, तो वह विदेशों से कुछ भी आयात नहीं कर पाएगा।

ऋषिकेश AIIMS में भर्ती अपनी माँ से मिलने पहुँचे CM योगी आदित्यनाथ, रुद्रप्रयाग हादसे के पीड़ितों को भी नहीं भूले

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माँ की तबीयत ख़राब हो गई, जिसके बाद उन्हें AIIMS ऋषिकेश में भर्ती कराया गया है। उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी उनका हालचाल लेने पहुँचे, वहीं सीएम योगी ने भी अस्पताल पहुँच कर अपनी माँ का हालचाल लिया। लगभग एक सप्ताह पहले भी सावित्री देवी का AIIMS ऋषिकेश में इलाज हुआ था। रविवार (16 जून, 2024) को करीब 20 मिनट तक योगी आदित्यनाथ ने अपनी माँ के साथ समय व्यतीत किया।

साथ ही CM योगी ने ऋषिकेश स्थित एम्स के डायरेक्टर से भी मुलाकात की और अपनी माँ के इलाज को लेकर जानकारी ली। सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 15 जून, 2024 को सावित्री देवी को एम्स में भर्ती कराया गया था। ऋषिकेश से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यमकेश्वर प्रखंड का पंचूर गाँव में ही योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ था। इस महीने दूसरी बार अस्पताल में भर्ती हुईं उनकी माँ सावित्री देवी का जीरियाट्रिक विभाग में इलाज चल रहा है।

भेंट की इस तस्वीर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर भी शेयर किया और सिर्फ एक कैप्शन लिखा – ‘माँ’। अस्पताल पहुँचे सीएम योगी ने रुद्रप्रयाग हादसे के घायलों से भी मुलाकात की। उन्होंने सभी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि सभी का सही तरीके से उपचार जारी है। बता दें कि रुद्रप्रयाग में हुए हादसे में 14 लोगों की मौत हुई है। मिनी बस अलकनंदा नदी में गिर गई। बस के पास न ट्रिप कार्ड था, न ही यात्रियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। बस में 26 लोग सवार थे।

वहीं सावित्री देवी के बारे में अस्पताल ने बताया है कि वृद्धावस्था संबंधित समस्याओं के कारण उन्हें भर्ती करना पड़ा है। पहले भी रूटीन चेकअप के लिए वो आती रही हैं। पिछली बार उन्हें आँखों की दिक्कतों के कारण भर्ती कराना पड़ा है। नाथ परंपरा में दीक्षित होने से पहले योगी आदित्यनाथ ने अपना घर छोड़ दिया था, हालाँकि वो अपनी माँ से मिलने जाते रहे हैं। उन्होंने बताया था कि उनकी बहन ने ही उन्हें अक्षर का ज्ञान कराया। अपने परिवार को वो मिस करते रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि अब जनता उनका परिवार है।

‘OTP से हैक नहीं होता EVM, अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई’: कॉन्ग्रेस एन्ड गिरोह को चुनाव आयोग ने लताड़ा, सोशल मीडिया में चल रहा प्रोपेगंडा

ईवीएम को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि ईवीएम मशीन एक स्टैंडअलोन मशीन है। इसे किसी ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती और न ही इसमें किसी तरह के इंटरनेट या किसी और चीज, यही वजह है कि ये हैकिंग प्रूफ है। चुनाव आयोग ने कहा कि ईवीएम को शुरू करने के लिए किसी तरह के ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती। इस तरह की अफवाह फैला रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

मुंबई उपनगर जिला कलेक्टर वंदना सूर्यवंशी ने ईवीएम पर जारी विवादों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईवीएम पर गलत ख़बर फैलाई गई है और सारे आरोप बेबुनियाद हैं। ईवीएम किसी मशीन से जुड़ा हुआ नहीं होता है। ईवीएम से जुड़े राहुल गाँधी के ट्वीट पर उन्होंने कहा, “जो खबर चल रही है, वो गलत है। ईवीएम के लिए किसी ओटीपी की जरूरत नही होती है, बल्कि रिजल्ट बटन प्रेस करके काम होता है। चुनाव आयोग ने ईवीएम को लेकर अपनी पूरी प्रकिया का पालन किया है।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गाँधी ने कहा कि ईवीएम एक ‘ब्लैक बॉक्स’ है, जिसकी जाँच करने की किसी को इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर ‘गंभीर चिंताएं’ जताई जा रही हैं।

राहुल गाँधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “जब संस्थाओं में जवाबदेही ही नहीं होती तो लोकतंत्र दिखावा बन कर रह जाता है और धाँधली की आशंका बढ़ जाती है।” इस पोस्ट के साथ गाँधी ने एक खबर भी साझा कि जिसमें दावा किया गया कि मुंबई की उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट से 48 वोट से जीत दर्ज करने वाले शिवसेना के उम्मीदवार के एक रिश्तेदार के पास एक ऐसा फोन है जिससे ईवीएम में छेड़छाड़ संभव थी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर एलन मस्क की उस पोस्ट को भी साझा किया जिसमें मस्क ने ईवीएम को हटाने की बात कही थी। मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा था, “हमें ईवीएम को खत्म कर देना चाहिए. मुनष्यों या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा हैक किए जाने का जोखिम, हालाँकि छोटा है, फिर भी बहुत अधिक है।”

वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, “‘टेक्नॉलजी’ समस्याओं को दूर करने के लिए होती है, अगर वही मुश्किलों की वजह बन जाए, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। आज जब विश्व के कई चुनावों में EVM को लेकर गड़बड़ी की आशंका ज़ाहिर की जा रही है और दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स EVM में हेराफेरी के ख़तरे की ओर खुलेआम लिख रहे हैं, तो फिर EVM के इस्तेमाल की ज़िद के पीछे की वजह क्या है, ये बात भाजपाई साफ़ करें। आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की अपनी माँग को हम फिर दोहराते हैं।”

राहुल गाँधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा, “कुछ लोगों को हमने डाटा अपलोड करने के लिए मोबाइल ले जाने की इजाजत दी थी। लेकिन उस संबधित व्यक्ति तक वो मोबाइल कैसे गया, उस पर हमने खुद भी एफआईआर दर्ज कराई है और मामले की जाँच की जा रही है। किसी को सीसीटीवी नहीं मिलेगा, जब तक कि कोर्ट का ऑर्डर नहीं होता है।”