Home Blog Page 905

हथिनी बैराज से डबल सप्लाई, फिर भी पानी को तरस रही दिल्ली: क्या टैंकर माफिया को फायदा पहुँचाने के लिए AAP की सरकार ने पैदा किया संकट?

उत्तर भारत भीषण गर्मी और तेज धूप समेत लू का सामना कर रहा है। आसमान से आग बरस रही है, गरम हवाएँ चल रही हैं। राजधानी दिल्ली के कुछ इलाकों का पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा है। इन सब समस्याओं के बीच अब दिल्ली में जल संकट भी आ गया है।

बीते कुछ दिनों से राजधानी दिल्ली से डरावनी तस्वीरें आ रही हैं। राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में पानी का भीषण संकट आ गया है। पानी की आपूर्ति के लिए लोग तरस रहे हैं। पानी के दौड़ते लोगों की डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक पानी के टैंकर के पीछे सैकड़ों लोग भाग रहे हैं।

कोने-कोने में भीषण जल संकट, डरावनी तस्वीरें

दिल्ली के चाणक्यपुरी के संजय कैम्प से लेकर गीता कॉलोनी तक और ओखला से लेकर वसंत कुंज तक, दसियों ऐसे इलाके हैं जहाँ पानी का गंभीर संकट है। रोहिणी, कैलाश विहार, बेगम विहार, बेगमपुर, पटेल नगर समेत तमाम इलाके जल संकट की चपेट में हैं। चाणक्यपुरी से आने वाली तस्वीरें तो काफी असहज करने वाली हैं। यहाँ पानी के एक टैंकर के पीछे बच्चे से लेकर बूढ़े तक दौड़ रहे हैं और पाइप डालने का प्रयास कर रहे हैं।

इस पूरी कवायद में कोई सफल हो रहा है तो कोई प्यासा रह जा रहा है। कहीं महिलाएँ पानी के बर्तन लेकर खड़ी हो रही हैं, कहीं लोगों में कुछ लीटर पानी के लिए बहस हो रही है। मारपीट तक की नौबत आ रही है। पानी के लिए तरसने वाले बता रहे हैं कि दिन भर में पानी का एक टैंकर आ रहा है, जिसमें पानी लेने वालों की संख्या सैकड़ों में है। दिल्ली के निवासी बता रहे हैं कि उन्हें पीने से लेकर नहाने और खाना बनाने तक के पानी में समस्या हो रही है।

AAP फिर से ‘ब्लेम गेम में जुटी’

जहाँ एक ओर दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत है, वहीं दिल्ली में पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार दिल्ली जल बोर्ड अकर्मण्य साबित हो रहा है। दिल्ली जल बोर्ड AAP सरकार के अंतर्गत आता है। AAP सरकार पानी की इस दिक्कत को सुलझाने और लोगों को राहत पहुँचाने की बजाय फिर से एक बार फिर दोष मढ़ने के लिए आगे आ गई है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी का पूरा अमला यह साबित करने पर जुटा हुआ है कि यह पानी की किल्लत इसके फेलियर नहीं बल्कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पानी ना देने की वजह से हो रही है।

AAP नेता आतिशी लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के यह बता रही हैं कि हरियाणा उन्हें कम पानी दे रहा है, इस कारण से दिल्ली में पानी की कमी हो रही है, उनका कहना है कि दिल्ली यमुना के पानी पर निर्भर है और उसका पानी घटा दिया गया है। हरियाणा से अधिक पानी लेने के लिए दिल्ली की AAP सरकार सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच गई है। यहाँ AAP सरकार ने याचिका लगाई है कि उन्हें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश अधिक पानी दें। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा है।

क्या है इस दावे की सच्चाई?

दिल्ली की AAP सरकार हरियाणा पर यमुना का पानी नहीं देने का आरोप लगा रही है। दिल्ली में हरियाणा से आने वाला यमुना का पानी यमुना नगर में स्थित हथिनी कुंड बैराज से आता है। यहाँ उत्तराखंड से आने वाली यमुना नदी का पानी बैराज के माध्यम से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को भेजा जाता है। हथिनी कुंड बैराज की पूर्वी नहर से पानी उत्तर प्रदेश जबकि पश्चिमी नहर से दिल्ली और हरियाणा को पानी भेजा जाता है। हथिनी कुंड बैराज के अधिकारियों ने दिल्ली को कम पानी भेजने की बात को सिरे से नकार दिया।

हथिनी कुंड बैराज के XEN अधिकारी विजय गर्ग ने ऑपइंडिया को बताया कि दिल्ली को वर्तमान में 761 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। सामान्यतः दिल्ली को नवम्बर से जून के बीच 381 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। इसे अब बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की पानी की माँग लगातार पूरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली इस संबंध में करनाल से अपनी आवश्यकता बताती है और उसी हिसाब से हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ दिया जाता है। पानी कम छोड़ने जैसी बात सत्य नहीं है।

पानी कम छोड़ने पर उन्होंने बताया कि जैसी भी उपलब्धता होती है, वैसा ही निर्णय लिया जाता है। यदि नदी में पानी कम आता है तो दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सभी को कम पानी भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में यह अधिक हो जाता है। उनका कहना है कि दिल्ली के पानी में कोई कमी नहीं की जा रही है। हरियाणा के सिंचाई मंत्री अभय सिंह यादव ने बताया है कि वर्तमान में दिल्ली को समझौते से अधिक पानी की आपूर्ति हो रही है, इसके बाद भी AAP इस पर राजनीति कर रही है।

वहीं दूसरी ओर यह भी सामने आया है कि दिल्ली की पानी की आपूर्ति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले वजीराबाद ट्रीटमेंट प्लांट की भी सफाई पिछले 10 वर्षों से नहीं हुई है। इस ट्रीटमेंट प्लांट में अब बड़े स्तर पर गाद जम गई है जिसके कारण इसकी पानी स्टोर करने की क्षमता घट गई है। ऐसे में यहाँ कम पानी साफ़ हो रहा है और आपूर्ति घट गई है।

भाजपा ने लगाया टैंकर माफिया को बढ़ाने का आरोप

दिल्ली के इस जल संकट को लेकर भाजपा ने AAP सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया है। भाजपा ने AAP सरकार पर कुप्रबन्धन का आरोप लगाया है। दिल्ली की भाजपा नेता बांसुरी स्वराज ने कहा है कि दिल्ली जल बोर्ड 2013 में ₹600 करोड़ के मुनाफे में था, वह अब ₹73000 करोड़ के घाटे में चला गया है।

उन्होंने कहा कि यह पूरा संकट AAP ने खुद ही खड़ा किया है। स्वराज ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरा जल संकट दिल्ली में भ्रष्टाचार करने और टैंकर माफिया को फायदा पहुँचाने के लिए लाया गया है।

सिखों के नाम से फर्जी पेसबुक-इंस्टाग्राम अकाउंट चला रहा चीन, खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाने में पाकिस्तान की कर रहा मदद

भारत से टक्कर लेने के चक्कर में हर जगह मुँह की खाने वाला चीन अब खालिस्तानी अलगाववाद को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है। इसके लिए वो फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी इस्तेमाल कर रहा है, ताकि भारत से बाहर रह रहे खालिस्तानी समर्थकों को एकजुट कर सके। इसके लिए चीन बोट्स का सहारा ले रहा था, लेकिन फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने उसकी हरकत को पकड़ लिया है। मेटा ने एक रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें चीनी कारनामों के बारे में खुलासा हुआ है।

मेटा ने अपनी ‘एडवर्सियल थ्रेट रिपोर्ट‘ प्रकाशित की है, जो 33 पन्नों की है। इसमें मेटा ने बताया है कि 37 फेसबुक खाते, 9 इंस्टाग्राम खाते, 13 फेसबुक पेज और 5 ग्रुप, जो चीन से चलाए जा रहे थे, उन्हें बंद कर दिया गया है। इनमें से कुछ पेजों पर 2700 के करीब फॉलोवर्स हैं, कुछ ग्रुपों में 1300 से ज्यादा सदस्य, वहीं इंस्टाग्राम आईडी पर 100 से भी कम फॉलोवर्स मिले थे।

इस अकाउंट्स के जरिए खालिस्तानी आतंकवाद और सिख अलगाववाद को भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, नाइजीरिया और यूके जैसे देशों में बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही थी। इस रिपोर्ट के पेज नंबर 7 पर मेटा ने बताया है कि चीन द्वारा पोषित प्रो-खालिस्तानी प्रोपेगेंडा सिर्फ फेसबुक तक ही लिमिटेड नहीं है, बल्कि चीन की कम्युनिष्ट पार्टी (सीसीपी) अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स और टेलीग्राम का भी इस्तेमाल कर रहा है। इन फेक अकाउंट्स और बोट्स में से कईयों को मेटा के सिस्टम ने पकड़ लिया और हमने जाँच शुरू की। इसमें से अकाउंट्स को सिखों की तरह पेश किया गया और उनपर खालिस्तान समर्थक कंटेंट पोस्ट किया जा रहा था।

चीन का ऑपरेशन-के

चीन द्वारा ऑपरेट किए जा रहे ‘ऑपरेशन-के’ द्वारा मेटा पर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों के बीच भारत को लेकर घृणा फैलाई जा रही थी। रिपोर्ट में लिखा है, “हमें जैसे ही प्रो-खालिस्तानी पोस्ट दिखे, हमने उन्हें फैलने से पहले ही डिलीट कर दिया। ये पोस्ट अंग्रेजी और हिंदी में थे, जिनमें न्यूज और एआई द्वारा एडिटेड तस्वीरें थी। इसमें पंजाब से जुड़ी बातें थी, जिन्हें पूरी दुनिया में सिख कम्यूनिटी के बीच फैलाने की कोशिश की जान रही थी। इन पोस्ट में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और भारत सरकार की बुराई शामिल थी।” मेटा ने अपनी आंतरिक जाँच टीम के ‘कॉर्डिनेटेर इनॉथेंटिक बिहैवियर’ प्रोग्राम के जरिए इस पूरी रिपोर्ट को सामने रखा है।

भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त चीन

कम्युनिस्ट चीन भारत के दूसरे पड़ोसी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान का एक मजबूत सहयोगी है और पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के अंदर गड़बड़ी फैलाने की कोशिश करता रहा है। कोरोना महामारी के दौरान एलएसी पर चीन-भारत के बीच काफी तनातनी रही, जो अब तक जारी है। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता रहा है, तो भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में उग्रवाद फैलाने के लिए भी बदनाम रहा है।

अब चीन भारत के पंजाब में पाकिस्तान की आईएसआई के साथ मिलकर गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान से आए कई ड्रोन, जो भारतीय सीमा के अंदर पकड़े गए हैं, उनका चीनी कनेक्शन भी निकला है। अब वो वैश्विक स्तर पर खालिस्तान के मुद्दे को हवा देने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत वो अब ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, नाइजीरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में खालिस्तान के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

मोदी राज में 4 गुना हुआ बैंकों का मुनाफा, डूब चुके ₹10 लाख करोड़ भी वसूले: जिस व्यवस्था को मनमोहन सरकार की ‘फोन बैंकिंग’ ने किया बर्बाद, उसे कर दिया आबाद

भारत की बैंकिंग व्यवस्था को किस तरह से मोदी सरकार न सिर्फ पटरी पर लेकर आई है, बल्कि इसे भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तम्भ भी बनाया है – इसे लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक लेख के जरिए सारी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि बैंकिंग क्षेत्र को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, हाल ही में भारत के बैंकिंग क्षेत्र ने 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का शुद्ध लाभ (Net Profit) दर्ज करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

निर्माता सीतारमण ने समझाया कि कैसे यह 2014 से पहले की स्थिति के बिल्कुल विपरीत है जब कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र को खराब ऋणों, निहित स्वार्थों, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के दलदल में बदल दिया था। NPA संकट के बीज तब ‘फोन बैंकिंग’ के ज़रिए बोए गए थे, जब यूपीए नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों के दबाव में अयोग्य व्यवसायों को लोन दिए गए थे। यूपीए के शासन में बैंकों से लोन प्राप्त करना अक्सर मज़बूत व्यावसायिक प्रस्ताव के बजाय शक्तिशाली कनेक्शन पर निर्भर करता था।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने समझाया है कि कैसे उस दौरान बैंकों को इन लोन को मंज़ूरी देने से पहले उचित परिश्रम और जोखिम मूल्यांकन की उपेक्षा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे गैर-निष्पादित आस्तियों (Non-Performing Assets (NPAs)) और संस्थागत भ्रष्टाचार में भारी वृद्धि हुई। कई बैंकों ने अपने खराब ऋणों को ‘सदाबहार’ या पुनर्गठन करके रिपोर्ट करने से परहेज किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और आरबीआई द्वारा परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (Asset Quality Review) जैसे विभिन्न उपायों ने NPA के छिपे हुए पहाड़ों का खुलासा किया और उन्हें छिपाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लेखांकन चालों को समाप्त कर दिया।

निर्मला सीतारमण ने लिखा, “UPA के समय में बेपरवाह और अविवेकपूर्ण तरीके से दिए गए ऋणों ने ‘Twin Balance Sheet’ की शर्मनाक विरासत पैदा की, जो हमें 2014 में विरासत में मिली। इस समस्या ने देश को विकास के लिए ज़रूरी ऋण प्रवाह से वंचित कर दिया। बैंक नए उधारकर्ताओं, खासकर MSME को ऋण देने में अनिच्छुक हो गए, जो आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की रीढ़ हैं। ऋण वृद्धि एक दशक के निचले स्तर पर आ गई। उच्च प्रावधान के कारण बैंकों को भारी नुकसान और पूंजी का क्षरण भी झेलना पड़ा। बैंकों द्वारा 2014 से पहले दिए गए ऋणों के लिए अपने NPA का पारदर्शी रूप से खुलासा करने के बाद, वित्त वर्ष 2017-18 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 14.6% के उच्च स्तर पर पहुँच गया।”

उन्होंने जानकारी दी कि RBI के दो पूर्व गवर्नरों ने UPA शासन द्वारा छोड़ी गई व्यवस्था में गिरावट के स्तर को खुले तौर पर उजागर किया है। साथ ही याद दिलाया कि कैसे राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भाग लेने वाले रघुराम राजन ने यूपीए काल के दौरान NPA संकट को ‘अतार्किक उत्साह की ऐतिहासिक घटना’ बताया। इसी तरह उर्जित पटेल ने कहा कि यूपीए के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कामकाज ‘नौकरशाही की जड़ता और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण एक स्थायी कमी’ से ग्रस्त था।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस लेख का लब्बोलुआब ये है कि NPA संकट ने करोड़ों महत्वाकांक्षी भारतीयों के सपनों को पूरा करने के लिए आवश्यक ऋण को रोक दिया, जो स्टार्ट-अप स्थापित करना चाहते थे और छोटे व्यवसायों का विस्तार करना चाहते थे। यूपीए ने लुटियंस दिल्ली में वंशवाद और दोस्तों का पक्ष लिया, जबकि भारतीयों के एक बड़े हिस्से को बीच में छोड़ दिया। जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली तो ये दोस्त अभियोजन के डर से भाग गए।

निर्मला सीतारमण ने आरोप लगाया कि जो लोग अब बैंकों के राष्ट्रीयकरण का श्रेय लेते हैं, उन्होंने देश के गरीब और मध्यम वर्ग को दशकों तक बैंकिंग से वंचित रखा, जबकि उनके नेता और सहयोगी भ्रष्टाचार की सीढ़ियाँ चढ़ते रहे। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार का श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत और निर्णायक नेतृत्व को दिया। उन्होंने बता कि मोदी सरकार ने व्यापक और दीर्घकालिक सुधारों के माध्यम से बैंकिंग क्षेत्र में यूपीए के पापों का प्रायश्चित किया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ 2015 की ‘ज्ञान संगम’ बैठक ने इन महत्वपूर्ण सुधारों की शुरुआत की।

अपनी सरकार के प्रयासों को गिनाते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने NPA को पारदर्शी रूप से पहचानने, समाधान और वसूली, पीएसबी को पुनर्पूंजीकृत करने और सुधार की एक व्यापक 4R रणनीति को लागू किया। हमारे सुधारों ने ऋण अनुशासन, वित्तीय तनाव की पहचान और समाधान, जिम्मेदार उधार और बेहतर शासन को संबोधित किया। मोदी सरकार ने बैंकों में राजनीतिक हस्तक्षेप की जगह पेशेवर ईमानदारी और स्वतंत्रता को अपनाया। गैर-कार्यकारी अध्यक्षों और पूर्णकालिक निदेशकों के पारदर्शी चयन के लिए Banks Board Bureau (BBB) बनाया गया।

मोदी सरकार द्वारा उठाए गए अन्य क़दमों की बात करें तो मिशन इंद्रधनुष के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 3.10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पूंजी डाली गई। 2015 में बड़े मूल्य के बैंक धोखाधड़ी से संबंधित समय पर पता लगाने और जाँच के लिए एक रूपरेखा जारी की गई। तेजी से वसूली के लिए Insolvency & Bankruptcy Code (IBC) लाई गई। भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए 2018 का भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम बनाया गया। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए SARFAESI अधिनियम में संशोधन किया गया।

इसी तरह मोदी सरकार ने पिछले 5 वर्षों के दौरान, बैंकों ने SARFAESI के माध्यम से ₹​​1.51 लाख करोड़ की वसूली की है। ऋण वसूली न्यायाधिकरण का वित्तीय क्षेत्राधिकार ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया गया, ताकि वह उच्च मूल्य के मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सके, जिसके परिणामस्वरूप बैंकों के लिए अधिक वसूली हो सके। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कठोर वसूली के लिए तनावग्रस्त परिसंपत्ति प्रबंधन वर्टिकल बनाए, प्रभावी निगरानी के लिए मंजूरी से पहले और बाद की अनुवर्ती भूमिकाओं को अलग किया। उच्च मूल्य के ऋणों में निगरानी भूमिकाओं को मंजूरी देने वाली भूमिकाओं से अलग किया गया।

इतना ही नहीं, मोदी सरकार द्वारा ₹250 करोड़ से अधिक के ऋणों की प्रभावी निगरानी के लिए विशेष निगरानी एजेंसियों को तैनात किया गया। समय पर और बेहतर वसूली सुनिश्चित करने के लिए Online end-to-end OTS (One-Time Settlement) प्लेटफॉर्म स्थापित किए गए। ₹500 करोड़ से अधिक की तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान के लिए 2021 में NARCL की स्थापना की गई, जिससे बैंकों के लिए अधिक मूल्य की वसूली हुई। बैंकों के प्रबंधन में सुधार के लिए Enhanced Access and Service Excellence (EASE) सुधारों के विभिन्न चरण शुरू किए गए हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि झूठ फैलाने की आदत रखने वाला विपक्ष गलत दावा करता है कि उद्योगपतियों को दिए गए कर्ज को ‘माफ’ (Waiver) किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त और अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ’ होने का दावा करने के बावजूद, यह अफ़सोस की बात है कि विपक्षी नेता अभी भी राइट-ऑफ (write off) और माफ़ी (waiver) के बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं। RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘राइट-ऑफ’ के बाद, बैंक सक्रिय रूप से खराब ऋणों की वसूली करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी उद्योगपति के लिए कोई ‘माफ़ी’ नहीं हुई है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने आँकड़े गिनाते हुए बताया कि 2014 से 2023 के बीच, बैंकों ने खराब ऋणों से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगभग 1105 बैंक धोखाधड़ी मामलों की जाँच की है, जिसके परिणामस्वरूप ₹64,920 करोड़ की अपराध आय को जब्त किया गया है। दिसंबर 2023 तक₹ 15,183 करोड़ की संपत्ति PSB को वापस कर दी गई है। खराब ऋणों की वसूली में कोई ढील नहीं बरती गई है, विशेष रूप से बड़े डिफाल्टर से, और यह प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बैंकिंग क्षेत्र में एक तरह के ‘समुद्र मंथन’ के दौरान अपेक्षित चुनौतियों के साथ-साथ सकारात्मक परिणाम भी दिए। तनाव की पहचान, तनावग्रस्त खातों के समाधान, पुनर्पूंजीकरण और बैंकों में सुधारों के लिए हमारी सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया के कारण, 2014 के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) की वित्तीय सेहत और मजबूती में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हमने बैंकों को ‘एनपीए से लदे दुःस्वप्न’ से ‘जन कल्याण के स्तंभ’ में बदल दिया है। ‘Twin Balance Sheet’ Problem से अब हमारे पास ‘Twin Balance Sheet Advantage’ है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया, “वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ₹1.41 लाख करोड़ का अब तक का सबसे अधिक कुल शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 2014 के ₹36,270 करोड़ से लगभग 4 गुना अधिक है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2023-24 में शेयरधारकों को ₹27,830 करोड़ का लाभांश घोषित किया (भारत सरकार का हिस्सा ₹18,088 करोड़); इन निधियों का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का Net NPA मार्च 2024 में घटकर 0.76% रह गया – जो मार्च 2015 में 3.92% था, और मार्च 2018 में 7.97% था। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का Gross NPA ratio मार्च 2024 में घटकर 3.47% रह गया – जो 2015 में 4.97% था और मार्च 2018 में 14.58% था। वित्त वर्ष 2024 में बैंक ऋण वृद्धि (गैर-खाद्य) 16% रही, जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक है।”

उन्होंने समझाया कि बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार के बिना यह संभव नहीं होता। लिक्विडिटी बढ़ी है, Provisioning Coverage Ratio (PCR) 2015 में 46.04% से बढ़कर मार्च 2024 में 92.99% हो गया है। पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, CRAR मार्च 2015 में 11.45% से बढ़कर मार्च 2024 में 15.53% हो गया है। क्रेडिट जोखिम के लिए मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत हैं और सभी बैंक प्रतिकूल तनाव परिदृश्यों में भी न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं का अनुपालन करते हैं।

निर्मला सीतारमण ने समझाया कि सुधारों के कारण, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी (इक्विटी और बॉन्ड) जुटाने की क्षमता में सुधार हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2023-24 के बीच बाजार से ₹4.34 लाख करोड़ की पूंजी जुटाई है। पहले RBI के Prompt Corrective Action (PCA) ढाँचे के तहत रखे गए बैंकों ने महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है, जिसके कारण सभी PCA प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। कृषि ऋण वित्त वर्ष 2014-15 में 8.45 लाख करोड़ रुपये से 2.5 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 में 21.55 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना ने किसानों को समय पर और परेशानी मुक्त ऋण प्रदान किया है, जिसमें 7.36 करोड़ से अधिक सक्रिय KCC खाते हैं। 2020 से, जमा बीमा कवरेज सीमा 1 लाख रुपये से बढ़कर 5 लाख रुपए हो गई है। इसे आखिरी बार 1993 में 30,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपए किया गया था। सितंबर 2023 तक, 97.93% खाते और कुल कर योग्य जमा का 44.2% DICGC के तहत पूरी तरह से सुरक्षित है।

आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2013-14 के अंत में, केवल 92.94% खाते पूरी तरह से सुरक्षित थे और 31.2% कर योग्य जमा का बीमा किया गया था। एक मजबूत बैंकिंग क्षेत्र एक ऐसा जहाज है जिस पर अर्थव्यवस्थाएँ चलती हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि मोदी सरकार देश की बैंकिंग प्रणाली को मजबूत और स्थिर बनाने के लिए निर्णायक कदम उठाती रहेगी, ताकि 2047 तक विकसित भारत के विकास पथ पर बैंकों का समर्थन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि वंशवादी दलों वाली यूपीए गठबंधन ने बैंकों का इस्तेमाल अपने ‘परिवार कल्याण’ के लिए किया गया, इसके विपरीत हमारी सरकार ने बैंकों का इस्तेमाल ‘जन कल्याण’ के लिए किया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मानें तो भारत में बैंकिंग के विस्तार के प्रयास दशकों तक विफल रहे, क्योंकि कॉन्ग्रेस ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण से परे सीमित कदम उठाए, जिससे मुख्य रूप से शिक्षित और कुलीन वर्ग को लाभ हुआ। 2014 से पहले, बैंकिंग की पहुँच मुख्य रूप से शहरों तक ही सीमित थी। आजादी के 68 साल बीत जाने के बावजूद, 68% से भी कम आबादी के पास बैंक खाते हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को कर्जदारों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो ऊँची दरें वसूलते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने बैंकिंग सेवाओं तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए जन धन और मुद्रा जैसी समावेशी योजनाएँ शुरू कीं।

मोदी सरकार के अनुसार, उसने वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने में बैंकों को भागीदार माना है। 52 करोड़ से ज़्यादा प्रधानमंत्री जन धन योजना खाते हैं, जिनमें 2.31 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा जमा हैं। 55% से ज़्यादा जन धन खाते महिलाओं के हैं और 66% से ज़्यादा ग्रामीण इलाकों में हैं। कोविड के दौरान 20.64 करोड़ महिलाओं को सीधे उनके जन धन खातों में पैसे मिले। आज भारत भर में लगभग सभी नागरिकों के पास 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग टचपॉइंट्स तक पहुँच है।

वहीं JAM Trinity पीएम मोदी की ‘गरीब कल्याण’ पहल की नींव बन गई है, जो DBT को सक्षम करके और लीकेज को खत्म करके जीवन में काफी सुधार ला रही है। जन सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से, मोदी सरकार ने गरीबों को अनिश्चितताओं से बचाने के लिए बहुत कम प्रीमियम पर किफायती बीमा उपलब्ध कराया। पीएम सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) सालाना सिर्फ ₹20 के प्रीमियम पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर प्रदान करती है। इसके 44 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं और ₹2,688 करोड़ के दावों का निपटारा किया जा चुका है।

ठीक इसी तरह पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) सालाना ₹436 के प्रीमियम पर ₹2 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान करती है। इसके 20 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं और ₹15,671 करोड़ के दावों का निपटारा किया जा चुका है। अटल पेंशन योजना (APY) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एक स्थिर पेंशन प्रदान करती है। इसके 6.5 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। उद्यमिता, स्वरोजगार और वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए ऋण तक पहुंच आवश्यक है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, बैंकों से औपचारिक ऋण तक पहुँच की कमी ने गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों को उच्च ब्याज दरों पर उधार लेने के लिए मजबूर किया, जिससे वे गरीबी और कर्ज के दुष्चक्र में फँस गए। यह प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana) के माध्यम से था कि बैंकों ने 10 लाख रुपये तक के जमानत-मुक्त ऋण की पेशकश शुरू की। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि जमानत की कमी के कारण ऋण देने से इनकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि वे इन ऋणों के लिए गारंटर के रूप में खड़े हैं।

उन्होंने और आँकड़े बताते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana) के तहत 48 करोड़ से ज़्यादा लोगों को 28 लाख करोड़ रुपए के लोन बाँटे गए हैं, जिनमें से 68% लोन महिलाओं को दिए गए हैं। लॉन्च के दौरान आलोचकों द्वारा जताई गई बेबुनियाद चिंताओं के बावजूद, मुद्रा के तहत एनपीए 3% से कम है, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। इसी तरह, शहरी स्ट्रीट वेंडर्स को औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने के लिए पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) की शुरुआत की गई।

78 लाख स्ट्रीट वेंडर्स (Street vendors) को 11,400 करोड़ रुपए से ज़्यादा के लोन बाँटे गए हैं, जिससे उनकी उच्च ब्याज दर वाले लोन पर निर्भरता कम हुई है। स्टैंड-अप इंडिया (Stand-up India) योजना ने एससी/एसटी व्यक्तियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद की है, जिसके तहत 2.28 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को 27,806 करोड़ रुपए के लोन बाँटे गए हैं। पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता देने के लिए पीएम विश्वकर्मा (PM Vishwakarma) योजना शुरू की गई है। यह 5% की रियायती ब्याज दर पर 2 लाख रुपये तक का क्रेडिट सपोर्ट देती है।

निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार औपचारिक बैंकिंग पहुँच का विस्तार करने के लिए समर्पित है। देशभर में कई क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 8 लाख लाभार्थियों को ₹22,000 करोड़ के ऋण वितरित किए गए। मोदी सरकार ने अंत्योदय के सिद्धांत के अनुरूप ‘बैंक रहित लोगों को बैंकिंग’, ‘ वित्त रहित लोगों को वित्तपोषित’ किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जिस बॉयफ्रेंड के लिए बाप-भाई को काटकर फ्रिज में भर दिया, वही चकमा देकर भाग गया: डबल मर्डर के 75 दिन बाद पकड़ी गई जबलपुर की नाबालिग

मध्य प्रदेश के जबलपुर में अपने ब्वॉयफ्रेंड के चक्कर में पड़कर करीबन ढाई महीने पहले रेलवे अधिकारी पिता और मात्र 8 साल के भाई की निर्ममता से हत्या करने वाली 15 साल की नाबालिग को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग अपने अपने 21 साल के ब्वॉयफ्रेंड के साथ हरिद्वार में भटक रही थी। पुलिस ने पहचान होते ही लड़की को पकड़ लिया, वहीं जिस लड़के के साथ मिल उसने पिता-भाई को मौत के घाट उतारा था उसने मौके पर चकमा देकर लड़की का साथ छोड़ दिया और फरार हो गया। हालाँकि 1 दिन बाद ही में खबर आई कि लड़के ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर में हत्या करने के बाद से दोनों नाबालिग लड़की अपने ब्वॉयफ्रेंड मुकुल के साथ फरार हुई थी और पुलिस लगातार इनकी तलाश में थी। लड़की नाबालिग थी इसलिए ज्यादा डिटेल ओपन नहीं कर सकते थे, मगर लड़का बालिग था इसलिए पुलिस ने उसकी फोटो लगाकर पोस्टर जगह-जगह लगाए।

इन पोस्टरों का फायदा ये हुआ कि हरिद्वार में रहने के दौरान एक दिन अस्पताल में इन्हें एक शख्स ने पहचान लिया। वहाँ ये लोग 2-3 घंटे से ज्यादा थे। व्यक्ति को इनकी पहले मूवमेंट संदिग्ध लगी क्योंकि लड़की बार-बार वॉशरूम जा रही थी और लड़का बाहर खड़ा होता था। बाद में गौर से देखा तो उसे याद आ गया लड़के का पोस्टर उसने देखा है।

व्यक्ति ने फौरन इस संबंध में पुलिस को फोन किया। चेहरा मिलाया तो मिल गया। पुलिस ने आकर पूछताछ की तो दोनों ने कहा वो घूमने आए हैं। हालाँकि पुलिस ने उन्हें एहसास नहीं होने दिया कि वो उन्हें पहचान गए हैं।

पुलिस ने कहा ‘चलो तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दें’ इतना कहकर उन्होंने लड़की को गाड़ी में बैठाया और लड़के को बैठने को कहा तो वो बोला कि अस्पताल से बैग लेकर आया। इतना कहकर वो अंदर गया और अंदर से ही फरार हो गया। पुलिस ने उसका पीछा किया, मगर भीड़ का फायदा उठाकर वो भाग गया।

पड़ताल में सामने आया कि 21 दिन से दोनों हरिद्वार के अलग-अलग आश्रम में रह रहे थे। उन्हें पता चला कि यूपी और मथुरा पुलिस उनकी तलाश में है। ऐसे में उन्होंने उत्तराखंड जाने की तैयारी की। ये प्लान भी मुकुल का ही था। मुकुल जानता था कि उत्तराखंड एक टूरिस्ट प्लेस है। यहाँ पुलिस की नजर उनपर नहीं पड़ेगी।

छानबीन में ये भी सामने आया कि दोनों की प्लानिंग नेपाल जाने की थी, मगर नेपाल के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। यही वजह थी कि वह नेपाल बॉर्डर से 600 किलोमीटर का सफर तय करके हरिद्वार पहुँचे। यहाँ वह दिन में आश्रम में गुजारते और रात में जिला अस्पताल के कैंपस में रहते थे। आखिरकार उनकी अपनी ही चालाकी के कारण वो फँस गए।

जबलपुर एसपी ने इस मामले में बताया कि वो लोग पिछले 75 दिन से दोनों आरोपितों को खोजने में प्रयासरत थे। इसके लिए उन्होंने कड़ी मशक्कत की। आठ टीमों को काम पर लगाया गया। खाते फ्रीज किए गए। लिमिट सिर्फ 1 हजार की गई। शुरू में आरोपित समझ गए कि पुलिस उन्हें उनकी ट्रांजैक्शन लोकेशन से पकड़ना चाह रही है, इसलिए उन्होंने ऐसा करना भी बंद कर दिया। जब पैसे खत्म हुए तो इन्होंने भंडारे और आश्रम में रहना शुरू कर दिया।

कहाँ-कहाँ भटके दोनों?

पुलिस को इस बीच इनकी लोकेशन मुंबई, पुणे, कर्नाटक, गोवा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और बिहार में मिली थी, लेकिन हर बार मुकुल की चालाकियों के कारण ये पुलिस के हाथ से बच जा रहे थे। 11 अप्रैल को पुलिस को इनकी एक लोकेशन चंडीगढ़ मिली जैसे ही पुलिस पहुँची पता चला वो लोग गायब हैं। 6 दिन बाद हरियमाण में दोनों की लोकेशन मिली और फिर 19 अप्रैल को अयोध्या में। इसके बाद जबलपुर पुलिस ने यूपी पुलिस की सहायता से उसे मथुरा में पकड़ना चाहा, पर वहाँ से भी वो फरार हो गया। इसके बाद सबसे आखिरी लोकेशन उन्हें नेपाल बॉर्डर के पास मिली।

मुकुल ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए बॉर्डर के पास अपना फोन ऑन करके बंद कर दिया ताकि पुलिस को लगे वो लोग नेपाल भाग गए हैं। पुलिस ने इन दोनों को पकड़ने के लिए देश भर में और नपाल में भी करीबन 10 हजार पोस्टर लगवा। वहीं देशभर के डीसीपी को भेजकर गिरफ्तारी में मदद माँगी और आखिर में इनकी गिरफ्तारी हरिद्वार से जाकर हुई।

BF के चक्कर में पिता-भाई की हत्या

बता दें कि नाबालिग लड़की के पिता राजकुमार विश्वकर्मा (52) रेलवे अधिकारी थे। ब्वॉयफ्रेंड के चक्कर में पड़कर पिता की हत्या लड़की ने 15 मार्च 2024 को धारदार भारी हथियार से की थी। उनके सिर पर 10 बार वार करके सिर की हर हड्डी तोड़ दी गई थी, वहीं भाई के सिर की हड्डी एक ही बार में सारी टूट गई थी। इसके बाद उन दोनों ने खून से लथपथ शव को पन्नी में बाँध घर में छोड़ दिया था, वहीं भाई के शव को फ्रिज में रख दिया था।

हत्या के बाद दोनों आरोपित घर से बाहर चले गए थे। जाँच में ये भी सामने आया था कि मुकुल हत्या से कुछ दिन पहले ही जेल से छूटा था। उस पर रेप का आरोप था, लेकिन इसी लड़की के बयान के कारण वो जेल से निकल आया था। हत्या के बाद लड़की ने भोपाल में रहने वाली अपनी चचेरी बहन को वॉयस नोट भेजा था। इस नोट में उसने कहा था कि मुकुल ने अपनी पापा-भाई को मार दिया है। उसकी चचेरी बहन ने यह जानकारी आगे दी तो आरपीएफ मौके पर पहुँची और पॉलीथीन से शव बरामद हुए

आमिर खान के बेटे की डेब्यू फिल्म में हिन्दू संतों को दिखाया जाएगा यौनाचारी: रेप की खबरें मदरसों से, यशराज-नेटफ्लिक्स 162 साल पुराना मामला दिखा कर चलाएँगे हिन्दू विरोधी एजेंडा

आमिर खान की फिल्म ‘PK’ (2014) आपको याद होगी, जिसमें जम कर हिन्दू धर्म का मजाक बनाया गया था। न सिर्फ भगवान शिव को लेकर अपमानजनक दृश्य दिखाया गया था, बल्कि हिन्दू संत को गुंडा भी दर्शाया गया था। अब आमिर खान ने हिन्दूफोबिया की ये मशाल अपने बेटे जुनैद को सौंप दी है। YRF (यशराज फिल्म्स) और Netflix मिल कर ‘महाराज’ नामक एक फिल्म बना रहा है, जो जुनैद खान की पहली फिल्म होगी। डेब्यू के साथ ही जुनैद खान ने बॉलीवुड में हिन्दू-घृणा के एजेंडे को चलाना शुरू कर दिया है।

असल में ये फिल्म ‘महाराज लिबेल केस’ पर बन रही है। ये मामला धर्मगुरु जदुनाथजी बृजरतनजी महाराज से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने सन् 1862 में गुजराती अख़बार ‘सत्यप्रकाश’ नामक अख़बार में करसंदास मूलजी द्वारा लिखे गए एक लेख को लेकर मानहानि का मामला दर्ज करवाया था। इस लेख में वैष्णव पंथ के ‘पुष्टिमार्ग’ (वल्लभ संप्रदाय) के साधुओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप लगाया गया था कि जदुनाथजी के कई महिलाओं से यौन संबंध हैं और लोगों को अपनी भक्ति साबित करने के लिए अपनी पत्नी साधुओं को सौंपनी पड़ती है।

जहाँ जुनैद खान इस फिल्म में उक्त पत्रकार का रोल करेंगे और हीरो होंगे, वहीं विलेन के रूप में एक हिन्दू साधु को दिखाया जाएगा जिसका रोल जयदीप अहलावत अदा करेंगे। फिल्म का पोस्टर रिलीज करते हुए बताया गया है कि आखिरकार 162 वर्षों बाद दिखाया जाएगा कि कैसे एक व्यक्ति ने अपने संकल्प की शक्ति से यथास्थिति को चुनौती दी। 1994 में जन्मे जुनैद खान आमिर खान और उनकी पहली पत्नी रीना दत्ता के बेटे हैं। आमिर खान अपने बेटे और साई पल्लवी को लेकर एक और फिल्म बना रहे हैं।

अंग्रेजों के जमाने वाली ‘बॉम्बे सुप्रीम कोर्ट’ ने इस मामले का फैसला पत्रकार करसंदास मूलजी के पक्ष में सुनाया था। ये फैसला अंग्रेज जज जोसेफ अरनॉल्ड ने सुनाया था। 162 साल पहले के अस्पष्ट मामले को आमिर खान के बेटे के डेब्यू फिल्म में दिखाया जाएगा, जिसमें गुंडा एक हिन्दू संत होगा। सवाल उठ रहे हैं कि आए दिन मदरसों से आ रही बलात्कार की घटनाओं के बीच इस तरह की फिल्म बना कर क्या नैरेटिव पेश किया जाने वाला है?

पत्नी का सर धड़ से अलग किया, रात भर बैठ कर उतारी खाल, दिख रही थी नसें और आँतें… रात का खाना नहीं मिला तो पति बना हैवान

क्या कोई सिर्फ इसलिए अपनी पत्नी की हत्या कर सकता है, क्योंकि उसने रात में खाने के लिए खाना न दिया हो? कर्नाटक के तुमकुर से ऐसी ही वारदात सामने आ रही है, जहाँ खाना न देने के लिए अपनी पत्नी की हत्या करने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात सोमवार (27 मई 2024) की रात कुनिगल तालुक के हुलियुरुदुर्गा शहर में हुई। मंगलवार की सुबह जब पुलिस मौके पर पहुँची, तो 35 साल की पुष्पालता का शव पुलिस को मिला। उसके ही पति शिवराम ने न सिर्फ पुष्पलता की हत्या कर दी थी, बल्कि बड़ी ही बेरहमी से पत्नी का सिर धड़ से अलग करने के बाद पूरी रात उसके शरीर से चमड़ी यानी खाल को उतारता भी रहा। इस दौरान उनका 8 साल का बच्चा घर के अंदर ही सोता रहा।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित शिवराम चीरघर में काम करता है और रोजाना अपनी 35 साल की पत्नी के साथ झगड़े किया करता था। सोमवार की रात पुष्पलता ने शिवराम को रात का खाना परोसने से मना कर दिया, इसे लेकर दोनों में रात खूब बहस भी हुई थी और फिर शिवराम ने चाकू से वार किया और फिर छुरी से उसका सिर काट दिया, जिससे उसके शरीर के हिस्से क्षत-विक्षत हो गए।

जानकारी मिली है कि पत्नी द्वारा रात का खाना परोसने से मना करने के बाद शिवराम ने इस वारदात को अंजाम दिया। महिला का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था और उसकी नसें और आँतें दिख रही थी, क्योंकि खाल उसने उतार दी थी। सुबह कटा हुआ सिर लेकर शिवराम शव के पास ही बैठा दिखाई दिया।

तुमकुर के पुलिस अधीक्षक अशोक वेंकट ने कहा कि हमने आरोपित को पकड़ लिया है। शिवराम और पुष्पा 10 साल से अंतरजातीय विवाह में बंधे थे। उनके बीच छोटी-मोटी लड़ाइयाँ होती थीं। लेकिन सोमवार की रात उसने पत्नी की हत्या कर सुबह मकानमालिक को इसकी सूचना दी। हमने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और शिवराम को गिरफ्तार कर लिया है।

भगवा वस्त्र, भगवान भास्कर को अर्घ्य, ओंकार का नाद, हाथों में माला… जिस ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ का कभी ईसाई नाविकों ने किया था बहिष्कार, वहाँ PM मोदी की चल रही साधना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के कन्याकुमारी स्थित ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ पर 45 घंटों की साधना में व्यस्त हैं। इस दौरान उन्होंने भगवा वस्त्र धारण किया, उदय हो रहे भगवान भास्कर को जल अर्पित किया और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के सामने बैठ कर ओंकार के नाद के बीच ध्यान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरान माला से जाप भी कर रहे हैं। बताते चलें कि भारत के सुदूर दक्षिण हिस्से में स्थित कन्याकुमारी से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य बड़ा मनमोहक होता है।

बता दें कि ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ वही स्थान है, जहाँ कभी माँ कन्याकुमारी ने तपस्या की थी और जहाँ स्वामी विवेकानंद को ज्ञान प्राप्त हुआ था। 1962 में कन्याकुमारी के RSS कार्यकर्ताओं के मन में यहाँ भव्य स्मारक बनवाने का विचार आया था। ‘हैंदव सेवा संघ’ के अध्यक्ष वैलयुधन पिल्लई ने इसकी पहल शुरू की। उसी दौरान पश्चिम बंगाल स्थित ‘रामकृष्ण मिशन’ के नेतृत्व में चेन्नई (तब मद्रास) में एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें उसके अध्यक्ष स्वामी सत्त्वानंद भी मौजूद थे और उनके मन में भी ऐसे ही विचार आए।

अब जब लोकसभा चुनाव 2024 के चुनाव के 7वें चरण का मतदान शनिवार (1 जून, 2024) को होना है, उससे पहले PM मोदी की साधना के बीच हमें ये भी याद करने की ज़रूरत है कि तमिलनाडु के कन्याकुमारी स्थित ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ का निर्माण RSS के सरकार्यवाह रहे एकनाथ रानडे ने बनवाया था। एकनाथ रानडे बताते हैं कि कन्याकुमारी में तब ईसाई मछुआरों की संख्या बहुत अधिक थी, जो उस समय से 400 वर्ष पूर्व हिन्दू हुआ करते थे लेकिन पुर्तगाल से आए सेंट जेवियर ने उनका धर्मांतरण करा दिया।

ईसाई इस जगह पर अपना दावा ठोकते थे और उन्होंने किसी कट्टर पादरी के उकसाने पर इस शिला पर क्रॉस कर दिया था, जिसके विरोध में हिन्दुओं की सभाएँ आयोजित हुईं और रातोंरात इसे किसी तरह हटाया गया। ईसाई इसे सेंट जेवियर की शिला बताते थे, जबकि यहाँ माँ कन्याकुमारी के चरण चिह्न (श्रीपाद) मौजूद है। जब वहाँ पहली बार नौका सेवा प्रारंभ की गई तो स्थानीय नाविकों ने इसका बहिष्कार कर दिया। फिर केरल से नाविकों को बुलाना पड़ा। 17 जनवरी, 1963 को यहाँ शिलालेख स्थापित किया गया था जिसे ईसाइयों ने समुद्र में फेंक दिया था। हालाँकि, फिर भी काम पूरा हुआ।

हिन्दू छात्र पर मुस्लिम भीड़ का हमला, पीट-पीट कर अधमरा कर कबूल करवाया ईशनिंदा का ‘गुनाह’: अब तक नहीं आया होश

बांग्लादेश के बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Bangabandhu Sheikh Mujibur Rahman Science and Technology University) में पढ़ने वाले हिंदू छात्र उत्सब कुमार ज्ञान को ईशनिंदा के आरोप में मुस्लिम भीड़ ने जमकर पीटा। आरोप है कि उत्सब ने पहले सोशल मीडिया ग्रुप में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ ‘अपमानजनक संदेश’ पोस्ट किया और फिर बाद में उसे हटा दिया।

जब यह खबर फैली कि हिंदू छात्र ने कथित तौर पर ‘ईशनिंदा’ की है, तो विश्वविद्यालय के मुस्लिम छात्रों ने रविवार (26 मई 2024) को उसे घेर लिया। मुस्लिमों की भीड़ ने उत्सब को बेरहमी से पीटा और उसे पैगम्बर मुहम्मद का ‘मजाक’ उड़ाने का जुर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद मुस्लिम छात्रों की उन्मादी भीड़ पीड़ित छात्र को प्रॉक्टर मोहम्मद कमरुज्जमाँ के ऑफिस ले गई, जहाँ उसे जबरन लिखित में कबूलनामा देने के लिए मजबूर किया गया।

उत्सब को ‘गुनाह’ कबूल कराने के बाद उसी भीड़ ने फिर से बेरहमी से पीटा और फिर बांग्लादेश के ढाका डिवीजन के गोपालगंज सदर पुलिस स्टेशन को सौंप दिया। गंभीर रूप से घायल उत्सब को गोपालगंज सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे खुलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल और फिर ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। इस बीच, उत्सब पर हमला करने वाले आरोपितों ने उसके खिलाफ सख्त कानूनी सजा और बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से स्थायी निष्कासन की माँग की।

घायल उत्सब कुमार ज्ञान (बाएं), और पीड़ित को सजा देने की माँग करती मुस्लिम भीड़

खबर लिखे जाने तक पीड़ित बेहोश बताया जा रहा था। इस मामले पर गोपालगंज सदर पुलिस स्टेशन के ओसी ने कहा , “हमने उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया है। पहले उसे ठीक होने दीजिए। उसके बाद हम उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे।”

इस बीच, विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर मोहम्मद कमरुज्जमाँ ने कहा, “उसने (उत्सब कुमार ज्ञान) ईशनिंदा की बात कबूल कर ली है। उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभी वीसी और डिप्टी-वीसी बाहर हैं। मैंने फोन पर उन्हें जानकारी दी है। उनके लौटने के बाद उत्सब कुमार के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, बांग्लादेश की एक अदालत ने तिथि सरकार नाम की एक हिंदू लड़की को 5 साल जेल की सजा सुनाई थी। जगन्नाथ विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा सरकार पर 2 नवंबर 2020 को पुलिस ने मामला दर्ज किया था। वह विश्व हिंदू संघर्ष परिषद की संयोजक और जगन्नाथ विश्वविद्यालय की छात्र सुरक्षा परिषद की कार्यालय सचिव भी थीं।

मूल रूप से ये खबर अंग्रेजी में लिखी गई है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

मस्कट से भारत के लिए एयर इंडिया ने भरी उड़ान, एयरहोस्टेस सुरभि खातून ने मलाशय में छिपा रखा था 1 किलो सोना: केरल के कन्नूर एयरपोर्ट पर पकड़ी गई

केरल के कन्नूर में एयर इंडिया की एक एयरहोस्टेस को सोना तस्करी करने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सुरभि खातून नाम की एयरहोस्टेट अपने प्राइवेट पार्ट (मलाशय) में 1 किलो के करीब सोना छिपाकर भारत आ रहीं थीं, लेकिन इसकी सूचना किसी ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों को दे दी और सुरभि खातून गिरफ्तार हुई।

छानबीन में सामने आया कि सुरभि खातून पहले भी सोने की तस्करी के कई मामलों में शामिल रही है। इसके बाद जाँच अधिकारियों ने इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता पर पूछताछ की। पता लगाया गया कि कहीं केबिन क्रू के अन्य सदस्य भी सोने तस्करी की गतिविधियों में तो शामिल नहीं थे।

अभी तक पूछताछ से कथिततौर पर चालक दल के कुछ और सदस्यों की मिली-जुली भगत सामने आई है। ऐसे में सुरभि खातून के बाद कुछ और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं। बताया जा रहा है कि ये नाम सुरभि ने ही अधिकारियों को बताए हैं। उसने ये भी बताया है कि उसे तो तस्करी गथिविधियों के लिए काम पर रखा गया था, इसमें से उसे हर डिलीवरी का कमीशन आता था।

बता दें कि डीआरआई अधिकारियों ने ओमान की राजधानी मस्कट से उड़ान भरकर भारत आने वाली एयर इंडिया एक्प्रेस की फ्लाइट में हो रही सोने तस्करी से जुड़ी जानकारी पाने के बाद ये कार्रवाई की। जाँच के बाद उसके शरीर से करीबन 960 ग्राम सोना बरामद हुआ। अधिकारियों ने उसे पूछताछ के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया और बाद में उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

बकरा, भैंस, भेड़, सूअर… कर्नाटक के डिप्टी CM शिवकुमार का दावा- सरकार गिराने को केरल में अघोरी कर रहे काला जादू

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए तंत्र मंत्र, काला जादू और यज्ञ का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके विरोधी राज्य केरल में इसके लिए एक विशेष यज्ञ का आयोजन कर रहे हैं और साथ ही इसके लिए पशुबलि भी दी गई है।

DCM शिवकुमार ने मीडिया से बताया, “मेरे पास पक्की जानकारी है कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए केरल के एक मंदिर के पास एक सूनसान जगह पर काला जादू किया गया था। इसके लिए ‘राज कंटक’ और ‘मरण मोहन स्तम्भन’ यज्ञ किया। केरल में किए जाने वाले काले जादू के क्रियाकलापों से अवगत लोगों ने हमें यज्ञ करवाने वालों की जानकारी दी।” उन्होंने कहा कि यहाँ शत्रु भैरवी यज्ञ किया गया है जिसमें उन्हें और राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाया गया है।

कर्नाटक DCM शिवकुमार ने यह भी आरोप लगाया कि इस तंत्र-मंत्री में अघोरी शामिल हैं और साथ ही यहाँ पशुबलि भी दी जा रही है। उन्होंने कहा, “ये यज्ञ अघोरियों द्वारा किए गए हैं और हमें पता चला है कि पंचबलि अनुष्ठान भी किया गया है। इसमें 21 बकरियों, 3 भैंसों, 21 काली भेड़ों और 5 सूअरों की बलि दी गई। उनको जो करना है करने दीजिए। जिन शक्तियों पर हम विश्वास करते हैं, वे हमारी रक्षा करेंगी। मैं हमेशा घर से निकलने से पहले पूजा करता हूँ।”

DCM शिवकुमार ने यह नहीं स्पष्ट किया कि कौन उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए यह यज्ञ और तंत्र-मंत्र करवा रहा है। उन्होंने कहा कि यह यज्ञ लगातार चल रहा है और उन्हें इस विषय में जानकारी इसमें जाने वाले एक आदमी से मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरा काम एक नेता के आदेश पर हो रहा है।

DCM शिवकुमार ने यह कहा कि वह घर से निकलने से पहले हाथ जोड़ कर पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि वह इस प्रकार के काले जादू में विश्वास नहीं करते है और मात्र भगवान में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि उन पर भगवान और आम जनता का आशीर्वाद है।