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2024 में NDA की ही बनेगी सरकार, टूटेगा 2019 का रिकॉर्ड भी: जानें Exit Polls में INDI गठबंधन का क्या है हाल

लोकसभा चुनाव 2024 के सातवें चरण के मतदान के साथ 1 जून को सम्पन्न होने के बाद अब मीडिया संस्थानों ने एक्जिट पोल देना शुरू कर दिया है। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व में की सरकार बनती नजर आ रही है। वहीं पूरा विपक्ष इकट्ठा होने के बाद भी हारता दिख रहा है।

अलग-अलग एग्जिट पोल्स के अनुमान अलग हैं लेकिन सबमें कॉमन बात एनडीए की जीत है। जैसे-

  • -इंडिया न्यूज के डी डायनामिक्स में एनडीए को 371 सीटें मिलती दिखाई गई हैं, INDI ब्लॉक को 125 और अन्य को 47।
  • – इसी तरह जन की बात के एग्जिट पोल ने एनडीए को 362-392 सीटें मिलती हुई दिखाई हैं, INDI ब्लॉक को 141-161 सीट मिली है और अन्य को 10-20।
  • -रिपब्लिक भारत के मैटरिज ने एनडीए को 353-368, INDI ब्लॉक के 118-133 और अन्य को 43-48।
  • -रिपब्लिक टीवी-पी के MARQ ने एनडीए को 359 सीट दी है, INDI गठबंध को 154 और अन्य को 30।

एग्जिट पोल मतदान केंद्रों से बाहर निकलने के तुरंत बाद मतदाताओं के सर्वेक्षण पर आधारित होता है। आमतौर पर, समाचार पत्रों और TV चैनलों के लिए काम करने वाली निजी सर्वेक्षण फर्म या संस्थाएँ मतदाताओं से पूछती हैं कि उन्होंने वास्तव में किसे वोट दिया और यह मानते हुए कि उन्हें सही उत्तर मिले हैं, वे परिणाम के रुझान की भविष्यवाणी करते हैं।

एग्जिट पोल पर आधारित चुनावी भविष्यवाणियों ने पिछले एक दशक में टेलीविजन की पहुँच को भारत में डिजिटल समाचार पोर्टलों के बढ़ने के साथ काफी बढ़ा दिया है। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऐसे एग्जिट पोल अक्सर फेल होते हैं, जिसकी बड़ी वजह है सैंपल साइज का छोटा होना और दूसरा जिनसे पूछा गया – उन्होंने कितना सही जवाब दिया।

बता दें कि पिछले साल एग्जिट पोलों में भाजपा के नेतृत्व में जीत दिखाई गई थी। उस समय भाजपा ने अकेले 300 का आँकड़ा पार करते हुए 303 सीटें पर कब्जा कर लिया था जबकि एनडीए की सीटें 352 थी। वहीं कॉन्ग्रेस के कुल 52 सीट मिली थी।

मस्जिद के आगे मरा जंगली सुअर फेंक फरार हुआ कार सवार, इमाम सोते रह गए: स्वीडन में हंगामा, दुनिया भर के मुस्लिम विरोध में उतरे

यूरोपीय देश स्वीडन में एक मस्जिद के बाहर मरा हुआ सुअर फेंके जाने की घटना सामने आई है। CCTV फुटेज में कार से आया एक अज्ञात व्यक्ति इस घटना को अंजाम दे गया। घटना से नाराज मुस्लिमों ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई है। दुनिया भर से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरोपित को गिरफ्तार करके कड़ी सजा की माँग की है। फिलहाल अभी तक आरोपित की पहचान या कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना मंगलवार (28 मई 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना स्वीडन के स्कोवडे शहर की है। यहाँ 1 साल पहले एक मस्जिद खोली गई थी जिससे अब लगभग एक हजार लोग जुड़ चुके हैं। मस्जिद का संचालन फिलहाल स्माजो सहात कर रहे हैं जिन्होंने बताया कि इस से पहले वहाँ किसी प्रकार की कोई धमकी नहीं आई थी। मस्जिद के CCTV फुटेज में यह घटना कैद हुई है। मंगलवार की देर रात एक व्यक्ति कार से मस्जिद के सामने रुका। उसने कुछ सामान फेंका और फिर कार ले कर फरार हो गया। सुबह कुछ लोगों ने स्माजो सहात को मस्जिद के बाहर कुछ पड़ा होने की जानकारी दी।

स्माजो सहात ने आगे बताया कि जब उन्होंने मस्जिद के बाहर निकल कर देखा तो वहाँ एक मरा हुआ सुअर पड़ा था। सुअर जंगली था। आनन-फानन में यह खबर आसपास के मुस्लिमों तक पहुँच गई। उन्होंने इस घटना का विरोध किया और पुलिस से आरोपितों को चिन्हित कर के कड़ी कार्रवाई की माँग शुरू कर दी। शिकायत स्वीडन के ही एक नस्लीय समूह के सदस्यों के खिलाफ दी गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। फिलहाल अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। स्वीडिश पुलिस ने इसे नफरत में की गई एक हरकत करार दिया है। इस हरकत से पूरी दुनिया के मुस्लिम समुदाय के लोगों में नाराजगी है।

T20 क्रिकेट विश्वकप पर भारतीय टीम का होगा कब्जा: कॉम्बिनेशन, रिप्लेसमेंट और इन खिलाड़ियों का बदला खेल दिलाएगा देश को ट्रॉफी

आईसीसी टी-20 क्रिकेट विश्व कप की शुरुआत हो रही है। 5 जून को भारतीय टीम अपना पहला मुकाबला आयरलैंड के खिलाफ खेलेगी। लेकिन उससे पहले भारतीय टीम 1 जून को बांग्लादेश के खिलाफ प्रैक्टिस मैच खेलने उतरेगी, जिसमें भारतीय टीम की बैटिंग और बॉलिंग कॉम्बिनेशन का लगभग खुलासा हो जाएगा। वैसे इस बार की भारतीय टीम पिछले विश्व कपों के मुकाबले कहीं ज्यादा संतुलित लग रही है। ऐसे में देखना ये होगा कि भारतीय टीम को कौन सा कॉम्बिनेशन इस विश्व कप की ट्रॉफी को उठाने में मददगार साबित हो सकता है।

आईसीसी टी-20 विश्वकप के पिछले संस्करण यानी साल 2022 में जिस टीम को सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों 10 विकेट से हार झेलनी पड़ी थी, उस टीम और इस टीम में 9 खिलाड़ी तो वही हैं, लेकिन साल 2022 और साल 2024 की टीम के बीच जिन 6 खिलाड़ियों का अंतर है, जो बाकी टीमों के लिए सिरदर्द साबित हो सकते हैं। वहीं, पुराने खिलाड़ियों का भी खेल बदला-बदला सा नजर आ रहा है, इसमें विराट कोहली, शिवम दुबे को ही देख लीजिए। इस बार, पिछली टीम के मुकाबले 6 जिन खिलाड़ियों को जगह मिली है, उनमें हैं-जसप्रीत बुमराह, रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, शिवम दुबे, यशस्वी जायसवाल और संजू सैमसन। ये खिलाड़ी आईपीएल में भी शानदार रंग में दिखे हैं। इसमें भी मुख्य खिलाड़ियों जैसे रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव और जसप्रीत बुमराह का नाम तो सीधे टीम में शामिल होता है।

अब बात बैटिंग ऑर्डर की करें तो टॉप 3 पोजिशन के लिए रोहित शर्मा, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव का नाम तय है। इसमें लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन के लिए यशस्वी जायसवाल को ओपनर के तौर पर उतारते हैं, तो ये देखना होगा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली में तीसरे नंबर पर कौन बल्लेबाजी के लिए आता है। वहीं, नंबर चार पर सूर्यकुमार यादव भी आएँगे। अगर यशस्वी को बाहर रखा जाता है, तो रोहित-विराट ओपनिंग कर सकते हैं और सूर्या को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कराई जा सकती है। इस स्थिति में चौथे नंबर पर ऋषभ पंत और संजू सैमसन के बीच प्रतिस्पर्धा होगी। दोनों विकेट कीपर हैं। ऐसे में अगर यशस्वी को ऊपर खिलाया जाता है, तो ऋषभ पंत की बैटिंग पोजिशन पाँचवें नंबर पर खिसक सकती है।

इन खिलाड़ियों के बाद बैटिंग क्रम में शिवम दुबे को खिलाया जा सकता है। इस स्थान पर बहस इसलिए भी हो सकती है कि अगर यशस्वी को ओपनिंग की जगह मिडिल ऑर्डर में खिलाया जाता है, तो वो शिवम दुबे की जगह को चुनौती दे सकते हैं। वहीं, इसके बाद हार्दिक पांड्या का नंबर लगभग तय है। हार्दिक के बाद सातवें नंबर पर रविंद्र जडेजा टीम की पहली पसंद होंगे। उनके अनफिट होने या उन्हें आराम देने के नाम पर भले ही उनकी जगह अक्षर पटेल को मौका दिया जा सकता है, वो भी कमजोर टीमों के खिलाफ, वर्ना अक्षर को मौके कम ही मिलने वाले हैं। कारण एक ही है कि दोनों एक जैसे ही खिलाड़ी हैं। वैसे, हार्दिक पांड्या को लेकर पिछले 2-3 दिनों से जो रिपोर्ट आ रही है, उसके मुताबिक, इस बार हार्दिक पांड्या अपने पुराने लय और आक्रामक अंदाज में दिखने वाले हैं, जो आते ही लंबे-लंबे छक्के लगाता है और कुछ ही ओवरों में मैच का रुख पलट सकता है। पांड्या इस बार टीम इंडिया के लिए एक्स फैक्टर भी साबित हो सकते हैं।

गेंदबाजी की बात करें, तो तेज गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह की टीम में निर्विवादित अगुवा की जगह है। उनके साथ अर्शदीप सिंह को बॉलिंग का मौका मिल सकता है। इसका कारण है दोनों ही गेंदबाजों का एकदम उलट होना। एक तरफ जसप्रीत बुमराह के पास तेजी है तो सटीकता भी है, वहीं अर्शदीप बाएँ हाथ की गेंदबाजी करते हैं। अगर तीसरे तेज गेंदबाज को उतारा जाता है, तो मोहम्मद सिराज को भी मौका मिल सकता है, लेकिन दुबे/पांड्या की मौजूदगी को देखते हुए सिराज और अर्शदीप को अदला-बदली के तौर पर अलग-अलग मैचों में आजमाया जा सकता है।

स्पिन गेंदबाजी जडेजा/अक्षर की जगह तय होने की वजह से दूसरे स्पिनर के तौर पर कुलदीप यादव की टीम में जगह पक्की है। टीम तीसरे स्पिनर को खिलाती है और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ एक और स्पिनर को मौका देती है, तो एक तेज गेदबाज की जगह पर युजवेंद्र चहल भी खेल सकेंगे। हालाँकि बाएँ हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता होने की स्थिति में कुलदीप की जगह किसी मैच में युजवेंद्र चहल को भी दूसरे स्पिनर के तौर पर जगह मिल सकती है।

इस तरह से देखा जाए, तो सभी 15 खिलाड़ियों की जगह टीम में तय है। कुछ खिलाड़ी एक दूसरे का रिप्लेसमेंट हैं। ऐसे में किसी बड़ी या कमजोर टीम को देखते हुए टीम में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन एक बात तो तय है कि पहली बार भारतीय टीम में शामिल सभी 15 खिलाड़ी पूरी तरह से तैयार और अनुभवी नजर आ रहे हैं। ऐसे में हम सभी उम्मीद कर सकते हैं कि इस बार ट्रॉफी भारत आ ही जाएगी।

टी-20 विश्वकप के मैचों में मेरी पसंद की भारतीय टीम: रोहित शर्मा, विराट कोहली, सूर्य कुमार यादव, संजू सैमसन/ऋषभ पंत, शिवम दुबे/यशस्वी जायसवाल, हार्दिक पांड्या, रविंद्र जडेजा/अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज/युजवेंद्र चहल

2 जून को जाना ही होगा अरविंद केजरीवाल को जेल, दिल्ली कोर्ट से नहीं मिली तुरंत बेल: ED ने दलील दी- तबीयत नहीं है खराब, सिर्फ भ्रमित कर रहे

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को फिलहाल राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिलती नहीं दिख रही है। उनके द्वारा डाली गई अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट 5 जून को फैसला सुनाएगा। अदालत द्वारा मिली इस तारीख के बाद यह तय हो गया है कि 2 जून 2024 (रविवार) को दिल्ली के मुख्यमंत्री को जेल में सरेंडर करना ही होगा। अपनी दलील में अरविन्द केजरीवाल ने बीमारी का हवाला दिया था। हालाँकि ED ने इस दलील को निराधार बताते हुए जमानत का विरोध किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू स्पेशल कोर्ट की जज कावेरी बावेजा की अदालत में हुई। अदालत में अरविन्द केजरीवाल का पक्ष एन हरिहरन ने रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। जेल में अरविन्द केजरीवाल को बेहतर इलाज न मिल पाने की दलील देते हुए उनके वकील ने अंतरिम जमानत की अवधि 7 दिनों के लिए और बढ़ाने की माँग की। एन हरिहरन ने बताया कि अरविन्द केजरीवाल साल 1994 से डायबिटीज के मरीज हैं और लगातार इन्सुलिन ले रहे।

हालाँकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की इस दलील का विरोध किया। ED का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अरविन्द केजरीवाल पर न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने अरविन्द केजरीवाल द्वारा की गई उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने बिना अदालत का फैसला आए ही 2 जून को सरेंडर करने का ऐलान कर दिया था।

ED ने अदालत से गुजारिश की है कि अरविन्द केजरीवाल को जमानत न दी जाए। इसके साथ उन्होंने ये भी बताया कि कैसे जमानत पाने के बाद केजरीवाल अपना मेडिकल टेस्ट कराने की बजाय रैलियाँ और रोड शो कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे तो यही लगता है कि वो बीमार नहीं है। इसके साथ ही केजरीवाल द्वारा जो जेल में 7 किलो वजन कम होने की बात कही गई थी, उस पर कोर्ट में बताया गया कि असल में अरविंद केजरीवाल का वजन 1 किलो बढ़ा था, न कि कम हुआ था। ईडी दोनों पक्षों की दलीलों को सुन कर कोर्ट ने फैसले के लिए 5 जून (बुधवार) की तिथि तय कर दी।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए अरविन्द केजरीवाल फिलहाल अंतरिम जमानत पर हैं। उन्हें 10 मई 2024 को अदालत द्वारा 21 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी। इस जमानत की मियाद 2 जून को खत्म हो रही है। इसी को 1 हफ्ते और बढ़ाने के लिए केजरीवाल ने अदालत में अर्जी लगाई थी। हालाँकि फिलहाल उन्हें कोई राहत अदालत ने नहीं दी है।

‘UP पुलिस के IPS अफसर ने महिला को पीटा’: सपा नेताओं और कट्टर इस्लामियों ने चुनाव के समय वायरल किया वीडियो, पंजाब के मामले की जानिए सच्चाई

सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसे उत्तर प्रदेश का बताया जा रहा है। इस वीडियो में एक युवक द्वारा किसी महिला को पहले डाँटते, फिर पीटते हुए देखा जा सकता है। समाजवादी पार्टी से जुड़े कई नेताओं व कुछ कट्टर इस्लामी हैंडलों ने इसे UP पुलिस विरोधी रूप और रंग देने का प्रयास किया है। इन लोगों ने वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को UP कैडर IPS अधिकारी आशीष तिवारी बताया है। ऑपइंडिया ने इस वीडियो की पड़ताल की।

समाजवादी पार्टी की सरकार में राजयमंत्री के ओहदे पर रह चुके नेता आईपी सिंह ने 21 सेकेंड लम्बे इस वीडियो को शुक्रवार (31 मई 2024) को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। वीडियो में महिला की पिटाई के दौरान पास ही खड़ा एक अन्य व्यक्ति सब चुपचाप देखता है। सामने मौजूद कोई अन्य व्यक्ति चुपके से पूरी घटना रिकॉर्ड करता है, जो बाद में वायरल हो गई। इस वीडियो की आड़ में सपा नेता आईपी सिंह ने UP की योगी सरकार तक को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।

आईपी सिंह की ही तरह उनकी पार्टी के यासर शाह, राघवेंद्र यादव, सत्या यादव और राहुल यादव आदि ने भी इसे IPS आशीष तिवारी से जुड़ी घटना बतानी शुरू कर दी। मामले को कथित तौर पर UP पुलिस व योगी सरकार से जुड़ने की आहट पाकर कुछ समुदाय विशेष के लोग भी सक्रिय हो गए। इनमें फिरदौस फिजा प्रमुख हैं। अपने X हैंडल से फिरदौस ने पुलिस अधिकारी पर की गई कार्रवाई का अपडेट तक पूछ डाला। खास बात यह है कि भारत के इस मसले में फिरदौस ने #Netanyahu, #Rafah और #Genocide जैसे हैशटैग लगाए।

X के अलावा भी इस वीडियो को कुछ अन्य लोगों ने सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्मों पर शेयर किया है।

जानिए क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई

ऑपइंडिया ने इस वायरल वीडियो की पड़ताल की। अपनी पड़ताल के दौरान हमने पाया कि 27 मई 2024 को UP पुलिस द्वारा इस घटना पर सफाई दी गई है। पुलिस ने बताया, “यह वीडियो उत्तर प्रदेश से न होकर थाना जीरकपुर, मोहाली, पंजाब में सन् 2018 की घटना से संबंधित है।”

जब हम इस वीडियो की तह तक गए तो पता चला कि जिसे UP कैडर IPS आशीष तिवारी बताया जा रहा है, वो असल में पंजाब का AIG आशीष कपूर है।

आशीष कपूर पूर्व में 1 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के मामले में सस्पेंड भी किया जा चुका था। साल 2023 में यह वीडियो पहली बार वायरल होने के बाद आशीष कपूर पर FIR भी दर्ज कर ली गई थी। जिस महिला की पिटाई हो रही है, उसने आशीष कपूर पर केस दर्ज करवाया था। केस में उसने आशीष पर खुद से जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। बाद में आशीष कपूर को जेल भी काटनी पड़ी थी। साल 2022 में पंजाब कैडर अधिकारी आशीष कपूर बर्खास्त भी कर दिए गए थे।

इस पूरे मामले पर ऑपइंडिया ने आईपीएस आशीष तिवारी से बात की। आशीष तिवारी उच्च शिक्षा के लिए फिलहाल अमेरिका में हैं। उन्होंने बताया कि वीडियो वायरल होते ही सूचना पुलिस मुख्यालय को भेज दी गई थी, जिसका पुलिस ने खंडन भी कर दिया है।

आशीष तिवारी ने अपील भी की है कि लोग किसी भी खबर को बिना सोचे-समझे और पूरी सच्चाई जाने बिना शेयर अथवा विश्वास करने से बचें। अतः हमारी पड़ताल में यह निकल कर सामने आया कि वायरल हो रहा वीडियो UP के आईपीएस आशीष तिवारी के बजाय पंजाब कैडर के अधिकारी आशीष कपूर का है।

कहीं भगवान पर थप्पड़, कहीं पेड़ में बांधकर हंटर… वामपंथन फेमिनिस्ट प्रियंका पॉल के हिंदू घृणा से सने पोस्ट, मुंबई पुलिस में शिकायत

सनातन धर्म के खिलाफ घृणा फैलाना लिबरल नारीवादियों का पसंदीदा काम रहा है। इसी क्रम में एक प्रियंका पॉल नाम की वामपंथी महिला की आईडी फिर चर्चा में है। प्रियंका पॉल अपने इंस्टाग्राम अकॉउंट के जरिए लंबे समय से हिंदू धर्म को अपमानित करने वाली सामग्री का प्रचार-प्रसार करती रही है।

उसकी आईडी सामने आने के बाद गिरफ्तारी की माँग हो रही है। मुंबई पुलिस को टैग कर करके प्रियंका पॉल के विरुद्ध एक्शन लेने को कहा जा रहा है। वहीं रैंडम सेना के ट्वीट के हिसाब से तो उनके कार्यकर्ता ठाणे के अंबरनाथ पुलिस स्टेशन भी पहुँच गए हैं। उन्होंने अपील की है कि लोग अपने करीबी थाने में जाकर शिकायतें दें।

बता दें कि हिंदू संगठनों का प्रियंका पॉल पर इतना गुस्सा इसलिए है क्योंकि उसने अपने हिंदू विरोधी पोस्टों में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया हुआ है। इसमें डॉ भीम रॉव अंबेडकर को भगवान राम को थप्पड़ मारते दिखाया गया है। इसके अलावा प्रियंका पॉल ने एक फोटो शेयर की थी जिसमें उसके हाथ पर टैटू है। इस टैटू में भगवान राम को पेड़ में बंधा दिखाकर भीम राव अंबेडकर के हाथ में हंटर दिखाया गया है। इसे साझा करते हुए प्रियंका ने लिखा था कि लोगों ने उसे कहा कि ये टैटू उसे महंगा पड़ेगा। उसे वाकई महंगा पड़ा-24000 का।

फिलहाल प्रियंका पॉल ने अपनी आईडी को प्राइवेट कर लिया है। उसकी आईडी पर 74 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। कहा जा रहा है कि पहले ये आईडी पब्लिक थी लेकिन हिंदुओं के आवाज उठाने के बाद प्रियंका ने अपनी करतूतें छिपाने के लिए इसे प्राइवेट किया है।

कुछ लोगों का कहना है कि हिंदू संगठन उसके खिलाफ ज्यादा कठोर हो रहे हैं। लड़की के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए। जबकि कुछ लोग कह रहे हैं कि ये सिर्फ हिंदू धर्म ही हैं जहाँ भगवान का ऐसा अपमान देखने के बाद भी लोग कानूनी तरीके से लड़की पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। अन्य मजहब को लेकर ऐसे घटिया प्रयास किए जाते तो क्या होता इसकी प्रतिक्रिया क्या होती ये छिपी नहीं है।

बता दें कि प्रियंका पॉल के खिलाफ पहले दफा मुकदमा दर्ज कराने की बात नहीं हो रही। 2022 में हिंदू आईटी सेल ने भी प्रियंका पर केस किया था। उन्होंने माँग की थी कि आईपीसी की धारा 153 ए, 298, 504, 505 के तहत केस हो। हालाँकि हिंदू आईटी सेल के मुताबिक, इस मामले पर एक्शन लिया जाना अभी बाकी है।

हर साधु-संन्यासी की बनने लगेगी समाधि, तो आम जनता कहाँ जाएगी: दिल्ली हाई कोर्ट, यहीं हैं 54 अवैध मस्जिद-मदरसे

दिल्ली हाई कोर्ट ने नागा साधुओं के नाम संपत्ति करने के मामले में एक अहम टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि नागा साधु सांसारिक दुनिया और मोह से दूर रहते हैं। नागा साधुओं का जीवन पूरी तरह वैरागी का होता है, इसलिए उनके नाम संपत्ति की माँग मान्यताओं के अनुसार सही नहीं है। कोर्ट ने एक अहम मामले में फैसला सुनाते हुए दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस धर्मेश शर्मा ने कहा कि नागा साधु महादेव के भक्त होते हैं। वह सांसारिक मोह और दुनिया से पूरी तरह विरक्त होते हैं। कोर्ट ने कहा कि वह जितना हिंदू धर्म समझते हैं उसके मुताबिक, नागा साधु शिव भक्त होने के कारण संसार से जुड़ी किसी भी वस्तु से जुड़ाव नहीं बल्कि अलगाव रखते हैं, इसलिए उनके नाम पर संपत्ति माँगना हिंदू धर्म की मान्यताओं और प्रथाओं के मुताबिक गलत है।

महंत श्री नागा बाबा भोला गिरि बनाम जिला मजिस्ट्रेट व अन्य के मामले में याचिकाकर्ता ने त्रिवेणी घाट, निगमबोध घाट, जमुना बाजार की जमीन को उनके नाम करने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देश देने की माँग की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह जमीनें उनके कब्जे में 1996 से हैं। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में साधु-संत, फकीर और गुरु होते हैं। सभी के लिए सार्वजनिक भूमि पर समाधि स्थल और मंदिर बनाने के नाम पर कुछ समूह अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए इसका लाभ उठा रहे हैं, जो कि आने वाले समय में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

जस्टिस धर्मेश शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक जमीन पर कब्जा किया है, इसलिए वह अतिक्रमणकर्ता हैं, क्योंकि दिल्ली सरकार की ओर से हटाई गई झुग्गियाँ यमुना नदी के पुनरुद्धार के लिए थी, जो कि सभी के लिए लाभ में आने वाला है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में यह कहीं भी प्रदर्शित नहीं है कि विवादित स्थान बाबा की समाधि या जनता को पूजा करने के लिए दिया गया है। कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता के पास किसी भी तरह का ऐसा सबूत नहीं है, जिससे यह साफ हो सके कि जमीन पर बनाई गई बाबा की समाधि एक ऐतिहासिक स्थान है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हालाँकि कोर्ट ने कहा कि अभी तक उक्त जमीन पर बने निर्माण को तोड़ने संबंधी कोई आदेश एलजी कार्यालय की ओर से जारी नहीं हुआ है।

तो क्या अवैध मजारों को भी हटाने का आदेश देगी कोर्ट?

देश में अनगिनत मजारें ऐसी हैं, जो सरकारी जमीनों पर बनी हुई हैं। यहाँ तो नागा बाबा समाधि के मामले में तो याचिकाकर्ता ने बताया ही है कि साल 1991 के कागजातों में उनकी जमीन दर्ज है, लेकिन अब उसका अता-पता नहीं है। ऐसे में दिल्ली हाई कोर्ट उनकी जमीन की पैमाइश करा दे, लेकिन हाई कोर्ट नहीं माना। ऐसे में देश भर में जो हर कुछ मील पर अवैध मजारें सरकारी जमीनों पर बनी हुई हैं, उनकी कानूनी स्थिति क्या होगी, इस पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। वैसे, साल 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले दिल्ली में 54 से ज्यादा मस्जिद, मदरसे सरकारी जमीनों पर बने हुए थे, जिनकी पूरी लिस्ट उप-राज्यपाल को सौंप दी गई थी।

कोलकाता पहुँचने से पहले तय था बांग्लादेशी MP का मरना: पहले गर्दन काटी, उसके बाद शरीर की खाल छील बनाया ‘कीमा’

बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम अनार की हत्या मामले में सामने आया है कि सांसद को निर्ममता से मारने की साजिश उनके कोलकाता पहुँचने से कुछ सप्ताह पहले ही रची गई थी। नई रिपोर्ट्स में सीआईडी के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि हत्यारों ने उस टैक्सी को भी 30 अप्रैल 2024 को ही किराए पर लिया था जिसमें आवामी लीग के वरिष्ठ नेता कोलकाता, न्यू टाउन के फ्लैट पर गए थे।

अब पुलिस ने इस टैक्सी के चालक को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ भी हो रही है। अभी तक जो जानकारी उसने दी है उसमें विरोधाभास है। पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि यह वही टैक्सी है, जिससे 14 मई को दो पुरुष और एक महिला एक ट्रॉली बैग के साथ फ्लैट से बाहर निकले थे। पुलिस को संदेह है कि उसी में मृत सांसद के शव के टुकड़े थे।

बता दें कि अनवारुल अजीम अनार की हत्या के इस मामले में बांग्लादेश से जासूसी विभाग के प्रमुख हारुन-या-रशीद अपनी टीम के साथ भारत आए हुए हैं। इस समय कोलकाता के उस फ्लैट की जाँच चल रही है जिसमें घटना को अंजाम दिया गया। जाँच में कोलकाता की सीआईडी टीम जुटी हुई है।

पिछले दिनों हारुन-या-रशीद ने बताया था, “…हमने पश्चिम बंगाल CID की मदद से उस डुप्लेक्स फ्लैट (हत्या की जगह) की सीवेज लाइन और सेप्टिक टैंक खुलवाया है, वहाँ हमें मांस मिला है। इसे फोरेंसिक और DNA टेस्ट के लिए भेजा जाएगा, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है… फोरेंसिक और DNA टेस्ट के बाद ही हम बता सकते हैं कि यह किसके शरीर के मांस हैं…”

मालूम हो कि 12 मई को भारत आए बांग्लादेशी सांसद की हत्या को न्यू टाउन के फ्लैट में अंजाम दिया गया था। इस हत्या के लिए कसाई को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, जिसने सांसद के शव के आगे बैठकर पहले खूब शराब पी, उसके बाद उनके शव से खाल उतारी थी और फिर उनके मांस को कीमा की तरह टुकड़ों में काटकर हल्दी लगाकर थैले में भरा। बाद में उन थैलों को सुनसान जगह देख फेंक दिया गया। हत्या के बाद शव से इतनी निर्ममता इतनी की गई थी कि अभी तक शव के पूरे टुकड़े नहीं मिले हैं। वहीं सांसद के परिजनों को यकीन नहीं हो पा रहा है कि ये हत्या अनवारुल के बचपन के दोस्त ने कराई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बेटी ने कहा कि यकीन मानना मुश्किल है– “पापा का मर्डर अंकल ने करवा दिया।”

पश्चिम बंगाल में पत्थरबाजी में फूटा ANI के पत्रकार का सर, कई घायल: बमबाजी-मारपीट के बीच आखिरी चरण में 1 बजे तक 40% मतदान

लोकसभा चुनाव 2024 में आखिरी चरण के लिए मतदान जारी है। दोपहर एक बजे तक 40% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है। हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा मतदान हुआ है, तो बिहार सबसे फिसड्डी साबित हो रहा है। इस बीच, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा जारी है। टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा मतदाताओं को धमकाने, बमबाजी की घटनाएँ हुई हैं, तो पश्चिम बंगाल के जयनगर लोकसभा सीट पर वोटिंग के दौरान टीएमसी के गुंडों की पत्थरबाजी के चपेट में आने से एएनआई के एक पत्रकार को गंभीर चोटें आई हैं, उन्हें कोलकाता के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, संदेशखाली से लेकर भांगड़ तक टीएमसी के बमबाजों की करतूतें सामने आ रही हैं।

TMC-BJP कार्यकर्ताओं की पत्थरबाजी में फूटा पत्रकार बंटी मुखर्जी का सर

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव की वोटिंग को कवर कर रहे पत्रकार बंटी मुखर्जी का पत्थरबाजी में सर फूट गया है। एएनआई के साथ स्ट्रिंग के तौर पर जुड़े बंटी मुखर्जी जयनगर लोकसभा सीट में आने वाले कैनिंग इलाके में थे। तभी टीएमसी के गुंडों की ओर से बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर की जाने वाली पत्थरबाजी की चपेट में आ गए। उन्हें गंभीर हालत में कोलकाता के मेडिका सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

संदेशखाली में टीएमसी के गुंडों का आतंक जारी

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र में आने वाले संदेशखाली में अब भी टीएमसी के गुंडों का कहर बरप रहा है। बमबारी के बीच टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं-समर्थकों पर हमला किया है। महिलाओं को घर-घर में घुसकर टारगेट किया जा रहा है और उन्हें टीएमसी के लिए वोट करने के लिए धमकाया जा रहा है।

वोटिंग में हिमाचल आगे, बिहार फिसड्डी

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में मतदान के क्रम में हिमाचल प्रदेश सबसे आगे है, तो बिहार फिसड्डी साबित हो रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 40.09% मतदान हो चुका है। सबसे अधिक मतदान हिमाचल प्रदेश में 48.63% दर्ज हुआ है, तो बिहार में सबसे कम 35.65%। वहीं, झारखंड में 46.80%, ओडिशा में 37.64%, पंजाब में 37.80%, उत्तर प्रदेश में 39.31%, पश्चिम बंगाल में 45.07%, चंडीगढ़ में 40.14% मतदान दर्ज हुआ है।

आखिरी चरण के मतदान में 57 लोकसभा सीटों पर मतदान जारी है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट भी शामिल है। पंजाब और यूपी की 13-13 सीटें, पश्चिम बंगाल की 9 सीटें, बिहार की 8 सीटें, ओडिशा की 6 सीटें, हिमाचल प्रदेश की 4 सीटें, झारखंड की 3 सीट और चंडीगढ़ की एक सीट पर मतदान जारी है।

हिन्दू लड़की को बेहोश करके किया किडनैप, फिर मुंबई में धर्मांतरण, निकाह और रेप… UP पुलिस ने शकील को दबोचा, पीड़िता को जान से मारने की दी थी धमकी

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू लड़की का निकाह करके उसे मुंबई ले जाकर इस्लाम कबूल करवाया गया। लड़की से रेप किया गया और मुँह खोलने पर उसे जान से मार डालने की धमकी भी दी गई। पीड़ित परिवार ने पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता को बरामद करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना सोमवार (20 मई 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बांदा जिले के थानाक्षेत्र गिरवां की है। यहाँ 20 मई को पीड़िता के परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि महुआ गाँव के शकील ने उनकी बेटी को नशीला पदार्थ सुंघा कर पहले बेहोश किया फिर अपहरण कर के कहीं ले गया। अपहरण में शकील के साथ उसके कुछ साथी भी शामिल बताए गए। पुलिस ने तब IPC की धारा 366 के तहत FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी थी। लड़की को मुंबई से बरामद कर लिया गया था। यहीं से शकील को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पीड़िता को बांदा लाकर पूछताछ की गई। लड़की ने बताया कि 20 मई को शकील ने पहले उसे कुछ सुंघा कर बेहोश किया। होश आने पर पीड़िता ने खुद को एक ट्रेन में पाया। शकील भी साथ था। उसने मदद माँगने पर मार डालने की धमकी दी और अपने साथ मुंबई ले गया। यहाँ लड़की को एक मस्जिद में ले जाया गया। मस्जिद में पीड़िता को इस्लाम कबूल कराया गया। इसी जगह लड़की का नाम इकरा रखा गया। इसके बाद शकील ने पीड़िता से जबरन निकाह करके बलात्कार किया।

पीड़िता के परिजनों ने बताया कि लड़की की मानसिक हालत ठीक नहीं है। शकील ने लड़की से निकाह करने के बाद उसके फोटो और निकाहनामा की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं थीं। विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना को लव जिहाद बताते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने मीडिया को बताया कि पीड़िता की बरामदगी के बाद केस में उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम व रेप की धारा 376 बढ़ाई गई है। शकील को जेल भेज दिया गया है। घटना में शामिल अन्य आरोपितों की संलिप्तता की जाँच करवाई जा रही है।